पांढुर्णा। मध्य प्रदेश के पांढुर्णा जिले में जाम नदी के तट पर कल एक बार फिर सदियों पुरानी और विश्वप्रसिद्ध ‘गोटमार मेले’ का खूनी खेल देखने को मिलेगा। परंपरा और आस्था के नाम पर पांढुर्णा और सावरगांव के लोग आमने-सामने होंगे और एक-दूसरे पर अंधाधुंध पत्थरों की बरसात करेंगे। सिर फोड़ती गोफन, लहूलुहान होते लोग और नदी किनारे बिखरे पत्थर—गोटमार मेले की सालों पुरानी पहचान बन चुके हैं।
पोला पर्व के दूसरे दिन आयोजित होने वाले इस मेले की शुरुआत मां चंडिका के पूजन और दर्शन के साथ होती है। वर्ष 1955 से लेकर अब तक इस पत्थरबाजी के खेल में 14 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं, जबकि हजारों की संख्या में लोग गंभीर रूप से घायल और अपाहिज हुए हैं। प्रशासन ने कई बार रबर बॉल से मेला कराने की कोशिश की, लेकिन हर बार परंपरा के आगे प्रशासन के प्रयास पस्त साबित हुए।
गोटमार मेले को लेकर कई कहानियां प्रचलित हैं। सबसे लोकप्रिय किवदंती पांढुर्णा के युवक और सावरगांव की युवती की प्रेम कहानी से जुड़ी है। कहा जाता है कि प्रेमी युगल को नदी पार करते समय दोनों गांवों के लोगों ने रोकने के लिए पत्थरबाजी की थी। इसी घटना की याद में गोटमार मेले की परंपरा शुरू हुई। हालांकि, बुजुर्गों का मानना है कि समय के साथ इसमें गोफन और शराब के इस्तेमाल से आक्रामकता और खतरा बहुत बढ़ गया है।
इस बार भी प्रशासन ने शांति समिति की बैठकें कर लोगों से शांतिपूर्ण उत्सव मनाने की अपील की है। सुरक्षा के मद्देनजर कलेक्टर-एसपी सहित भारी पुलिस बल तैनात रहेगा। करीब 700 पुलिसकर्मी, ड्रोन कैमरे और सीसीटीवी के जरिए पूरे मेला परिसर पर नजर रखी जाएगी। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग को अलर्ट मोड पर रखा गया है।
प्रशासनिक दावों और तैयारियों के बीच ज़मीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। मेले से दो दिन पहले से ही जाम नदी के दोनों किनारों पर ट्रैक्टरों के जरिए भारी मात्रा में पत्थर लाकर इकट्ठे किए गए हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस बार भी पांढुर्णा की जाम नदी में परंपरा के नाम पर खूनी खेल खेला जाएगा?
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नाबालिग से होटल में दुष्कर्म और फिर गर्भपात! डॉक्टर-परिजनों समेत 6 पर केस दर्ज; 5 हिरासत में
नर्मदापुरम। मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम में एक नाबालिग के साथ दुष्कर्म और जबरन गर्भपात कराने का गंभीर मामला सामने आया है। पुलिस ने पीड़िता की शिकायत पर मुख्य आरोपी अजीत सिंह और उसकी मदद करने वाली एक महिला डॉक्टर व परिजनों सहित कुल 6 लोगों के खिलाफ पॉक्सो एक्ट और अन्य संबंधित धाराओं में अपराध दर्ज किया है। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 5 आरोपियों को अभिरक्षा में ले लिया है। मामला कोतवाली थाना क्षेत्र का है।
पुलिस के अनुसार, डोलरिया क्षेत्र निवासी मुख्य आरोपी अजीत सिंह ने 17 वर्षीय एक लड़की को प्यार और शादी का झांसा दिया। 23 अक्टूबर 2025 को वह पीड़िता को घुमाने के बहाने नर्मदापुरम ले गया और आनंद नगर स्थित पलाश होटल के कमरे में ले जाकर उसके साथ जबरन संबंध बनाए। घटना के कुछ समय बाद जब पीड़िता गर्भवती हो गई, तो आरोपी ने 19 फरवरी को एक महिला डॉक्टर स्वाती मिर्धा की मदद से दवा देकर उसका गर्भपात करा दिया। इस कृत्य में आरोपी के परिजनों (मां, बहन, बड़ी मां और चाचा) ने भी आरोपी का साथ दिया। इसके बाद आरोपी पीड़िता को जान से मारने की धमकी देकर चुप कराता रहा।
घटना के लगभग 8 महीने बाद जब मुख्य आरोपी पीड़िता को बदनाम करने लगा, तो परेशान होकर पीड़िता ने पूरी बात अपने परिजनों को बताई। इसके बाद पीड़िता ने कोतवाली थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई। शिकायत मिलते ही पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया। मामले की जांच के तहत एसआई दीपिका लोखंडे ने घटनास्थल पलाश होटल पहुंचकर उस कमरे का निरीक्षण किया। एएसपी अभिषेक राजन ने बताया कि मामले में मुख्य आरोपी समेत 6 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है, जिसमें से 5 आरोपियों को पुलिस अभिरक्षा में लिया जा चुका है। अन्य की तलाश जारी है।
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महाकाल मंदिर के पास शाही मस्जिद का हिस्सा हटाने पर हाई कोर्ट की मंजूरी
इंदौर. सिंहस्थ कुंभ 2028 से पहले उज्जैन में सड़क और यातायात व्यवस्था को लेकर चल रही तैयारियों को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट से महत्वपूर्ण कानूनी आधार मिल गया है. महाकाल मंदिर के समीप स्थित शाही मस्जिद के एक हिस्से को हटाकर सड़क चौड़ी करने के नगर निगम के निर्णय के खिलाफ दायर दो याचिकाओं को हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया. अदालत ने माना कि नगर निगम ने कार्रवाई से पहले संबंधित पक्षों को सुनवाई का अवसर दिया और निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन किया.
न्यायमूर्ति संदीप एन. भट्ट की पीठ ने मामले की परिस्थितियों को देखते हुए कहा कि प्रस्तावित कार्रवाई को संविधान के अनुच्छेद 14, 25, 26 और 300-ए का उल्लंघन नहीं माना जा सकता. अदालत के सामने मुख्य सवाल केवल धार्मिक संरचना के प्रभावित होने का नहीं था, बल्कि यह भी था कि सार्वजनिक सड़क के विस्तार के लिए की जा रही कार्रवाई मनमानी है या कानून के अनुरूप.
उज्जैन में वर्ष 2028 में सिंहस्थ कुंभ होना है. महाकालेश्वर मंदिर और क्षिप्रा नदी के आसपास का क्षेत्र इस आयोजन के दौरान श्रद्धालुओं की भारी आवाजाही वाला प्रमुख क्षेत्र रहेगा. ऐसे में सड़क की क्षमता, पैदल यात्रियों की आवाजाही और वाहनों के दबाव को लेकर प्रशासन अभी से तैयारी कर रहा है.
