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भोपाल के पिपलानी इलाके के एक होटल में युवक-युवती को पुलिसकर्मी बनकर धमकाने और उनसे करीब 70 हजार रुपये ऐंठने के मामले में पुलिस जांच आगे बढ़ने के साथ कई चौंकाने वाली बातें सामने आ रही हैं। पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने अपनी पहचान छिपाने और होटल में कमरा लेने के लिए ChatGPT की मदद से फर्जी ID तैयार की थी।
मामला 3 अगस्त की शाम का है। बरखेड़ी खुर्द निवासी एक युवक अपनी महिला दोस्त के साथ पिपलानी इलाके के एक होटल में रुका था। इसी दौरान सादे कपड़ों में चार लोग उसके कमरे में पहुंचे। उन्होंने खुद को पुलिसकर्मी बताया और युवक को कानूनी कार्रवाई और केस में फंसाने की धमकी दी। आरोपियों ने युवक को इतना डराया कि उसने करीब 60 से 70 हजार रुपये ऑनलाइन ट्रांसफर कर दिए। घटना के करीब 4-5 दिन बाद पीड़ित ने पिपलानी थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई।
मामले की जांच के दौरान पुलिस को आरोपियों की डिजिटल गतिविधियों से जुड़ी अहम जानकारी मिली। आरोप है कि अपनी असली पहचान छिपाने के लिए आरोपियों ने ChatGPT की मदद से फर्जी दस्तावेज तैयार किए थे। इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर होटल में कमरा बुक कराया गया था। अब पुलिस यह पता लगा रही है कि फर्जी ID किस तरह तैयार की गई और होटल में दस्तावेजों का वेरिफिकेशन किस स्तर पर हुआ। होटल संचालक की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
इस मामले में पुलिस अब तक अबूजर, रघुवीर गोयल और करुणा शाही को गिरफ्तार कर चुकी है। वहीं कथित मास्टरमाइंड यावर खान अभी फरार है। पुलिस के अनुसार, अबूजर भी इस पूरी साजिश में शामिल था। करुणा घटना के बाद खाटू श्याम चली गई थी। पुलिस ने उसे भोपाल स्टेशन से गिरफ्तार किया। वहीं रघुवीर गोयल की पत्नी के पुलिस विभाग में हवलदार होने की बात सामने आई है। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि क्या आरोपियों ने पुलिस की कार्यप्रणाली की जानकारी हासिल करने के लिए इस संपर्क का फायदा उठाया।
पुलिस मामले की जांच कई स्तरों पर कर रही है। सबसे पहले युवक के खाते से ट्रांसफर हुए पैसों का ट्रेल खंगाला जा रहा है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि रकम किस खाते में पहुंची और उसके बाद उसे कहां भेजा गया। इसके अलावा होटल के CCTV फुटेज भी खंगाले जा रहे हैं। आरोपियों के होटल पहुंचने से लेकर कमरे में जाने और वहां से निकलने तक की पूरी गतिविधि की जांच की जा रही है। कमरा बुक कराने के समय कौन-कौन लोग मौजूद थे, इसकी भी जानकारी जुटाई जा रही है।
पुलिस उस युवती की भूमिका की भी जांच कर रही है, जो घटना के समय युवक के साथ होटल के कमरे में मौजूद थी। जांच में यह पता लगाया जा रहा है कि क्या उसका आरोपियों से पहले से कोई संपर्क था या वह भी इस पूरी घटना से अनजान थी।
जांच के दौरान नाबालिग से जुड़ा एक अलग पहलू सामने आया है। पुलिस के मुताबिक, इस मामले में युवक फारूक के खिलाफ POCSO एक्ट के तहत भी अलग से कानूनी कार्रवाई की जा रही है। पुलिस इस पहलू से जुड़े तथ्यों और सभी संबंधित लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।
अब पुलिस के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या आरोपियों ने सिर्फ इसी युवक को निशाना बनाया था या फिर इसी तरीके से दूसरे लोगों को भी फंसाने की योजना बनाई थी। फर्जी ID और ChatGPT के कथित इस्तेमाल को जांच का अहम हिस्सा माना जा रहा है। पुलिस आरोपियों के मोबाइल, डिजिटल रिकॉर्ड, बैंक ट्रांजैक्शन और अन्य साक्ष्यों की जांच कर रही है। फरार यावर खान की गिरफ्तारी के बाद इस पूरी साजिश और संभावित नेटवर्क से जुड़े और भी खुलासे होने की उम्मीद है।
