


जबलपुर। मध्य प्रदेश के जबलपुर स्थित मदन महल थाने के भीतर उस समय हड़कंप मच गया, जब एक महिला ने पुलिसकर्मियों के सामने ही खुद पर पेट्रोल उड़ेलकर खुदकुशी (आत्मदाह) करने की कोशिश की। महिला को पेट्रोल डालते देख थाने में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। हालांकि, मौके पर मौजूद महिला पुलिसकर्मियों ने मुस्तैदी दिखाते हुए बेहद सूझबूझ से नाराज महिला को समझाइश दी और उसे इस आत्मघाती कदम को उठाने से रोक लिया।
मिली जानकारी के अनुसार, खुदकुशी का प्रयास करने वाली महिला की पहचान गढ़ा थाना इलाके के गुप्ता नगर निवासी जयंती यादव के रूप में हुई है। जयंती यादव अपने एक परिचित युवक लकी मरावी को पुलिस द्वारा जेल भेजे जाने से बेहद नाराज थी।
यह पूरा विवाद सितंबर 2025 में स्नेह नगर इलाके में हुई चाकूबाजी की एक वारदात से जुड़ा हुआ है। इस वारदात में तीन आरोपियों ने मिलकर मान्या ठाकुर नाम के एक युवक पर जानलेवा हमला किया था। मामले में दो आरोपियों की गिरफ्तारी पहले ही हो चुकी थी। हाल ही में पुलिस ने इस केस के तीसरे आरोपी लकी मरावी को भी गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।
थाने के भीतर चले इस हाई-प्रोफाइल ड्रामे के दौरान जयंती यादव ने मदन महल थाना पुलिस पर गंभीर और सनसनीखेज आरोप लगाए हैं। महिला का कहना है कि पुलिस ने लकी मरावी को इस मामले में बेवजह फंसाया है। इसके साथ ही जयंती ने आरोप लगाया कि पुलिस ने इस केस को रफा-दफा करने के बदले 5 लाख रुपये की रिश्वत की मांग की थी, जिसे न देने पर यह कार्रवाई की गई।इस पूरे ड्रामे और महिला द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों के बाद मदन महल थाना इंचार्ज धीरज राज ने मामले को शांत कराया। पुलिस प्रशासन ने महिला के आरोपों को गंभीरता से लेते हुए निष्पक्ष जांच का भरोसा दिया है। पुलिस का कहना है कि पूरे मामले की बारीकी से जांच की जाएगी और जांच के बाद जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसके आधार पर उचित वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
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कोयला प्रोजेक्ट में गुंडा टैक्स का आतंक: कंपनी दफ्तर में घुसकर फायरिंग
शहडोल। रामपुर बटूरा मेगा प्रोजेक्ट में उस वक्त दहशत फैल गई, जब कोयला उत्खनन काम में लगी जय अम्बे’ कंपनी के दफ्तर में बदमाशों ने सरेआम धावा बोल दिया। आरोप है कि क्षेत्र के कुछ दबंग कट्टा लहराते हुए ऑफिस में घुसे, कर्मचारियों को कटरे की नोक में धमकाया और दहशत फैलाने के लिए फायरिंग कर दी। इस सनसनीखेज घटना के बाद पूरे इलाके में भय का माहौल है।
SECL सोहागपुर अंतर्गत संचालित रामपुर बटुरा OCM में कोयला और OB उत्खनन का काम कर रही निजी ठेका कंपनी जय अम्बे कंपनी में काम करने वाला आलोक त्रिपाठी अमन क्षत्रीय, श्रीराम विश्वकर्मा अपने साथियों पप्पू विश्वकर्मा और मिथलेश चर्मकार उर्फ लकी के साथ अचानक कंपनी कार्यालय पहुंचा। आरोप है कि तीनों कट्टे की नोक पर धमकाया और अवैध वसूली की मांग करने लगे। विरोध करने पर आरोपियों ने देशी कट्टे से फायर कर दिया।
गोली चलते ही कार्यालय में अफरा-तफरी मच गई। गनीमत रही कि कर्मचारी किसी तरह जान बचाकर बाहर निकल गए, नहीं तो बड़ा हादसा हो सकता था। पीड़ित कर्मचारियों का आरोप है कि यह कोई पहली घटना नहीं है। आरपी लंबे समय से कंपनी पर तथाकथित गुंडा टैक्स का दबाव बना रहे थे। आए दिन काम में बाधा डालना, धमकाना और पैसों की मांग करना उनकी आदत बन चुकी है।
हैरानी की बात यह है कि घटना के बाद जब कर्मचारी शिकायत दर्ज कराने थाने पहुंचे, तब भी आरोपियों के हौसले कम नहीं हुए। कर्मचारियों का दावा है कि आरोपी श्रीराम विश्वकर्मा ने मोबाइल पर कॉल कर गालियां दीं और शिकायत वापस नहीं लेने पर जान से मारने की धमकी दी। इस मामले की आलोक त्रिपाठी अमन क्षत्रीय ने अमलाई थाने में शिकायत दर्ज कराई है।
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जंगल में अवैध हथियार का ‘मिनी कारखाना’: तस्कर की निशानदेही पर छापेमारी, पिस्तौल-जिंदा कारतूस जब्त
बुरहानपुर। मध्य प्रदेश के बुरहानपुर पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। जहां एक हथियार तस्कर को अवैध पिस्तौल के साथ गिरफ्तार किया गया। जिससे पूछताछ में अवैध हथियार के ‘मिनी कारखाना’ का खुलासा हुआ! आरोपी की निशानदेही पर पुलिस ने एक और पिस्तौल और जिंदा कारतूस बरामद किया। फिलहाल पुलिस इस पूरे नेटवर्क की जांच में जुटी हुई है।
बुरहानपुर जिले की नेपानगर में मुखबिर की सूचना पर नेपानगर पुलिस ने तहसील चौराहे से एक हथियार तस्कर को अवैध पिस्तौल के साथ गिरफ्तार किया। जिससे पूछताछ करने पर उसने अपने घर में और हथियार होना बताया। थाना प्रभारी ने मामले को गंभीरता से लेते आरोपी युवक की निशानदेही पर घर की तलाशी ली। जहां एक और पिस्तौल और 5 जिंदा कारतूस बरामद किए।