नगर निगम का कहना था कि शाही सवारी, पेशवाई और सिंहस्थ के दौरान लाखों श्रद्धालुओं की आवाजाही के बीच मौजूदा मार्गों पर यातायात का दबाव काफी बढ़ सकता है. इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए सड़क को 15 मीटर तक चौड़ा करने की योजना बनाई गई है.
मस्जिद के प्रबंधन का दावा करने वाले दो पक्षों ने नगर निगम के नोटिस और प्रस्तावित कार्रवाई को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी. उनका कहना था कि सड़क चौड़ीकरण के लिए मस्जिद के जिस हिस्से को हटाने की योजना है, उसमें जमातखाना, करीब 120 फुट ऊंची मीनार और मजहर चौक शाही का हिस्सा प्रभावित होगा.
याचिकाकर्ताओं ने मस्जिद को पुरानी धार्मिक संरचना बताते हुए तर्क दिया कि नमाज स्थल, वजू की सुविधा और मीनार केवल भवन के हिस्से नहीं हैं, बल्कि धार्मिक गतिविधियों से जुड़े महत्वपूर्ण अंग हैं. इसलिए सड़क चौड़ीकरण के नाम पर इनका प्रभावित होना धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार से जुड़ा प्रश्न है.
नगर निगम ने अदालत के समक्ष अपने पक्ष में कहा कि प्रस्तावित कार्रवाई पूरी मस्जिद को प्रभावित नहीं करती. निगम के अनुसार मस्जिद के कुल ढांचे के 10 प्रतिशत से भी कम हिस्से को हटाने की आवश्यकता है.
निगम ने यह भी बताया कि उज्जैन में सड़क चौड़ीकरण की व्यापक योजना के तहत करीब 90 धार्मिक संरचनाओं को हटाने या स्थानांतरित करने की कार्रवाई की जा रही है. इनमें मंदिर और मस्जिद दोनों शामिल हैं. निगम के अनुसार 10 मंदिर और एक मस्जिद पहले ही हटाए जा चुके हैं.
इसी आधार पर निगम ने भेदभाव के आरोप को खारिज किया और कहा कि कार्रवाई किसी एक धर्मस्थल को निशाना बनाकर नहीं की जा रही है, बल्कि सड़क विस्तार की व्यापक योजना का हिस्सा है.
याचिकाकर्ताओं ने अदालत के सामने यह भी दलील रखी कि सड़क चौड़ी करने के लिए वैकल्पिक जमीन उपलब्ध है. उनका कहना था कि यदि मार्ग में उपलब्ध दूसरी भूमि का उपयोग किया जाए तो मस्जिद की संरचना को नुकसान पहुंचाए बिना भी यातायात परियोजना को आगे बढ़ाया जा सकता है.
यह तर्क इसलिए भी महत्वपूर्ण था क्योंकि मामला केवल धार्मिक अधिकारों तक सीमित नहीं था. यदि समान उद्देश्य कम नुकसान के साथ किसी दूसरे विकल्प से पूरा किया जा सकता हो तो प्रशासन को उस विकल्प पर विचार करना चाहिए या नहीं, यह भी न्यायिक समीक्षा का हिस्सा बन सकता है.
अदालत ने रिकॉर्ड पर उपलब्ध सामग्री और मामले की परिस्थितियों को देखते हुए निगम की कार्रवाई को केवल इस आधार पर मनमाना या पक्षपातपूर्ण नहीं माना.
याचिकाकर्ताओं ने यह भी कहा कि शाही मस्जिद वक्फ संपत्ति के रूप में पंजीकृत है और मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड को समुचित तरीके से नोटिस नहीं दिया गया. इसके अलावा नगर निगम अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं होने का दावा भी किया गया.
हाई कोर्ट ने उपलब्ध रिकॉर्ड की जांच के बाद पाया कि मस्जिद के प्रबंधन से जुड़े पक्षों को सुनवाई का अवसर दिया गया था. संबंधित आपत्तियों पर विचार करने के बाद कार्रवाई से जुड़े आदेश पारित किए गए. ऐसे में केवल प्रक्रिया पर सवाल उठाकर निगम की पूरी कार्रवाई को निरस्त करने का आधार अदालत को नहीं मिला.
याचिकाकर्ताओं ने संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 के तहत धार्मिक स्वतंत्रता और धार्मिक संस्थाओं के प्रबंधन से जुड़े अधिकारों का हवाला दिया था. उनका तर्क था कि सार्वजनिक उद्देश्य का हवाला देकर किसी पुराने धार्मिक स्थल के आवश्यक हिस्से को प्रभावित नहीं किया जा सकता.
हाई कोर्ट ने हालांकि मामले की परिस्थितियों में माना कि प्रस्तावित कार्रवाई को धार्मिक स्वतंत्रता के संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन नहीं कहा जा सकता. अदालत ने यह भी देखा कि कार्रवाई किसी एक धार्मिक समुदाय तक सीमित नहीं बताई गई है और निगम ने सड़क चौड़ीकरण परियोजना के तहत अन्य धार्मिक संरचनाओं के संबंध में भी कदम उठाए हैं.
याचिकाकर्ताओं की एक प्रमुख आपत्ति यह थी कि निगम की कार्रवाई चयनात्मक और भेदभावपूर्ण है. अदालत ने इस पहलू पर भी रिकॉर्ड में मौजूद जानकारी को देखा.
नगर निगम द्वारा बड़ी संख्या में धार्मिक संरचनाओं के संबंध में कार्रवाई किए जाने की जानकारी को ध्यान में रखते हुए पीठ ने माना कि उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि शाही मस्जिद के खिलाफ कार्रवाई केवल धार्मिक पहचान के आधार पर की जा रही है.
फैसले का व्यापक महत्व इस बात में है कि अदालत ने सार्वजनिक परियोजना और धार्मिक संरचना के विवाद को केवल धार्मिक अधिकारों के चश्मे से नहीं देखा. सिंहस्थ जैसे बड़े आयोजन में यातायात, श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सार्वजनिक सुविधाओं की आवश्यकता को भी मामले का हिस्सा माना गया.
साथ ही अदालत ने यह भी देखा कि प्रशासन ने प्रभावित पक्ष को सुनवाई का अवसर दिया या नहीं और कार्रवाई मनमानी तरीके से तो नहीं की गई. यानी सड़क चौड़ीकरण अपने आप में कार्रवाई को वैध नहीं बनाता, बल्कि उसके लिए कानूनी प्रक्रिया और परिस्थितियों का पालन भी जरूरी है.
दोनों याचिकाएं खारिज होने के बाद शाही मस्जिद के प्रभावित हिस्से को लेकर नगर निगम की कार्रवाई के सामने फिलहाल हाई कोर्ट स्तर पर बाधा नहीं रही. अब आगे की प्रक्रिया प्रशासनिक स्तर पर होगी.
