


सतना। मध्य प्रदेश के सतना के नागौद राजघराने की परसमनिया गढ़ी बीती रात गोलियों की आवाज से दहल उठी। लंबे समय से चले आ रहे पारिवारिक विवाद ने उस समय हिंसक रूप ले लिया। जब राजपरिवार के सदस्य रूपेंद्र सिंह उर्फ बाबा राजा की पहली पत्नी योगिता सिंह पर कथित रूप से उनकी दूसरी पत्नी सुनीता सिंह ने लाइसेंसी 22 बोर की बंदूक से फायरिंग कर दी। गोली योगिता सिंह के पेट में लगी, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गईं। उन्हें प्राथमिक उपचार के बाद रीवा के विंध्या अस्पताल रेफर किया गया जहां ऑपरेशन के बाद उनकी हालत फिलहाल खतरे से बाहर बताई जा रही है।
राजघराने और वर्तमान विधायक नागेंद्र सिंह के परिवार से जुड़ा होने के कारण पूरे विंध्य क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। नागेंद्र सिंह मध्य प्रदेश सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं। जानकारी के अनुसार बाबा राजा और उनकी पहली पत्नी योगिता सिंह के बीच लंबे समय से पारिवारिक विवाद चल रहा था। इसी विवाद के समाधान और बातचीत के उद्देश्य से योगिता सिंह दो दिन पहले अपने भाइयों और अन्य परिजनों के साथ परसमनिया गढ़ी पहुंची थीं।
बातचीत के दौरान विवाद अचानक इतना बढ़ गया कि कथित तौर पर सुनीता सिंह ने कई राउंड फायरिंग कर दी, जिसमें एक गोली योगिता सिंह को जा लगी। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और घायल महिला को अस्पताल भिजवाया। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी सुनीता सिंह को गिरफ्तार कर लिया है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए परसमनिया गढ़ी और आसपास के इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। पुलिस ने बताया कि आरोपी महिला को गिरफ्तार कर लिया गया है और पूरे घटनाक्रम की विस्तृत जांच की जा रही है। पुलिस फायरिंग के कारणों, घटनास्थल की परिस्थितियों और इस्तेमाल किए गए हथियार समेत सभी पहलुओं की जांच में जुटी है।
घायल योगिता सिंह की मां नरेंद्र कुमारी ने मीडिया से बातचीत में आरोप लगाया कि जब उनकी बेटी घर के अंदर जाने लगी तो उसके पति रूपेंद्र सिंह उर्फ बाबा राजा ने उसे धक्का दिया और कथित रूप से “मारो-मारो” कहकर उकसाया। उनका कहना है कि जान बचाने के लिए छिपने के बावजूद खिड़की से गोली चलाई गई, जो योगिता सिंह के पेट में लगी।
पीड़िता की मां ने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस ने केवल सुनीता सिंह के खिलाफ मामला दर्ज किया है, जबकि बाबा राजा की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। राजघराने के भीतर हुए इस गोलीकांड ने पूरे सतना और नागौद क्षेत्र में सनसनी फैला दी है। पुलिस का कहना है कि मामले में आरोपी सुनीता को गिरफ्तार कर किया गया है सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच की जा रही है और जांच के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
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पूर्व IAS नियाज खान का बड़ा बयान: देश में ‘जबरन नसबंदी’ की उठाई मांग, मुस्लिमों को लेकर कही यह बात
भोपाल। अपने बयानों और किताबों को लेकर अक्सर चर्चा में रहने वाले मध्य प्रदेश कैडर के पूर्व आईएएस (IAS) अधिकारी नियाज खान ने देश की बढ़ती जनसंख्या को लेकर एक बार फिर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने देश में बढ़ती आबादी को ‘नासूर’ बताते हुए कड़ाई से जबरन नसबंदी (Sterilization) लागू करने की वकालत की है।
पूर्व आईएएस नियाज खान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (ट्विटर) पर अपनी बात रखते हुए लिखा कि देश की बढ़ती जनसंख्या अब एक गंभीर संकट बन चुकी है। उन्होंने पोस्ट में लिखा- देश की डेढ़ अरब आबादी नासूर बन गई है। अब समय आ गया है कि लोगों की जबरदस्ती नसबंदी करने पर विचार किया जाए। लोग या तो खुद आगे आकर नसबंदी कराएं, या फिर सरकार को इसके लिए जबरिया (forcefully) कदम उठाने चाहिए। अगर हम ऐसा नहीं करते हैं, तो देश का भविष्य अंधकारमय है।
