This website uses cookies to ensure you get the best experience on our website.

ADD-n.jpg

 

 

 

दिल्ली। फरवरी 2020 के दिल्ली दंगों के दौरान आईबी अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में कड़कड़डूमा कोर्ट ने पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन समेत पांच दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। सजा सुनाते समय अदालत ने कहा कि यह बेहद गंभीर और समाज को झकझोर देने वाला अपराध था। कोर्ट ने टिप्पणी की कि अंकित शर्मा की बर्बर तरीके से हत्या की गई और उनके शव को जानवरों की तरह छोड़ दिया गया।
कोर्ट ने कहा कि हत्या को जिस तरह अंजाम दिया गया, वह बेहद क्रूर था। अदालत के मुताबिक, हमलावरों ने अंकित शर्मा की मौत के बाद भी उनके शव को घसीटकर चांद बाग इलाके तक ले जाकर नाले में फेंक दिया। जज ने कहा कि इस घटना ने पूरे समाज को सोचने पर मजबूर कर दिया था।
कड़कड़डूमा कोर्ट ने 13 जुलाई 2026 को ताहिर हुसैन, नजीम, कासिम, अनस और जावेद को दोषी ठहराया था। इसके बाद शुक्रवार, 31 जुलाई को सभी को उम्रकैद की सजा सुनाई गई।
दिल्ली पुलिस और पीड़ित परिवार ने अदालत से सभी दोषियों को मौत की सजा देने की मांग की थी। पुलिस ने इस मामले को 'रेयरेस्ट ऑफ रेयर' यानी बेहद दुर्लभ और गंभीर अपराध बताया था। पुलिस के अनुसार, अंकित शर्मा के शरीर पर कुल 51 चोटों के निशान थे, जिनमें सात घाव जानलेवा थे। इनमें से 16 घाव धारदार हथियार से किए गए थे। पुलिस ने यह भी कहा था कि मौत के बाद भी अंकित शर्मा के शव के साथ अमानवीय व्यवहार किया गया।
ताहिर हुसैन के वकील ने अदालत में मौत की सजा की मांग का विरोध किया था। उनका कहना था कि ताहिर हुसैन ने खुद पुलिस को फोन किया था। बचाव पक्ष ने दलील दी थी कि केवल शरीर पर लगे घावों की संख्या के आधार पर किसी आरोपी को मौत की सजा नहीं दी जा सकती।
फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए सांप्रदायिक दंगों के दौरान आईबी अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या कर दी गई थी। बाद में उनका शव चांद बाग इलाके के एक नाले से बरामद हुआ था। इस मामले में दिल्ली पुलिस ने ताहिर हुसैन समेत कई लोगों के खिलाफ हत्या और साजिश का मामला दर्ज किया था।
--------------------------------------
राम मंदिर दान चोरी को लेकर संसद परिसर में विपक्ष का प्रदर्शन, भगवा कपड़े पहनकर पहुंचे पप्पू यादव, स्पीकर ने दी कड़ी चेतावनी
विपक्ष के सांसदों ने आज संसद परिसर में दो तरह के प्रदर्शन किये, पिछले दो तीन दिनों से राम मंदिर दान चोरी मुद्दे पर संसद भवन परिसर में प्रदर्शन कर रही समाजवादी पार्टी को आज कांग्रेस सहित अन्य विपक्षी दलों के सांसदों का साथ भी मिला वहीं कांग्रेस ने “अमित शाह संसद से गायब क्यों? बैनर के साथ प्रदर्शन किया उन्हें भी अन्य विपक्षी दलों का साथ मिला लेकिन इस दौरान ऐसा कुछ हुआ जिसे लेकर लोकसभा की कार्यवाही के दौरान स्पीकर ओम बिरला ने नाराजगी जताई और सांसदों को चेतावनी भी दी।
संसद भवन के परिसर में आज कांग्रेस सांसद आज एक बड़ा सा बैनर लेकर आये, उनके हाथ में कुछ नारे लिखीं तख्तियां भी थीं, कल जब कांग्रेस ने प्रदर्शन किया था तो उसके बैनर पर लिखा था आर्डर किसने दिया ? और आज जब फिर प्रदर्शन किया तो उसपर लिखा था अमित शाह संसद से गायब क्यों? उनके इस प्रदर्शन को अन्य विपक्षी सांसदों का भी साथ मिला और सभी ने मिलकर नारेबाजी की और गृह मंत्री अमित शाह का इस्तीफा माँगा।
संसद परिसर में समाजवादी पार्टी ने भी राम मंदिर दान चोरी मामले पर अपना प्रदर्शन आज भी जारी रखा, सांसदों के हाथ में एक दान पात्र था जिसमें वे दान मांग रहे थे, और भाजपा के विरोध में चंदा चोर जैसे नारे लगा रहे थे, इस प्रदर्शन की ख़ास बात ये रही कि निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने इसमें एक साधू का वेश धारण किया और भगवा वस्त्र पहनकर गले में रुद्राक्ष की माला डालकर प्रदर्शन किया।
पप्पू यादव के इस व्यवहार पर भाजपा सांसदों ने आपत्ति जताई और इसे स्पीकर ओम बिरला के संज्ञान में लाया, ओम बिरला ने कहा मैंने पहले भी कहा था कि सदन के अन्दर तख्तियां लेकर आना, बैनर लेकर आना संसद की परम्पराओं और मर्यादाओं के अनुरूप नहीं है और कुछ सदस्य तो वेश बदलकर संसद में वस्त्र पहनकर जिस तरह से आते हैं मेरी उन सांसदों को चेतावनी है संसद या संसद परिसर में ऐसा ना करें आपको जनता ने चुना है आप उसकी पवित्रता बनाये रखें।
उधर आज लोकसभा की कार्यवाही शुरू होते ही कांग्रेस सहित पूरे विपक्ष ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की गैर मौजूदगी पर सवाल उठाये और उनके सदन में आकर बयान देने की मांग की, कांग्रेस ने कहा छात्रों पर दिल्ली पुलिस ने बर्बरता की और उसकी जिम्मेदारी लेने की जगह गृह मंत्री अमित शाह सदन से ही गायब है, आखिर वे बताएं कि लाठीचार्ज करने का, गोली चलाने का आदेश किसने दिया क्योंकि दिल्ली पुलिस तो उनके ही अधीन आती है। आखिर वो बयान देने से बच क्यों रहे हैं ?
------------------------------------------
‘अमित शाह इस्तीफा दें’, राहुल गांधी के बाद अभिजीत दीपके ने भी मांगा गृह मंत्री का इस्तीफा, पुलिस पर लगाए कई आरोप
पेपर लीक के बाद कॉकरोच जनता पार्टी का आंदोलन और फिर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद भी ममाला शांत नहीं हो रहा है। सीजेपी के प्रोटेस्ट में पुलिस कार्रवाई और पैलेट गन के इस्तेमाल के दावे के बीच अब गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे की मांग भी शुरू हो गई है। सीजेपी के फाउंडर अभिजीत दिपके ने अमित शाह का इस्तीफा मांगा है। राहुल गांधी की मांग का समर्थन करते हुए अभिजीत दीपके ने कहा कि अमित शाह को निश्चित रूप से इस्तीफा दे देना चाहिए।
सीजेपी चीफ ने आरोप लगाया कि 20 जुलाई को ‘संसद चलो’ मार्च के दौरान छात्रों के खिलाफ बल प्रयोग का आदेश केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने दिया होगा। दीपके ने कहा कि देश में लोकतंत्र खतरे में है। साथ ही न्यायपालिका और दिल्ली पुलिस समेत कई संस्थानों पर सवाल उठाए।
दरअसल ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के संस्थापक अभिजीत दिपके अपने गृह नगर छत्रपति संभाजीनगर पहुंच गए हैं। घर वापसी के बाद मीडिया से बात करते हुए दिपके ने केंद्र सरकार और गृह मंत्री अमित शाह पर जमकर निशाना साधा। राहुल गांधी की मांग का समर्थन करते हुए दिपके ने कहा कि 20 जुलाई को ‘संसद चलो’ मार्च के दौरान छात्रों के खिलाफ पुलिस बल का प्रयोग करने का आदेश गृह मंत्री अमित शाह की ओर से ही आया होगा। लिहाजा उन्हें तुरंत इस्तीफा देना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर सरकार कहती है कि आंदोलन को बाहर से फंडिंग मिल रही थी, तो यह अमित शाह का ही विफलता है. फिर वे किस बात के ‘चाणक्य’ हैं?
अभिजीत दीपके ने कहा, ‘लोकतंत्र को बचाना अब केवल विपक्ष का मुद्दा नहीं है। इसे बचाने के लिए देश की जनता को एकजुट होना होगा। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका पर भी सवालिया निशान लगा हुआ है। हम सबने देखा है कि शिवसेना और एनसीपी जैसी पार्टियों को तोड़ने के लिए ईडी और सीबीआई का इस्तेमाल कैसे किया गया। देश की बड़ी संस्थाओं का कर्तव्य था कि वे लोकतंत्र को जीवित रखें, न कि किसी एक व्यक्ति की तानाशाही को बढ़ावा दें। उन्होंने ऐसा होने दिया। इसे रोकने के लिए न केवल विपक्ष, बल्कि जनता को भी एकजुट होना होगा।
दिपके ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद प्रल्हाद जोशी को नया शिक्षा मंत्री बनाए जाने पर कड़ी आपत्ति जताई और उन्हें ‘अजीब इंसान’ करार दिया। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि अगर देश का शिक्षा मंत्री बलात्कारियों की प्रशंसा करता है, तो इसका मतलब है कि धर्मेंद्र प्रधान को हटाने के बाद एक और अजीब आदमी को लाया गया है। देश को क्या संदेश दिया जा रहा है? वे कुछ और नहीं कर सकते क्योंकि उनकी पार्टी गुंडों से भरी पड़ी है।राम रहीम जैसे लोग उनके कार्यकाल में पैरोल पर छूट जाते हैं।