हालांकि सड़क चौड़ीकरण का काम केवल एक संरचना से जुड़े निर्णय तक सीमित नहीं है. सिंहस्थ 2028 को देखते हुए उज्जैन में सड़कों, यातायात मार्गों और श्रद्धालुओं की आवाजाही से जुड़े कई विकास कार्य प्रस्तावित हैं. ऐसे में धार्मिक और ऐतिहासिक संरचनाओं से जुड़े मामलों में प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चुनौती विकास कार्यों को आगे बढ़ाते हुए निर्धारित कानूनी प्रक्रिया, प्रभावित पक्षों की आपत्तियों और सार्वजनिक हित के बीच संतुलन बनाए रखना होगी.
हाई कोर्ट के इस आदेश से फिलहाल इतना स्पष्ट है कि उपलब्ध रिकॉर्ड और मामले की परिस्थितियों में शाही मस्जिद के प्रभावित हिस्से को हटाकर सड़क चौड़ी करने की नगर निगम की कार्रवाई को अदालत ने असंवैधानिक या मनमाना नहीं माना है. दोनों याचिकाएं खारिज कर दी गई हैं.
भोपाल। मध्य प्रदेश में फर्जी पासपोर्ट के जरिए देश के विभिन्न हिस्सों और विदेश यात्रा करने वाले एक बड़े रैकेट का खुलासा हुआ है। ग्वालियर के डबरा के बाद अब भोपाल के गोविंदपुरा थाना क्षेत्र के अन्ना नगर इलाके से 40 फर्जी पासपोर्ट बरामद किए गए हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसटीएफ (STF) ने कार्रवाई करते हुए दो मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
एसटीएफ डीआईजी राहुल कुमार लोढ़ा ने मामले का खुलासा करते हुए बताया कि गिरफ्तार किए गए आरोपियों में रियाल चौधरी भी शामिल है, जो मूलतः असम का रहने वाला है। दूसरा आरोपी विप्लव अधिकारी है। जांच में सामने आया है कि विप्लव का यह नेटवर्क असम से शुरू होकर कोलकाता के रास्ते मध्य प्रदेश तक फैला हुआ था। आरोपियों ने वर्ष 2021 के आसपास ये फर्जी पासपोर्ट तैयार करवाए थे। पुलिस की टीमें असम और अन्य राज्यों में भी दबिश दे रही हैं।
कई जिलों से जुड़े फर्जीवाड़े के तार
ग्वालियर (डबरा): एक ही पते से लगभग 21-21 पासपोर्ट की एप्लीकेशन प्राप्त हुईं, जिनमें से 17 पासपोर्ट बनाए गए थे।
भोपाल: गोविंदपुरा के अन्ना नगर क्षेत्र से 40 फर्जी पासपोर्ट मिले हैं।
अन्य जिले: बैतूल और छिंदवाड़ा से भी फर्जी पासपोर्ट जारी किए जाने की बात सामने आई है।
बौद्ध अनुयायी बनकर मांगते थे भिक्षा
जांच में यह भी चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि आरोपी पहचान छिपाने के लिए बौद्ध अनुयायी का चोला पहनकर भिक्षा मांगते और जीवनयापन करते थे। इसके बाद वे विभिन्न इनविटेशन और फर्जी दस्तावेजों के आधार पर मलेशिया और कंबोडिया जैसे देशों में घूमने जाते थे। राहुल कुमार लोढ़ा, डीआईजी, एसटीएफ ने बताया कि- फर्जी दस्तावेजों के आधार पर पासपोर्ट बनाए जाने का यह पूरा मामला गंभीर है। दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। हमारी टीमें असम और अन्य राज्यों में भेजी गई हैं। दस्तावेजों और गहन जांच के बाद ही इस नेटवर्क से जुड़े अन्य राज सामने आ सकेंगे।
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सागर में शराब माफियाओं पर बुलडोजर एक्शन: गरजा बुलडोजर, 5 ठिकानों पर मकान और गोदाम जमींदोज
सागर/भोपाल। मध्य प्रदेश के सागर जिले से बड़ी खबर सामने आई है। मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव द्वारा अवैध एवं जहरीली शराब के कारोबार पर ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति अपनाने के कड़े निर्देशों के बाद सागर प्रशासन एक्शन मोड में आ गया है। जिले के बंडा क्षेत्र में अवैध शराब मामले के मुख्य आरोपियों की अवैध संपत्तियों पर प्रशासन और पुलिस की संयुक्त टीम ने बड़ा ‘बुलडोजर एक्शन’ शुरू कर दिया है।
मिली जानकारी के अनुसार, पुलिस और जिला प्रशासन की भारी मौजूदगी में शराब माफियाओं के करीब 5 प्रमुख ठिकानों पर सख्त कार्रवाई की जा रही है। मुख्य आरोपियों द्वारा अवैध तरीके से निर्मित किए गए आलीशान मकानों, बाउंड्रीवॉल और गोदामों को बुलडोजर और पोकलेन मशीनों की मदद से जमींदोज किया जा रहा है।
बंडा में अवैध शराब कारोबार से जुड़े मुख्य आरोपी मनीष, चंद्रभान और आशीष की बेनामी और अवैध संपत्तियों को चिन्हित कर यह कार्रवाई की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि शासकीय जमीनों पर अतिक्रमण कर और बिना अनुमति के बनाए गए इन ठिकानों का इस्तेमाल अवैध गतिविधियों और शराब के भंडारण के लिए किया जा रहा था।
कार्रवाई के दौरान भारी पुलिस बल तैनात किया गया है ताकि कानून-व्यवस्था बनी रहे। मुख्यमंत्री के सख्त रुख के बाद सागर जिले में हुई इस बड़ी कार्रवाई से शराब माफियाओं, भू-माफियाओं और असामाजिक तत्वों में हड़कंप मच गया है।
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दिग्विजय सिंह का बड़ा ऐलानः 20 अक्टूबर से उज्जैन से अयोध्या तक ‘सनातन स्वाभिमान यात्रा
भोपाल। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने सनातन और भगवान राम के मुद्दे पर बड़ा राजनीतिक ऐलान किया है। उन्होंने आगामी 20 अक्टूबर से उज्जैन से अयोध्या तक ‘सनातन स्वाभिमान यात्रा’ निकालने की घोषणा की है। इस दौरान उन्होंने विश्व हिंदू परिषद (VHP), राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर राम मंदिर निर्माण के लिए एकत्रित किए गए चंदे के दुरुपयोग का गंभीर आरोप लगाया है।
प्रेसवार्ता के दौरान दिग्विजय सिंह ने दावा किया कि जब रामशिला पूजन अभियान चलाया गया था, तब उन्होंने भी उसमें बढ़-चढ़कर योगदान दिया था। हालांकि, अब उन्होंने VHP, संघ और बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि जनता से राम मंदिर के नाम पर जो चंदा इकट्ठा किया गया था, उसका सही हिसाब नहीं दिया गया और बड़े पैमाने पर चंदे का दुरुपयोग किया गया है। इसी “चंदा चोरी” और सनातन के वास्तविक स्वरूप को सामने लाने के लिए यह यात्रा निकाली जा रही है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने राम मंदिर निर्माण के लिए चंदा देने वाले सभी रामभक्तों और आम नागरिकों से अपील की है कि वे इस ‘सनातन स्वाभिमान यात्रा’ में भारी संख्या में शामिल हों। इस यात्रा से जुड़ने और अपनी सहभागिता सुनिश्चित करने के लिए दिग्विजय सिंह ने एक विशेष क्यूआर कोड (QR Code) और आवेदन फॉर्म भी जारी किया है, जिसके जरिए लोग यात्रा में शामिल होने के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं।
नई दिल्ली. 1993 के मुंबई सिलसिलेवार बम धमाकों के दोषी और गैंगस्टर अबू सलेम को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है. शीर्ष अदालत ने उसकी समय से पहले रिहाई (Premature Release) की मांग करने वाली याचिका को सिरे से खारिज कर दिया है. इस फैसले के बाद सलेम के फिलहाल जेल से बाहर आने की तमाम उम्मीदों पर विराम लग गया है.
