


ग्वालियर। क्या एक झूठे आरोप से किसी की जिंदगी बर्बाद हो सकती है? ग्वालियर में सामने आए एक मामले ने न सिर्फ POCSO जैसे सख्त कानून के कथित दुरुपयोग पर बहस छेड़ दी है, बल्कि पुलिस की जांच प्रक्रिया पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अदालत ने CCTV फुटेज के आधार पर दोनों आरोपियों को बरी करते हुए तत्कालीन पुलिस जांच अधिकारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए हैं। इस फैसले ने कानून के सही इस्तेमाल और निष्पक्ष जांच की जरूरत को फिर से चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
दरअसल, मामला जून 2023 का है, जहां थाटीपुर थाने में एक 13 साल की मासूम ने शिकायत कर आरोप लगाया था कि, 10 जून 2023 को उसके चाचा ने घर पर अकेला पाकर गलत काम करने का प्रयास किया। साथ ही चाचा के दोस्त एड संकेत साहू पर जबरन संबंध बनाने समेत अन्य गंभीर आरोप लगाये थे। पुलिस ने 15 अगस्त 2023 को दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। दोनों को लंबे समय तक जेल में भी रहना पड़ा। लेकिन कोर्ट सुनवाई के दौरान असली वजह सामने आई। जहां यह मामला पुराने पारिवारिक संपत्ति विवाद से जुड़ा हुआ पाया। इस दौरान पुलिस ने चार्जशीट भी पेश कर दी। लेकिन सुनवाई के दौरान अदालत में पेश CCTV फुटेज ने पूरी कहानी बदल दी।
फुटेज के मुताबिक जिस समय घटना होना बताई गई, उस दौरान नाबालिग घर से बाहर ही नहीं निकली, जबकि आरोपी चाचा भी अपने कमरे से बाहर नहीं आए। अदालत ने माना कि अभियोजन की कहानी उपलब्ध सबूतों से मेल नहीं खाती। विशेष POCSO अदालत ने दोनों आरोपियों को संदेह का लाभ नहीं, बल्कि सबूतों के अभाव में बरी करते हुए तत्कालीन जांच अधिकारी सब इंस्पेक्टर बलराम मांझी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए हैं।
कोर्ट ने यह भी माना कि दोनों भाइयों के बीच पहले से मकान और पैसों का विवाद चल रहा था और आरोपी पहले ही पुलिस अधिकारियों को लिखित में फंसाए जाने की आशंका जता चुका था। बहरहाल यह मामला केवल एक परिवार के विवाद तक सीमित नहीं है। यह सवाल भी खड़ा करता है कि यदि जांच निष्पक्ष और प्रॉपर जांच नहीं होगी तो सख्त कानूनों की विश्वसनीयता पर भी असर पड़ सकता है।
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अंधविश्वास में पार की क्रूरता की हदेंः गड़े धन के लालच में पिता ने की नाबालिग बेटी की हत्या
भोपाल। राजधानी भोपाल के देहात क्षेत्र से अंधविश्वास और लालच की एक ऐसी रूह कंपा देने वाली वारदात सामने आई है, जिसने मानवीय रिश्तों को शर्मसार कर दिया है। यहां एक कलयुगी पिता ने गड़े हुए धन (खजाने) को पाने के लालच में अपनी ही नाबालिग बेटी की बेरहमी से हत्या कर दी। सूखीसेवनिया थाना पुलिस और साइबर सेल की संयुक्त टीम ने मुस्तैदी दिखाते हुए इस अंधे कत्ल की गुत्थी को सुलझाकर मुख्य आरोपी पिता को गिरफ्तार कर लिया है।
पुलिस खुलासे के अनुसार, आरोपी पिता ने गड़े धन को हासिल करने के अंधविश्वास के चलते अपनी नाबालिग बेटी की बलि देने की साजिश रची। इस खौफनाक वारदात को अंजाम देने के लिए उसने अपने दो अन्य साथियों को भी शामिल किया। आरोपियों ने पहले मासूम बच्ची पर डंडे से ताबड़तोड़ हमला किया और फिर गला दबाकर उसकी हत्या कर दी।
वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपियों ने साक्ष्य छुपाने के उद्देश्य से बच्ची के शव को एक खेत में ले जाकर मिट्टी के नीचे दफना दिया था। घटना के कई दिनों बाद पुलिस ने दबिश देकर खेत से मृतिका का कंकाल बरामद किया, जिससे इलाके में सनसनी फैल गई।
हत्या की इस खौफनाक वारदात को अंजाम देने के बाद से ही आरोपी पिता लगातार फरार चल रहा था। पुलिस और साइबर सेल की टीम लगातार उसकी लोकेशन ट्रैक कर रही थी, जिसके बाद घेराबंदी कर आरोपी को विदिशा जिले के गंजबासौदा से गिरफ्तार कर लिया गया।
पुलिस की कड़ाई से की गई पूछताछ में आरोपी पिता ने अंधविश्वास और गड़े धन के लालच में अपनी बेटी की हत्या करने का जुर्म कबूल कर लिया है। पुलिस ने आरोपी की निशानदेही पर हत्या में इस्तेमाल किया गया डंडा भी बरामद कर लिया है।
पुलिस ने इस जघन्य हत्याकांड में मुख्य आरोपी और उसके साथियों के खिलाफ हत्या सहित भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न गंभीर व प्रासंगिक धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस मामले की आगे की कानूनी कार्रवाई और अन्य फरार आरोपियों की तलाश में जुटी हुई है।
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स्कूल बैग में छिपी थी नागिन, क्लासरूम में बच्चे ने देखा तो मची अफरा-तफरी