नेपानगर पुलिस आरोपी से सख्ती से पूछताछ कर अवैध हथियार तस्कर के पूरे नेटवर्क की चेन तलाश कर रही है। पुलिस अधीक्षक के नेतृत्व में नेपानगर और खकनार पुलिस की संयुक्त टीम ने खकनार क्षेत्र के जंगल में दबिश देकर हथियार बनाने के मिनी कारखाने का भंडाफोड़ किया। इस कार्रवाई के दौरान दो आरोपी फरार होने में कामयाब हुए।
वहीं पुलिस ने अधॅनिर्मित पिस्तौल के साथ हथियार बनाने के काफी मात्रा में हथियार जप्त किए है। पुलिस अब गिरफ्तार आरोपी से मिली जानकारी, जब्त हथियारों और फरार आरोपियों के कनेक्शन के आधार पर पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है। आशंका है कि आरोपियों से जुड़े कई और नाम सामने आ सकते हैं।
नरसिंहपुर। मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर के जैन मंदिर में हुई हुई चोरी की वारदात बेहद सुर्खियों में हैं। पूरा मामला करकबेल स्थित नेमिनाथ जैन मंदिर का है जहां बीती देर रात चोरों ने ऐसी वारदात को अंजाम दिया, जिसने श्रद्धालुओं और ग्रामीणों को हैरान कर दिया। चोर मंदिर में भगवान की प्रतिमा पर विराजमान सोने-चांदी के छत्र को तो ले ही गए। साथ में अपनी पहचान छिपाने और सबूत मिटाने के लिए उन्होंने सीसीटीवी सिस्टम को भी निशाना बनाया और डीवीआर तक चुरा लिया।
इस पूरी वारदात में चोरों का मुख्य निशाना भगवान की प्रतिमा पर लगे कीमती सोने और चांदी के छत्र थे। लेकिन इस दौरान चोरों ने गर्भगृह तक पहुंचने का प्रयास किया, लेकिन वहां लगे मजबूत ताले को तोड़ने में सफल नहीं हो सके। इसके बाद उन्होंने डंडों की मदद से प्रतिमा पर लगे छत्र निकालने की कोशिश की और तीन छत्र चोरी कर ले गए।
वारदात को अंजाम देने पहुंचे चोर पूरी तैयारी के साथ आए थे। सबसे पहले उन्होंने मंदिर में लगे सीसीटीवी कैमरों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की। जब कैमरे नहीं टूटे तो सबूत मिटाने के लिए उन्होंने मंदिर परिसर से लगे स्कूल की दीवार तोड़ दी और स्कूल कार्यालय में रखा सीसीटीवी डीवीआर अपने साथ ले गए। इतना ही नहीं, चोरों ने मंदिर परिसर में लगे इनवर्टर और बैटरियों पर भी हाथ साफ कर दिया। सुबह जब श्रद्धालु मंदिर पहुंचे तो चोरी का पता चला।
सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी। मामले की गंभीरता को देखते हुए फिंगर प्रिंट एक्सपर्ट और डॉग स्क्वॉड की टीमों को भी बुलाया गया है। पुलिस मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में सुराग तलाश रही है। धार्मिक आस्था के केंद्र बने इस मंदिर में हुई चोरी ने सुरक्षा व्यवस्थाओं पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
फिलहाल पुलिस का दावा है कि तकनीकी साक्ष्यों और जांच के आधार पर जल्द ही आरोपियों तक पहुंचकर पूरे मामले का खुलासा किया जाएगा बहरहाल अब देखना होगा कि पुलिस इन चोरों तक कब पहुंच पाती हैं।
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MP Weather Update : 35 जिलों में आंधी-बारिश, 5 जिलों में हीटवेव का अलर्ट; जानिए अगले 4 दिन कैसा रहेगा मौसम
भोपाल। मध्य प्रदेश में मौसम लगातार करवट बदल रहा है। प्रदेश के कई हिस्सों में पिछले एक सप्ताह से तेज आंधी और बारिश का दौर जारी है, वहीं दूसरी ओर कई जिलों में तापमान 42 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया है। इसी बीच अच्छी खबर यह है कि दक्षिण भारत से आगे बढ़ चुका दक्षिण-पश्चिम मानसून अब तेजी से मध्य भारत की ओर बढ़ रहा है और मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार मानसून मध्य प्रदेश में सामान्य समय से पहले दस्तक दे सकता है।
केरल में प्रवेश करने के बाद मानसून कर्नाटक, तमिलनाडु और गोवा तक पहुंच चुका है। इसके चलते मध्य प्रदेश में मानसून की एंट्री 20 जून से पहले होने की संभावना जताई जा रही है।
35 जिलों में आंधी-बारिश का अलर्ट
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने रविवार को प्रदेश के करीब 35 जिलों में तेज आंधी, गरज-चमक और बारिश का अलर्ट जारी किया है। कुछ क्षेत्रों में हवा की रफ्तार 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है।
इन जिलों में बारिश और आंधी की संभावना
संभाग/जिले
भोपाल, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, विदिशा
इंदौर, धार, अलीराजपुर, झाबुआ
बड़वानी, खरगोन, खंडवा, बुरहानपुर
उज्जैन, देवास, शाजापुर, आगर-मालवा
मंदसौर, नीमच, रतलाम
नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा
भिंड, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़
छतरपुर, पन्ना
मंडला, बालाघाट, सिवनी
नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा
पिछले दिनों नर्मदापुरम, सिवनी, सीहोर, खरगोन समेत कई जिलों में बारिश दर्ज की गई। तेज हवाओं के कारण कई स्थानों पर पेड़ और टीनशेड भी गिर गए।
बारिश के बावजूद मध्य प्रदेश के कई इलाकों में गर्मी का असर बरकरार है। शनिवार को नौगांव प्रदेश का सबसे गर्म शहर रहा, जहां अधिकतम तापमान 42.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
अगले चार दिन कैसा रहेगा मौसम?