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आरजी कर मेडिकल कॉलेज की ट्रेनी डॉक्टर के रेप और मर्डर मामले में पश्चिम बंगाल की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। डॉक्टर के शव का कथित तौर पर जल्दबाजी में अंतिम संस्कार कराने के आरोप में पूर्व TMC विधायक निर्मल घोष को गिरफ्तार किया गया है। शुक्रवार को उन्हें उत्तर 24 परगना के खरदाह थाने से कोर्ट ले जाते समय गुस्साई भीड़ ने घेर लिया और उन पर जूते, चप्पल, अंडे और कीचड़ फेंके।
पुलिस सुरक्षा और RAF के जवानों के घेरे में निर्मल घोष को प्रिजन वैन तक ले जाया जा रहा था। इसी दौरान भीड़ ने उनके साथ धक्का-मुक्की और मारपीट की कोशिश की। सुरक्षा के लिए पुलिस ने उनके सिर पर हेलमेट लगाया था, लेकिन प्रदर्शनकारियों ने उन्हें निशाना बनाना जारी रखा। भीड़ ने उन्हें जूतों की माला भी पहनाई। निर्मल घोष के साथ पानिहाटी के पूर्व पार्षद संजीव मुखर्जी को भी विरोध का सामना करना पड़ा। मुखर्जी को एक दिन पहले गिरफ्तार किया गया था।
जब दोनों आरोपियों को बैरकपुर सब-डिविजनल कोर्ट ले जाया गया, वहां मौजूद लोगों ने भी उनका विरोध किया। कोर्ट परिसर में प्रदर्शनकारियों ने ‘चोर-चोर’ के नारे लगाए। सामने आए वीडियो में दोनों आरोपियों के कपड़ों पर अंडे और कीचड़ के दाग दिखाई दिए। इस मामले में पानिहाटी नगरपालिका के पूर्व अध्यक्ष सोमनाथ दे भी आरोपी हैं, लेकिन वह फिलहाल फरार बताए जा रहे हैं।
पुलिस की यह कार्रवाई मृतका के पिता की नई शिकायत के बाद हुई। शिकायत में आरोप लगाया गया कि निर्मल घोष ने तत्कालीन विधायक के तौर पर अपने प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए परिवार की इच्छा के खिलाफ डॉक्टर के शव का जल्द अंतिम संस्कार करवाया। मुख्यमंत्री द्वारा डॉक्टर की दूसरी बरसी पर जांच के निर्देश दिए जाने के बाद पुलिस ने मामले में कार्रवाई तेज की।
मृतका के परिवार का आरोप है कि शव का जल्द अंतिम संस्कार किए जाने से संभावित सबूतों को नुकसान पहुंचा और दोबारा पोस्टमार्टम की संभावना खत्म हो गई। परिवार लंबे समय से इस मामले में बड़े षड्यंत्र की आशंका जताता रहा है। आरजी कर अस्पताल में 9 अगस्त 2024 को ट्रेनी डॉक्टर के साथ रेप और हत्या हुई थी। मामले में नागरिक स्वयंसेवक संजय रॉय को दोषी ठहराकर उम्रकैद की सजा सुनाई जा चुकी है।
निर्मल घोष की गिरफ्तारी के बाद पश्चिम बंगाल में राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। विपक्ष ने मामले की व्यापक जांच की मांग की है। भाजपा नेता अग्निमित्रा पॉल ने जांच एजेंसियों से तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की भूमिका समेत सभी पहलुओं की जांच करने की मांग की है।
फिलहाल पुलिस गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर यह पता लगाने में जुटी है कि डॉक्टर के अंतिम संस्कार से जुड़े फैसलों में किन लोगों की भूमिका थी और क्या इस दौरान किसी तरह के सबूतों से छेड़छाड़ हुई थी।
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भोपाल। महिलाओं के खिलाफ अपराध को लेकर लगातार चर्चा होती है, लेकिन अब पुरुषों से जुड़ी घरेलू हिंसा और प्रताड़ना के आंकड़े भी चिंता बढ़ा रहे हैं। मध्यप्रदेश में पति की हत्या के मामले तेजी से सामने आने का दावा किया गया है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक 2026 के पहले छह महीनों में प्रदेश में पति की हत्या के 36 मामले सामने आए हैं, जिसके चलते मध्यप्रदेश इस मामले में देश में दूसरे स्थान पर बताया जा रहा है।
आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2026 के पहले छह महीनों में देशभर में पति की हत्या के 322 और आत्महत्या के 232 मामले सामने आए। इनमें मध्यप्रदेश में पति की हत्या के 36 मामले दर्ज हुए हैं। इन मामलों में बड़ी संख्या वैवाहिक विवाद से जुड़ी बताई गई है। कई मामलों में पति-पत्नी के बीच विवाद, विवाहेतर संबंध और घरेलू तनाव जैसे कारण सामने आने की बात कही गई है।
पुरुष अधिकारों से जुड़ी हेल्पलाइन पर भी शिकायतों का आंकड़ा तेजी से बढ़ रहा है। वर्ष 2025 में देशभर से करीब 58,289 कॉल पहुंचीं, जबकि 2026 के शुरुआती छह महीनों में ही यह संख्या बढ़कर 87,969 तक पहुंच गई। मध्यप्रदेश की बात करें तो वर्ष 2025 में हेल्पलाइन पर करीब 8,108 कॉल आई थीं। वहीं 2026 में जून तक ही 12,577 कॉल पहुंच चुकी हैं। यानी पुरुषों से जुड़ी घरेलू समस्याओं को लेकर मदद मांगने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
पुरुष अधिकार संगठनों का कहना है कि बड़ी संख्या में पुरुष वैवाहिक विवाद, पत्नी या ससुराल पक्ष से विवाद और कानूनी कार्रवाई के डर से मानसिक तनाव में रहते हैं। कई मामलों में वे सहायता और कानूनी सलाह के लिए हेल्पलाइन का सहारा लेते हैं। हालांकि हर शिकायत को सच मान लेना भी उचित नहीं होगा। जरूरत इस बात की है कि पति या पत्नी किसी भी पक्ष के खिलाफ हिंसा, प्रताड़ना या झूठी शिकायत के आरोपों की निष्पक्ष जांच हो और पीड़ित को कानून के तहत सहायता मिले।
पति की हत्या के मामले हों या पुरुषों की हेल्पलाइन पर बढ़ती शिकायतें- ये आंकड़े बदलते वैवाहिक रिश्तों की एक गंभीर तस्वीर सामने रखते हैं। सवाल यह है कि आखिर दांपत्य रिश्तों में विवाद किस स्तर तक पहुंच रहे हैं कि बात अलगाव से आगे बढ़कर हिंसा और हत्या तक पहुंच रही है? और क्या ऐसे मामलों को रोकने के लिए परिवार परामर्श, कानूनी सहायता और समय रहते हस्तक्षेप की व्यवस्था पर्याप्त है? मध्यप्रदेश में छह महीने में पति की हत्या के 36 मामले और हेल्पलाइन पर 12,577 कॉल- ये आंकड़े सिर्फ संख्या नहीं, बल्कि बिगड़ते वैवाहिक रिश्तों पर गंभीर मंथन की जरूरत का संकेत हैं।

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‘हर घर तिरंगा’ यात्रा में लापरवाही: भीषण गर्मी और उमस से दर्जनों छात्राओं की बिगड़ी तबीयत, मचा हड़कंप
सिंगरौली चितरंगी। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) द्वारा आयोजित ‘हर घर तिरंगा’ यात्रा के दौरान प्रशासनिक लापरवाही का एक बड़ा मामला सामने आया है। भीषण गर्मी और तेज धूप में निकाली गई इस रैली में शासकीय विद्यालय की कई दर्जन छात्राओं की अचानक तबीयत बिगड़ गई, जिससे कार्यक्रम स्थल पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। इस कार्यक्रम में सूबे की राज्यमंत्री राधा सिंह भी शामिल थीं।
यात्रा के दौरान एक तरफ जहां क्षेत्र के निजी (प्राइवेट) विद्यालयों के एक भी छात्र नजर नहीं आए, वहीं दूसरी तरफ सरकारी स्कूलों के गरीब छात्र-छात्राओं को इस चिलचिलाती धूप में पैदल चलने पर मजबूर होना पड़ा। स्थानीय लोगों और अभिभावकों ने सवाल उठाया है कि आखिर हर बार इस तरह के आयोजनों में केवल सरकारी स्कूल के गरीब बच्चों को ही क्यों झोंका जाता है और उनके स्वास्थ्य के साथ ऐसा अन्याय क्यों किया जाता है?
