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रीवा. मध्यप्रदेश के ग्रामीण इलाकों में बदहाल सड़कें और लचर स्वास्थ्य व्यवस्था किस तरह मासूम जिंदगियों पर भारी पड़ रही है, इसका एक बेहद बिचलित करने वाला मामला रीवा जिले से सामने आया है। मनगंवा विधानसभा क्षेत्र के ग्राम पंचायत नदना के डिहिया गांव में आकाशीय बिजली की चपेट में आई एक आदिवासी महिला को समय पर एंबुलेंस नहीं मिल सकी। अस्पताल पहुंचने के लिए तड़पते मरीज को परिजनों ने दो किलोमीटर तक खाट पर उठाकर मुख्य मार्ग तक पहुंचाने की जद्दोजहद की लेकिन इलाज मिलने से पहले ही महिला की सांसे थम गईं।
जानकारी के मुताबिक डिहिया गांव की रहने वाली रामकली रावत आकाशीय बिजली गिरने से गंभीर रूप से झुलस गई थी। घटना के तुरंत बाद परिजनों ने आपातकालीन सेवा एंबुलेंस को सूचना दी। परिजनों का आरोप है कि गांव तक पहुंचने वाली सड़क इस कदर जर्जर और कीचड़ से बदहाल थी कि एंबुलेंस अंदर गांव तक नहीं आ सकी।
जब कोई रास्ता नहीं सूझा तो बेबस परिवार और ग्रामीणों ने घायल रामकली को एक खाट पर लिटाया और अपने कंधों पर उठाकर करीब दो किलोमीटर पैदल चलते हुए मुख्य मार्ग की तरफ भागे। प्रशासनिक तंत्र की इस लेट-लतीफी के कारण काफी देर हो चुकी थी और महिला ने रास्ते में ही दम तोड़ दिया।
इस दर्दनाक मौत ने न सिर्फ स्वास्थ्य विभाग बल्कि लोक निर्माण और स्थानीय विकास के दावों की भी पोल खोलकर रख दी है। ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि गांव की इसी सड़क के निर्माण के लिए विधायक निधि से 5 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की गई थी।
बजट पास होने के बावजूद आज तक सड़क का निर्माण क्यों नहीं हुआ और सड़क बदहाल क्यों पड़ी रही? स्वीकृत राशि का उपयोग कहां किया गया, इसे लेकर अब भ्रष्टाचार के गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
इस घटना के बाद से डिहिया गांव सहित पूरे इलाके में प्रशासन के खिलाफ भारी आक्रोश है। ग्रामीणों के साथ-साथ अब विपक्ष ने भी सरकार को आड़े हाथों लिया है। स्थानीय लोगों ने मांग की है कि ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क, स्वास्थ्य और आपातकालीन सेवाओं की इस दुर्दशा की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच की जाए और विधायक निधि के पैसों में हेरफेर करने वाले जिम्मेदारों के खिलाफ कड़ी से कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जाए।

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आष्टा-शुजालपुर रोड पर ट्रक-बुलेरो की भीषण टक्कर, 5 की मौत, 4 गंभीर घायल
सीहोर। जिले में आष्टा-शुजालपुर मार्ग पर सोमवार को ट्रक और 'बोलेरो' वाहन के बीच भिड़ंत होने से पांच लोगों की मौत हो गई तथा चार अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि टक्कर इतनी भीषण थी कि 'बोलेरो' वाहन बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। उन्होंने बताया कि बोलेरो वाहन में सवार चार लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि पांच अन्य घायल हो गए। उन्होंने कहा कि घायलों को उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
पार्वती के थाना प्रभारी हरिसिंह परमार ने बताया कि पुलिस ने एंबुलेंस की मदद से घायलों को अस्पताल पहुंचाया। पुलिस ने बताया कि मृतकों की पहचान राजगढ़ जिले के भियापुरा के इंदर सिंह और राजाराम के रूप में हुई है, जबकि दो अन्य मृतकों की पहचान नहीं हो पायी है। पुलिस के मुताबिक प्रारंभिक जांच के अनुसार, बोलेरो में कुल नौ लोग सवार थे, जो एक मानसिक रूप से एक अस्वस्थ व्यक्ति का उपचार कराने जा रहे थे।
