


उज्जैन। मध्यप्रदेश पुलिस के 5500 से अधिक ट्रेड आरक्षकों ने देश में शायद पहली बार एक अभूतपूर्व कदम उठाते हुए अपनी पीड़ा सीधे न्याय के देवता महाकाल बाबा के दरबार में रखी है। इन सिपाहियों ने उज्जैन में बाबा के चरणों में अर्जी लगाने के बाद एक सामूहिक प्रार्थना-पत्र मुख्यमंत्री को भेजकर हस्तक्षेप की गुहार लगाई है। टेÑड आरक्षक चाहते हैं कि 5 साल की सेवा अवधि के बाद पूर्व की तरह विभागीय परीक्षा पास करने पर थानों में पोस्टिंग दी जाए।
महाकाल बाबा को अर्पित अर्जी के माध्यम से ट्रेड आरक्षकों कहना है कि उन्हें जनता की सुरक्षा के लिए नहीं बल्कि वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के निजी बंगलों में घरेलू नौकरों की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है, जिसमें झाड़ू-पोंछा, बर्तन धोना, साफ-सफाई करना, खाना बनाना, जूता पालिश, कारपेंटर सहित बच्चों और पालतू कुत्तों की देखभाल जैसे कार्य उनसे कराए जा रहे हैं। यह न केवल संविधान बल्कि मानवाधिकारों का भी खुला उल्लंघन है।
ट्रेड आरक्षकों ने अपने आवेदन में बताया है कि पहले मध्यप्रदेश में नियम जीओपी-57/93 के तहत 5 वर्ष की सेवा के बाद उन्हें जनरल ड्यूटी (जीडी) में संविलियन किया जाता था। इससे उनकी पोस्टिंग थानों में होने से फील्ड में कानून व्यवस्था संभालते थे। लेकिन वर्ष 2012 में इस व्यवस्था को अचानक जीओपी-57/93 के माध्यम से बंद कर दिया गया। नतीजे में 5500 जवान में से कई आज भी अफसरों की निजी सेवा में ही फं से हुए हैं।
प्रदेश के 5500 ट्रेड आरक्षकों के वेतन आदि पर प्रदेश सरकार सालाना लगभग 250-300 करोड़ रुपए खर्च कर रही है, जबकि वही काम आउटसोर्स के माध्यम से सिर्फ 45 करोड़ रु सालाना खर्च में हो सकता है। यानी हर साल लगभग 250 करोड़ बेवजह खर्च हो रहे हैं, जबकि यह राशि आम जनता के टैक्स से प्राप्त होती है।
मद्रास हाईकोर्ट कई दशक पहले ही अर्दली प्रथा को अवैध बता चुका है। इसके अलावा प्रिवेंशन आॅफ करप्शन एक्ट, 1988 की धारा 13 के अनुसार भी सरकारी स्टाफ को निजी सेवा में लगाना भ्रष्टाचार की श्रेणी में आता है। बावजूद मध्यप्रदेश में यह व्यवस्था दशकों से बरकरार है।
पूर्व विशेष पुलिस महानिदेशक (पुलिस रिफार्म्स) शैलेष सिंह ने अर्दली के तौर पर नियमित आरक्षकों की भर्ती से लेकर उनके रिटायरमेंट तक होने वाले वेतन भत्तों के खर्च को सामने रखते हुए प्रस्ताव तत्कालीन पुलिस महानिदेशक सुधीर सक्सेना को प्र्रस्तुत किया था। इसमे कलेक्टर रेट पर अर्दली रखने के साथ ही ट्रेड आरक्षकों को जीडी में संविलियन का मसौदा था, क्योंकि ट्रेड आरक्षक प्रमोशन पाते हुए सहायक उपनिरीक्षक या उपनिरीक्षक स्तर से रिटायर होते हैं। ऐसे में उनका मासिक वेतन 65 से 70 हजार रुपए तक हो जाता है, जबकि काम बंगले पर चाकरी करना ही होता है। यह प्रस्ताव अभी भी विचाराधीन ही है, जिससे ट्रेड आरक्षकों के थानों में पोस्टिंग पूर्व विभागीय परीक्षा शुरू नहीं हो पा रही है।
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पौने दो करोड़ की एक्सपायर बीयर ज़मीन में दफन, बड़ी कार्रवाई से हड़कंप
इंदौर। नागरिकों की सेहत से किसी भी तरह का समझौता न हो, इसी मंशा के साथ इंदौर आबकारी विभाग ने सख्त कार्रवाई करते हुए पौने दो करोड़ रुपये कीमत की एक्सपायर बीयर को नष्ट कर दिया। सिमरोल क्षेत्र स्थित माउंट एवरेस्ट ब्रेवरीज लिमिटेड, मेमदीग्राम में बनाई गई करीब 2 लाख 23 हजार 316 लीटर बीयर तय समय पर निर्यात नहीं हो सकी, जिसके चलते उसकी वैधता अवधि समाप्त हो गई थी।
अगर यह बीयर बाजार में पहुंचती, तो जनस्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा बन सकती थी। आबकारी विभाग को जैसे ही जानकारी मिली कि बीयर की निर्माण तिथि से छह महीने की अवधि पूरी हो चुकी है और स्टॉक अब एक्सपायर हो चुका है, विभाग ने इसे बेहद गंभीरता से लिया। बिना समय गंवाए नियमानुसार नष्टीकरण की प्रक्रिया शुरू की गई, ताकि किसी भी स्तर पर यह बीयर बिक्री या आपूर्ति में न आ सके। इस पूरे मामले में उपायुक्त आबकारी संजय तिवारी की अध्यक्षता में एक विशेष समिति गठित की गई।
समिति ने पूरी पारदर्शिता और सख्त निगरानी के साथ नष्टीकरण की कार्रवाई को अंजाम दिया। कुल 23,154 पेटियों में भरी बीयर, जिसकी डिस्टिलरी कीमत लगभग पौने दो करोड़ रुपये आंकी गई, को पूरी तरह नष्ट किया गया। सहायक आयुक्त आबकारी अभिषेक तिवारी ने बताया कि यह बीयर मध्यप्रदेश के अलावा दिल्ली, असम और महाराष्ट्र भेजे जाने के लिए बनाई गई थी, लेकिन संबंधित राज्यों से समय पर डिमांड नहीं आने के कारण इसे निर्धारित समय में निर्यात नहीं किया जा सका। ब्रेवरी प्रबंधन द्वारा खुद आबकारी विभाग को बीयर के एक्सपायर होने की सूचना दी गई, जिसके बाद विभाग ने तुरंत कार्रवाई शुरू की।
