


रायसेन। मानवता को शर्मसार करने वाला एक मामला सामने आया है जहां रायसेन के ग्राम अगरिया मारखो के 70 वर्षीय बुजुर्ग बिहारी बंजारे को अपने बेटे के प्रेम विवाह की गलती की सजा देने लड़की के परिजनों और रिश्तेदारों ने लात-घूंसों और चप्पल से पिटाई कर पेशाब पिला दिया। घटना का वीडियो आरोपितों ने खुद बनाकर वायरल किया। वीडियो के सामने आने के बाद पुलिस हरकत में आई।
पुलिस के अनुसार, 5 मार्च को रायसेन के नयापुरा अगरिया (मालखो टोला) निवासी एक युवक विदिशा जिले के शमशाबाद थाना क्षेत्र के ग्राम तलैया की नाबालिग लड़की को भगाकर ले गया था। इस मामले में 6 मार्च को शमशाबाद थाने में मामला दर्ज किया गया था। इसके अगले दिन 7 मार्च की सुबह लड़की पक्ष के परिजन और उनके रिश्तेदार दो चारपहिया वाहनों में सवार होकर रायसेन पहुंचे। उन्होंने पहले बुजुर्ग बिहारी बंजारा से लड़की के बारे में पूछा फिर बुजुर्ग दंपत्ति से मारपीट भी की। इसके बाद लड़की की तलाश के बहाने अपने साथ चलने के लिए कहने लगे और जबरदस्ती अपने साथ वाहन में बैठाकर ले गए। उक्त सभी 10-12 आरोपित बुजुर्ग को राजगढ़ जिले के मोतीपुरा गांव ले गए, जहां लड़की और लड़का के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली।
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CM हाउस के सामने धरना- प्रदर्शन पर रोक, पुलिस कमिश्नर का आदेश, 2 महीने तक रहेगा लागू
भोपाल में अब प्रमुख और व्यस्त चौराहों पर धरना-प्रदर्शन, हड़ताल और पुतला दहन जैसे कार्यक्रम आयोजित नहीं किए जा सकेंगे। पुलिस आयुक्त द्वारा भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 163 के तहत आदेश जारी कर पॉलिटेक्निक चौराहा, आकाशवाणी चौराहा और किलोल पार्क चौराहा सहित आसपास के क्षेत्रों को प्रतिबंधित घोषित कर दिया गया है। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है और अगले दो महीनों तक प्रभावी रहेगा।
जारी आदेश में साफ किया गया है कि ये सभी चौराहे शहर के मुख्य मार्गों पर स्थित हैं और यहां से एयरपोर्ट, हमीदिया अस्पताल और गांधी मेडिकल कॉलेज जैसे महत्वपूर्ण स्थानों के लिए आवागमन होता है। इन स्थानों पर धरना-प्रदर्शन होने से यातायात बाधित हो जाता है, जिससे आम नागरिकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। इसके साथ ही एंबुलेंस, फायर ब्रिगेड और अन्य आपातकालीन सेवाओं की आवाजाही भी प्रभावित होती है, जो गंभीर स्थिति पैदा कर सकती है।
पुलिस के अनुसार, इन चौराहों पर अक्सर विभिन्न संगठनों और राजनीतिक दलों द्वारा धरना-प्रदर्शन की अनुमति मांगी जाती रही है। लेकिन इन स्थानों पर कोई वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध नहीं होने के कारण प्रदर्शन के दौरान पूरा ट्रैफिक प्रभावित हो जाता है। खासतौर पर पॉलिटेक्निक चौराहा ऐसा प्रमुख बिंदु है, जहां से एयरपोर्ट और बड़े अस्पतालों तक पहुंचने का मुख्य रास्ता गुजरता है। ऐसे में यहां जाम लगने से स्थिति और भी गंभीर हो जाती है।
आदेश में यह भी उल्लेख किया गया है कि इन चौराहों पर होने वाले आंदोलनों के कारण वीआईपी और वीवीआईपी मूवमेंट भी प्रभावित होता है। इसके अलावा शहर की सामान्य जनसुविधाएं भी बाधित होती हैं, जिससे कानून-व्यवस्था बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
पुलिस आयुक्त ने साफ किया है कि इस आदेश का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। किसी भी संगठन या समूह को इन प्रतिबंधित क्षेत्रों में धरना, प्रदर्शन या पुतला दहन की अनुमति नहीं दी जाएगी।
दरअसल पुलिस प्रशासन का कहना है कि शहर में सुचारू यातायात और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से यह निर्णय लिया गया है। आम जनता को होने वाली असुविधा को देखते हुए इन प्रमुख चौराहों को प्रतिबंधित क्षेत्र घोषित करना आवश्यक हो गया था।
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एंबुलेंस में इश्कबाजी! सड़कों पर सायरन बजाती दौड़ती रही थी 108 एंबुलेंस , मरीज की जगह मिली लड़की
छतरपुर। मध्य प्रदेश के छतरपुर में आपातकालीन सेवा मानी जाने वाली 108 एम्बुलेंस एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। मामला तब सामने आया जब सायरन बजाते हुए दौड़ रही एंबुलेंस में कोई मरीज नहीं, बल्कि एक कॉलेज छात्रा बैठी हुई मिली। बताया जा रहा है कि एंबुलेंस चालक ने निजी काम के लिए सरकारी वाहन का इस्तेमाल किया और छात्रा को बैठाकर ले जा रहा था, जिससे पूरे सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
