


इछावर(सीहोर)। मृत्यु जीवन का अंत नहीं, बल्कि एक मुकम्मल सफर का विश्राम है। इस दार्शनिक सत्य को सीहोर जिले के इछावर क्षेत्र के ग्राम दीवाड़िया ने सच कर दिखाया है। यहां के वयोवृद्ध नागरिक गोविंद सिंह वर्मा जब 100 वर्ष से अधिक का एक समृद्ध, खुशहाल और संतोषजनक जीवन जीकर पंचतत्व में विलीन हुए, तो उनके परिजनों और ग्रामीणों ने इसे शोक की विदा नहीं, बल्कि एक पुण्यात्मा का ‘महाउत्सव’ बना दिया।
आमतौर पर जहां शवयात्रा सन्नाटे और सिसकियों के बीच से गुजरती हैं, वहीं दीवाड़िया गांव में दादाजी की अंतिम यात्रा का नजारा बिल्कुल जुदा था। यहां का वातावरण वैराग्य और आनंद के अनूठे संगम से सराबोर नजर आया। बेटों ने आंखों में आंसू रोकने की रूढ़िवादी कोशिश नहीं की, बल्कि पिता की अंतिम इच्छा का मान रखते हुए ढोल-ताशों और डीजे की सुमधुर लहरियों के साथ उन्हें विदा किया।
कहते हैं कि एक भरा-पूरा जीवन जी लेने के बाद मृत्यु भी एक वरदान बन जाती है। गोविंद सिंह वर्मा ने अपने जीवन के अंतिम पड़ाव पर अपने बेटों से एक मार्मिक इच्छा व्यक्त की थी। “जब मैं इस संसार से विदा लूं, तो माहौल में मातम या रुदन नहीं होना चाहिए, बल्कि खुशियों का संगीत गूंजना चाहिए।” पिता के इस अनूठे और जीवंत दर्शन को उनके दोनों बेटों, बाबूलाल और बद्री प्रसाद वर्मा ने एक आज्ञाकारी पुत्र की तरह शिरोधार्य किया। उन्होंने समाज की पुरानी रूढ़ियों को दरकिनार कर अपने पिता के इस ‘शताब्दी सफर’ का जश्न मनाया।
इस अंतिम यात्रा में शामिल होने वाले लोग गम की चादर ओढ़ने के बजाय, एक पूर्ण जीवन की पूर्णाहुति पर झूमते और नमन करते नज़र आए। यह दृश्य इस बात का जीवंत गवाह था कि यदि जीवन को पूरी शिद्दत और नेकी से जिया जाए, तो मौत भी अपना खौफ खो देती है और एक उत्सव में बदल जाती है।
सौ वर्षों की यह जीवन यात्रा केवल एक उम्र का आंकड़ा नहीं, बल्कि त्याग, प्रेम और संस्कारों की एक समृद्ध विरासत है। दादाजी का जाना परिवार और गांव के लिए एक शून्य जरूर छोड़ गया है, लेकिन उनकी विदाई का यह अनोखा अंदाज याद रखा जाएगा। दीवाड़िया गांव से उठी यह अंतिम यात्रा समाज को यह बड़ा संदेश दे गई कि विदाई केवल रुदन की मोहताज नहीं होती। शताब्दी पुरुष गोविंद सिंह वर्मा के इस महाप्रस्थान को आज पूरा जिला नमन कर रहा है।
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टि्वशा केस: जिस जिले की प्रधान जज रही उसी कोर्ट के कटघरे में डेढ़ घंटे खड़ी रही गिरिबाला
भोपाल भोपाल जिला अदालत की पूर्व प्रधान जज रही गिरिबाला को शुक्रवार को उसी रास्ते से सीबीआई की कस्टडी में ले जाया गया, जहां से सभी कैदियों को ले जाया जाता है।
कभी भोपाल की जिला अदालत की सबसे ऊंची कुर्सी पर बैठकर कानून की किताबों के आधार पर फैसले सुनाने वाली गिरिबाला सिंह शुक्रवार को उसी कोर्ट के कटघरे में एक आरोपी बनकर अपने फैसले का इंतजार करती नजर आई। वक्त के इस खेल को देख अदालत परिसर में मौजूद हर शख्स को कुछ देर के लिए खामोश-सा हो गया था। बेटे समर्थ सिंह के साथ करीब डेढ़ घंटे तक एक कटघरे में खड़ी गिरिबाला को CBI ने ट्विशा शर्मा मौत मामले में 5 दिनों के लिए रिमांड पर ले लिया। अब दोनों से आमने-सामने बैठकर पूछताछ की जाएगी।
अपनी बहू टि्वशा शर्मा की आत्महत्या मामले में सास गिरिबाला और टि्वशा का पति समर्थ सिंह भोपाल की जिला अदालत की सीबीआई कोर्ट में शुक्रवार को पेश हुए। सीबीआई ने दोनों को ही रिमांड पर ले लिया। अब दोनों से पूछताछ में अहम सबूत मिल सकेंगे।
सेवानिवृत्त जिला जज गिरिबाला सिंह भोपाल जिला कोर्ट की प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश रह चुकी हैं। 15/07/2021 से 28/02/2023 तक उनका कार्यकाल था। इस दौरान उन्होंने अनेक लोगों के भाग्य का फैसला किया, लेकिन आज जब सीबीआई कोर्ट में गिरिबाला सिंह की पांच दिन की रिमांड मांगी जा रही थी, तो आज सेवानिवृत्त जिला जज गिरिबाला डेढ़ घंटे तक अपने बेटे के साथ 12.40 से 2.10 बजे तक एक ही कटघरे में खड़ी थीं। कभी डायस पर बैठकर लोगों का फैसला करती थी, अब एक आरोपी के तौर पर सीबीआई की विशेष अदालत के कटघरे में मौजूद थी। खास बात यह है कि सीबीआई को रिमांड मिलने के बाद उन्हें जिस गेट से बाहर ले जाया गया यह वही गेट है जिससे सभी कैदियों को ले जाया जाता है।
