


आगर मालवा। मध्यप्रदेश की आगर पुलिस द्वारा राजस्थान की सीमा में घुसकर की गई एक बड़ी ड्रग्स कार्रवाई अब खुद पुलिस महकमे के लिए गले की हड्डी बन गई है। राजस्थान के चौमहला न्यायालय के सख्त आदेश के बाद, झालावाड़ जिले के डग थाने में आगर मालवा के दो थाना प्रभारियों (TI) सहित करीब 100 पुलिस अधिकारी-कर्मचारियों के खिलाफ विभिन्न गंभीर धाराओं में एफआईआर (FIR) दर्ज की गई है। इस कार्रवाई के बाद मध्यप्रदेश और राजस्थान, दोनों राज्यों के पुलिस बेड़े में हड़कंप मच गया है।
दरअसल 28 जनवरी 2026 को आगर मालवा पुलिस ने राजस्थान के डग थाना क्षेत्र के ग्राम घाटाखेड़ी में बड़ी दबिश दी थी। तब पुलिस ने दावा किया था कि उन्होंने मौके से 2 किलो एमडी (MD), 1 किलो स्मैक, केटामाइन, भारी मात्रा में केमिकल, नशीले इंजेक्शन, ड्रम और 2 राइफल बरामद की है। करीब 5 करोड़ की इस अवैध ड्रग्स फैक्ट्री का भंडाफोड़ करने और दो आरोपियों को गिरफ्तार करने का दावा कर इस कार्रवाई को आगर पुलिस की ऐतिहासिक सफलता के रूप में प्रचारित किया था।
पुलिस की इस तथाकथित सफलता को गिरफ्तार आरोपियों के पिता हमीद खान ने चुनौती दी थी। उन्होंने पूरी कार्रवाई को मनगढ़ंत और फर्जी बताते हुए चौमहला न्यायालय में परिवाद दर्ज कराया था। हमीद का आरोप था कि मध्यप्रदेश पुलिस ने स्थानीय राजस्थान पुलिस को बिना कोई सूचना दिए नियमों का उल्लंघन किया। पुलिसकर्मी जबरन उनके घर में घुसे और परिजनों के साथ अभद्र व्यवहार व मारपीट की। उनके बेटों को पूरी तरह बेकसूर होने के बाद भी झूठे एनडीपीएस (NDPS) एक्ट में फंसा दिया गया।
न्यायालय ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ASP) स्तर के अधिकारी से जांच कराने के निर्देश दिए थे। जांच रिपोर्ट ने आगर पुलिस के दावों की हवा निकाल दी। जांच में सामने आया कि- पुलिस कार्रवाई से जुड़े कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, सरकारी रिकॉर्ड और दावों की आपस में पुष्टि ही नहीं हो सकी। कोर्ट में पेश किए गए सीसीटीवी फुटेज और अन्य तकनीकी साक्ष्यों ने साफ कर दिया कि पुलिस ने रेड और जब्ती के दौरान निर्धारित कानूनी प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया था। परिवादी पक्ष के वकीलों ने साबित किया कि एनडीपीएस अधिनियम के तहत अनिवार्य नियमों को पूरी तरह ताक पर रख दिया गया था।
जांच रिपोर्ट और तकनीकी साक्ष्यों को सही पाते हुए चौमहला न्यायालय ने दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ तत्काल मुकदमा दर्ज करने का आदेश जारी किया। इसके बाद राजस्थान की डग पुलिस ने एमपी पुलिस के दो थाना प्रभारियों (TI) सहित लगभग 100 अज्ञात और नामजद पुलिसकर्मियों पर मामला दर्ज कर लिया है। जो अधिकारी कल तक पीठ थपथपा रहे थे, अब वही बड़ी न्यायिक और विभागीय जांच के दायरे में आ चुके हैं। दोनों राज्यों की इस कानूनी खींचतान पर अब पूरे पुलिस महकमे की निगाहें टिकी हुई हैं।
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ओबीसी 27% आरक्षण मामले में अब आर-पार की बहसः 24 जून से हाईकोर्ट में होगी ‘रेगुलर’ सुनवाई
जबलपुर। मध्यप्रदेश में लंबित और संवेदनशील 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण मामले में जबलपुर हाईकोर्ट ने एक बड़ा और सख्त फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने अब इस मामले की सुनवाई को आगे टालने से साफ इंकार कर दिया और आगामी 24 जून से इस पर ‘रेगुलर’ (नियमित) सुनवाई करने का आदेश दिया है। चीफ जस्टिस के ट्रांसफर होने की वजह से अब इस पूरे मामले की नए सिरे से सुनवाई शुरू की जाएगी।
24 जून से शुरू होने जा रही इस अंतिम और नियमित सुनवाई के पहले दिन कोर्ट यह तय करेगा कि किस पक्ष के वकील को अपनी दलीलें रखने के लिए कितना समय दिया जाएगा। कोर्ट का उद्देश्य मामले की समयबद्ध और त्वरित सुनवाई पूरा करना है, ताकि इस पर जल्द से जल्द अंतिम फैसला आ सके।
सुनवाई के दौरान आज भी कुछ पक्षों द्वारा मामले को आगे बढ़ाने और सुनवाई टालने की मांग की जा रही थी। लेकिन ओबीसी पक्ष के सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता शशांक रत्नु ने इसका कड़ा विरोध किया। वकील रत्नु के विरोध के बाद हाईकोर्ट ने सुनवाई टालने से साफ मना कर दिया। हाईकोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि, “यह मामला पहले ही बहुत लेट हो चुका है, अब किसी भी कीमत पर सुनवाई नहीं टलेगी। खुद सुप्रीम कोर्ट ने भी इस मामले की समय पर सुनवाई पूरी करने के निर्देश दिए हैं।”
बता दें कि ओबीसी आरक्षण और इसके विरोध से जुड़े हुए कुल 90 प्रकरणों (केसों) पर एक साथ सुनवाई चल रही है। इससे पहले 17 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने इन सभी मामलों को वापस मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ट्रांसफर कर दिया था। देश की सर्वोच्च अदालत ने निर्देश दिए थे कि हाईकोर्ट 3 महीने के भीतर इस पूरे मामले की सुनवाई प्रक्रिया को मुकम्मल करे। चीफ जस्टिस के बदलाव के बाद अब नए सिरे से होने जा रही इस रेगुलर सुनवाई पर पूरे प्रदेश की नजरें टिकी हुई हैं, क्योंकि इस फैसले पर मध्यप्रदेश में सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में ओबीसी आरक्षण का भविष्य तय होना है।
