भोपाल। महिलाओं के खिलाफ अपराध को लेकर लगातार चर्चा होती है, लेकिन अब पुरुषों से जुड़ी घरेलू हिंसा और प्रताड़ना के आंकड़े भी चिंता बढ़ा रहे हैं। मध्यप्रदेश में पति की हत्या के मामले तेजी से सामने आने का दावा किया गया है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक 2026 के पहले छह महीनों में प्रदेश में पति की हत्या के 36 मामले सामने आए हैं, जिसके चलते मध्यप्रदेश इस मामले में देश में दूसरे स्थान पर बताया जा रहा है।
आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2026 के पहले छह महीनों में देशभर में पति की हत्या के 322 और आत्महत्या के 232 मामले सामने आए। इनमें मध्यप्रदेश में पति की हत्या के 36 मामले दर्ज हुए हैं। इन मामलों में बड़ी संख्या वैवाहिक विवाद से जुड़ी बताई गई है। कई मामलों में पति-पत्नी के बीच विवाद, विवाहेतर संबंध और घरेलू तनाव जैसे कारण सामने आने की बात कही गई है।
पुरुष अधिकारों से जुड़ी हेल्पलाइन पर भी शिकायतों का आंकड़ा तेजी से बढ़ रहा है। वर्ष 2025 में देशभर से करीब 58,289 कॉल पहुंचीं, जबकि 2026 के शुरुआती छह महीनों में ही यह संख्या बढ़कर 87,969 तक पहुंच गई। मध्यप्रदेश की बात करें तो वर्ष 2025 में हेल्पलाइन पर करीब 8,108 कॉल आई थीं। वहीं 2026 में जून तक ही 12,577 कॉल पहुंच चुकी हैं। यानी पुरुषों से जुड़ी घरेलू समस्याओं को लेकर मदद मांगने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
पुरुष अधिकार संगठनों का कहना है कि बड़ी संख्या में पुरुष वैवाहिक विवाद, पत्नी या ससुराल पक्ष से विवाद और कानूनी कार्रवाई के डर से मानसिक तनाव में रहते हैं। कई मामलों में वे सहायता और कानूनी सलाह के लिए हेल्पलाइन का सहारा लेते हैं। हालांकि हर शिकायत को सच मान लेना भी उचित नहीं होगा। जरूरत इस बात की है कि पति या पत्नी किसी भी पक्ष के खिलाफ हिंसा, प्रताड़ना या झूठी शिकायत के आरोपों की निष्पक्ष जांच हो और पीड़ित को कानून के तहत सहायता मिले।
पति की हत्या के मामले हों या पुरुषों की हेल्पलाइन पर बढ़ती शिकायतें- ये आंकड़े बदलते वैवाहिक रिश्तों की एक गंभीर तस्वीर सामने रखते हैं। सवाल यह है कि आखिर दांपत्य रिश्तों में विवाद किस स्तर तक पहुंच रहे हैं कि बात अलगाव से आगे बढ़कर हिंसा और हत्या तक पहुंच रही है? और क्या ऐसे मामलों को रोकने के लिए परिवार परामर्श, कानूनी सहायता और समय रहते हस्तक्षेप की व्यवस्था पर्याप्त है? मध्यप्रदेश में छह महीने में पति की हत्या के 36 मामले और हेल्पलाइन पर 12,577 कॉल- ये आंकड़े सिर्फ संख्या नहीं, बल्कि बिगड़ते वैवाहिक रिश्तों पर गंभीर मंथन की जरूरत का संकेत हैं।
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‘हर घर तिरंगा’ यात्रा में लापरवाही: भीषण गर्मी और उमस से दर्जनों छात्राओं की बिगड़ी तबीयत, मचा हड़कंप
सिंगरौली चितरंगी। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) द्वारा आयोजित ‘हर घर तिरंगा’ यात्रा के दौरान प्रशासनिक लापरवाही का एक बड़ा मामला सामने आया है। भीषण गर्मी और तेज धूप में निकाली गई इस रैली में शासकीय विद्यालय की कई दर्जन छात्राओं की अचानक तबीयत बिगड़ गई, जिससे कार्यक्रम स्थल पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। इस कार्यक्रम में सूबे की राज्यमंत्री राधा सिंह भी शामिल थीं।
यात्रा के दौरान एक तरफ जहां क्षेत्र के निजी (प्राइवेट) विद्यालयों के एक भी छात्र नजर नहीं आए, वहीं दूसरी तरफ सरकारी स्कूलों के गरीब छात्र-छात्राओं को इस चिलचिलाती धूप में पैदल चलने पर मजबूर होना पड़ा। स्थानीय लोगों और अभिभावकों ने सवाल उठाया है कि आखिर हर बार इस तरह के आयोजनों में केवल सरकारी स्कूल के गरीब बच्चों को ही क्यों झोंका जाता है और उनके स्वास्थ्य के साथ ऐसा अन्याय क्यों किया जाता है?