उल्लेखनीय है कि 12 मार्च 1993 को मुंबई में हुए 12 सिलसिलेवार बम धमाकों में 257 लोगों की दर्दनाक मौत हुई थी और 800 से अधिक लोग घायल हुए थे. जांच एजेंसियों के अनुसार, इस पूरे षड्यंत्र में अबू सलेम ने मुख्य भूमिका निभाई थी. उस पर गुजरात से मुंबई तक हथियार और भारी मात्रा में विस्फोटक पहुंचाने का आरोप साबित हुआ था, जिसके बाद टाडा (TADA) कोर्ट ने उसे उम्रकैद की सजा सुनाई थी.
अबू सलेम की ओर से याचिका में दलील दी गई थी कि वर्ष 2002 में पुर्तगाल से उसके प्रत्यर्पण (Extradition) के समय भारत सरकार ने आश्वासन दिया था कि उसे 25 साल से अधिक की सजा नहीं दी जाएगी. सलेम के अनुसार वह इस अवधि को पूरा कर चुका है, इसलिए उसे रिहा किया जाना चाहिए.
इससे पहले बॉम्बे हाईकोर्ट ने भी सलेम की इस अर्जी को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि सजा में छूट की गणना रिहाई की तय समय-सीमा के अंतिम चरण में ही की जा सकती है, और वर्तमान में उसकी सजा पूरी नहीं मानी जा सकती. सुप्रीम कोर्ट ने भी निचली अदालतों के रुख को बरकरार रखते हुए उसकी रिहाई की अर्जी खारिज कर दी.
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अभिषेक बनर्जी के PA सुमित रॉय गिरफ्तारः TMC सांसद के घर से CID उठाकर ले गई
पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर बड़ा घटनाक्रम देखने मिला है। सीआई़डी (CID) ने अभिषेक बनर्जी के PA सुमित रॉय को गिरफ्तार किया है। सालबोनी भूमि घोटाला मामले में सुप्रीम कोर्ट से अग्रिम जमानत याचिका खारिज होने के बाद ब तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के निजी सहायक सुमित रॉय के खिलाफ बड़ा एक्शन लेते हुए CID ने साउथ कोलकाता से गिरफ्तार कर लिया।
टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी के निजी सहायक सुमित रॉय पर सालबोनी, पश्चिम मेदिनीपुर में जबरन जमीन कब्जाने का आरोप है। रॉय ने गिरफ्तारी से बचने के लिए अदालत का रुख किया था। उन्होंने अग्रिम जमानत के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल किया था। हालांकि शीर्ष न्यायालय से उन्हें निराशा हाथ लगी।
इससे पहले अदालत ने मामले में नरमी दिखाते हुए रॉय की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी थी। साथ ही अदालत ने यह भी निर्देश दिया था कि रॉय जांच में सहयोग करें और पूछताछ के लिए पुलिस के सामने पेश हों। इस आदेश के बाद माना जा रहा था कि मामला फिलहाल ठंडा पड़ गया है। हालांकि अब शीर्ष न्यायालय के ताजा फैसले ने पूरी स्थिति बदल दी है। कोर्ट का फैसला आते ही कुछ ही देर में सीआईडी की टीम हरकत में आ गई और सीधे अभिषेक बनर्जी के दक्षिण कोलकाता वाले घर पहुंच गई। इसके बाद सीआईडी सुमित रॉय को हिरासत में लेकर अपने साथ ले गई।
जांच एजेंसी का आरोप है कि पश्चिम मेदिनीपुर के सालबोनी क्षेत्र में सरकारी जमीन को कथित रूप से निजी संपत्ति बताकर फर्जी दस्तावेजों के माध्यम से बेचा गया और उससे जुड़े वित्तीय लेनदेन में भारी रकम का इस्तेमाल हुआ है। मामले की जांच के दौरान रॉय के बैंक खातों में करोड़ों रुपये जमा होने की जानकारी भी सामने आई है। सुमित रॉय के बैंक खातों में बड़ी मात्रा में नकदी जमा होने की जानकारी मिली है। सरकार के अनुसार एक लेनदेन में करीब 71 लाख रुपये जमा किए गए थे। जबकि विभिन्न खातों में कुल जमा राशि लगभग 15 करोड़ रुपये बताई गई।
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‘भारत सरकार मेरे साथ अन्याय कर रही है, सोचता हूं ‘कॉकरोच’ बन जाऊं…,’ विजय माल्या ने मोदी सरकार से रखी मांग
बैंकों के बकाया पैसे न चुकाने वाले और सरकार की ओर से भगोड़ा घोषित किए गए विजय माल्या ने अपने ऊपर हो रही कानूनी कार्रवाई को भारत सरकार का अन्याय बताया है। लंदन में रह रहे भारत के भगोड़े कारोबारी विजय माल्या ने भारत सरकार पर अन्याय करने का आरोप लगाया। विजय माल्य़ा ने कहा कि सोचता हूं कॉकरोच बन जाऊं। साथ ही उन्होंने कहा कि ब्रिटेन में चल रही कानूनी प्रक्रिया के कारण वे भारत नहीं लौट पा रहे हैं।
माल्या ने दावा किया कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बॉम्बे हाईकोर्ट में दाखिल हलफनामे में उनसे 14,000 करोड़ रुपए से ज्यादा की वसूली की बात मानी है। विजय माल्या पर किंगफिशर एयरलाइंस के लिए SBI समेत कई बैंकों से करीब ₹9,000 करोड़ का कर्ज लेने और उसे नहीं चुकाने का आरोप है।
भगोड़े कारोबारी विजय माल्या ने सोशल मीडिया एक्स पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के एक हलफनामे का जिक्र किया जिसके बारे में उनका दावा था कि इसे बॉम्बे हाई कोर्ट में दाखिल किया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि एजेंसी ने 14,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की रिकवरी और उसे बैंकों को ट्रांसफर करने की पुष्टि की थी। अगर आपको मुझ पर भरोसा नहीं है तो मेरी बात भूल जाइए। एनफोर्समेंट डायरेक्टोरेट ने जो कहा है, उस पर ध्यान दीजिए। जो लोग सही और सही अकाउंटिंग न्याय में विश्वास करते हैं, कृपया नीचे दी गई टेबल देखें। क्या मैं अब भी उसी तरह का हकदार हूँ जिस तरह मीडिया मुझे बुरा-भला कहता है और एक पत्रकार की स्क्रिप्ट की शुरुआत में ही मुझे धोखेबाज़ कहता है? क्यों न यह पूछना शुरू किया जाए कि मुझे मेरा रिफंड कब मिलेगा?