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होटल में हाईवोल्टेज ड्रामा: रेंजर को पत्नी ने दूसरी महिला के साथ पकड़ा, सड़क तक हंगामा, वीडियो वायरल
रीवा। मध्यप्रदेश के रीवा के एक निजी होटल से सामने आए वीडियो ने सतना और रीवा में चर्चा का माहौल बना दिया है। सतना जिले के बरौंधा सर्किल में पदस्थ वन परिक्षेत्र अधिकारी ब्रिजेंद्र पाण्डेय को उनकी पत्नी ने एक होटल के कमरे में दूसरी महिला के साथ पकड़ लिया।
जानकारी के अनुसार रीवा स्थित होटल रॉयल इन में वन परिक्षेत्र अधिकारी ब्रिजेंद्र पाण्डेय के मौजूद होने की सूचना उनकी पत्नी को मिली थी। इसके बाद पत्नी होटल पहुंची और कथित तौर पर कमरे में पति को एक अन्य महिला के साथ देख लिया। इसके बाद होटल परिसर में जमकर हंगामा हुआ।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक होटल से लेकर सड़क तक विवाद की स्थिति बनी रही। आरोप है कि इस दौरान रेंजर ने मौके पर मौजूद महिला को वहां से भगाने की कोशिश की और पत्नी के साथ मारपीट भी की। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
बताया जा रहा है कि जिस महिला के साथ रेंजर को पकड़ा गया, वह भी विवाहित है। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद लोगों के बीच तरह-तरह की चर्चा शुरू हो गई हैं। फिलहाल मामले में किसी पक्ष की ओर से आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। वायरल वीडियो और लगाए जा रहे आरोपों की पुष्टि लल्लूराम डॉट काम नहीं करता है।
उज्जैन। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर डॉ. सुमनानंद गिरि महाराज को उत्तर प्रदेश से एक अज्ञात पत्र मिला है, जिसमें उन्हें जान से मारने और कन्हैयालाल जैसा हश्र करने की सीधी धमकी दी गई है। पत्र में अभद्र भाषा का प्रयोग करते हुए लिखा गया है कि ‘अब पानी सिर से ऊपर हो चुका है, तुम्हें कोई नहीं बचा पाएगा।’
महामंडलेश्वर ने बताया कि उन्हें पहले भी ऐसी धमकियां मिलती रही हैं, जिसकी सूचना वे लगातार शासन-प्रशासन को दे रहे हैं। प्रयागराज कुंभ के दौरान उन्हें सुरक्षा मिली थी, लेकिन मध्य प्रदेश सरकार की ओर से फिलहाल कोई सुरक्षा व्यवस्था नहीं की गई है।
उन्होंने क्षेत्र की भौगोलिक संवेदनशीलता का हवाला देते हुए यहां एक पुलिस थाना या मजबूत सुरक्षा चौकी स्थापित करने की मांग की है। इस गंभीर मामले की जानकारी उन्होंने अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष और जिला प्रशासन को भी सौंप दी है।
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मध्य प्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र 20 जुलाई से: किसान और बेरोजगारी के मुद्दे पर घेरेगा विपक्ष
भोपाल। मध्य प्रदेश की राजनीति से बड़ी खबर सामने आई है। प्रदेश में आगामी 20 जुलाई से विधानसबा का मानसून सत्र शुरू होने जा रहा है। विधानसभा सचिवालय ने इस संबंध में आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है। यह सत्र 24 जुलाई तक चलेगा, जिसमें महज 4 दिनों की अल्पावधि में कई महत्वपूर्ण विधेयकों और विधायी प्रस्तावों पर गहन मंथन किया जाएगा।
इस चार दिवसीय संक्षिप्त सत्र के बेहद हंगामेदार रहने के आसार हैं। सूत्रों के मुताबिक राज्य सरकार इस मानसून सत्र के दौरान प्रदेश में UCC यानि सामान नागरिक संहिता को लागू करने को लेकर एक बड़ा और महत्वपूर्ण विधेयक सदन के पटल पर रख सकती है। अगर ऐसा होता है तो यह सत्र राजनीतिक रूप से बेहद सरगर्मियों भरा साबित होगा।
दूसरी ओर मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने भी सरकार को चौतरफा घेरने के लिए अपनी रणनीति तैयार कर ली है। विपक्ष इस छोटे से सत्र में जनता से जुड़े गंभीर मुद्दों को उठाने के लिए पूरी तरह आक्रामक मूड में नजर आ रहा है।
विपक्ष के निशाने पर मुख्य रूप से ये मुद्दे रहेंगे:
मीनाक्षी नटराजन मामला: इस संवेदनशील मुद्दे को लेकर विपक्ष सदन में हंगामा कर सकता है।
किसानों की समस्याएं: कर्जमाफी, खाद-बीज की उपलब्धता और फसलों के दामों को लेकर सरकार को घेरा जाएगा।
बेरोजगारी: प्रदेश में युवाओं की बेरोजगारी और भर्ती परीक्षाओं के मुद्दों पर विपक्ष तीखा सियासी प्रहार करने की तैयारी में है।
छोटे सत्र में बड़े फैसलों पर नजर
विधानसभा सचिवालय द्वारा जारी अधिसूचना के बाद पक्ष और विपक्ष दोनों ही अपनी-अपनी तैयारियों में जुट गए हैं। सत्ता पक्ष जहां अहम विधेयकों को पारित कराने की कोशिश करेगा, वहीं विपक्ष जनहित के मुद्दों पर सरकार की घेराबंदी करने में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहता।
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“भीड़ देखकर रात तक खोले जा रहे मंदिर, यह ठीक नहीं” भोपाल में बोले देवकीनंदन ठाकुर
