आलीराजपुर। आलीराजपुर में बिजली और पानी की समस्या को लेकर कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन के बाद अब पुलिस की कार्रवाई सामने आई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का पुतला जलाने के मामले में कोतवाली थाना पुलिस ने कांग्रेस नेता महेश पटेल, नगरपालिका उपाध्यक्ष साबिर बाबा समेत 11 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है।
जानकारी के अनुसार, मंगलवार को बिजली और पानी की समस्या को लेकर कांग्रेस नेता महेश पटेल के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस कार्यालय के बाहर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का पुतला जलाकर विरोध प्रदर्शन किया था। अब इस मामले में कोतवाली पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 223(B) के तहत 11 लोगों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया है।
पुलिस अधीक्षक रघुवंश सिंह भदोरिया बताया कि बिना सूचना के पुतला दहन का प्रयास किया गया था। मौके पर मौजूद पुलिस ने पुतले को छीन लिया। बिना सूचना के इस तरह के कार्यक्रम करने पर अपराध दर्ज किया गया है। आदिवासी विकास परिषद कांग्रेस के नेता महेश पटेल समेत 11 नामजद है। जिले में बिजली-पानी की समस्या से शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन अब FIR तक पहुंच गया है। अब देखना होगा कि इस मामले में आगे क्या कार्रवाई होती है।
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प्रधान आरक्षक निकला करोड़पति: लोकायुक्त ने एक साथ 15 ठिकानों पर मारा छापा, 6 करोड़ की संपत्ति का खुलासा
इंदौर। मध्य प्रदेश के इंदौर में लोकायुक्त पुलिस ने भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। इंदौर पुलिस ट्रेनिंग कॉलेज में पदस्थ प्रधान आरक्षक चालक फिरोज खान के ठिकानों पर लोकायुक्त की टीम ने एक साथ ताबड़तोड़ छापे मारे हैं। इस कार्रवाई के दौरान उसकी आय से 223 प्रतिशत अधिक संपत्ति का बड़ा खुलासा हुआ है।
लोकायुक्त इंदौर और उज्जैन की संयुक्त टीमों ने बुधवार सुबह करीब 6 बजे से इंदौर और देवास में लगभग 15 अलग-अलग लोकेशन पर एक साथ सर्चिंग शुरू की। शुरुआती जांच में फिरोज खान के पास से 6 करोड़ 26 लाख रुपए से अधिक की बेनामी और आय से अधिक संपत्ति का पता चला है। लोकायुक्त की यह कार्रवाई देवास स्थित उसके आवास से लेकर इंदौर के महंगे फ्लैट्स और कृषि भूमि तक लगातार जारी है।
लोकायुक्त जांच में यह बात सामने आई है कि प्रधान आरक्षक ने अपनी अवैध कमाई को छिपाने के लिए बड़े पैमाने पर हेरफेर किया है। आरोप है कि उसने अपनी पत्नी, मां और एक परिचित महिला के नाम पर कई संपत्तियां खरीद रखी हैं। इसके अलावा, करोड़ों रुपए के लेनदेन से जुड़ी एक संदिग्ध फर्म भी जांच के दायरे में आई है, जिसकी फाइलों को खंगाला जा रहा है। लोकायुक्त के अधिकारी् दस्तावेजों और संपर्कों की गहनता से जांच कर रहे हैं ताकि इस अवैध साम्राज्य से जुड़े हर एक राज से पर्दा उठाया जा सके।
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‘जोहार’ बोलने पर छात्रों को गाली देने वाले TI सस्पेंड; उमंग सिंघार ने की FIR की मांग, BJP ने भी दी चेतावनी
भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में आदिवासी छात्रों की समस्याओं को लेकर गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के छात्र विंग द्वारा किए प्रदर्शन के दौरान एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। प्रदर्शन के दौरान मिसरोद थाने के टीआई रतन सिंह परिहार का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें वे प्रदर्शनकारी आदिवासी छात्रो के साथ अभद्र भाषा का प्रयोग करते और गालियां देते हुए नजर आ रहे हैं। वीडियो में टीआई छात्रों को धमकाते हुए ‘यही कूट दूंगा’ जैसी आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करते हुए भद्दी-भद्दी गालियां दे रहे हैं। इस वीडियो के वायरल होने के बाद से आदिवासी संगठनों और राजनितिक गलियारों में भारी आक्रोश है। वहीं इस मामले में पुलिस कमिश्नर ने मिसरोद थाना प्रभारी रतन सिंह को निलंबित कर दिया है और विभागीय जांच के आदेश दिए हैं।