सागर मध्यप्रदेश में बारिश का मौसम आते ही सांप निकलने और सर्पदंश के मामले बढ़ गए हैं। ताजा मामला मध्यप्रदेश के सागर जिले के रहली ब्लॉक का है। यहां एक गांव में स्कूल में बच्चे के बैग से नागिन निकलने से स्कूल में हड़कंप मच गया। करीब डेढ़ फीट की नागिन बच्चे के स्कूल बैग में छिपी हुई थी। स्कूल के एक शिक्षक ने वक्त रहते बैग से नागिन को निकाला और सुरक्षित रेस्क्यू कर डिब्बे में बंद कर जंगल में ले जाकर छोड़ दिया। स्कूल बैग से नागिन निकलने का वीडियो भी सामने आया है जो तेजी से वायरल हो रहा है।
रहली ब्लाक अंतर्गत चांदपुर प्राथमिक स्कूल में एक बच्चे के बैग में नागिन निकलने से हड़कंप मच गया। यह घटना उस वक्त सामने आई जब बच्चे स्कूल में थे और रोज की तरह क्लास जारी थी। अचानक से एक बच्चे के बैग में कुछ बच्चों ने सांप देखा और बैग छोड़कर दूर हो गए। जैसे ही इसकी सूचना स्कूल में पदस्थ शिक्षक अभय यादव को लगी वो तुरंत ही कक्षा में पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया।
शिक्षक अभय यादव की सूझ बूझ और सतर्कता ने स्थिति को काबू में किया और बैग से नागिन निकाल कर बड़ी ही सतर्कता और सावधानी से नागिन को बिना कोई नुकसान पहुंचाए डिब्बे में बंद कर जंगल में छोड़ा। मौके पर मौजूद लोगों में से किसी ने इस पूरी घटना का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर अपलोड किया है जो तेजी से वायरल हो रहा है। स्कूल के शिक्षक अभय यादव के द्वारा बैग से नागिन का रेस्क्यू करने के साहसी कार्य की हर कोई तारीफ कर रहा है और उनकी पूरे क्षेत्र में चर्चा हो रही है।
बारिश का सीजन शुरू हो चुका है और बारिश के साथ ही सांपों का खतरा भी बढ़ गया है। बारिश होने से सांपों के बिलों में पानी भर जाता है जिसके कारण सांप अपने बिलों से निकलकर लोगों के घरों या फिर किसी सुरक्षित स्थान में घुस जाते हैं। ऐसे में सावधानी बरतना बेहद आवश्यक होता है, क्योंकि एक छोटी सी लापरवाही आपकी जान ले सकती है। सांप के काटने पर कुछ बातों को याद रखने से किसी की भी जान बचाई जा सकती है। इसको लेकर जागरूक होना बेहद जरूरी है।
सांप काटने पर क्या करें?
काटे गए अंग को जितना संभव हो स्थिर रखें।
तुरंत नजदीकी अस्पताल लेकर पहुंचें।
झाड़-फूंक, चीरा लगाने या जहर चूसने जैसी गलत विधियों से बचें।
यदि संभव हो तो सांप की पहचान करने की कोशिश करें, लेकिन उसे पकड़ने का प्रयास न करें।
स्कूटी की डिग्गी खोलते ही फन फैलाकर निकला
बैतूल। शहर में इंसान और उसके पालतू साथी के अटूट रिश्ते की एक भावुक घटना सामने आई है। यहां 67 वर्षीय प्रदीप जैन के निधन के बाद उनके 15 साल पुराने पालतू डॉग “डुग्गू” ने भी अंतिम यात्रा के दौरान दम तोड़ दिया। इस मार्मिक दृश्य ने अंतिम यात्रा में मौजूद सभी लोगों की आंखें नम कर दीं।
सिविल लाइन निवासी प्रदीप जैन का भोपाल स्थित एम्स अस्पताल में उपचार के दौरान निधन हो गया था। वे पिछले आठ दिनों से बीमार थे। उनका पार्थिव शरीर बैतूल लाया गया, जहां परिजन और परिचित अंतिम दर्शन के लिए जुटे। इस दौरान उनका पालतू डॉगी डुग्गू लगातार अपने मालिक के पार्थिव शरीर के पास रहने की कोशिश करता रहा। परिजनों ने उसे दूसरे कमरे में रखा, लेकिन वह पूरी रात बेचैन रहा और लगातार आवाजें निकालता रहा।
अगले दिन जब प्रदीप जैन की अंतिम यात्रा शुरू हुई तो डुग्गू भी अर्थी के पीछे-पीछे चल पड़ा। कुछ दूर चलने के बाद उसकी सांसें उखड़ गईं और उसने भी दम तोड़ दिया। यह देखकर वहां मौजूद लोग भावुक हो गए। इसके बाद परिजनों ने डुग्गू को भी सम्मानपूर्वक विदाई दी। प्रदीप जैन का अंतिम संस्कार हिंदू रीति-रिवाज से किया गया, जबकि डुग्गू को गंज मोक्षधाम परिसर के पास दफनाया गया।
प्रदीप जैन के छोटे भाई दिलीप जैन ने बताया कि डुग्गू पिछले 15 वर्षों से परिवार का हिस्सा था। वह अपने मालिक से बेहद जुड़ा हुआ था और उनके घर लौटते ही दौड़कर उनके पास पहुंच जाता था। परिवार के अनुसार, प्रदीप जैन की तबीयत खराब होने पर डुग्गू भी उदास और बीमार रहने लगता था। आखिरी समय तक उसने अपने मालिक का साथ नहीं छोड़ा। इस घटना ने एक बार फिर इंसान और पशु के बीच निस्वार्थ प्रेम, वफादारी और अपनापन का अनोखा उदाहरण पेश किया।
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शादी के मंडप में हड़कंप : मंडप से दूल्हे को उठा ले गई पुलिस, देखते रह गए घराती-बराती
