नर्मदापुरम। मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम जिले के पिपरिया में खाकी और शराब माफिया के बीच इश्क परवान चढ़ चुका है और इस वाक्ये के सामने आने के बाद अब कानून व्यवस्था का हाल भगवान भरोसे ही है। मामला थाना स्टेशन रोड का है, जहां पुलिस की अपनी साख भले ही दांव पर लगी हो लेकिन शराब ठेकेदार अटल राय बीजेपी नेता के पाले हुए गुंडों की आवभगत में कोई कसर नहीं छोड़ी जा रही।
वायरल वीडियो 19 सितंबर का पिपरिया के कुचबंदिया मोहल्ले का बताया जा रहा है। अवैध शराब पर पड़ी रेड के दौरान ‘गब्बर’ नाम का बदमाश पुलिस की गाड़ी में आगे बैठा नजर आया। जिस बदमाश पर सरेआम एक युवक का अपहरण कर मारपीट करने का गंभीर आरोप है, वह पुलिसकर्मियों की मौजूदगी में महुआ लहान नष्ट करने का हुक्म फरमाता दिखा। हद तो तब हो गई जब वर्दीधारी पुलिसकर्मी इस बदमाश के साथ बाकायदा फोटो खिंचवाते नजर आए।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि पिपरिया में ओवर-रेटिंग के खेल के चलते शराब प्रेमी पड़ोसी इलाकों से सस्ती शराब ला रहे थे। ठेकेदार को यह रास नहीं आया, जिसके बाद ठेकेदार के गुंडों को खुली छूट दे दी गई। आरोप है कि बाहर से शराब लाने वालों का अपहरण कर मारपीट की जाती है और पुलिस उल्टे बेकसूरों पर ही आबकारी कानून के तहत मामला दर्ज कर देती है।
मामला तूल पकड़ने और महकमे की फजीहत होने के बाद पुलिस अधीक्षक (SP) ने स्टेशन रोड थाना प्रभारी (TI) मदनलाल पवार को लाइन अटैच कर दिया है, जबकि एक हेड कांस्टेबल को निलंबित कर दिया गया है। हालांकि, ग्रामीणों और स्थानीय लोगों का सवाल है कि इतने गंभीर मामले के बाद भी मुख्य आरोपियों और ठेकेदार के खिलाफ जांच को ठंडे बस्ते में क्यों डाला जा रहा है?
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मुनि सुधासागर जी की टिप्पणी पर कोर्ट पहुंचा मामला, अब 12 नवंबर को होगी सुनवाई
इंदौर। जैन मुनि सुधासागर जी के एक प्रवचन के दौरान वकीलों को लेकर की गई टिप्पणी अब कानूनी प्रक्रिया तक पहुंच गई है। इंदौर की अदालत में इस मामले को लेकर परिवाद दायर किया गया है। कोर्ट ने मामले में प्रारंभिक कार्रवाई के बाद अगली सुनवाई के लिए 12 नवंबर की तारीख तय की है।
मामला इंदौर में हुए एक प्रवचन से जुड़ा है। जानकारी के मुताबिक, प्रवचन के दौरान एक वकील की ओर से पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए मुनि सुधासागर जी ने वकीलों के किसी समिति या कमेटी में शामिल होने को लेकर अपनी राय रखी थी। इस दौरान उन्होंने वकीलों की कार्यप्रणाली पर टिप्पणी करते हुए कहा था कि वकील कई बार समस्याओं का समाधान कराने के बजाय मामलों को बहस और विवाद की दिशा में ले जाते हैं। उन्होंने कथित तौर पर वकीलों की मानसिकता को ‘विध्वंसक’ बताते हुए समाज में विवाद बढ़ने की बात कही थी।
इन टिप्पणियों को लेकर अधिवक्ता शैलेंद्र द्विवेदी की ओर से जिला एवं सत्र न्यायालय में परिवाद दायर किया गया। मामले में प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी नीरज अग्रवाल की अदालत के समक्ष परिवादी के बयान दर्ज किए गए। इसके बाद कोर्ट की ओर से एमजी रोड पुलिस को समन जारी किया गया।
अदालत ने मामले में आगे की प्रक्रिया के लिए 12 नवंबर की तारीख तय की है। इसी दिन मामले से जुड़ी अगली सुनवाई होगी। फिलहाल यह मामला न्यायिक प्रक्रिया में है। कोर्ट में दर्ज परिवाद और आगे होने वाली सुनवाई के आधार पर ही यह तय होगा कि मामले में आगे किस तरह की कार्रवाई होती है। एक प्रवचन में कही गई टिप्पणी से शुरू हुआ विवाद अब अदालत की चौखट तक पहुंच चुका है। 12 नवंबर की सुनवाई पर इस मामले में अगला कदम क्या होगा, इस पर सभी की नजर रहेगी।
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थाने से महज 300 मीटर दूर खूनी खेल: हत्या का CCTV फुटेज आया सामने
इटारसी। मध्य प्रदेश के इटारसी में युवक की चाकू मारकर हत्या के मामले में अब घटना का CCTV फुटेज सामने आया है। गुरुद्वारे के बाहर हुई वारदात का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। फुटेज में हत्या से कुछ समय पहले मृतक और दोनों आरोपी एक साथ दिखाई दे रहे हैं। यह वारदात इटारसी थाने से करीब 300 मीटर की दूरी पर हुई थी।
पुलिस के अनुसार, मृतक विक्रम अपने परिचित गुलशन और सनी शर्मा के साथ बाइक पर मौजूद था। इसी दौरान तीनों के बीच किसी बात को लेकर विवाद हो गया। गुरुद्वारे में लगे CCTV कैमरे में पूरी घटना कैद हुई। वीडियो में तीनों के बीच मोबाइल को लेकर बातचीत और फिर बहस होती दिखाई दे रही है। इसके बाद विवाद बढ़ा और गुलशन ने विक्रम पर चाकू से हमला कर दिया।
