This website uses cookies to ensure you get the best experience on our website.

भोपाल। राजधानी भोपाल के कोलार थाना क्षेत्र में चोरों के हौसले इतने बुलंद हैं कि अब उन्होंने पुलिस अधिकारियों के घरों को भी निशाना बनाना शुरू कर दिया है। डीके-2 (DK 2) इलाके में स्थित ट्रैफिक एसीपी के सूने मकान का ताला तोड़कर चोर लाखों रुपए नकद और भारी मात्रा में जेवरात समेट ले गए।
गुरुवार की रात लगभग 10 बजे बदमाशों ने ट्रैफिक एसीपी विजय दुबे के आवास को निशाना बनाया। चोर घर का ताला तोड़कर अंदर घुसे और अलमारी में रखे 20 लाख रुपए नकद के साथ-साथ करीब 50 तोला सोना और अन्य चांदी के कीमती जेवरातों पर हाथ साफ कर दिया। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। वरिष्ठ अधिकारी और फॉरेंसिक टीम मौके पर पहुंची और साक्ष्य जुटाए।
कोलार इलाके में लगातार हो रही चोरियों से रहवासियों में भारी आक्रोश है। इस बड़ी वारदात से पहले भी इसी क्षेत्र में एक भाजपा नेत्री के घर चोरी हुई थी, जिसका खुलासा आज तक पुलिस नहीं कर पाई है। इसके अलावा कजलीखेड़ा क्षेत्र में हुई चोरी की दो अन्य वारदातों का भी पुलिस अब तक सुराग नहीं लगा सकी है। एक के बाद एक हो रही इन बड़ी चोरियों ने राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था और पुलिस गश्त की पोल खोल दी है। फिलहाल, कोलार पुलिस मामला दर्ज कर आसपास लगे सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है और आरोपियों की तलाश में जुटी है।

--------------------------------------------
‘सुंदर महिलाओं की डेड बॉडी से रेप’ वाले बयान पर बवाल: डॉक्टर संगठन ने जीतू पटवारी को कहा- सार्जवनिक माफी मांगे
भोपाल। मध्य प्रदेश के कांग्रेस विधायक अभय मिश्रा के विवादित बयान पर डॉक्टर संगठन नाराज है। मेडिकल टीचर एसोसिएशन, जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन ने कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी को पत्र लिखा है। अभय मिश्रा ने जो आरोप लगाए इसे लेकर सार्वजनिक माफी मांगने की मांग की गई है। डॉक्टर एसोसिएशन ने कहा कि चिकित्सीय पेशे पर अपमानजनक बर्दाश्त नहीं है।
सेमरिया विधायक अभय मिश्रा के विवादित बयान को लेकर डॉक्टर एसोसिएशन ने मोर्चा खोल दिया है। इसे लेकर डॉक्टर संगठन ने एमपी कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी को पत्र लिखा है। जिसमें अभय मिश्रा के बयान को पूरी तरह से निराधार और चिकित्सा विभाग की गरिमा के खिलाफ बताया है। डॉक्टर एसोसिएशन ने कहा कि बना तथ्यों के इस तरह का घिनौना आरोप लगाना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। इस तरह के आरोप लगाना संपूर्ण डॉक्टर समुदाय की निष्ठा और ईमानदारी पर हमला है। वहीं संगठन ने अभय मिश्रा से सार्वजानिक तौर पर माफी मांगने की मांग की है।
गौरतलब है कि सेमरिया विधायक अभय मिश्रा का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। जिसमें उन्होंने संजय गांधी अस्पताल की व्यवस्थाओं और सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा था कि ‘संजय गांधी हॉस्पिटल में अगर कोई सुंदर महिला एक्सपायर करती है तो पोस्टमार्टम कक्ष में अगर उसके परिवार के लोग खड़े नहीं रहते और खड़े रहने के लिए पैसा देना पड़ता है, तो डेड बॉडी के साथ वहां रेप किया जाता है।’
--------------------------------
पांढुर्णा में 2 गांवों की भिड़ंत में 650 से ज्यादा घायल, 22 एंबुलेंस भेजीं, विधायक ने भी पत्थर बरसाए
छिंदवाड़ा। पांढुर्णा के गोटमार मेले में झंडे के लिए परंपरागत टकराव जारी है। जाम नदी के किनारे पत्थरबाजी चल रही है। पांढुर्णा और सावरगांव के ग्रामीण एक दूसरे पर पत्थर बरसा रहे हैं। शुक्रवार को झंडे पर कब्जे के लिए यह लड़ाई चल रही है जिसमें अभी तक 650 से ज्यादा लोग घायल हो चुके हैं। घायलों को इलाज के लिए बनाए गए विशेष अस्पतालों में ले जाया जा रहा है, 22 एंबुलेंस भेजीं हैं। पांढुर्णा में गोटमार मेला शुरू होते ही दोनों पक्षों के लोगों ने आमने सामने आते हुए पत्थरबाजी शुरु कर दी। पत्थर लगने से कई लोगों के सिर फूट गए जिनमें से 4 की हालत गंभीर है। पांढुर्णा के विधायक निलेश उईके ने भी पत्थर बरसाए। कांग्रेस विधायक ने परंपरा को आस्था के साथ निभाने की भी बात कही। पूरी घटना की 3 ड्रोन से निगरानी की जा रही है। 650 से ज्यादा पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है।
पांढुर्ना का गोटमार मेला देशभर में विख्यात है। यहां पत्थरबाजी की सदियों पुरानी परंपरा है। गोटमार मेले की इस पंरपरा में कई लोग अपनी जान भी गंवा चुके हैं। हर साल सैंकड़ों लोग घायल होते हैं।
इस बार गोटमार मेला में पत्थर बाजी से घायलों के इलाज के लिए खासी कवायद की गई है। कलेक्टर नीरज कुमार वशिष्ठ के अनुसार मेला क्षेत्र में 7 अस्थायी स्वास्थ्य केंद्र बनाए गए। स्वास्थ्य विभाग ने घायलों के तवरित इलाज के लिए 44 डॉक्टरों की टीम बनाकर ड्यूटी लगाई। 22 एंबुलेंस भी तैनात की गई। इनसे घायलों को जरूरत के अनुसार प्राथमिक उपचार के बाद अस्पताल भेजा जा रहा है।
गोटमार मेला में सुरक्षा के लिए इस बार 3 ड्रोनों से निगरानी की जा रही है। इतना ही नहीं मेला क्षेत्र और आसपास 650 से ज्यादा पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं। मेले की सुरक्षा व्यवस्था के लिए 10 CCTV कैमरे भी लगाए गए हैं।
पांढुर्णा कलेक्टर नीरज कुमार वशिष्ठ ने बताया कि पांढुर्णा में परंपरागत रूप से गोटमार का आयोजन के लिए पुलिस और प्रशासन ने खासी तैयारी की। हमने चिकित्सा शिविर बनवाए , उसमें चिकित्सक दल तैनात किए और लगभग 22 एंबुलेंस उपलब्ध कराईं।

