


ग्वालियर। मध्य प्रदेश ग्वालियर में रिटायर्ड डिप्टी कलेक्टर के बैग से एक लाख रुपए चोरी का मामला सामने आया हैं। जहां रिटायर्ड डिप्टी कलेक्टर बैंक से पांच लाख रुपए निकालने गए थे पासबुक पर प्रिंटिंग मशीन के पास उनके रुपए निकल गए बैंक के सीसीटीवी में दो संदिग्ध महिला नजर आई हैं। जिसकी शिकायत उन्होंने थाने मे की हैं वहीं पुलिस ने उनकी शिकायत पर मामले की जांच कर संदिग्ध महिलाओं की तलाश शुरू कर दी हैं।
दरअसल ग्वालियर के मुरार थाना क्षेत्र संकट मोचन नगर निवासी केएस श्रीवास्तव ने पुलिस से शिकायत कर बताया कि वह रिटायर्ड डिप्टी कलेक्टर हैं। उनका मुरार बारादरी चौराहा स्थित स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में अकाउंट है। उनको किसी को पैसा देना था इसलिए वह मंगलवार दोपहर में बैंग पहुंचे थे और बैंक से उन्होंने पांच लाख रुपए निकाले थे। बैंक से उन्हें पांच-पांच सौ रुपए की दस गड्डिया दी थी। बैंक से मिली गड्डियों को उन्होंने बैग में रख लिया था जिसके बाद वह पासबुक में प्रिंट करने के लिए प्रिंटिंग मशीन के पास खड़े हो गए। इसी समय दो संदिग्ध महिलाएं उनके पीछे से आकर लाइन में लग गई और भीड़ में हाथ की सफाई दिखाते हुए रिटायर्ड डिप्टी कलेक्टर के बैग से दो गड्डिया निकाल कर 1 लाख रुपए चोरी कर फरार हो गई।
जब वह घर पहुंचे और बैंग से रुपए निकले तो चोरी का पता चला। चोरी का पता चलते ही रिटायर्ड डिप्टी कलेक्टर तत्काल बैंक पंहुचे और पूरी घटना बैंक प्रबंधक को बताई। जिसके बाद बैंक में लगे CCTV कैमरों को चेक किया तो पासबुक प्रिंटिंग मशीन की लाइन में दो महिलाएं रिटायर्ड डिप्टी कलेक्टर के पीछे खड़ी हुई दिखाई दी। जिनको उन्होंने संदिग्ध मना हैं। सीसीटीवी फुटेज मिलने के बाद पीड़ित ने थाने पहुचकर शिकायत की हैं। वहीं पुलिस ने उनके आवेदन लेकर जांच शुरू कर दी है। वहीं पुलिस अधिकारियों का कहना है कि बैंक के आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं और जल्द ही आरोपियों तक पहुंच कर मामले का खुलासा किया जाएगा।
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TET अनिवार्यता के खिलाफ शिक्षकों का घेराव, DPI मुख्यालय पर जोरदार प्रदर्शन
भोपाल में टीईटी अनिवार्यता के आदेश के विरोध में बुधवार को शिक्षक संगठनों ने एकजुट होकर लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) मुख्यालय का घेराव किया। इस दौरान बड़ी संख्या में शिक्षक सड़कों पर उतरे और नारेबाजी करते हुए परीक्षा रद्द करने की मांग उठाई। साथ ही प्रदेशभर में जिला कलेक्ट्रेट कार्यालयों में मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन भी सौंपे जा रहे हैं।
अध्यापक-शिक्षक संयुक्त मोर्चा के सदस्य उपेंद्र कौशल ने बताया कि राजधानी भोपाल में आसपास के जिलों से शिक्षक पहुंचकर DPI कार्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। उनकी मुख्य मांग टीईटी परीक्षा को रद्द करना है। साथ ही प्रदेशभर में भी संयुक्त मोर्चा के सदस्य जिला स्तर पर कलेक्ट्रेट पहुंचकर मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंप रहे हैं।
शिक्षक संगठनों का कहना है कि इस आदेश से प्रदेश के करीब 1.5 लाख शिक्षक प्रभावित हो सकते हैं। इनमें लगभग 70 हजार शिक्षक ऐसे हैं, जिनकी नियुक्ति 2011 से पहले हुई थी। इन शिक्षकों का कहना है कि उनकी नियुक्ति के समय टीईटी अनिवार्य नहीं था, ऐसे में अब इसे लागू करना गलत है और उनकी नौकरी पर खतरा खड़ा कर रहा है।
हाल ही में DPI भोपाल द्वारा जारी आदेश के अनुसार, जिन शिक्षकों की सेवानिवृत्ति में पांच वर्ष से अधिक समय बाकी है उन्हें अनिवार्य रूप से टीईटी परीक्षा पास करनी होगी। आदेश में साफ कहा गया है कि संबंधित शिक्षकों को दो वर्ष के भीतर परीक्षा पास करनी होगी अन्यथा उनकी सेवा समाप्त की जा सकती है।
शिक्षक संगठनों का कहना है कि आरटीई एक्ट 2009 में लागू हुआ और टीईटी 2011 से अनिवार्य किया गया। ऐसे में उससे पहले नियुक्त शिक्षकों पर यह नियम लागू करना “रेट्रोस्पेक्टिव” फैसला है जो न सिर्फ अन्यायपूर्ण है बल्कि कानूनी रूप से भी कमजोर है।
स्कूल शिक्षा विभाग का कहना है कि यह निर्णय सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के आधार पर लिया गया है। हालांकि इस आदेश के बाद शिक्षकों में व्यापक असंतोष देखने को मिल रहा है।
शिक्षक संगठनों ने साफ किया है कि अगर उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। 11 अप्रैल को ब्लॉक स्तर पर प्रदर्शन करते हुए स्थानीय विधायक, मंत्री और सांसदों को ज्ञापन सौंपे जाएंगे। इस दौरान टीईटी आदेश को निरस्त करने और सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर करने की मांग प्रमुख रहेगी।