जानकारी के मुताबिक, एक व्यक्ति की नजर एंबुलेंस के अंदर बैठी लड़की पर पड़ी, जिससे उन्हें शक हुआ। इसके बाद उस व्यक्ति ने तुरंत बाइक से एंबुलेंस का पीछा किया और कुछ दूरी पर उसे रुकवा लिया। जब चालक से पूछताछ की गई तो वह घबरा गया और सफाई देते हुए छात्रा को अपनी बहन बताया, लेकिन वह उसका नाम तक नहीं बता सका। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो मौके पर ही रिकॉर्ड कर लिया गया, जो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
वीडियो सामने आने के बाद लोगों में नाराजगी देखी जा रही है। आम जनता का कहना है कि जब गंभीर मरीजों को समय पर एंबुलेंस नहीं मिल पाती, तब इस तरह का दुरुपयोग बेहद चिंताजनक है। यह न सिर्फ सेवा की विश्वसनीयता पर सवाल उठाता है, बल्कि आपातकालीन व्यवस्था की निगरानी पर भी गंभीर प्रश्न खड़े करता है। वहीं इस मामले मे सीएमएचओ राजेंद्र प्रसाद गुप्ता ने कहा कि मामला संज्ञान में आया है। जांच के बाद कार्रवाई की जाएगी।
जबलपुर से करीब 40 किलोमीटर दूर बरगी थाना क्षेत्र के ग्राम सालीवाड़ा में एक दर्दनाक हादसे में नहर में नहाने के दौरान तीन लड़कियों की डूबने से मौत हो गई। घटना की जानकारी मिलते ही बरगी थाना पुलिस और एसडीआरएफ की टीम मौके पर पहुंची और रेस्क्यू कर शवों को बाहर निकाला तथा परिजनों को सौंप दिया।
जानकारी के मुताबिक़ सालीवाड़ा में शादी समारोह था जिसमें शामिल होने के लिए एक लड़की जबलपुर से गई थी। जबकि अन्य लड़कियां पड़ोस की ही गांव की रहने वाली है। शादी के बाद कुछ लड़कियां नहर में नहाने गई थीं और इसी दौरान ये हादसा हो गया। इस घटना के बाद खुशी का माहौल मातम में बदल गया।
मृतक लड़कियों की पहचान शीतल पटेल, तनु पटेल और सानिया पटेल के रूप में हुई है। सालीवाड़ा में एक शादी समारोह चल रहा था, जिसमें शामिल होने के लिए एक लड़की जबलपुर से आई थी जबकि अन्य लड़कियां आसपास के गांव की रहने वाली थीं। आज सुबह करीब 11 बजे शादी समारोह में शामिल कुछ लड़कियां नहर में नहाने गई थीं। इस दौरान कुल पांच लड़कियां नहर के किनारे पहुंचीं और पानी में उतर गईं। करीब आधे घंटे तक वे नहाती रहीं। इसी बीच अचानक गहरे पानी और तेज बहाव की चपेट में आने से हादसा हो गया।
बताया जा रहा है कि कुछ लड़कियां किनारे बैठकर मोबाइल से वीडियो बना रही थीं तभी अचानक तीन लड़कियां नहर के तेज बहाव की चपेट में आकर गहरे पानी में बह गईं। डूबने वाली लड़कियां शीतल पटेल, तनु पटेल और सानिया पटेल को बचाने के लिए स्थानीय लोगों ने कोशिश की, लेकिन गहरे पानी और तेज बहाव के कारण वे सफल नहीं हो सके। बताया गया कि एक लड़की को तैरना आता था जिसने अपनी सहेलियों को बचाने का प्रयास भी किया। वहीं किनारे मौजूद एक युवती ने साड़ी फेंककर बचाने की कोशिश की लेकिन तीनों लड़कियों को बचाया नहीं जा सका।
घटना की सूचना मिलते ही बरगी नगर पुलिस चौकी की टीम मौके पर पहुंची और एसडीआरएफ को सूचना दी गई। इसके बाद गोताखोरों और एसडीआरएफ की टीम ने रेस्क्यू अभियान शुरू किया। करीब ढाई घंटे तक चले अभियान के बाद तीनों लड़कियों के शव नहर से बरामद किए गए। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सूर्यकांत शर्मा ने बताया कि सालीवाड़ा में पटेल परिवार की शादी थी और कार्यक्रम के बाद सभी लोग अपने घर जाने की तैयारी कर रहे थे। इसी दौरान सुबह नहाने के लिए गई पांच लड़कियों में से तीन तेज बहाव की चपेट में आकर डूब गईं। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। इस घटना के बाद से इलाके में शोक का माहौल है।
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दरिंदगी की हद पार... पति ने पत्नी का मुंडन कराया, निर्वस्त्र वीडियो बनाकर किया वायरल
मध्यप्रदेश के इंदौर जिले से रिश्तों को शर्मसार करने वाली एक सनसनीखेज घटना सामने आई है। मानपुर थाना क्षेत्र के नाहरखोदरा गांव में एक पति ने अपनी ही पत्नी के साथ अमानवीय व्यवहार करते हुए उसका मुंडन कराया और फिर उसका निर्वस्त्र वीडियो बनाकर वायरल कर दिया। पीड़िता की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज कर मुख्य आरोपी पति को गिरफ्तार कर लिया है।
जानकारी के अनुसार आरोपी राजेश कटारे ने पहली पत्नी के रहते दूसरी शादी कर ली थी। इसके बाद पहली पत्नी के लिए घर ही प्रताड़ना का केंद्र बन गया। आरोप है कि पति उसकी दूसरी पत्नी और मां मिलकर पीड़िता को लगातार गालियां देते, मारपीट करते और जान से मारने की धमकी देते थे।
