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उज्जैन। सोशल मीडिया पर इन दिनों उज्जैन की केंद्रीय भैरवगढ़ जेल का एक अनोखा नजारा चर्चा में है। शारदीय नवरात्रि के दौरान जेल में पुरुष बंदी, महिला वेशभूषा पहनकर गरबा करते नजर आ रहे है। जेल परिसर में गरबा और डांडिया का यह आयोजन लोगों का ध्यान खींच रहा है। इसका वीडियो भी इंटरनेट पर वायरल हो रहा है।
दरअसल, भैरवगढ़ जेल में भी नवरात्रि का पर्व धार्मिक उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। यहां 647 पुरुष और महिला बंदियों ने नौ दिन का व्रत रखा है। शाम करीब 6:30 बजे मां दुर्गा की आरती के बाद गरबा शुरू होता है, जो लगभग एक घंटे तक चलता है।
इस आयोजन की सबसे खास बात कुछ पुरुष बंदियों का महिला वेशभूषा में गरबा करना है। करीब 25 बंदी इस आयोजन में हिस्सा लेते हैं। बंदी खुद गरबा गीत गाते हैं और बैंड की धुन तैयार करते हैं। इसके बाद दूसरे बंदी उन्हीं धुनों पर डांडिया करते हैं। जेल की चारदीवारी के भीतर नवरात्रि का यह अलग अंदाज अब सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है।

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व्यापारी के साथ 25 लाख रुपये की ठगी, बैग बदलकर आरोपी फरार, पुलिस ने दर्ज किया मामला
इंदौर के विजयनगर थाना क्षेत्र में व्यापार के नाम पर 25 लाख रुपये की ठगी का मामला सामने आया है। आरोप है कि फाइबर मैट का सौदा करने के बहाने दो लोगों ने व्यापारी को होटल में बुलाया और चालाकी से रुपयों से भरा बैग बदलकर फरार हो गए। जब व्यापारी माल लेने ट्रांसपोर्ट नगर पहुंचा, तब उसे ठगी का पता चला। पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
एसीपी पराग सैनी ने बताया कि लसुडिया थाना क्षेत्र की सिंगापुर टाउनशिप में रहने वाले व्यापारी अंकुर शर्मा की सितंबर में रामचंद्र मलिक और अनिल कुमार नाम के दो लोगों से पहचान हुई थी। दोनों ने खुद को मुंबई का निवासी बताते हुए फाइबर मैट के व्यापार का सौदा किया था।
दोनों ने अंकुर से 25 लाख रुपये में फाइबर मैट का सौदा तय किया था, ये 11 अक्टूबर को विजयनगर क्षेत्र के एक होटल में आते हैं फिर अंकुर से संपर्क कर उसे होटल बुलाते हैं,अंकुर उन्हें रुपयों से भरा बैग देता है दोनों पैसे गिनते हैं और अंकुर को भरोसे में लेकर कहते हैं कि हम आपको बैग अभी लौटा रहे हैं।
अंकुर जब उनके भरोसे में आगया तो उन्होंने बड़ी चालाकी से बैग बदल दिया और दूसरा बैग थमा दिया, कथित व्यापारियों ने अंकुर से कहा कि वो ट्रांसपोर्ट नगर जाकर फाइबर मैट की डिलीवरी ले सकता है लेकिन जब अंकुर ट्रांसपोर्ट नगर पहुँचा और उसने बैग खोला तो दंग रह गया बैग में पैसे नही थे।
अंकुर शर्मा ने रामचंद्र मलिक और अनिल कुमार को फोन लगाया तो वो बंद मिला, व्यापारी होटल पहुंचा, लेकिन तब तक दोनों आरोपी चेकआउट कर फरार हो चुके थे। उसने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है, शिकायत के बाद विजयनगर पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है।

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लिफ्ट में फंसे पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा: कड़ी मशक्कत के बाद बाहर निकाला गया
ग्वालियर। मध्य प्रदेश के पूर्व गृह मंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता नरोत्तम मिश्रा ग्वालियर में एक अजीब वाकये का शिकार हो गए। शहर के जयेन्द्रगंज स्थित एक कॉम्प्लेक्स में बने कोचिंग सेंटर के उद्घाटन कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे नरोत्तम मिश्रा अचानक लिफ्ट में फंस गए।
जानकारी के मुताबिक, जब वे लिफ्ट से ऊपर जा रहे थे, तभी फ्लोर के बीच में लिफ्ट तकनीकी खराबी के कारण अचानक बंद हो गई। लिफ्ट के अचानक रुकने से कुछ देर के लिए मौके पर हड़कंप मच गया और अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
