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मध्य प्रदेश के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में करीब नौ साल बाद छात्रसंघ चुनाव होने जा रहे हैं। राज्य सरकार ने हाईकोर्ट को बताया है कि शैक्षणिक सत्र 2026-27 में सितंबर महीने में छात्रसंघ चुनाव कराए जाएंगे। सरकार के इस आश्वासन के बाद हाईकोर्ट ने मामले से जुड़ी जनहित याचिका का निपटारा कर दिया।
जबलपुर निवासी छात्र अदनान अंसारी ने छात्रसंघ चुनाव कराने की मांग को लेकर जनहित याचिका दायर की थी। इस पर एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की डिवीजन बेंच ने सुनवाई की।
तीन सप्ताह पहले हुई सुनवाई में हाईकोर्ट ने सरकार और उच्च शिक्षा विभाग के प्रति सख्त रुख अपनाते हुए कहा था कि केवल आश्वासन और बहानों से काम नहीं चलेगा। सरकार को चुनाव की निश्चित तारीख बतानी होगी। कोर्ट ने सरकार को शैक्षणिक कैलेंडर पेश करने और छात्रसंघ चुनाव की पूरी कार्ययोजना प्रस्तुत करने के निर्देश भी दिए थे।
याचिकाकर्ता के वकील अक्षरदीप ने बताया कि वर्ष 2017 के बाद सरकार ने पहले कोरोना महामारी और बाद में अन्य कारणों का हवाला देकर छात्रसंघ चुनाव नहीं कराए। इसके चलते कई वर्षों से छात्रसंघों का गठन नहीं हो पाया। अब सरकार ने कोर्ट को जानकारी दी है कि सितंबर 2026 में चुनाव कराए जाएंगे।
याचिकाकर्ता अदनान अंसारी ने आरोप लगाया है कि छात्रसंघ चुनाव नहीं होने के बावजूद विश्वविद्यालय लगातार छात्रों से चुनाव शुल्क वसूल रहे हैं। उनका दावा है कि यह राशि करोड़ों रुपये तक पहुंच चुकी है। उन्होंने मांग की है कि सरकार इस रकम का पूरा हिसाब भी कोर्ट के सामने पेश करे।

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2 हजार करोड़ का राजस्व देने वाला ‘ऊर्जाधानी’ लाचारः खाट और बाइक पर उठानी पड़ रही लाशें
सिंगरौली। मध्यप्रदेश का सिंगरौली उर्जाधानी ऐसा जिला है जो हर साल सिर्फ खनिज विभाग से 2 हजार करोड़ का रेवेन्यू प्रदेश को देता है, लेकिन बुनियादी सुविधाओं के नाम पर आज भी काफी पिछड़ा हुआ है। हर चुनाव में विकास के दावों की बात होती है मगर हकीकत का आईना सामने दिख ही जाता है। जिले की 2 जगहों की दर्दनाक तस्वीरों ने पूरे जिले को शर्मशार कर दिया है।
दरअसल मध्यप्रदेश की ग्रामीण पंचायत विकास मंत्री राधा सिंह की विधानसभा से एक ऐसी तस्वीर वायरल हुई जो रोंगटे खड़ी कर रही है। हरफरी गांव के निवासी बाबूलाल सिंह के 8 साल के बेटे को सांप ने काटा था। चितरंगी अस्पताल में बेटे की मौत हो गई और घंटों इंतजार के बाद भी एंबुलेंस नहीं मिली तो बाइक में बच्चे की लाश लेकर पीड़ित पिता जाने को मजबूर हुआ और 10 किलोमीटर अपने घर बाइक से पहुंचे।
दूसरी दर्दनाक तस्वीर देवसर विधानसभा इलाके के सरई तहसील के दुधमनिया गांव की है जहां राज मोहन सिंह के बेटे अर्जुन सिंह 16 साल की मौत होने के बाद वाहन से गांव लेकर लाश जा रहे थे रास्ते में इतना ज्यादा खराब सड़क कीचड़ से सराबोर थी जिससे वाहन फंस गई और परिजनों को खाट पर बेटे की लाश को लेकर जाना पड़ा। वायरल दर्दनाक दोनों शर्मनाक तस्वीरों ने जिले के विकास पर सवाल पैदा कर दिया है।
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बदमाशों का खौफ: नाबालिग की पढ़ाई छूटी, परिवार बेघर, बड़ी बहन का अपहरण, छोटी को भी उठाने की धमकी
जबलपुर। न्यायधानी जबलपुर से एक रोंगटे खड़े कर देने वाला मामला सामने आया है, जहां बेखौफ बदमाशों के आतंक के कारण एक मासूम नाबालिग बच्ची का भविष्य और पूरे परिवार का चैन छिन गया है। बदमाशों की दहशत का आलम यह है कि एक नाबालिग पिछले 1 साल से स्कूल तक नहीं जा पा रही है। बदमाशों ने पहले बड़ी बहन का अपहरण किया और अब छोटी बहन को भी उठा ले जाने की लगातार धमकियां दे रहे हैं।
पीड़ित परिवार के अनुसार, इलाके के ही दबंग विकास केवट और अर्जुन पासी पर बड़ी बेटी के किडनैपिंग का आरोप है। बदमाशों की लगातार मिल रही धमकियों और खौफ के कारण परिवार अपना खुद का घर छोड़ने पर मजबूर हो गया। परिवार अब अपनी पहचान छिपाकर दूसरी जगह किराए के मकान में दिन काटने को मजबूर है।
पीड़ित परिवार का आरोप है कि स्थानीय पुलिस में बार-बार शिकायत करने के बावजूद आरोपियों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। पुलिस के लचर रवैये से निराश होकर पीड़ित परिवार न्याय की अंतिम आस लेकर एसपी (SP) कार्यालय पहुंचा और वरिष्ठ अधिकारियों के सामने अपनी आपबीती सुनाते हुए सुरक्षा व न्याय की गुहार लगाई।
