


मध्य प्रदेश। मुरैना जिले में पदस्थ डिप्टी कलेक्टर अरविंद माहौर एक गंभीर कानूनी मामले में फंस गए हैं। उन पर एक 32 वर्षीय महिला ने शादी का झांसा देकर लंबे समय तक शारीरिक शोषण और दुष्कर्म करने के आरोप लगाए हैं। शिकायत के आधार पर सिविल लाइन थाना पुलिस ने मामला दर्ज किया और आरोपी अधिकारी को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया गया। अदालत ने उनकी जमानत याचिका खारिज करते हुए उन्हें जेल भेजने का आदेश दिया। यह मामला अब प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर भी चर्चा का विषय बना हुआ है।
यह पूरा मामला सोशल मीडिया से शुरू हुआ बताया जा रहा है। पीड़िता के अनुसार वर्ष 2025 की शुरुआत में उसकी पहचान फेसबुक के माध्यम से अरविंद माहौर से हुई थी। उस समय वे सबलगढ़ में एसडीएम के पद पर कार्यरत थे। शुरुआती बातचीत धीरे धीरे बढ़ती गई और दोनों के बीच मोबाइल नंबर भी साझा हुए। इसके बाद संपर्क लगातार बना रहा और मुलाकातों का सिलसिला शुरू हो गया।
महिला का आरोप है कि अधिकारी ने उससे शादी करने का वादा किया था। इसी भरोसे पर दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं। शिकायत में कहा गया है कि आरोपी उसे अलग अलग जगहों पर ले गया और शादी का भरोसा दिलाकर शारीरिक संबंध बनाए। पीड़िता का कहना है कि वह लंबे समय तक इस भरोसे में रही कि अधिकारी उससे विवाह करेगा।
पीड़िता ने अपनी शिकायत में बताया कि 30 मार्च 2025 को उसे घूमाने के बहाने मुरैना ले जाया गया। वहां रेस्ट हाउस के पीछे कार में उसके साथ दुष्कर्म किया गया। इसके बाद सबलगढ़ स्थित सरकारी आवास और ग्वालियर के एक फ्लैट में भी कई बार शारीरिक शोषण किया गया। महिला का कहना है कि आरोपी लगातार शादी का आश्वासन देता रहा और इसी भरोसे का फायदा उठाता रहा।
शिकायत के अनुसार जब महिला ने शादी के लिए दबाव बनाना शुरू किया, तो आरोपी ने विवाह से इनकार कर दिया। इतना ही नहीं, पीड़िता का आरोप है कि उसे और उसके परिवार को नुकसान पहुंचाने की धमकियां भी दी गईं ताकि वह शिकायत न कर सके। इसके बाद पीड़िता ने अपने परिजनों के साथ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।
शिकायत मिलने के बाद सिविल लाइन थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की। पुलिस ने पीड़िता के बयान दर्ज किए और मेडिकल परीक्षण भी कराया। जांच में कुछ डिजिटल और दस्तावेजी साक्ष्य मिलने के बाद अधिकारी को गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तारी के बाद उसे कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
अदालत ने मामले की सुनवाई के दौरान आरोपी की जमानत याचिका खारिज कर दी और उसे जेल भेजने का आदेश दिया। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच अभी जारी है और सभी साक्ष्यों की गहराई से जांच की जा रही है। मोबाइल डेटा, वीडियो और अन्य डिजिटल सबूतों की भी जांच की जा रही है।
अरविंद माहौर पहले भी विवादों में रह चुके हैं। सबलगढ़ में एसडीएम रहते हुए उन पर एक अन्य महिला से जुड़ा विवाद सामने आया था, जिसके बाद उन्हें निलंबित किया गया था। अब इस नए मामले के बाद एक बार फिर वे सुर्खियों में हैं।
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एक जैसा नाम का फायदा उठाकर पास कर दिया 40 हजार का लोन, बैंक मैनेजर समेत दो गिरफ्तार
इंदौर। शहर में लोन प्रक्रिया में बड़ी लापरवाही और धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। एक महिला को तब झटका लगा जब उसने दोबारा लोन के लिए आवेदन किया और पता चला कि उसके नाम पर पहले से ही 40 हजार रुपये का लोन चल रहा है। हैरानी की बात यह थी कि महिला ने कभी ऐसा कोई लोन लिया ही नहीं था। शिकायत के बाद इंदौर क्राइम ब्रांच ने जांच शुरू की तो पूरे मामले का चौंकाने वाला खुलासा हुआ।
पुलिस के अनुसार अमरीन बाग नाम की महिला ने कुछ समय पहले लोन के लिए आवेदन किया था, लेकिन उनका लोन स्वीकृत नहीं हुआ। बाद में जब उन्होंने फिर से लोन लेने की कोशिश की तो रिकॉर्ड में उनके नाम पर पहले से 40 हजार रुपये का लोन सक्रिय मिला। यह जानकारी सामने आते ही महिला ने मामले की शिकायत की, जिसके बाद क्राइम ब्रांच ने जांच शुरू की।
क्राइम ब्रांच की जांच में पता चला कि अमरीन बाग और अमरीन खान नाम की दो अलग-अलग महिलाओं के नामों में एक जैसे होने के कारण पूरे मामले में गड़बड़ी हुई। आरोप है कि लोन स्वीकृत करने के दौरान जरूरी दस्तावेजों और पहचान की सही तरीके से जांच नहीं की गई। इसी का फायदा उठाकर अमरीन खान के नाम पर लोन जारी कर दिया गया, जबकि रिकॉर्ड में दूसरी महिला का नाम जुड़ गया।
पुलिस का कहना है कि लोन स्वीकृत करने से पहले संबंधित अधिकारी की जिम्मेदारी होती है कि वह आवेदक की पहचान, दस्तावेज, फोटो और अन्य जरूरी जानकारियों का सत्यापन करे। लेकिन इस मामले में यह प्रक्रिया पूरी तरह संदिग्ध नजर आई। आरोप है कि आरोहण फाइनेंस कंपनी के मैनेजर दिलीप यादव ने आवश्यक सत्यापन किए बिना ही लोन मंजूर कर दिया।
मामले में कार्रवाई करते हुए क्राइम ब्रांच ने कस्टमर सर्विस रिप्रेजेंटेटिव राहुल पोरवाल और आरोहण फाइनेंस कंपनी के मैनेजर दिलीप यादव को गिरफ्तार कर लिया है। दोनों आरोपियों से पूछताछ की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि यह केवल लापरवाही का मामला है या फिर इसके पीछे कोई संगठित धोखाधड़ी का नेटवर्क काम कर रहा था।