जबलपुर। मध्य प्रदेश में अब पुलिसकर्मी भी लव जिहाद का शिकार हो रही हैं। जबलपुर में एक महिला आरक्षक को मुस्लिम युवक ने हिंदू बनकर प्रेम जाल में फंसाकर संबंध बनाया। युवक पर जबरन रोजा रखवा कर गौमांस खिलाने का भी आरोप है। पीड़िता 5 महीने की गर्भवती हो गई, जिसके बाद उसने गर्भ में बच्चा लेकर एसपी ऑफिस पहुंची।
पीड़िता ने बताया कि शोहराब शेख ने अपना नाम सौरभ सिंह और गोलू बताकर उससे दोस्ती की थी। शादी का झांसा देकर 1 साल तक शारीरिक संबंध बनाया। शादी करने की बात पर आरोपी पीछा छुड़वाने की कोशिश कर रहा। महिला का आरोप है कि आरोपी का परिवार भी दे रहा धमकी
महिला का सनसनीखेज आरोप है कि कोर्ट में वह शोहराब बनकर घूमता रहा और जबरन उसका धर्म परिवर्तन। महिला से जबरदस्ती 40 दिन का रोजा रखवाया था। झांसे में लेकर गौ मांस खिलवाया था। इंस्टाग्राम आईडी से मामले का खुलासा हुआ। पीड़िता ने बताया कि कोर्ट में ड्यूटी के दौरान महिला पुलिसकर्मी की आरोपी से मुलाकात हुई थी।

