


उज्जैन. सेंट्रल ब्यूरो ऑफ नारकोटिक्स (सीबीएन) ने उज्जैन रेलवे स्टेशन पर बड़ी कार्रवाई करते हुए शिप्रा एक्सप्रेस से पश्चिम बंगाल ले जाई जा रही 1.067 किलोग्राम हेरोइन जब्त की है. मामले में राजस्थान के प्रतापगढ़ के रहने वाले एक आरोपी को गिरफ्तार किया गया है.
कार्रवाई का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें अधिकारी ट्रेन में घेराबंदी कर आरोपी को पकड़ते और तलाशी लेते नजर आ रहे हैं. सीबीएन को सूचना मिली थी कि शिप्रा एक्सप्रेस (ट्रेन नंबर 22911) के जरिए बड़ी मात्रा में हेरोइन की तस्करी की जा रही है.
सूचना के आधार पर गुरुवार-शुक्रवार दरमियानी रात करीब एक बजे उज्जैन रेलवे स्टेशन पर आरपीएफ और नारकोटिक्स अधिकारियों ने संयुक्त कार्रवाई की. ट्रेन के पहुंचते ही जनरल कोच में सघन तलाशी अभियान चलाया गया. इस दौरान एक संदिग्ध युवक की पहचान होने पर उसके हैंडबैग की जांच की गई.
तलाशी के दौरान बैग में छिपाकर रखे गए दो पैकेटों से 1.067 किलोग्राम हेरोइन बरामद हुई. बरामद मादक पदार्थ की अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत करीब सवा करोड़ रुपए आंकी जा रही है. गिरफ्तार आरोपी की पहचान राजस्थान के प्रतापगढ़ निवासी रमेश चंद्र के रूप में हुई है.
शुरुआती जांच में सामने आया है कि हेरोइन की यह खेप राजस्थान के प्रतापगढ़ क्षेत्र से पश्चिम बंगाल के हावड़ा भेजी जा रही थी. उज्जैन इस सप्लाई रूट का एक महत्वपूर्ण पड़ाव था. हेरोइन मिलने की पुष्टि होते ही आरोपी को हिरासत में लेकर आगे की कार्रवाई की जाती है.
सीबीएन ने आरोपी के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया है. अब एजेंसी ड्रग तस्करी नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और पूरी सप्लाई चेन की जांच कर रही है.
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EV शोरूम में भीषण आग ने मचाया तांडव, 20 लोग फंसे, सीढ़ियों से बची जान
इंदौर देश में लगातार इमारतों में आग लगने की खबरें सामने आ रही है। दिल्ली के मालवीय नगर अग्निकांड में विदेशी नागरिकों सहित 21 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई थी। ऐसी ही स्थिति शुक्रवार सुबह मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर की स्कीम-136 में बन गई। यहां इलेक्ट्रिक वाहनों के शोरूम (EV Showroom) में भीषण आग लगने से इलाके में हड़कंप मच गया। आग लगने के बाद शोरूम के ऊपर बने होमस्टे में ठहरे करीब 20 लोग धुएं के बीच फंस गए। उन्हे दूसरी बिल्डिंग से सीढ़ी लगाकार रेस्क्यू किया गया। आग लगने के कारण की जांच में पुलिस जुट चुकी है।
जानकारी के अनुसार सुबह रहवासियों ने बिल्डिंग से घना धुआं निकलते देखा। धुआं लगातार ऊपर की ओर फैल रहा था और होमस्टे में मौजूद लोग बाहर नहीं निकल पा रहे थे। स्थिति गंभीर होती देख स्थानीय लोग खुद ही रेस्क्यू में जुट गए। उन्होंने आसपास से सीढ़ियां और रस्सियां जुटाई और बिल्डिंग के कांच तोड़ना शुरू कर दिए ताकि धुआं बाहर निकल सके। कांच टूटते ही अंदर भरा धुआं बाहर निकलने लगा और फंसे लोगों को कुछ राहत मिली। इसके बाद रहवासियों ने सीढ़ियों के सहारे लोगों को नीचे उतारना शुरू किया। शुरुआती प्रयास में कई लोग सुरक्षित बाहर आ गए। घटना के दौरान पास की मल्टी में रहने वाले लोग भी मदद के लिए आगे आए। रहवासियों का कहना है कि यदि समय रहते बचाव शुरू नहीं किया जाता तो हालात गंभीर हो सकते थे। मौके पर पहुंचे पुलिसकर्मी नरेंद्र ने भी बचाव अभियान में भूमिका निभाई।
सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड और पुलिस की टीम पहुंच गई। दमकल कर्मियों ने आग बुझाने का अभियान शुरू किया। कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पा लिया। आग शांत होने के बाद ऊपर फंसे लोगों को सुरक्षित निकाल लिया गया। दमकल अधिकारियों के अनुसार आग लगने के कारणों की जांच की जा रही है। बताया जा रहा है कि ईवी शोरूम में मौजूद सभी वाहन जलकर खाक हो गए। वाहनों के जलने से उठे धुएं से रहवासियों को सांस लेने में दिक्कत हुई। मामले को एडिशनल डीसीपी अमरेंद्र सिंह का कहना है।
बता दें कि, पिछले महीने 14 मई को देवास जिले में भी ऐसी घटना ने लोगों को हिला दिया था। जिले के टोंक कलां क्षेत्र स्थित एक पटाखा फैक्ट्री में ब्लास्ट होने से भीषण आग लग गई थी। इस घटना में 3 मजदूरों की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई थी। वहीं, पांच मजदूरों की मौत इलाज के दौरान हो गई थी।
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खौफनाक साजिश: सोते हुए परिवार को जिंदा जलाने की कोशिश, महिला की सूझबूझ से टला बड़ा हादसा
ग्वालियर। मोहल्ले के आपसी विवाद का बदला लेने के लिए एक पूरे हंसते-खेलते परिवार को जिंदा जलाने की रोंगटे खड़े कर देने वाली साजिश का खुलासा हुआ है। बहोड़ापुर थाना क्षेत्र की इंद्रा कॉलोनी में दो नकाबपोश बदमाशों ने गुरुवार की आधी रात के बाद एक घर और बाहर खड़ी गाड़ी पर पेट्रोल छिड़ककर आग लगाने का प्रयास किया। गनीमत रही कि पेट्रोल की तीखी गंध के कारण घर की महिला की नींद सही समय पर खुल गई। महिला की तत्परता और बहादुरी के चलते बदमाश बिना माचिस जलाए ही मौके से भाग खड़े हुए। पुलिस को इस पूरी वारदात का सीसीटीवी फुटेज मिला है, जिसके आधार पर आरोपियों की तलाश तेज कर दी गई है।