क्राइम ब्रांच को आशंका है कि यह मामला सिर्फ एक महिला तक सीमित नहीं हो सकता। प्रारंभिक जांच में कई ऐसे बिंदु सामने आए हैं जिनसे संकेत मिल रहे हैं कि अन्य लोगों के नाम पर भी इसी तरह फर्जी या संदिग्ध तरीके से लोन जारी किए गए हो सकते हैं। इसी वजह से पुलिस अब पुराने रिकॉर्ड और लोन फाइलों की भी जांच कर रही है।
इस मामले ने एक बार फिर लोन कंपनियों की वेरिफिकेशन पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि नाम की समानता के आधार पर बिना पर्याप्त जांच के लोन स्वीकृत हो सकते हैं, तो आम लोगों की पहचान और वित्तीय सुरक्षा पर गंभीर खतरा पैदा हो सकता है। फिलहाल क्राइम ब्रांच पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही है और आने वाले दिनों में इस मामले में और खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
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चरित्र शंका में आरक्षक पति ने पत्नी को गर्म प्रेस से 7 बार दागा, हाथ-पैर बांधकर की पिटाई, आरक्षक गिरफ्तार
ग्वालियर। मध्य प्रदेश केग्वालियर में रिश्तों को शर्मसार कर देने वाली एक सनसनीखेज वारदात सामने आई है। जहां पत्नी के चरित्र पर शक करने वाले एक SAF आरक्षक ने हैवानियत की सारी हदें पार कर दीं। आरोप है कि उसने पहले पत्नी को बेरहमी से पीटा, हाथ-पैर बांधकर बंधक बनाया और फिर उसे गर्म प्रेस से 07 बार जलाया। गंभीर रूप से झुलसी महिला का अस्पताल में इलाज जारी है, जबकि पुलिस ने पीड़ित पत्नी की शिकायत पर आरोपी आरक्षक को गिरफ्तार कर लिया है।
दरअसल मामला 13वीं बटालियन स्थित सरकारी आवास का है। 13वीं बटालियन में ही पदस्थ आरक्षक राजेंद्र परिहार अपनी पत्नी पूजा परिहार के चरित्र को लेकर शक करता था। बताया जा रहा है कि वह अक्सर पत्नी पर निगरानी रखता था और उसे घर से बाहर निकलने तक पर आपत्ति जताता था। घटना वाली रात भी महिला खाना खाने के बाद घर के बाहर टहलने गई थी। जब वह लौटकर आई तो पति ने उससे पूछताछ शुरू कर दी। इसी बात को लेकर विवाद बढ़ा और आरोपी ने पहले पत्नी के साथ मारपीट की। फिर उसने महिला के हाथ-पैर बांध दिए और जमीन पर पटककर बेरहमी से पीटा। इसके बाद आरोपी ने महिला के शरीर पर गर्म प्रेस से 07 जगह जलाया, जिससे महिला गंभीर रूप से झुलस गई।
बताया जा रहा है कि उसके शरीर का बड़ा हिस्सा जल गया है। महिला की चीख-पुकार सुनकर आसपास के लोग पहुंचे और उसे मायके ले जाया गया,जहां से उसे अस्पताल पहुंचाया गया। घटना के बाद का वह दर्दनाक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें महिला गंभीर रूप से झुलसी हुई हालत में नजर आ रही है। वीडियो में उसकी लाचारी और दर्द साफ दिखाई देता है। घटना के बाद पीड़िता ने थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई है, पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए आरोपी आरक्षक राजेंद्र परिहार को गिरफ्तार कर लिया है,मामले में अलग अलग धाराओं के तहत केस दर्ज कर जांच की जा रही है।
मध्य प्रदेश नेशनल हेल्थ मिशन में बड़ा फर्जीवाड़ा (MP NHM Scam) सामने आया है। रिपोर्ट के मुताबिक कई डॉक्टर फर्जी एमबीबीएस डिग्री के आधार पर एनएचएम में नौकरी कर रहे थे। इस मामले को लेकर भोपाल के चुनाभट्टी थाने में 9 डॉक्टरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। जिसके बाद पुलिस ने जांच भी शुरू कर दी है।
सूत्रों के मुताबिक संबंधित डॉक्टर प्रदेश की अलग-अलग जिलों और स्वास्थ्य संस्थानों में सरकारी नौकरी कर रहे थे। फर्जी डिग्री के माध्यम से मरीजों का इलाज कर रहे थे। जांच के दौरान उनके शैक्षणिक योग्यताओं और एमबीबीएस डिग्री में कई गड़बड़ियां सामने आई। जिसे ध्यान में रखते हुए एनएचएम विभाग ने थाने में FIR दर्ज करवाई है। भविष्य में इस मामले को लेकर कई खुलासे भी हो सकते हैं।
मध्यप्रदेश एनएचएम में फर्जीवाड़े से स्वास्थ्य सेवाओं पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। राज्य के विभिन्न अस्पतालों में फर्जी डॉक्टरों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई भी देखने को मिल रही है। हाल ही में एनएचएम द्वारा संचालित दमोह में स्थित संजीवनी क्लिनिक में फर्जी एमबीबीएस डिग्री के मामले में तीन डॉक्टरों और फर्जीवाड़े से जुड़े दो सरगना (हीरा कौशल और आदिल सिद्दीकी) को गिरफ्तार किया गया था।
बताया जा रहा है कि हीरा कौशल को गैंग में मुख्य भूमिका निभाता था। लाखों की कीमतों में फर्जी एमबीबीएस डिग्री मुहैया करवाता था। वहीं आदिल सिद्दीकी भोपाल स्थित एनएचएम के दफ्तर में आईपी असिस्टेंट के तौर पर काम कर रहा था। आदिल ने बताया कि एनएचएम भर्ती प्रक्रिया में कोई इंटरव्यू या जांच नहीं होती। उसके इस बयान ने भर्ती प्रक्रिया पर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
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ट्रेनों में सक्रिय किन्नर गिरोह पर आरपीएफ का शिकंजा, जबरन वसूली करने वाले छह किन्नर दबोचे गए
जबलपुर. जबलपुर रेलवे स्टेशन और यहां से गुजरने वाली ट्रेनों में यात्रियों से जबरन रुपये वसूलने और अभद्र व्यवहार करने वाले किन्नर गिरोहों के खिलाफ रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) ने सख्त अभियान शुरू कर दिया है. हाल के दिनों में दो अलग-अलग कार्रवाइयों में कुल छह किन्नरों को पकड़कर उनके खिलाफ रेलवे एक्ट के तहत कार्रवाई की गई है. आरपीएफ का कहना है कि स्टेशन परिसर और ट्रेनों में यात्रियों की सुरक्षा तथा सुविधा प्रभावित करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा.
