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राजगढ़ । राजगढ़ जिले में शादी के नाम पर कथित ठगी और फर्जी दस्तावेजों के जरिए विवाह कराने का मामला सामने आया है। खुजनेर क्षेत्र के ग्राम बांसखेड़ा निवासी एक युवक की आठ माह पहले झारखंड की युवती से शादी कराई गई थी। अब युवती के परिजनों ने उसे नाबालिग बताते हुए झारखंड में अपहरण की शिकायत दर्ज करा दी है। इसके बाद झारखंड पुलिस रविवार को खुजनेर पहुंची और स्थानीय पुलिस की मदद से युवती और उसके पति को अपने साथ ले गई।
जानकारी के अनुसार बांसखेड़ा निवासी युवक रंगलाल की शादी अक्टूबर 2025 में झारखंड की एक युवती से कराई गई थी। आरोप है कि शादी कराने के एवज में बिचौलियों द्वारा करीब दो लाख रुपए लिए गए थे। विवाह के दौरान युवती का आधार कार्ड भी प्रस्तुत किया गया था। बताया जा रहा है कि जून माह में युवती के माता-पिता ने झारखंड के भगवानपुरा थाने में शिकायत दर्ज कराते हुए अपनी बेटी को नाबालिग बताया और उसके अपहरण की आशंका जताई।
शिकायत के आधार पर झारखंड पुलिस ने मामले में शामिल दो युवकों और एक महिला को हिरासत में लिया। उक्त महिला खुद को युवती की मौसी बता रही थी। रविवार को झारखंड पुलिस उक्त महिला के साथ खुजनेर थाने पहुंची और स्थानीय पुलिस के सहयोग से बांसखेड़ा गांव जाकर युवती और उसके पति को अपने साथ थाने लेकर आई। इस दौरान युवती ने पुलिस के सामने कहा कि उसकी शादी उसकी रिश्तेदारी में रहने वाली महिला के माध्यम से हुई थी और वह अपने पति के साथ ही रहना चाहती है। युवती ने अपनी उम्र 21 वर्ष बताई।
इधर जैसे ही युवती और उसके पति को पुलिस थाने लाई, बांसखेड़ा गांव के बड़ी संख्या में ग्रामीण खुजनेर थाने पहुंच गए। ग्रामीणों का कहना था कि यदि युवती अपनी इच्छा से पति के साथ रहना चाहती है तो उसे साथ क्यों ले जाया जा रहा है। हालांकि पुलिस ने ग्रामीणों को बताया कि शादी के समय प्रस्तुत किया गया आधार कार्ड फर्जी प्रतीत हो रहा है तथा युवती के पिता ने उसे नाबालिग बताया है। ऐसे में उम्र का सत्यापन और बयान की प्रक्रिया झारखंड में ही पूरी होगी। यदि जांच और दस्तावेजों में युवती बालिग पाई जाती है तो उसके बयान और इच्छा के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
राजगढ़ में महिला- पुरुष प्रतिशत प्रति एक हजार पुरुष 956 है। इस आंकड़े के साथ ही जिले में लड़कियों की कमी रहती है। इसीलिए यहां पहले मप्र के बैतूल जिले से लड़कियां लाई जाती थीं। इसके बाद बिहार से रुपए देकर लाने का ट्रेंड शुरू हुआ। यहां रुपए देकर उसके बदले में युवतियों को लाकर बिचौलिए विवाह करवाते हैं। कानून तौर पर यह मामला खरीद-फरोख्त से जुड़ा माना जाता है। इसमें कई बार बिचौलिए नाबालिगों की भी शादी करवा देते हैं। ऐसे असंख्य मामले जिले में सामने आ चुके हैं। यह एक तरह का ट्रेंड जिले में बन चुका है।
इनका कहना है-
लड़के के परिजनों को समझाइश दी गई है कि युवती की उम्र की जांच और उसके बयान झारखंड में होंगे। आगे की कार्रवाई और निर्णय वहीं की पुलिस और न्यायिक प्रक्रिया के अनुसार होगा। -रवि ठाकुर, थाना प्रभारी, खुजनेर

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बंदूक की नोक पर सराफा व्यापारी से लाखों के जेवर लूटे, विरोध करने पर सिर पर बरसाईं लाठियां
मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में शनिवार रात एक सराफा व्यापारी के साथ हुई लूट की वारदात ने इलाके में दहशत फैला दी। लांजी-आमगांव मार्ग पर हथियारबंद बदमाशों ने कामना ज्वेलर्स के संचालक कपिल आसटकर को निशाना बनाया। घटना उस समय हुई, जब वह रोज की तरह दुकान बंद कर सोने-चांदी के जेवरों से भरे दो बैग लेकर अपने घर जा रहे थे। बदमाशों ने उन्हें घेरकर लूट की कोशिश की और विरोध करने पर जानलेवा हमला कर दिया।
पीड़ित व्यापारी के अनुसार, जब उन्होंने बैग छोड़ने से इनकार किया तो आरोपियों ने पहले बंदूक से हवाई फायरिंग की, जिससे आसपास दहशत फैल गई। इसके बाद एक बदमाश ने उनके सिर पर लगातार कई बार लाठी से हमला किया। गंभीर चोट लगने के कारण वह बाइक सहित सड़क पर गिर पड़े। इसी दौरान बदमाश दोनों बैग लेकर आमगांव रोड की ओर फरार हो गए। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, लूटे गए जेवरों की कीमत करीब 8 से 9 लाख रुपये बताई जा रही है।
घटना के बाद घायल कपिल आसटकर को उनके परिजन तुरंत लांजी के सिविल अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां प्राथमिक इलाज के बाद उनकी गंभीर हालत को देखते हुए महाराष्ट्र के गोंदिया रेफर कर दिया गया। पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण कर जांच शुरू कर दी है। हालांकि अभी तक पुलिस ने आधिकारिक तौर पर आरोपियों की पहचान या लूट की पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं की है।
जांच एजेंसियां आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही हैं और वारदात के समय उस इलाके से गुजरने वाले लोगों से भी पूछताछ की जा रही है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, बदमाश पहले से व्यापारी की गतिविधियों पर नजर रखे हुए थे और उन्हें इस बात की जानकारी थी कि वह रोजाना दुकान बंद करने के बाद जेवर अपने साथ घर ले जाते हैं। पुलिस इस एंगल से भी जांच कर रही है कि कहीं आरोपियों को व्यापारी की दिनचर्या की पहले से जानकारी तो नहीं थी। फिलहाल इलाके में नाकाबंदी कर संदिग्धों की तलाश तेज कर दी गई है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि लांजी क्षेत्र में सराफा व्यापारी के साथ इस तरह की यह पहली बड़ी लूट की घटना है। इसलिए व्यापारियों में डर और असुरक्षा का माहौल बन गया है। व्यापारिक संगठनों का मानना है कि यदि बाजार और संवेदनशील इलाकों में रात के समय पुलिस गश्त बढ़ाई जाए तो ऐसी घटनाओं पर काफी हद तक रोक लगाई जा सकती है। कई व्यापारियों ने कीमती सामान ले जाने के दौरान अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था और सीसीटीवी निगरानी बढ़ाने की भी मांग की है।
