


खंडवा। वन मंडल के गुड़ी वन परिक्षेत्र में रविवार सुबह वन विभाग की विशेष गश्ती टीम पर कथित वन अतिक्रमणकारियों ने जानलेवा हमला कर दिया। आमाखुजरी बीट के कक्ष क्रमांक 748 एवं 749 में नियमित गश्त के दौरान हुए इस हमले में आठ से अधिक वनरक्षक घायल हो गए, जिनमें कुछ को गंभीर चोटें आई हैं। घटना के बाद घायल कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि सूचना देने के बावजूद उन्हें करीब दो घंटे तक समय पर सहायता और चिकित्सकीय सुविधा नहीं मिल सकी।
जानकारी के अनुसार, वर्ष 2025 में भर्ती हुए 45 नवपदस्थ वनरक्षकों को प्रशिक्षण के बाद गुड़ी रेंज में विशेष फ्लाइंग स्क्वाड के रूप में तैनात किया गया है। यह दल वन भूमि पर अवैध अतिक्रमण रोकने और जंगलों की सुरक्षा के लिए नियमित गश्त करता है। रविवार सुबह टीम आमाखुजरी क्षेत्र में निगरानी के लिए पहुंची थी। इसी दौरान पहले से घात लगाए बैठे कथित अतिक्रमणकारियों ने अचानक गोफन से पत्थरों की बौछार शुरू कर दी। इसके बाद लाठियों से भी हमला किया गया, जिससे मौके पर अफरा-तफरी मच गई।
हमले में वनरक्षक ज्वाला सिंह, रोमांक नायक, शैलेंद्र यादव, राजेंद्र सिंह सक्तावत, राजेंद्र बागड़ी, प्रदीप बघेल, चंद्रपाल तोमर और राहुल लोधी सहित अन्य कर्मचारी घायल हुए हैं। सभी घायलों का उपचार कराया जा रहा है। बताया जा रहा है कि गुड़ी रेंज में लंबे समय से वन भूमि पर अतिक्रमण की शिकायतें हैं। हाल ही में वन विभाग और जिला प्रशासन ने संयुक्त अभियान चलाकर कई स्थानों से अतिक्रमण हटाया था। इसके बाद से क्षेत्र में तनाव की स्थिति बनी हुई थी। वन कर्मचारियों का कहना है कि पूर्व में भी अमले पर हमले हो चुके हैं, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था पर्याप्त नहीं बढ़ाई गई।
घायल कर्मचारियों ने घटना के बाद गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि घटना की सूचना मिलने के बावजूद संबंधित अधिकारियों की ओर से तत्काल राहत नहीं पहुंची। कर्मचारियों के अनुसार, वे करीब दो घंटे तक जंगल में घायल अवस्था में पड़े रहे। उनका यह भी आरोप है कि पास के क्षेत्र से एक अन्य वन टीम मौके की ओर आई, लेकिन जंगल के भीतर प्रवेश किए बिना लौट गई।
वन कर्मचारियों ने डायल-112 की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि पुलिस वाहन घटनास्थल तक पहुंचा, लेकिन घायल वन कर्मचारियों को अस्पताल पहुंचाने के बजाय कथित रूप से दूसरी ओर के घायलों को लेकर चला गया, जिससे उन्हें समय पर उपचार नहीं मिल सका।
घटना के बाद वन विभाग के कर्मचारियों में आक्रोश है। उनका कहना है कि जंगल में अभियान चलाने वाले कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त पुलिस बल, सुरक्षा उपकरण और त्वरित सहायता व्यवस्था उपलब्ध कराई जानी चाहिए। कर्मचारियों ने हमलावरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई तथा पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
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घर के अंदर बन रही थी नामचीन कंपनी की ‘नकली DAP खाद’, कृषि विभाग ने किया भंडाफोड़
इंदर कुमार, जबलपुर। मानसून आने वाला है और इसके साथ ही प्रदेश भर के किसान खरीफ फसलों की बुवाई की तैयारियों में जुट गए हैं। बुवाई के इस पीक सीजन में खेतों के लिए डीएपी खाद क मांग सबसे ज्यादा होती है लेकिन दुखद बात यह है कि अन्नदाताओं की इसी जरूरत और मजबूरी का फायदा उठाने के लिए मिलावटखोर और जालसाज भी सक्रिया हो गए हैं।
कृषि विभाग की टीम ने एक आकस्मिक जांच अभियान के तहत पाटन क्षेत्र में दबिश देकर नकली डीएपी (DAP) खाद बनाने वाली एक अवैध फैक्ट्री को पकड़ा है। यह पूरा काला कारोबार एक घर के भीतर गुपचुप तरीके से संचालित किया जा रहा था। विभाग की इस मुस्तैदी से किसानों को नकली खाद की सप्लाई होने से पहले ही रोक दिया गया है।