इंदौर। शादी के मंडप में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब पुलिस दूल्हे को उठाकर अपने साथ ले गई। विवाह की रस्मों से पहले ही दूल्हे को हिरासत में लिया और थाने लेकर चली गई। खुशियों के बीच खाकी को देखकर हर कोई हैरान रह गए। वहां मौजूद लोगों में चर्चा होने लगी कि आखिर पुलिस ने दूल्हे को क्यों पकड़ा है। आप के मन में भी यही सवाल उठ रहे है, तो आइए हम आपको पूरा माजरा बताते है…
यह पूरा मामला मध्य प्रदेश का है। सीहोर में रवि विश्वकर्मा नाम के शख्स की शादी हो रही थी। विवाह के रस्मों की पूरी तैयारियां हो चुकी थी। इसी बीच पुलिस पहुंच गई, जिससे शादी के मंडप में हड़कंप मच गया। पुलिस ने दूल्हे को हिरासत में लिया और उसे थाने ले गई। बताया जा रहा है कि इंदौर के चंदन नगर की रहने वाली एक युवती ने रवि विश्वकर्मा पर दुष्कर्म का प्रकरण दर्ज कराया था।
इसी शिकायत पर पुलिस शादी के मंडप में पहुंची और दूल्हे को गिरफ्तार कर लिया। आरोप है कि रवि ने युवती को शादी का झांसा देकर उसके साथ संबंध बनाए थे। जब युवती ने शादी करने की बाद कही तो वह मुकर गया, जिसके बाद युवती ने थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई।
आरोपी रवि सीहोर जिले का रहने वाला है। वह इंदौर में अपनी बहन के घर आता-जाता था। इसी दौरान उसकी मुलाकात युवती से हुई थी। फिलहाल इंदौर की चंदन नगर पुलिस इस पूरे मामले की जांच पड़ताल में जुटी हुई है। रवि विश्वकर्मा (दूल्हे) से पूछताछ की जा रही है। विवेचना के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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नौ साल से बंद छात्रसंघ चुनाव पर एमपी हाईकोर्ट सख्त, सरकार से दो सप्ताह में मांगा जवाब
जबलपुर. मध्य प्रदेश के शासकीय विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में वर्ष 2017 से छात्रसंघ चुनाव नहीं कराए जाने के मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब तलब करते हुए दो सप्ताह के भीतर स्पष्ट स्थिति बताने के निर्देश दिए हैं. कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया और न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की युगलपीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि शैक्षणिक सत्र 2026-27 का अकादमिक कैलेंडर प्रस्तुत किया जाए, जिसमें छात्रसंघ गठन और चुनाव की पूरी प्रक्रिया का स्पष्ट उल्लेख हो. अदालत ने सरकार से इस संबंध में विस्तृत जानकारी भी मांगी है. मामले की अगली सुनवाई 3 अगस्त को निर्धारित की गई है.
यह मामला छात्रसंघ चुनाव नहीं होने को लेकर दायर जनहित याचिका से जुड़ा है. याचिकाकर्ता अदनान अंसारी की ओर से अधिवक्ता अक्षरदीप ने न्यायालय को बताया कि प्रदेश के शासकीय उच्च शिक्षा संस्थानों में वर्ष 2017 से छात्रसंघ गठन की प्रक्रिया पूरी तरह ठप पड़ी है. उन्होंने तर्क दिया कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा अनुमोदित लिंगदोह समिति की सिफारिशों का राज्य सरकार प्रभावी ढंग से पालन नहीं कर रही है, जिससे छात्रों के लोकतांत्रिक अधिकार प्रभावित हो रहे हैं.
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि शैक्षणिक सत्र 2026-27 का अकादमिक कैलेंडर अंतिम चरण में तैयार किया जा रहा है. सरकार ने भरोसा दिलाया कि इस बार कैलेंडर में छात्रसंघ गठन और चुनाव संबंधी प्रावधानों का स्पष्ट उल्लेख किया जाएगा. इस पर हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि दो सप्ताह के भीतर संशोधित अकादमिक कैलेंडर न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जाए ताकि यह स्पष्ट हो सके कि छात्रसंघ चुनाव कराने के लिए सरकार क्या व्यवस्था कर रही है.
याचिका में कहा गया है कि लंबे समय से छात्रसंघ चुनाव नहीं होने के कारण महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों में छात्र प्रतिनिधित्व की लोकतांत्रिक व्यवस्था प्रभावित हुई है. छात्र अपनी समस्याओं और मांगों को संस्थागत रूप से उठाने के अवसर से वंचित हैं. याचिकाकर्ता ने अदालत से अनुरोध किया कि सरकार को लिंगदोह समिति की सिफारिशों के अनुरूप नियमित छात्रसंघ चुनाव कराने के निर्देश दिए जाएं.
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि उच्च शिक्षा संस्थानों में लोकतांत्रिक प्रक्रिया को बनाए रखना आवश्यक है और यदि छात्रसंघ चुनाव संबंधी प्रावधान अकादमिक कैलेंडर का हिस्सा हैं तो उनका पालन भी सुनिश्चित होना चाहिए. अब सभी की निगाहें सरकार द्वारा प्रस्तुत किए जाने वाले अकादमिक कैलेंडर और आगामी सुनवाई पर टिकी हैं, जहां यह तय हो सकेगा कि प्रदेश के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में लगभग नौ वर्षों से बंद छात्रसंघ चुनाव दोबारा शुरू होने का रास्ता कब और कैसे खुलेगा.