नियाज खान ने जनसंख्या नियंत्रण के दायरे में मुस्लिम समुदाय को विशेष रूप से शामिल करने की बात कही है। उन्होंने अपनी पोस्ट में आगे लिखा कि मुस्लिम परिवारों में बच्चों की संख्या ज्यादा होती है, इसलिए कड़ाई के साथ उनकी भी नसबंदी की जानी चाहिए। उनका मानना है कि जनसंख्या नियंत्रण का यह नियम बिना किसी भेदभाव के सभी पर सख्ती से लागू होना चाहिए।
पूर्व प्रशासनिक अधिकारी के इस बेहद कड़े और संवेदनशील बयान के बाद सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक हलचल तेज हो गई है। बढ़ती आबादी और ‘जबरन नसबंदी’ जैसे शब्दों के इस्तेमाल को लेकर इंटरनेट पर लोग दो पक्षों में बंट गए हैं और इस पर तीखी बहस शुरू हो गई है।
देश की डेढ़ अरब आबादी नासूर बन गई है। अब समय आ गया है कि लोगों की जबरदस्ती नसबंदी करने पर विचार किया जाय। या लोग खुद नसबंदी कराएं या सरकार जबरिया नसबंदी करे। मुस्लिम के यहां ज्यादा बच्चे होते हैं इसलिए कड़ाई से उनकी भी नसबंदी हो। अगर हम यह नहीं करते तो भविष्य अंधकारमय है।
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तीसरी संतान का मामला पड़ा भारी, सिंगरौली के उप पंजीयक अशोक सिंह परिहार सेवा से बर्खास्त
लंबे समय से विवादों और शिकायतों के केंद्र में रहे सिंगरौली के उप पंजीयक अशोक सिंह परिहार को आखिरकार मध्यप्रदेश शासन ने सेवा से बर्खास्त कर दिया है। महानिरीक्षक पंजीयन एवं अधीक्षक मुद्रांक, मध्यप्रदेश भोपाल द्वारा 11 जून 2026 को जारी आदेश में विभागीय जांच में आरोप सिद्ध पाए जाने के बाद यह कार्रवाई की गई।
जानकारी के अनुसार अशोक सिंह परिहार के विरुद्ध शिकायत दर्ज कराई गई थी कि शासकीय सेवा में रहते हुए उनकी तीसरी संतान का जन्म निर्धारित कटऑफ तिथि के बाद हुआ है। मामले की विभागीय जांच कराई गई, जिसमें कलेक्टर सिंगरौली द्वारा गठित जांच समिति की रिपोर्ट में उनके तीन संतान होने की पुष्टि हुई। जांच में यह भी सामने आया कि उनकी तीसरी संतान का जन्म वर्ष 2003 में हुआ था।
विभागीय जांच अधिकारी ने आरोप को प्रमाणित माना, जिसके बाद शासन ने सख्त कदम उठाते हुए उनकी सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दीं। मध्यप्रदेश सिविल सेवा नियमों के अनुसार 26 जनवरी 2001 के बाद तीसरी संतान होने पर शासकीय सेवा के लिए अपात्रता का प्रावधान है। इसी आधार पर यह कार्रवाई की गई है।
अशोक सिंह परिहार का नाम इससे पहले भी विवादों में रहा है। उन पर एक करोड़ दस लाख रुपये से अधिक के कथित स्टाम्प घोटाले के मामले में निलंबन की कार्रवाई हो चुकी थी। हालांकि बाद में उनकी पुनः पदस्थापना सिंगरौली में ही कर दी गई थी, जिस पर भी सवाल उठे थे। जिले में लंबे समय से उनके कार्यकाल को लेकर शिकायतें और असंतोष की चर्चा होती रही है।
बर्खास्तगी के बाद पंजीयन विभाग सहित प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। माना जा रहा है कि शासन की यह कार्रवाई सेवा नियमों के उल्लंघन के मामलों में सख्त संदेश देने वाली है। वहीं जिले में यह मामला एक बार फिर चर्चा का विषय बन गया है कि वर्षों तक चले विवादों और शिकायतों के बाद आखिरकार प्रशासन ने निर्णायक कदम उठाया है।
जबलपुर। होटल विवाद के बाद कुछ युवकों ने देर रात एक घर के बाहर बम फेंककर दहशत फैलाने की कोशिश की। घटना में कोई जनहानि नहीं हुई, लेकिन इलाके में अफरा-तफरी मच गई। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है।
जानकारी के अनुसार गुरुवार शाम सिविल लाइन स्थित एक होटल में कुछ युवक कमरा लेकर रुके थे। आरोप है कि वे नशे की हालत में हंगामा और गाली-गलौज कर रहे थे। जब होटल कर्मचारी ने उन्हें समझाने का प्रयास किया तो उसके साथ मारपीट की।
होटल से बाहर निकाले जाने के बाद आरोपियों ने कर्मचारी को जान से मारने की धमकी दी। इस घटना के बाद होटल प्रबंधन ने मामले की शिकायत पुलिस से की। कर्मचारी भी अपने घर लौट गया, लेकिन विवाद यहीं खत्म नहीं हुआ।
रात करीब साढ़े 11 बजे स्कूटर पर सवार चार युवक कर्मचारी के घर के पास पहुंचे और एक के बाद एक कई बम फेंक दिए। हालांकि बम से कोई हताहत नहीं हुआ, लेकिन एक अन्य मकान परिसर में जाकर गिरे।
