जबलपुर। संस्कारधानी जबलपुर के गोहलपुर थाना क्षेत्र से शादी के नाम पर धोखाधड़ी और प्रताड़ना की एक गंभीर वारदात सामने आई है। दुबई में एक नामी आईटी कंपनी में सेल्स मैनेजर के पद पर कार्यरत महिला के साथ उसके ही पति ने करीब 14 लाख रुपये के सोने-डायमंड के जेवर और नकदी हड़प ली। इतना ही नहीं, अब आरोपी पति महिला को अपने साथ रखने से इंकार करते हुए तलाक देने की धमकी दे रहा है। पीड़िता की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
जानकारी के अनुसार, पीड़िता अशविंदर कौर दुबई में आईटी सॉफ्टवेयर कंपनी में सेल्स मैनेजर हैं। उनकी पहचान फेसबुक के माध्यम से जबलपुर के त्रिमूर्ति नगर निवासी सुनील ठाकुर से हुई थी। धीरे-धीरे दोस्ती प्यार में बदली और साल 2020 में दुबई में सुनील से मुलाकात के बाद दोनों लिव-इन रिलेशनशिप में रहने लगे। इसके बाद दोनों ने 23 फरवरी 2025 को जबलपुर के एक गुरुद्वारे में पूरे रीति-रिवाज के साथ सिख परंपरा से शादी कर ली थी।
पीड़िता अशविंदर कौर ने पुलिस को बताया कि शादी के दौरान उन्होंने अपने पति सुनील ठाकुर को लगभग 9.32 लाख रुपये मूल्य के सोने और डायमंड के कीमती जेवर दिए थे, साथ ही 5 लाख रुपये नकद भी सौंपे थे। शादी के कुछ समय बाद ही आरोपी पति का व्यवहार बदल गया और उसने पीड़िता को अपने साथ रखने से साफ मना कर दिया। जब महिला ने अपने जेवर और नकदी वापस मांगी, तो आरोपी उसके साथ विवाद करने लगा और जबरन तलाक देने की धमकियां देने लगा।
पीड़िता की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए गोहलपुर पुलिस ने आरोपी पति सुनील ठाकुर के खिलाफ संबंधित धाराओं में आपराधिक प्रकरण दर्ज कर लिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है और साक्ष्यों के आधार पर आरोपी के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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एक फोटो, अलग-अलग नाम और 2222 से ज्यादा शादी ! करोड़ों के फर्जीवाड़े का खुला राज
टीकमगढ़ मध्यप्रदेश के सिरोंज में विवाह सहायता योजना के कथित करोड़ों फर्जीवाड़े में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की कार्रवाई के बाद एक बार फिर से निवाड़ी जनपद पंचायत में हुए फर्जीवाड़े का जिन्न निकल कर सामने आ गया है। यहां पर कोरोना शादियां कराकर विवाह सहायता काल में तीन साल के भीतर 2222 राशि बांटने का फर्जीवाड़ा सामने आया था।
अब जिम्मेदार इसकी जांच लोकायुक्त द्वारा किए जाने की बात कह रहे है।दरअसल निवाड़ी जनपद पंचायत में 2019 से 2021 के बीच में तीन वर्षों के दौरान 2222 से अधिक विवाह सहायता प्रकरण स्वीकृत किए किए गए थे, जबकि निर्धारित सीमा के अनुसार एक जनपद में वर्ष में करीब 85 प्रकरणों की स्वीकृति का प्रावधान बताया गया है। इस आधार पर स्वीकृत प्रकरणों की संख्या को लेकर सवाल खड़े हुए थे। कोरोना काल के दौरान भवन एवं अन्य संनिर्माण कर्मकार मंडल की विवाह सहायता योजना में नियमों को दरकिनार कर यह गोलमाल किया गया था।
