


कटनी (ढीमरखेड़ा)। कटनी जिले के ढीमरखेड़ा थाना क्षेत्र के खमरिया हार में बीते दिनों जमीनी विवाद में उचेहरा निवासी 50 वर्षीय प्रहलाद कोल से मारपीट की जिसमें उसकी मौत हो गई थी। मृतक की पत्नी सुखबरा बाई की रिपोर्ट पर पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर मामले को जांच में लिया था। पुलिस ने मुस्तैदी के साथ हत्या में शामिल तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया।
एडिशनल एसपी कमल मौर्य ने बताया कि मृतक की पत्नी सुखवरा बाई की रिपोर्ट पर हत्या का मामला दर्ज कर मामले की विवेचना थाना प्रभारी महिमा रघुवंशी कर रही थी। जिसमें खमरिया बिजरावगढ़ निवासी विदेशी उर्फ परदेसी कोल, कुलसिया बाई, संतराम कोल और रतनलाल कोल के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर आरोपियों की तलाश की गई जिसमें विदेशी उर्फ परदेसी कुलसिया बाई, रतनराम कोल को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया।
घटना में फरार आरोपी संतराम कोल की तलाश की जा रही है। विवाद के बाद से मृतक के दामाद सुनील सिंह भी लापता है जिनकी तलाश की जा रही है। एडिशनल एसपी ने आगे बताया कि डॉग स्क्वाड की टीम को भी बुलाया गया है। विवाद में घायल महिला और बेटी का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में इलाज जारी था जिनका स्वास्थ्य अब ठीक है। हत्या के आरोपियों की गिरफ्तारी में एसडीओपी आकांक्षा चतुर्वेदी, थाना प्रभारी महिमा रघुवंशी और थाना स्टाफ की विशेष भूमिका रही।
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53 करोड़ की बोलियों ने मचाई सनसनी! इंदौर के चातुर्मास में कलश स्थापना के लिए लगी रिकॉर्ड बोली
इंदौर। धर्म, आस्था और दान के नाम पर इंदौर में ऐसा नजारा देखने को मिला जिसने हर किसी को चौंका दिया। मुनिश्री सुधासागर महाराज के चातुर्मास के दौरान कलश स्थापना के लिए हुई बोलियों ने करोड़ों के सारे पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए। महज कुछ ही देर में अलग-अलग कलशों के लिए करीब 53 करोड़ रुपये की बोलियां लग गईं। इनमें दो श्रद्धालुओं ने अकेले 16 करोड़ 16 लाख रुपये की बोली लगाकर सबसे अधिक चर्चा बटोरी।
जानकारी के अनुसार, चातुर्मास आयोजन में कलश स्थापना के लिए एक के बाद एक बोलियां लगती गईं। सबसे बड़ी बोली सपना मनीष गोधा और नवीन आनंद गोधा की ओर से 16 करोड़ 16 लाख रुपये की रही। इसके अलावा अन्य कलशों के लिए भी 5 करोड़, 3 करोड़ 55 लाख, 3 करोड़ 33 लाख और 2 करोड़ से अधिक की बोलियां लगीं। कुल मिलाकर यह आंकड़ा लगभग 53 करोड़ रुपये तक पहुंच गया।
करोड़ों की इन बोलियों के बाद शहर में चर्चा सिर्फ धार्मिक आयोजन की नहीं, बल्कि इतनी बड़ी राशि के भुगतान को लेकर भी शुरू हो गई है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि इतनी बड़ी रकम का भुगतान किस तरह होगा? क्या पूरी राशि एकमुश्त दी जाएगी या चरणबद्ध तरीके से? और क्या इतनी बड़ी वित्तीय प्रतिबद्धताओं पर संबंधित विभागों की भी नजर जाएगी?