पीड़ित (किडनैप लड़की की मां व छोटी बहन ने कहा- “बदमाशों ने हमारी बड़ी बेटी को किडनैप कर लिया है। अब वे छोटी बेटी को भी उठाने की धमकी दे रहे हैं। डर के मारे बच्ची 1 साल से स्कूल नहीं जा पाई। हमें अपना घर छोड़कर भागना पड़ा, लेकिन पुलिस हमारी कोई सुनवाई नहीं कर रही है। सूर्यकांत शर्मा ASP, जबलपुर ने बताया- पीड़ित परिवार द्वारा शिकायती आवेदन दिया गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित थाना पुलिस को तत्काल निष्पक्ष जांच और आरोपियों की धरपकड़ के निर्देश दिए गए हैं। परिवार को पूरी सुरक्षा मुहैया कराई जाएगी।

इंदौर। मध्य प्रदेश के इंदौर में सोमवार को एक अवैध वृद्धाश्रम को गिरा दिया गया। कुछ दिन पहले सोशल मीडिया पर एक वीडियो सामने आया था जिसमें वहां रहने वाली बुजुर्ग महिलाओं के साथ मारपीट की जा रही थी, जिससे लोगों में काफी गुस्सा फैल गया था।
अधिकारियों के अनुसार, बांगंगा पुलिस थाना क्षेत्र में स्थित इस वृद्धाश्रम के खिलाफ जांच तब शुरू की गई जब सोशल मीडिया पर एक वीडियो सामने आया। इस वीडियो में एक 14 साल का लड़का वहां रहने वाली महिलाओं को डंडे से पीटता हुआ दिखाई दे रहा था।
सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट निधि वर्मा ने बताया कि जांच में पता चला कि यह वृद्धाश्रम नगर निगम की 8,000 वर्ग फुट की जमीन पर चलाया जा रहा था, जिस पर पिछले चार साल से कब्जा किया हुआ था। उन्होंने बताया कि जांच के बाद, वृद्धाश्रम चलाने वाली नीलम दुबे ने वह जमीन इंदौर नगर निगम को वापस सौंप दी और उस जगह को गिरा दिया गया।
अधिकारियों ने बताया कि प्रशासन ने 30 जुलाई को ही इस वृद्धाश्रम को सील कर दिया था और वहां रहने वाले 31 लोगों को सामाजिक न्याय विभाग के तहत चलने वाले सरकार से मान्यता प्राप्त दूसरे केंद्रों में भेज दिया था। उन्होंने बताया कि जांच में यह भी पता चला कि यह वृद्धाश्रम जरूरी कानूनी मंजूरी के बिना चलाया जा रहा था।
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दतिया में कांग्रेस की बंपर जीत, BJP को 6 हजार से ज्यादा वोटों से दी करारी मात
मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में कांग्रेस ने शानदार जीत दर्ज की है। कांग्रेस उम्मीदवार घनश्याम सिंह ने बीजेपी के आशुतोष तिवारी को 6 हजार से अधिक वोटों के अंतर से हराकर सीट अपने नाम कर ली। मतगणना के शुरुआती दौर में बीजेपी आगे चल रही थी, लेकिन बाद के राउंड में कांग्रेस ने बढ़त बनाई और आखिर तक उसे बरकरार रखते हुए जीत हासिल की।इस जीत ने प्रदेश की राजनीति में कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
यह नतीजा प्रदेश की सत्ता के समीकरण नहीं बदलेगा, लेकिन राजनीतिक रूप से बीजेपी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। खास बात यह है कि पिछली बार इसी सीट पर गृहमंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा को हार का सामना करना पड़ा था और अब लगातार दूसरी बार बीजेपी दतिया सीट बचाने में नाकाम रही है। इससे पार्टी के लिए आत्ममंथन की स्थिति बन सकती है। वहीं, कांग्रेस के लिए यह जीत उत्साह बढ़ाने वाली है। हालांकि चुनाव से पहले पार्टी में अंदरूनी कलह भी खुलकर सामने आई थी। पूर्व विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता समाप्त किए जाने के बाद उन्होंने पार्टी नेतृत्व और उम्मीदवार पर गंभीर आरोप लगाए थे। इसके बावजूद कांग्रेस ने सभी चुनौतियों को पीछे छोड़ते हुए दतिया उपचुनाव में निर्णायक जीत दर्ज कर ली।
मतगणना के 10वें राउंड में कांग्रेस उम्मीदवार घनश्याम सिंह को 5,349 वोट मिले, जबकि बीजेपी उम्मीदवार आशुतोष तिवारी को 3,957 वोट हासिल हुए। इस राउंड में कांग्रेस ने 1,392 वोटों की बढ़त बनाई, जिससे कुल बढ़त और मजबूत हो गई।
इसके बाद 12वें राउंड में भी कांग्रेस का प्रदर्शन मजबूत रहा। इस राउंड में घनश्याम सिंह को 4,248 वोट, जबकि आशुतोष तिवारी को 3,841 वोट मिले। कांग्रेस ने इस चरण में भी 407 वोटों की बढ़त हासिल कर अपनी जीत की ओर कदम और तेज कर दिए। यह नतीजा बीजेपी के लिए बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है, क्योंकि पार्टी लगातार दूसरी बार इस सीट को बचाने में नाकाम रही।
वहीं बीजेपी के प्रदेश अध्‍यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने दतिया विधानसभा उपचुनाव में हार स्वीकार करते हुए प्रति‍क्रिया दी है।
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अस्पताल में इलाज नहीं… चोरी... 1 साल की बच्ची के गले से सोने का लॉकेट हुआ चोरी
शमशाबाद। विदिशा जिला अस्पताल में एक साल की मासूम बच्ची के गले से सोने का लॉकेट चोरी होने का मामला सामने आया है। बच्ची अपने परिजनों के साथ शमशाबाद से अस्पताल में भर्ती एक मरीज को देखने आई थी। घटना के बाद अस्पताल परिसर में हड़कंप मच गया। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और अब सीसीटीवी फुटेज के आधार पर संदिग्धों की तलाश में जुट गई है।