दुर्घअना के बाद स्थानीय लोगों ने तुरंत राहत कार्य शुरू कर घायलों को बाहर निकाला और एंबुलेंस की मदद से सिविल अस्पताल पहुंचाया। हादसे के बाद मौके पर चीख-पुकार और अफरा-तफरी का माहौल बन गया। सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन की टीम घटनास्थल पर पहुंची तथा दुर्घटना की जांच शुरू कर दी।
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रेलवे स्टेशन पर हैवानियत! खंभे से बांधकर बेदम पीटा; चीखता रहा बच्चा, वीडियो वायरल होने से मचा हड़कंप
अनूपपुर. मध्य प्रदेश क अनूपपुर रेलवे स्टेशन परिसर से इंसानियत को शर्मसार करने वाली एक बेहद अमानवीय और विचलित करने वाली घटना सामने आई है। कुछ युवकों ने क्रूरता की सारी हदें पार करते हुए एक नाबालिग बच्चे को रस्सी के सहारे लोहे के खंबे से बांध दिया और फिर उसकी बेरहमी से पिटाई की। इस खौफनाक और बर्बर कृत्य का वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसे देखकर हर किसी का दिल दहल उठा है।
वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि किस तरह चंद रसूखदार और बेखौफ युवक उस लाचार और सहमे हुए नाबालिग बच्चे पर अपनी हैवानियत बरसा रहे हैं। बच्चा खुद को छुड़ाने के लिए तड़पता रहा, रोता रहा और रहम की भीख मांगता रहा लेकिन उन युवकों का दिल नहीं पसीजा। वे लगातार उस मासूम पर लात-घूंसे और डंडे बरसाते रहे। सबसे ज्यादा हैरान और परेशान करने वाली बात यह है कि यह पूरी वारदात रेलवे स्टेशन जैसे सार्वजनिक और व्यस्त इलाके के मुख्य गेट के पास सरेआम होती रही लेकिन कोई भी उस मासूम को बचाने आगे नहीं आया।
इस अमानवीय घटना ने रेलवे स्टेशन की सुरक्षा व्यवस्था और कानून व्यवस्था पर एक बहुत बड़ा और गंभीर सवालिया निशान खड़ा कर दिया है। रेलवे परिसरों की सुरक्षा के लिए चौबीसों घंटे तैनात रहने वाली जीआरपी (GRP) और आरपीएफ (RPF) का इस पूरी वारदात के दौरान दूर-दूर तक कोई अता-पता नहीं था।
वीडियो वायरल होने के बाद से ही इलाके के लोगों में भारी आक्रोश है। लोग इस अमानवीय कृत्य को अंजाम देने वाले युवकों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई और रासुका जैसी धाराओं के तहत मामला दर्ज करने की मांग कर रहे हैं।
मध्यप्रदेश के अनूपपुर रेलवे स्टेशन से इंसानियत को शर्मसार करने वाला एक बेहद खौफनाक वीडियो सामने आया है। यहाँ कुछ रसूखदार गुंडों ने एक बेबस नाबालिग बच्चे को लोहे के खंभे से रस्सी के सहारे जकड़ दिया और फिर उस पर बेरहमी से लात-घूंसे और डंडे बरसाए।

 

ग्वालियर/मुरैना। चर्चित केएस ऑयल्स एक बार फिर सुर्खियों में है। इस बार मामला करीब 75 करोड़ रुपये के ट्रेड फाइनेंस घोटाले का है। आरोप है कि सरकारी कंपनी स्टेट ट्रेडिंग कॉरपोरेशन (STC) के अधिकारियों और केएस ऑयल्स के पदाधिकारियों की मिलीभगत से फर्जी कंपनियों के जरिए करोड़ों रुपये का खेल किया गया। मामले की जांच के बाद सीबीआई ने 12 आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
सीबीआई की एफआईआर के मुताबिक साल 2010 से 2014 के बीच एसटीसी ने केएस ऑयल्स लिमिटेड को सरसों तेल खरीदने के लिए 75 करोड़ रुपये का ट्रेड फाइनेंस मंजूर किया था। जांच में सामने आया कि नियमों को दरकिनार कर कंपनी की वित्तीय स्थिति और साख की उचित जांच किए बिना लोन स्वीकृत किया गया, इतना ही नहीं, 75 करोड़ की मंजूरी के बावजूद करीब 83.30 करोड़ रुपये के लेटर ऑफ क्रेडिट जारी कर दिए गए।