भोपाल विख्यात कथावाचक व धर्माचार्य देवकीनंदन ठाकुर ने रात्रि में हो रही शादियों को अनुचित बताया है। उन्होंने कहा कि यह दैत्य प्रणाली से होते हैं और दिन के विवाह देव प्रणाली से होते हैं। देवकीनंदन ठाकुर ने कहा कि आजकल रात में विवाह का चलन बढ़ गया है लेकिन यह प्रथा बंद होनी चाहिए। भोपाल के बावडिय़ा कला के रूद्राक्ष किंगस्टन परिसर में चल रही भागवत कथा में उन्होंने रात में की जा पूजा पर भी सवाल उठाया। देवकीनंदन ठाकुर ने कहा कि कुछ विशेष अवसरों पर ही रात्रि पूजन की जा सकती है। उन्होंने देर रात तक मंदिर खोले जाने पर भी आपत्ति जताई। कथावाचक व धर्माचार्य देवकीनंदन ठाकुर ने भीड़ देखकर यह काम किया जा रहा है। यह अनुचित है। उन्होंने बच्चों को अच्छे संस्कार देने की भी बात कही।
भागवत कथा में देवकीनंदन ठाकुर ने कहा कि गोविंद कभी अपने काम को पीछे नहीं छोड़ते। उन्होंने कहा कि जिस दिन मन भगवान के चरणों में लग जाए, वही सच्ची मुक्ति है। मन संसार में ही लगा हुआ है तो समझो तुम बंधे हुए हो। उन्होंने कहा कि भगवान के ऊपर अपनी मर्जी नहीं थोपनी चाहिए।
कथावाचक देवकी नंदन ठाकुर ने बच्चों को अच्छे संस्कार देने की सीख देते हुए कहा कि संस्कार न मिलने से बच्चे नशा कर रहे हैं। भारत का भविष्य अगर इस तरह हो जाएगा तो भारत विश्व गुरु कैसे बनेगा। बच्चे संस्कारी न हो तो आपके करोड़ों कमाने के बाद भी वह काम नहीं आएगा। बच्चों को संस्कार देंगे तभी कल्याण होगा। उन्होंने कहा कि बिना गुरु के गोविंद नहीं मिलते। जीवन में गुरु का होना जरूरी है। उन्होंने कर्म के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि न लाभ आपके हाथ है न हानि, न यश आपके हाथ है न अपयश, न अपना जन्म आपके हाथ है न मृत्यु। आपके हाथ बस आपका अपना कर्म ही है।
भागवत कथा में बड़ी संख्या में शामिल श्रद्धालुओं के सामने धर्माचार्य देवकीनंदन ठाकुर ने दैत्य प्रवृत्तियों से जोड़कर रात में हो रही शादियों का विरोध किया। उन्होंने कहा कि रात्रि का समय दैत्यों का होता है। इसलिए हमें अपने बच्चों के विवाह कभी भी रात्रि में नहीं करना चाहिए। देवकीनंदन ठाकुर ने कहा कि रात्रि विवाह के कारण ही पति-पत्नी के बीच विवाद बढ़ रहे हैं। अधिकांश विवाह रात में ही हो रहे हैं जिससे दांपत्य जीवन में टकराव बढ़ता है।
कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर ने कहा कि कुछ लोग रात्रि में पूजा करने के लिए कहते हैं, जबकि विशेष रात्रियों को छोड़कर कभी भी रात्रि में पूजा नहीं करनी चाहिए। शिवरात्रि और नवरात्रि जैसे कुछ अवसरों पर ही रात्रि में पूजा का विधान है। देवकीनंदन ठाकुर ने देर रात तक मंदिर खोले जाने को भी अनुचित करार दिया। उन्होंने कहा कि आजकल भीड़ देखकर रात तक मंदिर खोले जा रहे हैं, जो जरा भी ठीक नहीं है।
आज के जमाने में पैसा एक ऐसी चीज है जो किसी की भी नियत खराब कर सकता है। रिश्तें-नाते कुछ इसके आगे दिखाई नहीं देते। कर्नाटक के बेलगावी जिले से भी ऐसा ही उदाहरण सामने आया है जहां दो करोड़ के इंश्योरेंस के पैसे के लिए एक पूर्व सैनिक की हत्या कर दी गई। इस अपराध में और कोई नहीं बल्कि उसकी पत्नी शामिल थी। उसने अन्य आरोपियों के साथ पूर्व सैनिक की मौत को नेचुरल डेथ दिखाने की कोशिश की। लेकिन आखिरकार उनका भंडा फूट गया।
इस सनसनीखेज मामले में बेलगावी जिला पुलिस ने 9 लोगों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों में फ़ोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) का एक अधिकारी और शहर की पुलिस का एक कर्मचारी समेत पीड़ित की पत्नी भी शामिल है। इन पर आरोप है कि इन्होंने एक पूर्व सैनिक की हत्या की साजिश रची और जुर्म छिपाने के लिए फॉरेंसिक सबूतों के साथ छेड़छाड़ की।
जिला SP के. रामराजन ने कहा कि आरोपी ने हुक्केरी तालुका के घोदगेरी गांव के रहने वाले 46 साल के संदीप कलागौडा मंजरगी की कथित तौर पर हत्या कर दी, ताकि लगभग 2 करोड़ रुपये का एक्सीडेंट इंश्योरेंस क्लेम किया जा सके। मंजरगी, जो एक पूर्व सैनिक थे। 13 मार्च को अपने गांव लौटते समय मोटरसाइकिल से गिरकर मामूली रूप से घायल हो गए थे। उन्हें शुरू में हुक्केरी के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
पुलिस के अनुसार, प्राथमिक चिकित्सा जांच के दौरान पाया गया कि उनकी चोटें गंभीर नहीं थीं। हालांकि, उनकी पत्नी सुमा उन्हें घटाप्रभा के जेजे अस्पताल ले गईं, जहां 15 मार्च को कार्डियक अरेस्ट के कारण उनकी मौत हो गई।
जेजे अस्पताल के डॉक्टरों को कुछ गड़बड़ लगी और उन्होंने बेलगावी इंस्टीट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंसेज (BIMS) जिला अस्पताल में पोस्टमार्टम कराने की सलाह दी। शुरुआती पोस्टमार्टम रिपोर्ट और बाद में FSL की जांच में मौत की वजह कार्डियक अरेस्ट बताई गई।
