जबलपुर. एमपी की संस्कारधानी जबलपुर के रक्षा मंत्रालय की व्हीकल फैक्ट्री (व्हीएफजे) के पास एक संदिग्ध युवक पाया गया. स्थानीय लोगों ने उसकी हरकतों को देखकर उसे पकड़ लिया और पुलिस को सूचना दी. स्थानीय लोगों का दावा है कि, पूछताछ के बाद युवक ने बताया कि, वह पाकिस्तान के रावलपिंडी का रहने वाला है और भारत में बाघा बॉर्डर से आया था. उसने बताया कि, उसके साथ 11 और लोग भारत आए हैं. पुलिस ने उसे पकड़ लिया है और उसका मेडिकल टेस्ट करवाया जाएगा. इसके बाद उससे पूछता शुरू की जाएगी.
जबलपुर के रांझी में सतपुला ब्रिज के पास रक्षा मंत्रालय की व्हीकल फैक्ट्री है. व्हीकल फैक्ट्री की कॉलोनी में एक मंदिर है. आज बुधवार सुबह मॉर्निंग वॉक करने वाले लोगों ने देखा कि मंदिर के पास एक लड़का बैठा हुआ है और उसकी गतिविधियां कुछ ठीक नहीं लग रही हैं. मौके पर मौजूद एडवोकेट आशीष प्रजापति ने उसका वीडियो भी बनाया.
सतपुला के रहने वाले सचिन विश्वकर्मा ने बताया कि, जब हमने इससे पूछताछ की तो उसने बताया कि, वह पाकिस्तान के रावलपिंडी का रहने वाला है और भारत में वह कराची से होता हुआ बाघा बॉर्डर क्रॉस करके आया है. सचिन ने बताया कि, उसने यह स्वीकार किया है कि उसके साथ 11 और लोग आए हैं जब स्थानीय लोगों को इस बात की पूरी तसदीक हो गई की यह विदेशी है और गलत ढंग से भारत में आया है तब उन्होंने पुलिस को सूचना दी.
मौके पर पहुंचे जबलपुर के रांझी पुलिस के एएसआई सीताराम ने लड़के की गतिविधियों को संदिग्ध मानते हुए उसे हिरासत में ले लिया है. सीताराम का कहना है कि, हम सबसे पहले उसका मेडिकल टेस्ट करवाएंगे. क्योंकि ऐसा लग रहा है कि वह बीमार है फिर उससे पूछताछ की जाएगी कि आखिर वह पाकिस्तान से भारत क्यों आया है. दरअसल, उसका जबलपुर के रक्षा मंत्रालय के फैक्ट्री के पास पाया जाना भी उसे और संदिग्ध बना देता है. क्योंकि जबलपुर की इन फैक्ट्री में भारतीय सेना के लिए जरूरत के सामान बनाए जाते हैं और यहां पर किसी भी संदिग्ध को आने जाने की अनुमति नहीं है. ऐसी स्थिति में उसकी फैक्ट्री के पास पाया जाना और भी सवाल खड़े करता है.
जबलपुर के इस क्षेत्र में पहले भी पाकिस्तानियों की आने की सूचनाओं मिलती रही है. भारत-पाकिस्तान के संबंध हमेशा ही ठीक नहीं रहे हैं. इसलिए किसी पाकिस्तान का बिना अनुमति इस तरह भारत की केंद्र तक पहुंचाना संदिग्ध है. अब सवाल यह भी उठता है कि यह बाघा बॉर्डर में कैसे प्रवेश कर गया फिर यह बॉर्डर से लेकर लगभग डेढ़ हजार किलोमीटर दूर जबलपुर तक कैसे पहुंच गया. इस बीच में किसी ने रोका क्यों नहीं और इसकी जांच क्यों नहीं की गई.
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फर्नीचर फैक्ट्री में धधकी आग, 5-6 करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान, दमकलें आग बुझाने में जुटीं
नीमच में आज बुधवार अचानक एक फर्नीचर फैक्ट्री में आग धधक उठी, देखते ही देखते आग ने विकराल रूप ले लिया, सूचना पर पहुंचीं फायर ब्रिगेड की गाड़ियों ने आग पर काबू करने का प्रयास शुरू किया, आग से फैक्ट्री में रखा फर्नीचर जलकर ख़ाक हो गया, फैक्ट्री संचालक ने करीब 5-6 करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान जताया है। आग लगने का स्पष्ट कारण तो जाँच के बाद मालूम चल सकेगा लेकिन फैक्ट्री संचालक ने शॉर्ट सर्किट होने का अनुमान जताया हैं।
नीमच के पीजी कॉलेज के पीछे कृषि विज्ञान केंद्र के पास स्थित DV Distribution Services की फर्नीचर फैक्ट्री में दोपहर करीब 12:30 बजे भीषण आग लग गई। आग इतनी विकराल थी कि देखते ही देखते फैक्ट्री का बड़ा हिस्सा चपेट में आ गया। फैक्ट्री स्टाफ ने आसपास के लोगों की मदद से आग पर काबू पाने का प्रयास किया और फायर ब्रिगेड को सूचना दी।
सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की चार गाड़ियाँ मौके पर पहुंची चूँकि फैक्ट्री बड़े हिस्से में फैली थी और आग चारों तरफ फ़ैल चुकी थी इसलिए दीवारों को तोड़ने में बहुत मशक्कत करनी पड़ी उसके बाद पानी की धार आग पर पहुंचाई गई, सूचना मिलते ही कुछ देर पहले ही फैक्ट्री से गए संचालक वापस लौटे।
मीडिया से बात करते हुए फैक्ट्री संचालक दीपक भंडारी ने बताया की वे जब यहाँ से गए तब सबकुछ ठीक ठाक था अचानक आग कैसे लगी समझ नहीं आ रहा उन्होंने शॉर्ट सर्किट होने की आशंका जताई है, भंडारी के मुताबिक फैक्ट्री में करीब 2 से 2.5 करोड़ रुपये का तैयार स्टॉक था और लगभग 3 करोड़ रुपये की मशीनरी थी। करीब 30 हजार वर्गफीट का शेड भी आग की चपेट में आकर लगभग पूरी तरह ध्वस्त हो गया। संचालक ने कुल नुकसान 5 से 6 करोड़ रुपये तक होने का अनुमान बताया है। आग लगने की वजह फिलहाल स्पष्ट नहीं है, हालांकि संचालक ने शॉर्ट सर्किट की आशंका जताई है।
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इंदौर से चलता था साइबर ठगों का ‘APK कारखाना’! 2900 से ज्यादा फर्जी ऐप बनाकर देशभर में भेजे, मुंबई क्राइम ब्रांच ने दबोचा
