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पुंगनूर. आंध्र प्रदेश के चित्तूर जिले स्थित पुंगनूर कस्बे से एक ऐसा दिल दहला देने वाला हादसा सामने आया है, जिसने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है. यहां एक घर में सो रहे परिवार के चार लोगों की बेहद दर्दनाक मौत हो गई. हैरानी की बात यह है कि इस हंसते-खेलते परिवार की जान किसी बीमारी या हमले ने नहीं ली, बल्कि एक ऐसी साइलेंट किलर गैस ने ली है जो न तो दिखाई देती है और न ही उसकी कोई गंध होती है. जब तक परिवार को इस खतरे का अहसास होता, तब तक उनकी सांसें थम चुकी थीं.
यह हृदय विदारक घटना पुंगनूर के त्यागराजू स्ट्रीट इलाके की है. जानकारी के अनुसार, यहां रहने वाले एक व्यक्ति ने हाल ही में अपनी बाइक के इंजन का काम (बोर) करवाया था. बाइक ठीक होने के बाद मैकेनिक ने उसे सलाह दी थी कि नए पार्ट्स को अच्छी तरह से सेट करने के लिए इंजन को कुछ समय तक लगातार चालू रखना होगा. इसी सलाह को मानते हुए उस व्यक्ति ने अनजाने में एक भयानक गलती कर दी. उसने अपनी बाइक को घर के अंदर लाकर खड़ा कर दिया और उसका इंजन चालू छोड़कर परिवार के साथ सोने चला गया.
रात के समय कड़ाके की ठंड थी, जिससे बचने के लिए परिवार ने घर के सभी दरवाजे और खिड़कियां पूरी तरह से बंद कर लिए थे. उन्हें इस बात का बिल्कुल भी अंदाजा नहीं था कि घर के अंदर खड़ी बाइक का चालू इंजन धीरे-धीरे एक जानलेवा गैस छोड़ रहा है. बंद कमरा होने के कारण धुएं को बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं मिला और कुछ ही देर में पूरा घर कार्बन मोनोऑक्साइड जैसी खतरनाक गैस से भर गया. यह गैस रंगहीन और गंधहीन होती है, जो इंसान के शरीर में चुपचाप ऑक्सीजन खत्म कर देती है. कार्बन मोनोऑक्साइड के प्रभाव से पति-पत्नी और उनके दो मासूम बच्चे नींद में ही बेहोश हो गए और फिर कभी नहीं उठ सके.
अगली सुबह जब काफी देर तक घर का दरवाजा नहीं खुला और रोजमर्रा की तरह कोई हलचल नहीं हुई, तो पड़ोसियों को शक हुआ. उन्होंने कई बार दरवाजा खटखटाया और आवाजें दीं, लेकिन अंदर से कोई सुगबुगाहट नहीं हुई. अनहोनी की आशंका के चलते तुरंत पुलिस को सूचना दी गई. मौके पर पहुंची पुलिस ने जब दरवाजा तोड़ा, तो अंदर का खौफनाक मंजर देखकर सबके होश उड़ गए. पूरा परिवार अचेत पड़ा था और कमरे में दमघोंटू गैस भरी थी. तुरंत डॉक्टरों की मेडिकल टीम बुलाई गई, लेकिन जांच के बाद उन्होंने चारों को मृत घोषित कर दिया.
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आचार संहिता लागू होने से पहले ममता का बड़ा फैसला! पुजारियों और मुअज्जिनों का भत्ता बढ़ाया
कोलकाता। पश्चिम बंगाल में चुनाव की तारीखों का ऐलान होने से ठीक पहले मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने दो अहम घोषणाएं की हैं। इन फैसलों में पुजारियों और मुअज्जिनों के मासिक भत्ते में बढ़ोतरी और राज्य कर्मचारियों के डीए (महंगाई भत्ता) एरियर को लेकर बड़ा ऐलान शामिल है। चुनाव आयोग आज कुछ ही समय में चार राज्यों और केंद्रशासित प्रदेश पुडुचेरी के लिए चुनाव कार्यक्रम घोषित करने वाला है। इनमें पश्चिम बंगाल भी शामिल है। तारीखों की घोषणा के बाद आचार संहिता लागू हो जाएगी। इसके बाद राज्य सरकार नई योजनाओं की घोषणा नहीं कर पाएगी। इसी कारण ममता बनर्जी की इन घोषणाओं को राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने यह घोषणा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर की। उन्होंने लिखा कि राज्य सरकार ने पुरोहितों (पुजारियों) और मुअज्जिनों के मासिक भत्ते में 500 रुपये की बढ़ोतरी करने का फैसला किया है। उन्होंने अपने संदेश में कहा कि इन लोगों की सेवा समाज के आध्यात्मिक और सामाजिक जीवन को मजबूत करती है। सरकार उनके योगदान को सम्मान देती है।
इस बढ़ोतरी के बाद पुजारियों और मुअज्जिनों का मासिक भत्ता बढ़कर 2,000 रुपये हो जाएगा। सरकार का कहना है कि यह कदम धार्मिक कार्यों से जुड़े लोगों को आर्थिक सहायता देने के उद्देश्य से उठाया गया है। पहले जो भत्ता दिया जा रहा था, उसमें अब 500 रुपये की वृद्धि की गई है।
मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि पुजारियों और मुअज्जिनों द्वारा सम्मान के लिए किए गए सभी नए आवेदन राज्य सरकार द्वारा मंजूर कर दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि जो आवेदन सही तरीके से जमा किए गए हैं, उन्हें स्वीकृति दे दी गई है। इससे और अधिक लोगों को इस योजना का लाभ मिल सकेगा।
पुजारियों और मुअज्जिनों के भत्ते के साथ-साथ मुख्यमंत्री ने राज्य कर्मचारियों के डीए एरियर को लेकर भी बड़ा ऐलान किया है। हालांकि विस्तृत जानकारी अलग से दी गई है, लेकिन सरकार के इस कदम को कर्मचारियों के लिए राहत के रूप में देखा जा रहा है। यह घोषणा ऐसे समय में की गई है जब राज्य में चुनावी माहौल बन चुका है और सभी दल अपनी तैयारियों में लगे हैं।
चुनाव आयोग की ओर से तारीखों की घोषणा के बाद आचार संहिता लागू हो जाएगी। इसका मतलब है कि राज्य सरकार किसी नई योजना या बड़े वित्तीय फैसले की घोषणा नहीं कर सकेगी। इसलिए तारीखों की घोषणा से ठीक पहले किए गए इन फैसलों को राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि चुनाव से पहले की गई ऐसी घोषणाएं मतदाताओं को संदेश देने का काम करती हैं।
राज्य सरकार का कहना है कि यह निर्णय समाज के विभिन्न वर्गों के हित में लिया गया है। सरकार का दावा है कि धार्मिक कर्मकांड से जुड़े लोग समाज में अहम भूमिका निभाते हैं और उनके काम को सम्मान मिलना चाहिए। ममता बनर्जी ने अपने संदेश में यह भी कहा कि उनकी सरकार समाज के सभी वर्गों के विकास के लिए काम करती है और यह फैसला उसी दिशा में एक कदम है।
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5 राज्यों में विधानसभा चुनाव का ऐलान: असम-केरल-पुडुचेरी में 9 अप्रैल को वोटिंग, बंगाल में 23 और 29 अप्रैल को होगा मतदान
देश के पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान कर दिया गया है। भारतीय निर्वाचन आयोग ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर चुनाव कार्यक्रम की जानकारी दी। भारतीय निर्वाचन आयोग के अनुसार असम, केरल और पुडुचेरी में 9 अप्रैल को मतदान होगा, तमिलनाडु में 23 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे, जबकि पश्चिम बंगाल में दो चरणों में 23 और 29 अप्रैल को मतदान कराया जाएगा। सभी राज्यों के चुनाव परिणाम 4 मई को घोषित किए जाएंगे।
आयोग के अनुसार पश्चिम बंगाल में मतदान दो चरणों में कराया जाएगा। पहले चरण की वोटिंग 23 अप्रैल और दूसरे चरण की वोटिंग 29 अप्रैल को होगी।
असम, केरल, पुडुचेरी और तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव एक चरण में कराया जाएगा। असम, केरल और पुडुचेरी की सभी सीटों पर 9 अप्रैल को मतदान होगा। वहीं तमिलनाडु में 23 अप्रैल का मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे। चुनाव आयोग ने मतदान के लिए सभी जरूरी तैयारियां पूरी करने के निर्देश दिए हैं।
नई दिल्ली में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और अन्य चुनाव आयुक्तों ने चुनाव कार्यक्रम की घोषणा की। आयोग ने बताया कि इन राज्यों में चुनाव की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं और निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार मतदान कराया जाएगा।
इन पांचों राज्यों में से चार राज्यों की विधानसभा का कार्यकाल मई में समाप्त हो रहा है। वहीं केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी की विधानसभा का कार्यकाल जून में पूरा होगा। इसी को ध्यान में रखते हुए चुनाव कार्यक्रम तय किया गया है, ताकि तय समय सीमा के भीतर नई सरकार का गठन किया जा सके।
चुनाव आयोग के कार्यक्रम के अनुसार सभी राज्यों के वोटों की गिनती 4 मई को होगी और उसी दिन परिणाम घोषित किए जाएंगे। इसके साथ ही इन राज्यों में नई सरकारों के गठन का रास्ता साफ हो जाएगा।