आयोजन से जुड़े लोगों के अनुसार, बोली की राशि तत्काल पूरी जमा नहीं कराई जाती। परंपरा के अनुसार पहले एक निश्चित प्रतिशत राशि जमा कराई जाती है और शेष राशि निर्धारित समय सीमा के भीतर दी जाती है। भुगतान नकद, चेक या अन्य वैध माध्यमों से किया जा सकता है।
इतनी बड़ी बोलियों ने धार्मिक आयोजन को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना दिया है। जहां एक ओर श्रद्धालु इसे आस्था और दान की भावना से जोड़कर देख रहे हैं, वहीं दूसरी ओर इतनी बड़ी रकम को लेकर सामाजिक और आर्थिक स्तर पर भी सवाल उठने लगे हैं।फिलहाल करोड़ों की इन रिकॉर्ड बोलियों ने इंदौर के इस धार्मिक आयोजन को सुर्खियों में ला दिया है और अब सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि घोषित राशि का भुगतान किस प्रक्रिया के तहत पूरा किया जाता है।
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जुए के फड़ पर पुलिस की दबिश: रकम और घायलों को लेकर उठे सवाल! 17 आरोपी गिरफ्तार
शिवपुरी। मध्य प्रदेश के शिवपुरी शहर के ग्वालियर-गुना फोरलेन बायपास स्थित एक होटल में चल रहे जुए के फड़ पर सिटी कोतवाली पुलिस ने छापामार कार्रवाई करते हुए 17 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार मौके से 1 लाख 65 हजार रुपये नकद, 17 मोबाइल फोन तथा चार लग्जरी वाहन जब्त किए गए हैं।
इधर, सूत्रों के अनुसार पुलिस की दबिश के दौरान तीन जुआरी बचने के प्रयास में होटल की छत से कूद गए, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए। बताया जा रहा है कि उनका उपचार शहर के निजी अस्पतालों में कराया गया। हालांकि, कोतवाली पुलिस द्वारा जारी प्रेस नोट में इन घायलों का कोई उल्लेख नहीं किया गया है। साथ अधिकारी मामले में कैमरे के सामने आधिकारिक तौर पर बाईट देने से बचते रहे।
इस कार्रवाई को लेकर एक और बड़ा सवाल भी उठ रहा है। स्थानीय सूत्रों का दावा है कि होटल में बड़े स्तर पर जुआ संचालित हो रहा था और मौके पर करीब 20 लाख रुपये की राशि मौजूद थी, जबकि पुलिस ने केवल 1.65 लाख रुपये नकद बरामद होना बताया है। ऐसे में जब्त की गई राशि को लेकर चर्चाओं का दौर जारी है। फिलहाल पुलिस ने आरोपियों के विरुद्ध जुआ अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर उन्हें न्यायालय में पेश कर दिया है। वहीं, घायलों और बरामद राशि को लेकर उठ रहे सवालों पर पुलिस की ओर से कोई अलग आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।
इंदौर। एक वृद्धाश्रम में बुजुर्ग महिलाओं के साथ मारपीट का वीडियो सामने आया है। इसमें साफ दिख रहा है कि एक लड़का, जिसकी उम्र 14 साल बताई जा रही है, वह डंडे से महिलाओं को पीट रहा है। मामला मरीमाता पानी की टंकी के पास महाराणा प्रताप वेलफेयर सोसाइटी के वृद्धाश्रम का है। मामला सामने आने के बाद कलेक्टर शिवम वर्मा ने एसडीएम और तहसीलदार को मौके पर भेजा। जांच के बाद पाया गया कि आश्रम अवैध रूप से संचालित किया जा रहा था। पर कलेक्टर शिवम वर्मा के निर्देश पर वृद्धाश्रम को सील कर दिया गया। साथ ही आश्रम संचालकों पर एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं वृद्ध महिलाओं की पिटाई करने वाले बच्चे को महिला एवं बाल विकास विभाग की टीम ने रेस्क्यू कर काउंसलिंग शुरू कर दी है।
कलेक्टर शिवम वर्मा ने बताया कि उनके निर्देश पर एसडीएम मल्हारगंज, सामाजिक न्याय एवं महिला एवं बाल विकास विभाग के संयुक्त दल को मौके पर भेजा गया। दल ने त्वरित कार्रवाई करते हुए संबंधित वृद्धजनों को मान्यता प्राप्त वृद्धाश्रमों-गणेश आश्रम, निराश्रित सेवाश्रम और आशा निलय-में सुरक्षित स्थानांतरित कराया। वहीं नाबालिग को आवश्यक संरक्षण एवं आगे की वैधानिक कार्रवाई के लिए बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) की सुपुर्दगी में सौंप दिया गया है।
प्राथमिक जांच में संबंधित प्रेमाश्रय वृद्ध आश्रम, बाणगंगा का संचालन अवैध रूप से पाया गया। इसके बाद प्रशासन ने आश्रम को तत्काल प्रभाव से सील कर दिया। सामाजिक न्याय विभाग द्वारा आश्रम की संचालिका के विरुद्ध पुलिस में एफआईआर दर्ज कराने की कार्रवाई की जाएगी। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि नगर निगम के भवन में, जो शासकीय भूमि पर निर्मित है, आश्रम का संचालन किस आदेश के तहत किया जा रहा था।