पुलिस के मुताबिक, विक्रम पर चाकू से दो बार वार किए गए, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। पुलिस जांच में यह बात भी सामने आई है कि घटना से पहले मंगलवार को विक्रम, गुलशन और सनी शर्मा स्टेशन के पास बैठे थे। पुलिस के अनुसार, वहां शराब पीने के दौरान विक्रम ने गुलशन से अपने 100 रुपये वापस मांगे थे। इसी बात को लेकर विवाद शुरू होने की जानकारी सामने आई है।
वारदात की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की। पुलिस ने मामले में गुलशन और सनी शर्मा को गिरफ्तार कर लिया है। अब वायरल CCTV फुटेज और दूसरे साक्ष्यों के आधार पर पुलिस पूरे घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ रही है।
भोपाल। शक्तिनगर का वो घर, जिसके कमरे में पलंग की जगह बना सीमेंट का चबूतरा बिल्कुल सामान्य सा नजर आता है, लेकिन पुलिस को क्या पता था कि इसी चबूतरे के नीचे एक युवती का शव दबा है। 2 फरवरी-2017 में जब पुलिस ने इस चबूतरे को तोड़ा तो आकांक्षा शर्मा हत्याकांड का ऐसा राज खुला, जिसके बाद इसकी जांच ने हत्यारे उदयन दास को बेनकाब कर दिया…।
उदयन दास। यह वो नाम है जिसने अपने कारनामों से देशभर को दहला दिया था। प्रेम की तलाश में कोलकाता से भोपाल आई उस लड़की को नहीं मालूम था कि वो ऐसे जंजाल में फंस जाएगी, जिसके बाद कभी बाहर नहीं आ पाएगी। इस मामले में उदयन दास का ऐसा घिनोना चेहरा सामने आया जिसने सभी को हैरान कर दिया। जांच आगे बढ़ी तो उदयन से जुड़े तीन हत्याकांड का खुलासा हुआ। यदि बांकुड़ा पुलिस आकांक्षा को ढूंढते हुए भोपाल नहीं पहुंचती तो शायद उदयन दास खुला घूम रहा होता।
भोपाल में 24 अप्रैल 1984 को पैदा हुआ उदयन दास 10वीं तक पढ़ाई भोपाल में करने के बाद 12वीं पढ़ने के लिे रायपुर चले गया था। भिलाई के रूमता कालेज में इंजीनियरिंग की पढ़ाई शुरू की, लेकिन थर्ड ईयर में फेल हो गया था। भोपाल का उदयन दास और कोलकाता के बांकुड़ा की आकांक्षा शर्मा की मुलाकात 2007 में Orkut के जरिए हुई थी। इसके बाद दोनों की मुलाकात जयपुर में हुई। जहां उदयन ने बताया कि वो आईआईटी पासआउट है और उसके पास अमेरिका की नागरिकता है। यह कहकर ही संभवतः उदयन ने आकांक्षा का भरोसा जीता था। आकांक्षा ब्वायफ्रेंड के प्रेम में उलझती गई। 9 साल तक दोनों का प्रसंग चला। उदयन अपनी गर्लफ्रेंड से कहता था कि उसके पास समय बहुत कम है, वो थोड़े दिन तुम्हारे साथ रहना चाहता है, उसके बाद अमेरिका चले जाउंगा। लेकिन जब आकांक्षा फ्लाइट से मिलने पहुंचती, उसके बाद अमेरिका जाने की बजाय उदयन भोपाल वापस आ जाता था। एक बार जून 2016 को कोलकाता के बांकुड़ा की लड़की सबकुछ छोड़कर अपने प्रेमी से मिलने निकल आई। दोनों दिल्ली में मिले, फिर भोपाल चले आए। दोनों लिव-एन में रहने लगे थे। उदयन ने उसे बताया था कि उसके माता-पिता नहीं हैं। भोपाल के शक्ति नगर में रहने वाले दो मंजिला मकान में उदयन अकेले ही रहता है। उसके अमेरिका जाने वाला झूठ आकांक्षा को समझ आने लगा था।
14 जुलाई 2016 को दोनों में जमकर विवाद हुआ था। आकांक्षा किसी से फोन पर बात कर रही थी, इस बात को लेकर दोनों में झगड़ा हुआ था। आकांक्षा कहती थी मेरे साथ धोखा हुआ है। उदयन की हरकतें देख आकांक्षा परेशान रहने लगी थी। पुलिस जांच में सामने आया था कि इसी दौरान आकांक्षा की हत्या की प्लानिंग कर ली थी। दोनों के रिश्ते इतने खराब हो गए थे कि उदयन ने घर में ही आकांक्षा की आवाज हमेशा के लिए बंद कर दी। इसके बाद टीन की बड़ी पेटी में बंद कर सीमेंट का चबूतरा घर में ही बना दिया। क्राइम सीरियल देखने के शौकीन उदयन ने बाद में जो खुलासे किए वो हैरान करने वाले थे। वो घर में बने उसी चबूतरे पर सोता था और कॉलगर्ल को भी घर लेकर आता था। उधर, कोलकाता में आकांक्षा के माता-पिता परेशान थे। उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करा दी गई थी। कोलकाता पुलिस आकांक्षा की तलाश में जुटी थी।
कोलकाता की बांकुड़ा पुलिस काफी समय से आकांक्षा की लोकेशन ट्रैक कर रही थी। बांकुड़ा पुलिस भोपाल पहुंची, लेकिन जिस लड़की की तलाश में टीम आई थी, उसका कोई पता नहीं चला। घर में उदयन मौजूद था, लेकिन आकांक्षा कहीं नहीं थी। जांच उस समय एक ऐसे मोड़ पर खड़ी थी, जहां पुलिस के पास शक था, मगर ठोस सबूत नहीं। पुलिस ने आकांक्षा और उदयन की कॉल डिटेल भी खंगाली। उदयन पर शक गहराता गया और 2 फरवरी 2017 को भोपाल की गोविंदपुरा पुलिस के सहयोग से उदयन दास को गिरफ्तार कर लिया गया। इसी दिन शुरू हुई थी घर की तलाशी, जिसमें चबूतरे को देख पुलिस ने खुदाई कराई थी। जिसमें गुमशुदा आकांक्षा शर्मा का शव बाहर निकाला गया। इस मामले में उदयन ने आकांक्षा की हत्या किस तारीख को की थी, इसे लेकर पुलिस भी निश्चित तारीख नहीं बता पाई है।
