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ग्वालियर। अंजान नंबर से दोस्ती, फिर गुड मॉर्निंग-गुड नाइट से बातचीत और इसके बाद वीडियो कॉल तक पहुंचने के आरोपों से जुड़े मामले में स्थानीय रहवासी योगेश गुप्ता का मोबाइल पुलिस जांच के केंद्र में है। सनातन सेना की ओर से दिए गए आवेदन के बाद सामने आए इस मामले में मोबाइल की जांच के दौरान अब तक 32 वीडियो मिलने की बात सामने आई है। इनमें 28 अलग-अलग सनातन से संबंधित वीडियो या डिजिटल सामग्री होने का दावा किया जा रहा है। पुलिस इन वीडियो, चैट और सोशल मीडिया संपर्कों की जांच कर रही है।
आरोप है कि योगेश पहले ऐसे व्हाट्सऐप ग्रुपों में शामिल होता था, जहां बड़ी संख्या में अनजान लोग जुड़े रहते थे। वहां से महिलाओं के नंबर मिलने के बाद वह फेसबुक, इंस्टाग्राम और टेलीग्राम पर उन्हें तलाशता और संपर्क करता था। पहली बातचीत भी सामान्य तरीके से शुरू करने का आरोप है। वह कथित तौर पर कहता था- ‘आपका नंबर मेरे फोन में सेव है, क्या मैं आपको जानता हूं?’ इसके बाद मैसेजिंग के जरिए दोस्ती बढ़ाई जाती थी।
आरोप है कि लगातार संपर्क बनाए रखने के लिए गुड मॉर्निंग-गुड नाइट मैसेज, रील और सामान्य बातचीत का सहारा लिया जाता था। कुछ समय बाद बातचीत निजी होने और वीडियो कॉल तक पहुंचने की बात सामने आई है। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि इस तरह योगेश कितनी महिलाओं के संपर्क में आया और इनमें से कितने मामलों में निजी बातचीत या वीडियो रिकॉर्ड किए गए।
जांच में सोशल क्लबों और सामाजिक संगठनों से जुड़ा एक और एंगल सामने आया है। आरोप है कि योगेश सामाजिक गतिविधियों और कार्यक्रमों के दौरान महिलाओं से परिचय बढ़ाता था और बाद में सोशल मीडिया के जरिए लगातार संपर्क में रहता था। पुलिस अब उसके मोबाइल और सोशल मीडिया अकाउंट्स से मिले डेटा के आधार पर यह पता लगाने में जुटी है कि सोशल क्लबों और संगठनों के माध्यम से उसके संपर्क में कितनी महिलाएं आईं और क्या इनमें से किसी के निजी वीडियो या चैट भी मोबाइल में मौजूद हैं।
मामले में झांसी की एक महिला से करीब डेढ़ साल से संपर्क होने की बात भी सामने आई है। महिला का वैवाहिक विवाद और तलाक का मामला चलने की जानकारी है। आरोप है कि योगेश ने खुद को कंपनी का बड़ा अधिकारी बताकर महिला से दोस्ती बढ़ाई और शादी कर नया जीवन शुरू करने का भरोसा दिया। आरोप है कि हाल ही में महिला को ग्वालियर बुलाया गया। वह अपने छोटे बच्चे के साथ यहां आई थी। होटल में ठहरने के दौरान निजी क्षणों की रिकॉर्डिंग किए जाने का आरोप भी लगाया गया है। हालांकि इस आरोप की पुष्टि पुलिस जांच और महिला की औपचारिक शिकायत के बाद ही हो सकेगी।
मामले में सबसे अहम डिजिटल साक्ष्य योगेश के मोबाइल से मिलने की बात कही जा रही है। जांच में 32 वीडियो और 28 महिलाओं से संबंधित सामग्री मिलने का दावा है। इसके अलावा मोबाइल में कई नंबर, चैट, स्क्रीनशॉट और वीडियो कॉल से जुड़ी सामग्री भी मिलने की बात सामने आई है। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि ये वीडियो किस परिस्थिति में रिकॉर्ड किए गए, संबंधित महिलाओं की अनुमति थी या नहीं और क्या किसी निजी सामग्री को किसी अन्य व्यक्ति के साथ शेयर या सोशल मीडिया पर प्रसारित किया गया।
पुलिस जांच के तीन अहम बिंदु
योगेश कितनी महिलाओं के संपर्क में था और संपर्क का माध्यम क्या था।
मोबाइल में मिले वीडियो किस परिस्थिति में रिकॉर्ड किए गए।
निजी वीडियो या चैट को कहीं शेयर, प्रसारित अथवा दबाव बनाने के लिए इस्तेमाल तो नहीं किया गया।
शिकायत मिलने के बाद तथ्यों पर होगी कार्रवाई
विश्वविद्यालय क्षेत्र के सीएसपी रवि भदौरिया ने कहा कि आरोपी पर फिलहाल स्थानीय स्तर पर कोई औपचारिक फरियाद दर्ज नहीं हुई है। झांसी की एक महिला द्वारा कानूनी कार्रवाई की इच्छा जताने की जानकारी सामने आई है। महिला के औपचारिक रूप से सामने आने और शिकायत देने के बाद तथ्यों के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
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बीच सड़क पर खुलेआम गुंडागर्दी: सरेराह तड़तड़ाईं गोलियां, दहशत के साए में गुजरे 72 घंटे
इंदौर। शहर के कानून-व्यवस्था के दावों पर 1 अक्टूबर की शाम एक बार फिर जोरदार तमाचा पड़ा, जब ग्रीन पार्क कॉलोनी में सरेआम पिस्तौलें चमकीं और गोलियों की तड़तड़ाहट से पूरा इलाका थर्रा उठा। बीच सड़क पर खुलेआम गुंडागर्दी और जान से मारने की नीयत से की गई फायरिंग ने यह साबित कर दिया कि शहर में अपराधियों के दिल से पुलिस का खौफ पूरी तरह खत्म हो चुका है। इससे भी ज्यादा शर्मनाक पहलू यह है कि इस खौफनाक वारदात के बाद पूरे क्षेत्र में 3 दिनों तक दहशत और सन्नाटा पसरा रहा और चंदन नगर पुलिस को इन नामजद और आदतन बदमाशों को ढूंढकर शिकंजे में लेने में पूरे 72 घंटे का लंबा वक्त लग गया। सवाल उठना लाजमी है कि अगर इन तीन दिनों के दौरान ये सिरफिरे बदमाश किसी की जान ले लेते या किसी और बड़ी अनहोनी को अंजाम दे देते, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होती?