घटना की सूचना मिलते ही आनन-फानन में टेक्निकल एक्सपर्ट्स को बुलाया गया। काफी मशक्कत के बाद लिफ्ट का दरवाजा खोला गया और पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा को सुरक्षित बाहर निकाला गया। गनीमत यह रही कि इस दौरान उन्हें किसी प्रकार की चोट नहीं आई और वे पूरी तरह सुरक्षित रहे। लिफ्ट से बाहर आने के बाद, पूर्व गृह मंत्री ने बिना अपना उत्साह खोए निर्धारित कार्यक्रम में हिस्सा लिया और कोचिंग सेंटर के उद्घाटन समारोह में शामिल हुए।

इटारसी। इटारसी शहर के पत्ती बाजार स्थित ईरानी डेरा क्षेत्र में रविवार दोपहर उस वक्त सनसनी फैल गई, जब दो पक्षों के बीच पुरानी रंजिश को लेकर दिनदहाड़े खूनी संघर्ष छिड़ गया। सड़क पर चले तलवार, चाकू और ईंट-पत्थरों के इस तांडव से पूरे इलाके में दहशत का माहौल बन गया। घटना का सीसीटीवी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें एक युवक हाथ में तलवार और चाकू लहराते हुए साफ नजर आ रहा है।
वायरल वीडियो में साफ दिखाई दे रहा है कि विवाद के दौरान एक युवक हाथ में तलवार लेकर घूम रहा है, जबकि दूसरे युवक के पास चाकू है। चाकू से लैस आरोपी ने सामने वाले युवक की नाक पर जोरदार हमला कर उसे गंभीर रूप से घायल कर दिया।
घटना की गंभीरता को देखते हुए इटारसी थाना पुलिस तुरंत हरकत में आई। इटारसी टीआई सौरभ पांडे ने मामले की जानकारी देते हुए बताया कि रविवार दोपहर करीब 1 बजे ईरानी डेरे पर अली ईरानी और सैफ ईरानी के बीच पुरानी रंजिश को लेकर विवाद हुआ था।
पुलिस ने दोनों पक्षों की शिकायत पर काउंटर केस दर्ज कर लिया है। खास बात यह है कि दोनों ही आरोपियों के खिलाफ इटारसी थाने में पहले से कई गंभीर अपराध दर्ज हैं। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपियों अली ईरानी और सैफ ईरानी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।

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एमपी में 20 हजार सरकारी पदों पर दिव्यांगों को मिलेगी नौकरी, 31 दिसंबर तक भर्ती अभियान
भोपाल. मध्यप्रदेश में दिव्यांगों के लिए सरकारी नौकरी पाने का मौका है. राज्य के अलग-अलग सरकारी विभागों में दिव्यांगों के लिए रिजर्व करीब 20 हजार खाली पदों को भरने के लिए स्पेशल भर्ती अभियान शुरू हो गया है. मप्र सामान्य प्रशासन विभाग ने भर्ती के लिए निर्देश जारी किए हैं. ये अभियान 31 दिसंबर 2026 तक चलेगा.
मध्यप्रदेश सरकार के विभागीय सर्वे में सामने आया है कि प्रदेश में दिव्यांगों के लिए कुल 36 हजार पद रिजर्व हैं. इनमें से करीब 16 हजार पदों पर दिव्यांग काम कर रहे हैं, जबकि लगभग 20 हजार पद लंबे समय से खाली हैं. आयुक्त दिव्यांगजन डॉ. अजय खेमरिया ने बताया कि लंबे समय से विशेष भर्ती अभियान शुरू करने की मांग की जा रही थी. अब सरकार ने इसे मंजूरी दे दी है.
सामान्य प्रशासन विभाग के नए निर्देशों के मुताबिक भर्ती प्रक्रिया को आसान और पारदर्शी बनाया गया है. इसमें इंटरव्यू के लिए अलग से नंबर नहीं दिए जाएंगे. कैंडिडेट्स का सिलेक्शन संबंधित पद के भर्ती नियमों, शैक्षणिक योग्यता और दूसरी जरूरी शर्तों के आधार पर बनने वाली मेरिट लिस्ट से होगा.
भर्ती की जानकारी ज्यादा से ज्यादा कैंडिडेट्स तक पहुंचाने के लिए विभागों को कम से कम दो बड़े दैनिक अखबारों में विज्ञापन देना होगा. इसके साथ ही विज्ञापन संबंधित विभाग की वेबसाइट और सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग के पोर्टल पर भी अपलोड करना होगा. विज्ञापन में खाली पदों की संख्या, दिव्यांगता की कैटेगरी और जरूरी योग्यता की जानकारी साफ-साफ देनी होगी. विज्ञापन जारी होने के कम से कम 30 दिन बाद ही भर्ती की तारीख और जगह तय की जाएगी.
आवेदनों और डॉक्यूमेंट्स की शुरुआती जांच के बाद पात्र और अपात्र कैंडिडेट्स की अलग-अलग लिस्ट तैयार की जाएगी. यह लिस्ट वेबसाइट पर अपलोड होगी. अपात्र लिस्ट में नाम आने वाले कैंडिडेट्स को आपत्ति दर्ज करने के लिए 15 दिन का समय मिलेगा. इसके बाद मेरिट के आधार पर विज्ञापन में दी गई खाली सीटों की संख्या से ज्यादा से ज्यादा दोगुने कैंडिडेट्स को डॉक्यूमेंट्स वैरिफिकेशन के लिए बुलाया जाएगा. अगर किसी कैंडिडेट का सिलेक्शन दो विभागों में हो जाता है, तो उसे किसी एक विभाग को चुनना होगा. इसके बाद खाली हुई सीट वेटिंग लिस्ट से भरी जाएगी.