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मुस्लिम महिला कांग्रेस पार्षद का वंदे मातरम पर भड़काऊ बयान, बोली- ‘तुम्हारे बाप में दम हो तो कहलवा कर दिखाओ
इंदौर। इंदौर नगर निगम परिषद के बजट सम्मेलन में उस वक्त माहौल पूरी तरह बिगड़ गया जब “वंदे मातरम” के मुद्दे पर कांग्रेस और बीजेपी आमने-सामने आ गए। कांग्रेस की मुस्लिम पार्षदों पर वंदे मातरम का अपमान करने का आरोप लगा, जिसके बाद बीजेपी पार्षदों ने जोरदार विरोध शुरू कर दिया। बीजेपी ने कांग्रेस पार्षद रुबीना इकबाल खान और फौजिया शेख अलीम पर सीधे-सीधे वंदे मातरम के अपमान का आरोप लगाया।
इसी दौरान सदन में तीखी बहस के बीच रुबीना इकबाल खान ने विवादित बयान दे दिया — “तुम्हारे बाप में दम हो तो कहलवा कर दिखाओ”। इस बयान के बाद बीजेपी पार्षद भड़क गए और पूरे सदन में “वंदे मातरम” के नारे गूंजने लगे। स्थिति इतनी बिगड़ी कि सभापति को दखल देना पड़ा और कांग्रेस पार्षद फौजिया शेख को एक दिन के लिए सदन से बाहर कर दिया गया। फोजिया शेख आलम ने कहा संविधान का एक्ट है जिसके अंदर लिखा है कि आप राष्ट्रगान गा सकते हैं लेकिन राष्ट्रगीत नहीं मैंने यह बात सभापति के सामने रखी लेकिन फिर भी सभापति ने सदन से बाहर कर दिया। महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने इसे वंदे मातरम् का अपमान बताया है।
फौजिया शेख अलीम का कहना है हमारे इस्लाम में वंदे मातरम नहीं बोल सकते है। संविधान में साफ लिखा है वंदे मातरम गाने पर कोई जबरदस्ती नहीं है, संविधान में हमें छूट है हम राष्ट्रगान गा सकते है राष्ट्रीय गीत के लिए कोई बाध्य नहीं कर सकता है , साथ ही फौजिया शेख अलीम ने कहा हम भारत माता की पूजा नहीं करते हैं।
वंदे मातरम विवाद के बाद सदन में एक और टकराव सामने आया। कांग्रेस से बीजेपी में शामिल हुए पार्षदों को “गद्दार” कहे जाने पर बीजेपी ने तीखी प्रतिक्रिया दी। बीजेपी पार्षद सभापति के सामने धरने पर बैठ गए और कांग्रेस से सार्वजनिक माफी की मांग पर अड़ गए। उनका कहना था कि यह बयान राजनीतिक नहीं बल्कि व्यक्तिगत हमला है।
मामले को शांत कराने के लिए सभापति ने कांग्रेस पार्षद को खेद जताने के निर्देश दिए, लेकिन तब तक सदन का माहौल पूरी तरह से गरमा चुका था। इंदौर नगर निगम का बजट सम्मेलन विकास की बजाय विवादों का अखाड़ा बन गया। “वंदे मातरम” और “गद्दार” जैसे मुद्दों पर सियासी टकराव ने साफ कर दिया कि सदन में बहस कम और बवाल ज्यादा हो रहा है।
आलीराजपुर। मध्य प्रदेश के आलीराजपुर जिले से दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। जहां एक शादी समारोह के दौरान पारिवारिक विवाद ने हिंसक रूप ले लिया। इस दौरान काका ने अपने भतीजे पर तीर चला दिया, जो उसके पेट के अंदर घुस गया। जिससे वह बुरी तरह से घायल हो गया है। फिलहाल उसे इलाज के लिए गुजरात रेफर किया गया है।
यह पूरा मामला ग्राम सूखी बावड़ी का है। बताया जा रहा है कि समारोह के दौरान परिवार के दो पक्षों में कहासुनी हो गई, जो देखते ही देखते बढ़ गई। इसी दौरान बीच-बचाव करने आए युवक रवि सस्तीया पर उसके ही काका कमल सस्तीया ने तीर चला दिया। तीर सीधे रवि के पेट में जा लगा, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया।
घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। परिजन घायल रवि को तत्काल जिला अस्पताल लेकर पहुंचे। जहां वह पेट में तीर लगे होने की स्थिति में ही भर्ती हुआ। डॉक्टरों ने प्राथमिक इलाज के बाद उसकी गंभीर हालत को देखते हुए उसे गुजरात के दाहोद रेफर किया। जहां उसका इलाज जारी है। सूत्रों के मुताबिक आरोपी काका को गिरफ्तार कर लिया गया है। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है।
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बेखौफ रेत माफिया: मुरैना में ट्रैक्टर ट्रॉली से वनकर्मी का सिर कुचला, मौके पर मौत
मुरैना। मध्य प्रदेश के चंबल अंचल में रेत का अवैध कारोबार बेखौफ चल रहा है। इसी के चलते मुरैना में अवैध रेत परिवहन कर रहे ट्रैक्टर चालक विनोद कोरी ने वन रक्षक हरिकेश गुर्जर की कुचलकर हत्या कर दी। घटना बुधवार की अलसुबह हुई।
आरोपित विनोद कोरी इतना दुस्साहसी निकला कि उसने हत्या के बाद आधा किलोमीटर दूर पेट्रोल पंप पर ट्रैक्टर-ट्राली खड़ी की। कपड़े बदले और वहां के कर्मचारी को औने-पौने दाम पर रेत बेचकर ट्रैक्टर-ट्राली भी ले गया। पुलिस ने विनोद कोरी के विरुद्ध हत्या का प्रकरण दर्ज कर उसे हिरासत में ले लिया है।
उसने पुलिस को बताया है कि ट्रैक्टर का संचालन कुथियाना गांव के पवन तोमर व सोनू चौहान कर रहे हैं। पवन तोमर दिमनी भाजपा मंडल का उपाध्यक्ष है। सोनू भी भाजपा से ही जुड़ा है। मृतक के स्वजन की मांग है कि अवैध कारोबार में शामिल ट्रैक्टर मालिक को भी आरोपित बनाया जाए। पुलिस असली मालिकों की पहचान सुनिश्चित कर रही है।