विशेषज्ञों का कहना है कि हाल के वर्षों में सराफा कारोबारियों को निशाना बनाकर लूट की घटनाओं में सतर्कता बेहद जरूरी हो गई है। दुकान बंद करने के समय तय रूट बदलना, सुरक्षा इंतजाम मजबूत करना और जरूरत पड़ने पर पुलिस की मदद लेना ऐसे कदम हैं, जो जोखिम को कम कर सकते हैं। फिलहाल इस मामले में पुलिस आरोपियों की तलाश में लगातार छापेमारी कर रही है। व्यापारियों और स्थानीय लोगों की नजर अब इस बात पर है कि पुलिस इस हाई-प्रोफाइल लूटकांड का खुलासा कब तक कर पाती है।
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जमीन विवाद सुलझाने पहुंची पुलिस टीम पर हमलाः कमिश्नर की फटकार के बाद FIR दर्ज, 4 आरोपी गिरफ्तार
इंदौर। मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर के कनाड़िया थाना क्षेत्र से पुलिस टीम पर हमले की एक बड़ी घटना सामने आई है। कनाड़िया इलाके की डायमंड कॉलोनी में जमीन विवाद सुलझाने पहुंची पुलिस टीम पर कुछ असामाजिक तत्वों ने हमला कर दिया। इस हमले में दो पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस कमिश्नर की सख्त फटकार के बाद आनन-फानन में एफआईआर (FIR) दर्ज कर चारों मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है।
जानकारी के अनुसार, कनाड़िया थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली डायमंड कॉलोनी में एक जमीन को लेकर दो पक्षों के बीच विवाद की स्थिति बनी हुई थी। घटना वाले दिन पुलिस को इस जमीन विवाद की सूचना मिली थी, जिसके बाद स्थिति को संभालने और मामला शांत कराने के लिए पुलिस की एक टीम मौके पर पहुंची थी। लेकिन वहां मौजूद आरोपियों ने पुलिस टीम पर ही हमला बोल दिया।ह मले में दो आरक्षक विजयपाल सिकरवार और आशीष शर्मा घायल हुए थे।
घटना के बाद शुरुआत में मामले को लेकर ढिलाई बरती जा रही थी, लेकिन जैसे ही यह बात पुलिस कमिश्नर के संज्ञान में आई, उन्होंने कड़ा रुख अपनाया। कमिश्नर की सख्त फटकार के बाद कनाड़िया थाना पुलिस तुरंत हरकत में आई और शासकीय कार्य में बाधा डालने व पुलिसकर्मियों के साथ मारपीट करने की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया।पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए इस मामले में संलिप्त चारों आरोपियों मोहसिन मुश्ताक अली2. मोहम्मद अफजल शेख मोहम्मद लियाकत 3. दर्शन राधेश्याम 4.चंदन वर्मा सुरेश वर्मा शामिल है।

सारंगपुर। शिक्षा विभाग द्वारा लागू की जा रही ई-अटेंडेंस व्यवस्था एक बार फिर चर्चा में आ गई है। राज्य शासन ने स्पष्ट कर दिया है कि 1 जुलाई 2026 से स्कूल शिक्षा विभाग के अंतर्गत कार्यरत सभी शिक्षक, अतिथि शिक्षक, अधिकारी एवं कर्मचारी हमारे शिक्षक ऐप के माध्यम से अनिवार्य रूप से अपनी उपस्थिति दर्ज करेंगे।
नई व्यवस्था के तहत ई-अटेंडेंस दर्ज नहीं होने पर नियमित शिक्षकों का वेतन तथा अतिथि शिक्षकों का मानदेय रोका जा सकता है।
शासन का उद्देश्य विद्यालयों में कर्मचारियों की वास्तविक उपस्थिति सुनिश्चित करना और फर्जी हाजिरी पर अंकुश लगाना बताया जा रहा है, लेकिन जमीनी स्तर पर यह व्यवस्था शिक्षकों के लिए नई परेशानियां खड़ी करती दिखाई दे रही है। विकासखंड में प्राथमिक और माध्यमिक स्तर पर सैकड़ों शिक्षक कार्यरत हैं, जबकि आगामी सत्र में अतिथि शिक्षकों की नियुक्तियां भी प्रस्तावित है।
ऐसे में हजारों कर्मचारियों को प्रतिदिन मोबाइल ऐप के माध्यम से जियो-फेंसिंग आधारित उपस्थिति दर्ज करनी होगी। ग्रामीण और दुर्गम क्षेत्रों में पदस्थ शिक्षकों का कहना है कि कई विद्यालयों में इंटरनेट नेटवर्क बेहद कमजोर है।
कई बार विद्यालय परिसर में मौजूद रहने के बावजूद ऐप लोकेशन स्वीकार नहीं करता और शिक्षक को विद्यालय से बाहर दर्शाता है। सर्वर डाउन, ऐप क्रैश, जीपीएस की त्रुटियां और मोबाइल डेटा की बढती खपत जैसी समस्याएं भी लगातार सामने आ रही हैं।
संचालनालय ने स्पष्ट किया है कि शिक्षकों की ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज कराएं। विकासखंड शिक्षा अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि वे अपने अधीनस्थ सभी प्राचार्यों, शिक्षकों और कर्मचारियों द्वारा ई-अटेंडेंस का उपयोग सुनिश्चित करें। प्राचार्यों को विशेष रूप से निर्देशित किया गया है कि वे ई-अटेंडेंस के सही ढंग से दर्ज होने का ध्यान रखें।
यदि ई-अटेंडेंस दर्ज नहीं होती है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी प्राचार्य की होगी। संचालनालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि जो शिक्षक हमारे शिक्षक एप के माध्यम से अपनी उपस्थिति दर्ज नहीं करेंगे, उन्हें उस दिन अनुपस्थित माना जाएगा। ऐसे शिक्षकों को उस दिन का वेतन भी नहीं दिया जाएगा। यह निर्देश 1 जुलाई से सख्ती से लागू हो जाएगा।
शिक्षक संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि पिछली बार भी ई-अटेंडेंस व्यवस्था तकनीकी समस्याओं से घिरी रही थी और इस बार भी स्थिति में विशेष सुधार नहीं दिख रहा है। ऐप के बार-बार हैंग होने, सर्वर नहीं चलने, मोबाइल डेटा और बैटरी की अधिक खपत जैसी समस्याओं से शिक्षक परेशान है। कई बार शिक्षक विद्यालय में उपस्थित रहता है, लेकिन ऐप लोकेशन के आधार पर पूछता है कि वह स्कूल से दूर क्यों है।
संगठन ने फेस रीडिंग या बायोमेट्रिक मशीन जैसी वैकल्पिक व्यवस्था लागू करने की मांग की है। वहीं दूसरी तरफ शिक्षक संगठन ने ई-अटेंडेंस के विरोध में दायर याचिका को उच्च न्यायालय द्वारा निरस्त किए जाने के बाद अब शासन से व्यावहारिक समाधान की मांग तेज कर दी है।
जियो-फेंसिंग एक लोकेशन आधारित डिजिटल तकनीक है, जिसके माध्यम से किसी व्यक्ति की निर्धारित स्थान पर मौजूदगी की पुष्टि की जाती है। शिक्षक का मोबाइल जीपीएस चालू होने पर ऐप उसकी वर्तमान लोकेशन को विद्यालय की निर्धारित सीमा से मिलाता है। यदि शिक्षक तय दायरे में है तो उपस्थिति दर्ज हो जाती है, अन्यथा नहीं।