7 जून
बारिश और गरज-चमक : भोपाल, इंदौर, उज्जैन, नर्मदापुरम, बैतूल, सीहोर, राजगढ़, झाबुआ, खंडवा, खरगोन, सिवनी, बालाघाट समेत 35 जिलों में बारिश की संभावना।
गर्मी : ग्वालियर, मुरैना, शिवपुरी, सागर, दमोह, जबलपुर, रीवा, सीधी और सिंगरौली सहित कई जिलों में 40 से 42 डिग्री तापमान रह सकता है।
8 जून
दक्षिण और पूर्वी मध्य प्रदेश में बारिश का असर अधिक रहेगा। वहीं भोपाल, ग्वालियर, उज्जैन, सागर, रीवा और आसपास के क्षेत्रों में तेज गर्मी बनी रह सकती है।
9 जून
हीटवेव के साथ उत्तर मध्य प्रदेश में भीषण गर्मी का असर रहेगा, जबकि बालाघाट, सिवनी, बैतूल, खंडवा और बड़वानी जैसे जिलों में बारिश की संभावना बनी रहेगी।
10 जून
दक्षिण-पश्चिमी जिलों में बारिश और तेज हवाओं का दौर जारी रहेगा, जबकि ग्वालियर-चंबल और बुंदेलखंड क्षेत्र के कुछ हिस्सों में लू जैसी स्थिति बन सकती है।
मध्य प्रदेश में मानसून के प्रवेश की सामान्य तारीख 15 जून मानी जाती है। आमतौर पर केरल पहुंचने के करीब 15 दिन बाद मानसून प्रदेश में प्रवेश करता है। पिछले साल यानी 2025 में मानसून 16 जून को मध्य प्रदेश पहुंचा था। इस बार मानसून ने दक्षिण भारत में अच्छी गति पकड़ी है। मौसम विशेषज्ञों का अनुमान है कि, अगर वर्तमान रफ्तार बनी रही तो मानसून 20 जून से पहले प्रदेश में दस्तक दे सकता है।
भोपाल में पिछले 14 वर्षों के रिकॉर्ड बताते हैं कि नौतपा के दौरान 7 बार बारिश दर्ज की गई और 2 बार बूंदाबांदी हुई। इस बार भी नौतपा की शुरुआत में बूंदाबांदी दर्ज की गई थी। हालांकि 2018 और 2019 में नौतपा के दौरान औसत तापमान 43 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच गया था। इस बार लगातार बदलते मौसम के कारण गर्मी और बारिश दोनों का मिश्रित असर देखने को मिल रहा है।
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अशोकनगर में किन्नर गुटों में तनाव: बाहरी संगठनों पर वसूली और धमकी का आरोप, कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन
अशोकनगर। मध्य प्रदेश के अशोकनगर जिले में किन्नर गुटों के बीच आपसी विवाद और तनाव का मामला गरमा गया है। स्थानीय किन्नर समुदाय ने बाहरी किन्नर संगठनों पर क्षेत्र में आकर जबरन अवैध वसूली करने और शांति भंग करने की धमकी देने का गंभीर आरोप लगाया है। इस मामले को लेकर स्थानीय किन्नरों ने एकजुट होकर कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंचकर कलेक्टर को एक शिकायती आवेदन सौंपा है।
स्थानीय किन्नर गुट की प्रमुखों का आरोप है कि पिछले कुछ समय से बाहरी जिलों और राज्यों से आए कुछ अज्ञात किन्नर संगठन अशोकनगर और आसपास के क्षेत्रों में सक्रिय हो गए हैं। ये बाहरी लोग स्थानीय लोगों से बधाई और नेक के नाम पर जबरन मोटी रकम वसूल रहे हैं। जब स्थानीय किन्नरों ने इसका विरोध किया, तो उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने और शहर की शांति व्यवस्था बिगाड़ने की धमकियां दी जा रही हैं।
कलेक्टर को दिए गए आवेदन में स्थानीय किन्नरों ने मांग की है कि बाहरी और फर्जी किन्नर संगठनों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। साथ ही, स्थानीय किन्नर समुदाय को सुरक्षा मुहैया कराई जाए ताकि भविष्य में किसी भी अप्रिय घटना या हिंसक टकराव को टाला जा सके। प्रशासन ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए निष्पक्ष जांच और उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है। इस विवाद के बाद से क्षेत्र में पुलिस और प्रशासन सतर्क नजर आ रहा है।
भारत में जन्मदर में बड़ी गिरावट आई है। पिछले 10 साल में भारत के जन्मदर (भारत में फर्टिलिटी रेट) में रिकॉर्ड गिरावट दर्ज हुई है। हाल यह है कि भारत के कई राज्यों का जन्मदर यूरोपीय देश फिनलैंड से भी नीचे आ गया है। भारत में तेजी से गिरते जन्मदर पर स्पेसएक्स के सीईओ और दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति एलन मस्क ने भी चिंता जताई है।
भारत में जन्मदर में बड़ी गिरावट पर एल्न मस्क ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा- भारत में जन्म दर में गिरावट आई है। यह प्रतिस्थापन स्तर (रिप्लेसमेंट) से नीचे गिर गई है। सबसे ज़्यादा पढ़े-लिखे लोगों में, भारत की जन्म दर कई साल पहले रिप्लेसमेंट से नीचे गिर गई थी। उन्होंने कहा कि भारत की प्रजनन दर अब रिप्लेसमेंट लेवल 2.1 से नीचे आकर 1.9 रह गई है। दिल्ली की प्रजनन दर अब 1.2 है जो फिनलैंड से भी कम है।
बता दें कि एएफ पोस्ट ने द इकोनामिस्ट के 4 जून 2026 के एक लेख का हवाला दिया जिसका शीर्षक था ‘भारत की जनसंख्या जल्द ही घटने लगेगी। पिछले साल, संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (यूएनएफपीए) की 2025 विश्व जनसंख्या की स्थिति रिपोर्ट के मुताबिक भारत में कुल प्रजनन दर 1.9 जन्म प्रति महिला तक घट चुका है। यह रिप्लेसमेंट रेट 2.1 से नीचे है। जिसका मतलब है कि औसतन भारतीय महिलाएं ऐसी संख्या में बच्चे पैदा कर रही हैं जो एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक जनसंख्या का आकार बनाए रखने के लिए जरूरत से कम है।
यह दुनिया के सबसे ज़्यादा आबादी वाले देश में एक बड़े डेमोग्राफिक बदलाव का संकेत है। इस गिरावट का मतलब है कि भारत विकास के एक नए दौर में पहुंच गया है। अब देश तेजी से बढ़ती आबादी की चिंता से आगे बढ़कर, बूढ़ी होती आबादी, छोटे होते परिवारों और भविष्य में काम करने वाले लोगों की कमी जैसी चिंताओं की ओर बढ़ रहा है।