ताजा मामले में जबलपुर मुख्य रेलवे स्टेशन परिसर में तीन किन्नरों को यात्रियों से रुपये मांगते और अव्यवस्था फैलाते हुए पकड़ा गया. जानकारी के अनुसार आरपीएफ के उप निरीक्षक अरविंद सिंह और आरक्षक प्रवीण उपाध्याय स्टेशन के कटनी छोर की ओर नियमित गश्त कर रहे थे. इसी दौरान उनकी नजर तीन किन्नरों पर पड़ी जो यात्रियों से रुपये मांग रहे थे और स्टेशन परिसर में अनावश्यक भीड़ तथा अव्यवस्था की स्थिति पैदा कर रहे थे. शिकायत मिलने के बाद आरपीएफ टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए तीनों को हिरासत में लिया और पूछताछ के लिए आरपीएफ थाना लेकर पहुंची.
पकड़े गए आरोपियों की पहचान सुनैना (20 वर्ष), मोनू (20 वर्ष) और आशिकी किन्नर (32 वर्ष) के रूप में हुई है. तीनों कटनी जिले के एनकेजे थाना क्षेत्र के पीछे स्थित इलाके के निवासी बताए गए हैं. रेलवे एक्ट के अंतर्गत आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद उन्हें न्यायालय की शर्तों से अवगत कराया गया और बंधपत्र पर रिहा कर दिया गया. अधिकारियों ने उन्हें भविष्य में इस तरह की गतिविधियों से दूर रहने की चेतावनी भी दी है.
इसी बीच जबलपुर से होकर गुजरने वाली ट्रेनों में यात्रियों से जबरन बधाई और रुपये वसूलने वाले किन्नर गिरोह की सक्रियता का एक और मामला सामने आया है. ट्रेन क्रमांक 22909 वलसाड-पुरी एक्सप्रेस में सफर कर रहे यात्रियों ने शिकायत की थी कि कुछ किन्नर अनारक्षित कोच में चढ़कर यात्रियों से जबरन रुपये मांग रहे हैं. यात्रियों द्वारा पैसे देने से इनकार करने पर अभद्र व्यवहार किया जा रहा था, जिससे कोच के भीतर तनाव और विवाद की स्थिति बन रही थी.
यात्रियों की शिकायत मिलते ही जबलपुर आरपीएफ पोस्ट प्रभारी राजीव खरब ने तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए. सूचना के अनुसार कुछ किन्नर ट्रेन के अनारक्षित डिब्बे में सवार होकर यात्रियों को परेशान कर रहे थे. इसके बाद आरपीएफ की विशेष टीम गठित की गई और जवानों को मुख्य स्टेशन के आउटर क्षेत्र में तैनात किया गया ताकि ट्रेन के पहुंचने से पहले आरोपियों को पकड़ने की रणनीति बनाई जा सके.
जैसे ही वलसाड-पुरी एक्सप्रेस जबलपुर स्टेशन के आउटर क्षेत्र में पहुंची और उसकी गति धीमी हुई, अनारक्षित कोच से तीन किन्नर एक-एक कर नीचे कूद गए. हालांकि पहले से सतर्क आरपीएफ जवानों की नजर उन पर पड़ चुकी थी. आरोपियों ने भागने की कोशिश की, लेकिन जवानों ने घेराबंदी कर उन्हें मौके पर ही दबोच लिया. इसके बाद तीनों को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई.
आरपीएफ द्वारा पकड़े गए आरोपियों की पहचान आंध्र प्रदेश के गंटूर जिले के वन टाउन थाना क्षेत्र स्थित तेनामी वाइकुंटा पुरम निवासी बेलमकोन्डा दिनेश उर्फ बी. नीलीमा (43), नर्मदापुरम जिले के इटारसी स्थित नूरानी मस्जिद नाला मोहल्ला निवासी काली किन्नर गुरु (42) तथा बबली (52) के रूप में हुई है. तीनों के खिलाफ रेलवे नियमों के तहत आवश्यक कार्रवाई की गई.
जांच के दौरान आरपीएफ को यह भी जानकारी मिली कि सतना, कटनी, जबलपुर और इटारसी रेलखंड के बीच कई किन्नर समूह लंबे समय से ट्रेनों में सक्रिय हैं. ये समूह यात्रियों से जबरन रुपये वसूलने का काम करते हैं और शिकायत मिलने की स्थिति में बच निकलने के लिए विभिन्न तरीके अपनाते हैं. सूत्रों के अनुसार ये लोग ट्रेनों के शौचालयों में छिप जाते हैं, कपड़े बदल लेते हैं या स्टेशन पहुंचने से पहले चलती ट्रेन से उतरकर फरार हो जाते हैं. यही कारण है कि इनके खिलाफ कार्रवाई करना सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौती बना रहता है.
