टीकमगढ़। मध्यप्रदेश के टीकमगढ़ जिले के देहात थाना क्षेत्र अंतर्गत मवई गांव में बुधवार रात गणेश प्रतिमा खंडित किए जाने के मामले का पुलिस ने खुलासा कर दिया है। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए इस मामले में तीन सगे भाइयों को गिरफ्तार कर लिया है। प्रारंभिक जांच में यह पूरा विवाद डीजे की आवाज कम करने को लेकर सामने आया है।
दरअसल बुधवार की रात मवई गांव में गणेशोत्सव के दौरान डीजे बज रहा था। इसी दौरान आवाज कम करने को लेकर पक्ष-विपक्ष में कहासुनी और विवाद हुआ। विवाद बढ़ने पर आरोप है कि आरोपियों ने गणेश प्रतिमा को खंडित कर दिया, जिससे स्थानीय श्रद्धालुओं और आयोजन समिति में रोष फैल गया।
आयोजन समिति के सदस्य अनिल अहिरवार की शिकायत पर देहात थाने में तुरंत एफआईआर दर्ज की गई। वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में गठित पुलिस टीम ने दबिश देकर देर रात तीनों आरोपी भाइयों प्रकाश, मनोज और भागचंद अहिरवार को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस द्वारा मामले में आगे की वैधानिक कार्रवाई की जा रही है तथा क्षेत्र में शांति एवं कानून-व्यवस्था पूरी तरह सामान्य है।
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पत्नी, भाई और साले ने की हत्या, शव को ठिकाने लगाने जाते समय बाइक से गिरा तो वहीं छोड़कर भागे
मंदसौर। नई आबादी पुलिस ने मदारपुरा निवासी ईस्माईल उर्फ भूरा की हत्या के मामले में 24 घंटे में आरोपितों को पकड़ लिया है। मकान बेचकर मिलने वाले रुपये के लालच में भाई, पारिवारिक कलह के चलते पत्नी ने ही साले के साथ मिलकर गला घोंटकर हत्या कर दी थी।
हत्या के बाद शव को खिलचीपुरा रोड पर ठिकाने लगाने जाते समय गिर गया तो वहीं छोड़कर भाग गए। बाद में हत्यारा भाई ही फरियादी बनकर थाने में रिपोर्ट लिखवाने पहुंच गया था। पुलिस ने आरोपित भाई व पत्नी को गिरफ्तार कर लिया है। अभी फरार साले की तलाश है।
एसपी विनोद कुमार मीना ने बताया कि मंगलवार को 30 वर्षीय मो. ईशाक पुत्र अलीमुद्दीन मेव निवासी मदारपुरा ने नई आबादी थाने पर सूचना दी थी कि मेरा भाई 32 वर्षीय ईस्माईल उर्फ भूरा मेव खिलचीपुरा से नालछा माता मंदिर जाने वाले मार्ग पर अचेत अवस्था में पड़ा है। डायल 112 से उसे जिला चिकित्सालय ले जाया गया। वहां परीक्षण के बाद चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। मामले में पुलिस ने जांच शुरू की।
पुलिस इस मामले में पड़ताल ही कर रही थी कि सीसीटीवी के फुटेज से इस पूरे मामले का अहम सुराग मिल गया। एक फुटेज में खिलचिपुरा क्षेत्र में मृतक की पत्नी 24 वर्षीय मुस्कान मेवाती निवासी मदारपुरा व साला शाकिर पुत्र बब्बु खां मेव निवासी नई फतेहगढ़ बाइक पर बीच में अचेत अवस्था में इस्माइल को ले जाते दिखे। इसके बाद आसपास के लोगों से पता किया तो उन्होंने भी कहा बाइक गड्ढे में कूदने से इस्माइल नीचे गिर पड़ा था। जब लोगों ने मुस्कान व शाकिर से पूछताछ की तो वह इस्माइल को अचेत अवस्था में छोड़कर भाग गए। इधर पुलिस ने इस्माइल के भाई मो. इशाक से मनोवैज्ञानिक तरीके से पूछताछ की तो उसने भी गला घोंटकर हत्या करना कबूल लिया। इसमे इस्माइल की पत्नी मुस्कान व साला शाकिर भी शामिल था।
इस हत्याकांड के दो मुख्य किरदार है मृतक का भाई मो.इशाक व पत्नी मुस्कान। दोनों की ही हत्या करने की अपनी अपनी वजह है।
आरोपी भाई इशाक मकान बेचना चाहता था जिससे उसे मोटी रकम मिल सके। किंतु मृतक ईस्माईल अपनी सहमति नहीं दे रहा था और लगातार अड़चन बन रहा था।
मृतक ईस्माईल आए दिन शराब पीकर घर आता था। वह मुस्कान से झगड़ा करने के साथ ही मारपीट करता था। इससे मुस्कान भी काफी परेशान थी।
मकान बेचकर मिलने वाले रुपयों का लालच व पारिवारिक विवाद से परेशान होने के चलते इशाक, मुस्कान ने इस्माइल की हत्या करने की योजना बना ली। इसमे मुस्कान ने शाकिर को भी शामिल कर लिया। तीनों ने मिलकर मृतक के सिर पर डंडे से वार किया। इसके बाद गला घोंटकर हत्या भी कर दी।
हत्या के बाद साक्ष्य मिटाने के लिए शव को मोटरसायकल पर बीच मे लेकर शाकिर व मुस्कान खिलचिपुरा क्षेत्र में पहुंचे। वहा नालछा माता मंदिर रोड पर शव नीचे गिर गया तो छोड़कर भाग गया। इसके बाद मामले को सामान्य नशे या दुर्घटना में मौत का रुप देने तथा पुलिस को गुमराह करने के लिए आरोपित भाई फरियादी बनकर थाने पहुंच गया और झूठी रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने मोहम्मद इशाक व मुस्कान को गिरफ्तार कर लिया है। अभी शाकिर घटना के बाद से ही फरार है उसकी तलाश की जा रही है।
