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मुरैना। मध्य प्रदेश के मुरैना जिले से एक बार फिर इंसानियत को शर्मसार कर देने वाली घटना सामने आई है। जहां एक हिस्ट्रीशीटर बदमाश की दबंगई ने कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पैसे के लेनदेन को लेकर आरोपी ने एक दलित युवक को न सिर्फ बेरहमी से पीटा, बल्कि उसे मुर्गा बनाकर अमानवीय हरकत करने पर मजबूर किया। इतना ही नहीं आरोपी ने पूरी घटना का वीडियो भी बनवाया, जो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। मामला अंबाह थाना क्षेत्र का है।
मुरैना के अंबाह थाना क्षेत्र में दबंगई की ये तस्वीरें समाज को झकझोर देने वाली हैं। रेत का पुरा निवासी जो कि पुलिस रिकॉर्ड में आदतन अपराधी बताया जा रहा है, उसने किराए से रहने वाले एक दलित युवक को पैसे समय पर न देने के विवाद में अपने घर बुलाया
बताया जा रहा है कि जैसे ही युवक वहां पहुंचा, आरोपी ने अपने साथियों के साथ मिलकर उसके साथ मारपीट की। इसके बाद युवक को मुर्गा बनाकर अपमानित किया। इतने में आरोपी का मन नहीं भरा तो उसने सारी हदें पार करते हुए पीड़ित को अपना प्राइवेट पार्ट पकड़ने पर मजबूर कर दिया। इस दौरान आरोपी के सहयोगियों ने पूरी वारदात मोबाइल कैमरे में कैद कर ली। वीडियो के सोशल मीडिया पर वायरल होते ही इलाके में सनसनी फैल गई।
इस घटना ने न सिर्फ कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि यह भी दिखाया है कि कुछ बदमाशों में पुलिस का खौफ कितना कम रह गया है। फिलहाल पुलिस ने आरोपी के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर टीम रवाना की और उसे तत्काल गिरफ्तार कर लिया। अब पुलिस पूरे घटनाक्रम की बारीकी से जांच कर रही है।
एसडीओपी रवि भदौरिया ने इस मामले में बताया कि अंबाह थाना क्षेत्र अंतर्गत एक वीडियो संज्ञान में आया था, जिसमें एक युवक के साथ आरोपी माननीय गरिमा के विरुद्ध कार्य करते हुए दिखाई दे रहा है। मामले में एफआईआर दर्ज कर ली गई है। साथ ही आरोपी को राउंडअप कर आगे की कार्रवाई की जा रही है।

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कंचन बाई ने 20 बच्चों को बचाने के लिए दे दी जान, मधुमक्खियों के हमले में मौत
नीमच। मध्य प्रदेश के नीमच जिले के रानपुर गांव में मानवता और ममता की एक ऐसी मिसाल देखने को मिली, जिसे सुनकर हर किसी की आंख नम हो गई। मडावदा पंचायत के आंगनवाड़ी केंद्र पर जब अचानक मधुमक्खियों के खूंखार झुंड ने हमला किया, तो वहां मौजूद कंचन बाई मेघवाल ने अपनी जान की परवाह न करते हुए मौत से मुकाबला किया। जिस समय परिसर में खेल रहे मासूम बच्चों पर मधुमक्खियां झपटीं, कंचन बाई उन्हें बचाने के लिए दौड़ पड़ीं। उन्होंने सूझबूझ दिखाते हुए बच्चों को तिरपाल और दरी से ढका और एक-एक कर करीब 20 बच्चों को सुरक्षित कमरों के भीतर पहुंचाया। मासूमों को मौत के मुंह से निकालने के इस प्रयास में हजारों मधुमक्खियों ने कंचन बाई को अपना निशाना बना लिया और उन पर टूट पड़ीं।
आसपास के लोगों ने जब तक कंचन बाई को बचाने का प्रयास किया, तब तक वे बुरी तरह घायल हो चुकी थीं। सूचना पर पहुंची डायल 112 के आरक्षक कालूनाथ और पायलट राजेश राठौर ने उन्हें तत्काल सरवानिया स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। चिकित्सकों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। कंचन बाई न केवल आंगनवाड़ी में मध्यान भोजन बनाती थीं, बल्कि जय माता दी स्व-सहायता समूह की अध्यक्ष के रूप में गांव की सक्रिय महिला भी थीं। उनके निधन से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है, क्योंकि उनके पति शिवलाल पहले से ही पैरालिसिस जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं और अब एक बेटे व दो बेटियों के सिर से मां का साया भी उठ गया है।