जानकारी के मुताबिक शमशाबाद निवासी रेखा बाई अपने परिवार के साथ जिला अस्पताल आई थीं। इसी दौरान अस्पताल परिसर में पानी भरते समय उनकी एक साल की बेटी के गले से अज्ञात व्यक्ति सोने का लॉकेट निकालकर फरार हो गया। कुछ देर बाद परिजनों को घटना का पता चला, जिसके बाद उन्होंने अस्पताल पुलिस चौकी में शिकायत दर्ज कराई।
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस ने अस्पताल परिसर और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालना शुरू कर दिया। फुटेज में दो से तीन संदिग्ध व्यक्ति दिखाई देने की बात सामने आ रही है। पुलिस उनकी पहचान कर जल्द आरोपियों तक पहुंचने का दावा कर रही है। फिलहाल मामले की जांच जारी है।

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को भरोसा दिलाया है कि NEET पेपर लीक के विरोध में प्रदर्शन करने वाले छात्रों के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी। सोमवार को सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सरकार अपने वादे पर कायम है और प्रदर्शन में शामिल छात्रों के खिलाफ कोई FIR दर्ज नहीं होगी। हालांकि, प्रदर्शन के दौरान गंभीर अपराधों के आरोप में दर्ज 2,700 से अधिक FIR वापस नहीं ली जाएंगी।
सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता वृंदा ग्रोवर ने प्रदर्शनकारियों पर दर्ज मामलों को वापस लेने का मुद्दा उठाया। इस पर तुषार मेहता ने कहा कि कानूनी प्रक्रिया के अनुसार सरकार अपना वादा पूरा करेगी।
वहीं, चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने स्पष्ट किया कि यदि किसी पुलिस अधिकारी ने जरूरत से अधिक बल प्रयोग किया है, तो उसे संरक्षण नहीं मिलना चाहिए। साथ ही अदालत ने यह भी कहा कि छात्र आंदोलन की आड़ में किसी गंभीर अपराधी को बचाने की कोशिश भी स्वीकार नहीं की जाएगी।
परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी और NEET पेपर लीक के विरोध में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर 36 दिनों तक प्रदर्शन किया। संगठन की तीन प्रमुख मांगों में से एक यह थी कि प्रदर्शन में शामिल छात्रों के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई न हो। सरकार द्वारा इस मांग को स्वीकार किए जाने के बाद, 25 जुलाई को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद आंदोलन समाप्त कर दिया गया।
28 जुलाई की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों को प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई से रोकते हुए कहा था कि 18 वर्ष से कम उम्र के ऐसे लोगों को रिहा किया जाए जिनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है। अदालत ने महाराष्ट्र, बिहार, असम, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल और केरल सरकारों को नोटिस जारी कर डिजिटल साक्ष्यों—जैसे CCTV फुटेज, ड्रोन रिकॉर्डिंग, बॉडी कैमरा फुटेज, PCR लॉग और वायरलेस रिकॉर्ड—को सुरक्षित रखने का निर्देश भी दिया था। इस मामले की अगली सुनवाई 18 अगस्त को होगी, जिसमें केंद्र सरकार के आश्वासन और राज्यों की ओर से उठाए गए कदमों की समीक्षा की जाएगी।
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CJP करेगी दो दिवसीय रणनीति बैठक, राजनीतिक पार्टी बनाने से किया इनकार
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) 5 और 6 अगस्त को महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में दो दिवसीय रणनीति बैठक आयोजित करेगी। इस बैठक में पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके, प्रवक्ता सौरव दास और संगठन से जुड़े प्रमुख सदस्य शामिल होंगे। बैठक में संगठन के भविष्य, छात्र आंदोलनों और युवाओं से जुड़ी रणनीतियों पर चर्चा होगी।
CJP ने स्पष्ट किया है कि वह फिलहाल खुद को राजनीतिक दल में परिवर्तित नहीं करेगी। संगठन का कहना है कि उसका उद्देश्य युवाओं और छात्रों के मुद्दों को उठाना है, न कि चुनावी राजनीति में उतरना।
रणनीति बैठक के बाद CJP देशभर में ‘लिसनिंग टूर’ शुरू करेगी। इस अभियान के तहत संगठन विभिन्न राज्यों में जाकर युवाओं और छात्रों की समस्याओं, रोजगार, शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों को समझने का प्रयास करेगा।
हाल ही में सूरत के एक RTI कार्यकर्ता ने अभिजीत दीपके के पिता की संपत्ति और उनकी विदेश में पढ़ाई के लिए इस्तेमाल किए गए फंड की जांच की मांग की थी। इस पर दीपके ने कहा कि उन्हें बोस्टन यूनिवर्सिटी से स्कॉलरशिप मिली थी, जबकि बाकी खर्च के लिए उन्होंने शिक्षा ऋण (एजुकेशन लोन) लिया था, जिसे वह अभी भी चुका रहे हैं।
अभिजीत दीपके ने आरोप लगाया कि जंतर-मंतर पर छात्रों के शांतिपूर्ण प्रदर्शन में बाहरी लोगों की घुसपैठ कराई गई, जिसके कारण 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान हिंसा हुई। उनका दावा है कि प्रदर्शन को बदनाम करने के लिए कुछ लोगों को जानबूझकर भेजा गया और उनकी दिल्ली पुलिस के साथ मिलीभगत थी।शहर और स्थानीय मार्गदर्शिका