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अमेरिका में वीजा पाने के लिए फर्जी लूट करवाने के आरोप में 11 भारतीयों को गिरफ्तार किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि इन लोगों ने फर्जी डकैती और लूट करवाई, ताकि अमेरिका का U वीजा हासिल कर सके। U-वीजा उन लोगों को मिलता है, जो किसी गंभीर अपराध के शिकार होते हैं और जांच में पुलिस की मदद करते हैं। पुलिस ने कहा कि ये सभी अमेरिका के अलग-अलग राज्यों में अवैध रूप से रह रहे थे।
पुलिस के अनुसार, मार्च 2023 में एक आरोपी रामभाई और उसके साथियों ने मैसाचुसेट्स और अन्य स्थानों में कम से कम 6 सुविधा स्टोर, शराब दुकानों और फास्ट-फूड रेस्तरां में फर्जी डकैतियों को अंजाम दिया। इन फर्जी डकैतियों का उद्देश्य दुकानों के कर्मचारियों को U वीजा के लिए आवेदन करते समय यह झूठा दावा करने में सक्षम बनाना था कि वे एक अपराध का शिकार थे। गिरफ्तार किए गए एक आरोपी को पहले ही भारत भेजा जा चुका है।
आरोपियों की पहचान जितेंद्र पटेल (39), महेश पटेल (36), संजय पटेल (45), दीपिकाबेन पटेल (40), रमेशभाई पटेल (52), अमिताबहेन पटेल (43), रोना पटेल (28), संगीताबेन पटेल (36), मिंकेश पटेल (42), सोनल पटेल (42) और मितुल पटेल (40) के तौर पर हुई है। अमेरिकी न्याय विभाग के मुताबिक, 6 आरोपियों को बोस्टन की कोर्ट में पेश किया गया। दोषी साबित होने पर इन लोगों को 5 साल तक जेल और 2.31 करोड़ रुपये का जुर्माना हो सकता है।
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1 अप्रैल से हाईवे सफर महंगा! 3000 वाला सालाना पास करवाएगा ज्यादा खर्चा
नई दिल्ली।अगर आप नेशनल हाईवे पर नियमित रूप से ड्राइव करते हैं और सालाना टोल पास का इस्तेमाल करते हैं, तो आपके लिए एक छोटी बढ़ोतरी की खबर है। 1 अप्रैल 2026 से नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने सालाना टोल पास की कीमत में इजाफा कर दिया है।
पहले जिन पर्सनल वाहनों के लिए सालाना टोल पास की कीमत 3,000 रुपए थी, अब इसे 3,075 रुपए में खरीदा जा सकेगा। यह नई दर वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए लागू होगी। ध्यान रहे कि यह पास केवल उन वाहनों के लिए है जिनमें FASTag वैध और चालू है।
NHAI के नए नियम के अनुसार, सालाना टोल पास की वैधता अब 1 साल या 200 बार टोल पार करने तक की होगी, जो भी पहले पूरा होगा वही लागू होगा। मतलब अगर कोई वाहन 200 बार टोल पार कर लेता है, तो पास की वैधता खत्म हो जाएगी, भले ही साल पूरा न हुआ हो।
यह नियम उन यात्रियों के लिए फायदेमंद है जो नियमित रूप से नेशनल हाईवे पर सफर करते हैं। इससे टोल प्रशासन के काम में भी पारदर्शिता बढ़ेगी और पास का सही इस्तेमाल सुनिश्चित होगा।
NHAI ने सभी टोल प्लाजा और संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि 1 अप्रैल 2026 से नई दरें लागू की जाएं। साथ ही, यात्रियों को भी इसके बारे में पहले से जानकारी दी जाए।
सरकार के अनुसार, टोल शुल्क से जुड़ी दरों की हर साल समीक्षा होती है। यही प्रक्रिया इस साल भी अपनाई गई और सालाना टोल पास की कीमत में हल्की बढ़ोतरी की गई।
सालाना टोल पास की कीमत में यह मामूली वृद्धि मुख्य रूप से इन्फ्रास्ट्रक्चर, रख-रखाव और प्रशासनिक खर्चों को ध्यान में रखते हुए की गई है। नेशनल हाईवे की गुणवत्ता और सुविधाओं को बनाए रखने के लिए यह कदम जरूरी था।

पास लेने के फायदे
सुविधाजनक सफर: बार-बार टोल भरने की झंझट नहीं।
समय की बचत: टोल पर खड़े होने का समय बचेगा।
सालाना स्थिरता: एक साल तक निश्चित दर पर टोल का भुगतान।
नियमित यात्रियों के लिए किफायती: अगर आप साल भर में ज्यादा टोल पार करते हैं तो यह पास बहुत फायदेमंद है।
ध्यान देने वाली बातें
नया पास 1 अप्रैल 2026 से ही मान्य होगा।
यह सिर्फ निजी वाहनों (नॉन-कमर्शियल) के लिए है।
FASTag लगे बिना पास वैध नहीं होगा।
अगर 200 क्रॉसिंग पहले पूरी हो जाए तो पास की अवधि खत्म मानी जाएगी।
भविष्य में और बदलाव?