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, दोपहर के समय जब यह यात्रा निकाली गई तब तापमान बेहद अधिक था। इतनी भीषण गर्मी के बावजूद पूरे रैली मार्ग में बच्चों के लिए पीने के पानी की कोई व्यवस्था नहीं की गई थी। हद तो तब हो गई जब इतनी बड़ी छात्र संख्या वाली रैली में स्वास्थ्य विभाग (एम्बुलेंस या मेडिकल टीम) का कोई भी जिम्मेदार अधिकारी या कर्मचारी दूर-दूर तक नजर नहीं आया।
हैरानी की बात यह है कि इस पूरी यात्रा में राज्यमंत्री राधा सिंह खुद मौजूद थीं। उनके सामने ही कुप्रबंधन के चलते दर्जनों छात्राओं की हालत खराब होने लगी, जिससे रैली में भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। आनन-फानन में स्थानीय लोगों और शिक्षकों की मदद से अस्वस्थ बच्चों को संभाला गया।इस घटना के बाद से स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं कि बिना पुख्ता इंतजामों और सुरक्षा उपायों के स्कूली बच्चों को इस भीषण गर्मी में रैली में क्यों शामिल होने दिया गया।
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कीचड़ से सनी सड़क पर लाचार हुआ सिस्टम, बेबस परिजनों ने खटोले से बचाई जच्चा-बच्चा की जान
सीधी। मध्य प्रदेश के सीधी जिले से विकास के बड़े-बड़े दावों की खोखली सच्चाई उजागर हुई है। सिहावल जनपद के कुसेड़ा गांव में कीचड़ से सने रास्ते ने एक गर्भवती महिला को अस्पताल पहुंचाने वाली एंबुलेंस को उसके घर पहुंचने से रोक दिया। मजबूर परिजनों को रात के अंधेरे में चारपाई का खटोला बनाकर करीब दो किलोमीटर पैदल सफर करना पड़ा। सोशल मीडिया पर वायरल हुए इस वीडियो न सिर्फ व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रही हैं, बल्कि जनप्रतिनिधियों के विकास के दावों और वादों की हकीकत भी बयां कर रही हैं।
सीधी जिला कहने को सीधा है लेकिन यहां सब उल्टा है। सरकार सड़क, बिजली पानी, स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाओं को लेकर लगातार बड़े-बड़े दावे कर रही है लेकिन कुसेंडा गांव की इस घटना ने योजनाओं पर पलीता लगा दिया है। दरअसल, यहां एक गर्भवती की प्रसव की सूचना मिलते ही एंबुलेंस समय पर गांव पहुंच गई थी, लेकिन बदहाल और कीचड़ से भरे रास्ते के कारण गर्भवती महिला के घर तक नहीं पहुंच सकी। आखिरकार घर की महिलाओं ने ही उसका प्रसव कराया। इसके बाद परिजन चारपाई को खटोला बनाकर जच्चा-बच्चा को करीब दो किलोमीटर दूर खड़ी एंबुलेंस तक लेकर पहुंचे।
दोनों को बहरी स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया, जहां उनकी हालत स्वस्थ बताई गई है। वहीं दूसरी ओर बारिश में गांव की सड़क में घुटने तक पानी होने से बच्चों का स्कूल और आंगनबाड़ी जाना चुनौती से कम नहीं है। ऐसे में सवाल यह है कि विकास के दावों के बीच ग्रामीणों को आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए क्यों जूझना पड़ रहा है। ADM व्ही पी पांडेय ने इस मामले पर कहा कि पूरे प्रकरण की जांच कराई जाएगी। उसके आधार पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

नरसिंहपुर। नरसिंहपुर में पुलिस ने एक कथित फर्जी IAS अधिकारी को गिरफ्तार कर बड़ा खुलासा किया है। आरोपी पर खुद को कभी डॉक्टर तो कभी UPSC पास कर SDM होने का दावा कर लोगों को झांसे में लेने और पैसे ऐंठने का आरोप है।
नरसिंहपुर एसपी ऋषिकेश मीना ने मामले की जानकारी देते हुए बताया कि आरोपी की पहचान उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के बभनौती गांव निवासी संजय कुमार के रूप में हुई है। पुलिस के मुताबिक, आरोपी लोगों के सामने अपनी पहचान बदल-बदलकर पेश करता था और खुद को अधिकारी बताकर उन्हें प्रभावित करता था।