नष्टीकरण की प्रक्रिया तीन दिनों तक चली। सबसे पहले बोतलों में भरी बीयर को पूरी तरह बहाकर नष्ट किया गया, ताकि दोबारा उपयोग की कोई संभावना न रहे। वहीं, केन में भरी बीयर को बुलडोजर और जेसीबी मशीन की मदद से कुचलकर खत्म किया गया। पूरी कार्रवाई की फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी कराई गई, ताकि भविष्य में किसी भी तरह के सवाल या विवाद की गुंजाइश न रहे। आबकारी विभाग की इस कार्रवाई को जनहित में बड़ा कदम माना जा रहा है। अक्सर देखा जाता है कि एक्सपायर खाद्य और पेय पदार्थ चोरी-छिपे बाजार में खपा दिए जाते हैं, जिससे आम लोगों की सेहत पर सीधा असर पड़ता है।
लेकिन इस मामले में विभाग ने समय रहते सख्ती दिखाकर साफ संदेश दिया है कि स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने वालों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा। नष्टीकरण के दौरान समिति में शामिल उपायुक्त आबकारी संजय तिवारी, सहायक आयुक्त अभिषेक तिवारी, इकाई प्रभारी अधिकारी प्रतीक्षा शर्मा, धर्मेंद्र जोशी, जहांगीर खान, राजेश जैन, आरएस पुरोहित सहित सभी सहायक जिला आबकारी अधिकारी, आबकारी उपनिरीक्षक मीना माल और आबकारी आरक्षक मौजूद रहे। हर स्तर पर निगरानी रखी गई, ताकि प्रक्रिया पूरी तरह नियमों के मुताबिक हो।
आबकारी विभाग की यह कार्रवाई न सिर्फ विभागीय सख्ती का उदाहरण है, बल्कि शराब उद्योग को भी साफ चेतावनी है कि नियमों की अनदेखी या एक्सपायर उत्पादों के साथ किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इंदौर में हुई यह कार्रवाई आने वाले समय में प्रदेशभर के लिए एक मिसाल मानी जा रही है।
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बोतल में ‘सीवेज’ भरकर CMO दफ्तर पहुंचे पार्षद! बोले- आप पी कर बताए ये पानी
पन्ना। मध्य प्रदेश के पन्ना नगर पालिका से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने सिस्टम की ‘साफ-सफाई’ की पोल खोलकर रख दी है। ज़रा सोचिए, जिसे आप अपनी प्यास बुझाने के लिए पी रहे हैं, अगर वो नाले का गंदा पानी बन जाए तो आप क्या करेंगे ?
दरअस, मामला वार्ड नंबर-14 का है… जहां पिछले तीन दिनों से नलों से पानी नहीं बल्कि ‘बीमारियों का सीवेज’ सप्लाई हो रहा है। जनता का गला सूखा तो गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। हद तो तब हो गई जब शिकायतों के बाद भी अधिकारी ‘कुंभकर्णी नींद’ से नहीं जागे। मंगलवार को जब पार्षद वैभव थापक हाथ में गंदे पानी की बोतल लेकर सीधे CMO के चैंबर में दाखिल हुए, तो वहां मौजूद अफसरों के पसीने छूट गए।
पार्षद ने दो टूक शब्दों में पूछा कि ‘क्या यही पानी साहब के घर भी जाता है?’ इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों का हवाला देते हुए पार्षद ने चेताया कि प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतज़ार न करे। अब इस ‘गंदे संग्राम’ के बाद पन्ना की जनता को साफ पानी मिलता है या सिर्फ आश्वासन का घूंट!” यह देखने वाली बात है।
रतलाम। जिले के झाबुआ रोड पर उंडवा के पास देर रात दर्दनाक हादसा हो गया। टाइल्स से भरा ट्रक रिवर्स आया और पीछे चल रही लोडिंग गाड़ी को धकेलते हुए पीछे ले गया। कुछ दूर जाकर लोडिंग गाड़ी सड़क किनारे गड्ढे में गिर गई, जिस पर ट्रक भी पलटकर उसके ऊपर गिर गया। इससे लोडिंग गाड़ी में सवार तीन लोगों की दबने से मौके पर ही मौत हो गई। तीनों के शव को दो से ढाई घंटे की मशक्कत के बाद बाहर निकाला जा सका। तीनों के शव पूरी तरह चिपक गए थे।
बिलपांक थाना प्रभारी ने बताया कि टाइल्स से भरा ट्रक झाबुआ से रतलाम की ओर आ रहा था। उसके पीछे एक लोडिंग गाड़ी चल रही थी, जिसमें अंडों की खाली कैरेट भरी थी। उंडवा के पास सड़क पर चढ़ाई चढ़ रहा था, तभी अचानक तकनीकी खराबी के कारण वह रिवर्स आने लगा और पीछे चल रही लोडिंग (छोटा हाथी) गाड़ी को धकेलते हुए पीछे ले गया।
लोडिंग गाड़ी में सवार लोग कुछ समझ पाते, इससे पहले ही ट्रक उसे पीछे धकेलता चला गया। लोडिंग गाड़ी सड़क किनारे गड्ढे में गिर गई और ट्रक भी उसके ऊपर पलट गया। ट्रक के नीचे दबने से पिकअप के कैबिन में सवार रियाज (48) पिता शब्बीर अहमद, निवासी हाट रोड रतलाम, जफर (52) पिता अब्दुल शकूर, निवासी घास बाजार रतलाम और अब्दुल हमीद (50) पिता फाज मोहम्मद निवासी झाबुआ की मौके पर ही मौत हो गई।
मौके पर दो क्रेन और दो जेसीबी बुलाकर वाहनों को सीधा किया गया। करीब दो से ढाई घंटे की मशक्कत के बाद मृतकों के शव बाहर निकाले जा सके। शव निकालने के लिए कटर का भी उपयोग करना पड़ा। तीनों शव बुरी तरह क्षत-विक्षत हो चुके थे। बाद में शवों को मेडिकल कॉलेज भिजवाया गया। हादसे में लोडिंग गाड़ी भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई।
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मोहन कैबिनेट में अनेक निर्णय, ग्वालियर-उज्जैन व्यापार मेले में नई गाडिय़ों पर छूट
भोपाल. एमपी की कैबिनेट बैठक मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार, 13 जनवरी को मंत्रालय में हुई. बैठक में कई अहम फैसलों पर मुहर लगी. कैबिनेट में परिवहन विभाग के प्रस्ताव पर ग्वालियर व्यापार मेला 2026 और उज्जैन विक्रमोत्सव व्यापार मेला 2026 में नई गाडिय़ां खरीदने पर परिवहन टैक्स में 50 प्रतिशत छूट दिए जाने पर चर्चा हुई और बाद में सर्वसम्मति से इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गई.
