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भोपाल। विज्ञान और तकनीक के इस दौर में भी समाज के भीतर बैठा अंधविश्वास का जिन्न मासूमों की जिंदगी निगल रहा है। मध्य प्रदेश के बैतूल जिले से एक ऐसा रोंगटे खड़े कर देने वाला वाकया सामने आया है जिसने यह साबित कर दिया है कि अज्ञानता और तंत्र-मंत्र का नशा इंसान को हैवान बना देता है। मुलताई थाना क्षेत्र के ग्राम ताईखेड़ा में महज एक अंधविश्वास और सनक के चलते दो लोगों ने 12 साल के मासूम बच्चे अंकुश आहके की बेरहमी से हत्या कर दी। पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए महज 48 घंटे के भीतर इस सनसनीखेज और खौफनाक हत्याकांड का पर्दाफाश कर दोनों ओझा-तांत्रिक प्रवृत्ति के हत्यारों को गिरफ्तार कर लिया है।

मुलताई पुलिस की गिरफ्त में आए आरोपियों सुदामा इनवाती और राकेश उइके ने पूछताछ में जो खुलासा किया, उसने अंधविश्वास के भयानक चेहरे को सामने ला दिया है। आरोपियों ने बताया कि उन्हें मृतक बच्चे की मां पर शक था कि वह ‘जादू-टोना’ करती है। आरोपियों के मन में यह अंधविश्वास बैठ चुका था कि इसी कथित जादू-टोने के कारण उनके परिवार में वर्षों से कोई संतान पैदा नहीं हो रही है।

वारदात की शुरुआत 20 जून को हुई, जब गांव का ही सुदामा इनवाती 12 वर्षीय अंकुश को खेलने के बहाने अपने साथ बुलाकर ले गया। मासूम बच्चा बिना यह जाने कि वह अपने ही मौत के सौदागर के साथ जा रहा है, उसके साथ चला गया। आरोपी उसे सालईढाना के घने जंगल में ले गए। वहां दोनों ने मिलकर पहले बच्चे पर लोहे की रॉड से ताबड़तोड़ हमला किया और फिर रस्सी से गला घोंटकर उसकी निर्मम हत्या कर दी।

हैवानियत की हद पार करते हुए आरोपियों ने हत्या के बाद मासूम अंकुश के शव को एक बोरी में ठूंसकर बांधा और साक्ष्य छुपाने के लिए जंगल के एक गहरे नाले में फेंक दिया। जब बच्चा घर नहीं लौटा, तो मां संगीता आहके ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। एसपी वीरेंद्र जैन के निर्देशन में बनी स्पेशल टीम ने जब संदेही सुदामा को हिरासत में लेकर कड़ाई से पूछताछ की, तो अंधविश्वास की यह खूनी कहानी सामने आ गई। पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर नाले से शव बरामद कर लिया है।

इस दिल दहला देने वाली घटना के बाद बैतूल एसपी वीरेंद्र जैन ने समाज से अपील की है कि समाज में फैली जादू-टोना, डायन या अंधविश्वास जैसी कुरीतियों और अफवाहों से लोग पूरी तरह दूर रहें। यह अज्ञानता सिर्फ और सिर्फ विनाश की ओर ले जाती है। यदि किसी को कोई शंका या विवाद है, तो पुलिस और कानून की मदद लें। इस मामले के आरोपियों को सख्त से सख्त सजा दिलाई जाएगी ताकि समाज में एक कड़ा संदेश जाए।

 

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गौरक्षकों की रिहाई को लेकर राष्ट्रपति के नाम ज्ञापनः सर्व हिंदू समाज ने की उम्रकैद की सजा पाए 14 लोगों को रिहा करने की मांग

भोपाल/नीमच। मध्यप्रदेश के नीमच जिले के सर्व हिंदू समाज ने राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपकर सिवनी मालवा प्रकरण में आजीवन कारावास की सजा पाए 14 गौरक्षकों को रिहा करने की मांग की है।

दरअसल सर्व हिंदू समाज जिला नीमच ने राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन देकर शिवनी मालवा मामले में आजीवन कारावास की सजा पाए 14 गौरक्षकों को रिहा करने की मांग की है। ज्ञापन में कहा गया कि गौरक्षा का कार्य करने वाले लोग गौसेवा और समाजहित की भावना से काम करते हैं। सजा के बाद उनके परिवारों को आर्थिक और सामाजिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