आरोप है कि संजय कुमार ने नरसिंहपुर की एक महिला डॉक्टर को भी अपने झांसे में लिया। आरोपी ने खुद को मध्य प्रदेश के धार जिले में SDM के पद पर पदस्थ बताया और इसी पहचान के जरिए महिला डॉक्टर से करीब 3 लाख रुपये ले लिए। मामले का खुलासा तब हुआ जब पीड़ित महिला डॉक्टर ने पुलिस से शिकायत की। शिकायत के आधार पर नरसिंहपुर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस अब आरोपी से पूछताछ कर रही है। जांच का मुख्य फोकस इस बात पर है कि आरोपी ने फर्जी अधिकारी बनकर और कितने लोगों को अपना शिकार बनाया और उससे कितनी रकम की ठगी की। पुलिस आरोपी के दावों और उसकी गतिविधियों से जुड़े दस्तावेजों की भी जांच कर रही है। मामले की जांच आगे बढ़ने के साथ फर्जी अधिकारी के नेटवर्क और ठगी के अन्य मामलों का खुलासा होने की संभावना है।
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मदरसा सील: कागजों में 445 बच्चे, हकीकत में सिर्फ 35; बाल आयोग के औचक निरीक्षण में खुली पोल
ग्वालियर। एमपी के मुरैना में बाल अधिकार संरक्षण आयोग के औचक निरीक्षण में शिक्षा और बच्चों से जुड़ी व्यवस्थाओं की गंभीर तस्वीर सामने आई है। खड़ियाहार गांव में महज दो कमरों में संचालित मदरसा के रिकॉर्ड में 445 बच्चों का दाखिला दर्ज मिला, लेकिन मौके पर सिर्फ 35 बच्चे पढ़ते हुए मिले। रिकॉर्ड में दर्ज अधिकांश बच्चों के नियमित रूप से मदरसे नहीं आने की बात भी सामने आई है। निरीक्षण के बाद आयोग अध्यक्ष ने मदरसे को सील करा दिया और शिक्षा विभाग को मान्यता निरस्त करने की कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। वहीं ज्ञानोदय आवासीय छात्रावास के निरीक्षण में भी सफाई, भोजन, सुरक्षा और व्यवस्थाओं से जुड़ी कई कमियां मिलीं।
मुरैना जिले के खड़ियाहार गांव में संचालित मदरसा आयसा इस्लामिया में बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ निवेदिता शर्मा ने अचानक पहुंचकर निरीक्षण किया। उनके साथ शिक्षा विभाग और बाल कल्याण समिति के अधिकारी भी मौजूद रहे। निरीक्षण के दौरान मदरसा महज दो कमरों और छोटे से आंगन में संचालित मिला। दोनों कमरों में उस वक्त सिर्फ 35 बच्चे पढ़ते हुए मिले, जब मदरसे का दाखिला रिकॉर्ड खंगाला गया तो अधिकारियों के सामने चौंकाने वाली स्थिति आई। रिकॉर्ड में कुल 445 बच्चों के नाम दर्ज थे। अधिकारियों के मुताबिक, रिकॉर्ड में दर्ज अधिकांश बच्चे हिंदू बताए गए, लेकिन ये बच्चे नियमित रूप से मदरसे में पढ़ने नहीं आते थे। दो कमरों की क्षमता और रिकॉर्ड में दर्ज बच्चों की संख्या के बीच बड़ा अंतर मिलने पर मदरसे की व्यवस्थाओं और रिकॉर्ड पर सवाल खड़े हुए।
आयोग अध्यक्ष ने मदरसा प्रबंधन से बच्चों के दाखिले और संचालन से जुड़े जरूरी रिकॉर्ड मांगे, लेकिन कई रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराए जा सके। निरीक्षण में सामने आई इन कमियों को गंभीरता से लेते हुए आयोग अध्यक्ष ने मदरसे को तत्काल सील कराने के निर्देश दिए। साथ ही शिक्षा विभाग की सहायक संचालिका को मदरसे की मान्यता निरस्त करने की कार्रवाई शुरू करने को कहा गया। हालांकि आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि कार्रवाई के बीच बच्चों की पढ़ाई प्रभावित नहीं होनी चाहिए। रिकॉर्ड में दर्ज बच्चों की शैक्षणिक व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए उन्हें नजदीकी प्राथमिक स्कूलों में प्रवेश दिलाने के निर्देश दिए गए हैं। अब संबंधित विभाग मदरसे के रिकॉर्ड और संचालन से जुड़े पूरे मामले की आगे जांच करेगा।