इंद्रा कॉलोनी निवासी हरीशचंद्र गुप्ता पेशे से टेलर हैं। उन्होंने पुलिस को बताया कि बुधवार-गुरुवार की दरमियानी रात को पूरा परिवार खाना खाकर गहरी नींद में सो रहा था। रात करीब 3 बजे उनकी पत्नी मोना गुप्ता को अचानक नाक में पेट्रोल की तेज गंध महसूस हुई, जिससे उनकी आंख खुल गई। किसी अनहोनी की आशंका होने पर मोना ने जैसे ही खिड़की से बाहर झांका, उनके होश उड़ गए। बाहर चेहरे पर साफी (कपड़ा) बांधे दो संदिग्ध युवक उनके मुख्य दरवाजे और बाहर खड़ी बाइक पर बोतल से पेट्रोल छिड़क रहे थे।
मोना गुप्ता ने ऐसी खौफनाक स्थिति में घबराने के बजाय गजब की सूझबूझ दिखाई। वे तुरंत दौड़कर गईं और घर का मुख्य दरवाजा खोल दिया। अचानक गेट खुलने और महिला को सामने खड़ा देख दोनों बदमाश बुरी तरह हड़बड़ा गए। इससे पहले कि वे माचिस जलाकर आग लगा पाते, पकड़े जाने के डर से पेट्रोल की बोतल वहीं फेंककर गली की तरफ भाग निकले। मोना की इस त्वरित बहादुरी के कारण घर में सो रहे कई लोगों की जान बच गई।
टेलर हरीशचंद्र गुप्ता के अनुसार, दो दिन पहले उनके बेटे और उसके दोस्तों का मोहल्ले में ही रहने वाले समीर खान नाम के युवक से किसी बात पर विवाद हुआ था। समीर लगातार उनके बेटे पर अपने दोस्तों को बुलाने का दबाव बना रहा था और समझौता न होने पर उसने पूरे परिवार को जिंदा फूंकने का यह जानलेवा प्लान तैयार किया।
बहोड़ापुर थाना प्रभारी (TI) आलोक परिहार का कहना है कि पीड़ित परिवार की शिकायत पर मामला दर्ज कर लिया गया है। सीसीटीवी फुटेज के जरिए आरोपियों की पहचान की जा रही है और उन्हें दबोचने के लिए पुलिस टीमें लगातार दबिश दे रही हैं। जल्द ही आरोपी सलाखों के पीछे होंगे।
राजगढ़। नकली नोट खपाने के मामले में सात साल की सजा काट रहा एक कैदी जिला अस्पताल से फिल्मी अंदाज में फरार हो गया। पीलिया का उपचार कराने के लिए भर्ती किए गए कैदी ने ड्रिप स्टैंड की मदद से हथकड़ी तोड़ दी और पहली मंजिल की खिड़की से कूदकर अस्पताल परिसर से भाग निकला। देर शाम तक पुलिस और जेल प्रशासन को उसका कोई सुराग नहीं मिल सका।
जानकारी के अनुसार आगर मालवा जिले के नलखेड़ा निवासी 28 वर्षीय जितेंद्र भाटी को सारंगपुर पुलिस ने नकली नोट चलाने के मामले में गिरफ्तार किया था। न्यायालय द्वारा उसे सात वर्ष के कारावास की सजा सुनाए जाने के बाद 11 अप्रैल 2026 को राजगढ़ जिला जेल में स्थानांतरित किया गया था। तब से वह जिला जेल में बंद था।
एक जून को उसकी तबीयत बिगड़ गई और पीलिया की शिकायत सामने आने पर दो जून को उसे उपचार के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। अस्पताल के कैदी वार्ड में पहले से एक मानसिक रूप से अस्वस्थ महिला भर्ती होने के कारण जितेंद्र को पहली मंजिल स्थित कैंसर वार्ड में रखा गया था।
भर्ती के दौरान उसके एक हाथ में हथकड़ी लगाकर पलंग से बांधा गया था। सुरक्षा के लिए अलग-अलग समय पर तीन जेल प्रहरियों की ड्यूटी लगाई गई थी। बताया गया है कि शुक्रवार तड़के एक जेल प्रहरी कुछ समय के लिए वार्ड से बाहर चला गया। इसी दौरान कैदी ने कमरे में रखे ड्रिप स्टैंड की मदद से हथकड़ी तोड़ दी और खिड़की से नीचे कूदकर फरार हो गया।
कुछ देर बाद जब प्रहरी वापस लौटा तो कैदी वार्ड में नहीं मिला। पलंग पर टूटी हुई हथकड़ी पड़ी थी। यह देखकर जेल प्रहरी ने तत्काल जेल प्रशासन, पुलिस और अस्पताल प्रबंधन को सूचना दी।
प्रारंभिक जांच में सुरक्षा व्यवस्था में गंभीर लापरवाही सामने आई है। जिस कमरे में कैदी को रखा गया था, उसकी खिड़की में पहले से जाली नहीं लगी थी। इसके बावजूद कैदी को उसी कक्ष में भर्ती किया गया। माना जा रहा है कि इसी खामी का फायदा उठाकर वह भागने में सफल रहा।
घटना के बाद पुलिस और जेल प्रशासन ने अस्पताल परिसर तथा आसपास के क्षेत्रों में सर्चिंग अभियान चलाया, लेकिन देर शाम तक फरार कैदी का कोई पता नहीं चल सका। पुलिस उसकी तलाश में जुटी हुई है।
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रील्स का जुनून पड़ा भारी: सोशल मीडिया ‘इन्फ्लुएंसर’ बने यातायात प्रधान आरक्षक विवेकानंद तिवारी निलंबित
शहडोल। सोशल मीडिया पर रील्स और वीडियो बनाकर चर्चाओं में रहने वाले यातायात विभाग के बहुचर्चित प्रधान आरक्षक विवेकानंद तिवारी पर आखिरकार विभागीय कार्रवाई की गाज गिर गई। पुलिस अधीक्षक रामजी श्रीवास्तव ने सामान्य सेवा शर्तों के उल्लंघन और बिना सूचना लंबे समय तक ड्यूटी से गैरहाजिर रहने के आरोप में उन्हें निलंबित कर दिया है।
यातायात विभाग में पदस्थ प्रधान आरक्षक विवेकानंद तिवारी पिछले करीब 15 दिनों से बिना किसी पूर्व सूचना के ड्यूटी से अनुपस्थित चल रहे थे। इसी दौरान वे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम सहित अन्य माध्यमों पर लगातार वीडियो और रील्स बनाकर अपलोड करते दिखाई दिए। विभागीय जांच में यह बात सामने आई कि आरक्षक शासकीय कार्य से दूरी बनाकर निजी प्रचार और व्यक्तिगत लाभ के उद्देश्य से सोशल मीडिया गतिविधियों में सक्रिय थे।