इस घटना के बाद से पूरे रानपुर गांव में मातम के साथ-साथ भारी दहशत व्याप्त है। आलम यह है कि गांव में पानी भरने का एकमात्र स्रोत वह हेडपंप है जो आंगनवाड़ी के पास लगा है, लेकिन मधुमक्खियों के उसी पेड़ पर जमे होने के कारण ग्रामीणों ने वहां जाना छोड़ दिया है। ग्रामीण अब प्रशासन की ओर टकटकी लगाए बैठे हैं कि कब इन छत्तों को हटाकर क्षेत्र को सुरक्षित किया जाएगा।
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राजा रघुवंशी मर्डर केस में बड़ा अपडेट: कोर्ट ने दो लोगों को किया दोषमुक्त
इंदौर। मध्य प्रदेश के इंदौर के बहुचर्चित राजा रघुवंशी हत्याकांड मामले में बड़ा अपडेट सामने आया है। कोर्ट ने बिल्डिंग के मालिक लोकेंद्र और चौकीदार बलवीर को दोषमुक्त किया है। दोनों को राजा की हत्या के बाद सबूत मिटाने के आरोप में पुलिस ने गिरफ्तार किया था। विस्तृत जांच के बाद दोनों का हत्या से कोई सीधा संबंध नहीं निकला।
दरअसल, राजा रघुवंशी की हत्या करने के बाद सोनम रघुवंशी इंदौर आई थी और किराये के फ्लैट पर रुकी थी। जिस फ्लैट पर सोनम रुकी थी उस बिल्डिंग का मालिक लोकेंद्र सिंह तोमर है। वहीं बलवीर अहिरवार उस बिल्डिंग में चौकीदार था। मालिक लोकेंद्र ने शिलोम जेम्स नामक व्यक्ति को बिल्डिंग किराए पर दी थी। आपको बता दें कि शिलांग पुलिस ने राजा रघुवंशी हत्याकांड में दूसरी चार्जशीट कोर्ट में पेश कर दी है।
गौतरतलब है कि राजा रघुवंशी (29) और उसकी पत्नी सोनम (25) शादी के बाद हनीमून पर शिलॉन्ग के मेघालय गए थे। जहां राजा की लाश मिली थी। इस हत्याकांड की जांच में राजा की पत्नी सोनम ही मास्टरमाइंड निकली। शिलॉन्ग पुलिस ने सोनम के साथ राज कुशवाह, आकाश राजपूत, आनंद और विशाल समेत बिल्डिंग मालिक लोकेंद्र और चौकीदार बलवीर को गिरफ्तार किया था।

भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स, आरपीएफ और वन विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। रेलवे स्टेशन पर चेकिंग के दौरान कछुए पकड़े गए है। पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। जिसके पास से दो बैग में 311 कछुए बरामद हुए है। बताया जा रहा है कि आरोपी रेलवे कोच में अटेंडर का काम करता है। फिलहाल एसटीएफ पूरे मामले की जांच पड़ताल में जुटी हुई है।
जानकारी के मुताबिक, भोपाल के बैरागढ़ के संत हिरदाराम रेलवे स्टेशन पर आरपीएफ को बैग चेकिंग के दौरान कछुए मिले। अजय सिंह राजपूत पिता रामकुमार के पास दो बैग में 311 कछुए बरामद हुए। इसके बाद वन विभाग को जानकारी दी गई। सूचना मिलते ही स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स और वन विभाग का स्टाफ मौके पर पहुंचा। पकड़ा गया आरोपी अजय सिंह रेलवे कोच में अटेंडर का काम करता है। पूछताछ के दौरान आरोपी ने बताया कि ढाई हजार की लालच में वह इन कछुओं को देवास और इंदौर में पार्सल करने के लिए ले जा रहा था।
आरपीएफ की पूछताछ में रविंद्र कश्यप नामक व्यक्ति ढाई हजार रुपए की लालच देकर आरोपी से कछुए की तस्करी करा रहा था। फिलहाल आरोपी के खिलाफ वन अपराध प्रकरण क्रमांक 237/23 पंजीबद्ध किया गया है। आरपीएफ और वन विभाग की कार्रवाई के बाद एसटीएफ ने मामले की जांच शुरू कर दी है। आरोपी से पूछताछ की जा रही है, आज उसे माननीय न्यायालय में पेश किया जाएगा।
