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मुरैना। भारतीय जनता पार्टी के बागचीनी मंडल उपाध्यक्ष उमेश सिंह सिकरवार के बड़े भाई के घर दिनदहाड़े पौन करोड़ के गहने, नकदी व लाइसेंसी रायफल चोरी हो गई। चोरी की यह घटना गुरुवार दोपहर में घटी। 24 घंटे तक पुलिस ने न तो एफआईआर दर्ज की और न ही किसी को इस घटना की भनक लगने दी। पीड़ित पक्ष ने बेटे की सगाई करने आए लोगों पर चोरी के आरोप लगाए हैं। पुलिस ने संदेहियों को पकड़ लिया, लेकिन उनसे चोरी गया माल बरामद नहीं हुआ। वहीं पुलिस को घर की एक महिला सदस्य भी संदेही लग रही है।
भाजपा नेता के बड़े भाई विष्णु सिंह सिकरवार उम्र 60 साल भूतपूर्व सैनिक हैं और देवगढ़ थाना क्षेत्र के नंदपुरा गांव में रहते हैं। विष्णु सिंह के दोनों बेटे फौज में हैं और अविवाहित हैं। इन्हीं में से एक बेटे राघवेंद्र सिंह की शादी का रिश्ता लेकर गुरुवार को आधा दर्जन से अधिक लोग आए। सगाई लेकर आए लोग दोपहर दो से तीन बजे तक विष्णु सिंह के घर में रहे।
शाम को पांच बजे विष्णु सिंह को कमरे में टंगी रहने वाली रायफल नहीं दिखी, उसके बाद छोटी बेटी का अपने गहनों से भरा पर्स नहीं दिखा, तब उन्हें घर में चोरी का पता लगा। छानबीन की तो घर के पीछे टूटे बक्से, सूटकेस, रायफल का कवर आदि सामान बिखरा मिला।
भाजपा नेता उमेश सिंह ने बताया कि उनके बड़े भाई के घर से लगभग 45 तौला (540 ग्राम) वजन के सोने के गहने, 800 ग्राम चांदी, दो लाख रुपये नकदी, माउजर बंदूक और 50 कारतूस चोरी हो गए हैं।
विष्णु सिंह के फौजी बेटे की सगाई करवाने के लिए देवगढ़ थाना क्षेत्र के ही कोल्हूडांडा निवासी राजेंद्र सिंह जादौन अपने साथ भिंड के बाराकलां निवासी बलवीर पुत्र हाकिम सिंह भदौरिया, विनोद पुत्र उदय सिंह कुशवाह, रघुनाथपुरा जौरा निवासी विश्वनाथ सिंह पुत्र रघुनाथ सिंह के अलावा अंबाह थाना क्षेत्र के गोले की गढ़ी निवासी बलवीर सिंह उर्फ विजय सिंह पुत्र रामगोपाल सिंह तोमर, सूरज पुत्र मंगल सिंह तोमर और कल्लू पुत्र पप्पू सिंह तोमर को लेकर पहुंचा था।
इन सबके साथ एक साधु विजयदास उर्फ बलवीर सिंह पुत्र रामगोपाल सिंह तोमर निवासी कुर्रा-कनक के उनईपुरा थाना बलौली उत्तर प्रदेश भी था। विष्णु सिंह और उमेश सिंह का आरोप है कि यह लोग घर देखने और बातचीत करने के बहाने पूरे घर में घूमे। राजेंद्र सिंह पहले भी पांच बार घर आ चुका था और बाबा विजयदास भी दो बार पहले आ चुका था।
पीड़ित पक्ष का आरोप है कि बाबा विजयदास ने घर के लोगों पर सम्मोहन जैसी कोई क्रिया की, उसके बाद घर से गहने, रुपये, रायफल और कारतूस समेट ले गए।
विष्णु सिंह की दो बेटियां हैं, दोनों की शादी हो चुकी है। बड़ी बेटी प्रिंसी की शादी राजस्थान में फौजी के साथ हुई, लेकिन पति से मनमुटाव के कारण वह वर्षों से पिता के साथ रह रही हैं। छोटी बेटी शांता की ससुराल भी राजस्थान के महुआखेड़ा में है। उनके पति पुलिस में हैं और कुछ दिन पहले ही वह मायके आई थीं। दोनों बहनों के गहने और नकदी चोरी हुई है।
प्रिंसी के अनुसार उसके पांच तौला का रानी हार, पांच तौला का सीतारानी हार, ढाई तौला का हार, दो तौला वजन की आठ अंगूठियां, दो मंगलसूत्र डेढ़ तौला के, डेढ़ तौला की चेन, तीन तौला की चार चूड़ियां, सोने के टॉप्स की जोड़ी, सात जोड़ी तोड़िया, पांच जोड़ी बिछिया, एक पेंडल, तीन चांदी की अंगूठियां और पर्स में रखे एक लाख रुपये चोरी गए हैं।
छोटी बेटी शांता ने बताया कि तीन तौला वजनी चूड़ियों का सेट, पांच तौला वजनी रानी हार, पांच तौला का सीतारामी हार, दो तौला का छोटा हार, डेढ़ तौला की पांच अंगूठियां, एक मंगलसूत्र, सवा तौला की चेन, एक तौला वजनी झुमकी सेट, दो जोड़ी पायल, तीन जोड़ी बिछिया, नाक की बाली और 15 हजार रुपये नकदी चोरी हो गए।
छोटी बेटी ने बताया कि जो लोग सगाई करने आए थे, उनमें से कुछ घर के पीछे बैठकर फोन पर किसी से बात कर रहे थे। उसी जगह शाम के समय टूटे सूटकेस, बक्से और बिखरा सामान मिला।
घर में चोरी का पता लगने के बाद विष्णु सिंह और उमेश सिंह ने सबसे पहले राजेंद्र सिंह जादौन को फोन किया और पूछा कि आप लोग कहां हैं, साथ जो बाबा और अन्य लोग आए थे वह कहां हैं। राजेंद्र सिंह ने जवाब दिया कि वह अपने घर सो रहा है, बाकी लोगों का पता नहीं। लेकिन राजेंद्र सिंह घर नहीं मिला।
इसके बाद भाजपा नेता उमेश सिंह ने अपने नाते-रिश्तेदारों की मदद ली, तो पता चला कि राजेंद्र सिंह श्योपुर जिले के रघुनाथपुर गांव में है। आधी रात को उमेश सिंह और उनके स्वजन देवगढ़ पुलिस को साथ लेकर रघुनाथपुर पहुंचे, वहां से राजेंद्र सिंह को लाए। बाद में अन्य संदेहियों को बुलाया गया। रिश्ता लेकर आए भिंड के लोगों में से एक बलवीर सिंह भदौरिया भी रिटायर सैनिक हैं।

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अस्पताल से रिटायर्ड डॉक्टर ले गया सोनोग्राफी मशीन, सिविल सर्जन ने लगाया चोरी का आरोप, FIR दर्ज
सीधी। जिला अस्पताल से सोनोग्राफी मशीन चोरी का मामला प्रकाश में आया है। चोरी करने का आरोप सेवानिवृत्त शिशु रोग विशेषज्ञ पर लगाया गया है। जिसकी शिकायत सिविल सर्जन ने सिटी कोतवाली में दर्ज कराया है। पुलिस जांच में जुटी है। जांच के बाद कार्रवाई की जाएगी।
सिविल सर्जन डॉ. एसबी खरे ने बताया कि जिला अस्पताल के कक्ष क्रमांक 12 में सोनोग्राफी रखी लगी हुई थी। 21 मई दोपहर करीब 2.30 से 3 बजे के बीच डॉ. देवेंद्र सिंह सेवानिवृत्त शिशु रोग विशेषज्ञ जिला अस्पताल बिना सूचना के अस्पताल पहुंचे। जहां उन्होंने महेश केवट वार्ड बॉय से ताला खोलने को कहा। कहने पर वार्ड बॉय ने ताला खोल दिया। इसके बाद डॉक्टर देवेंद्र सिंह कक्ष क्रमांक 12 में रखें सोनोग्राफी मशीन सहित अन्य सामग्री को लेकर चले गए।
उन्होंने यह भी शिकायत किया है कि राम सुजान मिश्रा सुरक्षा गार्ड द्वारा मशीन ले जाने से नहीं रोका गया है। ऐसे में देवेंद्र सिंह के साथ इन दोनों पर एफआईआर दर्ज किया जाए।
