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जबलपुर। जिले के प्रसिद्ध बगदरी वॉटरफॉल में दो मासूम बच्चों के साथ बर्बरता और अमानवीय व्यवहार का बेहद दर्दनाक मामला सामने आया है। नहाने पहुंचे दो नाबालिग बच्चों को दबंग युवकों ने घेर लिया और उन पर चोरी का झूठा आरोप लगाते हुए न केवल बेरहमी से मारपीट की, बल्कि उन्हें अर्धनग्न कर उनका वीडियो भी बना लिया।
सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे इस वीडियो में दोनों मासूम गिड़गिड़ाते हुए रहम की भीख मांगते नजर आ रहे हैं। वे बार-बार दुहाई दे रहे हैं कि उन्होंने कोई चोरी नहीं की है, लेकिन आरोपी युवक लगातार उनके साथ मारपीट और गंदी-गंदी गालियां देते रहे।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, पीड़ित दोनों बच्चे पाटन क्षेत्र के निवासी हैं और वे बगदरी वॉटरफॉल में नहाने गए थे। इसी दौरान वहां पहुंचे कुछ सिरफिरे युवकों ने उन्हें रोक लिया। आरोप है कि दबंग युवकों ने बच्चों से शराब पीने के लिए पैसे मांगे। जब बच्चों ने मना किया, तो उन पर चोरी का बेबुनियाद आरोप लगाकर उनका मोबाइल फोन छीन लिया गया और मारपीट शुरू कर दी गई।
घटना का वीडियो सामने आने के बाद पुलिस प्रशासन में हड़कंप मच गया है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, मारपीट और वीडियो बनाने वाले आरोपी युवक पड़ोसी जिले दमोह के तेंदूखेड़ा क्षेत्र के रहने वाले बताए जा रहे हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने वायरल वीडियो को संज्ञान में ले लिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वीडियो के आधार पर आरोपियों की पहचान की जा रही है और जल्द ही उन्हें गिरफ्तार कर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

रीवा। भगवान श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की सुबह जब लोग भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव की तैयारियों में जुटे थे, उसी वक्त रीवा के बिछिया थाना क्षेत्र के कोठी गांव में दिल दहला देने वाली वारदात सामने आई। एक ही घर में हुए दोहरे हत्याकांड से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई।
जानकारी के मुताबिक, एक पति ने कथित तौर पर अपनी पत्नी और मासूम बेटी पर घर में रखे मूसल से हमला कर दिया। हमले में दोनों की दर्दनाक मौत हो गई। वारदात के बाद गांव में हड़कंप मच गया और बड़ी संख्या में लोग मौके पर जुट गए। घटना की सूचना मिलते ही बिछिया थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने दोनों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। वहीं, आरोपी पति को पुलिस ने हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है।
फिलहाल दोहरे हत्याकांड के पीछे की वजह सामने नहीं आई है। पुलिस घटना के सभी पहलुओं की जांच कर रही है और हत्या के कारणों का पता लगाने में जुटी है। जन्माष्टमी के पावन पर्व पर हुई इस खौफनाक वारदात ने पूरे गांव को झकझोर कर रख दिया है।

नई दिल्ली. डिजिटल अरेस्ट के नाम पर लोगों को कानूनी कार्रवाई और गिरफ्तारी का भय दिखाकर करोड़ों रुपये की ठगी करने वाले साइबर अपराध नेटवर्क के खिलाफ केंद्रीय जांच ब्यूरो ने देशव्यापी कार्रवाई की है. सीबीआई ने 20 राज्यों में एक साथ 89 ठिकानों पर तलाशी ली और कार्रवाई के दौरान तीन लोगों को गिरफ्तार किया. जांच एजेंसी का फोकस केवल उन लोगों तक पहुंचना नहीं है, जिन्होंने पीड़ितों को फोन या वीडियो काल के जरिये डराकर रकम स्थानांतरित कराई, बल्कि उन लोगों की भूमिका भी सामने लाना है, जिनके बैंक खातों में ठगी की रकम पहुंची और जिन्होंने उसे आगे दूसरे खातों में भेजकर उसके स्रोत को छिपाने की कोशिश की.
सीबीआई अधिकारियों के मुताबिक यह कार्रवाई तीन अलग-अलग साइबर अपराध मामलों की जांच के सिलसिले में की गई है. इन तीन मामलों में पीड़ितों से कुल 42 करोड़ 36 लाख रुपये से अधिक की ठगी किए जाने का आरोप है. गुजरात, राजस्थान के पिलानी और कर्नाटक से जुड़े इन मामलों में पीड़ितों को कथित तौर पर लंबे समय तक डिजिटल अरेस्ट की स्थिति में रखा गया. अपराधियों ने खुद को पुलिस अधिकारी अथवा अन्य सरकारी अधिकारी बताकर पीड़ितों को यह विश्वास दिलाया कि वे किसी गंभीर आपराधिक मामले में जांच के घेरे में हैं. इसके बाद कानूनी कार्रवाई से बचाने या जांच पूरी होने तक रकम सुरक्षित रखने के नाम पर उनसे बड़ी धनराशि विभिन्न खातों में स्थानांतरित कराई गई.