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पूर्व मंत्री गोपाल भार्गव का बड़ा बयान, कहा- ‘राजनीतिक दल का एक ही लक्ष्य- ब्राह्मणों को मारो या दबाओ
सागर। मध्य प्रदेश के वरिष्ठ बीजेपी नेता, पूर्व मंत्री और रेहली विधायक गोपाल भार्गव का ब्राह्मण समाज को लेकर दिया गया बयान सुर्खियों में छाया हुआ है। सागर के रविंद्र भवन में आयोजित ब्राह्मण समाज की पत्रिका विमोचन और प्रतिभा सम्मान समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए भार्गव ने ब्राह्मण समुदाय की मौजूदा स्थिति पर गहरा दर्द जाहिर किया।
उन्होंने कहा, “राजनीतिक दल और संगठनों का एक ही लक्ष्य है – ब्राह्मणों को मारो या दबा दो। ब्राह्मण सभी की नजरों में खटक रहे हैं, हमें मार दिया जाए या दबा दिया जाए।” भार्गव ने ब्राह्मणों से एकजुट होने की अपील की और कहा कि संगठित न होने के कारण ही समाज संवैधानिक व्यवस्था में पीछे धकेला जा रहा है।
पूर्व मंत्री ने आगे कहा, “पहले हमारे सीएम होते थे, अधिकारी हमारे होते थे, आधी कैबिनेट हमारी होती थी। लेकिन अब गिने-चुने लोग ही बचे हुए हैं।” उन्होंने ब्राह्मण समाज को धर्म की रक्षा के लिए एक होने का आह्वान किया और चिंता जताई कि सारे नियम-कानून ब्राह्मणों के खिलाफ बन रहे हैं।
यह कार्यक्रम ब्राह्मण समाज के मेधावी छात्रों को सम्मानित करने और पत्रिका विमोचन के लिए आयोजित किया गया था, जिसमें बड़ी संख्या में समाजजन मौजूद थे। गोपाल भार्गव के इस बयान से राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है, खासकर ऐसे समय में जब मध्य प्रदेश में ब्राह्मणों से जुड़े मुद्दे और बयान लगातार सुर्खियां बटोर रहे हैं।
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ये मेरा अंतिम फैसला… सरपंच ने खुद को पंचायत भवन में किया कैद, आत्मदाह की चेतावनी दी
नरसिंहपुर। मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर के एक सरपंच ने अपने आप को पंचायत भवन में कैद कर लिया। बताया जा रहा है कि सरपंच ने कलेक्टर समेत तमाम आला अधिकारियों से कई बार शिकायत की, लेकिन कहीं कोई सुनवाई नहीं हो रही है। सरपंच की मांग है कि समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो वह पंचायत भवन में ही आत्मदाह कर लेगा। आइए जानते है आखिर पूरा मामला क्या है…
यह पूरा मामला नरसिंहपुर के चीचली जनपद पंचायत अंतर्गत आने वाली सीरेगांव ग्राम पंचायत का है। जहां सरपंच महेंद्र कुशवाहा ने मंगलवार की रात खुद को पंचायत भवन में कैद कर लिया। बताया गया कि ग्राम पंचायत के विकास कार्य में भारी परेशानियां आ रही है। इसे लेकर सरपंच महेंद्र ने जिला कलेक्टर समेत तमाम आला अफसरों से शिकायत कर चुके हैं, लेकिन सुनवाई नहीं हो रही है। इससे नाराज होकर उन्होंने खुद को पंचायत भवन में बंद कर लिया है।
सरपंच महेंद्र कुशवाहा की मांग है कि अगर उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो पंचायत भवन में ही आत्मदाह कर लेगा। आत्मदाह की चेतावनी देने का वीडियो भी बनाया है। जिसमें सरपंच महेंद्र कुशवाहा कह रहा है कि ‘मेरी पंचायत में दो साल से काम नहीं कर पा रहा हूं। कई तरह की समस्याएं आ रही है। प्रशासनिक लोगों से कई बार लिखित आवेदन दिए है, जिस पर आज तक कार्रवाई नहीं हुई है।’
महेंद्र कुशवाहा ने बताया कि पिछले जनसुनवाई (बीते मंगलवार को) में अधिकारियों को लिखित आवेदन दिया था। लेकिन मुझे सिर्फ आश्वासन और प्रताड़ना मिली है। सरपंच ने आगे कहा कि ‘मेरी बातें अगर नहीं सुनी गई तो आत्महत्या कर लूंगा, इसका जिम्मेदार शासन-प्रशासन होगा। बीते दो साल से निवेदन कर रहा हूं कि निर्माण कार्यों में सहयोग करें, लेकिन कोई भी मदद नहीं कर रहा है, इसलिए यह मेरा अंतिम फैसला है।’ फिलहाल सरपंच का यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। साथ ही खुद को कैद करने और सरपंच के आत्मदाह की चेतावनी देने से हड़कंप मचा हुआ है।