NHAI हर साल टोल दरों की समीक्षा करता है। इसलिए यह संभावना है कि भविष्य में भी पास की कीमत और वैधता में मामूली बदलाव हो सकते हैं। यात्रियों को सलाह दी जाती है कि वे अपने सफर की योजना बनाते समय इन बदलावों को ध्यान में रखें।
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सरकार ने सोनम वांगचुक पर लगा NSA हटाया : करीब 170 दिन बाद जोधपुर जेल से होंगे रिहा
नई दिल्ली/लेह। लद्दाख के प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता और इंजीनियर सोनम वांगचुक से जुड़ी बड़ी खबर सामने आई है। केंद्र सरकार ने उनके ऊपर लगाया गया राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) हटाने का फैसला लिया है। गृह मंत्रालय के अनुसार, यह आदेश तुरंत प्रभाव से लागू किया जाएगा।
इस फैसले के साथ ही वांगचुक की करीब साढ़े पांच महीने से चली आ रही हिरासत समाप्त होने का रास्ता साफ हो गया है। वह सितंबर 2025 से जोधपुर जेल में बंद थे और अब लगभग 170 दिन बाद उनकी रिहाई संभव हो सकेगी। सरकार का कहना है कि वांगचुक ने NSA के तहत निर्धारित हिरासत अवधि का लगभग आधा समय पूरा कर लिया है, इसलिए इस कानून को हटाने का निर्णय लिया गया है।
लद्दाख प्रशासन ने 26 सितंबर 2025 को सोनम वांगचुक को राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत हिरासत में लिया था। इससे दो दिन पहले यानी 24 सितंबर 2025 को लेह में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन के दौरान हिंसा भड़क गई थी। प्रशासन ने आरोप लगाया था कि इस हिंसा को भड़काने में वांगचुक की भूमिका रही। इसी आरोप के आधार पर उन्हें NSA के तहत गिरफ्तार किया गया और बाद में उन्हें जोधपुर की जेल में शिफ्ट कर दिया गया।
राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम एक ऐसा कानून है, जो सरकार को विशेष परिस्थितियों में किसी व्यक्ति को बिना मुकदमा चलाए हिरासत में रखने की अनुमति देता है। इस कानून के तहत अगर किसी व्यक्ति से देश की सुरक्षा, सार्वजनिक व्यवस्था या राष्ट्रीय हित को खतरा माना जाता है, तो प्रशासन उसे हिरासत में ले सकता है। NSA के तहत किसी व्यक्ति को अधिकतम 12 महीने तक नजरबंद रखा जा सकता है। हालांकि, सरकार समय-समय पर समीक्षा के आधार पर इस हिरासत को समाप्त भी कर सकती है।
सितंबर 2025 में लद्दाख में लंबे समय से चल रहा आंदोलन अचानक हिंसक हो गया था। लद्दाख के लोग लंबे समय से दो प्रमुख मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे थे-
संविधान की छठी अनुसूची के तहत क्षेत्र को संवैधानिक सुरक्षा मिले
इन मांगों को लेकर सितंबर के महीने में लगातार विरोध प्रदर्शन और धरने चल रहे थे।
स्थिति को काबू में करने के लिए पुलिस और सुरक्षाबलों को सख्त कदम उठाने पड़े। प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े गए, कई जगह लाठीचार्ज भी किया गया। हिंसा में 10 से 12 पुलिसकर्मी भी घायल हो गए। हालात बिगड़ने के बाद प्रशासन ने पूरे लेह शहर में कर्फ्यू लगा दिया।
सोनम वांगचुक लद्दाख के जाने-माने इंजीनियर, शिक्षाविद और सामाजिक कार्यकर्ता हैं। वह पर्यावरण संरक्षण, शिक्षा सुधार और हिमालयी क्षेत्रों के सतत विकास को लेकर लंबे समय से काम करते रहे हैं। इसके अलावा वांगचुक को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिली है। वह लद्दाख के पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक तकनीक के मेल से विकास के मॉडल को बढ़ावा देने के लिए जाने जाते हैं।
लद्दाख में चल रहे आंदोलन में वांगचुक एक प्रमुख चेहरा बनकर सामने आए थे। उन्होंने कई बार सार्वजनिक मंचों से कहा था कि लद्दाख की संस्कृति, पर्यावरण और स्थानीय अधिकारों की रक्षा के लिए संवैधानिक सुरक्षा जरूरी है। हालांकि, प्रशासन ने आरोप लगाया कि उनके आह्वान और भाषणों के कारण प्रदर्शन का माहौल उग्र हुआ, जिसके बाद उन्हें NSA के तहत हिरासत में लिया गया।
गिरफ्तारी के बाद सोनम वांगचुक को लद्दाख से राजस्थान के जोधपुर की जेल में भेज दिया गया था। पिछले करीब साढ़े पांच महीने से वे वहीं बंद थे। इस दौरान कई सामाजिक संगठनों और राजनीतिक नेताओं ने उनकी रिहाई की मांग भी उठाई थी।
गृह मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, सरकार ने स्थिति की समीक्षा के बाद यह फैसला लिया है। अधिकारियों का कहना है कि वांगचुक ने NSA के तहत निर्धारित हिरासत अवधि का लगभग आधा हिस्सा पूरा कर लिया है और वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए इस कानून को हटाने का निर्णय लिया गया है।
NSA हटाए जाने के बाद वांगचुक की रिहाई की प्रक्रिया जल्द पूरी की जा सकती है। हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि उनके खिलाफ अन्य कानूनी मामलों की स्थिति क्या होगी और रिहाई के बाद उन्हें किन शर्तों का पालन करना होगा।

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ओमान के सोहार शहर में हुए एक हमले में दो भारतीय नागरिकों की मौत हो गई और 10 अन्य घायल हो गए. इसकी जानकारी विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को दी. अतिरिक्त सचिव (खाड़ी) असीम आर. महाजन ने कहा कि कुल 11 लोग घायल हुए, जिनमें 10 भारतीय शामिल हैं.