पीड़िता ने बताया कि आरोपियों ने जबरन उसका मुंडन कराया और उसके साथ अमानवीय व्यवहार किया। 21 अप्रैल को आरोपी पति ने उसे निर्वस्त्र कर वीडियो बनाया और यह वीडियो उसके भाई को भेज दिया। इस वीडियो में महिला का मुंडा हुआ सिर साफ दिखाई दे रहा है और आरोपियों की आवाजें भी सुनाई दे रही हैं।
26 वर्षीय पीड़िता ने पुलिस को दिए बयान में बताया कि आरोपी पति लगातार उसके चरित्र पर शक करता था। इसी शक के चलते उसे मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जाता था। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि आरोपियों ने उसे समाज में अपमानित करने के लिए वीडियो वायरल करने जैसी साजिश रच डाली।
जैसे ही यह वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया, पूरे इलाके में सनसनी फैल गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस तुरंत सक्रिय हुई और पीड़िता की शिकायत पर केस दर्ज किया गया।
मानपुर थाना पुलिस ने मुख्य आरोपी पति को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस के मुताबिक इस मामले में आरोपी की दूसरी पत्नी की भूमिका भी संदिग्ध है जिसे सह-आरोपी बनाया गया है। मामले की आगे जांच जारी है।
इस घटना के सामने आने के बाद इलाके में आक्रोश का माहौल है। लोग आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
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MP में संविदा-आउटसोर्स कर्मचारियों को बड़ी राहत: नियमितीकरण का रास्ता साफ, सरकार को हाईकोर्ट से नहीं मिला स्टे
भोपाल। मध्य प्रदेश में 25-30 वर्षों से नियमित और स्थाई किये जाने का राह देख रहे विभिन्न विभागों और निगम मंडलों, विश्वविद्यालयों में कार्य करने वाले 2 लाख संविदा कर्मचारियों और 3 लाख आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए बड़ी खबर है। आज मप्र उच्च न्यायालय जबलपुर के द्वारा सरकार को सिंगल बेंच के उस निर्णय पर स्टे देने से मना कर दिया, जिसमें 9 अप्रैल को उच्च न्यायालय के न्यायाधीश ने निर्णय दिया था कि जिन संविदा कर्मचारियों को 10 वर्ष हो गये हैं उन्हें जिस प्रकार दैनिक वेतन भोगियों को विनियमित करने के लिए म.प्र. सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग ने 7 अक्टूबर 2016 को वर्गीकृत कर स्थाई कर्मी बनाया था और वेतनमान भत्ते दिये थे।
साथ में मंहगाई भत्ता तथा प्रतिवर्ष इन्क्रक्रमेंट दिये जाने का प्रावधान किया था..उसी प्रकार संविदा कर्मचारियों 7 अक्टुबर 2016 की नीति का लाभ दिया जाए। सिंगल बैंच के इस निर्णय के विरोध में राज्य सरकार के अधिवक्ता ने आज बुधवार को डबल बैच में स्थगन के लिए याचिका लगाई थी। माननीय उच्च न्यायालय की डबल बेंच ने स्थगन देने से इंकार करते हुए कहा कि यह एक बहुत बड़े वर्ग का सवाल है, इसलिए हम इस पर स्थगन नहीं देंगें आप सिंगल बेंच में अपना पक्ष रखिए और निर्णय का पालन कीजिए।
मप्र संविदा कर्मचारी अधिकारी महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष रमेश राठौर ने म.प्र. जबलपुर हाईकोर्ट के इस निर्णय का स्वागत करते हुये कहा कि हम आभारी माननीय न्यायलय के जिन्होंने 5 लाख शोषित पीड़ित संविदा कर्मचारियों और आउटसोर्सिंग कर्मचारियों के दर्द को समझा हैं। हम पिछले 25 से 30 वर्षों से संविदा पर कार्य कर रहे थे, और शोषित हो रहे था. हर बार संविदा कर्मचारियों को संविदा नवीनीकरण के नाम पर हर वर्ष शोषण सहना पड़ता था और बार बार नौकरी से हटाने की धमकी भी देते थे कि तुम संविदा कर्मचारी हो हटा देंगें। वेतनमान और भत्ते नहीं मिलते थे महंगाई भत्ता और प्रतिवर्ष इंक्रीमेंट नहीं मिलता था, सरकारी मकान आवंटन नहीं होता था संविदा कर्मचारियों के साथ दोयम दर्जे का व्यवहार किया जाता था। विभिन्न विभागों में कार्य करने वाले लाखों संविदा कर्मचारियों में इस निर्णय से खुशी की लहर है।
महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष रमेश राठौर ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि अब संविदा कर्मचारियों के साथ न्याय करते हुए माननीय उच्च न्यायालय निर्णय का पालन करते हुए जिन संविदा कर्मचारियों को दस वर्ष हो गये हैं उन्हें स्थाई कर्मचारी बनाते हुये नियमित वेतनमान, मंहगाई भत्ता, इन्क्रीमेंट प्रदान किया जाए।
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के दौरान हिंसा की घटनाएं लगातार चिंता बढ़ा रही हैं. ताजा मामला दक्षिण दिनाजपुर के कुमारगंज इलाके से सामने आया है, जहां भारतीय जनता पार्टी (BJP) के उम्मीदवार शुभेंदु सरकार पर उग्र भीड़ ने हमला कर दिया. स्थिति इतनी बिगड़ गई कि उन्हें अपनी जान बचाकर मौके से भागना पड़ा.