पुलिस अधीक्षक द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि विवेकानंद तिवारी द्वारा पुलिस रेगुलेशन 64 के अंतर्गत सेवा की सामान्य शर्तों का उल्लंघन किया गया है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में वे पुलिस की निर्धारित वर्दी में नजर आ रहे थे, हालांकि कई वीडियो में उन्होंने वर्दी का मोनो हटाकर अन्य रूप में प्रस्तुति दी, जो विभागीय अनुशासन के विपरीत माना गया।
सूत्रों की मानें तो लंबे समय से उनके सोशल मीडिया एक्टिविटी को लेकर विभाग में चर्चाएं चल रही थीं। वीडियो बनाने और सोशल मीडिया पर लोकप्रियता हासिल करने की होड़ में शासकीय जिम्मेदारियों की अनदेखी को गंभीरता से लेते हुए यह कार्रवाई की गई है।
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दिनदहाड़े लूट की वारदातः AC मिस्त्री बनकर आए नकाबपोश बदमाशों ने महिला को बंधक बनाकर 4 लाख नकद और जेवर ले भागे
डबरा। ग्वालियर जिले के डबरा में लूट की सनसनीखेज वारदात हुई है। सचदेवा कॉलोनी में AC मिस्त्री बनकर आए दो नकाबपोश बदमाशों जबरन घर में घुसे और महिला पर पिस्टल अड़ाकर लूट की वारदात को अंजाम दिया है। दोनों लुटरों ने घर में मौजूद महिला पिंकी श्रीवास्तव की कनपटी पर पिस्टल अड़ाई उसके साथ मारपीट की। अलमारी तोड़कर करीब 4 लाख नकद और लाखों रुपए का सोना चांदी समेट कर ले भागे।
दरअसल महिला पिंकी श्रीवास्तव, मोनिका श्रीवास्तव की भाभी है। मोनिका एक कपड़े की दुकान पर काम करती है। घटना के समय मोनिका दुकान पर थी और उसकी भाभी पिंकी अकेली घर पर। बुधवार दोपहर 3 बजे करीब दो बाइक सवार बदमाश आए और गेट खुलवाया। अपने आप को AC का मिस्त्री बताया और AC ठीक करने की बात कही। जब पिंकी ने मना किया तो दोनों लुटेरे घर के अंदर प्रवेश कर गए और महिला पिंकी से पिस्टल अड़ाकर मारपीट शुरू कर दी। घर की अलमारी में रखें नगदी और जेवरात समेट कर ले गए। मामले की सूचना पर परिजन घर पहुंचे और पुलिस से शिकायत की। पुलिस आसपास लगे CCTV फुटेज खंगाल रही है।
फिलहाल आरोपियों का कोई सुराग नहीं लगा। मोनिका श्रीवास्तव ने बताया कि बेटी तनुष्का की शादी के लिए पैसे और ज्वेलरी घर में रखी थी जिसे लुटेरे ले गए। पुलिस इस मामले को संदिग्ध मानते हुए घटना की तफ्तीश में जुटी है।
पश्चिम बंगाल में बीजेपी सरकार बनने के बाद अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों पर लगातार कार्रवाई की जा रही है. सरकार ने साफ़ कहा है कि, घुसपैठियें खुद वापस अपने देश चले जाएं वरना एक्शन लिया जायेगा. भारत सरकार और बंगाल सरकार के इस सख्त एक्शन का ऐसा असर ये हुआ कि, सालों से भारत के संसाधनों का दोहन कर रहे बांग्लादेशी अब अपने देश वापस जाने मजबूर हो गए हैं. बॉर्डर से लगे इलाकों में इसी वजह से भारी भीड़ देखने को मिल रही है. इतनी ज्यादा संख्या में बॉर्डर पर घुसपैठियों को देखकर बांग्लादेश बौखला गया है. अब वह आरोप लगा रहा है कि भारत अवैध प्रवासियों को जबरदस्ती बांग्लादेश की सीमा में धकेल (पुश-इन) रहा है.
अवैध प्रवासियों की अदला-बदली को लेकर एक बार फिर गंभीर कूटनीतिक और सैन्य गतिरोध पैदा हो गया है. बांग्लादेश ने भारत पर यह आरोप लगाया है कि भारतीय सुरक्षा बलों ने पिछले 24 घंटों के भीतर कई बार अवैध प्रवासियों को जबरन बांग्लादेशी सीमा में धकेलने की कोशिश की है. बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (BGB) ने दावा किया है कि उन्होंने भारतीय अधिकारियों द्वारा सीमा के अलग-अलग हिस्सों से लोगों को अवैध रूप से सीमा पार कराने के कम से कम 10 प्रयासों को नाकाम किया है.
बांग्लादेश के आरोप से दोनों पड़ोसियों के बीच हाल के महीनों में रिश्तों को सुधारने के लिए किए जा रहे कूटनीतिक प्रयासों पर पानी फिर गया है. उल्लेखनीय है कि भारत और बांग्लादेश के बीच 4,000 किलोमीटर से भी लंबी अंतरराष्ट्रीय जमीनी सीमा है, जो दुनिया की सबसे लंबी सीमाओं में से एक है. भारत बांग्लादेश के साथ ही सबसे बड़ी सीमा साझा करता है.
नदी, पहाड़ों और घने जंगलों जैसे बेहद जटिल भौगोलिक क्षेत्रों से गुजरने के कारण इस पूरी सीमा की सटीक घेराबंदी या चौबीसों घंटे निगरानी करना दोनों ही देशों के सुरक्षा बलों के लिए हमेशा से एक बड़ी चुनौती रही है.
बांग्लादेशी सीमा प्रहरियों के इन तीखे आरोपों पर फिलहाल नई दिल्ली में भारतीय पक्ष की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है. भारत के सीमा सुरक्षा बल (BSF) और विदेश मंत्रालय ने इस पूरे मामले पर पूछे गए सवालों और टिप्पणियों के अनुरोधों का तुरंत कोई जवाब नहीं दिया है.
हालांकि, भारत के सीमावर्ती राज्यों- त्रिपुरा, पश्चिम बंगाल और असम में सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी लंबे समय से अवैध प्रवासियों और घुसपैठ की समस्या से निपटने को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल करती रही है.
पुश-इन के मामले पर बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (BGB) ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि किसी भी परिस्थिति में किसी भी व्यक्ति या समूह को अंतरराष्ट्रीय सीमा पार करके अवैध रूप से बांग्लादेश के क्षेत्र में प्रवेश करने की अनुमति नहीं दी जाएगी. अंतरराष्ट्रीय सीमा प्रबंधन के स्थापित नियमों, प्रोटोकॉल और दोनों देशों के बीच के द्विपक्षीय समझौतों का उल्लंघन करने वाले किसी भी प्रयास का पूरी ताकत से और कड़ाई से विरोध किया जाएगा.