सेवानिवृत डॉक्टर देवेंद्र सिंह ने दावा किया है कि सोनोग्राफी मशीन के साथ यहां रखी अन्य मशीन मेरे खुद के पैसे से खरीदी गई थी। इसलिए हम जिला अस्पताल से लेकर आए हैं।
डॉ एसबी खरे सिविल सर्जन के शिकायत के बाद अभिषेक उपाध्याय सिटी कोतवाली प्रभारी ने दोनों ही पक्ष से रिकॉर्ड प्रस्तुत करने को कहा है। लेकिन अब तक दोनों पक्ष मशीन संबंधित बिल एवं अन्य कागजात लेकर प्रस्तुत नहीं हुए हैं। उपाध्याय ने कहा कि यदि दोनों पक्ष प्रस्तुत नहीं होंगे तो नोटिस जारी किया जाएगा।
सेवानिवृत डॉ देवेंद्र सिंह जिला अस्पताल के कक्ष क्रमांक 12 में रखे सोनोग्राफी मशीन बिना जानकारी लेकर चले गए हैं। जिसकी शिकायत सिटी कोतवाली में दर्ज कराई गई है।- डॉ. एसबी खरे सिविल सर्जन जिला अस्पताल सीधी
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ब्लैकमेलिंग कांड में बड़ी कार्रवाई: रिशु चौधरी और हेड कॉन्स्टेबल बनाए गए आरोपी, कई नाम आ सकते हैं सामने
इंदौर। मध्य प्रदेश के बहुचर्चित ब्लैकमेलिंग के मामले में पुलिस ने दो आरोपियों के नाम और जोड़े हैं। जिसमें रिशु चौधरी और पुलिसकर्मी विनोद शर्मा को आरोपी बनाया गया है। पुलिस का कहना है कि विनोद चौधरी मुख्य आरोपी अलका दीक्षित के संपर्क में बना हुआ था और इस ब्लैकमेलिंग अभियान को मिशन के तौर पर संचालित किया जा रहा था। फिलहाल इसमें संभावना व्यक्त की गई की और भी आरोपी सामने आ सकते हैं। अभी तक सात लोगों को आरोपी बनाया जा चुका है। जिनकी 25 में तक पुलिस रिमांड ली गई है।
डीसीपी राजेश त्रिपाठी के मुताबिक प्रॉपर्टी कारोबार से जुड़े हुए हितेंन ठाकुर ने ब्लैकमेलिंग सहित विभिन्न धाराओं में प्रकरण दर्ज करवाया था। तभी से क्राइम ब्रांच लगातार जांच पड़ताल में जुटी थी। जिसमें अलका दीक्षित और उसके बेटे जयदीप दीक्षित को गिरफ्तार किया गया था। जांच पड़ताल के दौरान उज्जैन में रहने वाले जितेंद्र पुरोहित को भी पकड़ा गया था।
साथ ही इस ब्लैकमेलिंग में कारोबार को पार्टनरशिप के रूप में बताया गया था और पीथमपुर के रहने वाले लखन सिंह नामक व्यक्ति से अलका चौधरी ने फरियादी ठाकुर की मुलाकात करवाई थी। लेकिन इन सब के मंसूबों को लेकर फरियादी को किसी वारदात की बदबू आने लगी। इसके बाद उसने तुरंत क्राइम ब्रांच में शिकायत की।
शिकायत के बाद क्राइम ब्रांच ने मामले में जांच पड़ताल शुरू की जिसमें एक करोड रुपए की ब्लैकमेलिंग की बात सामने आई। इस आधार पर शिकायत भी दर्ज हुई थी। मामले में पुलिस ने 5 आरोपियों को पहले ही गिरफ्तार कर लिया था जो सागर के रहने वाली रिशु चौधरी और पुलिसकर्मी विनोद शर्मा संपर्क में थे।
मामले का खुलासा होने के बाद अब उन्हें भी आरोपी बना दिया गया है। इस मामले में अभी तक कुल सात आरोपी बन बन चुके हैं। पुलिस के मुताबिक पुलिसकर्मी विनोद लगातार अलका दीक्षित के संपर्क में था। वह पूरी प्लानिंग को मिशन के तौर पर संचालित कर रहा था ताकि ब्लैकमेलिंग से मिलने वाले रुपए का हिस्सा कर सभी आपस में बांट लेते। पुलिस के मुताबिक अभी और भी आरोपी बनने की संभावना है। उनके मोबाइल फोन की जांच पड़ताल की जा रही है।

पन्ना। मध्य प्रदेश के पन्ना जिले से कानून के रखवालों को शर्मसार करने वाली बेहद सनसनीखेज खबर सामने आई है। जहां रक्षक ही भक्षक बन बैठे। बागेश्वर धाम जा रहे एक व्यापारी को पुलिस ने शिकार बना लिया। इस मामले में निलंबन के बाद पहली बार टीआई समेत तीन पर केस दर्ज किया गया है।
जानकारी के मुताबिक, रीवा के एक संभ्रांत सोने-चांदी के व्यापारी मोहनलाल सोनी, जो अपनी गाड़ी से बागेश्वर धाम दर्शन के लिए निकले थे। उन्हें मड़ला थाना क्षेत्र में पुलिसकर्मियों और उनके गुर्गों ने अपना शिकार बना लिया। ​दिनदहाड़े हुई इस वारदात में व्यापारी की कार को रोककर, उसमें जबरन गांजे की पुड़िया होने का झूठा दावा किया गया।
इसके बाद जेल भेजने की धमकी देकर व्यापारी को करीब दो घंटे तक बंधक बनाए रखा गया। बदनामी और कानूनी कार्रवाई के डर से सहमे व्यापारी से आरोपियों ने 95,000 रुपये की मोटी रकम ऐंठ ली, जिसमें से 50,000 रुपये ऑनलाइन ट्रांसफर करवाए गए।
इस मामले में खाकी का असली चेहरा तब बेनकाब हुआ जब जांच के बाद मड़ला थाना प्रभारी रचना पटेल, पुलिसकर्मी रज्जाक खान, रामशरण अहिरवार और उनके एक साथी बृजेश यादव के खिलाफ साजिश और जबरन वसूली की संगीन धाराओं में मामला दर्ज किया गया। खाकी पर लगे इस बड़े दाग के बाद महकमे में हड़कंप तो मचा है, लेकिन हैरान करने वाली बात यह है कि इस गंभीर मामले पर पन्ना पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी कुछ भी कहने से साफ बच रहे हैं।
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कॉकरोच जनता पार्टी की MP में एंट्री : भोपाल में प्रेस कॉन्फ्रेंस, कहा- शिथिल सिस्टम के खिलाफ आवाज है
भोपाल। सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा में आई ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ यानी CJP ने अब मध्य प्रदेश में भी एंट्री कर ली है। राजधानी भोपाल में शुक्रवार को सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी कर रहे युवा कार्यकर्ता मयंक ने पार्टी के बैनर तले प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस दौरान नीट पेपर लीक, नर्सिंग परीक्षा गड़बड़ी और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं से प्रभावित छात्र-छात्राएं शामिल रही।
यह पूरे सिस्टम के खिलाफ आवाज है- मयंक
प्रेस कॉन्फ्रेंस में मयंक ने कहा कि CJP केवल एक राजनीतिक दल नहीं, बल्कि Gen-Z की परेशानियों और उम्मीदों से जुड़ा युवा आंदोलन है। उनका कहना था कि यह किसी व्यक्ति या पार्टी के खिलाफ अभियान नहीं, बल्कि उस सिस्टम के खिलाफ आवाज है जिसने युवाओं का भरोसा कमजोर किया है।
युवा सवाल पूछते हैं तो आवाज दबाई जाती है...