---------------------------------------
‘महिलाओं के लिए कोई आश्रम पूरी तरह सुरक्षित नहीं’, उज्जैन में हर्षा रिछारिया का बड़ा बयान
उज्जैन। उज्जैन पहुंचीं मॉडल-इंफ्लुएंसर से साध्वी बनीं हर्षा रिछारिया उर्फ स्वामी हर्षानंद गिरि ने आश्रमों में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर बड़ा सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में महिलाओं के लिए कोई भी आश्रम पूरी तरह सुरक्षित नहीं कहा जा सकता। उन्होंने यह भी कहा कि जो संत बेटी मानकर सुरक्षा की जिम्मेदारी ले उसी आश्रम में रहूंगी।
दरअसल, हर्षा रिछारिया उर्फ स्वामी हर्षानंद गिरि गुरु पूर्णिमा के अवसर पर उज्जैन पहुंचीं थी। जहां उन्होंने अपने गुरु महामंडलेश्वर सुमनानंद गिरि महाराज का आशीर्वाद लिया। मीडिया से बातचीत में साध्वी हर्षानंद ने कहा कि यदि कोई संत यह भरोसा दिलाए कि “हर्षानंद मेरी बेटी के समान है और मैं जीवनभर उसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी लेता हूं”, तो वह सहर्ष उसी आश्रम को अपना स्थायी ठिकाना बनाने को तैयार है।
संन्यास लेने के बाद भी माता-पिता के घर रहने और सोशल मीडिया पर सक्रिय रहने को लेकर उठ रहे सवालों पर उन्होंने कहा कि कुछ संत इस पर आपत्ति जताते हैं, लेकिन उनके पास बड़े-बड़े आश्रम हैं, जबकि मेरे पास केवल दो ही स्थान हैं-गुरु का आश्रम और माता-पिता का घर। उन्होंने कहा कि जब तक उनका अपना कोई सुरक्षित ठिकाना नहीं होगा, तब तक माता-पिता के साथ रहना ही सबसे उचित है।
महिलाओं की सुरक्षा पर उन्होंने कहा कि देश में लड़कियां कितनी सुरक्षित हैं, यह सभी जानते हैं। ऐसे में जब तक कोई संत सार्वजनिक रूप से उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं होता, तब तक वे किसी आश्रम में स्थायी रूप से नहीं रहेंगी। पार्लर जाने को लेकर हो रही आलोचना पर भी उन्होंने जवाब दिया। उन्होंने कहा कि जो साधु-संत इस पर सवाल उठाते हैं, वे स्वयं आश्रमों में पार्लर बुलाकर मेनिक्योर और पेडिक्योर जैसी सेवाएं लेते हैं। उन्होंने कहा कि वे ऐसा नहीं करतीं। उनका मानना है कि जब माता लक्ष्मी और भगवान नारायण सौंदर्य और स्वच्छता के प्रतीक हैं, तो उनकी भक्ति करने वाला व्यक्ति भी सुसज्जित और व्यवस्थित रह सकता है। यह केवल सोच का अंतर है।
गौरतलब है कि मॉडल और सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर से साध्वी बनीं हर्षानंद गिरि इससे पहले भी अपने बयानों को लेकर चर्चा में रही हैं। प्रयागराज महाकुंभ के बाद उज्जैन में संन्यास लेने के बाद उन्होंने लक्ष्मीपुरा में सात दिवसीय देवी प्रवचन किए थे। कार्यक्रम के समापन पर उन्होंने कुछ संतों पर उनका प्रवचन रोकने और समय कम करने का प्रयास करने का आरोप लगाया था।
--------------------------------------------
धर्मनगरी चित्रकूट में तालिबानी सजा: मोबाइल चोरी के शक में युवक को खंभे से बांधकर पीटा
सतना। पवित्र धर्मनगरी चित्रकूट में कानून-व्यवस्था को खुली चुनौती देने वाला एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहां मोबाइल चोरी के संदेह में एक युवक को बिजली के पोल से बांधकर (तालिबानी सजा) बर्बरतापूर्वक पीटा गया। सरेराह घटी इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हो रहा है, जिसने क्षेत्र में हड़कंप मचा दिया है।
घटना चित्रकूट थाना क्षेत्र अंतर्गत अशोक होटल के सामने की बताई जा रही है। वायरल वीडियो (जो बीती रात का बताया जा रहा है) में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है कि एक युवक बिजली के खंभे से बंधा हुआ है और एक महिला तथा उसके कुछ साथी मिलकर उसे बेदर्दी से पीट रहे हैं। सड़क के बीचों-बीच इस तरह तालिबानी अंदाज में कानून हाथ में लेकर की गई मारपीट ने स्थानीय पुलिस और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
हालाँकि पुलिस अधिकारियों ने अभी तक इस वायरल वीडियो की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है, लेकिन मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस टीम वीडियो में दिख रहे घटनास्थल पर पहुँचकर स्थानीय स्तर पर जांच-पड़ताल में जुट गई है। प्रशासन का कहना है कि वीडियो की सत्यता की जांच की जा रही है। यदि घटना की पुष्टि होती है, तो गैर-कानूनी तरीके से युवक को बंधक बनाकर हिंसा करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