इस कूटनीतिक रस्साकशी के बीच, भारत के विदेश मंत्रालय ने पूर्व में यह स्पष्ट किया था कि भारत सरकार ने बांग्लादेश से भारत में अवैध रूप से रह रहे 2860 से अधिक संदिग्ध बांग्लादेशी नागरिकों की नेशनलिटी वैरिफिकेशन का अनुरोध किया था. लेकिन औपचारिक चैनलों के बजाय सीमा पर हो रही इस कथित खींचतान ने जमीनी हालात बिगाड़ दिए हैं.
बांग्लादेश की अंतरिम सरकार और वहां के राजनयिकों ने इस बात पर बार-बार जोर दिया है कि अवैध प्रवासियों की पहचान और उनकी वापसी के लिए एक तय कानूनी और राजनयिक ढांचा मौजूद है. ढाका का स्पष्ट कहना है कि यदि भारत में कोई भी व्यक्ति अवैध रूप से रह रहा है. वह वास्तव में बांग्लादेशी नागरिक पाया जाता है, तो उसे स्थापित अंतरराष्ट्रीय नियमों और औपचारिक राजनयिक चैनलों के माध्यम से ही वापस भेजा जाना चाहिए.
इस बढ़ते तनाव को कम करने और दोनों देशों के बीच के इस कड़वे गतिरोध को सुलझाने के लिए अब सैन्य और कूटनीतिक स्तर पर बातचीत की तैयारी की जा रही है. इस बेहद संवेदनशील मुद्दे को नई दिल्ली में आयोजित होने वाली दोनों देशों के सीमा बलों के महानिदेशक स्तर की द्विवार्षिक वार्ता में प्रमुखता से उठाया जाएगा. यह उच्च स्तरीय बैठक 8 से 11 जून तक आयोजित होने वाली है, जहां भारत के बीएसएफ और बांग्लादेश के बीजीबी के शीर्ष कमांडर आमने-सामने बैठकर सीमा प्रबंधन, घुसपैठ और कथित ‘पुश-इन’ के मामलों पर अपनी-अपनी रिपोर्ट साझा करेंगे.
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केदारनाथ यात्रा रोकी : मूसलाधार बारिश के कारण यात्रियों को होल्डिंग क्षेत्रों में रुकने के निर्देश, प्रशासन अलर्ट
उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश और मौसम विभाग द्वारा जारी खराब मौसम के पूर्वानुमान के बाद जिला प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है। यात्रियों, श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए प्रशासन ने यात्रा मार्गों पर आवाजाही पर एहतियाती नियंत्रण लागू कर दिया है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि मौसम सामान्य होने तक यात्रियों को आगे बढ़ने की अनुमति न दी जाए। विशेष रूप से केदारनाथ यात्रा मार्ग पर निगरानी बढ़ा दी गई है, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। प्रशासन का कहना है कि किसी भी प्रकार का जोखिम उठाने के बजाय यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सबसे महत्वपूर्ण है।
जिलाधिकारी विशाल मिश्रा के निर्देश पर यात्रा मार्ग के विभिन्न पड़ावों, भूस्खलन संभावित क्षेत्रों और संवेदनशील जोनों में तैनात अधिकारियों को अलर्ट रहने को कहा गया है। प्रशासन ने सभी यात्रियों को निकटतम होल्डिंग क्षेत्रों और सुरक्षित स्थानों पर रोकने के निर्देश जारी किए हैं। साथ ही यात्रियों के लिए भोजन, आवास, चिकित्सा सहायता और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जा रही है। अधिकारियों को लगातार निगरानी बनाए रखने और मौसम की स्थिति पर नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं ताकि किसी भी आपात स्थिति में तत्काल कार्रवाई की जा सके।
प्रशासन ने केदारनाथ यात्रा मार्ग सहित जिले के सभी संवेदनशील क्षेत्रों में पुलिस, एसडीआरएफ, डीडीआरएफ, एनडीआरएफ, सेक्टर मजिस्ट्रेट और अन्य विभागों को उच्च स्तर की सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं। लगातार हो रही बारिश के कारण भूस्खलन, सड़क अवरोध और दुर्घटनाओं की आशंका बनी हुई है। ऐसे में सभी संबंधित एजेंसियों को किसी भी आपदा या आपात स्थिति की जानकारी तत्काल जिला आपातकालीन परिचालन केंद्र तक पहुंचाने के लिए कहा गया है। प्रशासन का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आवश्यकता पड़ने पर राहत और बचाव कार्य बिना किसी देरी के शुरू किए जा सकें।
जिला प्रशासन ने यात्रियों, तीर्थयात्रियों और स्थानीय नागरिकों से अपील की है कि वे मौसम विभाग और प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पूरी तरह पालन करें। लोगों को अफवाहों से बचने और मौसम सामान्य होने तक अनावश्यक यात्रा न करने की सलाह दी गई है। प्रशासनिक अधिकारियों के मुताबिक मौसम की स्थिति सामान्य होने और मार्गों को पूरी तरह सुरक्षित घोषित किए जाने के बाद ही यात्रियों की आवाजाही दोबारा शुरू की जाएगी। फिलहाल प्रशासन लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है और सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। प्रशासन ने आपातकालीन सहायता के लिए 8958757335 और 8218326386 नंबर जारी किए हैं।
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क्या भारत में पहुंच गया इबोला वायरस? राजस्थान में मिला पहला संदिग्ध केस, युगांडा से आई युवती में मिले लक्षण; RUHS में भर्ती
जयपुर। कोरोना महामारी के बाद दुनिया अब भी नई स्वास्थ्य चुनौतियों को लेकर सतर्क है। इसी बीच राजस्थान से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है। जयपुर में युगांडा से आई एक युवती में इबोला वायरस जैसे लक्षण पाए गए हैं। हालांकि अभी संक्रमण की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन एहतियात के तौर पर उसे आइसोलेशन में रखा गया है और सैंपल जांच के लिए पुणे भेजे गए हैं। रिपोर्ट आने तक पूरे स्वास्थ्य तंत्र को अलर्ट मोड पर रखा गया है।
जानकारी के अनुसार, 19 वर्षीय युगांडा नागरिक युवती शुक्रवार सुबह एयर अरेबिया की फ्लाइट से शारजाह होते हुए जयपुर पहुंची थी। एयरपोर्ट पर नियमित स्वास्थ्य जांच और स्क्रीनिंग के दौरान उसमें कुछ ऐसे लक्षण दिखाई दिए जो इबोला संक्रमण से मिलते-जुलते हैं। युवती को तुरंत मेडिकल निगरानी में लिया गया और आगे की जांच के लिए राजस्थान यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज (RUHS) अस्पताल भेजा गया।