सीबीआई की जांच में यह भी सामने आया कि जिन दो कंपनियों को सरसों तेल सप्लाई करने वाला बताया गया, वे वास्तव में शेल कंपनियां थीं और उनका संचालन भी केएस ऑयल्स से जुड़े लोगों द्वारा किया जा रहा था। इन कंपनियों के जरिए जारी की गई एलसी की रकम वापस केएस ऑयल्स के खातों में पहुंचाई गई। सबसे चौंकाने वाला खुलासा तब हुआ, जब गुना और मुरैना स्थित टैंकों का निरीक्षण किया गया,जहां सरसों तेल होना चाहिए था, वहां 90 प्रतिशत से ज्यादा पानी मिला। इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों ने समय रहते कार्रवाई नहीं की और कंपनी को लगातार राहत दी जाती रही। इस पूरे मामले में एसटीसी को करीब 74 करोड़ 77 लाख रुपये का नुकसान हुआ।
सीबीआई ने इस मामले में तत्कालीन एसटीसी के कई सीनियर अधिकारियों, केएस ऑयल्स लिमिटेड, उसके चेयरमैन रमेश चंद गर्ग, डायरेक्टर दवेश अग्रवाल, स्टार एग्री वेयरहाउसिंग एंड कोलेटरल मैनेजमेंट लिमिटेड और उसके डायरेक्टर अमित खंडेलवाल सहित 12 आरोपियों के खिलाफ आपराधिक साजिश,धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं में एफआईआर दर्ज की है। मामले की जांच सीबीआई के डीएसपी गौरव सोम को सौंपी गई है।
करीब डेढ़ दशक पुराने इस कथित घोटाले में सीबीआई की एफआईआर के बाद एक बार फिर केएस ऑयल्स और उससे जुड़े अधिकारियों की भूमिका सवालों के घेरे में है। अब जांच एजेंसी पूरे वित्तीय लेन-देन, जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका और सरकारी धन के दुरुपयोग की परतें खोलने में जुटी है।
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आष्टा-शुजालपुर रोड पर ट्रक-बुलेरो की भीषण टक्कर, 5 की मौत, 4 गंभीर घायल
सीहोर। जिले में आष्टा-शुजालपुर मार्ग पर सोमवार को ट्रक और 'बोलेरो' वाहन के बीच भिड़ंत होने से पांच लोगों की मौत हो गई तथा चार अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि टक्कर इतनी भीषण थी कि 'बोलेरो' वाहन बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। उन्होंने बताया कि बोलेरो वाहन में सवार चार लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि पांच अन्य घायल हो गए। उन्होंने कहा कि घायलों को उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
पार्वती के थाना प्रभारी हरिसिंह परमार ने बताया कि पुलिस ने एंबुलेंस की मदद से घायलों को अस्पताल पहुंचाया। पुलिस ने बताया कि मृतकों की पहचान राजगढ़ जिले के भियापुरा के इंदर सिंह और राजाराम के रूप में हुई है, जबकि दो अन्य मृतकों की पहचान नहीं हो पायी है। पुलिस के मुताबिक प्रारंभिक जांच के अनुसार, बोलेरो में कुल नौ लोग सवार थे, जो एक मानसिक रूप से एक अस्वस्थ व्यक्ति का उपचार कराने जा रहे थे।
दुर्घअना के बाद स्थानीय लोगों ने तुरंत राहत कार्य शुरू कर घायलों को बाहर निकाला और एंबुलेंस की मदद से सिविल अस्पताल पहुंचाया। हादसे के बाद मौके पर चीख-पुकार और अफरा-तफरी का माहौल बन गया। सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन की टीम घटनास्थल पर पहुंची तथा दुर्घटना की जांच शुरू कर दी।
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वक्फ बोर्ड में हिंदू सदस्य : आरिफ मसूद ने कहा-सुप्रीम कोर्ट जाऊंगा