मयंक ने आरोप लगाया कि जब युवा पेपर लीक, भर्ती घोटालों और परीक्षा गड़बड़ियों पर सवाल उठाते हैं, तब उनकी आवाज दबाने की कोशिश होती है। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया अकाउंट तक बैन किए जा रहे हैं और अब सरकारी संस्थान अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकते।
उन्होंने यह भी बताया कि जल्द ही मध्य प्रदेश में पार्टी की कोर कमेटी घोषित की जाएगी। विदेशी फॉलोअर्स और पाकिस्तानी अकाउंट्स से जुड़े आरोपों को उन्होंने दुष्प्रचार बताया।
एक बयान से शुरू हुआ पूरा आंदोलन
दरअसल, 15 मई 2026 को सुप्रीम कोर्ट के सीजेआई सूर्यकांत ने एक सुनवाई के दौरान युवाओं को लेकर टिप्पणी की थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक उन्होंने कहा था कि कुछ युवा कॉकरोच की तरह भटक रहे हैं और सोशल मीडिया या एक्टिविज्म के जरिए हर किसी पर हमला कर रहे हैं।
इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ नाम से डिजिटल कैंपेन शुरू हुआ। विवाद बढ़ने पर CJI ने बाद में सफाई देते हुए कहा कि उनके बयान को गलत तरीके से पेश किया गया।
कौन हैं CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके?
30 वर्षीय अभिजीत दीपके महाराष्ट्र के संभाजीनगर के रहने वाले डिजिटल मीडिया स्ट्रैटजिस्ट हैं। उन्होंने पुणे से पत्रकारिता की पढ़ाई की और फिलहाल बोस्टन यूनिवर्सिटी में पब्लिक रिलेशन की पढ़ाई कर रहे हैं।
अभिजीत 2020 से 2022 तक आम आदमी पार्टी के सोशल मीडिया स्ट्रैटजिस्ट भी रह चुके हैं। दिल्ली चुनावों में उन्होंने मीम आधारित डिजिटल कैंपेन पर काम किया था।
क्या हैं CJP के बड़े दावे?
पार्टी खुद को आलसी और बेरोजगार युवाओं की आवाज” बताती है। इसका नारा है- सेक्युलर, सोशलिस्ट, डेमोक्रेटिक, लेजी।
पार्टी ने अपने मैनिफेस्टो में कई बड़े वादे किए हैं, जिनमें महिलाओं को 50% आरक्षण, दलबदल करने वाले नेताओं पर 20 साल
प्रतिबंध, वोट डिलीट करने पर कड़ी कार्रवाई और मीडिया सिस्टम में बड़े बदलाव जैसे मुद्दे शामिल हैं>
क्यों चर्चा में है CJP?
सोशल मीडिया पर मीम और व्यंग्य के जरिए तेजी से लोकप्रिय हुई
बेरोजगारी, पेपर लीक और भर्ती घोटालों जैसे मुद्दे उठा रही
Gen-Z युवाओं के बीच डिजिटल आंदोलन की तरह उभर रही
पारंपरिक राजनीति के खिलाफ नया ऑनलाइन ट्रेंड बन चुकी है
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MP: पुलिस मुख्यालय का नया आदेश, एक थाने में 5 साल से ज्यादा नहीं रहेगी पोस्टिंग
मध्य प्रदेश में अब किसी भी पुलिसकर्मी की एक ही थाने में लंबी पोस्टिंग नहीं रहेगी। पुलिस मुख्यालय (PHQ) ने थानों में कर्मचारियों की पदस्थापना को लेकर नया आदेश जारी किया है। इसके तहत किसी भी पुलिसकर्मी को एक ही थाने में 5 साल से ज्यादा समय तक नहीं रखा जाएगा। साथ ही एक बार हटने के बाद उसी थाने में दोबारा पोस्टिंग भी नहीं मिलेगी।
शुक्रवार को जारी आदेश में डीजीपी कैलाश मकवाणा ने भोपाल और इंदौर पुलिस कमिश्नर समेत सभी जिलों के पुलिस अधीक्षकों को निर्देश दिए हैं कि थानों में लंबे समय से जमे कर्मचारियों का चरणबद्ध तरीके से तबादला किया जाए। इसका उद्देश्य पुलिस व्यवस्था में पारदर्शिता और कार्यप्रणाली की प्रभावशीलता बढ़ाना बताया गया है।
नए नियम के मुताबिक किसी भी कर्मचारी की एक ही थाने में एक पद पर अधिकतम पोस्टिंग अवधि 4 साल होगी। विशेष परिस्थितियों में इसे बढ़ाकर अधिकतम 5 साल तक किया जा सकेगा। इसके बाद संबंधित कर्मचारी को उसी थाने में दोबारा पदस्थ नहीं किया जाएगा।
पीएचक्यू ने यह भी स्पष्ट किया है कि आरक्षक से लेकर उप निरीक्षक स्तर तक किसी भी कर्मचारी की एक ही पुलिस अनुविभाग में अलग-अलग पदों पर कुल पोस्टिंग अवधि 10 साल से ज्यादा नहीं हो सकेगी। अगर किसी कर्मचारी को दोबारा उसी थाने में पदस्थ करना हो, तो दोनों पोस्टिंग के बीच कम से कम 3 साल का अंतर जरूरी होगा।
पुलिस मुख्यालय ने सभी जिलों को निर्देश दिए हैं कि थानों में पदस्थ कर्मचारियों की तत्काल समीक्षा की जाए। 1 जून से 5 जून 2026 के बीच स्थानांतरण आदेश जारी किए जाएंगे, जबकि 15 जून तक कर्मचारियों की नई थानों में जॉइनिंग सुनिश्चित करनी होगी।
आदेश में यह भी कहा गया है कि स्थानांतरित कर्मचारियों से जुड़े लंबित मामलों, जांच और प्रकरणों की पूरी जानकारी नए थाना प्रभारियों को विधिवत सौंपी जाएगी। सभी इकाइयों को 16 जून 2026 तक अपनी रिपोर्ट पुलिस मुख्यालय भेजने के निर्देश दिए गए हैं।

पानीपत। एडवोकेट सुधीर जाखड़ ने ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) को एक आधिकारिक राजनीतिक दल के रूप में पंजीकृत कराने के लिए भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के समक्ष अपनी विस्तृत अर्जी दाखिल की है। यह महत्वपूर्ण कदम एडवोकेट सुधीर जाखड़ द्वारा उठाया गया है। उन्होंने इस संबंध में सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करते हुए आवेदन पत्र जमा किया है, ताकि पार्टी आगामी राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय रूप से भाग ले सके।
उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार, कॉकरोच जनता पार्टी को लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 29A के तहत पंजीकृत कराने की मांग की गई है। सुधीर जाखड़ ने इस प्रस्तावित आंदोलन को एक ‘जन-केंद्रित लोकतांत्रिक पहल’ करार दिया है। इस नए दल का मुख्य जोर सामुदायिक सेवा, संवैधानिक जागरूकता और सामाजिक जवाबदेही सुनिश्चित करने पर रहेगा। इसके अलावा, आवेदन पत्र में पर्यावरण संरक्षण, पशु कल्याण और शासन में पारदर्शिता को भी पार्टी के प्राथमिक एजेंडे के रूप में प्रमुखता से सूचीबद्ध किया गया है, जो इसके व्यापक दृष्टिकोण को दर्शाता है।
अपने दस-सूत्रीय एजेंडे में कॉकरोच जनता पार्टी ने भारत के संविधान के अनुच्छेद 51A के तहत उल्लिखित मौलिक कर्तव्यों को बढ़ावा देने और मजबूत करने पर विशेष बल दिया है। सुधीर जाखड़ द्वारा हस्ताक्षरित आवेदन में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि पार्टी शांतिपूर्ण और संवैधानिक माध्यमों से लोकतांत्रिक सुधारों का समर्थन करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। ‘CJP’ ने देश के संविधान, समाजवाद, धर्मनिरपेक्षता, लोकतंत्र और गणतंत्र के सिद्धांतों के प्रति अपनी अटूट निष्ठा व्यक्त की है, साथ ही भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता को सर्वोपरि रखने का संकल्प लिया है।
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सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश, अब हर लापता व्यक्ति और बच्चे के मामले में दर्ज होगी अपहरण की एफआईआर
नई दिल्ली. देशभर में बढ़ते मानव तस्करी और लापता बच्चों के मामलों पर गंभीर चिंता जताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा और सख्त आदेश जारी किया है. शीर्ष अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि अब देश के हर पुलिस थाने में किसी भी लापता बच्चे या व्यक्ति के मामले में अनिवार्य रूप से अपहरण की एफआईआर दर्ज की जाएगी. कोर्ट ने कहा कि पुलिस किसी भी हाल में प्रारंभिक जांच के नाम पर मामला दर्ज करने में देरी नहीं कर सकती और न ही परिवार वालों को खुद तलाश करने के लिए छोड़ सकती है.
सुप्रीम कोर्ट ने यह अहम निर्देश उस समय दिया जब अदालत के सामने देशभर में वर्षों से लापता करीब 47 हजार बच्चों का चौंकाने वाला आंकड़ा रखा गया. अदालत ने इस स्थिति को बेहद गंभीर बताते हुए कहा कि समाज और प्रशासन इस समस्या की भयावहता को समझ ही नहीं रहा है. कोर्ट ने कहा कि लोगों को इस कठोर सच्चाई से झकझोरने की जरूरत है.
जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ तमिलनाडु के एक ऐसे मामले की सुनवाई कर रही थी जिसमें एक बच्चा वर्ष 2011 से लापता है. सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि किसी भी लापता व्यक्ति या बच्चे के मामले में संबंधित पुलिस थाने को तुरंत एफआईआर दर्ज करनी होगी और उसमें भारतीय न्याय संहिता की अपहरण से संबंधित धाराएं अनिवार्य रूप से शामिल करनी होंगी.
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि पुलिस अब किसी भी मामले को सामान्य गुमशुदगी मानकर हल्के में नहीं ले सकती. अदालत ने कहा कि यदि किसी मामले में मानव तस्करी की आशंका दिखाई देती है तो उसे तुरंत एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट को सौंपा जाए. कोर्ट ने इस दिशा में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की पुलिस को सक्रिय भूमिका निभाने के निर्देश दिए हैं.
यह निर्देश उस समिति की सिफारिशों के बाद जारी किए गए हैं जिसे सुप्रीम कोर्ट ने पूरे देश के लिए एक समान मानक संचालन प्रक्रिया यानी एसओपी तैयार करने के लिए गठित किया था. इस समिति की अध्यक्षता दिल्ली हाईकोर्ट की पूर्व न्यायाधीश जस्टिस मुक्ता गुप्ता कर रही थीं. समिति में पूर्व आईपीएस अधिकारी पी.एम. नायर और गृह मंत्रालय के अधिकारी वीरेंद्र कुमार मिश्रा भी शामिल थे.
सुनवाई के दौरान पूर्व आईपीएस अधिकारी पी.एम. नायर ने अदालत को कई चौंकाने वाले उदाहरण बताए. उन्होंने एक ऐसे बच्चे का मामला रखा जिसे केरल के बाल संरक्षण गृह में बरामद किया गया था, जबकि वह तीन साल पहले बिहार से लापता हुआ था. इस उदाहरण के जरिए समिति ने बताया कि राज्यों के बीच समन्वय की कमी के कारण कई बच्चे वर्षों तक अपने परिवारों से दूर रह जाते हैं.
समिति ने सुझाव दिया कि बरामद या बचाए गए बच्चों का आधार सत्यापन अनिवार्य किया जाए. अदालत ने इस सुझाव को स्वीकार करते हुए आदेश दिया कि जैसे ही कोई बच्चा या व्यक्ति बरामद होता है, उसका आधार सत्यापन या आधार कार्ड बनवाने की प्रक्रिया तुरंत शुरू की जाए. कोर्ट ने कहा कि बायोमेट्रिक जानकारी के जरिए ऐसे बच्चों की पहचान तेजी से हो सकेगी और उन्हें जल्द परिवार से मिलाया जा सकेगा.