कृषि विभाग को सूचना मिली थी कि पाटन के ग्राम करौंदी में बड़े पैमाने पर नकली खाद तैयार की जा रही है। इस इनपुट के आधार पर जब टीम ने अचानक छापा मारा तो अधिकारी भी दंग रह गए। वहां आरोपी बहादुर सिंह राजपूत ने अपने घर के भीतर ही नकली डीएपी खाद का भारी स्टॉक जमा कर रखा था। मौके से नकली डीएपी खाद बनाने में इस्तेमाल होने वाली कच्ची सामग्री, रसायन और अन्य उपकरण भी जब्त किया गया है।
आशंका जताई जा रही है कि आरोपी लोकल स्तर पर ही नामचीन और ब्रांडेड कंपनियों के हुबहू दिखने वाले खाली बैग छपवाता था। इसके बाद घर में तैयार की गई घटिया और नकली डीएपी खाद को इन ब्रांडेड बोरियों में तौलकर पैक किया जाता था, ताकि बाजार में इसे असली बताकर ऊंचे दामों पर किसानों को बेचा जा सके।
कृषि विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इस पूरे मामले में उर्वरक नियंत्रण आदेश (Fertilizer Control Order) एवं अन्य प्रासंगिक कानूनी प्रावधानों के तहत कड़ी वैधानिक कार्रवाई की जा रही है। जब्त की गई खाद के सैंपल को लैब टेस्ट के लिए भेजा जा रहा है। पुलिस अब इस बात की भी जांच कर रही है कि इस रैकेट में आरोपी बहादुर सिंह राजपूत के साथ और कौन-कौन से डीलर या लोकल छपाई करने वाले लोग शामिल हैं।
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सिद्धेश्वर नाथ मंदिर में बड़ी चोरी, दो ऐतिहासिक घंटे गायब, ग्रामीणों ने दी चक्का जाम की चेतावनी
सतना। जिला के नागौद विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत ग्राम गोबरांव कला स्थित अति प्राचीन एवं आस्था के केंद्र सिद्धेश्वर नाथ मंदिर में चोरी की बड़ी वारदात सामने आने से क्षेत्र में भारी आक्रोश व्याप्त हो गया है। अज्ञात चोर मंदिर परिसर से लगभग 11-11 किलोग्राम वजनी दो ऐतिहासिक पीतल के घंटे चोरी कर ले गए। घटना की जानकारी मिलते ही ग्रामीणों एवं श्रद्धालुओं में रोष फैल गया है और समय पर कार्रवाई नहीं होने पर विरोध स्वरूप चक्का जाम की तैयारी की चर्चा भी शुरू हो गई है।
जानकारी के अनुसार, ग्राम गोबरांव कला स्थित सिद्धेश्वर नाथ मंदिर क्षेत्र के सबसे प्राचीन धार्मिक स्थलों में से एक माना जाता है। मंदिर में वर्षों से स्थापित दोनों पीतल के घंटे धार्मिक एवं ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बताए जाते हैं। शुक्रवार शाम जब मुख्य पुजारी एवं ग्रामीण नियमित पूजा-अर्चना के लिए मंदिर पहुंचे, तब दोनों घंटे अपने स्थान से गायब मिले।
ग्रामीणों का आरोप है कि चोरों ने मंदिर की पवित्रता को भी ठेस पहुंचाई है। स्थानीय लोगों ने दावा किया है कि शिवलिंग के साथ भी आपत्तिजनक कृत्य किया गया, जिससे श्रद्धालुओं की भावनाएं गहराई से आहत हुई हैं। हालांकि इस संबंध में पुलिस की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हो सकी है।
घटनाक्रम सामने आने के बाद मामले की सूचना ग्राम पंचायत गोबरांव कला की सरपंच गुड़िया कोल द्वारा पुलिस को दी गई है। शिकायत में मंदिर से दोनों घंटों की चोरी का उल्लेख करते हुए अज्ञात चोरों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की गई है।
घटना के बाद बड़ी संख्या में ग्रामीण मंदिर परिसर में एकत्रित हो गए। लोगों ने आरोपितों की शीघ्र गिरफ्तारी, चोरी गए घंटों की बरामदगी तथा मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग की है। क्षेत्र में तनाव की स्थिति को देखते हुए पुलिस प्रशासन से त्वरित कार्रवाई की अपेक्षा की जा रही है।
इंदौर। शहर में बिना अनुमति आयोजित होने वाली हाई-प्रोफाइल हाउस पार्टियों पर पुलिस लगातार सख्ती बरत रही है। इसी कड़ी में लसूड़िया थाना पुलिस ने महालक्ष्मी नगर स्थित एक एयरबीएनबी फ्लैट पर छापामार कार्रवाई करते हुए डीजे और शराब पार्टी को शुरू होने से पहले ही बंद करा दिया। कार्रवाई के दौरान फ्लैट में 20 से 25 युवक-युवतियां मौजूद मिले। पुलिस ने पुलिस कमिश्नर के प्रतिबंधात्मक आदेशों का उल्लंघन करने पर छह आयोजकों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया है। वहीं फ्लैट मालिक के खिलाफ भी किरायेदारों की जानकारी पुलिस को उपलब्ध नहीं कराने के मामले में कार्रवाई की जा रही है।
