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गुना के 4 राशन विक्रेताओं का 249 माह का 14.94 लाख वेतन लंबित, बैंक खातों की जांच की मांग   |   गुना जिले में धारा 163 के अन्‍तर्गत विभिन्‍न प्रतिबंधात्‍मक आदेश जारी   |   06 अक्टूबर को इन क्षेत्रों में विद्युत प्रदाय रहेगा बाधित, ...जनगणना के द्वितीय चरण के लिए प्रशिक्षण प्रारंभ   |   सोशल मीडिया के विभिन्‍न प्‍लेटफार्म के संबंध में प्रतिबंधात्‍मक आदेश जारी   |   मंडी अंडरब्रिज पर कुदरत का हाई-वोल्टेज मुकाबला, नागराज-नेवले की जंग ने थमाई राहगीरों की सांसें   |   स्पाय कैमरे से महिलाओं के आपत्तिजनक वीडियो बनाने का आरोप, मोबाइल में मिलीं 40 से ज्यादा रिकॉर्डिंग   |   जशपुर में 3.41 करोड़ का गांजा जब्त, शराब की खाली बोतलों की आड़ में चल रही थी तस्करी

 

 

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सीहोर। मंडी अंडरब्रिज के पास सड़क पर उस समय कुदरत का ऐसा हाई-वोल्टेज मुकाबला देखने को मिला, जिसने राहगीरों के कदम रोक दिए। सड़क के बीचों-बीच एक विषधर सांप और नेवला आमने-सामने आ गए। दोनों के बीच शुरू हुआ संघर्ष देखते ही देखते इतना रोमांचक हो गया कि मौके पर मौजूद लोगों की निगाहें इसी जंग पर टिक गईं। कुछ लोगों ने मोबाइल निकालकर पूरे घटनाक्रम को कैमरे में कैद कर लिया।
प्रत्यक्षदर्शी जितेंद्र राजपूत के अनुसार, अंडरब्रिज के पास झाड़ियों के बीच अचानक हलचल दिखाई दी। देखते ही देखते एक सांप सड़क पर आ गया और फन फैलाकर फुंकार भरने लगा। इसी दौरान झाड़ियों से नेवला बाहर निकला और सांप के सामने डट गया। इसके बाद दोनों के बीच ऐसा संघर्ष शुरू हुआ, मानो सड़क कुछ देर के लिए कुदरत का अखाड़ा बन गई हो।
सांप ने फन फैलाकर लगातार नेवले को डराने और दूरी बनाए रखने की कोशिश की। वह तेजी से फुंकार भरता और मौका मिलते ही आगे बढ़कर वार करने का प्रयास करता दिखाई दिया। विषधर के हर प्रहार के साथ मौके पर मौजूद लोगों की धड़कनें तेज होती गईं। सड़क पर चल रहे इस प्राकृतिक संघर्ष ने कुछ ही पलों में राहगीरों का पूरा ध्यान अपनी ओर खींच लिया।
दूसरी ओर नेवला भी पीछे हटने को तैयार नहीं था। वह बेहद तेजी से सांप के हमले से बचता और मौका मिलते ही पलटकर हमला करने की कोशिश करता नजर आया। उसकी फुर्ती और लगातार बदलती दिशा ने सांप के लिए भी मुकाबला आसान नहीं रहने दिया। कुछ देर तक दोनों एक-दूसरे पर बढ़त बनाने की कोशिश करते रहे और सड़क पर तनावपूर्ण दृश्य बना रहा।
सड़क पर अचानक हुए इस अनोखे संघर्ष को देखकर वहां से गुजर रहे लोगों के कदम रुक गए। किसी ने सुरक्षित दूरी बनाकर दृश्य देखा तो किसी ने मोबाइल फोन से वीडियो बनाना शुरू कर दिया। कुछ ही देर में यह रोमांचक घटनाक्रम लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया। वीडियो में सड़क पर सांप और नेवले के बीच चल रहा संघर्ष साफ तौर पर लोगों का ध्यान खींच रहा है।
मुकाबला काफी देर तक चलता रहा, लेकिन इसका अंतिम नतीजा सामने नहीं आ सका। संघर्ष के बीच दोनों अचानक झाड़ियों की ओर बढ़ गए और देखते ही देखते नजरों से ओझल हो गए। मौके पर मौजूद लोग यह पता नहीं लगा सके कि इस प्राकृतिक जंग में आखिर किसकी जीत हुई। यही वजह रही कि घटना के बाद भी लोगों के बीच मुकाबले के परिणाम को लेकर चर्चा जारी रही।
सांप और नेवले की भिड़ंत भले ही कुछ समय के लिए राहगीरों के लिए रोमांच का कारण बनी लेकिन यह घटना एक बार फिर दिखाती है कि शहर और सड़कें बढ़ने के बावजूद प्राकृतिक जीवन हमारे आसपास मौजूद है। झाड़ियों और खुले क्षेत्रों में रहने वाले जीव कई बार इंसानी गतिविधियों के बेहद करीब पहुंच जाते हैं।
मंडी अंडरब्रिज के पास हुई इस भिड़ंत का वीडियो सोशल मीडिया पर भी चर्चा में है। कुछ मिनट तक चले इस प्राकृतिक संघर्ष ने लोगों को हैरान कर दिया। हालांकि, सांप और नेवले के बीच वास्तविक मुकाबले का परिणाम सामने नहीं आया, लेकिन सड़क पर अचानक शुरू हुई इस जंग ने मौके पर मौजूद लोगों को ऐसा दृश्य जरूर दिखा दिया, जिसे वे लंबे समय तक याद रखेंगे।

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युवक का अपहरण: भांजी-भतीजी के सामने किया अगवा; देव डांसर और साथियों पर आरोप
श्योपुर। मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले के बड़ौदा थाना क्षेत्र में अपहरण की एक सनसनीखेज और खौफनाक वारदात सामने आई है। अपनी भांजी और भतीजी के साथ रिश्तेदारी से लौट रहे उतनबाड़ निवासी कपिल मीणा का अपहरण कर लिया गया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, पीड़ित कपिल मीणा जब रास्ते में था, तभी एक काले रंग की गाड़ी में सवार होकर आए 7 से 8 हथियारबंद बदमाशों ने उसे घेर लिया और बंदूक की नोक पर जबरन अपने साथ उठाकर ले गए। परिजनों और प्रत्यक्षदर्शियों ने इस वारदात का मुख्य आरोपी देव डांसर और उसके साथियों को बताया है।
वारदात की खबर फैलते ही आक्रोशित ग्रामीण और पीड़ित के परिजन भारी संख्या में बड़ौदा थाने पहुंच गए। उग्र ग्रामीणों ने थाने का घेराव कर जमकर हंगामा किया और आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी व अपहृत युवक को सकुशल छुड़ाने की मांग की। घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस बल तैनात कर दिया गया है और बदमाशों की तलाश में नाकेबंदी की जा रही है।
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धीरेंद्र शास्त्री के बयान पर साध्वी हर्षानंद का पलटवारः बोलीं- ‘जब आश्रम खुद सुरक्षित नहीं, तो वहां जाने की क्या जरूरत है?’