गुजरात से जुड़े मामले में सबसे अधिक 19 करोड़ 24 लाख रुपये की ठगी का आरोप है. जांच के अनुसार पीड़ित को करीब तीन महीने तक डिजिटल अरेस्ट में रखा गया. कथित आरोपितों ने खुद को पुलिस अधिकारी बताकर उसे एक अपराध की जांच में फंसे होने का भय दिखाया और लगातार अपने निर्देशों का पालन करने के लिए मजबूर किया. लंबे समय तक बनाए गए इस मानसिक दबाव के दौरान पीड़ित से बड़ी रकम कथित तौर पर ठग ली गई.
राजस्थान के पिलानी का मामला भी इसी तरह की कार्यप्रणाली से जुड़ा है. यहां एक प्रतिष्ठित निजी विश्वविद्यालय से जुड़े व्यक्ति को कथित तौर पर तीन महीने तक डिजिटल अरेस्ट में रखा गया और उससे 7 करोड़ 67 लाख रुपये की रकम ठग ली गई. तीसरा मामला कर्नाटक का है, जहां पीड़ित को करीब एक महीने तक इसी तरह के दबाव में रखने के बाद 15 करोड़ 45 लाख रुपये की ठगी किए जाने का आरोप है. तीनों मामलों की रकम को जोड़ने पर राशि 42 करोड़ रुपये से अधिक पहुंचती है.
इन मामलों की जांच में अब सीबीआई का ध्यान उस वित्तीय तंत्र पर है, जिसके जरिये ठगी की रकम को एक खाते से दूसरे खाते तक पहुंचाया गया. जांच एजेंसी ने बैंक खातों, ऑनलाइन खातों तक पहुंच से जुड़े आंकड़ों और तकनीकी गतिविधियों का विश्लेषण करने के बाद तलाशी की कार्रवाई की. अधिकारियों के अनुसार इस विश्लेषण से ऐसे लोगों और खातों की पहचान करने में मदद मिली, जिनका इस्तेमाल ठगी की रकम प्राप्त करने और उसे आगे स्थानांतरित करने के लिए किया गया.
सीबीआई की कार्रवाई का यह हिस्सा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि साइबर ठगी में पीड़ित से रकम हासिल करना अपराध की आखिरी कड़ी नहीं होती. रकम सीधे मुख्य आरोपित के खाते में रखे जाने के बजाय कई बार अलग-अलग खातों में भेजी जाती है. इस प्रक्रिया में खाते उपलब्ध कराने वाले लोगों की भूमिका सामने आती है. रकम को एक खाते से दूसरे खाते में तेजी से भेजने, कुछ हिस्सा नकद निकालने या अलग-अलग डिजिटल माध्यमों से आगे स्थानांतरित करने का उद्देश्य कथित तौर पर धन के मूल स्रोत और अंतिम लाभार्थी के बीच की कड़ी को मुश्किल बनाना होता है.
तलाशी के दौरान गिरफ्तार किए गए तीन लोगों की भूमिका इसी वित्तीय नेटवर्क से जुड़ी बताई गई है. हरियाणा निवासी आकाश पर आरोप है कि उसके बैंक खाते में ठगी की रकम में से करीब 1 करोड़ 95 लाख रुपये पहुंचे. सीबीआई के अनुसार उसने खाता खुलवाया और रकम आने के बाद उसे उसी दिन दूसरे खातों में स्थानांतरित कर दिया. जांच एजेंसी का दावा है कि इस तरह रकम को तत्काल आगे भेजने से उसके खाते के इस्तेमाल और कथित धनशोधन में उसकी भूमिका सामने आई.
दूसरा गिरफ्तार व्यक्ति पश्चिम बंगाल के कोलकाता का रहने वाला राजा बताया गया है. उसके फर्म के खाते में कथित तौर पर 1 करोड़ 50 लाख रुपये की ठगी की रकम पहुंची. सीबीआई अब यह जांच कर रही है कि फर्म के खाते का इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया गया, रकम कहां से आई और उसके बाद वह किन खातों में पहुंची. इस तरह की जांच में बैंकिंग दस्तावेजों के साथ डिजिटल लेन-देन और संबंधित व्यक्तियों के बीच संपर्क की जानकारी भी महत्वपूर्ण हो सकती है.