समाज के प्रतिनिधियों ने राष्ट्रपति से मानवीय आधार पर मामले पर विचार करने और प्रभावित परिवारों को राहत देने का आग्रह किया। ज्ञापन में न्यायपालिका और संविधान के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए कहा गया कि यदि संवैधानिक प्रावधानों के तहत कोई राहत संभव हो तो उस पर विचार किया जाए। इस दौरान बड़ी संख्या में समाजजन और गौसेवक मौजूद रहे। सर्व हिंदू समाज के निर्मल देवड़ा ने कहा कि समाज राष्ट्रपति से 14 गौरक्षकों की रिहाई की मांग कर रहा है।

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चंदे पर सियासत: नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार का RSS पर सीधा वार- ‘मंदिरों से पहले RSS करे चंदे की जानकारी सार्वजनिक’

 भोपाल। मध्य प्रदेश की सियासत में एक बार फिर मंदिर, चंदा और पारदर्शिता को लेकर जोरदार घमासान छिड़ गया है। इस बार निशाने पर सीधे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ है। मध्य प्रदेश विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने मंदिरों के चंदे और उनकी व्यवस्थाओं को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच एक बड़ा और बेहद तीखा बयान जारी किया है। सिंघार ने सीधे तौर पर चुनौती देते हुए पूछा है कि मंदिरों के चंदे पर नजर रखने वाले लोग खुद अपने चंदें का हिसाब जनता को कब देंगे? वहीं नेता प्रतिपक्ष के इस बयान के बाद प्रदेश का सियासी पारा अचानक सातवें आसमान पर पहुंच गया है।

उमंग सिंघार ने मंदिरों की व्यवस्थाओं और चंदे को लेकर हो रही राजनीति पर ऐतराज जताया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि मंदिरों के चंदे पर बात करने से पहले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) को मिलने वाले चंदे की जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए। जनता को यह जानने का पूरा हक है कि संघ के पास कितना चंदा आता है और वह कहां जाता है? आखिर इस पर चुप्पी क्यों है?

सिंघार ने देश और प्रदेश के मौजूदा हालातों पर चिंता जताते हुए भारतीय जनता पार्टी और उससे जुड़े संगठनों पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि देश के अंदर जो हालात बन चुके हैं उसमें अब मंदिरों को भी नहीं छोड़ा जा रहा है। हर तरफ बस घोटाले ही घोटाले सामने आ रहे हैं। ऐसे में डर इस बात का है कि कहीं इन्हीं लोगों के हाथों में मंदिरों की पूरी जिम्मेदारी न सौंप दी जाए।

नेता प्रतिपक्ष ने व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि आज सबसे बड़ा मुद्दा यह होना चाहिए कि धार्मिक स्थलों और सरकारी व्यवस्थाओं में हो रहे घोटालों को कैसे रोका जाए। उन्होंने मांग की कि असली पारदर्शिता तब आएगी जब नियंत्रण जनता के हाथ में होगा। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सवाल दागते हुए कहा कि पारदर्शिता जनता के हाथ में कब आएगी? सिर्फ विपक्ष या आम लोगों से हिसाब मांगने वाले खुद के चंदे को लेकर इतने अपारदर्शी क्यों बने हुए हैं?

 

इंदौर। बेटमा थाना क्षेत्र के पंथ बड़ोदिया गांव में एक किसान के कथित अपहरण और 20 लाख रुपये की फिरौती मांगने के मामले ने सनसनी फैला दी। किसान के स्वजन को उसके गले पर चाकू रखे हुए फोटो भेजकर फिरौती की मांग की गई। सूचना मिलते ही पुलिस और ग्रामीण पूरी रात किसान की तलाश में जुटे रहे। आखिरकार सोमवार अलसुबह किसान गांव से करीब डेढ़ किलोमीटर दूर एक खेत में शराब के नशे में बेसुध अवस्था में मिला।