भोपाल। बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री द्वारा महिलाओं को दी गई चेतावनी और अपील के बाद अब संत समाज से ही इस पर प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं। हाल ही में साध्वी हर्षानंद गिरि का एक बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें उन्होंने धीरेंद्र शास्त्री के उस बयान पर बड़ा सवाल उठाया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि आश्रम आने वाली माताएं-बहनें अनजान लोगों पर भरोसा न करें और अपनी सुरक्षा खुद करें। हर्षानंद गिरि ने दो टूक कहा है कि जब आश्रम और वहां के सेवादार खुद सुरक्षित नहीं हैं, तो ऐसे स्थानों पर परिवार या बच्चों को भेजने का जोखिम क्यों उठाया जाए।
वायरल बयान में साध्वी हर्षानंद गिरि ने खुलकर अपनी बात रखी और कहा कि किसी से उनकी कोई व्यक्तिगत दुश्मनी नहीं है, लेकिन जो बयान सामने आ रहे हैं कि आश्रम में माताएं-बहनें न आएं या सेवादारों पर भरोसा न करें, वे चिंताजनक हैं। हर्षानंद गिरि ने सवाल उठाया कि अगर किसी संत को अपने ही आश्रम के सेवादारों पर भरोसा नहीं है, तो भक्त उस आश्रम पर कैसे भरोसा कर सकते हैं? उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जब कोई यह गारंटी ही नहीं ले रहा कि “तुम आओ और हम तुम्हें पूरी सुरक्षा देंगे”, तो वहां जाने का क्या औचित्य है?
साध्वी हर्षानंद गिरि ने स्पष्ट रूप से कहा कि हर आश्रम बुरा नहीं होता, लेकिन इस दुविधा में रहने से बेहतर है कि लोग आश्रमों में रुकने से बचें। उन्होंने सलाह दी कि मंदिर जाएं, भगवान के दर्शन करें और तुरंत अपने घर वापस लौट आएं। घर पर रहकर करें पूजा-पाठ: साध्वी ने कहा कि यदि सुरक्षित रहना है, तो अपने घर पर रहकर मंत्र जाप और पूजा-पाठ करें। खुद जिन्होंने आश्रम बनाए हैं, जब वे उन्हें नहीं संभाल पा रहे हैं, तो लोगों को आश्रम की राजनीति और पंचायत में पड़ने की कोई जरूरत नहीं है।
धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की अपील के बाद हर्षानंद गिरि के इस बयान ने धार्मिक और आध्यात्मिक हलकों में एक नई बहस छेड़ दी है। एक तरफ जहां सुरक्षा को लेकर सतर्कता बरतने की बात कही जा रही है, वहीं दूसरी तरफ आश्रमों की व्यवस्था और वहां की आंतरिक सुरक्षा पर भी सवाल खड़े होने लगे हैं।

ग्वालियर। महिलाओं से दोस्ती कर उनके निजी पलों की चोरी-छिपे रिकॉर्डिंग करने का गंभीर मामला सामने आया है। सिटी सेंटर के सारिका नगर में पानी प्लांट संचालक योगेश गुप्ता पर महिलाओं के आपत्तिजनक वीडियो बनाने का आरोप लगा है। विश्वविद्यालय थाना पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। शुरुआती जांच में उसके मोबाइल फोन से 40 से ज्यादा महिलाओं के आपत्तिजनक वीडियो मिलने की बात सामने आई है। इनमें कुछ वीडियो स्पाय कैमरे से रिकॉर्ड किए गए बताए जा रहे हैं। पुलिस अब यह पता लगा रही है कि वीडियो किन परिस्थितियों में बनाए गए और उनका इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया गया।
मामला सनातन सेना के कार्यकर्ताओं की सूचना के बाद सामने आया। संगठन के पदाधिकारियों भगवती शुक्ला और मुकेश शर्मा के साथ एक महिला कार्यकर्ता ने पुलिस को बताया कि योगेश गुप्ता कथित तौर पर पहले महिलाओं से दोस्ती करता था। इसके बाद उन्हें अपने पास बुलाकर उनके साथ निजी संबंध बनाता और इस दौरान चोरी-छिपे आपत्तिजनक वीडियो रिकॉर्ड कर लेता था।
संगठन के कार्यकर्ताओं का आरोप है कि योगेश की गतिविधियों की जानकारी मिलने के बाद उसे पकड़ने की योजना बनाई गई। इसके बाद कार्यकर्ताओं ने उसे पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया। पुलिस ने मोबाइल की जांच की तो उसमें बड़ी संख्या में महिलाओं के वीडियो मिलने की बात सामने आई। हालांकि, वीडियो बनाए जाने की परिस्थितियों और आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
विश्वविद्यालय थाना पुलिस के अनुसार, आरोपी के मोबाइल फोन में 40 से ज्यादा महिलाओं के आपत्तिजनक वीडियो मिले हैं। इनमें कुछ रिकॉर्डिंग स्पाय कैमरे से बनाए जाने की आशंका है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि सभी वीडियो आरोपी ने खुद बनाए हैं या इनमें किसी अन्य व्यक्ति की भी भूमिका है।
जांच का एक अहम पहलू यह भी है कि संबंधित महिलाओं को उनकी रिकॉर्डिंग की जानकारी थी या नहीं। पुलिस यह भी पता लगाएगी कि वीडियो कहां और किन परिस्थितियों में बनाए गए। क्या इन रिकॉर्डिंग को केवल मोबाइल में रखा गया था या इन्हें किसी अन्य व्यक्ति के साथ साझा भी किया गया, इसकी भी जांच की जा रही है।
सनातन सेना के कार्यकर्ताओं ने पुलिस को बताया कि आरोपी के संपर्क में आई कुछ महिलाएं तलाकशुदा भी हैं। पुलिस इस जानकारी की पुष्टि करने के साथ वीडियो में दिखाई देने वाली महिलाओं की पहचान करने और उनसे संपर्क करने की प्रक्रिया में जुटी है। मामले में महिलाओं की निजता को ध्यान में रखते हुए उनकी पहचान सार्वजनिक करना जांच को प्रभावित कर सकता है।