इससे फर्जी उपस्थिति पर रोक लगाने और निगरानी मजबूत करने का दावा किया जा रहा है। हालांकि ग्रामीण क्षेत्रों में कमजोर नेटवर्क, जीपीएस त्रुटि, गलत लोकेशन मैपिंग और ऐप की तकनीकी खामियां शिक्षकों के लिए बडी समस्या बन रही हैं। कई बार स्कूल परिसर में मौजूद रहने के बावजूद उपस्थिति दर्ज नहीं हो पाती।
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बेलगाम ई रिक्शों पर हाईकोर्ट सख्त , केंद्र सरकार से चार सप्ताह में मांगा जवाब
जबलपुर। शहर में तेजी से बढ़ रहे बैटरी चालित ई-रिक्शों और उनसे उत्पन्न हो रही यातायात अव्यवस्था को लेकर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कार्यवाहक मुख्य न्यायमूर्ति विवेक रूसिया और न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की युगलपीठ ने मोटर वाहन अधिनियम के तहत बैटरी चालित ई-रिक्शा तथा अन्य वाहनों को दी गई छूट के संबंध में केंद्र सरकार से स्पष्ट जवाब तलब किया है। अदालत ने संकेत दिए कि शहरों में ई-रिक्शों की लगातार बढ़ती संख्या और उससे बिगड़ रही यातायात व्यवस्था को देखते हुए अब इस नीति की व्यापक समीक्षा आवश्यक हो गई है।
सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार को अंतिम अवसर देते हुए चार सप्ताह के भीतर विस्तृत जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। अदालत ने कहा कि बैटरी चालित वाहनों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है, जिसका सीधा असर शहरों की यातायात व्यवस्था, सड़क सुरक्षा और ट्रैफिक प्रबंधन पर दिखाई दे रहा है। ऐसे में यह विचार करना आवश्यक है कि मोटर वाहन अधिनियम के अंतर्गत दी गई छूट वर्तमान परिस्थितियों में कितनी व्यावहारिक और प्रभावी है।
युगलपीठ ने केंद्र सरकार की ओर से उपस्थित सहायक सॉलिसिटर जनरल को निर्देश दिए कि वे इस विषय में केंद्र सरकार से स्पष्ट निर्देश प्राप्त कर अगली सुनवाई में न्यायालय के समक्ष अपना पक्ष रखें। अदालत ने यह भी संकेत दिया कि यदि आवश्यकता हो तो केंद्र सरकार बैटरी चालित ई-रिक्शों और अन्य वाहनों को दी गई छूट वापस लेने अथवा उसके प्रावधानों की पुनः समीक्षा करने पर भी विचार कर सकती है।
मामले की सुनवाई जबलपुर निवासी डॉ. पी.जी. नाजपांडे और रजत भार्गव द्वारा दायर जनहित याचिका पर की जा रही है। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता दिनेश कुमार उपाध्याय ने न्यायालय को बताया कि बिना प्रभावी नियमन के बड़ी संख्या में संचालित हो रहे ई-रिक्शे यातायात सुरक्षा, सड़क अनुशासन और प्रशासनिक नियंत्रण के लिए गंभीर चुनौती बन चुके हैं। कई स्थानों पर इनके कारण जाम की स्थिति बनती है और सड़क दुर्घटनाओं की आशंका भी बढ़ रही है।
याचिका में यह भी कहा गया कि वर्तमान व्यवस्था में ई-रिक्शों के संचालन के लिए पर्याप्त नियंत्रण और निगरानी तंत्र का अभाव है। परिणामस्वरूप अनेक वाहन बिना समुचित अनुशासन के सड़कों पर संचालित हो रहे हैं, जिससे आम नागरिकों के साथ-साथ अन्य वाहन चालकों को भी परेशानी का सामना करना पड़ता है। याचिकाकर्ताओं ने न्यायालय से इस विषय में प्रभावी दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की है।
हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्र और राज्य सरकार से विस्तृत जवाब मांगा है तथा स्पष्ट किया है कि इस विषय पर सभी पहलुओं का परीक्षण किया जाएगा। अदालत का मानना है कि पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य से बैटरी चालित वाहनों को प्रोत्साहित करना आवश्यक है, लेकिन इसके साथ यातायात सुरक्षा और सड़क अनुशासन बनाए रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
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दो युवतियों पर कथित गौमांस तस्करी का आरोप: नहर में फेंकी बोरी, रोकने पर युवक को किया लहूलुहान
रीवा। रीवा के समान थाना क्षेत्र में कथित गौमांस तस्करी को लेकर देर शाम उस समय हंगामा खड़ा हो गया, जब रिंग रोड स्थित नहर किनारे कच्चे मार्ग से बाइक पर जा रही दो युवतियों को ग्रामीणों ने रोकने का प्रयास किया। आरोप है कि युवतियां अपने साथ ले जा रही कथित गौमांस से भरी बोरी को नहर में फेंककर भागने लगीं। इसी दौरान रोकने वाले एक ग्रामीण युवक पर पत्थर से हमला कर दिया गया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया।
घटना की सूचना मिलते ही समान थाना पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों युवतियों को हिरासत में लेकर उनकी बाइक जब्त कर ली। पुलिस ने नहर से बरामद संदिग्ध मांस को कब्जे में लेकर जांच के लिए एफएसएल भेज दिया है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि बरामद मांस किस पशु का है।
इधर, घटना के बाद हिंदू संगठन के पदाधिकारियों ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि क्षेत्र में लंबे समय से गौकशी और गौमांस तस्करी की शिकायतें की जाती रही हैं, लेकिन समय पर प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से ऐसे मामलों की पुनरावृत्ति हो रही है।
हिंदू संगठन का दावा है कि इस मामले की सूचना भी पहले पुलिस को दी गई थी, लेकिन कार्रवाई में देरी के कारण संगठन के कार्यकर्ताओं को स्वयं घेराबंदी करनी पड़ी, जिसके दौरान उनके एक साथी पर हमला हुआ। फिलहाल पुलिस ने दोनों आरोपित युवतियों के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर लिया है। मामले की जांच जारी है और एफएसएल रिपोर्ट आने के बाद आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत ओडिशा में तैयार की गई नई स्कूली किताबें एक बार फिर चर्चा और विवाद के केंद्र में हैं। इन किताबों का उद्देश्य शिक्षा को आधुनिक और बेहतर बनाना था, लेकिन बार-बार सामने आ रही गलतियों और चयनित सामग्री को लेकर सवाल उठ रहे हैं। हाल ही में कक्षा 8 की कला शिक्षा की किताब कृति में कुछ ऐसे गीत शामिल किए गए हैं, जिन्हें लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है।