घटना का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें देखा जा सकता है कि पुलिसकर्मी उम्मीदवार को भीड़ से बचाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद लोग उन पर थप्पड़ और मुक्के बरसाते नजर आ रहे हैं.
बताया जा रहा है कि यह विवाद पोलिंग स्टेशनों पर एजेंटों को हटाने को लेकर शुरू हुआ. शुभेंदु सरकार का आरोप है कि तृणमूल कांग्रेस (TMC) के कार्यकर्ताओं ने कई बूथों से BJP के पोलिंग एजेंटों को जबरन बाहर निकाल दिया था. सूचना मिलने पर जब वह मौके पर पहुंचे और अपने एजेंटों को वापस अंदर भेजा, तभी स्थिति अचानक हिंसक हो गई.
हमले के दौरान उपद्रवियों ने उम्मीदवार की गाड़ी में भी जमकर तोड़फोड़ की. इस घटना में उन्हें चोटें आई हैं. पुलिस और सुरक्षाबलों को उन्हें सुरक्षित बाहर निकालने में काफी मशक्कत करनी पड़ी.
वीडियो वायरल होने के बाद भारत निर्वाचन आयोग ने मामले को गंभीरता से लिया है. आयोग ने वीडियो के आधार पर हमलावरों की पहचान कर तत्काल गिरफ्तारी के निर्देश दिए हैं और स्थानीय प्रशासन से पूरी रिपोर्ट मांगी है.
चुनाव के दौरान इस तरह की घटनाएं लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर रही हैं, जिससे सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी चिंताएं बढ़ गई हैं.
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बंगाल में मतदान खत्म, टूटे पिछले सारे रिकॉर्ड : शाम 6 बजे तक 91.35% वोटिंग दर्ज ; तमिलनाडु में भी बंपर वोटिंग
पश्चिम बंगाल में 16 जिलों की 152 सीटों पर विधानसभा चुनाव के लिए पहले चरण की वोटिंग ख़त्म हो चुकी है. इस बार राज्य की जनता ने वोटिंग के पुराने सरे रिकॉर्ड्स ध्वस्त कर दिए है. चुनाव आयोग के मुताबिक शाम 6 बजे तक 91.35 फीसदी मतदान हुआ है. सबसे ज्यादा मतदान रघुनाथगंज विधानसभा सीट पर हुआ है. यहां करीब 95 फीसदी मतदाताओं ने अपने लोकतांत्रिक अधिकार का प्रयोग किया. पहले चरण में 16 जिलों की 152 सीटों पर वोट डाले जा रहे हैं. मतदान सुबह सात बजे प्रारंभ हुआ और शाम 6 बजे तक जारी रही. जिन सीटों पर कड़ा मुकाबला माना जा रहा है, उनमें नंदीग्राम, खड़गपुर, पुरुलिया, बांकुरा और झारग्राम सीटों शामिल हैं. राज्य में दूसरे चरण का चुनाव 29 अप्रैल को होगा, जिसमें 142 सीटों पर मतदान होगा.
चुनाव आयोग के शुरुआती रुझानों के मुताबिक, आखिरी एक घंटे में आमतौर पर 2 से 3 फीसदी तक मतदान और बढ़ता है. शाम 5 बजे तक राज्य में 89.93 फीसदी वोटिंग दर्ज की गई थी. वहीं 6 बजे तक यह आंकड़ा 91.35 तक पहुंच गया. दिन की शुरुआत से ही कई इलाकों में लंबी कतारें देखी गईं. ग्रामीण क्षेत्रों से लेकर शहरी बूथों तक, महिलाएं, बुजुर्ग और युवा बड़ी संख्या में मतदान केंद्रों पर पहुंचे. मालतीपुर में एक महिला मतदाता की बूथ पर मौत जैसी दुखद घटना भी सामने आई, लेकिन इसके बावजूद लोगों का उत्साह कम नहीं हुआ. वहीं तमिल नाडु ने भी इस बार जमकर मतदान में हिस्सा लिया है. शाम 6 बजे तक तमिलनाडु में 84.29% वोटिंग दर्ज किया गया है.