पुलिस मोबाइल फोन में मिले वीडियो और अन्य डिजिटल सामग्री की फोरेंसिक जांच कराएगी। इससे रिकॉर्डिंग की प्रकृति, उनके बनाए जाने से जुड़े डिजिटल साक्ष्य और संभावित इस्तेमाल के बारे में जानकारी मिलने की उम्मीद है। जांच में यह भी देखा जाएगा कि वीडियो किसी अन्य डिवाइस या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर भेजे गए थे या नहीं।
सीएसपी रवि भदौरिया ने बताया कि सनातन सेना की सूचना पर एक युवक को हिरासत में लिया गया है। उसके मोबाइल से कई महिलाओं के आपत्तिजनक वीडियो मिले हैं। मामले में पूछताछ की जा रही है और वीडियो में दिखाई देने वाली महिलाओं से भी संपर्क किया जाएगा।
पुलिस के अनुसार, डिजिटल साक्ष्यों की जांच और संबंधित लोगों के बयान के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल आरोपी पर लगे आरोपों, वीडियो बनाने के तरीके और उनके संभावित इस्तेमाल से जुड़े सभी पहलुओं की पड़ताल की जा रही है।
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खौफनाक वारदातः मोमोज कम मिलने की शिकायत पर छात्र के ऊपर फेंका खौलता तेल, चेहरा और कान झुलसे
ग्वालियर। मोमोज कम मिलने की शिकायत करना एक 18 साल के छात्र को भारी पड़ गया। आरोप है कि कम मोमोज मिलने पर आपत्ति जताने से नाराज ठेले वाले ने पहले छात्र से विवाद किया और फिर कढ़ाई में खौलता हुआ तेल उठाकर उसके ऊपर फेंक दिया। गर्म तेल की चपेट में आने से छात्र का चेहरा और कान गंभीर रूप से झुलस गए। घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई और आरोपी मौके से फरार हो गया।
दरअसल मामला ग्वालियर के हजीरा थाना क्षेत्र स्थित पुरानी रेशम मिल चौराहे का है। पीड़ित छात्र शिवा उर्फ चेतन भदौरिया, उम्र 18 साल, न्यू रेशम मिल स्थित प्रगति नगर का रहने वाला है। बताया गया कि शिवा अपने दोस्त गोलू खान और विकास राजपूत के साथ जिम जाने के लिए निकला था। रास्ते में तीनों पुरानी रेशम मिल चौराहे पर स्थित अंकित नाम के व्यक्ति के मोमोज के ठेले पर रुके,शिवा ने 20 रुपए के मोमोज का ऑर्डर दिया। लेकिन प्लेट में मोमोज की संख्या कम देखकर उसने इसकी शिकायत की।
पुलिस को प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया की मामूली शिकायत को लेकर ठेले वाले अंकित और शिवा के बीच कहासुनी शुरू हो गई। आरोप है कि अंकित ने शिवा के साथ गाली-गलौज की। शिवा ने जब अभद्रता का विरोध किया तो विवाद और बढ़ गया,आरोप है कि अंकित ने पहले शिवा को धक्का दिया और इसके बाद कढ़ाई में खौलता हुआ गर्म तेल उठाकर सीधे उसके ऊपर फेंक दिया। गर्म तेल की चपेट में आने से शिवा का चेहरा और कान गंभीर रूप से झुलस गए। अचानक हुए इस हमले के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई।
घटना के बाद आरोपी ठेला छोड़कर मौके से भाग निकला। मामले की जानकारी पुलिस को दी गई और पुलिस ने मामला दर्ज कर अब पूरे घटनाक्रम की जांच शुरू कर दी है। महज मोमोज की संख्या को लेकर शुरू हुआ विवाद इतना बढ़ गया कि बात खौलते तेल से हमला करने तक पहुंच गई। अब पुलिस जांच के बाद यह साफ होगा कि विवाद की पूरी वजह क्या थी और गर्म तेल फेंकने के आरोप में आरोपी के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है।
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बड़ा आदेशः दिवाली, नवरात्रि और छठ पूजा के दौरान फुटपाथ दुकानदारों और कुम्हारों को नहीं हटाए जाएंगे, सामान जब्ती पर भी रोक
भोपाल। आगामी त्योहारी सीजन को देखते हुए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने देश के सभी राज्यों के लिए एक कड़ा और राहत भरा निर्देश जारी किया है। एनएचआरसी ने स्पष्ट किया है कि नवरात्रि, दिवाली और छठ पूजा के पावन पर्वों के दौरान लोकल वेंडर्स, स्ट्रीट हॉकर और चाक पर मिट्टी के बर्तन बनाने वाले कुम्हारों को बेवजह उनके स्थानों से नहीं हटाया जाएगा। आयोग के इस आदेश से त्योहारी सीजन में अपनी आजीविका कमाने वाले छोटे व्यापारियों को बड़ी राहत मिली है।
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने सभी राज्यों के मुख्य सचिवों (Chief Secretary) को भेजे गए सख्त निर्देशों में कुछ अहम बिंदुओं पर विशेष जोर दिया है। बेवजह हटाने पर रोक: त्योहारी सीजन (नवरात्रि, दिवाली, छठ) के दौरान किसी भी स्थानीय वेंडर या हॉकर को बिना ठोस कारण के नहीं हटाया जाएगा। अनिवार्य वैकल्पिक व्यवस्था: यदि कानून-व्यवस्था या सुरक्षा कारणों से किसी जगह को खाली कराना बेहद जरूरी हो भी जाता है, तो प्रशासन को कार्रवाई से पहले दुकानदारों और वेंडर्स के लिए वैकल्पिक जगह (Alternative Place) की व्यवस्था करनी होगी। सामान जब्ती और वसूली पर रोक: त्योहारों के इन दिनों में दुकानदारों का सामान जब्त करने और उनसे किसी भी प्रकार की जबरन वसूली या उत्पीड़न पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है।