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पार्किंग की जगह बिल्डर ने बनाई 18 दुकानें, नगर निगम ने चलाया बुलडोजर, सड़क पर खड़ी की दीवार भी तोड़ी
ग्वालियर। नगर निगम के नए कमिश्नर अभिषेक चौधरी के तेवर बहुत कड़े हैं, ऑफिस में अधिकारियों के साथ काम की समीक्षा, विभागों की बैठकों के अलावा फील्ड में निरीक्षण उनका रुटीन बन गया है, निगम में आंख बंद करे बैठे अफसरों की उन्होंने नींद उड़ा दी है यही वजह है कि अब अवैध अतिक्रमणों पर कार्रवाई की जा रही है।
नगर निगम के मुताबिक यहाँ बिल्डर मोहन बांदिल और ऋषभ जैन मिलकर एक बिल्डिंग बना रहे हैं, जिसमें सबसे नीचे वाहन पार्किंग के लिए उन्होंने नगर निगम से अनुमति ली थी मगर उन्होंने वे इस्तेमाल कमर्शियल रूप में करने के लिए वहां 18 दुकानों का निर्माण कर रहे थे , शिकायत के बाद नर निगम ने बिल्डर को नोटिस थमाया लेकिन बिल्डर एन दुकाने नहीं तोड़ी।
जब बिल्डर ने दुकाने नहीं हटाई तो ग्वालियर नगर निगम का मदाखलत अमला आज वार्ड क्रमांक 21 की बैंक कॉलोनी पहुंच गया, यहाँ उसे दुकानों में कंस्ट्रक्शन दिखाई दिया जिसपर नगर निगम ने बुलडोजर चला दिया और अनुमति के विपरीत पार्किंग की जगह बनाई गई सभी 18 दुकानों को गिरा दिया।
इसी तरह नगर निगम को ग्वालियर पूर्व विधानसभा में माधव प्लाजा के सामने थौराट की गोठ में रोड़ पर एक दीवार बनाये जाने की शिकायत मिली थी, मदाखलत की टीम वहां पहुंची और दीवार को हथौड़ा मारकर गिरा दिया। मदाखलत टीम ने मुरार बारादरी से सदर बाजार अग्रसेन चौराहा गणेश मंदिर गर्म सड़क गर्ल्स कॉलेज तक यातायात में बाधक बन रहे हाथ ठेले, फुटपाथियों, दुकानदारों के सामान को हटवाया और जब्त सामान को मदाखलत कार्यालय पर जमा किया।
बालाघाट. एमपी के बालाघाट में लांजी स्थित नीमटोला में आज जबलपुर से पहुंची आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) की टीम ने विलास चौरे के घर पर छापा मारा है. विलास चौरे मनेरी सेवा सहकारी समिति में प्रभारी प्रबंधक के पद पर काम कर रहा है. जांच में ईओडब्ल्यू की टीम को विलास की आय से 500 गुना ज्यादा संपत्ति व निवेश के दस्तावेज मिले है.
ईओडब्ल्यू के डीएसपी मंजीत सिंह ने बताया कि कुल वाहनों की कीमत करीब दो करोड़ रुपए है. विलास चौरे पत्नी के नाम से टूर एंड ट्रैवल्स का काम भी कर रहे थे. उनके पास पांच बसों में चार 50 सीटर बस और एक ट्रैवलर बस, दो बोलेरो, एक ग्रैंड विटारा, एक स्कॉर्पियो और दो ट्रैक्टर शामिल हैं. दोनों ट्रैक्टर खेती के लिए किराए पर चलाते थे. साल 2016 में लांजी में मकान बनाया था, जिसमें 50 लाख रुपए का निर्माण कराया था. करीब छह महीने पहले पास के गांव में 10 लाख रुपए की कृषि भूमि खरीदी थी. घर में जिम खोलने वाले थे. इसके लिए 10 लाख रुपए के इक्विपमेंट्स भी खरीद रखे थे. पत्नी, बेटे और ट्रैवल्स के नाम से जिला सहकारी बैंक और बैंक ऑफ महाराष्ट्र में खाते मिले हैं. इन खातों पर रोक लगा दी है. एलआईसी की चार पॉलिसी और पांच लाख रुपए का सोना मिला है.
डीएसपी मंजीत सिंह ने बताया कि विलास चौरे वर्ष 2014 में सेवा सहकारी समिति में दैनिक वेतन भोगी के रूप में पदस्थ हुआ था. वर्तमान में वह प्रभारी प्रबंधक के रूप में कार्यरत था. करीब 12 साल की नौकरी में उसकी आय लगभग 25 लाख रुपए बताई गई है. जांच में सामने आई संपत्तियां उसकी ज्ञात आय की तुलना में करीब 500 गुना अधिक हैं. ईओडब्ल्यू द्वारा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज कर लिया गया है. बैंक खातों में जमा राशि और अन्य वित्तीय जानकारी जुटाने के लिए संबंधित बैंकों को पत्र भेजे गए हैं. अधिकारियों के अनुसार, संपत्ति और निवेश से जुड़े दस्तावेजों की भी जांच की जा रही है.
विलास चौरे वर्तमान में सेवा सहकारी समिति मनेरी में प्रभारी प्रबंधक के पद पर हैं. उनके परिवार के नाम कृषि यंत्र बेचने का व्यवसाय भी बताया गया है. इसके अलावा 'मातोश्री' नाम से बालाघाट से हैदराबाद रूट पर तीन बसों के संचालन की जानकारी सामने आई है.
ईओडब्ल्यू द्वारा जांच जारी है, जिसमें संपत्ति और आय से जुड़े दस्तावेजों की जांच कर रही है. विभाग की जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा कि चौरे के पास आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक कितनी संपत्ति मिली है.