मदरसे के बाद आयोग अध्यक्ष ने ज्ञानोदय आवासीय छात्रावास का भी निरीक्षण किया। यहां सफाई व्यवस्था संतोषजनक नहीं मिली। बच्चों को दिए जाने वाले भोजन की गुणवत्ता पर भी सवाल सामने आए और अधिकारियों के मुताबिक, मीनू के अनुसार भोजन नहीं दिया जा रहा था। छात्रावास में बच्चों के लिए बनाए गए खेल ऑडिटोरियम पर ताला लगा मिला। यानी सुविधा मौजूद होने के बावजूद बच्चे उसका इस्तेमाल नहीं कर पा रहे थे। इस पर आयोग अध्यक्ष ने नाराजगी जताई। निरीक्षण के दौरान अधीक्षिका रामबेटी से निरीक्षण पंजी मांगी गई, लेकिन बार-बार कहने के बावजूद पंजी उपलब्ध नहीं कराई गई। छात्रावास भवन की कई खिड़कियां भी टूटी मिलीं। बालिकाओं की सुरक्षा से जुड़े इस मामले पर आयोग अध्यक्ष ने नाराजगी जताते हुए खिड़कियों को तत्काल दुरुस्त कराने के निर्देश दिए। इसके साथ ही छात्रावास में मिली दूसरी कमियों को भी दूर करने के लिए अधिकारियों को निर्देशित किया गया।
बहरहाल मुरैना में एक ही निरीक्षण के दौरान दो अलग-अलग संस्थानों में बच्चों से जुड़ी व्यवस्थाओं की तस्वीर सामने आई है। एक ओर मदरसे के रिकॉर्ड में 445 बच्चों का दाखिला और मौके पर सिर्फ 35 बच्चे मिले, तो दूसरी ओर आवासीय छात्रावास में भोजन, सफाई, सुरक्षा और सुविधाओं को लेकर कमियां सामने आईं। अब मदरसे के रिकॉर्ड और मान्यता की कार्रवाई के साथ-साथ छात्रावास की व्यवस्थाओं में सुधार को लेकर प्रशासन क्या कदम उठाता है, इस पर नजर रहेगी।
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हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: जेल में बंद कैदियों के बैंक खाते होंगे चालू, कैदियों की KYC कराने के निर्देश
जबलपुर। मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने प्रदेश की जेलों में बंद कैदियों के हित में एक बेहद महत्वपूर्ण और बड़ा फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने राज्य प्रशासन और जेल अधिकारियों को निर्देश दिया है कि जेलों में बंद विचाराधीन और सजायाफ्ता कैदियों के बायोमेट्रिक और अन्य दस्तावेज़ों का केवाईसी (KYC) कराने के लिए विशेष कैंप लगाए जाएं।
मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट के संज्ञान में आया कि जेलों में बंद कैदियों के बायोमैट्रिक विवरण अपडेट न होने के कारण उनके बैंक अकाउंट संचालित नहीं हो पा रहे थे। इसके चलते उन्हें और उनके परिवारों को आर्थिक लेन-देन में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था। हाईकोर्ट ने निर्देश दिया है कि जेलों में शिविर लगाकर कैदियों के- आधार कार्ड, पैन कार्ड, राशन कार्ड तथा अन्य आवश्यक सरकारी दस्तावेजों को अपडेट कराया जाए, ताकि उनके बैंक खाते सुचारू रूप से शुरू हो सकें।
यह अहम फैसला सिंगरौली निवासी कैदी प्रहलाद विश्वकर्मा की याचिका पर सुनवाई करते हुए आया है। याचिकाकर्ता प्रहलाद विश्वकर्मा ने कोर्ट को बताया था कि केवाईसी (KYC) और बायोमेट्रिक विवरण न होने के कारण उसका बैंक खाता बंद पड़ा है और वह संचालित नहीं हो पा रहा है।
जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस अवनींद्र कुमार सिंह की युगलपीठ (Double Bench) ने इस याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को 15 दिनों के भीतर इस पूरी प्रक्रिया को शुरू करने के कड़े निर्देश दिए हैं। कोर्ट के इस आदेश के बाद अब मध्य प्रदेश की सभी जेलों में कैदियों के आवश्यक दस्तावेजों को अपडेट करने और बैंक खातों को सक्रिय करने के लिए जल्द ही विशेष अभियान चलाया जाएगा।

बेंगलुरु। रेप केस में बेंगलुरु की सेंट्रल जेल में बंद पूर्व सांसद प्रज्वल रेवन्ना के मोबाइल में 90 पोर्न वीडियो मिले हैं। फोन की फोरेंसिक जांच जारी है। सेंट्रल क्राइम ब्रांच ने मंगलवार को प्रज्वल रेवन्ना के बैरक में छापेमारी की थी। रेवन्ना के पास फोन मिल थे। पुलिस मोबाइल को जब्त कर जांच की तो उसके मोबाइल में 90 पोर्न-वीडियो मिले।