मानवाधिकार आयोग ने इस मामले को बेहद गंभीरता से लिया है। सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को निर्देश दिए गए हैं कि वे इस आदेश के पालन से जुड़ी अनुपालन रिपोर्ट 18 अक्टूबर तक हर हाल में एनएचआरसी को सौंपें। आयोग के इस फैसले के बाद अब प्रशासनिक अमले और नगर निगमों को त्योहारी सीजन के दौरान स्ट्रीट वेंडर्स के प्रति नरमी बरतनी होगी, जिससे गरीब और छोटे व्यापारियों को त्योहारों के समय रोजी-रोटी की चिंता से मुक्ति मिल सकेगी।

रायपुर: जशपुर में नशे की तस्करी के खिलाफ पुलिस ने फिर बड़ी कार्रवाई की है। लावाकेरा चेकिंग बैरियर पर मिनी ट्रक से 632 किलो 380 ग्राम गांजा बरामद किया गया है। तस्करों ने गांजे को खाली शराब की बोतलों से भरी बोरियों के नीचे छिपा रखा था। बरामद गांजे समेत जब्ती की कुल कीमत करीब 3.41 करोड़ रुपए बताई गई है। खास बात यह है कि दो दिन पहले भी इसी बैरियर पर 2.20 करोड़ रुपए कीमत का 440 किलो से अधिक गांजा पकड़ा गया था। लगातार दूसरी बड़ी कार्रवाई के बाद जशपुर के सीमावर्ती इलाकों में नशे की तस्करी और निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के गृह जिले जशपुर में नशे की तस्करी के खिलाफ पुलिस ने एक बार फिर बड़ी कार्रवाई की है। लावाकेरा चेकिंग बैरियर पर एंटी नारकोटिक्स टीम और तपकरा पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में मिनी ट्रक से 632 किलो 380 ग्राम गांजा बरामद किया गया है। जब्त गांजे की अनुमानित कीमत करीब 3 करोड़ 16 लाख 19 हजार रुपए बताई गई है। पुलिस के मुताबिक तस्करों ने जांच टीम को चकमा देने के लिए गांजे को सीधे ट्रक में नहीं रखा था। गांजे के पैकेटों को खाली शराब की बोतलों से भरी बोरियों के नीचे छिपाकर ले जाया जा रहा था।
पुलिस ने ओडिशा की ओर से आ रहे मिनी ट्रक क्रमांक UP-47-AT-9839 को संदेह के आधार पर रोका। ट्रक के ऊपर खाली बोतलों से भरी बोरियां रखी थीं। जब पुलिस ने इन बोरियों को हटाकर नीचे रखी बोरियों की जांच की तो उनमें टेप से लिपटे पैकेट मिले। तलाशी के दौरान 20 बोरियों से कुल 597 पैकेट बरामद हुए। पैकेट खोलने पर इनमें गांजा मिला। तौल कराने पर कुल वजन 632.380 किलो निकला।
पुलिस ने मामले में उत्तर प्रदेश के बहराइच निवासी विनोद कुमार गुप्ता (42) को गिरफ्तार किया है। पूछताछ में आरोपी ने पुलिस को बताया कि गांजे की खेप ओडिशा से लेकर उत्तर प्रदेश जा रहा था। पुलिस ने आरोपी के कब्जे से गांजा, मिनी ट्रक, दो मोबाइल फोन और 3 हजार रुपए नकद जब्त किए हैं।
पुलिस के अनुसार बरामद गांजे की अनुमानित कीमत करीब 3 करोड़ 16 लाख 19 हजार रुपए है। तस्करी में इस्तेमाल मिनी ट्रक की कीमत करीब 25 लाख रुपए और मोबाइल की कीमत करीब 25 हजार रुपए बताई गई है। नकदी समेत पूरी जब्ती की अनुमानित कीमत करीब 3 करोड़ 41 लाख 47 हजार रुपए है।
लावाकेरा बैरियर पर यह लगातार दूसरी बड़ी कार्रवाई है। पुलिस ने इससे महज दो दिन पहले करीब 440.63 किलो गांजा बरामद किया था। उस मामले में भी गांजा ओडिशा से उत्तर प्रदेश ले जाया जा रहा था। तस्करों ने ट्रक में ऊपर मिर्च से भरी बोरियां रखी थीं और उनके नीचे गांजे के पैकेट छिपाए थे। उस कार्रवाई में करीब 2 करोड़ 20 लाख 31 हजार 500 रुपए कीमत का गांजा जब्त कर दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था।
लगातार दो बड़ी कार्रवाइयों ने जशपुर के रास्ते होने वाली नशे की तस्करी को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। पहले मिर्च की बोरियों की आड़ और अब खाली शराब की बोतलों से भरी बोरियों के नीचे करोड़ों का गांजा मिलने से यह सवाल महत्वपूर्ण हो गया है कि ओडिशा से छत्तीसगढ़ होते हुए उत्तर प्रदेश तक सक्रिय इस सप्लाई चेन में और कौन-कौन लोग शामिल हैं? पुलिस अब सिर्फ वाहन और ड्राइवर तक कार्रवाई सीमित रखने के बजाय गांजे के स्रोत, सप्लायर, रिसीवर और पूरे नेटवर्क तक पहुंचने की दिशा में जांच कर रही है।
जशपुर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का गृह जिला है। ऐसे में जिले के सीमावर्ती इलाकों में लगातार सामने आ रही बड़ी नशीली खेपों ने बॉर्डर चेकिंग और निगरानी व्यवस्था को चर्चा में ला दिया है। हालांकि पुलिस की कार्रवाई लगातार जारी है और करोड़ों रुपए की खेप पकड़ी जा रही है, लेकिन लगातार सामने आ रहे मामलों के बीच यह सवाल भी उठना स्वाभाविक है कि इतनी बड़ी मात्रा में गांजा आखिर किन रास्तों से जिले की सीमा तक पहुंच रहा है और तस्कर बार-बार नए तरीकों से पुलिस जांच को चकमा देने की कोशिश कैसे कर रहे हैं? इन सवालों का जवाब अब पुलिस की नेटवर्क जांच से ही सामने आएगा।
एसएसपी डॉ. लाल उमेद सिंह के मुताबिक सरगुजा रेंज आईजी दीपक कुमार झा के निर्देश पर नशे के अवैध कारोबार के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है। लावाकेरा चेकिंग बैरियर पर 6 क्विंटल से अधिक गांजा बरामद कर एक आरोपी को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि गांजा कहां से खरीदा गया, किस नेटवर्क के जरिए भेजा गया और उत्तर प्रदेश में इसकी डिलीवरी किसे होनी थी।