जांच में कुछ ऐसे प्रकरण सामने आने थे, जिनमें एक ही फोटो पर नाम व जाति बदलकर अलग-अलग प्रकरण तैयार किए गए। आरोप है कि कुछ ऐसे लोगों के नाम पर भी राशि निकाली गई, जिनकी शादी पहले ही हो चुकी थी। इतना ही नहीं, कुछ प्रकरणों में सहायता राशि हितग्राही के बजाय अन्य व्यक्ति के खातों में पहुंचाए जाने के आरोप भी हैं।
तत्कालीन कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी के निर्देशन में कुछ विवाह सहायता प्रकरणों की जांच कराई गई थी। जांच के दौरान करीब 85 प्रकरणों में फर्जीवाड़े और अनियमितताओं की बात सामने आई थी। आरोप है कि इनमें एक ही फोटो को अलग-अलग नामों से लगाकर विवाह सहायता राशि स्वीकृत कराई गई। जांच के बाद जनपद पंचायत में रखे विवाह सहायता से संबंधित फार्म एवं रिकॉर्ड जलने और तत्कालीन जनपद पंचायत सीईओ द्वारा इसकी सूचना थाना कोतवाली निवाड़ी को दिए जाने की जानकारी भी सामने आई थी।
जिला पंचायत के निर्देश पर पांच सदस्यीय जांच समिति ने जनपद पंचायत कार्यालय से थाना कोतवाली निवाड़ी को संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करने पत्र भेजा गया था, लेकिन मामला आगे नहीं बढ़ा और कार्रवाई फाइलों तक ही सीमित रह गई।
बारवाहा की रूपाली मिश्रा का कहना है कि सूची में उनका नाम 61वें नंबर पर था, इसके बावजूद राशि खाते में नहीं पहुंची। पिता शोभाराम मिश्रा का आरोप है कि रुपए नहीं देने पर नाम योजना से हटा दिया गया।
सिरोंज मामले के बाद निवाड़ी के मामले में भी ईडी से जांच पर लोगों का कहना है कि इतना बड़ा फर्जीवाड़ा होने, जांच से बचने रेकार्ड जलाने, एफआईआर के लिए पत्र लिखे जाने के बाद भी कार्रवाई न होना बताता है कि मामले में आरोपियों को प्रश्रय दिया जा रहा है।
विवाह सहायता मामले में लोकायुक्त जांच कर रही है। जिला पंचायत सीईओ उसके प्रभारी हैं। लोकायुक्त की जांच के बाद कार्रवाई की जाएगी।- जमुना भिडे, कलेक्टर, निवाड़ी।
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अपनी जगह से टस से मस नहीं हुए हनुमान जी... मंदिर टूटा, लेकिन बजरंगबली की प्रतिमा हटाने में मशीनें भी फेल
उज्जैन। सिंहस्थ कुंभ 2028 की तैयारियों के बीच उज्जैन में सड़क चौड़ीकरण के लिए करीब 170 साल पुराने हनुमान मंदिर का भवन तो तोड़ दिया गया, लेकिन मंदिर में विराजमान हनुमान जी की प्रतिमा को हटाने की कोशिश सफल नहीं हो सकी। आधुनिक मशीनों और तकनीकी विशेषज्ञों की मदद से कई प्रयास किए गए, लेकिन प्रतिमा अपनी जगह से नहीं हिली। मामला कंठाल चौराहे से छत्री चौक यानी बड़ा सराफा मार्ग का है। सिंहस्थ कुंभ 2028 से पहले शहर के पुराने हिस्से में सड़क चौड़ीकरण और यातायात व्यवस्था सुधारने का काम चल रहा है। इसी काम की जद में करीब 170 साल पुराने खड़े हनुमान मंदिर का भवन आया था।