कलेक्टर शिवम वर्मा ने कहा कि मामले के सभी पहलुओं की विस्तृत जांच कर दोषियों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि वृद्धजनों की सुरक्षा और सम्मान से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने बताया कि वृद्धाश्रम में रह रहे 30 बुजुर्गों में से स्वस्थ लोगों को गांधी नगर स्थित निराश्रित आश्रम और गणेश वृद्धाश्रम में भेजा गया है, जबकि बीमार बुजुर्गों को सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया जाएगा।
महिला एवं बाल विकास विभाग की टीम ने बच्चे से पूछताछ की। अधिकारियों के अनुसार लड़के की मानसिक स्थिति सामान्य है। अभी उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई है। लड़का करीब पांच महीने पहले अपनी मां के साथ वृद्धाश्रम आया था। उसकी मां झुलस गई थी और कुछ दिनों बाद उसकी मौत हो गई। इसके बाद से वह आश्रम में ही रह रहा था। उसकी बड़ी बहन मुंबई में रहती है, जिसे इंदौर बुलाया गया है।
एसडीएम निधि वर्मा ने बताया कि बुधवार को लड़के का एक बुजुर्ग महिला से विवाद हो गया था। इसके बाद उसने महिला को डंडे से पीटना शुरू कर दिया। वायरल वीडियो में वह बीच-बचाव करने वालों के साथ भी हाथापाई करता दिखाई दे रहा है। एसीपी के अनुसार बच्चे की काउंसलिंग कराई जाएगी और उसे वृद्धाश्रम से हटाकर नाबालिग बच्चों की देखरेख करने वाली संस्था में भेजा जाएगा।
वृद्धाश्रम की संचालिका नीलम दुबे ने बताया कि घटना उस समय की है जब वह गुरु पूजन के लिए बाहर गई थीं। उन्होंने कहा कि सभी बुजुर्गों को भोजन कराने के बाद उनके कमरों में भेज दिया गया था। वापस आने पर पता चला कि बच्चे ने एक बुजुर्ग महिला को डंडे से मारा है। पूछने पर लड़के ने बताया कि महिला ने उसके सिर पर टब मार दिया था, जिसके बाद उसने गुस्से में डंडा चला दिया। संचालिका ने कहा कि वह बच्चे को थाने भी लेकर गई थीं। उन्होंने स्वीकार किया कि कुछ गलतियां हुई हैं और अब प्रशासन अपनी कार्रवाई कर रहा है।
सूत्रों के अनुसार आश्रम जिस जमीन पर संचालित हो रहा था, वह शासकीय भूमि है और उस पर कब्जा कर आश्रम बनाया गया है। प्रशासन जमीन से जुड़े दस्तावेजों की भी जांच कर रहा है। मामले में पूर्व पार्षद एवं एमआईसी सदस्य संतोष गौर का नाम भी सामने आ रहा है। सामाजिक न्याय विभाग के अनुसार आश्रम का पंजीयन फर्म एवं सोसायटी के रूप में है, लेकिन वृद्धाश्रम संचालित करने के लिए विभाग को अनिवार्य रूप से सूचना देना आवश्यक होता है, जो संचालकों द्वारा नहीं दी गई। इस पूरे मामले की भी जांच की जा रही है।
मामला संज्ञान में आने के बाद तत्काल कार्रवाई की है, 30 वृद्धजनों को अन्य आश्रम में शिफ्ट किया है, संचालिका पर अपराधीक प्रकरण निर्देश दिए है, पूरे मामले की गहता के साथ सभी पहलूओं पर जांच की जा रही है।
शिवम वर्मा, कलेक्टर
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जैन मंदिर से चोरी हुई 200 साल पुरानी मूर्तियां , नारों के साथ निकला चोरों का जुलूस
नरसिंहपुर। मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर जिले से एक अनोखी और राहत भरी खबर सामने आई है। करेली थाना क्षेत्र के सगौरिया गांव स्थित जैन मंदिर में हुई 200 साल पुरानी बहुमूल्य मूर्तियों की चोरी का पुलिस ने पर्दाफाश कर दिया है। पुलिस ने मामले में चार शातिर चोरों को गिरफ्तार किया है, जिन्हें गिरफ्तार करने के बाद जब करेली की सड़कों पर घुमाया गया, तो चोर खुद ही “चोरी करना पाप है, पुलिस हमारी बाप है” के नारे लगाते दिखे।
घटना 22 जुलाई की है, जब सगौरिया के प्राचीन जैन मंदिर से भगवान की 18 बहुमूल्य मूर्तियां चोरी हो गई थीं। वारदात को अंजाम देने वाले चोर बेहद शातिर थे। उन्होंने मंदिर में दाखिल होते ही सबसे पहले सीसीटीवी कैमरों को तोड़ दिया था। हालांकि, कैमरों में चोरी से पहले के कुछ पल कैद हो गए थे, जिसके आधार पर पुलिस ने अपनी जांच आगे बढ़ाई।
करेली पुलिस ने घटना के आसपास के दिनों के सीसीटीवी फुटेज और रिकॉर्डिंग्स खंगाली, जिससे कुछ संदिग्धों की पहचान हुई। संदिग्धों को हिरासत में लेकर जब कड़ाई से पूछताछ की गई, तो उन्होंने न केवल सगौरिया जैन मंदिर, बल्कि दो अन्य धार्मिक स्थलों में भी चोरी करने की बात कबूल की। पुलिस के अनुसार, यह गैंग विशेष रूप से धार्मिक स्थलों को ही अपना निशाना बनाता था।
पुलिस ने आरोपियों के पास से जैन मंदिर से चोरी गई 18 में से 2 प्राचीन मूर्तियां बरामद कर ली हैं। पूछताछ के दौरान आरोपियों ने खुलासा किया कि पुलिस की बढ़ती दबिश और पकड़े जाने के डर से उन्होंने बाकी मूर्तियों को गाडरवारा की शक्कर नदी में फेंक दिया था। पुलिस अब नदी से अन्य मूर्तियों को तलाशने की कोशिश कर रही है। फिलहाल, करेली थाना पुलिस ने चारों आरोपियों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर उन्हें जेल भेज दिया है।