पुलिस के अनुसार अंबाह वन रेंज के डिप्टी रेंजर वीरकुमार तिर्की के नेतृत्व में हरिकेश गुर्जर सहित चार लोगों की टीम बुधवार को दिमनी थाना क्षेत्र के अंबाह-मुरैना रोड पर गश्त कर रहे थे। सुबह साढ़े पांच बजे रानपुर चौराहा पर टीम विनोद कोरी को रुकने का इशारा किया, लेकिन वह नहीं रुका।
तभी हरिकेश गुर्जर ट्रैक्टर पर चढ़ गए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार विनोद कोरी ने हरिकेश गुर्जर को लात मारकर धकेल दिया और उन्हें कुचलते हुए ट्रैक्टर-ट्राली ले भागा। हरिकेश ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। विनोद कोरी ट्रैक्टर-ट्राली के साथ आधा किमी दूर एक पेट्रोल पंप पर पहुंचा।
वहां के सीसीटीवी कैमरे में उसके फुटेज रिकार्ड हो गए। घटना के कुछ घंटे बाद ही पूर्व निर्धारित दौरे पर मुरैना पहुंचे भाजपा प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने रेत कारोबार की ऐसी घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए मुख्यमंत्री से चर्चा का आश्वासन दिया है। वहीं, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने आरोप लगाया कि प्रदेश में अब भाजपा का नहीं, माफिया का राज चल रहा है।
अंचल में रेत माफिया इतने बेखौफ हैं कि वे अधिकारियों पर हमला करने से बाज नहीं आते। प्रदेश में रेत माफिया के हाथों अब तक सात अधिकारी और कर्मचारी जान गंवा चुके हैं। आठ मार्च, 2012 को प्रशिक्षु आईपीएस नरेंद्र सिंह को भी कुचल दिया गया था।
चंबल नदी में केवल मुरैना में ही 25 से 30 छोटे-बड़े घाट हैं। बड़े घाटों से 1500 ट्राली और अन्य छोटे घाटों से प्रतिदिन 500 से 700 ट्राली रेत निकाली जाती है। मुरैना में एक ट्राली रेत ढाई से पौने तीन हजार रुपये में बिकती है। एक आकलन के अनुसार करीब 50 लाख रुपये की रेत प्रतिदिन चंबल नदी से निकाली जाती है।
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3 महीने बाद बंद हो सकती है LPG सप्लाई, 10 दिन में शुरू होगी पाइपलाइन से गैस
भोपाल। प्रदेश में सरकार का जोर अब पीएनजी के नेटवर्क को विस्तार देने पर है। इसके लिए भोपाल, इंदौर, उज्जैन सहित अन्य जिलों में पीएनजी लाइन के विस्तार के साथ कनेक्शन देने का काम किया जा रहा है। बुधवार को अपर मुख्य सचिव खाद्य नागरिक आपूर्ति रश्मि अरुण शमी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जिलों के अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी और नगरीय निकायों के अधिकारियों के साथ बैठक कर निर्देश दिए कि जहां पीएनजी की लाइन जोड़ी जा चुकी है, वहां 10 दिन के भीतर आपूर्ति प्रारंभ करें।
बैठक में निर्देश दिए गए कि जिन एलपीजी के उपभोक्ताओं ने कनेक्शन नहीं लिए हैं, उन्हें बताया जाए कि तीन माह बाद उनकी एलपीजी की आपूर्ति बंद की जा सकती है। रश्मि अरुण शमी ने कहा कि गृह विभाग के अधीन आने वाली संस्थाएं, सुधार गृहों के साथ-साथ पुलिस, सीएपीएफ, डिफेंस इस्टेब्लिशमेंट, ऑफिसर्स कॉलोनी, सामान्य प्रशासन पूल के घरों, पुलिस मुख्यालय, पुलिस कॉलोनी के आसपास पाइप लाइन बिछी हुई हैं, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर पीएनजी कनेक्शन दिए जाएं।
इस दौरान बताया गया कि ऐसे क्षेत्र, जहां पाइपलाइन बिछी है, वहां के रहवासियों एवं व्यवसायियों की सूची तैयार कर कॉलोनियों में शिविर लगाए जा रहे हैं। इस प्रक्रिया में स्थानीय निकायों के अधिकारियों, वार्ड पार्षद के साथ अन्य जनप्रतिनिधियों को भी शामिल किया जाए। इसी तरह औद्योगिक क्षेत्रों में उन औद्योगिक इकाइयों की पहचान की जाए, जिन्हें पीएनजी पर शिफ्ट किया जा सकता है।
ऑयल कंपनी के अधिकारियों ने बताया कि जिले के दूसरे स्थान से काम करने आए मजदूर, कर्मचारी और विद्यार्थियों को खाना पकाने के लिए पांच किलोग्राम का सिलिंडर 1,529 रुपये प्रति कनेक्शन के मान से उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इसके लिए एड्रेस प्रूफ की आवश्यकता भी नहीं है। इन सिलिंडर को 585 रुपये में रिफिल किया जा सकता है।
तमिलनाडु के सथानकुलम कस्टोडियल मौत मामले में छह साल बाद अदालत ने बड़ा फैसला सुनाते हुए 9 पुलिसकर्मियों को दोषी ठहराया और उन्हें फांसी की सजा सुनाई. यह फैसला न्याय व्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है. लेकिन इस पूरे मामले में एक नाम सबसे ज्यादा चर्चा में रहा. वह नाम है हेड कांस्टेबल रेवती. हेड कांस्टेबल रेवती की बहादुरी और सच्चाई के प्रति उनकी प्रतिबद्धता ने इस केस को मुकाम तक पहुंचाने में निर्णायक भूमिका निभाई.