पुलिस के अनुसार सोशल मीडिया मॉनिटरिंग के दौरान सूचना मिली थी कि महालक्ष्मी नगर स्थित एक एयरबीएनबी फ्लैट में हाई-प्रोफाइल हाउस पार्टी आयोजित की जा रही है। सूचना मिलते ही लसूड़िया थाना पुलिस मौके पर पहुंची और फ्लैट की जांच की।
जांच के दौरान पुलिस ने पाया कि फ्लैट में डीजे सिस्टम लगाया जा चुका था और शराब पार्टी की पूरी तैयारी कर ली गई थी। हालांकि समय रहते पुलिस पहुंच गई, जिससे पार्टी शुरू होने से पहले ही कार्रवाई कर उसे रुकवा दिया गया। छापेमारी के दौरान फ्लैट में करीब 20 से 25 युवक-युवतियां मौजूद मिले। पूछताछ में सामने आया कि आयोजन के लिए प्रशासन या पुलिस से किसी भी प्रकार की अनुमति नहीं ली गई थी।
एसीपी पराग सैनी ने बताया कि बिना अनुमति आयोजन करना पुलिस कमिश्नर के आदेशों का उल्लंघन है। इस मामले में छह आयोजकों के खिलाफ नामजद प्रकरण दर्ज किया गया है। इसके अलावा फ्लैट मालिक के खिलाफ भी कार्रवाई की जा रही है, क्योंकि उसने किरायेदारों की जानकारी स्थानीय पुलिस को उपलब्ध नहीं कराई थी। पुलिस इस पहलू की भी जांच कर रही है।
पुलिस का कहना है कि शहर में बिना अनुमति आयोजित होने वाले इवेंट, फार्म हाउस पार्टियों और हाउस पार्टियों पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से भी ऐसी गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ आगे भी इसी तरह सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
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सिस्टम शर्मसार: प्रसव पीड़ा से कराहती रही गर्भवती, रात होने का बहाना बना स्टाफ ने नहीं खोला गेट, 15 KM दूर जाकर हुआ प्रसव
श्योपुर। मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले से सरकारी स्वास्थ्य सिस्टम की एक बेहद शर्मनाक और संवेदनहीन तस्वीर सामने आई है। यहां स्वास्थ्य विभाग और सरकार के सुरक्षित प्रसव के तमाम बड़े दावों की पोल खुल गई है। जिले के एक उप स्वास्थ्य केंद्र पर तैनात स्टाफ की लापरवाही और मनमानी के कारण प्रसव पीड़ा से तड़प रही एक महिला को समय पर इलाज नहीं मिल सका। रात होने का बहाना बनाकर कर्मचारियों ने अस्पताल का गेट तक नहीं खोला, जिससे महिला करीब आधे घंटे तक परिसर के बाहर ही दर्द से चीखती रही।
यह पूरी घटना श्योपुर जिले के देहात थाना इलाके के अंतर्गत आने वाले प्रेमसर गांधीनगर उप स्वास्थ्य केंद्र की है। देहात थाना क्षेत्र के गुड्डा गांव की रहने वाली एक गर्भवती महिला को अचानक तेज प्रसव पीड़ा शुरू हुई थी। परिजन आनन-फानन में महिला को लेकर रात के समय नजदीकी उप स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे।
अस्पताल में स्टाफ मौजूद था लेकिन रात का समय होने के कारण उन्होंने मुख्य गेट खोलने से इनकार कर दिया। महिला करीब 30 मिनट तक अस्पताल के बाहर ही दर्द से बेहाल रही। जब डॉक्टरों और स्टाफ की इस तानाशाही और मनमानी को देखकर महिला के परिजनों ने अपने मोबाइल से वीडियो बनाना शुरू किया तो शर्मिंदा होने और मदद के लिए आगे आने के बजाय अस्पताल का स्टाफ परिजनों पर भड़क गया और विवाद करने लगा।
अस्पताल स्टाफ के अड़ियल और संवेदनहीन रवैये को देखने के बाद परिजनों को समझ आ गया कि यहां इलाज मिलना मुमकिन नहीं है। वे बिना प्रसव कराए ही प्रसूता को लेकर वहां से लौट आए। इसके बाद बेहद जोखिम भरे हालातों में परिजन महिला को करीब 15 किलोमीटर दूर स्थित जिला अस्पताल लेकर पहुंचे। गनीमत रही कि जिला अस्पताल में डॉक्टरों ने तत्परता दिखाई और महिला का सुरक्षित प्रसव कराया गया। वर्तमान में जच्चा और बच्चा दोनों पूरी तरह सुरक्षित और स्वस्थ हैं।
यह घटना सीधे तौर पर श्योपुर के ग्रामीण इलाकों में चरमरा चुकी स्वास्थ्य व्यवस्था और सरकारी कर्मचारियों की घोर लापरवाही को उजागर करती है। सवाल यह उठता है कि आपातकालीन सेवाओं के नाम पर वेतन उठाने वाला यह स्टाफ रात में गेट बंद करके क्यों बैठा था? अगर 15 किलोमीटर के सफर के दौरान प्रसूता या बच्चे को कुछ हो जाता, तो इस लापरवाही की जिम्मेदारी कौन लेता?