बम फटने की आवाज सुनकर आसपास के लोग घरों से बाहर निकल आए। सड़क पर धुआं फैल गया और पूरे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। स्थानीय लोगों ने तत्काल पुलिस को सूचना दी, जिसके बाद पुलिस टीम मौके पर पहुंची।
मौके पर पहुंची पुलिस ने आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की जांच की। फुटेज के आधार पर कुछ संदिग्ध युवकों की पहचान की गई है। पुलिस आरोपियों की तलाश में जुटी है और पूरे मामले की जांच कर रही है।
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रतलाम में भारी बवाल, पुलिस पर पथराव, दागने पड़े आंसू गैस के गोले; सरपंच सहित 20 हिरासत में
रतलाम। जिले के पलसोड़ी क्षेत्र में शुक्रवार को प्रस्तावित निवेश क्षेत्र के लिए अतिक्रमण हटाने पहुंची प्रशासन और पुलिस की टीम पर ग्रामीणों द्वारा पथराव किए जाने से स्थिति तनावपूर्ण हो गई। हालात बिगड़ने पर पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा तथा भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े गए। घटना में तीन पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। क्षेत्र में भारी पुलिस बल तैनात कर स्थिति को नियंत्रण में रखा गया है।
जानकारी के अनुसार पलसोड़ी सहित आसपास के चार से पांच गांवों की करीब 1700 हेक्टेयर भूमि निवेश क्षेत्र में शामिल की जा रही है। इसके विरोध में ग्रामीण लंबे समय से आंदोलनरत हैं। शुक्रवार सुबह करीब 11 बजे प्रशासनिक अधिकारी, भारी पुलिस बल तथा अतिक्रमण हटाने के लिए जेसीबी और बुलडोजर लेकर मौके पर पहुंचे थे। कार्रवाई शुरू होते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण एकत्र हो गए और विरोध प्रदर्शन करने लगे।
दोपहर करीब 2 बजे अधिकारियों ने ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन सहमति नहीं बनने पर पुलिस ने जुलवानिया सरपंच छोटू मईडा सहित 20 से अधिक लोगों को हिरासत में ले लिया। इसके बाद अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू की गई। इसी दौरान कुछ लोगों ने पुलिस और प्रशासनिक अमले पर पथराव कर दिया। अचानक हुई पत्थरबाजी से मौके पर अफरा-तफरी मच गई। हालात को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने बल प्रयोग किया तथा आंसू गैस के गोले छोड़े।
जुलवानिया सरपंच छोटू भाभर ने बताया कि ग्रामीण शांतिपूर्ण तरीके से प्रशासन से कार्रवाई रोकने और सात दिन का समय मांगने पहुंचे थे। उन्होंने बताया कि मामले में हाईकोर्ट में स्थगन के लिए आवेदन प्रस्तुत किया गया है। इसके बावजूद उन्हें हिरासत में ले लिया गया। उन्होंने पथराव की घटना की जानकारी होने से इनकार करते हुए कहा कि यह कृत्य असामाजिक तत्वों द्वारा किया गया होगा। सरपंच का आरोप है कि हिरासत में लेने के बाद उन्हें और अन्य लोगों को दो वज्र वाहनों में बैठाकर करीब दो घंटे तक रिंग रोड और आसपास के क्षेत्रों में घुमाया गया।
मध्यप्रदेश औद्योगिक विकास निगम (एमपीआईडीसी) द्वारा जिले में औद्योगिक विकास को गति देने के उद्देश्य से मेगा इंडस्ट्रियल पार्क निवेश क्षेत्र विकसित किया जा रहा है। इसके अंतर्गत ग्राम जामथुन, बिबड़ोद, जुलवानिया, पलसोड़ी, रामपुरिया और सरवनी खुर्द की करीब 1370.532 हेक्टेयर शासकीय भूमि पर निवेश क्षेत्र बनाया जा रहा है। यहां कई बड़ी कंपनियों ने भूमि लेने के साथ प्लांट स्थापना की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है।
दूसरी ओर शासकीय भूमि पर वर्षों से खेती कर रहे ग्रामीण इसका विरोध कर रहे हैं। पलसोड़ी के हल्का नंबर-7 के सर्वे नंबर-135 की 2.360 हेक्टेयर शासकीय भूमि को निवेश क्षेत्र में शामिल करने के लिए तहसीलदार कार्यालय से सार्वजनिक सूचना जारी की गई थी। इस पर आपत्ति दर्ज कराने के लिए 10 जून तक का समय निर्धारित किया गया था।
गुरुवार को एसडीएम शहर आर्ची हरित और तहसीलदार ऋषभ ठाकुर पलसोड़ी पहुंचे थे। ग्राम पंचायत भवन में आयोजित बैठक में पंचायत की ओर से भूमि लिए जाने पर आपत्ति पत्र सौंपा गया। ग्रामीणों ने तर्क दिया कि अधिग्रहण प्रक्रिया में देरी होने के कारण अधिसूचना निरस्त हो चुकी है और ग्रामवासी भूमि अधिग्रहण की अनुमति नहीं देते। अधिकारियों द्वारा अन्यत्र भूखंड आवंटन और रोजगार सृजन की जानकारी दिए जाने पर ग्रामीणों ने कहा कि उन्हें खेती करनी है, रोजगार और प्लाट नहीं चाहिए।