जांचकर्ता फोन में मौजूद वीडियो, तस्वीरों और अन्य डिजिटल डेटा की जांच कर रहे हैं। यह भी पता लगाया जा रहा है कि सामग्री कहां से आई और इसका आपराधिक मामले से कोई संबंध है या नहीं।
बता दें कि सेंट्रल क्राइम ब्रांच ने मंगलवार को जेल में छापेमारी की थी। रेवन्ना के पास से मोबाइल मिला था। रेवन्ना के पास फोन मिलने के बाद नई FIR दर्ज की गई है। जेल में बंद अंडरट्रायल कैदी प्रताप राय को भी मामले में आरोपी बनाया गया है। प्रज्वल रेवन्ना के मोबाइल की जांच की गई तो उसमें 90 पोर्न-वीडियो मिले। मोबाइल में अश्लील वीडियो मिलने के बाद जेल प्रशासन के कान खड़े हो गए। फोरेंसिक टीम मोबाइल में मिले पोर्न-वीडियो की जांच कर रही है।
इस मामले में जेल के असिस्टेंट सुपरिटेंडेंट को निलंबित कर दिया गया है, जबकि जेल सुपरिटेंडेंट को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। मोबाइल फोन मिलने के बाद नई एफआईआर भी दर्ज की गई है। इसमें एक विचाराधीन कैदी का नाम शामिल है। कैदी का नाम प्रताप राय बताया जा रहा है जिसे इस मामले में शामिल किया गया है। यह घटनाक्रम कर्नाटक हाई कोर्ट द्वारा रेवन्ना की सजा पर रोक और अंतरिम जमानत की मांग वाली याचिका खारिज किए जाने के कुछ दिनों बाद सामने आया है।
बता दें कि पूर्व सांसद प्रज्वल रेवन्ना जनता दल (सेक्युलर) के विधायक एचडी रेवन्ना का बेटा और पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा का पोता है। वह महिलाओं से रेप केस में अगस्त 2025 से उम्रकैद की सजा काट रहा है। फिलहाल बेंगलुरु की सेंट्रल जेल में बंद है। प्रज्वल के परिवार के फार्महाउस में काम करने वाली 47 साल की महिला ने अप्रैल 2024 में उसके ​​​​खिलाफ FIR दर्ज कराई थी। उसने प्रज्वल पर 2021 से कई बार रेप करने और किसी को भी घटना के बारे में बताने पर वीडियो लीक करने की धमकी देने के आरोप लगाए थे। कोर्ट ने 18 जुलाई 2025 को इस मामले की सुनवाई पूरी की थी। प्रज्वल के खिलाफ रेप, ताक-झांक, आपराधिक धमकी और अश्लील तस्वीरें लीक करने सहित कई धाराओं के तहत आरोप तय किए थे। खगोलशास्त्र
प्रज्वल को एक अगस्त 2025 को पीपुल्स रिप्रेजेंटेटिव्स की स्पेशल कोर्ट ने दोषी ठहराया था। उसे अगले दिन 2 अगस्त को उम्रकैद की सजा सुनाई गई और 11.50 लाख रुपए का जुर्माना लगाया गया।इसमें से 11.25 लाख रुपए पीड़ित को देने का निर्देश दिया गया था। प्रज्वल के खिलाफ रेप के तीन और मामले चल रहे हैं। इन मामलों की सुनवाई अभी बाकी है। खगोलशास्त्र
वहीं प्रज्वल के सोशल मीडिया पर 2,000 से ज्यादा अश्लील वीडियो क्लिप सामने आए थे। उसके खिलाफ दर्ज मामलों के बाद JDS ने उसे पार्टी से निलंबित भी कर दिया था।
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बंगाल में मस्जिदों से हट गए 4000 लाउडस्पीकर! कलकत्ता हाईकोर्ट पहुंचा मामला, शुभेंदु सरकार से जवाब मांगा
बंगाल में मस्जिदों और धार्मिक स्थलों से लाउडस्पीकर हटाए जाने के खिलाफ कलकत्ता हाई कोर्ट एक जनहित याचिका दायर की गई है, जिसे हाई कोर्ट ने उस जनहित याचिका को स्वीकार करते हुए सुनवाई की अनुमति दे दी है. याचिका हाई कोर्ट के अधिवक्ता दानिश फारूकी द्वारा दायर की गई है, जिसमें राज्यभर की करीब 4,000 मस्जिदों से लाउडस्पीकर हटा दिए गए हैं. लाउडस्पीकर हटाने के आरोपों पर कलकत्ता हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब मांगा है.
यह मामला एक जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान सामने आया. जिसमें राज्य सरकार के लाउडस्पीकर हटाने के उस कथित मौखिक निर्देश को चुनौती दी गई है.