ग्वालियर व्यापर मेला 25 दिसंबर से शुरू हो हुआ है. शुरुआत में ही मेले में नई गाडिय़ां खरीदने पर परिवहन टैक्स में 50 प्रतिशत छूट देने का प्रस्ताव सरकार के पास भेज दिया गया था. जिस पर आज यानी 13 जनवरी की कैबिनेट मीटिंग में मंजूरी दी गई है. करीब 19 दिन बाद प्रस्ताव को हरी झंडी मिली है.
टैबलेट लेकर पहुंचे सीएम व अन्य मंत्री
मोहन सरकार की यह पहली हाईटेक कैबिनेट बैठक हुई. जिसमें मुख्यमंत्री और मंत्री फाइलों के बजाय टैबलेट लेकर पहुंचे. सभी ने अपने प्रस्ताव टैबलेट पर देखकर ही रखे और मुख्यमंत्री ने भी टैबलेट में देखकर उन प्रस्तावों पर चर्चा की.
विदित हो कि गत 6 जनवरी को हुई कैबिनेट की बैठक में मुख्यमंत्री मोहन यादव की पहल पर प्रदेश में ई-कैबिनेट की प्रक्रिया शुरू करने के लिए मंत्रियों को टैबलेट दिए गए थे और कैबिनेट के सामने ई-टैबलेट एप्लिकेशन का प्रजेंटेशन हुआ था. सीएम ने बताया कि यह पहल प्रदेश में ई-गवर्नेंस को बढ़ावा देने के लिए की जा रही है. इससे पेपरलेस कार्य प्रक्रिया अपनाने, समय की बचत और पारदर्शिता सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी.
राजगढ़ जिले की सारंगपुर तहसील की मोहनपुरा विस्तारिकरण सिंचाई परियोजना 396.21 करोड़ की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई. खटनार तहसील के 26 गांवों की 11 हजार 40 हेक्टयर में सिंचाई होगी. इससे 10 हजार से ज्यादा गांवों के किसान लाभांवित होंगे. इसी प्रकार रायसेन जिले की सुल्तानपुर सिंचाई परियोजना के लिए 115.99 करोड़ की प्रशासकीय स्वीकृति हुई. 20 गांवों के 5700 हेक्टयर क्षेत्र में सिंचाई होगी.
स्पेस टेक नीति पर कैबिनेट की मुहर
स्पेस टेक नीति 2026 के जरिए राज्य सरकार का उद्देश्य स्पेस टेक्नोलॉजी, सैटेलाइट डेटा, ड्रोन, जियो-स्पेशियल एप्लीकेशन और स्टार्टअप्स को बढ़ावा और प्रोत्साहन देना है. इससे रिसर्च, इनोवेशन और निजी निवेश को आकर्षित करने के साथ-साथ युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित करना है.
सोलर एनर्जी के इन प्रोजेक्ट्स को मंजूरी
कैबिनेट बैठक में जिन तीन परियोजनाओं को मंजूरी दी गई. इन प्रोजेक्ट्स के द्वारा राज्य में नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन को स्थायित्व देने और पीक डिमांड के समय निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा गया है.
ये प्रोजेक्ट इस प्रकार हैं.
- सोलर सह 4 घंटे की 300 मेगावाट विद्युत प्रदाय स्टोरेज परियोजना
- सोलर सह 6 घंटे की 300 मेगावाट विद्युत प्रदाय स्टोरेज परियोजना
- 24 घंटे 200 मेगावाट सोलर सह स्टोरेज परियोजना
शिक्षकों को बड़ी राहत, चतुर्थ क्रमोन्नत वेतनमान योजना मंजूर
शैक्षणिक संवर्ग के शिक्षकों के लिए चतुर्थ क्रमोन्नत वेतन मान योजना लागू करने की मंजूरी दी गई. इसमें सहायक शिक्षक, उच्च श्रेणी शिक्षक तथा नए शैक्षणिक संवर्ग के शिक्षक शामिल होंगे. इस पर 322.34 करोड़ का अनुमानित व्यय आएगा. यह शिक्षकों के लिए राहतभरा निर्णय है.
स्कूल शिक्षा विभाग के प्रस्ताव पर सांदीपनि विद्यालय योजना के दूसरे चरण के लिए 200 नए सांदीपनी विद्यालय शुरू करने को मंजूरी. इसमें करीब 3660 करोड़ रुपए खर्च होंगे. प्रथम चरण में 275 विद्यालयों की स्वीकृति मिली थी. हर स्कूल की स्थापना पर 17-18 करोड़ रुपए खर्च होंगे.