ओमान के सोहार शहर में हुए एक हमले में 2 भारतीय नागरिकों की मौत हो गई। इस हमले में कुल 11 लोग घायल हुए, जिनमें से 10 भारतीय नागरिक हैं।
घायल हुए 10 भारतीयों में से 5 को अस्पताल से छुट्टी मिल चुकी है, जबकि 5 का इलाज जारी है। विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को इस घटना की जानकारी दी।
ओमान के सोहार शहर में हुए एक हमले में दो भारतीय नागरिकों की मौत हो गई और 10 अन्य घायल हो गए. इसकी जानकारी विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को दी. अतिरिक्त सचिव (खाड़ी) असीम आर. महाजन ने कहा कि कुल 11 लोग घायल हुए, जिनमें 10 भारतीय शामिल हैं.
घायलों में से पांच को अस्पताल से छुट्टी मिल चुकी है, जबकि बाकी पांच का इलाज चल रहा है. महाजन ने कहा, ‘मस्कट में एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना हुई है. मस्कट शहर के सोहर में हुए इस हमले में 2 भारतीय नागरिकों की मौत हो गई और 11 घायल हो गए; घायलों में से 10 भारतीय हैं. 5 लोगों को छुट्टी मिल चुकी है, जबकि 5 का इलाज चल रहा है.’
MEA के अनुसार, भारतीय अधिकारी इस घटना के संबंध में ओमान के अधिकारियों के संपर्क में हैं और स्थिति पर नजर रख रहे हैं. अधिकारियों ने बताया कि प्रभावित भारतीय नागरिकों को सहायता पहुंचाई जा रही है.
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‘कानून बनाया तो कोई महिलाओं को नौकरी नहीं देगा’, पेड पीरियड लीव पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से किया इंकार
कोर्ट ने मामले में सुनवाई करने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि महिलाओं को इतना कमजोर मत समझिए. आपकी मांग सुनने में सही लग सकती है, लेकिन यह महिलाओं का नुकसान ही करेगी।
सुप्रीम कोर्ट ने महिला कर्मचारियों को मासिक धर्म के दौरान अवकाश देने की याचिका को ठुकरा दिया। कोर्ट ने मामले में सुनवाई करने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि महिलाओं को इतना कमजोर मत समझिए. आपकी मांग सुनने में सही लग सकती है, लेकिन यह महिलाओं का नुकसान ही करेगी। अगर पेड पीरियड लीव को अनिवार्य किया गया, तो कोई उन्हें नौकरी नहीं देना चाहेगा।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता ने केंद्र सरकार को ज्ञापन दिया है। सरकार की तरफ इशारा करते हुए कहा कि सभी संबंधित सरकारों और संस्थाओं से चर्चा कर कुछ व्यवस्था बना सकती है। सीजेआई सूर्यकांत ने याचिकाकर्ता से कहा कि आप नहीं जानते कि इस तरह वर्कप्लेस पर उनके विकास और उनकी मैच्युरिटी को लेकर किस तरह की मानसिकता बनती है।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने सुनवाई करते हुए कहा कि ऐसी याचिकाएं महिलाओं को कमजोर दिखाती हैं और मासिक धर्म को एक बुरी घटना जैसा बनाती हैं। सीजेआई ने कहा कि इससे वर्कप्लेस पर महिलाओं के विकास पर गलत प्रभाव पड़ सकता है।
बता दें कि याचिकाकर्ता की तरफ से सीनियर एडवोकेट एम आर शमशाद ने दलील दी थी कि केरल सरकार ने स्कूलों में इस तरह की व्यवस्था बनाई है। साथ ही कई प्राइवेट कंपनियां भी स्वेच्छा से ऐसा कर रही हैं। इस दलील पर सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि अगर कोई कंपनी स्वेच्छा से ऐसा कर रही है, तो बहुत अच्छी बात है, लेकिन अगर आप इस चीज को कानून में शामिल करके जरूरी कर दोगे तो कोई महिलाओं को नौकरियां नहीं देगा, कोई उन्हें ज्यूडिशियरी या सरकारी नौकरियां नहीं देगा. उनका करियर खत्म हो जाएगा।
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LPG संकट : मिडिल ईस्ट तनाव का असर भारत की रसोई तक, सरकार ने उठाए 10 बड़े कदम
मिडिल ईस्ट में चल रहे ईरान-इजराइल संघर्ष के कारण भारत में गैस सप्लाई पर असर दिखने लगा है। तेल और गैस के लिए बेहद अहम समुद्री रास्ता स्ट्रेट ऑफ होर्मुज लगभग बाधित होने से देश में LPG सिलेंडर की कमी, बढ़ती कीमतें और लंबी कतारों की समस्या सामने आ रही है। कई जगह लोगों को सिलेंडर बुकिंग में देरी हो रही है और होटल-रेस्तरां कारोबार भी प्रभावित हुआ है।