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, दोपहर के समय जब यह यात्रा निकाली गई तब तापमान बेहद अधिक था। इतनी भीषण गर्मी के बावजूद पूरे रैली मार्ग में बच्चों के लिए पीने के पानी की कोई व्यवस्था नहीं की गई थी। हद तो तब हो गई जब इतनी बड़ी छात्र संख्या वाली रैली में स्वास्थ्य विभाग (एम्बुलेंस या मेडिकल टीम) का कोई भी जिम्मेदार अधिकारी या कर्मचारी दूर-दूर तक नजर नहीं आया।
हैरानी की बात यह है कि इस पूरी यात्रा में राज्यमंत्री राधा सिंह खुद मौजूद थीं। उनके सामने ही कुप्रबंधन के चलते दर्जनों छात्राओं की हालत खराब होने लगी, जिससे रैली में भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। आनन-फानन में स्थानीय लोगों और शिक्षकों की मदद से अस्वस्थ बच्चों को संभाला गया।इस घटना के बाद से स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं कि बिना पुख्ता इंतजामों और सुरक्षा उपायों के स्कूली बच्चों को इस भीषण गर्मी में रैली में क्यों शामिल होने दिया गया।
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कीचड़ से सनी सड़क पर लाचार हुआ सिस्टम, बेबस परिजनों ने खटोले से बचाई जच्चा-बच्चा की जान
सीधी। मध्य प्रदेश के सीधी जिले से विकास के बड़े-बड़े दावों की खोखली सच्चाई उजागर हुई है। सिहावल जनपद के कुसेड़ा गांव में कीचड़ से सने रास्ते ने एक गर्भवती महिला को अस्पताल पहुंचाने वाली एंबुलेंस को उसके घर पहुंचने से रोक दिया। मजबूर परिजनों को रात के अंधेरे में चारपाई का खटोला बनाकर करीब दो किलोमीटर पैदल सफर करना पड़ा। सोशल मीडिया पर वायरल हुए इस वीडियो न सिर्फ व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रही हैं, बल्कि जनप्रतिनिधियों के विकास के दावों और वादों की हकीकत भी बयां कर रही हैं।
सीधी जिला कहने को सीधा है लेकिन यहां सब उल्टा है। सरकार सड़क, बिजली पानी, स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाओं को लेकर लगातार बड़े-बड़े दावे कर रही है लेकिन कुसेंडा गांव की इस घटना ने योजनाओं पर पलीता लगा दिया है। दरअसल, यहां एक गर्भवती की प्रसव की सूचना मिलते ही एंबुलेंस समय पर गांव पहुंच गई थी, लेकिन बदहाल और कीचड़ से भरे रास्ते के कारण गर्भवती महिला के घर तक नहीं पहुंच सकी। आखिरकार घर की महिलाओं ने ही उसका प्रसव कराया। इसके बाद परिजन चारपाई को खटोला बनाकर जच्चा-बच्चा को करीब दो किलोमीटर दूर खड़ी एंबुलेंस तक लेकर पहुंचे।
दोनों को बहरी स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया, जहां उनकी हालत स्वस्थ बताई गई है। वहीं दूसरी ओर बारिश में गांव की सड़क में घुटने तक पानी होने से बच्चों का स्कूल और आंगनबाड़ी जाना चुनौती से कम नहीं है। ऐसे में सवाल यह है कि विकास के दावों के बीच ग्रामीणों को आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए क्यों जूझना पड़ रहा है। ADM व्ही पी पांडेय ने इस मामले पर कहा कि पूरे प्रकरण की जांच कराई जाएगी। उसके आधार पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
नरसिंहपुर। नरसिंहपुर में पुलिस ने एक कथित फर्जी IAS अधिकारी को गिरफ्तार कर बड़ा खुलासा किया है। आरोपी पर खुद को कभी डॉक्टर तो कभी UPSC पास कर SDM होने का दावा कर लोगों को झांसे में लेने और पैसे ऐंठने का आरोप है।
नरसिंहपुर एसपी ऋषिकेश मीना ने मामले की जानकारी देते हुए बताया कि आरोपी की पहचान उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के बभनौती गांव निवासी संजय कुमार के रूप में हुई है। पुलिस के मुताबिक, आरोपी लोगों के सामने अपनी पहचान बदल-बदलकर पेश करता था और खुद को अधिकारी बताकर उन्हें प्रभावित करता था।
आरोप है कि संजय कुमार ने नरसिंहपुर की एक महिला डॉक्टर को भी अपने झांसे में लिया। आरोपी ने खुद को मध्य प्रदेश के धार जिले में SDM के पद पर पदस्थ बताया और इसी पहचान के जरिए महिला डॉक्टर से करीब 3 लाख रुपये ले लिए। मामले का खुलासा तब हुआ जब पीड़ित महिला डॉक्टर ने पुलिस से शिकायत की। शिकायत के आधार पर नरसिंहपुर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस अब आरोपी से पूछताछ कर रही है। जांच का मुख्य फोकस इस बात पर है कि आरोपी ने फर्जी अधिकारी बनकर और कितने लोगों को अपना शिकार बनाया और उससे कितनी रकम की ठगी की। पुलिस आरोपी के दावों और उसकी गतिविधियों से जुड़े दस्तावेजों की भी जांच कर रही है। मामले की जांच आगे बढ़ने के साथ फर्जी अधिकारी के नेटवर्क और ठगी के अन्य मामलों का खुलासा होने की संभावना है।
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मदरसा सील: कागजों में 445 बच्चे, हकीकत में सिर्फ 35; बाल आयोग के औचक निरीक्षण में खुली पोल
ग्वालियर। एमपी के मुरैना में बाल अधिकार संरक्षण आयोग के औचक निरीक्षण में शिक्षा और बच्चों से जुड़ी व्यवस्थाओं की गंभीर तस्वीर सामने आई है। खड़ियाहार गांव में महज दो कमरों में संचालित मदरसा के रिकॉर्ड में 445 बच्चों का दाखिला दर्ज मिला, लेकिन मौके पर सिर्फ 35 बच्चे पढ़ते हुए मिले। रिकॉर्ड में दर्ज अधिकांश बच्चों के नियमित रूप से मदरसे नहीं आने की बात भी सामने आई है। निरीक्षण के बाद आयोग अध्यक्ष ने मदरसे को सील करा दिया और शिक्षा विभाग को मान्यता निरस्त करने की कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। वहीं ज्ञानोदय आवासीय छात्रावास के निरीक्षण में भी सफाई, भोजन, सुरक्षा और व्यवस्थाओं से जुड़ी कई कमियां मिलीं।