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75 किसानों से ट्रैक्टर की ठगी,रिंग रोड निर्माण में लगाए थे, न किराया मिला, न लौटाए वाहन
जबलपुर. एमपी के जबलपुर में बन रही रिंग रोड निर्माण में ग्रामीण क्षेत्र के किसानों के ट्रैक्टर किराए पर ले लिए गए. इसके बाद तीन माह तक किसानों को टै्रैक्टर का किराया नहीं मिला. किसान जब मौके पर पहुंचे तो पता चला कि जिस व्यक्ति को ट्रैक्टर दिए थे वह गायब हैं. इतना ही नहीं 75 किसानों के ट्रैक्टर भी गायब हैं. किसानों ने आसपास बहुत तलाश किया लेकिन ट्रैक्टर नहीं मिले तो गोसलपुर थाने पहुंचे. वहां पर भी सुनवाई नहीं हुई है. इसके बाद किसान एसपी आफिस पहुंचे और शिकायत की है.
पुलिस अधिकारियों से शिकायत करते हुए किसानों ने बताया कि जबलपुर के रहने वाले दीपक गोस्वामी ने कुछ माह पहले गांव आकर किसानों से कहा कि पास ही रिंग रोड बन रही है. यहां किसान अपना ट्रैक्टर लगवाना चाहते हैं तो चल सकते हैं. दीपक के कहने पर पौड़ी खुर्द, गोसलपुर, कुंडम में रहने वाले किसानों ने करीब 100 से अधिक ट्रैक्टर रिंग रोड बनाने में लगा दिए. कुछ दिनों तक दीपक लगातार किसानों के संपर्क में था. अचानक एक दिन उसका फोन बंद हो गया.
किसान मौके पर पहुंचे तो पता चला कि दीपक के साथ-साथ 75 ट्रैक्टर गायब हैं. किसानों का कहना है कि ट्रैक्टर बैंक से फाइनेंस कराए थे. सोचा था कि रिंग रोड के काम में अगर ट्रैक्टर लग जाएगे तो किस्त निकाल आती. शिकायत में कहा गया है कि आसपास के कई लोगों के ट्रैक्टर दीपक और विमल लेकर गए है. जहां पर रिंग रोड बन रही हैए वहां पर भी पूछताछ की गई तो पता चला कि कई दिनों से दोनों नहीं आए हैं. जितने ट्रैक्टर काम पर लगे थे सभी गायब हैं. दीपक और विमल ने 25 हजार रुपए प्रतिमाह में किराए पर लगाया था. गुलाब ने बताया कि इससे पहले दमोह के भी किसानों के साथ दोनों ने ठगी की थी.
कोलकाता। पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के बारासात स्थित एक निजी अस्पताल में दो नर्सों में निपाह वायरस के संदिग्ध लक्षण पाए गए हैं। इनमें एक पुरुष और एक महिला शामिल हैं। दोनों की स्थिति गंभीर बताई जा रही है और फिलहाल उन्हें अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया है।
जानकारी के अनुसार, संक्रमित नर्सों के नमूने AIIMS कल्याणी की वायरस रिसर्च और डायग्नोस्टिक लैब में जांच के लिए भेजे गए थे। प्रारंभिक रिपोर्ट में निपाह संक्रमण की आशंका जताई गई है।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा ने तुरंत राज्य सरकार के साथ समन्वय किया और पश्चिम बंगाल में नेशनल जॉइंट आउटब्रेक रिस्पॉन्स टीम को सक्रिय किया। इस टीम में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (NIV), पुणे; नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एपिडेमियोलॉजी (NIE), चेन्नई; AIIMS कोलकाता और वन्यजीव विभाग के विशेषज्ञ शामिल हैं।
नड्डा ने राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से बात कर उन्हें निर्देश दिया कि, राज्य की टीम केंद्रीय विशेषज्ञों के साथ मिलकर कार्य करे। उन्होंने बताया कि, नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल और पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी ऑपरेशंस सेंटर भी सक्रिय कर दिया गया है।
इसके अलावा राज्य सरकार ने नागरिकों की सहायता के लिए दो हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं- 03323330180 और 9874708858। नागरिक इन नंबरों पर कॉल करके वायरस से संबंधित जानकारी और सहायता प्राप्त कर सकते हैं।
बारासात के अस्पताल में दोनों नर्सों को पृथक वार्ड में वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार, दोनों की हालत गंभीर है और उनका इलाज विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में चल रहा है। एक नर्स हाल ही में अपने गृहनगर कटवा से लौटी थी, जहां वह बीमार पड़ गई थी। प्रारंभिक इलाज के बाद उसे बारासात अस्पताल में भर्ती कराया गया। पुरुष नर्स में भी समान लक्षण दिखे और उसे भी जीवन रक्षक प्रणाली पर रखा गया।
निपाह वायरस एक गंभीर और जानलेवा वायरस है, जिसे विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने हाई रिस्ट वर्ग में रखा है। यह वायरस मुख्य रूप से चमगादड़ और सुअर से फैलता है। संक्रमित जानवरों या दूषित भोजन के जरिए यह इंसानों में पहुंचता है। इसके अलावा, एक संक्रमित व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में भी यह फैल सकता है। खासकर लार, खून या अन्य बॉडी फ्लूइड के संपर्क में आने पर।
पहली पहचान: निपाह वायरस की पहली बार पहचान 1998 में मलेशिया के सुंगई निपाह गांव में हुई थी।
मुख्य स्रोत: इस वायरस का मुख्य स्रोत चमगादड़ और सुअर माना जाता है, जो संक्रमण के प्राथमिक वाहक होते हैं।
संक्रमण का तरीका: यह वायरस इंसानों में मुख्य रूप से जानवरों से फैलता है, लेकिन संक्रमित व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में भी फैलने की संभावना रहती है।