इस घटना के सामने आने के बाद मध्य प्रदेश विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर विरोध दर्ज कराया है। उन्होंने लिखा कि संविधान पुलिस द्वारा जोहार कहने पर अभद्र टिप्पणी और गाली-गलौज किया जाना बेहद गंभीर और निंदनीय है।
उमंग सिंघार ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि ‘जोहार’ कोई गाली नहीं, बल्कि आदिवासी संस्कृति, पहचान, स्वाभिमान और सम्मान का प्रतीक है, जो प्रेम, आदर और भाईचारे का संदेश देता है। संस्कृति और अस्मिता का यह अपमान किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग करते हुए कहा कि वर्दी की ताकत नागरिकों को अपमानित करने के लिए नहीं होती। यदि किसी पुलिसकर्मी ने अपने पद का दुरुपयोग किया है, तो उसकी जवाबदेही तय होनी चाहिए और दोषी पुलिसकर्मियों के विरुद्ध तत्काल FIR दर्ज कर कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।
इस पूरे मामले पर सियासी पारा चढ़ने के बाद भारतीय जनता पार्टी की ओर से भी प्रतिक्रिया सामने आई है। बीजेपी ने स्पष्ट किया है कि आदिवासी समाज हमारा गौरव हैं और पुलिसकर्मियों की इस तरह की भाषा एक दंडनीय अपराध है। पार्टी ने कहा कि किसी भी वर्ग के व्यक्ति का अपमान करना गलत है और इस प्रकार की भाषा का इस्तेमाल करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। इस मामले में जल्द ही कड़ी कार्रवाई किए जाने के संकेत दिए गए हैं।
आदिवासी छात्रों और युवाओं पर अभद्र टिप्पणी मामले में पुलिस कमिश्नर ने बड़ी कारर्वाई की है। पुलिस कमिश्नर ने मिसरोद थाना प्रभारी रतन सिंह को निलंबित कर दिया है और मामले में विभागीय जांच के भी आदेश दिए हैं। पुलिस कमिश्नर ने कहा है कि निलंबन के बाद अब विभागीय जांच में मामले से जुड़े तथ्यों की पड़ताल की जाएगी। जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे उनके आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
वैशाली जिले के राघोपुर थाना क्षेत्र के रामपुर श्यामचंद पंचायत में मंगलवार रात एक बेहद दर्दनाक घटना सामने आई। गंगा की उपधारा (ढाब) में नाव पलटने से 13 बच्चों की डूबकर असमय मौत हो गई, जिसमें 7 एक ही परिवार की थीं। इस भीषण हादसे के बाद से पूरे इलाके में कोहराम मचा हुआ है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हादसे पर दुख जताया है।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने हादसे में दुख जताया। प्रशासन को तुरंत राहत बचाव के कार्यों में तेजी लाने को कहा गया है। मृतकों के परिजनों को चार-चार लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने का एलान किया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी बिहार के वैशाली में नाव पलटने से मरी बच्चियों के शोकाकुल परिवार के पोस्ट किया। उन्होंने दुख जताते हुए पीड़ित परिवारों को प्रति संवेदनाएं जताईं। मैं सभी घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना करता हूं। पीएमएनआरएफ की ओर से मृतकों के परिजनों को 2 लाख रुपये की राशि और घायलों को 50,000 रुपये देने का एलान किया।
मिली जानकारी के मुताबिक रामपुर श्यामचंद पंचायत के भगतान टोला (माता महारानी स्थान के पास) निवासी सिंघेश्वर राय के घर श्राद्ध का भोज आयोजित था। भोज में शामिल होने के लिए करीब 20 से 25 लोग एक छोटी नाव पर सवार होकर ढाब के दूसरे किनारे जा रहे थे। क्षमता से अधिक भार और संतुलन बिगड़ने की वजह से नाव बीच धारा में ही पलट गई।
हादसा होते ही मौके पर चीख-पुकार मच गई। शोर सुनकर रामपुर श्यामचंद समेत आसपास के गांव वाले तुरंत घटनास्थल की ओर दौड़े। स्थानीय लोगों ने अपनी जान जोखिम में डालकर नदी में छलांग लगाई और करीब एक घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद डूब रहे कई लोगों को बाहर निकाला।
बचाए गए लोगों और बच्चों को आनन-फानन में इलाज के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, राघोपुर फतेहपुर ले जाया गया। अस्पताल लाए गए 17 बच्चों में से डॉक्टरों ने जांच के बाद 13 को मृत घोषित कर दिया। वहीं तीन मासूमों की नाजुक स्थिति को देखते हुए प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर इलाज के लिए पीएमसीएच (PMCH) पटना रेफर कर दिया गया। एक बच्चे का इलाज स्थानीय पीएचसी में जारी है, जिसकी स्थिति स्थिर बताई जा रही है।