एएफ पोस्ट के अनुसार, भारत में पहली बार कुल प्रजनन दर (टोटल फर्टिलिटी रेट-टीएफआर) देश के इतिहास में काफी नीचे पहुंच गई है। आंकड़ों के मुताबिक आबादी को स्थिर बनाए रखने के लिए आम तौर पर प्रति महिला लगभग 2.1 बच्चों की प्रजनन दर जरूरी मानी जाती है। भारत की 1.9 की दर यह बताती है कि डेमोग्राफिक मोमेंटम (आबादी की संरचना के कारण जारी रहने वाली बढ़त) की वजह से आबादी कुछ दशकों तक तो बढ़ती रहेगी, लेकिन अगर जन्म दर में सुधार नहीं हुआ, तो अंत में इसमें गिरावट आने की संभावना है। वहीं दिल्ली की प्रजनन दर घटकर सिर्फ़ 1.2 बच्चे प्रति महिला रह गई है, जबकि दक्षिणी राज्य तमिलनाडु और पूर्वी राज्य पश्चिम बंगाल में यह दर लगभग 1.3 तक पहुंच गई है, जो कुछ यूरोपीय देशों के बराबर है।
भारत की वर्तमान जनसंख्या 1.46 अरब से अधिक है। साल 2023 में भारत, चीन को पीछे छोड़कर दुनिया का सबसे अधिक जनसंख्या वाला देश बन गया। हालांकि यूएनएफपीए की वेबसाइट पर मौजूद जानकारी के मुताबिक साल-दर-साल इसकी प्रजनन दर में कमी आई है। भारत की आबादी एक अरब से अधिक है और स्वास्थ्य और शिक्षा में महत्वपूर्ण सुधार के बावजूद बड़े स्तर पर असमानताएं बनी हुई हैं।
रिप्लेसमेंट लेवल वह न्यूनतम प्रजनन दर होती है, जो किसी देश की आबादी को स्थिर बनाए रखने के लिए जरूरी मानी जाती है। आमतौर पर यह दर 2.1 मानी जाती है. संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (यूएनएफपीए) की 2025 विश्व जनसंख्या स्थिति रिपोर्ट के अनुसार भारत की कुल प्रजनन दर घटकर 1.9 जन्म प्रति महिला रह गई है, जो रिप्लेसमेंट रेट 2.1 से नीचे है। इसका मतलब है कि औसतन भारतीय महिलाएं अब उतने बच्चे पैदा नहीं कर रही हैं, जितने किसी पीढ़ी के आकार को अगली पीढ़ी तक बनाए रखने के लिए आवश्यक होते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जन्म दर में गिरावट का यही रुझान जारी रहा तो आने वाले वर्षों में भारत की जनसंख्या संरचना में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। कम जन्म दर के कारण भविष्य में युवाओं की तुलना में बुजुर्गों की संख्या तेजी से बढेगी। इसका असर देश की अर्थव्यवस्था, श्रम शक्ति और सामाजिक व्यवस्था पर असर पड़ेगा।
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3 महीने में दूसरी बार बढ़े LPG के दाम, घरेलू सिलेंडर 29 रुपए मंहगा तो कमर्शियल 1422 रुपए
देशभर के करोड़ों परिवारों को एक बार फिर महंगाई का झटका लगा है। घरेलू एलपीजी (LPG) गैस सिलेंडर की कीमतों में 29 रुपए की बढ़ोतरी कर दी गई है। नई कीमतें 7 जून से लागू हो गई हैं। इससे पहले मार्च में भी सिलेंडर के दाम बढ़ाए गए थे। लगातार दूसरी बार हुई बढ़ोतरी ने आम लोगों की रसोई का बजट बिगाड़ दिया है।
सरकारी तेल कंपनियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊर्जा की कीमतों में बढ़ोतरी और पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण गैस के दाम बढ़ाने पड़े हैं। खासतौर पर ईरान से जुड़े संकट और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में पैदा हुई अनिश्चितता का सीधा असर एलपीजी की कीमतों पर देखने को मिल रहा है।
नई बढ़ोतरी के बाद दिल्ली में 14.2 किलो वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत 913 रुपए से बढ़कर 942 रुपए हो गई है। इससे पहले 7 मार्च को भी घरेलू सिलेंडर के दाम में 60 रुपए की बढ़ोतरी की गई थी। यानी पिछले तीन महीनों में घरेलू गैस सिलेंडर कुल 89 रुपए महंगा हो चुका है।
घरेलू गैस का उपयोग लगभग हर घर में होता है। ऐसे में कीमतों में यह बढ़ोतरी सीधे तौर पर परिवारों के मासिक खर्च पर असर डाल सकती है।
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और तेल-गैस की वैश्विक आपूर्ति पर पड़े असर के कारण एलपीजी सिलेंडर लगातार महंगे हो रहे हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, ईरान संकट शुरू होने के बाद-
कमर्शियल सिलेंडर 1422 रुपए तक महंगा हुआ है।
घरेलू सिलेंडर 89 रुपए महंगा हुआ है।
5 किलो वाला छोटा सिलेंडर 11 रुपए महंगा हुआ है।
कमर्शियल सिलेंडर में रिकॉर्ड बढ़ोतरी
सबसे ज्यादा असर कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर पर देखने को मिला है। ईरान संकट शुरू होने से पहले जनवरी तक कमर्शियल सिलेंडर की कीमत 1691.50 रुपए थी। इसके बाद मई महीने में इसकी कीमत में एक साथ 993 रुपए की बड़ी बढ़ोतरी की गई। अब 7 जून को फिर 42 रुपए दाम बढ़ा दिए गए हैं।
इस तरह फरवरी के बाद से कमर्शियल सिलेंडर कुल 1422 रुपए महंगा हो चुका है। यह लगभग 84 प्रतिशत की बढ़ोतरी है। कमर्शियल सिलेंडर का उपयोग होटल, रेस्टोरेंट, ढाबे, कैंटीन और अन्य व्यावसायिक संस्थानों में होता है। ऐसे में बढ़ती कीमतों से इन कारोबारों की लागत काफी बढ़ गई है। कई छोटे व्यवसायों को आर्थिक दबाव का सामना करना पड़ रहा है।
14.2 किलो वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत संकट से पहले 853 रुपए थी। इसके बाद 7 मार्च को 60 रुपए की बढ़ोतरी हुई। 7 जून को फिर 29 रुपए बढ़ाए गए। दोनों बढ़ोतरी को जोड़ें तो घरेलू सिलेंडर अब तक 89 रुपए महंगा हो चुका है।
इसका असर सीधे तौर पर आम परिवारों की जेब पर पड़ रहा है। खासकर मध्यम वर्ग और निम्न आय वर्ग के लोगों के लिए यह अतिरिक्त खर्च चिंता का विषय बन सकता है।