प्रारंभिक लक्षण: संक्रमण के शुरुआती संकेतों में बुखार, सिरदर्द, मांसपेशियों में ऐंठन और सांस लेने में कठिनाई शामिल हैं।
गंभीर लक्षण: यदि संक्रमण गंभीर रूप ले, तो यह एन्सेफेलाइटिस (दिमाग की सूजन), कोमा, न्यूरोलॉजिकल डैमेज, निमोनिया, मायोकार्डाइटिस (हृदय की मांसपेशियों में नुकसान) और किडनी फेल्योर जैसी गंभीर जटिलताओं का कारण बन सकता है।
मृत्यु दर: निपाह वायरस की मृत्यु दर 40 से 75 प्रतिशत के बीच बताई जाती है, जो इसे अत्यंत घातक वायरस बनाती है।
उपलब्ध उपचार: वर्तमान में निपाह वायरस के लिए कोई विशेष दवा या वैक्सीन उपलब्ध नहीं है, इसलिए संक्रमित व्यक्ति का इलाज मुख्य रूप से सहायक और जीवनरक्षक देखभाल पर निर्भर करता है।
निपाह वायरस COVID-19 की तरह तेजी से नहीं फैलता, लेकिन यह भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों और बंद स्थानों में अधिक खतरनाक होता है। संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने वाले लोग भी संक्रमित हो सकते हैं।
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फैसलों में बटवारा : भ्रष्टाचार मामलों की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट के जज के अलग-अलग फैसले, CJI के पास भेजा गया मामला
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को भ्रष्टाचार के मामलों में सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ जांच शुरू करने से पहले सरकार से अनुमति लेने की अनिवार्यता को लेकर अहम सुनवाई हुई। यह मामला भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (PC Act) की धारा 17A की संवैधानिक वैधता से जुड़ा है, जिसमें किसी भी लोक सेवक के खिलाफ जांच से पहले सरकार की मंजूरी को जरूरी बताया गया है। इस संवेदनशील मुद्दे पर न्यायालय की दो जजों की पीठ ने बंटा हुआ फैसला सुनाया।
जस्टिस बीवी नागरत्ना ने अपने फैसले में धारा 17A को असंवैधानिक करार दिया। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार जैसे गंभीर मामलों में जांच शुरू करने से पहले अनुमति की शर्त जांच एजेंसियों के हाथ बांध देती है और निष्पक्ष जांच में बाधा बनती है। उनके अनुसार, कानून के तहत किसी भी सरकारी कर्मचारी के खिलाफ जांच के लिए पहले परमिशन लेना आवश्यक नहीं होना चाहिए।
वहीं, जस्टिस विश्वनाथन ने इससे असहमति जताते हुए धारा 17A को संवैधानिक रूप से वैध बताया। उन्होंने कहा कि इस प्रावधान को पूरी तरह खत्म करना ‘नहाने के पानी के साथ बच्चे को फेंकने’ जैसा होगा। जस्टिस विश्वनाथन के मुताबिक, इस धारा का उद्देश्य ईमानदार अधिकारियों को बेबुनियाद और दुर्भावनापूर्ण जांच से बचाना है।
जस्टिस ने यह भी टिप्पणी की कि धारा 17A को समाप्त करना जिस बीमारी का इलाज बताया जा रहा है, वह खुद बीमारी से भी ज्यादा नुकसानदेह साबित हो सकता है। हालांकि, उन्होंने यह सुझाव भी दिया कि जांच की मंजूरी देने की प्रक्रिया को सरकार के बजाय स्वतंत्र संस्थाओं जैसे लोकपाल या राज्य लोकायुक्त के माध्यम से तय किया जाना चाहिए, ताकि पारदर्शिता बनी रहे और भ्रष्टाचार के मामलों में संतुलित व निष्पक्ष व्यवस्था सुनिश्चित हो सके।
न्यायाधीश नागरत्ना और न्यायधीश विश्वनाथान के बीच बनें विभिन्न मतों का मामला अब मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के पास भेजा गया है। जहां वे इस मामले की जांच के लिए हाई एक्सपर्ट बेंच गठित करेंगे। जो इस मामले में पर अपना अंतिम फैसला सुनाएगी। हालांकि यह पहला मौका नहीं है जब सुप्रीम कोर्ट में जजों की किसी मामले में अलग-अलग राय रही हो। इससे पहले भी कई मामलों में शीर्ष अदालत के जजों का फैसला अलग-अलग आया है।
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आर्मी चीफ की पाक को सख्त चेतावनी : LoC पर 8 आतंकी कैंप अब भी सक्रिय, हरकत की तो मिलेगा मुंहतोड़ जवाब
नई दिल्ली। भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने 13 जनवरी 2026 को मानेकशॉ सेंटर में वार्षिक प्रेस कॉन्फ्रेंस में देश की सुरक्षा स्थिति, सीमाओं पर हालात, ऑपरेशन सिंदूर और सेना के आधुनिकीकरण पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने पाकिस्तान को चेतावनी देते हुए कहा कि, ऑपरेशन सिंदूर अभी भी जारी है और किसी भी उकसावे पर भारतीय सेना तुरंत सख्त कार्रवाई करने के लिए तैयार है।
सेना प्रमुख ने कहा कि, भारत की सीमाओं की निगरानी लगातार जारी है और किसी भी गलती का जवाब निर्णायक होगा। उन्होंने साथ ही जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद, पूर्वोत्तर सुरक्षा, आपदा प्रबंधन और सेना के आधुनिक हथियारों पर भी चर्चा की।