सुप्रीम कोर्ट ने गृह मंत्रालय को यह भी निर्देश दिया कि पूरे देश के पुलिस थानों को जोड़ने वाला एक राष्ट्रीय डाटा ग्रिड तैयार किया जाए. यह पोर्टल मानव तस्करी, लापता बच्चों और महिलाओं से जुड़े मामलों की निगरानी करेगा. अदालत ने कहा कि इस व्यवस्था से राज्यों के बीच सूचनाओं का आदान-प्रदान आसान होगा और जांच में तेजी आएगी.
अदालत ने सभी राज्यों के पुलिस महानिदेशकों और केंद्र शासित प्रदेशों के पुलिस प्रमुखों को निर्देश दिया कि एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट्स को पूरी तरह सक्रिय किया जाए और उन्हें प्रभावी कार्रवाई के लिए पर्याप्त अधिकार दिए जाएं. कोर्ट ने यह भी कहा कि केवल बच्चे को बरामद करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसे सुरक्षित तरीके से उसके परिवार तक पहुंचाना भी पुलिस और प्रशासन की जिम्मेदारी है.
सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो यानी एनसीआरबी के आंकड़ों के अनुसार देश में अब भी 47 हजार बच्चे ऐसे हैं जिनका कोई पता नहीं चल पाया है. अदालत ने इस पर गहरी चिंता जताते हुए कहा कि पुलिस अक्सर ऐसे मामलों में मानव तस्करी के एंगल की गंभीरता से जांच नहीं करती.
कोर्ट ने कहा कि कई मामलों में पुलिस केवल औपचारिकता पूरी कर अपने कर्तव्य से मुक्त हो जाती है और आगे की जिम्मेदारी बाल संरक्षण संस्थाओं पर छोड़ देती है. अदालत ने ऐसी लापरवाही को अस्वीकार्य बताते हुए कहा कि प्रशासनिक उदासीनता अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी.
इस दौरान अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस.डी. संजय ने अदालत को बताया कि सुप्रीम कोर्ट की अन्य पीठों में भी बाल तस्करी से जुड़े मामलों पर सुनवाई चल रही है. एक मामला एनजीओ गुरिया स्वयंसेवी संस्थान द्वारा दायर किया गया है, जबकि दूसरा मामला उत्तर प्रदेश में एक बच्चे की तस्करी से जुड़ा हुआ है.
वरिष्ठ अधिवक्ता अपर्णा भट्ट ने अदालत को बताया कि बाल तस्करी अब संगठित अंतरराज्यीय गिरोहों के जरिए बड़े स्तर पर संचालित हो रही है. उन्होंने कहा कि यह केवल कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं बल्कि मानवाधिकार और बच्चों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर संकट है.
सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई अगस्त में तय की है. तब तक समिति को और सुझाव देने के लिए समय दिया गया है. फिलहाल अदालत के इस ऐतिहासिक आदेश को बच्चों और महिलाओं की सुरक्षा के लिए एक बड़ा कदम माना जा रहा है. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन निर्देशों का सख्ती से पालन हुआ तो देश में मानव तस्करी और लापता बच्चों के मामलों की जांच में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है.
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लोन न चुकाने वालों का फोन होगा लॉक! जरूरी सेवाएँ रहेंगी सुरक्षित, RBI ने दिया प्रस्ताव
नई दिल्ली। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने बुधवार को सुझाव दिया कि बैंकों और वित्तीय संस्थानों को उन स्मार्टफोन और टैबलेट पर कुछ फंक्शन को दूर से ही सीमित करने या बंद करने की अनुमति दी जाए, जिन्हें डिवाइस फाइनेंसिंग लोन लेकर खरीदा गया था, ऐसा तब किया जाएगा जब लोन लेने वाले लोग लोन की किस्तें चुकाने में पीछे रह जाएँ।
यह प्रस्ताव भारत के बहुत बड़े मोबाइल बाज़ार के संदर्भ में आया है। 1.16 अरब से ज़्यादा मोबाइल कनेक्शन के साथ, भारत दुनिया के सबसे बड़े स्मार्टफ़ोन बाज़ारों में से एक है। होम क्रेडिट फ़ाइनेंस के 2024 के एक अध्ययन में पाया गया कि भारत में उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स की एक-तिहाई से ज़्यादा खरीद, जिसमें मोबाइल फ़ोन भी शामिल हैं, छोटे लोन के ज़रिए फ़ाइनेंस की जाती हैं।
प्रस्तावित नियम के तहत, लोन देने वाली कंपनियों को डिवाइस के फ़ंक्शन तभी सीमित करने की अनुमति होगी, जब लोन 90 दिनों से ज़्यादा समय से बकाया हो, और केवल तभी जब लोन लेने वाले ने लोन एग्रीमेंट पर साइन करते समय ऐसी पाबंदियों के लिए सहमति दी हो।
कोई भी पाबंदी लगाने से पहले, लोन लेने वालों को पेमेंट न करने के 60 दिनों के बाद एक नोटिस मिलना ज़रूरी है, जिसमें उन्हें बकाया चुकाने के लिए 21 दिन का समय दिया जाएगा। इसके बाद एक दूसरा नोटिस भी भेजा जाना ज़रूरी है, जिसमें पेमेंट के लिए कम से कम एक और हफ़्ता दिया जाए, और उसके बाद ही डिवाइस पर कोई कार्रवाई की जा सकती है।
RBI ने साफ़ कर दिया है कि ज़रूरी सेवाएँ हर समय उपलब्ध रहनी चाहिए, भले ही डिवाइस पर पाबंदी लगी हो। इंटरनेट का इस्तेमाल, आने वाली कॉल, इमरजेंसी SOS फ़ीचर और सरकारी अलर्ट किसी भी हाल में ब्लॉक नहीं किए जा सकते। इसके अलावा, लोन देने वाली कंपनियों को लॉक किए गए डिवाइस में मौजूद किसी भी निजी डेटा को देखने की मनाही होगी, जिससे निजता और डेटा सुरक्षा से जुड़ी चिंताएँ दूर होंगी।
जैसे ही कोई लोन लेने वाला अपना बकाया चुका देता है, लोन देने वाली कंपनियों को पेमेंट मिलने के एक घंटे के अंदर सभी पाबंदियाँ हटाना ज़रूरी है। ऐसा न करने पर, लोन देने वाली कंपनी को लोन लेने वाले को हर घंटे की देरी के लिए 250 रुपये का मुआवज़ा देना होगा। यह प्रस्ताव फ़रवरी में जारी एक पिछले ड्राफ़्ट पर मिली इंडस्ट्री की राय के बाद आया है, जिसमें लोन वसूली करने वाले एजेंटों से जुड़े नियमों को और सख़्त करने की बात कही गई थी. इस प्रस्ताव पर 31 मई तक आम लोगों की राय ली जाएगी।

ग्वालियर। ग्वालियर में सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर और ‘इंस्टाग्राम क्वीन’ के नाम से मशहूर 21 साल की पलक रजक की संदिग्ध मौत मामले में मुरार थाना पुलिस ने FIR दर्ज की है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत की वजह फांसी लगने से दम घुटना बताई गई है। वहीं परिजनों ने इसे हत्या करार देते हुए ससुराल पक्ष पर गंभीर आरोप लगाए हैं। मुरार थाना पुलिस ने पति, देवर और सास के खिलाफ FIR दर्ज कर जांच तेज कर दी है।