सरेराह पिस्टल लहराकर लिखी खौफ की इबारत घटनाक्रम के मुताबिक, फरियादी मोहम्मद समीर खान अपने साथी के साथ एक्टिवा से जा रहा था। पुरानी रंजिश और समझौते के विवाद को लेकर बेखौफ बदमाशों ने ब्लैक थार और एक्टिवा से उनका फिल्मी अंदाज में पीछा किया। आरोपियों ने न केवल उनका रास्ता रोका और जान से मारने की धमकी दी, बल्कि आरोपी मोनू उर्फ मुसेफ ने आव देखा ना ताव और जान से खत्म करने की नीयत से सीधी फायरिंग कर दी। गोली चलते ही क्षेत्र में भगदड़ मच गई और आम नागरिक अपनी जान बचाकर भागने लगे। जब कागज पर सिमट गई पुलिसिया मुस्तैदी: आदतन अपराधियों के आगे लाचार खाकी पकड़े गए आरोपियों का काला चिट्ठा खुद चीख-चीखकर पुलिस गश्त और मुस्तैदी के खोखले दावों की पोल खोल रहा है।
मोनू उर्फ मुसेफ (20 वर्ष): इसके खिलाफ पहले से 06 संगीन आपराधिक मामले दर्ज हैं।
दानिश उर्फ फाइव स्टार (18 वर्ष): इसके खिलाफ 04 आपराधिक मुकदमे लंबित हैं।
अल्फ़ाइज (18 वर्ष): यह भी पहले से 01 अपराध में शामिल रहा है।
इनके साथ एक नाबालिग को भी अपराध की इस भट्ठी में झोंका गया था।
हैरानी की बात यह है कि इन सभी बदमाशों पर पुलिस पहले भी ‘प्रतिबंधात्मक कार्रवाई’ और ‘बाउंड ओवर’ का कागजी चाबुक चला चुकी थी। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि ये अपराधी पुलिसिया कागजों को रद्दी का टुकड़ा समझते हुए हाथों में अवैध देशी पिस्टल और जिंदा कारतूस लेकर बेखौफ घूमते रहे।
वारदात के पूरे 3 दिन बीत जाने के बाद, चंदन नगर पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से एक अवैध देशी पिस्टल, जिंदा राउंड, थार गाड़ी, एक्टिवा और खाली खोखा जप्त करने में सफलता पाई। लेकिन इस कार्रवाई के बाद जारी किया गया आधिकारिक प्रेस नोट पुलिसिया कार्यशैली पर और बड़ा सवाल खड़ा करता है। 3 दिनों तक आम जनता को खौफ और असुरक्षा के साए में छोड़ने के बावजूद, पुलिस की ओर से जारी प्रेस नोट में बेशर्मी से इसे “घटना के चंद घंटों में त्वरित एवं प्रभावी कार्रवाई” करार दिया गया। प्रेस नोट का एक-एक शब्द अधिकारियों और पुलिस टीम की “सराहनीय भूमिका” की अपनी ही पीठ थपथपाने की कहानी गढ़ता नजर आया।
आदतन अपराधी जब सरेआम गोलियां चलाकर आसानी से फरार हो जाते हैं और उन्हें ढूंढने में पुलिस को 72 घंटे पापड़ बेलने पड़ते हैं, तो क्या इसे ‘तत्परता’ कहा जाएगा या खाकी की नाकामी और सुस्त रवैया? फिलहाल पुलिस जप्त पिस्टल की खरीद-फरोख्त और नेटवर्क को खंगालने की रटी-रटाई बात कह रही है, लेकिन चंदन नगर के रहवासी आज भी इस खौफनाक मंजर को भूल नहीं पाए हैं और पुलिस के इस ‘सरकारी ड्रामे’ पर सवाल उठा रहे हैं।

ग्वालियर। जीआरपी ने मानव तस्करी के एक मामले का खुलासा करते हुए चार विदेशी युवतियों समेत छह लोगों को हिरासत में लिया है। पुलिस के अनुसार युवतियों को शादी कराने के नाम पर अवैध तरीके से भारत लाया गया था। इनमें दो युवतियां नाबालिग बताई गई हैं। पुलिस ने मामले में दो युवकों को गिरफ्तार किया है और आगे की जांच शुरू कर दी है। जीआरपी कंट्रोल रूम भोपाल से सूचना मिली थी कि ट्रेन क्रमांक 12643 स्वर्ण जयंती एक्सप्रेस के जनरल कोच में एक संदिग्ध विदेशी युवक सफर कर रहा है। वह कथित तौर पर अवैध रूप से युवतियों को भारत लाकर उनकी शादी कराने के नेटवर्क से जुड़ा है। सूचना पर जीआरपी थाना प्रभारी ने टीम के साथ ट्रेन में चेकिंग की। हुलिए के आधार पर पुलिस ने मुबीन (25), निवासी म्यांमार, हाल निवासी हैदराबाद, को हिरासत में लिया।
पूछताछ में मुबीन ने पुलिस को बताया कि उसका साथी मोहम्मद हसन (35) अलीगढ़ में चार युवतियों के साथ किराए के मकान में रह रहा है। इसके बाद जीआरपी की टीम ने अलीगढ़ पहुंचकर दबिश दी और हसन के कब्जे से चार युवतियों को बरामद किया। पुलिस ने हसन को भी हिरासत में ले लिया। पुलिस के मुताबिक युवतियों को केवल रोहिंग्या/स्थानीय भाषा आती है, जिसके कारण पूछताछ में भाषा की समस्या सामने आई। पुलिस की प्रारंभिक पूछताछ में सामने आया कि युवतियों को बांग्लादेश के कुतुपालोंग रिफ्यूजी कैंप से उनके माता-पिता की सहमति होने की बात कहकर नदी और पहाड़ों के दुर्गम रास्तों से भारत में दाखिल कराया गया। आरोपियों की कथित योजना युवतियों की शादी जम्मू और श्रीनगर में कराने की थी। अब विस्तृत पूछताछ के लिए ट्रांसलेटर की मांग की जा रही है।
इस बारे में जीआरपी टीआई दीपशिखा तोमर ने कहा कि हमें बांग्लादेशियों की सूचना मिली थी, इसके बाद हमने मुख्य आरोपी को स्वर्ण जयंती एक्सप्रेस से गिरफ्तार किया, इसके बाद एक टीम अलीगढ़ भेजी वहां से चार युवतियों एवं दो युवकों को गिरफ्तार किया है। युवतियों को शेल्टर होम में रखा है, आगे की पूछताछ के लिए ट्रांसलेटर मांगा है, इसके बाद ही आगे की कार्रवाई होगी।
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सरकारी गाड़ी देखते ही पिछले दरवाजे से भागा BJP पार्षद का पति!, वार्ड 31 में पुलिस की रेड, 8 पेटी शराब संग 2 गिरफ्तार
दतिया। मध्य प्रदेश के दतिया जिले से एक बड़ी और सनसनीखेज खबर सामने आई है, जहां सिविल लाइन थाना पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर वार्ड क्रमांक 31 की भाजपा पार्षद के घर पर अचानक छापामार कार्रवाई की। पुलिस की इस अचानक हुई दबिश से इलाके में हड़कंप मच गया। जब पुलिस अधिकारियों ने घर के बाहर बनी बाथरूम की तलाशी ली, तो वहां अवैध रूप से छिपाकर रखी गई देशी और अंग्रेजी शराब का बड़ा जखीरा बरामद हुआ।