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1.74 करोड़ की सड़क को लेकर हंगामा: जनता ने खुद नापी सड़क की मोटाई, ठेकेदार को पड़ा जान बचाकर भागना
ग्वालियर। मध्य प्रदेश के ग्वालियर में विकास कार्यों में भ्रष्टाचार और खराब गुणवत्ता को लेकर एक बड़ा मामला सामने आया है। यहां करीब 1 करोड़ 74 लाख रुपये की भारी-भरकम लागत से बन रही एक सड़क की गुणवत्ता को लेकर स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों का गुस्सा इस कदर फूटा कि मौके पर जमकर हंगामा और मारपीट हो गई। जनता के आक्रोश के बाद जब नगर निगम के अधिकारी मौके पर पहुंचे और जांच शुरू की, तो शुरुआती जांच में ही भ्रष्टाचार की पोल खुल गई।
यह पूरा सनसनीखेज मामला ग्वालियर के सिंहपुर रोड का है, जहाँ 1.74 करोड़ रुपये की लागत से नई सड़क का निर्माण कराया जा रहा है। सड़क निर्माण में धांधली और खराब गुणवत्ता की लगातार मिल रही शिकायतों के बाद स्थानीय पार्षद, जनप्रतिनिधि और रहवासी खुद निरीक्षण करने मौके पर पहुंचे थे।
मौके पर जब लोगों ने काम की गुणवत्ता पर सवाल उठाए, तो ठेकेदार फर्म के कर्मचारियों ने बहस शुरू कर दी। देखते ही देखते यह बहस हिंसक झड़प में बदल गई। आरोप है कि आक्रोशित स्थानीय लोगों ने ठेकेदार पक्ष के कर्मचारियों को सड़क पर दौड़ा-दौड़ाकर पीट दिया।
हंगामे और मारपीट की सूचना मिलते ही नगर निगम के कार्यपालन यंत्री (EE), उपयंत्री (Sub Engineer) और पूरा इंजीनियरिंग अमला आनन-फानन में सिंहपुर रोड पहुंचा। अधिकारियों ने तुरंत सड़क की ‘कोर कटिंग’ कराई। शुरुआती सरकारी जांच में ही यह साफ हो गया कि कई स्थानों पर सड़क की मोटाई तय मापदंडों और मानकों से काफी कम थी। यानी सीधे तौर पर जनता के पैसे की बर्बादी और घोटाले का खेल चल रहा था।
शुरुआती जांच में ही धांधली पकड़े जाने के बाद नगर निगम के अधिकारियों ने तुरंत सड़क का निर्माण कार्य रुकवा दिया है। अधिकारियों ने सड़क के सैंपल सील कर लैब टेस्टिंग के लिए भेज दिए हैं। नगर निगम प्रशासन का साफ कहना है कि लैब से अंतिम रिपोर्ट आने के बाद यदि गुणवत्ता में और कमी पाई जाती है, तो संबंधित ठेकेदार फर्म के खिलाफ एफआईआर (FIR) समेत सख्त से सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
मुंबई. दक्षिण मुंबई में मुहर्रम के जुलूस के दौरान एक बड़ी त्रासदी को टालते हुए मुंबई पुलिस ने सामूहिक रूप से जहर देने की साजिश का भंडाफोड़ किया है. पुलिस ने इस मामले में पुणे के विमान नगर के रहने वाले एक पेंट कारोबारी को गिरफ्तार किया है.
आरोपी की पहचान फैयाज प्रेमजी (39 वर्ष) के रूप में हुई है, जिसके पास से पुलिस ने चूहे मारने वाले अत्यधिक विषैले रसायन जिंक फॉस्फाइड से भरी 14,900 कैप्सूल बरामद की हैं. पुलिस के अनुसार, आरोपी इन जहरीली कैप्सूलों को जुलूस में शामिल लोगों, विशेषकर मातम करने वालों को दर्द निवारक दवा बताकर बांट रहा था.
यह पूरी घटना भायखला और जेजे फ्लाईओवर के पास मुहर्रम के आशुरा जुलूस के दौरान शनिवार (27 जून 2026) तड़के सामने आई. सुबह करीब 4:00 बजे एक प्रतिभागी को यह कैप्सूल खाने के बाद गंभीर उल्टी और पेट में तेज ऐंठन की शिकायत हुई, जिसके बाद उसे तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया. डॉक्टरों को मामला संदिग्ध लगने पर उन्होंने तुरंत पुलिस को सूचित किया. मुस्तैदी दिखाते हुए पुलिस की गश्ती टीम ने रे रोड इलाके में रहमताबाद कब्रिस्तान के पास से आरोपी फैयाज प्रेमजी को रंगे हाथों दबोच लिया.
पूछताछ के दौरान आरोपी ने कबूल किया कि उसका इरादा जुलूस में शामिल लोगों को नुकसान पहुंचाना था. पुलिस उपायुक्त जयंत मीना के अनुसार, फैयाज ने ऑनलाइन माध्यम से 30,000 खाली कैप्सूल और 50 किलोग्राम जिंक फॉस्फाइड पाउडर मंगवाया था. वह मुंबई के डोंगरी इलाके के एक गेस्ट हाउस और डॉर्मिटरी में ठहरा हुआ था, जहां उसने खुद अपने हाथों से हर कैप्सूल में लगभग एक ग्राम जहरीला पाउडर भरा. वह कुल 30,000 कैप्सूल तैयार करने की फिराक में था, लेकिन आधी साजिश के दौरान ही पुलिस ने उसे दबोच लिया.
जांच में सामने आया है कि आरोपी फैयाज प्रेमजी खुद शिया खोजा मुस्लिम समुदाय से ताल्लुक रखता है. वह बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन ग्रेजुएट है और पुणे में अपने पिता की पेंट कंपनी संभालता है. पुलिस को उसकी हालिया यात्राओं पर गहरा संदेह है. रिकॉर्ड्स के मुताबिक, फैयाज ने साल 2019 से 2025 के बीच कई बार ईरान और इराक की यात्रा की है, जिसमें पिछले एक साल के भीतर ही उसने 19 बार इन देशों का दौरा किया. वर्तमान में उसकी मां और बहन (जो फिजियोथेरेपिस्ट हैं) ईरान में ही रह रही हैं.
मुंबई पुलिस ने फैयाज प्रेमजी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 109, 110 और 123 के तहत जहर देने और हत्या के प्रयास का मामला दर्ज किया है. पुलिस ने आरोपी का मोबाइल फोन, डिजिटल रिकॉर्ड और बैंक स्टेटमेंट जब्त कर लिए हैं. साइबर और फॉरेंसिक टीमें इस बात की गहनता से जांच कर रही हैं कि आरोपी ने इस खौफनाक साजिश को अकेले अंजाम दिया है या वह किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय या आतंकी नेटवर्क से जुड़ा हुआ था.