नीमच में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की पटना टीम ने मध्य प्रदेश के नीमच में एक बड़ी और गोपनीय कार्रवाई को अंजाम देते हुए सेंट्रल ब्यूरो ऑफ नारकोटिक्स (CBN) के इंस्पेक्टर सिद्धार्थ श्रीवास्तव को हिरासत में ले लिया है। यह कार्रवाई गुरुवार देर रात सीबीएन परिसर स्थित सरकारी आवास (सीबीएन कॉलोनी) में की गई। इस अचानक हुई छापेमारी से नारकोटिक्स महकमे में हड़कंप मच गया है।
जानकारी के अनुसार इंस्पेक्टर सिद्धार्थ श्रीवास्तव के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत डिजिटल लेन-देन और रिश्वतखोरी की ठोस शिकायत सीबीआई मुख्यालय पटना (बिहार) को मिली थी। तकनीकी जांच और डिजिटल ट्रांजेक्शन के पुख्ता सुराग मिलने के बाद, पटना से सीबीआई की विशेष टीम सीधे नीमच पहुंची और गुरुवार देर रात अधिकारी के सरकारी आवास पर दबिश दी।
छापेमारी के दौरान सीबीआई की टीम ने आवास के चप्पे-चप्पे की गहन तलाशी ली। इस दौरान मौके से लाखों रुपये की नकदी, संदेहास्पद बैंक लेन-देन से जुड़े डिजिटल रिकॉर्ड, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और कई महत्वपूर्ण कानूनी दस्तावेज जब्त किए गए हैं। टीम ने मौके पर ही कागजी औपचारिकताएं पूरी कर इंस्पेक्टर को अपनी कस्टडी में ले लिया।
हिरासत में लेने के बाद सीबीआई की टीम ने आरोपी इंस्पेक्टर सिद्धार्थ श्रीवास्तव को नीमच जिला न्यायालय में पेश किया। टीम ने मामले की अग्रिम तफ्तीश और साक्ष्यों की कड़ियों को जोड़ने के लिए अदालत से ट्रांजिट रिमांड की मांग की, ताकि उन्हें पटना ले जाकर विस्तृत पूछताछ की जा सके।
सीबीएन जैसे संवेदनशील केंद्रीय विभाग में बिहार सीबीआई की इस सीधी एंट्री के बाद महकमे में सन्नाटा पसरा हुआ है। माना जा रहा है कि पटना में होने वाली पूछताछ के बाद इस सिंडिकेट और रिश्वतखोरी के नेटवर्क से जुड़े कई और चेहरे भी बेनकाब हो सकते हैं। मामले में विस्तृत जांच जारी है
---------------------------------------
गोटमार मेला-झंडे को जीतने के लिए पांढुर्णा में जारी है जंग, पत्थरों से लहूलुहान हुए खिलाड़ी
पांढुर्णा। पोला पर्व के दूसरे दिन शुक्रवार को गोटमार मेले के दौरान जाम नदी में पत्थरबाजी जारी है। बीच नदी में लगे झंडे पर कब्जे के लिए पांढुर्णा और सावरगांव पक्ष के खिलाड़ी आमने-सामने हैं। पत्थर लगने से अब तक करीब 652 लोग घायल हो गए हैं। इनमें कई लोगों के सिर फूट गए। 4 खिलाड़ियों को गंभीर चोट आई है। वहीं, पांढुर्णा से कांग्रेस विधायक निलेश उईके ने भी पत्थरबाजी की।
इस दौरान सावरगांव निवासी 33 वर्षीय नितिन भादे का पैर टूट गया। 48 वर्षीय प्रह्लाद साहू के कंधे की हड्डी टूट गई। पांढुर्णा निवासी 39 वर्षीय सचिन हाटेकर का पैर टूट गया। सावरगांव निवासी 30 वर्षीय संजय धारपुरे के सिर और पैर में गंभीर चोट आई है। गंभीर रूप से घायल सचिन पाटणकर, प्रीतम रावत, संजय धरपुरे को नागपुर रेफर किया गया है, जबकि पांच और अन्य गंभीर घायलों को भी रेफर किया जा सकता है।
घायलों के इलाज के लिए मेला क्षेत्र में 7 अस्थायी स्वास्थ्य केंद्र बनाए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग ने 44 डॉक्टरों की ड्यूटी लगाई है और 22 एंबुलेंस तैनात की गई हैं। घायलों को जरूरत के मुताबिक प्राथमिक उपचार के बाद अस्पताल भेजा जा रहा है।
गोटमार मेले का इतिहास बताया जाता है कि बरसों साल पहले पांढुर्णा का युवक और सावरगांव की युवती को भगा ले गया था जैसे ही जाम नदी के बीच पहुंचा तो युवती के परिवार के लोग और गांव के लोगों ने युवक पर पत्थर की बौछार कर दी जैसे ही इसकी जानकारी पांढुर्णा पक्ष के लोगों को लगी तो वह भी युवक को बचाने के लिए पत्थर बरसने लगे लेकिन इसी बीच दोनों तरफ से पत्थर बरसाना शुरू हुई तो दोनों की ही मौत हो गई गांव के लोगों ने शव को मां चंडिका मंदिर में ले जाकर रखा पूजा के बाद अंतिम संस्कार किया गया। इसी घटना के बाद से ही परंपरा शुरू हो गई। पोला पर्व के दूसरे दिन गोटमार मेला का आयोजन किया जाता है। दोनों तरफ से होने वाली पत्थरबाजी में कई लोग घायल होते हैं।

------------------------------------------
मनुआभान टेकरी पर घूमने गए पत्रकार और युवती से चाकू की नोक पर लूटः iPhone-15 और जेवर ले उड़े बदमाश
भोपाल। राजधानी भोपाल के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल मनुआभान टेकरी पर बदमाशों ने लूट की सनसनीखेज वारदात को अंजाम दिया है। घूमने गए एक कपल को चाकू की नोक पर बंधक बनाकर तीन बदमाशों ने लूटपाट की और विरोध करने पर युवक पर धारदार हथियार से हमला कर दिया। घटना कोहेफिजा थाना क्षेत्र में गुरुवार रात की बताई जा रही है। बदमाश युवक का iPhone-15 और युवती की सोने की चेन व टॉप्स ले गए।
पीड़ित हर्ष शर्मा जो पेशे से पत्रकार हैं, अपनी एक महिला मित्र के साथ गुरुवार रात मनुआभान टेकरी पर घूमने गए थे। इसी दौरान तीन अज्ञात बदमाशों ने उन्हें घेर लिया और चाकू की नोक पर धमकाते हुए लूटपाट शुरू कर दी। बदमाशों ने युवक से उसका महंगा iPhone-15 और युवती के गले की सोने की चेन व कानों के टॉप्स उतरवा लिए। लूटपाट के दौरान जब युवक ने विरोध किया, तो बदमाशों ने धारदार हथियार से उस पर हमला कर दिया, जिससे वह घायल हो गया। घटना को अंजाम देने के बाद बदमाश अंधेरे का फायदा उठाकर मौके से फरार हो गए।
वारदात की सूचना मिलते ही कोहेफिजा थाना पुलिस हरकत में आई। पुलिस ने अज्ञात बदमाशों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और उनकी गिरफ्तारी के लिए विशेष टीमों का गठन किया गया है। राजधानी में इस तरह की घटना से सुरक्षा व्यवस्था पर एक बार फिर सवालिया निशान खड़े हो गए हैं, फिलहाल पुलिस टेकरी के आसपास लगे सीसीटीवी फुटेज खंगालकर आरोपियों की तलाश में जुटी है।