जनरल द्विवेदी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि, केंद्र और LC के पास पाकिस्तान के कब्जे वाले क्षेत्रों में कुल 8 सक्रिय आतंकी कैंप हैं, जिनमें से 6 LoC के पास और 2 अंतरराष्ट्रीय सीमा पर स्थित हैं। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के जरिए भारत ने आतंकियों और उनके नेटवर्क को निशाना बनाया है और पाकिस्तान की परमाणु धमकियों की हवा निकाल दी गई है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि, ऑपरेशन सिंदूर अभी भी जारी है और पाकिस्तान की ओर से किसी भी उकसावे पर भारतीय सेना तुरंत जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है।
आतंकवादी ढांचे को ध्वस्त करना, पारंपरिक ऑपरेशन्स में क्षमता बढ़ाना
जनरल द्विवेदी ने बताया कि, ऑपरेशन के तहत आतंकियों को गहराई तक निशाना बनाया गया और यदि पाकिस्तान ने कोई गलती की होती तो जमीनी ऑपरेशन शुरू करने के लिए सेना पूरी तरह तैयार थी।
उत्तरी और पश्चिमी सीमाओं की स्थिति
उत्तरी सीमाएं (चीन): स्थिति धीरे-धीरे सामान्य, उच्च स्तर पर बातचीत जारी, तैनाती मजबूत और संतुलित।
पश्चिमी मोर्चा (पाकिस्तान): ऑपरेशन सिंदूर की सफलता के बाद स्थिति नियंत्रित, लेकिन संवेदनशील।
सेना प्रमुख ने स्पष्ट किया कि, पाकिस्तान की किसी भी हरकत का जवाब तुरंत और निर्णायक होगा।
पूर्वोत्तर में सुरक्षा की स्थिति धीरे-धीरे सुधर रही है। मणिपुर में सुरक्षा बलों और प्रशासन के समन्वित प्रयासों से हालात स्थिर हुए हैं। वहीं म्यांमार में हाल ही में संपन्न चुनाव के बाद भारत और म्यांमार की सेनाओं के बीच सहयोग और मजबूत हुआ है। पूरे पूर्वोत्तर क्षेत्र की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए असम राइफल्स, भारतीय सेना और गृह मंत्रालय मिलकर सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं।
जनरल द्विवेदी ने सेना के आधुनिकीकरण पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि, 90% से अधिक गोला-बारूद अब स्वदेशी है। सेना 2026 को नेटवर्किंग और डेटा सेंट्रिसिटी वर्ष घोषित कर चुकी है, जिससे रियल-टाइम निर्णय क्षमता और युद्ध क्षमता बढ़ेगी।
CMP (कॉमन मेडिकल पैरामेडिकल) के बाद अब AEC और मेडिकल (नॉन-टेक्निकल) में महिलाओं को सैनिक/अग्निवीर के रूप में भर्ती किया जाएगा। इससे सेना में लिंग समानता और क्षमता विस्तार को बल मिलेगा।
भारतीय सेना ने पड़ोसी देशों और देश के 10 राज्यों में राहत और बचाव अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इन अभियानों के दौरान 30,000 से अधिक लोगों को सुरक्षित निकाला गया। उदाहरण के तौर पर, पंजाब के पठानकोट में आई बाढ़ के दौरान सेना ने हेलिकॉप्टर का उपयोग कर ढहती इमारत से CRPF के जवानों को सुरक्षित बाहर निकाला।
जम्मू-कश्मीर में सक्रिय स्थानीय आतंकियों की संख्या अब 10 से भी कम रह गई है और नई आतंकवादी भर्तियां लगभग समाप्त हो चुकी हैं। आतंकवाद से पर्यटन की ओर बदलाव स्पष्ट रूप से दिख रहा है। इस बदलाव का उदाहरण श्री अमरनाथ यात्रा है, जो शांतिपूर्ण रूप से संपन्न हुई और इसमें 4 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया। विकास कार्य तेजी से जारी हैं और सुरक्षा बलों व सेना के सहयोग से स्थानीय स्थिति में भी सुधार आया है।
रतलाम। शहर में साक्षी पेट्रोल पंप के समीप स्थित भैरव जी के मंदिर और नगर निगम की बाउंड्रीवॉल तोड़े जाने के विरोध में सोमवार सुबह जमकर हंगामा हो गया। नगर निगम कमिश्नर के मौके पर नहीं पहुंचने से नाराज भाजपा पार्षदों और हिंदू संगठन के कार्यकर्ताओं ने सिटी फोरलेन पर चक्काजाम कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने नगर निगम कमिश्नर के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। कुछ पार्षद पेट्रोल लेकर सड़क पर बैठ गए और आत्मदाह की चेतावनी दी। फिलहाल प्रशासन और पुलिस के अधिकारी मौके पर मौजूद हैं और समझाइश का प्रयास कर रहे हैं।
जानकारी के अनुसार मामला वार्ड नंबर 8 का है। यहां रविवार रात अज्ञात लोगों ने एक बगीचे की बाउंड्रीवॉल तोड़ दी। इसके साथ ही बाउंड्रीवॉल के पास स्थित भैरव जी का ओटला भी तोड़ दिया गया और वहां स्थापित प्रतिमा को अज्ञात लोग अपने साथ ले गए।
सोमवार सुबह घटना की जानकारी मिलते ही क्षेत्रीय पार्षद पप्पू पुरोहित, वार्ड नंबर 6 के पार्षद शक्ति सिंह सहित विश्व हिंदू परिषद, हिंदू जागरण मंच और बजरंग दल के पदाधिकारी मौके पर पहुंचे। आक्रोशित लोगों ने मौके पर ही दोबारा मंदिर निर्माण का कार्य शुरू कर दिया और घटना में शामिल अज्ञात आरोपितों पर सख्त कार्रवाई की मांग की।
घटना की सूचना पर प्रशासन और पुलिस के अधिकारी तो मौके पर पहुंच गए, लेकिन नगर निगम कमिश्नर अनिल भाना दोपहर 12 बजे तक घटनास्थल पर नहीं पहुंचे। इससे नाराज पार्षदों और हिंदू संगठनों के पदाधिकारियों ने सड़क पर बैठकर चक्काजाम कर दिया। इस दौरान भाजपा पार्षदों ने निगम तेरी सेटिंगबाजी नहीं चलेगी जैसे नारे लगाए। पार्षद पप्पू पुरोहित ने निगम कमिश्नर व अधिकारियों पर मनमर्जी करने का आरोप लगाया है। पुरोहित ने कहा कि निगम कमिश्नर हमारी नहीं सुनते हैं।
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4 साल की मासूम के साथ दरिंदगी: 28 वर्षीय आरोपी ने खेत में किया दुष्कर्म, गिरफ्तार