एमपी सरकार ने आगे के सालों के लिए भी भर्ती का कैलेंडर तय किया है. अब हर साल 1 जनवरी से 31 मार्च के बीच दिव्यांगों के लिए स्पेशल भर्ती अभियान चलाया जाएगा. सरकार ने 29 अप्रैल 2025 को जारी पुराना आदेश निरस्त कर नया ऑनलाइन रिकॉर्ड सिस्टम लागू किया है.
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एमपी के 71 अस्पतालों पर आयुष्मान योजना में फर्जीवाड़ा, 12 करोड़ का संदिग्ध क्लेम उजागर, जांच शुरू
भोपाल. प्रदेश में आयुष्मान भारत योजना के तहत करीब 12 करोड़ रुपये के संदिग्ध क्लेम की जांच की जा रही है. राज्य स्वास्थ्य एजेंसी ने टीएमएस (ट्रांजेक्शन मैनेजमेंट सिस्टम) साफ्टवेयर के डेस्कटॉप ऑडिट में मिले संकेतों के आधार पर 71 अस्पतालों को जांच के दायरे में लिया है. इनमें मृत व्यक्ति को जिंदा दिखाकर इलाज करने और बिना जरूरत मरीजों को आईसीयू में भर्ती दर्शाने जैसे मामले सामने आए हैं.
जांच के दायरे में भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, उज्जैन, रीवा, सागर, सतना, नीमच, शाजापुर और टीकमगढ़ सहित प्रदेश के विभिन्न जिलों के अस्पताल शामिल हैं. एजेंसी के अनुसार, अस्पतालों की ओर से क्लेम दर्ज किए जाने के बाद पोर्टल पर उसकी ट्रैकिंग होती है. क्लेम में असामान्य गतिविधि मिलने पर सॉफ्टवेयर अलर्ट देता है, जिसके आधार पर संदिग्ध मामलों की जांच की जाती है. आयुष्मान योजना में अनियमितताओं को लेकर राज्य स्वास्थ्य एजेंसी पहले भी कार्रवाई कर चुकी है.
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, भोपाल के 25 अस्पतालों पर 2.11 करोड़ रुपये की पेनल्टी लगाई गई थी. वहीं, 50 अस्पतालों पर 3.13 करोड़ रुपये की पेनल्टी लगाने के साथ 18 अस्पतालों को ब्लैकलिस्ट और 15 को निलंबित किया गया था. अब 71 अस्पतालों के क्लेम की जांच से योजना के तहत इलाज और भुगतान की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं.
टीएमएस में मरीज के पंजीयन, अस्पताल में भर्ती, इलाज, डिस्चार्ज और क्लेम से जुड़ी जानकारी दर्ज होती है. डेस्कटॉप ऑडिट में इन विवरणों और उपलब्ध दस्तावेजों की जांच के दौरान असामान्य मामलों को चिह्नित किया जाता है. मृत व्यक्ति के नाम पर इलाज दर्ज होना, बिना चिकित्सकीय जरूरत आईसीयू में भर्ती दिखाना या इलाज संबंधी विवरण में विसंगति मिलना जांच का आधार बन सकता है.

दुर्गा पूजा के बीच पश्चिम बंगाल में पोस्टर विवाद से राजनीतिक विवाद छिड़ गया है। पोस्टर में हिंदू दुकानों से ही बिरयानी (Biryani) खाने की अपील की गई है। साथ ही पूजा का सामान हिंदू व्यक्ति की दुकानों से खरीदने के लिए कहा गया है। हिंदू दुकानों से ही बिरयानी खाने की अपील का पोस्टर सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। अब विपक्षी पार्टियों इस मामले में आरोपी के खिलाफ पुलिस कार्रवाई की मांग की है।
दरअसल ये पोस्टर सिलीगुड़ी में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े संगठन ‘हिंदू जागरण मंच’ ने ये पोस्टर लगाए हैं। हिंदू जागरण मंच ने पोस्टर लगाए हैं जिसमें लिखा है- बिरयानी खाने से आपको कोई नहीं रोक रहा है। बिरयानी जरूर खाएं, लेकिन हिंदू दुकानों से।
मामले में तृणमूल के प्रवक्ता और बेलेघाटा के विधायक कुणाल घोष ने कहा कि सिलीगुड़ी की घटना मंजूर नहीं है क्योंकि स्वाद को धार्मिक सीमाओं में नहीं बांधा जा सकता। किसी हिंदू की दुकान की बिरयानी का स्वाद बहुत अच्छा हो सकता है या किसी मुस्लिम की दुकान की बिरयानी का स्वाद भी शानदार हो सकता है। खाने की पहचान स्वाद से होती है, धर्म से नहीं। ऐसे फरमान स्वीकार नहीं किए जा सकते हैं। उन्होंने आगे कहा हो सकता है कि उन्होंने ग्राहकों को लुभाने के लिए कोई आकर्षक टैगलाइन इस्तेमाल करने की कोशिश की हो, लेकिन धार्मिक मामलों में ऐसी चीजें नहीं करनी चाहिए।
वहीं सीनियर CPI(M) नेता और पूर्व मंत्री अशोक भट्टाचार्य ने पोस्टरों को लेकर पुलिस कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि एक धर्मनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक देश में ऐसे पोस्टर लगाना अपराध है। प्रशासन को न सिर्फ पोस्टर हटाने चाहिए, बल्कि इस सांप्रदायिक अभियान के पीछे जो लोग हैं, उन्हें भी गिरफ्तार करना चाहिए। संविधान सभी धर्मों के लोगों को समान अधिकार देता है और किसी व्यक्ति की आजीविका का आधार उसका धर्म नहीं होना चाहिए।