कक्षा 8 की किताब के मो संगीत जगत अध्याय में राजस्थानी लोकगीत निंबूड़ा-निंबूड़ा के पूरे बोल शामिल किए गए हैं। यह गीत मूल रूप से एक पारंपरिक लोकगीत है, जिसे बाद में 1999 की बॉलीवुड फिल्म हम दिल दे चुके सनम से बड़ी पहचान मिली। इसके अलावा इसी अध्याय में कश्मीरी लोकगीत रिंद पोश माल के बोल भी शामिल हैं, जिसे फिल्म मिशन कश्मीर के जरिए व्यापक लोकप्रियता मिली थी। इन दोनों गीतों को पाठ्यपुस्तक में जगह मिलने पर शिक्षा व्यवस्था और पाठ्यक्रम की प्राथमिकता को लेकर बहस तेज हो गई है।
जैसे ही यह जानकारी सामने आई, सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई। कई लोगों ने इस फैसले पर सवाल उठाए और कहा कि किताबों में ओडिशा की स्थानीय संस्कृति, ओड़िया लोकगीतों और परंपरागत संगीत को अधिक प्राथमिकता मिलनी चाहिए थी।
यह विवाद अकेला नहीं है। इससे पहले नई पाठ्यपुस्तकों में 1,678 गलतियां पाए जाने का मामला भी काफी चर्चा में रहा था। इन गलतियों में तथ्यात्मक गलतियां, व्याकरण संबंधी त्रुटियां और कुछ जगहों पर अनुचित या असंगत सामग्री शामिल है। ये समस्याएं कई अलग-अलग किताबों में सामने आई थीं, जिन्हें राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत तैयार किया गया था।
मामला बढ़ने पर शिक्षकों, अभिभावकों और विपक्षी दलों ने सरकार पर सवाल उठाए। सोशल मीडिया पर भी यह मुद्दा तेजी से ट्रेंड करने लगा। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने जांच के आदेश दिए। जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद प्रशासन ने जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई शुरू कर दी।
जांच के बाद बड़ी कार्रवाई करते हुए चार वरिष्ठ एससीईआरटी अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया। इसके अलावा छह अन्य अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी शुरू की गई है। यह कदम यह संकेत देता है कि सरकार अब शिक्षा सामग्री की गुणवत्ता को लेकर अधिक सख्त रुख अपना रही है।
सरकार ने यह भी तय किया है कि अब किसी भी पाठ्यपुस्तक को सीधे छपाई के लिए नहीं भेजा जाएगा। नई प्रक्रिया के तहत किताबों को भाषा की शुद्धता, तथ्यात्मक सटीकत, चित्रों की उपयुक्तता और समग्र गुणवत्ता इन सभी स्तरों पर पूरी तरह जांचने के बाद ही अंतिम मंजूरी दी जाएगी।
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'बॉस स्कैम' से सावधान... व्हाट्सएप पर सीईओ बनकर हो रही करोड़ों की ठगी, पुलिस ने जारी किया अलर्ट
तिरुवनंतपुरम। केरल पुलिस कंपनियों, व्यापारिक संस्थानों और कार्पोरेट कर्मचिरयों के लिए अलर्ट जारी किया है। केरल पुलिस के अनुसार, 'बॉस स्कैम' को 'सीईओ इंपर्सनेशन फ्रॉड' भी कहा जाता है। इस साइबर धोखाधड़ी में अपराधी कंपनी के सीईओ या वरिष्ठ अधिकारी की पहचान का इस्तेमाल कर वित्त विभाग के कर्मचारियों को तत्काल भुगतान करने का निर्देश देते हैं। मैसेज इतने वास्तविक लगते हैं कि कर्मचारी बिना पुष्टि किए ही रकम ट्रांसफर कर देते हैं, जिससे कंपनी को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।
पुलिस ने बताया कि साइबर अपराधी सबसे पहले भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) या किसी सरकारी ऑडिट टीम के नाम पर फर्जी और जरूरी संदेश भेजते हैं। इसके बाद कर्मचारियों से मैलवेयर युक्त ZIP, EXE या DLL फाइलें खुलवाई जाती हैं। इन फाइलों के जरिए हैकर्स कंपनी के कंप्यूटर नेटवर्क में घुसकर सिस्टम पर नियंत्रण हासिल कर लेते हैं। इसके बाद वे या तो अधिकारियों के अकाउंट हैक करते हैं या उनकी फर्जी प्रोफाइल बनाकर कर्मचारियों को व्हाट्सएप वेब के माध्यम से भुगतान के निर्देश भेजते हैं।?
केरल पुलिस ने कंपनियों को सलाह दी है कि केवल व्हाट्सएप या ई-मेल के आधार पर किसी भी बड़े वित्तीय लेन-देन को मंजूरी न दें। भुगतान से पहले संबंधित अधिकारी से फोन कॉल या किसी अन्य सत्यापित माध्यम से पुष्टि अवश्य करें। साथ ही कर्मचारियों को नियमित रूप से अपने व्हाट्सएप के Linked Devices सेक्शन की जांच करनी चाहिए, ताकि कोई अनजान डिवाइस उनके अकाउंट से जुड़ा न हो।
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों और पुलिस ने कंपनियों को मल्टी-लेवल अप्रूवल सिस्टम लागू करने की सलाह दी है, ताकि बड़ी रकम का भुगतान एक व्यक्ति के निर्णय पर न हो सके। इसके अलावा अनजान स्रोतों से आई ZIP, EXE और DLL फाइलें कभी न खोलें। कर्मचारियों को समय-समय पर साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण देना और सिस्टम को अपडेट रखना भी ऐसे हमलों से बचाव का प्रभावी तरीका माना गया है।
यदि कोई व्यक्ति या कंपनी इस तरह की साइबर वित्तीय धोखाधड़ी का शिकार होती है, तो तुरंत राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें या राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं। पुलिस का कहना है कि समय पर शिकायत मिलने पर संदिग्ध लेन-देन को रोकने और चोरी हुई राशि वापस दिलाने की संभावना काफी बढ़ जाती है।
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दिल्ली में नई ईवी पॉलिसी 1 अप्रैल 2028 से केवल ईवी टू व्हीलर का ही रजिस्ट्रेशन, इलेक्ट्रिक गाडिय़ों पर रोड टैक्स भी माफ
नई दिल्ली. दिल्ली सरकार ने दिल्ली ईवी पॉलिसी 2026 को मंजूरी दे दी है. मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में इस नई नीति को हरी झंडी दी गई. अब इस पॉलिसी को उपराज्यपालृ की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा. मंजूरी मिलने के बाद इसे 1 जुलाई 2026 से लागू करने का प्रस्ताव है. यह नई ईवी पॉलिसी 31 मार्च 2030 तक लागू रहेगी.