बालाघाट जिले में करीब एक पखवाड़े के भीतर ईओडब्ल्यू की यह दूसरी बड़ी कार्रवाई है. इससे पहले 3 सितंबर को ईओडब्ल्यू ने बालाघाट के पीआईयू-ई कमलकिशोर सिंगारे के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के मामले में कार्रवाई की थी. जांच में उनकी आय से 378 प्रतिशत अधिक, करीब 11 करोड़ रुपए से ज्यादा की संपत्ति मिलने की बात सामने आई थी. इसमें नकदी के साथ पत्नी और बेटों के नाम पर संपत्तियां मिलने की जानकारी दी गई थी.
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यूट्यूब चैनल का ‘संपादक’ निकला महाठग! फर्जी पत्रकार बन युवाओं को लगाया 25 लाख का चूना
जबलपुर। मध्य प्रदेश की संस्कारधानी जबलपुर में खुद को पत्रकार और यूट्यूब चैनल का संपादक बताकर बेरोजगार युवाओं को ठगने वाले एक शातिर जालसाज का पर्दाफाश हुआ है। आरोपी ने सरकारी नौकरी दिलाने का झांसा देकर 11 युवाओं से करीब 25 लाख रुपये ऐंठ लिए। पीड़ितों की शिकायत पर विजय नगर थाना पुलिस ने आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, विजय नगर निवासी आरोपी अंकित श्रीवास्तव खुद को एक यूट्यूब चैनल का संपादक बताता था। उसने इलाके के बेरोजगार युवाओं को अपनी बातों के जाल में फंसाया और सरकारी नौकरी लगवाने का दावा किया। आरोपी की कारस्तानी यहीं नहीं थमी, उसने पीड़ितों का विश्वास जीतने के लिए ‘कृषि विस्तार मंत्रालय’ का फर्जी नियुक्ति पत्र भी युवाओं को भेज दिया।
ठगी का शिकार हुए कुल 11 युवाओं ने जब आरोपी को पैसे दिए, तो उनसे 1 लाख रुपये से लेकर 6.50 लाख रुपये तक की रकम ऐंठी गई। जब लंबा समय बीत जाने के बाद भी नौकरी नहीं मिली और फर्जी मेल का सच सामने आया, तो पीड़ितों को अपने साथ हुई ठगी का अहसास हुआ। इसके बाद सभी पीड़ितों ने एकजुट होकर पुलिस से शिकायत की। पुलिस ने आरोपी अंकित श्रीवास्तव के खिलाफ जालसाजी और धोखाधड़ी का केस दर्ज कर उसकी तलाश शुरू कर दी है।
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मानवता हुई शर्मशार: जिस मां ने चार बेटे पाले, वही अंतिम संस्कार में हुई अकेली
हेमंत शर्मा, इंदौर। मध्य प्रदेश के इंदौर में रिश्तों को शर्मसार कर देने वाला मामला सामने आया है। जिस मां ने चार बेटों को जन्म दिया, उसी मां की मौत के बाद चारों बेटों ने अंतिम संस्कार से किनारा कर लिया। मौत के बाद तीन दिन तक बेटों का इंतजार किया गया, लेकिन न कोई बेटा आया और न ही किसी ने मुखाग्नि देने की जिम्मेदारी उठाई।
दरअसल, सिलिकॉन सिटी की गणेश रेसिडेंसी में रहने वाली लता बाई की 13 सितंबर को मौत हो गई थी। बताया जा रहा है कि लता बाई ने अपनी जिंदगी की जमा पूंजी और जेवर बेचकर फ्लैट खरीदा था। आरोप है कि बाद में फ्लैट बेटों के नाम करवा लिया गया और मां को घर से बाहर कर दिया गया। सड़क पर भटकती लता बाई की जानकारी समाजसेवी संगठन प्रीयु फाउंडेशन के अजय नागदा को मिली।
इसके बाद उन्हें जानकी वृद्धाश्रम में आश्रय दिलाया गया। करीब आठ महीने तक लता बाई वृद्धाश्रम में रहीं। तबीयत बिगड़ने पर एमवाय अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। मौत की सूचना चारों बेटों को दी गई, लेकिन परिजनों की तरफ से अंतिम संस्कार के लिए कोई नहीं पहुंचा। इसके बाद जानकी वृद्धाश्रम और प्रीयु फाउंडेशन के सदस्य आगे आए और उन्होंने बेटे का फर्ज निभाते हुए लता बाई का अंतिम संस्कार कराया। ये मामला सिर्फ एक मां की मौत का नहीं बल्कि उस रिश्ते पर बड़ा सवाल है, जिसे दुनिया का सबसे मजबूत रिश्ता माना जाता है।
मणिपुर में कुकी और नगा समुदायों के बीच बढ़ते तनाव का गहरा असर पहाड़ी इलाकों में जनजीवन पर पड़ा है। कई क्षेत्रों में पिछले 7 दिनों से स्कूल और बाजार बंद हैं। सड़क और हाईवे पर नाकेबंदी के चलते 7 पहाड़ी जिलों से संपर्क प्रभावित हुआ है। सामान्य आवाजाही के साथ जरूरी सामान की सप्लाई भी बाधित होने की खबर है।
मणिपुर में हिंसा फिर भड़क गई है। मणिपुर के तामेंगलोंग जिले के लीसांगफाई गांव में दो कुकी जनजाति (Kuki people) महिलाओं की गोली मारकर हत्या कर दी गई। इसके अलावा कई फार्महाउसों में आग लगा दी गई। मृतकों की पहचान किमजालहाई सिंगसोंग और फलनैचोंग सितल्हो के रूप में हुई है। दोनों इसी गांव… pic.twitter.com/QNJdoS1YjR