दीपके ने गृह मंत्री अमित शाह और दिल्ली पुलिस पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि पुलिस के अनुसार विरोध स्थल पर 2,100 अपराधी मौजूद थे, तो यह सुरक्षा व्यवस्था की गंभीर विफलता है। उन्होंने पुलिस कार्रवाई को “सोची-समझी साजिश” बताया।
CJP ने 27 जुलाई को पेपर लीक आंदोलन के बाद छात्रों के खिलाफ दर्ज मामलों में कानूनी सहायता देने के लिए लीगल डिफेंस फंड की घोषणा की थी। वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने इस फंड में 1 करोड़ रुपये देने का ऐलान किया और देशभर के वकीलों से भी सहयोग की अपील की।
CJP के प्रवक्ता सौरव दास के अनुसार, संगठन छात्रों के मामलों में कानूनी सहायता सुनिश्चित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट के वकीलों के संपर्क में है। उन्होंने आशंका जताई कि केंद्र सरकार के आश्वासनों के बावजूद कई राज्यों में छात्रों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हो सकते हैं।
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दतिया, बांकीपुर और मंजलपुर के नतीजे देश को देंगे नई दिशा? Protest के बाद BJP शासित राज्यों में युवा वोटरों का पहला टेस्ट
नई दिल्ली। बिहार की बांकीपुर, मध्य प्रदेश की दतिया और गुजरात की मंजलपुर विधानसभा सीट पर हुए उपचुनावों की मतगणना जारी है। सामान्य तौर पर तीन सीटों का उपचुनाव राष्ट्रीय चर्चा का विषय नहीं बनता, लेकिन इस बार तस्वीर अलग है।
पेपर लीक के विरोध में देशभर में हुए छात्र प्रदर्शनों के बाद यह पहला चुनाव है। इसलिए राजनीतिक दलों के साथ-साथ विश्लेषकों की भी नजर इस बात पर है कि क्या युवाओं का गुस्सा वोटिंग पैटर्न में किसी तरह दिखाई देता है। यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि छात्र आंदोलन का सीधा असर चुनाव नतीजों पर पड़ा है।
मध्य प्रदेश की दतिया सीट कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती की 2 अप्रैल को लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के तहत अयोग्यता के बाद खाली हुई थी।
इस सीट पर भाजपा ने पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ रहे आशुतोष तिवारी को मैदान में उतारा है। उनके सामने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कुंवर घनश्याम सिंह हैं, जो दो बार विधायक रह चुके हैं और पूर्व शाही परिवार से जुड़े हैं। दतिया को लंबे समय तक पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा का राजनीतिक गढ़ माना जाता रहा है। 2008 से 2018 तक लगातार तीन बार विधायक रहने वाले मिश्रा 2023 का चुनाव हार गए थे। इस बार टिकट बदलने के फैसले से उनके समर्थकों की नाराजगी भी चुनाव प्रचार के दौरान चर्चा में रही।
बिहार की बांकीपुर सीट भाजपा का मजबूत गढ़ मानी जाती है। यहां से अब तक कोई भाजपा उम्मीदवार चुनाव नहीं हारा है। यह सीट भाजपा अध्यक्ष नितिन नबीन के राज्यसभा सदस्य बनने के बाद खाली हुई।
चुनाव के दौरान भाजपा ने पहले अभिषेक कुमार सिन्हा को उम्मीदवार बनाया था, लेकिन उन्होंने नामांकन के अगले ही दिन पारिवारिक कारणों का हवाला देकर नाम वापस ले लिया। इसके बाद पार्टी ने युवा नेता नीरज कुमार सिन्हा को मैदान में उतारा। इस बदलाव को लेकर विपक्ष ने भाजपा पर सवाल उठाए। वहीं राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव ने दावा किया कि उनकी पार्टी की उम्मीदवार रेखा गुप्ता को विभिन्न सामाजिक और जातीय वर्गों का समर्थन मिला है।
गुजरात की मंजलपुर सीट भाजपा के वरिष्ठ नेता योगेशभाई नारंदास पटेल के निधन के बाद खाली हुई। यहां भाजपा ने वडोदरा नगर निगम के पूर्व पार्षद सतीश गोविंदभाई पटेल को उम्मीदवार बनाया है। कांग्रेस ने पूर्व मंत्री और प्रदेश उपाध्यक्ष भीखाभाई रबारी पर दांव लगाया है।
योगेश पटेल गुजरात की राजनीति का बड़ा चेहरा रहे हैं। उन्होंने 1990 से 2007 तक रावपुरा सीट का प्रतिनिधित्व किया और परिसीमन के बाद बनी मंजलपुर सीट से 2012, 2017 और 2022 में लगातार जीत दर्ज की थी।
दतिया, बांकीपुर और मंजलपुर की ये तीन सीटें भले ही संख्या में कम हों, लेकिन इनके नतीजों को राजनीतिक दल बेहद गंभीरता से देख रहे हैं। एक तरफ भाजपा अपनी मजबूत पकड़ बरकरार रखने की कोशिश में है, तो दूसरी ओर विपक्ष इसे जनता के मूड का संकेत मान रहा है। पेपर लीक के विरोध में हुए छात्र आंदोलनों के बाद यह पहला चुनावी मुकाबला है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या युवाओं की नाराजगी केवल सड़कों तक सीमित रही या फिर उसका असर मतदान में भी देखने को मिलेगा। इसका जवाब इन उपचुनावों के अंतिम नतीजों से ही मिलेगा।
उपचुनाव से जुड़े सवालों के जबाव
Q1. किन सीटों पर उपचुनाव की मतगणना हो रही है?