जम्मू-कश्मीर के उधमपुर जिले में सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच हुई मुठभेड़ में दो पाकिस्तानी आतंकी मारे गए। इनमें से एक आतंकी रुबानी उर्फ अबू माविया था, जो आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद का बड़ा कमांडर माना जा रहा था और लंबे समय से इलाके में सक्रिय था।
मंगलवार शाम बसंतगढ़ इलाके के किया गांव के जंगलों में सुरक्षाबलों को आतंकियों की मौजूदगी की सूचना मिली। इसके बाद सेना, सीआरपीएफ, व्हाइट नाइट कोर और जम्मू-कश्मीर पुलिस ने मिलकर एक संयुक्त अभियान शुरू किया और पूरे इलाके को घेर लिया।
सुरक्षाबलों ने आतंकियों से संपर्क साधते ही जवाबी कार्रवाई शुरू की। करीब 20 मिनट तक चली फायरिंग में दोनों आतंकियों को मार गिराया गया। मुठभेड़ के दौरान आतंकियों ने भागने की कोशिश की, लेकिन सुरक्षाबलों की घेराबंदी के चलते वे बच नहीं सके।
सुरक्षा सूत्रों के अनुसार रामनगर, बसंतगढ़ और बिलावर के जंगलों में अभी भी आतंकियों के छिपे होने की आशंका है। इसी वजह से पूरे इलाके में कड़ी निगरानी रखी जा रही है और सर्च ऑपरेशन जारी है।
इस ऑपरेशन में सुरक्षाबलों की सटीक रणनीति, आपसी तालमेल और पेशेवर कार्रवाई की सराहना की जा रही है। मुठभेड़ खत्म होने के बाद भी इलाके में सुरक्षा बलों की मौजूदगी बनाए रखी गई है, ताकि किसी भी खतरे को समय रहते रोका जा सके।
इससे पहले 31 जनवरी को किश्तवाड़ जिले के जंगलों में भी सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच मुठभेड़ हुई थी। उस दौरान तीन जवान घायल हो गए थे, जबकि एक आतंकी भी जख्मी हुआ था। बसंतगढ़ के जंगल किश्तवाड़ जिले तक फैले हुए हैं।
पिछले साल 8 अप्रैल 2025 को जोफड़ इलाके में भी आतंकी मुठभेड़ हुई थी। उस समय तीन आतंकियों के घिरे होने की सूचना थी। इसके बाद 26 नवंबर को तीन संदिग्ध चिगला बलोता गांव में एक स्थानीय व्यक्ति से खाना लेकर पास के जंगल की ओर भाग गए थे। पहाड़ी और घने जंगलों का फायदा उठाकर आतंकी रात के अंधेरे में फरार हो गए थे।
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SIR पर सुप्रीम सुनवाई : ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग को कहा Whatsapp Commission, जज से 5 मिनट मांगे, चुनाव आयोग को नोटिस
नई दिल्ली। वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की याचिका पर बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। सुनवाई के बाद कोर्ट ने चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया। सुनवाई के दौरान ममता बनर्जी ने शीर्ष अदालत से लोगों के हितों की रक्षा करने की अपील की। अगली सुनवाई 9 फरवरी को होगी।
ममता बनर्जी की ओर से सीनियर एडवोकेट श्याम दीवान ने दलीलें पेश कीं। उन्होंने बताया कि कैसे तार्किक विसंगति के नाम पर पश्चिम बंगाल में लोगों के नाम मतदाता सूची से काट दिए गए। साथ ही उन्होंने कोर्ट को यह भी बताया कि कैसे माता-पिता और बच्चों के सरनेम की वर्तनी में अंतर होने की वजह से नोटिस जा रहा है।
सुनवाई के दौरान ममता बनर्जी ने शीर्ष अदालत से अपनी बात रखने की अनुमति मांगी और कहा कि मैं बंगाल से हूं और समस्याओं को बेहतर बता सकती हूं। उन्होंने कहा कि हमें न्याय नहीं मिल रहा है, मैंने 6 बार चुनाव आयोग को पत्र लिखा है। ममता बनर्जी ने कहा, मैं साधारण परिवार से हूं। मैं बहुत महत्वपूर्ण नहीं हूं, लेकिन मैं सभी के लिए लड़ रही हूं।