भोपाल। मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड का पुनर्गठन कर सनवर पटेल को पुन: अध्यक्ष बनाया गया है। इसके साथ ही पहली बार बोर्ड में दो हिंदू सदस्यों को भी शामिल किया गया है। ऐसा करने वाला मध्य प्रदेश देश का पहला राज्य है। इस फैसले को लेकर जहां कुछ संगठनों और लोगों ने विरोध जताया है। भोपाल मध्य सीट से विधायक आरिफ मसूद ने कहा कि सरकार के इस निर्णय के खिलाफ वे सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करेंगे।
विधायक आरिफ मसूद ने कहा कि कांग्रेस नेता ने कहा कि ट्रस्ट में नियुक्ति का पूरा मामला पहले से सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने संशोधन के प्रावधान के विपरीत दो की जगह तीन श्रेणियों को शामिल कर गलती की है। सवाल उठाया कि जब मामला कोर्ट में लंबित है तो इतनी जल्दबाजी और घबराहट क्यों दिखाई गई। मसूद ने कहा, इस मुद्दे पर जल्द ही सुप्रीम कोर्ट में नई याचिका या आवेदन दायर किया जाएगा।
विधायक मसूद ने कहा कि सुनवाई के दौरान केंद्र की ओर से संशोधन का आश्वासन दिया गया था, फिर भी सरकार ने अलग तरीके से कार्रवाई की। ट्रस्ट को लेकर दिए गए सद्भावना वाले तर्क पर मसूद ने आपत्ति जताई और कहा कि धार्मिक संस्थाओं से जुड़े मामलों में ऐसे प्रयोग उचित नहीं हैं।
इस मामले में भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा ने कहा कि वक्फ बोर्ड की जमीन किसी मुल्ला या मौलवी की निजी संपत्ति नहीं, बल्कि देश और समाज की संपत्ति है। उन्होंने कहा कि वक्फ की जमीनों का उपयोग गरीबों और जरूरतमंदों के हित में होना चाहिए। उन्होंने कहा कि देश में गंगा-जमुनी तहजीब हमारी संस्कृति का हिस्सा है और सभी समुदायों की भागीदारी से ही व्यवस्था मजबूत होगी।
विधायक शर्मा ने कहा कि वक्फ संशोधन के बाद बोर्ड में दो हिंदू सदस्यों को शामिल किया गया है, जिनका उद्देश्य भी गरीबों के हित में काम करना होगा। इससे आम मुसलमानों को किसी प्रकार की परेशानी नहीं होनी चाहिए। शर्मा ने आगे कहा कि यदि किसी को इस फैसले से आपत्ति है तो वे लोग हैं, जो अब तक वक्फ की संपत्तियों का गलत लाभ उठाते रहे हैं। उनके अनुसार नए सदस्यों की नियुक्ति से वक्फ संपत्तियों के बेहतर प्रबंधन और पारदर्शिता को बढ़ावा मिलेगा।
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दिग्विजय की अयोध्या यात्रा पर घमासान: ‘बाबरी के लिए रोने वाले अब चंदा वापस मांगने जा रहे हैं’- BJP विधायक का तंज
मध्य प्रदेश में एक बार फिर राम मंदिर और सनातन के मुद्दे पर सियासत गर्मा गई है। पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह द्वारा उज्जैन से अयोध्या तक निकाली जाने वाली पदयात्रा को लेकर भाजपा ने उन पर सीधा और तीखा हमला बोला है। भोपाल की हुजूर सीट से भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा ने दिग्विजय सिंह की इस यात्रा को ‘सनातन विरोधी’ करार देते हुए उन पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
विधायक रामेश्वर शर्मा ने दिग्विजय सिंह के पुराने स्टैंड को याद दिलाते हुए उन पर चौतरफा हमला बोला। शर्मा ने कहा कि हम आपको हिंदू नहीं मानते। आप वो हैं जिन्होंने कार सेवा से लेकर मंदिर निर्माण तक हमेशा श्रीराम मंदिर का विरोध किया। विरोध ही नहीं किया, बल्कि बाबरी मस्जिद के लिए रोए और गाए भी। भाजपा की पांच-पांच सरकारें गिराने में भी आपकी भूमिका रही। अब जब आपने चंदा दिया तो मैं पहली बार देख रहा हूं कि कोई चंदा वापस लेने अयोध्या जा रहे हैं। क्या दिग्विजय सिंह जी गंगा मैया में विसर्जित पुरखों की अस्थियों को भी वापस लेने जाओगे?