मुरैना जिले के खड़ियाहार गांव में संचालित मदरसा आयसा इस्लामिया में बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ निवेदिता शर्मा ने अचानक पहुंचकर निरीक्षण किया। उनके साथ शिक्षा विभाग और बाल कल्याण समिति के अधिकारी भी मौजूद रहे। निरीक्षण के दौरान मदरसा महज दो कमरों और छोटे से आंगन में संचालित मिला। दोनों कमरों में उस वक्त सिर्फ 35 बच्चे पढ़ते हुए मिले, जब मदरसे का दाखिला रिकॉर्ड खंगाला गया तो अधिकारियों के सामने चौंकाने वाली स्थिति आई। रिकॉर्ड में कुल 445 बच्चों के नाम दर्ज थे। अधिकारियों के मुताबिक, रिकॉर्ड में दर्ज अधिकांश बच्चे हिंदू बताए गए, लेकिन ये बच्चे नियमित रूप से मदरसे में पढ़ने नहीं आते थे। दो कमरों की क्षमता और रिकॉर्ड में दर्ज बच्चों की संख्या के बीच बड़ा अंतर मिलने पर मदरसे की व्यवस्थाओं और रिकॉर्ड पर सवाल खड़े हुए।
आयोग अध्यक्ष ने मदरसा प्रबंधन से बच्चों के दाखिले और संचालन से जुड़े जरूरी रिकॉर्ड मांगे, लेकिन कई रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराए जा सके। निरीक्षण में सामने आई इन कमियों को गंभीरता से लेते हुए आयोग अध्यक्ष ने मदरसे को तत्काल सील कराने के निर्देश दिए। साथ ही शिक्षा विभाग की सहायक संचालिका को मदरसे की मान्यता निरस्त करने की कार्रवाई शुरू करने को कहा गया। हालांकि आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि कार्रवाई के बीच बच्चों की पढ़ाई प्रभावित नहीं होनी चाहिए। रिकॉर्ड में दर्ज बच्चों की शैक्षणिक व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए उन्हें नजदीकी प्राथमिक स्कूलों में प्रवेश दिलाने के निर्देश दिए गए हैं। अब संबंधित विभाग मदरसे के रिकॉर्ड और संचालन से जुड़े पूरे मामले की आगे जांच करेगा।
मदरसे के बाद आयोग अध्यक्ष ने ज्ञानोदय आवासीय छात्रावास का भी निरीक्षण किया। यहां सफाई व्यवस्था संतोषजनक नहीं मिली। बच्चों को दिए जाने वाले भोजन की गुणवत्ता पर भी सवाल सामने आए और अधिकारियों के मुताबिक, मीनू के अनुसार भोजन नहीं दिया जा रहा था। छात्रावास में बच्चों के लिए बनाए गए खेल ऑडिटोरियम पर ताला लगा मिला। यानी सुविधा मौजूद होने के बावजूद बच्चे उसका इस्तेमाल नहीं कर पा रहे थे। इस पर आयोग अध्यक्ष ने नाराजगी जताई। निरीक्षण के दौरान अधीक्षिका रामबेटी से निरीक्षण पंजी मांगी गई, लेकिन बार-बार कहने के बावजूद पंजी उपलब्ध नहीं कराई गई। छात्रावास भवन की कई खिड़कियां भी टूटी मिलीं। बालिकाओं की सुरक्षा से जुड़े इस मामले पर आयोग अध्यक्ष ने नाराजगी जताते हुए खिड़कियों को तत्काल दुरुस्त कराने के निर्देश दिए। इसके साथ ही छात्रावास में मिली दूसरी कमियों को भी दूर करने के लिए अधिकारियों को निर्देशित किया गया।
बहरहाल मुरैना में एक ही निरीक्षण के दौरान दो अलग-अलग संस्थानों में बच्चों से जुड़ी व्यवस्थाओं की तस्वीर सामने आई है। एक ओर मदरसे के रिकॉर्ड में 445 बच्चों का दाखिला और मौके पर सिर्फ 35 बच्चे मिले, तो दूसरी ओर आवासीय छात्रावास में भोजन, सफाई, सुरक्षा और सुविधाओं को लेकर कमियां सामने आईं। अब मदरसे के रिकॉर्ड और मान्यता की कार्रवाई के साथ-साथ छात्रावास की व्यवस्थाओं में सुधार को लेकर प्रशासन क्या कदम उठाता है, इस पर नजर रहेगी।
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हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: जेल में बंद कैदियों के बैंक खाते होंगे चालू, कैदियों की KYC कराने के निर्देश
जबलपुर। मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने प्रदेश की जेलों में बंद कैदियों के हित में एक बेहद महत्वपूर्ण और बड़ा फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने राज्य प्रशासन और जेल अधिकारियों को निर्देश दिया है कि जेलों में बंद विचाराधीन और सजायाफ्ता कैदियों के बायोमेट्रिक और अन्य दस्तावेज़ों का केवाईसी (KYC) कराने के लिए विशेष कैंप लगाए जाएं।
मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट के संज्ञान में आया कि जेलों में बंद कैदियों के बायोमैट्रिक विवरण अपडेट न होने के कारण उनके बैंक अकाउंट संचालित नहीं हो पा रहे थे। इसके चलते उन्हें और उनके परिवारों को आर्थिक लेन-देन में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था। हाईकोर्ट ने निर्देश दिया है कि जेलों में शिविर लगाकर कैदियों के- आधार कार्ड, पैन कार्ड, राशन कार्ड तथा अन्य आवश्यक सरकारी दस्तावेजों को अपडेट कराया जाए, ताकि उनके बैंक खाते सुचारू रूप से शुरू हो सकें।
यह अहम फैसला सिंगरौली निवासी कैदी प्रहलाद विश्वकर्मा की याचिका पर सुनवाई करते हुए आया है। याचिकाकर्ता प्रहलाद विश्वकर्मा ने कोर्ट को बताया था कि केवाईसी (KYC) और बायोमेट्रिक विवरण न होने के कारण उसका बैंक खाता बंद पड़ा है और वह संचालित नहीं हो पा रहा है।
जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस अवनींद्र कुमार सिंह की युगलपीठ (Double Bench) ने इस याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को 15 दिनों के भीतर इस पूरी प्रक्रिया को शुरू करने के कड़े निर्देश दिए हैं। कोर्ट के इस आदेश के बाद अब मध्य प्रदेश की सभी जेलों में कैदियों के आवश्यक दस्तावेजों को अपडेट करने और बैंक खातों को सक्रिय करने के लिए जल्द ही विशेष अभियान चलाया जाएगा।
बेंगलुरु। रेप केस में बेंगलुरु की सेंट्रल जेल में बंद पूर्व सांसद प्रज्वल रेवन्ना के मोबाइल में 90 पोर्न वीडियो मिले हैं। फोन की फोरेंसिक जांच जारी है। सेंट्रल क्राइम ब्रांच ने मंगलवार को प्रज्वल रेवन्ना के बैरक में छापेमारी की थी। रेवन्ना के पास फोन मिल थे। पुलिस मोबाइल को जब्त कर जांच की तो उसके मोबाइल में 90 पोर्न-वीडियो मिले।
जांचकर्ता फोन में मौजूद वीडियो, तस्वीरों और अन्य डिजिटल डेटा की जांच कर रहे हैं। यह भी पता लगाया जा रहा है कि सामग्री कहां से आई और इसका आपराधिक मामले से कोई संबंध है या नहीं।
बता दें कि सेंट्रल क्राइम ब्रांच ने मंगलवार को जेल में छापेमारी की थी। रेवन्ना के पास से मोबाइल मिला था। रेवन्ना के पास फोन मिलने के बाद नई FIR दर्ज की गई है। जेल में बंद अंडरट्रायल कैदी प्रताप राय को भी मामले में आरोपी बनाया गया है। प्रज्वल रेवन्ना के मोबाइल की जांच की गई तो उसमें 90 पोर्न-वीडियो मिले। मोबाइल में अश्लील वीडियो मिलने के बाद जेल प्रशासन के कान खड़े हो गए। फोरेंसिक टीम मोबाइल में मिले पोर्न-वीडियो की जांच कर रही है।
इस मामले में जेल के असिस्टेंट सुपरिटेंडेंट को निलंबित कर दिया गया है, जबकि जेल सुपरिटेंडेंट को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। मोबाइल फोन मिलने के बाद नई एफआईआर भी दर्ज की गई है। इसमें एक विचाराधीन कैदी का नाम शामिल है। कैदी का नाम प्रताप राय बताया जा रहा है जिसे इस मामले में शामिल किया गया है। यह घटनाक्रम कर्नाटक हाई कोर्ट द्वारा रेवन्ना की सजा पर रोक और अंतरिम जमानत की मांग वाली याचिका खारिज किए जाने के कुछ दिनों बाद सामने आया है।
बता दें कि पूर्व सांसद प्रज्वल रेवन्ना जनता दल (सेक्युलर) के विधायक एचडी रेवन्ना का बेटा और पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा का पोता है। वह महिलाओं से रेप केस में अगस्त 2025 से उम्रकैद की सजा काट रहा है। फिलहाल बेंगलुरु की सेंट्रल जेल में बंद है। प्रज्वल के परिवार के फार्महाउस में काम करने वाली 47 साल की महिला ने अप्रैल 2024 में उसके खिलाफ FIR दर्ज कराई थी। उसने प्रज्वल पर 2021 से कई बार रेप करने और किसी को भी घटना के बारे में बताने पर वीडियो लीक करने की धमकी देने के आरोप लगाए थे। कोर्ट ने 18 जुलाई 2025 को इस मामले की सुनवाई पूरी की थी। प्रज्वल के खिलाफ रेप, ताक-झांक, आपराधिक धमकी और अश्लील तस्वीरें लीक करने सहित कई धाराओं के तहत आरोप तय किए थे। खगोलशास्त्र
प्रज्वल को एक अगस्त 2025 को पीपुल्स रिप्रेजेंटेटिव्स की स्पेशल कोर्ट ने दोषी ठहराया था। उसे अगले दिन 2 अगस्त को उम्रकैद की सजा सुनाई गई और 11.50 लाख रुपए का जुर्माना लगाया गया।इसमें से 11.25 लाख रुपए पीड़ित को देने का निर्देश दिया गया था। प्रज्वल के खिलाफ रेप के तीन और मामले चल रहे हैं। इन मामलों की सुनवाई अभी बाकी है। खगोलशास्त्र
वहीं प्रज्वल के सोशल मीडिया पर 2,000 से ज्यादा अश्लील वीडियो क्लिप सामने आए थे। उसके खिलाफ दर्ज मामलों के बाद JDS ने उसे पार्टी से निलंबित भी कर दिया था।
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बंगाल में मस्जिदों से हट गए 4000 लाउडस्पीकर! कलकत्ता हाईकोर्ट पहुंचा मामला, शुभेंदु सरकार से जवाब मांगा
बंगाल में मस्जिदों और धार्मिक स्थलों से लाउडस्पीकर हटाए जाने के खिलाफ कलकत्ता हाई कोर्ट एक जनहित याचिका दायर की गई है, जिसे हाई कोर्ट ने उस जनहित याचिका को स्वीकार करते हुए सुनवाई की अनुमति दे दी है. याचिका हाई कोर्ट के अधिवक्ता दानिश फारूकी द्वारा दायर की गई है, जिसमें राज्यभर की करीब 4,000 मस्जिदों से लाउडस्पीकर हटा दिए गए हैं. लाउडस्पीकर हटाने के आरोपों पर कलकत्ता हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब मांगा है.
यह मामला एक जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान सामने आया. जिसमें राज्य सरकार के लाउडस्पीकर हटाने के उस कथित मौखिक निर्देश को चुनौती दी गई है.
पश्चिम बंगाल में मस्जिदों से लाउडस्पीकर हटाए जाने के मुद्दे पर विवाद बढ़ गया है. कलकत्ता हाईकोर्ट ने गुरुवार को CM शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली राज्य सरकार से साफ-साफ पूछा कि क्या पुलिस ने वाकई मस्जिदों से लाउडस्पीकर हटाने की कोई कार्रवाई की है या नहीं.
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश तापोब्रत चक्रवर्ती और न्यायमूर्ति अतारूप बनर्जी की बेंच ने राज्य को निर्देश दिया कि वह अगले मंगलवार तक जवाब दाखिल करे.