तपकरा थाना पुलिस ने आरोपी के खिलाफ BNS की धारा 20(बी)(ii)(सी) और NDPS Act के तहत मामला दर्ज किया है। आरोपी से पूछताछ के आधार पर पुलिस तस्करी से जुड़े अन्य लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।
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तीन वैज्ञानिकों को मिला मेडिसिन का नोबेल, दिमाग की नसों को रोशनी से कंट्रोल करने की खोज
2026 का मेडिसिन नोबेल पुरस्कार तीन वैज्ञानिकों को दिया गया है। अमेरिका के कार्ल डाइसेरोथ और जर्मनी के पीटर हेगेमैन और जॉर्ज नागेल को यह सम्मान लाइट-गेटेड आयन चैनल्स और ऑप्टोजेनेटिक्स से जुड़ी महत्वपूर्ण खोजों के लिए दिया गया है। उनकी रिसर्च ने वैज्ञानिकों को जीवित दिमाग में अलग-अलग नर्व सेल्स की गतिविधि को रोशनी की मदद से नियंत्रित करने का तरीका दिया है।
2026 के फिजियोलॉजी या मेडिसिन नोबेल के लिए कार्ल डाइसेरोथ, पीटर हेगेमैन और जॉर्ज नागेल को चुना गया है। तीनों वैज्ञानिकों के काम ने न्यूरोसाइंस यानी दिमाग और नर्वस सिस्टम की रिसर्च को नई दिशा दी है।
नोबेल समिति के मुताबिक, उनकी खोजों से विकसित ऑप्टोजेनेटिक्स तकनीक की मदद से जीवित दिमाग में अलग-अलग नर्व सेल्स को सटीक तरीके से सक्रिय या निष्क्रिय किया जा सकता है। यह तकनीक अब दुनियाभर की प्रयोगशालाओं में दिमाग के काम करने के तरीके को समझने के लिए इस्तेमाल की जा रही है।
ऑप्टोजेनेटिक्स ऐसी तकनीक है जिसमें प्रकाश की मदद से नर्व सेल्स की गतिविधि को नियंत्रित किया जाता है। इसके जरिए वैज्ञानिक यह समझने की कोशिश करते हैं कि दिमाग की अलग-अलग कोशिकाएं किस तरह काम करती हैं और उनके बीच किस तरह के संकेतों का आदान-प्रदान होता है। इस खोज ने दिमाग की जटिल गतिविधियों और न्यूरल सर्किट्स को समझने के लिए रिसर्च का एक नया रास्ता खोला है।
इस तकनीक का इस्तेमाल केवल दिमाग की रिसर्च तक सीमित नहीं है। वैज्ञानिक इसका इस्तेमाल आंखों से जुड़ी बीमारियों पर भी कर रहे हैं। रिसर्च का एक अहम लक्ष्य यह समझना है कि क्या ऑप्टोजेनेटिक्स जैसी तकनीकों की मदद से कुछ ऐसे लोगों की दृष्टि बहाल करने में मदद मिल सकती है, जिन्होंने अपनी आंखों की रोशनी खो दी है।
मेडिसिन के नोबेल पुरस्कार की घोषणा सोमवार को स्टॉकहोम स्थित कैरोलिंस्का इंस्टीट्यूट में की गई। इसके साथ ही 2026 के नोबेल पुरस्कारों की घोषणा का सप्ताह शुरू हो गया है। मेडिसिन के बाद मंगलवार को फिजिक्स, बुधवार को केमिस्ट्री और गुरुवार को साहित्य के नोबेल की घोषणा होगी। शुक्रवार को शांति पुरस्कार की घोषणा की जाएगी। इसके बाद 12 अक्टूबर को इकोनॉमिक साइंसेज में नोबेल मेमोरियल पुरस्कार की घोषणा होगी।
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महाराष्ट्र के चंद्रपुर जिले में 82 छात्रों को आधा गंजा कर दिया गया, सुपरिटेंडेंट को ‘कारण बताओ नोटिस’ जारी
महाराष्ट्र के चंद्रपुर जिले से एक हैरान कर देने के साथ ही बड़ा शर्मनाक मामला सामने आया है. स्कूल में छात्रों के बाल काटने को लेकर उठे विवाद ने स्कूल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं. जांभूलघाट सरकारी आश्रम स्कूल में खेलने पर नाराज सुपरिटेंडेंट ने 82 छात्रों को आधा गंजा करा दिया. मामला बढ़ने के बाद सुपरिटेंडेंट के खिलाफ नोटिस जारी हुआ है. अभिभावकों ने मामले की जांच की मांग की है.
महाराष्ट्र के चंद्रपुर जिले के एक सरकारी आश्रम स्कूल में 82 छात्रों को सजा के तौर पर आधा गंजा कर दिया गया, जिससे अभिभावकों में भारी गुस्सा है.
महाराष्ट्र के चंद्रपुर जिले के चिमूर तालुका के जांभूलघाट स्थित एक सरकारी माध्यमिक आश्रम स्कूल में अनुशासन के नाम पर मनमानी करते हुए करीब 82 छात्रों को आधा गंजा कर दिया गया. माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक आश्रमशाला में विद्यार्थियों के बाल अजीब ढंग से काट दिए गए.
आरोप है कि शनिवार को बाल काटने के दौरान कई विद्यार्थियों के सिर का आधा हिस्सा ट्रिमर से काट दिया गया और उन्हें अगले दिन बाकी बाल काटने की बात कहकर छोड़ दिया गया. जानकारी के मुताबिक जब बाल काटने का काम चल रहा था, तब कुछ छात्र खेल रहे थे. बच्चों के इस व्यवहार से सुपरिटेंडेंट नाराज हो गए और उन्होंने कथित तौर पर नाई को बच्चों को आधे बाल काटने का निर्देश दिया.
जांभुलघाट की इस आश्रमशाला में पहली से 11वीं कक्षा तक करीब 572 विद्यार्थी निवासी रहकर पढ़ाई करते हैं. स्कूल प्रबंधन के मुताबिक, छात्रों के सिर में डैंड्रफ और खुजली की समस्या को देखते हुए बाल काटने का फैसला लिया गया था.
इस घटना ने आश्रमशाला की प्रशासनिक व्यवस्था और निगरानी को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं. घटना के बाद स्कूल के हेडमास्टर ने सुपरिटेंडेंट को ‘कारण बताओ नोटिस’ जारी किया है, लेकिन अभिभावक इस पूरे मामले की जांच और कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं. तस्वीरें सामने आने के बाद कथित तौर पर उच्च अधिकारियों ने स्कूल से संपर्क किया और निर्देश दिया कि छात्रों के बाल ठीक से एक समान काटे जाएं.