इंदौर। साइबर ठगी के खिलाफ चल रही कार्रवाई में इंदौर से एक ऐसे नेटवर्क का खुलासा हुआ है, जिसने देशभर के साइबर ठगों को ठगी के लिए तैयार APK फाइलें उपलब्ध कराईं। खजराना थाना पुलिस और मुंबई महाराष्ट्र क्राइम ब्रांच की संयुक्त कार्रवाई में पंकज पिता अवधेश गुप्ता को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के मुताबिक आरोपी इंदौर में रहकर साइबर ठगों के लिए फर्जी एप तैयार करता और उन्हें उपलब्ध कराता था। मुंबई क्राइम ब्रांच की जांच में दावा किया गया है कि आरोपी ने करीब 2,905 APK फाइलें साइबर ठगी करने वाले गिरोहों को बेचीं। इन फाइलों के जरिए देशभर में करीब 9,673 लोगों को निशाना बनाए जाने की जानकारी सामने आई है। अब तक करीब 15.75 करोड़ रुपये की ठगी का पता चल चुका है। पुलिस को आशंका है कि वास्तविक ठगी की रकम इससे कहीं ज्यादा हो सकती है। आरोही पंकज मुल्तान नागदा का रहने वाला है।
जांच में सामने आया है कि पंकज ने इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी नहीं की और बीच में पढ़ाई छोड़ दी थी। शुरुआत में वह गेमिंग ऐप तैयार करने का काम करता था। इसी दौरान उसने APK फाइल बनाने की तकनीक सीखी।बाद में उसका संपर्क साइबर ठगी करने वाले लोगों से हुआ और कथित तौर पर उसने इसी तकनीकी जानकारी को ठगी के लिए इस्तेमाल होने वाले ऐप बनाने में लगा दिया।पुलिस के अनुसार वह करीब तीन साल से साइबर ठगों को ऐसे ऐप उपलब्ध करा रहा था।
पूछताछ में आरोपी ने साइबर ठगी के एक तरीके के बारे में भी जानकारी दी है। साइबर ठग खुद को कभी SBI, HDFC या किसी अन्य बैंक का अधिकारी या मैनेजर बताकर लोगों से संपर्क करते थे।लोगों को कहा जाता था कि उनकी KYC बंद हो गई है या बैंक खाता जल्द बंद हो सकता है। इसके बाद उन्हें KYC अपडेट करने के नाम पर फर्जी लिंक या APK भेजी जाती थी।कई मामलों में QR कोड के जरिए भी लोगों को जाल में फंसाने की बात सामने आई है।
साइबर ठग कभी-कभी लोगों से कहते थे कि QR कोड पर 5 भेजकर अपना बैलेंस चेक कर लें। जैसे ही पीड़ित बताए गए तरीके से प्रक्रिया पूरी करता, उसके मोबाइल और बैंकिंग से जुड़ी संवेदनशील जानकारी तक पहुंच बनाने की कोशिश की जाती थी।इसके बाद खाते से रकम निकालने या दूसरे खातों में ट्रांसफर करने का खेल शुरू हो जाता था।यानी 5 का भरोसा और उसके बाद खाते से लाखों रुपये गायब।
पुलिस के मुताबिक पंकज खुद हर पीड़ित को फोन करके ठगी नहीं करता था। उसका कथित काम साइबर ठगों के लिए फर्जी APK तैयार करना था।इन APK को अलग-अलग सरकारी सेवाओं, बैंकिंग प्रक्रियाओं और वेरिफिकेशन के नाम दिए जाते थे, ताकि आम व्यक्ति उन्हें देखकर भरोसा कर ले।
इन नामों के पीछे छिपी APK फाइलों का इस्तेमाल कथित तौर पर लोगों को गुमराह करने और उनके मोबाइल से संवेदनशील जानकारी हासिल करने के लिए किया जाता था।
मुंबई क्राइम ब्रांच की जांच के अनुसार आरोपी से जुड़े नेटवर्क ने करीब 2,905 APK फाइलें साइबर ठग गिरोहों को उपलब्ध कराईं। इनका इस्तेमाल कर करीब 9,673 लोगों को निशाना बनाए जाने की जानकारी सामने आई है।अब तक करीब ₹15.75 करोड़ की साइबर ठगी सामने आने का दावा किया गया है।जांच एजेंसी को आशंका है कि यह आंकड़ा अंतिम नहीं है और नेटवर्क की पूरी जांच के बाद ठगी की रकम और पीड़ितों की संख्या बढ़ सकती है।
इस कार्रवाई ने इंदौर में बैठे साइबर अपराध के एक अलग नेटवर्क की तस्वीर सामने रख दी है। आमतौर पर साइबर ठगी में फोन करने वाले ठग, बैंक खाते उपलब्ध कराने वाले लोग और रकम निकालने वाले गिरोह सामने आते हैं।लेकिन इस मामले में ठगी के लिए इस्तेमाल होने वाले तकनीकी हथियार तैयार करने वाले व्यक्ति तक पुलिस पहुंची है।यही वजह है कि जांच अब केवल पंकज तक सीमित नहीं रहने वाली। पुलिस उन लोगों की तलाश भी कर रही है, जिन्होंने उससे APK खरीदीं और आगे उनका इस्तेमाल साइबर अपराध में किया।
पुलिस की जांच से सामने आए इस तरीके के बाद आम लोगों के लिए सबसे बड़ी चेतावनी है—WhatsApp या SMS के जरिए आई किसी अनजान APK फाइल को डाउनलोड न करें।अगर कोई फाइल बैंक KYC, पेंशन, चालान, क्रेडिट कार्ड, सरकारी योजना या किसी वेरिफिकेशन के नाम पर भेजी जाए तो उस पर भरोसा न करें।
यह मामला सिर्फ एक आरोपी की गिरफ्तारी नहीं, बल्कि साइबर अपराध के बदलते तरीके की तस्वीर भी सामने लाता है। अब ठगों को खुद तकनीकी ऐप बनाने की जरूरत नहीं- ऐसे लोग उनके लिए फर्जी ऐप तैयार कर उपलब्ध करा रहे हैं। इंदौर से पकड़े गए आरोपी से पूछताछ के बाद अब पुलिस की नजर उन साइबर गिरोहों तक पहुंचने पर है, जिन्होंने इन APK फाइलों का इस्तेमाल किया। 2,905 APK, 9,673 संभावित पीड़ित और 15.75 करोड़ की सामने आई ठगी- इन आंकड़ों ने साइबर अपराध के उस नेटवर्क की गंभीरता जरूर उजागर कर दी है, जिसका अगला सिरा अब देशभर के ठग गिरोहों तक पहुंच सकता है।