अस्पताल परिसर में परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक टीम मौके पर पहुंच गई है और राहत व आगे की आवश्यक कार्रवाई में जुटी हुई है।
हादसे में जान गंवाने वाले मृतकों की सूची
मीरा कुमारी (पिता: रामनरेश राय)
निशु कुमारी (पिता: सत्येंद्र राय)
अनिषा कुमारी (पिता: सुरेंद्र राय)
सुनीता कुमारी (पिता: राज किशोर राय)
आर्यन कुमार (पिता: गांधी राय)
मोहन कुमार (पिता: अखिलेश राय)
अमृता कुमारी (पिता: राज किशोर राय)
अंकिता कुमारी (पिता: राज किशोर राय)
पिंकी कुमारी (पिता: डोमन राय)
नमन कुमार (पिता: मुकेश राय)
सिकी कुमारी (पिता: सुरेश राय)
भोनू कुमारी (पिता: रामप्रवेश राय)
सोनम कुमारी (पिता: नरेश राय)
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नीला ड्रम मर्डर केस में फैसला, दोषी साहिल-मुस्कान को फांसी की सजा; कोर्ट ने जघन्य हत्याकांड माना
मेरठ। सौरभ की हत्या 3 मार्च 2025 को मेरठ के ब्रह्मपुरी इलाके में हुई थी। आरोप है कि हत्या के बाद शव के टुकड़े कर नीले ड्रम में भरकर सीमेंट से जमा दिए गए थे। पुलिस ने मुस्कान और साहिल को 19 मार्च 2025 को गिरफ्तार किया था।
सुनवाई के दौरान मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत के सामने पेश किया गया था। सजा सुनाने से पहले अदालत ने साहिल से पूछा कि क्या उसने पहले कोई अपराध किया है, जिस पर उसने इनकार कर दिया।
फैसले के बाद वकीलों ने इसे अहम बताते हुए संतोष जताया और दोनों के लिए मृत्युदंड की मांग का समर्थन किया। इस दौरान अदालत परिसर में मौजूद लोगों ने भारत माता की जय के नारे भी लगाए।
मेरठ के ब्रह्मपुरी इलाके में 3 मार्च 2025 को सौरभ राजपूत की हत्या हुई थी। आरोप था कि हत्या के बाद शव के टुकड़े कर उन्हें नीले ड्रम में रखा गया और सीमेंट से भरकर छिपा दिया गया। इस घटना ने देशभर में सुर्खियां बटोरी थीं।
पुलिस ने मामले की जांच के बाद मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को गिरफ्तार किया था। दोनों को 30 सितंबर 2026 को अदालत ने हत्या के मामले में दोषी करार दिया था। इसके बाद 14 अक्टूबर को सजा के बिंदु पर फैसला निर्धारित किया गया था।
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बंगाल में मां दुर्गा का शाही दरबार, 100 किलो सोने के गहनों की चर्चा!
पश्चिम बंगाल। दुर्गा पूजा के दौरान पश्चिम बंगाल की रौनक देखते ही बनती है। यहां हर साल अलग-अलग थीम पर पंडाल सजाए जाते हैं, जिन्हें देखने के लिए दूर-दूर से लोग पहुंचते हैं। इस बार सिलीगुड़ी का एक पंडाल अपनी खास सजावट को लेकर चर्चा में है। इसे सोने की थीम पर तैयार किया गया है और मां दुर्गा की प्रतिमा को करीब 100 किलो सोने के गहनों से सजाए जाने की बात कही जा रही है। पंडाल का प्रवेश द्वार भी सोने के महल जैसा बनाया गया है। इसकी भव्यता लोगों का ध्यान खींच रही है।
सिलीगुड़ी के इस दुर्गा पूजा पंडाल की सजावट लोगों को आकर्षित कर रही है। पंडाल के बाहर बना प्रवेश द्वार सोने के महल जैसा दिखाई देता है। इसकी बनावट और सुनहरी सजावट इसे खास रूप देती है। अंदर पहुंचने पर मां दुर्गा की सजी हुई प्रतिमा भक्तों का ध्यान खींचती है। पूरे पंडाल को इस तरह तैयार किया गया है कि यहां आने वाले लोगों को भव्यता का एहसास हो। नवरात्रि और दुर्गा पूजा के दौरान श्रद्धालु मां के दर्शन के साथ इस अनोखी सजावट को देखने भी पहुंच रहे हैं।
इस पंडाल की सबसे खास बात मां दुर्गा की प्रतिमा पर की गई सजावट है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, मां को करीब 100 किलो सोने के गहनों से सजाया गया है। सोने की थीम और गहनों की चमक से दरबार का रूप बेहद खास नजर आता है। बंगाल में हर साल कई अनोखे पंडाल बनाए जाते हैं, लेकिन इस पंडाल की सुनहरी सजावट इसे अलग पहचान दे रही है। हालांकि, सोने की कुल मात्रा की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