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बड़ी खबर: पुलिस के तत्कालीन AIG अनिल मिश्रा को उम्रकैद, जानें पूरा मामला
भोपाल। मध्य प्रदेश पुलिस के तत्कालीन एआईजी रहे अनिल मिश्रा को दुष्कर्म और नाबालिग से गलत हरकत के मामले में जयपुर की विशेष पॉक्सो कोर्ट ने दोषी ठहराते हुए कड़ी सजा सुनाई है। अदालत ने दुष्कर्म के मामले में आरोपी को आजीवन कारावास की सजा दी है, जबकि पीड़िता की नाबालिग बेटी के साथ गलत हरकत करने के मामले में तीन वर्ष के कारावास और जुर्माने से भी दंडित किया है।
विशेष अदालत ने अपने फैसले में कहा कि आरोपी ने अपने वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के पद और प्रभाव का दुरुपयोग करते हुए पीड़िता का विश्वास तोड़ा और उसे मदद का झांसा देकर अपना शिकार बनाया। अदालत ने इसे विश्वास और अधिकार के गंभीर दुरुपयोग का मामला माना।
मामले के अनुसार, वर्ष 2012 में पीड़िता के पति के खिलाफ सीहोर में एक मामला दर्ज हुआ था। इसी मामले में मदद की उम्मीद से पीड़िता के पति ने अपनी पत्नी को तत्कालीन एआईजी अनिल मिश्रा से मिलने भेजा। मार्च 2012 में भोपाल में दोनों की मुलाकात हुई, जहां आरोपी ने कानूनी सहायता का भरोसा दिलाया। आरोप है कि मदद के बहाने अनिल मिश्रा ने पीड़िता को ऑफिसर्स मैस बुलाया और वहां उसके साथ दुष्कर्म किया। इसके बाद आरोपी ने पीड़िता को जोधपुर और मुंबई सहित अन्य शहरों में भी बुलाया।
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि आरोपी ने पीड़िता से आर्थिक लेन-देन भी कराया और उसके खाते में पैसे ट्रांसफर करवाए। मामले में एक और गंभीर आरोप यह था कि अप्रैल 2014 में आरोपी ने पीड़िता की नाबालिग बेटी के साथ भी गलत हरकत की। इस संबंध में दर्ज प्रकरण में पॉक्सो एक्ट के तहत सुनवाई हुई और अदालत ने आरोपी को दोषी मानते हुए तीन वर्ष के कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई।
दिल्ली। फरवरी 2020 के दिल्ली दंगों के दौरान आईबी अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में कड़कड़डूमा कोर्ट ने पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन समेत पांच दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। सजा सुनाते समय अदालत ने कहा कि यह बेहद गंभीर और समाज को झकझोर देने वाला अपराध था। कोर्ट ने टिप्पणी की कि अंकित शर्मा की बर्बर तरीके से हत्या की गई और उनके शव को जानवरों की तरह छोड़ दिया गया।
कोर्ट ने कहा कि हत्या को जिस तरह अंजाम दिया गया, वह बेहद क्रूर था। अदालत के मुताबिक, हमलावरों ने अंकित शर्मा की मौत के बाद भी उनके शव को घसीटकर चांद बाग इलाके तक ले जाकर नाले में फेंक दिया। जज ने कहा कि इस घटना ने पूरे समाज को सोचने पर मजबूर कर दिया था।
कड़कड़डूमा कोर्ट ने 13 जुलाई 2026 को ताहिर हुसैन, नजीम, कासिम, अनस और जावेद को दोषी ठहराया था। इसके बाद शुक्रवार, 31 जुलाई को सभी को उम्रकैद की सजा सुनाई गई।
दिल्ली पुलिस और पीड़ित परिवार ने अदालत से सभी दोषियों को मौत की सजा देने की मांग की थी। पुलिस ने इस मामले को 'रेयरेस्ट ऑफ रेयर' यानी बेहद दुर्लभ और गंभीर अपराध बताया था। पुलिस के अनुसार, अंकित शर्मा के शरीर पर कुल 51 चोटों के निशान थे, जिनमें सात घाव जानलेवा थे। इनमें से 16 घाव धारदार हथियार से किए गए थे। पुलिस ने यह भी कहा था कि मौत के बाद भी अंकित शर्मा के शव के साथ अमानवीय व्यवहार किया गया।
ताहिर हुसैन के वकील ने अदालत में मौत की सजा की मांग का विरोध किया था। उनका कहना था कि ताहिर हुसैन ने खुद पुलिस को फोन किया था। बचाव पक्ष ने दलील दी थी कि केवल शरीर पर लगे घावों की संख्या के आधार पर किसी आरोपी को मौत की सजा नहीं दी जा सकती।
फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए सांप्रदायिक दंगों के दौरान आईबी अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या कर दी गई थी। बाद में उनका शव चांद बाग इलाके के एक नाले से बरामद हुआ था। इस मामले में दिल्ली पुलिस ने ताहिर हुसैन समेत कई लोगों के खिलाफ हत्या और साजिश का मामला दर्ज किया था।
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राम मंदिर दान चोरी को लेकर संसद परिसर में विपक्ष का प्रदर्शन, भगवा कपड़े पहनकर पहुंचे पप्पू यादव, स्पीकर ने दी कड़ी चेतावनी
