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जबलपुर। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने भरण-पोषण से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में छतरपुर फैमिली कोर्ट के आदेश को रद्द कर दिया है। हाई कोर्ट ने कहा कि यदि पति की ओर से पत्नी के कथित अवैध संबंधों को लेकर पर्याप्त सबूत पेश किए गए हैं, तो अदालत उन्हें नजरअंदाज नहीं कर सकती। ऐसे मामलों में अंतिम फैसला लेने से पहले उपलब्ध साक्ष्यों की गहनता से जांच और अध्ययन जरूरी है। मामला छतरपुर फैमिली कोर्ट से जुड़ा है, जहां वर्ष 2018 में पत्नी को पति से हर महीने 6 हजार रुपये भरण-पोषण देने का आदेश दिया गया था। इस आदेश के खिलाफ पति ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
याचिकाकर्ता पति दिल्ली का निवासी है, जबकि उसकी शादी छतरपुर निवासी महिला से हुई थी। पति ने हाई कोर्ट में दायर याचिका में आरोप लगाया कि उसकी पत्नी के कई लोगों से अवैध संबंध हैं। अपने आरोपों के समर्थन में उसने सीडी, ट्रांसक्रिप्शन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य भी फैमिली कोर्ट के सामने पेश किए थे।
पति का आरोप था कि फैमिली कोर्ट ने उसके द्वारा पेश किए गए इन महत्वपूर्ण साक्ष्यों पर उचित तरीके से विचार नहीं किया और उन्हें नजरअंदाज करते हुए पत्नी के पक्ष में भरण-पोषण का आदेश पारित कर दिया। मामले की सुनवाई जस्टिस द्वारकाधीश बंसल की बेंच ने की। हाई कोर्ट ने माना कि मामले में पेश किए गए साक्ष्यों की उचित जांच और मूल्यांकन आवश्यक है। अदालत ने फैमिली कोर्ट के आदेश को रद्द करते हुए मामले को दोबारा सुनवाई के लिए निचली अदालत में भेज दिया।
हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि भरण-पोषण से जुड़े मामलों में उपलब्ध साक्ष्यों को नजरअंदाज करके फैसला नहीं किया जा सकता। खासतौर पर जब पति की ओर से पत्नी के आचरण को लेकर दस्तावेजी और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य पेश किए गए हों, तो अदालत को उनकी विश्वसनीयता और प्रासंगिकता का गहन परीक्षण करना चाहिए। अब फैमिली कोर्ट को उपलब्ध साक्ष्यों का दोबारा परीक्षण करते हुए मामले में नए सिरे से फैसला करना होगा।
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सुअर पकड़ने पहुंची नगर पालिका की टीम का महिलाओं ने किया विरोध, पुलिस से हुई तीखी नोकझोंक
हरदा। नगर पालिका और इंदौर से आई टीम पुलिस बल के साथ श्रीधाम कालोनी में सुअर पकड़ने पहुंची थी। कार्रवाई के दौरान महिलाओं ने नगर पालिका अमले का विरोध किया और लाठियां तान दीं। जिसके बाद नोंकझोंक हुई।
नपा कर्मियों ने महिलाओं को नगर पालिका के आदेश का हवाला देते हुए समझाने की कोशिश की, लेकिन महिलाओं ने एक ना सुनी और आगे बढ़ते हुए सुअरों को पिकअप से बाहर कर फिर से खुल्ला छोड़ दिया। सुअरों को छोड़ने की बात पर महिलाओं और नपा कर्मियों के बीच तीखी नोंकझोंक भी हुई। घटना को लेकर स्थानीय लोगों ने पुलिस की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि पुलिस बल मौके पर मौजूद होने के बावजूद नगर पालिका कर्मचारियों और महिलाओं के बीच हुए विवाद में प्रभावी तरीके से बीच-बचाव नहीं कर पाया। उधर, नगर पालिका प्रशासन अब घटना को गंभीरता से लेते हुए शासकीय कार्य में बाधा डालने के मामले में कानूनी कार्रवाई की तैयारी कर रहा है। इसके लिए नगर पालिका ने पुलिस प्रशासन से सहयोग मांगा है
नगर पालिका कर्मियों के साथ इंदौर से आई टीम थाना कोतवाली पहुंची, जहां पूरे मामले की शिकायत की है। पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार महिला होने की वजह से पुलिस जवान उन पर जवाबी कार्रवाई नहीं कर सके। शिकायत और वायरल वीडियो के आधार पर बाधा उत्पन्न करने वालों की पहचान की जा रही है। जिनके विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।
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बालाघाट में मीजल्स और मलेरिया से हुई 19 बच्चों की मौत, आईसीएमआर की रिपोर्ट से खुलासा
बालाघाट. मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के आदिवासी बैगा बाहुल्य ग्रामों में बच्चों में फैली बीमारी और लगातार हुई मौतों को लेकर अब खुलासा हो गया है. आईसीएमआर सहित अन्य संस्थानों की जांच में नियमित टीकाकरण से छूटे बच्चों में मीजल्स संक्रमण पाया गया है. आईसीएमआर रिपोर्ट के आधार पर कलेक्टर कुमार सत्यम ने बच्चों की मौत के मामले में मीजल्स संक्रमण की पुष्टि कर दी है. आईसीएमआर सहित अन्य संस्थानों की जांच में नियमित टीकाकरण से छूटे बच्चों में मीजल्स संक्रमण पाया गया है.
