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जबलपुर। मध्य प्रदेश के जबलपुर में पुलिस और प्रशासन ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए अवैध लिंग परीक्षण के बड़े रैकेट का पर्दाफाश किया है। ऑपरेशन गरिमा के तहत की गई इस कार्रवाई में अधारताल स्थित डॉ. आर.के. अग्रवाल के आर.के. डायग्नोस्टिक सेंटर पर छापा मारकर कई अहम सबूत बरामद किए गए। कार्रवाई के बाद सेंटर को सील कर दिया गया। इसके अलावा अधारताल स्थित डॉ. अग्रवाल के एक अन्य डायग्नोस्टिक सेंटर को भी सील कर दिया गया।
जानकारी के अनुसार, कार्रवाई को सफल बनाने के लिए दो महिला पुलिसकर्मियों को गर्भवती बनाकर सेंटर भेजा गया। यहां कथित तौर पर ₹15 हजार में गर्भ में पल रहे शिशु का लिंग बताने का सौदा तय हुआ। जांच के दौरान ऐसे कई सबूत मिले, जिनसे अवैध लिंग परीक्षण किए जाने की पुष्टि होने का दावा किया गया।
इतना ही नहीं, आरोप है कि यदि गर्भ में बेटी होने की जानकारी मिलती थी तो गर्भपात (अबॉर्शन) कराने के लिए अलग से रकम लेने की बात भी कही जाती थी। यह पूरा ऑपरेशन अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (एएसपी) अनु बेनीवाल के नेतृत्व में संचालित किया गया। फिलहाल पुलिस ने डायग्नोस्टिक सेंटरों को सील कर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। मामले में संबंधित दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों की जांच की जा रही है। जांच के आधार पर आगे और लोगों की भूमिका भी सामने आ सकती है।

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युवक-युवती का हाईवोल्टेज ड्रामा: गुस्से में लड़की ने बीच सड़क उतारे कपड़े...
ग्वालियर। मध्य प्रदेश के ग्वालियर शहर के अलकापुरी इलाके से एक असहज कर देने वाला मामला सामने आया है। यहां युवक और युवती के बीच हुए विवाद का एक CCTV वीडियो सामने आया है, जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में दोनों के बीच पहले बहस और फिर हाथापाई होती दिखाई दे रही है।
बताया जा रहा है कि विवाद के दौरान गुस्से में युवती ने अपने कपड़े उतार दिए। इसके बाद वह रोती हुई भी दिखाई दी। वहीं, युवक उसे शांत कराने और कपड़े पहनाने की कोशिश करता नजर आया। हालांकि कुछ देर बाद युवती ने दोबारा कपड़े पहन लिए। घटना किस वजह से हुई, इसे लेकर अभी तक कोई स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है। हालांकि पूरे घटनाक्रम का CCTV फुटेज सामने आने के बाद मामला पुलिस के संज्ञान में पहुंच गया है।
यूनिवर्सिटी थाना पुलिस ने वीडियो के आधार पर जांच शुरू कर दी है। पुलिस आसपास के लोगों से पूछताछ कर रही है और CCTV फुटेज की भी जांच की जा रही है। जांच के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति और विवाद की वजह स्पष्ट हो सकेगी।
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नेताजी के ‘बधाई वाले पोस्टर’ अब ले जाएंगे जेल? अवैध होर्डिंग्स-बैनरों पर हाईकोर्ट सख्त, अफसरों पर भी होगी FIR
भोपाल। मध्य प्रदेश में जन्मदिन, स्वागत और बधाई के नाम पर अवैध होर्डिंग्स-बैनरों से शहरों को बदरंग करने वाले नेताओं और उनके समर्थकों पर इंदौर हाईकोर्ट ने चाबुक चलाया है। हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए सख्त आदेश जारी किया है कि सार्वजनिक स्थानों पर लगे सभी राजनीतिक, धार्मिक और सामाजिक अवैध पोस्टरों को 24 घंटे के भीतर हटाया जाए।
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि निर्धारित समय सीमा में अवैध होर्डिंग्स नहीं हटाए गए तो इसके लिए संबंधित नगर निगम के ज़िम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सीधी दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। अदालत का यह आदेश इंदौर के साथ-साथ राजधानी भोपाल और प्रदेश के सभी शहरों में लागू होगा।
राजधानी भोपाल और इंदौर समेत प्रदेश के लगभग सभी छोटे-बड़े शहरों के चौराहे, डिवाइडर और बिजली के खंभे स्थानीय नेताओं की पब्लिसिटी का अड्डा बने हुए हैं।
शहरों की रंगत हो रही खराब: सीनीयर नेताओं को खुश करने के लिए पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं द्वारा लगाए जा रहे अवैध पोस्टरों और कटआउट्स से शहर की खूबसूरत सड़कें और चौराहे पूरी तरह बदरंग हो चुके हैं।
हाईकोर्ट ने नगर निगम और स्थानीय पुलिस प्रशासन को बेहद सख्त निर्देश दिए हैं। हाईकोर्ट का कहना है कि शिकायत दर्ज होते ही नगर निगम के अमले को 24 घंटे के भीतर मौके से अवैध बैनर-होर्डिंग हटाने होंगे।
यदि किसी एजेंसी या व्यक्ति के स्वीकृत होर्डिंग के ऊपर बिना अनुमति के किसी नेता या संगठन का पोस्टर चिपकाया जाता है तो ऐसा करने वालों पर सीधी एफआईआर दर्ज की जाएगी। हाईकोर्ट ने कहा कि नगर निगम का अमला ढिलाई बरतता है तो संबंधित क्षेत्र के अधिकारियों पर कोर्ट के आदेश की अवहेलना की कार्रवाई होगी।

उज्जैन. पंचायती निर्मोही अणि अखाड़ा से जुड़े महामंडलेश्वर ज्ञान दास महाराज मुसीबत में फंस गए हैं. उन पर एक महिला ने दुष्कर्म, मारपीट और जान से मारने की धमकी के आरोप लगाए हैं. वहीं, ज्ञानदास महाराज ने इस मामले को ब्लैकमेलिंग व हनीट्रैप से जुड़ा बताया है. पुलिस दोनों ओर से की गई शिकायतों की जांच करने में जुटी है.