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के पहले चरण की वोटिंग के दौरान झड़प की खबरें सामने आई है. बीरभूम जिले की दुबराजपुर विधानसभा सीट के खैरासोल घुमर गांव में तैनात CRPF जवानों पर लोगों ने पत्थर फेंके.
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि विधानसभा चुनाव के पहले चरण में अब तक हुए मतदान से संकेत मिलता है कि तृणमूल कांग्रेस अभी से ही जीत की स्थिति में है. उन्होंने कहा, ‘मुझे किसी पद में कोई दिलचस्पी नहीं है. मुझे कुर्सी नहीं चाहिए. मैं सिर्फ दिल्ली में बीजेपी सरकार का अंत चाहती हूं.’
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बंगाल में चुनाव सभा को संबोधित करते हुए कहा कि आज, वोटिंग का पहला चरण लगभग पूरा हो चुका है. 5 तारीख को दीदी को पूरी तरह से हार का सामना करना पड़ेगा. बंगाल में पूर्ण बहुमत वाली भाजपा सरकार बनने जा रही है. आप सभी को बंगाल को घुसपैठियों से मुक्त कराने के लिए कमल के निशान वाला बटन जरूर दबाना चाहिए.
इसके आलवा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, ‘बंगाल में अभी-अभी मुझे कुछ लोग मिले, जो कह रहे थे कि अमित भाई, लोग वोट तो देना चाहते हैं, लेकिन गुंडों से डरते हैं. इनसे मत डरना. मैं दीदी के गुंडों को कहकर जाता हूं, 29 तारीख को घर के बाहर मत निकलना, वरना 5 तारीख के बाद हम तुम्हें सीधा कर देंगे.’
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2006 Malegaon Blast: हाईकोर्ट ने ट्रायल को रोकते हुए 4 को किया बरी, कहा- केस अब डेड एंड मोड़ पर
बॉम्बे हाई कोर्ट ने 2006 मालेगांव बम धमाका मामले में अहम फैसला सुनाते हुए चार आरोपियों को आरोपमुक्त कर दिया है। अदालत ने मामले की जांच पर गंभीर टिप्पणी करते हुए कहा कि यह केस अब डेड एंड यानी ऐसे मोड़ पर पहुंच चुका है, जहां से सच्चाई तक पहुंचना मुश्किल नजर आता है। कोर्ट ने यह भी कहा कि जांच एजेंसियों की परस्पर विरोधी कहानियों ने पूरे मामले को उलझा दिया है।
बॉम्बे हाई कोर्ट ने बुधवार को स्पेशल कोर्ट के पिछले साल के आदेश को रद्द कर दिया जिसमें नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) द्वारा दायर चार्जशीट के आधार पर 2006 मालेगांव ब्लास्ट केस में चार आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए गए थे। हाई कोर्ट ने 2006 मालेगांव बम धमाका मामले में चार आरोपियों राजेंद्र चौधरी, धन सिंह, मनोहर नरवरिया और लोकेश शर्मा को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया।
2006 के मालेगांव ब्लास्ट केस में बॉम्बे हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला दिया है। अदालत ने बुधवार को चार आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने वाले आदेश को रद्द कर करते हुए उन्हें बरी कर दिया। मालेगांव में इन धमाकों में 37 लोगों की जान चली गई थी।
हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस चंद्रशेखर और जस्टिस श्याम चांदक की डिवीजन बेंच ने आरोपियों की ओर से एक स्पेशल कोर्ट के सितंबर 2025 के उस आदेश के खिलाफ दायर अपीलों पर यह फैसला सुनाया, जिसमें उनके खिलाफ आरोप तय किए गए थे। हाईकोर्ट के फैसले से इन आरोपियों के खिलाफ मामला बंद हो गया और उनके खिलाफ चल रहा ट्रायल भी खत्म हो गया।
फरवरी 2007 में जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दी गई और बाद में एनआईए ने इसे अपने हाथ में ले लिया। एनआईए ने आगे की जांच के बाद अन्य आरोपियों के साथ-साथ इन चारों को भी आरोपी बनाया था और एक नई चार्जशीट दायर की थी।
अपीलकर्ताओं के वकील ने दो मुख्य दलीलें दीं। पहली, कि NIA कोई भी ऐसा चश्मदीद गवाह पेश करने में नाकाम रही जिसने वास्तव में घटना को अपनी आंखों से देखने का दावा किया हो। दूसरी, कि चार्जशीट में शामिल अन्य आरोपियों को बरी किया जाना पूरी तरह से गैर-कानूनी था। वकील ने यह भी बताया कि उन बरी करने वाले आदेशों को चुनौती देने वाली अलग-अलग आपराधिक अपीलें अभी भी लंबित हैं।
मालेगांव का यह मामला 8 सितंबर 2006 का है, जब इस शहर में हुए सिलसिलेवार धमाकों के बाद अज्ञात लोगों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता, गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम और अन्य कानूनों के तहत मामला दर्ज किया गया था। जांच सबसे पहले महाराष्ट्र आतंकवाद निरोधक दस्ते (एटीएस) ने की थी, जिसने 12 आरोपियों को गिरफ्तार किया और दिसंबर 2006 में चार्जशीट दायर की।