तमिलनाडु के सथानकुलम कस्टोडियल मौत मामले में हेड कांस्टेबल रेवती की साहसिक गवाही सबसे अहम साबित हुई. धमकियों और दबाव के बावजूद उन्होंने सच सामने रखा. उनकी गवाही ने दोषियों की पहचान और अपराध साबित करने में निर्णायक भूमिका निभाई.
यह घटना साल 2020 की है, जब कोविड नियमों के उल्लंघन के आरोप में पी जयाराज और उनके बेटे जे बेन्निक्स को तूतीकोरिन जिले के सथानकुलम पुलिस स्टेशन में हिरासत में लिया गया था. आरोप था कि उन्होंने अपनी मोबाइल की दुकान तय समय से ज्यादा देर तक खुली रखी थी. लेकिन पुलिस स्टेशन के अंदर जो हुआ. उसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया. आरोप है कि पिता और बेटे को थाने में बुरी तरह पीटा गया. उन्हें घंटों तक यातनाएं दी गईं. उनके शरीर पर गंभीर चोटें आईं और कुछ ही दिनों के भीतर दोनों की मौत हो गई.
इस घटना के बाद लोगों ने न्याय की मांग की और मामला धीरे धीरे अदालत तक पहुंचा. केस को मजबूत बनाने में सबसे बड़ी भूमिका निभाई हेड कांस्टेबल रेवती ने. अपनी आंखों से उस रात की पूरी घटना देखी थी कि किस तरह पिता-पुत्र को बेरहमी से पीटा जा रहा था.
अगर उन्होंने साहस नहीं दिखाया होता. तो संभव है यह मामला कभी भी इस अंजाम तक नहीं पहुंच पाता. न्यायिक मजिस्ट्रेट एमएस भारथिदासन को रेवती ने कहा कि सर मैं आपको सब कुछ बताऊंगी. हर वह सच जो छिपाया जा रहा है. लेकिन मैं दो छोटी बच्चियों की मां हूं, क्या आप मेरे बच्चों और मेरी नौकरी की सुरक्षा की गारंटी दे सकते हैं.
रेवती ने अपनी गवाही में बताया कि पुलिसकर्मियों को उस समय जो भी हाथ लगा वो उससे मारते रहे. यहां तक कि उनके प्राइवेट पार्ट पर भी जूते से मारा गया. बीच बीच में पुलिसकर्मी शराब पीने के लिए रुकते थे. उन्होंने बताया कि जब वह रात करीब 8.50 बजे स्टेशन पहुंचीं . तब अंदर से चीखने और रोने की आवाजें आ रही थीं, कोई चिल्ला रहा था. अम्मा, दर्द हो रहा है, मुझे छोड़ दो मैंने गलती की है.
रेवती ने बताया कि किस तरह दोनों लोगों को लगातार पीटा गया. उसके शरीर से खून बह रहा था और कुछ समय बाद जब मारपीट खत्म हुई, तो उसी घायल शख्स से फर्श पर गिरे खून को साफ करवाया गया. उन्हें गंभीर चोटें आईं और बाद में उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया.
एक समय ऐसा भी आया जब दोनों को नग्न कर दिया गया और उनके हाथ बांध दिए गए. उस दृश्य को देखकर रेवती खुद को रोक नहीं पाईं और कमरे से बाहर चली गईं.
रेवती की गवाही सिर्फ बयान तक सीमित नहीं रही. उन्होंने सीसीटीवी फुटेज में दिखाई दे रहे पुलिसकर्मियों की पहचान भी की. रेवती को इस दौरान कई तरह की धमकियों और दबाव का सामना करना पड़ा.
छह साल बाद आया यह फैसला न सिर्फ पीड़ित परिवार के लिए न्याय लेकर आया. बल्कि यह भी संदेश देता है कि कानून से ऊपर कोई नहीं है. रेवती का यह कदम पुलिस व्यवस्था के भीतर एक दुर्लभ उदाहरण माना जा रहा है. जहां एक जूनियर अधिकारी ने अपने ही साथियों के खिलाफ जाकर सच बोलने का साहस दिखाया.
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सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: सरकारी नौकरी में पिछड़ा वर्ग होना रियायत का आधार नहीं
नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने सरकारी नौकरियों में भर्ती प्रक्रिया की अखंडता को लेकर एक अहम टिप्पणी की है. शीर्ष अदालत ने कहा है कि केवल पिछड़े समुदाय से संबंधित होना किसी उम्मीदवार के पक्ष में तराजू झुकाने का आधार नहीं बन सकता.
जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक रोजगार के मामलों में सहानुभूति या सामाजिक पृष्ठभूमि के आधार पर निर्णय नहीं लिए जा सकते और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए अनुग्रह, दान या करुणा को दूर रखा जाना चाहिए.