इंदौर। हीरानगर थाना क्षेत्र में सामने आए चर्चित नकली प्लास्टर कांड की जांच तेज हो गई है। वायरल वीडियो के बाद शुरू हुई विभागीय जांच में अब तक थाना प्रभारी (टीआई), एसीपी और संबंधित डॉक्टर के बयान दर्ज किए जा चुके हैं। जांच में सबसे अहम तथ्य डॉक्टर के बयान के रूप में सामने आया है। सूत्रों के अनुसार डॉक्टर ने अपने बयान में स्पष्ट किया है कि उन्होंने दोनों आरोपियों के हाथ-पैर में किसी प्रकार का प्लास्टर नहीं लगाया था। इस बयान के बाद पुलिस की कार्रवाई और वायरल वीडियो को लेकर कई नए सवाल खड़े हो गए हैं।
जानकारी के अनुसार मामले में गिरफ्तार किए गए आरोपी मयंक और शोभित का हाथ-पैर पर पट्टियां और कथित प्लास्टर बांधकर पुलिस ने सार्वजनिक जुलूस निकाला था। बाद में सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें दोनों आरोपी जेल परिसर पहुंचने से पहले अपने हाथ-पैर की पट्टियां उतारकर झाड़ियों में फेंकते दिखाई दे रहे हैं। वीडियो वायरल होने के बाद पूरे घटनाक्रम की जांच एडीसीपी ओमप्रकाश को सौंपी गई है।
सूत्रों के मुताबिक जांच में यह भी सामने आया है कि दोनों आरोपियों के खिलाफ पुलिस ने केवल दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 151 के तहत प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की थी। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि जब आरोपियों पर गंभीर अपराध दर्ज नहीं था और उन्हें कोई गंभीर चोट भी नहीं थी, तो फिर उनके हाथ-पैर पर प्लास्टर जैसी पट्टियां बांधकर सार्वजनिक जुलूस निकालने की आवश्यकता क्यों पड़ी।
जांच से जुड़े सूत्रों का दावा है कि दोनों आरोपियों को ऐसी कोई चोट नहीं थी, जिसके लिए प्लास्टर की जरूरत हो। डॉक्टर के बयान के बाद इस पहलू को और बल मिला है। हालांकि, जांच पूरी होने तक पुलिस अधिकारियों की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की गई है। पुलिस महकमे में यह चर्चा भी है कि शहर के कुछ थानों में आरोपियों के हाथ-पैर पर प्लास्टर जैसी पट्टियां बांधने का काम खुफिया शाखा के कुछ कर्मचारियों के माध्यम से कराया जाता रहा है। हालांकि, इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और जांच एजेंसी इसी पहलू की भी पड़ताल कर रही है।
सूत्रों का कहना है कि यदि जांच में यह साबित होता है कि बिना चिकित्सकीय आवश्यकता के आरोपियों पर फर्जी प्लास्टर चढ़ाकर जुलूस निकाला गया, तो संबंधित पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई तय मानी जा रही है।
------------------------------------------
रिटायरमेंट से 24 घंटे पहले ‘आखिरी रिश्वत’ ले रहा था इंजीनियर, लोकायुक्त ने रंगे हाथों दबोचा
ग्वालियर ग्वालियर के नगर निगम के दफ्तर में गुरुवार को सुबह उस समय हड़कंप मच गया जब एक बड़े अधिकारी को लोकायुक्त ने रिश्वत के रुपयों के साथ पकड़ लिया। यह अधिकारी अगले दिन शुक्रवार को यानी 31 जुलाई 2026 को ही सेवानिवृत्त होने वाले थे। यह रिश्वत उनकी आखिरी साबित हुई।
ग्वालियर नगर निगम में गुरुवार को सुबह से ही हलचल थी। यहां जलकार्य विभाग कार्यपालन यंत्री सुशील कटारे अपने दफ्तर में थे। बताया जा रहा है कि इसी विभाग से पूर्व में सेवानिवृत्त हुए प्रेम पचौरी के बेटा सचिन पचौरी नगर निगम में कांट्रेक्ट लेता है। ठेकेदार सचिन पचौरी का 36 लाख रुपए का पेमेंट लंबे समय से अटका हुआ था। उसे निकालने के लिए सुशील कटारे एक प्रतिशत के हिसाब से कमीशन मांग रहे थे। वे 30 हजार रुपए ले चुके थे, लेकिन गुरुवार को सुबह 6 हजार रुपए लेना बाकी था। नगर निगम के पूर्व अधिकारी प्रेम पचौरी और सुशील कटारे के बीच पहले भी मतभेद रह चुके हैं। इसके बाद प्रेम पचौरी के बेटे सचिन ने गुरुवार को उनके कक्ष में जैसे ही सुशील कटारे के हाथ में 6 हजार रुपए दिए, नगर निगम दफ्तर में पहले से मौजूद लोकायुक्त टीम ने इशारा पाते ही कटारे को दबोच लिया। कटारे के जेब से लोकायुक्त के निशान लगे हुए नोट निकलवाए गए और हाथ धुलवाए गए तो वो रिश्वत के पैसों से रंगे हुए मिले।
नगर निगम के कार्यपालन यंत्री सुशील कटारे एक दिन बाद यानी 31 जुलाई 2026 को अपने विभाग से रिटायर होने वाले थे। कल उनके रिटायरमेंट के अवसर पर विदाई पार्टी भी होने वाली थी। लेकिन, उससे 24 घंटे पहले सुशील कटारे अंतिम रिश्वत ले रहे थे और पकड़ा गए। खास बात यह भी है कि हाल ही में असिस्टेंट इंजीनियर (AE) से सुशील कटारे का प्रमोशन हुआ है और वे एक्जीक्यूटिव इंजीनियर (EE) बनाए गए थे।
-------------------------------------
Datia Assembly By-Election: 5 बजे तक 69.36 फीसदी मतदान, भाजपा पर फर्जी वोटिंग के आरोप, दो गुटों में विवाद
दतिया। मध्य प्रदेश के दतिया विधानसभा में उपचुनाव के लिए वोटिंग शाम तक जारी रही। मतदान करने वालों ने ढाई साल के बाद दोबारा वोट देने का मौका नहीं छोड़ा और बढ़ चढ़कर वोट डाले। शाम 5 बजे तक 69.36 फीसदी मतदान दर्ज हुआ।
जिगना थाना क्षेत्र के मतदान केंद्र के बाहर जमकर हंगामा हो गया। बाहरी लोगों के पहुंचने पर दो गुटों में विवाद हो गया। कांग्रेस ने भाजपा पर फर्जी वोटिंग करने के आरोप लगाते हुए निर्वाचन अधिकारियों से शिकायत की। विवाद से जुड़ा एक वीडियो भी सामने आया है।
कुल 01 लाख 76 हजार 759 मतदाताओं ने अपने मताधिकार का उपयोग किया था। 1 लाख 74 हजार 661 सामान्य मतदाताओं ने वोट डाले।। 2 हजार 98 पोस्टल वोट डले थे।
राजेंद्र भारती को कुल 88 हजार 977 वोट मिले थे।
कांग्रेस का वोट शेयर 50.34 प्रतिशत रहा था।
नरोत्तम मिश्रा को 81 हजार 235 वोट मिले थे।
बीजेपी का वोट शेयर 45.96 प्रतिशत रहा था।
दतिया में बढ़ता रहा मतदान प्रतिशत
2023 – 79.04 प्रतिशत
2018 – 77.35 प्रतिशत
2013 – 75.59 प्रतिशत
2008 – 73.66 प्रतिशत
2023 में पोस्टल मिलाकर 80.02 फीसदी मतदान हुआ था।