स्वास्थ्य विभाग के निर्देश पर युवती को RUHS अस्पताल के विशेष आइसोलेशन वार्ड में भर्ती किया गया है। अस्पताल प्रशासन ने उसे अन्य मरीजों से पूरी तरह अलग रखा है, ताकि किसी भी संभावित संक्रमण के खतरे को रोका जा सके। अस्पताल के वरिष्ठ डॉक्टरों की टीम लगातार उसकी निगरानी कर रही है और सभी जरूरी मेडिकल प्रोटोकॉल का पालन किया जा रहा है।
RUHS अस्पताल के अधीक्षक डॉ. अनिल गुप्ता ने कहा कि, फिलहाल युवती में इबोला वायरस की पुष्टि नहीं हुई है। उन्होंने बताया कि मरीज में बुखार और सिरदर्द समेत कुछ ऐसे लक्षण पाए गए हैं जो इबोला संक्रमण से मिलते हैं, लेकिन केवल लक्षणों के आधार पर किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा जा सकता। उन्होंने कहा कि, अंतिम पुष्टि लैब रिपोर्ट आने के बाद ही होगी। फिलहाल मामले को केवल संदिग्ध मानकर जांच की जा रही है।
महिला के ब्लड और अन्य मेडिकल सैंपल जांच के लिए पुणे स्थित राष्ट्रीय स्तर की विशेष प्रयोगशाला भेजे गए हैं। स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, रिपोर्ट 24 से 48 घंटे के भीतर आने की संभावना है। रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि युवती वास्तव में इबोला वायरस से संक्रमित है या नहीं।
राजस्थान में पहली बार इबोला का संदिग्ध मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह अलर्ट हो गया है। एयरपोर्ट, अस्पतालों और अन्य स्वास्थ्य संस्थानों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही युवती की ट्रैवल हिस्ट्री और उसके संपर्क में आए लोगों की जानकारी भी जुटाई जा रही है।
गौरतलब है कि 2 जून को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने इबोला वायरस को लेकर एडवाइजरी जारी की थी। एडवाइजरी में कहा गया था कि, जो लोग पिछले 21 दिनों के भीतर इबोला प्रभावित देशों की यात्रा कर चुके हैं, उन्हें अपने स्वास्थ्य पर विशेष नजर रखनी चाहिए। अगर किसी व्यक्ति में बुखार, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द, उल्टी, दस्त या असामान्य रक्तस्राव जैसे लक्षण दिखाई दें तो उसे तुरंत खुद को अलग कर स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारियों को सूचना देनी चाहिए।
इबोला वायरस एक बेहद गंभीर और कई मामलों में जानलेवा वायरल बीमारी है। यह पहली बार साल 1976 में अफ्रीका में सामने आया था। इस वायरस का नाम डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो में बहने वाली इबोला नदी के नाम पर रखा गया था, जहां इसके शुरुआती मामले मिले थे। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, यह बीमारी तेजी से गंभीर रूप ले सकती है और कई मामलों में मरीज की मौत का कारण बनती है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, इबोला वायरस की मृत्यु दर 25 प्रतिशत से 90 प्रतिशत तक हो सकती है। मृत्यु दर वायरस के प्रकार, संक्रमण की गंभीरता और समय पर इलाज मिलने पर निर्भर करती है। जितनी जल्दी मरीज की पहचान और इलाज शुरू होता है, उसके बचने की संभावना उतनी अधिक रहती है।
भारत में अब तक इबोला वायरस संक्रमण का कोई पुष्ट मामला दर्ज नहीं हुआ है। यही वजह है कि, जयपुर में सामने आया यह संदिग्ध मामला स्वास्थ्य एजेंसियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि विशेषज्ञ लगातार यह दोहरा रहे हैं कि फिलहाल घबराने की जरूरत नहीं है क्योंकि अभी केवल लक्षण मिले हैं, संक्रमण की पुष्टि नहीं हुई है।
राजस्थान से पहले हैदराबाद एयरपोर्ट पर भी एक सूडानी नागरिक में इबोला जैसे लक्षण पाए जाने के बाद उसे निगरानी में रखा गया था। वहीं छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में अफ्रीकी देशों से लौटे तीन लोगों को एहतियातन 21 दिन के लिए होम आइसोलेशन में रखा गया है। हालांकि इनमें किसी भी प्रकार के लक्षण नहीं मिले हैं।
मध्य प्रदेश। मुरैना जिले में पदस्थ डिप्टी कलेक्टर अरविंद माहौर एक गंभीर कानूनी मामले में फंस गए हैं। उन पर एक 32 वर्षीय महिला ने शादी का झांसा देकर लंबे समय तक शारीरिक शोषण और दुष्कर्म करने के आरोप लगाए हैं। शिकायत के आधार पर सिविल लाइन थाना पुलिस ने मामला दर्ज किया और आरोपी अधिकारी को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया गया। अदालत ने उनकी जमानत याचिका खारिज करते हुए उन्हें जेल भेजने का आदेश दिया। यह मामला अब प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर भी चर्चा का विषय बना हुआ है।
यह पूरा मामला सोशल मीडिया से शुरू हुआ बताया जा रहा है। पीड़िता के अनुसार वर्ष 2025 की शुरुआत में उसकी पहचान फेसबुक के माध्यम से अरविंद माहौर से हुई थी। उस समय वे सबलगढ़ में एसडीएम के पद पर कार्यरत थे। शुरुआती बातचीत धीरे धीरे बढ़ती गई और दोनों के बीच मोबाइल नंबर भी साझा हुए। इसके बाद संपर्क लगातार बना रहा और मुलाकातों का सिलसिला शुरू हो गया।
महिला का आरोप है कि अधिकारी ने उससे शादी करने का वादा किया था। इसी भरोसे पर दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं। शिकायत में कहा गया है कि आरोपी उसे अलग अलग जगहों पर ले गया और शादी का भरोसा दिलाकर शारीरिक संबंध बनाए। पीड़िता का कहना है कि वह लंबे समय तक इस भरोसे में रही कि अधिकारी उससे विवाह करेगा।
पीड़िता ने अपनी शिकायत में बताया कि 30 मार्च 2025 को उसे घूमाने के बहाने मुरैना ले जाया गया। वहां रेस्ट हाउस के पीछे कार में उसके साथ दुष्कर्म किया गया। इसके बाद सबलगढ़ स्थित सरकारी आवास और ग्वालियर के एक फ्लैट में भी कई बार शारीरिक शोषण किया गया। महिला का कहना है कि आरोपी लगातार शादी का आश्वासन देता रहा और इसी भरोसे का फायदा उठाता रहा।