महिला ने पुलिस को दी शिकायत में कहा है कि महामंडलेश्वर ज्ञान दास महाराज से उसकी दोस्ती फेसबुक पर हुई थी. इसके बाद दत्त अखाड़ा पर पहली मुलाकात हुई. विगत वर्ष गुरु पूर्णिमा पर वह उज्जैन पहुंची. इसके बाद वह वहीं रहने लगी. इसी दौरान ज्ञानदास महाराज ने उसके साथ दुष्कर्म किया. विरोध करने मारपीट की व जान से मारने की धमकी दी. उसके अश्लील वीडियो बनाकर प्रताडि़त किया जाने लगा. महिला ने ज्यादती की शिकायत गृह मंत्री, डीजीपी, आईजी व एसपी से भी की है.
ज्ञानदास का कहना है महिला ने उनसे 20-25 लाख रुपये व आश्रम अपने नाम करने की मांग रखी. महिला द्वारा लगाए गए आरोप निराधार हैं. महिला पिछले एक वर्ष से ब्लैकमेल कर रही है. इसकी शिकायत मैंने महाकाल थाने पर की थी. इसके बाद महिला ने दुष्कर्म की शिकायत पुलिस से की. महिला द्वारा मेरे पर हमला भी करवाया गया था, जिस दिन मेरी गाड़ी पर हमला हुआ था, उसके पहले शाम को आश्रम पर पत्थरबाजी भी महिला और उसके प्रेमी द्वारा की गई.
महामंडलेश्वर का कहना है महिला द्वारा लगातार मोटी रकम की डिमांड की जा रही है. महिला ने मेरे ऊपर शादी का भी दबाव बनाया. उसने कहा था अगर नहीं करोगे तो दुष्कर्म के केस में जेल भिजवा दूंगी. महिला ने उन पर शादी के लिए लगातार दबाव बनाया और कहा कि इसके बाद सारा मैटर खत्म हो जाएगा. मैंने शादी भी कर ली. अब वह हिस्सा मांग रही व बदनाम कर रही है. महाकाल थाना प्रभारी गगन बादल ने बताया दोनों ने एक-दूसरे के खिलाफ शिकायत की है. महिला ने दुष्कर्म कर वीडियो बनाने मारपीट करने के साथ ही धमकी के आरोप लगाए हैं. महामंडलेश्वर ने महिला पर ब्लैकमेल करने के आरोप लगाए हैं. दोनों शिकायतों की जांच की जा रही है.
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मंदिर में मांस रखने पर बवालः तांत्रिक के कहने पर अमीर बनने के चक्कर में..., आरोपी रज्जाक को पुलिस ने भेजा जेल
खंडवा। मध्य प्रदेश के खंडवा जिले की पंधाना तहसील अंतर्गत स्थित प्रसिद्ध शिव और हनुमान मंदिर में मांस का टुकड़ा फेंके जाने के मामले में पुलिस ने मुख्य आरोपी रज्जाक (पिता गनी खान) को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। आरोपी ने पूछताछ में चौंकाने वाला खुलासा करते हुए बताया कि उसने अमीर बनने की चाहत में एक तांत्रिक बाबा के बहकावे में आकर मंदिर में मांस रखा था। हालाँकि, पुलिस प्रशासन का कहना है कि आरोपी की मानसिक स्थिति की भी तकनीकी जाँच कराई जाएगी।
मंदिर जैसी पवित्र जगह पर इस तरह की नापाक हरकत सामने आते ही पूरे पंधाना क्षेत्र में भारी हड़कंप मच गया और स्थानीय लोगों व हिंदू संगठनों में आक्रोश फैल गया। घटना के विरोध में बड़ी संख्या में हिंदू संगठनों के पदाधिकारी और कार्यकर्ता पंधाना थाने पहुँचे और पुलिस प्रशासन के खिलाफ विरोध दर्ज कराते हुए थाने का घेराव कर दिया। प्रदर्शनकारी आरोपी पर सख्त से सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे थे। मौके पर पहुंचे वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने आक्रोशित लोगों को जल्द व कड़ी कानूनी कार्रवाई का ठोस आश्वासन दिया, जिसके बाद स्थिति नियंत्रण में आई।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि घटनास्थल से मिले साक्ष्यों, सीसीटीवी फुटेज और अन्य कड़ियों को जोड़ते हुए आरोपी रज्जाक की पहचान की गई और उसे हिरासत में लिया गया। पूछताछ के दौरान अपराध स्वीकार करने के बाद आरोपी को न्यायालय के समक्ष पेश किया गया, जहां से कोर्ट के आदेश पर उसे जेल भेज दिया गया है। पुलिस अब मामले में संलिप्त तांत्रिक के एंगल सहित सभी पहलुओं की गहनता से जांच कर रही है।
महेंद्र तारनेकर, ASP ने बताया-आरोपी को साक्ष्यों के आधार पर गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया है। आरोपी के बयानों और उसकी मानसिक स्थिति की भी निष्पक्ष जांच की जा रही है। शांति और सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश करने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी।
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7 अगस्त से पूरे प्रदेश में शुरू होगा जन विश्वास अभियान, मंत्री, विधायक, कलेक्टर,अधिकारी गांव-वार्डों में पहुंचकर सुनेंगे समस्याएं
भोपाल। मध्यप्रदेश की डॉ. मोहन सरकार ने जन समस्याओं के त्वरित समाधान और सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए ‘जन विश्वास अभियान’ शुरू करने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में यह अभियान 7 अगस्त से पूरे प्रदेश में शुरू होगा और हर शुक्रवार संचालित किया जाएगा। अभियान के तहत मंत्री, जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी गांवों एवं शहरी वार्डों में पहुंचकर आम जनता से सीधे संवाद करेंगे, उनकी समस्याएं सुनेंगे और सरकारी योजनाओं के जमीनी क्रियान्वयन की समीक्षा करेंगे। इसका उद्देश्य शासन को जनता के और करीब लाना तथा प्रशासनिक जवाबदेही और पारदर्शिता को मजबूत करना है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में हुए निर्णय अनुसार अब प्रत्येक शुक्रवार मंत्रालय, जिला और संभाग स्तर पर नियमित बड़ी बैठकें नहीं होंगी। इसके बजाय मंत्री, जनप्रतिनिधि और अधिकारी अपने-अपने क्षेत्रों में जाकर लोगों से सीधे संवाद करेंगे। अभियान के दौरान विभिन्न विभागों की योजनाओं की प्रगति की समीक्षा भी की जाएगी, ताकि पात्र हितग्राहियों तक समय पर योजनाओं का लाभ पहुंच सके।