एमपीआईडीसी के राजेश राठौर ने बताया कि निवेश क्षेत्र के लिए ली जा रही भूमि शासकीय है तथा प्रभावित लोगों के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं भी की जा रही हैं। फिलहाल घटना के बाद प्रशासन और पुलिस स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।
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एलिवेटेड रोड के लिए टूटेंगे ‘289 मकान-दुकान’, ग्वालियर में लगाए गए लाल निशान, मिलेगा मुआवजा
ग्वालियर। मध्यप्रदेश के ग्वालियर शहर में स्वर्णरखा एलिवेटेड रोड परियोजना के दूसरे चरण में अब तेजी से काम दिखाई देने लगा है। सबसे बड़ी बाधा बने बिजली के खंभों को हटाने का काम शुरू हो चुका है, ट्रांसफार्मर और बिजली लाइनों की शिफ्टिंग भी अंतिम दौर में है। प्रशासन का दावा है कि भू-अर्जन की प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी है, जिसके बाद अब अतिक्रमण हटाने की बड़ी कार्रवाई शुरू की जाएगी। करीब 926.21 करोड़ रुपए की लागत की यह प्रदेश की पहली एलिवेटेड रोड है।
इसका निर्माण कार्य 26 जून 2024 से शुरू हुआ था और इसे नवंबर 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य है। परियोजना का जिम्मा पीएनसी इंफ्राटेक लिमिटेड को सौंपा गया है। शहरवासियों की नजर अब इस बात पर टिकी है कि वर्षों से ट्रैफिक दबाव झेल रहे इस मार्ग पर आखिर कब एलिवेटेड रोड का सपना हकीकत में बदलेगा।
सात भाई की गोठ, टापू वाले मोहल्ले, रतन कॉलोनी के पीछे, नई सड़क, कमानी पुल और जीवाजीगंज क्षेत्र में नए बिजली खंभे लगाने तथा ट्रांसफार्मर शिफ्ट करने का काम तेजी से चल रहा है। वहीं जिन मकानों और दुकानों पर परियोजना का असर पड़ना है, वहां सीमांकन कर लाल निशान लगाए जा चुके हैं। इससे प्रभावित क्षेत्रों में हलचल तेज हो गई है।
भू-अर्जन शाखा के परियोजना की जद में आने अनुसार। वाले 289 कब्जे हटेंगे। इसके लिए लगभग 63 करोड़ मुआवजा निर्धारित किया है। 1.7 हेक्टेयर तेजी, 24 हेक्टेयर सरकारी भूमि के निजी मामलों का निराकरण अंतिम चरण में है।
गिरवाई पुलिस चौकी से फूलबाग तक करीब 7.42 किलोमीटर लंबे हिस्से में जगह-जगह अतिक्रमण है। कई स्थानों पर जलभराव की समस्या भी निर्माण कार्य में बाधा बन रही है। हालांकि प्रशासन का मानना है कि भू-अर्जन प्रक्रिया पूरी होते ही इन चुनौतियों को दूर किया जाएगा।
अधिकांश गांवों में प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। केवल 4 का कार्य शेष है। इसके पूरा होते ही अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई होगी। भू-अर्जन कार्य अंतिम चरण में है।- अतुल सिंह, प्रभारी भू-अर्जन शाखा
शहर के विभिन्न हिस्सों को जोड़ने के लिए इस एलिवेटेड रोड में 14 लूप (एंट्री-एग्जिट पॉइंट) बनाए जा रहे हैं, जिससे अलग-अलग क्षेत्रों से वाहन सीधे इस कॉरिडोर पर चढ़ सकेंगे।
बता दें कि एलिवेटेड रोड बनने के बादमुरैना से शिवपुरी या झांसी की ओर जाने वाले वाहनों को शहर के भीतरी हिस्सों से होकर नहीं गुजरना पड़ेगा। वाहन जलालपुर तिराहा से सीधे एलिवेटेड रोड पर चढ़कर गिरवाई के रास्ते अपने गंतव्य तक पहुंच सकेंगे। इससे शहर में लगने वाले ट्रैफिक जाम से राहत मिलेगी और यात्रियों का करीब एक घंटे तक का समय बच सकता है।
छत्तीसगढ़ में आगामी मोहर्रम और उर्स आयोजनों को लेकर राज्य वक्फ बोर्ड ने सख्त निर्देश जारी किए हैं। बोर्ड ने सभी धार्मिक कार्यक्रमों को शरीयत और इस्लामी परंपराओं के अनुरूप आयोजित करने का आदेश दिया है। इसके तहत DJ, बैंड-बाजा, धुमाल, नाच-गाना और आतिशबाजी जैसी गतिविधियों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है। नियमों का उल्लंघन करने वाली समितियों पर 50 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
छत्तीसगढ़ राज्य वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. सलीम राज ने प्रदेश की सभी ताजिया कमेटियों, दरगाह कमेटियों, उर्स कमेटियों, मुतवल्लियान और इंतेजामिया कमेटियों को निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने कहा है कि मोहर्रम, उर्स और अन्य धार्मिक कार्यक्रम केवल कुरान, हदीस और शरीयत के अनुसार आयोजित किए जाएं।