यह मामला दिल्ली पुलिस में कांस्टेबल पद की भर्ती से जुड़ा है. एक उम्मीदवार ने भर्ती के शुरुआती चरणों को पार कर लिया था, लेकिन जनवरी 2024 में आयोजित होने वाले शारीरिक सहनशक्ति और मापन परीक्षण में बीमारी का हवाला देकर शामिल नहीं हुआ. सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (कैट) ने दिल्ली पुलिस को निर्देश दिया था कि उसे दूसरे बैच के साथ परीक्षा देने का मौका दिया जाए. इस फैसले को सितंबर 2025 में दिल्ली हाईकोर्ट ने भी बरकरार रखा था. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने अब इन दोनों आदेशों को खारिज कर दिया है.
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को गैर-जिम्मेदारी का एक क्लासिक उदाहरण बताया. पीठ ने नोट किया कि लगभग एक लाख उम्मीदवारों में से केवल यही एक उम्मीदवार था जिसने टेस्ट को दोबारा शेड्यूल करने की मांग की थी. अदालत ने कहा, जब अवसर दुर्लभ हों, तो उन्हें दोनों हाथों से पकडऩा चाहिए. कोर्ट के अनुसार, निर्धारित तिथि पर उपस्थित न होना और फिर से अवसर की उम्मीद करना उम्मीदवार में पहल और प्रेरणा की कमी को दर्शाता है. पीठ ने यह भी कहा कि अगर उम्मीदवार बीमार था, तो उसे कम से कम केंद्र पर रिपोर्ट करना चाहिए था और वहां अपनी स्थिति बतानी चाहिए थी.
अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि सार्वजनिक रोजगार की प्रक्रिया में अधिसूचित शर्तों का सख्ती से पालन किया जाना चाहिए. कोर्ट ने कहा कि किसी एक उम्मीदवार के लिए नियमों में ढील देने से पूरी चयन प्रक्रिया की शुचिता प्रभावित होती है. केवल सामाजिक पृष्ठभूमि के आधार पर रियायत देना उन हजारों अन्य उम्मीदवारों के साथ अन्याय होगा जिन्होंने नियमों का पालन किया है. सुप्रीम कोर्ट ने अंतत: फैसला सुनाया कि उम्मीदवार के पास परीक्षण को दोबारा शेड्यूल करने का कोई लागू करने योग्य अधिकार नहीं है और सार्वजनिक हित में भर्ती नियमों की कठोरता को बनाए रखना आवश्यक है.
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बॉम्बे हाईकोर्ट ने 8 पुलिसकर्मियों पर हत्या का आरोप बरकरार रखा, याचिका खारिज की
Bombay High Court ने मंगलवार (7 अप्रैल) को मुंबई पुलिस के 8 अधिकारियों को बड़ा झटका दिया है। जस्टिस अजय गडकरी और जस्टिस श्याम चंदक की डिवीजन बेंच ने स्पष्ट किया कि 2014 के एग्नेलो वाल्डारिस मौत मामले में इन अधिकारियों के खिलाफ हत्या (IPC 302) और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने (IPC 295-A) जैसी गंभीर धाराओं के तहत आरोप तय किए जाएंगे। इसके साथ ही अदालत ने स्पेशल POCSO कोर्ट के पुराने आदेश को सही ठहराते हुए पुलिस अधिकारियों की पुनर्विचार याचिकाओं को खारिज कर दिया।
अदालत ने यह भी कहा कि कस्टोडियल डेथ के मामलों में सीधा चश्मदीद सबूत मिलना दुर्लभ होता है और ऐसे मामलों में परिस्थितिजन्य साक्ष्यों का महत्व बढ़ जाता है.
अप्रैल 2014 में 25 साल के एग्नेलो वाल्डारिस की वडाला रेलवे पुलिस स्टेशन में हिरासत के दौरान कथित तौर पर यातना के कारण मौत हो गई थी.
वडाला GRP पुलिस ने चेन स्नैचिंग के शक में एग्नेलो और तीन अन्य लोगों (जिनमें एक नाबालिग लड़का भी शामिल था) को गिरफ्तार किया था. एग्नेलो के पिता लियोनार्ड वाल्डारिस ने खुद पुलिस को सहयोग किया और बेटे को सौंप दिया, क्योंकि पुलिस ने कहा था कि सिर्फ पूछताछ होगी और कोर्ट में पेश किया जाएगा. लेकिन बाप के पास पुलिस ने बेटे की लाश पहुंचाई.
परिवार और गवाहों के मुताबिक पुलिस ने उन पर बुरी तरह टॉर्चर किया. बेल्ट और डंडे से मारा, नंगा करके पीटा, उल्टा लटकाया और सेक्सुअल अब्यूज (यौन शोषण) भी किया, जिसकी वजह से उसकी मौत हुई.