विपक्ष के सांसदों ने आज संसद परिसर में दो तरह के प्रदर्शन किये, पिछले दो तीन दिनों से राम मंदिर दान चोरी मुद्दे पर संसद भवन परिसर में प्रदर्शन कर रही समाजवादी पार्टी को आज कांग्रेस सहित अन्य विपक्षी दलों के सांसदों का साथ भी मिला वहीं कांग्रेस ने “अमित शाह संसद से गायब क्यों? बैनर के साथ प्रदर्शन किया उन्हें भी अन्य विपक्षी दलों का साथ मिला लेकिन इस दौरान ऐसा कुछ हुआ जिसे लेकर लोकसभा की कार्यवाही के दौरान स्पीकर ओम बिरला ने नाराजगी जताई और सांसदों को चेतावनी भी दी।
संसद भवन के परिसर में आज कांग्रेस सांसद आज एक बड़ा सा बैनर लेकर आये, उनके हाथ में कुछ नारे लिखीं तख्तियां भी थीं, कल जब कांग्रेस ने प्रदर्शन किया था तो उसके बैनर पर लिखा था आर्डर किसने दिया ? और आज जब फिर प्रदर्शन किया तो उसपर लिखा था अमित शाह संसद से गायब क्यों? उनके इस प्रदर्शन को अन्य विपक्षी सांसदों का भी साथ मिला और सभी ने मिलकर नारेबाजी की और गृह मंत्री अमित शाह का इस्तीफा माँगा।
संसद परिसर में समाजवादी पार्टी ने भी राम मंदिर दान चोरी मामले पर अपना प्रदर्शन आज भी जारी रखा, सांसदों के हाथ में एक दान पात्र था जिसमें वे दान मांग रहे थे, और भाजपा के विरोध में चंदा चोर जैसे नारे लगा रहे थे, इस प्रदर्शन की ख़ास बात ये रही कि निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने इसमें एक साधू का वेश धारण किया और भगवा वस्त्र पहनकर गले में रुद्राक्ष की माला डालकर प्रदर्शन किया।
पप्पू यादव के इस व्यवहार पर भाजपा सांसदों ने आपत्ति जताई और इसे स्पीकर ओम बिरला के संज्ञान में लाया, ओम बिरला ने कहा मैंने पहले भी कहा था कि सदन के अन्दर तख्तियां लेकर आना, बैनर लेकर आना संसद की परम्पराओं और मर्यादाओं के अनुरूप नहीं है और कुछ सदस्य तो वेश बदलकर संसद में वस्त्र पहनकर जिस तरह से आते हैं मेरी उन सांसदों को चेतावनी है संसद या संसद परिसर में ऐसा ना करें आपको जनता ने चुना है आप उसकी पवित्रता बनाये रखें।
उधर आज लोकसभा की कार्यवाही शुरू होते ही कांग्रेस सहित पूरे विपक्ष ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की गैर मौजूदगी पर सवाल उठाये और उनके सदन में आकर बयान देने की मांग की, कांग्रेस ने कहा छात्रों पर दिल्ली पुलिस ने बर्बरता की और उसकी जिम्मेदारी लेने की जगह गृह मंत्री अमित शाह सदन से ही गायब है, आखिर वे बताएं कि लाठीचार्ज करने का, गोली चलाने का आदेश किसने दिया क्योंकि दिल्ली पुलिस तो उनके ही अधीन आती है। आखिर वो बयान देने से बच क्यों रहे हैं ?
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‘अमित शाह इस्तीफा दें’, राहुल गांधी के बाद अभिजीत दीपके ने भी मांगा गृह मंत्री का इस्तीफा, पुलिस पर लगाए कई आरोप
पेपर लीक के बाद कॉकरोच जनता पार्टी का आंदोलन और फिर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद भी ममाला शांत नहीं हो रहा है। सीजेपी के प्रोटेस्ट में पुलिस कार्रवाई और पैलेट गन के इस्तेमाल के दावे के बीच अब गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे की मांग भी शुरू हो गई है। सीजेपी के फाउंडर अभिजीत दिपके ने अमित शाह का इस्तीफा मांगा है। राहुल गांधी की मांग का समर्थन करते हुए अभिजीत दीपके ने कहा कि अमित शाह को निश्चित रूप से इस्तीफा दे देना चाहिए।
सीजेपी चीफ ने आरोप लगाया कि 20 जुलाई को ‘संसद चलो’ मार्च के दौरान छात्रों के खिलाफ बल प्रयोग का आदेश केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने दिया होगा। दीपके ने कहा कि देश में लोकतंत्र खतरे में है। साथ ही न्यायपालिका और दिल्ली पुलिस समेत कई संस्थानों पर सवाल उठाए।
दरअसल ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के संस्थापक अभिजीत दिपके अपने गृह नगर छत्रपति संभाजीनगर पहुंच गए हैं। घर वापसी के बाद मीडिया से बात करते हुए दिपके ने केंद्र सरकार और गृह मंत्री अमित शाह पर जमकर निशाना साधा। राहुल गांधी की मांग का समर्थन करते हुए दिपके ने कहा कि 20 जुलाई को ‘संसद चलो’ मार्च के दौरान छात्रों के खिलाफ पुलिस बल का प्रयोग करने का आदेश गृह मंत्री अमित शाह की ओर से ही आया होगा। लिहाजा उन्हें तुरंत इस्तीफा देना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर सरकार कहती है कि आंदोलन को बाहर से फंडिंग मिल रही थी, तो यह अमित शाह का ही विफलता है. फिर वे किस बात के ‘चाणक्य’ हैं?