शिकायत के अनुसार जब महिला ने शादी के लिए दबाव बनाना शुरू किया, तो आरोपी ने विवाह से इनकार कर दिया। इतना ही नहीं, पीड़िता का आरोप है कि उसे और उसके परिवार को नुकसान पहुंचाने की धमकियां भी दी गईं ताकि वह शिकायत न कर सके। इसके बाद पीड़िता ने अपने परिजनों के साथ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।
शिकायत मिलने के बाद सिविल लाइन थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की। पुलिस ने पीड़िता के बयान दर्ज किए और मेडिकल परीक्षण भी कराया। जांच में कुछ डिजिटल और दस्तावेजी साक्ष्य मिलने के बाद अधिकारी को गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तारी के बाद उसे कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
अदालत ने मामले की सुनवाई के दौरान आरोपी की जमानत याचिका खारिज कर दी और उसे जेल भेजने का आदेश दिया। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच अभी जारी है और सभी साक्ष्यों की गहराई से जांच की जा रही है। मोबाइल डेटा, वीडियो और अन्य डिजिटल सबूतों की भी जांच की जा रही है।
अरविंद माहौर पहले भी विवादों में रह चुके हैं। सबलगढ़ में एसडीएम रहते हुए उन पर एक अन्य महिला से जुड़ा विवाद सामने आया था, जिसके बाद उन्हें निलंबित किया गया था। अब इस नए मामले के बाद एक बार फिर वे सुर्खियों में हैं।
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एक जैसा नाम का फायदा उठाकर पास कर दिया 40 हजार का लोन, बैंक मैनेजर समेत दो गिरफ्तार
इंदौर। शहर में लोन प्रक्रिया में बड़ी लापरवाही और धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। एक महिला को तब झटका लगा जब उसने दोबारा लोन के लिए आवेदन किया और पता चला कि उसके नाम पर पहले से ही 40 हजार रुपये का लोन चल रहा है। हैरानी की बात यह थी कि महिला ने कभी ऐसा कोई लोन लिया ही नहीं था। शिकायत के बाद इंदौर क्राइम ब्रांच ने जांच शुरू की तो पूरे मामले का चौंकाने वाला खुलासा हुआ।
पुलिस के अनुसार अमरीन बाग नाम की महिला ने कुछ समय पहले लोन के लिए आवेदन किया था, लेकिन उनका लोन स्वीकृत नहीं हुआ। बाद में जब उन्होंने फिर से लोन लेने की कोशिश की तो रिकॉर्ड में उनके नाम पर पहले से 40 हजार रुपये का लोन सक्रिय मिला। यह जानकारी सामने आते ही महिला ने मामले की शिकायत की, जिसके बाद क्राइम ब्रांच ने जांच शुरू की।
क्राइम ब्रांच की जांच में पता चला कि अमरीन बाग और अमरीन खान नाम की दो अलग-अलग महिलाओं के नामों में एक जैसे होने के कारण पूरे मामले में गड़बड़ी हुई। आरोप है कि लोन स्वीकृत करने के दौरान जरूरी दस्तावेजों और पहचान की सही तरीके से जांच नहीं की गई। इसी का फायदा उठाकर अमरीन खान के नाम पर लोन जारी कर दिया गया, जबकि रिकॉर्ड में दूसरी महिला का नाम जुड़ गया।
पुलिस का कहना है कि लोन स्वीकृत करने से पहले संबंधित अधिकारी की जिम्मेदारी होती है कि वह आवेदक की पहचान, दस्तावेज, फोटो और अन्य जरूरी जानकारियों का सत्यापन करे। लेकिन इस मामले में यह प्रक्रिया पूरी तरह संदिग्ध नजर आई। आरोप है कि आरोहण फाइनेंस कंपनी के मैनेजर दिलीप यादव ने आवश्यक सत्यापन किए बिना ही लोन मंजूर कर दिया।
मामले में कार्रवाई करते हुए क्राइम ब्रांच ने कस्टमर सर्विस रिप्रेजेंटेटिव राहुल पोरवाल और आरोहण फाइनेंस कंपनी के मैनेजर दिलीप यादव को गिरफ्तार कर लिया है। दोनों आरोपियों से पूछताछ की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि यह केवल लापरवाही का मामला है या फिर इसके पीछे कोई संगठित धोखाधड़ी का नेटवर्क काम कर रहा था।
क्राइम ब्रांच को आशंका है कि यह मामला सिर्फ एक महिला तक सीमित नहीं हो सकता। प्रारंभिक जांच में कई ऐसे बिंदु सामने आए हैं जिनसे संकेत मिल रहे हैं कि अन्य लोगों के नाम पर भी इसी तरह फर्जी या संदिग्ध तरीके से लोन जारी किए गए हो सकते हैं। इसी वजह से पुलिस अब पुराने रिकॉर्ड और लोन फाइलों की भी जांच कर रही है।
इस मामले ने एक बार फिर लोन कंपनियों की वेरिफिकेशन पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि नाम की समानता के आधार पर बिना पर्याप्त जांच के लोन स्वीकृत हो सकते हैं, तो आम लोगों की पहचान और वित्तीय सुरक्षा पर गंभीर खतरा पैदा हो सकता है। फिलहाल क्राइम ब्रांच पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही है और आने वाले दिनों में इस मामले में और खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
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चरित्र शंका में आरक्षक पति ने पत्नी को गर्म प्रेस से 7 बार दागा, हाथ-पैर बांधकर की पिटाई, आरक्षक गिरफ्तार
ग्वालियर। मध्य प्रदेश केग्वालियर में रिश्तों को शर्मसार कर देने वाली एक सनसनीखेज वारदात सामने आई है। जहां पत्नी के चरित्र पर शक करने वाले एक SAF आरक्षक ने हैवानियत की सारी हदें पार कर दीं। आरोप है कि उसने पहले पत्नी को बेरहमी से पीटा, हाथ-पैर बांधकर बंधक बनाया और फिर उसे गर्म प्रेस से 07 बार जलाया। गंभीर रूप से झुलसी महिला का अस्पताल में इलाज जारी है, जबकि पुलिस ने पीड़ित पत्नी की शिकायत पर आरोपी आरक्षक को गिरफ्तार कर लिया है।
दरअसल मामला 13वीं बटालियन स्थित सरकारी आवास का है। 13वीं बटालियन में ही पदस्थ आरक्षक राजेंद्र परिहार अपनी पत्नी पूजा परिहार के चरित्र को लेकर शक करता था। बताया जा रहा है कि वह अक्सर पत्नी पर निगरानी रखता था और उसे घर से बाहर निकलने तक पर आपत्ति जताता था। घटना वाली रात भी महिला खाना खाने के बाद घर के बाहर टहलने गई थी। जब वह लौटकर आई तो पति ने उससे पूछताछ शुरू कर दी। इसी बात को लेकर विवाद बढ़ा और आरोपी ने पहले पत्नी के साथ मारपीट की। फिर उसने महिला के हाथ-पैर बांध दिए और जमीन पर पटककर बेरहमी से पीटा। इसके बाद आरोपी ने महिला के शरीर पर गर्म प्रेस से 07 जगह जलाया, जिससे महिला गंभीर रूप से झुलस गई।