पुलिस ने मौके से 8 पेटी अवैध शराब बरामद की है, जिसकी अनुमानित बाजार कीमत करीब 50 हजार रुपये बताई जा रही है। कार्रवाई के दौरान पुलिस ने मौके से ही भाजपा पार्षद के देवर मुकेश साहू और उनके साथी दिनेश चतुर्वेदी को धर दबोचा और गिरफ्तार कर लिया।
कार्रवाई के दौरान जैसे ही पुलिस की टीम ने घर को घेरा, भाजपा पार्षद का पति राकेश साहू पुलिस को चकमा देकर मौके से फरार होने में कामयाब हो गया। सिविल लाइन थाना पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए पार्षद के फरार पति राकेश साहू, देवर मुकेश साहू और आरोपी दिनेश चतुर्वेदी के खिलाफ आबकारी अधिनियम की धारा 34 (2) के तहत गंभीर आपराधिक प्रकरण दर्ज कर लिया है।
इस पूरी कार्रवाई को सिविल लाइन थाना प्रभारी वैभव गुप्ता, सब इंस्पेक्टर भास्कर शर्मा और प्रधान आरक्षक धर्मेंद्र शाक्य की टीम ने अंजाम दिया। पुलिस का कहना है कि जब्त शराब कहाँ से लाई गई थी और इसे कहाँ खपाने की तैयारी थी, इसको लेकर गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ की जा रही है। वहीं, फरार चल रहे पार्षद के पति राकेश साहू की गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर दबिश दी जा रही है।
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बीच सड़क पर खुलेआम गुंडागर्दी: सरेराह तड़तड़ाईं गोलियां, दहशत के साए में गुजरे 72 घंटे
इंदौर। शहर के कानून-व्यवस्था के दावों पर 1 अक्टूबर की शाम एक बार फिर जोरदार तमाचा पड़ा, जब ग्रीन पार्क कॉलोनी में सरेआम पिस्तौलें चमकीं और गोलियों की तड़तड़ाहट से पूरा इलाका थर्रा उठा। बीच सड़क पर खुलेआम गुंडागर्दी और जान से मारने की नीयत से की गई फायरिंग ने यह साबित कर दिया कि शहर में अपराधियों के दिल से पुलिस का खौफ पूरी तरह खत्म हो चुका है। इससे भी ज्यादा शर्मनाक पहलू यह है कि इस खौफनाक वारदात के बाद पूरे क्षेत्र में 3 दिनों तक दहशत और सन्नाटा पसरा रहा और चंदन नगर पुलिस को इन नामजद और आदतन बदमाशों को ढूंढकर शिकंजे में लेने में पूरे 72 घंटे का लंबा वक्त लग गया। सवाल उठना लाजमी है कि अगर इन तीन दिनों के दौरान ये सिरफिरे बदमाश किसी की जान ले लेते या किसी और बड़ी अनहोनी को अंजाम दे देते, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होती?
सरेराह पिस्टल लहराकर लिखी खौफ की इबारत घटनाक्रम के मुताबिक, फरियादी मोहम्मद समीर खान अपने साथी के साथ एक्टिवा से जा रहा था। पुरानी रंजिश और समझौते के विवाद को लेकर बेखौफ बदमाशों ने ब्लैक थार और एक्टिवा से उनका फिल्मी अंदाज में पीछा किया। आरोपियों ने न केवल उनका रास्ता रोका और जान से मारने की धमकी दी, बल्कि आरोपी मोनू उर्फ मुसेफ ने आव देखा ना ताव और जान से खत्म करने की नीयत से सीधी फायरिंग कर दी। गोली चलते ही क्षेत्र में भगदड़ मच गई और आम नागरिक अपनी जान बचाकर भागने लगे। जब कागज पर सिमट गई पुलिसिया मुस्तैदी: आदतन अपराधियों के आगे लाचार खाकी पकड़े गए आरोपियों का काला चिट्ठा खुद चीख-चीखकर पुलिस गश्त और मुस्तैदी के खोखले दावों की पोल खोल रहा है।
मोनू उर्फ मुसेफ (20 वर्ष): इसके खिलाफ पहले से 06 संगीन आपराधिक मामले दर्ज हैं।
दानिश उर्फ फाइव स्टार (18 वर्ष): इसके खिलाफ 04 आपराधिक मुकदमे लंबित हैं।
अल्फ़ाइज (18 वर्ष): यह भी पहले से 01 अपराध में शामिल रहा है।
इनके साथ एक नाबालिग को भी अपराध की इस भट्ठी में झोंका गया था।
हैरानी की बात यह है कि इन सभी बदमाशों पर पुलिस पहले भी ‘प्रतिबंधात्मक कार्रवाई’ और ‘बाउंड ओवर’ का कागजी चाबुक चला चुकी थी। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि ये अपराधी पुलिसिया कागजों को रद्दी का टुकड़ा समझते हुए हाथों में अवैध देशी पिस्टल और जिंदा कारतूस लेकर बेखौफ घूमते रहे।
वारदात के पूरे 3 दिन बीत जाने के बाद, चंदन नगर पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से एक अवैध देशी पिस्टल, जिंदा राउंड, थार गाड़ी, एक्टिवा और खाली खोखा जप्त करने में सफलता पाई। लेकिन इस कार्रवाई के बाद जारी किया गया आधिकारिक प्रेस नोट पुलिसिया कार्यशैली पर और बड़ा सवाल खड़ा करता है। 3 दिनों तक आम जनता को खौफ और असुरक्षा के साए में छोड़ने के बावजूद, पुलिस की ओर से जारी प्रेस नोट में बेशर्मी से इसे “घटना के चंद घंटों में त्वरित एवं प्रभावी कार्रवाई” करार दिया गया। प्रेस नोट का एक-एक शब्द अधिकारियों और पुलिस टीम की “सराहनीय भूमिका” की अपनी ही पीठ थपथपाने की कहानी गढ़ता नजर आया।
आदतन अपराधी जब सरेआम गोलियां चलाकर आसानी से फरार हो जाते हैं और उन्हें ढूंढने में पुलिस को 72 घंटे पापड़ बेलने पड़ते हैं, तो क्या इसे ‘तत्परता’ कहा जाएगा या खाकी की नाकामी और सुस्त रवैया? फिलहाल पुलिस जप्त पिस्टल की खरीद-फरोख्त और नेटवर्क को खंगालने की रटी-रटाई बात कह रही है, लेकिन चंदन नगर के रहवासी आज भी इस खौफनाक मंजर को भूल नहीं पाए हैं और पुलिस के इस ‘सरकारी ड्रामे’ पर सवाल उठा रहे हैं।

असम में एक महिला के साथ मारपीट के साथ साथ एक बड़ा ही संगीन मामला सामने आया है. गुवाहाटी में एक नाइट क्लब के बाहर महिला से कथित मारपीट और उसके कपड़े उतारने के मामले को लेकर पुलिस ने मैनेजर और बाउंसर समेत 7 लोगों को गिरफ्तार किया है. पुलिस के अनुसार, महिला के साथ बार के अंदर और बाद में बेसमेंट की ओर ले जाकर मारपीट की गई. गिरफ्तार आरोपितों में तीन महिलाएं हैं.