उत्तर: मध्य प्रदेश की दतिया, बिहार की बांकीपुर और गुजरात की मंजलपुर विधानसभा सीट पर।
Q2. दतिया सीट खाली क्यों हुई थी?
उत्तर: कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती की 2 अप्रैल को अयोग्यता के बाद यह सीट रिक्त हुई थी।
Q3. बांकीपुर सीट पर भाजपा का उम्मीदवार क्यों बदला गया?
उत्तर: अभिषेक कुमार सिन्हा ने नामांकन वापस ले लिया था। इसके बाद नीरज कुमार सिन्हा को उम्मीदवार बनाया गया।
Q4. मंजलपुर सीट पर उपचुनाव क्यों हो रहा है?
उत्तर: भाजपा विधायक योगेशभाई नारंदास पटेल के निधन के बाद यह सीट खाली हुई थी।
Q5. इन उपचुनावों पर पूरे देश की नजर क्यों है?
उत्तर: क्योंकि ये पेपर लीक विरोध में हुए राष्ट्रव्यापी छात्र आंदोलनों के बाद हुए पहले उपचुनाव हैं और इनके नतीजों को राजनीतिक माहौल तथा युवा मतदाताओं के रुझान के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

विदिशा। मध्य प्रदेश के विदिशा में कपल का चलती गाड़ी में रोमांस करते हुए एक वीडियो सामने आया है। युवक और युवती की अश्लीलता की चर्चा न सिर्फ शहर में बल्कि पूरे सोशल मीडिया में सुर्खियां बटोर रहा है। यातायात नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाने वाले युवक पर पुलिस ने कार्रवाई भी कर ली है।
जांच में पता चला कि बाइक चालक करैया खेड़ा रोड निवासी निखिल अहिरवार है। वह सांची रोड पर बाइक चलाते समय अपने आगे गोद में एक युवती को बैठाकर फर्राटे भर रहा था। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद पुलिस हरकत में आई। पुलिस अधीक्षक रोहित काशवानी के निर्देश पर कोतवाली थाना प्रभारी आनंद राज ने टीम गठित कर बाइक के रजिस्ट्रेशन नंबर के आधार पर चालक की पहचान कराई।
वीडियो में वह युवती को गोद में बैठाकर बाइक चला रहा था, जिससे न केवल यातायात नियमों का उल्लंघन हुआ बल्कि सड़क पर चल रहे अन्य लोगों की जान भी खतरे में पड़ सकती थी।
कोतवाली थाना प्रभारी आनंद राज ने बताया कि आरोपी की पहचान कर उसके खिलाफ मोटर व्हीकल एक्ट के तहत कार्रवाई शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि इस तरह की लापरवाही और स्टंटबाजी किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। ऐसे मामलों में लगातार कार्रवाई जारी रहेगी।

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PM मोदी की आपत्तिजनक वॉल पेंटिंग पर विवाद! बीजेपी ने जताया विरोध, पुतवाकर पुलिस को दी सूचना, FIR दर्ज
इंदौर। मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर के लैंटर्न चौराहा क्षेत्र में शनिवार सुबह एक विवादित पेंटिंग को लेकर राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई। चौराहे के पास स्थित एक इमारत की दीवार पर देश के प्रधानमंत्री और देश के प्रमुख उद्योगपतियों से जुड़ी एक पेंटिंग बनाई गई थी, जिस पर स्थानीय जनप्रतिनिधियों और भाजपाइयों ने कड़ी आपत्ति जताई है।
घटना की जानकारी मिलते ही मौके पर पहुंचे एमआईसी सदस्य व क्षेत्रीय पार्षद नंदकिशोर पहाड़िया ने समर्थकों के साथ विरोध जताते हुए दीवार से उस चित्र को साफ करवाया।
जानकारी के मुताबिक शनिवार सुबह जब स्थानीय नागरिक वॉक के लिए निकले तो उनकी नज़र लैंटर्न चौराहा स्थित एक बिल्डिंग की दीवार पर बनी इस पेंटिंग पर पड़ी। नागरिकों ने इसे आपत्तिजनक मानते हुए तत्काल क्षेत्रीय एमआईसी सदस्य नंदकिशोर पहाड़िया को सूचित किया।
सूचना मिलते ही पार्षद पहाड़िया अपने समर्थकों के साथ मौके पर पहुंचे और पेंटिंग को मिटवाया। उन्होंने इस तरह के कृत्यों को शांति व्यवस्था और सद्भाव बिगाड़ने की कोशिश करार दिया।
एमआईसी सदस्य नंदकिशोर पहाड़िया ने इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी तुरंत स्थानीय पुलिस प्रशासन को दी। उन्होंने पुलिस अधिकारियों से मांग की है कि आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की जांच की जाए और सार्वजनिक संपत्ति या दीवार पर इस तरह के विवादित चित्र बनाने वाले तत्वों की पहचान कर उनके खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाए।