जब कोर्ट रूम में सुनवाई हो रही थी और सीबीआई पांच दिन की रिमांड गिरिबाला के लिए और पांच दिन की रिमांड समर्थ सिंह के लिए बढ़ाने का आवेदन दे रही थी, तो आरोपी पक्ष के वकील ने इस पर जरा भी आपत्ति नहीं की। सीबीआई की दलीलों के बाद दोनों को 2 जून को दोपहर 2 बजे तक के लिए सीबीआई को सौंप दिया गया।
टि्वशा के परिवार के जुड़े हाईकोर्ट वकील अनुराग श्रीवास्तव ने मीडिया को बताया कि उन्होंने रिमांड के मामले में किसी बात का विरोध नहीं व्यक्त किया, क्योंकि उनकी अग्रिम जमानत ठीक इसी धार पर खारिज कर दी गई थी कि मामले की प्रकृति ऐसी थी कि जमानत नहीं दी जा सकती थी। हाईकोर्ट के सामने विस्तार से दलीलें पेश की गईं, जिसमें यह जोर देकर कहा गया था कि जांच के लिए गिरिबाला की हिरासत जरूरी है। इन सभी बातों परविचार करने के बाद अग्रिम जमानत का आदेश रद्द कर दिया गया। आरोपी के पास सीबीआई जांच की जरूरत को चुनौती देने का कोई अधिकार नहीं था। हमें सीबीआई पर पूरा भरोसा है। इधर, इसी मामले में टि्वशा शर्मा के परिवार के वकील अंकुर पांडे ने कहा कि पांच दिन की रिमांड मंजूर कर दी गई है। आरोपी के वकील ने रिमांड पर कोई आपत्ति नहीं जताई।
गिरिबाला सिंह भोपाल जिले की प्रधान जिला जज रह चुकी हैं। इसे पहले वे कई जिलों में भी जज रही। गिरिबाला सिंह जिला उपभोक्ता आयोग भोपाल-2 की अध्यक्ष हैं। खाद्य नागरिक आपूर्ति विभाग ने उन्हें पद से हटाने के लिए लिखा है। टि्वशा शर्मा के परिजनों ने भी राज्यपाल मंगुभाई पटेल को पत्र लिखकर मांग की थी कि गिरिबाला सिंह का न्यायिक पद है, इसलिए निष्पक्ष जांच के लिए उन्हें तुरंत पद से हटाया जाना चाहिए।
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शादी में घूंघट डालकर पहुंचे दो युवक, फिर हुआ ऐसा कांड कि ग्रामीणों ने दी ‘तालिबानी सजा’
आलीराजपुर। मध्य प्रदेश के आलीराजपुर जिले में एक शादी समारोह में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब लड़की के कपड़े पहनकर पहुंचे दो युवकों पर चोरी का आरोप लगा। बताया जा रहा है कि दोनों युवक भीड़भाड़ और शादी की रस्मों का फायदा उठाकर घर में घुसे थे। इसी दौरान एक महिला का चांदी का मंगलसूत्र गायब हो गया। वहीं ग्रामीणों ने दोनों को पकड़कर तालिबानी सजा दी। यह पूरा मामला जोबट तहसील के ग्राम उबलड़ का है।
जानकारी के मुताबिक, महिला के शोर मचाते ही शादी समारोह में अफरा-तफरी मच गई। गांव के लोगों ने घेराबंदी कर दोनों युवकों को पकड़ लिया। इसके बाद गुस्साए ग्रामीणों ने दोनों आरोपियों को पशुओं को बांधने वाले लोहे के स्टैंड से बांध दिया और कथित तौर पर ‘तालिबानी सजा’ दी। मौके पर भारी भीड़ जमा हो गई और देर तक हंगामे की स्थिति बनी रही।
फरियादी महिला लीलू की शिकायत पर जोबट पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 309(5) एवं 3(5) के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों युवकों को ग्रामीणों के कब्जे से छुड़ाकर अपने साथ ले गई। घटना का वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसके बाद मामला पूरे इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है। शादी की खुशियों के बीच हुई इस अनोखी वारदात ने हर किसी को हैरान कर दिया।
बुरहानपुर। मध्यप्रदेश के बुरहानपुर जिले से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जिसने कानून, पुलिस तफ्तीश और पूरे सिस्टम को कटघरे में खड़ा कर दिया है। जिस बेटी की ‘हत्या’ के आरोप में एक बेगुनाह पिता और भाई पिछले 22 दिनों से जेल की सलाखों के पीछे जिंदगी काट रहे हैं, वह बेटी अचानक जिंदा लौट आई है। युवती ने पुलिस के सामने पहुंचकर जब कहा, “साहब… मैं जिंदा हूं, मेरी हत्या नहीं हुई है…” तो अधिकारियों के पैरों तले जमीन खिसक गई।
पूरा मामला बुरहानपुर जिले के खकनार थाना क्षेत्र के ग्राम खड़की का है। यहां रहने वाली आदिवासी युवती शिवानी बीती 22 अप्रैल को अचानक लापता हो गई थी। परिजनों ने अपने स्तर पर उसकी काफी खोजबीन की, लेकिन जब कोई सुराग नहीं मिला तो 1 मई को खकनार थाने में उसकी गुमशुदगी दर्ज कराई गई।