केवल बड़े सिलेंडर ही नहीं, बल्कि 5 किलो वाले छोटे एलपीजी सिलेंडर की कीमत भी बढ़ाई गई है। 1 जून को इसकी कीमत में 11 रुपए की बढ़ोतरी की गई थी। इसके बाद दिल्ली में 5 किलो वाले सिलेंडर की कीमत 821.50 रुपए हो गई है।
कीमतें बढ़ने के बीच लोगों के मन में यह सवाल भी है कि क्या गैस की सप्लाई प्रभावित होगी? इस पर पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि देश में एलपीजी की सप्लाई पूरी तरह सामान्य है। मंत्रालय के अनुसार किसी भी गैस एजेंसी पर गैस की कमी की स्थिति नहीं है। देशभर में पर्याप्त मात्रा में एलपीजी उपलब्ध है। उपभोक्ताओं को घबराने या अतिरिक्त सिलेंडर जमा करने की जरूरत नहीं है।
सरकार का कहना है कि संकट के बावजूद लोगों तक गैस की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है।
सरकार ने यह भी बताया है कि गैस की जमाखोरी और कालाबाजारी रोकने के लिए लगातार कार्रवाई की जा रही है। देशभर में निगरानी बढ़ाई गई है ताकि कोई भी व्यक्ति या एजेंसी कृत्रिम कमी पैदा कर मुनाफाखोरी न कर सके। इसके अलावा तेल कंपनियों और प्रशासन को भी सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।
सरकार ने एलपीजी बुकिंग को लेकर भी महत्वपूर्ण जानकारी दी है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, देश में अब लगभग 99 प्रतिशत गैस बुकिंग ऑनलाइन हो रही है। वहीं करीब 95 प्रतिशत गैस डिलीवरी ग्राहकों के मोबाइल पर भेजे गए ओटीपी के जरिए सत्यापित की जा रही है। इस व्यवस्था का उद्देश्य गैस वितरण में पारदर्शिता बढ़ाना और हेराफेरी को रोकना है।
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भारतीय रेलवे 100% विद्युतीकरण के करीब, अब बस 5 राज्यों में 269 रूट किलोमीटर का काम बाकी…
भारतीय रेलवे अपने पूरे ब्रॉड गेज (BG) नेटवर्क के विद्युतीकरण का काम मिशन मोड में कर रहा है। रेल मंत्रालय ने बताया कि देश के ब्रॉड गेज (BG) नेटवर्क का 99.6 प्रतिशत हिस्सा पहले ही विद्युतीकृत हो चुका है। BG लाइनों के कुल 70,271 रूट किलोमीटर (RKm) में से, 31 मई 2026 तक 70,002 RKm का विद्युतीकरण हो चुका है, और नेटवर्क का बहुत छोटा सा हिस्सा ही बाकी है।
भारत में रेलवे विद्युतीकरण 1925 में शुरू हुआ था, जब देश की पहली इलेक्ट्रिक ट्रेन, जो 1,500-वोल्ट DC सिस्टम पर चलती थी, महाराष्ट्र में बॉम्बे विक्टोरिया टर्मिनस और कुर्ला हार्बर के बीच चली थी। रेल मंत्रालय के ताज़ा अपडेट के अनुसार, 25 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने अपने ब्रॉड गेज (BG) रेलवे नेटवर्क का 100 प्रतिशत विद्युतीकरण पूरा कर लिया है, और कोई भी रूट किलोमीटर बाकी नहीं है।
अभी भी सिर्फ़ पाँच राज्यों में कुछ हिस्सों का विद्युतीकरण होना बाकी है। इन बचे हुए हिस्सों की कुल लंबाई सिर्फ़ 269 RKm है। इनके अलावा, सभी नई लाइन और मल्टी-ट्रैकिंग प्रोजेक्ट्स को विद्युतीकरण के साथ मंज़ूरी दी जा रही है और बनाया जा रहा है।
रेल मंत्रालय के अनुसार, सिर्फ़ पाँच राज्यों – राजस्थान, तमिलनाडु, असम, कर्नाटक और गोवा – में ब्रॉड गेज (BG) रेलवे सेक्शन का विद्युतीकरण अभी बाकी है, जिनकी कुल लंबाई 269 रूट किलोमीटर (RKm) है।
राजस्थान में, राज्य के कुल 6,514 RKm BG नेटवर्क में से 6,504 RKm का विद्युतीकरण हो चुका है, और सिर्फ़ 10 RKm का काम बाकी है। इसी तरह, तमिलनाडु ने अपने 3,926 RKm BG नेटवर्क में से 3,858 RKm का विद्युतीकरण कर लिया है, और 68 RKm बाकी है। असम ने अपने 2,589 RKm ब्रॉड गेज नेटवर्क का 97.9 प्रतिशत विद्युतीकरण पूरा कर लिया है, जबकि कर्नाटक ने अपने 3,743 RKm BG नेटवर्क का 96.8 प्रतिशत विद्युतीकरण किया है। गोवा में, कुल 187 RKm ब्रॉड गेज नेटवर्क में से 171 RKm का विद्युतीकरण हो चुका है, और केवल 16 RKm का काम बाकी है।
रतलाम। मध्यप्रदेश के रतलाम जिले के पंचेड़-नामली मार्ग पर स्थित ‘तुलसी वाटर पार्क’ में स्विमिंग पूल की आड़ में अवैध स्पा सेंटर और देह व्यापार के बड़े रैकेट का भंडाफोड़ हुआ है। एसपी अमित कुमार के निर्देशन में पुलिस टीम ने खुद ग्राहक बनकर इस काले कारोबार का पर्दाफाश किया। छापेमार कार्रवाई के दौरान पुलिस को मौके से थाईलैंड की तीन युवतियां, तीन संदिग्ध युवक और वाटर पार्क का मैनेजर मिला है, जिन्हें हिरासत में ले लिया गया है।
एसपी अमित कुमार को लंबे समय से तुलसी वाटर पार्क में संदिग्ध गतिविधियों की शिकायतें मिल रही थीं। सूचना लीक न हो, इसलिए एसपी ने इसे पूरी तरह गोपनीय रखा और एएसपी विवेक कुमार लाल के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित की। टीम ने सबसे पहले कुछ पुलिसकर्मियों को फर्जी ग्राहक बनाकर वाटर पार्क भेजा। वहां जैसे ही अवैध स्पा और अनैतिक गतिविधियों की पुष्टि हुई, वैसे ही विशेष टीम ने पूरे परिसर को घेरकर दबिश दे दी।
पुलिस की जांच में सामने आया कि वाटर पार्क परिसर के पिछले हिस्से में छह विशेष कमरे बनाए गए थे, जहां स्पा सेंटर की आड़ में यह खेल चल रहा था। तीन अलग-अलग कमरों में थाईलैंड की तीन युवतियां और उनके साथ संदिग्ध परिस्थितियों में तीन युवक मिले। तलाशी के दौरान स्पा के कमरों के डस्टबिन से बड़ी संख्या में उपयोग किए हुए कंडोम और अन्य आपत्तिजनक सामग्री मिली है। पुलिस ने वाटर पार्क के मैनेजर दिलीप ठाकुर को भी हिरासत में लिया है।