भाजपा विधायक ने आगे कहा कि दिग्विजय सिंह केवल सनातन को बदनाम और टारगेट करने के लिए यह यात्रा कर रहे हैं। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यह सनातन विरोधी यात्रा देश भर में कांग्रेस की ‘अंतिम यात्रा’ साबित होगी।
रामेश्वर शर्मा ने दिग्विजय सिंह को चुनौती देते हुए कहा कि अगर वे सच में धार्मिक यात्रा करना चाहते हैं तो श्रीकृष्ण जन्मभूमि की मुक्ति के लिए पदयात्रा करें। उन्होंने कहा कि चलो मथुरा श्रीकृष्ण जन्मभूमि की मुक्ति यात्रा पर मैं और पूरा संत समाज और देश का करोड़ों हिंदू आपके साथ चलेगा। हो सके तो अपने कांग्रेसी कुनबे और गांधी परिवार को भी साथ ले चलना, चुनाव के समय सिर्फ गंगा नहाने से काम नहीं चलेगा।
दरअसल पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने उत्तर प्रदेश में राम मंदिर निर्माण के लिए जुटाए गए चंदे में कथित वित्तीय अनियमितताओं यानि चोरी के आरोपों को लेकर 2 अक्टूबर से उज्जैन के महाकाल मंदिर से अयोध्या तक करीब 1000 किलोमीटर लंबी पदयात्रा का ऐलान किया है।
दिग्विजय सिंह ने स्वयं राम मंदिर के लिए 1 लाख 11 हजार रुपये का चंदा दिया था, जिसकी रसीद और चेक की प्रति उनके पास सुरक्षित है। उन्होंने कहा है कि वे वरिष्ठ वकीलों से चर्चा कर कोर्ट में मुकदमा दायर करेंगे और चंदे का पूरा हिसाब मांगेंगे।
दिग्विजय सिंह ने सोशल मीडिया पर संघ प्रमुख मोहन भागवत को संबोधित करते हुए लिखा था कि धर्म को चंदा चोरों से बचाने के लिए RSS और VHP को आगे आकर मेरी पदयात्रा का समर्थन करना चाहिए।
भाजपा के अलावा धार्मिक हलकों से भी दिग्विजय सिंह की इस यात्रा का विरोध शुरू हो गया है। धर्मगुरु अनिलानंद महाराज ने कांग्रेस के पुराने रुख पर सवाल उठाते हुए कहा कि जिन लोगों ने एक समय कोर्ट में भगवान श्रीराम के अस्तित्व पर सवाल उठाए थे और उन्हें काल्पनिक बताया था, आज वही लोग राजनीतिक लाभ के लिए यात्राएं निकालने का ढोंग रच रहे हैं, जो पूरी तरह से गलत है।

महाराष्ट्र में मानसून ने रफ्तार पकड़ ली है और लगातार तीसरे दिन हो रही मूसलाधार बारिश ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। सबसे ज्यादा असर मुंबई, पुणे और आसपास के इलाकों में देखने को मिल रहा है। मौसम विभाग के रेड अलर्ट के बीच प्रशासन ने लोगों से बिना जरूरी काम के घर से बाहर न निकलने की अपील की है। कई निजी कंपनियों ने कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम की सलाह दी है, जबकि सरकारी, निजी और नगर निगम के सभी स्कूल-कॉलेजों में सोमवार को छुट्टी घोषित कर दी गई।
भारी बारिश के चलते मुंबई-पुणे रेल मार्ग पर करजत-लोनावला के भोर घाट सेक्शन में दो स्थानों पर लैंडस्लाइड हुई, जिससे तीनों रेलवे लाइनें प्रभावित हो गईं। सुरक्षा कारणों से 20 ट्रेनों को रद्द करना पड़ा, जबकि कई अन्य ट्रेनों का संचालन प्रभावित रहा। वहीं, मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर भी भूस्खलन के कारण यातायात बाधित हो गया और कई घंटों तक वाहनों की आवाजाही प्रभावित रही।
मुंबई में रविवार से 75 किलोमीटर प्रति घंटे तक की तेज हवाएं चल रही हैं। तेज बारिश और हवाओं के कारण शहर में सैकड़ों पेड़ गिरने की घटनाएं सामने आईं। बीएमसी के अनुसार, 350 से अधिक पेड़ गिरने की सूचना मिली, जिससे कई इलाकों में यातायात और बिजली व्यवस्था प्रभावित हुई।
बारिश का असर छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर भी पड़ा। रविवार रात 12 बजे से सोमवार सुबह 11:30 बजे तक 17 उड़ानें रद्द करनी पड़ीं, जबकि आने-जाने वाली 217 फ्लाइट्स निर्धारित समय से देरी से संचालित हुईं। इससे यात्रियों को लंबा इंतजार करना पड़ा।
भारी बारिश और रेड अलर्ट को देखते हुए महाराष्ट्र विधानसभा की सोमवार की कार्यवाही पूरे दिन के लिए स्थगित कर दी गई। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि प्रशासन पूरी तरह सतर्क है और नागरिकों से अनावश्यक यात्रा से बचने की अपील की है।
उधर, जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में भी भारी बारिश के बाद लैंडस्लाइड हुई, जिसमें 6 से 7 वाहन मलबे में दब गए। राहत एवं बचाव दल मौके पर पहुंचकर मलबा हटाने और वाहनों को निकालने का कार्य कर रहे हैं।