गुमशुदगी दर्ज होने के करीब 10 दिन बाद पड़ोसी राज्य महाराष्ट्र के जलगांव जामोद क्षेत्र में एक अज्ञात युवती की जली हुई और सिर कटी लाश बरामद हुई। शव की हालत इतनी बदतर थी कि उसकी शिनाख्त करना नामुमकिन था। जांच के दौरान महाराष्ट्र पुलिस बुरहानपुर के खकनार थाने पहुंची और वहां से लापता युवतियों का रिकॉर्ड खंगाला। बिना किसी पुख्ता फॉरेंसिक या डीएनए (DNA) जांच के, महाराष्ट्र पुलिस ने दावा कर दिया कि वह जली हुई लाश शिवानी की ही है। इसके बाद पुलिस ने शिवानी के पिता बापूराव और भाई अजय को हिरासत में ले लिया। पूछताछ के बाद दोनों पर हत्या का मुकदमा दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया गया और महाराष्ट्र की बुलढाणा जेल भेज दिया गया।
जेल में बंद पिता और भाई पिछले 22 दिनों से बेगुनाही के आंसू रो रहे थे, तभी इस कहानी में एक फिल्मी मोड़ आया। दरअसल, शिवानी मरी नहीं थी, बल्कि वह गांव के ही अरुण नामक युवक के साथ भाग गई थी और दोनों ने प्रेम विवाह कर लिया था। लोक-लाज और डर के मारे दोनों गांव नहीं लौट रहे थे। इसी बीच शिवानी को सोशल मीडिया के जरिए पता चला कि पुलिस ने उसे मृत मान लिया है और उसकी ‘हत्या’ के आरोप में उसके पिता और भाई को जेल में भेज दिया है। यह खबर मिलते ही शिवानी के होश उड़ गए और वह तुरंत खकनार पुलिस के सामने हाजिर हो गई।
शिवानी के जिंदा सामने आने के बाद खकनार पुलिस ने उसे महिला थाने भेजा और तुरंत इसकी सूचना महाराष्ट्र की जलगांव जामोद पुलिस को दी। इस लापरवाही ने अब कई गंभीर सवालों को जन्म दे दिया है। बिना किसी पुख्ता वैज्ञानिक पहचान या डीएनए टेस्ट के पुलिस ने लाश को शिवानी कैसे मान लिया? एक बेगुनाह बाप और बेटे को बिना ठोस सबूत के 22 दिनों तक जेल में क्यों सड़ना पड़ा? आखिर जांच में इतनी बड़ी और अमानवीय चूक की जिम्मेदारी किसकी है? अगर शिवानी जिंदा है, तो महाराष्ट्र में मिली वह जली हुई और सिर कटी लाश आखिर किसकी थी?
फिलहाल, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र दोनों राज्यों की पुलिस अपनी साख बचाने के लिए मामले की दोबारा जांच में जुट गई है। लेकिन अब जनता की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि इस लचर सिस्टम के कारण बिना कसूर जेल की हवा खा रहे निर्दोष पिता-पुत्र को कब तक रिहा किया जाता है और लापरवाह पुलिसकर्मियों पर क्या कार्रवाई होती है।
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लॉरेंस गैंग का ‘डिजिटल दिमाग’ गिरफ्तार: वर्चुअल प्लेटफॉर्म से चलाता था गैंग का नेटवर्क
इंदौर क्राइम ब्रांच की एसआईटी टीम ने लॉरेंस बिश्नोई गैंग के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान में बड़ी सफलता हासिल करते हुए 25 हजार रुपए के इनामी आरोपी राहुल सिंह राठौर उर्फ बाबा को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी घटना के बाद से लगातार फरार चल रहा था और गिरफ्तारी से बचने के लिए उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड सहित कई राज्यों में अपने ठिकाने बदल रहा था। उस पर राज्य एसटीएफ द्वारा 15 हजार और क्राइम ब्रांच इंदौर द्वारा 10 हजार रुपए का इनाम घोषित किया गया था।
पुलिस के अनुसार राहुल राठौर गैंग का सक्रिय सदस्य होने के साथ-साथ करणी सेना से भी जुड़ा रहा है। वह लॉरेंस बिश्नोई गैंग के लिए तकनीकी और रणनीतिक सहयोग उपलब्ध कराता था। इंदौर में व्यापारियों और व्यवसायियों को गैंग के नाम पर धमकी देने के मामलों में उसकी भूमिका महत्वपूर्ण पाई गई है। क्राइम ब्रांच की एसआईटी ने पूर्व में गिरफ्तार आरोपी राजपाल चंद्रावत से पूछताछ के दौरान मिली जानकारी के आधार पर राहुल तक पहुंच बनाई। इसके बाद उसे गिरफ्तार कर पूछताछ की गई, जिसमें कई अहम तथ्य सामने आए हैं।
जांच में पता चला है कि राहुल सिंह राठौर उर्फ बाबा व्यापारियों और कारोबारियों के घर, कार्यालय और अन्य स्थानों की रेकी करता था। इसके अलावा वह गैंग के सदस्यों के बीच पैसों के लेन-देन, समन्वय और अन्य गतिविधियों को संचालित करने में सक्रिय भूमिका निभाता था। आरोपी गैंग के सदस्यों को तकनीकी सहायता, संसाधन और अन्य जरूरी सहयोग उपलब्ध कराकर आपराधिक गतिविधियों को आगे बढ़ाने में मदद करता था। पुलिस के मुताबिक राहुल विभिन्न तकनीकी माध्यमों और वर्चुअल प्लेटफॉर्म का उपयोग कर गैंग की गतिविधियों को संचालित करने में सहयोग कर रहा था। उसके मोबाइल, डिजिटल उपकरणों और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की विस्तृत जांच की जा रही है, जिससे गैंग के नेटवर्क और गतिविधियों को लेकर और बड़े खुलासे होने की संभावना है।