अभिजीत दीपके ने कहा, ‘लोकतंत्र को बचाना अब केवल विपक्ष का मुद्दा नहीं है। इसे बचाने के लिए देश की जनता को एकजुट होना होगा। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका पर भी सवालिया निशान लगा हुआ है। हम सबने देखा है कि शिवसेना और एनसीपी जैसी पार्टियों को तोड़ने के लिए ईडी और सीबीआई का इस्तेमाल कैसे किया गया। देश की बड़ी संस्थाओं का कर्तव्य था कि वे लोकतंत्र को जीवित रखें, न कि किसी एक व्यक्ति की तानाशाही को बढ़ावा दें। उन्होंने ऐसा होने दिया। इसे रोकने के लिए न केवल विपक्ष, बल्कि जनता को भी एकजुट होना होगा।
दिपके ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद प्रल्हाद जोशी को नया शिक्षा मंत्री बनाए जाने पर कड़ी आपत्ति जताई और उन्हें ‘अजीब इंसान’ करार दिया। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि अगर देश का शिक्षा मंत्री बलात्कारियों की प्रशंसा करता है, तो इसका मतलब है कि धर्मेंद्र प्रधान को हटाने के बाद एक और अजीब आदमी को लाया गया है। देश को क्या संदेश दिया जा रहा है? वे कुछ और नहीं कर सकते क्योंकि उनकी पार्टी गुंडों से भरी पड़ी है।राम रहीम जैसे लोग उनके कार्यकाल में पैरोल पर छूट जाते हैं।
जबलपुर। मध्य प्रदेश में अब पुलिसकर्मी भी लव जिहाद का शिकार हो रही हैं। जबलपुर में एक महिला आरक्षक को मुस्लिम युवक ने हिंदू बनकर प्रेम जाल में फंसाकर संबंध बनाया। युवक पर जबरन रोजा रखवा कर गौमांस खिलाने का भी आरोप है। पीड़िता 5 महीने की गर्भवती हो गई, जिसके बाद उसने गर्भ में बच्चा लेकर एसपी ऑफिस पहुंची।
पीड़िता ने बताया कि शोहराब शेख ने अपना नाम सौरभ सिंह और गोलू बताकर उससे दोस्ती की थी। शादी का झांसा देकर 1 साल तक शारीरिक संबंध बनाया। शादी करने की बात पर आरोपी पीछा छुड़वाने की कोशिश कर रहा। महिला का आरोप है कि आरोपी का परिवार भी दे रहा धमकी
महिला का सनसनीखेज आरोप है कि कोर्ट में वह शोहराब बनकर घूमता रहा और जबरन उसका धर्म परिवर्तन। महिला से जबरदस्ती 40 दिन का रोजा रखवाया था। झांसे में लेकर गौ मांस खिलवाया था। इंस्टाग्राम आईडी से मामले का खुलासा हुआ। पीड़िता ने बताया कि कोर्ट में ड्यूटी के दौरान महिला पुलिसकर्मी की आरोपी से मुलाकात हुई थी।
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‘महिलाओं के लिए कोई आश्रम पूरी तरह सुरक्षित नहीं’, उज्जैन में हर्षा रिछारिया का बड़ा बयान
उज्जैन। उज्जैन पहुंचीं मॉडल-इंफ्लुएंसर से साध्वी बनीं हर्षा रिछारिया उर्फ स्वामी हर्षानंद गिरि ने आश्रमों में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर बड़ा सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में महिलाओं के लिए कोई भी आश्रम पूरी तरह सुरक्षित नहीं कहा जा सकता। उन्होंने यह भी कहा कि जो संत बेटी मानकर सुरक्षा की जिम्मेदारी ले उसी आश्रम में रहूंगी।
दरअसल, हर्षा रिछारिया उर्फ स्वामी हर्षानंद गिरि गुरु पूर्णिमा के अवसर पर उज्जैन पहुंचीं थी। जहां उन्होंने अपने गुरु महामंडलेश्वर सुमनानंद गिरि महाराज का आशीर्वाद लिया। मीडिया से बातचीत में साध्वी हर्षानंद ने कहा कि यदि कोई संत यह भरोसा दिलाए कि “हर्षानंद मेरी बेटी के समान है और मैं जीवनभर उसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी लेता हूं”, तो वह सहर्ष उसी आश्रम को अपना स्थायी ठिकाना बनाने को तैयार है।
संन्यास लेने के बाद भी माता-पिता के घर रहने और सोशल मीडिया पर सक्रिय रहने को लेकर उठ रहे सवालों पर उन्होंने कहा कि कुछ संत इस पर आपत्ति जताते हैं, लेकिन उनके पास बड़े-बड़े आश्रम हैं, जबकि मेरे पास केवल दो ही स्थान हैं-गुरु का आश्रम और माता-पिता का घर। उन्होंने कहा कि जब तक उनका अपना कोई सुरक्षित ठिकाना नहीं होगा, तब तक माता-पिता के साथ रहना ही सबसे उचित है।