जानकारी के अनुसार ग्राम पंथ बड़ोदिया निवासी हुकुम सिंह सोलंकी रविवार रात करीब 8.30 बजे घर से खेत में मुरम डलवाने की बात कहकर निकले थे। देर रात तक वापस नहीं लौटने पर परिजनों ने उनकी तलाश शुरू की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। रात करीब 12.30 बजे हुकुम सिंह के मोबाइल से उनके बड़े भाई चैन सिंह के फोन पर एक फोटो भेजी गई। फोटो में हुकुम सिंह जमीन पर लेटे दिखाई दे रहे थे और उनके गले पर चाकू रखा हुआ था। तस्वीर में चाकू पकड़ने वाले व्यक्ति का केवल हाथ नजर आ रहा था। इसके बाद हुकुम सिंह के मोबाइल से ही व्हाट्सएप कॉल कर अज्ञात व्यक्ति ने 20 लाख रुपये की फिरौती मांगी और धमकी दी कि निर्धारित स्थान पर रकम नहीं पहुंचाई गई तो किसान की हत्या कर दी जाएगी।

कुछ देर बाद किसान की बेटी प्राची ने पिता के मोबाइल पर कॉल किया तो एक अज्ञात व्यक्ति ने फोन उठाकर कहा कि “तुम्हारे घर के सदस्य का हमने अपहरण कर लिया है” और कॉल काट दी। घटना की सूचना मिलते ही बेटमा पुलिस सक्रिय हुई और गांव सहित आसपास के क्षेत्रों में सघन सर्च ऑपरेशन शुरू किया गया। ग्रामीणों ने भी पूरी रात पुलिस का सहयोग करते हुए खेतों और सुनसान इलाकों में तलाश अभियान चलाया।

सोमवार सुबह किसान हुकुम सिंह गांव से करीब डेढ़ किलोमीटर दूर एक खेत में नशे की हालत में मिले। उन्हें सुरक्षित घर लाया गया। हालांकि पूरे घटनाक्रम को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं और पुलिस मामले को संदेहास्पद मानकर हर पहलू की जांच कर रही है। परिजनों ने बताया कि हाल ही में पश्चिमी रिंग रोड परियोजना के लिए अधिग्रहित हुई पैतृक कृषि भूमि के बदले परिवार को कुल 1 करोड़ 72 लाख रुपये का मुआवजा मिला था। इसमें 1 करोड़ 32 लाख रुपये हुकुम सिंह और 40 लाख रुपये उनकी पत्नी के खाते में जमा हुए थे। इसी वजह से परिवार ने आशंका जताई है कि मुआवजे की राशि के लालच में अपहरण और फिरौती की साजिश रची गई हो सकती है।

एडिशनल एसपी राजकृष्णा ने बताया कि पुलिस की पहली प्राथमिकता किसान को सुरक्षित तलाशना थी, जिसमें सफलता मिली है। अब पूरे घटनाक्रम की गहन जांच की जा रही है। प्रारंभिक जांच में मामला संदिग्ध प्रतीत हो रहा है। किसान से पूछताछ की जा रही है और यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि उसके साथ वास्तव में क्या हुआ था तथा फिरौती मांगने वालों की भूमिका क्या है।

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लखनऊ अग्निकांड के बाद इंदौर में एक्शन: फायर सेफ्टी में मिली खामियां, 12 से ज्यादा कोचिंग सेंटर सील

इंदौर। लखनऊ में बहुमंजिला इमारत में लगी भीषण आग में 15 लोगों की मौत के बाद इंदौर जिला प्रशासन और नगर निगम अलर्ट मोड पर हैं। शहरभर में फायर सेफ्टी मानकों की जांच शुरू कर दी गई है। इसी कड़ी में प्रशासन ने फायर सेफ्टी नियमों का पालन नहीं करने वाले 12 से ज्यादा संस्थानों पर कार्रवाई करते हुए उन्हें सील कर दिया।

प्रशासनिक टीम ने जांच के दौरान पाया कि कई संस्थानों में आग लगने की स्थिति से निपटने के लिए आवश्यक उपकरण मौजूद नहीं थे। वहीं कुछ स्थानों पर आपातकालीन निकास और सुरक्षा संबंधी अन्य व्यवस्थाएं भी अधूरी मिलीं। इसके बाद एसडीएम धनश्याम धनगर के नेतृत्व में कार्रवाई करते हुए कई संस्थानों को सील किया गया। नगर निगम और फायर सेफ्टी विभाग की संयुक्त टीम ने शहर के विभिन्न क्षेत्रों में निरीक्षण किया। कार्रवाई के दौरान माखनवाला रसोई रेस्टोरेंट और रामानुजन कोचिंग सेंटर को सील कर दिया गया।