2 महीने तक सबकुछ उनके प्लान के मुताबिक चला लेकिन इस बीच सुमा और उसके प्रेमी पुंडलिक के बीच पैसों के लेनदेन को लेकर बड़ा झगड़ा हो गया, झगड़ा इस स्तर तक पहुंच गया कि सुमा ने पुंडलिक से सम्बंध खत्म कर लेने की धमकी दे दी, पुंडलिक को अंदाजा था कि संदीप की पत्नी होने के नाते इंश्योरेंस का सारा पैसा सुमा को ही मिलेगा, तो उसने सुमा को एक्पोज करने का फैसला कर लिया और इस मामले में तब एक बड़ा मोड़ आ गया। जब आरोपी पुंडलिक विट्ठल डोम्बर ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी करके आरोप लगाया कि मंजारगी की हत्या हुई थी। दावा किया कि उसे इस अपराध के बारे में जानकारी है।
पुलिस ने जांच शुरू की तो पता चला है कि आर्मी से रिटायर होने के बाद, मंजारगी ने 2023 में डोम्बर के साथ मिलकर हिडकल डैम के पास खाने-पीने का एक स्टॉल शुरू किया था। इस दौरान, डोम्बर और पूर्व सैनिक की पत्नी सुमा के बीच कथित तौर पर नाजायज संबंध बन गए। जांचकर्ताओं को शक है कि दोनों ने मंजारगी के इंश्योरेंस के फायदे पाने के लिए उसे रास्ते से हटाने की साजिश रची।
डोम्बर का रिश्तेदार और जेजे अस्पताल के कर्मचारी राहुल हनुमंत जोगी ने कथित तौर पर मंजारगी को JJ अस्पताल ले कर आने का सुझाव दिया और साजिश रचने वालों को भरोसा दिलाया कि वो बिना किसी शक के संदीप को ठिकाने लगा देगा।
जांच में पता चला कि 14 मार्च को तीन आरोपियों ने कथित तौर पर नस के जरिए चूहे मारने का जहर देने की कोशिश की, लेकिन वे कामयाब नहीं हो पाए। अगले दिन, उन्होंने कथित तौर पर बाहर से एक और जहर मंगाया, उसे इंजेक्शन से दिया और नींद की गोलियां भी खिलाईं। इसके बाद उनकी मौत हो गई। शुरू में मौत की वजह कार्डियक अरेस्ट बताई गई थी। डोम्बर के खुलासे के बाद, पुलिस ने मंजारगी का शव कब्र से बाहर निकाला और दोबारा पोस्टमार्टम कराने का आदेश दिया।
पुलिस ने बताया कि सुमा की मां, जो एक रिटायर्ड हेल्थ वर्कर हैं। उन्होंने अपनी बेटी को बचाने के लिए रजिस्टर्ड मेडिकल प्रैक्टिशनर बसवराज भस्मे से मदद मांगी। भस्मे ने कथित तौर पर अपने रिश्तेदार अशोक गुजनाल की मदद ली, जो शहर पुलिस में कर्मचारी थे। इसके बाद दोनों ने कथित तौर पर FSL के चपरासी अप्पासाब फखरुद्दीन नाइकवाड़ी से संपर्क किया ताकि फोरेंसिक रिपोर्ट में बदलाव किया जा सके।
पुलिस का आरोप है कि FSL के लेबोरेटरी असिस्टेंट चन्नप्पा अदाविसवामीमथ ने सीनियर साइंटिफिक ऑफिसर पी एम नागराजू के साथ मिलकर जहर देने के सबूत छिपाने के लिए FSL रिपोर्ट में बदलाव किया। जांच में यह भी पता चला कि यूट्यूबर सचिन सेलार और तीन अन्य लोगों ने जिन्हें डोम्बर से हत्या के बारे में पता चला था। सुमा से चुप रहने के बदले पैसे और सेक्सुअल फेवर की मांग करने की कोशिश की। पुलिस ने इस सनसनीखेज हत्या कांड में शामिल सभी 9 आरोपियों को अरेस्ट कर लिया है।
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क्या आधार कार्ड से ले रहे हैं नागरिकता? सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्यों से मांगा जवाब
वोटर कार्ड और अन्य दस्तावेजों में आधार के दुरुपयोग पर सुप्रीम कोर्ट ने संज्ञान लिया है. सुप्रीम कोर्ट मंगलवार को उस याचिका पर विचार करने के लिए तैयार हो गया है, जिसमें कहा गया है कि भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) द्वारा जारी आधार कार्ड का उपयोग नागरिकता, निवास स्थान और पते के सबूत के तौर पर गलत तरीके से किया जा रहा है. याचिका में मांग की गई है कि आधार का इस्तेमाल सिर्फ पहचान की पुष्टि के लिए ही सीमित किया जाए.इस मामले की अगली सुनवाई 7 अगस्त को होगी.
याचिका में केंद्र,राज्यों और चुनाव आयोग से निर्देश देने की मांग की गई है कि वे यह पक्का करने के लिए उचित कदम उठाएं कि आधार का इस्तेमाल सिर्फ पहचान के सबूत के तौर पर ही हो.
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को एक याचिका पर नोटिस जारी करते हुए केंद्र और राज्यों सरकारों से जवाब मांगा है. याचिका के अनुसार आधार कार्ड का इस्तेमाल नागरिकता और पते के सबूत के तौर पर गलत तरीके से किया जा रहा है. इस मामले की अगली सुनवाई 7 अगस्त को होगी.
आधार का यूज सिर्फ पहचान पत्र के लिए हो, घुसपैठिए ले रहे फायदा', SC का केंद्र राज्यों और EC को नोटिस | Aadhaar should be used only as an identity document Supreme
वकील अश्विनी कुमार उपाध्याय द्वारा दायर की गई इस याचिका पर सुप्रीम कोर्ट की बेंच चीफ जस्टिस सूर्य कांत और जस्टिस वी. मोहना ने इस मामले में केंद्र सरकार, सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों (UTs) को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है.
याचिका में मांग की गई है कि आधार का इस्तेमाल सिर्फ पहचान की पुष्टि के लिए ही सीमित किया जाए. इस याचिका में केंद्र सरकार, सभी राज्यों व केंद्रशासित प्रदेशों और भारत के चुनाव आयोग को निर्देश देने की मांग की गई है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि आधार का इस्तेमाल केवल पहचान के सबूत के तौर पर हो न कि नागरिकता, निवास, पते या जन्मतिथि के सबूत के तौर पर.