चीफ जस्टिस (CJI) सूर्यकांत ने कहा कि पश्चिम बंगाल सरकार की तरफ से बेहतरीन वकील आपका पक्ष रख रहे हैं। फिर ममता बनर्जी ने 5 मिनट अपनी बात रखने की इजाजत मांगी। जिस पर सीजेआई ने कहा कि हम आपको 15 मिनट देंगे।
बCJI ने कहा कि हम समाधान निकालेंगे। शीर्ष अदालत ने कहा, जो असली मतदाता हैं, उनका चुनावी अधिकार कोई नहीं छीन सकता है। हम जिम्मेदारी से नहीं भागेंगे। इसका समाधान निकालेंगे।
चुनाव आयोग की ओर से एडवोकेट राकेश द्विवेदी ने कहा कि माइक्रो ऑब्जर्वर सिर्फ ERO की मदद कर रहे हैं। उन्हें कानून के मुताबिक ही पश्चिम बंगाल में लगाया गया है। उन्होंने कहा, ''हमने राज्य सरकार को कई बार लिखा कि क्लास टू अधिकारियों को ERO के तौर पर नियुक्त किया जाए। सिर्फ 80 अधिकारी दिए गए... गलती उनकी है, इसीलिए हमने माइक्रो ऑब्ज़र्वर नियुक्त किए हैं।
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‘गद्दार दोस्त’ से लेकर ‘देश का दुश्मन’ तक.. संसद के गेट पर रणवीर सिंह बिट्टू और राहुल गांधी में जबरदस्त भिड़ंत
संसद में आज एक अलग नजारा देखने को मिला जब संसद के मकर द्वार पर कांग्रेस सांसद हाथों में तख्तियां लेकर प्रदर्शन कर रहे थे तो राहुल गांधी और केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू का आमना-सामना हुआ और जुबानी जंग देखने को मिली. इस दौरान जहां राहुल गांधी ने कांग्रेस सांसदों की तारीफ की तो वहीं केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू को गद्दार दोस्त बताया. वीडियो में दिख रहा है कि राहुल गांधी बिट्टू की तरफ हैंड शेक करने के लिए हाथ बढ़ा रहे हैं लेकिन बिट्टू हाथ आगे नहीं बढ़ाते हैं. ‘गद्दार दोस्त’ वाले कमेंट पर बिट्टू ने भी तुरंत पलटवार किया और कहा कि उनका “देश के दुश्मनों” से कोई लेना-देना नहीं है.
तीन बार कांग्रेस सांसद रह चुके रवनीत सिंह बिट्टू पहली बार 2009 में आनंदपुर साहिब से लोकसभा के लिए चुने गए थे. इसके बाद 2014 और 2019 में लुधियाना से जीते थे. खालिस्तान समर्थक कट्टरपंथी आवाजों के मुखर आलोचक माने जाने वाले बिट्टू 2024 में हुए लोकसभा चुनाव से पहले बीजेपी में शामिल हो गए.
इस चुनाव में वह लुधियाना से पंजाब कांग्रेस प्रमुख अमरिंदर सिंह राजा वारिंग से लगभग 20 हजार वोटों से हार गए. चुनाव हारने के बावजूद केंद्र सरकार में उन्हें मंत्री बनाया गया रेल तथा खाद्य प्रसंस्करण उद्योग राज्य मंत्री की जिम्मेदारी दी.
बिट्टू महज 11 साल के थे जब उनके पिता का निधन हो गया. इसके बाद 20 साल की उम्र में उन्होंने अपने दादा और पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह को भी खो दिया, जिनकी 31 अगस्त 1995 को चंडीगढ़ में खालिस्तान समर्थक आतंकवादियों ने हत्या कर दी थी. वर्ष 2007 में राहुल गांधी से मुलाकात के बाद बिट्टू ने राजनीति में कदम रखा.
यह पहली बार नहीं जब बिट्टू और राहुल गांधी के बीच इस तरह की बयानबाजी चली हो. सितंबर 2024 में बिट्टू ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी को लेकर तीखा और विवादास्पद बयान दिया था. बिट्टू ने राहुल गांधी पर सिख समुदाय को बांटने की कोशिश करने का आरोप लगाया और कहा कि सिख किसी भी राजनीतिक दल से बंधे नहीं हैं.
उन्होंने अमेरिका में सिखों को लेकर दिए गए राहुल गांधी के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा था, ‘राहुल गांधी ने सिखों को बांटने की कोशिश की है, सिख किसी पार्टी से जुड़ा नहीं है और यह चिंगारी लगाने की कोशिश है, राहुल गांधी देश के नंबर वन टेरेरिस्ट हैं.’