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ये कैसी स्वास्थ्य व्यवस्था? सतना में मरीज को ई रिक्शा से लेकर वार्ड तक पहुंचाया, इधर सिंगरौली में बाइक पर मासूम का शव रखकर ले गए परिजन
सतना।जिला अस्पताल में आज एक इलेक्ट्रिक ऑटो के हड्डी वार्ड के सामने तक पहुंचने से कुछ देर के लिए हड़कंप मच गया। सुरक्षा गार्डों ने ऑटो चालक को पकड़कर पुलिस चौकी के हवाले कर दिया, लेकिन जब पूरी कहानी सामने आई तो यह मामला सुरक्षा चूक से ज्यादा अस्पताल की बदहाल व्यवस्था और एक ऑटो चालक की इंसानियत की मिसाल बनकर सामने आया।
ऑटो में सवार मरीज संतोष अग्रवाल ने बताया कि सड़क दुर्घटना में उनका पैर टूट गया है और उनका ऑपरेशन होना है। फिलहाल खून की कमी के कारण उन्हें वार्ड क्रमांक-4 में भर्ती किया जाना था। मरीज के मुताबिक वह अस्पताल में अकेले थे और मेन गेट पर उन्हें वार्ड तक ले जाने के लिए न तो स्ट्रेचर मिला और न ही कोई सहयोगी। ऐसे में उन्होंने ऑटो चालक से वार्ड तक छोड़ने की गुजारिश की। मरीज की परेशानी को देखते हुए चालक ने मानवता दिखाते हुए ऑटो सीधे वार्ड के गेट तक पहुंचा दिया। हालांकि अस्पताल के अंदर ऑटो पहुंचते ही सुरक्षा गार्ड सक्रिय हुए और चालक को पकड़कर पुलिस चौकी ले गए जहां उससे पूछताछ की गई।
यह घटना जिला अस्पताल की व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े करती है। अगर प्रवेश द्वार पर मरीजों के लिए समय पर स्ट्रेचर और सहायक कर्मचारी उपलब्ध होते तो शायद ऑटो चालक को ऐसा कदम उठाने की जरूरत ही नहीं पड़ती। गंभीर मरीज को तत्काल इलाज दिलाने की कोशिश में चालक ने नियमों का उल्लंघन जरूर किया लेकिन उसका उद्देश्य केवल मरीज की मदद करना था।
यह पहली बार नहीं है जब अस्पताल की अव्यवस्था के कारण किसी वाहन को वार्ड तक ले जाना पड़ा हो। इससे पहले 30 मई को भी स्ट्रेचर उपलब्ध नहीं होने पर एक युवक अपने मरीज को लेने बाइक से फर्स्ट फ्लोर स्थित वार्ड तक पहुंच गया था। उस समय मरीज को रीवा रेफर किया जाना था और तत्काल स्थिति को देखते हुए परिजन को केवल समझाइश देकर जाने दिया गया था।
दोनों घटनाएं यह बताती हैं कि समस्या केवल सुरक्षा व्यवस्था की नहीं, बल्कि मरीजों के लिए मूलभूत सुविधाओं की उपलब्धता की भी है। जब जरूरतमंद मरीज को समय पर स्ट्रेचर नहीं मिलता, तब परिजन और मददगार लोग मजबूरी में ऐसे कदम उठाते हैं। ऐसे में नियमों के पालन के साथ-साथ अस्पताल प्रबंधन को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि किसी मरीज को इलाज तक पहुंचने के लिए इस तरह की मजबूरी का सामना न करना पड़े।
सिंगरौली। सिंगरौली के चितरंगी अस्पताल से इंसानियत को झकझोर देने वाली तस्वीर सामने आई है। सर्पदंश से 8 वर्षीय मासूम की मौत के बाद अस्पताल में शव वाहन तक उपलब्ध नहीं था। मजबूर परिजन मासूम का शव मोटरसाइकिल पर रखकर घर ले गए। सवाल ये है कि क्या सरकारी अस्पतालों में मौत के बाद भी सम्मान नसीब नहीं होगा।
सिंगरौली जिले के चितरंगी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर खामियां एक बार फिर सामने आई हैं। ग्राम हरफरी निवासी बाबूलाल सिंह अपने 8 वर्षीय बेटे को शनिवार सुबह सर्पदंश के बाद इलाज के लिए अस्पताल लेकर पहुंचे। डॉक्टरों के प्रयास के बावजूद दोपहर करीब 2 बजे मासूम की मौत हो गई।
लेकिन असली दर्द तब शुरू हुआ, जब अस्पताल में शव वाहन उपलब्ध नहीं मिला। परिजन घंटों इंतजार करते रहे, लेकिन कोई व्यवस्था नहीं हुई। आखिरकार मजबूरी में मासूम के शव को मोटरसाइकिल पर रखकर गांव ले जाना पड़ा। यह दृश्य देखकर अस्पताल में मौजूद लोग भी भावुक हो उठे और स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े करने लगे।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में शव वाहन जैसी बुनियादी सुविधा का अभाव लंबे समय से बना हुआ है। उनका कहना है कि अगर समय पर शव वाहन उपलब्ध होता तो परिजनों को इस दर्दनाक और अपमानजनक स्थिति का सामना नहीं करना पड़ता।