याचिका के अनुसार, नए वोटर रजिस्ट्रेशन (फॉर्म-6) में आधार को जन्मतिथि और पते के सबूत के तौर पर लिया जा रहा है. याचिकाकर्ता का तर्क है कि यह प्रक्रिया कानून के खिलाफ है. याचिका में कहा गया है, “आधार एक्ट, 2016 की धारा 9 साफ तौर पर कहती है कि ‘आधार नागरिकता या निवास का सबूत नहीं है.’
PIL में खास तौर पर नए वोटर रजिस्ट्रेशन (फॉर्म-6) के लिए आवेदन फॉर्म में जन्मतिथि और निवास के सबूत के तौर पर आधार के इस्तेमाल को चुनौती दी गई है.
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अभिषेक बनर्जी सहित 23 लोगों पर FIR दर्ज, 163 बीघा जमीन से मिट्टी बेचा, 300 करोड़ रुपये का सरकारी खजाने को लगाया चूना
पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक और बड़ा विवाद सामने आया है. डायमंड हार्बर के भाजपा नेता अभिजीत विश्वास उर्फ बॉबी ने तृणमूल कांग्रेस सांसद अभिषेक बनर्जी, उनके सहयोगी सहित कुल 23 लोगों के खिलाफ कथित रूप से अवैध मिट्टी कटाई और बिक्री के मामले में एफआईआर दर्ज कराई है. सांसद अभिषेक बनर्जी के खिलाफ करीब 300 करोड़ रुपये के अवैध मिट्टी खनन और तस्करी के आरोप में एफआईआर दर्ज करायी गयी है.
इस संबंध में सोमवार रात कालीतला-आशुलिया थाने में शिकायत दर्ज कराई गई. शिकायत दर्ज कराते हुए दावा किया है कि वर्षों से बड़े पैमाने पर अवैध रूप से मिट्टी काटकर बेची गयी.
भाजपा नेता और पूर्व लोकसभा प्रत्याशी अभिजीत विश्वास उर्फ बॉबी ने डायमंड हार्बर के कालीतला आशुलिया थाने में शिकायत दर्ज कराते हुए दावा किया है कि सांसद अभिषेक बनर्जी अपने सहयोगियों के साथ मिलकर 300 करोड़ रुपये के अवैध मिट्टी खनन और तस्करी किया है, जिससे सरकारी राजस्व और पर्यावरण दोनों को भारी नुकसान हुआ.
शिकायत के अनुसार, इस मामले में केवल अभिषेक बनर्जी ही नहीं, बल्कि उनके सहयोगी सुमित राय, विष्णुपुर के जेल में बंद तृणमूल विधायक दिलीप मंडल सहित कुल 23 लोगों के नाम एफआईआर में शामिल किये गये हैं. फिलहाल इस नये मामले में एफआईआर दर्ज होने के बाद राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गयी है.
आरोप है कि एक संगठित गिरोह ने अवैध रूप से लगभग 163 बीघा जमीन से मिट्टी की कटाई कर उसे बेच दिया, जिससे सरकारी खजाने को लगभग 300 करोड़ रुपये का चूना लगा. शिकायतकर्ता ने इस कथित घोटाले के समर्थन में पुलिस को इलाके की सैटेलाइट तस्वीरें भी सौंपी हैं, जिनमें भूमि को हुए नुकसान को स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है.
पूर्व लोकसभा प्रत्याशी अभिजीत विश्वास उर्फ बॉबी ने आगे कहा कि वर्ष 2022 और 2023 के दौरान यह अवैध कारोबार सबसे अधिक सक्रिय रहा. इस मुद्दे को पहले भी कई बार उठाया गया, लेकिन तत्कालीन पुलिस प्रशासन ने कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की.
हालांकि, समाचार लिखे जाने तक आरोपों पर अभिषेक बनर्जी या तृणमूल कांग्रेस की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.
भाजपा नेता ने दावा किया कि शिकायत के समर्थन में उन्होंने क्षेत्र की कई सैटेलाइट तस्वीरें भी पुलिस को सौंपी हैं। उनके अनुसार, इन तस्वीरों से यह स्पष्ट होता है कि किन स्थानों से मिट्टी काटी गई
अगार मालवा आगर-मालवा के जिला अस्पताल में दर्दनाक नजारा दिखाई दिया। यहां एक बच्ची को लाया गया था जिसे कुत्ते ने काटा था। तीन साल की मासूम बच्ची का पूरा चेहरा बिगाड़ दिया, उसे दर्जनों टांके लगाने पड़े। उज्जैन जिले की महिदपुर तहसील में देलवाड़ी गांव में घर के बाहर खेल रही माही (3) पिता कालू सिंह पर अचानक आवारा कुत्ता ने हमला कर दिया। मासूम के चेहरे को जगह-जगह से उसने बुरी तरह फाड़ डाला। आंख के नीचे, पूरी नाक, गाल और मुंह तक गंभीर जख्म आए। बच्ची दर्द से चीखती रही। परिजन उसे जिला अस्पताल लाए। कुत्ते ने बच्ची की ऐसी हालत कर दी कि टांके लगाना भी मुश्किल हो गया। आखिरकार बड़ी ही सावधानी से डॉक्टरों ने 55 टांके लगाए। बच्ची की हालत गंभीर है। उसे इंदौर रेफर किया गया है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद भी प्रदेश में आवारा कुत्तों पर प्रभावी नियंत्रण की कवायद नहीं की जा रही। जिम्मेदारों की इसी लापरवाही से इस बच्ची की जान पर बन आई।
प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया, माही खेल रही थी। पास ही बैठा कुत्ता अचानक आक्रामक हो उठा। उसने हमला किया और बच्ची गिर गई। वह मदद के लिए चीखती रही, चिल्लाती रही। कुत्ता काटता रहा। परिजन उसे जिला अस्पताल ले गए।
डॉक्टर भी मासूम के दर्द और उसके चेहरे की दशा देख द्रवित हो उठे। बच्ची की आंख के पास तक पहुंचे जख्म को देख ड्यूटी डॉक्टर ने नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. शशांक सकसेना को बुलाया। डॉ. सक्सेना ने सर्जरी कर आंख को बचाने का प्रयास किया। डॉक्टर ने बताया, जख्म गहरा है, आंखों की रोशनी बचाना जरूरी है।