ग्वालियर के मुरार थाना क्षेत्र स्थित सुरैयापुरा में रहने वाली सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर पलक रजक की संदिग्ध मौत ने पूरे शहर को झकझोर दिया है। 12 मई की शाम पलक का शव उसके ससुराल स्थित घर में मिला था। महज 21 साल की उम्र में पलक की मौत ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत की वजह हैंगिंग यानी फांसी लगने से दम घुटना बताई गई है। रिपोर्ट में शरीर पर किसी तरह की बाहरी चोट या प्रताड़ना के निशान नहीं मिले हैं। लेकिन सोनम के माता पिता भाई आरोप लगा चुके है कि पलक ने आत्महत्या नहीं की,बल्कि उसकी हत्या की गई है। पलक के पिता राधेश्याम रजक और भाई प्रिंस रजक ने ससुराल पक्ष पर गंभीर आरोप लगाए हैं। परिवार का कहना है कि शादी के बाद से ही पलक को लगातार प्रताड़ित किया जा रहा था। आरोप है कि ससुराल वाले कार और सोने की चेन की मांग कर रहे थे। सास और देवर मानसिक रूप से प्रताड़ित करते थे,जबकि पति अमित ने कभी उसका साथ नहीं दिया।
परिजनों के मुताबिक मौत से करीब 20 मिनट पहले पलक ने अपने पिता को फोन कर अपनी पीड़ा बताई थी। भाई प्रिंस उसे लेने जाने की तैयारी कर रहा था, लेकिन उससे पहले ही पलक की मौत की खबर आ गई। पलक सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव थी और इंस्टाग्राम पर उसकी बड़ी फैन फॉलोइंग थी। पुलिस को उसकी प्रोफाइल से कई ऐसी रील्स मिली हैं जो मानसिक तनाव की ओर इशारा करती हैं। 10 मई को पोस्ट की गई एक रील में पलक ने Panic Attack, Anxiety, Sleepless Nights, Continuous Crying और Depression जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया था। वहीं 24 अप्रैल को मैरिज एनिवर्सरी पर पोस्ट की गई रील में भी उसने दर्द और टूटती जिंदगी के भाव जाहिर किए थे। अब पुलिस इन सोशल मीडिया पोस्ट्स को तकनीकी साक्ष्य मानकर जांच कर रही है।
मामले में CSP अतुल सोनी का कहना है कि शुरुआती तौर पर मर्ग कायम किया गया था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और परिजनों के आरोपों के आधार पर अब पति अमित, देवर आकाश और सास मीरा देवी के खिलाफ FIR दर्ज कर ली गई है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हैंगिंग की पुष्टि हुई है। सोशल मीडिया एक्टिविटी और कॉल रिकॉर्ड की जांच की जा रही है। फिलहाल FIR तो दर्ज हो गयी है,लेकिन पलक रजक की मौत आत्महत्या है या इसके पीछे कोई साजिश छिपी है,इसका जवाब पुलिस की पूरी जांच के बाद ही सामने आएगा।

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सीएम के काफिले का सिपाही ने चार किमी तक किया पीछा, लालघाटी चौराहे पर सुरक्षा घेरा तोड़ा, किया गया सस्पेंड
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सुरक्षा में बड़ी चूक का मामला सामने आया है। बुधवार रात एक बाइक सवार सिपाही ने लालघाटी चौराहे पर मुख्यमंत्री के काफिले में घुसकर उसे ओवरटेक करने की कोशिश की। सिपाही नशे की हालत में करीब चार किलोमीटर तक पीछा करता रहा।
करबला तिराहे के पास प्वाइंट पर पुलिस ने उसे रोका। ब्रीथ एनलाइजर से टेस्ट करने पर वह शराब के नशे में पाया गया। जिसके बाद डीसीपी जोन-4 ने सिपाही शैलेश अवस्थी को सस्पेंड कर दिया है।
शैलेश भोपाल में थाना प्रभारी रहे इंस्पेक्टर नीलेश अवस्थी का छोटा भाई है। जानकारी के अनुसार मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव रात करीब 10 बजे स्टेट हैंगर से मुख्यमंत्री निवास लौट रहे थे। काफिले के गुजरने के दौरान लालघाटी चौराहे पर कोहेफिजा पुलिस की विशेष सुरक्षा व्यवस्था लगाई गई थी।
बताया जा रहा है कि सिपाही शैलेश अवस्थी करीब चार किलोमीटर तक मुख्यमंत्री के काफिले के पीछे बाइक दौड़ाता रहा। स्थिति को गंभीरता से लेते हुए पुलिस ने तत्काल वायरलेस पर आगे के प्वाइंट्स को सूचना दी। इसके बाद करबला तिराहे पर घेराबंदी कर उसे पकड़ लिया गया।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार सिपाही शराब के नशे में था। प्रारंभिक जांच के बाद उसके खिलाफ कार्रवाई करते हुए उसे सस्पेंड कर दिया गया है। घटना के बाद कोहेफिजा पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठे हैं। अधिकारियों का कहना है कि सुरक्षा में हुई चूक की अलग से जांच कर जिम्मेदार पुलिसकर्मियों पर भी कार्रवाई की जाएगी।
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देवास पटाखा फैक्ट्री ब्लास्ट केस: मुख्य आरोपी दिल्ली एयरपोर्ट से गिरफ्तार, विस्फोट में 6 लोगों की गई जान
भोपाल। देवास के टोंककला पटाखा फैक्ट्री ब्लास्ट मामले में पुलिस को बड़ी कामयाबी मिली है। मामले के मुख्य आरोपी मुकेश विज को चीन के ग्वांग्झू से भारत लौटते ही दिल्ली एयरपोर्ट से गिरफ्तार कर लिया गया। आरोपी के खिलाफ पहले से लुक आउट सर्कुलर जारी था। वहीं फरार चल रहे एक अन्य आरोपी महेश चौहान को भी दिल्ली से पकड़ा गया है।
बता दें कि टोंककला पटाखा फैक्ट्री में हुए भीषण विस्फोट में अब तक 6 लोगों की मौत हो चुकी है। इस मामले में इससे पहले फैक्ट्री लाइसेंसी अनिल मालवीय, ठेकेदार मोहम्मद अयाज और संयुक्त संचालक कपिल विज की गिरफ्तारी हो चुकी है। अब तक कुल 5 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जबकि मामले की जांच लगातार जारी है।

उमरिया, भरेवा। लूट का सामान खरीदने वाले आरोपित के फरार होने के मामले में थाना इंदवार के प्रभारी, सब इंस्पेक्टर और एएसआई को एसपी ने सस्पेंड कर दिया है। इस बारे में जानकारी देते हुए एसडीओपी पीएल परस्ते ने बताया कि यह कार्रवाई थाना प्रभारी विजय पाटिल, सब इंस्पेक्टर सूर्यपाल सिंह और एएसआई अमर बहादुर सिंह के खिलाफ की गई है।