आरपीएफ अधिकारियों के अनुसार पकड़े गए तीनों आरोपी एक ही गुरु के चेले बताए जा रहे हैं. प्रारंभिक जांच में इनकी गुरु का नाम रेशमा सामने आया है. सुरक्षा एजेंसियां अब इस पूरे नेटवर्क की जानकारी जुटाने में लगी हैं ताकि ट्रेनों में सक्रिय ऐसे गिरोहों की गतिविधियों पर प्रभावी रोक लगाई जा सके.
रेलवे अधिकारियों का कहना है कि ट्रेनों और स्टेशन परिसरों में यात्रियों को परेशान करने, जबरन रुपये मांगने या अभद्र व्यवहार करने वालों के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जाएगा. यात्रियों से भी अपील की गई है कि यदि यात्रा के दौरान कोई व्यक्ति जबरन पैसे मांगता है, डराता-धमकाता है या असुविधा पैदा करता है तो तुरंत रेलवे हेल्पलाइन 139 या निकटतम आरपीएफ कर्मी को सूचना दें.
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अजब-गजब: ‘सिंघम’ मैडम के आगे ढेर हुए पुलिस के ‘शहंशाह’, बीच सड़क काटा सिपाहियों का चालान
नरसिंहपुर। जरा सोचिए, आप सड़क पर जा रहे हों और अचानक पुलिस आपको रोक ले… धड़कनें बढ़ना तो लाज़मी है। लेकिन तब क्या हो जब पुलिस ही पुलिस को रोक ले और सरेराह उसकी ‘क्लास’ लगा दे? जी हां ऐसा ही एक गजब नजारा मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर में देखने को मिला, जहां ‘खाकी’ के घमंड पर ‘खाकी’ का ही डंडा ऐसा चला कि देखने वाले देखते रह गए।
ट्रैफिक नियमों का पाठ पढ़ाने वाली पुलिस जब खुद बिना हेलमेट के ‘रॉबिनहुड’ बनकर घूम रही थी तो मैडम सिंघम ने बीच चौराहे पर ही उनकी ऐसी बत्ती गुल की कि उन्हें लेने के देने पड़ गए!
मामला नरसिंहपुर जिला मुख्यालय के कंट्रोल रूम के पास का है। यहां यातायात थाना प्रभारी ममता तिवारी अचानक पूरे ‘सिंघम अवतार’ में सड़क पर आ धमकीं। मैडम ने जैसे ही चेकिंग शुरू की, आम जनता तो नियम कायदों में आ गई, लेकिन तभी बाइक पर सवार होकर कुछ पुलिस के जवान बिना हेलमेट लगाए बड़े टशन में वहां से गुजरे।
बस फिर क्या था! मैडम ने आव देखा न ताव, तुरंत गाड़ी रुकवाई। ऑन-ड्यूटी पुलिसकर्मियों ने सोचा होगा कि ‘अपनी ही तो पुलिस है, छोड़ देगी’, लेकिन ममता मैडम के इरादे कुछ और ही थे। उन्होंने बीच सड़क पर ही नियम तोड़ने वाले जवानों की ऐसी क्लास लगाई कि बेचारे बगलें झांकने लगे।
मैडम तिवारी ने साफ कर दिया कि वर्दी का रौब घर पर छोड़कर आइए, सड़क पर कानून सबके लिए बराबर है। उन्होंने तुरंत रसीद कट्टा निकाला और ऑन-ड्यूटी पुलिस के जवानों के भी तड़ातड़ चालान काट दिए।
सड़क किनारे खड़ी जनता जो अमूमन पुलिस की चेकिंग से डरती है, वो यह नजारा देखकर तालियां बजाने लगी। लोगों के मुंह से बस एक ही बात निकल रही थी- वाह मैडम, कानून हो तो ऐसा! आज तो खाकी का ही बैंड बज गया।
इस अनोखी और सख्त कार्रवाई के बाद यातायात प्रभारी ममता तिवारी ने कड़क लहजे में बताया कि यह कोई मजाक नहीं है। सुप्रीम कोर्ट की कमेटी की बैठक में साफ निर्देश दिए गए हैं कि सभी सरकारी विभागों में यातायात नियमों का कड़ाई से पालन होना चाहिए।
मैडम ने साफ कहा कि इस महा-अभियान की शुरुआत हमने सबसे पहले पुलिस विभाग और कलेक्ट्रेट से की है ताकि जनता को संदेश मिले। इस अजब-गजब चेकिंग के दौरान नियम तोड़ने वाले सरकारी और गैर-सरकारी बाबुओं के कुल 68 चालान काटकर उनके हाथ में थमा दिए गए।
‘कॉलेज’ एक ऐसा शब्द है जो शायद ही किसी से छिपा हो, जिसका सीधा अर्थ होता है महाविद्यालय. महाविद्यालय का नाम आते ही मन बोल उठता है शिक्षा का मंदिर, पर कोलकाता के एक प्रतिष्ठित सुरेंद्रनाथ कॉलेज में इसका अर्थ कुछ और ही सुनने और देखने को मिल रहा है. इस प्रतिष्ठित शिक्षा के मंदिर में छात्रसंघ कक्ष से मिला है 1 करोड़ रुपये, 2 एयर कन्डिशन बेडरूम, शराब की बोतलें, कंडोम के पैकेट और साथ ही एक रिवॉल्वर भी बरामद होता है जिससे इस कॉलेज की गरिमा में चार चांद लगा देता है. जिस कक्ष से ये सब बरामद हुआ है वो लगभग एक साल से बंद था.
भारतीय जनता पार्टी ने इस मामले को लेकर तृणमूल कांग्रेस पर गंभीर आरोप लगाए हैं. BJP इसे दाखिला घोटाले और भ्रष्टाचार से जोड़ते हुए ईडी जांच की मांग की है.