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आयात करता है। हर दिन लगभग 25–27 लाख बैरल तेल सऊदी अरब, इराक, कतर और संयुक्त अरब अमीरात से आता है।
भारत की लगभग 55% LPG और 30% LNG भी इन्हीं देशों से आती है। युद्ध के कारण होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई, जिससे गैस और तेल की सप्लाई पर असर पड़ा है।
संकट से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने तुरंत कई फैसले लिए हैं, ताकि घरेलू उपभोक्ताओं को राहत मिल सके।
1. रिफाइनरियों को उत्पादन बढ़ाने का आदेश
सरकार ने देश की सभी सरकारी और निजी रिफाइनरियों को LPG उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिए हैं, ताकि घरेलू सप्लाई बनी रहे।
2. सिलेंडर बुकिंग का अंतर 21 से बढ़ाकर 25 दिन
पैनिक बुकिंग और जमाखोरी रोकने के लिए सरकार ने बुकिंग का अंतर 21 दिन से बढ़ाकर 25 दिन कर दिया है।
3. घरेलू उपयोग को प्राथमिकता
सरकार ने घरेलू LPG, PNG और वाहनों के लिए CNG को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए हैं। अस्पतालों और स्कूलों की जरूरतों को भी प्राथमिकता में रखा गया है।
4. कमर्शियल सिलेंडर की कमी पर समिति
होटल और रेस्तरां में इस्तेमाल होने वाले 19 किलो के कमर्शियल सिलेंडर की कमी दूर करने के लिए ऑयल मार्केटिंग कंपनियों की हाई-लेवल समिति बनाई गई है।
5. अतिरिक्त LPG सरकारी कंपनियों को देने का निर्देश
सरकार ने अतिरिक्त उत्पादित LPG को केवल इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम को देने के निर्देश दिए हैं, ताकि सप्लाई चेन स्थिर रहे।
6. कालाबाजारी पर सख्त कार्रवाई
देशभर में कालाबाजारी रोकने के लिए छापेमारी, जब्ती और लाइसेंस रद्द करने जैसी कार्रवाई की जा रही है। जरूरत पड़ने पर आवश्यक सेवा अनुरक्षण अधिनियम (Essential Services Maintenance Act) लागू करने की भी तैयारी है।
कमर्शियल LPG की कमी से बेंगलुरु, मुंबई और कोलकाता जैसे शहरों में होटल-रेस्तरां प्रभावित हुए हैं। कई रेस्तरां ने अपना मेन्यू छोटा कर दिया है, जबकि कुछ जगह गैस की कमी के कारण किचन अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा है।
सरकारी सूत्रों के मुताबिक फिलहाल पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना कम है। LPG में हाल ही में बढ़ी कीमतों के बाद अभी बड़ी वृद्धि की उम्मीद नहीं जताई जा रही है।
सरकार का कहना है कि घरेलू उपभोक्ताओं की जरूरतें सबसे पहले पूरी की जाएंगी। साथ ही होटल-रेस्तरां सेक्टर के लिए भी सप्लाई सामान्य करने की कोशिश जारी है। सरकार का दावा है कि वैकल्पिक देशों से तेज़ी से तेल-गैस खरीदकर देश में गैस की कमी नहीं होने दी जाएगी।

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नई दिल्ली। महाकुंभ से लाइमलाइट में आईं मोनालिसा की शादी को लेकर बड़ा विवाद खडा हो गया है। उन्होंने केरल में फरमान खान संग कोर्ट मैरिज की। मोनालिसा के इस फैसले ने उनकी डेब्यू फिल्म के डायरेक्टर सनोज मिश्रा को बड़ा शॉक दिया है। इस शादी के बाद उन्होंने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने बोलते हुए इस रिश्ते को लव जिहाद का नाम दिया है। उन्होंने ये भी कहा कि मैनेजर ने मोनालिसा का सौदा किया है। सनोज ने बताया कि उन्हें धमकियां मिल रही हैं।
सनोज ने इंस्टा पर एक पोस्ट लिखा। जिसमें कहा गया है कि मुझे सिर तन से जुदा करने की धमकी दी जा रही है। PFI (The Popular Front of India) ने जाल बनाकर केरल में मोनालिसा का लव जिहाद कराया जो कि इस्लामिक राजनीतिक संस्था है। सनोज का ये पोस्ट देखकर उनके फैंस की चिंता बढ़ गई है। वो सनोज का खुलकर सपोर्ट करते हुए मोनालिसा को ट्रोल कर रहे हैं। उनका कहना है मोनालिसा ने डायरेक्टर के साथ अच्छा नहीं किया। कमेंट बॉक्स में एक शख्स ने दावा किया कि फरमान PFI वर्कर और एक्टिविस्ट है। सनोज ने इससे पहले की गई पोस्ट में बताया था कितनी मुश्किलों के बाद उन्होंने ये मूवी बनाई थी। इसके लिए वो झूठे केस में जेल भी गए थे।