इस नई नीति का सबसे बड़ा मकसद दिल्ली में प्रदूषण कम करना और इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) को बढ़ावा देना है. सरकार चाहती है कि ज्यादा से ज्यादा लोग पेट्रोल-डीजल की गाडिय़ों की जगह जीरो एमिशन इलेक्ट्रिक वाहन अपनाएं. इससे दिल्ली की हवा साफ होगी और लोगों को बेहतर परिवहन सुविधा मिलेगी.
सरकार का कहना है कि अगले चार वर्षों में 7,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का सीधा निवेश किया जाएगा. इसके अलावा टैक्स में छूट, चार्जिंग स्टेशन और दूसरी ईवी सुविधाओं को मिलाकर करीब 15,000 करोड़ रुपये का कुल लाभ दिल्ली के लोगों को मिलेगा. नई ईवी पॉलिसी के तहत सभी इलेक्ट्रिक वाहनों पर 100 प्रतिशत रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन शुल्क माफ रहेगा. यानी अगर कोई व्यक्ति इलेक्ट्रिक वाहन खरीदता है, तो उसे रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन फीस नहीं देनी होगी. चार पहिया इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए यह लाभ 30 लाख रुपये तक की एक्स-शोरूम कीमत वाली गाडिय़ों पर मिलेगा. इससे इलेक्ट्रिक कार खरीदना पहले के मुकाबले और सस्ता हो जाएगा.
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि आज दिल्ली के लिए बहुत एतिहासिक दिन है. वर्षों से दिल्ली की आवश्यकता थी. दिल्ली की लीगेसी प्रोब्लम सॉल्व हो सकती थी. पॉलिसी 1 जुलाई 2026 से उपराज्यपाल की मंजूरी के बाद लागू होगी, जो 31 मार्च 2030 तक लागू रहेगी. 7 हजार करोड़ का खर्च इन सालों में खर्च होगा. 8 हजार करोड़ अन्य तरीके से खर्च होगा. रोड टैक्स में छूट दी गई है. सीएम ने आगे कहा, हम 15 करोड़ खर्च कर रहे हैं. हमने स्क्रैप और रोड टैक्स रजिस्ट्रेशन पर छूट दी है. हमने 2, 3, 4 और एनवी ट्रकों को शामिल किया है. हमने कोई कैप नहीं रखी है. लोग कई ईवी ले सकते हैं. आज कैबिनेट के एप्रूवल के बाद उपराज्यपाल को भेजा जाएगा. 1 जुलाई से लोग सब्सिडी का लाभ ले पाएंगे.
बड़ी बात ये है कि इस पॉलिसी के आने के बाद दिल्ली में पेट्रोल और सीएनजी से चलने वाले ऑटो रिक्शा की बिक्री पर प्रतिबंध लग सकता है. राज्य में अगले साल यानी 1 जनवरी से सिर्फ इलेक्ट्रिक ऑटो का ही रजिस्ट्रेशन होगा. इसके अलावा पेट्रोल से चलने वाले टू-व्हीलर भी प्रतिबंधित होंगे. सरकारी सूत्रों का कहना है कि 1 अप्रैल 2028 से सिर्फ इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर का ही रजिस्ट्रेश होगा. इसके अलावा दिल्ली ईवी पॉलिसी के पहले साल में सभी इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर खरीदारों को 30,000 रुपये और थ्री-व्हीलर खरीदारों को 50,000 रुपये की सब्सिडी मिलेगी.
दिल्ली के ट्रांसपोर्ट मंत्री डॉ पंकज सिंह ने कहा कि दिल्ली सरकार जो ईवी पॉलिसी लाई है. उसमें दिल्ली की जनता को जो लाभ मिलना चाहिए. उसका ख्याल रखा गया है. दिल्ली के लोग इस ईवी पॉलिसी को अपनाएं. दूसरी ओर बिजली मंत्री आशीष सूद ने कहा कि दिल्ली में ईवी की वजह से बिजली की मांग बढ़ेगी, हम नया इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ाएंगे. सीएम रेखा गुप्ता ने कहा कि नई ईवी चार्जिंग प्वाइंट लगाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा.
सरकार पुरानी गाडिय़ों को कबाड़ (स्क्रैप) करने पर भी अलग से प्रोत्साहन राशि देगी. अगर कोई व्यक्ति बीएस-4 या उससे पुराने उत्सर्जन मानक वाले वाहन को स्क्रैप कराता है, तो उसे अतिरिक्त लाभ मिलेगा.
इसके अलावा सभी ईवी वाहनों पर 100 प्रतिशत रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन शुल्क माफ रहेगा. हालांकि चार पहिया वाहनों के लिए यह छूट 30 लाख रुपये तक की एक्स-शोरूम कीमत वाली इलेक्ट्रिक कारों पर मिलेगी. सरकार ने 3.5 टन से 12 टन तक के इलेक्ट्रिक ट्रकों को भी बढ़ावा देने का फैसला किया है. पॉलिसी लागू होने के तीन महीने के भीतर ऐसे पहले 1,000 इलेक्ट्रिक ट्रकों को दिल्ली में विशेष अनुमति और प्रोत्साहन दिया जाएगा.
नई पॉलिसी में सिर्फ प्रोत्साहन ही नहीं, बल्कि कुछ नियम भी लागू किए जाएंगे. 1 जनवरी 2027 से दिल्ली में नए ऑटो और केवल इलेक्ट्रिक ही रजिस्टर किए जाएंगे. 1 अप्रैल 2028 से दिल्ली में नए दोपहिया वाहन भी केवल इलेक्ट्रिक ही रजिस्टर होंगे. स्कूल बसों को भी धीरे-धीरे इलेक्ट्रिक बनाया जाएगा. पॉलिसी लागू होने के दो साल के भीतर स्कूलों को अपनी 10 प्रतिशत बसें ईवी में बदलनी होंगी. तीन साल में यह लक्ष्य 20 प्रतिशत होगा और पॉलिसी अवधि खत्म होने तक 30 प्रतिशत बसें इलेक्ट्रिक करनी होंगी.