वहीं फायर सेफ्टी विभाग की टीम कैटेलाइजर कोचिंग क्लास में भी जांच के लिए पहुंची। जहां सुरक्षा मानकों को लेकर शिकायतें मिली थीं। कोचिंग संस्थानों और व्यावसायिक भवनों में फायर सेफ्टी को लेकर लगातार शिकायतें मिल रही थीं। जांच में कई जगह अग्निशमन यंत्र, फायर अलार्म और अन्य सुरक्षा संसाधनों की कमी सामने आई।

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि नियमों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों के खिलाफ आगे भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। जिला प्रशासन और नगर निगम की टीम ने भवन संचालकों को फायर सेफ्टी मानकों का पालन करने के निर्देश दिए हैं। एसडीएम धनश्याम धनगर का कहना है कि लोगों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी

 

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गैस पाइपलाइन ब्लास्ट : सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर समेत 4 लोग झुलसे, इलाके में फैली दहशत

इंदौर । मध्य प्रदेश के इंदौर में मंगलवार को अवंतिका गैस पाइपलाइन में विस्फोट होने से हड़कंप मच गया। यह हादसा विजय नगर थाना क्षेत्र के सुमन नगर जैन मंदिर के पास हुआ। विस्फोट में विजय पटेल समेत चार लोग झुलस गए। घायलों में सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर राजकुमारी झाला भी शामिल हैं। सभी घायलों को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

पुलिस के अनुसार जिस जगह हादसा हुआ, वहां स्थानीय पार्षद बालमुकुंद सोनी की ओर से बोरिंग का काम कराया जा रहा था। इसी दौरान अवंतिका गैस की पाइपलाइन क्षतिग्रस्त हो गई और उसमें से गैस का रिसाव शुरू हो गया। कुछ देर बाद गैस ने आग पकड़ ली, जिससे जोरदार धमाका हो गया।

विस्फोट की तेज आवाज सुनकर आसपास के लोग घबरा गए और अपने घरों से बाहर निकल आए। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक धमाका इतना तेज था कि पूरे इलाके में कुछ समय के लिए दहशत का माहौल बन गया। घटना के बाद मौके पर लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई।

हादसे में झुलसे चारों लोगों को तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां उनका इलाज जारी है। प्रशासन ने फिलहाल अन्य घायलों की पहचान और उनकी स्वास्थ्य स्थिति को लेकर विस्तृत जानकारी जारी नहीं की है।

घटना की सूचना मिलते ही विजय नगर थाना पुलिस, फायर ब्रिगेड और राहत-बचाव दल मौके पर पहुंच गए। सुरक्षा के मद्देनजर पूरे क्षेत्र की घेराबंदी कर दी गई और हालात को नियंत्रित करने के लिए राहत कार्य शुरू किया गया।

हादसे के बाद संबंधित विभागों ने गैस सप्लाई और पाइपलाइन की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों की टीम यह पता लगाने में जुटी है कि पाइपलाइन किस वजह से क्षतिग्रस्त हुई और विस्फोट किन परिस्थितियों में हुआ। फिलहाल धमाके के सटीक कारणों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

 

अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे और दान प्रबंधन से जुड़े अनियमितताओं के मामले में गठित विशेष जांच दल (SIT) ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट उत्तर प्रदेश सरकार को सौंप दी है। रिपोर्ट में मंदिर ट्रस्ट की कार्यप्रणाली में व्यापक सुधार की आवश्यकता जताते हुए ट्रस्ट के पुनर्गठन और किसी वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी को मुख्य कार्यकारी अधिकारी के रूप में नियुक्त करने का सुझाव दिया गया है।

सूत्रों के अनुसार, SIT ने दान राशि की गणना, निगरानी व्यवस्था और जवाबदेही से जुड़े कई पहलुओं की समीक्षा की है। जांच के दौरान चढ़ावे की गिनती से जुड़े कर्मचारियों, ट्रस्ट पदाधिकारियों और अन्य संबंधित व्यक्तियों से पूछताछ की गई। रिकॉर्ड, बैंक दस्तावेजों और सीसीटीवी फुटेज की भी जांच की गई, ताकि दान प्रबंधन प्रणाली में किसी संभावित खामी या अनियमितता का पता लगाया जा सके।