सनोज ने इंस्टा पोस्ट में लिखा था कि ये बगावत नहीं लव जिहाद है और मेरी जिंदगी का सबसे बुरा दिन. मोनालिसा आज फिर चर्चा में है और मैं मानसिक अवसाद में, क्योंकि एक गरीब जंगलों में रहने वाली लड़की, जो महाकुंभ में वायरल होने के बाद भाग कर अपने डेरा महेश्वर चली गई थी। मुझे उसकी गंगा जैसी पवित्रता अच्छी लगी और उसका प्रकृति जैसा रूप, मैंने उसको प्रशिक्षण देकर फिल्म में अभिनेत्री बनाने की घोषणा की। देश दुनिया ने स्वागत किया। लेकिन ये बात हमारे विरोधियों में शामिल वसीम रिजवी और उसका कर मीडिया में आने के जिज्ञासुओं को पसंद नहीं आई और मुझे झूठे आरोप में जेल भेज दिया। उद्देश्य यही था कि माननीय योगी आदित्यनाथ जी के महाआयोजन महाकुंभ को असफल करना।
उन्होंने कहा कि मैने जेल में रहकर फिल्म की कहानी को लिखा और जो कह रहे थे कि सनोज कभी फिल्म नहीं बनाएगा फिल्म पूरी कर उनके मुंह पर मैने इतनी विष्ठा वृत्ति की कि अब उनको कोई आरोप नहीं समझ आया कि उनको अब क्या करना चाहिए। सब एक दूसरे का बंद दरवाजा झांकते रहे। मेरे पास एक ही विकल्प था- मोनालिसा, जिसको मैं मां गंगा का अवतार मानता था। मोनालिसा का आज का उठाया हुआ कदम उसको बगावत लग रहा होगा लेकिन असल में ये लव जिहाद है, जिसका शिकार वो हो चुकी है। जिसमें वो तोतला शिक्षक भी शामिल है, जो मेरे द्वारा वेतन दिए जाने के बाद मोनालिसा का मैनेजर और दलाल बन चुका था। आज वो बेरोजगार हो गया। उसको मैंने मोनालिसा को शिक्षित करने के लिए चुना था, लेकिन बाद में वो दलाल बनकर उसका सौदा दक्षिण भारत में करने लगा था और बंजारा समुदाय से मेरी दूरी बना दी जिसका परिणाम आज सामने है।
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छत्तीसगढ़: LPG संकट पर विधानसभा में हंगामा, 30 कांग्रेसी विधायक निलंबित; कुछ देर बाद बहाल
छत्तीसगढ़ विधानसभा में गुरुवार को रसोई गैस सिलेंडर की कथित कमी को लेकर जमकर हंगामा हुआ। मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने प्रदेश में LPG सिलेंडर की किल्लत का मुद्दा उठाते हुए सदन में चर्चा की मांग की। जब चर्चा की अनुमति नहीं मिली तो कांग्रेसी विधायक नारेबाजी करने लगे। इसके बाद सभापति ने कार्रवाई करते हुए 30 कांग्रेस विधायकों को निलंबित कर दिया गया हालांकि कुछ समय बाद उनका निलंबन वापस ले लिया गया।
शून्यकाल के दौरान विपक्ष के नेता चरणदास महंत ने ईरान-इजराइल संघर्ष के बीच प्रदेश में रसोई गैस की संभावित किल्लत का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि राज्य में कई जगहों पर एलपीजी सिलेंडर की कमी की शिकायतें मिल रही हैं और इस पर सदन में चर्चा होनी चाहिए। महंत ने कहा कि सरकार ने पहले भरोसा दिलाया था कि छत्तीसगढ़ में गैस की कोई कमी नहीं होगी लेकिन उसके बाद भी लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
जब सभापति ने इस मुद्दे पर तत्काल चर्चा की अनुमति नहीं दी तो कांग्रेस के विधायक सदन में नारेबाजी करने लगे। हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही कुछ समय के लिए प्रभावित हुई। स्थिति को देखते हुए सभापति ने नियमों के तहत 30 कांग्रेसी विधायकों को निलंबित करने की घोषणा कर दी। हालांकि थोड़ी देर बाद हालात सामान्य होने पर सभापति ने निलंबन का आदेश वापस ले लिया और सदन की कार्यवाही फिर से शुरू हुई।
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी इस मुद्दे पर सरकार से जवाब मांगा। उन्होंने कहा कि भले ही एलपीजी आपूर्ति केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र में आती हो, लेकिन कालाबाजारी और जमाखोरी को रोकना राज्य सरकार की जिम्मेदारी है। बघेल ने कहा कि अगर वाणिज्यिक गैस सिलेंडर की आपूर्ति प्रभावित होती है तो होटल, शादी समारोह और अन्य कार्यक्रमों पर इसका सीधा असर पड़ सकता है।