सबसे पुराने और प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों में शामिल कोलकाता का सुरेंद्रनाथ कॉलेज एक बड़े विवाद के केंद्र में आ गया है. यहां एक कॉलेज के छात्रसंघ कक्ष से करीबन एक करोड़ रुपए कैश से भरे दो बॉक्स मिले है. अधिकतर कैश में दीमक लगी हुई है. सुरेंद्रनाथ कॉलेज इन दिनों सुर्खियों में बना हुआ है. इसके लिए BJP ने पूर्णरूप से TMC को जिम्मेदार ठहराया है.
आपको बताते चले कि साउथ कोलकत्ता लॉ कॉलेज के स्टूडेंट विंग के कमरे में पिछले साल जून में एक 24 वर्षीय छात्रा का गैंगरेप हुआ था. जिसके बाद कोलकाता हाईकोर्ट का आदेश टीएमसी सरकार को मिला कि कॉलेजों में स्टूडेंट विंग के कमरे बंद कर दिए जाएं. और इसी कड़ी में कोलकाता के सबसे पुराने और प्रतिष्ठित सुरेंद्र नाथ कॉलेज के स्टूडेंट विंग के कमरे को बंद कर दिया गया था.
राज्य सरकार द्वारा कॉलेजों में छात्रसंघ निधि के खर्च का लेखा-जोखा जांचने के निर्देश दिए गए. जिसके बाद कॉलेज प्रशासन ने मंगलवार को एक वर्ष से बंद छात्रसंघ कक्ष को भी साफ-सफाई के इरादे से खोला. फिर रूम से चौंकाने वाले खुलासे सामने आते गए. पुरानी लकड़ी की अलमारी से दो बड़े बक्से में 100 और 500 रुपये के नोटों की गड्डियां भरी हुई थीं. कॉलेज प्रशासन के अनुसार नकदी की कुल राशि करीब एक करोड़ रुपये है.
भाजपा ने आरोप लगाया है कि यह पैसा कॉलेज में दाखिले के दौरान होने वाली कथित अनियमितताओं और अवैध वसूली से जुड़ा हो सकता है. वहीं तृणमूल कांग्रेस की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है. हालांकि कॉलेज प्रशासन के अनुसार इन कमरों का उपयोग तृणमूल के प्रभावशाली नेता देवाशीष बंद्योपाध्याय उर्फ “कानकाटा देबू” और उनके पुत्र शिवाशीष द्वारा किया जाता था.
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अंधविश्वास का खौफनाक अंत : 7 दिन चली तंत्र साधना के बाद दोहरे हत्याकांड का खुलासा, चार दोषियों को उम्रकैद
छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले में अपने ही परिवार के दो बेटों की हत्या के मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। इस सनसनीखेज मामले में मां, दो बहनों और एक भाई को आजीवन कारावास की सजा दी गई है। पूरा मामला अंधविश्वास और तंत्र-मंत्र से जुड़ा बताया जा रहा है।
जानकारी के मुताबिक, यह घटना बाराद्वार थाना क्षेत्र के ग्राम तांदुलडीह की है, जो करीब दो साल पुरानी है। यहां एक ही परिवार के पांच सदस्य तंत्र साधना में लीन थे। परिवार में मां और बेटियां लगातार धार्मिक अनुष्ठान और तंत्र पूजा कर रही थीं।
परिवार के दो बेटे विकास सिदार (25) और विक्की सिदार (22) ने इस अंधविश्वास का विरोध किया था। आरोप है कि इसी बात से नाराज होकर उन्हें पहले कीटनाशक मिला पानी पिलाया गया और फिर गला घोंटकर उनकी हत्या कर दी गई।
पुलिस जांच में सामने आया कि पूरा परिवार अक्टूबर 2024 में एक कमरे में लगातार 7 दिनों तक बंद रहा। इस दौरान वे उपवास और तंत्र साधना कर रहे थे। अंदर से चिल्लाने की आवाजें भी सुनाई देती थीं, जिससे पड़ोसियों को शक हुआ और उन्होंने पुलिस को सूचना दी।
जब पुलिस मौके पर पहुंची तो परिवार के सदस्य ‘जय गुरुदेव’ के नारे लगाते हुए पूजा-पाठ में लगे थे। इसी दौरान दोनों भाई अचेत अवस्था में जमीन पर पड़े मिले। उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।
जांच में पता चला कि परिवार की बड़ी बेटी ने उज्जैन के एक बाबा से गुरु दीक्षा ली थी। इसके बाद परिवार में तंत्र-मंत्र और अंधविश्वास बढ़ गया। मृतक भाइयों ने इसका विरोध किया था, जिसके कारण उन्हें रास्ते से हटाने की साजिश रची गई।
पुलिस, एफएसएल और मेडिकल टीम की जांच में घटनास्थल से पूजा सामग्री, हवन सामग्री, जड़ी-बूटियां, कीटनाशक और धार्मिक पुस्तकें बरामद की गईं। साथ ही ग्रामीणों और परिजनों के बयान भी दर्ज किए गए।
करीब डेढ़ साल चली सुनवाई के बाद अदालत ने मां, दो बहनों और एक भाई को दोषी पाया। सभी को दोहरे हत्याकांड में आजीवन सश्रम कारावास की सजा सुनाई गई। सरकार की ओर से अपर लोक अभियोजक उदय वर्मा ने केस की पैरवी की।
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समुद्री सुरक्षा को बड़ा बूस्ट: ब्रह्मोस से लैस होंगे नेवी के 8 नए कॉर्वेट युद्धपोत, ₹40,000 करोड़ के प्रोजेक्ट को मिल सकती है मंजूरी
भारतीय नौसेना की समुद्री युद्ध क्षमता को नई मजबूती देने वाला नेक्स्ट जेनरेशन कॉर्वेट (NGC) प्रोजेक्ट जल्द ही अंतिम चरण में पहुंच सकता है। करीब 40,000 करोड़ रुपये की इस रणनीतिक परियोजना को अब केवल कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) की अंतिम मंजूरी का इंतजार है। मंजूरी मिलने के बाद नौसेना को आठ अत्याधुनिक युद्धपोतों का बेड़ा हासिल होगा, जो हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की सैन्य उपस्थिति को और सशक्त बनाएंगे।