बताया जा रहा है कि उसके शरीर का बड़ा हिस्सा जल गया है। महिला की चीख-पुकार सुनकर आसपास के लोग पहुंचे और उसे मायके ले जाया गया,जहां से उसे अस्पताल पहुंचाया गया। घटना के बाद का वह दर्दनाक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें महिला गंभीर रूप से झुलसी हुई हालत में नजर आ रही है। वीडियो में उसकी लाचारी और दर्द साफ दिखाई देता है। घटना के बाद पीड़िता ने थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई है, पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए आरोपी आरक्षक राजेंद्र परिहार को गिरफ्तार कर लिया है,मामले में अलग अलग धाराओं के तहत केस दर्ज कर जांच की जा रही है।
मध्य प्रदेश नेशनल हेल्थ मिशन में बड़ा फर्जीवाड़ा (MP NHM Scam) सामने आया है। रिपोर्ट के मुताबिक कई डॉक्टर फर्जी एमबीबीएस डिग्री के आधार पर एनएचएम में नौकरी कर रहे थे। इस मामले को लेकर भोपाल के चुनाभट्टी थाने में 9 डॉक्टरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। जिसके बाद पुलिस ने जांच भी शुरू कर दी है।
सूत्रों के मुताबिक संबंधित डॉक्टर प्रदेश की अलग-अलग जिलों और स्वास्थ्य संस्थानों में सरकारी नौकरी कर रहे थे। फर्जी डिग्री के माध्यम से मरीजों का इलाज कर रहे थे। जांच के दौरान उनके शैक्षणिक योग्यताओं और एमबीबीएस डिग्री में कई गड़बड़ियां सामने आई। जिसे ध्यान में रखते हुए एनएचएम विभाग ने थाने में FIR दर्ज करवाई है। भविष्य में इस मामले को लेकर कई खुलासे भी हो सकते हैं।
मध्यप्रदेश एनएचएम में फर्जीवाड़े से स्वास्थ्य सेवाओं पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। राज्य के विभिन्न अस्पतालों में फर्जी डॉक्टरों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई भी देखने को मिल रही है। हाल ही में एनएचएम द्वारा संचालित दमोह में स्थित संजीवनी क्लिनिक में फर्जी एमबीबीएस डिग्री के मामले में तीन डॉक्टरों और फर्जीवाड़े से जुड़े दो सरगना (हीरा कौशल और आदिल सिद्दीकी) को गिरफ्तार किया गया था।
बताया जा रहा है कि हीरा कौशल को गैंग में मुख्य भूमिका निभाता था। लाखों की कीमतों में फर्जी एमबीबीएस डिग्री मुहैया करवाता था। वहीं आदिल सिद्दीकी भोपाल स्थित एनएचएम के दफ्तर में आईपी असिस्टेंट के तौर पर काम कर रहा था। आदिल ने बताया कि एनएचएम भर्ती प्रक्रिया में कोई इंटरव्यू या जांच नहीं होती। उसके इस बयान ने भर्ती प्रक्रिया पर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
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ट्रेनों में सक्रिय किन्नर गिरोह पर आरपीएफ का शिकंजा, जबरन वसूली करने वाले छह किन्नर दबोचे गए
जबलपुर. जबलपुर रेलवे स्टेशन और यहां से गुजरने वाली ट्रेनों में यात्रियों से जबरन रुपये वसूलने और अभद्र व्यवहार करने वाले किन्नर गिरोहों के खिलाफ रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) ने सख्त अभियान शुरू कर दिया है. हाल के दिनों में दो अलग-अलग कार्रवाइयों में कुल छह किन्नरों को पकड़कर उनके खिलाफ रेलवे एक्ट के तहत कार्रवाई की गई है. आरपीएफ का कहना है कि स्टेशन परिसर और ट्रेनों में यात्रियों की सुरक्षा तथा सुविधा प्रभावित करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा.
ताजा मामले में जबलपुर मुख्य रेलवे स्टेशन परिसर में तीन किन्नरों को यात्रियों से रुपये मांगते और अव्यवस्था फैलाते हुए पकड़ा गया. जानकारी के अनुसार आरपीएफ के उप निरीक्षक अरविंद सिंह और आरक्षक प्रवीण उपाध्याय स्टेशन के कटनी छोर की ओर नियमित गश्त कर रहे थे. इसी दौरान उनकी नजर तीन किन्नरों पर पड़ी जो यात्रियों से रुपये मांग रहे थे और स्टेशन परिसर में अनावश्यक भीड़ तथा अव्यवस्था की स्थिति पैदा कर रहे थे. शिकायत मिलने के बाद आरपीएफ टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए तीनों को हिरासत में लिया और पूछताछ के लिए आरपीएफ थाना लेकर पहुंची.
पकड़े गए आरोपियों की पहचान सुनैना (20 वर्ष), मोनू (20 वर्ष) और आशिकी किन्नर (32 वर्ष) के रूप में हुई है. तीनों कटनी जिले के एनकेजे थाना क्षेत्र के पीछे स्थित इलाके के निवासी बताए गए हैं. रेलवे एक्ट के अंतर्गत आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद उन्हें न्यायालय की शर्तों से अवगत कराया गया और बंधपत्र पर रिहा कर दिया गया. अधिकारियों ने उन्हें भविष्य में इस तरह की गतिविधियों से दूर रहने की चेतावनी भी दी है.
इसी बीच जबलपुर से होकर गुजरने वाली ट्रेनों में यात्रियों से जबरन बधाई और रुपये वसूलने वाले किन्नर गिरोह की सक्रियता का एक और मामला सामने आया है. ट्रेन क्रमांक 22909 वलसाड-पुरी एक्सप्रेस में सफर कर रहे यात्रियों ने शिकायत की थी कि कुछ किन्नर अनारक्षित कोच में चढ़कर यात्रियों से जबरन रुपये मांग रहे हैं. यात्रियों द्वारा पैसे देने से इनकार करने पर अभद्र व्यवहार किया जा रहा था, जिससे कोच के भीतर तनाव और विवाद की स्थिति बन रही थी.
यात्रियों की शिकायत मिलते ही जबलपुर आरपीएफ पोस्ट प्रभारी राजीव खरब ने तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए. सूचना के अनुसार कुछ किन्नर ट्रेन के अनारक्षित डिब्बे में सवार होकर यात्रियों को परेशान कर रहे थे. इसके बाद आरपीएफ की विशेष टीम गठित की गई और जवानों को मुख्य स्टेशन के आउटर क्षेत्र में तैनात किया गया ताकि ट्रेन के पहुंचने से पहले आरोपियों को पकड़ने की रणनीति बनाई जा सके.