ग्वालियर। अंजान नंबर से दोस्ती, फिर गुड मॉर्निंग-गुड नाइट से बातचीत और इसके बाद वीडियो कॉल तक पहुंचने के आरोपों से जुड़े मामले में स्थानीय रहवासी योगेश गुप्ता का मोबाइल पुलिस जांच के केंद्र में है। सनातन सेना की ओर से दिए गए आवेदन के बाद सामने आए इस मामले में मोबाइल की जांच के दौरान अब तक 32 वीडियो मिलने की बात सामने आई है। इनमें 28 अलग-अलग सनातन से संबंधित वीडियो या डिजिटल सामग्री होने का दावा किया जा रहा है। पुलिस इन वीडियो, चैट और सोशल मीडिया संपर्कों की जांच कर रही है।
आरोप है कि योगेश पहले ऐसे व्हाट्सऐप ग्रुपों में शामिल होता था, जहां बड़ी संख्या में अनजान लोग जुड़े रहते थे। वहां से महिलाओं के नंबर मिलने के बाद वह फेसबुक, इंस्टाग्राम और टेलीग्राम पर उन्हें तलाशता और संपर्क करता था। पहली बातचीत भी सामान्य तरीके से शुरू करने का आरोप है। वह कथित तौर पर कहता था- ‘आपका नंबर मेरे फोन में सेव है, क्या मैं आपको जानता हूं?’ इसके बाद मैसेजिंग के जरिए दोस्ती बढ़ाई जाती थी।
आरोप है कि लगातार संपर्क बनाए रखने के लिए गुड मॉर्निंग-गुड नाइट मैसेज, रील और सामान्य बातचीत का सहारा लिया जाता था। कुछ समय बाद बातचीत निजी होने और वीडियो कॉल तक पहुंचने की बात सामने आई है। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि इस तरह योगेश कितनी महिलाओं के संपर्क में आया और इनमें से कितने मामलों में निजी बातचीत या वीडियो रिकॉर्ड किए गए।
जांच में सोशल क्लबों और सामाजिक संगठनों से जुड़ा एक और एंगल सामने आया है। आरोप है कि योगेश सामाजिक गतिविधियों और कार्यक्रमों के दौरान महिलाओं से परिचय बढ़ाता था और बाद में सोशल मीडिया के जरिए लगातार संपर्क में रहता था। पुलिस अब उसके मोबाइल और सोशल मीडिया अकाउंट्स से मिले डेटा के आधार पर यह पता लगाने में जुटी है कि सोशल क्लबों और संगठनों के माध्यम से उसके संपर्क में कितनी महिलाएं आईं और क्या इनमें से किसी के निजी वीडियो या चैट भी मोबाइल में मौजूद हैं।
मामले में झांसी की एक महिला से करीब डेढ़ साल से संपर्क होने की बात भी सामने आई है। महिला का वैवाहिक विवाद और तलाक का मामला चलने की जानकारी है। आरोप है कि योगेश ने खुद को कंपनी का बड़ा अधिकारी बताकर महिला से दोस्ती बढ़ाई और शादी कर नया जीवन शुरू करने का भरोसा दिया। आरोप है कि हाल ही में महिला को ग्वालियर बुलाया गया। वह अपने छोटे बच्चे के साथ यहां आई थी। होटल में ठहरने के दौरान निजी क्षणों की रिकॉर्डिंग किए जाने का आरोप भी लगाया गया है। हालांकि इस आरोप की पुष्टि पुलिस जांच और महिला की औपचारिक शिकायत के बाद ही हो सकेगी।
मामले में सबसे अहम डिजिटल साक्ष्य योगेश के मोबाइल से मिलने की बात कही जा रही है। जांच में 32 वीडियो और 28 महिलाओं से संबंधित सामग्री मिलने का दावा है। इसके अलावा मोबाइल में कई नंबर, चैट, स्क्रीनशॉट और वीडियो कॉल से जुड़ी सामग्री भी मिलने की बात सामने आई है। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि ये वीडियो किस परिस्थिति में रिकॉर्ड किए गए, संबंधित महिलाओं की अनुमति थी या नहीं और क्या किसी निजी सामग्री को किसी अन्य व्यक्ति के साथ शेयर या सोशल मीडिया पर प्रसारित किया गया।
पुलिस जांच के तीन अहम बिंदु
योगेश कितनी महिलाओं के संपर्क में था और संपर्क का माध्यम क्या था।
मोबाइल में मिले वीडियो किस परिस्थिति में रिकॉर्ड किए गए।
निजी वीडियो या चैट को कहीं शेयर, प्रसारित अथवा दबाव बनाने के लिए इस्तेमाल तो नहीं किया गया।
शिकायत मिलने के बाद तथ्यों पर होगी कार्रवाई
विश्वविद्यालय क्षेत्र के सीएसपी रवि भदौरिया ने कहा कि आरोपी पर फिलहाल स्थानीय स्तर पर कोई औपचारिक फरियाद दर्ज नहीं हुई है। झांसी की एक महिला द्वारा कानूनी कार्रवाई की इच्छा जताने की जानकारी सामने आई है। महिला के औपचारिक रूप से सामने आने और शिकायत देने के बाद तथ्यों के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
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बीच सड़क पर खुलेआम गुंडागर्दी: सरेराह तड़तड़ाईं गोलियां, दहशत के साए में गुजरे 72 घंटे
इंदौर। शहर के कानून-व्यवस्था के दावों पर 1 अक्टूबर की शाम एक बार फिर जोरदार तमाचा पड़ा, जब ग्रीन पार्क कॉलोनी में सरेआम पिस्तौलें चमकीं और गोलियों की तड़तड़ाहट से पूरा इलाका थर्रा उठा। बीच सड़क पर खुलेआम गुंडागर्दी और जान से मारने की नीयत से की गई फायरिंग ने यह साबित कर दिया कि शहर में अपराधियों के दिल से पुलिस का खौफ पूरी तरह खत्म हो चुका है। इससे भी ज्यादा शर्मनाक पहलू यह है कि इस खौफनाक वारदात के बाद पूरे क्षेत्र में 3 दिनों तक दहशत और सन्नाटा पसरा रहा और चंदन नगर पुलिस को इन नामजद और आदतन बदमाशों को ढूंढकर शिकंजे में लेने में पूरे 72 घंटे का लंबा वक्त लग गया। सवाल उठना लाजमी है कि अगर इन तीन दिनों के दौरान ये सिरफिरे बदमाश किसी की जान ले लेते या किसी और बड़ी अनहोनी को अंजाम दे देते, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होती?
सरेराह पिस्टल लहराकर लिखी खौफ की इबारत घटनाक्रम के मुताबिक, फरियादी मोहम्मद समीर खान अपने साथी के साथ एक्टिवा से जा रहा था। पुरानी रंजिश और समझौते के विवाद को लेकर बेखौफ बदमाशों ने ब्लैक थार और एक्टिवा से उनका फिल्मी अंदाज में पीछा किया। आरोपियों ने न केवल उनका रास्ता रोका और जान से मारने की धमकी दी, बल्कि आरोपी मोनू उर्फ मुसेफ ने आव देखा ना ताव और जान से खत्म करने की नीयत से सीधी फायरिंग कर दी। गोली चलते ही क्षेत्र में भगदड़ मच गई और आम नागरिक अपनी जान बचाकर भागने लगे। जब कागज पर सिमट गई पुलिसिया मुस्तैदी: आदतन अपराधियों के आगे लाचार खाकी पकड़े गए आरोपियों का काला चिट्ठा खुद चीख-चीखकर पुलिस गश्त और मुस्तैदी के खोखले दावों की पोल खोल रहा है।
मोनू उर्फ मुसेफ (20 वर्ष): इसके खिलाफ पहले से 06 संगीन आपराधिक मामले दर्ज हैं।
दानिश उर्फ फाइव स्टार (18 वर्ष): इसके खिलाफ 04 आपराधिक मुकदमे लंबित हैं।
अल्फ़ाइज (18 वर्ष): यह भी पहले से 01 अपराध में शामिल रहा है।
इनके साथ एक नाबालिग को भी अपराध की इस भट्ठी में झोंका गया था।
हैरानी की बात यह है कि इन सभी बदमाशों पर पुलिस पहले भी ‘प्रतिबंधात्मक कार्रवाई’ और ‘बाउंड ओवर’ का कागजी चाबुक चला चुकी थी। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि ये अपराधी पुलिसिया कागजों को रद्दी का टुकड़ा समझते हुए हाथों में अवैध देशी पिस्टल और जिंदा कारतूस लेकर बेखौफ घूमते रहे।