इस कार्रवाई की सबसे खास बात यह रही कि घटनास्थल से महज कुछ किलोमीटर दूर स्थित नामली थाने की पुलिस को इसकी कानों-कान भनक तक नहीं लगने दी गई। सूचना लीक होने के डर से एसपी ने कार्रवाई में शामिल सभी पुलिसकर्मियों के मोबाइल फोन तक बंद करवा दिए थे। स्थानीय पुलिस की भूमिका संदिग्ध मानते हुए अब उनकी भी जांच की जा रही है। फिलहाल, पुलिस मामले से जुड़े सभी व्यक्तियों से पूछताछ कर रही है और वाटर पार्क के दस्तावेजों को खंगाल रही है।
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कुत्तों का खूनी आतंक! युवक के गुप्तांग पर हमला , 10 घंटे में 42 लोगों को काटा
इंदौर। मध्य प्रदेश के इंदौर में आवारा कुत्तों का आतंक अब खतरनाक स्तर पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। शहर के प्रतिष्ठित अरविंदो अस्पताल परिसर में एक कुत्ते ने ऐसा आतंक मचाया कि महज 10 घंटे के भीतर 42 लोगों को अपना शिकार बना लिया। सबसे चौंकाने वाला मामला एक युवक का सामने आया, जिसके गुप्तांग पर कुत्ते ने हमला कर गंभीर रूप से घायल कर दिया। घटना ने एक बार फिर नगर निगम के दावों और व्यवस्थाओं की पोल खोल दी है।
हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट द्वारा खूंखार और आक्रामक कुत्तों को चिन्हित कर उन्हें शेल्टर होम भेजने के निर्देश दिए जा चुके हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर हालात बिल्कुल अलग नजर आ रहे हैं। शहर में लगातार डॉग बाइट के मामले बढ़ रहे हैं और लोग डर के साए में जीने को मजबूर हैं।
हुकुमचंद अस्पताल के प्रभारी डॉक्टर आर.के. पटेल ने बताया कि अरविंदो अस्पताल से कई पीड़ित वैक्सीनेशन के लिए पहुंचे थे। सभी का उपचार कर एंटी रेबीज वैक्सीन लगाई गई है। उन्होंने बताया कि अस्पताल में प्रतिदिन 200 से 250 डॉग बाइट पीड़ित इलाज के लिए पहुंच रहे हैं, जो स्थिति की गंभीरता को दर्शाता है।
डॉक्टर पटेल के अनुसार एक युवक ऐसा भी आया था जिसके गुप्तांग पर कुत्ते ने काट लिया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए उसे सर्जन से परामर्श लेने की सलाह दी गई है। इस घटना ने लोगों के बीच भय का माहौल पैदा कर दिया है। इंदौर में लगातार बढ़ते डॉग बाइट के मामलों के बावजूद नगर निगम की ओर से कोई ठोस और प्रभावी कार्रवाई दिखाई नहीं दे रही। शहर के अस्पतालों में रोजाना सैकड़ों लोग कुत्तों के हमलों का शिकार होकर पहुंच रहे हैं, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान अब तक नहीं निकल पाया है। अरविंदो अस्पताल में 10 घंटे के भीतर 42 लोगों को काटने की घटना ने साफ कर दिया है कि आवारा और खूंखार कुत्तों का मुद्दा अब केवल पशु नियंत्रण का नहीं, बल्कि सार्वजनिक सुरक्षा का बड़ा संकट बन चुका है।
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‘सतना ढाबा’ पर खूनी संघर्षः खाना खाने के बाद बिल मांगना पड़ा भारी, बदमाशों ने मचाया जमकर उत्पात
जबलपुर। मध्यप्रदेश के जबलपुर जिले के गोसलपुर थाना अंतर्गत गांधीग्राम इलाके में स्थित ‘सतना ढाबा’ पर कुछ बदमाशों ने खूनी संघर्ष को अंजाम दिया। ढाबा संचालक का कसूर सिर्फ इतना था कि उसने खाना खाने के बाद आए बदमाशों से बिल की मांग कर ली थी। इसी बात से नाराज होकर बदमाशों ने ढाबा संचालक और वहां के कर्मचारियों पर लाठी-डंडों से जानलेवा हमला कर दिया।
बिल मांगने पर आगबबूला हुए बदमाशों ने आव देखा न ताव और ढाबा संचालक व कर्मियों को बेरहमी से पीटना शुरू कर दिया। इस हमले में कई कर्मचारियों को गंभीर चोटें आई हैं। मारपीट करने के बाद भी जब बदमाशों का मन नहीं भरा, तो उन्होंने पूरे ढाबे को अपना निशाना बनाया। बदमाशों ने ढाबे के भीतर घूम-घूमकर आतंक मचाया और वहां रखे काउंटर, टेबल तथा कुर्सियों को लाठी-डंडे मार-मारकर चकनाचूर कर दिया।
इस पूरी वारदात का एक बेहद डरावना सीसीटीवी (CCTV) फुटेज भी सामने आया है। इस वीडियो में साफ तौर पर देखा जा सकता है कि किस तरह से बेखौफ बदमाश ढाबे के अंदर तांडव मचा रहे हैं। वे हाथों में लाठी-डंडे लहराते हुए काउंटर और फर्नीचर को तोड़ते नजर आ रहे हैं। इस फुटेज के सामने आने के बाद इलाके में दहशत का माहौल है।
वारदात को अंजाम देने के बाद जाते-जाते बदमाशों ने ढाबा संचालक को खुलेआम धमकी दी। बदमाशों ने कहा “अगर दोबारा कभी हमसे बिल मांगा, तो सीधे जान से मार देंगे।” यह धमकी देते हुए सभी आरोपी मौके से फरार हो गए।
घटना की सूचना मिलते ही गोसलपुर थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज और शिकायत के आधार पर मुख्य आरोपी राज यादव, जीत रैकवार और उनके अन्य साथियों के खिलाफ विभिन्न गंभीर धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस का कहना है कि आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए टीमें रवाना क
जबलपुर. एमपी के जबलपुर में क्राइम ब्रांच व थाना पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए नशीले इंजेक्शनों का बड़ा जखीरा बरामद किया है. इस मामले में दो मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव (एमआर) सहित छह आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है. सभी आरोपी जबलपुर के रहने वाले हैं और कम कीमत पर इंजेक्शन खरीदकर नशा करने वालों को ऊंचे दामों पर बेचते थे. पुलिस इस कारोबार के मास्टरमाइंड की तलाश में जुटी है. आज आरोपियों के कब्जे से करीब 6,600 इंजेक्शन, एक ऑटो और पांच मोबाइल फोन जब्त किए गए.