ग्वालियर। ग्वालियर के शिवानी नगर में एक शादी समारोह उस वक्त अखाड़े में बदल गया, जब हवन की लकड़ी तोड़ने की छोटी सी बात पर दूल्हा और दुल्हन पक्ष आपस में भिड़ गए। मंडप में जमकर जूतम-पैजार हुई और शादी की खुशियां हंगामे में बदल गईं। सूचना पर पहुंची पुलिस ने मारपीट कर रहे वर-वधू पक्ष के 4 लोगों को हिरासत में लिया है। वहीं पुलिस ने दोनों पक्षों पर मारपीट और शांति भंग करने की धाराओं में मामला दर्ज आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।
दअरसल, ग्वालियर के पुरानी छावनी थाना क्षेत्र के मोती झील पर रहने वाले सतीश पाल की चचेरी बहन की शादी की रस्में चल रही थीं। बारात की अगवानी के बाद फेरों की तैयारी थी। मंडप में पंडितजी ने दूल्हे के मौसेरे भाई विशाल से हवन के लिए लकड़ी तोड़ने को कहा। विशाल ने लकड़ी तोड़ने की कोशिश लेकिन वह लकड़ी नहीं तोड़ पाया तो पंडितजी ने मजाक में कह दिया कि जब एक छोटी लकड़ी नहीं तोड़ पाए तो जिंदगी में क्या करोगे।
इस छोटे से कमेंट पर विशाल ने सबके सामने पंडितजी से अभद्रता शुरू कर दी। जब घराती पक्ष ने उसे चुप कराने की कोशिश की तो कहासुनी के बाद. बात मारपीट में बदल गई। देखते ही देखते मंडप में कुर्सियां चलीं और दोनों पक्ष एक दूसरे से भिड़ गए। दुल्हन और महिलाएं घबरा गईं। कुछ देर के लिए शादी की रस्में रुक गईं। विशाल का कहना है कि वधू पक्ष के अंकित बघेल, गोलू और सौरभ ने उसे पीटा है।
हंगामे की सूचना मिलते ही पुलिस की टीम शादी के मंडप में पहुंची। पुलिस ने बीच-बचाव कर दोनों पक्षों के उपद्रवियों को अलग किया और 4 लोगों को थाने ले आई। पुलिस का कहना है कि मारपीट और शांति भंग करने की धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। वहीं पुलिस की समझाइश के बाद देर रात शादी की रस्में फिर शुरू हुईं।
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छेड़छाड़ पर तालिबानी फैसला: आरोपी को पेड़ से बांधकर मूंछ-भौंहें काटीं, जूतों की पहनाई माला
नीमच। मध्य प्रदेश के नीमच जिले के मांगरोल चक गांव में एक छेड़छाड़ के मामले ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है। मदन बंजारा नामक युवक पर आरोप है कि उसने गांव की एक विधवा महिला के घर में घुसकर उसके साथ जबरदस्ती करने की कोशिश की। महिला और उसके बेटे ने साहस दिखाते हुए आरोपी को पकड़ लिया।
इसके बाद गुस्साए ग्रामीणों ने आरोपी को पेड़ से बांध दिया। उन्होंने आरोपी के सिर के बाल काट दिए, मूंछें-भौंहें साफ कर दीं, जूतों की माला पहनाई और पूरे गांव में घुमाकर सजा दी।घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। पुलिस इस मामले में जांच कर रही है। ग्रामीणों का कहना है कि महिला की सुरक्षा और सम्मान के लिए उन्होंने यह कदम उठाया, जबकि कानूनी रूप से ऐसे कृत्यों की निंदा भी की जा रही है।
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जयारोग्य अस्पताल में लापरवाही: महिला की ECG रिपोर्ट पर पुरुष का इलाज, गलत रिपोर्ट से शख्स की मौत
ग्वालियर। मध्य प्रदेश के ग्वालियर के जयारोग्य अस्पताल में महिला की ECG रिपोर्ट पर पुरुष का इलाज कर दिया,जिसके चलते पुरुष मरीज की मौत हो गयी,एक बेटी ने अस्पताल प्रशासन और डॉक्टरों पर गंभीर आरोप लगाते हुए यह दावा किया है कि गलत मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर इलाज करने से उसके पिता की मौत हो गई,रागिनी जाधव नाम की युवती ने अब न्याय और जांच की मांग को लेकर मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री से गुहार लगाई है,उसका कहना है कि कोई उनकी पुकार नही सुन रहा है,अब सिर्फ मुख्यमंत्री मामा डॉ मोहन यादव जी पर ही भरोसा है।
दरअसल यह पूरा मामला बीती 18 अप्रैल 2026 का है,जब गुढ़ा लश्कर क्षेत्र के रहने वाले दिलीप जाधव को घबराहट होने पर JAH अस्पताल के ट्रामा सेंटर में भर्ती कराया गया था,परिजनों का आरोप है कि भर्ती के बाद डॉक्टरों ने ECG जांच करवाई, लेकिन रिपोर्ट में किसी अन्य महिला का नाम और उम्र प्रिंट थी। हैरानी की बात यह है कि डॉक्टरों ने इस गंभीर गलती को नजरअंदाज कर उसी गलत रिपोर्ट के आधार पर इलाज शुरू कर दिया,जिससे कुछ समय बाद मरीज की हालत बिगड़ती गई,डॉक्टर्स ने मरीज को मिर्गी आने की बात कहकर न्यूरोलॉजी डिपार्टमेंट लें जाने के लिए कहा,लेकिन जब तक वह पहुँचते मरीज ने एम्बुलेंस में ही दम तोड़ दिया। जिसे बाद में अस्पताल द्वारा ‘हार्ट अटैक’ बताया गया।