आपको बता दें कि अप्रैल 2014 में वडाला पुलिस स्टेशन के अधिकारियों ने एग्नेलो वाल्डारिस और तीन अन्य (एक नाबालिग सहित) को चोरी के शक में हिरासत में लिया था। हिरासत के दौरान उनके साथ भीषण मारपीट की गई। गवाहों के अनुसार, उन्हें न केवल शारीरिक यातनाएं दी गईं, बल्कि उनके साथ घिनौना यौन दुर्व्यवहार भी किया गया। पुलिस कस्टडी में रहते हुए ही 18 अप्रैल को एग्नेलो की मौत हो गई। पुलिस का दावा था कि वह भागने की कोशिश में ट्रेन से टकरा गया, लेकिन मेडिकल रिपोर्ट और गवाहों के बयान कुछ और ही कहानी बयां कर रहे थे।
मुरैना। मुरैना जिला भ्रूण लिंग परीक्षण और गर्भपात के लिए कुख्यात होता जा रहा है। ऐसा ही एक मामला सामने आया है। जहां खेतों के बीच बनी एक झोपड़ी में भ्रूण लिंग परीक्षण किया जा रहा था। गांव के युवक ने इसका वीडियो बनाया और एक आरोपी को भी पकड़कर पुलिस को सौंपा हैं। मामला बागचीनी थाना क्षेत्र का है, लेकिन देर रात को सिविल लाइन थाने में तीन नामदजों पर जीरो पर कायमी की गई है।
सांटा गांव के विकास पुत्र रामधार शर्मा (26) ने पुलिस को सूचना देते हुए बताया कि उसे हडबांसी गांव के खेतों में एक झोंपड़ी में कुछ संदिग्ध गतिविधियां लगी। कार से एक महिला को लोग लाए और झोंपड़ी में ले गए, महिला गर्भवती थी। इसके बाद विकास चुपके से गया और मोबाइल से वीडियो बनाया तो देखा कि कुछ लोग महिला का भ्रूण लिंग परीक्षण कर रहे हैं। विकास के वीडियो बनाने की भनक आरोपियों को लग गई।
इसके बाद विकास को अपने साथ अनहोनी का डर सताने लगा, अंदेशा हुआ और वह भागा। इसी बीच आरोपी झोंपड़ी से निकलकर भाग गए। इसके बाद विकास ने साहस दिखाकर ईको कार एमपी 06 जेडजे 5244 से भागने का प्रयास करते एक आरोपी को पकड़ लिया। जिसकी पहचान राकेश पुत्र बदन सिंह प्रजापति (44 ) निवासी रिठौरा, सरायछौला के रूप में हुई।
राकेश प्रजापति ने खुद को कार का ड्राइवर बताते हुए भ्रूण लिंग परीक्षण करने वाले आरोपियों के नाम संजीव उर्फ संजू पुत्र सूरतराम शर्मा निवासी गोपालपुरा मुरैना और छोटू उर्फ विक्रम शर्मा निवासी जौरा रोड मुरैना के नाम बताया। वहीं संजीव शर्मा और विक्रम शर्मा पूर्व में भी भ्रूण लिंग परीक्षण करते हुए पकड़े जा चुके हैं और सिविल लाइन थाने में अपराध भी दर्ज है। इन आरोपियों की तलाश की जा रही है।
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खाटू श्याम मंदिर में दिनदहाड़े चोरी: दानपेटी लेकर छत पर चढ़ा चोर
नीमच। मध्य प्रदेश के नीमच शहर के व्यस्त तिलक मार्ग स्थित प्राचीन श्री खाटू श्याम मंदिर में दिनदहाड़े चोरी की सनसनीखेज वारदात सामने आई है, जहां एक चोर मंदिर में घुसकर दानपेटी उठाकर सीधे छत पर ले गया और उसे तोड़कर उसमें रखी नगदी लेकर फरार हो गया। पूरी घटना मंदिर में लगे सीसीटीवी कैमरों में कैद हो गई, जिसका वीडियो मंगलवार सुबह सामने आया है।
फुटेज में साफ दिखाई दे रहा है कि चोर ने सुनसान मौके का फायदा उठाते हुए तेजी से वारदात को अंजाम दिया। चोरी का खुलासा तब हुआ जब पुजारी छत पर पहुंचे और वहां टूटी हुई खाली दानपेटी मिली। गौरतलब है कि इस मंदिर में पहले भी चोरी की घटनाएं हो चुकी हैं, जिससे स्थानीय रहवासियों और श्रद्धालुओं में भारी आक्रोश है। शहर के बीचों-बीच दिनदहाड़े हुई इस वारदात ने कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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इंदौर में टैक्सी ड्राइवर ने एसआई पर 50 हजार रूपये की मांग का आरोप लगाकर किया सुसाइड, सस्पेंड
इंदौर। राजेंद्र नगर थाना थाने के एसआई पर गाड़ी छोड़ने के एवज में 50 हजार रूपये की मांग का आरोप लगाते हुए टैक्सी ड्राइवर ने सुसाइड कर लिया है। मामले में एसआई को सस्पेंड कर दिया गया। युवक ने सुसाइड से पहले वीडियो बनाकर एसआई पर मारपीट और पैसों की मांग का आरोप लगाया है।
सोमवार रात अभिषेक पाटिल की कार का एक्सीडेंट एक अन्य कार से हो गया था। मृतक ने आरोप लगाया कि इस मामले में एसआई मनोहर पाल ने कार छोड़ने के एवज में 50 हजार रुपए की मांग की और मारपीट की।
देर रात घर लौटने के बाद अभिषेक ने वीडियो बनाकर अपने स्वजन को भेजा और मंगलवार दोपहर में फांसी लगा ली। वीडियो में अभिषेक ने बताया कि उसे थाने ले जाने वाले पुलिसकर्मी का व्यवहार ठीक था, लेकिन एक सब इंस्पेक्टर ने दूसरे पक्ष की गाड़ी छोड़ दी और मुझे परेशान करना शुरू कर दिया।
डीसीपी कृष्ण लालचंदानी ने बताया कि घटना सोमवार रात 12 बजे की है। एक्सीडेंट के बाद डायल 112 पर काल आया था। वाहन चालक ने गाड़ी डैमेज होने पर 25 हजार रूपये मांगे थे। मृतक के खिलाफ किशनगंज थाने में लूट का अपराध दर्ज है।