सूत्रों के अनुसार, सरकारी शिपबिल्डिंग कंपनी Garden Reach Shipbuilders & Engineers (GRSE) सबसे कम बोलीदाता (L1) के रूप में उभरी है और उसे पांच कॉर्वेट के निर्माण का ठेका मिल सकता है। शेष तीन युद्धपोतों का निर्माण Goa Shipyard Limited (GSL) द्वारा किए जाने की संभावना है।
करीब 3,500 टन विस्थापन वाले इन युद्धपोतों को “डिस्ट्रिब्यूटेड लेथैलिटी” अवधारणा पर विकसित किया जा रहा है। यानी आकार में अपेक्षाकृत छोटे होने के बावजूद ये जहाज लंबी दूरी तक सटीक और घातक हमला करने में सक्षम होंगे। इनकी अधिकतम गति 32 नॉट्स होगी और ये बिना बाहरी सहायता के लगभग 30 दिनों तक समुद्र में लगातार तैनात रह सकेंगे।
NGC की सबसे बड़ी ताकत इसकी उन्नत हथियार प्रणाली होगी। प्रत्येक कॉर्वेट पर 8 एक्सटेंडेड-रेंज ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलें तैनात की जाएंगी, जो लंबी दूरी पर सटीक निशाना साधने में सक्षम हैं।
हवाई खतरों से सुरक्षा के लिए जहाजों में 16 से 32 वर्टिकल लॉन्च शॉर्ट-रेंज सरफेस-टू-एयर मिसाइल (VLS-SR SAM) सेल लगाए जाएंगे। इसके अलावा AK-630 क्लोज-इन वेपन सिस्टम मिसाइलों, ड्रोन और लड़ाकू विमानों जैसे नजदीकी खतरों को निष्क्रिय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
इन युद्धपोतों को उन्नत पनडुब्बी-रोधी (ASW) क्षमताओं से लैस किया जाएगा। इनमें हल-माउंटेड सोनार, एक्टिव टोव्ड ऐरे सोनार और ट्रिपल-ट्यूब टॉरपीडो लॉन्चर लगाए जाएंगे, जिससे समुद्र के भीतर छिपे दुश्मन की पहचान और उस पर हमला करना आसान होगा।
साथ ही, ये युद्धपोत HAL Dhruv और Sea King जैसे मल्टी-रोल हेलीकॉप्टरों का संचालन भी कर सकेंगे, जिससे उनकी निगरानी और पनडुब्बी-रोधी क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी।
नई पीढ़ी के इन कॉर्वेट्स में ELM-2248 MF-STAR AESA रडार, VARUNA ESM, SHAKTI इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम और उन्नत लक्ष्य-ट्रैकिंग तकनीक शामिल होगी। ये प्रणालियां युद्ध के दौरान दुश्मन की मिसाइलों, रडार और इलेक्ट्रॉनिक हमलों का मुकाबला करने में अहम भूमिका निभाएंगी।
क्या है संभावित टाइमलाइन?
यदि CCS से 2026 में मंजूरी मिल जाती है, तो उसी वर्ष GRSE और GSL के साथ निर्माण अनुबंध पर हस्ताक्षर किए जा सकते हैं। इसके बाद 2027 में विस्तृत डिजाइन और स्टील कटिंग के साथ निर्माण कार्य शुरू होने की संभावना है।
योजना के अनुसार, पहला कॉर्वेट 2028-29 तक लॉन्च किया जा सकता है और 2031-32 तक भारतीय नौसेना में शामिल हो सकता है। बाकी सात युद्धपोत 2032 से 2036 के बीच चरणबद्ध तरीके से नौसेना को सौंपे जा सकते हैं।
ब्रह्मोस मिसाइलों, उन्नत एयर डिफेंस, आधुनिक सेंसर और शक्तिशाली पनडुब्बी-रोधी क्षमताओं से लैस नेक्स्ट जेनरेशन कॉर्वेट भारतीय नौसेना के आधुनिकीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। इनके शामिल होने से हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की समुद्री सुरक्षा, निगरानी क्षमता और रणनीतिक प्रभाव पहले से कहीं अधिक मजबूत होगा।
इंदौर नगर निगम के बहुचर्चित फर्जी बिल घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए मामले के कथित मास्टरमाइंड और पूर्व सहायक यंत्री अभय राठौर सहित तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। ईडी ने अभय राठौर, मोहम्मद जाकिर और राहुल वडेरा को हिरासत में लेकर मंगलवार को पीएमएलए कोर्ट में पेश किया, जहां से तीनों को तीन दिन की ईडी रिमांड पर भेज दिया गया। सूत्रों के मुताबिक जांच एजेंसी को अब तक 92 करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितताओं और हेराफेरी के ठोस साक्ष्य मिले हैं। मामले में अगली सुनवाई 5 जून को होगी।
जांच में सामने आया है कि घोटाले को अंजाम देने के लिए पुराने और पूर्ण हो चुके कार्यों को नया दर्शाकर फर्जी वर्क ऑर्डर और भुगतान फाइलें तैयार की गईं। आरोपियों ने अधिकारियों के लॉगिन आईडी, पासवर्ड और सिस्टम एक्सेस का दुरुपयोग करते हुए फर्जी बिलों को लेखा शाखा तक पहुंचाया और भुगतान भी करवा लिया। जांच एजेंसियों के अनुसार बिना कार्य किए तकनीकी स्वीकृति, ऑडिट और भुगतान की पूरी प्रक्रिया कागजों में पूरी कर दी गई थी। इसके बाद करोड़ों रुपये ठेकेदारों के खातों में ट्रांसफर कर दिए गए।
साल 2024 में नगर निगम के ड्रेनेज विभाग में पुराने कार्यों के नाम पर भुगतान की फाइलें सामने आने के बाद मामले का खुलासा हुआ था। प्रारंभिक जांच में करीब 28 करोड़ रुपये के ऐसे भुगतान सामने आए थे, जिनके पीछे वास्तविक कार्य नहीं मिला। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, घोटाले का दायरा बढ़ता गया और करोड़ों रुपये की अतिरिक्त गड़बड़ियां सामने आने लगीं।