वारदात के पूरे 3 दिन बीत जाने के बाद, चंदन नगर पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से एक अवैध देशी पिस्टल, जिंदा राउंड, थार गाड़ी, एक्टिवा और खाली खोखा जप्त करने में सफलता पाई। लेकिन इस कार्रवाई के बाद जारी किया गया आधिकारिक प्रेस नोट पुलिसिया कार्यशैली पर और बड़ा सवाल खड़ा करता है। 3 दिनों तक आम जनता को खौफ और असुरक्षा के साए में छोड़ने के बावजूद, पुलिस की ओर से जारी प्रेस नोट में बेशर्मी से इसे “घटना के चंद घंटों में त्वरित एवं प्रभावी कार्रवाई” करार दिया गया। प्रेस नोट का एक-एक शब्द अधिकारियों और पुलिस टीम की “सराहनीय भूमिका” की अपनी ही पीठ थपथपाने की कहानी गढ़ता नजर आया।
आदतन अपराधी जब सरेआम गोलियां चलाकर आसानी से फरार हो जाते हैं और उन्हें ढूंढने में पुलिस को 72 घंटे पापड़ बेलने पड़ते हैं, तो क्या इसे ‘तत्परता’ कहा जाएगा या खाकी की नाकामी और सुस्त रवैया? फिलहाल पुलिस जप्त पिस्टल की खरीद-फरोख्त और नेटवर्क को खंगालने की रटी-रटाई बात कह रही है, लेकिन चंदन नगर के रहवासी आज भी इस खौफनाक मंजर को भूल नहीं पाए हैं और पुलिस के इस ‘सरकारी ड्रामे’ पर सवाल उठा रहे हैं।

ग्वालियर। जीआरपी ने मानव तस्करी के एक मामले का खुलासा करते हुए चार विदेशी युवतियों समेत छह लोगों को हिरासत में लिया है। पुलिस के अनुसार युवतियों को शादी कराने के नाम पर अवैध तरीके से भारत लाया गया था। इनमें दो युवतियां नाबालिग बताई गई हैं। पुलिस ने मामले में दो युवकों को गिरफ्तार किया है और आगे की जांच शुरू कर दी है। जीआरपी कंट्रोल रूम भोपाल से सूचना मिली थी कि ट्रेन क्रमांक 12643 स्वर्ण जयंती एक्सप्रेस के जनरल कोच में एक संदिग्ध विदेशी युवक सफर कर रहा है। वह कथित तौर पर अवैध रूप से युवतियों को भारत लाकर उनकी शादी कराने के नेटवर्क से जुड़ा है। सूचना पर जीआरपी थाना प्रभारी ने टीम के साथ ट्रेन में चेकिंग की। हुलिए के आधार पर पुलिस ने मुबीन (25), निवासी म्यांमार, हाल निवासी हैदराबाद, को हिरासत में लिया।
पूछताछ में मुबीन ने पुलिस को बताया कि उसका साथी मोहम्मद हसन (35) अलीगढ़ में चार युवतियों के साथ किराए के मकान में रह रहा है। इसके बाद जीआरपी की टीम ने अलीगढ़ पहुंचकर दबिश दी और हसन के कब्जे से चार युवतियों को बरामद किया। पुलिस ने हसन को भी हिरासत में ले लिया। पुलिस के मुताबिक युवतियों को केवल रोहिंग्या/स्थानीय भाषा आती है, जिसके कारण पूछताछ में भाषा की समस्या सामने आई। पुलिस की प्रारंभिक पूछताछ में सामने आया कि युवतियों को बांग्लादेश के कुतुपालोंग रिफ्यूजी कैंप से उनके माता-पिता की सहमति होने की बात कहकर नदी और पहाड़ों के दुर्गम रास्तों से भारत में दाखिल कराया गया। आरोपियों की कथित योजना युवतियों की शादी जम्मू और श्रीनगर में कराने की थी। अब विस्तृत पूछताछ के लिए ट्रांसलेटर की मांग की जा रही है।
इस बारे में जीआरपी टीआई दीपशिखा तोमर ने कहा कि हमें बांग्लादेशियों की सूचना मिली थी, इसके बाद हमने मुख्य आरोपी को स्वर्ण जयंती एक्सप्रेस से गिरफ्तार किया, इसके बाद एक टीम अलीगढ़ भेजी वहां से चार युवतियों एवं दो युवकों को गिरफ्तार किया है। युवतियों को शेल्टर होम में रखा है, आगे की पूछताछ के लिए ट्रांसलेटर मांगा है, इसके बाद ही आगे की कार्रवाई होगी।
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सरकारी गाड़ी देखते ही पिछले दरवाजे से भागा BJP पार्षद का पति!, वार्ड 31 में पुलिस की रेड, 8 पेटी शराब संग 2 गिरफ्तार
दतिया। मध्य प्रदेश के दतिया जिले से एक बड़ी और सनसनीखेज खबर सामने आई है, जहां सिविल लाइन थाना पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर वार्ड क्रमांक 31 की भाजपा पार्षद के घर पर अचानक छापामार कार्रवाई की। पुलिस की इस अचानक हुई दबिश से इलाके में हड़कंप मच गया। जब पुलिस अधिकारियों ने घर के बाहर बनी बाथरूम की तलाशी ली, तो वहां अवैध रूप से छिपाकर रखी गई देशी और अंग्रेजी शराब का बड़ा जखीरा बरामद हुआ।
पुलिस ने मौके से 8 पेटी अवैध शराब बरामद की है, जिसकी अनुमानित बाजार कीमत करीब 50 हजार रुपये बताई जा रही है। कार्रवाई के दौरान पुलिस ने मौके से ही भाजपा पार्षद के देवर मुकेश साहू और उनके साथी दिनेश चतुर्वेदी को धर दबोचा और गिरफ्तार कर लिया।
कार्रवाई के दौरान जैसे ही पुलिस की टीम ने घर को घेरा, भाजपा पार्षद का पति राकेश साहू पुलिस को चकमा देकर मौके से फरार होने में कामयाब हो गया। सिविल लाइन थाना पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए पार्षद के फरार पति राकेश साहू, देवर मुकेश साहू और आरोपी दिनेश चतुर्वेदी के खिलाफ आबकारी अधिनियम की धारा 34 (2) के तहत गंभीर आपराधिक प्रकरण दर्ज कर लिया है।
इस पूरी कार्रवाई को सिविल लाइन थाना प्रभारी वैभव गुप्ता, सब इंस्पेक्टर भास्कर शर्मा और प्रधान आरक्षक धर्मेंद्र शाक्य की टीम ने अंजाम दिया। पुलिस का कहना है कि जब्त शराब कहाँ से लाई गई थी और इसे कहाँ खपाने की तैयारी थी, इसको लेकर गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ की जा रही है। वहीं, फरार चल रहे पार्षद के पति राकेश साहू की गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर दबिश दी जा रही है।
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बीच सड़क पर खुलेआम गुंडागर्दी: सरेराह तड़तड़ाईं गोलियां, दहशत के साए में गुजरे 72 घंटे
इंदौर। शहर के कानून-व्यवस्था के दावों पर 1 अक्टूबर की शाम एक बार फिर जोरदार तमाचा पड़ा, जब ग्रीन पार्क कॉलोनी में सरेआम पिस्तौलें चमकीं और गोलियों की तड़तड़ाहट से पूरा इलाका थर्रा उठा। बीच सड़क पर खुलेआम गुंडागर्दी और जान से मारने की नीयत से की गई फायरिंग ने यह साबित कर दिया कि शहर में अपराधियों के दिल से पुलिस का खौफ पूरी तरह खत्म हो चुका है। इससे भी ज्यादा शर्मनाक पहलू यह है कि इस खौफनाक वारदात के बाद पूरे क्षेत्र में 3 दिनों तक दहशत और सन्नाटा पसरा रहा और चंदन नगर पुलिस को इन नामजद और आदतन बदमाशों को ढूंढकर शिकंजे में लेने में पूरे 72 घंटे का लंबा वक्त लग गया। सवाल उठना लाजमी है कि अगर इन तीन दिनों के दौरान ये सिरफिरे बदमाश किसी की जान ले लेते या किसी और बड़ी अनहोनी को अंजाम दे देते, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होती?