वीडियो में अभिषेक कह रहा है कि सामने चल रही कार ने अचानक ब्रेक लगाया, जिससे उसकी कार पीछे से टकरा गई। इसपर कार चालक ने 25 हजार रूपये की मांग की थी, इसपर उसे मरम्मत कराने की बात कही थी। इसके बाद थाने पहुंचे तो वहां दबाव बनाया गया। एसआई ने 50 हजार रुपए नहीं देने पर जेल भेजने की धमकी दी।
वीडियो में कहा कि थाने की रिकार्डिंग देखें, जिससे सच्चाई सामने आ जाएगी। मैं जिंदगी अच्छे से जीना चाहता था, अच्छी गृहस्ति बसाना चाहता था। पुलिस ने झूठ का साथ दिया और 500 रूपये में बिक गई। मेरी गाड़ी छीन ली, वह मेरी रोजीरोटी थी। मैं पुलिसवाले के कारण जान दे रहा हूं। पुलिस वह होती है जो इंसान को न्याय दिलाए।
सागर। सुरखी थाना पुलिस ने बहेरिया थाना क्षेत्र में कार्रवाई कर हड़ंकप मचा दिया। रविवार की देर रात बहेरिया थाना क्षेत्र के ग्राम रुसल्ला के जंगल में संचालित हो रहे जुआ फड़ पर पुलिस टीम ने दबिश दी। कार्रवाई में फड़ से 21 जुआरियों को पकड़ा गया, जिनके पास से 22 बाइक, 11 कार, 21 मोबाइल और एक पिस्टल व चाकू जब्त किया गया है। इसकी कुल कीमत करीब 45 लाख आंकी गई है, वहीं जुआरियों के पास से नकद 6 लाख 45 हजार रुपए भी बरामद किए गए हैं। कुल बरामदगी 51 लाख 45 हजार की है। कार्रवाई में पांच थानों का पुलिस बल शामिल था। इस टीम को प्रशिक्षु आइपीएस दीपांशु ने तैयार किया था। सूत्रों के अनुसार जुआ फड़ संचालित होने की जानकारी मिलने पर एसपी विकास विकाश कुमार शाहवाल ने प्रशिक्षु आइपीएस के लिए कार्रवाई के निर्देश दिए थे। मामले में जुआरियों को थाने ले जाकर जुआ एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है।
ग्राम रुसल्ला के जंगल में लंबे समय से जुआ फड़ संचालित हो रहा था। चूंकि यह बड़े स्तर पर फड़ संचालित होता था, तो जुआरियों ने भी अपना मुखबिर तंत्र सक्रिय किया हुआ था ताकि पुलिस की कार्रवाई से बचा जा सके। पुलिस ने जुआरियों की धरपकड़ के लिए प्लानिंग की। रविवार रात पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली। सूचना मिलते ही सुरखी, बिलहरा, बहेरिया कर्रापुर, ढाना की 22 सदस्य की स्पेशल टीम गठित कर कार्रवाई के लिए रवाना की गई। टीम जंगल में पहुंचकर घेराबंदी की और जुआ फड़ पर दबिश दी यहां करीब 30 से 40 लोग जुआ खेल रहे थे। पुलिस को देख जुआरी भागने लगे, जिस पर पुलिस जवानों ने पीछा कर 21 आरोपियों के लिए पकड़ लिया।
बड़े स्तर पर संचालित जुआ फड़ में लग्जरी कार सहित शहर और आसपास के इलाकों के नामी लोग पहुंचते थे। पुलिस की प्राथमिक जांच में सामने आया कि उक्त जुआ फड़ का संचालक आरोपी अमित टिम्मा कर रहा था। कार्रवाई में उसे भी गिरफ्तार किया गया है। आरोपी के पास से पिस्टल, जिंदा कारतूस और चाकू बरामद किया गया है।
रुसल्ला के जंगल जुआ फड़ पर कार्रवाई की गई है। फड़ का संचालन अमित टिम्मा नाम का व्यक्ति कर रहा था। उसके पास से हथियार भी बरामद हुए है। आरोपी के खिलाफ जुआ एक्ट के साथ ऑर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज कर कार्रवाई की गई है। मामला दर्ज कर आरोपियों से पूछताछ की जा रही है।
डॉ. संजीव उईके, एडिशनल एसपी
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पोहा जलेबी बेचती नजर आईं पूर्व सीएम उमा भारती, गरीबों के लिए अतिक्रमण विरोधी कार्रवाई से नाराज
टीकमगढ़. मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती मंगलवार को सड़क किनारे लगे एक ठेले पर पोहा बेचती नजर आई हैं. हालांकि, वो ऐसा प्रशासन की ओर से की गई कार्रवाई के विरोध में रही हैं. लेकिन, कुछ ही देर में उनका ये वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने लगा है.
आपको बता दें कि, पूर्व सीएम उमा भारती मंगलवार को टीकमगढ़ शहर के सिविल लाइन इलाके में सड़क किनारे लगे ठेले पर पोहा बेच रही हैं. उन्होंने प्रशासन द्वारा एक दिन पहले की गई अतिक्रमण विरोधी कार्रवाई को गलत ठहराया था. आज वो उन्हीं हटाए गए ठेलो को फिर से लगाकर उनमें से एक ठेले पर पोहा बेचने पहुंची हैं.
बता दें कि, पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने एक दिन पहले प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल खड़े करते हुए अतिक्रमण विरोधी कार्रवाई को गलत ठहराया था. यही नहीं, वो खुद कार्रवाई रुकवाने सिविल लाइन इलाके पहुंच गई थीं. प्रशासन ने सोमवार की दोपहर सिविल लाइन से अतिक्रमण हटाया तो देर शाम पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने उस पर सवाल उठते हुए इसे गरीबों के खिलाफ की गई अनुचित कार्रवाई बताया था. उनका कहना था कि, प्रशासन सबसे पहले पैसे वालों का अतिक्रमण हटाएं. ठेले वाले सबसे बाद में आते है. सोमवार की रात 8.45 बजे पूर्व मुख्यमंत्री ईदगाह के सामने पहुंची. यहां पर उन्होंने प्रशासन द्वारा हटाए गए अतिक्रमण की जानकारी ली थी.