भोपाल। मध्य प्रदेश में निजी स्कूलों पर फीस और किताबों की मनमानी रोकने के लिए शिक्षा विभाग ने सख्त कदम उठाया है। सभी प्राइवेट स्कूलों को 15 फरवरी तक अपनी फीस संरचना, किताबों की सूची और अन्य संबंधित जानकारी ऑफिशियल पोर्टल पर अपलोड करनी अनिवार्य है।
मुख्य बिंदु कुछ इस प्रकार है
शुल्क अधिनियम 2020 के तहत यह नियम लागू।
तीन साल तक यूनिफॉर्म में कोई बदलाव नहीं किया जा सकता।
जानकारी सार्वजनिक न करने पर सख्त कार्रवाई।
भोपाल जिले के करीब 150 स्कूलों ने अभी तक जानकारी नहीं दी है।
शिक्षा विभाग ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि डेडलाइन मिस करने वाले स्कूलों के खिलाफ तुरंत एक्शन लिया जाएगा। यह कदम अभिभावकों को पारदर्शिता देने और अनावश्यक खर्च से बचाने के लिए उठाया गया है। ऐसे में अगर आपका बच्चा भी किसी प्राइवेट स्कूल में पढ़ता है, तो स्कूल से इस बारे में जरूर पूछताछ करें और विभाग की वेबसाइट पर अपडेट चेक करें।
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बिजली विभाग की सख्ती: बकायादारों के घर के बाहर तैनात किए बंदूकधारी गार्ड, 24 घंटे पहरा
भोपाल। राजधानी भोपाल से बड़ी और हैरान करने वाली खबर सामने आई है, जहां बिजली बिल के बकायेदारों पर ऊर्जा विभाग ने अब अनोखा और सख्त रुख अपनाया है। बड़े बकायादारों के बिजली कनेक्शन काटने के बाद अब उनके घरों के बाहर बंदूकधारी गार्ड तैनात कर दिए गए हैं। ये गार्ड 24 घंटे पहरा दे रहे हैं ताकि कोई अवैध तरीके से कनेक्शन दोबारा न जोड़ सके।
दरअसल लंबे समय से बिजली बिल नहीं भरने वाले कई बड़े उपभोक्ताओं के खिलाफ मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने अभियान तेज कर दिया है। पहले चरण में बकाया बिलों पर नोटिस, फिर कनेक्शन काटे गए। लेकिन समस्या ये थी कि कई लोग कटे हुए कनेक्शन को चुपके से दोबारा जोड़ लेते थे, यानी ‘कटिया’ लगाकर बिजली चोरी करते थे। इसी को रोकने के लिए विभाग ने दूसरा कदम उठाया – घर के ठीक बाहर हथियारबंद सुरक्षा गार्ड तैनात करना। ये गार्ड बिजली कंपनी के निर्देश पर काम कर रहे हैं।
सूत्रों के मुताबिक, गार्डों को साफ निर्देश दिए गए हैं कि घर में कोई लाइट या बिजली का उपकरण नहीं जलना चाहिए। अगर कोई कोशिश करता है तो तुरंत कार्रवाई। एक शिकायतकर्ता ने बताया कि मेरा 1 लाख 76 हजार रुपये का बकाया बिल था, चार साल से नहीं भरा। अब कनेक्शन कट गया और घर के बाहर बंदूकधारी गार्ड खड़ा है। ये तरीका कितना सही है, ये तो समय बताएगा। शहर के अलग-अलग इलाकों में ये गार्ड तैनात किए गए हैं। विभाग का कहना है कि ये कदम सिर्फ बड़े बकायादारों पर है, जहां बकाया राशि लाखों में है। इसका मकसद बिजली चोरी रोकना और वसूली सुनिश्चित करना है।
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लोन लेकर दूसरी जगह पैसा लगाया, यशास एफआरपी के कर्ताधर्ताओं पर साढ़े तीन करोड़ की हेराफेरी का केस दर्ज
इंदौर। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ(ईओडब्ल्यू) ने यशास एफआरपी मैन्युफैक्चरिंग के कर्ताधर्ताओं के खिलाफ 3 करोड़ 57 लाख की धोखाधड़ी का केस दर्ज किया है। आरोपितों पर बैंक से ऋण लेकर धनराशि का अन्य कार्यों में इस्तेमाल करने का आरोप है। प्रकोष्ठ ने मामले में दंपति को नामजद आरोपित बनाया है।
एसपी(ईओडब्ल्यू) रामेश्वर यादव के अनुसार मेसर्स यशास एफआरपी मैन्युफैक्चरिंग एलएलपी और उसके संचालक संजय रामप्रकाश गुप्ता और शालिनी संजय गुप्ता के विरुद्ध प्रकरण दर्ज किया है। कंपनी पर बैंक आफ बड़ौदा और ओद्योगिक विकास निगम के साथ हेराफेरी करने का आरोप है।
एसपी के अनुसार कंपनी का मुख्य कार्यालय आरएनटी मार्ग स्थित मिलिंदा मैनोर स्थित दूसरी मंजिल पर इस कंपनी का मुख्य काम फाइबर ग्लास का निर्माण और आपूर्ति करना था। कंपनी रैलिंग,सीढ़ियां,ट्रे,पंखे सहित अन्य सामान का उत्पादन करना रहा है। कंपनी साल 2013 में बंद हो चुकी है।