तीसरी गिरफ्तार महिला की पहचान ज्योति के रूप में बताई गई है. सीबीआई के अनुसार उसके बैंक खाते में भी एक पीड़ित से ठगी गई रकम का हिस्सा पहुंचा. आरोप है कि उसने रकम का एक हिस्सा नकद निकाला और शेष रकम दूसरे खातों में स्थानांतरित कर दी. जांच एजेंसी इस लेन-देन को ठगी की रकम के प्रवाह को अलग-अलग हिस्सों में बांटने की प्रक्रिया के तौर पर देख रही है. हालांकि आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के दौरान होगी.
सीबीआई अधिकारियों के मुताबिक तलाशी अभियान का उद्देश्य ठगी की रकम के रास्ते का पता लगाने के साथ-साथ ऐसे दस्तावेज और डिजिटल सामग्री हासिल करना भी था, जिनसे अपराध में शामिल अन्य लोगों की पहचान हो सके. जांच एजेंसी ने बैंक खातों और ऑनलाइन गतिविधियों के तकनीकी विश्लेषण को तलाशी की कार्रवाई का आधार बनाया. इससे संकेत मिलता है कि जांच अब केवल पारंपरिक पूछताछ पर निर्भर नहीं है, बल्कि बैंकिंग रिकॉर्ड और डिजिटल गतिविधियों को जोड़कर पूरे नेटवर्क की संरचना समझने का प्रयास किया जा रहा है.
डिजिटल अरेस्ट की कार्यप्रणाली ने साइबर अपराध की गंभीरता को एक नया रूप दिया है. अपराधी आमतौर पर पीड़ित को किसी अनजान नंबर से फोन करते हैं और दावा करते हैं कि उसके नाम से कोई आपराधिक गतिविधि हुई है या उसका मोबाइल नंबर, बैंक खाता अथवा पहचान दस्तावेज किसी अपराध से जुड़ा पाया गया है. इसके बाद फर्जी पुलिस अधिकारी, जांच अधिकारी या अन्य सरकारी अधिकारी बनकर वीडियो काल के माध्यम से पूछताछ की जाती है. पीड़ित को यह विश्वास दिलाया जाता है कि यदि उसने निर्देशों का पालन नहीं किया तो उसे गिरफ्तार कर लिया जाएगा.
इस पूरी प्रक्रिया में अपराधी पीड़ित को परिवार और परिचितों से संपर्क करने से रोकने का प्रयास भी कर सकते हैं. उसे लगातार वीडियो काल पर बने रहने और अपनी गतिविधियों पर निगरानी रखने के लिए कहा जाता है. इसी मानसिक दबाव में उससे बैंक खाते की जानकारी, धनराशि स्थानांतरित करने या किसी खाते में रकम जमा करने के लिए कहा जाता है. कई मामलों में पीड़ित यह समझ ही नहीं पाता कि जिस व्यक्ति से वह बात कर रहा है वह वास्तविक सरकारी अधिकारी नहीं, बल्कि साइबर अपराधी है.
सीबीआई की मौजूदा कार्रवाई इसी वजह से व्यापक महत्व रखती है. यदि जांच केवल फोन करने वाले व्यक्ति तक सीमित रहती है तो अपराध का एक छोटा हिस्सा ही सामने आता है. इसके विपरीत बैंक खातों, धन के हस्तांतरण और डिजिटल संपर्कों की कड़ियां जोड़ने पर उन लोगों तक पहुंचा जा सकता है, जो पर्दे के पीछे रहकर पूरे नेटवर्क को आर्थिक आधार उपलब्ध कराते हैं.
यह कार्रवाई ‘ऑपरेशन चक्र-छह’ के तहत की गई है. अभियान के जरिये देशभर में सक्रिय डिजिटल अरेस्ट और संगठित साइबर अपराध नेटवर्क पर कार्रवाई की जा रही है. सीबीआई अब उन अन्य आरोपितों की तलाश में है, जो पीड़ितों से संपर्क करने, सरकारी अधिकारियों की फर्जी पहचान तैयार करने, बैंक खाते उपलब्ध कराने, रकम प्राप्त करने और उसे आगे भेजने में कथित तौर पर शामिल हो सकते हैं.
डिजिटल अरेस्ट के बढ़ते मामलों पर सुप्रीम कोर्ट ने भी गंभीरता दिखाई है और सीबीआई को ऐसे अपराधों तथा उनसे जुड़े व्यापक नेटवर्क के खिलाफ समन्वित कार्रवाई के निर्देश दिए हैं. इसके बाद जांच एजेंसी के सामने चुनौती केवल अलग-अलग राज्यों में दर्ज मामलों की जांच करना नहीं, बल्कि उनके बीच मौजूद साझा नेटवर्क और वित्तीय कड़ियों को तलाशना भी है.