वक्फ बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि धार्मिक आयोजनों में DJ, धुमाल, बैंड-बाजा, नाच-गाना, आतिशबाजी और अन्य गैर-शरीयत गतिविधियों की किसी भी स्थिति में अनुमति नहीं होगी। बोर्ड का कहना है कि धार्मिक आयोजनों की पवित्रता और गरिमा बनाए रखना आयोजक समितियों की जिम्मेदारी है।
निर्देश में कहा गया है कि किसी भी जुलूस, उर्स या धार्मिक कार्यक्रम में प्रतिबंधित गतिविधियां पाए जाने पर संबंधित समिति और उसके जिम्मेदार पदाधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। गंभीर मामलों में समिति की मान्यता भी समाप्त की जा सकती है।
वक्फ बोर्ड ने चेतावनी दी है कि नियमों का उल्लंघन करने वाली समिति या इंतेजामिया पर 50 हजार रुपये तक का आर्थिक दंड लगाया जा सकता है। साथ ही आयोजकों से अपील की गई है कि वे कार्यक्रमों को पूरी सादगी, अनुशासन और धार्मिक मर्यादा के साथ संपन्न कराएं।
बोर्ड ने प्रदेश के मुस्लिम समाज से हजरत इमाम हुसैन और शहीद-ए-कर्बला की कुर्बानियों को याद करते हुए मोहर्रम को इबादत, सब्र और सादगी के साथ मनाने की अपील की है। इसके अलावा सभी मस्जिदों के इमाम, मुतवल्लियान और इंतेजामिया कमेटियों को निर्देश दिया गया है कि इस आदेश को जुमे की नमाज से पहले पढ़कर सुनाया जाए और मस्जिदों के नोटिस बोर्ड पर भी लगाया जाए।
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दिल्ली में एमपी कांग्रेस के 61 विधायक गिरफ्तार, राष्ट्रपति भवन की तरफ कर रहे थे कूच, पुलिस से जमकर झड़प
नई दिल्ली. राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से बड़ी खबर सामने आ रही है. जंतर-मंतर पर सत्याग्रह करने के बाद महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मिलने राष्ट्रपति भवन की तरफ जा रहे नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार और एमपी कांग्रेस के 61 विधायकों को दिल्ली पुलिस ने रास्ते से ही गिरफ्तार कर लिया है. दिल्ली पुलिस सभी विधायकों को पुलिस वैन में डालकर थाने लेकर गई हैं.
दरअसल, मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव के लिए मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द किए जाने के को लेकर एमपी कांग्रेस 61 विधायकों ने महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मिलने की मांग की थी. बता दें कि, मध्य प्रदेश विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, प्रदेशाध्यक्ष जीतू पटवारी सहित कांग्रेस के 61 विधायकों ने शुक्रवार को दिल्ली में जंतर-मंतर पर चुनाव आयोग के खिलाफ 'सत्याग्रह' विरोध प्रदर्शन किया.
राष्ट्रपति से मिलने की अनुमति नहीं मिलने और दिल्ली पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए जाने के बाद नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि वह देश की राष्ट्रपति हैं न की किसी पार्टी की अध्यक्ष है. सिंघार ने दावा किया कि उन्हें राष्ट्रपति की तरफ से एक मेल भिजवाया गया था जिसमें लिखा था कि वे आज नहीं मिल सकती है. इस पर सिंघार ने राष्ट्रपति पर आरोप लगाते हुए कहा कि वह भाजपा की एजेंट के तौर पर काम कर रही है. क्या राष्ट्रपति लोकतंत्र को बचाना नहीं चाहती हैं?
कांग्रेस के विधायकों को जिस समय दिल्ली पुलिस गिरफ्तार कर वैन में भर रही थी उस समय एमपी कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और एक पुलिसकर्मी के बीच तीखी बहस देखने को मिली. दरअसल, राष्ट्रपति भवन की तरफ बढ़ हे कांग्रेस नेता और विधायकों को रोकने के लिए पुलिस ने बैरिकेड लगाए थे. जीतू पटवारी इसी बैरिकेड में चढ़े तो उन्हें एक पुलिसकर्मी ने नीचे खींचने की कोशिश की. इससे वह भड़क गए और पुलिसकर्मी से बोले कि 'अरे मेरे को छोड़ो, आप मुझे छोड़ो. पुलिस से बहस करने के कुछ देर बाद पुलिस ने उन्हें भी घसीटकर वैन में डाल दिया और गिरफ्तार कर लिया.
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मैगी में कीड़े मिलने के बाद बड़ा एक्शन: FSSAI ने नेस्ले और KFC को भेजा नोटिस, कंपनी से मांगी विस्तृत रिपोर्ट