अब इस घटना के बाद प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। आखिर करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद क्या एक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में शव वाहन जैसी मूलभूत सुविधा भी उपलब्ध नहीं हो सकती।

नरसिंहपुर। मध्य प्रदेश की जीवनदायिनी मां नर्मदा से देशभर के करोड़ों श्रद्धालुओं की अटूट श्रद्धा जुड़ी हैं। मां नर्मदा देश की एकमात्र ऐसी नदी है जिनकी परिक्रमा करने का विधान है। इसी क्रम में भक्ति और संकल्प की एक ऐसी ही अद्भुत और विहंगम तस्वीर सामने आई है। दरअसल श्री पंचायती निरंजनी अखाड़ा हरिद्वार के एक साधक संत मां नर्मदा की 3,600 किलोमीटर की कठिन परिक्रमा पैदल नहीं बल्कि अपने हाथों के बल पर कर रहे हैं।
साधक संत ने मां नर्मदा के उद्गम स्थल अमरकंटक से इस अति-दुर्लभ और कठिन परिक्रमा का संकल्प लिया था। निरंतर हाथों के बल चलने के कारण उनके हाथों में बड़े-बड़े निशान और छाले पड़ चुके हैं लेकिन मां नर्मदा के प्रति अटूट आस्था के आगे यह शारीरिक पीड़ा भी बौनी साबित हो रही है। हाल ही में जब इस अनोखी यात्रा का आगमन नरसिंहपुर जिले के करेली बस्ती में हुआ तो संत के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ पड़ा।
संत की इस कठिन यात्रा में उनके साथ चल रहे साथी संतों ने बताया कि इस अत्यंत दुर्लभ परिक्रमा का एकमात्र उद्देश्य विश्व का कल्याण, सनातन संस्कृति का संवर्धन और मानव जाति की सुख-समृद्धि है। संत का मानना है कि मां नर्मदा की कृपा और शक्ति के बल पर ही यह असंभव सा दिखने वाला संकल्प पूरा हो रहा है।
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जेल से बाहर आना है तो 75 लाख दो, कटनी सीएसपी नेहा पर लगा हत्या के आरोपी से डील का आरोप
जेल से बाहर आना है तो 75 लाख दो, कटनी सीएसपी नेहा पर लगा हत्या के आरोपी से डील का आरोप
कटनी. एमपी के कटनी में पदस्थ सीएसपी नेहा पच्चीसिया पर ट्रांसपोर्ट कारोबारी से कथित रिश्वत मांगने के बाद अब हत्या के एक आरोपी और उसके परिवार ने भी गंभीर आरोप लगाए हैं. आरोप है कि आरोपी के परिवार पर जमीन बेचने का दबाव बनाया गया, दलाली कराई गई और जेल से छुड़ाने के नाम पर 75 लाख रुपए मांगे गए.
मामले की शिकायत वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों, मुख्यमंत्री, मानवाधिकार आयोग और अदालत तक पहुंच चुकी है. आईजी प्रमोद वर्मा ने ट्रांसपोर्टर से कथित वसूली और हत्या के आरोपी की शिकायत, दोनों की जांच जबलपुर की अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अनु बेनीवाल को सौंपी है. कटनी पुलिस ने 3 अप्रैल 2026 को आदिवासी युवक की हत्या के मामले में मुख्य आरोपी आकाश लोधी को गिरफ्तार किया था. आकाश का आरोप है कि गिरफ्तारी के बाद कुठला थाना प्रभारी राजेंद्र मिश्रा और सीएसपी नेहा पच्चीसिया ने उसके परिवार पर जमीन बेचने का दबाव बनाया. उसके मुताबिक, पिता रमेश लोधी को दो दिन सीएसपी के घर बैठाया गया.
15 अप्रैल को उन्हें सरकारी वाहन से ग्राम कन्हवारा स्थित खसरा नंबर 2618/1 (2.15 हेक्टेयर) की जमीन की रजिस्ट्री कराने ले जाया गया. करीब 82 लाख रुपए गाइडलाइन कीमत वाली जमीन का सौदा 1.07 करोड़ रुपए में कराया गया. आरोप है कि रजिस्ट्री के समय 15 लाख रुपए का चेक दिया गया और बाकी 92 लाख रुपए सात दिन में देने का आश्वासन दिया गया. आकाश लोधी का आरोप है कि जमीन का पैसा नहीं मिलने पर उसके पिता रमेश लोधी ने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में शिकायत की और नामांतरण पर आपत्ति दर्ज कराई.