इसके पूर्व इस कंपनी ने सियागंज स्थित बैंक आफ बड़ौदा की शाखा में खाता खुलवाया और टर्म लोन,वर्किंग कैपिटल,कैश क्रेडिट,एक्सपोर्ट पैकेजिंग क्रेडिट के रुप में साल 2013 से 2015 तक 11 करोड़ का ऋण लिया गया था।
16 दिसंबर 2013 से 31 मार्च 2016 तक की अवधि में कंपनी द्वारा कैश क्रेडिट के खाते से बड़ी मात्रा में कैश निकाला गया।जबकि ऋण की शर्तों के अनुसार उक्त राशि का उपयोग व्यावसायिक कार्यों में ही होना था। निर्यात के लिए स्वीकृत 2.95 करोड़ रुपये का भी दुरुपयोग हुआ। इस राशि के कोई निर्यात नहीं किया गया।
यहां तक कि टर्म लोन से खरीदी गई सीएनसी स्ट्रक्चरल एफआरपी एक्सट्रूडर मशीन को बेच कर राशि बैंक में जमा नहीं की। मामले की आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ द्वारा जांच कर सोमवार को आरोपित संजय गुप्ता और शालिनी गुप्ता के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया।

भोपाल देश के कई राज्यों की तुलना में मध्यप्रदेश में पेट्रोल-डीजल महंगा बिकता है। इसकी वजह है- राज्य सरकार द्वारा ज्यादा टैक्स वसूलना। प्रदेश में पेट्रोल पर 29 प्रतिशत वैट और डीजल पर 19 प्रतिशत वैट लिया जाता है। इनके अलावा उपकर भी लिए जाते हैं जिससे अन्य राज्यों की तुलना में पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ जाते हैं। जल्द ही यह स्थिति बदल जाएगी। प्रदेश में पेट्रोल-डीजल के रेट कम हो जाएंगे। सीएम मोहन यादव ने इसकी घोषणा की है। उन्होंने प्रदेश में पेट्रोल-डीटल पर वैट कम करने का भरोसा दिलाया। सीएम मोहन यादव ने यह भी कहा कि करारोपण धीरे धीरे कम किया जाएगा। इतना ही नहीं, उन्होंने इशारा किया कि प्रदेश के आनेवाले बजट में ही पेट्रोल-डीटल पर वैट कम किया जा सकता है।
मंगलवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भोपाल में पत्रकार वार्ता ली। केंद्रीय बजट को लेकर उन्होंने कहा कि इसे इस तरह तैयार किया गया है कि अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति की भी चिंता करते हुए वैश्विक स्तर पर भारत की छवि चमकाने का रोडमैप भी बनाया है।
सीएम मोहन यादव ने रेल बजट में प्रदेश को 15 हजार करोड़ रुपए का प्रावधान पर कहा कि एमपी के लिए क्रांति हुई है। प्रदेश में रेल पटरियों में 8 गुना बढोत्तरी हुई जबकि इलेक्ट्रीफिकशन 5 गुना बढ़ा है। सीएम मोहन यादव ने प्रदेश में टेक्सटाइल उद्योग को फिर जीवित करने की बात कही। उन्होंने कहा कि इससे प्रदेश में रोजगार बढ़ेंगे।
सीएम डॉ. मोहन यादव ने पत्रकार वार्ता में प्रदेश में पेट्रोल-डीजल के दाम कम करने के संकेत दिए। प्रदेश में डीजल पेट्रोल पर सबसे ज्यादा वैट से जुड़े प्रश्न पर उन्होंने स्पष्ट कहा कि हम इसका निराकरण कर रहे हैं। सीएम मोहन यादव ने इशारा किया कि 18 फरवरी को पेश होनेवाले राज्य के बजट में ही इस मामले में काफी हद तक निराकरण कर दिया जाएगा। हालांकि उन्होंने यह भी साफ कर दिया कि वित्तीय तरलता के लिए करों में धीरे-धीरे कटौती की जाएगी।
मध्यप्रदेश में पेट्रोल डीजल पर वैट कम करने संबंधी प्रश्न के उत्तर में सीएम मोहन यादव ने कहा " डीजल पेट्रोल पर वैट कम करने की चुनौती है। हम इसका निराकरण करेंगे। जो जितनी जीडीपी देगा… वित्तीय तरलता बनी रहेगी… लेकिन हम कोशिश करेंगे कि धीरे-धीरे कट लगता जाए।
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श्मशान की जमीन को लेकर दो पक्षों में खूनी संघर्ष... घरों की छतों से बरसे पत्थर, पुलिस जवान समेत 8 घायल
खरगोन। मध्य प्रदेश के खरगोन जिले के मंडलेश्वर थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम सुलगांव में एक वृद्धा के अंतिम संस्कार स्थल को लेकर दो समुदायों के बीच उपजा विवाद हिंसक संघर्ष में बदल गया। स्थिति इस कदर बिगड़ी कि शव यात्रा पर पथराव शुरू हो गया, जिसमें एक पुलिस जवान और ग्राम चौकीदार समेत कुल 8 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। गांव में तनाव को देखते हुए तीन थानों का पुलिस बल तैनात किया गया है।