सीबीआई अधिकारियों के अनुसार गिरफ्तार किए गए तीन लोगों से पूछताछ में उनकी भूमिका और उनके संपर्कों के बारे में और जानकारी सामने आ सकती है. जांच एजेंसी यह भी पता लगाने में जुटी है कि 89 ठिकानों से मिले संभावित दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य इस नेटवर्क की कितनी परतें खोलते हैं. साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि अलग-अलग राज्यों में सामने आए बैंक खातों और डिजिटल माध्यमों के बीच कोई साझा संपर्क मौजूद है या नहीं.
अभी इस मामले में जांच जारी है और अन्य आरोपितों की तलाश की जा रही है. सीबीआई का प्रयास ठगी की रकम के पूरे रास्ते को सामने लाने का है, ताकि यह पता चल सके कि पीड़ितों से हासिल धन आखिर किन-किन लोगों तक पहुंचा. इस जांच से यह भी स्पष्ट हो सकेगा कि डिजिटल अरेस्ट के नाम पर होने वाली करोड़ों रुपये की ठगी में कौन लोग प्रत्यक्ष रूप से पीड़ितों को निशाना बनाते हैं और कौन लोग पर्दे के पीछे रहकर धन के लेन-देन की व्यवस्था संभालते हैं.
20 राज्यों में 89 ठिकानों पर हुई एक साथ कार्रवाई ने इस साइबर अपराध की राष्ट्रीय पहुंच को सामने रखा है. तीन मामलों में 42 करोड़ रुपये से अधिक की कथित ठगी और रकम को अलग-अलग खातों के जरिये आगे बढ़ाने के आरोप बताते हैं कि डिजिटल अरेस्ट को केवल एक फोन आधारित धोखाधड़ी मानना पर्याप्त नहीं होगा. इसके पीछे तकनीकी छल, मानसिक दबाव और वित्तीय लेन-देन की कई परतें हो सकती हैं. अब सीबीआई की जांच का अगला महत्वपूर्ण चरण इन्हीं परतों को खोलना और उस पूरे नेटवर्क तक पहुंचना है, जो कथित तौर पर लोगों को डिजिटल अरेस्ट के जाल में फंसाकर उनकी मेहनत की करोड़ों रुपये की कमाई तक पहुंच बना रहा था.
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मराठा आरक्षण आंदोलन फिर तेज, मनोज जरांगे का सरकार को अल्टीमेटम; 12 सितंबर को मुंबई कूच की चेतावनी
महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण को लेकर आंदोलन एक बार फिर तेज हो गया है। जालना के अंतरवाली सराटी गांव में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे मराठा आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जरांगे ने सरकार को 11 सितंबर तक का समय दिया है। उन्होंने गुरुवार रात स्पष्ट किया कि अगर तब तक उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं, तो 12 सितंबर को समर्थकों के साथ मुंबई पहुंचकर आंदोलन किया जाएगा।
मनोज जरांगे पिछले एक सप्ताह से मराठा समुदाय को आरक्षण देने और पात्र मराठों को कुनबी जाति प्रमाणपत्र जारी करने की मांग को लेकर अनशन पर हैं। उनकी तबीयत बिगड़ने को लेकर डॉक्टरों ने चिंता जताई है। प्रदर्शन स्थल पर मौजूद चिकित्सकों ने उन्हें IV फ्लूइड यानी ड्रिप लेने की सलाह दी, लेकिन जरांगे ने इसे लेने से इनकार कर दिया।
गुरुवार को महाराष्ट्र सरकार का प्रतिनिधिमंडल जरांगे से मिलने पहुंचा। इसमें मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल, उदय सामंत, MLC प्रसाद लाड और विधायक मकरंद पाटिल शामिल थे। विखे पाटिल ने जरांगे की खराब होती सेहत का हवाला देते हुए उनसे अनशन खत्म करने या कुछ समय के लिए स्थगित करने की अपील की।
सरकार के मुताबिक अब तक करीब 58 लाख कुनबी रिकॉर्ड खोजे जा चुके हैं। प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया तेज करने के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त किए जाएंगे। हालांकि, इन आश्वासनों के बावजूद जरांगे अनशन खत्म करने पर राजी नहीं हुए।