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'दोषियों को कर्मों का फल मिलेगा...', राम मंदिर चढ़ावा चोरी पर स्वामी चक्रपाणि का बड़ा बयान, बोले- ट्रस्ट ले नैतिक जिम्मेदारी
अयोध्या। राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी के मामले पर हिंदू महासभा के अध्यक्ष स्वामी चक्रपाणि ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट और चढ़ावे की गिनती से जुड़े लोगों पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि यह घटना करोड़ों रामभक्तों की भावनाओं को आहत करने वाली है और इससे मंदिर की छवि को नुकसान पहुंचा है।
स्वामी चक्रपाणि ने कहा कि जिस रामराज्य की कल्पना ईमानदारी और न्याय पर आधारित है, उसी राम मंदिर में इस तरह की घटना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि इस मामले के सामने आने के बाद हिंदू विरोधी लोगों को आलोचना और उपहास का मौका मिल गया है। सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे को लेकर कई तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
स्वामी चक्रपाणि ने कहा कि राम मंदिर का निर्माण लंबे कानूनी संघर्ष और सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के बाद संभव हो सका। उनका दावा है कि इस लड़ाई में कई हिंदू पक्षकारों ने वर्षों तक कानूनी लड़ाई लड़ी और अपनी निजी संपत्ति तक खर्च की। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे पक्षकारों को न तो ट्रस्ट में जगह दी गई और न ही राम मंदिर के उद्घाटन समारोह में आमंत्रित किया गया।
स्वामी चक्रपाणि ने राम मंदिर के उद्घाटन समारोह में फिल्मी हस्तियों को बुलाए जाने पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि ट्रस्ट में धार्मिक संतों, 13 अखाड़ों के प्रतिनिधियों और उन लोगों को शामिल किया जाना चाहिए था, जिन्होंने मंदिर आंदोलन और कानूनी लड़ाई में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने यह भी कहा कि अगर ट्रस्ट में धार्मिक पृष्ठभूमि के लोग होते तो ऐसी घटना नहीं होती।
स्वामी चक्रपाणि ने कहा कि राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने भी व्यवस्था में कमियों की बात कही है। उनके अनुसार, चढ़ावा चोरी के मामले की नैतिक जिम्मेदारी ट्रस्ट को लेनी चाहिए। उन्होंने ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि यदि चढ़ावे की व्यवस्था उनकी जिम्मेदारी में नहीं थी, तो इस पर पहले ही स्पष्टता होनी चाहिए थी।
स्वामी चक्रपाणि ने अपने बयान में धार्मिक मान्यताओं का हवाला देते हुए कहा कि मंदिर की संपत्ति या चढ़ावे की चोरी को धर्म में गंभीर अपराध माना गया है। उन्होंने कहा कि ऐसा करने वालों को अपने कर्मों का फल अवश्य मिलेगा। उन्होंने यह भी कहा कि अगर कोई व्यक्ति कानून या सबूतों से बच भी जाए, तो धार्मिक मान्यता के अनुसार उसके कर्मों का हिसाब भगवान के न्याय में अवश्य होगा।
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नीरव मोदी की भारत वापसी का रास्ता साफ... यूरोपियन कोर्ट से भी झटका; जल्द हो सकता है प्रत्यर्पण
पंजाब नेशनल बैंक (PNB) घोटाले के मुख्य आरोपी और भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी की भारत वापसी का रास्ता अब लगभग साफ हो गया है। यूरोपियन कोर्ट ऑफ ह्यूमन राइट्स (ECHR) से भी उसे बड़ा झटका लगा है। अदालत ने उसकी याचिका पर राहत नहीं दी, जिससे भारत प्रत्यर्पण रोकने की उसकी आखिरी कानूनी उम्मीद भी खत्म हो गई है। अब ब्रिटेन सरकार उसके प्रत्यर्पण की प्रशासनिक प्रक्रिया को आगे बढ़ाएगी।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, नीरव मोदी के पास अब भारत आने से बचने का कोई प्रभावी कानूनी विकल्प नहीं बचा है। सूत्रों का कहना है कि उसके सभी कानूनी रास्ते बंद हो चुके हैं और अब केवल कुछ प्रशासनिक औपचारिकताएं पूरी की जानी हैं। इसके बाद उसे भारत लाए जाने की प्रक्रिया तेज हो सकती है। जिसका केंद्र को लंबे समय से इंतजार है।