याचिका में आरोप लगाया गया है कि पुलिस मस्जिदों से जबरन लाउडस्पीकर हटा रही है. याचिका में तृणमूल सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता कल्याण बनर्जी ने अदालत को बताया कि मौखिक आदेशों के जरिए सभी मस्जिदों से लाउडस्पीकर उतरवा दिए गए हैं
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता दानिश फारूकी की तरफ से पेश कल्याण बनर्जी ने कहा कि राज्य में एक नया चलन शुरू हो गया है, जिसमें बिना किसी लिखित अधिसूचना के मौखिक आदेश दिए जाते हैं. हास्यास्पद तो तब है कि पुलिस भी बिना किसी लिखित आदेश के मौखिक आदेश दिए जाने पर लागू करने लगती है.
राज्य सरकार के एडवोकेट जनरल सुरजीत नाथ मित्रा ने कहा कि सरकार को अपना पक्ष रखने के लिए समय दिया जाना चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि इस याचिका को जुर्माने के साथ खारिज कर दिया जाना चाहिए.
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एयर इंडिया का बड़ा फैसला: अब सभी पायलटों का होगा प्री-फ्लाइट ड्रग टेस्ट
एयर इंडिया ने विमान सुरक्षा को लेकर बड़ा कदम उठाते हुए अपने समूह के सभी पायलटों की मादक पदार्थों और प्रतिबंधित दवाओं की जांच अनिवार्य कर दी है। एयरलाइन का यह फैसला 13 अगस्त 2026 से लागू हो गया है। यह कदम हाल ही में फुकेत से दिल्ली आ रही एयर इंडिया की उड़ान में सामने आए गंभीर मामले के बाद उठाया गया है।
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, टाटा समूह के स्वामित्व वाली एयर इंडिया ने इस संबंध में अपने कर्मचारियों को ईमेल भेजकर नई व्यवस्था की जानकारी दी है। एयरलाइन ने कहा कि समूह के सभी पायलटों की उन पदार्थों और दवाओं के लिए जांच की जाएगी, जो मौजूदा विमानन नियमों के तहत प्रतिबंधित हैं।
यह जांच अनिवार्य होगी और पायलटों की ट्रेनिंग के दौरान गुरुग्राम स्थित अकादमी के अलावा फ्लाइट ब्रीफिंग सेंटर, एयर इंडिया के कार्यालयों और अन्य निर्धारित स्थानों पर भी की जा सकती है।
वर्तमान नियमों के तहत एयरलाइंस पायलटों का हर दिन उड़ान से पहले ब्रेथ एनालाइजर टेस्ट करती हैं, ताकि शराब के सेवन का पता लगाया जा सके। वहीं, ड्रग्स की जांच अभी मुख्य रूप से औचक तरीके से की जाती है। एयर इंडिया ने अब इस व्यवस्था से आगे बढ़ते हुए सभी पायलटों की प्रतिबंधित पदार्थों के लिए व्यापक जांच शुरू करने का फैसला किया है।
4 अगस्त को फुकेत से दिल्ली आ रही एयर इंडिया की उड़ान AI-2379 को गंभीर टर्बुलेंस का सामना करना पड़ा। रिपोर्ट के अनुसार, विमान अचानक करीब 300 फीट नीचे चला गया और यात्रियों को जोरदार झटके लगे। घटना में 17 यात्री घायल हुए।
जांच के दौरान विमान में हाइड्रोलिक सिस्टम से जुड़ी समस्या और पायलट-इन-कमांड के कथित तौर पर गांजा सेवन के मामले की भी जानकारी सामने आई। इस घटना के बाद विमान संचालन में पायलटों की फिटनेस और नशीले पदार्थों के सेवन की जांच को लेकर सुरक्षा चिंताएं बढ़ गई हैं।
एयर इंडिया का नया फैसला पायलटों के बीच प्रतिबंधित पदार्थों के इस्तेमाल पर जीरो-टॉलरेंस नीति को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। इसका उद्देश्य उड़ान संचालन के दौरान पायलटों की सतर्कता, फिटनेस और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
इंदौर। शहर में सार्वजनिक गार्डन के इस्तेमाल को लेकर एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने नगर निगम की व्यवस्था और नियमों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। नेमीनगर स्थित निगम के सार्वजनिक गार्डन में जैन समाज के एक धर्मगुरु के निधन के बाद अंतिम संस्कार किए जाने की जानकारी सामने आई है। मामला सामने आने के बाद नगर निगम के उद्यान विभाग ने आपत्ति जताई है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या किसी सार्वजनिक गार्डन में बिना नगर निगम की अनुमति अंतिम संस्कार किया जा सकता है? निगम का कहना है कि पार्क उद्यान विभाग के अधीन है और वहां इस तरह की गतिविधि के लिए निर्धारित प्रक्रिया और अनुमति जरूरी है।
मिली जानकारी के मुताबिक, जैन समाज के धर्मगुरु नेमीनगर स्थित नगर निगम के गार्डन में ठहरे हुए थे। इसी दौरान उनका निधन हो गया। इसके बाद सुबह करीब 6 बजे गार्डन परिसर में ही उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया। नगर निगम उद्यान विभाग के कर्मचारियों को इसकी जानकारी करीब सुबह 7 बजे मिली। जब निगम की टीम मौके पर पहुंची, तब तक अंतिम संस्कार पूरा हो चुका था। मौके पर केवल राख और अन्य अवशेष मौजूद थे।