इस घटना का एक वीडियो शुक्रवार को सोशल मीडिया पर सामने आया. यह घटना बृहस्पतिवार देर रात खानापारा इलाके के एक नाइट क्लब में हुई बताई गई है.
गुवाहाटी के एक नाइटक्लब में महिला से मारपीट और कपड़े उतारने के आरोप में प्रबंधक सहित सात लोगों को गिरफ्तार किया गया है. वायरल वीडियो में महिला बिना कपड़ों के फर्श पर लेटी हुई दिखाई दे रही है और 2 अन्य महिलाएं उसे लात मार रही हैं. उनके साथ कुछ पुरुष भी नजर आ रहे हैं. एक अन्य वीडियो में एक महिला उसे उठाने की कोशिश करती है, तभी एक कार आती है और सारे व्यू ब्लॉक कर देती है.
वायरल वीडियो में एक महिला पार्किंग में जमीन पर पड़ी दिखाई दे रही है. कुछ लोग उसके साथ मारपीट करते नजर आ रहे हैं. बाद में एक अन्य महिला उसे बचाने पहुंचती है। हालांकि, वीडियो की पुष्टि नहीं हुई है.
पुलिस के मुताबिक, क्लब वाली बिल्डिंग में काम करने वाले एक सिक्योरिटी गार्ड ने बताया कि महिला ने क्लब के अंदर एक महिला बाउंसर पर बीयर की बोतल से हमला किया था. वहीं, गिरफ्तार किए जाने वालों में नाइटक्लब मैनेजर, इवेंट मैनेजर और फ्रंट ऑफिस एग्जीक्यूटिव भी शामिल हैं.
घटना का वीडियो इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित होने के बाद पुलिस ने स्वतः संज्ञान लेते हुए जांच शुरू की और आरोपितों को गिरफ्तार किया. फिलहाल पुलिस ने वीडियो के आधार पर मामला दर्ज जांच शुरू कर दी है. शुरुआती रिपोर्टों के मुताबिक, महिला को कथित तौर पर ज़मीन पर गिराया गया, उसके कपड़े उतारे गए और उस जगह के अंदर उसके साथ मारपीट की गई.
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GST चोरी पर नहीं होगी गिरफ्तारी ! कानून में बदलाव पर विचार कर रही है सरकार ; 7 अक्टूबर को फैसला
GST कानून लागू करने के करीब 9 साल बाद अब सरकार इस टैक्स सिस्टम में एक बड़ा बदलाव करने पर विचार कर रही है. सरकार जीएसटी अधिकारियों को मिली गिरफ्तारी की शक्ति हटाने पर विचार कर रही है. इस प्रस्ताव पर 7 अक्टूबर को होने वाली जीएसटी काउंसिल की बैठक में चर्चा हो सकती है. अगर इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो GST से जुड़े मामलों में टैक्स अधिकारियों के पास सीधे गिरफ्तारी करने की मौजूदा शक्ति खत्म हो सकती है. इसके लिए GST कानून में संशोधन करना होगा और सरकार इसे आगामी शीतकालीन सत्र में संसद के सामने ला सकती है. बता दें, 2016 में संविधान में 101 वे संशोधन के साथ यह कानून अस्तित्व में आया था. जबकि 2017 में इसे लागू कर दिया गया था.
मौजूदा GST कानून के तहत गंभीर टैक्स अपराधों के मामलों में गिरफ्तारी का प्रावधान है. खासकर फर्जी बिल बनाना, गलत तरीके से इनपुट टैक्स क्रेडिट लेना और जानबूझकर टैक्स चोरी जैसे मामलों में कार्रवाई हो सकती है. CGST Act की धारा 69 के तहत कमिश्नर को गिरफ्तारी की मंजूरी देने का अधिकार है. इसके लिए अधिकारी के पास ये मानने का पर्याप्त आधार होना चाहिए कि व्यक्ति ने गंभीर GST अपराध किया है.
सरकार ने 2022 में गिरफ्तारी और जमानत को लेकर अधिकारियों के लिए दिशानिर्देश भी जारी किए थे. इनमें कहा गया था कि सिर्फ इसलिए गिरफ्तारी नहीं होनी चाहिए क्योंकि कानून में इसकी अनुमति है. गिरफ्तारी के लिए मामले की गंभीरता और व्यक्ति की भूमिका समेत दूसरे पहलुओं को देखना जरूरी है.
इस बदलाव के पीछे सबसे बड़ी वजह टैक्स अधिकारियों के अधिकारों के गलत इस्तेमाल की शिकायतें बताई जा रही हैं. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक केंद्र और राज्य सरकारों के बीच पिछले करीब 8-9 महीनों से इस मुद्दे पर चर्चा चल रही है. कारोबारियों और कंपनियों की तरफ से GST जांच और गिरफ्तारी को लेकर चिंताएं जताई जाती रही हैं.