सुप्रीम कोर्ट ने 19 मई को ही अपने फैसले में कुत्तों पर नियंत्रण के लिए सख्ती दिखाई। कोर्ट ने कहा था, जरूरी हो तो रेबीज पीडि़त, असाध्य बीमार, ज्यादा आक्रामक और खतरनाक आवारा कुत्ते को दया मृत्यु दी जा सकती है।
शीर्ष कोर्ट ने यह भी कहा..'गरिमा के साथ जीने के अधिकार में यह तथ्य शामिल है कि व्यक्ति कुत्तों के हमलों के डर के बिना स्वतंत्र रूप से जीवन जी सके। राज्य मूकदर्शक बनकर नहीं रह सकता। कोर्ट भी उस कठोर जमीनी हकीकत से आंखें नहीं मूंद सकती, जहां बच्चे-बुजुर्ग, विदेशी यात्री तक कुत्तों के काटने की घटनाओं के शिकार हुए।' कोर्ट ने कहा कि ईमानदारी से काम करने वाले अफसरों पर आपराधिक कार्यवाही नहीं की जाएगी। जब तक की उनके खिलाफ अधिकारों के दुरुपयोग का ठोस सबूत न हो।
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एटीएस की बड़ी कार्रवाई: राजस्थान से दबोचा गया PFI का ‘सेकंड कमांडर’ शाकिर मेव, 3 दिन में तीसरी गिरफ्तारी
भोपाल। मध्य प्रदेश एंटी टेरेरिस्ट स्क्वाड (MP ATS) ने देश विरोधी ताकतों और आतंकी नेटवर्क के खिलाफ एक बार फिर बड़ी और ताबड़तोड़ कार्रवाई की है। एटीएस ने प्रतिबंधित संगठन पीएफआई (PFI) और अन्य आतंकी संगठनों के संपर्क में रहने वाले शातिर आतंकी शाकिर मेव को गिरफ्तार कर लिया है। शाकिर मेव को आतंकी नेटवर्क का ‘सेकंड कमांडर’ माना जा रहा है। पिछले 3 दिनों के भीतर एमपी एटीएस द्वारा की गई यह तीसरी बड़ी गिरफ्तारी है।
मिली जानकारी के अनुसार, एमपी एटीएस ने खुफिया इनपुट के आधार पर दबिश देकर आरोपी शाकिर मेव को राजस्थान के अलवर जिले के टप्पुकरा थाना क्षेत्र से धर दबोचा। जांच एजेंसियों के मुताबिक, शाकिर मेव बेहद शातिर है और वह भारत में किसी बड़ी देश विरोधी गतिविधि और हमले की फिराक में था। वह पूरे आतंकी षड्यंत्र का ब्लूप्रिंट और रूपरेखा (प्लानिंग) तैयार करने का मुख्य काम संभालता था।
यह पूरी कार्रवाई हाल ही में पकड़े गए संदिग्ध आतंकी मोहम्मद फराक से पूछताछ के बाद की गई है। शाकिर मेव, मोहम्मद फराक का ही मुख्य सहयोगी है। जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा भी हुआ है कि आरोपी मोहम्मद फराक युवाओं को मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग देने के बहाने बरगला रहा था और ट्रेनिंग पूरी होने के बाद वह खुद अफगानिस्तान जाने की फिराक में था। ये सभी आरोपी प्रतिबंधित संगठन पीएफआई (PFI) सहित अन्य अंतरराष्ट्रीय आतंकी संगठनों के सीधे संपर्क में थे।
गिरफ्तारी के बाद एमपी एटीएस की टीम आरोपी शाकिर मेव को लेकर भोपाल पहुंची, जहां उसे विशेष न्यायालय (Court) में पेश किया गया। एटीएस ने आतंकी नेटवर्क और उनके भविष्य के प्लान का पर्दाफाश करने के लिए आरोपी की रिमांड मांगी थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए न्यायालय ने आरोपी शाकिर मेव को 20 जून तक एटीएस की रिमांड पर सौंप दिया है। अब पूछताछ में कई और बड़े चौंकाने वाले खुलासे होने की उम्मीद है।
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भोपाल में चयनित शिक्षकों का बड़ा आंदोलन: जनजाति कार्य विभाग से DPI तक निकाली ‘दंडवत यात्रा’, पद वृद्धि की मांग
भोपाल। मध्य प्रदेश में शिक्षक पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण कर चुके अभ्यर्थियों का गुस्सा अब सड़कों पर फूट पड़ा है। प्रदेश के अलग-अलग जिलों से राजधानी भोपाल पहुंचे वर्ग-2 और वर्ग-3 के शिक्षक अभ्यर्थियों ने अपनी मांगों को लेकर मोर्चा खोल दिया है। अपनी पीड़ा सरकार तक पहुंचाने के लिए अभ्यर्थियों ने जनजाति कार्य विभाग से लेकर लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) तक दंडवत यात्रा निकालकर अनोखा प्रदर्शन किया।
आंदोलन कर रहे चयनित अभ्यर्थियों ने सरकार के सामने मुख्य रूप से दो मांगें रखी हैं। वर्ग 2 (Class 2): रिक्त पदों को भरने के लिए कम से कम 10,000 पदों की बढ़ोतरी की जाए। वर्ग 3 (Class 3): प्राथमिक शिक्षकों के लिए 25,000 पद वृद्धि की मांग की जा रही है। अभ्यर्थियों का तर्क है कि मध्य प्रदेश के स्कूल शिक्षा विभाग और जनजाति कार्य विभाग में इस समय करीब 1 लाख 25 हजार पद खाली पड़े हैं, इसके बावजूद युवाओं को नियुक्तियों के लिए भटकना पड़ रहा है।
प्रदर्शनकारियों ने बताया कि वर्ष 2023 में शिक्षक पात्रता परीक्षा आयोजित की गई थी, जिसमें प्रदेश भर से लगभग पौने दो लाख (1.75 लाख) अभ्यर्थी शामिल हुए थे। लंबी प्रक्रिया के बाद सरकार ने महज 10,700 पदों पर भर्ती निकाली थी। हैरानी की बात यह है कि परीक्षा पास करने और नाम चयन सूची में आने के बावजूद इन पदों पर भी फिलहाल अब तक जॉइनिंग नहीं हो सकी है। स्कूल एलॉटमेंट (School Allotment) न होने के कारण चयनित अभ्यर्थी केवल दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर हैं।
अपनी सुस्त रफ्तार और उदासीनता को लेकर हमेशा सुर्खियों में रहने वाले जनजाति कार्य विभाग के बाहर अभ्यर्थियों ने जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शन में शामिल युवाओं का कहना है कि जब तक सरकार पद वृद्धि और तुरंत नियुक्ति को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाती, उनका यह संघर्ष जारी रहेगा। इस आंदोलन ने एक बार फिर प्रदेश की लचर शिक्षक भर्ती प्रक्रिया और युवाओं के रोजगार के मुद्दे को गरमा दिया है।