एक बार फिर डिलीवरी बॉय की शर्मनाक करतूत का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है। मामला पश्चिम बंगाल के खड़दहा (Khardaha) का है। यहां डिलीवरी बॉय ने बीच सड़क पर महिला को प्राइवेट पार्ट दिखाया। हालांकि डिलीवरी बॉय ने जिस महिला को प्राइवेट पार्ट दिखाया, वो लेडी कॉन्स्टेबल निकली। इसके बाद लड़की आरोपी युवक को 400 मीटर दूर थाने तक घसीटकर ले गई। लेडी कॉन्स्टेबल की हिम्मतभरा यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।
खड़दहा के व्यस्त बीटी रोड पर महिला स्कूटी पर बैठी हुई थी। उस समय वह वर्दी में नहीं थी। इसी दौरान वहां एक डिलीवरी बॉय पहुंचा। युवक ने बीच सड़क पर खड़े होकर पैंट की चेन खोलकर महिला को अपना प्राइवेट पार्ट दिखाने लगा। साथ ही अश्लील इशारे भी किए। उसे शायद इस बात का अंदाजा नहीं था कि जिस महिला को वह परेशान कर रहा है, वह लेडी कॉन्स्टेबल है।
इसके बाद युवक की हरकत देखकर महिला कॉन्स्टेबल ने स्कूटी से उतरी और आरोपी के पास जाकर उसका कॉलर पकड़ लिया। इसके बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। महिला महिला कांस्टेबल आरोपी डिलीवरी बॉय का कॉलर पकड़कर उसे 400 मीटर दूर थाने तक घसीटकर ले गई। इल दौरान 400 मीटर तक लोग पूरे वाकये को हैरानी से देखते रहे
पुलिस ने आरोपी की पहचान आकाश घोष के रूप में की है। वह एक डिलीवरी एजेंट है। फिलहाल पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि इस मामले में भी आरोपों की जांच के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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रथ यात्रा के दौरान बड़ा हादसा: भीड़ में मची भगदड़ से एक श्रद्धालु की मौत, कई गंभीर
पुरी। विश्व प्रसिद्ध पुरी रथ यात्रा के दौरान आज उस समय एक अत्यंत दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण घटना सामने आई, जब भगवान जगन्नाथ के दर्शन के लिए उमड़े जनसैलाब में अत्यधिक भीड़ के कारण भगदड़ मच गई। बड़ादांड (Grand Road) पर मची इस भगदड़ में दबने और दम घुटने के कारण एक श्रद्धालु की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि एक अन्य श्रद्धालु गंभीर रूप से घायल हो गया है। इसके अलावा कई अन्य लोगों को भी मामूली चोटें आई हैं।
मिली जानकारी के अनुसार, महाप्रभु जगन्नाथ, भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के दर्शन तथा रथ खींचने के लिए देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु पुरी पहुंचे थे। रथ यात्रा के दौरान बड़ादांड पर भीड़ का दबाव अचानक बहुत ज्यादा बढ़ गया, जिससे कुछ जगहों पर स्थिति प्रशासन के नियंत्रण से बाहर हो गई। श्रद्धालुओं के बीच आगे बढ़ने की होड़ में अचानक धक्का-मुक्की और ठेलमठेल शुरू हो गई। इसी अफरा-तफरी के बीच पैर फिसलने से कुछ श्रद्धालु जमीन पर गिर गए और भीड़ के नीचे दब गए।
घटनास्थल पर तैनात पुलिस बल और विभिन्न स्वयंसेवी संगठनों (जैसे सेंट जॉन एम्बुलेंस) के सदस्यों ने बिना समय गंवाए मुस्तैदी दिखाई। उन्होंने तुरंत भीड़ के बीच से प्रभावित श्रद्धालुओं को सुरक्षित बाहर निकाला और एम्बुलेंस के जरिए नजदीकी जिला मुख्य अस्पताल पहुंचाया। अस्पताल में डॉक्टरों ने एक श्रद्धालु को मृत घोषित कर दिया, जबकि दूसरे गंभीर रूप से घायल व्यक्ति का आपातकालीन वार्ड में इलाज जारी है।
इस दुखद हादसे की खबर फैलते ही आस्था के इस महापर्व के बीच बड़ादांड पर शोक की लहर दौड़ गई है। हालांकि जिला और पुलिस प्रशासन की ओर से भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे, लेकिन इस अनपेक्षित हादसे ने सभी को झकझोर कर रख दिया है।
श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (SJTA) और जिला प्रशासन ने स्थिति को संभालते हुए सभी भक्तों से धैर्य बनाए रखने और सुरक्षा घेरे का पालन करते हुए अनुशासित तरीके से दर्शन करने की अपील की है।
हादसे के बाद प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गया है। बड़ादांड और रथों के आसपास सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक कड़ा कर दिया गया है। अतिरिक्त पुलिस बलों को तैनात कर भीड़ को नियंत्रित किया जा रहा है, ताकि आगे किसी भी प्रकार की अप्रिय स्थिति से बचा जा सके। पुलिस प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे सुरक्षाकर्मियों का सहयोग करें और धैर्यपूर्वक महाप्रभु के दर्शन करें।
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मुस्लिम शिक्षिका ने हिंदू बच्चों को कलमा पढ़ायाः लोगों का प्रदर्शन, शिक्षिका बर्खास्त, प्रिंसिपल की गिरफ्तारी की मांग
तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद से शॉकिंग मामला सामने आया है। यहां के प्राइवेट स्कूल में मुस्लिम शिक्षिका ने सेकंड क्लास के हिंदू बच्चों को कलमा पढ़ाया। साथ ही कलमा एक और दो पढ़कर आने का होमवर्क भी दे दिया। दूसरी कक्षा के मासूम बच्चों को दूसरे धर्म के धार्मिक होमवर्क देने पर विवाद बढ़ गया। घटना के सामने आते ही छात्र के माता-पिता. लोग और BJP नेताओं ने स्कूल प्रबंधन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। विवाद इतना बढ़ गया कि पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा। तनावपूर्ण माहौल को देखते हुए स्कूल प्रशासन ने आरोपी शिक्षिका को बर्खास्त कर दिया है। वहीं लोग प्रिंसिपल की गिरफ्तारी की मांग कर रहे हैं।
दरअसल पूरा मामला हैदराबाद के सईदआबाद का है। यहां प्राइवेट स्कूल ‘सक्सेस द स्कूल’ में मुस्लिम शिक्षिका ने सेकंड क्लास के हिंदू बच्चों को कलमा पढ़ाया। घटना की जानकारी उस समय बाहर आई, जब पीड़ित छात्र की रिश्तेदार की नजर बच्चे की डायरी पर गई।
इधर, धार्मिक होमवर्क की बात फैलते ही बुधवार को स्कूल परिसर के बाहर भारी संख्या में लोग और भाजपा कार्यकर्ता एकत्र हो गए। प्रदर्शनकारियों ने संस्थान के खिलाफ नारेबाजी करते हुए स्कूल की मान्यता तुरंत रद्द करने, इसे स्थायी रूप से बंद करने और प्रिंसिपल की गिरफ्तारी की मांग की। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए हैदराबाद पुलिस ने तुरंत कार्रवाई की और विरोध प्रदर्शन कर रहे कई भाजपा कार्यकर्ताओं व अभिभावकों को हिरासत में ले लिया। इस बीच, भाजपा नेता और जाने-माने अधिवक्ता करुणा सागर भी स्कूल परिसर पहुंचे, जिन्हें बाद में पुलिस ने हिरासत में ले लिया। करुणा सागर ने पुलिसिया कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा, “मैं यहां पुलिस से ये पूछने आया हूं कि इस मामले में अब तक प्राथमिकी (FIR) क्यों दर्ज नहीं की गई है? हमारी मांग है कि उस प्रिंसिपल को तुरंत गिरफ्तार किया जाए जो मासूम छात्रों पर यह सब थोप रहा है।
भाजपा नेता अंदेला श्रीरामुलु यादव ने स्कूल के पाठ्यक्रम पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि कक्षा दो के बच्चों को कलमा क्यों पढ़ाया जा रहा है? मासूम बच्चे खुद बयां कर रहे हैं कि स्कूल के भीतर क्या हुआ। उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम के पीछे एआईएमआईएम (AIMIM) नेताओं का हाथ होने का दावा किया।
वहीं मामला तूल पकड़ते ही सक्सेस ग्रुप ऑफ एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस के प्रबंधन ने सख्त कदम उठाते हुए सईदआबाद शाखा में मदर टीचर के पद पर कार्यरत शिक्षिका की सेवाएं 16 जुलाई से तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दीं। प्रिंसिपल द्वारा हस्ताक्षरित इस आदेश में साफ तौर पर कहा गया है कि उक्त शिक्षिका को भविष्य में भी इस ग्रुप के किसी भी संस्थान में रोजगार के लिए आवेदन करने से स्थायी रूप से प्रतिबंधित कर दिया गया है।
वहीं मामले में पीड़ित बच्चे की श्तेदार सुप्रिया गौड़ ने कहा कि कल, मैं अपने भतीजे को लेने स्कूल गई थी और मैंने देखा कि उसकी डायरी में कुछ ऐसा लिखा था जो सब्जेक्ट से जुड़ा नहीं था। मैंने एक टीचर को कलमा और सुक्रालफेट पढ़ने के लिए लिखते देखा। यह बिल्कुल गलत है… अगर आप शिक्षा दे रहे हैं, तो बस वही करें। अलग-अलग धर्मों, अलग-अलग पहलुओं से स्टूडेंट शिक्षा लेने आ रहे हैं। वे अच्छी शिक्षा के लिए आ रहे हैं… कलमा और सुक्रालफेट सब्जेक्ट का हिस्सा नहीं है, यह एक धार्मिक किताब है। इसे मिक्स न करें। अगर आप इसे सब्जेक्ट बनाना चाहते हैं, तो प्लीज़ भगवद गीता, बाइबिल को सब्जेक्ट के तौर पर रखें। मैं स्कूल मैनेजमेंट की बहुत शुक्रगुजार हूं क्योंकि उन्होंने इस पर सख्त एक्शन लिया है। हमने डायरी देखी है और हमने अपनी आवाज उठाई है। मुझे नहीं पता कि कितनी डायरियों में और कितने स्टूडेंट में ऐसा होता रहा है।
रायसेन। मध्य प्रदेश के रायसेन जिले में अंधविश्वास और लालच की एक रोंगटे खड़े कर देने वाली वारदात सामने आई है। गैरतगंज से 7 जुलाई से लापता साहूकार और प्रतिष्ठित व्यापारी विजय जैन की दफीना (गड़ा हुआ धन) निकालने के चक्कर में कुल्हाड़ी से गर्दन काटकर नरबलि दे दी गई। पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए महज छह दिनों के भीतर इस अंधे कत्ल का सनसनीखेज खुलासा कर तीन मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि कुछ अन्य संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ जारी है। समयऔर कैलेंडर
मृतक विजय जैन (42) नगर के एक अत्यंत प्रतिष्ठित और रसूखदार परिवार से ताल्लुक रखते थे। गौरतलब है कि वर्ष 2013 में उनके घर पर 3 करोड़ रुपये की एक बेहद चर्चित डकैती हुई थी, जिसने पूरे प्रदेश को हिलाकर रख दिया था। इस बड़ी वारदात के बाद से ही विजय जैन अपने परिवार का लेन-देन और साहूकारी का मुख्य कारोबार संभाल रहे थे।