जरांगे ने पात्र मराठों से 4 सितंबर से कुनबी प्रमाणपत्र के लिए आवेदन करने की अपील की है। इसके लिए पुराने पारिवारिक रिकॉर्ड, रक्त संबंध और वंशावली से जुड़े दस्तावेजों का इस्तेमाल किया जा सकता है। कुनबी समुदाय OBC श्रेणी में आता है और जरांगे की मांग है कि पात्र मराठों को कुनबी के रूप में मान्यता देकर OBC आरक्षण का लाभ दिया जाए।
इसके अलावा सतारा गजट के आधार पर आरक्षण, आंदोलन के दौरान दर्ज पुलिस केस वापस लेना और मृत प्रदर्शनकारियों के परिवारों को सरकारी नौकरी व आर्थिक मुआवजा देने की मांग भी शामिल है।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि सरकार संविधान और कानून के दायरे में आने वाली मांगों पर बातचीत के लिए तैयार है। उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने भी मराठा समुदाय को न्याय दिलाने की प्रतिबद्धता जताई, लेकिन कहा कि किसी अन्य वर्ग के साथ अन्याय नहीं होना चाहिए। अब सबकी नजर 11 सितंबर पर है। जरांगे ने इसे अपना आखिरी भूख हड़ताल बताते हुए 12 सितंबर को मुंबई आंदोलन की चेतावनी दी है।

मुरैना। अफसर ने झगड़े के बाद एक हवलदार की वर्दी उतरवाई और फिर नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया। ढाई दशक तक मंदिरों पर संत बनकर रहे। परिवार की जिम्मेदारियां भी निभाईं और नौकरी के लिए कोर्ट में केस भी लड़ते रहे। पूरे 26 साल बाद हाईकोर्ट में केस जीते और अब संत का चोला उतारकर फिर से सीआरपीएफ की वर्दी पहन ली। संघर्ष, आस्था और हक की लड़ाई की यह कहानी है, मुरैना के छिछावली गांव निवासी 50 साल के गिरवरसिंह तोमर की।
छिछावली गांव के गिरवर सिंह पुत्र दामोदार सिंह तोमर को सेना में भर्ती होने का जुनुन था। किशोर अवस्था से ही सेना भर्ती की तैयारी में जुट गए। कड़ी मेहनत के बाद साल 1991 में वह सीआरपीएफ में हवलदार के पद पर चयनित हुए। 8 साल तक नौकरी अच्छे से चलती रही, प्रमोशन की लिस्ट में नाम आने वाला था, लेकिन साल 1999 की शुरुआत में सीआरपीएफ के एक बड़े अफसर के साथ मुंहवाद हो गया।
अफसर ने इसे इतना तूल दिया कि पहले गिरवरसिंह को निलंबित करवाया, फिर विभागीय जांच बैठाकर 21 अक्टूबर 1999 को सीआरपीएफ से गिरवरसिंह को बर्खास्त कर दिया गया। कुछ समय वह घर पर रहे, लेकिन परेशान रहने लगे। इसके बाद वह छिछावली गांव से एक किलोमीटर दूर बारहद्वारी मंदिर पर चार-पांच साल रहे। यहां भी मन नहीं लगा तो 20 साल पहले मुरैना के गुफा मंदिर पर आ गए। यहां संत बनकर मंदिर में पूजा-पाठ, मंदिर के पुजारी के सेवा करने लगे। मंदिर के मुख्य पुजारी ने उन्हें गिरवरदास महाराज नाम दिया।
बर्खास्तगी की कार्रवाई के विरोध में गिरवरसिंह ने इलाहबाद हाईकोर्ट में साल 1999 में केस किया। साल 2007 में कोर्ट ने उनके पक्ष में फैसला सुनाया, लेकिन सीआरपीएफ ने इस फैसले के खिलाफ स्टे ले लिया। इसके बाद गिरवरसिंह ने हाईकोर्ट की डबल बैंच में अपील की, जहां कोर्ट ने 28 अगस्त 2025 को सीआरपीएफ को आदेश पारित किया, कि तीन महीने में गिरवरसिंह को दोबारा जॉइनिंग दी जाए।
हाईकोर्ट के इस आदेश के छह महीने बाद ज्वाइनिंग नहीं मिली, फिर कोर्ट व वकीलों से नोटिस जारी करवाए गए। सीआरपीएफ ने 26 साल पुराने मामले की फाइलें ढूंढ़ने में समय लगने का तर्क देकर राहत मांगी। अंत में बीते 26 अगस्त को सीआरपीएफ ने गिरवरसिंह को फिर से नौकरी पर रखने का आदेश जारी करते हुए उन्हे छत्तीसगढ़ के बीजापुर में पोस्टिंग दे दी। गिरवरसिंह बताते हैं, कि वह अब आगे अपने प्रमोशन के लिए भी कानूनी लड़ाई लड़ेंगे।
गिरवरसिंह की बर्खास्ती एक अफसर की सनक के कारण हुई, जो गलत थी। इस कार्रवाई को उन्होंने इलाहबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी। मंदिर पर रहने के साथ-साथ गिरवरसिंह ने अपने परिवार की जिम्मेदारी भी अच्छे से संभाली। गिरवरसिंह के परिवार में पत्नी मंजू देवी, दो बेटी शिवानी, राधा और दो बेटे अभिषेक व कृष्णा है। बच्चों को अच्छी शिक्षा दिलाई। दोनों बेटियों की शादी कर दी। अभिषेक एयरफोर्स का जवान है और कृष्णा अभी पढ़ रहा है।