महिलाओं की सुरक्षा पर उन्होंने कहा कि देश में लड़कियां कितनी सुरक्षित हैं, यह सभी जानते हैं। ऐसे में जब तक कोई संत सार्वजनिक रूप से उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं होता, तब तक वे किसी आश्रम में स्थायी रूप से नहीं रहेंगी। पार्लर जाने को लेकर हो रही आलोचना पर भी उन्होंने जवाब दिया। उन्होंने कहा कि जो साधु-संत इस पर सवाल उठाते हैं, वे स्वयं आश्रमों में पार्लर बुलाकर मेनिक्योर और पेडिक्योर जैसी सेवाएं लेते हैं। उन्होंने कहा कि वे ऐसा नहीं करतीं। उनका मानना है कि जब माता लक्ष्मी और भगवान नारायण सौंदर्य और स्वच्छता के प्रतीक हैं, तो उनकी भक्ति करने वाला व्यक्ति भी सुसज्जित और व्यवस्थित रह सकता है। यह केवल सोच का अंतर है।
गौरतलब है कि मॉडल और सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर से साध्वी बनीं हर्षानंद गिरि इससे पहले भी अपने बयानों को लेकर चर्चा में रही हैं। प्रयागराज महाकुंभ के बाद उज्जैन में संन्यास लेने के बाद उन्होंने लक्ष्मीपुरा में सात दिवसीय देवी प्रवचन किए थे। कार्यक्रम के समापन पर उन्होंने कुछ संतों पर उनका प्रवचन रोकने और समय कम करने का प्रयास करने का आरोप लगाया था।
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धर्मनगरी चित्रकूट में तालिबानी सजा: मोबाइल चोरी के शक में युवक को खंभे से बांधकर पीटा
सतना। पवित्र धर्मनगरी चित्रकूट में कानून-व्यवस्था को खुली चुनौती देने वाला एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहां मोबाइल चोरी के संदेह में एक युवक को बिजली के पोल से बांधकर (तालिबानी सजा) बर्बरतापूर्वक पीटा गया। सरेराह घटी इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हो रहा है, जिसने क्षेत्र में हड़कंप मचा दिया है।
घटना चित्रकूट थाना क्षेत्र अंतर्गत अशोक होटल के सामने की बताई जा रही है। वायरल वीडियो (जो बीती रात का बताया जा रहा है) में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है कि एक युवक बिजली के खंभे से बंधा हुआ है और एक महिला तथा उसके कुछ साथी मिलकर उसे बेदर्दी से पीट रहे हैं। सड़क के बीचों-बीच इस तरह तालिबानी अंदाज में कानून हाथ में लेकर की गई मारपीट ने स्थानीय पुलिस और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
हालाँकि पुलिस अधिकारियों ने अभी तक इस वायरल वीडियो की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है, लेकिन मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस टीम वीडियो में दिख रहे घटनास्थल पर पहुँचकर स्थानीय स्तर पर जांच-पड़ताल में जुट गई है। प्रशासन का कहना है कि वीडियो की सत्यता की जांच की जा रही है। यदि घटना की पुष्टि होती है, तो गैर-कानूनी तरीके से युवक को बंधक बनाकर हिंसा करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
इंदौर। हीरानगर थाना क्षेत्र में सामने आए चर्चित नकली प्लास्टर कांड की जांच तेज हो गई है। वायरल वीडियो के बाद शुरू हुई विभागीय जांच में अब तक थाना प्रभारी (टीआई), एसीपी और संबंधित डॉक्टर के बयान दर्ज किए जा चुके हैं। जांच में सबसे अहम तथ्य डॉक्टर के बयान के रूप में सामने आया है। सूत्रों के अनुसार डॉक्टर ने अपने बयान में स्पष्ट किया है कि उन्होंने दोनों आरोपियों के हाथ-पैर में किसी प्रकार का प्लास्टर नहीं लगाया था। इस बयान के बाद पुलिस की कार्रवाई और वायरल वीडियो को लेकर कई नए सवाल खड़े हो गए हैं।
जानकारी के अनुसार मामले में गिरफ्तार किए गए आरोपी मयंक और शोभित का हाथ-पैर पर पट्टियां और कथित प्लास्टर बांधकर पुलिस ने सार्वजनिक जुलूस निकाला था। बाद में सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें दोनों आरोपी जेल परिसर पहुंचने से पहले अपने हाथ-पैर की पट्टियां उतारकर झाड़ियों में फेंकते दिखाई दे रहे हैं। वीडियो वायरल होने के बाद पूरे घटनाक्रम की जांच एडीसीपी ओमप्रकाश को सौंपी गई है।
सूत्रों के मुताबिक जांच में यह भी सामने आया है कि दोनों आरोपियों के खिलाफ पुलिस ने केवल दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 151 के तहत प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की थी। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि जब आरोपियों पर गंभीर अपराध दर्ज नहीं था और उन्हें कोई गंभीर चोट भी नहीं थी, तो फिर उनके हाथ-पैर पर प्लास्टर जैसी पट्टियां बांधकर सार्वजनिक जुलूस निकालने की आवश्यकता क्यों पड़ी।