प्रभावित ग्रामों में मीजल्स और मलेरिया के प्रकरणों की आयुक्त स्वास्थ्य धनराजू एस की अध्यक्षता में 5 सदस्यीय दल ने 13 से 15 अगस्त तक जिले के प्रभावित ग्रामों का भ्रमण किया एवं जांच की. इस दौरान बच्चों की मृत्यु के कारणों की विस्तृत समीक्षा की गई. जिसके बाद रिपोर्ट और सेंपल को एनआईवी पुणे भेजे गए थे. जहां जांच में चांदीपुरा वायरस, वेस्ट नाईल फीवर वायरस और जापानीज एनसेफेलाइटिस वायरस सहित विभिन्न वायरस की जांच निगेटिव पाई गई. जांच एवं उपलब्ध रिपोर्टों के आधार पर बच्चों में मृत्यु का कारण मीजल्स और मलेरिया संक्रमण पाया गया है.
आईसीएमआर रिपोर्ट के आधार पर बच्चों की मौतों के प्रमुख कारणों में मलेरिया और मीजल्स संक्रमण सामने आया है. कलेक्टर कुमार सत्यम ने रिपोर्ट के आधार पर मौतों की पुष्टि की है. उन्होंने बताया, जिन गांव से ज्यादा केस आ रहे थे. वहां स्थिति अब सामान्य है. प्रभावित क्षेत्रों और गांवों में 20 हेल्थ टीम लगाई हैं जो घर घर जा रही हैं और बच्चों का चेकअप कर रही हैं. जिन बच्चों में कुछ लक्षण नजर आ रहे हैं वहां से उन्हें जिला अस्पताल रेफर करवा रहे हैं. अभी तक ऐसे 135 बच्चों को इलाज के बाद वापस उनके घर भेजा गया है. प्रभावित क्षेत्रों में मौसमी बीमारियों के साथ मलेरिया और मीजल्स की शिकायत मिली है. कुछ बच्चों में स्किन में बीमारी की शिकायत मिली है यानि मौत की वजह में कई बीमारियां शामिल हैं.
कलेक्टर कुमार सत्यम ने बताया, अब सभी प्रभावित क्षेत्रों में मीजल्स रूबेला के वैक्सीनेशन की 20 अगस्त से शुरुआत कर रहे हैं और इसकी शुरुआत बिरसा से होगी. इसमें 9 माह से 10 साल तक के बच्चों को मीजल्स रूबेला वैक्सीन की अतिरिक्त खुराक दी जाएगी. जिले के आदिवासी बाहुल्य बैहर, बिरसा और परसवाड़ा विकासखण्डों में 20 से 25 अगस्त तक एमआर कैचअप राउंड संचालित किया जाएगा.

दिल्ली के टिकरी कलां इलाके में बुधवार को एक CNG पंप पर गैस भरने के दौरान जोरदार ब्लास्ट हो गया. हादसे में तीन शख्स की मौत हो गई, जबकि तीन लोगों के घायल होने की खबर है. घटना के बाद मौके पर मौजूद लोगों मे अफरा-तफरी मच गई. आसपास मौजूद लोगों में भी दहशत फैल गई. सूचना मिलते ही पुलिस और दमकल की टीमें मौके पर पहुंचीं और राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया. घायलों को इलाज के लिए तत्कल अस्पताल पहुंचाया गया.
जानकारी के मुताबिक, हादसा उस समय हुआ जब एक रीफिलिंग ट्रक के जरिए CNG पंप पर गैस भरी जा रही थी. इसी दौरान अचानक तेज धमाके के साथ ब्लास्ट हो गया. धमाके की आवाज काफी दूर तक सुनाई दी. हादसे के बाद पंप पर मौजूद लोगों में भगदड़ जैसी स्थिति बन गई. पुलिस और संबंधित विभाग की टीमें यह पता लगाने में जुटी हैं कि CNG की रीफिलिंग के दौरान आखिर किस वजह से ब्लास्ट हुआ.
घटना में तीन लोग घायल हुए हैं. सभी घायलों को तत्काल इलाज के लिए नजदीकी अस्पताल पहुंचाया गया. उनकी हालत को लेकर फिलहाल विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है. वहीं, हादसे के कारणों की जांच शुरू कर दी गई है. ब्लास्ट की सूचना मिलते ही दमकल की गाड़ियां और पुलिस टीम मौके पर पहुंची. सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए आसपास के इलाके को घेर लिया गया और पंप पर मौजूद लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया. मौके पर राहत और बचाव कार्य चलाया जा रहा है.
पुलिस और संबंधित विभाग की टीमें यह पता लगाने में जुटी हैं कि CNG की रीफिलिंग के दौरान आखिर किस वजह से ब्लास्ट हुआ. क्या गैस लीकेज के कारण हादसा हुआ या फिर रीफिलिंग सिस्टम में किसी तकनीकी खराबी की वजह से यह घटना हुई, इसकी जांच की जा रही है. हादसे के बाद CNG पंप की सुरक्षा व्यवस्था और गैस रीफिलिंग प्रक्रिया पर भी सवाल उठ रहे हैं. अधिकारियों की ओर से पंप के उपकरणों और रीफिलिंग ट्रक की तकनीकी जांच कराए जाने की संभावना है.
फिलहाल प्राथमिकता घायलों को सही इलाज उपलब्ध कराने और घटनास्थल को सुरक्षित करने की है. पुलिस घटना से जुड़े प्रत्यक्षदर्शियों से भी पूछताछ कर रही है. जांच पूरी होने के बाद ही ब्लास्ट की वास्तविक वजह स्पष्ट हो सकेगी.