एसडीओपी ने यह भी बताया कि फरार हुए आरोपित अनुराग ताम्रकार के पास से पुलिस ने पांच से सात लाख रुपए मूल्य के सोने और चांदी के आभूषण जब्त किए हैं। इसमें एक किलो 10 ग्राम चांदी और 15 ग्राम सोना शामिल है। एसडीओपी ने बताया कि आरोपित की तलाश की जा रही है और उसे जल्द से जल्द गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
एसडीओपी पीएल परस्ते ने बताया कि आरोपित ने गिरफ्तारी के बाद जब्ती के कागजातों पर हस्ताक्षर करने से मना कर दिया था और अपनी पहुंच की धौंस पुलिस अधिकारियों को बता रहा था। आरोपित का कहना था कि उसने जब्त किए गए सोने और चांदी को खरीदा नहीं है, बल्कि उसने यह सारा सामान गिरवी रखा है। पुलिस आरोपित के साथ पूरी सद्भावना का भाव प्रदर्शित कर रही थी और उसे सहयोग के लिए कह रही थी, लेकिन इसी बीच मौका पाकर वह थाने से गायब हो गया। पुलिस लगातार आरोपित की तलाश कर रही है, लेकिन अभी तक उसका कोई सुराग नहीं मिला है।
जिले के इंदवार थाना से लूट का माल खरीदने का आरोपित अनुराग ताम्रकार पिता रामदीन ताम्रकार, उम्र लगभग 40 वर्ष, बुधवार को फरार हो गया था। जानकारी के अनुसार ग्राम पल्झा में कुछ दिन पूर्व हुए सराफा व्यापारी लूटकांड की जांच के दौरान पुलिस ने अनुराग ताम्रकार को पूछताछ के लिए थाने बुलाया था, जिस पर लुटेरों से सोना-चांदी खरीदने का आरोप था।
लूट की घटना को अंजाम देने वाले आरोपितों ने सराफा व्यापारी से लूटे गए सोना-चांदी अनुराग ताम्रकार को बेच दिया था। पुलिस को पूछताछ के दौरान मिली जानकारी और आरोपितों की निशानदेही पर मंगलवार की शाम बरही क्षेत्र से अनुराग को हिरासत में लिया गया था।
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नाबालिग की अधेड़ से शादी, दूल्हा और दादा-दादी समेत 13 लोगों पर FIR, फरार पंडित की तलाश में जुटी पुलिस
इंदौर। राऊ थाना क्षेत्र से सामाजिक व्यवस्था को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है। यहां एक 13 साल की मासूम बच्ची की शादी उससे करीब 30 साल बड़े यानी 42 वर्ष के व्यक्ति से कराई जा रही थी। हालांकि बच्ची के माता-पिता की सूझबूझ और पुलिस की मुस्तैदी के कारण इस बाल विवाह को रुकवा दिया गया है। पुलिस ने दूल्हे बच्ची के दादा-दादी और बारातियों समेत कुल 13 लोगों को आरोपी बनाया है।
जानकारी के अनुसार इस घिनौने अपराध की ताने-बाने बच्ची के दादा-दादी ने बुने थे। वे बच्ची के माता-पिता की मर्जी के खिलाफ जाकर जबरन यह शादी करवा रहे थे। माता-पिता इस शादी से बेहद नाराज थे और अपनी मासूम बेटी का भविष्य बचाने के लिए उन्होंने तुरंत जिला प्रशासन के ‘बाल विवाह निरोधी दस्ते’ से संपर्क किया और लिखित शिकायत दर्ज कराई।
शिकायत के बाद हरकत में आई राऊ थाना पुलिस और बाल विवाह निरोधी दस्ते को पता चला कि यह विवाह उज्जैन में गुपचुप तरीके से संपन्न भी करा दिया गया था। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए मासूम बच्ची को आरोपियों के चंगुल से छुड़ाया और सुरक्षित उसके माता-पिता के सुपुर्द किया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने बेहद सख्त रुख अपनाया है। डीसीपी नरेंद्र रावत के मुताबिक पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 42 वर्षीय दूल्हे को गिरफ्तार कर लिया है। इसके अलावा बच्ची के दादा-दादी को मुख्य साजिशकर्ता एवं शादी में शामिल हुए बारातियों को भी सह-आरोपी बनाया गया है। इसके साथ ही उज्जैन के रहने वाले उस पंडित की भी सरगर्मी से तलाश की जा रही है जिसने यह बाल विवाह करवाया था।
DCP रावत ने बताया कि बाल विवाह एक बेहद गंभीर और सामाजिक अपराध है। कानून के मुताबिक बाल विवाह में शामिल होने वाला या उसमें किसी भी तरह का सहयोग करने वाला हर एक व्यक्ति चाहे वह बाराती हो, हलवाई हो या पंडित बराबर का अपराधी माना जाता है। इस मामले में भी शामिल सभी 13 लोगों पर कड़ी कार्रवाई की जा रही है।
जिला प्रशासन और सरकार द्वारा बाल विवाह को रोकने के लिए लगातार बड़े-बड़े जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। लेकिन इंदौर की इस घटना ने साफ कर दिया है कि आज भी समाज के कुछ हिस्सों में ऐसी रूढ़िवादी और आपराधिक मानसिकता पैर पसारे हुए है। फिलहाल पुलिस पकड़े गए आरोपियों से पूछताछ कर रही है और फरार पंडित की तलाश में जुटी है।
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वाग्देवी मंदिर घोषित होने के बाद पहले शुक्रवार को अखंड पूजा और महाआरती, धार में चप्पे-चप्पे पर सुरक्षा
भोपाल। धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला परिसर में शुक्रवार को एक नया अध्याय शुरू होने जा रहा है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के हालिया फैसले के बाद यह पहला शुक्रवार है, जब यहां की तस्वीर पूरी तरह बदली नजर आएगी। अदालत ने विवादित भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद परिसर को देवी वाग्देवी यानी मां सरस्वती का मंदिर माना है। साथ ही, वर्षों से चली आ रही उस व्यवस्था को भी समाप्त कर दिया गया है, जिसके तहत मुस्लिम समुदाय को शुक्रवार को नमाज अदा करने की अनुमति दी जाती थी।
हाईकोर्ट के फैसले के बाद हिंदू संगठनों में उत्साह का माहौल है। भोज उत्सव समिति ने इस शुक्रवार को गौरव दिवस के रूप में मनाने का फैसला किया है। समिति के अनुसार, दोपहर में श्रद्धालु धान मंडी चौराहे पर एकत्र होंगे, जहां से विशाल जुलूस भोजशाला परिसर तक पहुंचेगा। परिसर में सामूहिक पूजा, अखंड आराधना और महाआरती का आयोजन किया जाएगा। आयोजकों का कहना है कि यह आयोजन ऐतिहासिक और सांस्कृतिक अस्मिता का प्रतीक होगा।
संवेदनशील माहौल को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने पूरे शहर को सुरक्षा घेरे में बदल दिया है। एसपी सचिन शर्मा के मुताबिक, भोजशाला परिसर और आसपास के संवेदनशील इलाकों में लगभग 2000 पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है। ड्रोन कैमरों और CCTV के जरिए हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है। इसके अलावा मोबाइल गश्त, वाहनों की सघन जांच और नौ-स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई है, ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके।