इस खास पंडाल का उद्घाटन जलपाईगुड़ी के बीजेपी सांसद डॉ. जयंत रॉय ने किया। उद्घाटन के दौरान फीता काटा गया और परंपरा के अनुसार शंख बजाकर मां का स्वागत किया गया। इस मौके पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। पूजा के माहौल और आकर्षक सजावट ने आयोजन को खास बना दिया। पंडाल में भक्तों के पहुंचने का सिलसिला जारी है और लोग मां दुर्गा के दर्शन कर रहे हैं।
पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा आस्था और संस्कृति से जुड़ा बड़ा त्योहार है। यहां पंडालों को अलग-अलग विषयों पर सजाने की परंपरा है। कहीं मंदिर जैसी बनावट दिखाई देती है, तो कहीं आधुनिक कला और खास डिजाइन देखने को मिलते हैं। सिलीगुड़ी का यह पंडाल सोने की थीम के कारण चर्चा में है। मां दुर्गा के दर्शन और पंडाल की सजावट देखने के लिए पहुंच रहे श्रद्धालुओं के बीच यह खास आकर्षण बना हुआ है।
उज्जैन। सोशल मीडिया पर इन दिनों उज्जैन की केंद्रीय भैरवगढ़ जेल का एक अनोखा नजारा चर्चा में है। शारदीय नवरात्रि के दौरान जेल में पुरुष बंदी, महिला वेशभूषा पहनकर गरबा करते नजर आ रहे है। जेल परिसर में गरबा और डांडिया का यह आयोजन लोगों का ध्यान खींच रहा है। इसका वीडियो भी इंटरनेट पर वायरल हो रहा है।
दरअसल, भैरवगढ़ जेल में भी नवरात्रि का पर्व धार्मिक उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। यहां 647 पुरुष और महिला बंदियों ने नौ दिन का व्रत रखा है। शाम करीब 6:30 बजे मां दुर्गा की आरती के बाद गरबा शुरू होता है, जो लगभग एक घंटे तक चलता है।
इस आयोजन की सबसे खास बात कुछ पुरुष बंदियों का महिला वेशभूषा में गरबा करना है। करीब 25 बंदी इस आयोजन में हिस्सा लेते हैं। बंदी खुद गरबा गीत गाते हैं और बैंड की धुन तैयार करते हैं। इसके बाद दूसरे बंदी उन्हीं धुनों पर डांडिया करते हैं। जेल की चारदीवारी के भीतर नवरात्रि का यह अलग अंदाज अब सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है।
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व्यापारी के साथ 25 लाख रुपये की ठगी, बैग बदलकर आरोपी फरार, पुलिस ने दर्ज किया मामला
इंदौर के विजयनगर थाना क्षेत्र में व्यापार के नाम पर 25 लाख रुपये की ठगी का मामला सामने आया है। आरोप है कि फाइबर मैट का सौदा करने के बहाने दो लोगों ने व्यापारी को होटल में बुलाया और चालाकी से रुपयों से भरा बैग बदलकर फरार हो गए। जब व्यापारी माल लेने ट्रांसपोर्ट नगर पहुंचा, तब उसे ठगी का पता चला। पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
एसीपी पराग सैनी ने बताया कि लसुडिया थाना क्षेत्र की सिंगापुर टाउनशिप में रहने वाले व्यापारी अंकुर शर्मा की सितंबर में रामचंद्र मलिक और अनिल कुमार नाम के दो लोगों से पहचान हुई थी। दोनों ने खुद को मुंबई का निवासी बताते हुए फाइबर मैट के व्यापार का सौदा किया था।
दोनों ने अंकुर से 25 लाख रुपये में फाइबर मैट का सौदा तय किया था, ये 11 अक्टूबर को विजयनगर क्षेत्र के एक होटल में आते हैं फिर अंकुर से संपर्क कर उसे होटल बुलाते हैं,अंकुर उन्हें रुपयों से भरा बैग देता है दोनों पैसे गिनते हैं और अंकुर को भरोसे में लेकर कहते हैं कि हम आपको बैग अभी लौटा रहे हैं।
अंकुर जब उनके भरोसे में आगया तो उन्होंने बड़ी चालाकी से बैग बदल दिया और दूसरा बैग थमा दिया, कथित व्यापारियों ने अंकुर से कहा कि वो ट्रांसपोर्ट नगर जाकर फाइबर मैट की डिलीवरी ले सकता है लेकिन जब अंकुर ट्रांसपोर्ट नगर पहुँचा और उसने बैग खोला तो दंग रह गया बैग में पैसे नही थे।
अंकुर शर्मा ने रामचंद्र मलिक और अनिल कुमार को फोन लगाया तो वो बंद मिला, व्यापारी होटल पहुंचा, लेकिन तब तक दोनों आरोपी चेकआउट कर फरार हो चुके थे। उसने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है, शिकायत के बाद विजयनगर पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है।
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लिफ्ट में फंसे पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा: कड़ी मशक्कत के बाद बाहर निकाला गया