ग्वालियर। ग्वालियर से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है।जहां शिवपुरी से पत्नी को लेकर फूलबाग स्तिथ चिड़ियाघर घूमने आया पति,उसे गेट पर छोड़कर बाइक पार्क करने गया,लेकिन वापस लौटा तो पत्नी गायब थी। तलाश की तो पत्नी एक युवक की बाइक पर बैठकर जाती दिखाई दी।पूरी घटना गांधी प्राणी उद्यान के गेट पर लगे CCTV कैमरे में कैद हुई है। पति ने पत्नी के एक युवक के साथ जाने का शक जताते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है।पुलिस ने मामला दर्ज कर महिला की तलाश शुरू कर दी है।
दरअसल मामला पड़ाव थाना क्षेत्र के फूलबाग स्थित गांधी प्राणी उद्यान चिड़ियाघर का है। शिवपुरी जिले के कांकर निवासी 21 वर्षीय करन रजक ने पुलिस को बताया कि उसकी शादी 5 मई 2026 को सुहाना रजक से हुई थी। करन के मुताबिक, वह पत्नी के साथ बाइक से ग्वालियर में रहने वाले रिश्तेदारों के यहां आया था। रास्ते में पत्नी ने पहले चिड़ियाघर घूमने और उसके बाद रिश्तेदारों के घर जाने की इच्छा जताई। पत्नी की बात मानकर करन उसे लेकर गांधी प्राणी उद्यान पहुंचा। यहां मेन गेट के पास पत्नी को छोड़कर वह बाइक पार्किंग में खड़ी करने चला गया,लेकिन जब वह वापस लौटा तो पत्नी वहां नहीं थी। आसपास तलाश करने के बाद भी जब उसका पता नहीं चला तो पति ने उसकी खोज शुरू की। इसी दौरान उसे पत्नी एक युवक की बाइक पर बैठकर जाती हुई नजर आई।
घटना की जानकारी मिलने के बाद पड़ाव थाना पुलिस ने चिड़ियाघर और आसपास लगे CCTV कैमरों के फुटेज खंगाले,फुटेज में एक महिला बाइक सवार युवक के साथ जाती हुई दिखाई दे रही है। पति ने आशंका जताई है कि उसकी पत्नी अरमान खान नाम के युवक के साथ गई है। काफी तलाश के बाद भी पत्नी का कोई सुराग नहीं मिलने पर करन पड़ाव थाने पहुंचा और नामजद शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने पति की शिकायत पर मामला दर्ज कर महिला की तलाश शुरू कर दी है। CCTV फुटेज के आधार पर बाइक सवार युवक की पहचान करने की कोशिश की जा रही है। हालांकि महिला अपनी मर्जी से गई है या उसके साथ किसी तरह की घटना हुई है। इसका खुलासा महिला के मिलने के बाद ही हो सकेगा।फिलहाल पुलिस CCTV फुटेज और अन्य सुरागों के आधार पर महिला और उसके साथ नजर आ रहे युवक की तलाश में जुटी है।
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पुलिस यूनिफॉर्म में बदमाश की शादी में जाना पड़ा भारी, सब इंस्पेक्टर और ASI को किया तत्काल सस्पेंड
भोपाल। ड्यूटी के दौरान पुलिस वर्दी पहनकर निजी कार्यक्रम में शामिल होना कजलीखेड़ा थाने के दो पुलिसकर्मियों को भारी पड़ गया है। इंटरनेट मीडिया के अलग-अलग माध्यमों पर तस्वीरें वायरल होने के बाद पुलिस महकमे ने बड़ी कार्रवाई करते हुए उप निरीक्षक श्रीकांत द्विवेदी और सहायक उप निरीक्षक गदीश रघुवंशी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
हाल ही में दोनों पुलिसकर्मी थाना क्षेत्र के एक निगरानी बदमाश की शादी में ऑन-ड्यूटी वर्दी पहनकर शामिल हुए थे। इंटरनेट मीडिया पर इनकी तस्वीरें वायरल होने के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया था। मामले का संज्ञान लेते हुए पुलिस उपायुक्त (जोन-04) आदर्शकांत शुक्ला ने इसे घोर अनुशासनहीनता, अशोभनीय और संदेहस्पद आचरण माना। यह कृत्य पुलिस रेगुलेशन के पैरा-64 में उल्लेखित सेवा की सामान्य शर्तों का स्पष्ट उल्लंघन है।
कार्रवाई के तहत दोनों अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर सहायक पुलिस आयुक्त कार्यालय, चूनाभट्टी, भोपाल से संबद्ध कर दिया गया है। निलंबन अवधि के दौरान उन्हें नियमानुसार वेतन-भत्तों की पात्रता होगी।
पुलिस उपायुक्त ने इस प्रकरण की प्राथमिक जांच के निर्देश भी दिए हैं। सहायक पुलिस आयुक्त (चूनाभट्टी) को मामले की विस्तृत जांच कर 7 दिवस के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के आदेश दिए गए हैं।गौरतलब है कि पिछले डेढ़ माह के दौरान भोपाल में कजलीखेड़ा, बजरिया और कोतवाली समेत एक दर्जन से अधिक पुलिसकर्मियों पर इस तरह की अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा चुकी है।
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निजी अस्पतालों ने निकाली एम्बुलेंस रैली, ‘आयुष्मान योजना’ के बहिष्कार की चेतावनी, दिल्ली कूच की तैयारी
भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में निजी अस्पताल संचालकों ने आयुष्मान भारत योजना का बकाया भुगतान न मिहने से नाराज होकर मोर्चा खोल दिया है। निजी अस्पतालों ने सड़कों पर एम्बुलेंस रैली निकाली और उग्र प्रदर्शन किया। एम्बुलेंसों के साथ-साथ अस्पतालों के बाहर भी आयुष्मान योजना बंद के पोस्टर चिपका दिए गए हैं। अस्पताल संचालकों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि उनकी समस्याओं का समाधान जल्द नहीं हुआ तो वे इस योजना का पूरी तरह बहिष्कार कर देंगे।