इसके बाद रमेश लोधी और उनके दामाद सतीश लोधी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया. आरोप है कि आपत्ति के बावजूद जमीन का नामांतरण मारूफ अहमद हनफी के नाम कर दिया गया. आकाश का दावा है कि इसके बाद मृतक पक्ष और सीएसपी ने 75 लाख रुपए मांगे. उससे कहा गया कि अगर जेल से बाहर आना है तो 75 लाख रुपए दे दो, कोर्ट में बयान बदल दिए जाएंगे और सभी आरोपी जेल से बाहर आ जाएंगे. हत्या के मामले में गिरफ्तारी के तीन महीने बाद 7 जुलाई को डिफॉल्ट जमानत पर बाहर आने के बाद आकाश ने ये आरोप लगाए.
सीएसपी नेहा पच्चीसिया के खिलाफ शिकायतों की शुरुआत ट्रांसपोर्ट व्यवसायी महेंद्र कुमार जैन की शिकायत से हुई थी. महेंद्र जैन का आरोप है कि 21 जुलाई की रात वाहन चेकिंग के दौरान रेत और डोलोमाइट का वैध परिवहन कर रहे उनके हाईवा वाहनों को रोककर 30 हजार रुपए मांगे गए. आरोप के मुताबिक, मौके पर 25 हजार रुपए नकद लिए गए, जबकि बाकी 5 हजार रुपए अगले दिन ष्टस्क्क के ड्राइवर के जरिए मंगवाए गए. हालांकि बाद में शिकायतकर्ता अपने बयान से पीछे हट गए और शिकायत पर कार्रवाई नहीं होने की बात कही.
कटनी एसपी अभिनय विश्वकर्मा ने शिकायत और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ष्टस्क्क के ड्राइवर कॉन्स्टेबल केशव सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया. साथ ही नेहा पच्चीसिया के अधिकार क्षेत्र से कुठला, माधवनगर और रंगनाथ नगर थानों का प्रभार हटाकर अजाक डीएसपी शिवा पाठक को सौंप दिया गया. शिकायतकर्ता महेंद्र कुमार जैन का कहना है कि उनकी सभी गाडिय़ां वैध परिवहन में लगी थीं. चेकिंग के नाम पर जबरन वसूली की गई. साक्ष्यों के साथ एसपी से न्याय मांगा, लेकिन शिकायत पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई.
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पुलिस की बड़ी कार्रवाई, यात्री बस से 65 किलो डोडाचूरा जब्त, 7 तस्कर गिरफ्तार
मुख्यमंत्री और पुलिस महानिदेशक के निर्देश पर प्रदेशभर में मादक पदार्थों और नशे के खिलाफ विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसके तहत रविवार को नीमच जिले की नयागांव पुलिस को एक बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने नाकाबंदी के दौरान एक यात्री बस से 65 किलोग्राम अवैध डोडाचूरा बरामद कर 7 तस्करों को गिरफ्तार किया है। पकड़े गए सभी आरोपी राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले के निवासी हैं।
सूत्रों के मुताबिक नयागांव पुलिस चौकी प्रभारी राजेन्द्रसिंह सिसौदिया को 1 अगस्त 2026 की रात मुखबिर से अवैध मादक पदार्थ की तस्करी की गुप्त सूचना मिली थी। इसी सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने नीमच-निम्बाहेड़ा हाईवे फोरलेन टोल के पास सघन नाकाबंदी की।
वाहन की चेकिंग के दौरान नीमच से राजस्थान की ओर जा रही सांगवान ट्रेवल्स की बस (क्र. एमपी-44-जेडएफ-4005) को रोका गया है। जब तलाशी ली गई, तो बस में सफर कर रहे 7 संदिग्धों के पास 6 अलग-अलग बैग बरामद हुए। इन बैगों की जांच करने पर उनमें कुल 65 किलोग्राम अवैध डोडाचूरा पाया गया। पुलिस मौके से ही मादक पदार्थ जब्त कर लिया और आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ धारा 8/15 एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया है। जांच भी शुरू हो चुकी है। सभी आरोपियों से पूछताछ जारी है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि यह मादक पदार्थ कहां से लाया गया था और इसकी डिलीवरी किसे दी जानी थी। इस कार्रवाई नीमच के पुलिस अधीक्षक राजेश व्यास, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक हेमलता अग्रवाल, एसडीओपी (जावद) हर्ष राठौर, जावद थाना प्रभारी निरीक्षक मनोजसिंह जादौन की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
गिरफ्तार किए गए आरोपियों का नाम रणजीतसिंह पिता रेशमसिंह रायसिख (35 वर्ष) निवासी ग्राम गाडू, हनुमानगढ़, अजयकुमार पिता बलवन्तसिंह रायसिंह (24 वर्ष) निवासी ग्राम गाडू, अमरजीत पिता दिलीपसिंह रायसिख (51 वर्ष) निवासी सूरेवाला, रविन्द्रसिंह पिता मेजरसिंह रायसिख (39 वर्ष) निवासी ग्राम फतेहपुर, मंगतसिंह पिता महेन्द्रसिंह रायसिख (36 वर्ष) निवासी ग्राम सूरेवाला, जसविन्द्रसिंह पिता किशोरसिंह रायसिख (25 वर्ष) निवासी ग्राम सूरेवाला, रणजीत सिंह पिता कुलवंतसिंह रायसिख (23 वर्ष) निवासी ग्राम सूरेवाला बताया जा रहा है।

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फोटो गैलरी

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गरिमा के जन्म के 15 मिनिट बाद का फोटो
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गरिमा के 1 वर्ष बाद का फोटो
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गरिमा के 2 वर्ष बाद का फोटो
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