खासकर कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारियों की गिरफ्तारी को लेकर उद्योग जगत में सवाल उठते रहे हैं. सरकार अब GST सिस्टम में ऐसा बदलाव चाहती है जिससे गंभीर धोखाधड़ी पर कार्रवाई भी बनी रहे और कारोबारियों को डर का सामना भी न करना पड़े.
आंकड़ों से पता चलता है कि GST कानून के तहत गिरफ्तारी का इस्तेमाल हुआ है. 2021-22 से 2024-25 के बीच 72,393 जीएसटी अपराध के मामले दर्ज हुए और केंद्रीय जीएसटी अधिकारियों ने 887 लोगों को गिरफ्तार किया है. ये आंकड़ा सिर्फ केंद्रीय जीएसटी फॉर्मेशन का है. राज्य GST अधिकारियों की गिरफ्तारियां इसमें शामिल नहीं हैं.
प्रस्तावित बदलाव में गंभीर धोखाधड़ी और जानबूझकर किए गए अपराधों पर कार्रवाई जारी रखने की बात है. फर्क ये हो सकता है कि GST कानून के तहत टैक्स अधिकारी खुद गिरफ्तारी की शक्ति का इस्तेमाल न करें. ऐसे मामलों में आपराधिक कानून के तहत कार्रवाई का रास्ता अपनाया जा सकता है. रिपोर्ट के मुताबिक जानबूझकर किए गए गंभीर फ्रॉड और धोखाधड़ी के मामलों में भारतीय न्याय संहिता के तहत कार्रवाई की जा सकती है.
अब सबकी नजर 7 अक्टूबर की जीएसटी काउंसिल बैठक पर है. इसी बैठक में गिरफ्तारी की शक्ति हटाने के प्रस्ताव पर चर्चा हो सकती है. अगर परिषद से प्रस्ताव आगे बढ़ता है तो जीएसटी कानून में संशोधन की जरूरत होगी. इसके बाद सरकार इसे संसद में ला सकती है. रिपोर्ट के मुताबिक आगामी शीतकालीन सत्र में कानून में बदलाव किया जा सकता है.
अभी फिलहाल तो जीएसटी अधिकारियों की गिरफ्तारी की शक्ति खत्म नहीं हुई है. ये एक प्रस्ताव है और अंतिम फैसला जीएसटी काउंसिल की चर्चा, सरकार के फैसले और आगे होने वाली कानूनी प्रक्रिया के बाद ही साफ होगा.
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CJP प्रदर्शन में नाबालिगों की भागीदारी पर NHRC सख्त, मुंबई पुलिस समेत चार को नोटिस
मुंबई में 2 अक्टूबर को चीफ इलेक्शन कमिश्नर (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ हुए कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन में नाबालिग बच्चों की कथित भागीदारी और उनकी तस्वीरें-वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित किए जाने के मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने संज्ञान लिया है। आयोग ने मामले में मुंबई पुलिस, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY), भारत में X Corp. के ग्रिवांस ऑफिसर और महाराष्ट्र के महिला एवं बाल विकास विभाग को नोटिस जारी किया है।
मामले पर NHRC सदस्य प्रियंक कानूनगो की अध्यक्षता वाली बेंच ने विचार किया। शिकायत सेवा न्याय उत्थान फाउंडेशन के हेड ऑफ इंटरवेंशन सतीश वैद ने दर्ज कराई है।
शिकायत में सोशल मीडिया पर सामने आए कथित कंटेंट का हवाला दिया गया है, जिसमें एक बच्चे को भीड़ के ऊपर उठाए जाने, नारेबाजी और लोगों द्वारा वीडियो रिकॉर्ड किए जाने की बात कही गई है। शिकायत में यह भी आरोप है कि प्रदर्शन से पहले ग्रुप और चैट में नाबालिगों की भागीदारी को लेकर चर्चा हुई थी। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही होगी।
NHRC ने मुंबई पुलिस को तस्वीरों, वीडियो, सोशल मीडिया पोस्ट और अन्य डिजिटल सबूतों की जांच करने को कहा है। आयोग ने निर्देश दिया है कि यदि जांच में कोई कॉग्निजेबल अपराध सामने आता है तो FIR दर्ज की जाए।
पुलिस को यह भी पता लगाने को कहा गया है कि बच्चों को प्रदर्शन में किन परिस्थितियों में शामिल किया गया और आयोजकों, कोऑर्डिनेटरों, साथ मौजूद वयस्कों या अन्य लोगों की इसमें क्या भूमिका थी। कथित ग्रुप और चैट की डिजिटल जानकारी सुरक्षित रखने और उसकी फॉरेंसिक जांच के भी निर्देश दिए गए हैं।
NHRC ने Juvenile Justice (Care and Protection of Children) Act, 2015 की धारा 75 और 83(2) समेत अन्य लागू कानूनों की संभावित प्रासंगिकता की जांच के निर्देश दिए हैं। आयोग यह भी जांचना चाहता है कि कहीं बच्चों की नाबालिग स्थिति का इस्तेमाल पुलिस कार्रवाई से बचने या उसे सीमित करने के लिए तो नहीं किया गया।
महाराष्ट्र के महिला एवं बाल विकास विभाग को बच्चों की सुरक्षा, देखभाल और जरूरत पड़ने पर उन्हें सक्षम बाल कल्याण समिति (CWC) के सामने पेश करने के निर्देश दिए गए हैं। बच्चों को काउंसलिंग, मनोसामाजिक सहायता, देखभाल और पुनर्वास उपलब्ध कराने को भी कहा गया है।
NHRC ने सोशल मीडिया पर बच्चों की तस्वीरों और वीडियो के प्रसार की भी जांच के निर्देश दिए हैं। X Corp. और MeitY से संबंधित डिजिटल सबूत सुरक्षित रखने तथा लागू बाल-सुरक्षा और कंटेंट मॉडरेशन नियमों के अनुपालन की जानकारी मांगी गई है। सभी संबंधित अधिकारियों से एक सप्ताह के भीतर Action Taken Report (ATR) मांगी गई है।

रतलाम। रतलाम जिले के जावरा से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। यहां खुद को धार्मिक नेता बताने वाले का एक होटल से जुड़ा हाई-वोल्टेज वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में पीड़ित पत्नी अपने पति को एक अन्य महिला के साथ होटल के कमरे में रंगे हाथ पकड़ती और जमकर हंगामा करती नजर आ रही है।