बीना (सागर) मध्य प्रदेश के सागर जिले के बीना से बेहद ही दर्दनाक और शर्मनाक खबर सामने आई है। यहां खिमलासा थाना क्षेत्र में महज 4 साल की मासूम बच्ची के साथ क्रूरता की सारी हदें पार कर दी गईं। जानकारी के अनुसार, बच्ची अपने छोटे भाई के साथ खेत में मटर खाने गई थी। इसी दौरान 28 वर्षीय आरोपी ने मौका देखकर भाई को डरा-धमकाकर भगा दिया और मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म की वारदात को अंजाम दिया।
दरिंदगी के दौरान मासूम दर्द से चीखती-चिल्लाती रही, लेकिन आरोपी दिल नहीं पसीजा। घटना के बाद बच्ची की हालत गंभीर हो गई। परिजनों ने उसे तुरंत लेकर थाने पहुंचे, जहां पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए आरोपी के खिलाफ पॉक्सो एक्ट सहित गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया। पुलिस ने छापेमारी कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है।
यह घटना प्रदेश में एक बार फिर मासूम बच्चियों और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है। आखिर कब तक बच्चियां इस तरह दरिंदों का शिकार बनते रहेगी। रेप का यह कोई पहला मामला नहीं है, अनेकों बार बहन बेटियों की इज्जत तार-तार की जाती है, बड़ा सवाल यह है कि आखिर कब इस तरह की घटनाओं पर लगाम लगेगा। पुलिस प्रशासन के साथ-साथ समाज में रहने वाले लोगों को भी जागरूक होने की जरूरत है, तभी इस तरह के मामलों में कमी आएगी।
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जहां छात्राएं हो रहीं लापता, उसी गर्ल्स हॉस्टल के क्लासरूम में अश्लील गानों पर रील, उठे गंभीर सवाल
शहडोल। मध्य प्रदेश के शहडोल जिले के सोहागपुर क्षेत्र स्थित माता शबरी शासकीय कन्या शिक्षा परिसर, कंचनपुर एक बार फिर विवादों के घेरे में है। जिस आवासीय स्कूल से एक-एक कर दो छात्राएं लापता हुई उसी स्कूल के क्लासरूम में शिक्षिका द्वारा छात्राओं के साथ अश्लील गानों पर डांस करते हुए रील बनाए जाने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इस वीडियो ने न केवल शिक्षा व्यवस्था की मर्यादा पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि परिसर की सुरक्षा और अनुशासन पर भी गंभीर चिंताएं बढ़ा दी हैं।
वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि छात्राएं स्कूल ड्रेस में क्लासरूम के भीतर मौजूद हैं और एक शिक्षिका उनके साथ लोकप्रिय भोजपुरी गीत पतली कमरिया मोरी हाय-हाय पर ठुमके लगाती नजर आ रही हैं। क्लासरूम जैसे पवित्र शैक्षणिक स्थान में इस तरह की गतिविधि को लेकर अभिभावकों और समाज में भारी नाराजगी है। स्थानीय लोग सवाल उठा रहे हैं कि जब शिक्षिका ही इस तरह का व्यवहार करेंगी तो छात्राओं पर इसका क्या असर पड़ेगा।
गौरतलब है कि इसी शिक्षा परिसर से 28 दिसंबर को कक्षा 12वीं की एक छात्रा हॉस्टल से मामा के साथ घर जाने की बात कहकर निकली थी, लेकिन वह घर नहीं पहुंची। इस मामले में तत्कालीन हॉस्टल अधीक्षिका सुलोचना बट्टे की शिकायत पर सोहागपुर थाना पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ अपहरण का मामला दर्ज किया था, पुलिस जांच अभी जारी ही थी कि 8 जनवरी को कक्षा 10वीं की एक और छात्रा के लापता होने की घटना सामने आ गई।
जानकारी के अनुसार, कक्षा 10वीं की छात्रा अपने नाना और दो सहेलियों के साथ हॉस्टल पहुंची थी, सहेलियां तो भीतर चली गईं, लेकिन छात्रा बहन को बाहर छोड़ने की बात कहकर बाहर निकली और फिर लौटकर नहीं आई। रोल कॉल के दौरान छात्रा की अनुपस्थिति सामने आने पर प्रबंधन में हड़कंप मच गया, इसके बाद प्रिंसिपल देवेंद्र श्रीवास्तव ने भी सोहागपुर थाने में शिकायत दर्ज कराई, जिस पर पुलिस ने दूसरे मामले में भी अज्ञात आरोपियों के खिलाफ अपहरण का प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। एक ओर छात्राओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल हैं, तो दूसरी ओर शिक्षिका का यह वायरल वीडियो पूरे शिक्षा परिसर की साख पर बट्टा लगा रहा है।
वहीं इस पूरे मामले में सहायक आयुक्त जन जातीय कार्य विभाग आनंद राय सिन्हा का कहना है कि सम्भवतः बच्चे 26 जनवरी की तैयारी को लेकर प्रैक्टिस कर रही होंगी, उसी दौरान का वीडियो होगा, फिर भी मामला आपके माध्यम से संज्ञान में आया है मामले की गंभीरता से लेते हुए मामले की जांच करा उचित कार्यवाही की जाएगी।
इंदौर के रेशम केंद्र स्थित गौशाला से दिल दहला देने वाली तस्वीरें सामने आई हैं। गौशाला परिसर में करीब 20 गायें मृत अवस्था में मिली हैं, जिससे पूरे शहर में सनसनी फैल गई है। भागीरथपुरा में दूषित पानी से हुई 22 मौतों का मामला अभी शांत भी नहीं हुआ था कि, अब गोवंश संरक्षण को लेकर एक और शर्मनाक अध्याय खुल गया है।
इस घटना ने प्रदेश की राजनीति में भूचाल ला दिया है। कांग्रेस ने मृत गायों का भयावह वीडियो सोशल मीडिया पर जारी कर सरकार की कार्यप्रणाली पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि गौशाला में गायों को न तो पर्याप्त चारा मिला और न ही पीने के लिए पानी, जिसके चलते भूख और प्यास से तड़पकर उनकी मौत हो गई।