जनविश्वास अभियान का मुख्य उद्देश्य जन शिकायतों के त्वरित निराकरण के साथ शासन और जनता के बीच विश्वास को मजबूत करना है। अधिकारी ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में पहुंचकर लोगों की समस्याएं सुनेंगे तथा जहां संभव होगा, वहीं उनका समाधान करेंगे। जिन मामलों में तत्काल समाधान संभव नहीं होगा, उनका समयबद्ध निराकरण सुनिश्चित किया जाएगा।
लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने कैबिनेट के निर्णयों की जानकारी देते हुए कहा कि जनविश्वास अभियान सुशासन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे सरकार और जनता के बीच सीधा संवाद बढ़ेगा और योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता आएगी। उन्होंने बताया कि मंत्री अपने प्रभार वाले जिलों से अभियान की शुरुआत करेंगे।
अभियान के दौरान यदि किसी स्तर पर भ्रष्टाचार, अनियमितता या लापरवाही सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी। अभियान का मूल मंत्र संवाद, समाधान, संवेदनशीलता और सादगी रहेगा। इसके लिए किसी अतिरिक्त बजट का प्रावधान नहीं किया गया है और अनावश्यक तामझाम से भी बचा जाएगा। सरकार की प्रदेशवासियों से अपील की है कि वे इस अभियान का लाभ उठाते हुए अपनी समस्याएं, शिकायतें और सुझाव सीधे अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों के समक्ष रखें। सरकार का मानना है कि प्रशासन के सीधे जनता के बीच पहुंचने से शिकायतों के समाधान में तेजी आएगी, योजनाओं की प्रभावी निगरानी होगी और शासन व्यवस्था अधिक पारदर्शी एवं जवाबदेह बनेगी।
मध्य प्रदेश सरकार पहले भी जनकल्याण शिविरों और विभिन्न जनसंपर्क कार्यक्रमों के माध्यम से सरकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने का प्रयास करती रही है। जनविश्वास अभियान को इसी दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। सरकार का विश्वास है कि यह पहल न केवल योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करेगी, बल्कि शासन और जनता के बीच विश्वास के रिश्ते को भी और मजबूत बनाएगी।

नई दिल्ली। NEET पेपर लीक को लेकर देशभर में हुए छात्र प्रदर्शनों और उन पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने अहम टिप्पणी करते हुए कई महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए प्रदर्शनकारियों को अंतरिम राहत दी है। अदालत ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज FIR में फिलहाल किसी भी तरह की दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगा दी है। इसके साथ ही केंद्र सरकार और सात राज्यों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है। सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि पूरे मामले में ऐसे कई आरोप सामने आए हैं जिनकी निष्पक्ष जांच जरूरी है।
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि जिन प्रदर्शनकारियों की उम्र 18 वर्ष से कम है और जिनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है, उन्हें तत्काल रिहा किया जाए। अदालत ने माना कि नाबालिगों के साथ कानून के अनुसार संवेदनशील व्यवहार किया जाना चाहिए और बिना पर्याप्त आधार के उन्हें हिरासत में रखना उचित नहीं है। कोर्ट ने यह भी आदेश दिया कि जिन राज्यों में प्रदर्शन हुए हैं, वहां मौजूद सभी डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखा जाए ताकि भविष्य की जांच में किसी तरह की बाधा न आए।
पीठ ने सभी संबंधित राज्यों को निर्देश दिया कि प्रदर्शन से जुड़े CCTV फुटेज, ड्रोन रिकॉर्डिंग, बॉडी कैमरा फुटेज, वायरलेस कम्युनिकेशन रिकॉर्ड और PCR लॉग को सुरक्षित रखा जाए। अदालत ने यह भी कहा कि प्रदर्शनकारियों से जुड़ा यदि कोई डिजिटल डेटा या अन्य जानकारी एकत्र की गई है तो उसे सुरक्षित रखा जाए, लेकिन उसे सार्वजनिक नहीं किया जाए। कोर्ट ने माना कि डिजिटल साक्ष्य किसी भी स्वतंत्र जांच का महत्वपूर्ण आधार बन सकते हैं और इन्हें नष्ट होने से बचाना जरूरी है।
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि विभिन्न याचिकाओं में कई समान आरोप सामने आए हैं। इनमें एक 19 वर्षीय युवक की आंख की रोशनी पैलेट गन के इस्तेमाल से जाने का मामला भी शामिल है। अदालत के सामने इलेक्ट्रिक बैटन के इस्तेमाल, गंभीर रूप से घायल एक युवती के ICU में भर्ती होने, वकीलों पर हमले और एक मीडिया कर्मी के साथ कथित मारपीट के आरोप भी रखे गए। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि यदि इन आरोपों में सच्चाई है तो यह गंभीर चिंता का विषय है और इसकी स्वतंत्र जांच आवश्यक है।