दरअसल मध्य प्रदेश के निजी अस्पताल संचालकों का लंबे समय से आयुष्मान योजना के तहत किए गए इलाज का भुगतान अटका हुआ है। अस्पताल संचालकों का आरोप है कि राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण द्वारा कई क्लेम बिना वजह रिजेक्ट किए जा रहे हैं या फिर स्वीकृत क्लेम की राशि में भारी कटौती की जा रही है। इसके अलावा NABH की अनिवार्यता, प्री-ऑथराइजेशन के बाद क्लेम सेटलमेंट की जटिल प्रक्रिया, टीएटी, ऑथेंटिकेशन और अन्य तकनीकी खामियों को लेकर भी अस्पताल संचालकों में भारी असंतोष है।
अस्पताल संचालकों ने सरकार और प्रशासन को स्पष्ट अल्टीमेटम देते हुए कहा है कि यदि 8 अक्टूबर तक उनकी समस्याओं का कोई ठोस और स्थायी समाधान नहीं निकाला गया, तो वे आयुष्मान भारत योजना का अनिश्चितकालीन बहिष्कार शुरू कर देंगे। यही नहीं, अपनी आवाज केंद्र सरकार तक पहुंचाने के लिए प्रदेशभर के अस्पताल संचालक करीब 1,000 एम्बुलेंसों के काफिले के साथ दिल्ली कूच करेंगे और प्रधानमंत्री कार्यालय तक अपनी मांगें पहुंचाएंगे।
नई दिल्ली. दिल्ली के सीमापुरी इलाके में न्यू सीमापुरी स्थित ईदगाह मछली मंडी के पास एक एक पांच मंजिला इमारत गिर गई. इसके बाद इलाके में हड़कंप मच गया. फायर कंट्रोल रूम को दोपहर 3:15 बजे बिल्डिंग गिरने की कॉल मिली. सूचना मिलते ही दिल्ली फायर सर्विस की टीम मौके पर पहुंची और राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया गया. मौके पर दिल्ली पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीमें मौजूद हैं.
मिली जानकारी के मुताबिक, मलबे में कुछ लोगों के दबे होने की सूचना है. घायलों को तुरंत राजीव गांधी अस्पताल ले जाया गया है. जहां उनका इलाज कराया जा रहा है. फायर विभाग के मुताबिक, शुरुआती तौर पर मौके पर 3 वाटर टेंडर और एक इंसिडेंट रिस्पांस टीम (आईआरटी) को रवाना किया गया. एसटीओ मनोज त्यागी की ओर से वरिष्ठ अधिकारी की मांग भी की गई. चीफ फायर ऑफिसर ए.के. मलिक ने घटना को लेकर जानकारी दी है. फिलहाल राहत-बचाव अभियान जारी है और घटना में किसी के हताहत होने की आधिकारिक जानकारी का इंतजार है.
बताया जा रहा है कि यह इमारत गली के बिल्कुल अंदर की ओर है और पिछले साल ही बनी थी. इस पांच मंजिला इमारत में ग्राउंड फ्लोर पर दुकानें और ऊपर की ओर चार मंजिलें बनी हुई थीं, जिनमें अलग- अलग परिवार रहते थे. बिल्डिंग मालिक और उसका परिवार भी इसी इमारत में रहता था और उसके भी दबने की खबर है. दो बच्चों को स्थानीय लोगों ने मलबे से निकालकर अस्पताल पहुंचाया.
बता दें कि 6 सितंबर को दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के सत्य निकेतन के पास एक बहुमंजिला इमारत ढह गई थी. इस हादसे में 7 लोगों की जान चली गई थी. जबकि कई लोग घायल हो गए थे. इस हादसे के बाद दिल्ली सरकार ने सख्त कदम उठाते हुए जर्जर इमारतों को सील करने का निर्देश दिया था. आज 7 अक्टूबर 2026 को उत्तर-पूर्वी दिल्ली के सीमापुरी इलाके में एक और बहुमंजिला इमारत ढह गई है.
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जंतर-मंतर पर भारी बवाल, प्रियंका ने पुलिस पर बर्बरता का लगाया आरोप, राहुल-प्रियंका को पुलिस ने दूसरी बार हिरासत में लिया
दिल्ली में चुनाव आयोग के खिलाफ विपक्ष का विरोध प्रदर्शन जारी है. कांग्रेस जंतर-मंतर पर धरना देने के लिए पहुंची तो प्रियंका गांधी का अनोखा विरोध देखने को मिला. इंडिया ब्लॉक के सांसद लंच के बहाने दिल्ली में जमा हुए. इसके बाद राहुल गांधी ने जंतर-मंतर पर धरना देने का ऐलान किया और इसी के साथ सभी विपक्षी सांसद बसों में सवार होकर जंतर-मंतर की ओर रवाना हो गए. कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने पुलिस की बर्बरता का आरोप लगाया है. प्रियंका गांधी ने सड़क पर लेटकर विरोध जताया.
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष रुकने के मूड में नहीं है. कल दिनभर धरने के बाद आज इंडिया ब्लॉक के सांसद लंच के बहाने दिल्ली में जमा हुए.
दिल्ली में आज ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर विपक्षी सांसद जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने को लेकर राहुल-प्रियंका सहित कांग्रेसी सांसद बस में बैठ कर वहां के लिए रवाना हुए. हालांकि राहुल गांधी समेत विपक्षी सांसदों को पुलिस ने जंतर-मंतर जाने की इजाजत नहीं दी और रास्ता ब्लॉक कर दिया, जिसके बाद राहुल समेत तमाम विपक्षी नेता सड़क पर ही धरने पर बैठ गए.
इंडिया गठबंधन के सांसदों के प्रदर्शन को देखते हुए जंतर-मंतर पर सुरक्षा बढ़ा दी गई है. पुलिस और पैरामिलिट्री फोर्स के जवान चप्पे-चप्पे पर तैनात किए गए हैं. चारों तरफ बैरिकेड्स लगा दिए गए हैं.