क्राइम ब्रांच को आरोपी का आपराधिक रिकॉर्ड भी मिला है, जिसकी पड़ताल की जा रही है। पुलिस का मानना है कि राहुल की गिरफ्तारी से प्रदेश में सक्रिय गैंग नेटवर्क के कई अन्य सदस्यों तक पहुंचने में मदद मिलेगी। गौरतलब है कि लॉरेंस बिश्नोई गैंग के नाम पर व्यापारियों को धमकाने के मामलों में दर्ज अपराध क्रमांक 48/2026 और 50/2026 में थाना अपराध शाखा इंदौर में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 308(5) और 351(4) के तहत प्रकरण दर्ज हैं। मामले में पूछताछ जारी है और पुलिस को कई महत्वपूर्ण खुलासों की उम्मीद है।
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अवैध कफ सिरप फैक्ट्री पर STF का छापा, डेढ़ करोड़ का माल जब्त; 10 लोग हिरासत में
भोपाल के गांधी नगर क्षेत्र में स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने अवैध नशीले कफ सिरप के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए एक कथित फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया है। छापेमारी के दौरान 700 से अधिक पेटियां, बड़ी मात्रा में कफ सिरप और निर्माण में इस्तेमाल होने वाली मशीनें जब्त की गई हैं। जब्त सामग्री और उपकरणों की कुल कीमत करीब डेढ़ करोड़ रुपए आंकी जा रही है।
एसटीएफ की यह कार्रवाई गुरुवार रात करीब 12 बजे शुरू हुई और शुक्रवार सुबह 3 बजे तक जारी रही। टीम ने डोबरा पटेल सिटी कॉलोनी स्थित एक मकान पर छापा मारकर पूरे नेटवर्क का खुलासा किया। कार्रवाई के दौरान मौके से 10 लोगों को हिरासत में लिया गया है, जिनसे पूछताछ की जा रही है।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि मकान के अंदर ‘ऑफ कफ’ नाम से अवैध कफ सिरप तैयार किया जा रहा था। मकान के अलग-अलग कमरों में बड़ी संख्या में कफ सिरप की बोतलें, पैकिंग सामग्री और तैयार माल के कार्टन रखे हुए मिले। एसटीएफ ने मौके से बरामद कफ सिरप के नमूने जांच के लिए प्रयोगशाला भेज दिए हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इनमें कौन-कौन से तत्व इस्तेमाल किए गए थे।
एसटीएफ अधिकारियों के अनुसार गांधी नगर इलाके से अवैध रूप से नशीले कफ सिरप की सप्लाई किए जाने की सूचना लंबे समय से मिल रही थी। सूचना की पुष्टि के बाद विशेष टीम गठित कर कार्रवाई को अंजाम दिया गया। अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई पूरी तरह गोपनीय रखी गई थी और स्थानीय पुलिस को भी पहले से इसकी जानकारी नहीं दी गई थी।
जिस मकान में यह अवैध गतिविधि संचालित की जा रही थी, वह एक मालवीय नामक व्यक्ति का बताया जा रहा है। हालांकि खबर लिखे जाने तक एसटीएफ का मकान मालिक से संपर्क नहीं हो पाया था। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि मकान मालिक को इस गतिविधि की जानकारी थी या नहीं।
एसटीएफ अब इस बात की जांच कर रही है कि अवैध कफ सिरप का नेटवर्क किन लोगों से जुड़ा हुआ है और इसकी सप्लाई भोपाल समेत किन-किन जिलों या राज्यों में की जा रही थी। हिरासत में लिए गए आरोपियों से पूछताछ के आधार पर आगे और कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।
अधिकारियों का मानना है कि यह हाल के समय में भोपाल में नशीले कफ सिरप के खिलाफ की गई बड़ी कार्रवाइयों में से एक है। जांच पूरी होने के बाद मामले में कई और खुलासे हो सकते हैं।
अब 100, 101, 102, 108 और 1091 जैसे अलग-अलग इमरजेंसी नंबरों के झंझट से लोगों को राहत मिलने वाली है। सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए कहा है कि पूरे देश में आपातकालीन सेवाओं के लिए सिर्फ एक हेल्पलाइन नंबर 112 को पूरी तरह लागू किया जाए। ‘सेव लाइफ फाउंडेशन’ की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम Court ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को निर्देश दिया कि वे अगले तीन महीने के भीतर 112 नंबर को पूरी तरह ऑपरेशनल करें। कोर्ट ने कहा कि ट्रॉमा के समय तुरंत इलाज मिलना नागरिकों का संवैधानिक अधिकार है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सड़क हादसे या किसी गंभीर आपात स्थिति में घायल व्यक्ति सदमे और घबराहट में होता है। ऐसे समय में मदद मिलने में हर मिनट की देरी उसकी जान के लिए खतरा बन सकती है। अदालत ने साफ कहा— “तेजी ही जीवनरक्षक दवा है।” कोर्ट ने यह भी माना कि कई लोग घायल की मदद करना चाहते हैं, लेकिन पुलिस पूछताछ, कोर्ट-कचहरी और कानूनी परेशानियों के डर से पीछे हट जाते हैं। इसलिए राज्यों को प्रभावी ‘गुड समैरिटन’ शिकायत निवारण व्यवस्था बनाने का निर्देश दिया गया है, ताकि मदद करने वालों को परेशान न किया जाए।
सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि सरकारी और निजी सभी एंबुलेंस को AIS-125 मानकों के अनुसार GPS और Vehicle Location Tracking Device (VLTD) से लैस किया जाए। इन सभी को 112 हेल्पलाइन से रियल-टाइम में जोड़ा जाएगा, ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत लोकेशन ट्रैक कर मदद पहुंचाई जा सके। अदालत ने कहा कि ट्रॉमा देखभाल और समय पर इलाज, संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत ‘जीवन के अधिकार’ का हिस्सा है। केंद्र सरकार को ट्रॉमा मामलों के लिए मेडिकल रेस्क्यू प्रोटोकॉल जारी करने और राज्यों को उसे लागू करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
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सुप्रीम कोर्ट का देश की सभी हाई कोर्ट को निर्देश, अधिकतम 3 महीने के भीतर फैसला सुनाएं
नई दिल्ली. अदालती फैसलों में होने वाली देरी को लेकर सुप्रीम ने शुक्रवार 29 मई को सख्त रुख अपनाया है. सुप्रीम कोर्ट ने देश के सभी उच्च न्यायालयों को निर्देश दिया है कि आदेश सुरक्षित रखने के बाद अधिकतम तीन माह के अंदर फैसला सुनाया जाए. चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जोयमाल्या बागची की पीठ ने कहा कि फैसलों में देरी से वादियों को अपूरणीय क्षति का सामना करना होता है.
सुप्रीम कोर्ट ने विशेष रूप से व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जुड़े केस में तेजी लाने को कहा है. चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच ने कहा कि जमानत की अर्जियों पर आदेश उसी दिन सुनाए जाने जरूरी हैं. अगर उन्हें सुरक्षित रखा जाता है तो उन्हें अगले ही दिन सुनाया और अपलोड किया जाना चाहिए. कई निर्देश को जारी करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जमानत या सजा निलंबित करने का आदेश सुनाए जाने के तुरंत बाद जेल अधिकारियों को सूचित किया जाना चाहिए. विचाराधीन कैदी/दोषी को बेहतर होगा कि उसी दिन, या ज्यादा से ज्यादा अगले दिन रिहा किया जाना चाहिए.
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कॉकरोच जनता पार्टी को दिल्ली हाईकोर्ट से बड़ा झटका, X अकाउंट को बहाल करने से इनकार किया
कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी (CJP) को दिल्ली हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। दिल्ली हाईकोर्ट ने कॉकरोच जनता पार्टी के सोशल मीडिया एक्स अकाउंट (X account) को तुरंत बहाल करने से इनकार कर दिया है। कॉकरोच जनता पार्टी के फाउंडर अभिजीत दीपके (abhijit dipke) की याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस पुरुषैन्द्र कुमार कौरव ने कहा कि अकाउंट को तुरंत बहाल नहीं किया जा सकता है।
मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस पुरुषैन्द्र कुमार कौरव ने कहा कि इसके दूरगामी परिणाम होने के कारण वह सरकार की बात सुनने के बाद ही कोई कदम उठाएगा। मामले की अगली सुनवाई 6 जुलाई को होगी।
बता दें कि भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की कथित टिप्पणी को लेकर शुरू की गई कॉकरोच जनता पार्टी अपने कैंपेन और अनोखे प्रतीकों और डिजिटल अभियान की पॉलिसी की वजह से चर्चा का विषय बना हुआ है। इसका एक्स हैंडल 21 मई को भारत में ‘ब्लॉक’ कर दिया गया था। इसके बाद ‘कॉकरोच इज बैक’ नाम से नए हैंडल बनाया गया था, जिसके मौजूदा समय में 2.27 लाख से अधिक फॉलोअर्स है। 16 मई को शुरू हुई सीजेपी का दावा है कि उसका मकसद युवाओं की आवाज को मजबूत करने और सरकार को जवाबदेह ठहराने के लिए युवाओं के लिए एक स्वतंत्र आंदोलन खड़ा करना है।
‘कॉकरोच जनता पार्टी’ ट्रेंड उस विवाद के बाद शुरू हुआ जिसमें भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की कथित टिप्पणी को लेकर चर्चा हुई थी। बताया गया कि वरिष्ठ वकील का दर्जा देने से जुड़ी एक याचिका की सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने कथित तौर पर ‘परजीवी’ और ‘कॉकरोच’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया था। यह पूरा विचार इसी विवाद से प्रेरित था। हालांकि बाद में मुख्य न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि उनके बयान को गलत तरीके से पेश किया गया था और उनकी टिप्पणी सिर्फ फर्जी और गलत डिग्री लेकर कानूनी पेशे में आने वाले लोगों के लिए थी।