जानकारी के मुताबिक, पत्नी को अपने पति पर शक था, जिसके बाद उसने पति का पीछा किया और उसे जावरा स्थित एक होटल के कमरे में दूसरी महिला के साथ पकड़ लिया। इसके तुरंत बाद पत्नी ने डायल-112 पुलिस को मौके पर बुला लिया। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में पत्नी अपने पति और साथ मौजूद महिला पर तीखी नाराजगी जताते हुए पति को थप्पड़ मारती हुई भी दिखाई दे रही है।
पीड़ित पत्नी का आरोप है कि विजय दगदी आचार्य ने उससे लव मैरिज की थी, लेकिन शादी के बाद अब वह दूसरी महिला के साथ होटल के कमरे में रंगरेलियां मना रहा था। पत्नी की शिकायत पर कार्रवाई करते हुए औद्योगिक क्षेत्र थाना जावरा पुलिस ने आरोपी पति विजय दगदी आचार्य के खिलाफ मारपीट और संबंधित संगीन धाराओं के तहत आपराधिक प्रकरण दर्ज कर लिया है।
मामले की जांच में यह बात भी निकलकर सामने आई है कि आरोपी पति विजय दगदी आचार्य इलाके में सक्रिय केसरिया शक्ति संगठन नाम से एक हिंदू संगठन चलाता है और खुद को उसका राष्ट्रीय पदाधिकारी बताता है। इस घटना का वीडियो सामने आने के बाद इलाके में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की वैधानिक जांच में जुटी है।

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चोरी के संदेह में मां-बेटे को थाने लाई पुलिसः पति ने थाना परिसर में लगाई आग, देर रात इलाज के दौरान मौत
कटनी। जिले के कुठला थाना परिसर में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब चोरी के एक मामले में पूछताछ के लिए पत्नी और बेटे को थाने लाए जाने से नाराज एक व्यक्ति ने खुद पर पेट्रोल छिड़ककर आग लगा ली। झुलसी हालत में उसे तत्काल जिला अस्पताल पहुंचाया गया, जहां से गंभीर स्थिति को देखते हुए जबलपुर रेफर कर दिया गया। हालांकि, इलाज के दौरान देर रात उसकी मौत हो गई।
पुलिस के अनुसार, 12 सितंबर को कुठला थाने में सोने-चांदी के जेवरात और नकदी चोरी का मामला दर्ज हुआ था। मामले की जांच करते हुए पुलिस ने मोहित पटेल और मुकेश उर्फ लाला पटेल को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। आरोपियों की निशानदेही पर पुलिस ने कुछ मशरुका भी बरामद किया था।
डीएसपी अनिमेष द्विवेदी ने बताया कि पूछताछ के दौरान मुख्य आरोपी मोहित ने स्वीकार किया था कि उसने चोरी का कुछ सामान अपनी मां को दिया था। जांच में पता चला कि महिला ने सराफा बाजार में संजय सोनी नाम के सुनार को कुछ जेवरात बेचे थे। जब पुलिस ने महिला से पूछताछ की, तो उसने एक सोने की अंगूठी अपने पास होने की बात कबूल की और उसे पुलिस को सौंपने का भरोसा दिया।
पुलिस का पक्ष: डीएसपी के मुताबिक, पूछताछ के दौरान महिला लगातार अपने पति दलपत पटेल को फोन कर रही थी। पुलिस का दावा है कि दलपत पटेल ने चोरी का सामान जब्त होने से बचाने और बेटे को छुड़ाने के लिए दबाव बनाने की नीयत से ऑटो से थाने पहुंचकर खुद को आग लगाई। वहीं मृतक के परिजनों ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि पुलिस महिला और मासूम बच्ची को बार-बार फोन कर थाने बुला रही थी और उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रही थी। पुलिस ने परिजनों के आरोपों को जांच का विषय बताया है और पूरे घटनाक्रम की सूक्ष्मता से जांच की जा रही है।
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सांसद ने दिया ‘हम दो, हमारे पांच’ का नारा: बोले- ‘कम से कम 5 बच्चे पैदा करें हिंदू, कांग्रेस बोली- देश में दंगा कराना चाहती है BJP
बड़वानी। जनसंख्या के मुद्दे पर बीजेपी सांसद गजेंद्र सिंह पटेल ने बड़ा बयान दिया है। हिंदू समाज की घटती जन्मदर पर चिंता जताते हुए सांसद ने युवाओं से समय पर शादी करने और पांच-पांच बच्चे पैदा करने की अपील की। हम दो और हमारे पांच का नारा भी दिया। सांसद ने कहा कि सभी हिंदुओं को एकजुट रहना चाहिए। भाजपा सांसद ने कहा कि बदलती डेमोग्राफी को गंभीरता से समझने की जरूरत है। धर्मातरण को भी उन्होंने डेमोग्राफी में बदलाव की वजह बताया है।
दरअसल खरगोन-बड़वानी के सांसद गजेंद्र पटेल ने एक कार्यक्रम में ‘हम दो, हमारे पांच’ का नारा दिया। उन्होंने कहा कि हर हिंदू को कम से कम 5 बच्चे पैदा करने चाहिए। सांसद गजेंद्र पटेल ने कहा कि जनसंख्या की जो जन्म दर है. वह हमारी 1.9 है। वहीं दूसरे समाज की जन्म दर 2.9 है। इसका मतलब यह है कि अगर चार बच्चे जन्म लेते हैं, तो हमारे हिंदू समाज में एक बच्चा जन्म लेता है, जबकि दूसरे समाज के तीन बच्चे पैदा होते हैं। हमारे बढ़ने का ग्राफ कम हुआ है, जबकि दूसरे समाज का ग्राफ बढ़ा है। कहा कि कालिका मंदिर समिति का हर हिंदू युवा शादी भी करे और 5-5 बच्चे भी पैदा करे। व्यायाम शाला और अखाड़ों को बढ़ावा देना होगा।
सांसद ने कहा कि कई लोग हमारे हिंदू समाज के धर्मातरण में हो गए हैं। पहले शादियां 20 – 22 साल में हो जाती थीं। अब युवा 30 से 35 साल में भी शादी नहीं कर रहे। और अगर शादी कर भी रहे हैं तो एक ही बच्चे को जन्म दे रहे हैं। कई लोग शादी के बाद बच्चा भी नहीं कर रहे हैं, चाहे लड़का हो या लड़की। यह जो 1.9 की हमारी सनातनी जन्मदर आ रही है, इसका कारण है। और कई लोग हमारे हिंदू समाज के धर्मातरण में हो गए हैं। कई कारण से डेमोग्राफी चेंज हो गई है, इसको गंभीरता से समझना पड़ेगा।