कांगपोकपी के कुछ गांवों में चीनी की कीमत ₹400-450 प्रति किलो तक पहुंचने का दावा स्थानीय लोगों ने किया है। लोगों के मुताबिक, डर के कारण ग्रामीण घरों से बाहर निकलने और खेतों में जाने से बच रहे हैं। मेडिकल इमरजेंसी में अस्पताल या एयरपोर्ट पहुंचना भी मुश्किल बताया जा रहा है। स्थानीय निवासी मार्गरेट के मुताबिक, जिला मुख्यालय में जरूरी सामान मिल रहा है, लेकिन दूरदराज के गांवों में स्थिति गंभीर है। वहीं डेविड ने बताया कि कई लोग खेतों में जाने से भी डर रहे हैं।
स्थानीय लोगों का दावा है कि उखरुल, सेनापति, तामेंगलोंग और चंदेल जैसे नगा-बहुल इलाकों में प्रमुख सड़कों पर नाकेबंदी और चेकपॉइंट बनाए गए हैं। निजी वाहनों के लिए बिना सुरक्षा एस्कॉर्ट आवाजाही मुश्किल बताई जा रही है। कुछ लोगों ने मेडिकल इमरजेंसी और एयरपोर्ट जाने के लिए स्थानीय प्रशासन से अनुमति लेने की बात कही है।
कांगपोकपी के चावांगकिनिंग लियांगमाई गांव में बुधवार को कई घरों में आग लगाए जाने की सूचना मिली। कुछ घरों पर गोलीबारी के निशान भी मिले हैं। अधिकारियों के अनुसार, मंगलवार रात संदिग्ध हथियारबंद लोगों और CRPF के बीच करीब 6 घंटे तक रुक-रुककर गोलीबारी हुई। दो लकड़ी के घर जलने की भी जानकारी है।
तामेंगलोंग के लीसांगफाई गांव में मंगलवार को दो कुकी महिलाओं की गोली मारकर हत्या कर दी गई। एक कुकी विधायक ने वारदात में NSCN-IM और ZUF-K कैडरों की कथित भूमिका का आरोप लगाया है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
कुकी संगठनों ने पिछले 4 दिनों में 4 महिलाओं समेत 6 कुकी लोगों की हत्या का आरोप नगा समुदाय पर लगाया है। स्थानीय संगठनों के मुताबिक, फरवरी से अब तक करीब 40 लोगों की मौत हो चुकी है।
मणिपुर में मैतेई और कुकी-जो समुदायों के बीच 3 मई 2023 से हिंसा जारी है। इस दौरान सैकड़ों लोगों की मौत और हजारों के विस्थापन की रिपोर्ट सामने आई है। फरवरी 2026 में उखरुल के लिटन गांव से कुकी-नगा तनाव बढ़ने के बाद पहाड़ी क्षेत्रों में हिंसा, फायरिंग और आगजनी की घटनाएं फिर तेज हुई हैं।
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एन चंद्रशेखरन 2032 तक बने रहेंगे टाटा संस के चेयरमैन: बोर्ड ने दिया 5 साल का एक्सटेंशन
मुंबई. टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन का कार्यकाल 2032 तक के लिए बढ़ा दिया गया है. गुरुवार को हुई टाटा संस लिमिटेड के बोर्ड की बैठक में उन्हें 5 साल का नया एक्सटेंशन देने का फैसला लिया गया. इसके साथ ही बोर्ड ने कंपनी को शेयर बाजार में सूचीबद्ध (IPO) कराने के प्रस्ताव पर भी अपनी सहमति दे दी है.
चंद्रशेखरन का मौजूदा कार्यकाल फरवरी 2027 में पूरा हो रहा था. हालांकि, नोएल टाटा के साथ मतभेदों और टाटा ट्रस्ट्स के भीतर चल रही खींचतान के कारण उन्होंने 12 अगस्त 2026 को अपने पद से इस्तीफा दे दिया था. बोर्ड के इस ताजा फैसले के बाद अब वे 2032 तक कंपनी की कमान संभालते रहेंगे.
चंद्रशेखरन के एक्सटेंशन के इस फैसले को अभी आगामी वार्षिक आम बैठक (AGM) में अंतिम मंजूरी मिलना बाकी है. टाटा संस में टाटा ट्रस्ट्स की 66% हिस्सेदारी है. बोर्ड बैठक के दौरान ट्रस्ट के प्रमुख सदस्य नोएल टाटा ने इस फैसले का विरोध किया, जबकि वेनु श्रीनिवासन ने चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति का समर्थन किया.
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‘माफी मांगें, अखबारों में प्रकाशित कराए…’, दिशा सालियान के पिता ने आदित्य ठाकरे को भेजा 500 करोड़ का मानहानि नोटिस
दिवंगत बॉलिवुड एक्टर शुशांत सिंह राजपूत की पूर्व मैनेजर दिशा सालियान की मौत पर सस्पेंस जारी है. दिशा की मौत मामले में कई बड़े-बड़े नाम सामने आ रहे हैं. डिनो मौर्या, रिया चक्रवर्ती, सूरज पंचोली तक का नाम आ रहा है. वहीं अब दिशा के पिता सतीश सालियन ने आदित्य ठाकरे और महाराष्ट्र के पूर्व गृहमंत्री अनिल देशमुख को 500 करोड़ रुपये का मानहानि नोटिस भेजा है. दोनों के ही नाम हाल ही में सीबीआई ने सतीश सालियान की शिकायत के आधार पर दर्ज FIR में शामिल किया था. अब दिशा के पिता ने दोनों नेताओं को 500 करोड़ रुपये का मानहानि नोटिस भेजा है. नोटिस में दोनों के कुछ बयानों पर आपत्ति जताई गई है. सतीश सालियन ने माफी मांगने, बयान वापस लेने और 500 करोड़ का हर्जाना देने की मांग की है. इसके लिए सात दिन का समय दिया गया है.