उदयन से लगातार पूछताछ में हर दिन नए खुलासे होने लगे। उदयन का एक और कारनामा सभी के सामने था। पूछताछ के बीच पुलिस ने उदयन के पिता वीरेंद्र दास और मां इंद्राणी के बारे में पूछताछ की। वो कहता था कि मां अमेरिका में रहती थी, पिता बीमारी से गुजर गए। हत्या के बाद 7 सालों तक वो माता-पिता की पेंशन से जीवन गुजार रहा था। सख्ती हुई तो इस खुलासे ने देशभर की नींद उड़ा दी। उदयन ने बताया कि 2010 में रायपुर में उसने अपने माता-पिता की हत्या कर दी थी। बाद में मकान बेच दिया गया था। पुलिस ने रायपुर के उसी घर में गड्ढा खोदकर अवशेष निकाले थे।
इस केस में पश्चिम बंगाल की बांकुड़ा पुलिस ने 30 अप्रैल 2017 को 600 पन्नों की केस डायरी कोर्ट में पेश की थी। 19 गवाहों के बयान और सबूतों के आधार पर कोर्ट ने दोषी पाया था। बांकुड़ा में फास्ट ट्रैक कोर्ट में उदयन दास को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। इसके बाद रायपुर जिला न्यायालय ने भी माता-पिता की हत्या कर शव घर में दफनाने के मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इस तरह एक गुमशुदगी की जांच ने तीन हत्याओं के रहस्य से पर्दा उठाया दिया। उदयन दास अब पश्चिम बंगाल की एक जेल में सजा काट रहा है।
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चलती फॉर्च्यूनर में बनाई रील … पूर्व विधानसभा अध्यक्ष के बेटे ने फिर दिखाई सत्ता की हनक, पीछे चलती रही पुलिस
नरसिंहपुर। मध्यप्रदेश के पूर्व विधानसभा अध्यक्ष एनपी प्रजापति के बेटे नीर प्रजापति का एक नया वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में नीर प्रजापति चलती फॉर्च्यूनर गाड़ी का गेट खोलकर खतरनाक स्टंट करते नजर आ रहे हैं। इस दौरान गाड़ी में हूटर भी लगा दिखाई दे रहा है।
हैरान करने वाली बात यह है कि कि इस खतरनाक रीलबाज़ी के दौरान नीर प्रजापति की गाड़ी के ठीक पीछे पुलिस का काफिला भी चलता हुआ नजर आ रहा है। पुलिस की मौजूदगी के बावजूद इस तरह के खतरनाक स्टंट पर कोई रोक-टोक न होने से अब पुलिस की कार्यप्रणाली और भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
हालांकि, यह वीडियो कब और कहाँ का है, इसकी आधिकारिक पुष्टि फिलहाल नहीं हो पाई है। लेकिन इस घटना के बाद स्थानीय लोगों में यह चर्चा तेज़ हो गई है कि आम जनता पर तुरंत कार्रवाई करने वाली पुलिस, नेता पुत्र के इस मामले में क्या रुख अपनाएगी।
गौरतलब है कि नीर प्रजापति का विवादों से पुराना नाता रहा है। इससे पहले भी उनका एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें वे मारपीट करते हुए “आधा भोपाल मेरे नाम से डरता है” कहते सुने गए थे।
मामले पर जानकारी देते हुए नरसिंहपुर के एएसपी संदीप भूरिया ने बताया कि वीडियो की जांच की जा रही है और तथ्यों के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
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डाक विभाग ने 8 लोगों को नौकरी से निकाला, जांच में फर्जी निकले दस्तावेज, सीबीआई ने शुरू की जांच
जबलपुर. ग्रामीण डाक सेवक में फर्जी 10वीं की मार्कशीट लगाकर नौकरी पाने वाले आठ अभ्यर्थियों को डाक विभाग ने नौकरी से निकाल दिया है. जनवरी 2023 और जुलाई 2024 की भर्ती में इन्हीं अंकसूचियों के आधार पर चयन हुआ था.
जांच में मार्कशीट फर्जी मिलने के बाद मामला सीबीआई तक पहुंचा. 18 सितंबर की शिकायत पर 22 सितंबर को आठ अभ्यर्थियों और अन्य संबंधित लोगों के खिलाफ केस दर्ज हुआ. जांच में चार राज्यों के बोर्ड के नाम पर फर्जी मार्कशीट और करीब एक हजार रुपए में इन्हें उपलब्ध कराने की बात सामने आई है.
जांच में सामने आया कि अंकसूचियां बिहार स्कूल एग्जामिनेशन बोर्ड, मध्य प्रदेश राज्य ओपन स्कूल, जम्मू एंड कश्मीर स्टेट ओपन और झारखंड एकेडमिक काउंसिल के नाम से तैयार की गई थीं. फर्जी अंकसूचियां करीब एक हजार रुपए में उपलब्ध कराए जाने की जानकारी भी जांच में सामने आई है. सीबीआई को आशंका है कि फर्जी अंकसूचियां तैयार करने वाले गिरोह का नेटवर्क कई राज्यों में फैला हो सकता है.
फर्जी दस्तावेज के आधार पर चयनित आठों अभ्यर्थियों को जबलपुर और कटनी के अलग-अलग उप डाकघरों में पदस्थ किया गया था. मानवेंद्र सिंह को कुंडम, राजा बाबू अहिरवार और सौरभ शर्मा को पाटन, प्रदीप खरे को कुड़ारी-उमरिया बरेला और नयन कुमार को रमखिरिया-शहपुरा में पोस्टिंग मिली थी. बद्री प्रसाद यादव को कटनी के संसारपुर, देवेंद्र सिंह चौहान को उमरिया पान और रमाकांत शर्मा को मोहतरा उप डाकघर में पदस्थ किया गया था.
सीबीआई फर्जी अंकसूचियां तैयार करने वाले नेटवर्क का पता लगा रही है. जांच में यह भी देखा जा रहा है कि दस्तावेज किन माध्यमों से तैयार कराए गए और भर्ती प्रक्रिया में इनके इस्तेमाल के दौरान किसी सरकारी कर्मचारी की भूमिका थी या नहीं. शिकायत में सरकारी कर्मचारियों की मिलीभगत की आशंका भी जताई गई है. सीबीआई अधिकारियों के अनुसार मामले की जांच जारी है. आरोपियों की भूमिका स्पष्ट होने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी.