मृतक अपने घर का इकलौते कमाने वाले सदस्य था,उन पर उनके तीन बच्चों के अलावा एक नेत्रहीन चाचा और मानसिक रूप से दिव्यांग बुआ की जिम्मेदारी भी थी,ऐसे में अब मृतक की बेटी रागिनी और हलचल जाधव अस्पताल द्वारा दी गयी गलत ECG रिपोर्ट और रिकॉर्ड के साथ न्याय की आस में भटक रहे है। उनका कहना है कि यह केवल एक गलती नहीं बल्कि अस्पताल प्रशासन, लैब टेक्नीशियन और संबंधित डॉक्टरों की घोर लापरवाही है। अगर समय पर सही रिपोर्ट आती और सही इलाज मिलता, तो उनके पिता की जान बचाई जा सकती थी।
पीड़ित बेटियों ने मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव से गुहार लगाई है,उनका कहना है कि अब उन्हें सिर्फ डॉ मोहन यादव जो कि लाडली बहनो के भाई है,यानी उनके मामा है,सिर्फ उन्हीं पर भरोसा है। मामा डॉ मोहन यादव जी से उन्होंने अब इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच, दोषी डॉक्टरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और आर्थिक सहायता की मांग की है। बहरहाल इस घटना ने एक बार फिर सरकारी अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।
इंदौर के हीरानगर में हुए सुरेंद्र साहू हत्याकांड के फरार आरोपियों पर आखिरकार पुलिस ने शिकंजा कस दिया। वारदात के बाद फरारी काट रहे दोनों आरोपी कानून से बचने के लिए सैकड़ों किलोमीटर दूर भागे, लेकिन उनकी चालाकी एक सतर्क पड़ोसी के सामने टिक नहीं सकी। सूचना मिलते ही पुलिस ने घेराबंदी कर दोनों को धर दबोचा।
पुलिस के मुताबिक आरोपी आशीष राजपूत और आकाश वारदात के बाद सागर जिले के ग्राम बिनाका में अपने मामा के घर जाकर छिपे हुए थे। खुद को सुरक्षित समझ रहे इन आरोपियों ने वहीं अपने ‘गुनाह’ की कहानी बयां कर दी। मामा के पूछने पर आशीष ने कबूल किया कि उसके साथियों ने इंदौर में हत्या कर दी है और वह बचने के लिए यहां भागकर आया है। लेकिन यही ‘बेखौफ कबूलनामा’ उनके लिए फांसी का फंदा बन गया।
आरोपियों की बातचीत एक पड़ोसी ने सुन ली और बिना देर किए पुलिस को सूचना दे दी। बस फिर क्या था। पुलिस ने तत्काल एक्शन लेते हुए मौके पर दबिश दी। टीम का नेतृत्व कर रहे थाना प्रभारी सुशील पटेल अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे तो आरोपियों के होश उड़ गए। पुलिस को देखते ही दोनों आरोपी भागने लगे, लेकिन किस्मत ने उनका साथ नहीं दिया। भागते-भागते दोनों गिर पड़े और पुलिस ने मौके पर ही उन्हें दबोच लिया। इसके बाद कड़ी सुरक्षा में दोनों को इंदौर लाया गया।
पुलिस ने साफ किया है कि इस सनसनीखेज हत्याकांड में शामिल सभी आरोपियों को अब गिरफ्तार कर लिया गया है। पूरी कार्रवाई पुलिस कमिश्नर संतोष कुमार सिंह के निर्देश पर की गई। ऑपरेशन में एसीपी रूबिना मिजवानी, टीआई सियाराम गुर्जर और हीरानगर पुलिस की टीम लगातार जुटी रही।
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बंद आरटीओ चेक पोस्ट फिर होगें चालू, हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को 30 दिन में चेक पोस्ट शुरू करने के दिए आदेश
जबलपुर. एमपी में बंद आरटीओ के चेक पोस्ट फिर से चालू होंगे. हाईकोर्ट जस्टिस विशाल मिश्रा की कोर्ट ने जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह बड़ा फैसला सुनाया है. दलील दी गई है कि भारी वाहनों की जांच और हादसों को रोकने के लिए सड़कों पर चेक पोस्ट जरूरी हैं.
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश दिए हैं कि 30 दिनों के भीतर सभी चेक पोस्ट शुरू करें. मध्यप्रदेश में 30 जून 2024 से आरटीओ चेक पोस्ट बंद कर दिए थे. इसी मामले में रजनीश त्रिपाठी ने याचिका दायर की थी. गौरतलब है कि सीएम मोहन यादव के निर्देश पर 1 जुलाई 2024 को प्रदेश भर के चेक पोस्ट परिवहन विभाग ने बंद कर दिए थे. याचिकाकर्ता राजनीश त्रिपाठी त्रिपाठी ने मप्र परिवहन विभाग के अपर मुख्य सचिव आईएएस मनीष सिंह एवं अन्य के विरुद्ध 2025 में लगाई थी.