भारत के खाद्य सुरक्षा नियामक FSSAI ने सोशल मीडिया पर वायरल हुई शिकायतों के बाद बड़ा एक्शन लेते हुए नेस्ले इंडिया, KFC, फ्लिपकार्ट इंडिया और ओपन सीक्रेट जैसी कंपनियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। सबसे गंभीर मामला नेस्ले के लोकप्रिय ब्रांड मैगी से जुड़ा है, जिसमें एक उपभोक्ता ने पैकेट के अंदर जिंदा कीड़े (लार्वा) मिलने का दावा किया था। FSSAI ने इस शिकायत को गंभीर मानते हुए नेस्ले इंडिया से तुरंत विस्तृत एक्शन टेकन रिपोर्ट मांगी है। वहीं KFC को साफ-सफाई और हाइजीन से जुड़े मामलों पर नोटिस भेजा गया है। इसके अलावा फ्लिपकार्ट इंडिया और ओपन सीक्रेट को खजूर आधारित प्रोडक्ट में कीड़े मिलने की शिकायत पर जवाब देने के निर्देश दिए गए हैं।
नेस्ले से मांगी गई विस्तृत रिपोर्ट
FSSAI ने नेस्ले इंडिया से तीन बिंदुओं पर मांगी जानकारी
1. कच्चे माल और क्वालिटी चेक की जानकारी
कंपनी को यह बताना होगा कि जिस बैच में शिकायत मिली, उसका कच्चा माल किस सप्लायर से आया था। साथ ही पैकेट बाजार में भेजने से पहले कंपनी ने कौन-कौन से क्वालिटी टेस्ट किए थे उनके रिकॉर्ड भी जमा करने होंगे।
2. बाजार से प्रभावित स्टॉक हटाने के निर्देश
FSSAI ने पूछा है कि कंपनी ने शिकायत वाले बैच को सप्लाई चेन और बाजार से हटाने के लिए क्या कदम उठाए हैं ताकि संभावित रूप से प्रभावित प्रोडक्ट ग्राहकों तक न पहुंचे।
3. भविष्य के लिए नई सुरक्षा व्यवस्था
रेगुलेटर ने यह भी पूछा है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कंपनी अपने क्वालिटी कंट्रोल सिस्टम में क्या बदलाव करने जा रही है।
मैगी नेस्ले इंडिया का सबसे बड़ा और सबसे ज्यादा बिकने वाला ब्रांड है। ऐसे में यह मामला कंपनी की साख के लिहाज से बेहद संवेदनशील माना जा रहा है। साल 2015 में भी मैगी विवादों में आई थी, जब FSSAI ने लेड (सीसा) की अधिक मात्रा और MSG लेबलिंग विवाद के चलते देशभर से मैगी वापस मंगाने का आदेश दिया था। उस विवाद के बाद कंपनी को बिक्री और भरोसे दोनों में भारी नुकसान झेलना पड़ा था। अब सोशल मीडिया पर वायरल शिकायत के बाद आया यह नया नोटिस कंपनी के लिए फिर चिंता बढ़ाने वाला माना जा रहा है।
FSSAI ने KFC को आउटलेट्स में साफ-सफाई और हाइजीन से जुड़े मामलों पर नोटिस भेजा है। वहीं ओपन सीक्रेट और फ्लिपकार्ट इंडिया को खजूर आधारित एक प्रोडक्ट में कीड़े मिलने की शिकायत पर जवाब देने के लिए कहा गया है। रेगुलेटर अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रही शिकायतों को भी गंभीरता से लेते हुए सीधे जांच और कार्रवाई कर रहा है।
इन मामलों ने यह साफ कर दिया है कि अब सोशल मीडिया पर की गई एक शिकायत भी कंपनियों के लिए बड़ा संकट बन सकती है। पहले उपभोक्ता शिकायतों और आधिकारिक कार्रवाई के बीच लंबा समय लगता था लेकिन अब वायरल पोस्ट सीधे रेगुलेटरी नोटिस में बदल रही हैं। इससे फूड कंपनियों और क्विक सर्विस ब्रांड्स के लिए ऑपरेशनल और प्रतिष्ठा से जुड़ा जोखिम तेजी से बढ़ गया है।
सागर। गेहूं की जगह मिट्टी की बोरियों को वेयरहाउस पहुंचाने के मामले में सिविल लाइन पुलिस ने स्व सहायता समूह की अध्यक्ष, सचिव और संचालनकर्ता (समूह अध्यक्ष के पति) पर एफआईआर दर्ज कर ली है। देर रात हुई यह एफआईआर नागरिक आपूर्ति निगम डीएम की ओर से कराई गई है। बता दें, नवदुनिया ने इस भ्रष्टाचार के मामले को प्रमुखता के साथ उठाया था।
बीते दिनों सिरोंजा स्थित हर्षिका स्व सहायता समूह द्वारा 600 गेहूं की बोरियां गंभीरिया के लक्ष्मीनगर स्थित देव प्रभाकर वेयरहाउस में भेजी गई थीं। इस दौरान कुछ बोरियां वेयरहाउस में रखी जा चुकी थीं। तभी बोरियों की जांच की गई तो पता चला कि उनमें गेहूं की जगह मिट्टी भरी हुई थी। वेयरहाउस संचालक ने तुरंत बोरियों को वापस करा दिया और मामले की शिकायत अधिकारियों से की।
इस भ्रष्टाचार को लेकर लगातार खबरों के प्रकाशन और इंटरनेट मीडिया पर वीडियो बहुप्रसारित होने के बाद कलेक्टर प्रतिभा पाल ने एक जांच कमेटी बनाई थी। जांच कमेटी ने अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत कर दी है, जिसमें गड़बड़ी पाई गई।