देवास। देवास पुलिस ने चोरी करने वाले एक अंतरराज्यीय गिरोह के सात सदस्यों को गिरफ्तार किया है। गिरोह के सदस्य लग्जरी कार से वारदात करने आते थे और इनके निशाने पर धार्मिक आयोजनों में शामिल होने वाली महिला श्रद्धालु रहती थीं। आरोपितों से 158 ग्राम वजनी नौ सोने की चेन, वारदात में प्रयुक्त करीब 20 लाख रुपये कीमत की कार, छह मोबाइल फोन और 3,500 रुपये नकद जब्त किए गए हैं।
पुलिस के अनुसार, राधागंज क्षेत्र निवासी सरोज अग्रवाल ने कोतवाली थाने में शिकायत दर्ज कराई थी कि 10 जून को मंडी व्यापारी एसोसिएशन धर्मशाला, एबी रोड में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दौरान भीड़ का फायदा उठाकर उनके गले से करीब 3.50 लाख रुपये कीमत की सोने की चेन और पेंडल चोरी कर लिया गया।
पुलिस अधीक्षक पुनीत गेहलोत ने बताया कि ऑपरेशन त्रिनेत्रम के तहत लगाए गए सीसीटीवी कैमरों की सैकड़ों फुटेज का विश्लेषण किया गया। संदिग्ध महिलाओं की गतिविधियों को चिन्हित कर उनकी आवाजाही ट्रेस की गई। जांच के दौरान आरोपितों की लोकेशन भोपाल तक मिली, जिसके बाद पुलिस टीम ने दबिश देकर गिरोह के सात सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस जांच में सामने आया कि गिरोह बड़े धार्मिक आयोजनों के दौरान अपनी कार को दूर खड़ा कर देता था। इसके बाद महिलाएं पैदल या ऑटो से कार्यक्रम स्थल तक पहुंचती थीं। आरती, प्रसाद वितरण और भीड़भाड़ के समय महिला श्रद्धालुओं के करीब पहुंचकर उनके गले से सोने की चेन निकाल लेती थीं। वारदात के तुरंत बाद गिरोह के सदस्य अलग-अलग दिशाओं में निकल जाते थे, ताकि किसी को संदेह न हो।
गिरोह के पुरुष सदस्य निगरानी रखने, परिवहन की व्यवस्था करने और चोरी के माल को ठिकाने लगाने का काम करते थे।
पुलिस ने बताया कि आरोपितों के मोबाइल फोन से अयोध्या, ओरछा, उज्जैन, नरसिंहपुर, जयपुर और अलवर सहित विभिन्न शहरों में होने वाले धार्मिक आयोजनों की जानकारी मिली है। पुलिस को आशंका है कि गिरोह इन आयोजनों में भी वारदात की तैयारी कर रहा था।
गिरोह की मुख्य सरगना जया निवासी मदनगीर, दक्षिण दिल्ली सहित ज्योति मानकर, मग्मा, देवी, देवेंद्र मुगम, रवि और राहुल को गिरफ्तार किया गया है। सभी वर्तमान में दक्षिण दिल्ली में रहते हैं और मूल रूप से तमिलनाडु के निवासी हैं। पुलिस के अनुसार, आरोपितों के खिलाफ दिल्ली, मुंबई और हरियाणा में चोरी व लूट के छह प्रकरण पहले से दर्ज हैं।
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बड़ा फर्जीवाड़ा: 20 टैक्सियां किराए पर लेकर किसानों को बेचीं, 1 करोड़ की लग्जरी कारें बरामद, आरोपी गिरफ्तार
भोपाल में एक बड़े वाहन फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है, जिसमें किराए पर ली गई कारों को आगे बेचने या गिरवी रखने का मामला सामने आया है। अरेरा हिल्स थाना पुलिस ने इस मामले में कार्रवाई करते हुए एक आरोपी को गिरफ्तार किया है और उसके कब्जे से करीब 10 लग्जरी कारें बरामद की गई हैं। इन कारों की कुल कीमत एक करोड़ रुपये से ज्यादा बताई जा रही है। पुलिस अब इस पूरे गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश में जुटी है और यह भी जांच कर रही है कि कितनी और गाड़ियां इस नेटवर्क के जरिए गायब की गई हैं।
यह मामला तब सामने आया जब पुरानी विधानसभा के सामने वाहन कारोबार करने वाले गौरव कुशवाहा ने अरेरा हिल्स थाने में शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने बताया कि 19 फरवरी को शैलेंद्र जोशी नाम का व्यक्ति उनके पास आया और एक कार किराए पर ली।
शुरुआत में सब कुछ सामान्य था। आरोपी समय पर किराया भी देता रहा, जिससे मालिक को कोई शक नहीं हुआ। लेकिन कुछ समय बाद उसने अचानक संपर्क तोड़ दिया। इसके बाद न तो वह कार वापस लेकर आया और न ही किराए की राशि दी। काफी समय तक इंतजार करने के बाद जब कोई जवाब नहीं मिला, तो पीड़ित ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।
शिकायत मिलने के बाद अरेरा हिल्स थाना पुलिस ने जांच शुरू की। जांच के दौरान पुलिस ने शैलेंद्र जोशी को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में कई अहम जानकारियां सामने आईं। पुलिस को पता चला कि आरोपी अकेले काम नहीं कर रहा था, बल्कि वह एक ऐसे गिरोह का हिस्सा हो सकता है जो किराए पर ली गई गाड़ियों को बेचने या गिरवी रखने का काम करता है। इसके बाद पुलिस ने आरोपी की निशानदेही पर कई जगह छापेमारी की और करीब 10 लग्जरी कारें बरामद कर लीं।
पुलिस के अनुसार, बरामद की गई कारों की कीमत लगभग एक करोड़ रुपये से ज्यादा है। ये सभी कारें अलग-अलग कंपनियों और मॉडल की हैं। जांच में यह भी सामने आया है कि गिरोह लग्जरी वाहनों को निशाना बनाता था, ताकि उन्हें आसानी से बेचकर ज्यादा पैसा कमाया जा सके।