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राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला: SIT जांच में नए खुलासे, पैसे के बंटवारे के विवाद से खुलने लगा पूरा नेटवर्क; कई संदिग्धों की संपत्तियां रडार पर
अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी के मामले में एसआईटी (SIT) की जांच लगातार आगे बढ़ रही है। सूत्रों के अनुसार जांच के दौरान कई संदिग्धों की आर्थिक स्थिति में असामान्य बढ़ोतरी के संकेत मिले हैं। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि कुछ लोगों की आर्थिक हैसियत 50 गुना से लेकर 100 गुना तक कैसे बढ़ी। इसी कड़ी में जमीन, प्लॉट, होटल और अन्य संदिग्ध संपत्तियों की भी जांच की जा रही है।
सूत्रों के मुताबिक जांच में यह बात भी सामने आई है कि कथित तौर पर रकम के बंटवारे को लेकर आपसी विवाद के बाद पूरे मामले की परतें खुलनी शुरू हुईं। बताया जा रहा है कि टिन्नू यादव और उससे जुड़े 30 से अधिक लोग पुलिस और SIT की जांच के दायरे में हैं। जांच एजेंसियां इन सभी लोगों के आर्थिक लेनदेन और आपसी संबंधों की भी पड़ताल कर रही हैं।
SIT की जांच केवल कथित चोरी तक सीमित नहीं है बल्कि मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था की भी गहन समीक्षा की जा रही है। सूत्रों के अनुसार कंट्रोल रूम प्रभारी, सुरक्षा कर्मियों, PAC के जवानों और संबंधित पुलिसकर्मियों की भूमिका की जांच की जा रही है। जांच रिपोर्ट के आधार पर संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी की जा सकती है।
सूत्रों का कहना है कि मामले में ट्रस्ट से जुड़े पदाधिकारियों की भूमिका की भी जांच जारी है। अभी तक किसी भी बड़े नाम को क्लीन चिट नहीं दी गई है। SIT सभी पहलुओं की विस्तृत जांच कर रही है और जांच पूरी होने के बाद ही जिम्मेदार लोगों की भूमिका स्पष्ट हो सकेगी।
फिलहाल मामले की जांच जारी है और SIT विभिन्न पहलुओं से सबूत जुटाने में लगी हुई है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि कथित चढ़ावा चोरी में किन-किन लोगों की भूमिका रही और किसके खिलाफ क्या कार्रवाई की जाएगी।
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झारखंड के कस्तूरबा आवासीय में मचा हड़कंप; 100 से अधिक छात्राएं फूड प्वाइजनिंग की शिकार, मानवता भी हुई शर्मसार
गढ़वा जिले के खरौंदी प्रखंड स्थित एक हॉस्टल की 100 लड़कियां शुक्रवार शाम अचानक बीमार पड़ गईं. छात्राओं को पेट दर्द, उल्टी, चक्कर और कमजोरी की शिकायत के बाद अस्पताल पहुंचाया गया. एक-एक कर सभी को उल्टी, दस्त की शिकायत हो गई. सभी छात्राओं को दूषित भोजन (फूड प्वाइजनिंग) और भीषण गर्मी में टंकी का खौलता पानी पीने के कारण मौत पर बन आयी.
खरौंधी स्थित कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय में शुक्रवार को प्रशासनिक और मानवीय संवेदनहीनता की सारी हदें पार होते देखने को मिली.
झारखंड के गढ़वा जिले से हैरान करने वाला बहुत बड़ा मामला सामने आया. कुल 300 छात्राओं वाले इस विद्यालय में कुप्रबंधन का आलम यह था कि घटना के वक्त हॉस्टल पूरी तरह गार्ड के भरोसे था, न तो वॉर्डन मौके पर थीं और न ही एकाउंटेंट. मानवता तो तब शर्मसार हुआ जब छात्राओं को दूषित भोजन और भीषण गर्मी में टंकी का खौलता पानी पीने को मिला.
सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार शुरुआती दौर में स्कूल प्रबंधन मामले को दबाने में जुटा रहा. बच्चियों की हालत बेहद खराब होने की सूचना पाकर जब अभिभावक हॉस्टल पहुंचे, तो प्रबंधन ने घंटों मुख्य दरवाजा बंद रखा. स्थिति बिगड़ती देख स्थानीय थाना प्रभारी को हस्तक्षेप करना पड़ा, जिसके बाद पुलिस की कड़ाई पर हॉस्टल का दरवाजा खोला गया.
आनन-फानन में सभी को भवनाथपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया. अस्पताल पहुंची छात्राओं में से कई को प्राथमिक उपचार दिया गया, जबकि एक दर्जन से अधिक छात्राओं को सलाइन और जरूरी दवाइयां दी गईं. डॉक्टरों के मुताबिक फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है.
घटना की सूचना मिलते ही भवनाथपुर बीडीओ नंद जी राम और अंचलाधिकारी शंभू राम अविलंब भवनाथपुर अस्पताल पहुंचे. भवनाथपुर पीएचसी के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ दिनेश कुमार सिंह ने बताया कि प्रथम दृष्टया यह मामला पूरी तरह से फूड प्वाइजनिंग और अत्यधिक गर्मी में दूषित या गर्म पानी पीने का है.
अभिभावकों ने आरोप लगाया कि हॉस्टल में जनरेटर की सुविधा होने के बावजूद ठंडे पानी की व्यवस्था के लिए मोटर नहीं चलाई गई. हालांकि, प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है. अधिकारियों की टीम छात्राओं के बीमार होने के कारणों की जांच कर रही है.