रिपोर्ट के आधार पर नागरिक आपूर्ति निगम डीएम रोहित बघेल ने थाने में शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस ने हर्षिका स्व सहायता समूह की अध्यक्ष बबीता सेन, सचिव नेहा सेन और पति दीपक सेन पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(2), 318(4), 316(2) और 3(5) के तहत एफआईआर दर्ज कर ली है।
उधर, इस गड़बड़ी का खुलासा होने के बाद जिला आपूर्ति नियंत्रक ज्योति बघेल, एएसओ निशांत पांडे, आरएम और एनआरएलएम को कारण बताओ नोटिस जारी कर तीन दिन में जवाब मांगा गया है।
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विलुप्त होती अंतर्राष्ट्रीय बैलगाड़ी दौड़: रातभर चले मुकाबले; विजेता को मिली बुलेट
बागली (देवास)। मध्य प्रदेश के देवास जिले में विलुप्त होती अंतर्राष्ट्रीय बैलगाड़ी दौड़ प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम के लिए लोग रातभर जागते रहे। 24 घंटे चले मुकाबले के बाद प्रतियोगिता खत्म हुई। वहीं विजेता को इनाम में बुलेट गाड़ी मिली।
बदलते दौर में भले ही बैलगाड़ी दौड़ का चलन कम हुआ हो, लेकिन सतवास में उमड़ी भीड़ ने बता दिया कि ग्रामीण परंपराओं का रोमांच आज भी लोगों के दिलों में जिंदा है। देवास जिले के सतवास में अंतर्राष्ट्रीय बैलगाड़ी दौड़ का ऐसा जुनून देखने को मिला, जहां लोग पूरी रात तालाब मैदान और उसकी पाल पर जमे रहे। बुधवार दोपहर से शुरू हुई प्रतियोगिता गुरुवार दोपहर तक करीब 24 घंटे चली।
मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र से आई 100 से अधिक बैलगाड़ियों ने अपनी रफ्तार का दम दिखाया। फाइनल मुकाबले में मगरिया के पदम पटेल के बैल शेरा और शक्ति ने बाजी मारते हुए रॉयल एनफील्ड बुलेट अपने नाम की। विजेता बैल मालिकों को शील्ड और अन्य पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया।
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EOW का एक्शन: तहसीलदार दफ्तर में दी दबिश, 20 हजार की रिश्वत लेते रीडर को दबोचा
ग्वालियर। एमपी के ग्वालियर में आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ यानी EOW ने रिश्वतखोरी के एक मामले में बड़ी कार्रवाई की है। गोशपुरा वृत के नायब तहसीलदार कार्यालय में ईओडब्ल्यू की टीम ने दबिश देकर रीडर को 20 हजार की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। बताया जा रहा है कि प्लॉट के नामांतरण के मामले में फरियादी से घूस की मांग की गई थी।
ग्वालियर में EOW ने एक बार फिर भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। कलेक्ट्रेट स्थित तहसील ग्वालियर के गोशपुरा वृत में नायब तहसीलदार कार्यालय पर EOW की टीम ने छापा मारते हुए रीडर अनिल कुड़वारिया को 20 हजार रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा। किला गेट क्षेत्र के रहने वाले जितेंद्र पांडे का रानीपुरा स्तिथ प्लॉट नामांतरण का मामला ऑफिस में लंबित था।
आरोप है कि इस काम को करने के एवज में 50 हजार रुपए की रिश्वत मांगी गई थी। बाद में 40 हजार रुपए में सौदा तय हुआ। जुलाई 2025 से लंबित मामले में बार बार की जा रही रिश्वत की मांग से परेशान होकर फरियादी ने मामले की शिकायत EOW से की थी। शिकायत की पुष्टि होने पर EOW ने जाल बिछाया और तय योजना के तहत आरोपी रीडर को 20 हजार रुपए रिश्वत की पहली किस्त लेते हुए धर दबोचा।
इस कार्रवाई के दौरान EOW की टीम ने मौके पर कानूनी प्रक्रिया पूरी की। आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। वहीं पूरे मामले में अन्य जिम्मेदार लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
जबलपुर। साइबर ठगों ने लूट का एक ऐसा नया और खौफनाक तरीका अख्तियार कर लिया है जिसने हर मोबाइल यूजर के होश उड़ा दिए हैं। आमतौर पर लोग सोचते हैं कि जब तक वे किसी अनजान लिंक पर क्लिक नहीं करेंगे या अपना OTP शेयर नहीं करेंगे तब तक उनका बैंक खाता सुरक्षित है। लेकिन लॉर्डगंज थाना क्षेत्र में रहने वाले एक फैक्ट्री कर्मचारी के साथ जो हुआ उसने हम सभी को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि हमारा पैसा आखिर सुरक्षित कहा रहेगा?