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सुप्रीम कोर्ट का आदेश- बच्चों को संपत्ति से बेदखल कर सकते हैं माता-पिता; कहा- हर व्यक्ति को जीवनभर गरिमा के साथ जीने का अधिकार
सीनियर सिटीजन्स (बुजुर्गों) की गरिमा और सुरक्षा को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा आदेश दिया है। एक मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कि सीनियर सिटीजन्स अपने बच्चों को संपत्ति से बेदखल कर सकते हैं। देश के शीर्ष न्यायालय ने कहा कि हर व्यक्ति को जीवनभर गरिमा के साथ जीने का अधिकार है। बढ़ती उम्र का मतलब असुरक्षा या अपमान नहीं होना चाहिए।
जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच ने कहा कि कानून का मकसद बुजुर्गों की गरिमा और सुरक्षा तय करना है। सभ्य समाज का स्तर अक्सर इस बात से तय होता है कि वह अपने बुजुर्गों को कितना सम्मान और सुरक्षा देता है।
सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले के साथ ही इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश को भी पलट दिया, जिसमें बेटे और बहू को मकान से बेदखल करने के ट्रिब्यूनल कोर्ट के आदेश को रद्द किया गया था। कोर्ट ने कहा कि बुजुर्गों की गरिमा के लिए ट्रिब्यूनल के पास बच्चों को संपत्ति से निकालने का आदेश देने का अधिकार है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट ने ट्रिब्यूनल के आदेश में दखल देकर गलती की। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि भरण-पोषण और सुरक्षा के लिए जरूरी होने पर ट्रिब्यूनल बेदखली का आदेश दे सकता है। कोर्ट ने कहा कि एक्ट की धारा 7 के तहत ट्रिब्यूनल बनाए गए हैं और धारा 8 उन्हें सिविल कोर्ट जैसी शक्तियां देती है। वहीं, धारा 27 सिविल कोर्ट के अधिकार क्षेत्र पर रोक लगाती है। इसलिए ट्रिब्यूनल को कानून के उद्देश्य को लागू करने के लिए जरूरी कदम उठाने की शक्ति भी है।
पूरा मामला यूपी की राजधानी लखनऊ का है। लखनऊ निवासी रवि कांत गुप्ता ने 5 जून 2022 को अपने बेटे को मकान से निकालने के लिए जिला मजिस्ट्रेट के पास आवेदन दिया था। यह मकान उनकी खुद की खरीदी हुई संपत्ति थी। मामला तब सामने आया, जब गुप्ता की 81 साल की मां को घर छोड़कर वृद्धाश्रम में रहने के लिए मजबूर होना पड़ा। SDM ने 15 नवंबर 2022 को बेटे की बेदखली का आदेश दिया। जिला मजिस्ट्रेट ने भी 9 अगस्त 2023 को इसे बरकरार रखते हुए बेटे और बहू को मकान खाली करने का निर्देश दिया।
इसके बाद बेटे और बहू ने आदेश को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी। हाईकोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को बदलते हुए कहा कि 2007 का कानून बुजुर्गों को अपनी संपत्ति से बच्चों को बेदखल करने का अधिकार नहीं देता। इसके बाद आदेश रद्द कर दिए। इसके बाद रवि कांत गुप्ता ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी। सुप्रीम कोर्ट ने अब फैसला सुनाते हुए हाईकोर्ट के आदेश को बदल दिया है। साथ ही कहा कि बुजुर्ग माता-पिता च्चों को संपत्ति से बेदखल कर सकते हैं।
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अग्निकांड में 9 बांग्लादेशी नागरिकों की मौत, सभी इलाज कराने आए थे, 48 घंटे के अंदर दूसरी बार बंगाल में आग का तांडव
पश्चिम बंगाल में एक बार आग ने तांडव मचाया है। तारापीठ के बाद अब राजधानी कोलकाता में आग ने अपना तांडव मचाते हुए 9 लोगों को लील गया। कोलकाता में बुधवार तड़क होटल में आग लगने से 9 लोगों की मौत हो गई। कोलकाता अग्निकांड में मरने वालों में सभी बांग्लादेशी नागरिक (9 Bangladeshi Nationals Died in Kolkata) है। जबकि 6 अन्य लोग गंभीर रूप से झुलस गए। आग लगने के वक्त होटल में ज्यादातर लोग सो रहे थे। देखते ही देखते कमरों में धुआं भर गया, जिससे दम घुटने के कारण लोगों की मौत हुई। स्थिति का जायजा लेने के लिए खुद फायर मिनिस्टर कौशिक चौधरी भी घटनास्थल पर पहुंचे।
जानकारी के मुताबिक मध्य कोलकाता के दिल कहे जाने वाले न्यू मार्केट इलाके (मिर्ज़ा गालिब स्ट्रीट/फ्री स्कूल स्ट्रीट) स्थित शिखेल नामक 4 मंजिला होटल में बुधवार तड़के भीषण आग लग गई। अग्निकांड में 9 बांग्लादेशी लोगों की मौत हो गई।
धुएं का गुबार और लपटें उठती देख परिसर में अफरा-तफरी मच गई। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और फायर ब्रिगेड की कई गाड़ियां तुरंत मौके पर पहुंची और राहत व बचाव कार्य शुरू किया। आग के बाद उठे धुएं के कारण दमकलकर्मियों को आग बुझाने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा और सीढ़ियों से ऊपर की मंजिलों तक पहुंचना मुश्किल हो गया। दमकल विभाग की टीम ने काफी प्रयासों के बाद आग पर पूरी तरह से काबू पाया। हालांकि तबतक 9 लोगों की मौत हो चुकी थी। मरने वालों में सभी बांग्लादेशी नागरिक है।