ग्वालियर। मध्य प्रदेश के पूर्व गृह मंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता नरोत्तम मिश्रा ग्वालियर में एक अजीब वाकये का शिकार हो गए। शहर के जयेन्द्रगंज स्थित एक कॉम्प्लेक्स में बने कोचिंग सेंटर के उद्घाटन कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे नरोत्तम मिश्रा अचानक लिफ्ट में फंस गए।
जानकारी के मुताबिक, जब वे लिफ्ट से ऊपर जा रहे थे, तभी फ्लोर के बीच में लिफ्ट तकनीकी खराबी के कारण अचानक बंद हो गई। लिफ्ट के अचानक रुकने से कुछ देर के लिए मौके पर हड़कंप मच गया और अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
घटना की सूचना मिलते ही आनन-फानन में टेक्निकल एक्सपर्ट्स को बुलाया गया। काफी मशक्कत के बाद लिफ्ट का दरवाजा खोला गया और पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा को सुरक्षित बाहर निकाला गया। गनीमत यह रही कि इस दौरान उन्हें किसी प्रकार की चोट नहीं आई और वे पूरी तरह सुरक्षित रहे। लिफ्ट से बाहर आने के बाद, पूर्व गृह मंत्री ने बिना अपना उत्साह खोए निर्धारित कार्यक्रम में हिस्सा लिया और कोचिंग सेंटर के उद्घाटन समारोह में शामिल हुए।
इटारसी। इटारसी शहर के पत्ती बाजार स्थित ईरानी डेरा क्षेत्र में रविवार दोपहर उस वक्त सनसनी फैल गई, जब दो पक्षों के बीच पुरानी रंजिश को लेकर दिनदहाड़े खूनी संघर्ष छिड़ गया। सड़क पर चले तलवार, चाकू और ईंट-पत्थरों के इस तांडव से पूरे इलाके में दहशत का माहौल बन गया। घटना का सीसीटीवी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें एक युवक हाथ में तलवार और चाकू लहराते हुए साफ नजर आ रहा है।
वायरल वीडियो में साफ दिखाई दे रहा है कि विवाद के दौरान एक युवक हाथ में तलवार लेकर घूम रहा है, जबकि दूसरे युवक के पास चाकू है। चाकू से लैस आरोपी ने सामने वाले युवक की नाक पर जोरदार हमला कर उसे गंभीर रूप से घायल कर दिया।
घटना की गंभीरता को देखते हुए इटारसी थाना पुलिस तुरंत हरकत में आई। इटारसी टीआई सौरभ पांडे ने मामले की जानकारी देते हुए बताया कि रविवार दोपहर करीब 1 बजे ईरानी डेरे पर अली ईरानी और सैफ ईरानी के बीच पुरानी रंजिश को लेकर विवाद हुआ था।
पुलिस ने दोनों पक्षों की शिकायत पर काउंटर केस दर्ज कर लिया है। खास बात यह है कि दोनों ही आरोपियों के खिलाफ इटारसी थाने में पहले से कई गंभीर अपराध दर्ज हैं। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपियों अली ईरानी और सैफ ईरानी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।
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एमपी में 20 हजार सरकारी पदों पर दिव्यांगों को मिलेगी नौकरी, 31 दिसंबर तक भर्ती अभियान
भोपाल. मध्यप्रदेश में दिव्यांगों के लिए सरकारी नौकरी पाने का मौका है. राज्य के अलग-अलग सरकारी विभागों में दिव्यांगों के लिए रिजर्व करीब 20 हजार खाली पदों को भरने के लिए स्पेशल भर्ती अभियान शुरू हो गया है. मप्र सामान्य प्रशासन विभाग ने भर्ती के लिए निर्देश जारी किए हैं. ये अभियान 31 दिसंबर 2026 तक चलेगा.
मध्यप्रदेश सरकार के विभागीय सर्वे में सामने आया है कि प्रदेश में दिव्यांगों के लिए कुल 36 हजार पद रिजर्व हैं. इनमें से करीब 16 हजार पदों पर दिव्यांग काम कर रहे हैं, जबकि लगभग 20 हजार पद लंबे समय से खाली हैं. आयुक्त दिव्यांगजन डॉ. अजय खेमरिया ने बताया कि लंबे समय से विशेष भर्ती अभियान शुरू करने की मांग की जा रही थी. अब सरकार ने इसे मंजूरी दे दी है.
सामान्य प्रशासन विभाग के नए निर्देशों के मुताबिक भर्ती प्रक्रिया को आसान और पारदर्शी बनाया गया है. इसमें इंटरव्यू के लिए अलग से नंबर नहीं दिए जाएंगे. कैंडिडेट्स का सिलेक्शन संबंधित पद के भर्ती नियमों, शैक्षणिक योग्यता और दूसरी जरूरी शर्तों के आधार पर बनने वाली मेरिट लिस्ट से होगा.
भर्ती की जानकारी ज्यादा से ज्यादा कैंडिडेट्स तक पहुंचाने के लिए विभागों को कम से कम दो बड़े दैनिक अखबारों में विज्ञापन देना होगा. इसके साथ ही विज्ञापन संबंधित विभाग की वेबसाइट और सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग के पोर्टल पर भी अपलोड करना होगा. विज्ञापन में खाली पदों की संख्या, दिव्यांगता की कैटेगरी और जरूरी योग्यता की जानकारी साफ-साफ देनी होगी. विज्ञापन जारी होने के कम से कम 30 दिन बाद ही भर्ती की तारीख और जगह तय की जाएगी.