जामनगर। गुजराज के जामनगर में बॉलीवुड थ्रिलर फ़िल्म ‘दृश्यम’ की कहानी जैसा मामला सामने आया है. एक महिला और उसके कथित प्रेमी ने पति की हत्या करने के बाद उसकी लाश को चुपके से फैक्ट्री के फ़र्श के नीचे दफना दिया. लगभग दो साल तक परिवार को यह यकीन दिलाने का आरोप है कि वह काम के सिलसिले में ऑस्ट्रेलिया चला गया है।
रिपोर्ट के अनुसार, यह मामला तब सामने आया जब जिग्नेश मावड़िया के रिश्तेदारों को शक हुआ, क्योंकि ऑस्ट्रेलिया जाने वाले परिवार के एक सदस्य को वहाँ उसका कोई सुराग नहीं मिला। इसके बाद जिग्नेश के भाई ने पुलिस से संपर्क किया और उसके लापता होने की जाँच शुरू हुई। जाँचकर्ताओं को शक है कि जिग्नेश की पत्नी पृथ्वी और उसके कथित साथी नीलेश ने हत्या की साज़िश रची और फिर अपराध के सभी सबूत मिटाने की कोशिश की।
पुलिस का आरोप है कि दोनों ने जिग्नेश की शराब में साइनाइड मिलाकर उसे ज़हर दिया। उन पर लाश को जामनगर के डेरेड GIDC इलाके में एक इंडस्ट्रियल यूनिट में ले जाने का भी आरोप है, जहाँ पकड़े जाने से बचने के लिए उसे फैक्ट्री के फ़र्श के नीचे लगभग 12 फ़ीट गहरे दफ़ना दिया गया था।
जाँचकर्ताओं का दावा है कि जिग्नेश के परिवार को बार-बार बताया गया कि वह नौकरी के लिए ऑस्ट्रेलिया चला गया है। पुलिस के अनुसार, इस बात की वजह से लगभग दो साल तक किसी को शक नहीं हुआ। यह कथित झूठ तब खुलने लगा जब ऑस्ट्रेलिया जाने की तैयारी कर रहे एक रिश्तेदार ने वहाँ जिग्नेश की कॉन्टैक्ट डिटेल्स मांगीं। जब उसका कोई पता नहीं चला, तो परिवार ने पुलिस को सूचना दी।
आरोपियों से पूछताछ के बाद, पुलिस ने कथित तौर पर उस जगह का पता लगाया जहाँ लाश दफ़नाई गई थी और फैक्ट्री परिसर में खुदाई की। फर्श के नीचे से कंकाल मिला है और पहचान पक्की करने के लिए उसे DNA जाँच के लिए भेजा गया है। पुलिस ने कहा कि फ़ोरेंसिक पुष्टि के बाद हत्या और सबूत मिटाने समेत संबंधित धाराओं के तहत औपचारिक रूप से मामला दर्ज किया जाएगा।
----------------------------------
CJP आंदोलन पर बनेगी फिल्म : 'The Accidental Cockroach Party' टाइटल हुआ रजिस्टर
NEET पेपर लीक विवाद और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के आंदोलन पर अब फीचर फिल्म बनने जा रही है। फिल्म का नाम 'The Accidental Cockroach Party' आधिकारिक तौर पर रजिस्टर कराया गया है।
जानकारी के अनुसार, जयपुर के रहने वाले गोविंद देव 'ब्रह्म' लंबे समय से इस विषय पर रिसर्च और स्क्रिप्ट तैयार कर रहे थे। अब उन्होंने इस प्रोजेक्ट का औपचारिक ऐलान कर दिया है।
फिल्म से जुड़े लोगों का दावा है कि यह सिर्फ राजनीतिक घटनाओं पर आधारित कहानी नहीं होगी। इसमें आंदोलन की तैयारी, उसके पीछे की रणनीति और कई ऐसे पहलुओं को दिखाया जाएगा, जो अब तक सार्वजनिक नहीं हुए हैं।
यह फिल्म बड़े स्तर पर बनाई जाएगी। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, इसका बजट 20 करोड़ रुपये से अधिक रखा गया है। फिलहाल स्क्रिप्ट को अंतिम रूप देने के साथ-साथ शूटिंग लोकेशन तय करने का काम चल रहा है।
फिल्म की स्टार कास्ट, निर्देशक और सह-निर्माताओं के चयन के लिए मुंबई में कई फिल्म निर्माताओं से बातचीत अंतिम चरण में बताई जा रही है। हालांकि, अभी किसी कलाकार या निर्देशक के नाम की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
यदि सभी तैयारियां तय योजना के अनुसार पूरी होती हैं, तो 'The Accidental Cockroach Party' को साल 2027 में सिनेमाघरों में रिलीज करने की योजना है।
---------------------------------------
वंदे मातरम् के अपमान पर अब होगी जेल, संसद से बिल पास, तीन साल तक की सजा का रास्ता साफ
नई दिल्ली. संसद ने राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम्' के सम्मान को कानूनी संरक्षण देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए राष्ट्रीय सम्मान अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026 को मंजूरी दे दी है. गुरुवार को लोकसभा ने हंगामे के बीच ध्वनिमत से इस विधेयक को पारित कर दिया. इससे एक दिन पहले राज्यसभा भी इस विधेयक को मंजूरी दे चुकी थी. अब राष्ट्रपति की स्वीकृति मिलने के बाद यह विधेयक कानून का रूप ले लेगा और इसके लागू होने के साथ ही वंदे मातरम् का अपमान, उसके गायन में जानबूझकर बाधा डालना या व्यवधान उत्पन्न करना दंडनीय अपराध माना जाएगा.
लोकसभा में यह विधेयक ऐसे समय पारित हुआ जब विपक्ष लगातार नीट पेपर लीक मामले को लेकर चर्चा की मांग करते हुए सदन में विरोध प्रदर्शन कर रहा था. विपक्षी सदस्यों के शोर-शराबे के बीच सरकार ने विधायी कार्यवाही जारी रखी और संक्षिप्त चर्चा के बाद ध्वनिमत से विधेयक पारित करा लिया. सदन में लगातार व्यवधान के बावजूद सरकार ने इसे राष्ट्रीय सम्मान से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय बताते हुए आगे बढ़ाया.
यह संशोधन राष्ट्रीय सम्मान अपमान निवारण अधिनियम, 1971 में किया गया है. वर्तमान कानून के तहत संविधान, राष्ट्रीय ध्वज और राष्ट्रगान का अपमान दंडनीय अपराध है, लेकिन राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम्' इस कानून के दायरे में शामिल नहीं था. संशोधन के बाद राष्ट्रीय गीत को भी समान कानूनी संरक्षण प्राप्त होगा.
नए प्रावधान के अनुसार यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर वंदे मातरम् का अपमान करता है, उसके गायन में बाधा डालता है या किसी प्रकार का व्यवधान उत्पन्न करता है, तो उसके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की जाएगी. दोष सिद्ध होने पर उसे अधिकतम तीन वर्ष तक का कारावास, जुर्माना या दोनों की सजा हो सकती है. यह वही दंड होगा जो वर्तमान में राष्ट्रगान और राष्ट्रीय ध्वज के अपमान के मामलों में लागू है.
सरकार का कहना है कि यह संशोधन केवल दंडात्मक प्रावधान जोड़ने के लिए नहीं बल्कि स्वतंत्रता संग्राम की विरासत और राष्ट्रीय अस्मिता के प्रतीक रहे 'वंदे मातरम्' के सम्मान को कानूनी सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से लाया गया है. केंद्र सरकार लंबे समय से राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान को लेकर विभिन्न स्तरों पर पहल करती रही है और इसी क्रम में यह विधेयक संसद में प्रस्तुत किया गया.
गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने राज्यसभा में विधेयक पर चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि 'वंदे मातरम्' केवल एक गीत नहीं बल्कि भारत की स्वतंत्रता की चेतना, सांस्कृतिक पहचान और राष्ट्रीय स्वाभिमान का प्रतीक है. उन्होंने कहा कि आजादी की लड़ाई के दौरान इस गीत ने करोड़ों भारतीयों में देशभक्ति की भावना जगाई थी और इसलिए इसका सम्मान सुनिश्चित करना देश की जिम्मेदारी है. मंत्री ने कहा कि सरकार राष्ट्रीय विरासत और राष्ट्रीय प्रतीकों की गरिमा बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है.
विधेयक पर चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष के सदस्यों ने इसे ऐतिहासिक और आवश्यक कदम बताया. उनका कहना था कि जिस प्रकार राष्ट्रध्वज और राष्ट्रगान को कानूनी संरक्षण प्राप्त है, उसी प्रकार राष्ट्रीय गीत को भी समान दर्जा और सुरक्षा मिलनी चाहिए. उनका तर्क था कि राष्ट्रीय सम्मान से जुड़े मामलों में किसी प्रकार की लापरवाही या अपमान को स्वीकार नहीं किया जा सकता.
हालांकि विपक्ष के कुछ सदस्यों ने विधेयक पर व्यापक चर्चा और सर्वसम्मति की आवश्यकता पर जोर दिया. विपक्षी दलों का कहना था कि राष्ट्रीय महत्व के ऐसे विषयों पर सभी पक्षों को पर्याप्त समय देकर विचार-विमर्श कराया जाना चाहिए. राज्यसभा में चर्चा के दौरान कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलों के सदस्यों ने विरोध जताते हुए सदन से वॉकआउट भी किया था. इसके बावजूद सरकार ने बहुमत के आधार पर विधेयक पारित करा लिया.
यह विधेयक 24 जुलाई 2026 को राज्यसभा में प्रस्तुत किया गया था. विस्तृत चर्चा के बाद 29 जुलाई को इसे उच्च सदन से मंजूरी मिली और 30 जुलाई को लोकसभा ने भी इसे पारित कर दिया. संसद के दोनों सदनों से पारित होने के बाद अब केवल राष्ट्रपति की स्वीकृति शेष है. स्वीकृति मिलने के बाद संशोधित कानून पूरे देश में लागू हो जाएगा.
सरकार ने इस विधेयक को 'वंदे मातरम्' की 150वीं वर्षगांठ के अवसर पर राष्ट्रीय सम्मान से जुड़े विशेष प्रयासों का हिस्सा बताया है. 'वंदे मातरम्' की रचना बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय ने वर्ष 1875 में की थी और इसे वर्ष 1882 में प्रकाशित उनके प्रसिद्ध उपन्यास 'आनंदमठ' में शामिल किया गया था. स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान यह गीत देशभक्ति और राष्ट्रीय जागरण का प्रमुख प्रतीक बनकर उभरा तथा अनेक आंदोलनों और सभाओं में इसे पूरे सम्मान के साथ गाया जाता रहा.
हाल के महीनों में केंद्र सरकार ने राज्यों को भी निर्देश दिए हैं कि सरकारी कार्यक्रमों और महत्वपूर्ण आयोजनों में राष्ट्रीय गीत का सम्मानपूर्वक गायन सुनिश्चित किया जाए. सरकार का मानना है कि इससे नई पीढ़ी में राष्ट्रभक्ति और राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति सम्मान की भावना मजबूत होगी.
विधेयक ऐसे समय पारित हुआ है जब संसद का मानसून सत्र लगातार राजनीतिक टकराव का केंद्र बना हुआ है. नीट पेपर लीक मामले को लेकर विपक्ष के विरोध के कारण पिछले कई दिनों से दोनों सदनों की कार्यवाही बार-बार बाधित होती रही है. इसके बावजूद सरकार ने अपने विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाते हुए इस महत्वपूर्ण संशोधन को संसद से पारित करा लिया.
राष्ट्रीय सम्मान से जुड़े इस संशोधन को सरकार एक ऐतिहासिक पहल बता रही है, जबकि विपक्ष व्यापक सहमति और विस्तृत चर्चा की आवश्यकता पर जोर दे रहा है. अब देशभर की निगाहें राष्ट्रपति की स्वीकृति पर टिकी हैं. स्वीकृति मिलने के बाद 'वंदे मातरम्' का अपमान भी राष्ट्रीय ध्वज और राष्ट्रगान की तरह कानूनन दंडनीय अपराध होगा और दोषी पाए जाने पर संबंधित व्यक्ति को तीन वर्ष तक के कारावास, जुर्माना या दोनों का सामना करना पड़ सकता है. संसद से विधेयक पारित होने के साथ ही राष्ट्रीय गीत को कानूनी संरक्षण देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण संवैधानिक प्रक्रिया लगभग पूरी हो गई है.