वीडियो में गौशाला के भीतर कई गायों के शव जमीन पर पड़े दिखाई दे रहे हैं। दुबली-पतली देह, पसलियां बाहर निकली हुई और चारों ओर फैली बदहाली खुद सिस्टम की असंवेदनशीलता की गवाही दे रही है। कांग्रेस ने इसे सीधे तौर पर सरकार की गोवंश संरक्षण नीति की घोर विफलता करार दिया है।
कांग्रेस ने इस पूरे मामले को लेकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को ई-मेल के माध्यम से शिकायत भेजी है और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। पार्टी का कहना है कि जिस प्रदेश में गोवंश संरक्षण को लेकर बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, वहां गौशाला में ही गायों की ऐसी दर्दनाक मौत प्रशासनिक लापरवाही का सबसे बड़ा प्रमाण है।
कांग्रेस नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि इस मामले में जल्द ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो वे सड़क से लेकर सदन तक आंदोलन करेंगे। फिलहाल प्रशासन की ओर से इस घटना पर कोई ठोस जवाब सामने नहीं आया है, लेकिन रेशम केंद्र गौशाला में पसरे सन्नाटे ने व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है।
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05 हजार का ईनामी भाजयुमो का मंडल अध्यक्ष गिरफ्तार, पुलिस को थी तलाश
जबलपुर। एमपी के जबलपुर में पांच माह से फरार पांच हजार रुपए के ईनामी भाजयुमो के मंडल अध्यक्ष राकेश आर्मो को आज बरगी पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। राकेश आर्मो घटना के बाद से पुलिस को चकमा देते हुए लगातार फरार चल रहा था, पुलिस ने आरोपी के पास से एक स्कार्पियो भी बरामद की है। बरगी पुलिस द्वारा भाजयुमो मंडल अध्यक्ष के सभी दोस्तों को पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि जबलपुर के घमापुर क्षेत्र में रहने वाले शरद यादव का 17 अगस्त 2015 को जन्मदिन था, वह अपने साथी आशुतोष नाथ, अभिलाष चौधरी, विष्णु रजक, राहुल पाठक के साथ एसएसबी रिसोर्ट पहुंचकर पार्टी कर रहे थे। इस दौरान अभिलाष के घर से कॉल आया तो वह रिसोर्ट से बाहर आकर बात करने लगता है। थोड़ी देर बाद अभिलाष ने सिगरेट जलाई और पीने लगा। इस दौरान बरगी नगर निवासी अंकित पटेल साथी राजेंद्र पटेल ने सिगरेट मांगी, जिसपर अभिलाष ने मना कर दिया, इस बात को लेकर विवाद हो गया। राजेंद्र पटेल ने भाजयुमो के बरगी अध्यक्ष राकेश उर्फ गोलू आर्मो को कॉल कर मौके पर बुलाया। कुछ ही देर बाद भाजयुमो नेता अपने कुछ साथियों के साथ आया और राजेंद्र के इशारा करते ही फरसा से हमला करना शुरू कर दिया। मौके पर अफरा.तफरी का माहौल बन गया। अभिलाष और उसके साथी अपनी-अपनी जान बचाकर बरगी नगर पुलिस चौकी पहुंचे और शिकायत दर्ज करवाई। आशुतोष का कहना था कि बर्थ-डे पार्टी के दौरान कुछ पुराने दोस्त मिल गए तो उनके साथ बैठ गयाए इसी बीच शोर सुनाई दिया तो मौके पर जाकर बीच-बचाव करने लगा तभी भाजयुमो नेता राकेश उर्फ गोलू आर्मो अपने साथी अंकित पटेल, राजेंद्र पटेल, बाबू, संगम के साथ तीन से चाल लड़के आए और चाकू व फरसा से हमला कर दिया। पुलिस ने हत्या के प्रयास का प्रकरण दर्ज कर आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था। वहीं राकेश उर्फ गोलू आर्मो घटना के बाद से लगातार फरार चल रहा था, जिसपर एसपी द्वारा पांच हजार रुपए का ईनाम भी घोषित किया था। पुलिस की टीमे राकेश को लगातार तलाश करती रही। जिसे आज पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।
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लोकायुक्त की बड़ी कार्रवाईः तहसील का बाबू रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार
सिंगरौली। मध्यप्रदेश में भ्रष्ट अधिकारी कर्मचारी के खिलाफ लोकायुक्त पुलिस की कार्रवाई लगातार जारी है। इसी कड़ी में रीवा लोकायुक्त पुलिस ने सरई तहसील के बाबू लखपति सिंह को 3 हजार रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। समाचार के लिखे जाने तक लोकायुक्त की कार्रवाई जारी थी।
दरअसल जमीन नामांतरण के एवज में आवेदक रामनारायण शाह से बाबू ने रिश्वत की मांग की थी। उन्होंने इसकी शिकायत लोकायुक्त से की थी। लोकायुक्त टीम ने शिकायत की गोपनीय जांच की, जिसमें मामला सही पाया गया। इसके बाद टीम ने योजनाबद्ध तरीके से जाल बिछाया और बाबू को रंगे हाथों पकड़ लिया।
लोकायुक्त पुलिस ने आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। फिलहाल आगे की वैधानिक कार्रवाई और पूछताछ जारी है। यह कार्रवाई रीवा लोकायुक्त पुलिस की भ्रष्टाचार के खिलाफ लगातार मुहिम का हिस्सा है। लोकायुक्त पुलिस की टीम ने बताया कि वे भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी कार्रवाई जारी रखेंगे और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
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