आवेदनों और डॉक्यूमेंट्स की शुरुआती जांच के बाद पात्र और अपात्र कैंडिडेट्स की अलग-अलग लिस्ट तैयार की जाएगी. यह लिस्ट वेबसाइट पर अपलोड होगी. अपात्र लिस्ट में नाम आने वाले कैंडिडेट्स को आपत्ति दर्ज करने के लिए 15 दिन का समय मिलेगा. इसके बाद मेरिट के आधार पर विज्ञापन में दी गई खाली सीटों की संख्या से ज्यादा से ज्यादा दोगुने कैंडिडेट्स को डॉक्यूमेंट्स वैरिफिकेशन के लिए बुलाया जाएगा. अगर किसी कैंडिडेट का सिलेक्शन दो विभागों में हो जाता है, तो उसे किसी एक विभाग को चुनना होगा. इसके बाद खाली हुई सीट वेटिंग लिस्ट से भरी जाएगी.
एमपी सरकार ने आगे के सालों के लिए भी भर्ती का कैलेंडर तय किया है. अब हर साल 1 जनवरी से 31 मार्च के बीच दिव्यांगों के लिए स्पेशल भर्ती अभियान चलाया जाएगा. सरकार ने 29 अप्रैल 2025 को जारी पुराना आदेश निरस्त कर नया ऑनलाइन रिकॉर्ड सिस्टम लागू किया है.
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एमपी के 71 अस्पतालों पर आयुष्मान योजना में फर्जीवाड़ा, 12 करोड़ का संदिग्ध क्लेम उजागर, जांच शुरू
भोपाल. प्रदेश में आयुष्मान भारत योजना के तहत करीब 12 करोड़ रुपये के संदिग्ध क्लेम की जांच की जा रही है. राज्य स्वास्थ्य एजेंसी ने टीएमएस (ट्रांजेक्शन मैनेजमेंट सिस्टम) साफ्टवेयर के डेस्कटॉप ऑडिट में मिले संकेतों के आधार पर 71 अस्पतालों को जांच के दायरे में लिया है. इनमें मृत व्यक्ति को जिंदा दिखाकर इलाज करने और बिना जरूरत मरीजों को आईसीयू में भर्ती दर्शाने जैसे मामले सामने आए हैं.
जांच के दायरे में भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, उज्जैन, रीवा, सागर, सतना, नीमच, शाजापुर और टीकमगढ़ सहित प्रदेश के विभिन्न जिलों के अस्पताल शामिल हैं. एजेंसी के अनुसार, अस्पतालों की ओर से क्लेम दर्ज किए जाने के बाद पोर्टल पर उसकी ट्रैकिंग होती है. क्लेम में असामान्य गतिविधि मिलने पर सॉफ्टवेयर अलर्ट देता है, जिसके आधार पर संदिग्ध मामलों की जांच की जाती है. आयुष्मान योजना में अनियमितताओं को लेकर राज्य स्वास्थ्य एजेंसी पहले भी कार्रवाई कर चुकी है.
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, भोपाल के 25 अस्पतालों पर 2.11 करोड़ रुपये की पेनल्टी लगाई गई थी. वहीं, 50 अस्पतालों पर 3.13 करोड़ रुपये की पेनल्टी लगाने के साथ 18 अस्पतालों को ब्लैकलिस्ट और 15 को निलंबित किया गया था. अब 71 अस्पतालों के क्लेम की जांच से योजना के तहत इलाज और भुगतान की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं.
टीएमएस में मरीज के पंजीयन, अस्पताल में भर्ती, इलाज, डिस्चार्ज और क्लेम से जुड़ी जानकारी दर्ज होती है. डेस्कटॉप ऑडिट में इन विवरणों और उपलब्ध दस्तावेजों की जांच के दौरान असामान्य मामलों को चिह्नित किया जाता है. मृत व्यक्ति के नाम पर इलाज दर्ज होना, बिना चिकित्सकीय जरूरत आईसीयू में भर्ती दिखाना या इलाज संबंधी विवरण में विसंगति मिलना जांच का आधार बन सकता है.