गुफा मंदिर पर गिरवरदास करीब 20 साल सेवा करते रहे। वह अपने पूजा-पाठ और भक्ति में ही मस्त रहते थे। बताते भी थे कि पहले वह सीआरपीएफ में थे, किसी बात पर एक अफसर ने नौकरी से निकलवा दिया, केस चल रहा है। वह केस की तारीखों पर भी समय पर जाते। जब वह केस जीते और ज्वाइनिंग के लिए बुलाया गया, तब मंदिर छोड़ते समय भावुक थे। हम सभी को प्रसन्नता है कि उनका 26 साल का संघर्ष व तपस्या सफल रही। - महामंडलेश्वर शिवशरण महाराज महंत, गुफा मंदिर मुरैना।

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कब्र से निकालकर घर के दरवाजे पर फेंका बच्ची का शव! दबंगों की हैवानियत, गुस्साए लोगों ने लगाया जाम
डबरा। इंसानियत को तार-तार कर देने वाला एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसे सुनकर किसी की भी रूह कांप जाए। ग्वालियर जिले के डबरा के करहिया थाना क्षेत्र के चैतगांव स्थित मुंशी के पुरा में 3 माह की मासूम बच्ची के शव के साथ अमानवीयता की सारी हदें पार कर दी गईं। बीमारी से दम तोड़ने वाली बच्ची को जब परिजनों ने सुपुर्द-ए-खाक किया, तो दबंगों ने जमीन के विवाद में कब्र खोदकर मासूम का शव निकाला और परिजनों के दरवाजे पर लाकर पटक दिया!
जानकारी के अनुसार, कृष्णा बाई और बीरबल सिंह बंजारे की 3 माह की मासूम बच्ची की रविवार सुबह बीमारी के कारण मौत हो गई थी। दुखी परिवार बच्ची का अंतिम संस्कार करने भीमवाड़ा नदी किनारे स्थित श्मशान क्षेत्र के पास पहुंचा। बच्ची के दादा चिमन सिंह बंजारा का परिवार नदी के पास ही डेरा बनाकर रहता है। परिजनों ने नदी किनारे एक खेत के पास बच्ची को दफना दिया।
जब बंजारा परिवार बच्ची को दफना रहा था, तभी वहां खेती करने वाले स्थानीय गुर्जर समुदाय के कुछ लोगों ने उस जमीन को अपनी बताते हुए दफनाने का विरोध किया। हालांकि, परिजन बच्ची को दफनाकर वापस अपने घर लौट आए।
आरोप है कि परिजनों के जाते ही गांव के दबंग पप्पू गुर्जर, राजेंद्र सिंह गुर्जर, रामनिवास गुर्जर मौके पर पहुंचे। उन्होंने दरिंदगी दिखाते हुए कब्र से मासूम का शव बाहर निकाला और सीधे बंजारा परिवार के घर के दरवाजे पर लाकर फेंक दिया।
मासूम के शव के साथ हुए इस खौफनाक व्यवहार को देखकर परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा। आक्रोशित परिवार ने बच्ची के शव को सड़क पर रखकर चक्काजाम कर दिया। देखते ही देखते दोनों पक्षों के बीच विवाद इतना बढ़ गया कि नौबत मारपीट और हिंसक झड़प तक पहुंच गई।
सड़क जाम और हंगामे की खबर मिलते ही करहिया थाना पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंची। पुलिस ने जैसे-तैसे आक्रोशित लोगों को शांत कराकर जाम खुलवाया और बच्ची के शव को सुरक्षित दूसरी जगह दफन करवाया।
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हैरिटेज होटल ग्रुप से 1 करोड़ की साइबर ठगी: खातों में भेजे पैसे, पुलिस ने होल्ड कराए 95 लाख रुपये
भोपाल। राजधानी भोपाल में साइबर ठगी का एक बड़ा मामला सामने आया है। मशहूर हैरिटेज होटल ‘नूर-उस-सबाह पैलेस’ से जुड़े रिलायबल ग्रुप को शातिर साइबर ठगों ने 1 करोड़ रुपये का चूना लगा दिया।
जानकारी के अनुसार, साइबर ठगों ने ग्रुप को एक फर्जी ईमेल आईडी बनाकर बैंक खाते से जुड़ी गलत जानकारी भेजी थी। रिलायबल ग्रुप के कर्मचारियों ने जैसे ही उस फर्जी खाते में रकम ट्रांसफर की, ठगी को अंजाम दे दिया गया।