15 मई को आए हाईकोर्ट के फैसले ने प्रदेश की राजनीति और सामाजिक माहौल में नई हलचल पैदा कर दी है। अदालत ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के उस पुराने आदेश को भी निरस्त कर दिया, जिसके आधार पर परिसर में शुक्रवार को नमाज की अनुमति दी जाती थी। फैसले के बाद प्रशासन लगातार शांति बनाए रखने की अपील कर रहा है। कलेक्टर राजीव रंजन मीना और पुलिस अधिकारियों ने शांति समिति की बैठक कर दोनों समुदायों से संयम और सौहार्द बनाए रखने की अपील की है।
उधर, हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस ने आरोप लगाया है कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (ASI) अब तक अदालत के निर्देशों का पूर्ण रूप से पालन नहीं कर रहा है। इसे लेकर संस्था के मुख्य याचिकाकर्ता आशीष गोयल और अधिवक्ता विनय जोशी ने एएसआई भोपाल मंडल को पत्र और ई-मेल भेजकर तत्काल कार्रवाई की मांग की है। संस्था की ओर से भेजे गए पत्र में कहा गया है कि भोजशाला प्रकरण में हाईकोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए विस्तृत आदेश पारित किया था। इसके बावजूद अब तक कई महत्वपूर्ण मांगों पर अमल नहीं हुआ है। हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस ने एएसआई से मांग की है कि न्यायालय के आदेशों का पालन सुनिश्चित करते हुए श्रद्धालुओं को निर्बाध दर्शन और पूजन की सुविधा उपलब्ध कराई जाए।
संस्था ने अपने पत्र में कहा कि वर्तमान में श्रद्धालुओं से प्रवेश के लिए एक रुपए का टिकट लिया जा रहा है, जबकि न्यायालय के आदेश के अनुसार भक्तों को नि:शुल्क प्रवेश और पूजा का अधिकार मिलना चाहिए। पत्र में यह भी मांग की गई कि भोजशाला परिसर के दक्षिण-पूर्व दिशा में स्थित कमरे को खोला जाए, जिसे मूल मंदिर का हिस्सा बताया गया है।
हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस ने एएसआई सर्वेक्षण के दौरान प्राप्त देवी-देवताओं की प्रतिमाओं और धार्मिक अवशेषों को पुनः भोजशाला परिसर में स्थापित करने की मांग भी उठाई है। संस्था का कहना है कि सर्वे के दौरान मिले कई हिंदू प्रतीक चिह्न और प्रतिमाएं फिलहाल सुरक्षित स्थानों पर रखी गई हैं, लेकिन श्रद्धालुओं को उनके दर्शन की अनुमति नहीं है। पत्र में कहा गया कि इन प्रतिमाओं और धार्मिक अवशेषों को भोजशाला परिसर में उचित स्थान पर स्थापित किया जाए, ताकि श्रद्धालु नियमित रूप से दर्शन और पूजन कर सकें। साथ ही प्रतिमाओं की सुरक्षा और संरक्षण के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने की भी मांग की गई है।
संस्था ने अपने पत्राचार में यह भी कहा कि हाई कोर्ट ने भोजशाला को मंदिर घोषित किया है, इसलिए परिसर में बाद में लगाए गए मुस्लिम धर्म से जुड़े प्रतीक चिह्नों को हटाया जाना चाहिए। हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस ने दावा किया कि भोजशाला प्राचीनकाल से मां वाग्देवी और हिंदू आस्था का प्रमुख केंद्र रही है। गौरतलब है कि वर्ष 2024 में हाई कोर्ट के निर्देश पर भोजशाला परिसर में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग द्वारा 98 दिन तक वैज्ञानिक सर्वेक्षण किया गया था। इसके बाद से ही हिंदू और मुस्लिम पक्षों के बीच धार्मिक स्वरूप को लेकर कानूनी लड़ाई तेज हो गई थी। वहीं, 23 जनवरी 2026 को वसंत पंचमी के अवसर पर सुप्रीम कोर्ट ने दिनभर पूजा-अर्चना की अनुमति देने का आदेश भी इसी प्रकरण में पारित किया था। इसके बाद अब हाई कोर्ट के हालिया आदेश के क्रियान्वयन को लेकर एक बार फिर भोजशाला मामला चर्चा में आ गया है।

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मुरैना। भारतीय जनता पार्टी के बागचीनी मंडल उपाध्यक्ष उमेश सिंह सिकरवार के बड़े भाई के घर दिनदहाड़े पौन करोड़ के गहने, नकदी व लाइसेंसी रायफल चोरी हो गई। चोरी की यह घटना गुरुवार दोपहर में घटी। 24 घंटे तक पुलिस ने न तो एफआईआर दर्ज की और न ही किसी को इस घटना की भनक लगने दी। पीड़ित पक्ष ने बेटे की सगाई करने आए लोगों पर चोरी के आरोप लगाए हैं। पुलिस ने संदेहियों को पकड़ लिया, लेकिन उनसे चोरी गया माल बरामद नहीं हुआ। वहीं पुलिस को घर की एक महिला सदस्य...

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गुना। (गरिमा टीवी न्यूज़) गुना शहर के कैंट थाना क्षेत्र अंतर्गत एक बड़ी होटल के पीछे बनी एक कॉलोनी में आधी रात को डकैतों ने हथियारों से लैस होकर एक घर में धावा बोला और बुजुर्ग संपत्ति को बंधक बनाकर वहां से करीब चार लाख रुपए के सोने चांदी के जेवर सहित नगदी लेकर बदमाश फरार हो गए।  मिली जानकारी के अनुसार, गुना के राजविलास होटल के पास एम-3 टाउन कॉलोनी में हुई एक बड़ी सनसनीखेज डकैती की घटना ने पूरे इलाके में दहशत फैला दी है। देर रात करीब 2 से 3 बजे के...

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गरिमा के जन्म के 15 मिनिट बाद का फोटो
गरिमा के जन्म के 15 मिनिट बाद का फोटो
गरिमा के 1 वर्ष बाद का फोटो
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बीमार होने के बाद भोपाल अस्पताल मे भर्ती गरिमा
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हाई कोर्ट के आदेश के बाद गरिमा के शव को जमीन से निकालते हुऐ
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निकालने के बाद गरिमा के शव को पैक कर जॉच के लिऐ भेजा गया
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दोषी डॉक्टर के खिलाफ मामला कायम कराने के लिऐ पुलिस अधिक्षक से मिले पत्रकार
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गरिमा के शव की जॉच होने के बाद पुनः उसी स्थान पर चबूतरा का निर्माण किया गया
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पूजा स्थल मे गरिमा
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