फायर ब्रिगेड सूत्रों के मुताबिक, यह खौफनाक हादसा मंगलवार आधी रात के बाद करीब 2:45 बजे हुआ। घटना की सूचना पर दमकल विभाग, आपदा प्रबंधन और न्यू मार्केट पुलिस ने मौके पर पहुंचकर रेसेक्यू ऑपरेशन शुरू किया। आग होटल की तीसरी मंजिल पर लगी थी। दमकल विभाग की प्रारंभिक जांच में आग लगने का मुख्य कारण शॉर्ट सर्किट माना जा रहा है। जिस वक्त यह हादसा हुआ, होटल में ठहरे ज्यादातर मेहमान गहरी नींद में सो रहे थे। देखते ही देखते कमरों और संकरे गलियारों में जहरीला धुआं भर गया। धुआं इतनी तेजी से फैला कि लोगों को संभलने और बाहर भागने का मौका ही नहीं मिला। 60 से ज्यादा लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला। इस पूरे हादसे में होटल प्रशासन की भारी लापरवाही उजागर हुई है।
इस भीषण हादसे में मारे गए सभी 9 मृतक बांग्लादेशी नागरिक थे। मृतकों में अधिकांश लोग वे थे जो मेडिकल ट्रीटमेंट (इलाज) के लिए बांग्लादेश से कोलकाता आए थे और इस होटल में ठहरे हुए थे। मृतकों में 2 महिलाएं और एक नाबालिग बच्ची भी शामिल है। डॉक्टरों के अनुसार अधिकांश मौतें दम घुटने के कारण हुई हैं। हालांकि कुछ शवों पर जलने के निशान भी मिले हैं। 15 झुलसे और बेहोश हुए लोगों को रेस्क्यू कर कलकत्ता मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया है।
बता दें कि सोमवार (17 अगस्त) को पश्चिम बंगाल के तारापीठ में भी एक होटल में आग लग गई थी। इस हादसे में भी 9 लोगों की मौत हुई थी। आग सुबह करीब पांच बजे तारापीठ मंदिर नगरी स्थित चार मंजिला एक होटल के भूतल पर लगी उस समय होटल में ठहरे ज्यादातर अतिथि सो रहे थे। आग शॉर्ट सर्किट के कारण लगने की आशंका है।

ग्वालियर. एमपी के भिंड में नेशनल हाईवे-719 पर गोहद इलाके में सोमवार-मंगलवार की दरमियानी देर रात करीब 1 बजे तेज रफ्तार पिकअप सामने से आ रहे ट्रक से टकरा गई. इससे 8 लोगों की मौत हो गई. 23 घायल हैं. इनमें ट्रक ड्राइवर भी शामिल है.
पिकअप में कुल 29 मजदूर सवार थे. सभी अलग-अलग गांव के थे. ये लोग ग्वालियर से धान की रोपाई का काम पूरा कर घर लौट रहे थे. पहले चार मजदूरों की मौत और 25 के घायल होने की जानकारी आई थी. हादसे के बाद गोहद चौराहा थाना पुलिस मौके पर पहुंची और स्थानीय लोगों की मदद से घायलों को अस्पताल पहुंचाया. पांच शव गोहद और तीन शव ग्वालियर में रखे गए हैं. शवों की पहचान की जा रही है.
थाना प्रभारी रामनरेश यादव के मुताबिक पिकअप की रफ्तार 80 से 90 किलोमीटर प्रति घंटा होने का अनुमान है. छीमका गांव के पास हाईवे पर कुछ गायें सड़क पर बैठी थीं. अचानक सामने आए मवेशियों को बचाने के प्रयास में ड्राइवर ने पिकअप मोड़ी और सामने से आ रहे ट्रक से टक्कर हो गई. टक्कर इतनी तेज थी कि पिकअप बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई. मजदूरों को गंभीर चोटें आईं. पुलिस और आसपास के लोग मौके पर पहुंचे और घायलों को वाहन से बाहर निकालने में मदद की.
थाना प्रभारी रामनरेश यादव ने बताया कि पिकअप में सवार मजदूर ग्वालियर क्षेत्र में धान की रोपाई के लिए आए थे. काम पूरा होने के बाद सभी यूपी के लखीमपुर खीरी स्थित अपने गांव लौट रहे थे.
शुरुआती जांच में सड़क पर बैठी गायों को बचाने की कोशिश को हादसे की मुख्य वजह माना जा रहा है. रात में तेज गति से चलने वाले वाहनों के सामने अचानक मवेशी आने से हादसे का खतरा बढ़ जाता है. हादसे के बाद कुछ समय तक हाईवे पर यातायात प्रभावित रहा. पुलिस ने दोनों क्षतिग्रस्त वाहनों को सड़क से हटवाकर यातायात सामान्य कराया.

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12 करोड़ के ऑनलाइन गेमिंग स्कैम में रसूखदारों को बचाने पर भड़की अदालत, DGP को जांच के निर्देश
जबलपुर। मध्य प्रदेश के कटनी जिले से जुड़े चर्चित ऑनलाइन गेमिंग और 12 करोड़ रुपये के मनी ट्रेल मामले में हाईकोर्ट ने बेहद सख्त रुख अपनाया है। जांच में पक्षपात और बड़े रसूखदार लोगों को बचाने के आरोपों पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने मध्य प्रदेश के पुलिस महानिदेशक को पूरे मामले की निष्पक्ष और निष्पक्षता से जांच कराने के स्पष्ट निर्देश दिए हैं।
याचिकाकर्ता का आरोप है कि 12 करोड़ रुपये के भारी-भरकम मनी ट्रेल में कई बड़े और प्रभावशालियों के नाम सामने आए थे लेकिन पुलिस जांच में उन्हें जानबूझकर बाहर रखा गया।
कोर्ट के समक्ष यह बात लाई गई कि मामले में चार्जशीट दाखिल करने से पहले कटनी कंप्यूटर के मालिक समेत अन्य प्रमुख संदिग्धों से आवश्यक पूछताछ तक नहीं की गई। इस सट्टेबाज़ी और ऑनलाइन गेमिंग फ्रॉड मामले में योगेश बजाज और अन्य को आरोपी बनाया गया है।
जांच में हुई इस गंभीर लापरवाही और लीपापोती को आधार बनाकर हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी, जिस पर सुनवाई करते हुए अदालत ने डीजीपी को निष्पक्ष कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा है।
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2 साल के मासूम का अपहरण कर हत्या, घर के पास मिला शव, गांव में तनाव