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में बड़े प्रशासनिक बदलाव की संभावना मजबूत हो गई है। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित एसआईची ने राम मंदिर में चढ़ावे के कथित गबन या अनियमितताओं की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट सरकार को सौंप दी है। रिपोर्ट में ट्रस्ट की कार्यप्रणाली में सुधार, पेशेवर प्रबंधन और सीईओ की नियुक्ति की सिफारिश की गई है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि मंदिर जैसी विशाल धार्मिक संस्था में वित्तीय और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को अधिक पारदर्शी बनाने की जरूरत है। इसी उद्देश्य से पेशेवर प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करने, निगरानी तंत्र को आधुनिक बनाने और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए CEO नियुक्त करने का सुझाव सामने आया है।

जानकारी के मुताबिक यह अंतिम रिपोर्ट नहीं है, बल्कि जांच का प्रारंभिक निष्कर्ष है। एसआईटी को आगे भी कई बिंदुओं पर जांच जारी रखनी है। इसलिए सरकार फिलहाल इस रिपोर्ट का अध्ययन कर रही है और आगे की कार्रवाई अंतिम रिपोर्ट तथा उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर तय की जाएगी। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए SIT ने जांच के दौरान ट्रस्ट और मंदिर प्रशासन से जुड़े कुछ अधिकारियों को अयोध्या में उपलब्ध रहने के निर्देश भी दिए थे। जांच का दायरा सिर्फ दान प्रबंधन तक सीमित नहीं है बल्कि नियुक्तियों और प्रशासनिक प्रक्रियाओं की भी समीक्षा की जा रही है। गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश सरकार ने जून में इस मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय SIT का गठन किया था।

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सिंधु जल संधि विवाद : पाकिस्तान की युद्ध की धमकी पर भारत ने दिया मुंहतोड़ जवाब

नई दिल्ली। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ द्वारा सिंधु जल संधि और भारत के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की चेतावनी दिए जाने के बाद भारत ने कड़ा जवाब दिया है। विदेश मंत्रालय ने साफ कहा है कि पाकिस्तान ऐसे बयान अपनी आंतरिक विफलताओं, मानवाधिकार उल्लंघनों और अवैध कब्जे वाले क्षेत्रों में बढ़ते जनाक्रोश से ध्यान हटाने के लिए देता है। भारत ने पाकिस्तान के सभी आरोपों और दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि पाकिस्तान की ओर से लगाए जा रहे आरोप पूरी तरह निराधार हैं। उन्होंने कहा कि भारत इन मनगढ़ंत दावों को सिरे से खारिज करता है। जायसवाल के मुताबिक, पाकिस्तान लगातार ऐसे मुद्दे उठाकर दुनिया का ध्यान अपनी घरेलू समस्याओं से हटाने की कोशिश करता है।

उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में हो रहे विरोध प्रदर्शनों और वहां के लोगों की समस्याओं की ओर भी दिलाया।

भारत ने कहा कि पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले क्षेत्रों में वर्षों से आर्थिक शोषण, नागरिक अधिकारों का हनन और प्रशासनिक दमन जारी है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, इन नीतियों के खिलाफ स्थानीय लोगों का विरोध बढ़ रहा है। जायसवाल ने आरोप लगाया कि विरोध प्रदर्शनों को दबाने के लिए पाकिस्तानी प्रशासन पुलिस बल का इस्तेमाल कर रहा है। साथ ही आवश्यक वस्तुओं और दवाओं की आपूर्ति रोकने, इंटरनेट सेवाएं बंद करने और निहत्थे नागरिकों के खिलाफ कठोर कार्रवाई जैसे कदम उठाए जा रहे हैं।

भारत ने एक बार फिर दोहराया कि सिंधु जल संधि को लेकर उसका रुख नहीं बदला है। सरकार का कहना है कि जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद को पूरी तरह और विश्वसनीय तरीके से बंद नहीं करता, तब तक संधि स्थगित रहेगी।

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने एक टीवी इंटरव्यू में कहा था कि पानी पाकिस्तान की राष्ट्रीय सुरक्षा का अहम हिस्सा है। उन्होंने दावा किया कि यदि भारत सिंधु नदी के जल प्रवाह को रोकने की कोशिश करता है तो पाकिस्तान इसे गंभीर खतरे के रूप में देखेगा और सैन्य कार्रवाई से पीछे नहीं हटेगा। उनके इस बयान के बाद दोनों देशों के बीच सिंधु जल संधि को लेकर बहस और तेज हो गई है।