नगर निगम उद्यान विभाग का कहना है कि अंतिम संस्कार से पहले विभाग को इसकी कोई सूचना या वैध अनुमति नहीं दी गई थी। जानकारी मिलने के बाद उद्यान विभाग की टीम ने मौके का निरीक्षण किया और पंचनामा तैयार किया। पूरे मामले की रिपोर्ट वरिष्ठ अधिकारियों को भेज दी गई है। अब आगे की कार्रवाई को लेकर अधिकारियों के स्तर पर फैसला लिया जाना है।
वहीं इस मामले में जैन समाज की ओर से अलग पक्ष सामने आया है। समाज का कहना है कि अंतिम संस्कार से पहले पुलिस को इसकी जानकारी दी गई थी और पुलिस को सूचना देने के बाद ही अंतिम संस्कार किया गया। ऐसे में अब विवाद का केंद्र यही है कि पुलिस को सूचना देना पर्याप्त था या नगर निगम के उद्यान विभाग से भी औपचारिक अनुमति लेना जरूरी था।
सहायक उद्यान अधिकारी राहुल वर्मा के मुताबिक, नेमीनगर का यह गार्डन नगर निगम के उद्यान विभाग के अधीन आता है। सार्वजनिक पार्क में किसी भी तरह की गतिविधि के लिए निर्धारित नियम और प्रक्रिया का पालन किया जाना जरूरी है।
अधिकारी के मुताबिक, मौके पर पंचनामा तैयार कर लिया गया है और मामले की पूरी रिपोर्ट वरिष्ठ अधिकारियों को भेजी गई है।
यह मामला सिर्फ एक अंतिम संस्कार तक सीमित नहीं है, बल्कि शहर में सार्वजनिक स्थानों के इस्तेमाल और उनके प्रबंधन से जुड़े कई सवाल खड़े करता है। अगर किसी सार्वजनिक गार्डन में इस तरह की अनुमति दी जा सकती है तो उसकी प्रक्रिया क्या है? और अगर अनुमति जरूरी है तो क्या इस मामले में वह प्रक्रिया पूरी की गई थी?फिलहाल नगर निगम की रिपोर्ट के बाद आगे की कार्रवाई वरिष्ठ अधिकारियों के निर्णय पर निर्भर है।
वहीं जैन समाज की ओर से पुलिस को सूचना दिए जाने की बात सामने आने के बाद अब यह भी स्पष्ट होना बाकी है कि संबंधित विभागों के बीच अनुमति और सूचना को लेकर आखिर स्थिति क्या थी। नेमीनगर का यह मामला अब सिर्फ अंतिम संस्कार को लेकर विवाद नहीं रहा, बल्कि सार्वजनिक पार्कों के इस्तेमाल के नियम और प्रशासनिक अनुमति की व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर रहा है।
इधर, जैन समाज ने बताया कि नेमीनगर जिनालय में 11 अगस्त को प्राकृताचार्य आचार्य सुनील सागर महाराज के संघस्थ क्षुल्लक सुलब्धि सागर की समाधि हो गई, जिनकी अग्नि क्रिया 12 अगस्त को प्रातः नेमीनगर स्थित विद्यासागर उद्यान में की गई। उद्यान में अंतिम क्रिया पर कहा कि हमारे यहां की यह परंपरा रही है, पहले भी दो समाधियां यहां हुईं, उनका अंतिम संस्कार, उनकी अग्नि क्रिया इसी उद्यान में पहले भी हो चुकी है। यह यहां की परंपरा है और दिगंबर समाज की परंपरा है कि किसी भी साधु का, ऐलक का, क्षुल्लक का या साध्वी का अंतिम संस्कार श्मशान में नहीं करते। या तो हमारी नसिया में करते हैं, अन्यथा जहां परंपरा है, ऐसे अंतिम संस्कार अग्नि क्रिया करने का, वहां किया जा सकता है। इसी परंपरा के तहत आज यह अंतिम संस्कार विद्यासागर उद्यान में संपन्न हुआ। अतः इसमें किसी भी प्रकार की विवाद करने की कोई आवश्यकता नहीं है, यह परंपरा है।
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किताबों की जगह स्कूल में मासूमों से कराई जा रही थी मजदूरी, Video Viral होते ही मचा हड़कंप
सतना। मध्य प्रदेश के सतना से बेहद सनसनीखेज मामला सामने आया है। जिस स्कूल में शिक्षा देकर बच्चों का जीवन संवारने का काम किया जाता है, वहां मासूमों के हाथ में फावड़ा और तगाड़ी पकड़ा दी गई। इसका वीडियो सामने आते विद्यालय प्रबंधन पर सवाल खड़े होने लगे हैं।
दरअसल, पूरा मामला सतना के रामपुर बघेलान ब्लॉक के शासकीय विद्यालय त्योंधरा क्रमांक-1 का है। आरोप है कि स्कूल पहुंचे छात्रों से सड़क पर पड़ी गिट्टी फावड़े से उठवाकर एक जगह से दूसरी जगह ढुलवाई गई। इस पूरे मामले का वीडियो दो दिन पुराना बताया जा रहा है, जो बुधवार को सोशल मीडिया पर वायरल हुआ।
वीडियो में स्कूली बच्चे स्कूल परिसर अथवा आसपास के मार्ग पर फावड़े से गिट्टी उठाते और उसे दूसरी जगह ले जाते दिखाई दे रहे हैं। वीडियो सामने आने के बाद शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है।
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जनाजे को दफनाने की जद्दोजहद: बारिश में कमर तक पहुंचा ‘विकास’, नदी से होकर अंतिम यात्रा पर निकले लोग
सिवनी। मध्य प्रदेश के सिवनी में कुछ घंटे की बारिश ने व्यवस्थाओं की पोल खोलकर रख दी। कई जगह पानी से लबालब हो गए और विकास के सारे दावे पानी में ही डूब गए। लोगों को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए कमर भरे पानी से होकर गुजरना पड़ा। इसका असर जिंदा ही नहीं बल्कि मृत इंसानों पर भी हुआ जिन्हें अंतिम सफर के दौरान भी मुश्किलें झेलनी पड़ी। भौगोलिकसंदर्भ