नरसिंहपुर। मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर जिले के तेंदूखेड़ा थाना क्षेत्र अंतर्गत काचरकोना गांव से एक दिल दहला देने वाली सनसनीखेज वारदात सामने आई है। यहां सोते समय महज 2 साल के मासूम बच्चे को अगवा कर उसकी बेरहमी से हत्या कर दी गई। घटना के बाद घर के कुछ ही दूरी पर बच्चे का शव मिलने से परिजनों में कोहराम मच गया और पूरे इलाके में भारी तनाव व आक्रोश का माहौल व्याप्त है।
मिली जानकारी के मुताबिक, वारदात बीती रात की है। रात करीब 11 बजे जब मासूम की मां की नींद खुली, तो बच्चा बिस्तर से गायब था। परिजनों ने तुरंत आसपास उसकी खोजबीन शुरू की, लेकिन कुछ ही देर में घर के पास ही मासूम का शव बरामद हुआ। परिजनों ने गांव की ही एक महिला पर हत्या का गंभीर आरोप लगाया है।
घटना की सूचना मिलते ही तेंदूखेड़ा पुलिस भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंची। मामले की संवेदनशीलता और गंभीरता को देखते हुए तत्काल फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स और डॉग स्क्वॉड की टीम को मौके पर बुलाया गया। पुलिस ने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाकर मासूम के शव को पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल भिजवा दिया है।
संदीप भूरिया, एडिशनल एसपी (ASP), नरसिंहपुर ने कहा-“मामले की हर एंगल से गहनता से जांच की जा रही है। फॉरेंसिक टीम और साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई जारी है। जल्द ही आरोपी को चिन्हित कर सलाखों के पीछे भेजा जाएगा।”

इंदौर। गोराकुंड की यह सड़क करीब तीन साल पहले स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत 40 करोड़ रुपए की लागत से बनाई गई थी। पाइपलाइन की टेस्टिंग के दौरान अचानक पानी का तेज बहाव शुरू हुआ, जिससे डामर और पेवर ब्लॉक उखड़ गए। घटना के बाद सड़क निर्माण की गुणवत्ता और नई पाइपलाइन की टेस्टिंग को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
सोमवार को गोराकुंड क्षेत्र में सड़क पर सामान्य आवाजाही चल रही थी, तभी अचानक नीचे से पानी का तेज बहाव आने लगा। देखते ही देखते सड़क का हिस्सा टूट गया और वहां बड़ा गड्ढा बन गया। पानी के दबाव से डामर और पेवर ब्लॉक उखड़कर दूर जा गिरे। सड़क से गुजर रहे कार, ऑटो और बाइक सवार अचानक हुई घटना से घबरा गए और कई लोग अपनी गाड़ियां छोड़कर सुरक्षित जगह की ओर भागने लगे। घटना का वीडियो मंगलवार को सामने आया है।
जानकारी के मुताबिक, गोराकुंड इलाके में 24 घंटे पानी सप्लाई के लिए नई पाइपलाइन पहले ही बिछाई जा चुकी है। इंजीनियर कनेक्शन जोड़ने के बाद पाइपलाइन की टेस्टिंग कर रहे थे। इसी दौरान पाइप में पानी का दबाव बढ़ा और सड़क का हिस्सा अचानक टूट गया। पानी सड़क पर फैलने से आसपास अफरा-तफरी का माहौल बन गया। हालांकि इस दौरान कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ और किसी के घायल होने की जानकारी सामने नहीं आई।
गोराकुंड की सड़क करीब तीन साल पहले स्मार्ट सिटी के एरिया बेस्ड डेवलपमेंट के तहत विकसित की गई थी। एमजी रोड और आसपास के इलाकों में सड़क समेत कई सुविधाओं के विकास पर करोड़ों रुपए खर्च किए गए हैं। ऐसे में सड़क का इस तरह टूटना निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल खड़े कर रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि करोड़ों रुपए खर्च करने के बाद भी सड़क पानी के दबाव को क्यों नहीं झेल सकी, इसकी जांच होनी चाहिए।
घटना के बाद स्थानीय लोगों ने पाइपलाइन बिछाने और सड़क निर्माण से जुड़े कामों की गुणवत्ता की जांच की मांग की है। लोगों का कहना है कि नई पाइपलाइन की टेस्टिंग के दौरान सड़क का टूटना गंभीर विषय है। इससे यह भी सवाल उठ रहा है कि पाइपलाइन और सड़क के काम के बीच सही समन्वय हुआ था या नहीं। अब पूरे मामले की जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि सड़क पानी के दबाव से क्यों धंसी और इसके लिए जिम्मेदारी किसकी तय होती है।
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लाड़ली लक्ष्मी-बहनों को 5 साल तक मिलते रहेंगे रुपये, इस बार रक्षाबंधन पर 250 अतिरिक्त मिलेंगे
भोपाल. मध्य प्रदेश में लाड़ली बहना और लाड़ली लक्ष्मियों को सरकारी सहायता मिलती रहेगी. मंगलवार को कैबिनेट बैठक में इन दोनों योजनाओं को अगले 5 साल तक जारी रखने का फैसला लिया गया है. सरकार लाड़ली बहना योजना पर 1,14,365 करोड़ और लाड़ली लक्ष्मी योजना पर 16,326 करोड़ रुपए खर्च करेगी.
कैबिनेट ने मध्य प्रदेश सड़क विकास निगम में 35 नए पदों समेत 18 प्रस्तावों को मंजूरी भी दी है. निगम में पहले से स्वीकृत 7 पद 19 सितंबर 2026 के बाद अगले पांच साल तक बने रहेंगे. प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना को वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक जारी रखने का प्रस्ताव भी मंजूर किया गया है. इसमें 60त्न केंद्र जबकि 40त्न राज्य का हिस्सा रहेगा.
मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना में इस बार रक्षाबंधन पर लाभार्थियों को 250 रुपए अतिरिक्त दिए जाएंगे. हर महीने मिलने वाली 1500 रुपए की किस्त के साथ यह राशि जुडऩे से 19 अगस्त को लाड़ली बहनों के खातों में कुल 1750 रुपए पहुंचेंगे. उज्ज्वला योजना का लाभ लेने वाली पात्र महिलाओं को भी इस बार 250 रुपए की अतिरिक्त राशि दी जाएगी.
कैबिनेट के फैसलों की जानकारी देते हुए लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने कहा- लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग की मौजूदा योजनाओं को भी अगले पांच साल तक जारी रखने की मंजूरी दी गई है. इनमें नए उप स्वास्थ्य केंद्र बनाने, अस्पतालों और डिस्पेंसरी के लिए बिल्डिंग निर्माण की योजनाएं शामिल हैं. उन्होंने कहा कि आशा कार्यकर्ताओं को मिलने वाला अतिरिक्त प्रोत्साहन और कृषि विकास विभाग की 500 करोड़ रुपए से कम वित्तीय आकार वाली तीन योजनाएं भी अगले पांच साल तक जारी रहेंगी. पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के निर्मल एवं अविरल मां नर्मदा मिशन यानी नमन मिशन को कैबिनेट ने हरी झंडी दे दी है. इसका उद्देश्य नर्मदा से जुड़े संरक्षण और विकास कार्यों को संस्थागत रूप से आगे बढ़ाना है.
मंत्री राकेश सिंह ने बताया कि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की 'अनुसंधान, योजना तथा विकासीय गतिविधियां, निर्देशन एवं प्रशासन और 'विज्ञान को लोकप्रिय करना, विज्ञान के प्रसार हेतु सहायताÓ योजनाओं को भी जारी रखने की मंजूरी मिली है. विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग में पांच साल के लिए 492 करोड़ रुपए से अधिक की योजनाएं प्रस्तावित हैं.
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कैबिनेट बैठक से पहले कहा- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लालकिले से 5 से 15 साल के बच्चों में प्रतिभाओं की खोज के लिए टैलेंट हंट अभियान चलाने की बात कही है. युवाओं के लिए फ्री ऑनलाइन कोचिंग का बड़ा नेटवर्क तैयार किया जाएगा. देश के एक करोड़ युवाओं को एआई स्किल की ट्रेनिंग दी जाएगी. दुनिया का सबसे लोकतांत्रिक युवा देश होने के नाते एआई के विस्तार और विकास में भारत की अहम भूमिका होगी. मुख्यमंत्री ने कहा कि नशामुक्त भारत के लिए देश में 100 सप्ताह का बड़ा अभियान चलाया जाएगा. इसमें प्रमुख हस्तियों, समाजसेवी संस्थाओं और हर वर्ग के लोगों को जोड़ा जाएगा. उन्होंने सिविल डिफेंस नेटवर्क तैयार करने की आवश्यकता भी बताई.
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जनसुनवाई में युवक को डॉग की वेशभूषा पहनाकर पहुंचे निगम नेता प्रतिपक्ष, कुत्तों की नसबंदी पर उठे सवाल
खंडवा। खंडवा नगर निगम में आवारा कुत्तों की नसबंदी और उनके नियंत्रण को लेकर नेता प्रतिपक्ष दीपक राठौर कलेक्टर की जनसुनवाई में ज्ञापन सौंपकर गंभीर सवाल उठाए हैं। आरोप लगाया है कि, पिछले चार वर्षों में आवरों कुत्तों की नसबंदी के नाम पर करीब 40 लाख रुपये खर्च किए जाने के बावजूद संख्या में कमी नहीं आई है। इसके विरोध में नेता प्रतिपक्ष ने युवक को डॉग की वेशभूषा में लेकर जनसुनवाई में पहुंचे ।
खंडवा नगर निगम में विपक्ष के नेता प्रतिपक्ष दीपक राठौर ने आरोप लगाते हुए कहा कि, पिछले चार वर्षों में करीब 13,225 लोग डॉग बाइट का शिकार हुए हैं। इससे शहर के बच्चों, महिलाओं, बुजुर्गों और आम नागरिकों में भय का वातावरण बना हुआ है। नसबंदी कार्य में खर्च हुई राशि की वित्तीय एवं तकनीकी जांच कराने, संबंधित टेंडर की पूरी प्रक्रिया, कंपनी की पात्रता, दस्तावेज की जांच की जाए।
साथ ही नसबंदी किए गए कुत्तों की वास्तविक संख्या, उनकी पहचान, भुगतान और कार्य की गुणवत्ता का मौके पर भौतिक सत्यापन भी होना चाहिए। इसके अलावा यदि किसी अपात्र कंपनी को नियमों के विरुद्ध टेंडर दिया गया है तो संबंधित अधिकारियों और जिम्मेदार कंपनी के खिलाफ एफआईआर एवं कानूनी कार्रवाई की जाए। इस मामले को लेकर अपर कलेक्टर काशीराम बडोले ने कहा कि, जो शिकायत मिली है उसकी जांच कराएंगे। अगर कोई दोषी होता है तो उस पर कार्रवाई की जाएगी।

देश के बड़े और नामचीन इंजीनियरिंग कॉलेजों में दाखिले का सपना देखने वाले छात्रों और उनके परिजनों को अपना शिकार बनाने वाले एक बेहद शातिर और हाईटेक गिरोह का मुंबई पुलिस ने भंडाफोड़ किया है. फर्जी एडमिशन दिलाने के नाम पर करोड़ों की ठगी करने वाले अंतरराज्यीय रैकेट का भंडाफोड़ करते हुए पवई पुलिस ने पुणे से 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया. कार्रवाई में 22 मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य सामान जब्त किये है जिनकी कीमत कुल कीमत एक करोड़ रुपये से अधिक बताई जा रही है.
मामले का खुलासा एक महिला की शिकायत के बाद हुआ. पुलिस के अनुसार आरोपी इंस्टाग्राम पर विज्ञापन के जरिए छात्रों और अभिभावकों से संपर्क करते थे.