बेलबाग थाना प्रभारी जितेंद्र पाटकर को मुखबिर से सूचना मिली थी कि नशीले इंजेक्शनों की बड़ी खेप उत्तर प्रदेश से रीवा, सतना और कटनी होते हुए बस के जरिए जबलपुर लाई गई है. यहां से इसे शहर के विभिन्न इलाकों में सप्लाई किया जाना था. सूचना मिलने पर एसपी संपत उपाध्याय को अवगत कराया गया. इसके बाद एएसपी क्राइम जितेंद्र सिंह के नेतृत्व में टीम गठित कर कार्रवाई की गई. पुलिस ने रामलीला मैदान के पास ई-रिक्शा क्रमांक रूक्क-20र्-ंङ्ग-7302 के साथ एक संदिग्ध युवक को देखा. पूछताछ के लिए रोकने पर वह भागने लगा, लेकिन पुलिस ने घेराबंदी कर उसे पकड़ लिया. पूछताछ में आरोपी ने अपना नाम दुर्गा पटेल (46) निवासी समता कॉलोनी, थाना गोहलपुर बताया. तलाशी के दौरान ई-रिक्शा से तीन कार्टन और एक सफेद बोरी बरामद हुई. तीनों कार्टनों में 16-16 बॉक्स रखे थे. प्रत्येक बॉक्स में 25-25 शीशियांमिलीं. कुल 1,200 शीशियों की कीमत लगभग 26,400 रुपए आंकी गई. सफेद बोरी में 80 डिब्बे मिले. इनमें कुल 2,000 इंजेक्शन थे, जिनकी कीमत करीब 54,400 रुपए बताई गई. इस तरह दोनों प्रकार के कुल 3,200 नशीले इंजेक्शन बरामद हुए, जिन्हें ई-रिक्शा समेत जब्त कर लिया गया.
दुर्गा पटेल से नशीले इंजेक्शनों के संबंध में पूछताछ की गई तो उसने बताया कि गोहलपुर निवासी अमजद खान के कहने पर उसे खेप मोहम्मद आरिफ तक पहुंचानी थी. इसके बदले उसे पैसे मिलते थे. दुर्गा की निशानदेही पर पुलिस ने भानतलैया बढ़ई मोहल्ला रोड में दबिश देकर मोहम्मद आरिफ (32) निवासी ठक्कर ग्राम पचकुइया, हनुमानताल और अमजद खान (48) निवासी गाजी नगर झुग्गी-झोपड़ी, 10 नल को गिरफ्तार कर लिया. आरोपियों से पूछताछ में सैय्यद अशरफ अली और मदनमहल के गुलाटी पेट्रोल पंप क्षेत्र निवासी सौरभ नामदेव का नाम सामने आया. पुलिस के अनुसार, सौरभ नामदेव उत्तर प्रदेश से नशीले इंजेक्शन मंगवाकर अमजद खान और अन्य लोगों के माध्यम से उनकी सप्लाई करवाता था. मामले में सौरभ सोनकर अभी फरार है. आरोपियों के खिलाफ धारा 5/13 मप्र ड्रग्स कंट्रोल एक्ट तथा 8/21, 22 और 29 एनडीपीएस एक्ट के तहत कार्रवाई की गई है.-
आज बेलबाग पुलिस के साथ अधारताल थाना पुलिस ने भी नशीले इंजेक्शन बेचने वाले एक आरोपी को गिरफ्तार किया. मुखबिर की सूचना पर मिल्क स्कीम क्षेत्र में चार बोरियों के साथ खड़े एक युवक को पकड़ा गया. उसने अपना नाम गीतांशु साहू (25) निवासी बजरंग बाड़ा, आधारताल बताया. बोरियों की तलाशी लेने पर 3,400 नशीले इंजेक्शन बरामद किए गए. पूछताछ में गीतांशु ने बताया कि भानतलैया निवासी कल्लू दद्दा ने उसे ये इंजेक्शन बेचने के लिए रखवाए थे. पुलिस ने सभी इंजेक्शन जब्त कर आरोपी के खिलाफ मप्र ड्रग्स कंट्रोल एक्ट और एनडीपीएस एक्ट की संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया है.
एएसपी जितेंद्र सिंह ने बताया कि जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है. आरोपी एविल और बुप्रेनॉर्फिन इंजेक्शन का कॉम्बो तैयार कर सिरिंज के जरिए नशेडिय़ों को 300 से 500 रुपए में बेचते थे. पुलिस अब तक इस मामले में छह आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है.
पुलिस गिरफ्त में आरोपी-
-दुर्गा पिता बेनीप्रसाद पटेल, उम्र 46 वर्ष, निवासी समता कॉलोनी, गोहलपुर
-मोहम्मद आरिफ पिता निसार अहमद, उम्र 32 वर्ष, निवासी ठक्कर ग्राम, पचकुइया, हनुमानताल.
-अमजद पिता गफ्फार खान, उम्र 48 वर्ष, निवासी गाजी नगर झुग्गी-झोपड़ी, 10 नल, गोहलपुर.
-सैय्यद अशरफ अली उर्फ जीजा उम्र 39 वर्ष, निवासी बंद कुआं, ओमती.
-सौरभ नामदेव पिता रमेश नामदेव, उम्र 45 वर्ष, निवासी गुलाटी पेट्रोल पंप के पास, मदनमहल.
-गीतांशु साहू पिता संतोष साहू, उम्र 26 वर्ष, निवासी बजरंग बाड़ा, आधारताल.