मनी लॉन्ड्रिंग के पहलू से जांच कर रही ईडी ने जुलाई 2025 में लगभग 34 करोड़ रुपये मूल्य की 43 अचल संपत्तियां अटैच की थीं। इनमें मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में स्थित मकान, कृषि भूमि और अन्य संपत्तियां शामिल हैं। ईडी का मानना है कि घोटाले से अर्जित धन को विभिन्न संपत्तियों में निवेश किया गया था।
शुरुआती जांच में करीब 107 करोड़ रुपये के गबन की आशंका जताई गई थी। हालांकि अदालत में ईडी ने फिलहाल 92 करोड़ रुपये की अनियमितताओं की जानकारी प्रस्तुत की है। जांच एजेंसी के अनुसार पूर्व सहायक यंत्री अभय राठौर इस पूरे नेटवर्क का प्रमुख सूत्रधार था। आरोप है कि उसने ठेकेदारों के साथ मिलकर फर्जी दस्तावेजों और हस्ताक्षरों के आधार पर करोड़ों रुपये का भुगतान करवाया।
घोटाले की जांच के शुरुआती दौर में निगम से कई महत्वपूर्ण फाइलें गायब होने की जानकारी भी सामने आई थी। जो दस्तावेज मिले, उनमें मौजूद हस्ताक्षरों की जांच कराई गई तो कई अधिकारियों के हस्ताक्षर मेल नहीं खाए। सबसे बड़ा सवाल यह भी बना हुआ है कि अधिकारियों की मूल आईडी और पासवर्ड आरोपियों तक कैसे पहुंचे। हालांकि जांच के दौरान कुछ अधिकारियों को क्लीन चिट भी मिल चुकी है।
जांच एजेंसियों के अनुसार संदिग्ध 186 फाइलों की जांच की गई, जिनमें 80 प्रतिशत से अधिक फाइलों में गड़बड़ी और फर्जीवाड़ा पाया गया। इनमें ट्रेंचिंग ग्राउंड से जुड़ी करीब 4 करोड़ रुपये की फाइल भी शामिल बताई जा रही है। फर्जी वर्क ऑर्डर, नकली मापन पुस्तिकाएं (एमबी), फर्जी बिल और भुगतान दस्तावेजों के जरिए पूरे घोटाले को अंजाम दिया गया। हैरत की बात यह है कि करोड़ों रुपये का भुगतान होने के बावजूद लंबे समय तक किसी स्तर पर इसकी भनक नहीं लगी।
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गजब हो गया: 1.31 करोड़ की नई SDM बिल्डिंग में दरारें, एक साल में खुली निर्माण की पोल
हरदा। जिला मुख्यालय की तवा कॉलोनी में करीब 12 माह पहले शुरू हुआ नया एसडीएम कार्यालय भवन अब भ्रष्टाचार और लापरवाही के आरोपों के घेरे में है। लगभग 1 करोड़ 31 लाख रुपए की लागत से निर्मित इस भवन की दीवारों में 6 से 8 इंच चौड़ी दरारें आ गई हैं, जिससे किसी बड़े हादसे की आशंका बनी हुई है।
भवन के दोनों किनारों और पिछले हिस्से में स्ट्रक्चरल जोड़ खुल गए हैं। सबसे चिंताजनक स्थिति बेसमेंट और ऊपरी हिस्से के बीच बढ़ते गैप की है। तकनीकी विशेषज्ञों के अनुसार यह स्थिति नींव धंसने या निर्माण में घटिया सामग्री के उपयोग का संकेत हो सकती है। इस भवन का भूमिपूजन 19 अप्रैल 2023 को तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और प्रभारी मंत्री तुलसी सिलावट द्वारा किया गया था। निर्माण कार्य की निगरानी का जिम्मा पीआईयू को सौंपा गया था, लेकिन अब गुणवत्ता नियंत्रण पर सवाल उठ रहे हैं।
मामला सामने आने के बाद कलेक्टर सिद्धार्थ जैन ने पीआईयू के माध्यम से ठेकेदार पर दंडात्मक कार्रवाई और तत्काल मरम्मत के निर्देश दिए हैं। एसडीएम अशोक डेहरिया ने भवन की स्थिति को गंभीर बताते हुए जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदार के खिलाफ जांच तथा एफआईआर की मांग की है।
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व्यापारी हत्याकांड में बड़ी सफलता: मुख्य आरोपी के पिता-पत्नी पकड़ाए
इंदौर। चर्चित गुलाब बाग पेट्रोल पंप हत्याकांड में लसूडिया पुलिस को एक और बड़ी सफलता मिली है। हत्या के मामले में फरार चल रहे मुख्य आरोपी चंद्रकांत उर्फ डीलू लहारिया को संरक्षण देने और उसकी गिरफ्तारी से बचाने में सहयोग करने के आरोप में पुलिस ने उसकी पत्नी और पिता को गिरफ्तार किया है। दोनों आरोपियों को न्यायालय में पेश किया गया है।
दरअसल, इंदौर के लसूडिया थाना क्षेत्र में 21 मई को गुलाब बाग पेट्रोल पंप के सामने हुए अभितेंद्र उर्फ अभि तोमर हत्याकांड की जांच लगातार जारी है। इस मामले में पुलिस पहले ही पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है, जबकि मुख्य आरोपी चंद्रकांत उर्फ डीलू लहारिया अब भी फरार है।
पुलिस जांच के दौरान सामने आया कि फरार आरोपी को उसकी पत्नी प्रीति लहारिया और पिता राजेंद्र कुमार शर्मा की ओर से संरक्षण दिया जा रहा था। पुलिस के अनुसार दोनों को घटना की जानकारी होने के बावजूद उन्होंने आरोपी को छिपाने और गिरफ्तारी से बचाने में सहयोग किया। इसी दौरान पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली कि आरोपी की पत्नी और पिता अपने पुत्र एवं पोते से मिलने इंदौर आने वाले हैं।
सूचना मिलते ही लसूडिया थाना पुलिस ने सक्रियता दिखाते हुए देवगुराडिया क्षेत्र में घेराबंदी की और दोनों को हिरासत में ले लिया। पुलिस का कहना है कि फरार मुख्य आरोपी की तलाश लगातार जारी है और उसे जल्द गिरफ्तार करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