जांच से जुड़े सूत्रों का दावा है कि दोनों आरोपियों को ऐसी कोई चोट नहीं थी, जिसके लिए प्लास्टर की जरूरत हो। डॉक्टर के बयान के बाद इस पहलू को और बल मिला है। हालांकि, जांच पूरी होने तक पुलिस अधिकारियों की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की गई है। पुलिस महकमे में यह चर्चा भी है कि शहर के कुछ थानों में आरोपियों के हाथ-पैर पर प्लास्टर जैसी पट्टियां बांधने का काम खुफिया शाखा के कुछ कर्मचारियों के माध्यम से कराया जाता रहा है। हालांकि, इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और जांच एजेंसी इसी पहलू की भी पड़ताल कर रही है।
सूत्रों का कहना है कि यदि जांच में यह साबित होता है कि बिना चिकित्सकीय आवश्यकता के आरोपियों पर फर्जी प्लास्टर चढ़ाकर जुलूस निकाला गया, तो संबंधित पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई तय मानी जा रही है।
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रिटायरमेंट से 24 घंटे पहले ‘आखिरी रिश्वत’ ले रहा था इंजीनियर, लोकायुक्त ने रंगे हाथों दबोचा
ग्वालियर ग्वालियर के नगर निगम के दफ्तर में गुरुवार को सुबह उस समय हड़कंप मच गया जब एक बड़े अधिकारी को लोकायुक्त ने रिश्वत के रुपयों के साथ पकड़ लिया। यह अधिकारी अगले दिन शुक्रवार को यानी 31 जुलाई 2026 को ही सेवानिवृत्त होने वाले थे। यह रिश्वत उनकी आखिरी साबित हुई।
ग्वालियर नगर निगम में गुरुवार को सुबह से ही हलचल थी। यहां जलकार्य विभाग कार्यपालन यंत्री सुशील कटारे अपने दफ्तर में थे। बताया जा रहा है कि इसी विभाग से पूर्व में सेवानिवृत्त हुए प्रेम पचौरी के बेटा सचिन पचौरी नगर निगम में कांट्रेक्ट लेता है। ठेकेदार सचिन पचौरी का 36 लाख रुपए का पेमेंट लंबे समय से अटका हुआ था। उसे निकालने के लिए सुशील कटारे एक प्रतिशत के हिसाब से कमीशन मांग रहे थे। वे 30 हजार रुपए ले चुके थे, लेकिन गुरुवार को सुबह 6 हजार रुपए लेना बाकी था। नगर निगम के पूर्व अधिकारी प्रेम पचौरी और सुशील कटारे के बीच पहले भी मतभेद रह चुके हैं। इसके बाद प्रेम पचौरी के बेटे सचिन ने गुरुवार को उनके कक्ष में जैसे ही सुशील कटारे के हाथ में 6 हजार रुपए दिए, नगर निगम दफ्तर में पहले से मौजूद लोकायुक्त टीम ने इशारा पाते ही कटारे को दबोच लिया। कटारे के जेब से लोकायुक्त के निशान लगे हुए नोट निकलवाए गए और हाथ धुलवाए गए तो वो रिश्वत के पैसों से रंगे हुए मिले।
नगर निगम के कार्यपालन यंत्री सुशील कटारे एक दिन बाद यानी 31 जुलाई 2026 को अपने विभाग से रिटायर होने वाले थे। कल उनके रिटायरमेंट के अवसर पर विदाई पार्टी भी होने वाली थी। लेकिन, उससे 24 घंटे पहले सुशील कटारे अंतिम रिश्वत ले रहे थे और पकड़ा गए। खास बात यह भी है कि हाल ही में असिस्टेंट इंजीनियर (AE) से सुशील कटारे का प्रमोशन हुआ है और वे एक्जीक्यूटिव इंजीनियर (EE) बनाए गए थे।
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Datia Assembly By-Election: 5 बजे तक 69.36 फीसदी मतदान, भाजपा पर फर्जी वोटिंग के आरोप, दो गुटों में विवाद
दतिया। मध्य प्रदेश के दतिया विधानसभा में उपचुनाव के लिए वोटिंग शाम तक जारी रही। मतदान करने वालों ने ढाई साल के बाद दोबारा वोट देने का मौका नहीं छोड़ा और बढ़ चढ़कर वोट डाले। शाम 5 बजे तक 69.36 फीसदी मतदान दर्ज हुआ।
जिगना थाना क्षेत्र के मतदान केंद्र के बाहर जमकर हंगामा हो गया। बाहरी लोगों के पहुंचने पर दो गुटों में विवाद हो गया। कांग्रेस ने भाजपा पर फर्जी वोटिंग करने के आरोप लगाते हुए निर्वाचन अधिकारियों से शिकायत की। विवाद से जुड़ा एक वीडियो भी सामने आया है।
कुल 01 लाख 76 हजार 759 मतदाताओं ने अपने मताधिकार का उपयोग किया था। 1 लाख 74 हजार 661 सामान्य मतदाताओं ने वोट डाले।। 2 हजार 98 पोस्टल वोट डले थे।
राजेंद्र भारती को कुल 88 हजार 977 वोट मिले थे।
कांग्रेस का वोट शेयर 50.34 प्रतिशत रहा था।
नरोत्तम मिश्रा को 81 हजार 235 वोट मिले थे।
बीजेपी का वोट शेयर 45.96 प्रतिशत रहा था।
दतिया में बढ़ता रहा मतदान प्रतिशत
2023 – 79.04 प्रतिशत
2018 – 77.35 प्रतिशत
2013 – 75.59 प्रतिशत
2008 – 73.66 प्रतिशत
2023 में पोस्टल मिलाकर 80.02 फीसदी मतदान हुआ था।
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