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विपक्ष के विरोध प्रदर्शन के बीच बैकफुट पर चुनाव आयोग, 30 दिन में अपने पुराने 5 फैसलों पर मारा U-TURN
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर उठ रहे सवालों के बीच चुनाव आयोग ने आवेदन, आपत्तियों और दस्तावेजों के सत्यापन से जुड़ी प्रक्रियाओं में कई बदलाव किए हैं। बिहार, पश्चिम बंगाल और दिल्ली में मतदाता सूची को लेकर विवाद के बीच इन कदमों को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कांग्रेस और अन्य संगठनों के विरोध प्रदर्शनों के बीच आयोग ने पात्र मतदाताओं को सूची में शामिल करने और दस्तावेजी प्रक्रिया आसान बनाने पर जोर दिया है।
पश्चिम बंगाल में SIR के दौरान मतदाता सूची से छूटे पात्र लोगों के नाम जोड़ने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। राज्य के सभी 24 जिला निर्वाचन अधिकारियों (DEO) को विशेष शिविरों के जरिए मतदाताओं की समस्याएं दूर करने और यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं कि कोई पात्र नागरिक मताधिकार से वंचित न रहे।
दिल्ली में मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान करीब 33 लाख मामलों में विसंगतियां सामने आने की बात कही गई। इनमें से लगभग 20 लाख मामलों के निपटारे की जानकारी दी गई है। शेष मामलों के समाधान के लिए भी अभियान जारी है। मतदाता अपने रिकॉर्ड की जांच और सुधार के लिए बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) से संपर्क कर सकते हैं।
नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म-6 के साथ अतिरिक्त घोषणापत्र जोड़े जाने पर विवाद हुआ। मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। सुनवाई के दौरान अदालत ने स्पष्ट किया कि उसने संशोधित फॉर्म-6 को मंजूरी नहीं दी थी। इसके बाद संबंधित अतिरिक्त घोषणापत्र को कुछ राज्यों में ऑनलाइन पोर्टल से हटाए जाने की जानकारी सामने आई।
मतदाता सूची से नाम हटाने या किसी नाम पर आपत्ति दर्ज कराने के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म-7 पर भी सीमा तय किए जाने की बात कही गई है। इसका उद्देश्य बड़ी संख्या में आपत्तियां दाखिल कर नाम हटवाने की आशंका को नियंत्रित करना है।
इसके अलावा, नोटिस पाने वाले मतदाताओं के दस्तावेज जुटाने में BLO मदद करेंगे और जरूरत के अनुसार सुनवाई की प्रक्रिया आसान बनाई जाएगी।
मतदाता सूची की शुद्धता और पात्र नागरिकों के मतदान अधिकारों के बीच संतुलन SIR विवाद का प्रमुख मुद्दा बना हुआ है। आयोग के इन कदमों का उद्देश्य प्रक्रिया को सुगम बनाना बताया जा रहा है, जबकि नियमों की पारदर्शिता और उनके क्रियान्वयन पर बहस जारी है।
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दुकानदारों और ग्राहकों को राहत, 2,000 से ज्यादा के UPI पेमेंट पर MDR चार्ज दिवाली तक टला
फेस्टिव सीजन में UPI से पेमेंट करने वाले करोड़ों लोगों और दुकानदारों के लिए बड़ी खबर है। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने चुनिंदा मर्चेंट UPI ट्रांजैक्शन पर लागू होने वाले मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) के नए नियमों को दिवाली के बाद तक टाल दिया है। यह शुल्क पहले 15 अक्टूबर 2026 से लागू होना था। अब इसे लागू करने की नई तारीख अलग से घोषित की जाएगी। इस फैसले से त्योहारों के दौरान डिजिटल पेमेंट व्यवस्था को नए नियमों के लिए तैयारी का अतिरिक्त समय मिलेगा। NPCI से जुड़ी रिपोर्टों के मुताबिक, फिलहाल प्रस्तावित शुल्क की शुरुआत दिवाली के बाद होगी।
UPI भारत में ऑनलाइन पेमेंट का बेहद लोकप्रिय माध्यम है। लोग सब्जी खरीदने से लेकर कपड़े, इलेक्ट्रॉनिक्स और दूसरे महंगे सामान की खरीदारी तक के लिए इसका इस्तेमाल करते हैं। दिवाली और धनतेरस के दौरान डिजिटल पेमेंट की संख्या बढ़ जाती है। इसी बीच चुनिंदा मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर MDR लागू करने का प्रस्ताव सामने आया था। इसके तहत 2,000 से अधिक के पात्र Person-to-Merchant (P2M) UPI भुगतान पर 0.4% शुल्क लगाने की योजना थी। यह व्यवस्था 15 अक्टूबर 2026 से शुरू होनी थी, लेकिन अब इसे दिवाली के बाद तक टाल दिया गया है। NPCI के अनुसार, नया नियम लागू करने की तारीख बाद में बताई जाएगी। इसलिए फिलहाल यह मानना सही नहीं होगा कि शुल्क हमेशा के लिए रद्द कर दिया गया है।
क्या होता है MDR चार्ज?