9 जुलाई को विजय जैन की गुमशुदगी दर्ज होने के बाद थाना प्रभारी के नेतृत्व में पुलिस टीम जांच में जुटी थी। 13 जुलाई को ग्राम परासिया के पास नदी किनारे मिट्टी में दबा एक शव मिला, जिसके हाथ-पैर बाहर दिख रहे थे। आरोपियों ने गला रेतकर हत्या करने के बाद सबूत मिटाने की नीयत से शव को गड्ढे में दफना दिया था। घटनास्थल पर मिले कपड़ों, मोबाइल और उनकी एक कृत्रिम (पत्थर की) आंख के आधार पर परिजनों ने शव की पहचान विजय जैन के रूप में की। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसपी आशुतोष गुप्ता, एएसपी दीपक नायक, एफएसएल और डॉग स्क्वॉड की टीम ने तुरंत मौके पर पहुंचकर मुआयना किया और शव को पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया।
एसडीओपी बेगमगंज सोनाली गुप्ता और थाना प्रभारी निरीक्षक डी.पी. लोहिया की टीम ने जब संदेही प्रहलाद साहू को हिरासत में लेकर कड़ाई से पूछताछ की, तो रूह कंपाने वाली साजिश सामने आई। आरोपी प्रहलाद साहू स्वयं तांत्रिक क्रियाएं करता था और मृतक का परिचित था। दोनों के बीच अक्सर गड़ा धन (दफीना) निकालने को लेकर बात होती थी। आरोपियों को शक था कि परासिया नदी के चबूतरे के पास भारी धन गड़ा है।
योजना के तहत 7 जुलाई को प्रहलाद, उसके साथी करीम खान और बेटे टीकम साहू ने विजय को मोटरसाइकिल पर बैठाया और नदी किनारे ले गए। वहां तांत्रिक अनुष्ठान के दौरान प्रहलाद चिल्लाया, “धरती गर्म हो रही है, दफीना बलि मांग रहा है।” इसके बाद तीनों ने विजय को दबोचा और कुल्हाड़ी से गर्दन काटकर उसकी निर्मम हत्या कर दी। पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर वारदात में इस्तेमाल कुल्हाड़ी, फावड़ा, बाइक और मोबाइल जब्त कर लिए हैं और मामले की हर एंगल से विस्तृत विवेचना की जा रही है।
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5 घंटे की जटिल सर्जरी: सिर में आरपार धंसा त्रिशूल निकाला, ठीक होने के बाद शिवम बोला- अब मैं भी डॉक्टर बनूंगा
ग्वालियर। ग्वालियर के जयारोग्य अस्पताल के डॉक्टरों ने एक बेहद जटिल और चुनौतीपूर्ण ऑपरेशन को सफलतापूर्वक अंजाम देकर 14 साल के मासूम बच्चे की जान बचा ली। छतरपुर के रहने वाले शिवम के सिर और पैर में आरपार धंसा त्रिशूल करीब पांच घंटे की सर्जरी के बाद निकाला गया। सबसे बड़ी बात यह रही कि डॉक्टरों ने बच्चे की आंख और दिमाग को सुरक्षित बचा लिया। सफल ऑपरेशन के बाद बच्चा अब पूरी तरह स्वस्थ होकर अस्पताल से घर लौट चुका है। प्रदेश में इस तरह की यह पहली सफल सर्जरी बताई जा रही है।
दरअसल, छतरपुर जिले का रहने वाले 14 साल का शिवम बीती 25 जून को अपने घर की छत पर खेल रहा था। इसी दौरान उसका बैलेंस बिगड़ा और वह नीचे गिर गया। चुकी नीचे मंदिर था, ऐसे में वह त्रिशूल पर जा गिरा। त्रिशूल का एक सिरा बाईं आंख के पास से सिर के अंदर चला गया, जबकि दूसरा सिरा उसके बाएं पैर में आर-पार धंस गया। परिजन बच्चे को पहले स्थानीय अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां से उसे गंभीर हालत में ग्वालियर के जयारोग्य अस्पताल रेफर किया गया। खेल
जयारोग्य अस्पताल में न्यूरो सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉअविनाश शर्मा के नेतृत्व में न्यूरो सर्जरी, एनेस्थीसिया और ट्रॉमा विशेषज्ञों की टीम ने करीब पांच घंटे तक ऑपरेशन किया। डॉक्टरों ने बेहद सावधानी से त्रिशूल को दो अलग-अलग फेज में निकाला ताकि आंख, दिमाग और खून की नशो को कोई नुकसान न पहुंचे। ऑपरेशन के दौरान इंफेक्शन रोकने के भी विशेष इंतजाम किए गए।
न्यूरो सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉक्टर अविनाश शर्मा ने बताया कि यह ऑपरेशन इसलिए बहुत ज्यादा चुनौतीपूर्ण था क्योंकि त्रिशूल आंख और दिमाग के बेहद संवेदनशील हिस्से से होकर गुजरा था। थोड़ी सी भी चूक बच्चे की जान या उसकी आंख की रोशनी के लिए खतरा बन सकती थी। लेकिन डॉक्टरों की सतर्कता और टीमवर्क से ऑपरेशन सफल रहा और अब बच्चा पूरी तरह स्वस्थ होकर अपने घर लौट गया है। बच्चे ने स्वस्थ्य होने के बाद कहा कि उसे नई जिंदगी डॉक्टर्स ने दी है, वह भी अब बड़ा होकर डॉक्टर बनेगा।
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आस्था का सौदा: खैरुआ सरकार मंदिर में मन्नत के नारियलों को गुपचुप बेचने वाले पुजारी भाइयों पर FIR
सतना। अयोध्या के सुप्रसिद्ध राम लला मंदिर में चढ़ावा चोरी का मामला अभी ठंडा हुआ नहीं कि अब उनके भक्त हनुमान के मंदिर में मन्नत के लिए बाँधे गए नारियल का सौदा करने के का मामला सामने आया है। जी हां सतना जिले के नागौद में स्थित खेरूआ सरकार मंदिर में आस्था अटूट बंधन में बंधे नारियल का मंदिर के पुजारी द्वारा चोरी छिपे सौदा कर दिया गया है, नागौद क्षेत्र के सुप्रसिद्ध खैरुआ सरकार मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा अपनी इच्छापूर्ति और मन्नत के लिए बांधे गए नारियलों को चोरी-छिपे बेचने जैसे सनसनीखेज मामले से पूरे क्षेत्र के भक्तों में गहरा आक्रोश व्याप्त है। वही मामले का खुलासा होते ही पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए आरोपी पुजारी और उसके भाई के खिलाफ बी एन एस की विभिन्न धाराओं के तहत अमानत में ख़यानत का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