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार यह एक शांतिपूर्ण छात्र प्रदर्शन था, जिसमें संविधान के दायरे में रहते हुए कुछ मांगें उठाई जा रही थीं। उन्होंने यह भी कहा कि कई बार ऐसे प्रदर्शनों में कुछ ऐसे लोग शामिल हो जाते हैं जिनका अपना अलग एजेंडा होता है और बाद में वही माहौल बिगाड़ने की कोशिश करते हैं। हालांकि अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि पुलिसकर्मियों के परिवारों की ओर से भी याचिकाएं दाखिल की गई हैं, जिनमें पुलिस पर हमले के आरोप लगाए गए हैं। इसलिए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच जरूरी है।
याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने अदालत को बताया कि यह केवल दिल्ली तक सीमित मामला नहीं है बल्कि देशभर में हुए छात्र प्रदर्शनों से जुड़ा मुद्दा है। उन्होंने अदालत के सामने एक वीडियो का हवाला देते हुए दावा किया कि उसमें एक सहायक उप निरीक्षक (ASI) खुद एक कार के शीशे तोड़ता दिखाई दे रहा है। उनका कहना था कि यदि जिम्मेदारी केवल निचले स्तर तक सीमित रही तो जवाबदेही तय नहीं हो पाएगी। वरिष्ठ अधिवक्ता शादान फरासत ने अदालत को बताया कि कई पुलिसकर्मी बिना नाम की पट्टी के ड्यूटी पर मौजूद थे, जिससे उनकी पहचान करना मुश्किल हो गया।
बिहार से जुड़े मामलों का उल्लेख करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता शादान फरासत ने कहा कि वहां हालात दिल्ली से भी अधिक गंभीर रहे। उन्होंने अदालत को बताया कि राज्य सरकार ने कुछ FIR वापस लेने का दावा किया है, लेकिन इसके बावजूद 140 से अधिक लोग अब भी हिरासत में हैं। इनमें बड़ी संख्या 16 से 18 वर्ष के किशोरों की है, जबकि एक 13 वर्षीय बच्चे का भी मामला सामने आया। उनका आरोप था कि इन नाबालिगों को 40 घंटे से अधिक समय बाद मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया।
वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने अदालत को बताया कि जुनैद मलिक नाम का एक युवक केवल प्रदर्शनकारियों को भोजन पहुंचाने गया था, लेकिन उसे हिरासत में लेकर आंखों पर पट्टी बांधकर मसूरी हाईवे पर छोड़ दिया गया। उन्होंने दावा किया कि उसके परिवार से भी पूछताछ की गई। वहीं वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान ने अदालत के सामने यह मुद्दा उठाया कि जंतर-मंतर क्षेत्र में सुबह चार बजे पत्थरों से भरा ट्रक कैसे पहुंचा। उन्होंने कहा कि यदि ट्रक दिल्ली पुलिस की कई सुरक्षा परतों को पार करके अंदर पहुंच गया तो इसकी जवाबदेही तय होनी चाहिए। वरिष्ठ अधिवक्ता वृंदा ग्रोवर ने भी अदालत से कहा कि यदि पुलिस को ही यह जानकारी नहीं है कि ट्रक वहां कैसे पहुंचा, तो यह पूरे घटनाक्रम पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
श्याम दीवान ने अदालत के सामने यह मुद्दा भी रखा कि प्रदर्शन के दौरान यदि चेहरा पहचानने वाली तकनीक (Facial Recognition) का इस्तेमाल किया गया है तो उससे जुटाए गए डेटा का उपयोग प्रदर्शनकारियों की प्रोफाइलिंग के लिए नहीं होना चाहिए। इस पर अदालत ने भी कहा कि प्रदर्शनकारियों से जुड़ा कोई भी डेटा सार्वजनिक नहीं किया जाएगा और उसे केवल सुरक्षित रखा जाएगा ताकि जांच प्रभावित न हो।
सुनवाई के दौरान जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने पुलिसकर्मियों के सुरक्षा उपकरणों को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि भीड़ नियंत्रण के दौरान आक्रामक हथियारों की तुलना में सुरक्षात्मक उपकरण अधिक महत्वपूर्ण हैं। अदालत ने संकेत दिया कि भविष्य में ऐसी घटनाओं से निपटने के लिए पुलिस व्यवस्था की भी समीक्षा की जानी चाहिए।
सुनवाई के अंत में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि उपलब्ध तथ्यों और आरोपों को देखते हुए सबसे संयमित शब्दों में भी यह कहा जा सकता है कि मामले की स्वतंत्र जांच आवश्यक दिखाई देती है। अदालत ने संकेत दिया कि पूरे घटनाक्रम की जांच के लिए उच्च स्तरीय समिति या विशेष जांच दल (SIT) गठित किया जा सकता है। फिलहाल केंद्र सरकार और सात राज्यों से जवाब तलब किया गया है और मामले की अगली सुनवाई में आगे की कार्रवाई तय होगी।
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नक्सलियों को बड़ा झटका, 6 इनामी समेत 16 माओवादियों ने किया सरेंडर, हथियार पुलिस को सौंपे
रांची. झारखंड में नक्सल विरोधी अभियान के तहत पुलिस को बड़ी कामयाबी मिली है. मंगलवार को रांची में प्रतिबंधित भाकपा (माओवादी) संगठन से जुड़े 16 नक्सलियों ने झारखंड पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया. आत्मसमर्पण करने वालों में छह इनामी नक्सली शामिल हैं, जिन पर कुल 39 लाख रुपये का इनाम घोषित था. इस समूह में पांच महिला नक्सली भी शामिल हैं.