जैसे ही वलसाड-पुरी एक्सप्रेस जबलपुर स्टेशन के आउटर क्षेत्र में पहुंची और उसकी गति धीमी हुई, अनारक्षित कोच से तीन किन्नर एक-एक कर नीचे कूद गए. हालांकि पहले से सतर्क आरपीएफ जवानों की नजर उन पर पड़ चुकी थी. आरोपियों ने भागने की कोशिश की, लेकिन जवानों ने घेराबंदी कर उन्हें मौके पर ही दबोच लिया. इसके बाद तीनों को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई.
आरपीएफ द्वारा पकड़े गए आरोपियों की पहचान आंध्र प्रदेश के गंटूर जिले के वन टाउन थाना क्षेत्र स्थित तेनामी वाइकुंटा पुरम निवासी बेलमकोन्डा दिनेश उर्फ बी. नीलीमा (43), नर्मदापुरम जिले के इटारसी स्थित नूरानी मस्जिद नाला मोहल्ला निवासी काली किन्नर गुरु (42) तथा बबली (52) के रूप में हुई है. तीनों के खिलाफ रेलवे नियमों के तहत आवश्यक कार्रवाई की गई.
जांच के दौरान आरपीएफ को यह भी जानकारी मिली कि सतना, कटनी, जबलपुर और इटारसी रेलखंड के बीच कई किन्नर समूह लंबे समय से ट्रेनों में सक्रिय हैं. ये समूह यात्रियों से जबरन रुपये वसूलने का काम करते हैं और शिकायत मिलने की स्थिति में बच निकलने के लिए विभिन्न तरीके अपनाते हैं. सूत्रों के अनुसार ये लोग ट्रेनों के शौचालयों में छिप जाते हैं, कपड़े बदल लेते हैं या स्टेशन पहुंचने से पहले चलती ट्रेन से उतरकर फरार हो जाते हैं. यही कारण है कि इनके खिलाफ कार्रवाई करना सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौती बना रहता है.
आरपीएफ अधिकारियों के अनुसार पकड़े गए तीनों आरोपी एक ही गुरु के चेले बताए जा रहे हैं. प्रारंभिक जांच में इनकी गुरु का नाम रेशमा सामने आया है. सुरक्षा एजेंसियां अब इस पूरे नेटवर्क की जानकारी जुटाने में लगी हैं ताकि ट्रेनों में सक्रिय ऐसे गिरोहों की गतिविधियों पर प्रभावी रोक लगाई जा सके.
रेलवे अधिकारियों का कहना है कि ट्रेनों और स्टेशन परिसरों में यात्रियों को परेशान करने, जबरन रुपये मांगने या अभद्र व्यवहार करने वालों के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जाएगा. यात्रियों से भी अपील की गई है कि यदि यात्रा के दौरान कोई व्यक्ति जबरन पैसे मांगता है, डराता-धमकाता है या असुविधा पैदा करता है तो तुरंत रेलवे हेल्पलाइन 139 या निकटतम आरपीएफ कर्मी को सूचना दें.
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अजब-गजब: ‘सिंघम’ मैडम के आगे ढेर हुए पुलिस के ‘शहंशाह’, बीच सड़क काटा सिपाहियों का चालान
नरसिंहपुर। जरा सोचिए, आप सड़क पर जा रहे हों और अचानक पुलिस आपको रोक ले… धड़कनें बढ़ना तो लाज़मी है। लेकिन तब क्या हो जब पुलिस ही पुलिस को रोक ले और सरेराह उसकी ‘क्लास’ लगा दे? जी हां ऐसा ही एक गजब नजारा मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर में देखने को मिला, जहां ‘खाकी’ के घमंड पर ‘खाकी’ का ही डंडा ऐसा चला कि देखने वाले देखते रह गए।
ट्रैफिक नियमों का पाठ पढ़ाने वाली पुलिस जब खुद बिना हेलमेट के ‘रॉबिनहुड’ बनकर घूम रही थी तो मैडम सिंघम ने बीच चौराहे पर ही उनकी ऐसी बत्ती गुल की कि उन्हें लेने के देने पड़ गए!
मामला नरसिंहपुर जिला मुख्यालय के कंट्रोल रूम के पास का है। यहां यातायात थाना प्रभारी ममता तिवारी अचानक पूरे ‘सिंघम अवतार’ में सड़क पर आ धमकीं। मैडम ने जैसे ही चेकिंग शुरू की, आम जनता तो नियम कायदों में आ गई, लेकिन तभी बाइक पर सवार होकर कुछ पुलिस के जवान बिना हेलमेट लगाए बड़े टशन में वहां से गुजरे।
बस फिर क्या था! मैडम ने आव देखा न ताव, तुरंत गाड़ी रुकवाई। ऑन-ड्यूटी पुलिसकर्मियों ने सोचा होगा कि ‘अपनी ही तो पुलिस है, छोड़ देगी’, लेकिन ममता मैडम के इरादे कुछ और ही थे। उन्होंने बीच सड़क पर ही नियम तोड़ने वाले जवानों की ऐसी क्लास लगाई कि बेचारे बगलें झांकने लगे।
मैडम तिवारी ने साफ कर दिया कि वर्दी का रौब घर पर छोड़कर आइए, सड़क पर कानून सबके लिए बराबर है। उन्होंने तुरंत रसीद कट्टा निकाला और ऑन-ड्यूटी पुलिस के जवानों के भी तड़ातड़ चालान काट दिए।
सड़क किनारे खड़ी जनता जो अमूमन पुलिस की चेकिंग से डरती है, वो यह नजारा देखकर तालियां बजाने लगी। लोगों के मुंह से बस एक ही बात निकल रही थी- वाह मैडम, कानून हो तो ऐसा! आज तो खाकी का ही बैंड बज गया।
इस अनोखी और सख्त कार्रवाई के बाद यातायात प्रभारी ममता तिवारी ने कड़क लहजे में बताया कि यह कोई मजाक नहीं है। सुप्रीम कोर्ट की कमेटी की बैठक में साफ निर्देश दिए गए हैं कि सभी सरकारी विभागों में यातायात नियमों का कड़ाई से पालन होना चाहिए।
मैडम ने साफ कहा कि इस महा-अभियान की शुरुआत हमने सबसे पहले पुलिस विभाग और कलेक्ट्रेट से की है ताकि जनता को संदेश मिले। इस अजब-गजब चेकिंग के दौरान नियम तोड़ने वाले सरकारी और गैर-सरकारी बाबुओं के कुल 68 चालान काटकर उनके हाथ में थमा दिए गए।
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