असम से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। यहां गोलाघाट जिले में ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉर्पोरेशन (ONGC) की पाइपलाइन से कच्चे तेल की चोरी के मामले में असम पुलिस के एक बड़े अधिकारी पर गाज गिरी है। गुरुवार को गोलाघाट जिले के सारुपथार को-जिला के पुलिस अधीक्षक (SP) दीपेन पातर को तेल चोरी के इस सनसनीखेज मामले में गिरफ्तार कर लिया गया। बता दें कि गोलाघाट के क्राइम ब्रांच एएसपी जॉन दास के नेतृत्व में पुलिस टीम ने आरोपी एसपी दीपेन पातर को उनके आवास से गिरफ्तार किया।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) स्वप्ननील डेका ने बताया कि इस मामले की जांच तब शुरू हुई जब 3 अगस्त को उरियाघाट पुलिस स्टेशन में एक एफआईआर दर्ज कराई गई थी। शिकायत के मुताबिक 25 से 27 जुलाई के बीच उरियामघाट इलाके से गुजरने वाली ONGC की मुख्य पाइपलाइन में छेद करके पाइपलाइन से करीब 2 से 3 टैंकर कच्चा तेल चुरा लिया गया था। जिसकी कीमत लाखों रुपये आंकी गई है। पुलिस ने एसएसपी स्वप्ननील डेका के नेतृत्व में जांच शुरू की थी। घटना के बाद पुलिस ने गिरोह के कुछ सदस्यों को पकड़ा था, लेकिन जब इनसे पूछताछ की गई तो कुछ ऐसा खुलासा हुआ, जिस पर पुलिस को भी यकीन नहीं हुआ। क्योंकि इन सदस्यों ने दीपेन पातर का नाम लिया था।
आरोपियों ने खुलासा किया कि उन्हें स्थानीय पुलिस का पूरा समर्थन हासिल था और इसके बदले वे SDPO दीपेन पातर को मोटी रकम पहुंचाते थे। जबकि वह पाइपलाइन में छेद करके कच्चा तेल चुराने वाले गिरोह को सीधी मदद करते थे। जांच पड़ताल में जब पुलिस को पुख्ता सबूत मिले तो दीपेन पातर को गिरफ्तार किया गया। पातर की गिरफ्तारी के साथ सरूपथर तेल चोरी के मामले में गिरफ्तार लोगों की कुल संख्या पांच हो गई है, जिसमें एक महिला भी शामिल है। पुलिस को शक है कि यह मामला एक बड़े नेटवर्क का हिस्सा है जिसमें सरूपथर के कई लोग और ओएनजीसी से कथित तौर पर जुड़े व्यक्ति शामिल हैं।
पुलिस को जांच में पता चला है कि कच्चा तेल कथित तौर पर सरूपथर से पश्चिम बंगाल ले जाया गया था, गोलाघाट पुलिस अब बड़े नेटवर्क का पता लगाने और इसमें शामिल अन्य लोगों की पहचान करने के लिए जांच का दायरा पश्चिम बंगाल तक बढ़ाने पर विचार कर रही है। एसएसपी स्वप्निल डेका ने कहा कि जांच अभी जारी है और संकेत दिया कि जैसे-जैसे पुलिस तेल चोरी के कथित नेटवर्क का खुलासा कर रही है और गिरफ्तारियां होने की संभावना है।
-----------------------------------
ज्योति जासूसी कांड के बाद बदले गए पाकिस्तान धार्मिक यात्रा के नियम : अब प्राइवेट टूर पर पूरी रोक
केंद्र और हरियाणा सरकार ने भारत-पाकिस्तान धार्मिक यात्राओं के नियम बदल दिए हैं। यह फैसला ऑपरेशन सिंदूर के बाद सामने आए यूट्यूबर ज्योति मल्होत्रा केस के बाद लिया गया है। जांच में खुलासा हुआ है कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी (ISI) और वहां के प्राइवेट टूर ऑपरेटर धार्मिक यात्रा के नाम पर भारतीय नागरिकों को स्पॉन्सर करते हैं, ताकि उनसे जासूसी करा सकें। इसे देखते हुए भारत सरकार ने पाकिस्तान से चलने वाले सभी प्रकार के प्राइवेट स्पॉन्सर्ड टूर पर पाबंदी लगा दी है। वीजा की शर्तें भी बदल दी गई हैं।
हरियाणा सिख गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी के टूरिज्म इंचार्ज हरकीरत सिंह ने भी इसकी पुष्टि की। बकौल दैनिक भास्कर उन्होंने बताया कि ज्योति मल्होत्रा जैसे जासूसी केस मिलने के बाद से प्राइवेट स्पॉन्सर टूर बंद कर दिए गए हैं। पहले पाकिस्तान जाने वाले लोग वहां की एजेंसी से संपर्क कर टूर प्रोग्राम अरेंज करते थे। फिर यहां से वहां जाकर धार्मिक टूर करते थे। करीब 10 महीने पहले कुरुक्षेत्र के ऐतिहासिक गुरुद्वारा छठी पातशाही से जत्था रवाना हुआ था।
भारत और पाकिस्तान के बीच धार्मिक यात्राएं दोनों माध्यमों (इंडिविजुअल और जत्थे) से होती हैं। अधिकांश श्रद्धालु भारत-पाकिस्तान ‘रिलीजियस श्राइन्स प्रोटोकॉल 1974’ के तहत जत्थों (ग्रुप) में यात्रा करते हैं। इसमें विदेश मंत्रालय (MEA) और गृह मंत्रालय की ओर से वीजा व सुरक्षा क्लीयरेंस दी जाती है।
2019 में बने करतारपुर साहिब कॉरिडोर के जरिए भारतीय नागरिक/OCI कार्डधारक बिना वीजा के केवल पासपोर्ट के आधार पर सुबह जाकर शाम को वापस आ सकते हैं। इसके अलावा कटासराज मंदिर (शिवरात्रि) के लिए भी विशेष ग्रुप/इंडिविजुअल वीजा पर लोग जाते हैं।
पहले का नियम (प्राइवेट स्पॉन्सरशिप): पाकिस्तान के प्राइवेट टूर ऑपरेटर (जैसे लाहौर और इस्लामाबाद की ट्रैवल एजेंसियां) भारतीय नागरिकों, इन्फ्लुएंसर्स और श्रद्धालुओं को सीधे स्पॉन्सरशिप लेटर भेजती थीं। इससे दिल्ली स्थित पाकिस्तानी उच्चायोग से वीजा आसानी से मिल जाता था। पंजाब और हरियाणा पुलिस की 2025 की रिपोर्ट के अनुसार, इसी आड़ में पाक एजेंसियां यात्रियों को ठहरने, घूमने और सुविधाएं देने का लालच देकर उनसे संपर्क करती थीं। फिर भारत से जुड़ी रणनीतिक व संवेदनशील जानकारियां जुटाने का काम करती थीं।