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, आत्मसमर्पण करने वालों में संगठन का एक क्षेत्रीय समिति (रीजनल कमेटी) सदस्य, एक जोनल कमेटी सदस्य, दो सब-जोनल कमेटी सदस्य और दो एरिया कमेटी सदस्य भी शामिल हैं. इसे राज्य में नक्सल उन्मूलन अभियान की महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है.
आत्मसमर्पण करने वालों में सबसे प्रमुख नाम संतोष महतो उर्फ बसुदेव दा उर्फ दिलीप का है. वह प्रतिबंधित भाकपा (माओवादी) का रीजनल कमेटी सदस्य था और उसके ऊपर 15 लाख रुपये का इनाम घोषित था. पुलिस के मुताबिक, संतोष महतो 128 आपराधिक मामलों में वांछित था. उसके ऊपर एक मार्च को मनोहरपुर, छोटानगर और झारियाकेला थाना क्षेत्र की सीमा से लगे जंगल में आईईडी विस्फोट की घटना में शामिल होने का भी आरोप है. इस विस्फोट में कोबरा बटालियन का एक जवान घायल हो गया था.
आत्मसमर्पण करने वालों में जोनल कमेटी सदस्य चंदन लोहरा भी शामिल है. उसके खिलाफ 78 मामले दर्ज हैं और उस पर 10 लाख रुपये का इनाम घोषित था. पुलिस का मानना है कि उसके आत्मसमर्पण से संगठन की गतिविधियों को बड़ा झटका लगेगा.
आत्मसमर्पण के दौरान नक्सलियों ने पुलिस के समक्ष बड़ी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद भी जमा कराया. इनमें छह इंसास राइफल, दो एके-47 राइफल, 38 मैगजीन और 1,562 कारतूस शामिल हैं. पुलिस का कहना है कि आत्मसमर्पण करने वाले सभी नक्सलियों से पूछताछ की जा रही है और उन्हें सरकार की पुनर्वास नीति के तहत आगे की प्रक्रिया में शामिल किया जाएगा.
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‘जो राम मंदिर का चढ़ावा नहीं बचा बचा सके, वे पेपर लीक कैसे बचाएंगे…,’ अखिलेश यादव बोले- प्रधान को हटाकर के प्रधानमंत्री को बचा लिया
संसद के लोकसभा में पेपर लीक कानून संशोधन बिल पर चर्चा हो रही है। चर्चा में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच शब्दों के बाण छोड़े जा रहे हैं। सपा चीफ अखिलेश यादव ने भी पेपप लीक चर्चा में भाग लेकर केंद्र की मोदी सरकार पर हमला बोला। अखिलेश यादव ने कहा कि जो राम मंदिर का चढ़ावा नहीं बचा बचा सके, वे पेपर लीक कैसे बचाएंगे। उन्होंने कहा कि बीजेपी ने प्रधान को हटाकर के प्रधानमंत्री को बचा लिया। सरकार की नियत साफ होगी, तब जाकर पेपर साफ होगा।
अपने संबोधन की शुरुआत करते हुए सपा चीफ अखिलेश यादव ने कहा कि आंदोलन को बहुत दूर से देख रहा था. उस आंदोलन में जीत के बाद एक नारा लगा, सरकार के खिलाफ नारा लगा कि सरकार को अहंकार था कि सरकार झुकती नहीं है। नई पीढ़ी ने नारा दिया कि सरकार भी झुकती है, झुकानेवाला चाहिए। सरकार झुक गई है।
खिलेश यादव ने कहा कि करोड़ों युवाओं की मांग थी कि धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दें। धर्मेंद्र प्रधान अब मंत्री नहीं है। जब वे सदन लौटे हैं तो उनका स्वागत हुआ। हमें स्वागत से समस्या नहीं है। कितनी राहत मिली होगी कि एक प्रधान जी को हटाकर के प्रधानमंत्री बचा लिए आपने। यह सरकार कई वर्षों से नकारात्मक राजनीति करती थी। कितने हजार करोड़़ रुपये नकारात्मक प्रचार के लिए खर्चा किया, युवा पीढ़ी को बधाई देता हूं कि युवाओं ने झुका दिया।
अखिलेश यादव ने कहा कि अगर हम यह मानें कि 20 लाख बच्चों ने परीक्षा दी थी। अगर यह मानें कि एक परिवार में पांच लोग हों, तो एक करोड़ लोग होते हैं। हम राजनीतिक लोग हैं. आंदोलन करते हैं तो देखते हैं कि कितनी तैयारी करनी पड़ती है। पहला आंदोलन देखा, जिसमें बच्चों के मां-बाप ने कहा कि जाओ, आंदोलन करो. अगर यह गलत बात है, तो गृह मंत्री को लाइए, वे सब साफ कर देते हैं। जो लोग चढ़ावा नहीं बचा सके, वो लोग पेपर लीक कैसे बचा पाएंगे. भगवान के दरबार से दान गायब हो गया। लोगों की आंखों में धूल झोंक रहे हैं। 20 परीक्षाएं लीक हो गईं। कोर्ट जाना पड़ा, इसके बाद परीक्षाएं रद्द हुईं। यूपी टीईटी का एक नहीं, तीन बार पेपर लीक हुआ। अखिलेश यादव ने पेपर लीक की घटनाओं का सिलसिलेवार तरीके से उल्लेख किया और कहा कि जहां से प्रधानमंत्री चुनकर आते हैं, उस यूपी में भी पेपर लीक हो रहा है। हमें आउटसोर्सिंग से डर लगता है, कहीं ऐसा न हो कि पूरी सरकार आउटसोर्स हो जाए। यही अकाउंटिबिलिटी है आपकी, कि सबसे महत्वपूर्ण संस्था को आउटसोर्स किए हुए हैं आप। एनटीए में सब आउटसोर्स. हमें पता होना चाहिए कि वो कौन लोग थे, जो एनटीए में बैठकर घोटाला कर रहे थे।