मैं 1992 से यूनाइटेड किंगडम का स्थायी निवासी
माल्या ने खुद को भगोड़ा कहे जाने पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि बैंक का बकाया चुकाना भारत में उनकी मौजूदगी पर निर्भर नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि जो लोग कहते हैं कि मैं भारत आने से इनकार करने वाला भगोड़ा हूं, उन्हें बता दूं कि मैं 1992 से यूनाइटेड किंगडम का स्थायी निवासी हूं और अभी कानूनी तौर पर इस देश को छोड़ने पर रोक लगी हुई है। यह सब भारत सरकार की पोस्टर बॉय वाली हरकतों से शुरू हुआ, जिन्होंने मेरे मामले में बहुत अन्याय किया है।
उन्होंने आगे लिखा- मेरे ट्वीट्स पर मिले-जुले जवाब देने के लिए आप सभी का धन्यवाद। प्यार और नफ़रत साथ-साथ चलते हैं और मैं इसे सम्मान के साथ स्वीकार करता हूँ, साथ ही आपकी राय भी विनम्रता से स्वीकार करता हूँ। लेकिन जो लोग परमानेंट रेजिडेंसी और सिटिज़नशिप के बीच का अंतर नहीं समझते हैं और जो सोचते हैं कि रीपेमेंट फिजिकल प्रेजेंस पर आधारित होते हैं, कृपया दोबारा सोचें।
14,131.60 करोड़ रुपये की रिकवरी का जिक्र
माल्या ने बॉम्बे हाई कोर्ट में ईडी द्वारा दायर हलफनामे का एक अंश पोस्ट किया और 14,131.60 करोड़ रुपये की राशि की ओर इशारा किया। उन्होंने लिखा- और क्या मैं फिर से कह सकता हूं, सबसे खतरनाक आपराधिक एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय द्वारा अदालत में दायर हलफनामे से पुष्टि होती है कि उन्होंने 2021 में बैंकों को 14,000 से अधिक करोड़ रुपये सौंपे। अगर आपको मुझ पर भरोसा नहीं है तो मैं जो कहता हूं उसे भूल जाइए। प्रवर्तन निदेशालय ने जो कहा उस पर ध्यान दें।
अंत में विजय माल्या ने लिखा- मैंने जितने भी अन्याय झेले हैं और झेल रहा हूँ, उन्हें देखते हुए मैं सोचता हूँ कि क्या मुझे कॉकरोच बन जाना चाहिए। शायद कॉकरोच की तरफ़ बेहतर ज़िंदगी मिल जाए।
भोपाल। अगर आपकी कोई चीज गुम या चोरी हो जाए तो आप मदद मांगने पुलिस के पास जाएंगे। लेकिन क्या हो अगर वही खाकी आपकी चोरी हुई चीज का इस्तेमाल करते दिखे तो… ऐसा ही एक मामला राजधानी भोपाल से सामने आया है जहां एक नर्सिंग ऑफिसर की चोरी हुई स्कूटी महिला पुलिसकर्मी चलाते दिखाई दी। इसका खुलासा तब हुआ जब उनके पास इसका चालान आया।
दरअसल, एयरपोर्ट रोड निवासी 32 वर्षीय नीलू साहू हमीदिया अस्पताल में नर्सिंग ऑफिसर है। 22 अगस्त की सुबह करीब 8.05 बजे वह अपनी नीले रंग की स्कूटी ( MP 04-YY-5579) से ड्यूटी पर पहुंची थीं। अस्पताल के बाहर स्कूटी खड़ी कर वह कार्यालय चली गई। करीब आधे घंटे बाद लौटने पर देखा तो स्कूटी गायब थी। आसपास तलाश के बाद उन्होंने कोहेफिजा थाने में चोरी की रिपोर्ट दर्ज कराई।
उन्होंने यह भी शिकायत में लिखवाया कि स्कूटी पर रखा काले रंग का बैग भी चोरी हो गया था। इसमें आईफोन, सिम कार्ड, पेन ड्राइव, एसबीआई एटीएम कार्ड और कार की डिजिटल चाबी रखी थी। 2026 मॉडल की स्कूटी की कीमत करीब 95 हजार रुपए बताई गई है। मामले में दिलचस्प मोड़ तब आया जब स्कूटी चोरी होने के करीब 11 दिन बाद 2 सितंबर को नीलू के घर ई-चालान पहुंचा।
इसमें रोशनपुरा स्क्वायर पर ट्रैफिक सिग्नल तोड़ने की जानकारी थी। चालान में लगी तस्वीर देखते ही नीलू ने पहचान लिया कि सिग्नल तोड़ने वाली स्कूटी वही है जो उनके घर से चोरी हुई थी। तस्वीर में स्कूटी चलाने वाली युवती पुलिस की वर्दी में दिखाई दे रही है।
अब पुलिस के सामने सबसे बड़ा सवाल युवती की पहचान को लेकर है। जांच की जा रही है कि वह पुलिस विभाग में कार्यरत है या उसने पहचान छिपाने के लिए वर्दी पहनी थी। पुलिस ई-चालान के फोटो, रोशनपुरा चौराहे के सीसीटीवी और चोरी के बाद स्कूटी की गतिविधियों की कड़ी जोड़ रही है।
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एमपी हाईकोर्ट का प्रमोशन में आरक्षण पर अंतरिम फैसला, कहा- 50 प्रतिशत आरक्षण की सीमा न लांघें
जबलपुर. प्रमोशन में आरक्षण को लेकर हाईकोर्ट में सुनवाई हुई. जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने राज्य सरकार को निर्देश दिए कि कर्मचारियों को प्रमोशन दिया जा सकता है, लेकिन आरक्षण की 50 प्रतिशत निर्धारित सीमा का उल्लंघन नहीं होना चाहिए.