दुर्गा पूजा के बीच पश्चिम बंगाल में पोस्टर विवाद से राजनीतिक विवाद छिड़ गया है। पोस्टर में हिंदू दुकानों से ही बिरयानी (Biryani) खाने की अपील की गई है। साथ ही पूजा का सामान हिंदू व्यक्ति की दुकानों से खरीदने के लिए कहा गया है। हिंदू दुकानों से ही बिरयानी खाने की अपील का पोस्टर सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। अब विपक्षी पार्टियों इस मामले में आरोपी के खिलाफ पुलिस कार्रवाई की मांग की है।
दरअसल ये पोस्टर सिलीगुड़ी में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े संगठन ‘हिंदू जागरण मंच’ ने ये पोस्टर लगाए हैं। हिंदू जागरण मंच ने पोस्टर लगाए हैं जिसमें लिखा है- बिरयानी खाने से आपको कोई नहीं रोक रहा है। बिरयानी जरूर खाएं, लेकिन हिंदू दुकानों से।
मामले में तृणमूल के प्रवक्ता और बेलेघाटा के विधायक कुणाल घोष ने कहा कि सिलीगुड़ी की घटना मंजूर नहीं है क्योंकि स्वाद को धार्मिक सीमाओं में नहीं बांधा जा सकता। किसी हिंदू की दुकान की बिरयानी का स्वाद बहुत अच्छा हो सकता है या किसी मुस्लिम की दुकान की बिरयानी का स्वाद भी शानदार हो सकता है। खाने की पहचान स्वाद से होती है, धर्म से नहीं। ऐसे फरमान स्वीकार नहीं किए जा सकते हैं। उन्होंने आगे कहा हो सकता है कि उन्होंने ग्राहकों को लुभाने के लिए कोई आकर्षक टैगलाइन इस्तेमाल करने की कोशिश की हो, लेकिन धार्मिक मामलों में ऐसी चीजें नहीं करनी चाहिए।
वहीं सीनियर CPI(M) नेता और पूर्व मंत्री अशोक भट्टाचार्य ने पोस्टरों को लेकर पुलिस कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि एक धर्मनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक देश में ऐसे पोस्टर लगाना अपराध है। प्रशासन को न सिर्फ पोस्टर हटाने चाहिए, बल्कि इस सांप्रदायिक अभियान के पीछे जो लोग हैं, उन्हें भी गिरफ्तार करना चाहिए। संविधान सभी धर्मों के लोगों को समान अधिकार देता है और किसी व्यक्ति की आजीविका का आधार उसका धर्म नहीं होना चाहिए।
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विपक्ष के विरोध प्रदर्शन के बीच बैकफुट पर चुनाव आयोग, 30 दिन में अपने पुराने 5 फैसलों पर मारा U-TURN
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर उठ रहे सवालों के बीच चुनाव आयोग ने आवेदन, आपत्तियों और दस्तावेजों के सत्यापन से जुड़ी प्रक्रियाओं में कई बदलाव किए हैं। बिहार, पश्चिम बंगाल और दिल्ली में मतदाता सूची को लेकर विवाद के बीच इन कदमों को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कांग्रेस और अन्य संगठनों के विरोध प्रदर्शनों के बीच आयोग ने पात्र मतदाताओं को सूची में शामिल करने और दस्तावेजी प्रक्रिया आसान बनाने पर जोर दिया है।
पश्चिम बंगाल में SIR के दौरान मतदाता सूची से छूटे पात्र लोगों के नाम जोड़ने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। राज्य के सभी 24 जिला निर्वाचन अधिकारियों (DEO) को विशेष शिविरों के जरिए मतदाताओं की समस्याएं दूर करने और यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं कि कोई पात्र नागरिक मताधिकार से वंचित न रहे।
दिल्ली में मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान करीब 33 लाख मामलों में विसंगतियां सामने आने की बात कही गई। इनमें से लगभग 20 लाख मामलों के निपटारे की जानकारी दी गई है। शेष मामलों के समाधान के लिए भी अभियान जारी है। मतदाता अपने रिकॉर्ड की जांच और सुधार के लिए बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) से संपर्क कर सकते हैं।
नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म-6 के साथ अतिरिक्त घोषणापत्र जोड़े जाने पर विवाद हुआ। मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। सुनवाई के दौरान अदालत ने स्पष्ट किया कि उसने संशोधित फॉर्म-6 को मंजूरी नहीं दी थी। इसके बाद संबंधित अतिरिक्त घोषणापत्र को कुछ राज्यों में ऑनलाइन पोर्टल से हटाए जाने की जानकारी सामने आई।
मतदाता सूची से नाम हटाने या किसी नाम पर आपत्ति दर्ज कराने के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म-7 पर भी सीमा तय किए जाने की बात कही गई है। इसका उद्देश्य बड़ी संख्या में आपत्तियां दाखिल कर नाम हटवाने की आशंका को नियंत्रित करना है।
इसके अलावा, नोटिस पाने वाले मतदाताओं के दस्तावेज जुटाने में BLO मदद करेंगे और जरूरत के अनुसार सुनवाई की प्रक्रिया आसान बनाई जाएगी।