पुलिस की शुरुआती जांच में खुलासा हुआ है कि साइबर अपराधियों ने पैसे मिलते ही बेहद तेजी से काम किया। ठगों ने महज तीन घंटे के भीतर 1 करोड़ रुपये की बड़ी रकम को देश के अलग-अलग राज्यों में स्थित लगभग 200 बैंक खातों में ट्रान्सफर कर दिया।
मामला सामने आते ही साइबर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए विभिन्न खातों में भेजे गए 95 लाख रुपये होल्ड करा लिए हैं। हालांकि, ठग करीब 5 लाख रुपये कैश निकालने में कामयाब रहे। पुलिस फिलहाल मामले की विस्तृत जांच कर रही है और गिरोह का सुराग लगाने में जुटी है।

भोपाल। राजधानी भोपाल के गांधी भवन में रविवार को सरकारी स्कूलों के इंफ्रास्ट्रक्चर और ऑडिट को लेकर बुलाई गई एक बैठक में जमकर हंगामा हो गया। आरोप है कि ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) द्वारा आयोजित इस बैठक के लिए पुलिस और प्रशासन से कोई पूर्व अनुमति नहीं ली गई थी।
बैठक के दौरान मौजूद यूथ लीडर गौतम जायसवाल ने जब आयोजकों से सवाल किया कि “दिल्ली में जो असामाजिक तत्व पनपे, वे भोपाल में न पनपे इसके लिए क्या एक्शन लिया जाएगा?” तो CJP के कार्यकर्ता भड़क गए। आरोप है कि सवाल सुनते ही CJP के लोगों ने गौतम जायसवाल के साथ धक्का-मुक्की की और हाथ से माइक छीन लिया।
गौतम जायसवाल का कहना है कि वे सरकारी स्कूलों में सुधार के खिलाफ बिल्कुल नहीं हैं, लेकिन कोई भी गतिविधि सही तरीके और पुलिस प्रशासन की विधिवत अनुमति के साथ होनी चाहिए
थाना प्रभारी ने गांधी भवन सचिव को दी सख्त चेतावनी
घटना के बाद गौतम जायसवाल ने थाना प्रभारी से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा और कार्यक्रम में शामिल असामाजिक तत्वों पर पुलिस निगरानी की मांग की।
मामले की गंभीरता को देखते हुए थाना प्रभारी ने बताया कि गांधी भवन के सचिव को औपचारिक पत्राचार कर सख्त चेतावनी दी गई है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में यदि बिना पूर्व सूचना व अनुमति के ऐसी किसी बैठक या कार्यक्रम का आयोजन होता है, तो उसकी पूरी जिम्मेदारी गांधी भवन प्रबंधन की होगी।
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डुमना विमानतल पर टपक रहा पानी, मेन गेट किया बंद, दो साल पहले 450 करोड़ में बनी टर्मिनल बिल्डिंग
जबलपुर। एमपी के जबलपुर में डुमना एयरपोर्ट की टर्मिनल बिल्डिंग से पानी टपक रहा है, जिसके चलते गेट के पास का रास्ता गीता व फिसलन भरा हो गया है। जिसके चलते प्रबंधन को मेन गेट बंद करना पड़ा है, दूसरे गेट से आवाजाही कराई जा रही है। गौरतलब है कि करीब दो साल पहले ही एयरपोर्ट की 450 करोड़ रुपए की लागत से टर्मिनल बिल्डिंग बनी थी।
डुमना एयरपोर्ट की बिल्डिंग की छत से पानी टपकने के कारण यात्रियों को फिसलन से बचाने के लिए एयरपोर्ट प्रबंधन ने मुख्य गेट पर 'फर्श गीला है, संभलकर चलेंÓ की चेतावनी वाला बोर्ड लगाया। बारिश के दौरान यात्रियों को टर्मिनल में आने-जाने में परेशानी हुई। प्रबंधन का कहना है कि बारिश के कारण कैनोपी में पानी भर गया था। कैनोपी की रिपेयरिंग चल रही है। यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा को देखते हुए गेट नम्बर वन बंद कर गेट नम्बर टू से आवाजाही कराई जा रही है। नई टर्मिनल बिल्डिंग के निर्माण और एयरपोर्ट की मौजूदा व्यवस्थाओं पर वायु सेवा संघर्ष समिति ने सवाल उठाए हैं। समिति अध्यक्ष हिमांशु खरे ने एयरपोर्ट के निर्माण और वर्तमान व्यवस्थाओं की उच्चस्तरीय जांच और ऑडिट की मांग की है। हिमांशु खरे का कहना है कि किसी भी शहर के लिए एयरपोर्ट उसकी पहली छवि बनाता है। ऐसे में करीब 450 करोड़ रुपए खर्च होने के बावजूद यात्रियों को प्रवेश करते ही गीले फर्श और टपकते पानी का