सरकार ने ईवी चार्जिंग नेटवर्क पर भी बड़ा जोर दिया है. पॉलिसी के तहत दिल्ली में 23,000 नए श्वङ्क चार्जिंग प्वाइंट लगाने का लक्ष्य रखा गया है. इसके लिए जमीन की पहचान की जा चुकी है और आने वाले समय में पूरे शहर में तेजी से चार्जिंग स्टेशन लगाए जाएंगे. सरकार का कहना है कि यह दिल्ली की अब तक की सबसे बड़ी ईवी पॉलिसी है. इसका उद्देश्य प्रदूषण कम करना, इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देना और दिल्ली को स्वच्छ और पर्यावरण के अनुकूल राजधानी बनाना है.

खंडवा। वन मंडल के गुड़ी वन परिक्षेत्र में रविवार सुबह वन विभाग की विशेष गश्ती टीम पर कथित वन अतिक्रमणकारियों ने जानलेवा हमला कर दिया। आमाखुजरी बीट के कक्ष क्रमांक 748 एवं 749 में नियमित गश्त के दौरान हुए इस हमले में आठ से अधिक वनरक्षक घायल हो गए, जिनमें कुछ को गंभीर चोटें आई हैं। घटना के बाद घायल कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि सूचना देने के बावजूद उन्हें करीब दो घंटे तक समय पर सहायता और चिकित्सकीय सुविधा नहीं मिल सकी।
जानकारी के अनुसार, वर्ष 2025 में भर्ती हुए 45 नवपदस्थ वनरक्षकों को प्रशिक्षण के बाद गुड़ी रेंज में विशेष फ्लाइंग स्क्वाड के रूप में तैनात किया गया है। यह दल वन भूमि पर अवैध अतिक्रमण रोकने और जंगलों की सुरक्षा के लिए नियमित गश्त करता है। रविवार सुबह टीम आमाखुजरी क्षेत्र में निगरानी के लिए पहुंची थी। इसी दौरान पहले से घात लगाए बैठे कथित अतिक्रमणकारियों ने अचानक गोफन से पत्थरों की बौछार शुरू कर दी। इसके बाद लाठियों से भी हमला किया गया, जिससे मौके पर अफरा-तफरी मच गई।
हमले में वनरक्षक ज्वाला सिंह, रोमांक नायक, शैलेंद्र यादव, राजेंद्र सिंह सक्तावत, राजेंद्र बागड़ी, प्रदीप बघेल, चंद्रपाल तोमर और राहुल लोधी सहित अन्य कर्मचारी घायल हुए हैं। सभी घायलों का उपचार कराया जा रहा है। बताया जा रहा है कि गुड़ी रेंज में लंबे समय से वन भूमि पर अतिक्रमण की शिकायतें हैं। हाल ही में वन विभाग और जिला प्रशासन ने संयुक्त अभियान चलाकर कई स्थानों से अतिक्रमण हटाया था। इसके बाद से क्षेत्र में तनाव की स्थिति बनी हुई थी। वन कर्मचारियों का कहना है कि पूर्व में भी अमले पर हमले हो चुके हैं, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था पर्याप्त नहीं बढ़ाई गई।
घायल कर्मचारियों ने घटना के बाद गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि घटना की सूचना मिलने के बावजूद संबंधित अधिकारियों की ओर से तत्काल राहत नहीं पहुंची। कर्मचारियों के अनुसार, वे करीब दो घंटे तक जंगल में घायल अवस्था में पड़े रहे। उनका यह भी आरोप है कि पास के क्षेत्र से एक अन्य वन टीम मौके की ओर आई, लेकिन जंगल के भीतर प्रवेश किए बिना लौट गई।
वन कर्मचारियों ने डायल-112 की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि पुलिस वाहन घटनास्थल तक पहुंचा, लेकिन घायल वन कर्मचारियों को अस्पताल पहुंचाने के बजाय कथित रूप से दूसरी ओर के घायलों को लेकर चला गया, जिससे उन्हें समय पर उपचार नहीं मिल सका।
घटना के बाद वन विभाग के कर्मचारियों में आक्रोश है। उनका कहना है कि जंगल में अभियान चलाने वाले कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त पुलिस बल, सुरक्षा उपकरण और त्वरित सहायता व्यवस्था उपलब्ध कराई जानी चाहिए। कर्मचारियों ने हमलावरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई तथा पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

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घर के अंदर बन रही थी नामचीन कंपनी की ‘नकली DAP खाद’, कृषि विभाग ने किया भंडाफोड़
इंदर कुमार, जबलपुर। मानसून आने वाला है और इसके साथ ही प्रदेश भर के किसान खरीफ फसलों की बुवाई की तैयारियों में जुट गए हैं। बुवाई के इस पीक सीजन में खेतों के लिए डीएपी खाद क मांग सबसे ज्यादा होती है लेकिन दुखद बात यह है कि अन्नदाताओं की इसी जरूरत और मजबूरी का फायदा उठाने के लिए मिलावटखोर और जालसाज भी सक्रिया हो गए हैं।
कृषि विभाग की टीम ने एक आकस्मिक जांच अभियान के तहत पाटन क्षेत्र में दबिश देकर नकली डीएपी (DAP) खाद बनाने वाली एक अवैध फैक्ट्री को पकड़ा है। यह पूरा काला कारोबार एक घर के भीतर गुपचुप तरीके से संचालित किया जा रहा था। विभाग की इस मुस्तैदी से किसानों को नकली खाद की सप्लाई होने से पहले ही रोक दिया गया है।
कृषि विभाग को सूचना मिली थी कि पाटन के ग्राम करौंदी में बड़े पैमाने पर नकली खाद तैयार की जा रही है। इस इनपुट के आधार पर जब टीम ने अचानक छापा मारा तो अधिकारी भी दंग रह गए। वहां आरोपी बहादुर सिंह राजपूत ने अपने घर के भीतर ही नकली डीएपी खाद का भारी स्टॉक जमा कर रखा था। मौके से नकली डीएपी खाद बनाने में इस्तेमाल होने वाली कच्ची सामग्री, रसायन और अन्य उपकरण भी जब्त किया गया है।
आशंका जताई जा रही है कि आरोपी लोकल स्तर पर ही नामचीन और ब्रांडेड कंपनियों के हुबहू दिखने वाले खाली बैग छपवाता था। इसके बाद घर में तैयार की गई घटिया और नकली डीएपी खाद को इन ब्रांडेड बोरियों में तौलकर पैक किया जाता था, ताकि बाजार में इसे असली बताकर ऊंचे दामों पर किसानों को बेचा जा सके।