पूर्व सीएम ने प्रशासन पर ठेलों से नारियल तक उठा ले जाने का आरोप लगाया था. उन्होंने कहा कि, मुझे पता चला है यहां से कई लोगों की दुकानों को तोड़ा गया है, नारियल तक उठाकर ले गए. ये बात गलत है, मैं उनका नारियल उन्हें वापस दिलाकर रहूंगी. उन्होंने आगे कहा कि, दुकानों में लोगों की चार पांच साल की कमाई लगी थी. उनका कहना था कि, प्रशासन को पहले पैसे वालों के अतिक्रमण हटाने चाहिए. प्रशासन को कटरा बाजार से अभियान शुरू कर सिविल लाइन आना चाहिए. ये तो बेचारे गरीब हैं. उन्होंने सड़क निर्माण के समय सिविल लाइन स्थित अपने निवास का अतिक्रमण खुद हटाने का उदाहरण देते हुए कहा कि, बड़े लोगों को इसके लिए खुद आगे आना चाहिए.
उमा भारती ने ये भी कहा कि, मेरी भाजपा पार्षद और पार्षद दल से ये बात हुई थी कि, पहले लोगों को कोई दूसरी जगह दी जाएगी. पार्षदों ने पहले स्थान चिह्नित करने को कहा था. तीन - चार स्थान बताए भी थे. प्रशासन पहले इन्हें दुकानों लगाने के स्थान दे, बाद में हटाए. पहले बंगले वाले और अन्य पैसे वालों के अतिक्रमण हटेंगे इसके बाद गरीबों को हटाया जाएगा. उमा भारती ने यहां से हटाए गए दुकानदारों से अपील की थी कि, वो वापस आए और यही पर अपनी दुकानें लगाए, मैं उनके साथ हूं. उनके ठेलो को यहां से नहीं हटने दूंगी और इसी वादे पर अमल करते हुए आज वो मौके पर पहुंची और ठेलों को दोबारा लगवाकर अपने हाथ से ग्राहकों को पोहा जलेबी बेचती नजर आंई.
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15 बेरोजगार युवाओं से लाखों की ठगी, CMHO के फर्जी सील-साइन कर थमा दिया ज्वाइनिंग लेटर, वार्ड बॉय निकला मास्टरमाइंड
शहडोल। कहते हैं कि मजबूरी का फायदा उठाना सबसे बड़ा गुनाह है, और जब यह मजबूरी बेरोजगारी हो, तो घाव और गहरा हो जाता है। शहडोल जिले में एक ऐसा ही सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहाँ एक शातिर जालसाज ने स्वास्थ्य विभाग में सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर सुनहरा जाल बुनकर 15 युवाओं के भविष्य और उनके परिवार की जमापूंजी के साथ खिलवाड़ किया। इस पूरे खेल की पटकथा इतनी बारीकी से लिखी गई थी कि किसी को शक तक नहीं हुआ। आरोपी ने खुद को रसूखदार बताते हुए युवाओं को स्वास्थ्य विभाग में वार्ड बॉय की पक्की नौकरी का झांसा दिया, हद तो तब हो गई जब उसने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) के फर्जी हस्ताक्षर और जाली सील का इस्तेमाल कर बाकायदा नियुक्ति पत्र तक थमा दिए। इन कागजों के बदले उसने उन युवाओं से 6 लाख से अधिक रुपये ऐंठ लिए, जिसके खिलाफ कोतवाली पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है।
शहडोल जिला मुख्यालय से लगे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पटासी में आउटसोर्स में वार्ड बॉय के पद में पदस्थ ज्ञानेंद्र सिंह द्वारा शहडोल एवं उमरिया जिले के 15 से अधिक बेरोजगार युवाओं को स्वास्थ्य विभाग में वार्ड बॉय की पक्की नौकरी दिलाने के नाम पर 15 लोगो से लगभग 7 लाख रु ऐठ लिए। इतना ही नहीं शास्त्री तेजी ने स्वास्थ्य विभाग के मुखिया मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) के फर्जी हस्ताक्षर एवं फर्जी शील युक्त ज्वाइनिंग लेटर तक थमा दिया। इस बात का खुलासा तब हुआ जब ज्वानिंग लेटर लेकर बताए गए विभाग में ज्वाइन करने पहचे तब उन्हें पता लगा कि उनके साथ ठगी हुई है , उनके साथ स्कैम हो गया। ठगी का शिकार हुए बेरोजगार युवकों ने इसकी शिकायत शहडोल एसपी की ,जिस पर कोतवाली पुलिस ने स्वास्थ्य विभाग में रोजगार दिलाने के नापर बेरोजगार युवाओं से ठगी करने वाले कथित स्वास्थ्य विभाग का आउटसोर्स कर्मचारी वार्डबॉय के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। लेकिन वह अभी पुलिस की गिरफ्त से कोसों दूर और बेरोजगार युवाओं के साथ ठगी करने का पालन बना रहा है।
पीड़ित युवाओं की शिकायत पर शहडोल एसपी के निर्देशानुसार कोतवाली पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है। डीएसपी मुख्यालय राजेंद्र मोहन दुबे ने पुष्टि की है कि आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। यह घटना न सिर्फ प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि कैसे बेरोजगारी और सिस्टम पर भरोसे का फायदा उठाकर ठग मासूम युवाओं को निशाना बना रहे हैं। अब देखना होगा कि पुलिस इस मामले में कितनी तेजी से कार्रवाई करती है और क्या इन युवाओं को उनका हक और न्याय मिल पाता है या नहीं।
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