हाईकोर्ट ने प्रदेश के मुख्य सचिव को व्यक्तिगत रूप से यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं कि इस मामले या सुप्रीम कोर्ट में लंबित आरबी राय और जरनैल सिंह मामलों में फैसला आने तक प्रमोशन में आरक्षण की 50 प्रतिशत सीमा का सख्ती से पालन हो. सुनवाई के दौरान भोपाल की वेटरनरी सर्जन डॉ. स्वाति तिवारी सहित अन्य की ओर से दायर याचिकाओं पर बहस हुई. याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मनोज शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार की ओर से कर्मचारियों को लगातार प्रमोशन दिए जा रहे हैं. एक बार प्रमोशन मिलने के बाद संबंधित कर्मचारियों को बाद में पदावनत यानी रिवर्ट करना व्यावहारिक रूप से मुश्किल हो जाता है. वरिष्ठ अधिवक्ता ने आरबी राय मामले का हवाला देते हुए कहा कि स्पष्ट कानूनी स्थिति होने के बावजूद अब तक प्रभावित कर्मचारियों को रिवर्ट नहीं किया गया है.
डिवीजन बेंच ने सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक इंद्रा साहनी बनाम भारत संघ फैसले में निर्धारित 50 प्रतिशत आरक्षण की सीमा का उल्लेख किया. कोर्ट ने कहा कि कर्मचारियों को प्रमोशन के लिए विचार किए जाने का अधिकार है, लेकिन आरक्षण की निर्धारित 50 प्रतिशत ऊपरी सीमा का पालन भी जरूरी है. इसे प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से पार नहीं किया जा सकता. कोर्ट ने मुख्य सचिव को निर्देश दिए कि लंबित मामलों में अंतिम निर्णय आने तक प्रमोशन प्रक्रिया में 50 प्रतिशत आरक्षण की सीमा का सख्ती से पालन सुनिश्चित करें. मामले की अगली सुनवाई 1 दिसंबर को होगी. सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता प्रशांत सिंह और अतिरिक्त महाधिवक्ता जान्हवी पंडित ने सरकार का पक्ष रखा.
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ट्रेन और गाड़ियों की टक्कर से 5 लोगों की मौत, सिंगरौली-छिंदवाड़ा और नर्मदापुरम में मचा कोहराम
मध्य प्रदेश के 3 जिलों से भीषण हादसे ने कई जिंदगियां छीन ली। अलग-अलग जगह हुए हादसों में 5 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। वहीं कई लोग घायल हो गए। घटना के बाद मृतकों के परिवार में मातम पसर गया।
ट्रैक पार करते समय ट्रेन ने चपेट में आए 3 लोग, 2 की मौत
सिंगरौली। जिले के थाना बरगवां अंतर्गत ग्राम कसर में रेलवे ट्रैक पार करते समय 3 लोग चपेट में आ गए जिससे 2 लोगों की दर्दनाक मौत हो गयी जबकि तीसरा शख्स जिला अस्पताल में जिंदगी मौत से जूझ रहा है।
घटना कल रात की है जब बरगवां इलाके के कसर रेलवे गेट के पास 3 लोग ट्रैक पार कर रहे थे। इसी बीच दूसरी दिशा से ट्रेन आ गई और यह खौफनाक हादसा हो गया। दुर्घटना में जगनारायण साहू नामक व्यक्ति की मौके पर मौत हो गई। जबकि जगदीश गुर्जर की अस्पताल पहुंचने से पहले सांसें उखड़ गई। तीसरा शख्स बंधु लाल गुर्जर जिला अस्पताल में जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहा है।
घटना की खबर मिलते ही भारी संख्या में ग्रामीण और बरगवां टीआई अनिल पटेल सहित पुलिस टीम मौके पर पहुंची और घायलों को तत्काल एम्बुलेंस से हॉस्पिटल भिजवाया। बताया जा रहा है पिता-पुत्र, एक साथी के साथ अपनी बेटी को पहुंचाने गांव जा रहे थे। जैसे ही तीनों ट्रैक पर पहुंचे, अचानक ट्रेन आ गई। बेटी थोड़ा पीछे होने से बाल बाल बच गई।
छिंदवाड़ा में कार की टक्कर से बाइक सवार की मौत
छिंदवाड़ा। नागपुर रोड स्थित इमलीखेड़ा अंडरपास पर कार की टक्कर से बाइक सवार दो युवक घायल हो गए। हादसे में एक युवक की मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद मौके पर कुछ देर के लिए अफरा-तफरी की स्थिति बन गई।
कार किसी वजह से अनियंत्रित होकर दुर्घटनाग्रस्त हो गई। हादसे में कार को भी नुकसान पहुंचा है। घटना की जानकारी मिलने के बाद संबंधित पुलिस ने मामले की जानकारी जुटाई। हादसा किन परिस्थितियों में हुआ, इसकी जांच की जा रही है। दुर्घटना के कारणों और घायलों की स्थिति को लेकर विस्तृत जानकारी का इंतजार है। इमलीखेड़ा अंडरपास क्षेत्र में लगातार बड़ी संख्या में वाहनों की आवाजाही रहती है।
बोलेरो की ठोकर से बाइक सवार 2 युवकों की उखड़ी सांसें
नर्मदापुरम-पिपरिया स्टेट हाईवे पर सेमरीहरचंद में मंगलवार रात 10:30 बजे पुलिया के मोड़ पर हादसा हो गया। बोलेरो और बाइक की आमने-सामने भिड़ंत हो गई। टक्कर के बाद बोलेरो बाइक समेत सड़क से 5 फीट नीचे उतरकर पलट गई।
हादसे में बाइक सवार चीचली-नरसिंहपुर निवासी चंद्रमोहन कुशवाह और खरचिली-बनखेड़ी निवासी प्रमोद कुशवाह की मौके पर ही मौत हो गई। वहीं बोलेरो चालक गंभीर रूप से घायल हो गया जिसे सोहागपुर अस्पताल में भर्ती कराया गया।
पुलिया के मोड़ पर तेज रफ्तार और स्पीड कंट्रोल न होने के कारण हादसा हुआ है। सेमरीहरचंद चौकी प्रभारी विवेक यादव की टीम ने क्रेन की मदद से बोलेरो को बाहर निकाला और शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा।
जबलपुर। संस्कारधानी जबलपुर के गोहलपुर थाना क्षेत्र से शादी के नाम पर धोखाधड़ी और प्रताड़ना की एक गंभीर वारदात सामने आई है। दुबई में एक नामी आईटी कंपनी में सेल्स मैनेजर के पद पर कार्यरत महिला के साथ उसके ही पति ने करीब 14 लाख रुपये के सोने-डायमंड के जेवर और नकदी हड़प ली। इतना ही नहीं, अब आरोपी पति महिला को अपने साथ रखने से इंकार करते हुए तलाक देने की धमकी दे रहा है। पीड़िता की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