अवैध तरीके से अमेरिका जाने की कोशिश में गुजरात के एक ही परिवार के तीन इथियोपिया में फंस गए हैं. लापता लोगों के परिजनों ने दावा किया कि तीनों का इथियोपिया में अपहरण कर लिया गया और अपहरणकर्ताओं ने उनकी रिहाई के लिए एक करोड़ रुपये की फिरौती मांगी है. तीनों 20 सितंबर को गुजरात से निकले थे और चार दिन बाद जब परिवार का उनसे संपर्क टूट गया तो पुलिस से संपर्क किया गया.
अमेरिका जा रहे गुजरात के तीन लोगों को इथियोपिया में किडनैप कर लिया गया. परिजनों ने बताया कि रुत्विक जंसारी, ममता चावड़ा और मूयरी तीनों कुछ एजेंटों के माध्यम से 20 सितंबर को अमेरिका जाने के लिए रवाना हुए थे.
गुजरात के तीन लोग अवैध रास्ते से अमेरिका जाने के लिए रवाना होने के बाद इथियोपिया में लापता हो गए. किडनैपरों ने उनकी रिहाई के लिए एक करोड़ रुपए देने की मांग की है. तीनों के परिवार वालों ने फिरौती की रकम दे दी है, लेकिन इसके बाद भी तीनों से परिवार का संपर्क नहीं हो पा रहा है.
तीनों गुजरात से राजस्थान, जयपुर और अबू धाबी होते हुए इथियोपिया पहुंचे थे. उसका दावा है कि अपहरण के बाद 60 लाख रुपये दिए जा चुके हैं, लेकिन अब भी 1 करोड़ रुपये की मांग की जा रही है.
तीनों एजेंट के माध्यम से अमेरिका जा रहे थे. उनकी पहचान मेहसाणा के वडसमा गांव निवासी रुत्विक जंसारी, मेहसाणा की मूल निवासी और वर्तमान में अहमदाबाद में रह रही ममता चावड़ा तथा गांधीनगर निवासी मयूरी के रूप में हुई है.
पुलिस के मुताबिक, परिवार ने बताया कि तीनों ने अचानक जवाब देना बंद कर दिया था. इसके बाद एक शख्स ने परिवार से संपर्क किया और फिरौती की मांग की. गोजरिया के किरीटभाई चौहान की बेटी को बार-बार अमेरिकी वीजा नहीं मिल पा रहा था. इसके बाद परिवार ने एक एजेंट से संपर्क किया.
उनके परिवार इस मामले में सरकार से दखल देने की मांग कर रहे हैं. हम सरकार से अनुरोध करते हैं कि हमारे तीनों बच्चों को सुरक्षित वापस लाया जाए. ममता के पिता कीरितभाई चौहान ने मंगलवार को पत्रकारों को बताया कि परिवार ने तीनों को अमेरिका भेजने के लिए एक एजेंट को प्रति व्यक्ति लगभग 70 लाख रुपए दिए थे.
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नीला ड्रम मर्डर केस में कोर्ट का बड़ा फैसला, मुस्कान-साहिल दोषी करार
मेरठ के चर्चित नीला ड्रम हत्याकांड में जिला जज की अदालत ने बुधवार को मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को सौरभ राजपूत की हत्या के मामले में दोषी करार दिया। कोर्ट ने दोनों को दोषी तो ठहराया है, लेकिन अभी सजा का ऐलान नहीं किया गया है। अब अदालत में दोनों को मिलने वाली सजा पर फैसला होना बाकी है।
यह मामला 3 मार्च 2025 का है। आरोप है कि मुस्कान ने डिनर में सौरभ को नींद की दवा दी थी। इसके बाद साहिल शुक्ला को बुलाया गया। आरोपों के मुताबिक, दोनों ने सौरभ की हत्या की और शव के चार टुकड़े कर उन्हें नीले ड्रम में रख दिया। ड्रम के ऊपर सीमेंट भरकर उसे सील कर दिया गया था। सौरभ 24 फरवरी 2025 को लंदन से मेरठ अपने घर लौटा था। अगले दिन पत्नी मुस्कान ने उसके लौटने की खुशी में घर पर पार्टी रखी थी। 28 फरवरी को परिवार ने बेटी पीहू का जन्मदिन भी मनाया था। इसके कुछ दिन बाद 3 मार्च को हत्या की घटना सामने आई।
आरोप है कि हत्या के अगले दिन 4 मार्च को मुस्कान अपनी बेटी पीहू को अपनी मां के घर छोड़कर साहिल के साथ हिमाचल चली गई थी। 17 मार्च को वह हिमाचल से वापस लौटी और अपने मायके पहुंचकर माता-पिता को घटना के बारे में बताया। इसके अगले दिन 18 मार्च को पुलिस इंद्रानगर स्थित घर पहुंची। यहां पुलिस को नीले ड्रम में सौरभ का शव मिला। इसके बाद पुलिस ने मुस्कान और साहिल को गिरफ्तार कर लिया। 19 मार्च को दोनों को आमने-सामने बैठाकर पूछताछ की गई और सौरभ के शव के चार टुकड़ों का पोस्टमार्टम कराया गया।
जांच के बाद पुलिस ने 12 मई को करीब 1,000 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की। इसमें 34 गवाहों का जिक्र किया गया था। 17 जून को मुस्कान और साहिल पर हत्या और सबूत मिटाने के आरोप तय किए गए। इसके बाद मामले में ट्रायल शुरू हुआ। जुलाई से नवंबर के बीच परिवार, पुलिस, डॉक्टर, डांसर और ड्रम बेचने वाले समेत कई गवाहों के बयान कोर्ट में दर्ज किए गए। 19 दिसंबर को कोर्ट में नीला ड्रम और ट्रॉली बैग भी पेश किए गए, जिन्हें मामले में महत्वपूर्ण सबूत बताया गया।
23 जनवरी 2026 को जियो के नोडल अधिकारी ने कोर्ट में कॉल डिटेल, चैट और मोबाइल लोकेशन से जुड़ी रिपोर्ट पेश की। 21 अप्रैल को आरोपों को लेकर सुनवाई हुई। दोनों आरोपियों ने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को मानने से इनकार किया। इसके बाद 22 मई से 17 सितंबर तक मामले में अंतिम बहस चली। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था।