यह कानूनी नोटिस वकील अनुष्का सोनावणे के जरिए भेजा गया है. नोटिस में दोनों नेताओं से बिना शर्त, स्पष्ट और सार्वजनिक रूप से लिखित माफी मांगने को कहा गया है. माफी को सभी प्रमुख मीडिया संस्थानों में प्रकाशित कराने की मांग की गई है. इसके लिए प्रिंट मीडिया में ए4 आकार का विज्ञापन देने और राष्ट्रीय और राज्य स्तर के प्रमुख न्यूज चैनलों के साथ-साथ सोशल मीडिया अकाउंट्स पर कम से कम तीन मिनट का बिना शर्त वीडियो माफीनामा जारी करने को कहा गया है.
नोटिस में कहा गया है कि आदित्य ठाकरे और अनिल देशमुख ने सतीश सालियान के बयानों और कानूनी कार्रवाई को लेकर झूठे, दुर्भावनापूर्ण और मानहानिकारक आरोप लगाए. सतीश का कहना है कि उनकी बेटी की मौत की स्वतंत्र जांच की मांग को राजनीतिक मकसद से प्रेरित बताया गया. साथ ही यह भी कहा गया कि सीबीआई पहले ही दिशा सालियान मामले की जांच कर चुकी है और उन्हें क्लीन चिट दे चुकी है.
नोटिस के मुताबिक, सतीश सालियान ने अपनी बेटी की मौत की स्वतंत्र जांच के लिए संवैधानिक और कानूनी अधिकारों के तहत हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. उनका दावा है कि याचिका में कई आरोपों, परिस्थितियों, विरोधाभासों और दस्तावेजी व इलेक्ट्रॉनिक सबूतों को मेंशन किया गया था.
नोटिस में कहा गया है कि आदित्य ठाकरे ने इस मामले की सुनवाई में हस्तक्षेप किया. उन्होंने केवल कानूनी पहलुओं पर सवाल नहीं उठाए, बल्कि सतीश सालियान की नीयत और उनकी विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े किए. उन्होंने सतीश की कानूनी लड़ाई को राजनीतिक साजिश और उन्हें परेशान करने की कोशिश बताया.
सतीश सालियान ने इन आरोपों को झूठा बताते हुए कहा है कि इन्हें बिना किसी ठोस सबूत के लगाया गया. नोटिस में अनिल देशमुख के पिछले साल दिए गए उस बयान का भी जिक्र है, जिसमें उन्होंने सतीश की याचिका को आदित्य ठाकरे को बदनाम करने की साजिश बताया था. सतीश का कहना है कि देशमुख खुद इस मामले में निष्पक्ष व्यक्ति नहीं थे, इसलिए उनका बयान और भी गंभीर और दुर्भावनापूर्ण था.
दिशा सालियान के पिता लंबे समय से अपनी बेटी की मौत को लेकर सवाल उठाते आ रहे हैं. 2025 में उन्होंने बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और मामले की दोबारा जांच की मांग की. उनके वकील ने कोर्ट में दावा किया कि दिशा के साथ पहले दुष्कर्म किया गया और उसके बाद उनकी हत्या कर दी गई. ये भी आरोप लगाया गया कि मामले को दबाने के लिए प्रभावशाली लोगों और पुलिस अधिकारियों की भूमिका रही. इन आरोपों की पुष्टि अभी CBI की जांच का विषय है.
दिशा सालियान की मौत की शुरुआती जांच मुंबई पुलिस ने की थी. पुलिस की जांच में उनकी मौत को आत्महत्या बताया गया था. मार्च 2025 में सामने आई मुंबई पुलिस की क्लोजर रिपोर्ट में भी दिशा की मौत को आत्महत्या बताया गया था और उनकी मानसिक परेशानी का जिक्र किया गया था. यानी अब CBI के सामने सबसे अहम सवाल यही है कि क्या पुराने निष्कर्षों से अलग कोई नया और ठोस सबूत सामने आता है.
तमिलनाडु के कोयंबटूर से उत्तर प्रदेश एटीएस ने तमिलनाडु पुलिस के साथ मिलकर अल-कायदा से जुड़े एक संदिग्ध आतंकी को दबोचने में सफलता प्राप्त की है. अल-कायदा इंडियन सब-कॉन्टिनेंट (AQIS) की विचारधारा से जुड़े होने के आरोप में यूपी एटीएस ने तमिलनाडु से मकसूद अली को गिरफ्तार किया है. गिरफ्तार किया गया आंतकी यूपी के सिद्धार्थनगर का रहने वाला है, जो कोयंबटूर में छिपा हुआ था.
गिरफ्तार किया गया आंतकी कोयंबटूर से पाकिस्तान में मौजूद हैंडलरों के संपर्क में था. उसने एक सीक्रेट ऐप भी तैयार किया था.
तमिलनाडु के कोयंबटूर से यूपी ATS ने अलकायदा से जुड़े एक आतंकी को गिरफ्तार किया है. 19 साल का मकसूद अली पाकिस्तान में मौजूद हैंडलरों के संपर्क में था. वह देश विरोधी हिंसक गतिविधियों की साजिश में शामिल था. वह लंबे समय से तमिलनाडु के कोयंबटूर में छिपकर रह रहा था. यूपी एटीएस उसे ट्रांजिट रिमांड पर लेकर लखनऊ पहुंच चुकी है.
एटीएस के अनुसार, मकसूद अली अलग-अलग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर ग्रुप बनाकर देश विरोधी गतिविधियों के लिए लड़कों को फंसा रहा था. वह युवाओं में कट्टरपंथ का जहर भरकर उन्हें मुजाहिद बनने के लिए उकसाता था.
जांच में यह भी सामने आया कि मकसूद पाकिस्तान के कुछ हैकर्स के संपर्क में था और कथित तौर पर हैकिंग टूल तैयार करने का प्रयास कर रहा था. उसने एक सीक्रेट ऐप भी तैयार किया था. उसे कोर्ट में पेश करके आगे की कानूनी कार्रवाई और पूछताछ की जाएगी.