दरअसल, जिले के लखनादौन तहसील की गणेशगंज ग्राम पंचायत के गंज टोला से बेहद हैरान करने वाली तस्वीरें सामने आई हैं। यहां नाईम शाह नाम के शख्स का निधन हो गया था। लेकिन उन्हें दफनाने के लिए ले जाने वाला रास्ता पानी से भरा हुआ था। लेकिन कड़ी मुश्किलों के बाद करीब 5 फीट गहरे पानी से होते हुए लोग जनाजा लेकर गुजरने को मजबूर नजर आए।
बता दें कि 50 घरों की इस बस्ती में लगभग 500 मतदाता रहते हैं। इसके बावजूद बारिश के दिनों में लोगों को आवागमन की गंभीर समस्या का सामना करना पड़ रहा है। जनाजे को पानी के बीच से ले जाते लोगों की ये तस्वीरें ग्रामीण सुविधाओं और विकास के दावों पर सवाल खड़े कर रही हैं।
टीकमगढ़। टीकमगढ़ जिले में एक निजी स्कूल के टीचर की मारपीट से मासूम बच्ची के कान का पर्दा फटने का माता पिता ने गंभीर आरोप लगाया है। यह पूरा मामला टीकमगढ़ शहर के प्रतिष्ठित पुष्पा इंग्लिश मीडियम स्कूल का है, जहां कक्षा एक में पढ़ने वाली मासूम छात्रा सांभवि तिवारी के साथ स्कूल की अध्यापिका अमृता सिंह पर मारपीट करने व मारपीट से उनकी बेटी के कान के पर्दे में छेद हो जाने का आरोप माता पिता ने लगाया है। वहीं इस मामले की शिकायत माता पिता के द्वारा लिखित रूप से जिला कलेक्टर को भी दी गई है, जिसके बाद कलेक्टर ने पूरे मामले के जांच के आदेश दिए है।
दरअसल यह पूरा मामला टीकमगढ़ शहर के पुष्पा इंग्लिश मीडियम स्कूल का है। जहां कक्षा एक में पढ़ने वाली मासूम छात्रा सांभवि के पिता राजेश तिवारी का आरोप है की पिछले महीने की 15 जुलाई को उनकी बेटी सांभवी के साथ स्कूल में अध्यापिका अमृता सिंह ने मारपीट की थी। जिसकी शिकायत उन्होंने स्कूल प्रबंधन से की थी, लेकिन स्कूल प्रबंधन ने उनकी शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया। मारपीट की घटना के बाद से उनकी बेटी लगातार कान दर्द की शिकायत किया करती थी, जिसके बाद उन्होंने अपनी बेटी को डॉक्टर को दिखाया।
जांच उपरांत डॉक्टर का कहना था की उनकी बेटी के कान के पर्दे में छेद हो गया है जिस कारण उसे दर्द रहता है, पिता का कहना है उन्होंने डॉक्टर की रिपोर्ट से स्कूल वालों को अवगत कराया तो पहले तो उन्होंने बेटी के इलाज में सहयोग करने की बात कही थी। लेकिन बाद में इलाज कराना तो दूर, उन्होंने स्कूल से बेटी का नाम काट कर टीसी पकड़ा दी। आज भी स्कूल प्रबंधन अपनी टीचर का बचाव कर रहा है, जिसके बाद मजबूरन उन्हें जिले के कलेक्टर से पूरे मामले की शिकायत करना पड़ी है।
वहीं शिकायत के बाद इस पूरे मामले की जांच कराने की टीकमगढ़ कलेक्टर ने बात कही है। वहीं जब स्कूल प्रबंधन से इस सम्बंध में बात की गई तो उन्होंने स्वीकार किया की टीचर ने बच्ची को मारा है। प्रिंसिपल ने कहा कि हमने छात्रा के माता पिता को पूरा सहयोग किया और हमने बच्ची के इलाज के लिये भी अपने स्तर से नाक कान गला विशेषज्ञों से बात कर ली थी। लेकिन उनके परिजन इलाज को राजी नहीं हुए, वे अपने बच्चे का इलाज ग्वालियर कराना चाहते थे। हमने उन्हें पूरा सहयोग किया है वही टीसी काटने की बात है तो छात्रा के माता पिता ने ही स्कूल से नाम कटवाने का फॉर्म भर कर हमें दिया था। रहा मारपीट का सवाल तो टीचर ने बच्चे के साथ ऐसी कोई गंभीर मारपीट नहीं की है।
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खजराना गणेश मंदिर में कड़ी सुरक्षा के बीच खुलीं दान पेटियां: दो दिन में 72 लाख से ज्यादा चढ़ावा
इंदौर। अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी का मामला सामने आने के बाद देशभर के प्रमुख मंदिरों में दान राशि की सुरक्षा और गिनती की व्यवस्था को लेकर सतर्कता बढ़ गई है। इसी कड़ी में इंदौर के प्रसिद्ध खजराना गणेश मंदिर में भी लंबे समय से बंद दान पेटियों को कड़ी सुरक्षा के बीच खोला गया है। करीब साढ़े तीन महीने बाद शुरू हुई चढ़ावे की गिनती में दो दिनों के भीतर ही 72 लाख रुपये से अधिक की नकद राशि सामने आ चुकी है।मंदिर प्रबंधन के मुताबिक दान पेटियों को खोलने से लेकर राशि की गिनती और बैंक में जमा कराने तक पूरी प्रक्रिया निगरानी में की जा रही है। इस दौरान कर्मचारियों की जांच, सीसीटीवी निगरानी और वीडियोग्राफी जैसी व्यवस्थाएं की गई हैं।
खजराना गणेश मंदिर परिसर में 40 से अधिक दान पेटियां हैं। करीब साढ़े तीन महीने तक बंद रहने के बाद इन पेटियों को चरणबद्ध तरीके से खोला जा रहा है। अब तक 25 से अधिक दान पेटियां खोली जा चुकी हैं।इन पेटियों से निकली राशि की गिनती का काम लगातार जारी है। सिर्फ दो दिनों में करीब 72 लाख रुपये से अधिक की नकदी गिनी जा चुकी है। बाकी दान पेटियों की गिनती पूरी होने के बाद चढ़ावे की कुल राशि और बढ़ने की संभावना है।मंदिर प्रबंधन के अनुसार पूरी प्रक्रिया को पूरा करने में करीब 5 से 6 दिन का समय लग सकता है।