नागौद के खेरूआ सरकार मंदिर में बीते कुछ दशकों लोगों की आस्था प्रगाढ़ हुई है, जहां आम जनमानस से लेकर मध्य प्रदेश के कई मंत्रियों की आस्था का केंद्र रहा है। जहां लोगों की आस्था का इतना अटूट बंधन था वहां स्थित पुजारी परिवार ने उसका सौदा कर डाला पूरे मामले पर अब अकौना-साठिया गांव के निवासी बृजराज सिंह परिहार द्वारा नागौद पुलिस थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई गई कि मंदिर के पुजारी प्रशांत तिवारी और उनके भाई मोहित तिवारी ने दूर-दूर से आने वाले भक्तों की आस्था के प्रतीक इन नारियलों का गुपचुप तरीके से सौदा कर दिया है।
आरोप है कि दोनों भाइयों ने मन्नत के इन नारियलों को महज 7 हजार रुपये में बेच दिया है ,जब भक्तों को इस बात की भनक लगी, तो उन्होंने बेचे गए लाल कपड़ों में बंधे मन्नत के नारियलों से लोड एक यूपी पासिंग गाड़ी (UP93DT0759) को रंगे हाथों पकड़ लिया। आक्रोशित श्रद्धालुओं ने गाड़ी को तुरंत नागौद कोतवाली पुलिस के हवाले कर दिया है। पुलिस ने शिकायत की प्राथमिक जांच के बाद आरोपी प्रशांत तिवारी और मोहित तिवारी के खिलाफ अमानत में खयानत का मुकदमा दर्ज कर आगे की विवेचना शुरू कर दी है।
गौरतलब है कि खैरुआ सरकार मंदिर की देखरेख और संचालन का जिम्मा वर्तमान में न्यायालय के आदेशानुसार नागौद के एसडीएम (SDM) संभाल रहे हैं, जिन्हें कोर्ट ने रिसीवर नियुक्त किया है। नियम के मुताबिक, मंदिर परिसर में किसी भी तरह की खरीदी, बिक्री या अन्य निर्माण कार्यों के लिए एसडीएम की पूर्व अनुमति अनिवार्य है। मंदिर के पुजारियों को सीधे तौर पर कोई भी सामग्री बेचने या खरीदने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है। इसके बावजूद पुजारी बंधुओं द्वारा नियमों का उल्लंघन कर भक्तों की आस्था का सौदा करना अपने आप में आस्था पर गहरी चोट है देखना कबीले गौर होगा कि इस मामले पर जिला प्रशासन का आगे क्या सख्त रवैया होगा।
इंदौर । भरण-पोषण राशि का भुगतान नहीं करने के मामले में फैमिली कोर्ट इंदौर ने मंदसौर जिले में पदस्थ जॉइंट कलेक्टर राहुल चौहान के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। न्यायालय ने आदेश की अवहेलना को गंभीर मानते हुए उनके खिलाफ वसूली वारंट जारी करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने कहा कि प्रशासनिक पद पर बैठे अधिकारी से न्यायालय के आदेशों के पालन की जिम्मेदारी और अधिक अपेक्षित होती है। आदेश के बावजूद बकाया राशि जमा नहीं करने पर न्यायालय ने वसूली की कार्रवाई के निर्देश दिए।
मामला भरण-पोषण से जुड़ा है। निर्मला ने अपने पति राहुल चौहान (पिता- शंकरलाल चौहान) के खिलाफ दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा-125 के तहत फैमिली कोर्ट इंदौर में आवेदन दायर किया था। राहुल चौहान वर्तमान में मंदसौर जिले की गरोठ तहसील में जॉइंट कलेक्टर के पद पर पदस्थ हैं। मामले की सुनवाई के बाद फैमिली कोर्ट के प्रथम अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश ने 4 मई 2026 को अंतरिम भरण-पोषण के रूप में राहुल चौहान को पत्नी को 20 हजार रुपए प्रतिमाह देने का आदेश दिया था।
न्यायालय में पेश जानकारी के अनुसार आदेश जारी होने के बाद भी भरण-पोषण राशि का नियमित भुगतान नहीं किया गया। इसके चलते बकाया राशि बढ़कर 5 लाख 56 हजार रुपए तक पहुंच गई। पिछली सुनवाई के दौरान राहुल चौहान की ओर से केवल 40 हजार रुपए जमा किए गए थे। इसके बाद पत्नी ने शेष राशि की वसूली के लिए न्यायालय में आवेदन दिया।
सुनवाई के दौरान राहुल चौहान स्वयं न्यायालय में उपस्थित नहीं हुए। उनकी ओर से अधिवक्ता विनोद पाटीदार पेश हुए। अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि उन्हें अपने पक्षकार की ओर से आगे की पैरवी या व्यक्तिगत उपस्थिति को लेकर कोई निर्देश प्राप्त नहीं हुए हैं।
फैमिली कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि प्रतिपक्ष की ओर से प्रभावी उपस्थिति नहीं है और न्यायालय के आदेश के बावजूद बकाया भरण-पोषण राशि का भुगतान नहीं किया गया। कोर्ट ने इसे गंभीर मानते हुए राहुल चौहान के खिलाफ वसूली वारंट जारी करने के निर्देश दिए। साथ ही बकाया राशि की वसूली सुनिश्चित करने के लिए सख्त कार्रवाई के आदेश दिए गए हैं।