मुंबई की पवई पुलिस ने इंस्टाग्राम के जरिए देश के नामी इंजीनियरिंग कॉलेजों में फर्जी एडमिशन दिलाने वाले एक बड़े अंतर-राज्यीय रैकेट का भंडाफोड़ किया है. आरोपियों का यह गिरोह इंस्टाग्राम और फेसबुक जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर देश भर के प्रसिद्ध संस्थानों में मैनेजमेंट या NRI कोटे से एडमिशन दिलाने के लुभावने विज्ञापन पोस्ट करता था.
तकनीकी जांच के आधार पर पुलिस को पता चला कि यह पूरा नेक्सस पुणे से संचालित हो रहा था. गिरोह ने पुणे में दो बकायदा कॉल सेंटर खोल रखे थे. फर्जी सिम और व्हाट्सऐप नंबरों के जरिए बातचीत कर नामी कॉलेजों में एडमिशन दिलाने का भरोसा दिया जाता था. एडमिशन पक्का कराने के नाम पर आरोपियों द्वारा टोकन मनी, एडवांस या पहले साल की फीस के तौर पर लाखों रुपये वसूले जाते थे.
मामले का खुलासा एक महिला की शिकायत के बाद हुआ जब उसने पुलिस को बताया कि इंस्टाग्राम पर techorbit1111 नाम के अकाउंट के जरिए उससे संपर्क किया गया था. आरोपियों ने IIIT हैदराबाद में एडमिशन दिलाने के नाम पर करीब 16 लाख 50 हजार रुपये ठग लिए.
फर्जी एडमिशन दिलाने की सूचना पक्की होने पर पवई पुलिस ने पुणे के दोनों कॉल सेंटरों पर एक साथ छापेमारी की और वहां से 10 आरोपियों को धर दबोचा. उनमें से 5 आरोपी बीटेक (B.Tech) ग्रेजुएट इंजीनियर हैं. छापेमारी के दौरान पुलिस ने 22 मोबाइल फोन, 23 सिम कार्ड, एक HP लैपटॉप, दो हार्ड डिस्क, सात डेबिट कार्ड, एक जियोबुक और दो कारें बरामद कीं.
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सुप्रीम कोर्ट, चुनाव में गलत हथकंडे अपनाने वाले उम्मीदवारों पर सख्त, सत्ता बदलते ही केस वापस लेने के खेल पर रोक
नई दिल्ली. भारतीय चुनावी राजनीति में काले धन और अनुचित साधनों के इस्तेमाल को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक बेहद कड़ा फैसला सुनाया है। अक्सर देखा जाता है कि चुनाव के दौरान गड़बड़ी या काले धन के इस्तेमाल के आरोपी नेताओं पर सरकार बदलते ही राजनीतिक रसूख के चलते दर्ज मुकदमे वापस ले लिए जाते हैं। इस मनमानी पर कड़ा प्रहार करते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट कर दिया है कि अब चुनाव लडऩे वाले प्रत्याशियों के खिलाफ दर्ज मुकदमों को वापस लेने के लिए संबंधित उच्च न्यायालय (हाई कोर्ट) की पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य होगा। सांसदों-विधायकों की तरह उम्मीदवारों पर भी लागू होगा नियम जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एन.के. सिंह की पीठ ने मौजूदा सांसदों और विधायकों से जुड़े पुराने नियम का हवाला देते हुए यह बड़ा आदेश दिया। पीठ ने कहा कि जिस तरह मौजूदा सांसदों और विधायकों के मुकदमे केवल हाई कोर्ट की मंजूरी के बाद ही वापस हो सकते हैं, ठीक वही नियम अब चुनाव लडऩे वाले सामान्य उम्मीदवारों पर भी समान रूप से लागू होगा। अदालत ने टिप्पणी की कि यह कदम चुनाव प्रक्रिया में निष्पक्षता लाने की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर साबित होगा। इससे संभावित उम्मीदवारों को कड़ा संदेश जाएगा कि गलत काम करके कोई भी नेता सिर्फ सत्ता परिवर्तन के दम पर बच नहीं सकता। राजनीतिक लाभ के लिए केस वापस लेना न्याय प्रणाली के खिलाफ अदालत ने राजनीति में सत्ता परिवर्तन के बाद मुकदमों को वापस लेने की परिपाटी पर गंभीर चिंता जताई। पीठ ने कहा कि यह कोई छिपी हुई बात नहीं है कि राजनीतिक बदलाव के बाद अक्सर ऐसे अनुचित फैसले लिए जाते हैं, जो निष्पक्ष आपराधिक न्याय प्रणाली की मूल भावना के पूरी तरह खिलाफ हैं। अदालत ने जोर देकर कहा कि एक जीवंत संवैधानिक लोकतंत्र अपने प्रतिनिधियों से नैतिक ईमानदारी और निष्पक्षता की पूरी उम्मीद रखता है। लोकतंत्र, कानून का शासन और पारदर्शी चुनावी प्रक्रिया एक-दूसरे से पूरी तरह जुड़े हुए हैं और इनमें से किसी से भी समझौता व्यवस्था को कमजोर करता है। 10 लाख से ज्यादा कैश मिलने पर शिकंजा, 1 साल में जांच पूरी करने का निर्देश काले धन के बेलगाम इस्तेमाल पर लगाम कसने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने सख्त दिशानिर्देश जारी किए हैं। कोर्ट ने आदेश दिया है कि चुनाव के दौरान चेकिंग में यदि स्टैटिक सर्विलांस टीम को 10 लाख रुपये से अधिक की नकदी मिलती है, तो तुरंत इनकम टैक्स विभाग को सक्रिय कर कार्रवाई की जाए। इसके साथ ही, अदालत ने जांच अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि केस दर्ज होने की तारीख से एक साल के भीतर जांच हर हाल में पूरी की जाए, ताकि चुनावी भ्रष्टाचार में लिप्त नेताओं को समय पर सजा दिलाई जा सके। 
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विरोध की आवाज दबाने सोशल मीडिया पर सेंसरशिप, 5 महीने में ब्लॉक किए 1.95 लाख अकाउंट… खरगे का सरकार पर हमला
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने मंगलवार (18 अगस्त) को मोदी सरकार पर एक बार फिर तीखा हमला किया है. खरगे ने मोदी सरकार पर विरोध की आवाज दबाने का आरोप लगाया. उन्होंने दावा किया कि मार्च और जुलाई 2026 के बीच सरकार ने सोशल मीडिया कंपनियों को 1.95 लाख ब्लॉकिंग आदेश जारी किए. उन्होंने इसे सरकार के खिलाफ बोलने, सवाल करने और असहमति जताने के लोकतांत्रिक अधिकार पर सुनियोजित हमला बताया. उन्होंने कहा कि सरकार की सोशल मीडिया रोक लगाने की कार्रवाई उतनी ही निंदनीय है, जितना युवाओं पर किया गया लाठीचार्ज और पैलेट गन का इस्तेमाल करना है.