अखिलेश की स्पीच पर किरण रिजिजू ने कहा, अखिलेशजी तो समाजवादी हैं। मैं पूछना चाहता हूं कि छात्रों के आंदोलन के बाद सरकार बिल लेकर आती है, ये अच्छा है या आंदोलन के बाद सरकार उसे कुचलने के लिए इमरजेंसी लगा देती है, वो अच्छा है? अखिलेश यादव का जवाब- इमरजेंसी तो नहीं देखी,लेकिन इमरजेंसी में क्या-क्या हुआ वो दिल्ली में भी देखने को मिल गया। याद दिला दूं इमरजेंसी के बाद परिवर्तन हुआ था इस बार भी परिवर्तन होगा।

हरदा। चोरी की पूरी वारदात घर में लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हुई है, जिसके आधार पर पुलिस जांच कर रही है। सूचना मिलते ही टिमरनी पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी। लगातार हो रही चोरी की घटनाओं से ग्रामीणों में दहशत का माहौल है और रात्रि गश्त बढ़ाने की मांग उठ रही है।
पीड़ित किसान रूप सिंह जाट ने बताया कि बदमाश खिड़की के रास्ते घर में घुसा। उस समय परिवार के सदस्य घर के अंदर सोते रहे। चोर एक पेटी उठाकर ले गया, जिसमें करीब 20 तोला सोना, चांदी की ज्वैलरी और लगभग 3 लाख रुपये नकद रखे थे। चोरी गए सामान की अनुमानित कीमत करीब 60 लाख रुपए बताई जा रही है।
पीड़ित किसान रूप सिंह जाट ने बताया कि चोर ने अलमारी का सामान भी बिखेर दिया। इतना ही नहीं, वारदात को अंजाम देने से पहले उसने गांव में विजेश जाट और आनंद जाट के घर भी घुसने का प्रयास किया, लेकिन वहां चोरी करने में सफल नहीं हो सका। चोरी की यह वारदात घर में लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हुई है, जिससे पुलिस को अहम सुराग मिलने की उम्मीद है। वहीं किसान ने कहा कि ग्राम पंचायत में लगे सीसीटीवी कैमरे चालू नहीं हैं। अगर गांव में स्ट्रीट लाइट और कैमरे चालू होते तो चोर अन्य जगह भी कैमरे में कैद हो जाता।
सुबह जब परिवार के लोगों की नींद खुली तो घर का सामान बिखरा मिला और आभूषणों, नकदी से भरी पेटी गायब थी। सूचना पर टिमरनी पुलिस मौके पर पहुंची, मौका पंचनामा तैयार किया और जांच शुरू कर दी। पुलिस अन्य सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी खंगाल रही है। हालांकि, यह पहली घटना नहीं है। ग्रामीणों के अनुसार करीब सात माह पहले भी गांव में चोरी हुई थी, जिसका अब तक खुलासा नहीं हो सका है।
लगातार हो रही चोरियों से ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में लगातार हो रही चोरी की घटनाओं के चलते बदमाशों में पुलिस का खौफ कम होता नजर आ रहा है। ग्रामीणों ने पुलिस प्रशासन से रात्रि गश्त बढ़ाने, संदिग्धों पर सख्त निगरानी रखने और जल्द से जल्द चोरों को गिरफ्तार करने की मांग की है। अब देखना होगा कि सीसीटीवी में कैद चोर तक पुलिस कितनी जल्दी पहुंच पाती है या फिर यह मामला भी पुराने मामलों की तरह लंबी जांच तक सीमित रह जाएगा। टिमरनी थाना उप निरीक्षक उदय चौहान ने बताया कि- चोरी की सूचना मिली थी। पुलिस टीम गांव पहुंची है। जांच कर रहे हैं कि कितने का माल चोरी हुआ है। आसपास के सीसीटीवी कैमरे खंगाल रहे हैं। चोरों की तलाश जारी है।
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लोकायुक्त की बड़ी कार्रवाई: 19 हजार रिश्वत लेते रोजगार सहायक रंगे हाथों गिरफ्तार, इस काम के लिए मांगी थी घूस
जबलपुर। एमपी के जबलपुर जिले के बरगी थाना अंतर्गत ग्राम पंचायत तिनसी में लोकायुक्त पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक रिश्वतखोर रोजगार सहायक को रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। आरोपी रोजगार सहायक दिलीप साहू को मकान का पट्टा बनवाने के एवज में 19 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए पकड़ा गया है।
जानकारी के अनुसार, पीड़िता राजकुमारी परस्ते ने अपने मकान का शासकीय पट्टा बनवाने के लिए ग्राम पंचायत में आवेदन दिया था। आरोप है कि पट्टा जारी कराने और प्रक्रिया आगे बढ़ाने के एवज में रोजगार सहायक दिलीप साहू ने पीड़िता से 20,000 रुपये रिश्वत की मांग की थी।
परेशान होकर पीड़िता राजकुमारी परस्ते ने इसकी शिकायत जबलपुर लोकायुक्त पुलिस से कर दी। शिकायत के सत्यापन के बाद लोकायुक्त टीम ने योजनाबद्ध तरीके से घेराबंदी की। जैसे ही पीड़िता सोमवार को ग्राम पंचायत भवन तिनसी पहुंची और रिश्वत की पहली किस्त के रूप में 19,000 रुपये रोजगार सहायक दिलीप साहू को दिए, वैसे ही घात लगाए बैठी लोकायुक्त पुलिस टीम ने उसे रंगे हाथों दबोच लिया।
रिश्वत लेते पकड़े जाने के बाद लोकायुक्त पुलिस ने आरोपी रोजगार सहायक के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। मौके पर कागजी कार्रवाई पूरी की जा रही है और मामले की आगे की जांच जारी है।