इसी बीच प्रियंका गांधी का अनोखा विरोध देखने को मिला. प्रियंका गांधी सड़क पर ही लेट गईं और कहा कि मैं यहां से हटने वाली नहीं हूं. इस दौरान उन्होंने पुलिस पर बर्बरता का आरोप लगाया. वहीं, दिल्ली पुलिस ने राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को हिरासत में ले लिया और राहुल को जबरदस्ती बस में बिठाया गया. हालांकि, कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने बस की हवा निकाल दी जिससे कि राहुल गांधी को वहां से हटाया नहीं जा सके.
दिल्ली पुलिस ने 7 अक्टूबर 2026 को राहुल गांधी को आंदोलन करने पर हिरासत में ले लिया. इससे पहले 6 अक्टूबर को भी राहुल और प्रियंका गांधी को हिरासत में लिया था. पिछले 24 घंटे के अंदर राहुल गांधी अबतक दो बार हिरासत में लिए गए. आकाशवाणी भवन में बिना अनुमति घुसने के आरोप में दोनों पर FIR भी दर्ज की गई. इस पर राहुल ने कहा, ‘मेरे खिलाफ 45 FIR हैं, मेरा टारगेट 100 केस का है.
वहीं, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी कहा, ‘हम डरने वाले नहीं हैं. EC के खिलाफ हम प्रदर्शन करते रहेंगे. अपनी बात पूरे देश में पहुंचाएंगे. लोकतंत्र को खत्म करने की कोशिश हो रही है’.
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‘टाटा ग्रुप’ में बवालः Tata Trusts को चैरिटी कमिश्नर का नोटिस, ट्रस्टी वेणु श्रीनिवासन ने ट्रस्ट्स के गवर्नेंस पर उठाए गंभीर सवाल थे
TATA Controversy: महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर ने टाटा ट्रस्ट्स को नोटिस जारी किया (Maharashtra Charity Commissioner issue notice to Tata Trusts) है। चैरिटी कमिश्नर ने Tata Trusts से 12 अक्टूबर तक जवाब मांगा है। ट्रस्टी वेणु श्रीनिवासन ने ट्रस्ट्स के गवर्नेंस पर गंभीर सवाल उठाए थे। ने 24 सितंबर को वेणु श्रीनिवासन ने सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट में गड़बड़ियों के आरोप वाली शिकायत की थी। इसपर अब महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर ने टाटा ट्रस्ट्स को नोटिस जारी किया है।
बता दें कि टाटा संस (Tata Sons) के चेयरमेन एन चंद्रशेखरन (N Chandrasekaran) और टाटा ट्रस्ट्स (Tata Trusts) के चेयरमेन नोएल टाटा (Noel Tata) के बीच पावर को लेकर पिछले कई महीने से कोल्ड वॉर चल रहा है। नोएल टाटा ने एन चंद्रशेखरन को दोबारा टाटा संस का चेयरमेन बनाने पर आपत्ति जताई है।
हालांकि मामले में उस समय नया ट्विस्ट आ गया, जब एन चंद्रशेखरन और नोएल टाटा की लड़ाई में टाटा ट्रस्ट्स के जॉइंट नॉमिनी डायरेक्टर वेणु श्रीनिवासन (venu srinivasan) कुद पड़े हैं। वेणु श्रीनिवासन ने एन चंद्रशेखरन की नियुक्ति को सही करार देते हुए (Tata Trusts) के चेयरमेन नोएल टाटा (Noel Tata) पर ही आरोपों की बौछार कर दी। सर रतन टाटा ट्रस्ट्स के ट्रस्टी और टाटा संस बोर्ड में उनके जॉइंट नॉमिनी डायरेक्टर वेणु श्रीनिवासन ने महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर से ट्रस्ट के एडमिनिस्ट्रेशन और गवर्नेंस की तुरंत जांच करने की मांग कर डाली थी। उन्होंने गंभीर गवर्नेंस खामियों का आरोप लगाया है। साथ ही टाटा संस के मामलों में चैरिटेबल ट्रस्ट और उसके ट्रस्टियों की भागीदारी पर चिंता जताई थी।
श्रीनिवासन के अनुसार, टाटा ट्रस्ट्स अब समाजसेवा के अपने मुख्य काम से भटककर कंपनियों के बिजनेस फैसलों में दखल दे रहा है। ट्रस्टी खुद बड़े कारोबारी सौदों को तय करने, बातचीत करने और उन्हें फाइनल कराने में लगे हैं, जो कि चैरिटी ट्रस्ट के नियमों के खिलाफ है। श्रीनिवासन ने चैरिटी कमिश्नर से यह भी मांग की है कि जांच पूरी होने तक नोएल टाटा कुछ खास फैसलों से खुद को अलग रखें। इनमें टाटा संस की आम बैठकों के लिए प्रतिनिधि नामित करना और कंपनी के बोर्ड में आर्टिकल 121 से जुड़े मामलों पर वोट करना शामिल है। उन्होंने जांच पूरी होने तक ट्रस्ट की बैठकें, सर्कुलर प्रस्ताव और बोर्ड में बदलाव रोकने की मांग भी की है।
यह घटना चैरिटेबल ट्रस्ट्स के बीच गवर्नेंस और टाटा संस के बड़े शेयरहोल्डर के तौर पर श्रीनिवासन की भूमिका को लेकर बढ़ते तनाव को दिखाती है। टाटा ट्रस्ट्स के पास ग्रुप की होल्डिंग कंपनी, टाटा संस की 66% हिस्सेदारी है। इसमें से, SDTT के पास टाटा संस में 27.98% और सर रतन टाटा ट्रस्ट (SRTT) के पास 23.56% हिस्सेदारी है, जो कुल मिलाकर 51.54% होती है।
कटनी। मध्य प्रदेश के कटनी जिले के स्लीमनाबाद थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम मटवारा में दलित उत्पीड़न और दबंगई का एक बेहद रोंगटे खड़े कर देने वाला सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहाँ मामूली कहासुनी के बाद करीब एक दर्जन से अधिक दबंगों ने घर में जबरन घुसकर एक दलित युवक के कपड़े फाड़कर उसे नग्न कर दिया और लात-घूसों व डंडों से बेरहमी से पीटा। इस दौरान जब पीड़ित की असहाय मां अपने बेटे को बचाने आई, तो दबंगों ने उसके साथ भी जमकर अभद्रता की और उसके कपड़े फाड़ दिए।