पहले इस मामले में 19 सितंबर को फैसला सुनाया जाना था, लेकिन बाद में अदालत ने 30 सितंबर की तारीख तय की। बुधवार को कोर्ट ने मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को हत्या का दोषी करार दिया। हालांकि, अदालत ने अभी सजा का ऐलान नहीं किया है। अब दोनों आरोपियों को किस सजा का सामना करना पड़ेगा, इस पर कोर्ट के अगले आदेश का इंतजार है।
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सु्प्रीम कोर्ट ने कहा- पटाखों पर देशभर में पूरी तरह बैन नहीं, 15 अक्टूबर को अगली सुनवाई
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पटाखे चलाने के लिए 24 घंटे की अनुमति नहीं दी जा सकती, क्योंकि लगातार पटाखे चलने से बीमार लोगों, बुजुर्गों और बच्चों पर असर पड़ सकता है। अदालत अब पटाखों के प्रकार और उन्हें चलाने की समय-सीमा पर विचार करेगी। इस मामले में अगली सुनवाई 15 अक्टूबर को होगी।
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा कि पूरे देश में पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का उसका इरादा नहीं है। अदालत ने कहा कि दिवाली लोगों की भावनाओं से जुड़ा त्योहार है और इसे पूरी तरह नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि पटाखे चलाने के लिए 24 घंटे की अनुमति नहीं दी जा सकती। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि लगातार पटाखे चलने से बीमार लोगों, बुजुर्गों और बच्चों के स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है।
सुप्रीम कोर्ट अब इस बात पर विचार करेगा कि किस तरह के पटाखों की अनुमति दी जानी चाहिए। इसके साथ ही अदालत पटाखे चलाने की समय-सीमा को लेकर भी निर्देश तय कर सकती है, ताकि प्रदूषण को नियंत्रित किया जा सके।
अदालत का जोर ऐसा संतुलन बनाने पर है, जिससे लोगों की त्योहार मनाने की भावनाएं भी बनी रहें और स्वास्थ्य से जुड़ी चिंताओं का भी ध्यान रखा जा सके। कोर्ट ने संकेत दिया कि पटाखों को लेकर नियम तय करते समय दोनों पहलुओं को ध्यान में रखा जाएगा।
दिल्ली-NCR में पटाखों से होने वाले प्रदूषण को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। यह मामला 2015 से चल रहा है, जिसमें अदालत दिल्ली, उत्तर प्रदेश समेत उत्तर भारत के प्रदूषण प्रभावित इलाकों में अक्टूबर से जनवरी के दौरान पटाखों के इस्तेमाल को लेकर अलग-अलग निर्देश देती रही है। अब इस मामले में अगली सुनवाई 15 अक्टूबर को होगी।
मंदसौर। मंदसौर पुलिस ने देशव्यापी साइबर अपराध के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए एक खतरनाक अंतरराज्यीय साइबर ठग गिरोह का भंडाफोड़ किया है। पुलिस की विशेष टीम ने राजस्थान के जयपुर और बिहार के अरवल जिले में दबिश देकर मुख्य सरगना समेत कुल 6 शातिर अपराधियों को गिरफ्तार किया है। इस गिरोह ने देश के अलग-अलग राज्यों में बैठकर 100 से ज्यादा साइबर ठगी की वारदातों को अंजाम दिया है। पुलिस की शुरुआती जांच में ही 11 करोड़ रुपये से अधिक के ऑनलाइन फ्रॉड का सनसनीखेज खुलासा हुआ है।
पूरे मामले की शुरुआत एक पीड़िता की शिकायत से हुई, जिसे गिरोह ने मेट्रिमोनियल साइट के जरिए अपना शिकार बनाया था। आरोपी ने खुद को NRI बताकर युवती से दोस्ती की और शादी का झांसा दिया। इसके बाद युवती को महंगे विदेशी गिफ्ट भेजने का लालच दिया गया। फिर कस्टम ड्यूटी और प्रोसेसिंग फीस के नाम पर पीड़िता से अलग-अलग किस्तों में साढ़े 7 लाख रुपये ठग लिए गए। ठगी का अहसास होने पर जब पीड़िता ने पुलिस का रुख किया, तो जांच की परतें खुलती चली गईं।
जांच में सामने आया कि गिरोह ठगी की रकम को फर्जी नाम-पते पर खोले गए म्यूल बैंक खातों में ट्रांसफर करवाता था और तुरंत कैश निकाल लेता था। इस गिरोह ने 150 से अधिक फर्जी बैंक खातों और मोबाइल सिम कार्ड का इस्तेमाल किया था। शातिर अपराधी इतने चालाक थे कि जैसे ही कोई बैंक खाता पुलिस द्वारा फ्रीज किया जाता, वे उससे जुड़े मोबाइल, सिम, एटीएम और पासबुक को जलाकर या तोड़कर नष्ट कर देते थे।
पुलिस ने आरोपियों के ठिकाने से 22 एंड्रॉयड मोबाइल, 30 मोबाइल सिम और 5 एटीएम कार्ड बरामद किए हैं। इसके अलावा विभिन्न फर्जी बैंक खातों में जमा 8 लाख रुपये से अधिक की राशि को पुलिस ने तत्काल प्रभाव से फ्रीज करा दिया है। मंदसौर पुलिस के अनुसार, कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद यह फ्रीज की गई राशि पीड़िता को वापस दिलाने की कार्रवाई की जाएगी।
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गिरफ्तारी वारंट के बाद हरकत में आईं कलेक्टर, 5 दिन के अंदर याचिकाकर्ता को हुआ बकाया भुगतान
जबलपुर। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के एक्शन के बाद पन्ना कलेक्टर उषा परमार हरकत में आ गईं। गैर जमानती वारंट जारी होने के बाद 5 दिन के अंदर याचिकाकर्ता को बकाया भुगतान कर दिया गया। याचिकाकर्ता जवीन आरा रिजवी को 3,15,548 रुपये का एरियर भुगतान मिल गया है।