नया नियम (केवल मान्यता प्राप्त ): सरकार ने प्राइवेट नेटवर्क को पूरी तरह खत्म कर दिया है। अब पाकिस्तान यात्रा के लिए केवल शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) और हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (HSGMC) जैसे पंजीकृत और संवैधानिक धार्मिक निकायों को ही तय सीमा में जत्थे (ग्रुप) ले जाने की अनुमति दी जाएगी। निजी तौर पर वीजा के लिए आवेदन नहीं कर सकेंगे।
पुलिस वेरिफिकेशन ज्यादा सख्त: सभी आवेदन SGPC और HSGPC के पास एकत्र होंगे। इसके बाद लोकल पुलिस, सीआईडी (CID) और केंद्रीय खुफिया एजेंसियां आवेदकों के बैकग्राउंड की जांच करेंगी। क्लीयरेंस मिलने के बाद ही वीजा के लिए फाइल गृह मंत्रालय को भेजी जाएगी।
1974 के द्विपक्षीय समझौते के तहत सिख श्रद्धालुओं के मुख्य जत्थे साल में 4 प्रमुख अवसरों पर पाकिस्तान जाते हैं। इस समझौते के तहत चारों मौकों पर मिलाकर हर साल कुल 8,000 सिख श्रद्धालुओं को पाकिस्तान जाने की अनुमति (वीजा कोटा) है।
बैसाखी/खालसा साजना दिवस (अप्रैल): अधिकतम 3,000 श्रद्धालु
श्री गुरु अर्जुन देव जी का शहीदी दिवस (मई-जून): अधिकतम 1,000 श्रद्धालु
महाराजा रणजीत सिंह की पुण्यतिथि (जून): अधिकतम 1,000 श्रद्धालु
श्री गुरु नानक देव जी का प्रकाश पर्व (नवंबर- ननकाना साहिब): अधिकतम 3,000 श्रद्धालु
गुरुपर्व पर हरियाणा से जाएगा 2000 श्रद्धालुओं का जत्था
इसी बीच श्री गुरु नानक देव जी के प्रकाश पर्व (गुरुपर्व) के अवसर पर पाकिस्तान स्थित ननकाना साहिब और अन्य ऐतिहासिक गुरुद्वारों के दर्शन के लिए हरियाणा सरकार ने प्रक्रिया शुरू कर दी है। 22 नवंबर से 1 दिसंबर तक होने वाले धार्मिक समारोहों में शामिल होने के लिए सिख संगत से आवेदन मांगे गए हैं। श्रद्धालु 12 सितंबर तक आवेदन जमा कर सकते हैं।
----------------------------------------
19 साल की लड़की से डरी मुंबई: Mumbai ATS उसकी यात्राओं का डाटा खंगालने में जुटी, पिता के ‘अतीत कनेक्शन’ ने मुंबई पुलिस को हिला डाला
एक 19 साल की लड़की ने पूरी मुंबई प्रशासन को हिलाकर रख दी है। इस 19 साल की लड़की से मुंबई डरी हुई है। महाराष्ट्र एटीएस और मुंबई पुलिस उसकी यात्राओं का डाटा निकाल खंगालने में जुटी हुई है। यह सिर्फ इसलिए हो रहा है क्य़ोंंकि लड़की के पिता का इंडियन मुजाहिदीन और SIMI कनेक्शन रहा है। लड़की नया पासपोर्ट बनवाकर विदेश यात्रा पर भी गई थी। लिहाजा अब Mumbai ATS उसकी पूरी ट्रेवल हिस्ट्री निकालने में जुट गई है।
ATS की प्राथमिक जांच के बाद अब मुंब्रा पुलिस ने नामीराह तारिक खान के खिलाफ Passport Act की धारा 12(1)(b) और BNS की धारा 318(2), 212 और 3(5) के तहत FIR दर्ज की है। जांच एजेंसियां अब नामीराह के पुराने और नए पासपोर्ट, उसकी विदेश यात्राओं और फरार पिता से संभावित संपर्क की कड़ियों को जोड़ने में जुटी हैं।
19 साल की लड़की नामीराह तारिक खान के पिता का नाम तारिक खान है। तारिक खान का नाम इंडियन मुजाहिदीन (IM) और SIMI से जुड़े मामलों में सामने आ चुका है। ATS को जानकारी मिली थी कि मुंब्रा की रहने वाली नामीराह तारिक खान ने अधूरी जानकारी देकर नया पासपोर्ट बनवाया है। इसके बाद ATS ने जब मामले की जांच शुरू की तो पता चला कि नामीराह के पास पहले से ही उत्तर प्रदेश के लखनऊ से जारी एक पासपोर्ट मौजूद था। नया पासपोर्ट बनवाते समय पुराने पासपोर्ट की जानकारी देनी होती है, लेकिन नामीराह ने कथित तौर पर अपने पुराने पासपोर्ट की जानकारी नहीं दी और मुंब्रा से नया पासपोर्ट बनवा लिया।
नामीराह के पिता तारिक खान का नाम इंडियन मुजाहिदीन (IM) और SIMI से जुड़े मामलों में सामने आ चुका है। इसके बाद ATS ने मामले को और गंभीरता से लेना शुरू किया. सूत्रों के मुताबिक, तारिक खान के खिलाफ तीन मामले दर्ज हैं। पहला मामला वर्ष 2001 का है, जिसमें उस पर प्रतिबंधित संगठन SIMI से जुड़े होने का आरोप लगा था। इसके बाद वर्ष 2006 में मुंबई Crime Branch ने उसके खिलाफ UAPA के तहत मामला दर्ज किया था। 2011 में उसके खिलाफ फर्जी करेंसी से जुड़ा मामला दर्ज हुआ था। इस मामले में भी UAPA की गंभीर धाराएं लगाई गई थीं। जांच एजेंसियों के सूत्रों के मुताबिक, तारिक खान को इंडियन मुजाहिदीन के रियाज भटकल और यासीन भटकल का करीबी भी माना जाता था।
सूत्रों के मुताबिक वर्ष 2011 के बाद तारिक खान देश छोड़कर फरार हो गया था। जांच एजेंसियों को शक है कि वह किसी Gulf country में छिपा हुआ है। अब ATS नामीराह के पुराने पासपोर्ट और उसकी विदेश यात्राओं की भी जांच कर रही है। जब नामीराह नाबालिग थी, तब उसके पास लखनऊ से जारी पासपोर्ट था। इसी पासपोर्ट का इस्तेमाल कर वह 2014 और 2016 में Gulf country गई थी। एजेंसियों को शक है कि इन यात्राओं के दौरान नामीराह अपने फरार पिता से मिलने गई हो सकती है।
मुंब्रा पुलिस ने नामीराह तारिक खान के खिलाफ Passport Act की धारा 12(1)(b) और BNS की धारा 318(2), 212 और 3(5) के तहत मामला दर्ज किया है। फिलहाल ATS और मुंब्रा पुलिस इस पूरे मामले की जांच कर रही हैं।