फिलहाल सभी छात्राओं का इलाज किया जा रहा है जहां स्थिति नियंत्रण में है और उन पर डॉक्टरों की विशेष निगरानी रखी जा रही है
राम मंदिर में दान और चढ़ावे की चोरी के मामले में RSS-VHP विपक्ष ने निशाने पर है, विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी आरोप लगा रहे हैं, पुलिस इस मामले में मंदिर में आने वाले दान के प्रबंधन से जुड़े 8 लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है उनके खिलाफ गबन सहित अलग अलग धाराओं में ममला दर्ज कर जाँच की जा रही है।
कांग्रेस द्वारा कल शुक्रवार को इस मामले में आधिकारिक बयान जारी करने के बाद अब अन्य नेता भी मुखर हो गए हैं प्रियंका गांधी ने 8 कर्मचारियों की गिरफ़्तारी पर सवाल उठाये हैं, उन्होंने X पर लिखा- सत्य और धर्म को स्थापित करने वाले मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम और उनके करोड़ों भक्तों की आस्था के साथ जो चोरी और लूट का कपटपूर्ण कृत्य किया गया है, उसने पूरे देश को स्तब्ध कर दिया है। भगवान राम करोड़ों मन का पवित्र भाव हैं। उसी पवित्र भाव से लोग मंदिर में माथा टेकते हैं और दान करते हैं। राम मंदिर में चोरी करने वालों ने धर्म और आस्था की मूल भावना को खंडित करने का महापाप किया है।
प्रियंका गांधी ने कहा यह सवाल भी महत्वपूर्ण है कि क्या छोटे कर्मचारी अकेले CCTV बंद कर हजारों करोड़ के चढ़ावे में हेराफेरी कर सकते हैं, या इसके पीछे कुछ बड़े लोगों की मिलीभगत है? इस मामले में जांच के नाम पर लीपापोती करने की जगह पारदर्शी तरीके से जांच हो और जो भी लोग इस चोरी में संलिप्त हैं, उन्हें कड़ी सजा मिले।
प्रियंका गांधी के बाद मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने भी मंदिर चोरी दान विवाद पर अपनी प्रतिक्रिया दी है, उन्होंने उज्जैन में मीडिया से बात करते हुए कई गंभीर आरोप लगाये, न्यूज़ एजेंसी ANI ने दिग्विजय सिंह का वीडियो पोस्ट किया है, दिग्विजय सिंह ने कहा यह मामला सोशल मीडिया के माध्यम से बाहर आया लेकिन स्थापित मीडिया जिसे गोदी मीडिया कहते हैं उसने इस मामले को नहीं उठाया।
दिग्विजय बोले मामला उजागर होने के बाद एसआईटी बनी उसकी रिपोर्ट आ गई इसी बीच आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने चंपत राय द्वारा सस्ती जमीन को कैसे महंगी कीमत पर ट्रस्ट के लिए खरीदवाया इसे 11 बिन्दुओं में समझाते हुए दस्तावेज एसआईटी को सौंपे हैं वो इसकी जाँच कर रही है।
यानि जो जमीन खरीदी उसमें भ्रष्टाचार किया, चंदे में भ्रष्टाचार, सिंधी समाज ने 200 किलो चांदी की ईंटें दी उसमें भ्रष्टाचार, एक महिला ने सोने के जेवर दिए उसमें भ्रष्टाचार, किसी को रसीद नहीं दी गई, विदेशों से मिले दान के लिए भी कोई रसीद नहीं दी गई । दिग्विजय सिंह ने कहा मतलब साफ़ है RSS और VHP का धर्म से कोई लेना-देना नहीं है। वे सनातन धर्म को मानने वालों और दान देने वालों को ठग रहे हैं सनातन धर्म को मानने वालों के साथ इससे बड़ी बेईमानी, गद्दारी और धोखा नहीं हो सकता।
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होम साइंस कॉलेज में 9.20 लाख का महाघोटाला! खेल सामग्री की एक गेंद नहीं आई, रिटायरमेंट से पहले फंसीं प्राचार्य डॉ. कामिनी जैन
नर्मदापुरम। मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम जिला मुख्यालय स्थित होम साइंस कॉलेज में सब कुछ ‘ऑल इज़ वेल’ बताने वाली प्राचार्य डॉ. कामिनी जैन के दावों की हवा निकल गई है। रिटायरमेंट के मुहाने पर खड़ीं प्राचार्य के कार्यकाल का एक ऐसा ‘अनोखा’ महाघोटाला सामने आया है, जिसने उच्च शिक्षा विभाग से लेकर कलेक्ट्रेट तक हड़कंप मचा दिया है। कॉलेज में खेल सामग्री की एक गेंद तक नहीं पहुंची, लेकिन कागजों पर ₹9 लाख से अधिक का भुगतान भी हो गया! इस खेल का पर्दाफाश खुद क्षेत्रीय विधायक डॉ. सीतासरन शर्मा की सक्रियता से हुआ। भनक लगते ही विधायक ने जब कॉलेज पहुंचकर कड़ाई से पूछताछ की, तो परतें खुलती चली गईं।
मामला बेहद शातिराना है। सरकारी मद से आवंटित राशि में से लगभग ₹9 लाख 20 हजार की खेल सामग्री का क्रय दिखाया गया। खेल का सामान भोपाल की एक फर्म से आना था, जो कभी कॉलेज पहुंचा ही नहीं। लेकिन मैडम प्राचार्य की मेहरबानी देखिए स्टॉक रजिस्टर में सामान प्राप्ति की फर्जी एंट्री भी हो गई, वाउचर भी बन गए और ट्रेजरी से भोपाल की फर्म को भुगतान भी कर दिया गया! विधायक डॉ. सीतासरन शर्मा ने कहा सामान आया नहीं और रिसीव कर लिया गया। बकायदा वाउचर बनाकर रजिस्टर में एंट्री भी ठोक दी गई। हमने फिलहाल पेमेंट रुकवाया है और उच्च शिक्षा आयुक्त समेत कलेक्टर-कमिश्नर को शिकायत भेज दी है।
विधायक की सूचना पर जब तहसीलदार सरिता मालवीया भारी लाव-लश्कर के साथ जांच करने कॉलेज पहुंचीं, तो वहां हड़कंप मच गया। दिनभर प्राचार्य कक्ष में अधिकारियों-कर्मचारियों के चेहरे उड़े रहे। तहसीलदार ने गड़बड़ी की पुष्टि करते हुए अपनी रिपोर्ट वरिष्ठ अधिकारियों को सौंप दी है। अब जनभागीदारी फंड से हुई अन्य खरीदियों की भी कुंडली खंगाली जा रही है। लंबे समय से कॉलेज में अपनी एकछत्र हुकूमत चलाने वाली प्राचार्य डॉ. कामिनी जैन अब चारों तरफ से घिर चुकी हैं। हालांकि, उन्होंने अपना बचाव करते हुए कहा”नियम के अनुसार कार्य किया गया है, गड़बड़ी के आरोप पूरी तरह निराधार हैं।” लेकिन बड़ा सवाल यह है कि जब सामान स्टोर रूम में है ही नहीं, तो वह गया कहां? क्या रिटायरमेंट से पहले विदाई का यह ‘खेल’ प्राचार्य को भारी पड़ने वाला है? जांच की आंच तेज है, और अगर लीपापोती नहीं हुई, तो कई बड़े चेहरे बेनकाब होना तय है!