भुगतान के बाद कलेक्टर ने हाईकोर्ट में हलफनामा जमा करा दिया है। उन्होंने वारंट वापस लेने और अवमानना कार्रवाई समाप्त करने की गुहार लगाई है।बता दें कि पन्ना कलेक्टर उषा परमार को अवमानना मामले में हाईकोर्ट ने गैर-जमानती गिरफ्तारी वारंट जारी किया था।
कोर्ट के आदेश के बाद भी याचिकाकर्ता को भुगतान नहीं करने पर कोर्ट ने यह बड़ा फैसला लिया था। मामले की अगली सुनवाई 30 सितंबर को होगी।
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दो आधार कार्ड के फेर में 16 साल के आशीष का भविष्य अटका, अब स्कूल में दाखिले को मोहताज
सतना। सतना में एक दस्तावेजी गलती अब 16 वर्षीय छात्र आशीष कुमार कोल की पढ़ाई पर भारी पड़ रही है। सतना जिले के कोठी वार्ड क्रमांक-02 निवासी आशीष के नाम से कथित तौर पर दो आधार कार्ड बन गए थे। बाद में दोनों आधार कार्ड निरस्त हो गए, लेकिन इसके बाद छात्र के सामने नई मुश्किल खड़ी हो गई। आधार से जुड़ी समस्या के कारण अब उसका विद्यालय में दाखिला तक नहीं हो पा रहा है।
परिजनों के मुताबिक, आशीष के आधार कार्ड से जुड़ी समस्या के समाधान के लिए उसके पिता ने स्थानीय स्तर से लेकर जिला और प्रदेश स्तर तक अधिकारियों के चक्कर लगाए। समस्या का समाधान नहीं होने पर वे सतना से देश की राजधानी दिल्ली तक पहुंचे, लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद अभी तक आशीष की पहचान से जुड़ी समस्या का स्थायी निराकरण नहीं हो सका है।
करीब 16 वर्षीय आशीष पढ़ाई जारी रखना चाहता है, लेकिन आधार संबंधी दस्तावेजी समस्या उसके रास्ते में बाधा बन गई है। परिजनों का कहना है कि आधार कार्ड की स्थिति स्पष्ट नहीं होने के कारण विद्यालय में प्रवेश नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में एक नाबालिग छात्र की पढ़ाई और भविष्य दोनों प्रभावित हो रहे हैं।
आशीष के पिता का कहना है कि बेटे की समस्या के समाधान के लिए उन्होंने कई कार्यालयों और अधिकारियों से संपर्क किया। स्थानीय स्तर पर समाधान नहीं होने के बाद वे दिल्ली तक गए, लेकिन इसके बावजूद समस्या जस की तस बनी हुई है। परिवार अब इस उम्मीद में है कि संबंधित विभाग मामले को गंभीरता से लेकर जल्द समाधान निकालेगा।
परिजनों ने प्रशासन और संबंधित अधिकारियों से मामले की जांच कर आशीष की पहचान संबंधी समस्या का जल्द समाधान कराने की मांग की है, ताकि उसका विद्यालय में दाखिला हो सके और पढ़ाई बाधित न हो। परिवार का सवाल है कि यदि दस्तावेजी प्रक्रिया में गलती हुई है, तो उसका खामियाजा एक छात्र को अपनी पढ़ाई रोककर क्यों भुगतना पड़े?
मामला संज्ञान में आने के बाद रघुराज नगर एसडीएम एलआर जांगड़े और कोठी तहसीलदार प्रज्ञा दुबे ने संबंधित अधिकारियों से बात कर जल्द समस्या का निराकरण कराने की बात कही है। अब देखना होगा कि अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद आशीष की आधार संबंधी समस्या कब तक सुलझती है और उसे दोबारा स्कूल में दाखिला मिल पाता है।
ग्वालियर. शहर के ढोली बुआ पुल क्षेत्र में शनिवार रात अचानक सड़क में लंबी और चौड़ी दरारें उभरने से आसपास रहने वाले परिवारों में दहशत फैल गई. मामला केवल सड़क क्षतिग्रस्त होने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि कुछ ही समय में आसपास के चार मकानों में भी दरारें दिखाई देने की शिकायत सामने आई. घनी आबादी वाले इलाके में जमीन और निर्माणों में एक साथ दरारें दिखाई देने के बाद लोग घरों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हो गए. नगर निगम के अधिकारी रात में मौके पर पहुंचे, लेकिन सड़क धंसने की वास्तविक वजह को लेकर नगर निगम और लोक निर्माण विभाग के स्तर पर अलग-अलग बातें सामने आई हैं.
वार्ड क्रमांक 39 के दतिया वाले मोहल्ले में शनिवार रात सड़क की दरारें अचानक चौड़ी होने लगीं. स्थानीय लोगों के मुताबिक इसकी शुरुआत पहले ही हो गई थी, लेकिन रात तक स्थिति ज्यादा गंभीर दिखाई देने लगी. सड़क पर लंबी दरारें बनने के बाद आसपास बने मकानों में भी दीवार, आंगन, रसोई और अन्य हिस्सों में दरारें दिखाई देने लगीं.
स्वर्ण रेखा के नजदीक बसा यह क्षेत्र घनी आबादी वाला है. ऐसे में सड़क के धंसने और मकानों के क्षतिग्रस्त होने की आशंका ने लोगों की चिंता बढ़ा दी. स्थानीय निवासियों ने नगर निगम को इसकी सूचना दी, जिसके बाद क्षेत्रीय अधिकारी संजीव झा सहित संबंधित अधिकारी मौके पर पहुंचे.
प्रारंभिक जानकारी में चार मकानों में दरारें आने की शिकायत सामने आई है. लीला शाक्य के मकान के आंगन, रसोई और बाथरूम में दरारें दिखाई देने की बात कही गई है. गणेश शाक्य के कमरे और रसोई, नारायण कन्नोजिया के आंगन और बाथरूम तथा शालिनी ढेरे के मकान की बाउंड्रीवाल में दरार आने की शिकायत अधिकारियों से की गई है.