जानकारी के मुताबिक लार्डगंज थाना अंतर्गत क्षेत्र के निवासी नितिन शाह जो एक फैक्ट्री में कार्यरत हैं उन्होंने थाने में शिकायत दर्ज कराई है। नितिन के मुताबिक शातिर साइबर ठगों ने उनके मोबाइल फोन को पूरी तरह से हैक कर लिया और उन्हें भनक तक नहीं लगने दी।
साइबर अपराधियों ने इस पूरी वारदात को बेहद शातिर तरीके से अंजाम दिया। ठगों ने 27 मई से 29 मई के बीच महज दो दिनों के भीतर पीड़ित के बैंक खाते में तीन बार सेंध लगाई और 3 लाख रुपए पार कर दिए। पीड़ित को इस बात की जानकारी तब हुई जब उनके खाते से पूरी जमापूंजी गायब हो चुकी थी।
इस मामले में सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात यह रही कि ठगी के दौरान पीड़ित शिकायतकर्ता के मोबाइल पर न तो कोई फिशिंग लिंक आई और न ही बैंक की तरफ से कोई ओटीपी प्राप्त हुई। बिना किसी क्रेडेंशियल शेयरिंग के इतनी बड़ी रकम का पार हो जाना यह साफ इशारा करता है कि हैकर्स ने किसी एडवांस मैलवेयर के जरिए पीड़ित का पूरा फोन अपने कब्जे में ले रखा था।
पीड़ित नितिन शाह की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए लॉर्डगंज थाना पुलिस ने अज्ञात साइबर ठगों के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर लिया है। मामले की तकनीकी जांच के लिए पुलिस ने साइबर सेल की मदद ली है। पुलिस अब उन बैंक खातों और आई एड्रेस को ट्रेस करने में जुटी है जहां ठगी की यह रकम ट्रांसफर की गई है।
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क्राइम ब्रांच का फर्जी अधिकारी बनकर की लूट, 4 आरोपी गिरफ्तार; पूछताछ में जुटी पुलिस
इंदौर। आरोपियों ने फरियादी से करीब 5 लाख रुपये मूल्य के यूएसडीटी और एक मोबाइल लूट लिया था। पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया है कि वे कई दिनों से फरियादी की क्रिप्टो ट्रेडिंग गतिविधियों पर नजर रखे हुए थे।
दरअसल इंदौर के द्वारिकापुरी क्षेत्र में रहने वाले स्नेह परमार ने क्राइम ब्रांच में शिकायत दर्ज कराई थी कि कुछ लोग खुद को क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताकर उसके घर में घुस आए। आरोपियों ने उसके साथ और उसके पिता के साथ मारपीट की। इसके बाद दोनों को कार में बैठाकर लसुड़िया क्षेत्र ले गए।
आरोपी फरियादी और उसके पिता को फ्रॉड के मामले में जेल भेजने की धमकी देने लगे। आरोपियों ने कार्रवाई नहीं करने के नाम पर फरियादी के मोबाइल से उसके ट्रेडिंग अकाउंट से 5773 यूएसडीटी, जिसकी कीमत करीब 5 लाख 12 हजार रुपये है, अन्य खातों में ट्रांसफर करवा लिए। इसके साथ ही एक मोबाइल भी लूट लिया गया।
जांच के दौरान क्राइम ब्रांच ने पहले तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया था। तकनीकी साक्ष्यों और विश्लेषण के आधार पर फरार आरोपी नितिन लोधी का सुराग मिला। इसके बाद पुलिस टीम ने कार्रवाई करते हुए उसे सागर से गिरफ्तार कर लिया।
पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे कई दिनों से फरियादी की क्रिप्टो ट्रेडिंग गतिविधियों पर नजर रखे हुए थे। मोटी रकम हड़पने की योजना बनाकर उन्होंने वारदात को अंजाम दिया। मामले में पुलिस आगे की पूछताछ और जांच कर रही है।
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सूने घर से 15 लाख के गहने चोरी: पड़ोसियों ने पुलिस को सूचना, डॉयल 112 को चकमा देकर भागा चोर
सतना। सतना के सिविल लाइन थाना क्षेत्र के एफसीआई गोदाम के पास एक सूने घर से चोरों ने लगभग 15 लाख कीमत के सोने चांदी के जेवरात और नगदी पार कर दी। घटना बुधवार-गुरुवार की दरमियानी रात लगभग 1.30 बजे की बताई जा रही है। प्राप्त जानकारी के अनुसार आशीष मिश्रा इंदौर में एक आटोमोबाइल्स कंपनी में मैनेजर है। यहां अमौधा स्थित एफसीआई गोदाम के पास किराए के मकान में उनका परिवार रहता है।
आशीष ने बताया कि बुधवार को उनकी पत्नी बेटी के साथ अपने मायके कोरीगवां गई हुई थी। रात लगभग 1.30 बजे घर की लाइट जलती देख सामने रहने वाले पड़ोसी को शंका हुई तो उन्होंने आशीष को फोन लगाया। आशीष उस समय इंदौर से सतना के लिए ट्रेन में सफर कर रहे थे। पड़ोसी से जानकारी मिलने के बाद डॉयल 112 को सूचना दी गई।
आरोप है कि मौके पर पहुंची पुलिस ने घर के अंदर से एक बदमाश को पकड़ लिया था लेकिन वह भी चकमा दे कर भागने में कामयाब रहा। उधर, आशीष की पत्नी को घटना की जानकारी लगते ही वो भी तड़के घर पहुंची तो देखा कमरों में सारा सामान बिखरा हुआ था। बदमाशों ने इत्मीनान के साथ पेटी, अलमारी, सूटकेस और दीवान सब की तलाशी ली। आशीष के अनुसार लगभग 15 लाख कीमत के गहने और कुछ नगदी चोरी गए है। पुलिस फिलहाल घटना की जांच कर रही है।
आशीष मिश्रा के घर के ठीक सामने रहने वाली महिला ने बताया कि रात में आहट मिलने के बाद वो अपने घर की छत पर जा कर देखी तो दो बदमाश घर के अंदर दाखिल होते दिखे। लेकिन डॉयल 112 की दो टीमें आने के बाद एक बदमाश पीछे के रास्ते से भाग गया जबकि दूसरे को पुलिस ने घर के अंदर से पकड़ लिया और जब बदमाश को बाहर लाया जा रहा था तो वो भी पुलिस को चकमा दे कर भाग गया
उधर, गुरुवार की सुबह आशीष की पत्नी और पड़ोसी जब फरियाद ले कर सिविल लाइन थाने पहुंचे तो वहां चैनल गेट बंद मिला। काफी चिल्लाने के बाद भी कोई पुलिसकर्मी थाने से बाहर नहीं निकला। पुलिस के इस रवैए से पीड़ित परिवार और मोहल्ले के लोगों में काफी नाराजगी है।
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