मिली जानकारी के अनुसार, घटना 29 सितंबर की शाम की है। पीड़ित अरविंद ने बताया कि निवार बाजार में उसकी गाड़ी से एक स्कूटी को मामूली झटका लग गया था। इसी मामूली बात पर आक्रोशित होकर संजू बर्मन, सिद्धार्थ पाण्डेय और उनके अन्य साथियों ने बीच बाजार अरविंद से मारपीट की। अरविंद जान बचाकर मटवारा स्थित अपने घर पहुँचा, लेकिन आरोपी शांत नहीं हुए। वे करीब एक दर्जन से अधिक उपद्रवियों की भीड़ लेकर अरविंद के घर आ धमके और जबरन अंदर घुस गए।
पीड़ित की मां के अनुसार, दबंगों ने घर पर धावा बोलकर छोटे बेटे को घसीटते हुए आंगन में ला खड़ा किया। आरोपियों ने उसके सारे कपड़े फाड़कर उसे नग्न कर दिया और लात-घूसों तथा डंडों से निर्दयतापूर्वक पीटना शुरू कर दिया। बेबस मां अपने जवान बेटे को चंगुल से छुड़ाने के लिए रहम की भीख मांगती रही, लेकिन आरोपियों का दिल नहीं पसीजा। जब मां ने बेटे को बचाने की कोशिश की, तो दबंगों ने उनके साथ भी हाथापाई की और उनके कपड़े फाड़ दिए
घटना के तुरंत बाद पीड़ित परिवार न्याय की उम्मीद में स्लीमनाबाद थाने पहुँचा, लेकिन आरोप है कि पुलिस ने शुरुआती स्तर पर मामले को दबाने का प्रयास किया और एफआईआर दर्ज करने में टालमटोल करती रही। स्थानीय पुलिस की इस बेरुखी से हताश होकर पीड़ित परिवार ने 1 अक्टूबर को कटनी पुलिस अधीक्षक अभिनव विश्वकर्मा के समक्ष उपस्थित होकर लिखित शिकायत दर्ज कराई। SP के कड़े हस्तक्षेप के बाद स्लीमनाबाद पुलिस तत्काल हरकत में आई और भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया गया।
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नसबंदी के बाद महिला की संदिग्ध मौत: आरोप- ‘एक के बाद एक लगे 3 इंजेक्शन, फिर थम गई पल्स’
विदिशा। विदिशा जिला अस्पताल में नसबंदी के बाद एक 31 वर्षीय महिला की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का मामला सामने आया है। परिजनों का आरोप है कि नसबंदी के कुछ घंटे बाद पेट में दर्द होने पर महिला को लगातार तीन इंजेक्शन लगाए गए। तीसरा इंजेक्शन लगने के बाद उसकी हालत अचानक बिगड़ गई और पल्स बंद हो गई। इसके बाद महिला को ICU में भर्ती कराया गया, जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। मामले में परिजनों ने निष्पक्ष जांच की मांग की है।
मृतका की पहचान बंटी नगर निवासी 31 वर्षीय संगीता लोधी, पत्नी त्रिलोक लोधी के रूप में हुई है। परिजनों के मुताबिक संगीता की यह तीसरी डिलीवरी थी। प्रसव पीड़ा होने पर घर पर ही उसकी सामान्य डिलीवरी हुई और बेटी का जन्म हुआ। नाल नहीं कटने के कारण परिजन जच्चा-बच्चा को लेकर जिला अस्पताल पहुंचे।
परिजनों का कहना है कि अस्पताल पहुंचने के समय मां और बच्ची दोनों स्वस्थ थे। इसके बाद संगीता की सहमति से नसबंदी की गई। परिजनों के अनुसार ऑपरेशन के बाद कई घंटे तक उसकी हालत सामान्य रही, लेकिन बाद में पेट में दर्द होने पर नर्स से इंजेक्शन देने के लिए कहा गया। आरोप है कि एक के बाद एक तीन इंजेक्शन लगाए गए। तीसरा इंजेक्शन लगने के बाद संगीता की हालत अचानक बिगड़ गई और उसकी पल्स बंद हो गई
इसके बाद अस्पताल स्टाफ ने महिला को ICU में भर्ती कर उपचार शुरू किया, लेकिन इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। घटना के बाद परिजनों ने इंजेक्शन, इलाज की प्रक्रिया और महिला की मौत के कारण की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है। फिलहाल महिला की मौत की वजह स्पष्ट नहीं है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। रिपोर्ट सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि महिला की मौत किन परिस्थितियों में हुई।
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80 की उम्र में दिग्विजय की 930 किमी लंबी ‘सनातन स्वाभिमान यात्रा’ का रूट तय, विजयदशमी से होगी शुरुआत
भोपाल। मध्य प्रदेश की सियासत से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। कांग्रेस के दिग्गज नेता और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह विजयदशमी के पावन अवसर पर एक ऐतिहासिक और लंबी पदयात्रा का आगाज करने जा रहे हैं। ‘राम मंदिर चंदा चोरी’ के मुद्दों को लेकर निकाली जा रही इस ‘सनातन स्वाभिमान यात्रा’ का पूरा रूट चार्ट तय हो चुका है। 80 साल की उम्र में दिग्विजय सिंह उज्जैन से लेकर अयोध्या तक लगभग 930 किलोमीटर का सफर पैदल तय करेंगे।
महाकाल की नगरी उज्जैन से शुरू होने वाली यह पदयात्रा मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के कई जिलों से होकर गुजरेगी। तय कार्यक्रम के अनुसार यात्रा का रूट इस प्रकार रहेगा। मध्य प्रदेश का हिस्सा: उज्जैन (महाकालेश्वर मंदिर) से उठने वाली यात्रा तराना, शाजापुर, सारंगपुर, खुजनेर, राजगढ़, चाचौड़ा, आरोन, अशोकनगर, चंदेरी और निवाड़ी जिले के ऐतिहासिक ओरछा (रामराजा सरकार) तक पहुंचेगी। उत्तर प्रदेश का हिस्सा: ओरछा के बाद यात्रा उत्तर प्रदेश की सीमा में प्रवेश करेगी, जो चिरगांव, उरई, कालपी, कानपुर देहात, लखनऊ देहात और बाराबंकी से होते हुए आगे बढ़ेगी।