रिहायशी मकानों में दरारें आने के कारण मामला अब केवल सड़क की मरम्मत तक सीमित नहीं रह गया है. प्रभावित परिवारों के लिए सबसे बड़ा सवाल यह है कि उनके मकान फिलहाल कितने सुरक्षित हैं और जमीन में आई हलचल आगे बढ़ेगी या यहीं रुक जाएगी.
स्थानीय निवासियों का कहना है कि इलाके में एलिवेटेड रोड परियोजना से संबंधित गतिविधियों के बाद सड़क की स्थिति में बदलाव दिखाई देना शुरू हुआ. लोगों का आरोप है कि पिलर निर्माण से जुड़े काम के लिए स्वर्ण रेखा की दीवार के पास ग्राउंड बेस रैंप तोड़ा गया था. इसके बाद सड़क में दरारें दिखाई देने लगीं और शनिवार रात तक उनका आकार बढ़ गया.
नगर निगम के क्षेत्रीय अधिकारी संजीव झा ने भी स्थानीय लोगों से मिली जानकारी के आधार पर एलिवेटेड रोड से संबंधित खोदाई के कारण सड़क धंसने की आशंका का उल्लेख किया है. हालांकि इसकी तकनीकी पुष्टि अभी सामने नहीं आई है.
मामले में लोक निर्माण विभाग के सेतु संभाग का पक्ष अलग है. कार्यपालन यंत्री जोगिंदर यादव के अनुसार जिस स्थान पर निर्माण कार्य के कारण सड़क और मकानों को नुकसान पहुंचने की बात कही जा रही है, वहां हाल-फिलहाल कोई काम नहीं चल रहा था. उन्होंने मौके का निरीक्षण करने की बात कही है.
ऐसे में सड़क धंसने का वास्तविक कारण अभी स्पष्ट नहीं है. यह तकनीकी जांच के बाद ही तय हो सकेगा कि जमीन बैठने के पीछे निर्माण गतिविधि, मिट्टी की स्थिति, आसपास मौजूद संरचनाओं या किसी अन्य कारण की भूमिका रही है.
घटना ने निर्माणाधीन एलिवेटेड रोड के आसपास रहने वाले लोगों की सुरक्षा का सवाल भी खड़ा कर दिया है. सड़क में दरारों के साथ मकानों में नुकसान की शिकायत सामने आने के बाद क्षेत्र की जमीन और प्रभावित भवनों की तकनीकी जांच महत्वपूर्ण हो गई है.
स्थानीय लोगों के लिए तत्काल चिंता मकानों की सुरक्षा को लेकर है. वहीं, नगर निगम और पीडब्ल्यूडी के अलग-अलग दावों के बीच यह स्पष्ट होना बाकी है कि आखिर सड़क अचानक क्यों धंसी. अब विस्तृत निरीक्षण और तकनीकी जांच से ही यह तय हो सकेगा कि नुकसान का वास्तविक कारण क्या है और प्रभावित मकानों को आगे किसी तरह का खतरा तो नहीं है.
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शाही मस्जिद के प्रभावित हिस्से को हटाने का काम जारी: अब तक 8 FIR और 15 लोग गिरफ्तार
उज्जैन। “सिंहस्थ 2028” को लेकर सड़क मार्ग चौड़ीकरण के तहत बीच में आने वाली शाही मस्जिद का हिस्सा हटाने की कार्यवाही सोमवार को शुरू हुई थी, जो शाम 7 बजे तक लगातार जारी रही। इस दौरान 10 घंटे के भीतर कई घटनाक्रम सामने आए। देर रात को मुस्लिम धर्म गुरु व मस्जिद कमेटी के सदस्यों से पुलिस प्रशासन ने चर्चा की व यह तय हुआ कि आपसी सहमति से मस्जिद कमेटी के लोग मस्जिद का हिस्सा हटाएंगे।
सोमवार की सुबह मस्जिद का हिस्सा हटाने का कार्य शुरू हुआ। इस दौरान कुछ लोगों ने सोशल मीडिया पर भ्रामक जानकारी पोस्ट की और यह बताया कि मस्जिद पर बुलडोजर चल रहा है। पूरी मस्जिद को हटाया जा रहा है। जिससे लोग भड़क गए और कुछ उपद्रवियों ने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की व पथराव किया। पथराव की घटना करीब 3 से 4 बार हुई। इस दौरान पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े व लाठी चार्ज किया, बल प्रयोग कर मामला शांत कराया।
वहीं दूसरी ओर भ्रामक जानकारियों को लेकर शहर काजी ने वीडियो जारी किया और स्पष्ट किया कि पुलिस प्रशासन हमारी सहमति से काम कर रहे हैं। कोई भी अफवाह ना फैलाएं। शहर काजी के इस बयान के बाद कुछ उपद्रवी लोग उनके घर पहुंचे और नारेबाजी की व पथराव शुरू कर दिया। तत्काल भारी संख्या में पुलिस बल ने शहर काजी का घर पूरी तरह सुरक्षा में लिया व उपद्रवियों पर जमकर लाठी बरसाई। दोपहर बाद से क्षेत्र में लगातार शांति का माहौल बना रहा।
पूरे घटनाक्रम को लेकर एसपी प्रदीप शर्मा ने कहा कि शाही मस्जिद कमेटी के सदस्यों की ओर से आपसी सहमति से मस्जिद का हिस्सा सुबह 8:45 से शाम 7:00 बजे तक तोड़ा गया है। यह कार्रवाई लगातार जारी है। कुछ असंतुष्ट लोगों ने विरोध किया था परंतु भारी पुलिस बल तैनात होने से पूरी स्थिति को नियंत्रण में किया गया। करीब ढाई हजार पुलिस कर्मी व आधिकारिक तैनात हैं।
उन्होंने बताया कि इस मामले में कुल 8 FIR दर्ज की गई है। जिसमें से एक FIR शहर काजी की ओर से दर्ज करवाई गई है। काजी साहब के घर पर नारेबाजी व उपद्रव किया गया था, इस मामले में 11 लोगों के खिलाफ केस दर्ज हुआ है, जिसमें से 3 नामजद है व बाकी अन्य है। माहौल खराब करने में कुछ सोशल मीडिया अकाउंट की भी भूमिका सामने आई है। ऐसे पांच सोशल मीडिया एकाउंट के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया गया है। 100 से अधिक कंटेंट डिलीट करवाए गए है। सभी FIR में अभी तक 20 नामजद आरोपी है। जिसमें से 15 आरोपी गिरफ्तार कर लिए गए है।