सामना करना पडऩा गंभीर सवाल खड़े करता है। उन्होंने एयरपोर्ट की सुविधाओं और रैंकिंग पर भी सवाल उठाए। उनके मुताबिक, हालिया कस्टमर सेटिस्फेक्शन इंडेक्स में जबलपुर एयरपोर्ट को देशभर में 22वां स्थान मिला है। डुमना एयरपोर्ट के नए टर्मिनल भवन, एटीसी टावर और फायर स्टेशन समेत आधुनिकीकरण का काम दिल्ली की मेसर्स एनकेजी इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड को दिया गया था। परियोजना के तहत करीब 1.15 लाख वर्गफुट क्षेत्र में टर्मिनल भवन बनाया गया। इसमें तीन एयरोब्रिज, आधुनिक बैगेज स्क्रीनिंग सिस्टम, फूड कोर्ट और 250 से अधिक कारों एवं बसों की पार्किंग जैसी सुविधाएं शामिल हैं। -
एयरपोर्ट प्रभारी डायरेक्टर नीरज कुमार के मुताबिक, जून 2024 में फैब्रिक कैनोपी गिरने की घटना की जांच चल रही है। एनकेजी कंपनी के खिलाफ कार्रवाई भी मुख्यालय स्तर पर चल रही है। वर्तमान में कैनोपी की रिपेयरिंग दूसरी कंपनी को दी गई है। इसी कैनोपी में बारिश के दौरान पानी भरने और टपकने की समस्या सामने आई है।
डुमना एयरपोर्ट की नई टर्मिनल बिल्डिंग की निर्माण गुणवत्ता पर पहले भी सवाल उठ चुके हैं। 27 जून 2024 को भारी बारिश के दौरान ड्रॉप एंड गो एरिया की फैब्रिक कैनोपी का एक हिस्सा गिर गया था। कैनोपी का हिस्सा वहां खड़ी आयकर विभाग के एक अधिकारी को लेने आई कार पर गिरा था, जिससे कार क्षतिग्रस्त हो गई थी। हादसे से कुछ मिनट पहले ही अधिकारी और ड्राइवर कार से उतरकर टर्मिनल के अंदर चले गए थे। इससे वे हादसे की चपेट में आने से बच गए और बड़ा हादसा टल गया।
डुमना एयरपोर्ट के विस्तार के बाद यहां से उड़ानों की संख्या बढऩे का दावा किया गया था। हालांकि, फिलहाल एयरपोर्ट से सात फ्लाइट संचालित हो रही हैं। इनमें इंदौर, हैदराबाद, दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु की उड़ानें शामिल हैं। बिलासपुर और जगदलपुर की फ्लाइट फिलहाल बंद हो चुकी हैं।
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थाने की फर्जी सील लगाकर 500 में बांट रहा था ‘कैरेक्टर सर्टिफिकेट’: संचालक गिरफ्तार
धार। मध्य प्रदेश के धार जिले की मनावर पुलिस ने फर्जी चरित्र प्रमाण पत्र बनाने वाले एक शातिर जालसाज का पर्दाफाश किया है। आरोपी अपनी फोटो कॉपी की दुकान से ही फर्जी रबर सील और दस्तखत के जरिए महज 500 रुपये लेकर सरकारी व प्राइवेट नौकरी के लिए फर्जी चरित्र प्रमाण पत्र जारी कर रहा था।
मनावर पुलिस को मुखबिर से सटीक सूचना मिली थी कि ‘आदित्य फोटो कॉपी सेंटर’ का संचालक अपनी दुकान से थाना मनावर की फर्जी सील का इस्तेमाल कर अवैध रूप से चरित्र प्रमाण पत्र तैयार कर रहा है। सूचना मिलते ही पुलिस टीम ने तुरंत दुकान पर दबिश दी।
मौके पर दुकान संचालक आदित्य सोलंकी जिसकी उम्र 32 वर्ष, निवासी पटेल कॉलोनी मनावर मौजूद मिला। पुलिस ने जब दुकान और उसके सिस्टम की जांच की, तो पूरा फर्जीवाड़ा बेनकाब हो गया।
पुलिस ने आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4), 338, 336(3), और 340(2) के तहत मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया है। विवेचना के दौरान आरोपी के लैपटॉप को खंगाला गया, जिसमें 27 और फर्जी चरित्र प्रमाण पत्र व शपथ पत्र बरामद हुए हैं। पुलिस ने आरोपी को न्यायालय में पेश कर पुलिस रिमांड पर लिया है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि उसने अब तक कितने लोगों को फर्जी प्रमाण पत्र जारी किए हैं।

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गरिमा के शव की जॉच होने के बाद पुनः उसी स्थान पर चबूतरा का निर्माण किया गया
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