मकसूद ने अपने नापाक मंसूबों को अंजाम देने के लिए ‘कैप्टन एम नेटवर्क’ नाम का एक सिक्योर मोबाइल ऐप बनाया था. इसका मोटो था ‘एक प्लेटफॉर्म, एक मकसद: यूनिटी, प्लान एंड एक्शन’.
ATS के मुताबिक, पूछताछ में उसने पायथन, जावा, कोडिंग और हैकिंग की जानकारी ऑनलाइन माध्यमों से हासिल करने की बात बताई है. जांच में मकसूद से जुड़े कई वॉट्सएप ग्रुपों की जानकारी भी सामने आई है. इनमें यूयू एंट्री गेट, यूनाइटेड उम्माह, गजवा-ए-हिंद, टीम ब्लैक हैट और लश्कर-ए-महंदी जैसे नाम वाले ग्रुप शामिल हैं.
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₹2000 से ऊपर के UPI चार्ज मामला पहुंचा सुप्रीम कोर्ट, मर्चेंट पेमेंट पर MDR चार्ज को चुनौती
UPI पेमेंट पर चार्ज का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है. 2,000 रुपये से अधिक के कमर्शियल UPI लेनदेन पर शुल्क लगाए जाने के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है. यह याचिका केंद्र सरकार, RBI, नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) और UPI के खिलाफ दायर की गई है. केंद्र सरकार ने बुधवार को यह फैसला किया था. यह याचिका एडवोकेट अंजन दत्ता की ओर से दायर की गई है.
इस संबंध में एक याचिका दाखिल कर वित्त मंत्रालय की ओर से 14 और 15 सितंबर को जारी की गई गजट अधिसूचनाओं को रद्द करने की मांग की गई है.
सुप्रीम कोर्ट में UPI चार्ज के खिलाफ एक याचिका दायर की गई है. यूपीआई से 2,000 रुपये से अधिक के भुगतान पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी एमडीआर लगाने के केंद्र के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है. जनहित याचिका दाखिल कर आरोप लगाया गया है कि नई व्यवस्था मनमानी और भेदभावपूर्ण है और इससे पूरे देश में कारोबारियों पर आर्थिक बोझ पड़ेगा.
एडवोकेट अंजन दत्ता की ओर से दायर याचिका में इस संबंध में 14 दिसंबर की जारी अधिसूचना और 15सितंबर को जारी किए गए MDR फ्रेमवर्क को रद्द करने की मांग करते हुए यह कहा है कि सरकार का यह कदम पूरी तरह असंवैधानिक और गलत है. याचिका में कहा गया है कि सरकार ने बिना पर्याप्त कानूनी आधार के यह फैसला लिया है.
याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि भले ही इन चार्जेज को मामूली और UPI प्लेटफॉर्म को बनाए रखने के लिए जरूरी बताया जा रहा हो. चाहे फीस सीधे प्लेटफॉर्म या मर्चेंट पर ही क्यों न लगाई जाए, आम जनता पर इसका असर पड़ सकता है.
दूसरी तरफ UPI पर चार्ज के खिलाफ विपक्ष भी लगातार सरकार पर निशाना साध रहा है. लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने कहा कि यूपीआई टैक्स वापस लीजिए. वहीं, कांग्रेस नेता कार्ति चिदंबरम ने 2,000 से अधिक के मर्चेंट लेन-देन पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर लगाने के मामले पर कहा कि यह ऐसा टैक्स है, जो धीरे-धीरे बढ़ता जाएगा.
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ISI समर्थित शहजाद भट्टी नेटवर्क को सरकार ने आतंकी संगठनों की लिस्ट में डाला, 14 राज्यों में 200 गिरफ्तारियों के बाद एक्शन
केंद्र सरकार ने पाकिस्तान स्थित शहजाद भट्टी नेटवर्क को गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी UAPA के तहत आतंकी संगठन घोषित किया है. नेटवर्क पर युवाओं को आतंकवाद की ओर धकेलने जैसे कई आरोप है. शहजाद भट्टी नेटवर्क देश में अवैध हथियारों, ड्रग्स और विस्फोटकों की तस्करी समेत आतंकी वारदात करता है. इस नेटवर्क के खिलाफ अब तक 80 से ज्यादा FIR और 200 से अधिक गिरफ्तारियां दर्ज की जा चुकी हैं.
सरकारी आदेश में कहा गया है कि शहजाद भट्टी नेटवर्क को यूएपीए के तहत प्रतिबंधित आतंकवादी संगठनों की सूची में शामिल किया गया है.
शहजाद भट्टी नेटवर्क पर केंद्र की मोदी सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. केंद्रीय गृह मंत्रालय ने शाहजाद भट्टी नेटवर्क (SBN) को गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी UAPA के तहत आतंकवादी संगठन घोषित कर दिया है. गृह मंत्रालय ने 16 सितंबर को नोटिफिकेशन जारी कर SBN को UAPA की फर्स्ट शेड्यूल में शामिल किया है.
गृह मंत्रालय के मुताबिक, 12 अगस्त को 14 राज्यों में एक साथ ऑपरेशन चलाकर 253 लोगों को हिरासत में लिया गया था. इस नेटवर्क पर सीमा पार हथियार, विस्फोटक और मादक पदार्थों की तस्करी में शामिल होने का आरोप है. शहजाद भट्टी नेटवर्क पर भारत में ग्रेनेड, IED और पेट्रोल बम हमलों और टारगेट किलिंग से जुड़े होने का आरोप है.
इस नेटवर्क पर युवाओं और छोटे अपराधियों को भी आतंकवाद की ओर धकेलने का आरोप है. सरकार ने यह कार्रवाई आतंकवाद के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति के तहत की है.
गृह मंत्रालय का आरोप है कि नेटवर्क भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था और सांप्रदायिक सौहार्द को निशाना बनाने वाली गतिविधियों में शामिल रहा है.