सांसद ने कहा कि सनातन संस्कृति में जहां एक तरफ देवी-देवता आशीर्वाद देते हैं, वहीं उनके हाथों में शस्त्र भी दिखाई देते हैं। इसलिए हिंदुओं को शास्त्र के ज्ञान के साथ-साथ आवश्यकता पड़ने पर शस्त्र उठाना भी आना चाहिए। अपने संबोधन में उन्होंने कहा— “मैं सांसद बाद में हूं, आपका भाई पहले हूं। मैं चाहता हूं कि आप सब लोग माता की भक्ति के साथ-साथ अपने परिवार और मोहल्ले की शक्ति को भी एकत्रित करें। हम ही अपने परिवार और अपने मोहल्ले के रक्षक हैं।”
कांग्रेस ने कहा कि भाजपा सांसद का बयान पार्टी की सोच को दर्शाता है..वह हिंदू मुस्लिम को बांटना चाहती है और देश में दंगे करवा कर और देश को पीछे ले जाना चाहती है इसके अलावा भाजपा के पास कोई एजेंडा नहीं है गलत आंकड़ों के जरिए हिंदू मुस्लिम भाईचारे को भाजपा खत्म करना चाहती है। संसद के बयान पर भाजपा ने बचाव करते हुए कहा कि कांग्रेस शब्दों को विवादित बयान बता रही है। क्या वह दूसरे धर्म से संबंध रखने वाले लोग जिनको अपना वोट बैंक मानते आए हैं। उन लोगों से क्या इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए या फिर इस तरह के वातावरण को निषेध करने के लिए कोई अपील कर सकते हैं। कांग्रेस कभी नहीं कर पाएगी बयान को डेमोग्रेफ़िक आंकड़ों की तरह देखा जाए।

अनूपपुर। मध्यप्रदेश के अनूपपुर जिले के अमोदा गांव में एक ही परिवार के चार लोगों की मौत से सनसनी फैल गई। पुलिस के मुताबिक 32 वर्षीय प्रेम सिंह गोंड ने शनिवार सुबह अपने परिवार के लोगों पर डंडे से हमला कर दिया। हमले में उसकी नानी भन्नी बाई गोंड, नाना संपत सिंह गोंड, मां अनूपिया बाई और मामा की बेटी मोनिका की मौत हो गई। घटना में आरोपी के मामा और उनकी दूसरी बेटी घायल हैं जिनका शहडोल अस्पताल में इलाज चल रहा है। पुलिस ने आरोपी को हिरासत में लेकर पूरे घटनाक्रम की जांच शुरू कर दी है।
पुलिस के अनुसार प्रेम सिंह गोंड पिछले कुछ समय से अपनी मां के साथ अपने नाना-नानी के घर रह रहा था। शुक्रवार रात उसने गांव के मंदिर के पुजारी के साथ भी मारपीट की थी। इसके बाद ग्रामीणों ने उसे पकड़ लिया और दोबारा किसी को नुकसान पहुंचाने से रोकने के लिए उसके हाथ-पैर रस्सी से बांध दिए थे। रात की इस घटना के बाद गांव में स्थिति तनावपूर्ण रही। इसके बाद सुबह घर में हुई वारदात ने पूरे इलाके को झकझोर दिया।
पुलिस के मुताबिक शनिवार सुबह करीब 4 से 5 बजे के बीच अनूपिया बाई ने प्रेम सिंह के हाथ-पैर में बंधी रस्सियां खोल दी थीं। इसके बाद उसने पास में रखे डंडे से घर के लोगों पर हमला कर दिया। हमले में उसकी नानी 70 वर्षीय भन्नी बाई गोंड, नाना 75 वर्षीय संपत सिंह गोंड और मां 50 वर्षीय अनूपिया बाई गंभीर रूप से घायल हो गए। पुलिस के अनुसार तीनों की मौके पर ही मौत हो गई। इसके बाद आरोपी ने अपने मामा और उनकी दो बेटियों पर भी हमला किया। इस घटना में तीनों घायल हुए और उन्हें इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया।
हमले में घायल मामा और उनकी दोनों बेटियों को उपचार के लिए शहडोल अस्पताल ले जाया गया। इलाज के दौरान मोनिका ने दम तोड़ दिया। वहीं, उसके मामा और उनकी दूसरी बेटी का उपचार जारी है। इस तरह इस वारदात में परिवार के कुल चार लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि दो लोग घायल हैं।
घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस टीम अमोदा गांव पहुंची और घटनास्थल को सुरक्षित कर जांच शुरू की। फॉरेंसिक टीम ने मौके से जरूरी साक्ष्य जुटाए और घटनास्थल तथा आसपास के इलाके की भी जांच की। मृतकों के शवों का पंचनामा तैयार कर पुलिस ने आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है। पुलिस घटना से जुड़े सभी पहलुओं और उपलब्ध साक्ष्यों को जांच में शामिल कर रही है।
पुलिस अब शुक्रवार रात मंदिर के पुजारी के साथ हुई मारपीट से लेकर शनिवार सुबह परिवार के सदस्यों पर हुए हमले तक के पूरे घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ रही है। जांच में यह भी पता लगाया जा रहा है कि आरोपी ने परिवार के लोगों पर हमला किन परिस्थितियों में किया और इस वारदात के पीछे क्या वजह थी। फिलहाल पुलिस ने प्रेम सिंह गोंड को हिरासत में ले लिया है और उससे पूछताछ की जा रही है। अमोदा गांव में हुई इस वारदात के बाद इलाके में दहशत और शोक का माहौल है। एक ही परिवार के चार लोगों की मौत से परिजन और ग्रामीण सदमे में हैं। पुलिस की जांच पूरी होने के बाद ही घटना के कारण और पूरे घटनाक्रम की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
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बड़ा हादसा : 100 फीट नीचे नदी में समाई कार, अंदर फंसे थे 5 लोग, आधी रात चला रेस्क्यू
सिंगरौली. मध्य प्रदेश के सिंगरौली में शुक्रवार-शनिवार की देर रात एक बहुत बड़ा हादसा होते-होते टल गया. बैढऩ से शासन की ओर जा रही तेज रफ्तार कार अंधे मोड़ के पास पहुंचकर अचानक अनियंत्रित हो गई और सीधा 100 फीट नीचे नदी में जा गिरी.