खरगे ने सोशल मीडिया पर एक लंबा पोस्ट शेयर किया है, जिसमें उन्होंने कहा ‘मोदी सरकार ने बोलने, सवाल करने और असहमति व्यक्त करने के प्रत्येक भारतीय के लोकतांत्रिक अधिकार पर अपना सबसे दुस्साहसी और सुनियोजित हमला किया है. सोशल मीडिया पर उसकी सेंसरशिप उतनी ही निंदनीय है जितनी कि हमारे युवाओं पर लाठीचार्ज और पेलेट गन का इस्तेमाल!’.
खरगे के मुताबिक, केंद्र सरकार ने पांच महीनों में करीब 1.95 लाख ब्लॉकिंग आदेश जारी किए गए. उन्होंने कहा ‘आज हम जो देख रहे हैं वह तो बस हिमबर्ग का एक छोटा सा हिस्सा है. महज 5 महीनों में 1.95 लाख ब्लॉकिंग ऑर्डर. हर 68 सेकंड में एक. ये अपराधियों के खिलाफ नहीं, बल्कि छात्रों, उन युवा भारतीयों के खिलाफ हैं जो अपने भविष्य और धांधली वाली परीक्षाओं के लिए जवाबदेही की मांग करते हुए सड़कों पर उतरे थे. दिन दहाड़े हड्डियां तोड़ी गईं. और ठीक उसी समय, एक-एक पोस्ट और एक-एक वीडियो के जरिए, उनका समर्थन करने वाली हर आवाज को सरकार के सीधे आदेश से इंटरनेट से व्यवस्थित रूप से मिटाया जा रहा था’.
इसके साथ ही कांग्रेस अध्यक्ष ने सत्तारूढ़ पार्टी के समर्थकों पर ऑनलाइन उत्पीड़न का आरोप लगाया. उन्होंने दावा किया कि महिलाओं की निजी जानकारी सार्वजनिक की जा रही है और उन्हें बलात्कार की धमकी दी जा रही है. उन्होंने कहा ‘आजकल इस सरकार की आलोचना करने वाला कोई भी रचनाकार, पत्रकार या आम नागरिक, तुरंत हटाए जाने, धमकी भरे एफआईआर नोटिस और सुनियोजित धमकियों का सामना करता है. वहीं दूसरी ओर, सत्ताधारी पार्टी के अंधभक्त बेखौफ होकर महिलाओं की निजी जानकारी लीक करते हैं, बलात्कार की धमकियां देते हैं और संगठित उत्पीड़न अभियान चलाते हैं. उन पर कोई कानूनी कार्रवाई नहीं होती, क्योंकि प्रधानमंत्री खुद ऐसे कई ट्रोल्स को फॉलो करते हैं!. मोदी सरकार ने पोस्ट हटाने का समय घटाकर 3 घंटे कर दिया है और सेंसरशिप को इतना स्वचालित कर दिया है कि आवाज दबाने से पहले कोई इंसान आदेश पढ़ता तक नहीं है’.
जंतर-मंतर पर कॉकरेच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष रखा है. पुलिस ने अपने हलफनामे में कहा कि प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के लिए उसके जवानों ने अधिकतम संयम बरता और केवल उतने ही बल का इस्तेमाल किया, जितना जरूरी था. हलफनामे में कहा गया है कि प्रदर्शनकारियों के हिंसक होने और संसद की ओर मार्च करने के प्रयास में कई बैरिकेड तोड़ देने के बाद स्थिति बिगड़ गई.
यह हलफनामा उन याचिकाओं के जवाब में दाखिल किया गया है, जिनमें प्रदर्शन के दौरान पुलिस पर जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग करने का आरोप लगाया गया है. दिल्ली के पुलिस उपायुक्त सचिन शर्मा ने हलफनामे में नुकीली कीलों वाली लाठियों के इस्तेमाल के आरोपों का भी जवाब दिया. उन्होंने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि इसके समर्थन में पेश किया गया वीडियो केवल एक अकेली रिकॉर्डिंग है.

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फोटो गैलरी

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गरिमा के जन्म के 15 मिनिट बाद का फोटो
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गरिमा के 1 वर्ष बाद का फोटो
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गरिमा के 2 वर्ष बाद का फोटो
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बीमार होने के बाद भोपाल अस्पताल मे भर्ती गरिमा
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हाई कोर्ट के आदेश के बाद गरिमा के शव को जमीन से निकालते हुऐ
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निकालने के बाद गरिमा के शव को पैक कर जॉच के लिऐ भेजा गया
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दोषी डॉक्टर के खिलाफ मामला कायम कराने के लिऐ पुलिस अधिक्षक से मिले पत्रकार
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