भारत ने पिछले महीने सिंधु जल संधि के तहत कथित रूप से गठित कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन के फैसले को भी अवैध बताते हुए अस्वीकार कर दिया था। भारत का कहना है कि यह अदालत वैध प्रक्रिया के तहत गठित नहीं की गई थी, इसलिए उसके फैसले का कोई कानूनी महत्व नहीं है।

भारत ने यह भी स्पष्ट किया कि पहलगाम आतंकी हमले के बाद राष्ट्रीय सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत अपने अधिकारों का उपयोग करते हुए संधि को स्थगित किया गया था। सरकार का कहना है कि आतंकवाद के खिलाफ ठोस और स्थायी कार्रवाई के बिना स्थिति में कोई बदलाव नहीं होगा।

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अन्ना हजारे का बड़ा ऐलान! RTI नियमों पर महाराष्ट्र सरकार को अल्टीमेटम, बदलाव वापस नहीं लेने पर 5 जुलाई से करेंगे अनशन

मुंबई। सूचना के अधिकार (RTI) को लेकर एक बार फिर देश में बड़ा आंदोलन खड़ा हो सकता है। भ्रष्टाचार के खिलाफ कई ऐतिहासिक आंदोलनों का नेतृत्व कर चुके सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने महाराष्ट्र सरकार को सीधी चेतावनी दी है। उन्होंने कहा है कि यदि RTI नियमों में किए गए नए बदलाव वापस नहीं लिए गए तो वह 5 जुलाई से अपने गांव रालेगण सिद्धि में आमरण अनशन शुरू करेंगे। अन्ना का आरोप है कि नए नियम पारदर्शिता को कमजोर करेंगे और आम लोगों के सूचना पाने के अधिकार को सीमित कर देंगे।

अन्ना हजारे ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखकर महाराष्ट्र सरकार के 'महाराष्ट्र सूचना का अधिकार नियम, 2026' पर कड़ी आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि, 12 जून को लागू किए गए नए नियम सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की मूल भावना के खिलाफ हैं। उनके मुताबिक, इन बदलावों से नागरिकों के लिए सरकारी जानकारी हासिल करना पहले की तुलना में अधिक कठिन और महंगा हो जाएगा।

अपने पत्र में अन्ना हजारे ने साफ कहा है कि, अगर सरकार नए RTI नियमों को तुरंत वापस नहीं लेती, तो वह 5 जुलाई से अहिल्यानगर (पूर्व अहमदनगर) जिले के रालेगण सिद्धि स्थित यादव बाबा मंदिर में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि वह अपने फैसले से पीछे नहीं हटेंगे, चाहे इसके लिए उन्हें अपनी जान की बाजी ही क्यों न लगानी पड़े।

अन्ना हजारे ने RTI आवेदन शुल्क बढ़ाने का सबसे ज्यादा विरोध किया है। उनका कहना है कि सरकार ने फीस बढ़ाने के पीछे कोई ठोस आर्थिक कारण या वित्तीय विश्लेषण पेश नहीं किया है। उन्होंने कहा कि सूचना का अधिकार कानून सरकार के लिए कमाई का जरिया नहीं, बल्कि नागरिकों को जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करने वाला कानून है। उनका मानना है कि, अगर 20 साल बाद आवेदन शुल्क बढ़ाया जा रहा है, तो सूचना देने में लापरवाही या इनकार करने वाले अधिकारियों पर लगने वाला जुर्माना भी बढ़ाया जाना चाहिए।

नए नियमों के तहत RTI आवेदन के साथ पहचान पत्र देना अनिवार्य किया गया है। अन्ना हजारे ने इस प्रावधान का भी विरोध किया है। उनका कहना है कि RTI अधिनियम की धारा 6(2) के अनुसार किसी भी आवेदक को अपनी व्यक्तिगत जानकारी या सूचना मांगने का कारण बताने की आवश्यकता नहीं होती। ऐसे में पहचान पत्र अनिवार्य करना व्हिसलब्लोअर, सामाजिक कार्यकर्ताओं और भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने वाले लोगों की सुरक्षा के लिए खतरा बन सकता है।

अन्ना हजारे ने सरकार के 'एक विषय, एक आवेदन' नियम को भी अव्यावहारिक बताया है। उनके अनुसार, इससे नागरिकों को एक ही विभाग से जुड़ी अलग-अलग जानकारियों के लिए कई आवेदन करने पड़ेंगे। इससे न केवल प्रक्रिया जटिल होगी, बल्कि लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ भी पड़ेगा। उनका कहना है कि इससे पारदर्शिता बढ़ने के बजाय सूचना प्राप्त करना और मुश्किल हो जाएगा।