MDR यानी Merchant Discount Rate वह शुल्क है, जो किसी दुकान या कारोबारी से डिजिटल पेमेंट स्वीकार करने और उसकी प्रक्रिया से जुड़ी सेवाओं के लिए लिया जा सकता है। आसान भाषा में समझें तो जब ग्राहक किसी दुकान पर UPI से भुगतान करता है, तो उस पेमेंट को पूरा करने में बैंक और दूसरे भुगतान सेवा प्रदाता शामिल होते हैं। MDR इसी भुगतान व्यवस्था से जुड़ा शुल्क है।
प्रस्तावित फ्रेमवर्क के मुताबिक, पात्र मर्चेंट UPI ट्रांजैक्शन पर 0.4% MDR निर्धारित किया गया है। कुछ खास श्रेणियों के भुगतान के लिए अलग व्यवस्था हो सकती है। इसलिए हर तरह के पेमेंट पर एक जैसा शुल्क मानना सही नहीं होगा। उदाहरण के लिए, यदि किसी पात्र ट्रांजैक्शन पर 0.4% की दर लागू होती है, तो गणना इस तरह होगी-
5,000 के भुगतान पर 0.4% = 20 रुपए
10,000 के भुगतान पर 0.4% = 40 रुपए
50,000 के भुगतान पर 0.4% = 200 रुपए
दिवाली से पहले क्यों टाला गया UPI MDR का फैसला?
त्योहारी सीजन में बाजारों में खरीदारी बढ़ जाती है। ग्राहक ऑनलाइन भुगतान करना पसंद करते हैं, जबकि छोटे और बड़े व्यापारी भी तेजी से पेमेंट स्वीकार करने के लिए डिजिटल माध्यमों पर निर्भर रहते हैं। ऐसे समय में नए शुल्क संबंधी नियम लागू होने से कारोबारियों को अपनी भुगतान व्यवस्था, हिसाब-किताब और सॉफ्टवेयर में बदलाव करना पड़ सकता है। ग्राहकों के बीच भी यह सवाल उठ सकता है कि कौन-सा भुगतान मुफ्त रहेगा और किस पर शुल्क लागू होगा। इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए UPI और Services Steering Committee ने MDR लागू करने की तारीख दिवाली के बाद रखने का फैसला किया। इससे भुगतान से जुड़े संस्थानों और व्यापारियों को तैयारी के लिए अधिक समय मिलेगा।
सबसे अहम सवाल यह है कि क्या अब UPI से पैसे भेजने पर आम लोगों को अतिरिक्त शुल्क देना होगा? फिलहाल उपलब्ध जानकारी के अनुसार, Person-to-Person (P2P) यानी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को पैसे भेजने वाले UPI ट्रांजैक्शन इस MDR व्यवस्था से बाहर हैं। 2,000 तक के मर्चेंट भुगतान और शून्य-MDR व्यवस्था के अंतर्गत आने वाले छोटे कारोबारियों के भुगतान भी पहले की तरह शुल्क से बाहर रहेंगे। वित्त मंत्रालय ने सितंबर में बताया था कि नए फ्रेमवर्क के तहत लगभग 96% मर्चेंट UPI ट्रांजैक्शन प्रभावित नहीं होंगे। हालांकि, पात्र बड़े मर्चेंट ट्रांजैक्शन के लिए प्रस्तावित शुल्क व्यवस्था अलग है।

रतलाम। रतलाम जिले के अंतर्गत आने वाले बाजना इलाके में नवरात्रि के दौरान शिव मंदिर में स्थापित शिवलिंग उखाड़कर ले जाने और गरबा आयोजन रोकने की धमकी देने का मामला सामने आया है। बाकी और भडानकलां गांवों की सीमा पर स्थित मंदिर में नवदुर्गा की ज्योत स्थापना के बाद गरबा पंडाल तैयार किया जा रहा था, तभी कथित तौर पर हथियार लेकर पहुंचे कुछ लोगों ने शिवलिंग उखाड़ दिया। घटना का वीडियो सामने आने के बाद मामला चर्चा में आया। पुलिस ने संबंधित लोगों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किए जाने की पुष्टि की है।
जानकारी के अनुसार, बाजना उपखंड के बाकी और भडानकलां गांवों की सीमा पर स्थित शिव मंदिर में नवरात्रि के अवसर पर दोपहर को नवदुर्गा की ज्योत स्थापित की गई थी। इसके बाद गरबा आयोजन की तैयारियां चल रही थीं। इसी दौरान करीब दोपहर 3 बजे कुछ लोग वहां पहुंचे। आरोप है कि उन्होंने गेती की मदद से मंदिर में स्थापित शिवलिंग उखाड़ लिया। घटना के दौरान एक व्यक्ति शिवलिंग ले जाता दिखाई दे रहा है, जबकि उसके साथ चल रहे दूसरे व्यक्ति के हाथ में धारदार हथियार नजर आने की बात सामने आई है।