कृषि विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इस पूरे मामले में उर्वरक नियंत्रण आदेश (Fertilizer Control Order) एवं अन्य प्रासंगिक कानूनी प्रावधानों के तहत कड़ी वैधानिक कार्रवाई की जा रही है। जब्त की गई खाद के सैंपल को लैब टेस्ट के लिए भेजा जा रहा है। पुलिस अब इस बात की भी जांच कर रही है कि इस रैकेट में आरोपी बहादुर सिंह राजपूत के साथ और कौन-कौन से डीलर या लोकल छपाई करने वाले लोग शामिल हैं।
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सिद्धेश्वर नाथ मंदिर में बड़ी चोरी, दो ऐतिहासिक घंटे गायब, ग्रामीणों ने दी चक्का जाम की चेतावनी
सतना। जिला के नागौद विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत ग्राम गोबरांव कला स्थित अति प्राचीन एवं आस्था के केंद्र सिद्धेश्वर नाथ मंदिर में चोरी की बड़ी वारदात सामने आने से क्षेत्र में भारी आक्रोश व्याप्त हो गया है। अज्ञात चोर मंदिर परिसर से लगभग 11-11 किलोग्राम वजनी दो ऐतिहासिक पीतल के घंटे चोरी कर ले गए। घटना की जानकारी मिलते ही ग्रामीणों एवं श्रद्धालुओं में रोष फैल गया है और समय पर कार्रवाई नहीं होने पर विरोध स्वरूप चक्का जाम की तैयारी की चर्चा भी शुरू हो गई है।
जानकारी के अनुसार, ग्राम गोबरांव कला स्थित सिद्धेश्वर नाथ मंदिर क्षेत्र के सबसे प्राचीन धार्मिक स्थलों में से एक माना जाता है। मंदिर में वर्षों से स्थापित दोनों पीतल के घंटे धार्मिक एवं ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बताए जाते हैं। शुक्रवार शाम जब मुख्य पुजारी एवं ग्रामीण नियमित पूजा-अर्चना के लिए मंदिर पहुंचे, तब दोनों घंटे अपने स्थान से गायब मिले।
ग्रामीणों का आरोप है कि चोरों ने मंदिर की पवित्रता को भी ठेस पहुंचाई है। स्थानीय लोगों ने दावा किया है कि शिवलिंग के साथ भी आपत्तिजनक कृत्य किया गया, जिससे श्रद्धालुओं की भावनाएं गहराई से आहत हुई हैं। हालांकि इस संबंध में पुलिस की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हो सकी है।
घटनाक्रम सामने आने के बाद मामले की सूचना ग्राम पंचायत गोबरांव कला की सरपंच गुड़िया कोल द्वारा पुलिस को दी गई है। शिकायत में मंदिर से दोनों घंटों की चोरी का उल्लेख करते हुए अज्ञात चोरों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की गई है।
घटना के बाद बड़ी संख्या में ग्रामीण मंदिर परिसर में एकत्रित हो गए। लोगों ने आरोपितों की शीघ्र गिरफ्तारी, चोरी गए घंटों की बरामदगी तथा मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग की है। क्षेत्र में तनाव की स्थिति को देखते हुए पुलिस प्रशासन से त्वरित कार्रवाई की अपेक्षा की जा रही है।

इंदौर। शहर में बिना अनुमति आयोजित होने वाली हाई-प्रोफाइल हाउस पार्टियों पर पुलिस लगातार सख्ती बरत रही है। इसी कड़ी में लसूड़िया थाना पुलिस ने महालक्ष्मी नगर स्थित एक एयरबीएनबी फ्लैट पर छापामार कार्रवाई करते हुए डीजे और शराब पार्टी को शुरू होने से पहले ही बंद करा दिया। कार्रवाई के दौरान फ्लैट में 20 से 25 युवक-युवतियां मौजूद मिले। पुलिस ने पुलिस कमिश्नर के प्रतिबंधात्मक आदेशों का उल्लंघन करने पर छह आयोजकों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया है। वहीं फ्लैट मालिक के खिलाफ भी किरायेदारों की जानकारी पुलिस को उपलब्ध नहीं कराने के मामले में कार्रवाई की जा रही है।
पुलिस के अनुसार सोशल मीडिया मॉनिटरिंग के दौरान सूचना मिली थी कि महालक्ष्मी नगर स्थित एक एयरबीएनबी फ्लैट में हाई-प्रोफाइल हाउस पार्टी आयोजित की जा रही है। सूचना मिलते ही लसूड़िया थाना पुलिस मौके पर पहुंची और फ्लैट की जांच की।
जांच के दौरान पुलिस ने पाया कि फ्लैट में डीजे सिस्टम लगाया जा चुका था और शराब पार्टी की पूरी तैयारी कर ली गई थी। हालांकि समय रहते पुलिस पहुंच गई, जिससे पार्टी शुरू होने से पहले ही कार्रवाई कर उसे रुकवा दिया गया। छापेमारी के दौरान फ्लैट में करीब 20 से 25 युवक-युवतियां मौजूद मिले। पूछताछ में सामने आया कि आयोजन के लिए प्रशासन या पुलिस से किसी भी प्रकार की अनुमति नहीं ली गई थी।
एसीपी पराग सैनी ने बताया कि बिना अनुमति आयोजन करना पुलिस कमिश्नर के आदेशों का उल्लंघन है। इस मामले में छह आयोजकों के खिलाफ नामजद प्रकरण दर्ज किया गया है। इसके अलावा फ्लैट मालिक के खिलाफ भी कार्रवाई की जा रही है, क्योंकि उसने किरायेदारों की जानकारी स्थानीय पुलिस को उपलब्ध नहीं कराई थी। पुलिस इस पहलू की भी जांच कर रही है।
पुलिस का कहना है कि शहर में बिना अनुमति आयोजित होने वाले इवेंट, फार्म हाउस पार्टियों और हाउस पार्टियों पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से भी ऐसी गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ आगे भी इसी तरह सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
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सिस्टम शर्मसार: प्रसव पीड़ा से कराहती रही गर्भवती, रात होने का बहाना बना स्टाफ ने नहीं खोला गेट, 15 KM दूर जाकर हुआ प्रसव
श्योपुर। मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले से सरकारी स्वास्थ्य सिस्टम की एक बेहद शर्मनाक और संवेदनहीन तस्वीर सामने आई है। यहां स्वास्थ्य विभाग और सरकार के सुरक्षित प्रसव के तमाम बड़े दावों की पोल खुल गई है। जिले के एक उप स्वास्थ्य केंद्र पर तैनात स्टाफ की लापरवाही और मनमानी के कारण प्रसव पीड़ा से तड़प रही एक महिला को समय पर इलाज नहीं मिल सका। रात होने का बहाना बनाकर कर्मचारियों ने अस्पताल का गेट तक नहीं खोला, जिससे महिला करीब आधे घंटे तक परिसर के बाहर ही दर्द से चीखती रही।