ग्वालियर। ग्वालियर - चंबल में डकैतों का खौफ दोबारा पनपने लगा है। 9 महीने पहले गुर्जा गांव (तिघरा) में घुसकर गनप्वाइंट पर गर्भवती महिला को अगवा करने वाले डकैत कल्ली गुर्जर ने रविवार को दिनदहाड़े एबी रोड को दहला दिया। डकैत और उसके साथियों ने दिल्ली से भोपाल परचून लेकर जा रहे ट्रक को बंदूकों की नोंक रोककर चालक से टैरर टैक्स मांगा और पैसा नहीं देने पर डकैत गैंग ने कंटेनर के 12 टायर गोली मारकर फोड़ दिए। ड्राइवर को धमकी दी कि अपने मालिक से कह देना है हाइवे पर चलना है तो उसे पैसा देना पड़ेगा। डकैतों के खुलेआम हाइवे पर फायरिंग से दहशत हो गई एबी रोड से निकल रहे वाहन थम गए। खुलेआम आतंक मचाकर डकैत गिरोह सिंघाईगढ़ा गांव के कच्चे रास्ते से भाग गया।
डकैत कल्ली गुर्जर और उसके तीन साथियों ने आतंक रविवार दोपहर करीब 11.30 बजे सिरसा गांव से कुछ दूर सिंघाईगढ़ा गांव (मोहना और घाटीगांव के बीच) मचाया। घनश्याम सिंह गुर्जर निवासी नजीराबाद भोपाल ने बताया, वह गुरुकृपा ट्रांसपोर्ट कंपनी में ड्राइवर की नौकरी करते हैं। 26 जुलाई को हेल्पर चेतराम तोमर के साथ कंटेनर आरजे 11 जीबी 8882 में परचून भरकर दिल्ली से भोपाल जा रहे थे। दोपहर को सिरसा गांव क्रास कर सिंघाईगढा से गुजर रहे थे तब सफेद रंग की बिना नंबर की जीप से डकैत कल्ली गुर्जर और उसके साथी ट्रक का पीछा करते हुए। डकैतों ने ट्रक को ओवर टेक कर रोककर वारदात की।
धनश्याम सिंह ने बताया, जीप से उतरकर डकैतों ने बंदूकें तान दीं। गैंगलीडर का कल्ली गुर्जर निवासी बरवासिन, मुरैना और उसके दो साथी थे। गैंग ने पैसा मांगा लेकिन उन्हें पैसा नहीं दिया तो डकैत कल्ली गुर्जर ने 12 बोर की बंदूक से कंटेनर के टायर फायरिंग कर दी। उसने अंधाधुंध गोलियां चलाकर कंटेनर के 12 टायर फोड दिए और कांच को गोली मारकर चकनाचूर कर दिया। उसके बाद डकैत गैंग धमकी देकर भाग गई।
डकैत कल्ली गुर्जर और उसके साथी योगी गुर्जर ने नौ महीने पहले तिघरा के गुर्जा गांव में घुसकर अंधाधुंध गोलियां चलाई थीं। आतंक मचाकर डकैत गैंग गांव में रहने वाले बृजलाल गुर्जर की गर्भवती बहू को अगवा कर ले गया था। इस वारदात में डकैत योगी गुर्जर सहित उसके कुछ साथी पकड़े गए थे लेकिन मास्टरमाइंड कल्ली गुर्जर फरार था। रविवार को उसने दिनदहाड़े फिर वारदात कर दी।
एएसपी देहात जयराज कुबेर का कहना है कि, वारदात मोहना और घाटीगांव के बीच में रविवार दोपहर की है। ट्रक चालक की शिकायत पर केस दर्ज किया है। डकैतों की तलाश की जा रही है।
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बड़ा खुलासा: फर्जी इंटरनेशनल कॉल सेंटर का भंडाफोड़, अमेरिकी नागरिकों से ठगी करने वाले 4 शातिर गिरफ्तार
ग्वालियर। जिले की मोहना पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए फर्जी इंटरनेशनल कॉल सेंटर का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने मौके से अमेरिकी नागरिकों से ऑनलाइन लोन दिलाने के नाम पर साइबर ठगी करने वाले 4 शातिर आरोपियों को रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। यह गिरोह एनएच-46 स्थित ‘जैनपथ होटल’ के कमरों से पिछले 5 महीनों से अपना नेटवर्क चला रहा था।
पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि मोहना थाना क्षेत्र के जैनपथ होटल में संदिग्ध गतिविधियां चल रही हैं। सूचना मिलते ही जब पुलिस ने होटल के कमरा नंबर-6 में दबिश दी, तो वहां चार युवक लैपटॉप पर काम करते मिले। पूछताछ और जांच में सामने आया कि ये आरोपी अमेरिका में स्थित प्रसिद्ध “लेंडिंग क्लब” (Lending Club) कंपनी के फर्जी एजेंट बनकर अमेरिकी नागरिकों को लोन दिलाने का झांसा देते थे।
गिरफ्तार आरोपी और फर्जी पहचान
पुलिस ने मौके से निम्नलिखित 4 आरोपियों को दबोचा है:
राजपूत अभिषेक राजकुमार (फर्जी नाम: Frank)
शुभोम विश्वनाथ घोष (फर्जी नाम: Luis Hamilton)
आर्यन राजपूत उर्फ लाला (फर्जी नाम: Bruce)
शिवेन्द्र नरेन्द्र सिंह परिहार
यह गिरोह अमेरिकी नागरिकों को अपने जाल में फंसाकर उनसे सोशल सिक्योरिटी नंबर (SSN) और बैंक संबंधी संवेदनशील जानकारियां हासिल कर लेता था। इसके बाद लोन की प्रोसेसिंग फीस और अन्य शुल्कों के नाम पर उनसे एप्पल (Apple) गिफ्ट कार्ड, नाइकी (Nike) गिफ्ट कार्ड और अन्य वाउचर्स के रूप में पैसे ऐंठता था।
इस पूरे गिरोह का मुख्य सरगना अहमदाबाद (गुजरात) का रहने वाला प्रबल प्रताप परिहार है, जो फिलहाल फरार चल रहा है। जांच में खुलासा हुआ है कि प्रबल प्रताप के निर्देश पर ही यह फर्जी कॉल सेंटर संचालित हो रहा था। वह इन युवकों को काम के बदले प्रतिमाह ₹15,000 से ₹20,000 सैलरी और ठगी की गई कुल रकम पर 5% कमीशन देता था। पुलिस ने मौके से 4 लैपटॉप, 7 मोबाइल फोन, हेडफोन, ठगी करने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली स्क्रिप्ट जब्त की है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए ग्वालियर पुलिस इस इंटरनेशनल साइबर क्राइम की जानकारी अमेरिका की केंद्रीय जांच एजेंसी FBI (Federal Bureau of Investigation) को भेजने की तैयारी में है। पुलिस की एक विशेष टीम मुख्य सरगना प्रबल प्रताप सिंह परिहार की तलाश में संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर रही है।