अन्ना हजारे ने कई अन्य नए प्रावधानों पर भी आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि आवेदक के अनुपस्थित रहने पर अपील खारिज करना, आवेदक की मृत्यु होने पर मामला खुद ही समाप्त कर देना, सूचना आयोग में सुनवाई के दौरान कानूनी सहायता पर रोक लगाना और बार-बार आवेदन करने वालों पर प्रतिबंध जैसी व्यवस्थाएं नागरिकों के अधिकारों को कमजोर करेंगी। उनका कहना है कि सरकार को प्रक्रिया आसान बनानी चाहिए, न कि उसे अधिक तकनीकी और जटिल।

अन्ना हजारे का कहना है कि सरकार को RTI कानून की धारा 4 का प्रभावी पालन करना चाहिए। इस धारा के तहत सरकारी विभागों को अधिक से अधिक जानकारी स्वयं सार्वजनिक करनी चाहिए, ताकि लोगों को बार-बार RTI आवेदन दाखिल करने की जरूरत ही न पड़े। उनके अनुसार, इससे पारदर्शिता भी बढ़ेगी और सरकारी विभागों पर अनावश्यक बोझ भी कम होगा।

 

इंदौर। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह अपने इंदौर दौरे के दौरान एक बार फिर आक्रामक अंदाज में नजर आए। मीडिया से चर्चा करते हुए उन्होंने नीट परीक्षा (NEET EXAM), राम मंदिर की दान राशि और योग दिवस समेत कई मुद्दों पर केंद्र और राज्य की भाजपा सरकार को आड़े हाथो लिया।

नीट परीक्षा को लेकर देश भर में चल रहे घटनाक्रमों के बीच दिग्विजय सिंह ने अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यह अच्छा है कि परीक्षा किसी तरह अच्छें से पूरी हो गई लेकिन उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर तीखा निशाना साधा। दिग्विजय सिंह ने केंद्रीय मंत्री की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए सरकार को घेरा।

अयोध्या के श्री राम मंदिर की दान राशि चोरी होने के मामले को लेकर भी पूर्व मुख्यमंत्री बोले। उन्होंने इस पूरे मामले को लेकर सरकार की कार्यप्रणाली पर तीखा तंज कसा और पारदर्शिता पर सवाल उठाए। इसके अलावा, योग दिवस के आयोजन को लेकर भी उन्होंने अपनी बात रखी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर जुबानी हमला बोला।

 

जबलपुर. मध्य प्रदेश में सड़क निर्माण कार्यों से जुड़े कथित भ्रष्टाचार और मनी लांड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए जबलपुर और रीवा जिले के कई ठिकानों पर छापेमार कार्रवाई की है. जांच के दौरान एजेंसी ने 23.50 लाख रुपये नकद जब्त किए हैं, जबकि 2.93 करोड़ रुपये की बैंक जमा राशि और सावधि जमा खातों को फ्रीज कर दिया गया है. ईडी की इस कार्रवाई के बाद सड़क निर्माण परियोजनाओं में हुए कथित वित्तीय घोटाले को लेकर प्रदेश में हलचल तेज हो गई है.

प्रवर्तन निदेशालय की यह कार्रवाई मध्य प्रदेश पुलिस के आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ द्वारा दर्ज विभिन्न प्रकरणों के आधार पर की गई है. एजेंसी धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत मामले की जांच कर रही है. प्रारंभिक जांच में सामने आए तथ्यों ने संकेत दिया है कि सड़क निर्माण कार्यों में डामर की आपूर्ति और उपयोग के नाम पर बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा किया गया तथा सरकारी धन का दुरुपयोग कर करोड़ों रुपये की हेराफेरी की गई.

जांच एजेंसियों के अनुसार कुछ निजी ठेकेदारों ने मध्य प्रदेश ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकरण की परियोजना क्रियान्वयन इकाई के अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ मिलकर कथित रूप से सुनियोजित तरीके से सरकारी धन का दुरुपयोग किया. आरोप है कि सड़क निर्माण में प्रयुक्त होने वाले बिटुमेन की खरीद और उपयोग दर्शाने के लिए सार्वजनिक क्षेत्र की प्रमुख तेल कंपनियों के नाम पर फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए और इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर सरकारी भुगतान हासिल किया गया.