इस बार दान पेटियों की गिनती के दौरान सुरक्षा व्यवस्था पर खास जोर दिया गया है। पेटियां खोलने से लेकर नोटों की गिनती और राशि को बैंक तक पहुंचाने की प्रक्रिया तक निगरानी रखी जा रही है।मौके पर पांच सुरक्षा गार्ड तैनात किए गए हैं। इसके अलावा चार सीसीटीवी कैमरों से पूरे परिसर और गिनती की प्रक्रिया पर नजर रखी जा रही है। गिनती में शामिल कर्मचारियों को जांच के बाद ही अंदर प्रवेश दिया जा रहा है।पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी भी कराई जा रही है, ताकि चढ़ावे की गिनती में पारदर्शिता बनी रहे और पूरी प्रक्रिया का रिकॉर्ड सुरक्षित रखा जा सके।
चढ़ावे की गिनती के लिए अलग-अलग विभागों के कर्मचारियों को जिम्मेदारी दी गई है। बैंक, कोषालय और नगर निगम के कर्मचारियों समेत करीब 25 लोगों की टीम इस पूरी प्रक्रिया में जुटी है।दान पेटियों से निकलने वाली नकदी को गिनने के बाद उसका रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है। इसके बाद राशि को अधिकृत बैंक खाते में जमा कराया जा रहा है।यानी दान पेटी खुलने से लेकर बैंक में राशि जमा होने तक हर चरण को रिकॉर्ड और निगरानी के दायरे में रखा गया है।
खजराना गणेश मंदिर की दान पेटियों में भक्तों ने सिर्फ नकदी ही नहीं चढ़ाई है। गिनती के दौरान चांदी की गणेश प्रतिमा, करीब 10 ग्राम वजन के चांदी के सिक्के और स्मार्ट वॉच जैसी वस्तुएं भी मिली हैं।इसके अलावा करीब 10 साल पहले बंद हो चुके 1000 रुपये के पुराने नोट भी दान पेटियों से मिले हैं। इन वस्तुओं और पुराने नोटों को भी अलग से सुरक्षित रखा जा रहा है।
मंदिर में चढ़ावे की रकम का बड़ा हिस्सा भक्तों की आस्था से जुड़ा होता है। ऐसे में दान पेटियों की गिनती के दौरान सुरक्षा के साथ-साथ पारदर्शिता भी अहम हो जाती है। यही वजह है कि इस बार पूरी प्रक्रिया को कई स्तरों की निगरानी में रखा गया है।मंदिर के मुख्य पुजारी अशोक भट्ट, मंदिर प्रबंधक और अन्य अधिकारी भी गिनती की प्रक्रिया पर नजर बनाए हुए हैं। अधिकारियों और कर्मचारियों की मौजूदगी में पेटियां खोली जा रही हैं और प्राप्त राशि का हिसाब दर्ज किया जा रहा है।
खजराना गणेश मंदिर में दान पेटियों की गिनती अभी पूरी नहीं हुई है। 40 से अधिक पेटियों में से 25 से अधिक पेटियां खोली जा चुकी हैं और दो दिनों में ही 72 लाख रुपये से ज्यादा की राशि सामने आ चुकी है।ऐसे में बाकी पेटियों की गिनती पूरी होने के बाद चढ़ावे की कुल रकम कितनी पहुंचती है, इस पर सभी की नजर है। फिलहाल मंदिर प्रबंधन की टीम सुरक्षा और पारदर्शिता के साथ गिनती की प्रक्रिया को पूरा करने में जुटी है।
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दूध की जगह वनस्पति से बना पनीर मध्य प्रदेश में हुआ बैन, सीएम ने जारी किया आदेश
भोपाल. महाराष्ट्र, गुजरात और छत्तीसगढ़ की तर्ज पर अब मध्य प्रदेश में भी एनालॉग पनीर पर प्रतिबंध लगा दिया गया है. बुधवार 12 अगस्त को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुजरात रवाना होने से पहले खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के अधिकारियों की बैठक में इसके उत्पादन, बिक्री और इस्तेमाल पर रोक लगाने के आदेश दिए.
बता दें कि एनालॉग पनीर को असली दूध से बने पनीर के विकल्प के तौर पर तैयार किया जाता है. इसमें दूध की जगह या दूध के साथ वनस्पति वसा, स्टार्च और अन्य सामग्री का इस्तेमाल किया जाता है. इसकी कम कीमत के कारण बाजार में इसकी खपत तेजी से बढ़ी है. मुख्यमंत्री ने कहा मध्य प्रदेश में एनालॉग पनीर पर हम प्रतिबंध लगा रहे हैं. जैसा अन्य राज्यों ने लगाया है. हम प्राकृतिक रूप से दुग्ध उत्पादन को बढ़ाएंगे और प्राकृतिक रूप से ही पनीर बनाएंगे.
मध्य प्रदेश में एनालॉग पनीर की रोजाना आवक और बिक्री करीब 300 से 400 क्विंटल होने का अनुमान है. इस हिसाब से प्रदेश में हर महीने करीब 9 हजार से 12 हजार क्विंटल, यानी 900 से 1200 टन एनालॉग पनीर खपने की बात सामने आई है. बड़ी मात्रा में इसकी बिक्री को देखते हुए सरकार ने अब इस पर सख्ती का निर्णय लिया है.
एनालॉग पनीर की बिक्री को लेकर राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग ने भी नाराजगी जताई है. आयोग ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए मध्य प्रदेश समेत अन्य राज्यों को पत्र लिखने का फैसला किया है. आयोग की ओर से राज्यों से इस तरह के उत्पाद की बिक्री और लोगों के स्वास्थ्य पर पडऩे वाले संभावित प्रभाव को लेकर जानकारी मांगे जाने की संभावना है. आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो ने कहा कि एनालॉग पनीर घातक है. इसके लिए एफएसएसएआई को नोटिस देकर पूछ रहे हैं कि इस तरह के पनीर को बेचने की इजाजत क्यों दे रहे हैं.
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