 


पांढुर्णा। मध्य प्रदेश के पांढुर्णा जिले में जाम नदी के तट पर कल एक बार फिर सदियों पुरानी और विश्वप्रसिद्ध ‘गोटमार मेले’ का खूनी खेल देखने को मिलेगा। परंपरा और आस्था के नाम पर पांढुर्णा और सावरगांव के लोग आमने-सामने होंगे और एक-दूसरे पर अंधाधुंध पत्थरों की बरसात करेंगे। सिर फोड़ती गोफन, लहूलुहान होते लोग और नदी किनारे बिखरे पत्थर—गोटमार मेले की सालों पुरानी पहचान बन चुके हैं।
पोला पर्व के दूसरे दिन आयोजित होने वाले इस मेले की शुरुआत मां चंडिका के पूजन और दर्शन के साथ होती है। वर्ष 1955 से लेकर अब तक इस पत्थरबाजी के खेल में 14 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं, जबकि हजारों की संख्या में लोग गंभीर रूप से घायल और अपाहिज हुए हैं। प्रशासन ने कई बार रबर बॉल से मेला कराने की कोशिश की, लेकिन हर बार परंपरा के आगे प्रशासन के प्रयास पस्त साबित हुए।
गोटमार मेले को लेकर कई कहानियां प्रचलित हैं। सबसे लोकप्रिय किवदंती पांढुर्णा के युवक और सावरगांव की युवती की प्रेम कहानी से जुड़ी है। कहा जाता है कि प्रेमी युगल को नदी पार करते समय दोनों गांवों के लोगों ने रोकने के लिए पत्थरबाजी की थी। इसी घटना की याद में गोटमार मेले की परंपरा शुरू हुई। हालांकि, बुजुर्गों का मानना है कि समय के साथ इसमें गोफन और शराब के इस्तेमाल से आक्रामकता और खतरा बहुत बढ़ गया है।
इस बार भी प्रशासन ने शांति समिति की बैठकें कर लोगों से शांतिपूर्ण उत्सव मनाने की अपील की है। सुरक्षा के मद्देनजर कलेक्टर-एसपी सहित भारी पुलिस बल तैनात रहेगा। करीब 700 पुलिसकर्मी, ड्रोन कैमरे और सीसीटीवी के जरिए पूरे मेला परिसर पर नजर रखी जाएगी। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग को अलर्ट मोड पर रखा गया है।
प्रशासनिक दावों और तैयारियों के बीच ज़मीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। मेले से दो दिन पहले से ही जाम नदी के दोनों किनारों पर ट्रैक्टरों के जरिए भारी मात्रा में पत्थर लाकर इकट्ठे किए गए हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस बार भी पांढुर्णा की जाम नदी में परंपरा के नाम पर खूनी खेल खेला जाएगा?