जांच में यह तथ्य सामने आया है कि इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी कंपनियों के नाम पर लगभग 55.60 करोड़ रुपये मूल्य के कथित फर्जी और जाली इनवॉइस प्रस्तुत किए गए. इन दस्तावेजों को वास्तविक दर्शाकर भुगतान प्राप्त किया गया, जिससे सरकारी खजाने को भारी वित्तीय नुकसान पहुंचा. एजेंसियों का मानना है कि यह पूरा नेटवर्क लंबे समय से सक्रिय था और विभिन्न स्तरों पर मिलीभगत के बिना इतनी बड़ी वित्तीय अनियमितता संभव नहीं थी.

ईडी द्वारा की गई तलाशी के दौरान कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, संपत्तियों से संबंधित अभिलेख, डिजिटल उपकरण और वित्तीय लेनदेन से जुड़े रिकॉर्ड बरामद किए गए हैं. जांच अधिकारियों का मानना है कि इन दस्तावेजों से धन के प्रवाह, फर्जी बिलों की श्रृंखला और कथित लाभार्थियों की भूमिका को समझने में मदद मिलेगी. जब्त किए गए डिजिटल उपकरणों की फोरेंसिक जांच भी कराई जाएगी ताकि लेनदेन और संचार से जुड़े अतिरिक्त साक्ष्य जुटाए जा सकें.

छापेमारी के दौरान ईडी ने 23.50 लाख रुपये नकद बरामद किए. इसके अलावा विभिन्न बैंक खातों और सावधि जमा में मौजूद 2.93 करोड़ रुपये की राशि का पता लगाया गया, जिसे तत्काल प्रभाव से फ्रीज कर दिया गया. एजेंसी का मानना है कि यह धन कथित अवैध गतिविधियों से जुड़ा हो सकता है और इसकी विस्तृत वित्तीय जांच की जा रही है.

मामले की जांच के दौरान मेहता पेट्रोल पंप और उससे संबंधित दस्तावेज भी एजेंसी के रडार पर आए हैं. बताया जा रहा है कि मेसर्स विश्वकुसुम इन्फ्राटेक नामक फर्म के कार्यालय की भी हाल ही में जांच की गई थी. इस फर्म का संचालन अखिलेश मेहता द्वारा किया जाता है. जांच एजेंसियों ने फर्म के वित्तीय रिकॉर्ड, बिलिंग दस्तावेजों और आपूर्ति से संबंधित कागजात की विस्तार से पड़ताल की है.

आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ ने इससे पहले अखिलेश मेहता को भी जांच के दायरे में लिया था. उन पर 12 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के कथित फर्जी इनवॉइस प्रस्तुत करने के आरोप लगाए गए थे. अब इसी मामले से जुड़े वित्तीय लेनदेन और धन के स्रोतों की जांच ईडी कर रही है. एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि फर्जी बिलों के माध्यम से प्राप्त राशि का उपयोग कहां और किस प्रकार किया गया.

जांच से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि अब तक सामने आए दस्तावेज कई नए पहलुओं की ओर संकेत कर रहे हैं. संभावना व्यक्त की जा रही है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और भी लोगों की भूमिका सामने आ सकती है. वित्तीय लेनदेन, ठेकेदारों, आपूर्तिकर्ताओं और सरकारी अधिकारियों के बीच संबंधों की भी गहन जांच की जा रही है.

इस कार्रवाई ने एक बार फिर सार्वजनिक निर्माण परियोजनाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं. करोड़ों रुपये की लागत वाली ग्रामीण सड़क परियोजनाओं का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी ढांचा मजबूत करना था, लेकिन यदि जांच में लगे आरोप सही पाए जाते हैं तो यह सार्वजनिक धन के दुरुपयोग का बड़ा मामला साबित हो सकता है.

ईडी ने स्पष्ट किया है कि जांच अभी प्रारंभिक चरण में है और बरामद दस्तावेजों तथा वित्तीय रिकॉर्ड का विश्लेषण जारी है. एजेंसी का कहना है कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे और पूछताछ, तलाशी तथा कानूनी कार्रवाई की जा सकती है. फिलहाल जबलपुर और रीवा में हुई इस कार्रवाई ने प्रदेश के प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में व्यापक चर्चा छेड़ दी है तथा सभी की नजर अब जांच के अगले चरण और संभावित खुलासों पर टिकी हुई है.

 

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