इसके बावजूद ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गई। कॉकरोच को चुनाव चिन्ह बनाकर मीम्स, व्यंग्य, ग्राफिक्स और राजनीतिक टिप्पणियों के जरिए इस अभियान को आगे बढ़ाया गया। इस प्लेटफॉर्म पर बेरोजगारी, परीक्षा पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था जैसे युवाओं से जुड़े मुद्दों को व्यंग्यात्मक घोषणापत्र और चुनावी अभियान की शैली में पेश किया जाता था। अभिजीत दिपके ने इस आंदोलन को ‘आलसी और बेरोजगार लोगों की आवाज’ बताया था।
रायसेन। मध्यप्रदेश के रायसेन जिले से बड़ी खबर सामने आई है। यहां सांचेत स्थित प्रसिद्ध कालभैरव धाम में बीती देर रात जमकर बवाल हो गया। चमत्कारी रूप से लोगों की शराब की लत छुड़ाने का दावा करने वाले धाम के प्रमुख, नाना गुरु सरकार (नाना साहेब) पर पड़ोसियों ने जानलेवा हमला कर दिया। दोनों पक्षों के बीच हुई इस भीषण और हिंसक झड़प में कुल पांच लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं।
बताया जा रहा है कि प्रसिद्ध कालभैरव धाम पर शराब की लत से पीड़ित हजारों श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है। हर दिन लगने वाले इस तांते और भीड़भाड़ से आसपास के पड़ोसी काफी समय से परेशान थे, जिसके कारण दोनों पक्षों के बीच पुरानी रंजिश और ज्यादा गहरा गई थी। बीती रात दोनों पक्षों में किसी बात को लेकर बातचीत शुरू हुई, जो देखते ही देखते विवाद में बदल गई और दोनों तरफ से लाठी-डंडे व धारदार हथियार निकल आए।
घटना की सूचना मिलते ही देवनगर थाना पुलिस तुरंत बल के साथ मौके पर पहुँची और स्थिति को नियंत्रित किया। पुलिस ने तत्काल सभी घायलों को इलाज के लिए जिला अस्पताल पहुंचाया। अस्पताल के डॉक्टर आर.के. वर्मा ने बताया कि घायलों में धाम प्रमुख नाना साहेब की स्थिति सबसे ज्यादा नाजुक बनी हुई है। उनकी रीढ़ की हड्डी (रीड) में गंभीर चोट आने के कारण प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें बेहतर इलाज के लिए तत्काल भोपाल रेफर कर दिया गया है। फिलहाल पुलिस ने दोनों पक्षों की शिकायत पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और गांव में एहतियातन पुलिस बल तैनात है।
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वॉटर पार्क में करंट से मौत मामला: संचालक व पूर्व तहसीलदार विवेक त्रिपाठी गिरफ्तार, जांच में लापरवाही उजागर
जबलपुर। बरेला स्थित बहुचर्चित ‘निसर्ग वॉटर पार्क’ में रविवार को हुए दर्दनाक हादसे के बाद प्रशासन और पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। वॉटर पार्क में करंट लगने से एक युवक की मौत के मामले में पुलिस ने रिजॉर्ट संचालक और पूर्व तहसीलदार विवेक त्रिपाठी को गिरफ्तार कर लिया है। जांच में रिजॉर्ट प्रबंधन की गंभीर लापरवाही उजागर होने के बाद पुलिस ने एफआईआर (FIR) दर्ज कर यह कदम उठाया है।
इस पूरे मामले में जांच के दौरान एक बेहद चौंकाने वाली बातें सामने आई है। मृतक के साथियों ने अपने बयानों में खुलासा किया है कि जब फिसल पट्टी (स्लाइड) के पास लगे पोल में करंट आने से चपेट में आया, तब उसे मौके पर कोई तात्कालिक मदद नहीं मिल सकी। रिजॉर्ट प्रबंधन की संवेदनहीनता के कारण युवक ने मौके पर ही दम तोड़ दिया था। साथियों के बयानों के आधार पर पुलिस ने मामले को गंभीरता से लिया है।
युवक की मौत के बाद जिला प्रशासन ने तत्काल एक्शन लेते हुए निसर्ग वॉटर पार्क को सील कर दिया था। इसके बाद राजस्व, पुलिस, खाद्य सुरक्षा और विद्युत विभाग की संयुक्त टीम ने पूरे परिसर का बारीकी से निरीक्षण किया। इस जांच में वॉटर पार्क के अंदर कई बड़ी अनियमितताएं पाई गईं।
हादसे के बाद से ही जिला प्रशासन और वॉटर पार्क की सुरक्षा जांच को लेकर लगातार गंभीर सवाल उठ रहे थे। चौतरफा दबाव के बाद प्रशासन ने पूर्व तहसीलदार विवेक त्रिपाठी से रिसॉर्ट के निर्माण, भूमि डायवर्शन और संचालन से जुड़े सभी आवश्यक दस्तावेज तलब किए हैं। इस हाई-प्रोफाइल गिरफ्तारी के बाद अब कयास लगाए जा रहे हैं कि अवैध निर्माण पाए जाने पर रिसॉर्ट पर आगे और भी बड़ी कार्रवाई हो सकती है।