यह पूरी घटना श्योपुर जिले के देहात थाना इलाके के अंतर्गत आने वाले प्रेमसर गांधीनगर उप स्वास्थ्य केंद्र की है। देहात थाना क्षेत्र के गुड्डा गांव की रहने वाली एक गर्भवती महिला को अचानक तेज प्रसव पीड़ा शुरू हुई थी। परिजन आनन-फानन में महिला को लेकर रात के समय नजदीकी उप स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे।
अस्पताल में स्टाफ मौजूद था लेकिन रात का समय होने के कारण उन्होंने मुख्य गेट खोलने से इनकार कर दिया। महिला करीब 30 मिनट तक अस्पताल के बाहर ही दर्द से बेहाल रही। जब डॉक्टरों और स्टाफ की इस तानाशाही और मनमानी को देखकर महिला के परिजनों ने अपने मोबाइल से वीडियो बनाना शुरू किया तो शर्मिंदा होने और मदद के लिए आगे आने के बजाय अस्पताल का स्टाफ परिजनों पर भड़क गया और विवाद करने लगा।
अस्पताल स्टाफ के अड़ियल और संवेदनहीन रवैये को देखने के बाद परिजनों को समझ आ गया कि यहां इलाज मिलना मुमकिन नहीं है। वे बिना प्रसव कराए ही प्रसूता को लेकर वहां से लौट आए। इसके बाद बेहद जोखिम भरे हालातों में परिजन महिला को करीब 15 किलोमीटर दूर स्थित जिला अस्पताल लेकर पहुंचे। गनीमत रही कि जिला अस्पताल में डॉक्टरों ने तत्परता दिखाई और महिला का सुरक्षित प्रसव कराया गया। वर्तमान में जच्चा और बच्चा दोनों पूरी तरह सुरक्षित और स्वस्थ हैं।
यह घटना सीधे तौर पर श्योपुर के ग्रामीण इलाकों में चरमरा चुकी स्वास्थ्य व्यवस्था और सरकारी कर्मचारियों की घोर लापरवाही को उजागर करती है। सवाल यह उठता है कि आपातकालीन सेवाओं के नाम पर वेतन उठाने वाला यह स्टाफ रात में गेट बंद करके क्यों बैठा था? अगर 15 किलोमीटर के सफर के दौरान प्रसूता या बच्चे को कुछ हो जाता, तो इस लापरवाही की जिम्मेदारी कौन लेता?
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1.74 करोड़ की सड़क को लेकर हंगामा: जनता ने खुद नापी सड़क की मोटाई, ठेकेदार को पड़ा जान बचाकर भागना
ग्वालियर। मध्य प्रदेश के ग्वालियर में विकास कार्यों में भ्रष्टाचार और खराब गुणवत्ता को लेकर एक बड़ा मामला सामने आया है। यहां करीब 1 करोड़ 74 लाख रुपये की भारी-भरकम लागत से बन रही एक सड़क की गुणवत्ता को लेकर स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों का गुस्सा इस कदर फूटा कि मौके पर जमकर हंगामा और मारपीट हो गई। जनता के आक्रोश के बाद जब नगर निगम के अधिकारी मौके पर पहुंचे और जांच शुरू की, तो शुरुआती जांच में ही भ्रष्टाचार की पोल खुल गई।
यह पूरा सनसनीखेज मामला ग्वालियर के सिंहपुर रोड का है, जहाँ 1.74 करोड़ रुपये की लागत से नई सड़क का निर्माण कराया जा रहा है। सड़क निर्माण में धांधली और खराब गुणवत्ता की लगातार मिल रही शिकायतों के बाद स्थानीय पार्षद, जनप्रतिनिधि और रहवासी खुद निरीक्षण करने मौके पर पहुंचे थे।
मौके पर जब लोगों ने काम की गुणवत्ता पर सवाल उठाए, तो ठेकेदार फर्म के कर्मचारियों ने बहस शुरू कर दी। देखते ही देखते यह बहस हिंसक झड़प में बदल गई। आरोप है कि आक्रोशित स्थानीय लोगों ने ठेकेदार पक्ष के कर्मचारियों को सड़क पर दौड़ा-दौड़ाकर पीट दिया।
हंगामे और मारपीट की सूचना मिलते ही नगर निगम के कार्यपालन यंत्री (EE), उपयंत्री (Sub Engineer) और पूरा इंजीनियरिंग अमला आनन-फानन में सिंहपुर रोड पहुंचा। अधिकारियों ने तुरंत सड़क की ‘कोर कटिंग’ कराई। शुरुआती सरकारी जांच में ही यह साफ हो गया कि कई स्थानों पर सड़क की मोटाई तय मापदंडों और मानकों से काफी कम थी। यानी सीधे तौर पर जनता के पैसे की बर्बादी और घोटाले का खेल चल रहा था।
शुरुआती जांच में ही धांधली पकड़े जाने के बाद नगर निगम के अधिकारियों ने तुरंत सड़क का निर्माण कार्य रुकवा दिया है। अधिकारियों ने सड़क के सैंपल सील कर लैब टेस्टिंग के लिए भेज दिए हैं। नगर निगम प्रशासन का साफ कहना है कि लैब से अंतिम रिपोर्ट आने के बाद यदि गुणवत्ता में और कमी पाई जाती है, तो संबंधित ठेकेदार फर्म के खिलाफ एफआईआर (FIR) समेत सख्त से सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

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गरिमा के जन्म के 15 मिनिट बाद का फोटो
गरिमा के जन्म के 15 मिनिट बाद का फोटो
गरिमा के 1 वर्ष बाद का फोटो
गरिमा के 1 वर्ष बाद का फोटो
गरिमा के 2 वर्ष बाद का फोटो
गरिमा के 2 वर्ष बाद का फोटो
बीमार होने के बाद भोपाल अस्पताल मे भर्ती गरिमा
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हाई कोर्ट के आदेश के बाद गरिमा के शव को जमीन से निकालते हुऐ
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निकालने के बाद गरिमा के शव को पैक कर जॉच के लिऐ भेजा गया
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दोषी डॉक्टर के खिलाफ मामला कायम कराने के लिऐ पुलिस अधिक्षक से मिले पत्रकार
दोषी डॉक्टर के खिलाफ मामला कायम कराने के लिऐ पुलिस अधिक्षक से मिले पत्रकार
गरिमा के शव की जॉच होने के बाद पुनः उसी स्थान पर चबूतरा का निर्माण किया गया
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पूजा स्थल मे गरिमा
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