पश्चिम बंगाल में मस्जिदों से लाउडस्पीकर हटाए जाने के मुद्दे पर विवाद बढ़ गया है. कलकत्ता हाईकोर्ट ने गुरुवार को CM शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली राज्य सरकार से साफ-साफ पूछा कि क्या पुलिस ने वाकई मस्जिदों से लाउडस्पीकर हटाने की कोई कार्रवाई की है या नहीं.
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश तापोब्रत चक्रवर्ती और न्यायमूर्ति अतारूप बनर्जी की बेंच ने राज्य को निर्देश दिया कि वह अगले मंगलवार तक जवाब दाखिल करे.
याचिका में आरोप लगाया गया है कि पुलिस मस्जिदों से जबरन लाउडस्पीकर हटा रही है. याचिका में तृणमूल सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता कल्याण बनर्जी ने अदालत को बताया कि मौखिक आदेशों के जरिए सभी मस्जिदों से लाउडस्पीकर उतरवा दिए गए हैं
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता दानिश फारूकी की तरफ से पेश कल्याण बनर्जी ने कहा कि राज्य में एक नया चलन शुरू हो गया है, जिसमें बिना किसी लिखित अधिसूचना के मौखिक आदेश दिए जाते हैं. हास्यास्पद तो तब है कि पुलिस भी बिना किसी लिखित आदेश के मौखिक आदेश दिए जाने पर लागू करने लगती है.
राज्य सरकार के एडवोकेट जनरल सुरजीत नाथ मित्रा ने कहा कि सरकार को अपना पक्ष रखने के लिए समय दिया जाना चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि इस याचिका को जुर्माने के साथ खारिज कर दिया जाना चाहिए.
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एयर इंडिया का बड़ा फैसला: अब सभी पायलटों का होगा प्री-फ्लाइट ड्रग टेस्ट
एयर इंडिया ने विमान सुरक्षा को लेकर बड़ा कदम उठाते हुए अपने समूह के सभी पायलटों की मादक पदार्थों और प्रतिबंधित दवाओं की जांच अनिवार्य कर दी है। एयरलाइन का यह फैसला 13 अगस्त 2026 से लागू हो गया है। यह कदम हाल ही में फुकेत से दिल्ली आ रही एयर इंडिया की उड़ान में सामने आए गंभीर मामले के बाद उठाया गया है।
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, टाटा समूह के स्वामित्व वाली एयर इंडिया ने इस संबंध में अपने कर्मचारियों को ईमेल भेजकर नई व्यवस्था की जानकारी दी है। एयरलाइन ने कहा कि समूह के सभी पायलटों की उन पदार्थों और दवाओं के लिए जांच की जाएगी, जो मौजूदा विमानन नियमों के तहत प्रतिबंधित हैं।
यह जांच अनिवार्य होगी और पायलटों की ट्रेनिंग के दौरान गुरुग्राम स्थित अकादमी के अलावा फ्लाइट ब्रीफिंग सेंटर, एयर इंडिया के कार्यालयों और अन्य निर्धारित स्थानों पर भी की जा सकती है।
वर्तमान नियमों के तहत एयरलाइंस पायलटों का हर दिन उड़ान से पहले ब्रेथ एनालाइजर टेस्ट करती हैं, ताकि शराब के सेवन का पता लगाया जा सके। वहीं, ड्रग्स की जांच अभी मुख्य रूप से औचक तरीके से की जाती है। एयर इंडिया ने अब इस व्यवस्था से आगे बढ़ते हुए सभी पायलटों की प्रतिबंधित पदार्थों के लिए व्यापक जांच शुरू करने का फैसला किया है।
4 अगस्त को फुकेत से दिल्ली आ रही एयर इंडिया की उड़ान AI-2379 को गंभीर टर्बुलेंस का सामना करना पड़ा। रिपोर्ट के अनुसार, विमान अचानक करीब 300 फीट नीचे चला गया और यात्रियों को जोरदार झटके लगे। घटना में 17 यात्री घायल हुए।
जांच के दौरान विमान में हाइड्रोलिक सिस्टम से जुड़ी समस्या और पायलट-इन-कमांड के कथित तौर पर गांजा सेवन के मामले की भी जानकारी सामने आई। इस घटना के बाद विमान संचालन में पायलटों की फिटनेस और नशीले पदार्थों के सेवन की जांच को लेकर सुरक्षा चिंताएं बढ़ गई हैं।
एयर इंडिया का नया फैसला पायलटों के बीच प्रतिबंधित पदार्थों के इस्तेमाल पर जीरो-टॉलरेंस नीति को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। इसका उद्देश्य उड़ान संचालन के दौरान पायलटों की सतर्कता, फिटनेस और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

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