जानकारी के अनुसार, पीड़िता अशविंदर कौर दुबई में आईटी सॉफ्टवेयर कंपनी में सेल्स मैनेजर हैं। उनकी पहचान फेसबुक के माध्यम से जबलपुर के त्रिमूर्ति नगर निवासी सुनील ठाकुर से हुई थी। धीरे-धीरे दोस्ती प्यार में बदली और साल 2020 में दुबई में सुनील से मुलाकात के बाद दोनों लिव-इन रिलेशनशिप में रहने लगे। इसके बाद दोनों ने 23 फरवरी 2025 को जबलपुर के एक गुरुद्वारे में पूरे रीति-रिवाज के साथ सिख परंपरा से शादी कर ली थी।
पीड़िता अशविंदर कौर ने पुलिस को बताया कि शादी के दौरान उन्होंने अपने पति सुनील ठाकुर को लगभग 9.32 लाख रुपये मूल्य के सोने और डायमंड के कीमती जेवर दिए थे, साथ ही 5 लाख रुपये नकद भी सौंपे थे। शादी के कुछ समय बाद ही आरोपी पति का व्यवहार बदल गया और उसने पीड़िता को अपने साथ रखने से साफ मना कर दिया। जब महिला ने अपने जेवर और नकदी वापस मांगी, तो आरोपी उसके साथ विवाद करने लगा और जबरन तलाक देने की धमकियां देने लगा।
पीड़िता की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए गोहलपुर पुलिस ने आरोपी पति सुनील ठाकुर के खिलाफ संबंधित धाराओं में आपराधिक प्रकरण दर्ज कर लिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है और साक्ष्यों के आधार पर आरोपी के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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एक फोटो, अलग-अलग नाम और 2222 से ज्यादा शादी ! करोड़ों के फर्जीवाड़े का खुला राज
टीकमगढ़ मध्यप्रदेश के सिरोंज में विवाह सहायता योजना के कथित करोड़ों फर्जीवाड़े में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की कार्रवाई के बाद एक बार फिर से निवाड़ी जनपद पंचायत में हुए फर्जीवाड़े का जिन्न निकल कर सामने आ गया है। यहां पर कोरोना शादियां कराकर विवाह सहायता काल में तीन साल के भीतर 2222 राशि बांटने का फर्जीवाड़ा सामने आया था।
अब जिम्मेदार इसकी जांच लोकायुक्त द्वारा किए जाने की बात कह रहे है।दरअसल निवाड़ी जनपद पंचायत में 2019 से 2021 के बीच में तीन वर्षों के दौरान 2222 से अधिक विवाह सहायता प्रकरण स्वीकृत किए किए गए थे, जबकि निर्धारित सीमा के अनुसार एक जनपद में वर्ष में करीब 85 प्रकरणों की स्वीकृति का प्रावधान बताया गया है। इस आधार पर स्वीकृत प्रकरणों की संख्या को लेकर सवाल खड़े हुए थे। कोरोना काल के दौरान भवन एवं अन्य संनिर्माण कर्मकार मंडल की विवाह सहायता योजना में नियमों को दरकिनार कर यह गोलमाल किया गया था।
जांच में कुछ ऐसे प्रकरण सामने आने थे, जिनमें एक ही फोटो पर नाम व जाति बदलकर अलग-अलग प्रकरण तैयार किए गए। आरोप है कि कुछ ऐसे लोगों के नाम पर भी राशि निकाली गई, जिनकी शादी पहले ही हो चुकी थी। इतना ही नहीं, कुछ प्रकरणों में सहायता राशि हितग्राही के बजाय अन्य व्यक्ति के खातों में पहुंचाए जाने के आरोप भी हैं।
तत्कालीन कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी के निर्देशन में कुछ विवाह सहायता प्रकरणों की जांच कराई गई थी। जांच के दौरान करीब 85 प्रकरणों में फर्जीवाड़े और अनियमितताओं की बात सामने आई थी। आरोप है कि इनमें एक ही फोटो को अलग-अलग नामों से लगाकर विवाह सहायता राशि स्वीकृत कराई गई। जांच के बाद जनपद पंचायत में रखे विवाह सहायता से संबंधित फार्म एवं रिकॉर्ड जलने और तत्कालीन जनपद पंचायत सीईओ द्वारा इसकी सूचना थाना कोतवाली निवाड़ी को दिए जाने की जानकारी भी सामने आई थी।
जिला पंचायत के निर्देश पर पांच सदस्यीय जांच समिति ने जनपद पंचायत कार्यालय से थाना कोतवाली निवाड़ी को संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करने पत्र भेजा गया था, लेकिन मामला आगे नहीं बढ़ा और कार्रवाई फाइलों तक ही सीमित रह गई।
बारवाहा की रूपाली मिश्रा का कहना है कि सूची में उनका नाम 61वें नंबर पर था, इसके बावजूद राशि खाते में नहीं पहुंची। पिता शोभाराम मिश्रा का आरोप है कि रुपए नहीं देने पर नाम योजना से हटा दिया गया।
सिरोंज मामले के बाद निवाड़ी के मामले में भी ईडी से जांच पर लोगों का कहना है कि इतना बड़ा फर्जीवाड़ा होने, जांच से बचने रेकार्ड जलाने, एफआईआर के लिए पत्र लिखे जाने के बाद भी कार्रवाई न होना बताता है कि मामले में आरोपियों को प्रश्रय दिया जा रहा है।
विवाह सहायता मामले में लोकायुक्त जांच कर रही है। जिला पंचायत सीईओ उसके प्रभारी हैं। लोकायुक्त की जांच के बाद कार्रवाई की जाएगी।- जमुना भिडे, कलेक्टर, निवाड़ी।
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अपनी जगह से टस से मस नहीं हुए हनुमान जी... मंदिर टूटा, लेकिन बजरंगबली की प्रतिमा हटाने में मशीनें भी फेल
उज्जैन। सिंहस्थ कुंभ 2028 की तैयारियों के बीच उज्जैन में सड़क चौड़ीकरण के लिए करीब 170 साल पुराने हनुमान मंदिर का भवन तो तोड़ दिया गया, लेकिन मंदिर में विराजमान हनुमान जी की प्रतिमा को हटाने की कोशिश सफल नहीं हो सकी। आधुनिक मशीनों और तकनीकी विशेषज्ञों की मदद से कई प्रयास किए गए, लेकिन प्रतिमा अपनी जगह से नहीं हिली। मामला कंठाल चौराहे से छत्री चौक यानी बड़ा सराफा मार्ग का है। सिंहस्थ कुंभ 2028 से पहले शहर के पुराने हिस्से में सड़क चौड़ीकरण और यातायात व्यवस्था सुधारने का काम चल रहा है। इसी काम की जद में करीब 170 साल पुराने खड़े हनुमान मंदिर का भवन आया था।