-------------------------------------
नाबालिग से होटल में दुष्कर्म और फिर गर्भपात! डॉक्टर-परिजनों समेत 6 पर केस दर्ज; 5 हिरासत में
नर्मदापुरम। मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम में एक नाबालिग के साथ दुष्कर्म और जबरन गर्भपात कराने का गंभीर मामला सामने आया है। पुलिस ने पीड़िता की शिकायत पर मुख्य आरोपी अजीत सिंह और उसकी मदद करने वाली एक महिला डॉक्टर व परिजनों सहित कुल 6 लोगों के खिलाफ पॉक्सो एक्ट और अन्य संबंधित धाराओं में अपराध दर्ज किया है। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 5 आरोपियों को अभिरक्षा में ले लिया है। मामला कोतवाली थाना क्षेत्र का है।
पुलिस के अनुसार, डोलरिया क्षेत्र निवासी मुख्य आरोपी अजीत सिंह ने 17 वर्षीय एक लड़की को प्यार और शादी का झांसा दिया। 23 अक्टूबर 2025 को वह पीड़िता को घुमाने के बहाने नर्मदापुरम ले गया और आनंद नगर स्थित पलाश होटल के कमरे में ले जाकर उसके साथ जबरन संबंध बनाए। घटना के कुछ समय बाद जब पीड़िता गर्भवती हो गई, तो आरोपी ने 19 फरवरी को एक महिला डॉक्टर स्वाती मिर्धा की मदद से दवा देकर उसका गर्भपात करा दिया। इस कृत्य में आरोपी के परिजनों (मां, बहन, बड़ी मां और चाचा) ने भी आरोपी का साथ दिया। इसके बाद आरोपी पीड़िता को जान से मारने की धमकी देकर चुप कराता रहा।
​घटना के लगभग 8 महीने बाद जब मुख्य आरोपी पीड़िता को बदनाम करने लगा, तो परेशान होकर पीड़िता ने पूरी बात अपने परिजनों को बताई। इसके बाद पीड़िता ने कोतवाली थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई। शिकायत मिलते ही पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया। ​मामले की जांच के तहत एसआई दीपिका लोखंडे ने घटनास्थल पलाश होटल पहुंचकर उस कमरे का निरीक्षण किया। एएसपी अभिषेक राजन ने बताया कि मामले में मुख्य आरोपी समेत 6 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है, जिसमें से 5 आरोपियों को पुलिस अभिरक्षा में लिया जा चुका है। अन्य की तलाश जारी है।
------------------------------------
महाकाल मंदिर के पास शाही मस्जिद का हिस्सा हटाने पर हाई कोर्ट की मंजूरी
इंदौर. सिंहस्थ कुंभ 2028 से पहले उज्जैन में सड़क और यातायात व्यवस्था को लेकर चल रही तैयारियों को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट से महत्वपूर्ण कानूनी आधार मिल गया है. महाकाल मंदिर के समीप स्थित शाही मस्जिद के एक हिस्से को हटाकर सड़क चौड़ी करने के नगर निगम के निर्णय के खिलाफ दायर दो याचिकाओं को हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया. अदालत ने माना कि नगर निगम ने कार्रवाई से पहले संबंधित पक्षों को सुनवाई का अवसर दिया और निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन किया.
न्यायमूर्ति संदीप एन. भट्ट की पीठ ने मामले की परिस्थितियों को देखते हुए कहा कि प्रस्तावित कार्रवाई को संविधान के अनुच्छेद 14, 25, 26 और 300-ए का उल्लंघन नहीं माना जा सकता. अदालत के सामने मुख्य सवाल केवल धार्मिक संरचना के प्रभावित होने का नहीं था, बल्कि यह भी था कि सार्वजनिक सड़क के विस्तार के लिए की जा रही कार्रवाई मनमानी है या कानून के अनुरूप.
उज्जैन में वर्ष 2028 में सिंहस्थ कुंभ होना है. महाकालेश्वर मंदिर और क्षिप्रा नदी के आसपास का क्षेत्र इस आयोजन के दौरान श्रद्धालुओं की भारी आवाजाही वाला प्रमुख क्षेत्र रहेगा. ऐसे में सड़क की क्षमता, पैदल यात्रियों की आवाजाही और वाहनों के दबाव को लेकर प्रशासन अभी से तैयारी कर रहा है.
नगर निगम का कहना था कि शाही सवारी, पेशवाई और सिंहस्थ के दौरान लाखों श्रद्धालुओं की आवाजाही के बीच मौजूदा मार्गों पर यातायात का दबाव काफी बढ़ सकता है. इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए सड़क को 15 मीटर तक चौड़ा करने की योजना बनाई गई है.
मस्जिद के प्रबंधन का दावा करने वाले दो पक्षों ने नगर निगम के नोटिस और प्रस्तावित कार्रवाई को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी. उनका कहना था कि सड़क चौड़ीकरण के लिए मस्जिद के जिस हिस्से को हटाने की योजना है, उसमें जमातखाना, करीब 120 फुट ऊंची मीनार और मजहर चौक शाही का हिस्सा प्रभावित होगा.
याचिकाकर्ताओं ने मस्जिद को पुरानी धार्मिक संरचना बताते हुए तर्क दिया कि नमाज स्थल, वजू की सुविधा और मीनार केवल भवन के हिस्से नहीं हैं, बल्कि धार्मिक गतिविधियों से जुड़े महत्वपूर्ण अंग हैं. इसलिए सड़क चौड़ीकरण के नाम पर इनका प्रभावित होना धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार से जुड़ा प्रश्न है.
नगर निगम ने अदालत के समक्ष अपने पक्ष में कहा कि प्रस्तावित कार्रवाई पूरी मस्जिद को प्रभावित नहीं करती. निगम के अनुसार मस्जिद के कुल ढांचे के 10 प्रतिशत से भी कम हिस्से को हटाने की आवश्यकता है.
निगम ने यह भी बताया कि उज्जैन में सड़क चौड़ीकरण की व्यापक योजना के तहत करीब 90 धार्मिक संरचनाओं को हटाने या स्थानांतरित करने की कार्रवाई की जा रही है. इनमें मंदिर और मस्जिद दोनों शामिल हैं. निगम के अनुसार 10 मंदिर और एक मस्जिद पहले ही हटाए जा चुके हैं.
इसी आधार पर निगम ने भेदभाव के आरोप को खारिज किया और कहा कि कार्रवाई किसी एक धर्मस्थल को निशाना बनाकर नहीं की जा रही है, बल्कि सड़क विस्तार की व्यापक योजना का हिस्सा है.
याचिकाकर्ताओं ने अदालत के सामने यह भी दलील रखी कि सड़क चौड़ी करने के लिए वैकल्पिक जमीन उपलब्ध है. उनका कहना था कि यदि मार्ग में उपलब्ध दूसरी भूमि का उपयोग किया जाए तो मस्जिद की संरचना को नुकसान पहुंचाए बिना भी यातायात परियोजना को आगे बढ़ाया जा सकता है.
यह तर्क इसलिए भी महत्वपूर्ण था क्योंकि मामला केवल धार्मिक अधिकारों तक सीमित नहीं था. यदि समान उद्देश्य कम नुकसान के साथ किसी दूसरे विकल्प से पूरा किया जा सकता हो तो प्रशासन को उस विकल्प पर विचार करना चाहिए या नहीं, यह भी न्यायिक समीक्षा का हिस्सा बन सकता है.
अदालत ने रिकॉर्ड पर उपलब्ध सामग्री और मामले की परिस्थितियों को देखते हुए निगम की कार्रवाई को केवल इस आधार पर मनमाना या पक्षपातपूर्ण नहीं माना.
याचिकाकर्ताओं ने यह भी कहा कि शाही मस्जिद वक्फ संपत्ति के रूप में पंजीकृत है और मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड को समुचित तरीके से नोटिस नहीं दिया गया. इसके अलावा नगर निगम अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं होने का दावा भी किया गया.
हाई कोर्ट ने उपलब्ध रिकॉर्ड की जांच के बाद पाया कि मस्जिद के प्रबंधन से जुड़े पक्षों को सुनवाई का अवसर दिया गया था. संबंधित आपत्तियों पर विचार करने के बाद कार्रवाई से जुड़े आदेश पारित किए गए. ऐसे में केवल प्रक्रिया पर सवाल उठाकर निगम की पूरी कार्रवाई को निरस्त करने का आधार अदालत को नहीं मिला.
याचिकाकर्ताओं ने संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 के तहत धार्मिक स्वतंत्रता और धार्मिक संस्थाओं के प्रबंधन से जुड़े अधिकारों का हवाला दिया था. उनका तर्क था कि सार्वजनिक उद्देश्य का हवाला देकर किसी पुराने धार्मिक स्थल के आवश्यक हिस्से को प्रभावित नहीं किया जा सकता.
हाई कोर्ट ने हालांकि मामले की परिस्थितियों में माना कि प्रस्तावित कार्रवाई को धार्मिक स्वतंत्रता के संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन नहीं कहा जा सकता. अदालत ने यह भी देखा कि कार्रवाई किसी एक धार्मिक समुदाय तक सीमित नहीं बताई गई है और निगम ने सड़क चौड़ीकरण परियोजना के तहत अन्य धार्मिक संरचनाओं के संबंध में भी कदम उठाए हैं.
याचिकाकर्ताओं की एक प्रमुख आपत्ति यह थी कि निगम की कार्रवाई चयनात्मक और भेदभावपूर्ण है. अदालत ने इस पहलू पर भी रिकॉर्ड में मौजूद जानकारी को देखा.
नगर निगम द्वारा बड़ी संख्या में धार्मिक संरचनाओं के संबंध में कार्रवाई किए जाने की जानकारी को ध्यान में रखते हुए पीठ ने माना कि उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि शाही मस्जिद के खिलाफ कार्रवाई केवल धार्मिक पहचान के आधार पर की जा रही है.
फैसले का व्यापक महत्व इस बात में है कि अदालत ने सार्वजनिक परियोजना और धार्मिक संरचना के विवाद को केवल धार्मिक अधिकारों के चश्मे से नहीं देखा. सिंहस्थ जैसे बड़े आयोजन में यातायात, श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सार्वजनिक सुविधाओं की आवश्यकता को भी मामले का हिस्सा माना गया.
साथ ही अदालत ने यह भी देखा कि प्रशासन ने प्रभावित पक्ष को सुनवाई का अवसर दिया या नहीं और कार्रवाई मनमानी तरीके से तो नहीं की गई. यानी सड़क चौड़ीकरण अपने आप में कार्रवाई को वैध नहीं बनाता, बल्कि उसके लिए कानूनी प्रक्रिया और परिस्थितियों का पालन भी जरूरी है.
दोनों याचिकाएं खारिज होने के बाद शाही मस्जिद के प्रभावित हिस्से को लेकर नगर निगम की कार्रवाई के सामने फिलहाल हाई कोर्ट स्तर पर बाधा नहीं रही. अब आगे की प्रक्रिया प्रशासनिक स्तर पर होगी.
हालांकि सड़क चौड़ीकरण का काम केवल एक संरचना से जुड़े निर्णय तक सीमित नहीं है. सिंहस्थ 2028 को देखते हुए उज्जैन में सड़कों, यातायात मार्गों और श्रद्धालुओं की आवाजाही से जुड़े कई विकास कार्य प्रस्तावित हैं. ऐसे में धार्मिक और ऐतिहासिक संरचनाओं से जुड़े मामलों में प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चुनौती विकास कार्यों को आगे बढ़ाते हुए निर्धारित कानूनी प्रक्रिया, प्रभावित पक्षों की आपत्तियों और सार्वजनिक हित के बीच संतुलन बनाए रखना होगी.
हाई कोर्ट के इस आदेश से फिलहाल इतना स्पष्ट है कि उपलब्ध रिकॉर्ड और मामले की परिस्थितियों में शाही मस्जिद के प्रभावित हिस्से को हटाकर सड़क चौड़ी करने की नगर निगम की कार्रवाई को अदालत ने असंवैधानिक या मनमाना नहीं माना है. दोनों याचिकाएं खारिज कर दी गई हैं.