यह पैदल यात्रा लगभग 70 दिनों में पूरी होगी। इस दौरान दिग्विजय सिंह मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के विभिन्न इलाकों से गुजरते हुए कुल 930 किलोमीटर की लंबी दूरी पैदल नापेंगे। 80 वर्ष की उम्र में इस तरह की कठिन और लंबी पदयात्रा निकालने के उनके फैसले ने राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है।
यात्रा के अंतिम चरण में यह पवित्र नगरी अयोध्या पहुंचेगी, जहां 930 किलोमीटर का सफर तय करने के बाद रामलला के दर्शन के साथ इस यात्रा का समापन होगा। इस यात्रा के जरिए कांग्रेस पार्टी एक बार फिर धार्मिक और वैचारिक मुद्दों पर आक्रामक तेवर दिखाने की तैयारी में है, जिस पर राजनीतिक दलों की पैनी नजर बनी हुई है।
रतलाम। रतलाम जिले के ताल कस्बे से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां एक शिक्षक पर नाबालिग छात्रा के साथ छेड़छाड़ करने का आरोप लगा, जिसके बाद गुस्साए लोगों ने कानून अपने हाथ में लेते हुए शिक्षक को पेड़ से रस्सी से बांधकर जमकर पीटा। इस घटना का वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, वहीं पुलिस की कार्रवाई को लेकर भी स्थानीय स्तर पर सवाल खड़े होने लगे हैं।
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, यह घटना गत 3 अक्टूबर की है। ताल इलाके में एक शिक्षक पर नाबालिग छात्रा के साथ छेड़छाड़ करने का गंभीर आरोप लगा था। इस बात की भनक लगते ही ग्रामीणों और आक्रोशित लोगों में गुस्सा फूट पड़ा। आरोप है कि भीड़ ने शिक्षक को पकड़कर एक पेड़ से रस्सी के सहारे बांध दिया और उसकी जमकर धुनाई कर दी। घटना के दौरान वहां मौजूद किसी शख्स ने इसका वीडियो बना लिया, जो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
शिक्षक पर पॉक्सो व अन्य धाराओं में केस: मामले की सूचना मिलते ही ताल थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने छेड़छाड़ और संबंधित गंभीर धाराओं में प्रकरण दर्ज कर आरोपी शिक्षक को गिरफ्तार कर लिया और जेल भेज दिया।
इस मामले में पुलिस के दोहरे रवैये को लेकर चर्चाएं तेज हो गईं हैं। एक तरफ जहां पुलिस ने शिक्षक को गिरफ्तार कर लिया है, वहीं दूसरी तरफ शिक्षक की शिकायत पर अज्ञात लोगों के खिलाफ मारपीट का मामला दर्ज किया गया है।स्थानीय लोगों और जानकारों का कहना है कि वायरल वीडियो में शिक्षक को पेड़ से बांधकर पीटने वाले लोगों के चेहरे साफ तौर पर दिखाई दे रहे हैं, इसके बावजूद पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ मामला दर्ज किया है। कानून हाथ में लेकर भीड़ द्वारा इस तरह मारपीट करने वालों पर सीधी कार्रवाई न होने से ताल पुलिस की कार्यप्रणाली और मंशा पर अब गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं।
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मां ने 1 दिन की बच्ची को मार डाला, फिर रची झूठी कहानी - फिर सामने आया सच
अशोकनगर। जिला अस्पताल में एक दिन की नवजात बच्ची की गला दबाकर हत्या के मामले का पुलिस ने मंगलवार को खुलासा कर दिया। कोतवाली पुलिस की जांच में सामने आया है कि नवजात की हत्या किसी बाहरी व्यक्ति ने नहीं, बल्कि उसकी मां ने ही की थी। पुलिस के अनुसार बच्ची को जन्म देने के बाद मां के पास अकेले रहने के दौरान उसने अंगूठे और उंगली से बच्ची का गला दबा दिया। बाद में बच्ची की नाक से खून निकलता देखकर उसने परिजनों को बताया कि बच्ची को पता नहीं क्या हो गया है।
पुलिस अधीक्षक राजीव कुमार मिश्रा ने मंगलवार को मामले का खुलासा करते हुए बताया कि घटना की जानकारी मिलते ही कोतवाली पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी थी। अस्पताल में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली गई। बच्ची की मां भावना विश्वकर्मा और उसकी सास राजन बाई, पति और अन्य रिश्तेदारों से पूछताछ की गई। वहीं नवजात का पोस्टमार्टम कराया गया, जिसमें डॉक्टर ने गला घोंटने से मौत होने की पुष्टि की।
एसपी ने बताया कि प्रारंभिक जांच में मिले साक्ष्य घटना की दिशा मां की ओर इशारा कर रहे थे। महिला की तबीयत खराब होने के कारण पुलिस ने उससे तत्काल कड़ाई से पूछताछ करने के बजाय महिला पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी में संवेदनशील तरीके से बातचीत की। जब वह बातचीत करने की स्थिति में आई तो उससे पूछताछ की गई। करीब चार-पांच घंटे की पूछताछ के बाद उसने बच्ची की हत्या करने की बात स्वीकार कर ली।
प्रसव के बाद नर्स और डॉक्टर द्वारा बच्ची को उसके पास सुलाए जाने के बाद मां और बच्ची कुछ समय के लिए अकेले थे। पुलिस के मुताबिक इसी दौरान उसने बच्ची का गला दबा दिया। पुलिस के अनुसार बच्ची की हत्या के बाद मां ने घटना को छिपाने का प्रयास किया और परिजनों को बताया कि बच्ची की तबीयत अचानक खराब हो गई है। बच्ची की नाक से खून निकलने के बाद मामला सामने आया। पुलिस ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों के आधार पर हत्या का प्रकरण दर्ज कर महिला को गिरफ्तार कर लिया है। मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है।