मौके पर मौजूद गरबा आयोजकों ने शिवलिंग उखाड़ने का विरोध किया, लेकिन कथित तौर पर उनकी बात नहीं मानी गई। आरोप है कि गरबा आयोजन नहीं करने की धमकी भी दी गई। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस ने हस्तक्षेप कर शिवलिंग दोबारा स्थापित करवाया। घटना के बाद गरबा आयोजन को लेकर भी सवाल खड़े हुए।
बाजना थाना प्रभारी रवीन्द्र दंतोड़िया ने पत्रिका को बताया कि मामला गांव के लोगों के बीच आपसी विवाद का था, जिसे सुलझा लिया गया है। शिवलिंग फिर से स्थापित करवा दिया गया है और अब गरबा आयोजन का विरोध नहीं किया जा रहा है। टीआई के मुताबिक, गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया गया है और संबंधित स्थान पर गरबा आयोजित किया जाएगा।

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दुर्गा पंडाल को लेकर विवाद: SI का धमकी भरा वीडियो वायरल, एसपी ने किया लाइन अटैच
टीकमगढ़। टीकमगढ़ जिले में दुर्गा पंडाल लगाने के एक मामले ने तूल पकड़ लिया है। शहर के कटरा बाजार चौराहे पर पंडाल लगाने को लेकर समिति के कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच तीखी बहस और गाली-गलौज का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। मामले की गर्माहट और हिंदू संगठनों के कड़े विरोध को देखते हुए पुलिस अधीक्षक ने त्वरित कार्रवाई करते हुए संबंधित उपनिरीक्षक को लाइन अटैच कर दिया है।
यह पूरा विवाद टीकमगढ़ शहर के व्यस्ततम कटरा बाजार चौराहे का है। यहां पिछले 3 वर्षों से स्थानीय समिति द्वारा दुर्गा पंडाल सजाकर माता की प्रतिमा स्थापित की जाती रही है। बीती देर रात जब समिति के लोग अपना पंडाल सजा रहे थे, तभी कोतवाली में पदस्थ उपनिरीक्षक राजवीर यादव मौके पर पहुंचे और उन्होंने पंडाल हटाने की बात कही। एसआई का कहना था कि यहां पंडाल लगने से आम लोगों को आने-जाने में परेशानी होगी।
इस पर समिति के लोगों ने उन्हें समझाया कि वे पिछले तीन सालों से लगातार इसी स्थान पर मूर्ति रखते आ रहे हैं और कभी किसी को कोई असुविधा नहीं हुई। यह बात सुनते ही उपनिरीक्षक आगबबूला हो गए और उन्होंने कथित तौर पर अपशब्दों का प्रयोग करते हुए कार्यकर्ताओं को औकात में रहने और घर से उठाकर ले जाने तक की धमकी दे डाली। हालांकि, मौके पर मौजूद लोगों की समझाइश के बाद पुलिस टीम वहां से वापस लौट गई थी, लेकिन इस घटना का वीडियो बाद में वायरल हो गया।
घटना का वीडियो सामने आने के बाद शहर में रोष फैल गया। आज शाम बजरंग दल और विभिन्न दुर्गा पंडाल समितियों के कार्यकर्ताओं ने एकजुट होकर एसपी कार्यालय के सामने जमकर प्रदर्शन किया और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपकर दोषी उपनिरीक्षक के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। मामले की गंभीरता को भांपते हुए टीकमगढ़ एसपी ने तत्काल प्रभाव से उपनिरीक्षक राजवीर यादव को लाइन अटैच कर दिया है।
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3 करोड़ के कफ सिरप जब्ती मामले में छिपकर बैठा था इनामी बदमाश, STF के हत्थे चढ़ा
भोपाल। मध्य प्रदेश में नशीली कफ सिरप के अवैध कारोबार के खिलाफ STF की कार्रवाई लगातार जारी है। इसी कड़ी में एसटीएफ ने बड़ी सफलता हासिल करते हुए 20 हजार रुपये के इनामी आरोपी अभिषेक निगम को उत्तराखंड के देहरादून से गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी लंबे समय से वहां छिपकर रह रहा था।