सरेराह पिस्टल लहराकर लिखी खौफ की इबारत घटनाक्रम के मुताबिक, फरियादी मोहम्मद समीर खान अपने साथी के साथ एक्टिवा से जा रहा था। पुरानी रंजिश और समझौते के विवाद को लेकर बेखौफ बदमाशों ने ब्लैक थार और एक्टिवा से उनका फिल्मी अंदाज में पीछा किया। आरोपियों ने न केवल उनका रास्ता रोका और जान से मारने की धमकी दी, बल्कि आरोपी मोनू उर्फ मुसेफ ने आव देखा ना ताव और जान से खत्म करने की नीयत से सीधी फायरिंग कर दी। गोली चलते ही क्षेत्र में भगदड़ मच गई और आम नागरिक अपनी जान बचाकर भागने लगे। जब कागज पर सिमट गई पुलिसिया मुस्तैदी: आदतन अपराधियों के आगे लाचार खाकी पकड़े गए आरोपियों का काला चिट्ठा खुद चीख-चीखकर पुलिस गश्त और मुस्तैदी के खोखले दावों की पोल खोल रहा है।
मोनू उर्फ मुसेफ (20 वर्ष): इसके खिलाफ पहले से 06 संगीन आपराधिक मामले दर्ज हैं।
दानिश उर्फ फाइव स्टार (18 वर्ष): इसके खिलाफ 04 आपराधिक मुकदमे लंबित हैं।
अल्फ़ाइज (18 वर्ष): यह भी पहले से 01 अपराध में शामिल रहा है।
इनके साथ एक नाबालिग को भी अपराध की इस भट्ठी में झोंका गया था।
हैरानी की बात यह है कि इन सभी बदमाशों पर पुलिस पहले भी ‘प्रतिबंधात्मक कार्रवाई’ और ‘बाउंड ओवर’ का कागजी चाबुक चला चुकी थी। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि ये अपराधी पुलिसिया कागजों को रद्दी का टुकड़ा समझते हुए हाथों में अवैध देशी पिस्टल और जिंदा कारतूस लेकर बेखौफ घूमते रहे।
वारदात के पूरे 3 दिन बीत जाने के बाद, चंदन नगर पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से एक अवैध देशी पिस्टल, जिंदा राउंड, थार गाड़ी, एक्टिवा और खाली खोखा जप्त करने में सफलता पाई। लेकिन इस कार्रवाई के बाद जारी किया गया आधिकारिक प्रेस नोट पुलिसिया कार्यशैली पर और बड़ा सवाल खड़ा करता है। 3 दिनों तक आम जनता को खौफ और असुरक्षा के साए में छोड़ने के बावजूद, पुलिस की ओर से जारी प्रेस नोट में बेशर्मी से इसे “घटना के चंद घंटों में त्वरित एवं प्रभावी कार्रवाई” करार दिया गया। प्रेस नोट का एक-एक शब्द अधिकारियों और पुलिस टीम की “सराहनीय भूमिका” की अपनी ही पीठ थपथपाने की कहानी गढ़ता नजर आया।
आदतन अपराधी जब सरेआम गोलियां चलाकर आसानी से फरार हो जाते हैं और उन्हें ढूंढने में पुलिस को 72 घंटे पापड़ बेलने पड़ते हैं, तो क्या इसे ‘तत्परता’ कहा जाएगा या खाकी की नाकामी और सुस्त रवैया? फिलहाल पुलिस जप्त पिस्टल की खरीद-फरोख्त और नेटवर्क को खंगालने की रटी-रटाई बात कह रही है, लेकिन चंदन नगर के रहवासी आज भी इस खौफनाक मंजर को भूल नहीं पाए हैं और पुलिस के इस ‘सरकारी ड्रामे’ पर सवाल उठा रहे हैं।

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ग्वालियर। महिलाओं से दोस्ती कर उनके निजी पलों की चोरी-छिपे रिकॉर्डिंग करने का गंभीर मामला सामने आया है। सिटी सेंटर के सारिका नगर में पानी प्लांट संचालक योगेश गुप्ता पर महिलाओं के आपत्तिजनक वीडियो बनाने का आरोप लगा है। विश्वविद्यालय थाना पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। शुरुआती जांच में उसके मोबाइल फोन से 40 से ज्यादा महिलाओं के आपत्तिजनक वीडियो मिलने की बात सामने आई है। इनमें कुछ वीडियो स्पाय कैमरे से रिकॉर्ड किए गए बताए जा...
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फोटो गैलरी

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गरिमा के जन्म के 15 मिनिट बाद का फोटो
गरिमा के जन्म के 15 मिनिट बाद का फोटो
गरिमा के 1 वर्ष बाद का फोटो
गरिमा के 1 वर्ष बाद का फोटो
गरिमा के 2 वर्ष बाद का फोटो
गरिमा के 2 वर्ष बाद का फोटो
बीमार होने के बाद भोपाल अस्पताल मे भर्ती गरिमा
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हाई कोर्ट के आदेश के बाद गरिमा के शव को जमीन से निकालते हुऐ
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निकालने के बाद गरिमा के शव को पैक कर जॉच के लिऐ भेजा गया
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दोषी डॉक्टर के खिलाफ मामला कायम कराने के लिऐ पुलिस अधिक्षक से मिले पत्रकार
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गरिमा के शव की जॉच होने के बाद पुनः उसी स्थान पर चबूतरा का निर्माण किया गया
गरिमा के शव की जॉच होने के बाद पुनः उसी स्थान पर चबूतरा का निर्माण किया गया
पूजा स्थल मे गरिमा
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