शहजाद भट्टी नेटवर्क की गतिविधियां सिर्फ एक तरह के अपराध तक सीमित नहीं बताई गई हैं. गृह मंत्रालय के अनुसार, नेटवर्क सीमा पार से हथियार, विस्फोटक और नशीले पदार्थों की तस्करी में शामिल था.
केंद्र सरकार ने हाल ही में UPI पर MDR चार्ज लगाने का ऐलान कर दिया है। 2000 रुपए से ज्यादा का भुगतान करने पर 0.40 फीसदी शुल्क वसूला जाएगा। इस फैसले का असर मध्य प्रदेश में भी दिखाई देने लगा है। भोपाल में एक तरफ जहां व्यापारियों में चिंता की लकीरें खिंच गई हैं। वहीं दूसरी तरफ इंदौर में भी इसका विरोध करने के लिए दुकानों पर पोस्टर लगाने की तैयारी शुरू कर दी है।
भोपाल। 15 अक्टूबर 2026 से 2 हजार रुपये से अधिक के निर्धारित मर्चेंट यानी दुकान या कारोबारी को किए जाने वाले UPI भुगतान पर 0.4 प्रतिशत MDR यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट लागू होगा। यह शुल्क ग्राहक से नहीं, बल्कि मर्चेंट यानी भुगतान प्राप्त करने वाले कारोबारी से लिया जाएगा। 2 हजार से अधिक के यूपीआई भुगतान पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर (मर्चेट डिस्काउंट रेट) शुल्क लगाए जाने की प्रस्तावित व्यवस्था को लेकर भोपाल के व्यापारियों में चिंता है।
व्यापारिक संगठनों का कहना है कि सरकार और बैंकों ने पिछले कई वर्षो में डिजिटल भुगतान को बढ़ावा दिया है। व्यापारियों ने भी इसे अपनाकर अपने कारोबार में यूपीआई को रोजमर्रा के लेनदेन का हिस्सा बनाया है। अब बड़े डिजिटल भुगतान पर शुल्क लगने से खासकर कम मार्जिन वाले कारोबारियों की लागत बढ़ सकती है। व्यापारियों का कहना है कि अतिरिक्त शुल्क की वजह से कुछ कारोबारी बड़े यूपीआई भुगतान के बजाय नकद भुगतान लेने या भुगतान को अलग-अलग हिस्सों में करने का आग्रह कर सकते हैं। इससे डिजिटल भुगतान की सहजता प्रभावित होने की आशंका है। व्यापारियों का कहना है कि जब डिजिटल भुगतान को बढ़ावा दिया जा रहा है तो ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए जिससे व्यापारी और ग्राहक दोनों के लिए यह आसान और किफायती बना रहे।
भोपाल चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के सचिव अजय देवनानी ने कहा कि सूचना सामने आने के बाद शहर के कई व्यापारियों ने चैंबर से संपर्क कर अपनी चिंता बताई है। उनका कहना है कि व्यापारी डिजिटल और कैशलेस अर्थव्यवस्था के साथ हैं लेकिन नए शुल्क का असर सीधे कारोबार की लागत पर पड़ेगा।देवनानी ने कहा कि 0.4 प्रतिशत शुल्क पहली नजर में कम दिखाई देता है लेकिन बड़े लेनदेन में इसकी राशि बढ़ जाती है। उदाहरण के तौर पर 75 हजार रुपए के यूपीआई भुगतान पर करीब 300 रुपये शुल्क बनेगा। ऐसे कई डिजिटल लेनदेन रोज होने पर महीने में व्यापारी पर अतिरिक्त आर्थिक भार बढ़ सकता है।
उन्होंने कहा कि कई कारोबार ऐसे हैं जिनका मुनाफा मार्जिन ही बहुत कम है। ऐसे में 0.4 प्रतिशत अतिरिक्त लागत भी व्यापारियों के लिए महत्वपूर्ण हो जाती है।अजय देवनानी ने कहा कि भोपाल चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज व्यापारियों की चिंता को मध्यप्रदेश और केंद्रीय स्तर पर उठाएगा। उन्होंने कहा कि केंद्रीय वित्त मंत्री और मध्यप्रदेश के वित्त मंत्री को ईमेल के माध्यम से व्यापारियों की परेशानी से अवगत कराया जाएगा। साथ ही उनसे प्रस्तावित शुल्क पर पुनर्विचार कर इसे वापस लेने का आग्रह किया जाएगा। व्यापारिक संगठनों का कहना है कि वे डिजिटल भुगतान व्यवस्था के विरोध में नहीं हैं। उनकी मांग है कि छोटे और मध्यम व्यापारियों पर अतिरिक्त बोझ न डाला जाए। किसी भी नए शुल्क को लागू करने से पहले व्यापारियों से चर्चा की जाए ताकि डिजिटल भुगतान की व्यवस्था भी बनी रहे और कारोबारियों की लागत भी अनावश्यक रूप से ना बढ़ सके।
भोपाल किराना व्यापारी महासंघ के महामंत्री विवेक साहू ने कहा कि छोटे दुकानदारों से लेकर बड़े कारोबारियों तक यूपीआई भुगतान आज व्यापार व्यवस्था का अहम हिस्सा बन चुका है। ग्राहक के पास नकदी नहीं होने पर भी मोबाइल से तुरंत भुगतान हो जाता है और व्यापारी को छुट्टे पैसे की समस्या भी नहीं रहती।उन्होंने बताया कि 5 हजार रुपए के यूपीआई भुगतान पर 20 रुपए, 10 हजार पर 40 रुपए और 50 हजार रुपए के भुगतान पर 200 रुपए शुल्क बनेगा। दिनभर में कई बड़े डिजिटल भुगतान होने पर यह राशि महीने के अंत तक काफी बढ़ सकती है। कम मार्जिन वाले किराना और दूसरे कारोबार में इसका असर ज्यादा महसूस हो सकता है।