कलेक्टर रोशन कुमार सिंह ने कहा कि सड़क चौड़ीकरण का कार्य मास्टर प्लान के तहत हो रहा है। मस्जिद का हिस्सा कमेटी के लोग खुद ही हटाने का काम कर रहे है। सोशल मीडिया पर भ्रामक जानकारी फैलाई जा रही है। ऐसे लोगों के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है। कोई भी व्यक्ति सोशल मीडिया की भ्रामक जानकारी को सत्य ना माने और ना ही अन्य जगह फैलाएं। हाईकोर्ट की ओर से शाही मस्जिद की एक याचिका को खारिज करते हुए नगर निगम के पक्ष में फैसला दिया है।
दिल्ली में नए मुख्यमंत्री की घोषणा के साथ ही नए कैबिनेट में शामिल होने वाले चेहरों को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं. आतिशी 21 सितंबर को मुख्यमंत्री पद की शपथ ले सकती हैं. अरविंद केजरीवाल के इस्तीफे के बाद उम्मीद जताई जा रही थी कि उनका मंत्री मंडल भी इस्तीफा दे सकता है, लेकिन अब ऐसी खबरें सामने आ र
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मोहन कैबिनेट में दमोह-कटनी फोरलेन को मंजूरी, अग्निवीरों को सरकारी नौकरियों में मौका सहित ये निर्णय हुए
भोपाल. मध्यप्रदेश कैबिनेट मीटिंग मंगलवार को सीएण, डा. मोहन यादव की अध्यक्षता मे आयोजित की गई, जिसमेंं कई बड़े फैसले लिए गए। बच्चों की स्कूल ड्रेस खरीदने के लिए पेरेंट्स के खातों में सीधे पैसे भेजे जाएंगे। मप्र सरकार 600 रुपये ड्रेस के हिसाब से कुल 348 करोड़ रुपये की राशि खर्च करेगी। सीएम मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई मप्र कैबिनेट मीटिंग में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गई।
मंत्री चैतन्य कश्यप ने बताया कि कक्षा 1 से लेकर 8 तक 9.58 लाख का स्टूडेंट्स को स्कूल ड्रेस बनाकर दिए जाने की योजना थी, लेकिन क्वालिटी को लेकर इसकी संभावना नहीं बनी। बच्चों के लिए देरी करना ठीक नहीं है, इसलिए 600 रुपये प्रति स्कूल ड्रेस के हिसाब से भुगतान किया जाएगा। डीबीटी के जरिए पर पेरेंट्स के खातों में पैसे भेजे जाएंगे। अगले साल दूसरे नियम के तहत स्कूल के बच्चों के लिए स्कूल ड्रेस की व्यवस्था की जाएगी।
कैबिनेट ने दमोह-कटनी के बीच 105.01 किलोमीटर लंबी फोरलेन रोड के प्रस्ताव को मंजूरी दी। करीब 4,400 करोड़ रुपये की लागत से फोरलेन बनाई जाएगी। फोरलेन बनने के बाद दमोह-कटनी के बीच सफर का वक्त करीब डेढ़ घंटे कम होने का अनुमान है। अभी टू-लेन मार्ग पर भारी वाहनों की वजह से कई जगहों पर ट्रैफिक जाम होता है। ये फोरलेन बुंदेलखंड से लेकर विंध्य तक कनेक्टिविटी को और मजबूत करेगी।
मध्यप्रदेश में वर्दीधारी विभागों में अग्निवीरों के लिए भर्ती के नए मौके दिए जाएंगे। अग्निवीरों को अलग से आरक्षण देने की व्यवस्था बनाई जाएगी। इसके साथ ही पूर्व सैनिकों को भी इसका लाभ दिया जाएगा। वन विभाग के आरक्षक, गृह विभाग, विशेष सशस्त्र बल (स््रस्न), जेल प्रहरी और आबकारी विभाग के आरक्षक जैसे पदों पर अग्निवीरों को मौका दिया जाएगा। सरकार का कहना है कि इससे प्रदेश के युवाओं के लिए रोजगार के नए रास्ते खुलेंगे। सीएम मोहन यादव ने इसे प्रदेश में एक बड़ी नई पहल बताया है।
सिंगरौली में 450 बेड का अस्पताल तैयार किया जा रहा है। मेडिकल कॉलेज में रूक्चक्चस् की 150 सीटों की जरूरत थी, जिसे बढ़ाकर 155 किया गया है। इसके साथ ही अस्पताल और चिकित्सा सुविधाओं के लिए 355 करोड़ रुपए की मंजूरी दी गई है।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के लिए 3,113 करोड़ रुपए की राशि मंजूर की गई है। इसके साथ ही सिंचाई विभाग की 4 बड़ी योजनाओं को भी मंजूरी दी गई है। मां रतनगढ़-दतिया सिंचाई परियोजना से 78 हजार हेक्टेयर जमीन को सिंचाई सुविधा मिलेगी। इसके लिए 1,608 करोड़ रुपए की स्वीकृति दी गई है और योजना को 2027 तक पूरा करने का टारगेट रखा गया है। रामपुर मानव परियोजना के लिए 524 करोड़ रुपए मंजूर किए गए हैं। इस योजना से 44 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई की सुविधा पहुंचाने का लक्ष्य है और इसे भी 2027 तक पूरा किया जाना है।
उज्जैन में कान नदी का प्रदूषित पानी शिप्रा नदी में मिलने से रोकने के लिए चल रही योजना को आगे जारी रखने की मंजूरी दी गई है। इस योजना का 52 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। सागर जिले में करीब 80 हजार हेक्टेयर क्षेत्र को सिंचाई सुविधा देने वाली योजना का काम भी 2027 तक पूरा करने का टारगेट रखा गया है।
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