इससे पहले अप्रैल 2026 में यूके हाईकोर्ट ने नीरव मोदी को भारत प्रत्यर्पण के फैसले को चुनौती देने की अनुमति देने से इनकार कर दिया था। अदालत ने भारत सरकार की ओर से भारतीय जेलों की सुरक्षा और सुविधाओं को लेकर दिए गए आश्वासनों को पर्याप्त माना था। हाईकोर्ट से राहत नहीं मिलने के बाद नीरव मोदी ने यूरोपियन कोर्ट ऑफ ह्यूमन राइट्स का दरवाजा खटखटाया था, लेकिन वहां से भी उसे कोई राहत नहीं मिली।
ब्रिटेन की अदालत पहले ही उसके प्रत्यर्पण के पक्ष में फैसला दे चुकी थी और आवश्यक दस्तावेज सौंपने की प्रक्रिया भी शुरू हो गई थी। इसके बाद ECHR में दाखिल याचिका उसके लिए आखिरी कानूनी विकल्प मानी जा रही थी।
नीरव मोदी को मार्च 2019 में लंदन में गिरफ्तार किया गया था। तब से वह वैंड्सवर्थ जेल में बंद है। उस पर पंजाब नेशनल बैंक से हजारों करोड़ रुपये की धोखाधड़ी, मनी लॉन्ड्रिंग और वित्तीय अनियमितताओं के आरोप हैं। इस मामले में भारत की केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) लंबे समय से उसकी तलाश कर रहे हैं।
नीरव ने ब्रिटेन की अदालतों में दावा किया था कि भारत भेजे जाने पर उसके साथ प्रताड़ना हो सकती है और जेलों की स्थिति ठीक नहीं है। हालांकि ब्रिटेन की अदालतों ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया और भारत सरकार के आश्वासनों को पर्याप्त माना।
अब राजनयिक सूत्रों के अनुसार, ब्रिटेन के अधिकारी नीरव मोदी को भारत सौंपने की तैयारी में जुट गए हैं। यदि प्रशासनिक औपचारिकताएं तय समय पर पूरी हो जाती हैं, तो भगोड़े कारोबारी का भारत प्रत्यर्पण जल्द संभव हो सकता है। इससे पीएनबी घोटाले की जांच और मुकदमे की प्रक्रिया को भी नई गति मिलने की उम्मीद है।

उज्जैन। तंत्र-मंत्र और अंधविश्वास के नाम पर सोशल मीडिया के जरिए संरक्षित वन्यजीवों के अवशेष बेचने का बड़ा मामला सामने आया है। जिला वन अधिकारी (DFO) अनुराग तिवारी ने बताया कि वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो भोपाल से मिली सूचना के आधार पर वन विभाग ने जांच शुरू की। सूचना एक महिला द्वारा संचालित इंस्टाग्राम अकाउंट से जुड़ी थी, जहां वन्यजीवों के अंगों को बेचने की कोशिश की जा रही थी।
DFO अनुराग तिवारी ने बताया कि जांच के दौरान वन विभाग की टीम ने ग्राहक बनकर महिला से संपर्क करने का प्रयास किया। इंस्टाग्राम पोस्ट में बार-बार उज्जैन का नाम इस्तेमाल किया जा रहा था, इसलिए यह पता लगाने की कोशिश की गई कि उसका शहर से कोई संबंध है या नहीं।
हालांकि जांच में महिला का उज्जैन से कोई सीधा कनेक्शन नहीं मिला। बैंक खातों की KYC जांच में महिला का पता दिल्ली का सामने आया। इसके बाद पूरे मामले की जानकारी और दस्तावेज वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरों, भोपाल को भेज दिए गए हैं, जहां से आगे की जांच दिल्ली में की जाएगी।
DFO ने जानकारी दी कि जांच के दौरान महिला के बैंक खाते में पिछले छह महीनों में करीब 3-4 करोड़ रुपये के लेनदेन का पता चला है। यह रकम छोट-छोटे ट्रांजैक्शनों के जरिए जमा हुई थी, जिससे बड़े स्तर पर कारोबार होने की आशंका जताई जा रही है।
शुरूआती जांच में यह जानकारी सामने आई है कि महिला लोगों को यह कहकर वन्यजीवों के अवशेष बेचती थी कि इन्हें रखने या इस्तेमाल करने से आर्थिक लाभ होगा, तांत्रिक सिद्धियां प्राप्त होंगी और जीवन की कई समस्याएं दूर हो जाएंगी। इसी तरह के भ्रामक दावों और अंधविश्वास का सहारा लेकर लोगों को गुमराह किया जा रहा था। वहीं वन विभाग का कहना है कि पूरे मामले की जांच की जा रही है और उसी के आधार पर आगे वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

भोपाल। राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच के बीच अब स्वर्ण जड़ित रामचरितमानस ग्रंथ भी गायब है जिसे मप्र कैडर के पूर्व आईएएस एस. लक्ष्मीनारायण ने मंदिर ट्रस्ट को सौंपा था। पांच महीने तक इसे रामलला मंदिर गर्भगृह के पास देखा गया। अब वहां से नदारद है। एस. लक्ष्मीनारायण ने बताया कि इस रामचरितमानस को बनवाने में उनकी माताजी के सभी स्वर्ण आभूषण और अपनी मेहनत की कमाई लगा दी थी। 1000 कॉपर प्लेटों पर लेजर से उकेरी गई इस किताब पर एक किलो से अधिक 24 कैरेट सोने की परत चढ़ी है।
पांच महीने बाद हटवाकर गार्ड रूम में रखवा दी थी...