हेमंत शर्मा, इंदौर। UPI भुगतान पर प्रस्तावित मर्चेंट फीस को लेकर व्यापारियों की नाराजगी अब बाजारों में नजर आएगी। इंदौर रिटेल गारमेंट्स एसोसिएशन ने 18 सितंबर 2026 से शहर की अलग-अलग दुकानों पर ‘UPI पर मर्चेंट फीस का विरोध’ लिखे पोस्टर लगाने का निर्णय लिया है।
एसोसिएशन के अध्यक्ष अक्षय जैन के मुताबिक, डिजिटल भुगतान आज व्यापार का अहम हिस्सा बन चुका है। ऐसे में UPI लेन-देन पर अतिरिक्त शुल्क लगाया जाता है तो इसका असर सीधे व्यापारियों और ग्राहकों पर पड़ सकता है। इसी चिंता को सरकार तक पहुंचाने के लिए पोस्टर अभियान शुरू किया जा रहा है।
अक्षय जैन ने स्पष्ट किया कि यह अभियान किसी राजनीतिक दल के विरोध में नहीं है, बल्कि व्यापारियों और उपभोक्ताओं की चिंताओं को शांतिपूर्ण तरीके से सामने रखने का प्रयास है। पोस्टरों के जरिए ग्राहकों को भी प्रस्तावित मर्चेंट फीस और उसके संभावित प्रभावों की जानकारी दी जाएगी।
एसोसिएशन का कहना है कि छोटे और मध्यम व्यापारियों के लिए हर डिजिटल भुगतान पर लगने वाला शुल्क कारोबार की लागत बढ़ा सकता है। वहीं, ग्राहकों के लिए भी भुगतान व्यवस्था में अतिरिक्त आर्थिक बोझ की स्थिति बन सकती है। 18 सितंबर से शुरू होने वाले इस अभियान के जरिए UPI शुल्क का मुद्दा बाजारों में उठाया जाएगा। एसोसिएशन ने व्यापारियों से पोस्टर मुहिम में शामिल होने की अपील की है।
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जर्जर मकान गिरने से दर्दनाक हादसा, 3 महिलाओं की मौके पर मौत, 4 घायल अस्पताल में भर्ती
इंदौर। मध्य प्रदेश के इंदौर में बड़ी दुर्घटना हो गई जहां एक जर्जर मकान गिर गया। हादसे में 3 महिलाओं की मौके पर ही मौत हो गई। वहीं 4 लोग गंभीर घायल हैं जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
दरअसल, सांवेर विधानसभा में जर्जर मकान तोड़ने का काम चल रहा था। उसी दौरान मकान भरभराकर गिर गया जिससे मौके पर मौजूद लोग इसकी जद में आ गए। इस घटना से मौके पर हड़कंप मच गया।
हादसे में तीन महिलाओं ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। वहीं चार गंभीर घायल एमवाय अस्पताल रेफर किए गए हैं। जानकारी के अनुसार, एक महिला मलबे में दबी हुई है। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे जिसके बाद मलबा हटाने का काम तेजी से चल रहा है।
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किसानों का अनोखा प्रदर्शन: कलेक्टर नहीं मिले तो कुत्ते को सौंपा ज्ञापन, आंदोलन की चेतावनी
खडंवा। मध्य प्रदेश के खंडवा में किसानों ने प्रशासन के खिलाफ अनोखे अंदाज में विरोध प्रदर्शन किया। अपनी विभिन्न मांगों को लेकर कलेक्टर कार्यालय पहुंचे किसान कलेक्टर को ही ज्ञापन देने पर अड़े रहे। काफी देर इंतजार के बाद भी जब कलेक्टर किसानों से मिलने नहीं पहुंचे तो किसानों का गुस्सा फूट पड़ा। सिटी मजिस्ट्रेट बजरंग बहादुर किसानों के बीच पहुंचे और ज्ञापन लेने का प्रयास किया, लेकिन किसान अपनी बात पर अड़े रहे। किसानों ने अपना ज्ञापन एक कुत्ते को सौंपकर विरोध दर्ज कराया। किसानों ने चेतावनी दी है कि मांगों नहीं हुई तो वह जल्द बड़ा आंदोलन करेंगे।
खंडवा में राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ के बैनर तले किसान अपनी विभिन्न मांगों को लेकर ज्ञापन देने पहुंचे थे। किसानों की मांग थी कि उनका ज्ञापन सीधे कलेक्टर लें। किसानों का कहना था कि वे अपनी समस्याओं को लेकर कलेक्टर से ही चर्चा करना चाहते हैं। काफी देर तक इंतजार के बाद भी जब कलेक्टर किसानों के बीच नहीं पहुंचे तो किसानों की नाराजगी बढ़ गई। किसानों ने साफ कर दिया कि वे किसी अन्य अधिकारी को ज्ञापन नहीं देंगे। मामला बढ़ता देख सिटी मजिस्ट्रेट बजरंग बहादुर किसानों के बीच पहुंचे और उनसे चर्चा कर ज्ञापन लेने का प्रयास किया। लेकिन किसान अपनी मांग पर अड़े रहे।
इसके बाद किसानों ने प्रशासन के प्रति नाराजगी जताने के लिए अनोखा तरीका अपनाया और ज्ञापन एक कुत्ते को सौंप दिया। किसानों का कहना था कि जब उनकी बात सुनने के लिए अधिकारी तैयार नहीं हैं, तो इसी तरह विरोध दर्ज कराकर प्रशासन तक अपनी बात पहुंचाई जाएगी। राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवकुमार कक्का जी ने कहा कि किसानों को अपनी समस्याओं को लेकर बार-बार कलेक्टर कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। यदि प्रशासन के अधिकारियों के पास किसानों की समस्याएं सुनने का समय नहीं है तो आने वाले दिनों में ऐसे अधिकारियों के खिलाफ भी मोर्चा खोला जाएगा।
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