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दमोह फर्जी MBBS डिग्री कांड: NHM का आईटी असिस्टेंट आदिल खान गिरफ्तार, जेल में है 3 फर्जी डॉक्टर और मास्टरमाइंड
दमोह। मध्य प्रदेश के दमोह जिले में शासकीय स्वास्थ्य केंद्रों में फर्जी एमबीबीएस (MBBS) की डिग्री के सहारे नौकरी हासिल करने वाले बड़े रैकेट का पुलिस ने भंडाफोड़ किया है। इस मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए भोपाल राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) कार्यालय से पांचवें आरोपी आईटी असिस्टेंट आदिल खान को गिरफ्तार किया है। वहीं मामले में पकड़े गए तीन कथित डॉक्टरों को रिमांड अवधि समाप्त होने के बाद जेल भेज दिया गया है।
दमोह के शासकीय आरोग्य केंद्र यानि संजीवनी हॉस्पिटल में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर प्रैक्टिस और नौकरी करने का यह मामला बेहद चौंकाने वाला है। कुछ दिनों पहले पुलिस ने फर्जी एमबीबीएस डिग्री पर नौकरी कर रहे दो फर्जी डॉक्टरों सचिन यादव और राजपाल गौर को गिरफ्तार किया था। इसके बाद इन दोनों से कड़ी पूछताछ के बाद पुलिस ने जबलपुर के संजीवनी हॉस्पिटल से तीसरे आरोपी डॉक्टर अजय मौर्य को दबोचा था।
इन तीनों से मिली निशानदेही और इनपुट के आधार पर पुलिस ने भोपाल से इस पूरे फर्जीवाड़े के मास्टरमाइंड और रेडियोलॉजिस्ट डॉक्टर हीरा सिंह कौशल को गिरफ्तार किया, जो फर्जी डिग्रियां तैयार करता था।
पुलिस जांच में पांचवें आरोपी के रूप में भोपाल एनएचएम में पदस्थ आईटी असिस्टेंट आदिल खान का नाम सामने आया है। पुलिस को अंदेशा है कि आदिल खान इस रैकेट को सरकारी सिस्टम और एनएचएम की साइट पर नियुक्तियों व आर्डर्स के संबंध में मदद पहुंचा रहा था।
जिला अस्पताल में मेडिकल परीक्षण के दौरान पांचवें आरोपी आदिल खान ने मीडिया के सामने खुद को बेकसूर बताया। आदिल का कहना है कि मेरा काम सिर्फ एनएचएम की वेबसाइट पर वैकेंसी और आर्डर अपलोड करना है। किसी आरोपी ने मेरा नाम ले लिया और पुलिस ने मुझे पकड़ लिया। मैं इन चारों में से किसी को नहीं जानता। एनएचएम में इंटरव्यू की कोई प्रक्रिया नहीं होती। मेरा इस फर्जी डिग्री मामले में कोई रोल नहीं है।
पुलिस ने इस मामले के मुख्य सरगना डॉक्टर हीरा सिंह कौशल और एनएचएम के आईटी असिस्टेंट आदिल खान को जिला अस्पताल लाकर उनका मेडिकल परीक्षण कराया। इसके बाद दोनों आरोपियों को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से पुलिस ने आगे की पूछताछ और बड़े खुलासों के लिए दोनों को 2 दिन की पुलिस रिमांड पर लिया है। पुलिस को उम्मीद है कि रिमांड के दौरान इस रैकेट से जुड़े कई और रसूखदार चेहरों के नाम सामने आ सकते हैं।
पिथौरा, महासमुंद। जिले में करोड़ों रुपये के धान घोटाले का बड़ा मामला सामने आया है। धान उपार्जन केंद्र बम्हनी में किसानों के 3742 क्विंटल धान के गबन मामले में पुलिस ने केंद्र प्रभारी गंगाधर जगत को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। आरोपी पर करीब 1 करोड़ 16 लाख रुपये के धान घोटाले का आरोप है।
जानकारी के मुताबिक, 27 मई 2026 को जिला सहकारी केंद्रीय बैंक पिरदा शाखा के प्रबंधक उस्त कुमार प्रधान ने थाना बसना में लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। आर्थिक अपराधों और सरकारी संपत्ति के गबन पर वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर जिला पुलिस लगातार जांच कर रही है। शिकायत में बताया गया है कि धान उपार्जन केंद्र बम्हनी, प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति आरंगी में 16 मई 2026 को प्रशासनिक जांच दल द्वारा किए गए भौतिक सत्यापन के दौरान 3742 क्विंटल यानी 9355 कट्टे मोटा धान कम पाया गया।
जांच में सामने आया कि समर्थन मूल्य और कृषक उन्नति योजना की राशि मिलाकर कुल 1 करोड़ 16 लाख 200 रुपये का गबन किया गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए बसना थाना में मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई। पुलिस ने मामले के मुख्य आरोपी और तत्कालीन केंद्र प्रभारी गंगाधर जगत से पूछताछ की, जिसमें उसने अपना जुर्म स्वीकार किया। जांच रिपोर्ट और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने आरोपी को विधिवत गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया।
गिरफ्तार आरोपी-गंगाधर जगत, पिता दुर्जन सिंह जगत, उम्र 37 वर्ष, निवासी – ग्राम दलालखार, थाना बसना, जिला महासमुंद