राजगढ़। राजगढ़ जिले के अंतर्गत आने वाले बोड़ा थाना इलाके के कड़िया सांसी गांव में पुलिस टीम पर उस समय जानलेवा हमला हो गया, जब पुलिस एक आरोपी को पकड़ने गांव पहुंची थी। बताया जा रहा है कि, आरोपी पकड़ने पर भी़ इस कदर हिंसक हो गई, उसकी ओर पुलिस पर पथराव कर दिया। बताया जा रहा है कि, इस पथराव में दो पुलिसकर्मी घायल हो गए हैं। वहीं, अब इस घटनाक्म के बाद गांव में जिलेभर से भारी पुलिसबल तैनात किया गया है। गांव में तनावपूर्ण माहौल बताया जा रहा है।
आरोप है कि, आरोपी पक्ष के पुरुषों के साथ साथ महिलाओं ने भी पुलिस द्वारा की जा रही कार्रवाई का विरोध करते हुए पहले गाली - गलौज की गई। इसपर भी जब पुलिस की ओर से कार्रवाई जारी रही तो आग बबूला हुई भीड़ ने पुलिस टीम पर ही पथराव कर दिया। बता दें कि, इस जानलेवा हमले के दौरान कुछ पुलिसकर्मियों को चोटें भी आईं हैं। पथराव से पुलिसकर्मियों के बीच मची अफरा तफरी का फायदा उठाकर हिरासत में लिए गए आरोपी छुड़ाकर फरार हो गए। वहीं, इस जानलेवा हमले में आरक्षक विनोद और कपिल अटारिया घायल हुए हैं। पुलिस के अनुसार, कपिल को गंभीर चोटें आई हैं।
घटना मंगलवार देर रात 28 जुलाई से बुधवार तड़के 29 जुलाई के बीच की बताई जा रही है। पुलिस के अनुसार, कड़िया सांसी गांव में कार्रवाई के दौरान लालू उर्फ हिमांशु, नमन, भगवान सिंह, रुचिता, काड़ा, शकीना सहित अन्य लोगों ने एकजुट होकर शासकीय कार्य में बाधा डालते हुए आरोपी को पुलिस गिरफ्ता से फरार कराने का कार्य किया है। आरोपियों ने पुलिस दल पर पथराव किया, अभद्र भाषा का प्रयोग किया और जान से मारने की नीयत से हमला कर दिया। हमले के दौरान पुलिस की गिरफ्त में मौजूद लालू उर्फ हिमांशु को छुड़ाकर सभी आरोपी मौके से फरार हो गए।
घटना के बाद थाना प्रभारी देवेंद्र सिंह राजपूत की रिपोर्ट पर 6 नामजद समेत अन्य महिला - पुरुषों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) एवं आईपीसी की गंभीर धाराओं में प्रकरण दर्ज किया गया है। पुलिस ने शासकीय कार्य में बाधा, सरकारी कर्मचारी पर हमला, जानलेवा हमला, बलवा, धमकी और आरोपी को छुड़ाने सहित अन्य धाराएं लगाई हैं।
पुलिस का कहना है कि, फरार आरोपियों की तलाश के लिए संभावित ठिकानों पर दबिश दी जा रही है। मामले की जांच जारी है और आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद पूरे घटनाक्रम का खुलासा किया जाएगा।