एसपी ने यह भी कहा कि प्रसव के बाद महिला की शारीरिक और मानसिक स्थिति, परिवार का दबाव तथा घटना से पहले का पूरा माहौल भी विवेचना का हिस्सा है। यदि महिला पर किसी प्रकार का दबाव या ताने दिए जाने की बात सामने आती है तो उसे भी जांच में शामिल किया जाएगा। फिलहाल पुलिस को हत्या में किसी अन्य व्यक्ति के शामिल होने के साक्ष्य नहीं मिले हैं।
पुलिस ने पहले नवजात की सास, पिता और अन्य परिजनों से पूछताछ की। इसके बाद महिला पुलिस अधिकारियों ने बच्ची की मां से संवेदनशील तरीके से पूछताछ की। करीब चार-पांच घंटे की पूछताछ के बाद मां ने बच्ची का गला दबाने की बात स्वीकार की। पुलिस के अनुसार पूछताछ के दौरान महिला रो भी रही थी और घटना पर अफसोस जताया।
घटना के समय अस्पताल में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज पुलिस ने खंगाली। पुलिस के अनुसार जिस अवधि में बच्ची अपनी मां के पास थी, उस दौरान कोई अन्य व्यक्ति अंदर जाता हुआ नहीं दिखाई दिया। अब तक की जांच में भी बच्ची की हत्या में किसी अन्य व्यक्ति की मदद या संलिप्तता सामने नहीं आई है।
पूछताछ में सामने आया कि परिवार को इस बार बच्चा होने की उम्मीद थी। परिवार में पहले से एक बच्ची होने के कारण बच्ची के जन्म को लेकर मानसिकता नकारात्मक थी। एसपी ने कहा कि परिवार की ओर से किसी प्रकार का दबाव या ताने दिए गए थे या नहीं, इसकी भी विवेचना की जा रही है। फिलहाल पुलिस को हत्या में किसी अन्य व्यक्ति की प्रत्यक्ष भूमिका के साक्ष्य नहीं मिले हैं।
एसपी राजीव कुमार मिश्रा ने कहा कि बेटियां आज हर क्षेत्र में सफलता हासिल कर रही हैं। शिक्षा, सेना, पुलिस, राजनीति और अंतरिक्ष विज्ञान तक बेटियों ने अपनी पहचान बनाई है। उन्होंने कहा कि बेटियों को लेकर समाज की सोच बदलनी होगी। ईश्वर की देन मानकर बेटियों को स्वीकार करना चाहिए और किसी भी परिस्थिति में उनके साथ इस तरह की क्रूरता नहीं होनी चाहिए।
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अशोकनगर में बिजली तार चोर गिरोह का पर्दाफाश, यूपी-एमपी के 9 आरोपी गिरफ्तार
अशोकनगर। अशोकनगर जिले के ग्रामीण अंचलों में बिजली के खंभों से लाखों रुपए के तार चुराने वाले शातिर अंतरराज्यीय गिरोह का पुलिस ने पर्दाफाश कर दिया है। थाना सेहराई पुलिस ने घेराबंदी कर इस गिरोह के 9 सदस्यों को गिरफ्तार किया है, जिनमें उत्तर प्रदेश के ललितपुर और मध्य प्रदेश के अशोकनगर शहर के आरोपी शामिल हैं।
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से चोरी किए गए बड़ी मात्रा में विद्युत तार, वारदात में इस्तेमाल किए जाने वाले वाहन और औजार सहित कुल 21.50 लाख रुपए का माल बरामद किया है। इससे जिले में लगातार हो रही बिजली तार चोरी की कई अन्य वारदातों का भी खुलासा हुआ है।
बिजली कंपनी के कनिष्ठ यंत्री महेश्वर धुर्वे ने सेहराई में थाने में बिजली लाइन का करीब 3 किमी तार चोरी होने की शिकायत की थी। इससे एफआइआर दर्ज कर जांच शुरु की और सूचना मिली तो पुलिस टीम ने खिरिया पठारी रोड पर घेराबंदी कर कुछ संदिग्धों को दबोचा। जब पुलिस ने सख्ती से पूछताछ की, तो उन्होंने खंभों से तार काटकर बोलेरो पिकअप में भरकर ले जाने का जुर्म कबूल कर लिया।
पुलिस की प्रारंभिक पूछताछ में इन शातिरों ने बताया कि वे केवल सेहराई तक सीमित नहीं थे। इस गिरोह ने चंदेरी के कुंवरपुर और विक्रमपुर, पिपरई, बहादुरपुर, कचनार और नईसराय थाना क्षेत्रों में भी तार चोरी की घटनाओं को अंजाम दिया था। पुलिस अब इन मामलों में भी इनसे गहन पूछताछ कर रही है। वहीं, इस गिरोह का एक अन्य साथी शिवराम सेन निवासी सिरसी ललितपुर फिलहाल फरार है, जिसकी तलाश में पुलिस की टीमें जुटी हुई हैं।
एसपी राजीवकुमार मिश्रा ने मामले का खुलासा किया और बताया कि इस अंतरराज्यीय तार चोर गिरोह के सदस्यों में उप्र के ललितपुर जिले के जखौरा थाना क्षेत्र निवासी ओमकार लोधी (27), पुष्पेन्द्र लोधी (22), तेज सिंह उर्फ दीपेश (20), उजागर उर्फ झल्लू (31), कुश लोधी (22), अशोकनगर शहर के शंकर कॉलोनी निवासी नीतेश जोशी (21), गोकुलधाम कॉलोनी निवासी अरुण जैन (30), त्रिलोकपुरी कॉलोनी निवासी राजेन्द्र साहू (38) व टीवीएस शोरूम के पास रहने वाल ऋषभ जैन को गिरफ्तार किया हे। जिनके पास बड़ी मात्रा में बिजली तार, तार काटने के विशेष उपकरण, एक बोलेरो कार, एक पिकअप वाहन और एक बाइक बरामद की है।
इस बड़े अंतरराज्यीय गिरोह को दबोचने में सेहराई पुलिस और साइबर सेल की टीम का अहम योगदान रहा। टीम में थाना प्रभारी धर्मेश दांगी, एएसआइ अनिल कुमार, देवेन्द्र चौहान, लल्लूराम दांगी, प्रधान आरक्षक भानू प्रकाश, अनिल पलिया, आरक्षक दीपक यादव, रोहित, प्रीतम, ज्ञान सिंह, ब्रजेश महोबिया, राहुल कुमार और मनोज रघुवंशी शामिल रहे। वहीं तकनीकी साक्ष्य जुटाने में साइबर सेल के एसआइ संजय गुप्ता, मशीह खान और एएसआइ अभिजीत सिंह की भूमिका भी सराहनीय रही।
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