पुलिस के अनुसार मामले में अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। आगे और कार्रवाई की संभावना है।
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बद्रीनाथ की 21 दिन की तपस्या के बाद बोले बाबा बागेश्वर- एक महीना ईंधन बचाया, मोदी जी नेताओं के चार्टर प्लेन पर भी रोक लगाएं
छतरपुर। बद्रीनाथ धाम की 21 दिन की कठिन तपस्या और साधना पूरी कर बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री वापस लौटे हैं। सत्यनारायण कथा के पावन मंच से उन्होंने देश के ज्वलंत मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखी, जो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
साधना के दौरान ईंधन बचत का जिक्र करते हुए बाबा बागेश्वर ने कहा, “प्रधानमंत्री जी ने डीजल-पेट्रोल बचाने का आह्वान किया था। हमने उसका सबसे ज्यादा पालन किया। पूरे एक महीने हमने ईंधन नहीं जलाया।” इसके साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से एक विशेष निवेदन भी किया। बाबा ने कहा कि आम जनता से तो अपील की गई, लेकिन नेताओं के चार्टर विमानों पर भी रोक लगाई जाए।
विपक्ष पर तंज कसते हुए धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि सोशल मीडिया पर नई ‘कॉकरोच पार्टी’ उभर रही है। उन्होंने कहा, “ऐसी पार्टियां चर्चा में आना बेरोजगारी को दिखाता है। सरकारों को तुरंत काम करना चाहिए।” रुपए की गिरती स्थिति पर चिंता जताते हुए बाबा ने कहा कि उन्हें इस बात की चिंता है कि रुपया डॉलर के मुकाबले कमजोर हो रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि भारत इतना विकास करे कि एक दिन ₹1 = $30 के बराबर हो जाए। इसके अलावा उन्होंने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर भी जमकर चुटकी ली।
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बकरीद पर MP के कई शहरों से उठी मांग- 'गाय को राष्ट्रीय धरोहर घोषित करे सरकार', हजारों मुसलमानों ने हाथ उठाकर किया समर्थन
मालवा-निमाड़। ईद-उल-अजहा (बकरीद) का त्योहार गुरुवार को अकीदत, भाईचारे और सौहार्द के साथ मनाया गया। इंदौर, उज्जैन, खंडवा और धार सहित कई शहरों में मुस्लिम समाज ने सामूहिक नमाज अदा कर देश में अमन-चैन, खुशहाली और आपसी सद्भाव की दुआ मांगी। इस दौरान कई स्थानों पर गाय को राष्ट्रीय धरोहर या राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग भी उठी।
देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर में सदर बाजार स्थित ईदगाह पर नमाज से पहले शहर काजी डॉ. इशरत अली ने समाज को सौहार्द और गंगा-जमुनी तहजीब का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि गाय को हमसाया कौम बड़े सम्मान से देखती है और उसे राष्ट्रीय धरोहर घोषित किया जाना चाहिए, ताकि उसके वध पर पूरी तरह प्रतिबंध लग सके। उनके इस प्रस्ताव का वहां मौजूद हजारों नमाजियों ने हाथ उठाकर समर्थन किया। उन्होंने जल संरक्षण का संदेश देते हुए लोगों से बारिश का पानी जमीन में उतारने की अपील भी की।
उज्जैन में इंदिरानगर स्थित ईदगाह पर शहर काजी खालिकुर्रहमान ने मुख्य नमाज अदा कराई। नमाज के बाद देश में शांति और भाईचारे के लिए विशेष दुआ की गई। सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर ईदगाह और आसपास के क्षेत्रों में भारी पुलिस बल तैनात रहा।
खंडवा में मुख्य ईदगाह समेत 40 मस्जिदों में नमाज अदा की गई। शहर काजी सैयद निसार अली ने कहा कि हिंदू समाज की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए क्षेत्र में वर्षों से गोवंश की कुर्बानी नहीं दी जा रही है। उन्होंने गोवंश की आड़ में हिंसा करने वालों पर भी सख्त कार्रवाई की मांग की। इस दौरान पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए नमाजियों को पौधे वितरित किए गए।
धार की लाट मस्जिद में भी बड़ी संख्या में मुस्लिम समाज के लोग जुटे। शहर काजी वकार सादिक ने नमाज अदा कराई। नमाज के बाद लोगों ने गले मिलकर एक-दूसरे को ईद की मुबारकबाद दी। त्योहार को लेकर पूरे क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रही और प्रशासनिक अधिकारी लगातार निगरानी करते रहे।
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30 May 2026
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