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अब थाने में नहीं होगी झिझक… ‘सेतु’ बनेगा जनता और पुलिस के बीच भरोसे का नया पुल, इंदौर से शुरू हुई नई पहल
इंदौर। किसी भी थाने में कदम रखते ही अक्सर लोगों के मन में एक सवाल होता है—”अब किससे बात करें?”… “कौन अधिकारी ड्यूटी पर है?”… “बीट अधिकारी कौन है?”… और कई बार यही झिझक शिकायत दर्ज कराने या मदद मांगने में सबसे बड़ी बाधा बन जाती है। इसी झिझक को खत्म करने के लिए इंदौर पुलिस एक ऐसी पहल लेकर आई है, जो सच मायनों में जनता और पुलिस के बीच ‘सेतु’ बनने जा रही है।
इंदौर पुलिस के एसीपी पराग सैनी की परिकल्पना पर तैयार किए जा रहे ‘सेतु एप’ के जरिए अब थानों में लगी डिजिटल स्क्रीन और ऐप पर पूरी जानकारी उपलब्ध होगी। स्क्रीन पर थाना प्रभारी का नाम और मोबाइल नंबर, ड्यूटी पर मौजूद अधिकारियों की जानकारी, बीट अधिकारियों के नाम और संपर्क नंबर, पासपोर्ट वेरिफिकेशन के जिम्मेदार अधिकारी सहित कई महत्वपूर्ण जानकारियां दिखाई देंगी।
इतना ही नहीं, यदि कोई व्यक्ति अपने मोबाइल पर सेतु एप खोलकर किसी भी थाने की लोकेशन सर्च करेगा, तो उसे उस थाने का पता ही नहीं, बल्कि वहां उस समय ड्यूटी पर मौजूद अधिकारियों और बीट अधिकारियों की पूरी जानकारी भी मिल जाएगी।
एसीपी पराग सैनी का कहना है कि इस एप का सबसे बड़ा उद्देश्य पुलिस और आम नागरिक के बीच की दूरी को कम करना है। कई लोग थाने पहुंचने के बाद यह समझ नहीं पाते कि किस अधिकारी से संपर्क करें। ऐसे लोगों के लिए यह एप और डिजिटल स्क्रीन एक भरोसेमंद मार्गदर्शक का काम करेंगे।
फिलहाल इस परियोजना की टेस्टिंग इंदौर के विजयनगर थाने और एसीपी कार्यालय में की जा रही है। इसके बाद इसे शहर के सभी 36 थानों, एसीपी कार्यालय, अतिरिक्त डीसीपी कार्यालय, डीसीपी कार्यालय और पुलिस कमिश्नर कार्यालय तक विस्तारित किया जाएगा। संबंधित अधिकारियों को अपने-अपने सर्कल की जानकारी देखने की सुविधा भी मिलेगी।
हर दिन हजारों लोग दूसरे शहरों और राज्यों से इंदौर आते हैं। किसी हादसे, अपराध या आपात स्थिति में उन्हें पुलिस तक पहुंचने के लिए अब इधर-उधर भटकना नहीं पड़ेगा। ‘सेतु’ सिर्फ एक एप नहीं, बल्कि पुलिस और जनता के बीच विश्वास, पारदर्शिता और आसान संवाद की नई शुरुआत बनने की ओर बढ़ रहा है।
छतरपुर। मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के गौरिहार थाना क्षेत्र के मनुरिया गांव निवासी रवि अहिरवार हाथ में विहार के भरत तिवारी का पोस्टर लेकर पुलिस अधीक्षक (SP) कार्यालय पहुंचा। पीड़ित युवक ने गौरिहार थाना पुलिस के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए जमकर नारेबाजी की और ‘पुलिस मुर्दाबाद’ के नारे लगाए।
रवि अहिरवार का आरोप है कि राजनीतिक दबाव के चलते उसके खिलाफ गौरिहार थाने में झूठा मामला दर्ज किया गया है। उसने राज्यमंत्री दिलीप अहिरवार के भाई और स्थानीय नेताओं पर साजिश के तहत फर्जी केस में फंसाने का गंभीर आरोप लगाया है। पीड़ित युवक ने एसपी से गुहार लगाते हुए निष्पक्ष जांच और न्याय की मांग की है।
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राम मंदिर के चोरों को बाबा बागेश्वर ने बताया पापी, धीरेंद्र शास्त्री बोले- भगवान खुद उन्हें महादंड देंगे
छतरपुर। उत्तर प्रदेश में अयोध्या राम मंदिर में चंदा चोरी के खुलासे से न सिर्फ दानदाताओं का विश्वास उठा है, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था को भी ठेस पहुंची है। चोरी, जांच और कार्रवाई के बीच बागेश्वर धाम पीठाधीश पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने भी इस पर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने चोरों को पापी बताते हुए कहा है कि भगवान खुद उन्हें महादंड देंगे।
दरअसल, पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने इंडोनेशिया में आयोजित हनुमान कथा के दौरान चंदा चोरी की घटना पर गहरी नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ पैसों की नहीं, बल्कि देश के करोड़ों लोगों की आस्था और श्रद्धा की चोरी है।