भोपाल। मध्य प्रदेश में फर्जी पासपोर्ट के जरिए देश के विभिन्न हिस्सों और विदेश यात्रा करने वाले एक बड़े रैकेट का खुलासा हुआ है। ग्वालियर के डबरा के बाद अब भोपाल के गोविंदपुरा थाना क्षेत्र के अन्ना नगर इलाके से 40 फर्जी पासपोर्ट बरामद किए गए हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसटीएफ (STF) ने कार्रवाई करते हुए दो मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
एसटीएफ डीआईजी राहुल कुमार लोढ़ा ने मामले का खुलासा करते हुए बताया कि गिरफ्तार किए गए आरोपियों में रियाल चौधरी भी शामिल है, जो मूलतः असम का रहने वाला है। दूसरा आरोपी विप्लव अधिकारी है। जांच में सामने आया है कि विप्लव का यह नेटवर्क असम से शुरू होकर कोलकाता के रास्ते मध्य प्रदेश तक फैला हुआ था। आरोपियों ने वर्ष 2021 के आसपास ये फर्जी पासपोर्ट तैयार करवाए थे। पुलिस की टीमें असम और अन्य राज्यों में भी दबिश दे रही हैं।
कई जिलों से जुड़े फर्जीवाड़े के तार
ग्वालियर (डबरा): एक ही पते से लगभग 21-21 पासपोर्ट की एप्लीकेशन प्राप्त हुईं, जिनमें से 17 पासपोर्ट बनाए गए थे।
भोपाल: गोविंदपुरा के अन्ना नगर क्षेत्र से 40 फर्जी पासपोर्ट मिले हैं।
अन्य जिले: बैतूल और छिंदवाड़ा से भी फर्जी पासपोर्ट जारी किए जाने की बात सामने आई है।
बौद्ध अनुयायी बनकर मांगते थे भिक्षा
जांच में यह भी चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि आरोपी पहचान छिपाने के लिए बौद्ध अनुयायी का चोला पहनकर भिक्षा मांगते और जीवनयापन करते थे। इसके बाद वे विभिन्न इनविटेशन और फर्जी दस्तावेजों के आधार पर मलेशिया और कंबोडिया जैसे देशों में घूमने जाते थे। राहुल कुमार लोढ़ा, डीआईजी, एसटीएफ ने बताया कि- फर्जी दस्तावेजों के आधार पर पासपोर्ट बनाए जाने का यह पूरा मामला गंभीर है। दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। हमारी टीमें असम और अन्य राज्यों में भेजी गई हैं। दस्तावेजों और गहन जांच के बाद ही इस नेटवर्क से जुड़े अन्य राज सामने आ सकेंगे।
-----------------------------------------
सागर में शराब माफियाओं पर बुलडोजर एक्शन: गरजा बुलडोजर, 5 ठिकानों पर मकान और गोदाम जमींदोज
सागर/भोपाल। मध्य प्रदेश के सागर जिले से बड़ी खबर सामने आई है। मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव द्वारा अवैध एवं जहरीली शराब के कारोबार पर ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति अपनाने के कड़े निर्देशों के बाद सागर प्रशासन एक्शन मोड में आ गया है। जिले के बंडा क्षेत्र में अवैध शराब मामले के मुख्य आरोपियों की अवैध संपत्तियों पर प्रशासन और पुलिस की संयुक्त टीम ने बड़ा ‘बुलडोजर एक्शन’ शुरू कर दिया है।
मिली जानकारी के अनुसार, पुलिस और जिला प्रशासन की भारी मौजूदगी में शराब माफियाओं के करीब 5 प्रमुख ठिकानों पर सख्त कार्रवाई की जा रही है। मुख्य आरोपियों द्वारा अवैध तरीके से निर्मित किए गए आलीशान मकानों, बाउंड्रीवॉल और गोदामों को बुलडोजर और पोकलेन मशीनों की मदद से जमींदोज किया जा रहा है।
बंडा में अवैध शराब कारोबार से जुड़े मुख्य आरोपी मनीष, चंद्रभान और आशीष की बेनामी और अवैध संपत्तियों को चिन्हित कर यह कार्रवाई की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि शासकीय जमीनों पर अतिक्रमण कर और बिना अनुमति के बनाए गए इन ठिकानों का इस्तेमाल अवैध गतिविधियों और शराब के भंडारण के लिए किया जा रहा था।
कार्रवाई के दौरान भारी पुलिस बल तैनात किया गया है ताकि कानून-व्यवस्था बनी रहे। मुख्यमंत्री के सख्त रुख के बाद सागर जिले में हुई इस बड़ी कार्रवाई से शराब माफियाओं, भू-माफियाओं और असामाजिक तत्वों में हड़कंप मच गया है।
---------------------------------------
दिग्विजय सिंह का बड़ा ऐलानः 20 अक्टूबर से उज्जैन से अयोध्या तक ‘सनातन स्वाभिमान यात्रा
भोपाल। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने सनातन और भगवान राम के मुद्दे पर बड़ा राजनीतिक ऐलान किया है। उन्होंने आगामी 20 अक्टूबर से उज्जैन से अयोध्या तक ‘सनातन स्वाभिमान यात्रा’ निकालने की घोषणा की है। इस दौरान उन्होंने विश्व हिंदू परिषद (VHP), राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर राम मंदिर निर्माण के लिए एकत्रित किए गए चंदे के दुरुपयोग का गंभीर आरोप लगाया है।
प्रेसवार्ता के दौरान दिग्विजय सिंह ने दावा किया कि जब रामशिला पूजन अभियान चलाया गया था, तब उन्होंने भी उसमें बढ़-चढ़कर योगदान दिया था। हालांकि, अब उन्होंने VHP, संघ और बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि जनता से राम मंदिर के नाम पर जो चंदा इकट्ठा किया गया था, उसका सही हिसाब नहीं दिया गया और बड़े पैमाने पर चंदे का दुरुपयोग किया गया है। इसी “चंदा चोरी” और सनातन के वास्तविक स्वरूप को सामने लाने के लिए यह यात्रा निकाली जा रही है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने राम मंदिर निर्माण के लिए चंदा देने वाले सभी रामभक्तों और आम नागरिकों से अपील की है कि वे इस ‘सनातन स्वाभिमान यात्रा’ में भारी संख्या में शामिल हों। इस यात्रा से जुड़ने और अपनी सहभागिता सुनिश्चित करने के लिए दिग्विजय सिंह ने एक विशेष क्यूआर कोड (QR Code) और आवेदन फॉर्म भी जारी किया है, जिसके जरिए लोग यात्रा में शामिल होने के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं।