प्रशासन ने मंदिर की चाहरदीवारी और भवन का हिस्सा हटा दिया। इसके बाद हनुमान प्रतिमा को सुरक्षित तरीके से दूसरी जगह ले जाने की कोशिश की गई। प्रतिमा को नुकसान न पहुंचे, इसके लिए तकनीकी विशेषज्ञों की मदद ली गई। इंदौर से इंजीनियरों और विशेषज्ञों की टीम भी बुलाई गई। विशेषज्ञों ने दो दिन तक प्रतिमा के आधार और आसपास की संरचना को समझा और उसे हटाने का प्रयास किया, लेकिन तमाम कोशिशों के बाद भी प्रतिमा अपनी जगह से नहीं हिली। अब प्रतिमा को टेंट लगाकर सुरक्षित रखा गया है। प्रशासन जल्दबाजी में कोई कदम उठाने के बजाय विशेषज्ञों की राय के आधार पर आगे की तकनीक तय करने की तैयारी कर रहा है।
प्रतिमा के आधार की स्थिति जानने के लिए प्रशासन की ओर से करीब डेढ़ फीट गहरा गड्ढा भी खोदा गया है। इसके जरिए यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि प्रतिमा किस तरह स्थापित है और उसके नीचे की संरचना कैसी है। प्रशासन के मुताबिक प्रतिमा को किसी तरह का नुकसान पहुंचाए बिना सुरक्षित तरीके से दूसरी जगह स्थापित करना प्राथमिकता है। प्रस्तावित तौर पर प्रतिमा को टंकी चौक पर स्थापित करने की योजना बताई जा रही है।
प्रतिमा को हटाने की कोशिश की जानकारी स्थानीय लोगों और हिंदू संगठनों तक पहुंचने के बाद विरोध शुरू हो गया। मंगलवार शाम मंदिर परिसर में सैकड़ों श्रद्धालु पहुंचे। यहां महाआरती की गई, ढोल-ताशे बजाए गए और हनुमान चालीसा का पाठ हुआ। श्रद्धालुओं और हिंदू संगठनों का कहना है कि कई कोशिशों के बाद भी जब प्रतिमा अपनी जगह से नहीं हिली तो प्रशासन को इसे हटाने का फैसला दोबारा देखना चाहिए। उनका कहना है कि सड़क चौड़ीकरण जरूरी है, लेकिन प्रतिमा को हटाना ही एकमात्र रास्ता नहीं होना चाहिए।
मंदिर के पुजारी सुलभ शांतनु शर्मा और मंदिर समिति के सदस्यों ने भी प्रतिमा हटाने पर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि मंदिर के दोनों तरफ सड़क मौजूद है, इसलिए प्रशासन को सड़क की योजना पर दोबारा विचार करना चाहिए। पुजारी की मांग है कि अगर प्रतिमा को दूसरी जगह स्थापित करना है तो पहले लिखित में गारंटी दी जाए कि प्रतिमा को बिना किसी नुकसान के सुरक्षित तरीके से टंकी चौक पर स्थापित किया जाएगा। इसके बाद ही प्रतिमा को हटाने की अनुमति दी जाएगी।
उज्जैन के इतिहास और धार्मिक स्थलों के जानकार भगवती लाल राजपुरोहित के मुताबिक मंदिर की उम्र करीब 170 वर्ष बताई जा रही है। प्रतिमा पर लंबे समय से सिंदूर चढ़ाए जाने के कारण उसकी मूल आकृति और भाव-भंगिमा पूरी तरह स्पष्ट नहीं दिखाई देती। प्रतिमा के न हटने के बाद स्थानीय श्रद्धालु इसे भगवान हनुमान की इच्छा मान रहे हैं। वहीं प्रशासन और तकनीकी विशेषज्ञ इसे धार्मिक मान्यता के बजाय तकनीकी और संरचनात्मक चुनौती के रूप में देख रहे हैं। अब प्रशासन के सामने सड़क चौड़ीकरण और श्रद्धालुओं की भावनाओं, दोनों के बीच रास्ता निकालने की चुनौती है।