-----------------------------------------
लिंग परीक्षण करने वाले डॉक्टर समेत एक नर्स पर FIR: डायग्नोस्टिक सेंटर में बताते थे ‘लड़का है या लड़की
जबलपुर। जबलपुर शहर में अवैध रूप से भ्रूण लिंग परीक्षण करने वाले एक बड़े रैकेट का पर्दाफाश हुआ है। पुलिस और प्रशासन ने मामले में सख्त कार्रवाई करते हुए ‘आर के डायग्नोस्टिक सेंटर’ के डॉक्टर और एक नर्स के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है। सोमवार को प्रशासन की संयुक्त टीम ने डायग्नोस्टिक सेंटर पर छापामार कार्रवाई की थी, जिसके बाद अब यह बड़ा कदम उठाया गया है।
जबलपुर के नामी ‘आर के डायग्नोस्टिक सेंटर’ पर चले कानूनी हथौड़े से स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मच गया है। मामले में डॉ. सतीश अग्रवाल और नर्स सुनीता उर्फ डॉली के खिलाफ पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है।। प्रशासन को लंबे समय से शिकायत मिल रही थी कि इस सेंटर में मोटी रकम लेकर गर्भस्थ शिशु के लिंग की जांच की जाती है और ‘लड़का है या लड़की’ इसकी जानकारी दी जाती है।
सोमवार को पुलिस और प्रशासन की संयुक्त टीम ने जब अचानक डायग्नोस्टिक सेंटर पर छापा मारा, तो मौके से लिंग परीक्षण से जुड़े कई पुख्ता सबूत बरामद हुए। कार्रवाई के दौरान अधिकारियों ने सेंटर से ​कंप्यूटर और हार्ड डिस्क, ​सोनोग्राफी से संबंधित महत्वपूर्ण दस्तावेज और कई रिपोर्ट मिली है। पुलिस ने ​इन सभी चीजों को सील कर अपने कब्जे में ले लिया है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए डॉ. आर. के. अग्रवाल के इस डायग्नोस्टिक सेंटर को तुरंत प्रभाव से सील कर दिया गया। इतना ही नहीं, कार्रवाई का दायरा बढ़ाते हुए आर के अग्रवाल के अधारताल स्थित दूसरे सेंटर पर भी प्रशासन ने ताला जड़कर उसे सील कर दिया है।
प्रशासन की इस बड़ी कार्रवाई के बाद अब पुलिस दोनों आरोपियों के खिलाफ आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी कर रही है। शहर में ऐसे अवैध कारनामों पर यह एक बड़ा प्रहार माना जा रहा है। आपको बता दे कि पुलिस और जिला प्रशासन की पूरी कार्रवाई ऑपरेशन गरिमा के तहत की जारी है। इसके पहले भी पुलिस ने कुछ डायग्नोस्टिक सेंटर, स्पा सेंटर पर छापामार कार्रवाई की है।
-----------------------------------------
इश्क, इनकार और फिर कत्ल: सनकी आशिक ने रची मौत की ऐसी साजिश; पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने पलट दी पूरी कहानी
इंदौर। प्यार में ठुकराए जाने की सनक किस हद तक किसी को हैवान बना सकती है, इसका खौफनाक उदाहरण इंदौर में सामने आया है। जहां एक सनकी प्रेमी ने शादी से इनकार करने पर अपनी करीबी मित्र और एसबीआई बैंक कर्मचारी युवती की गला घोंटकर हत्या कर दी। इसके बाद उसने हत्या को आत्महत्या या हादसा साबित करने के लिए ऐसा षड्यंत्र रचा कि पहली नजर में हर कोई यही मान बैठा कि युवती आग में जिंदा जल गई। लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट, एफएसएल जांच और सीसीटीवी फुटेज ने कातिल की पूरी साजिश का पर्दाफाश कर दिया। पुलिस ने आरोपी प्रेमी को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे पहुंचा दिया है।
26 जुलाई को खजराना थाना क्षेत्र के तपेश्वरी बाग स्थित किराए के कमरे में एसबीआई बैंक कर्मचारी युवती का जला हुआ शव मिला था। कमरे की हालत देखकर शुरुआती तौर पर मामला आत्महत्या या आग लगने से मौत का प्रतीत हो रहा था। लेकिन पुलिस ने बिना किसी निष्कर्ष पर पहुंचे घटनास्थल से हर छोटे-बड़े साक्ष्य जुटाए। एफएसएल टीम को बुलाया गया और शव का पोस्टमार्टम कराया गया।
जांच की सबसे अहम कड़ी पोस्टमार्टम रिपोर्ट बनी। रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि युवती की मौत आग से नहीं, बल्कि गला दबाकर की गई थी। यानी हत्या पहले की गई और बाद में शव पर पेट्रोल डालकर आग लगा दी गई, ताकि सबूत मिटाए जा सकें और मामला आत्महत्या या दुर्घटना जैसा लगे। यहीं से पुलिस ने हत्या का केस दर्ज कर जांच का दायरा बढ़ाया और घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालना शुरू किया।
सीसीटीवी फुटेज में एक युवक पेट्रोल का डिब्बा लेकर घटनास्थल की ओर जाता दिखाई दिया। यही फुटेज जांच का सबसे बड़ा सुराग साबित हुई। तकनीकी साक्ष्यों और डिजिटल ट्रैकिंग के जरिए पुलिस आरोपी तक पहुंच गई। आरोपी की पहचान ग्वालियर जिले के डबरा निवासी मयंक शाक्य के रूप में हुई, जो पिछले करीब पांच वर्षों से मृतका का करीबी मित्र था।
पूछताछ में आरोपी ने पुलिस के सामने अपना जुर्म कबूल कर लिया। उसने बताया कि वह युवती से शादी करना चाहता था, लेकिन युवती ने शादी से इनकार कर दिया था। इसी बात से नाराज होकर उसने गुस्से में युवती का गला दबाकर उसकी हत्या कर दी। हत्या के बाद उसने शव पर पेट्रोल डालकर आग लगा दी, ताकि पुलिस और परिवार को लगे कि युवती ने आत्महत्या की है या किसी हादसे में उसकी मौत हुई है।
इंदौर पुलिस ने आरोपी मयंक शाक्य को गिरफ्तार कर हत्या, साक्ष्य नष्ट करने और अन्य संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि हत्या की योजना पहले से बनाई गई थी या वारदात अचानक हुई। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि इस पूरी साजिश में किसी अन्य व्यक्ति की कोई भूमिका तो नहीं थी।
यह मामला सिर्फ एक हत्या का नहीं, बल्कि उस खतरनाक मानसिकता का है जिसमें प्यार में इनकार को स्वीकार करने के बजाय मौत का रास्ता चुन लिया जाता है। आरोपी ने न सिर्फ युवती की बेरहमी से हत्या की, बल्कि सबूत मिटाने के लिए शव को आग के हवाले कर पुलिस को गुमराह करने की भी कोशिश की। हालांकि, वैज्ञानिक जांच, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और सीसीटीवी फुटेज ने उसकी पूरी साजिश को बेनकाब कर दिया और आखिरकार सनकी आशिक कानून के शिकंजे में आ गया।