उन्होंने रावण का उदाहरण देते हुए कहा, “माता सीता को चुराने वाले रावण के पूरे वंश का नाश हो गया था। राम मंदिर में चोरी करने वाले महापापी हैं, उन्हें भगवान खुद महादंड देंगे।” दर्ज हुई एफआईआर (FIR) का जिक्र करते हुए बागेश्वर महाराज ने कहा कि इस मामले में अभी और जांच होनी चाहिए, जिससे कई और आरोपी पकड़े जाएंगे। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि ऐसे लोगों को सरकारी दंड तो मिलेगा ही, साथ ही वे ईश्वरीय न्याय से भी नहीं बच पाएंगे।
सपा के पूर्व मंत्री पवन पांडेय ने 7 जून को राम मंदिर में चढ़ावा चोरी का मुद्दा उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि 5 से 7.5 करोड़ रुपए की चोरी की है। इसके बाद 8 जून सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव ने कोर्ट से स्वतः संज्ञान लेने की अपील की। 9 जून भाजपा नेता डॉ. रजनीश सिंह ने प्रधानमंत्री को एक चिट्ठी लिखकर मामले की CBI और ED से जांच की मांग की। 9 जून को राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने ट्रस्ट के सदस्यों के साथ बैठक की। चढ़ावे की राशि, गिनती और लेखा-जोखा पर चर्चा की। 10 जून को प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने मंदिर ट्रस्ट से मामले पर रिपोर्ट मांगी ली। दूसरी तरफ, ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने सभी आरोप खारिज किए। 11 जून को मंदिर के पूर्व लेखा प्रभारी महिपाल सिंह का बयान सामने आया। CCTV फुटेज को लेकर आरोप लगाए।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सख्त रुख और उनके निर्देश पर गठित SIT की प्रारंभिक रिपोर्ट के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के चढ़ावा चोरी प्रकरण में FIR दर्ज की गई। ट्रस्ट के सदस्य कृष्णमोहन की लिखित शिकायत पर श्रीराम जन्मभूमि थाने में मामला दर्ज किया गया। FIR में 8 लोगों को नामजद किया गया जिनमें अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पाण्डेय, रमाशंकर मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव और श्री राम शंकर यादव उर्फ टिन्नू के नाम शामिल थे।
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने इस्तीफा दे दिया है। साथ ही ट्रस्ट के सदस्य अनिल मिश्रा ने अपना पद त्याग (Anil Mishra Resigns) दिया है। गबन के बाद से इन दोनों पदाधिकारियों पर ही सबसे ज्यादा दबाव बना हुआ था। दोनों पर इस्तीफे का दबाव था।
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रेप पीड़िताओं को लेकर HC की सख्त शर्त, मुआवजे के लिए देना होगा शपथ पत्र, बयान बदलने पर लौटानी होगी पूरी सहायता राशि
ग्वालियर। दुष्कर्म और एससी-एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम के मामलों में मिलने वाले मुआवजे को लेकर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने बड़ा और अहम आदेश दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि अब आर्थिक सहायता की अगली किस्त जारी करने से पहले पीड़िता को शपथ पत्र देना होगा कि वह आरोपी से समझौता नहीं करेगी और मुकदमे के दौरान अपनी गवाही से नहीं मुकरेंगी। अगर ट्रायल के दौरान पीड़िता बयान बदलती है या आरोपों से पीछे हटती है, तो उसे मिली पूरी सहायता राशि सरकार को वापस करनी होगी।
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के जस्टिस विशाल मिश्रा की एकलपीठ ने यह आदेश आर्थिक सहायता के दुरुपयोग पर चिंता जताते हुए दिया। अदालत ने कहा कि कई मामलों में पीड़ित पक्ष मुआवजा मिलने के बाद अपने बयान बदल देता है, जिससे अभियोजन कमजोर पड़ जाता है और सरकारी धन का उद्देश्य भी विफल हो जाता है।
कोर्ट ने निर्देश दिए हैं कि संबंधित अधिकारी सहायता राशि जारी करने से पहले पीड़िता से विधिवत हलफनामा लें। आदेश में यह भी कहा गया है कि यदि ट्रायल के दौरान पीड़िता गवाही से मुकरती है तो फैसला होने के 30 दिन के भीतर पूरी सहायता राशि वापस करनी होगी। राशि जमा नहीं करने पर उसकी विधिवत वसूली की जाएगी। साथ ही ट्रायल कोर्ट उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र रहेगा।
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