याचिकाकर्ता की ओर से पैरवी अधिवक्ता जुबिन प्रसाद एवं भानु प्रकाश ने एवं शासन की ओर से अंजली मिश्रा ने की. याचिका का हाईकोर्ट ने निराकण करते हुए सरकार को आदेश दिया कि विभागीय अधिकारी वाहनों में ओवरलोडिंग की जांच हेतु अन्य तरीकों को अपनाने के लिए स्वतंत्र हैं, परंतु इस न्यायालय के समक्ष दी गई वचनबद्धताओं का पालन किया जाना अनिवार्य है.
अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि 30 दिन का समय चेक पोस्ट पुन: स्थापित करने के लिए दिया है. यदि इस आदेश की प्रमाणित प्रति प्राप्त होने की तारीख से 30 दिनों के भीतर आदेश का पालन नहीं किया जाता तो याचिकाकर्ता अवमानना याचिका लगाकर इस याचिका को पुनर्जीवित कर सकता है. जस्टिस विशाल मिश्रा ने आदेश में स्पष्ट किया है कि यदि न्यायालय में दिए गए वचन का पालन नहीं किया जाता है, तो न्यायालय द्वारा पारित आदेश की अवहेलना मानी जाएगी. अधिकारियों द्वारा पूर्व में चेक पोस्ट बंद करने के संबंध में जारी आदेश को न्यायालय ने 4 सितंबर 2018 के आदेश से स्थगित कर दिया था.
विभागीय अधिकारियों द्वारा प्रस्तुत जवाबों को कोर्ट ने संतोषजनक नहीं माना. न्यायालय ने कहा कि यह कृत्य इस न्यायालय द्वारा पारित आदेश और प्रतिवादियों द्वारा दी गई वचनबद्धता की अवहेलना के समान है. हालांकि न्यायालय ने प्रतिवादी अधिकारियों के विरुद्ध दंडात्मक निर्देश जारी नहीं किया. कोर्ट ने कहा कि मध्यप्रदेश की सीमा से सटे दूसरे राज्यों से आने-जाने वाले वाहनों की जांच की जाए. क्षमता से अधिक भार और ऊंचाई (ओवर वेट-ओवर लोड) सहित अन्य कमियों वाहे प्रत्येक वाहन को रोककर जांच की जाएगी. कमियां मिलने पर नियमानुसार चालानी कार्रवाई की जाए.
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तेंदुए का कहर: गांव में घुसकर 4 लोगों पर हमला, दहशत में घरों में दुबके ग्रामीण
धार जिले के एक छोटे से गांव में अचानक ऐसा मंजर बना, जिसे देखकर हर कोई सहम गया। जंगल से निकलकर एक तेंदुआ सीधे रिहायशी इलाके में पहुंच गया। कुछ ही पलों में गांव का माहौल बदल गया और हर तरफ डर का साया छा गया।
जंगली जानवरों का आबादी वाले इलाकों में आना अब आम होता जा रहा है। लेकिन जब ऐसा होता है, तो हालात बेहद खतरनाक हो जाते हैं। धार में हुई यह घटना भी कुछ ऐसी ही रही, जहां लोगों को अपनी जान बचाने के लिए घरों में छिपना पड़ा।
यह घटना धामनोद वन परिक्षेत्र के गुजरी गांव की डेहरिया बस्ती की है। मंगलवार को अचानक एक तेंदुआ झाड़ियों से निकलकर बस्ती में घुस आया। किसी को संभलने का मौका भी नहीं मिला। तेंदुए ने सामने आए लोगों पर हमला करना शुरू कर दिया। धार तेंदुआ हमला इतनी तेजी से हुआ कि लोग समझ ही नहीं पाए कि क्या हो रहा है।
इस हमले में चार लोग घायल हो गए। घायलों में महेश वास्केल, ग्यारसीलाल सोलंकी, कांताबाई राठौड़ और विकास डावर शामिल हैं। घटना के बाद सभी को तुरंत प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र गुजरी में भर्ती कराया गया। वहां उनका इलाज जारी है। इस दौरान वन विभाग का एक कर्मचारी भी घायल हो गया, जिससे स्थिति और गंभीर हो गई।
तेंदुए के हमले के बाद पूरे गांव में डर फैल गया। लोगों ने तुरंत अपने घरों के दरवाजे बंद कर लिए। बच्चे और बुजुर्ग सबसे ज्यादा सहमे हुए नजर आए। हर कोई अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित था। धार तेंदुआ हमला के बाद गांव में सन्नाटा छा गया।
घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग और पुलिस मौके पर पहुंची। पूरे इलाके को घेर लिया गया। तेंदुए को पकड़ने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया। टीम लगातार सर्चिंग कर रही है। हालांकि, खबर लिखे जाने तक तेंदुआ पकड़ में नहीं आया है।
वन विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे बिना जरूरत घर से बाहर न निकलें। खासकर अकेले खेत या जंगल की ओर जाने से बचें। गांव में माइकिंग कर लोगों को सतर्क किया जा रहा है। हर तरफ निगरानी बढ़ा दी गई है।
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