प्रशासन ने मंदिर की चाहरदीवारी और भवन का हिस्सा हटा दिया। इसके बाद हनुमान प्रतिमा को सुरक्षित तरीके से दूसरी जगह ले जाने की कोशिश की गई। प्रतिमा को नुकसान न पहुंचे, इसके लिए तकनीकी विशेषज्ञों की मदद ली गई। इंदौर से इंजीनियरों और विशेषज्ञों की टीम भी बुलाई गई। विशेषज्ञों ने दो दिन तक प्रतिमा के आधार और आसपास की संरचना को समझा और उसे हटाने का प्रयास किया, लेकिन तमाम कोशिशों के बाद भी प्रतिमा अपनी जगह से नहीं हिली। अब प्रतिमा को टेंट लगाकर सुरक्षित रखा गया है। प्रशासन जल्दबाजी में कोई कदम उठाने के बजाय विशेषज्ञों की राय के आधार पर आगे की तकनीक तय करने की तैयारी कर रहा है।
प्रतिमा के आधार की स्थिति जानने के लिए प्रशासन की ओर से करीब डेढ़ फीट गहरा गड्ढा भी खोदा गया है। इसके जरिए यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि प्रतिमा किस तरह स्थापित है और उसके नीचे की संरचना कैसी है। प्रशासन के मुताबिक प्रतिमा को किसी तरह का नुकसान पहुंचाए बिना सुरक्षित तरीके से दूसरी जगह स्थापित करना प्राथमिकता है। प्रस्तावित तौर पर प्रतिमा को टंकी चौक पर स्थापित करने की योजना बताई जा रही है।
प्रतिमा को हटाने की कोशिश की जानकारी स्थानीय लोगों और हिंदू संगठनों तक पहुंचने के बाद विरोध शुरू हो गया। मंगलवार शाम मंदिर परिसर में सैकड़ों श्रद्धालु पहुंचे। यहां महाआरती की गई, ढोल-ताशे बजाए गए और हनुमान चालीसा का पाठ हुआ। श्रद्धालुओं और हिंदू संगठनों का कहना है कि कई कोशिशों के बाद भी जब प्रतिमा अपनी जगह से नहीं हिली तो प्रशासन को इसे हटाने का फैसला दोबारा देखना चाहिए। उनका कहना है कि सड़क चौड़ीकरण जरूरी है, लेकिन प्रतिमा को हटाना ही एकमात्र रास्ता नहीं होना चाहिए।
मंदिर के पुजारी सुलभ शांतनु शर्मा और मंदिर समिति के सदस्यों ने भी प्रतिमा हटाने पर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि मंदिर के दोनों तरफ सड़क मौजूद है, इसलिए प्रशासन को सड़क की योजना पर दोबारा विचार करना चाहिए। पुजारी की मांग है कि अगर प्रतिमा को दूसरी जगह स्थापित करना है तो पहले लिखित में गारंटी दी जाए कि प्रतिमा को बिना किसी नुकसान के सुरक्षित तरीके से टंकी चौक पर स्थापित किया जाएगा। इसके बाद ही प्रतिमा को हटाने की अनुमति दी जाएगी।
उज्जैन के इतिहास और धार्मिक स्थलों के जानकार भगवती लाल राजपुरोहित के मुताबिक मंदिर की उम्र करीब 170 वर्ष बताई जा रही है। प्रतिमा पर लंबे समय से सिंदूर चढ़ाए जाने के कारण उसकी मूल आकृति और भाव-भंगिमा पूरी तरह स्पष्ट नहीं दिखाई देती। प्रतिमा के न हटने के बाद स्थानीय श्रद्धालु इसे भगवान हनुमान की इच्छा मान रहे हैं। वहीं प्रशासन और तकनीकी विशेषज्ञ इसे धार्मिक मान्यता के बजाय तकनीकी और संरचनात्मक चुनौती के रूप में देख रहे हैं। अब प्रशासन के सामने सड़क चौड़ीकरण और श्रद्धालुओं की भावनाओं, दोनों के बीच रास्ता निकालने की चुनौती है।
- 1993 मुंबई बम ब्लास्ट: अबू सलेम को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका, समय से पहले रिहाई की याचिका खारिज
- दुर्गा पूजा से पहले KMC का बड़ा एक्शन, 40 रेस्टोरेंट- स्वीट शॉप के लाइसेंस सस्पेंड
- कोलकाता के कालीघाट मंदिर के गहनों की चाबी 1980 से गायब, 1,000 करोड़ के घोटाले का लगा आरोप
- रोंगटे खड़े करने वाला हत्याकांड: पति ने पत्नी की बेरहमी से हत्या कर सिर काटकर फ्रिज में रखा, उंगलियां भी काटी
- चेन्नई में TVK नेता की बीच सड़क हत्या, 6 लोगों ने धारदार हथियारों से किया ताबड़तोड़ हमला ; मौके पर मौत
- केरल के त्रिशूर में खड़े लॉरी से टकराई कार, तमिलनाडु के 8 छात्रों की भीषण सड़क हादसे में हुई मौत
- डिजिटल अरेस्ट के 42 करोड़ रुपये के नेटवर्क पर सीबीआई की कार्रवाई, 20 राज्यों में 89 ठिकानों पर तलाशी, तीन गिरफ्तार
- राज ठाकरे के बेटे ने सरकारी पॉलिटेक्निक कॉलेज से PM मोदी की फोटो जबरन हटवाई, VIDEO वायरल
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11 September 2026
नई दिल्ली. 1993 के मुंबई सिलसिलेवार बम धमाकों के दोषी और गैंगस्टर अबू सलेम को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है. शीर्ष अदालत ने उसकी समय से पहले रिहाई (Premature Release) की मांग करने वाली याचिका को सिरे से खारिज कर दिया है. इस फैसले के बाद सलेम के फिलहाल जेल से बाहर आने की तमाम उम्मीदों पर विराम लग गया है.उल्लेखनीय है कि 12 मार्च 1993 को मुंबई में हुए 12 सिलसिलेवार बम धमाकों में 257 लोगों की दर्दनाक मौत हुई थी और 800 से अधिक लोग घायल हुए थे.... मध्य प्रदेश
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पांढुर्णा। मध्य प्रदेश के पांढुर्णा जिले में जाम नदी के तट पर कल एक बार फिर सदियों पुरानी और विश्वप्रसिद्ध ‘गोटमार मेले’ का खूनी खेल देखने को मिलेगा। परंपरा और आस्था के नाम पर पांढुर्णा और सावरगांव के लोग आमने-सामने होंगे और एक-दूसरे पर अंधाधुंध पत्थरों की बरसात करेंगे। सिर फोड़ती गोफन, लहूलुहान होते लोग और नदी किनारे बिखरे पत्थर—गोटमार मेले की सालों पुरानी पहचान बन चुके हैं।पोला पर्व के दूसरे दिन आयोजित होने वाले इस मेले की शुरुआत मां चंडिका... अपराध
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गुना। (गरिमा टीवी न्यूज़) गुना जिले के आरोन थाना क्षेत्र अंतर्गत एक कॉलोनी में चोरों ने सूने घर को निशाना बनाया और उसे घर के अंदर रखे सरकारी लैपटॉप सहित लक्ष्मी और लड्डू गोपाल जी की मूर्ति सहित अन्य कीमती सामान चोर चोरी करके ले गए। पुलिस ने मामले में मामला पंजीबद्ध कर जांच में लिया है।
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