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49.50 लाख के फर्जी लूटकांड का 24 घंटे में खुलासा: खुद पीड़िता ही निकली मास्टरमाइंड
ग्वालियर। डबरा में बीते दो दिनों से चर्चा का विषय बने कथित लाखों रुपये की लूटकांड का ग्वालियर पुलिस ने महज 24 घंटे के भीतर खुलासा कर दिया है। जिस महिला को पूरे मामले में पीड़िता माना जा रहा था, वही अपने पति और उसके साथियों के साथ मिलकर इस पूरी साजिश की मुख्य किरदार निकली। पुलिस ने न केवल फर्जी लूटकांड का खुलासा किया बल्कि लगभग 49.50 लाख रुपये का पूरा मशरूका भी बरामद कर लिया। एसएसपी धर्मवीर सिंह ने प्रेसवार्ता में मामले की जानकारी दी है।
घटना 4 जून 2026 की है, जब डबरा सिटी थाना क्षेत्र के संस्कृति नगर स्थित सचदेवा फार्म के पास रहने वाली मोनिका उर्फ रानू श्रीवास्तव ने पुलिस को सूचना दी कि उसकी भाभी पिंकी श्रीवास्तव घर पर अकेली थी। इसी दौरान एसी सर्विसिंग के बहाने दो युवक घर में घुसे, मारपीट कर उसे बंधक बनाया और अलमारी का लॉक तोड़कर 2.50 लाख रुपये नगद तथा लाखों रुपये के सोने-चांदी के जेवरात लूटकर फरार हो गए।
डबरा अनुभाग, क्राइम ब्रांच और साइबर टीम ने संयुक्त रूप से जांच शुरू की। घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की बारीकी से पड़ताल की गई। तकनीकी साक्ष्य जुटाए गए, मोबाइल लोकेशन और संदिग्ध गतिविधियों का विश्लेषण किया गया। जांच के दौरान पुलिस को कई ऐसे तथ्य मिले जिन्होंने कथित लूट की कहानी पर सवाल खड़े कर दिए।
सीसीटीवी फुटेज में दिखाई दे रहे संदिग्धों की पहचान शुभम श्रीवास्तव और सोनू जाटव के रूप में हुई। पुलिस ने जब शुभम श्रीवास्तव को हिरासत में लेकर पूछताछ की तो पूरे मामले की परतें खुलती चली गईं। पूछताछ में सामने आया कि शुभम अपनी पत्नी पिंकी के साथ पिछले तीन महीनों से अपनी बहन मोनिका के घर रह रहा था। इसी दौरान पिंकी ने मोनिका को अलमारी में बड़ी मात्रा में नगदी और जेवर रखते हुए देख लिया था। तभी से दोनों ने संपत्ति हड़पने की योजना बनानी शुरू कर दी।
योजना के तहत शुभम ने अपने दोस्त सोनू जाटव को साथ लिया। तय हुआ कि घर में लूट की झूठी कहानी तैयार कर नगदी और जेवरात गायब कर दिए जाएंगे। घटना वाले दिन जब मोनिका अपने बच्चों के साथ घर से बाहर गई हुई थी, तब शुभम और सोनू घर पहुंचे। पिंकी ने खुद दरवाजा खोला और सीसीटीवी कैमरे के सामने सामान्य बातचीत का अभिनय किया ताकि किसी को शक न हो।
इसके बाद घर के अंदर जाकर लोहे की रॉड से अलमारी तोड़ी गई और उसमें रखे 2.50 लाख रुपये नगद तथा लाखों के जेवर निकाल लिए गए। साजिश को असली लूट जैसा दिखाने के लिए ड्रेसिंग टेबल का कांच तोड़ा गया और पिंकी के माथे पर हल्की चोट भी पहुंचाई गई। फिर उसके हाथ-पैर बांध दिए गए ताकि वह खुद को पीड़िता साबित कर सके।
लूट की रकम में से एक लाख रुपये पिंकी के बैग में छिपाकर रख दिए गए, जबकि डेढ़ लाख रुपये सोनू जाटव को दे दिए गए। वहीं करोड़ों के बराबर महत्व रखने वाले जेवरातों को एक बैग में भरकर ग्वालियर निवासी आशिफ खान के घर छिपा दिया गया।
पुलिस की तकनीकी जांच, सीसीटीवी विश्लेषण और लगातार पूछताछ के दबाव में आखिरकार आरोपियों की कहानी टूट गई। पुलिस ने शुभम की निशानदेही पर सोनू जाटव को गिरफ्तार किया और उसके घर से 1.50 लाख रुपये बरामद किए। इसके बाद आशिफ खान के घर छापा मारकर सोने-चांदी के सभी जेवरात बरामद कर लिए गए। जांच के दौरान पिंकी के बैग से भी एक लाख रुपये बरामद हुए।
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 252.82 ग्राम सोने के जेवर, लगभग 1.9 किलोग्राम चांदी के आभूषण, 2.50 लाख रुपये नगद और घटना में प्रयुक्त डिस्कवर मोटरसाइकिल जब्त की है। बरामद संपत्ति की कुल कीमत लगभग 49 लाख 50 हजार रुपये आंकी गई है।
पूरे मामले को ट्रेस करने में डबरा सिटी थाना प्रभारी निरीक्षक संजय शर्मा, एसडीओपी डबरा सौरभ कुमार, डीएसपी अपराध नागेंद्र सिंह सिकरवार, डीएसपी मनीष यादव, क्राइम ब्रांच, साइबर सेल तथा डबरा, पिछोर और गिजौरा थाना पुलिस की संयुक्त टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही। तकनीकी साक्ष्यों, सीसीटीवी फुटेज और वैज्ञानिक जांच के दम पर पुलिस ने 24 घंटे के भीतर इस हाई-प्रोफाइल मामले का खुलासा कर दिया।
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स्कूल शिक्षा विभाग का बड़ा फैसला: बंद होगी यूनिफॉर्म की नकद राशि, सीधे बांटी जाएगी गणवेश
भोपाल। मध्यप्रदेश में स्कूल शिक्षा विभाग ने सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों की यूनिफॉर्म व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया है। अब छात्रों के खातों में ड्रेस की राशि भेजने के बजाय सीधे सिली हुई यूनिफॉर्म उपलब्ध कराई जाएगी जिसे प्रदेश की गारमेंट्स इंडस्ट्री तैयार करेगी,हालांकि इस फैसले को लेकर बच्चों और अभिभावकों की राय अलग-अलग है। वहीं कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता स्वदेश शर्मा ने आरोप लगाया कि विद्यार्थियों के खातों में यूनिफॉर्म की राशि भेजने की व्यवस्था बंद कर गणवेश वितरण के नाम पर भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी का नया रास्ता खोला गया है।
सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले लाखों विद्यार्थियों को अब यूनिफॉर्म के लिए राशि नहीं मिलेगी। मध्य प्रदेश में स्कूल यूनिफॉर्म को लेकर बड़ा नियम बदल गया हैअब कक्षा 1 से 8वीं तक के छात्रों के बैंक खातों में 600 रुपए नहीं भेजे जाएंगे। इसकी जगह बच्चों को सीधे रेडीमेड यूनिफॉर्म दी जाएगी, जिसे प्रदेश की गारमेंट्स इंडस्ट्री तैयार करेगी।
बता दें कि मध्यप्रदेश में 2024-25 से कक्षा 1 से 8 तक के विद्यार्थियों के खातों में यूनिफॉर्म के लिए 600 रुपये की राशि डीबीटी के माध्यम से भेजी जा रही थी। इससे पहले गणवेश स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से सिलवाकर वितरित की जाती थी।
हालांकि कई विद्यार्थियों का मानना है कि ड्रेस की जगह राशि मिलना अधिक सुविधाजनक था। छात्राओं का कहना है कि तैयार यूनिफॉर्म में साइज की समस्या हो सकती है, जबकि नकद राशि मिलने पर वे अपनी पसंद और सही नाप की ड्रेस खरीद सकती थी। कुछ छात्राओं ने यह भी कहा कि जरूरत पड़ने पर परिवार की ओर से अतिरिक्त राशि जोड़कर अच्छी यूनिफॉर्म खरीदी जा सकती थी। अभिभावकों का कहना है कि पहले यूनिफॉर्म की राशि विद्यार्थियों के खातों में जाती थी, लेकिन कई बार यह अन्य जरूरतों में खर्च हो जाती थी, जिससे कुछ बच्चे नई ड्रेस नहीं बनवा पाते थे. इसे देखते हुए सरकार ने व्यवस्था बदलकर सीधी यूनिफॉर्म उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है।
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