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दतिया में भाजपा के प्रचार वाहन पर हमला, चंद्रशेखर आजाद की सभा से लौट रहे थे लोग, FIR दर्ज
दतिया। मध्य प्रदेश के दतिया में उपचुनाव के बीच बड़ी घटना सामने आई है। अज्ञात लोगों ने बीजेपी के प्रचार वाहन पर हमला कर दिया। इस घटना के बाद हड़कंप मच गया।
दरअसल, कुछ लोग आजाद समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद की सभा से लौट रहे थे। इस दैरान भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी का प्रचार वाहन निकल रहा था। तभी बड़ी संख्या में लोगों ने वाहन पर लगे बैनर फाड़ दिए और हंगामा करने लगे।
इस घटना का वीडियो सामने आया है। घटना जिगना थाना क्षेत्र के उदगवां गांव की है। मामले के बाद पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है।

प्रमुख समाचार

नई दिल्ली। NEET पेपर लीक को लेकर देशभर में हुए छात्र प्रदर्शनों और उन पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने अहम टिप्पणी करते हुए कई महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए प्रदर्शनकारियों को अंतरिम राहत दी है। अदालत ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज FIR में फिलहाल किसी भी तरह की दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगा दी है। इसके साथ ही केंद्र...

मध्य प्रदेश

जबलपुर। मध्य प्रदेश के जबलपुर में पुलिस और प्रशासन ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए अवैध लिंग परीक्षण के बड़े रैकेट का पर्दाफाश किया है। ऑपरेशन गरिमा के तहत की गई इस कार्रवाई में अधारताल स्थित डॉ. आर.के. अग्रवाल के आर.के. डायग्नोस्टिक सेंटर पर छापा मारकर कई अहम सबूत बरामद किए गए। कार्रवाई के बाद सेंटर को सील कर दिया गया। इसके अलावा अधारताल स्थित डॉ. अग्रवाल के एक अन्य डायग्नोस्टिक सेंटर को भी सील कर दिया गया।जानकारी के अनुसार, कार्रवाई को सफल बनाने के लिए दो महिला...

अपराध

उज्जैन. पंचायती निर्मोही अणि अखाड़ा से जुड़े महामंडलेश्वर ज्ञान दास महाराज मुसीबत में फंस गए हैं. उन पर एक महिला ने दुष्कर्म, मारपीट और जान से मारने की धमकी के आरोप लगाए हैं. वहीं, ज्ञानदास महाराज ने इस मामले को ब्लैकमेलिंग व हनीट्रैप से जुड़ा बताया है. पुलिस दोनों ओर से की गई शिकायतों की जांच करने में जुटी है.महिला ने पुलिस को दी शिकायत में कहा है कि महामंडलेश्वर ज्ञान दास महाराज से उसकी दोस्ती फेसबुक पर हुई थी. इसके बाद दत्त अखाड़ा पर पहली...
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गुना। (गरिमा टीवी न्यूज़) गुना जिले के चांचौड़ा थाना क्षेत्र के एक वेयरहाउस से धनिया के 81 कट्टा और सोयाबीन के 58 कट्टा चोरी होने का मामला प्रकाश में आया है। वहीं जामनेर क्षेत्र में एक खाली प्लाट से ट्रैक्टर - ट्राली चोरी होने का मामला भी पुलिस ने दर्ज किया है। यह है पूरा मामला... फरियादी मनीष अग्रवाल पुत्र भगवानदास अग्रवाल उम्र 48 साल निवासी ए.बी रोड बीनागंज थाना चांचौडा ने रिपोर्ट किया कि मेरा आर. के. वेयर हाउस के नाम से निचला बाजार भगवानदास पेट्रोल पम्प के पास...

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गरिमा के जन्म के 15 मिनिट बाद का फोटो
गरिमा के जन्म के 15 मिनिट बाद का फोटो
गरिमा के 1 वर्ष बाद का फोटो
गरिमा के 1 वर्ष बाद का फोटो
गरिमा के 2 वर्ष बाद का फोटो
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बीमार होने के बाद भोपाल अस्पताल मे भर्ती गरिमा
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हाई कोर्ट के आदेश के बाद गरिमा के शव को जमीन से निकालते हुऐ
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निकालने के बाद गरिमा के शव को पैक कर जॉच के लिऐ भेजा गया
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दोषी डॉक्टर के खिलाफ मामला कायम कराने के लिऐ पुलिस अधिक्षक से मिले पत्रकार
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गरिमा के शव की जॉच होने के बाद पुनः उसी स्थान पर चबूतरा का निर्माण किया गया
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पूजा स्थल मे गरिमा
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