जांच में सामने आया है कि गिरफ्तार आरोपी अभिषेक निगम ने मध्य प्रदेश के विंध्य क्षेत्र में नशीली कफ सिरप की सप्लाई करने के लिए एक बड़ी चेन तैयार की थी। मई 2026 में एसटीएफ ने भोपाल के गांधीनगर क्षेत्र में कार्रवाई करते हुए करीब 3 करोड़ रुपये कीमत की 74 हजार नशीली कफ सिरप जब्त की थी। जब्त की गई सिरप में मुख्य रूप से ‘KUFF OFF’ और ‘ONREX’ ब्रांड शामिल थे। एसटीएफ की पूछताछ में अन्य राज्यों तक भी इस अवैध सप्लाई चेन के जुड़े होने की महत्वपूर्ण जानकारियां हाथ लगी हैं, जिसके आधार पर आगे की जाँच की जा रही है।

शहडोल। नवरात्रि से ठीक पहले शहडोल जिले के बुढ़ार में दुर्गा पंडाल को लेकर शुरू हुआ विवाद धार्मिक आक्रोश में बदल गया, वर्षों से संचालित दुर्गा पंडाल की नापजोख करने पहुंचे प्रशासनिक अमले के सामने विरोध शुरू हुआ और देखते ही देखते मामला हंगामे तक पहुंच गया। आरोप है कि पंडाल के कर्ताधर्ता शेखर चौधरी ने मां दुर्गा की फ्रेमयुक्त प्रतिमा निकालकर पटक दी। घटना के बाद हिंदू संगठनों में आक्रोश फैल गया और लोगों ने बुढ़ार थाने का घेराव कर कार्रवाई की मांग की। बुढार पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है।
जानकारी के अनुसार, जिले के बुढ़ार नगर के वार्ड क्रमांक 8 स्थित नेहरू पार्क दुर्गा स्टेज पर नवरात्रि से एक दिन पहले प्रशासनिक अमला पंडाल की नापजोख करने पहुंचा था। इस दौरान शेखर चौधरी और उनके समर्थकों ने विरोध जताया। आरोप है कि विवाद बढ़ने पर शेखर चौधरी ने पंडाल में स्थापित मां दुर्गा की फ्रेमयुक्त प्रतिमा पटक दी, साथ ही मंच से तहसीलदार, नगरपालिका सीएमओ सहित अन्य अधिकारियों के विरोध में नारेबाजी भी की गई। घटना के बाद शेखर चौधरी ने प्रेस वार्ता आयोजित कर अपनी गलती स्वीकारते हुए सामूहिक रूप से माफी मांगी। हालांकि, तब तक मामला तूल पकड़ चुका था, धार्मिक भावनाएं आहत होने का आरोप लगाते हुए हिंदू संगठन एवं नगर के संभ्रांत नागरिक के लोग बुढ़ार थाने पहुंच गए।
प्रदर्शनकारियों ने थाने के सामने बैठकर धार्मिक जयकारे लगाए और संबंधित लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। शिकायत के आधार पर बुढ़ार पुलिस ने शेखर चौधरी सहित अन्य लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं 298, 299 और 196(1)(क) के तहत मामला दर्ज किया है। घटना की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस प्रशासन सतर्क है। नवरात्रि पर्व के मद्देनजर शहडोल एसपी डॉ. संजय कुमार अग्रवाल ने बुढ़ार पहुंचकर नगर का भ्रमण किया और सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया फिलहाल मामले की जांच जारी है।
वहीं इस मामले में नायब तहसीलदार बुढ़ार मनोज सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि नगर परिषद के सीएमओ द्वारा हमें सूचना दी गई थी कि संबंधित स्थल पर पुराना निर्माण है तथा वहां दुर्गा जी की स्थापना की जा रही है। उक्त सूचना के आधार पर हम शनिवार देर शाम मौके पर पहुंचे थे। मौके पर निर्माण को तोड़ने संबंधी न तो कोई आदेश था, न ही हमारे साथ जेसीबी मशीन गई थी और न ही निर्माण तोड़ने के संबंध में कोई बात कही गई थी।
इस मामले में बुढार थाना प्रभारी खेम सिंह पेंद्रो ने जानकारी देते हुए बताया कि हिन्दू संगठन और नगर के लोग आए थे और शिकायत दर्ज कराई थी,शिकायत के आधार पर धार्मिक भावनाओं को आहत करने एवं इलेक्ट्रानिक माध्यम से वीडियो प्रसारित करने के माध्यम में मामला दर्ज किया गया है।
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दुर्गाोत्सव पर पुलिस की बड़ी कार्रवाई, कैंट क्षेत्र में 25 डीजे बॉक्स और साउंड सिस्टम जब्त
जबलपुर. एमपी के जबलपुर में दुर्गाोत्सव के दौरान ध्वनि प्रदूषण के खिलाफ पुलिस ने सख्त रुख अपना लिया है. इसी कड़ी में रांझी और कैंट थाना क्षेत्रों में बड़ी कार्रवाई करते हुए अवैध रूप से डीजे और साउंड सिस्टम बजा रहे वाहनों को जब्त किया गया है.