प्रमुख समाचार

असम से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। यहां गोलाघाट जिले में ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉर्पोरेशन (ONGC) की पाइपलाइन से कच्चे तेल की चोरी के मामले में असम पुलिस के एक बड़े अधिकारी पर गाज गिरी है। गुरुवार को गोलाघाट जिले के सारुपथार को-जिला के पुलिस अधीक्षक (SP) दीपेन पातर को तेल चोरी के इस सनसनीखेज मामले में गिरफ्तार कर लिया गया। बता दें कि गोलाघाट के क्राइम ब्रांच एएसपी जॉन दास के नेतृत्व में पुलिस टीम ने आरोपी एसपी दीपेन पातर को उनके आवास से गिरफ्तार...

मध्य प्रदेश

नीमच में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की पटना टीम ने मध्य प्रदेश के नीमच में एक बड़ी और गोपनीय कार्रवाई को अंजाम देते हुए सेंट्रल ब्यूरो ऑफ नारकोटिक्स (CBN) के इंस्पेक्टर सिद्धार्थ श्रीवास्तव को हिरासत में ले लिया है। यह कार्रवाई गुरुवार देर रात सीबीएन परिसर स्थित सरकारी आवास (सीबीएन कॉलोनी) में की गई। इस अचानक हुई छापेमारी से नारकोटिक्स महकमे में हड़कंप मच गया है।जानकारी के अनुसार इंस्पेक्टर सिद्धार्थ श्रीवास्तव के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण...

अपराध

भोपाल। राजधानी भोपाल के कोलार थाना क्षेत्र में चोरों के हौसले इतने बुलंद हैं कि अब उन्होंने पुलिस अधिकारियों के घरों को भी निशाना बनाना शुरू कर दिया है। डीके-2 (DK 2) इलाके में स्थित ट्रैफिक एसीपी के सूने मकान का ताला तोड़कर चोर लाखों रुपए नकद और भारी मात्रा में जेवरात समेट ले गए।गुरुवार की रात लगभग 10 बजे बदमाशों ने ट्रैफिक एसीपी विजय दुबे के आवास को निशाना बनाया। चोर घर का ताला तोड़कर अंदर घुसे और अलमारी में रखे 20 लाख रुपए नकद के साथ-साथ...
More inअपराध  

गुना सिटी

गुना।(गरिमा टीवी न्यूज़) गुना मे अपने पिता को खुश करने 17 साल का नाबालिग बेटा फर्जी शिक्षा अधिकारी बन गया। पिता को झूठा भरोसा दिलाने बेटा स्वयं ही फर्जी आई-कार्ड बनाकर निजी स्कूल का औचक निरीक्षण करने पहुंच गया।हैरानी की बात यह कि वह अपने पिता को भी साथ लेकर गया, ताकि बता सके कि उसकी शिक्षा विभाग में नौकरी लग गई है। कोतवाली पुलिस ने मामले की पड़ताल कर फर्जीवाड़े का राजफाश कर दिया है और नाबालिग किशोर का कोई पुराना आपराधिक रिकॉर्ड न होने से नोटिस थमाया है।पूरा मामला...

फोटो गैलरी

35,10,0,50,1
25,600,60,1,300,200,25,800
90,150,1,50,12,30,50,1,70,12,1,50,1,1,1,5000
0,2,1,0,2,40,15,5,2,1,0,20,0,1
गरिमा के जन्म के 15 मिनिट बाद का फोटो
गरिमा के जन्म के 15 मिनिट बाद का फोटो
गरिमा के 1 वर्ष बाद का फोटो
गरिमा के 1 वर्ष बाद का फोटो
गरिमा के 2 वर्ष बाद का फोटो
गरिमा के 2 वर्ष बाद का फोटो
बीमार होने के बाद भोपाल अस्पताल मे भर्ती गरिमा
बीमार होने के बाद भोपाल अस्पताल मे भर्ती गरिमा
हाई कोर्ट के आदेश के बाद गरिमा के शव को जमीन से निकालते हुऐ
हाई कोर्ट के आदेश के बाद गरिमा के शव को जमीन से निकालते हुऐ
निकालने के बाद गरिमा के शव को पैक कर जॉच के लिऐ भेजा गया
निकालने के बाद गरिमा के शव को पैक कर जॉच के लिऐ भेजा गया
दोषी डॉक्टर के खिलाफ मामला कायम कराने के लिऐ पुलिस अधिक्षक से मिले पत्रकार
दोषी डॉक्टर के खिलाफ मामला कायम कराने के लिऐ पुलिस अधिक्षक से मिले पत्रकार
गरिमा के शव की जॉच होने के बाद पुनः उसी स्थान पर चबूतरा का निर्माण किया गया
गरिमा के शव की जॉच होने के बाद पुनः उसी स्थान पर चबूतरा का निर्माण किया गया
पूजा स्थल मे गरिमा
पूजा स्थल मे गरिमा
© 2017 Your Company. All Rights Reserved. Designed By WarpTheme