विपक्ष ने दावा किया कि छत्तीसगढ़ में 36 लाख से ज्यादा एलपीजी उपभोक्ता हैं और गैस की आपूर्ति प्रभावित होने पर लोगों को गंभीर परेशानी हो सकती है। विपक्ष ने सरकार से मांग की कि घरेलू और वाणिज्यिक गैस सिलेंडर के स्टॉक और आपूर्ति की स्थिति पर सदन को जानकारी दी जाए।
पूर्व मुख्यमंत्री बघेल ने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर पूरे देश में दिख रहा है और कई राज्यों से एलपीजी की कमी की खबरें आ रही हैं। उन्होंने सरकार से कालाबाजारी और जमाखोरी रोकने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की।
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पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला पर जानलेवा हमला, सुरक्षाकर्मियों ने हवा में मोड़ा हमलावर का हाथ
जम्मू. जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कॉन्फ्रेंस के दिग्गज नेता डॉ. फारूक अब्दुल्ला एक भीषण हमले में बाल-बाल बच गए. जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान एक हथियारबंद व्यक्ति ने बेहद करीब से उन पर रिवॉल्वर तान दी और फायरिंग की कोशिश की. सुरक्षाकर्मियों की मुस्तैदी के चलते गोली हवा में चल गई और एक बड़ा हादसा टल गया.
घटना उस समय हुई जब फारूक अब्दुल्ला, जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी के साथ नेशनल कॉन्फ्रेंस के कार्यकर्ता सुरजीत सिंह के बेटे की शादी में शामिल होने पहुंचे थे. प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जब अब्दुल्ला मेहमानों के बीच मौजूद थे, तभी एक बुजुर्ग व्यक्ति पीछे से आया और सीधे उनके सिर की ओर रिवॉल्वर तान दी.
सामने आए सीसीटीवी फुटेज में देखा जा सकता है कि हमलावर, जिसकी पहचान 70 वर्षीय कमल सिंह जामवाल के रूप में हुई है, ने अचानक हमला करने की कोशिश की. इससे पहले कि वह सटीक निशाना लगा पाता, अब्दुल्ला के सुरक्षा गार्डों ने बिजली जैसी तेजी दिखाते हुए उसका हाथ पकड़ लिया. इस छीना-झपटी में गोली चल गई, लेकिन वह हवा में लगी.

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मिडिल ईस्ट के अहम समुद्री मार्ग स्ट्रेट ऑफ होमुर्ज के पास एक कार्गो शिप पर हमला होने की खबर सामने आई है। यह जहाज थाईलैंड से जुड़ा बताया जा रहा है और भारत के गुजरात की ओर आ रहा था। अचानक एक अज्ञात प्रोजेक्टाइल के टकराने से जहाज में आग लग गई, जिससे जहाज पर सवार क्रू मेंबर्स के बीच अफरा-तफरी मच गई।
घटना के बाद तुरंत रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया। अब तक जहाज पर मौजूद 23 में से 20 क्रू मेंबर्स को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है, जबकि तीन लोग अभी भी जहाज पर फंसे हुए बताए जा रहे हैं।
मरीन सिक्योरिटी सूत्रों और शिप ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, इस कार्गो शिप की पहचान मयूरी नारी के रूप में हुई है। जहाज को ओमान के उत्तरी तट से लगभग 11 नॉटिकल मील दूर निशाना बनाया गया। हमले के बाद जहाज के एक हिस्से में आग लग गई, जिसे कंट्रोल करने की कोशिश की जा रही है। समुद्री सुरक्षा एजेंसियां इस घटना की जांच में जुट गई हैं।
रॉयल थॉइल नेवी और यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस दोनों ने पुष्टि की है कि 11 मार्च को होर्मुज जलडमरूमध्य के पास एक कार्गो जहाज से किसी अज्ञात प्रोजेक्टाइल की टक्कर हुई। हालांकि अभी तक यह साफ नहीं हो पाया है कि यह प्रोजेक्टाइल मिसाइल थी, ड्रोन था या किसी अन्य तरह का हथियार। सुरक्षा एजेंसियां इस बात की जांच कर रही हैं कि हमला जानबूझकर किया गया था या यह किसी और सैन्य गतिविधि का परिणाम है।
इंटरनेशनल मैरीटाइम ऑर्गनाइजेशन ने जहाज के नंबर, ढांचे और सुपरस्ट्रक्चर की पुष्टि की है। यह जानकारी संगठन के रिकॉर्ड में मौजूद तस्वीरों से मेल खाती है। मैरीटाइम रिकॉर्ड के मुताबिक, इस जहाज का मालिकाना हक Precious Shipping के पास है। फिलहाल समुद्री सुरक्षा एजेंसियां इस घटना के पीछे की वजह और संभावित जिम्मेदार पक्ष का पता लगाने की कोशिश कर रही हैं।