गोकलपुर रांझी में सीएसपी सतीश साहू ने रात्रि गश्त के दौरान तेज आवाज में बज रहे एक मिनीट्रक को पकड़ा. जांच करने पर वाहन संचालक शैलेंद्र कुमार से 3 छोटे और 12 बड़े डीजे सिस्टम (कुल 15 बाक्स) के वैध दस्तावेज मांगे गए, जिसे वह पेश नहीं कर सका. पुलिस ने वाहन और डीजे सामग्री जब्त कर कोलाहल अधिनियम के तहत कार्रवाई की.
देर रात करीब 2 बजे पुलिस ने वाहन क्रमांक रूक्क 49 त्र 0986 को पकड़ा, जिसमें 10 साउंड बॉक्स लगे हुए थे. इस वाहन पर भी नियमों के उल्लंघन के चलते जब्ती की कार्रवाई की गई.
बताया गया है कि प्रशासन की बैठक 2 अक्टूबर को पुलिस कंट्रोल रूम में प्रशासन, पुलिस और विद्युत विभाग के अधिकारियों के साथ लगभग 250 डीजे, साउंड और लाइट संचालकों की बैठक हुई थी. जिसमेें साफ किया गया था कि प्रतिबंधित डीजे और तेज आवाज में साउंड सिस्टम का उपयोग पूरी तरह वर्जित है. झांकियों, स्वागत मंचों और चल समारोहों में स्पीकर बॉक्स की संख्या, आकार और ध्वनि स्तर को लेकर तय की गई गाइडलाइंस का पालन करना अनिवार्य है. नियमों की अनदेखी करने वालों के खिलाफ आगे भी इसी तरह की सख्त कानूनी कार्रवाई लगातार जारी रहेगी.
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‘न खाना खाएंगे, न स्कूल जाएंगे’… बच्चों ने दी चेतावनी, काली की स्थापना के लिए धरने पर बैठे मासूम
दमोह। दमोह जिले से एक अनोखा मामला सामने आया है। जिले के हटा क्षेत्र में शारदीय नवरात्रि मे इस बार देवी स्थापना न होने से आक्रोशित जेन-अल्फा के बच्चों ने प्रदर्शन शुरू कर दिया। सोमवार सुबह से मासूम बच्चे प्रदर्शन कर रहे हैं। बच्चों की मांग है कि हर साल की तरह इस बार भी यहां मां काली की प्रतिमा स्थापित की जाए। बच्चों के प्रदर्शन का वीडियो भी सामने आया है। वीडियो में बच्चे 'हमारी मांगे पूरी करो' का नारा लगाते हुए दिखाई दे रहे हैं। मामला हटा के पास स्थित ग्राम रसोटा का बताया जा रहा है।
मिली जानकारी के अनुसार, सोमवार सुबह ही गांव के तिराहे पर एक दर्जन से अधिक मासूम बच्चे-बच्चियों ने धरना देना शुरू कर दिया था। बच्चे मोहल्लेवासियों के खिलाफ प्रदर्शन करने लगे। बबच्चों को धरना देते देख ग्रामीण लगातार उन्हें समझाने की कोशिश करते रहे लेकिन, बच्चों ने उनकी एक न सुनी। प्रदर्शनकारी बच्चों ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर उनकी मांग पूरी नहीं की गई तो वे न खाना खाएंगे और न ही स्कूल जाएंगे। बच्चे नारा लगाते रहे - "हमारी मांगें पूरी करो, खाना नहीं खाएंगे माता धरो।"
पत्रिका ने बच्चों से जब बातचीत की तो, उन्होंने बताया कि यहां 15-16 वर्षों से मां काली की प्रतिमा स्थापित की जा रही है। लेकिन इस साल ऐसा नहीं किया गया। उन्होंने बताया कि समिति के लोगों से हमने जल्द से जल्द पंडाल बनाने की सिफारिश की थी लेकिन अब तक उसका काम शुरू नहीं किया गया है। बच्चों का कहना है कि हम हर साल माता रानी का आशीर्वाद लेते थे लेकिन इस वर्ष हमें उनका आशीर्वाद नहीं मिलेगा। बच्चों ने कहा कि अगर माता नहीं रखी गई तो हम न खाना खाएंगे और न स्कूल जाएंगे। हम चाहते है कि हर साल की तरह इस बार भी यहां काली मां की प्रतिमा स्थापित की जाए। बच्चों ने कहा कि यह धरना तब तक चलेगा, जब तक हमारी मांगें सुनी नहीं जाएंगी। बच्चों ने यह भी बताया कि उन्होंने दुर्गा समिति के सामने माता की प्रतिमा स्थापित करने की मांग रखी थी, लेकिन समिति के लोगों ने उनका मजाक उड़ाया।
बच्चों के प्रदर्शन की सूचना मिलते ही हटा थाना प्रभारी सुधीर बैगी मौके पर पहुंचे। उन्होंने कहा कि बच्चों की आस्था का सम्मान किया जाएगा। पुलिस और ग्रामीणों की घंटों की समझाइश और आश्वासन के बाद बच्चों ने धरना समाप्त कर दिया। थाना प्रभारी बैगी ने बच्चो को भरोसा दिलाया कि हम हटा से देवी की प्रतिमा भेजकर उसकी स्थापना करवाएंगे, जिसके बाद बच्चों ने तैयारियां शुरू कर हैं।

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