मतदाता सूची की शुद्धता और पात्र नागरिकों के मतदान अधिकारों के बीच संतुलन SIR विवाद का प्रमुख मुद्दा बना हुआ है। आयोग के इन कदमों का उद्देश्य प्रक्रिया को सुगम बनाना बताया जा रहा है, जबकि नियमों की पारदर्शिता और उनके क्रियान्वयन पर बहस जारी है।
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दुकानदारों और ग्राहकों को राहत, 2,000 से ज्यादा के UPI पेमेंट पर MDR चार्ज दिवाली तक टला
फेस्टिव सीजन में UPI से पेमेंट करने वाले करोड़ों लोगों और दुकानदारों के लिए बड़ी खबर है। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने चुनिंदा मर्चेंट UPI ट्रांजैक्शन पर लागू होने वाले मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) के नए नियमों को दिवाली के बाद तक टाल दिया है। यह शुल्क पहले 15 अक्टूबर 2026 से लागू होना था। अब इसे लागू करने की नई तारीख अलग से घोषित की जाएगी। इस फैसले से त्योहारों के दौरान डिजिटल पेमेंट व्यवस्था को नए नियमों के लिए तैयारी का अतिरिक्त समय मिलेगा। NPCI से जुड़ी रिपोर्टों के मुताबिक, फिलहाल प्रस्तावित शुल्क की शुरुआत दिवाली के बाद होगी।
UPI भारत में ऑनलाइन पेमेंट का बेहद लोकप्रिय माध्यम है। लोग सब्जी खरीदने से लेकर कपड़े, इलेक्ट्रॉनिक्स और दूसरे महंगे सामान की खरीदारी तक के लिए इसका इस्तेमाल करते हैं। दिवाली और धनतेरस के दौरान डिजिटल पेमेंट की संख्या बढ़ जाती है। इसी बीच चुनिंदा मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर MDR लागू करने का प्रस्ताव सामने आया था। इसके तहत 2,000 से अधिक के पात्र Person-to-Merchant (P2M) UPI भुगतान पर 0.4% शुल्क लगाने की योजना थी। यह व्यवस्था 15 अक्टूबर 2026 से शुरू होनी थी, लेकिन अब इसे दिवाली के बाद तक टाल दिया गया है। NPCI के अनुसार, नया नियम लागू करने की तारीख बाद में बताई जाएगी। इसलिए फिलहाल यह मानना सही नहीं होगा कि शुल्क हमेशा के लिए रद्द कर दिया गया है।
क्या होता है MDR चार्ज?
MDR यानी Merchant Discount Rate वह शुल्क है, जो किसी दुकान या कारोबारी से डिजिटल पेमेंट स्वीकार करने और उसकी प्रक्रिया से जुड़ी सेवाओं के लिए लिया जा सकता है। आसान भाषा में समझें तो जब ग्राहक किसी दुकान पर UPI से भुगतान करता है, तो उस पेमेंट को पूरा करने में बैंक और दूसरे भुगतान सेवा प्रदाता शामिल होते हैं। MDR इसी भुगतान व्यवस्था से जुड़ा शुल्क है।
प्रस्तावित फ्रेमवर्क के मुताबिक, पात्र मर्चेंट UPI ट्रांजैक्शन पर 0.4% MDR निर्धारित किया गया है। कुछ खास श्रेणियों के भुगतान के लिए अलग व्यवस्था हो सकती है। इसलिए हर तरह के पेमेंट पर एक जैसा शुल्क मानना सही नहीं होगा। उदाहरण के लिए, यदि किसी पात्र ट्रांजैक्शन पर 0.4% की दर लागू होती है, तो गणना इस तरह होगी-
5,000 के भुगतान पर 0.4% = 20 रुपए
10,000 के भुगतान पर 0.4% = 40 रुपए
50,000 के भुगतान पर 0.4% = 200 रुपए
दिवाली से पहले क्यों टाला गया UPI MDR का फैसला?
त्योहारी सीजन में बाजारों में खरीदारी बढ़ जाती है। ग्राहक ऑनलाइन भुगतान करना पसंद करते हैं, जबकि छोटे और बड़े व्यापारी भी तेजी से पेमेंट स्वीकार करने के लिए डिजिटल माध्यमों पर निर्भर रहते हैं। ऐसे समय में नए शुल्क संबंधी नियम लागू होने से कारोबारियों को अपनी भुगतान व्यवस्था, हिसाब-किताब और सॉफ्टवेयर में बदलाव करना पड़ सकता है। ग्राहकों के बीच भी यह सवाल उठ सकता है कि कौन-सा भुगतान मुफ्त रहेगा और किस पर शुल्क लागू होगा। इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए UPI और Services Steering Committee ने MDR लागू करने की तारीख दिवाली के बाद रखने का फैसला किया। इससे भुगतान से जुड़े संस्थानों और व्यापारियों को तैयारी के लिए अधिक समय मिलेगा।
सबसे अहम सवाल यह है कि क्या अब UPI से पैसे भेजने पर आम लोगों को अतिरिक्त शुल्क देना होगा? फिलहाल उपलब्ध जानकारी के अनुसार, Person-to-Person (P2P) यानी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को पैसे भेजने वाले UPI ट्रांजैक्शन इस MDR व्यवस्था से बाहर हैं। 2,000 तक के मर्चेंट भुगतान और शून्य-MDR व्यवस्था के अंतर्गत आने वाले छोटे कारोबारियों के भुगतान भी पहले की तरह शुल्क से बाहर रहेंगे। वित्त मंत्रालय ने सितंबर में बताया था कि नए फ्रेमवर्क के तहत लगभग 96% मर्चेंट UPI ट्रांजैक्शन प्रभावित नहीं होंगे। हालांकि, पात्र बड़े मर्चेंट ट्रांजैक्शन के लिए प्रस्तावित शुल्क व्यवस्था अलग है।
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