सवाल: आपके द्वारा भेंट की गई यह दुर्लभ कृति कब से गायब है?
जवाब: मंदिर में करीब 5 महीने तक लाखों लोगों ने इसके दर्शन किए। बाद में इसे हटा कर गार्ड रूम में रखवा दिया। अब कोई सूचना नहीं है।
सवाल: पूछताछ में कुछ पता चला, भेंट करते समय रसीद मिली थी?
जवाब: कई बार फॉलोअप किया लेकिन जानकारी नहीं मिली। 8 अप्रैल 2024 को मैंने भेंट की थी। रसीद नहीं मिला।
सवाल: अब एसआईटी की जांच हो रही है, आपने कोई शिकायत की क्या?
जवाब: हां मैंने सीएम योगीजी और मुख्य सचिव को शिकायत भेजी है। सीएम ऑफिस से जवाब मिला कि जांच के निर्देश दिए हैं।
सवाल: इसे बनवाने में कितना खर्च आया?
जवाब: मेरी मां ने सभी जेवर दे दिए थे। मैंने भी अपनी कमाई लगा दी थी, करीब 800-900 ग्राम सोना लगा। कीमत करोड़ों में है। चोरी से मन दुखी है।
सवाल: मंदिर ट्रस्ट से भी आपने पूर्व में पूछताछ की होगी?
जवाब: मैंने चंपत राय से बात की थी लेकिन संतोषप्रद जवाब नहीं मिला।
अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक सोमवार को मणिरामदास छावनी में होगी। बैठक में महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा के इस्तीफों पर फैसला लिया जा सकता है। साथ ही दानपात्र से कथित चढ़ावा चोरी मामले में एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट पर भी चर्चा होगी। इधर अयोध्या के साधु-संत ट्रस्ट महासचिव चंपत राय के समर्थन में उतर गए हैं। संतों ने हजारा मंदिर में बैठक की और कहा कि चढ़ावा चोरी की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच होनी चाहिए। लेकिन जांच पूरी होने से पहले किसी भी व्यक्ति को दोषी ठहराना ठीक नहीं है। महंत राघवेश दास वेदांती ने कहा कि दान राशि में गड़बड़ी के आरोपों की सच्चाई एसआईटी जांच के बाद ही सामने आएगी। वहीं अयोध्या पुलिस को पांच आरोपियों से जेल में पूछताछ की कोर्ट से अनुमति मिल गई है।
अब केदारनाथ और बद्रीनाथ से भी चढ़ावा चोरी का आरोप लग रहा है। धार्मिक संगठन भैरव सेना के अध्यक्ष संदीप खत्री ने बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) को पत्र लिखकर बीकेटीसी अध्यक्ष के निजी सहायक पर चोरी के आरोप लगाए हैं। शिकायत के बाद बीकेटीसी के सीईओ ने निजी सहायक समेत सभी कर्मचारियों को नोटिस जारी कर तीन दिन में जवाब मांगा है।

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निकालने के बाद गरिमा के शव को पैक कर जॉच के लिऐ भेजा गया
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दोषी डॉक्टर के खिलाफ मामला कायम कराने के लिऐ पुलिस अधिक्षक से मिले पत्रकार
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गरिमा के शव की जॉच होने के बाद पुनः उसी स्थान पर चबूतरा का निर्माण किया गया
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पूजा स्थल मे गरिमा
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