प्रमुख समाचार

दिल्ली। फरवरी 2020 के दिल्ली दंगों के दौरान आईबी अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में कड़कड़डूमा कोर्ट ने पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन समेत पांच दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। सजा सुनाते समय अदालत ने कहा कि यह बेहद गंभीर और समाज को झकझोर देने वाला अपराध था। कोर्ट ने टिप्पणी की कि अंकित शर्मा की बर्बर तरीके से हत्या की गई और उनके शव को जानवरों की तरह छोड़ दिया गया।कोर्ट ने कहा कि हत्या को जिस तरह अंजाम दिया गया, वह बेहद क्रूर था। अदालत के...

मध्य प्रदेश

इंदौर। हीरानगर थाना क्षेत्र में सामने आए चर्चित नकली प्लास्टर कांड की जांच तेज हो गई है। वायरल वीडियो के बाद शुरू हुई विभागीय जांच में अब तक थाना प्रभारी (टीआई), एसीपी और संबंधित डॉक्टर के बयान दर्ज किए जा चुके हैं। जांच में सबसे अहम तथ्य डॉक्टर के बयान के रूप में सामने आया है। सूत्रों के अनुसार डॉक्टर ने अपने बयान में स्पष्ट किया है कि उन्होंने दोनों आरोपियों के हाथ-पैर में किसी प्रकार का प्लास्टर नहीं लगाया था। इस बयान के बाद पुलिस की...

अपराध

जबलपुर। मध्य प्रदेश में अब पुलिसकर्मी भी लव जिहाद का शिकार हो रही हैं। जबलपुर में एक महिला आरक्षक को मुस्लिम युवक ने हिंदू बनकर प्रेम जाल में फंसाकर संबंध बनाया। युवक पर जबरन रोजा रखवा कर गौमांस खिलाने का भी आरोप है। पीड़िता 5 महीने की गर्भवती हो गई, जिसके बाद उसने गर्भ में बच्चा लेकर एसपी ऑफिस पहुंची।पीड़िता ने बताया कि शोहराब शेख ने अपना नाम सौरभ सिंह और गोलू बताकर उससे दोस्ती की थी। शादी का झांसा देकर 1 साल तक शारीरिक संबंध बनाया। शादी करने...
More inअपराध  

गुना सिटी

गुना। (गरिमा टीवी न्यूज़) गुना जिले के धरनावदा थाना क्षेत्र अंतर्गत हनुमान टेकरी से दर्पण करके लौट रहे एक युवक व्यक्ति को पांच बदमाशों ने रोक कर गंभीर मारपीट की और लूटपाट की फिर युवती को अलग ले जाकर उसके साथ गैंगरेप का प्रयास किया। इस मामले में पुलिस ने एसआईटी गठित की है और आरोपियों का सुराग लगाने की कोशिश की जा रही है। पीड़ितों के अनुसार, वे बाइक से लौट रहे थे कि धरनावदा थाना क्षेत्र में हाईवे पर कुछ अज्ञात लोगों ने गाड़ी का पहिया पंचर होने का बहाना बनाकर उन्हें रोक लिया।...

फोटो गैलरी

35,10,0,50,1
25,600,60,1,300,200,25,800
90,150,1,50,12,30,50,1,70,12,1,50,1,1,1,5000
0,2,1,0,2,40,15,5,2,1,0,20,0,1
गरिमा के जन्म के 15 मिनिट बाद का फोटो
गरिमा के जन्म के 15 मिनिट बाद का फोटो
गरिमा के 1 वर्ष बाद का फोटो
गरिमा के 1 वर्ष बाद का फोटो
गरिमा के 2 वर्ष बाद का फोटो
गरिमा के 2 वर्ष बाद का फोटो
बीमार होने के बाद भोपाल अस्पताल मे भर्ती गरिमा
बीमार होने के बाद भोपाल अस्पताल मे भर्ती गरिमा
हाई कोर्ट के आदेश के बाद गरिमा के शव को जमीन से निकालते हुऐ
हाई कोर्ट के आदेश के बाद गरिमा के शव को जमीन से निकालते हुऐ
निकालने के बाद गरिमा के शव को पैक कर जॉच के लिऐ भेजा गया
निकालने के बाद गरिमा के शव को पैक कर जॉच के लिऐ भेजा गया
दोषी डॉक्टर के खिलाफ मामला कायम कराने के लिऐ पुलिस अधिक्षक से मिले पत्रकार
दोषी डॉक्टर के खिलाफ मामला कायम कराने के लिऐ पुलिस अधिक्षक से मिले पत्रकार
गरिमा के शव की जॉच होने के बाद पुनः उसी स्थान पर चबूतरा का निर्माण किया गया
गरिमा के शव की जॉच होने के बाद पुनः उसी स्थान पर चबूतरा का निर्माण किया गया
पूजा स्थल मे गरिमा
पूजा स्थल मे गरिमा
© 2017 Your Company. All Rights Reserved. Designed By WarpTheme