इस मामले में अगली सुनवाई 20 जुलाई 2026 को निर्धारित की गई है। न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि आदेश का पालन सुनिश्चित कराया जाएगा और बकाया राशि की वसूली की जाएगी।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार राहुल चौहान के खिलाफ इंदौर में दहेज प्रताड़ना से जुड़ी FIR भी दर्ज की गई है। उनकी पत्नी ने आरोप लगाया है कि शादी के बाद से ही दहेज के लिए उन्हें प्रताड़ित किया जाता रहा। पत्नी का यह भी आरोप है कि अधिकारी पद पर होने के कारण पहले शिकायत दर्ज कराने में परेशानी हुई।
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गोलीकांड : धीरेंद्र शास्त्री के भाई शालिग्राम गर्ग समेत 2 आरोपी गिरफ्तार, हथियार भी बरामद
छतरपुर। मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के राजनगर थाना क्षेत्र के कोड़ा गांव में हुए गोलीकांड मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस ने एफआईआर के आधार पर दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों में शालिग्राम गर्ग, जो बागेश्वर धाम के महंत पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के भाई हैं और अंकित मिश्रा शामिल हैं।
एडिशनल एसपी आदित्य पटले ने बताया कि इस मामले में कुल चार आरोपी हैं। इनमें तीन नामजद और एक अज्ञात आरोपी शामिल है। गिरफ्तार दोनों आरोपियों से पूछताछ की जा रही है। वहीं, फरार आरोपियों की तलाश के लिए पुलिस लगातार अलग-अलग जगहों पर दबिश दे रही है।
पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आया है कि घटना की वजह जमीन को लेकर हुआ विवाद था। इसी विवाद के दौरान गोली चली, जिसमें एक युवक घायल हो गया। पहले उसका इलाज जिला अस्पताल में किया गया, लेकिन हालत गंभीर होने पर उसे ग्वालियर रेफर कर दिया गया।
पुलिस ने कार्रवाई के दौरान घटना में इस्तेमाल किया गया हथियार भी बरामद कर लिया है। फिलहाल मामले की जांच जारी है। पुलिस का कहना है कि जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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न कॉल, न OTP... फिर भी खाते खाली! ग्वालियर में दो दिन में साइबर ठगों ने मचाई दहशत
ग्वालियर। साइबर ठगों की नजर आपके बैंक खातों पर है। अब तो बगैर काॉल और मैसेज के ही ठग खातों में सेंध लगा रहे हैं। पिछले दो दिन में साइबर ठगी की 6 वारदात सामने आई हैं। इसमें से पांच घटनाओं में ग्वालियर के अलग-अलग थानों में एफआइआर दर्ज हुई है।
नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल के जरिये ठगे गए लोगों का पैसा होल्ड कराने की कोशिश पुलिस कर रही है। फिलहाल ठगों का सुराग नहीं है।
सिंध विहार कालोनी में रहने वालीं वृद्धा के साथ 2.71 लाख रुपये की साइबर ठगी का मामला सामने आया है। कारोबारी विकास अग्रवाल की मां माया अग्रवाल का पंजाब नेशनल बैंक की नया बाजार स्थित शाखा में खाता है। उनके बैंक खाते में पति का मोबाइल नंबर लिंक है।
थाटीपुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत नया मोहल्ला में रहने वाले गौरव शाक्य के साथ 37 हजार 400 रुपये की ठगी हुई है। वह मोबाइल चार्ज पर लगा गए थे। जब बाजार से लौटकर घर पहुंचे तो खाते में से 37 हजार 400 रुपये निकल गए थे। इसकी शिकायत नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर की, फिर एफआइआर दर्ज कराई।
शताब्दीपुरम स्थित ग्लोरी विला में रहने वाले झलक जौहरी इंस्टाग्राम चला रहे थे। ऑनलाइन ट्रेडिंग की पोस्ट दिखी। इस पर क्लिक किया फिर वाट्स एप पर मीनाक्षी सिंह नाम की युवती का मैसेज आया। उसने एक स्कीम में निवेश करने की बात कही। उसने कहा कि रुपये लगाने पर कम समय में दोगुने हो जाएंगे। उन्होंने 60 हजार रुपये लगा दिए। मुनाफा दिखने लगा, जब रुपये निकालने का प्रयास किया तो मैसेज आया कि वह पैसा नहीं निकाल सकते। तब पता लगा कि ठगी हो गई।
जनकगंज स्थित न्यू शांति नगर में रहने वाले व्यापारी शाहिद रजा का पे-वालेट हैक कर 1.89 लाख रुपये निकाल लिए गए। वह एक मजदूर को भुगतान कर रहे थे। बार-बार प्रयास के बाद भी भुगतान नहीं हो पा रहा था। फिर पे-वालेट हैक हुआ और उनके खाते से 1.89 लाख रुपये निकल गए।
इंदरगंज थाना क्षेत्र के अंतर्गत उस्मानी मस्जिद के पास रहने वाले 25 वर्षीय राकेश प्रजापति के साथ 41 हजार रुपये की साइगर ठगी हुई। अंजान फाइल पर क्लिक किया था। इसके बाद मोबाइल बंद हुआ। जब मोबाइल खोला तो 41 हजार रुपये खाते से निकल गए। एपीके फाइल के जरिये खाते में सेंध लगाई गई।
माधोगंज इलाके में रहने वाले सन्नी पुत्र सुनील शर्मा के साथ ठगी हो गई। उनके मोबाइल पर साफ्टवेयर अपडेट करने का मैसेज आया। इस लिंक पर क्लिक किया तो मोबाइल हैक हुआ। इसके बाद खाते से 13 हजार 800 रुपये निकल गए।
ठग ने इनके पे-वालेट में रुपये डाले और दूसरी जगह ट्रांसफर किए। अब इनके पास अलग-अलग नंबरों से कॉल आ रहे हैं और कॉल करने वाले कह रहे हैं- उनके खाते में ठगी का पैसा आया है। उनकी सिम भी बंद कर दी है।
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