छिंदवाड़ा। मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा के देहात थाना क्षेत्र की प्रियदर्शनी कॉलोनी में पुलिस लाइन में पदस्थ महिला प्रधान आरक्षक का जला हुआ शव उनके ही मकान में मिला है। वारदात के बाद इलाके में सनसनी फ़ैल गई। सूचना मिलते ही पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे और जांच शुरू कर दी है।
जानकारी के अनुसार महिला प्रधान आरक्षक दीपा नेगी सुबह अपनी मां से कहकर घर से निकली थी कि पेट्रोल डलवाने जा रही हूं , उनका मकान कुछ ही दूरी पर था। वहीं उनका जला हुआ शव बरामद हुआ है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पूरे मामले की जांच की जा रही है, अभी इस पर कुछ भी कहना संभव नहीं है। जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे उनके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
घटना की सूचना मिलते ही आसपास के इलाके में अफरा-तफरी मच गई। दीपा नेगी स्थानीय पुलिस बल में पदस्थ थीं और उनकी अचानक इस तरह मौत ने सभी को स्तब्ध कर दिया है। पुलिस आत्महत्या, हत्या या किसी अन्य कारण की आशंका जताते हुए हर पहलू से जांच कर रही है। फिलहाल मामले की जांच जारी है।
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कब्र से निकाली गई 2 साल की मासूम की लाश, पोस्टमार्टम के लिए होगा खुलासा, गलत इलाज का आरोप
इंदौर। मध्य प्रदेश के इंदौर में डॉक्टर की लापरवाही से हुई 2 साल की बच्ची की मौत के बाद उसे दफना दिया गया था। लेकिन आज इसे दोबारा कब्र खुदवाकर निकाला गया है। जिसके बाद पोस्टमार्टम में जांच के लिए भेज दिया गया है।
बता दें कि उल्टी-दस्त के बाद बच्ची का तीन अस्पतालों में इलाज चला था। लेकिन अचानक उसकी मौत हो गई थी जिसके बाद इलाज में लापरवाही के आरोप लगे थे। परिजनों ने अस्पताल पर गलत उपचार का आरोप लगाया था जिस पर पुलिस ने मर्ग दर्ज कर इसकी जांच शुरू कर दी।
एसडीएम की अनुमति के बाद शव को कब्र से बाहर निकालकर पांच डॉक्टरों के पैनल ने पोस्टमार्टम किया। पोस्टमार्टम के दौरान विसरा सुरक्षित रख लिया है। अब दवाओं और इलाज की जांच होगी। भंवरकुआं पुलिस तीनों अस्पतालों से उपचार संबंधी दस्तावेज जुटा रही है। जांच के बाद खुलासा होगा।
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कागज चेकिंग के दौरान भड़का शख्स, पुलिसकर्मी को जड़ा थप्पड़, जांच में हुआ बड़ा खुलासा
धार। मध्य प्रदेश के धार में बाइक के कागज चेक करने पर विवाद हो गया। विवाद इतना बढ़ा कि युवक ने पुलिसकर्मी को थप्पड़ तक जड़ दिए जिससे पुलिसकर्मी नीचे गिर पड़ा। इस घटना के बाद मौके पर तनाव की स्थिति पैदा हो गई। इससे जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।
घटना मंगलवार शाम की बताई जा रही है जब मांडव नाका स्थित रिलायंस पेट्रोल पंप के पास शाम को बाइक के कागजों की जांच के दौरान शुरू हुआ विवाद देखते ही देखते बड़े हंगामे में बदल गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, पुलिसकर्मियों ने एक बाइक सवार युवक को रोककर उससे वाहन के दस्तावेज मांगे। लेकिन बातचीत के दौरान दोनों पक्षों के बीच विवाद बढ़ गया। इसी दौरान युवक ने कथित रूप से एक पुलिसकर्मी को जमकर थप्पड़ जड़ दिया जिसके चलते पुलिसकर्मी नीचे गिर गया। इसके बाद स्थिति और बिगड़ गई।
आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने युवक के साथ मारपीट की। वहीं बाइक पर मौजूद महिलाओं के साथ भी धक्का-मुक्की की गई। घटना के समय महिलाओं के साथ छोटे बच्चे भी मौजूद थे, जो पूरे घटनाक्रम के दौरान डरे-सहमे नजर आए। घटना का वायरल वीडियो भी सामने आया है, जिसमें सड़क पर जमकर हंगामे दिखाई दे रहा है। वीडियो में महिलाओं की चीख-पुकार और धक्का-मुक्की के दृश्य भी दिखाई दे रहा है। वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और घटना को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं चल रही हैं।
नगर पुलिस अधीक्षक सुजावल जग्गा ने बताया कि पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी कि एक एक व्यक्ति बाइक से जा रहा है जो बाइक सही से नहीं चला रहा है और उसके नंबर प्लेट संदिग्ध लग रही है। उसी की चेकिंग के लिए बल भेजा गया था। जब बाइक सवार को रोका गया और कागजात मांगे तो उसने पुलिसकर्मियों को धक्का देकर भागने की कोशिश की। बदतमीजी को संदिग्ध मानते हुए उसका मेडिकल करवाया गया जिसमे वह शराब के नशे में पाया गया। उसके खिलाफ 185 मोटर व्हीकल एक्ट के तहत कार्रवाई की गई है वही 170 126 बीएनएस की कार्रवाई प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की गई है। मोटर व्हीकल का डेटाबेस चेक करवाया गया तो यह बात सामने आई कि उसकी नंबर प्लेट है दूसरे गाड़ी की है जबकि वाहन उसका दूसरा वाहन था। इसे भी संज्ञान में लेते हुए अपराध पंजीबद्ध किया गया है।
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