स्थानीय लोगों की सूचना और पुलिस पेट्रोल टीम ने तत्काल पुलिस बल बुलाकर रस्सी के माध्यम से कार में सवार पांचों लोगों को बाहर निकाला और जिला अस्पताल लेकर आए. सभी लोग सुरक्षित हैं बताए जा रहे हैं. अगर समय रहते कार सवारों को नदी से बाहर नहीं निकाला जाता तो जानहानि भी हो सकती थी.
दरअसल पूरी घटना सिंगरौली जिले के कोतवाली थाना क्षेत्र अंतर्गत शासन के मयार नदी पुल के पास की है. जहां शुक्रवार-शनिवार की देर रात 1:00 बजे कार में सवाल होकर पांच लोग बैढऩ से शासन की ओर जा रहे थे. उस वक्त कार की रफ्तार बहुत तेजी में थी. सामने अंधा मोड था जहां कार अनियंत्रित होकर 100 फीट नीचे मयार नदी में जा गिरी.
राहत की बात यह रही कि जैसे ही यह हादसा हुआ वहां से पुलिस की पेट्रोलिंग टीम गुजर रही थी. जिसने तत्काल पुलिस को सूचना दी. बल बुलाकर रस्सी और अन्य माध्यम से नदी में गिरे कार सवार लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया. पांचों को इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया. जहां वह सुरक्षित हैं. पुलिस के अनुसार यह हादसा ड्राइवर के नींद आने की वजह से हुआ है. साथ ही कार की रफ्तार भी बहुत अधिक थी. घटना का जो वीडियो सामने आया है उसमें साफ दिख रहा है कि कार नदी में पूरी तरह अंदर चली गई थी.
कोतवाली थाना प्रभारी अभिमन्यु द्विवेदी ने बताया कि, देर रात हमें हादसे की सूचना मिली थी. यह गाड़ी शुक्रवार- शनिवार की देर रात 1 बजे के लगभग बैढऩ से शासन की ओर जा रही थी. उसी समय तीखे मोड़ पर तेज रफ्तार यह वाहन अनियंत्रित होकर नदी में जा गिरी, जिसमें पांच लोग सवार थे. सभी को बचा लिया गया है. फिलहाल पुलिस इस हादसे का कारण जानने में जुटी हुई है. हादसे के दौरान घटना स्थल पर लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा. लोग अपने वाहन खड़े करके रेस्क्यू को देखते रहे. इस दौरान ट्रैफिक जाम के भी हालात बने.
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नाबालिग से पानी में नशीला पदार्थ पिलाकर 5 लड़कों ने किया गैंगरेप, पुलिस ने 2 आरोपियों को दबोचा
उज्जैन। धर्मनगरी उज्जैन के चिमनगंज थाना क्षेत्र से एक बेहद सनसनीखेज और शर्मसार कर देने वाला मामला सामने आया है। यहाँ एक 16 वर्षीय नाबालिग लड़की के साथ सामूहिक दुष्कर्म की खौफनाक वारदात को अंजाम दिया गया है। पीड़िता को पानी में नशीला पदार्थ मिलाकर पिलाया गया और फिर 5 लड़कों ने बारी-बारी से उसके साथ दरिंदगी की। मामले का खुलासा तब हुआ जब दो दिनों से लापता नाबालिग किसी तरह अपने घर पहुँची और परिजनों को आपबीती सुनाई।
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, पीड़िता 9वीं कक्षा तक पढ़ी है और फिलहाल पढ़ाई छोड़ चुकी है। 26 सितंबर को वह अचानक अपने घर से लापता हो गई थी। परिजनों ने काफी खोजबीन की, लेकिन जब कोई सुराग नहीं लगा तो 28 सितंबर को चिमनगंज थाने में अपहरण की रिपोर्ट दर्ज कराई गई। इसके बाद 30 सितंबर को पीड़ित नाबालिग खुद लहूलुहान और बदहवास हालत में घर लौटी और परिजनों को रो-रोकर पूरी घटना बताई।
पीड़िता के परिजनों के मुताबिक, 5 लड़कों ने उसे अपनी हवस का शिकार बनाया। आरोपियों ने पहले उसे पीने के पानी में कोई नशीला पदार्थ मिलाकर पिला दिया, जिससे वह अचेत हो गई। इसके बाद सभी लड़कों ने बारी-बारी से उसके साथ दुष्कर्म किया। परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने पीड़िता का तत्काल मेडिकल कराया, जिसकी रिपोर्ट के आधार पर मामले में गैंगरेप और पॉक्सो एक्ट (की गंभीर धाराएं जोड़ी गईं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए चिमनगंज थाना पुलिस ने तुरंत कार्रवाई की। पीड़िता द्वारा बताए गए सुराग के आधार पर पुलिस ने जीवाजीगंज क्षेत्र के एक नाबालिग आरोपी को पकड़ा, जिसने पूछताछ में अपना जुर्म कबूल कर लिया। उसे बाल संप्रेक्षण गृह भेज दिया गया है। वहीं, मुख्य बालिग आरोपी 19 वर्षीय लक्की (पिता जुगल किशोर) निवासी महावीरनगर को भी गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया गया, जहाँ से उसे जेल भेज दिया गया है।
मामले की जानकारी देते हुए एएसपी आलोक शर्मा ने बताया कि घटना में कुल 5 आरोपी शामिल हैं, जिनमें से 4 नाबालिग (उम्र 16 से 17 वर्ष) और 1 बालिग है। दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि फरार चल रहे 3 अन्य नाबालिगों की तलाश में पुलिस टीमें लगातार दबिश दे रही हैं और जल्द ही उन्हें भी पकड़ लिया जाएगा।

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गरिमा के जन्म के 15 मिनिट बाद का फोटो
गरिमा के जन्म के 15 मिनिट बाद का फोटो
गरिमा के 1 वर्ष बाद का फोटो
गरिमा के 1 वर्ष बाद का फोटो
गरिमा के 2 वर्ष बाद का फोटो
गरिमा के 2 वर्ष बाद का फोटो
बीमार होने के बाद भोपाल अस्पताल मे भर्ती गरिमा
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हाई कोर्ट के आदेश के बाद गरिमा के शव को जमीन से निकालते हुऐ
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निकालने के बाद गरिमा के शव को पैक कर जॉच के लिऐ भेजा गया
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दोषी डॉक्टर के खिलाफ मामला कायम कराने के लिऐ पुलिस अधिक्षक से मिले पत्रकार
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गरिमा के शव की जॉच होने के बाद पुनः उसी स्थान पर चबूतरा का निर्माण किया गया
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पूजा स्थल मे गरिमा
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