पुलिस का कहना है कि यह मामला सिर्फ 10 कारों तक सीमित नहीं है। शुरुआती जांच में संकेत मिले हैं कि गिरोह ने करी30 से 36 वाहन किराए पर लिए हो सकते हैं। इनमें से कई गाड़ियां भोपाल और आसपास के जिलों से ली गई थीं। पुलिस अब उन सभी वाहनों की तलाश कर रही है जो अभी तक बरामद नहीं हुए हैं।
जांच में यह भी सामने आया है कि यह गिरोह सिर्फ भोपाल तक सीमित नहीं था। बल्कि आसपास के जिलों से भी वाहन किराए पर लेकर उन्हें या तो गिरवी रखा गया या बेच दिया गया। इससे साफ है कि यह एक संगठित नेटवर्क हो सकता है, जिसमें कई लोग शामिल हैं। पुलिस अब गिरोह के अन्य सदस्यों की पहचान करने में जुटी है।
जब इस पूरे मामले का खुलासा हुआ और पुलिस ने कुछ गाड़ियां बरामद कीं, तो कई वाहन मालिक अरेरा हिल्स थाने पहुंचे। कई लोगों को यह भी पता चला कि उनकी गाड़ियां चोरी या गायब हो चुकी हैं। थाने में लोगों की भीड़ लग गई, क्योंकि कई लोग अपने वाहनों की स्थिति जानने के लिए पहुंचे थे।
कुछ वाहन मालिकों ने बताया कि उन्होंने अपनी गाड़ियां किराए पर दी थीं, लेकिन बाद में उन्हें धोखे का पता चला। एक मालिक ने बताया कि उसने लगभग डेढ़ महीने पहले अपनी कार किराए पर दी थी, लेकिन बाद में पता चला कि गाड़ी वापस नहीं आई। एक अन्य व्यक्ति ने कहा कि उसकी कार अब तक गायब थी और बाद में उसे थाने से जानकारी मिली। एक और पीड़ित ने बताया कि उनकी हुंडई ओरा कार के बारे में तीन महीने बाद पता चला कि वह बरामद कर ली गई है, इसलिए वे थाने पहुंचे। कई लोगों ने यह भी कहा कि उन्हें लंबे समय तक यह नहीं पता था कि उनकी गाड़ियां वास्तव में चोरी हो चुकी हैं।
अरेरा हिल्स थाना प्रभारी सुनील शर्मा के अनुसार, आरोपी से लगातार पूछताछ की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस गिरोह में और कौन-कौन लोग शामिल हैं। इसके अलावा, जिन गाड़ियों की अभी तक बरामदगी नहीं हुई है, उनकी भी तलाश जारी है। पुलिस का मानना है कि जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं।
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थाना प्रभारी पर जानलेवा हमला, उपद्रवियों ने किया धारदार हथियार से हमला, सिर पर आई गंभीर चोट
सीधी। मध्य प्रदेश के सीधी जिले से कानून व्यवस्था को चुनौती देने वाली एक बेहद गंभीर और सनसनीखेज वारदात सामने आई है। यहां कमर्जी थाना क्षेत्र में दो पक्षों के बीच चल रहे नाली विवाद के बाद लगाए गए सड़क जाम को खुलवाने पहुंचे थाना प्रभारी और पुलिस बल पर कुछ असामाजिक तत्वों ने जानलेवा हमला कर दिया। इस हमले में कमर्जी थाना प्रभारी के सिर पर नुकीले हथियार से वार किया गया है, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। उन्हें तत्काल जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
जानकारी के अनुसार कमर्जी थाना क्षेत्र के अंतर्गत एक ही परिवार के लोगों के बीच नाली निर्माण को लेकर काफी समय से विवाद चल रहा था। सोमवार को यह विवाद इतना बढ़ गया कि आक्रोशित लोगों ने सड़क पर उतरकर चक्काजाम कर दिया। सड़क पर वाहनों की लंबी कतारें लगने और जाम की सूचना मिलने पर कमर्जी थाना प्रभारी अपने पुलिस स्टाफ के साथ तुरंत मौके पर पहुंचे।
थाना प्रभारी और पुलिस दल मौके पर मौजूद लोगों को समझाइश देकर शांतिपूर्वक जाम खुलवाने का प्रयास कर रहे थे। इसी दौरान चक्काजाम कर रहे करीब आठ लोग अचानक उग्र हो गए और पुलिस दल के साथ विवाद करने लगे। देखते ही देखते आरोपियों ने थाना प्रभारी पर हमला बोल दिया और उनके सिर पर नुकीले हथियार से ताबड़तोड़ वार कर दिए। अचानक हुए इस हमले में थाना प्रभारी लहूलुहान होकर वहीं गिर पड़े।
थाना प्रभारी पर हमले की खबर जंगल की आग की तरह फैली, जिससे पूरे पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। गंभीर रूप से घायल अधिकारी को तुरंत जिला अस्पताल लाया गया, जहां डॉक्टरों की टीम उनका उपचार कर रही है। घटना की गंभीरता को देखते हुए सीधी पुलिस अधीक्षक (SP) संतोष कोरी तुरंत जिला अस्पताल पहुंचे और घायल थाना प्रभारी का हालचाल जाना। पुलिस अधीक्षक ने साफ कहा है कि घटना में शामिल सभी आरोपियों की पहचान कर ली गई है और पुलिस बल पर हमला करने वाले किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा, सभी के खिलाफ बेहद कड़ी कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
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उज्जैन। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर डॉ. सुमनानंद गिरि महाराज को उत्तर प्रदेश से एक अज्ञात पत्र मिला है, जिसमें उन्हें जान से मारने और कन्हैयालाल जैसा हश्र करने की सीधी धमकी दी गई है। पत्र में अभद्र भाषा का प्रयोग करते हुए लिखा गया है कि ‘अब पानी सिर से ऊपर हो चुका है, तुम्हें कोई नहीं बचा पाएगा।’महामंडलेश्वर ने बताया कि उन्हें पहले भी ऐसी धमकियां मिलती रही हैं, जिसकी सूचना वे लगातार शासन-प्रशासन को दे रहे हैं।... अपराध
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