घटना उस समय शुरू हुई जब गांव की 90 वर्षीय वृद्धा गंगाबाई पाटीदार के निधन के बाद परिजन उनका अंतिम संस्कार करने पहुंचे थे। मुख्य श्मशान का रास्ता खराब होने के कारण ग्रामीण नर्मदा तट से करीब 200 मीटर दूर वासुदेव पाटीदार की निजी जमीन (खले) पर अंतिम संस्कार की तैयारी कर रहे थे। पाटीदार समाज का दावा है कि यह जमीन वासुदेव पाटीदार ने श्मशान के लिए दान की है। हालांकि, जैसे ही मुखाग्नि की तैयारी शुरू हुई, पास ही रहने वाले विशेष समुदाय और कुछ अन्य ग्रामीणों ने रिहायशी इलाके के पास शव जलाने का कड़ा विरोध शुरू कर दिया।
बातचीत से शुरू हुआ विवाद गाली-गलौज और फिर उग्र पथराव में तब्दील हो गया। सरपंच फुलकी बाई वर्मा और विरोध कर रहे ग्रामीणों का तर्क था कि घरों के पास अंतिम संस्कार होने से धुएं के कारण रहवासियों को परेशानी होगी और बच्चों में भय पैदा होगा। इसी बीच उपद्रवियों ने घरों की छतों और गलियों से पत्थर बरसाना शुरू कर दिए। उपद्रवियों ने वहां मौजूद पुलिस बल को भी नहीं बख्शा। इस पथराव में पुलिस का एक जवान और ग्राम चौकीदार श्रवण पिता रणछोड़ लहूलुहान हो गए। हिंसक झड़प में दोनों पक्षों के कुल 8 लोग घायल हुए हैं, जिन्हें मंडलेश्वर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया।
घटना की गंभीरता को देखते हुए महेश्वर एसडीओपी श्वेता शुक्ला भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचीं। मंडलेश्वर, महेश्वर और कसरावद थानों के पुलिस बल ने मोर्चा संभाला और गांव को छावनी में तब्दील कर दिया। पुलिस के कड़े पहरे के बीच ही विवादित स्थल पर वृद्धा का अंतिम संस्कार संपन्न कराया गया। अधिकारियों की मौजूदगी में स्थिति को नियंत्रित किया गया, हालांकि गांव में अब भी तनावपूर्ण शांति बनी हुई है।
पुलिस ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए दोनों पक्षों की शिकायतों पर क्रॉस एफआईआर दर्ज की है।
पहले पक्ष के आलोक पाटीदार की रिपोर्ट पर पुलिस ने पीरू पठान, अमजद पठान, अकलीम खान सहित 13 लोगों को नामजद आरोपी बनाया है।
दूसरे पक्ष के राजू वर्मा की शिकायत पर वासुदेव पाटीदार, दीपक पाटीदार सहित 6 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।
घायलों में एक पक्ष से आलोक और वासुदेव पाटीदार शामिल हैं, जबकि दूसरे पक्ष से आमिर खान, शाहीन और कई महिलाएं मामूली रूप से घायल हुई हैं। एसडीओपी श्वेता शुक्ला ने बताया कि वीडियो फुटेज के आधार पर अन्य अज्ञात पत्थरबाजों की पहचान की जा रही है और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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MP बजट सत्र में सरकारी छुट्टियों पर ब्रेक: बिना अनुमति मुख्यालय नहीं छोड़ सकेंगे अधिकारी-कर्मचारी, निर्देश जारी
भोपाल। मध्य प्रदेश में बजट सत्र को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। विधानसभा के बजट सत्र के दौरान सरकारी छुट्टियों पर ब्रेक लग गया है। जल संसाधन विभाग ने अपने अधिकारियों और कर्मचारियों को सख्त निर्देश जारी किए हैं। विधानसभा का बजट सत्र 16 फरवरी 2026 से शुरू हो रहा है, जो मार्च महीने तक जारी रहेगा। इस सत्र के दौरान सरकार वित्तीय वर्ष का बजट पेश करेगी।
ऐसे में जल संसाधन विभाग ने अपने सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि बजट सत्र की अवधि में कोई भी अधिकारी या कर्मचारी बिना अनुमति के मुख्यालय नहीं छोड़ सकता। सरकारी छुट्टियां या लीव पर जाने की अनुमति सिर्फ विभाग के वरिष्ठ अधिकारी ही दे सकेंगे, वो भी बहुत विशेष परिस्थितियों में। विभाग ने कहा है कि मुख्यालय में मौजूदगी अनिवार्य है, ताकि कोई भी कार्य प्रभावित न हो और बजट से जुड़े काम सुचारु रूप से चलते रहें।

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