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इंदौर नगर निगम के बहुचर्चित फर्जी बिल घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए मामले के कथित मास्टरमाइंड और पूर्व सहायक यंत्री अभय राठौर सहित तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। ईडी ने अभय राठौर, मोहम्मद जाकिर और राहुल वडेरा को हिरासत में लेकर मंगलवार को पीएमएलए कोर्ट में पेश किया, जहां से तीनों को तीन दिन की ईडी रिमांड पर भेज दिया गया। सूत्रों के मुताबिक जांच एजेंसी को अब तक 92 करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितताओं और हेराफेरी के ठोस साक्ष्य मिले हैं। मामले में अगली सुनवाई 5 जून को होगी।
जांच में सामने आया है कि घोटाले को अंजाम देने के लिए पुराने और पूर्ण हो चुके कार्यों को नया दर्शाकर फर्जी वर्क ऑर्डर और भुगतान फाइलें तैयार की गईं। आरोपियों ने अधिकारियों के लॉगिन आईडी, पासवर्ड और सिस्टम एक्सेस का दुरुपयोग करते हुए फर्जी बिलों को लेखा शाखा तक पहुंचाया और भुगतान भी करवा लिया। जांच एजेंसियों के अनुसार बिना कार्य किए तकनीकी स्वीकृति, ऑडिट और भुगतान की पूरी प्रक्रिया कागजों में पूरी कर दी गई थी। इसके बाद करोड़ों रुपये ठेकेदारों के खातों में ट्रांसफर कर दिए गए।
साल 2024 में नगर निगम के ड्रेनेज विभाग में पुराने कार्यों के नाम पर भुगतान की फाइलें सामने आने के बाद मामले का खुलासा हुआ था। प्रारंभिक जांच में करीब 28 करोड़ रुपये के ऐसे भुगतान सामने आए थे, जिनके पीछे वास्तविक कार्य नहीं मिला। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, घोटाले का दायरा बढ़ता गया और करोड़ों रुपये की अतिरिक्त गड़बड़ियां सामने आने लगीं।
मनी लॉन्ड्रिंग के पहलू से जांच कर रही ईडी ने जुलाई 2025 में लगभग 34 करोड़ रुपये मूल्य की 43 अचल संपत्तियां अटैच की थीं। इनमें मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में स्थित मकान, कृषि भूमि और अन्य संपत्तियां शामिल हैं। ईडी का मानना है कि घोटाले से अर्जित धन को विभिन्न संपत्तियों में निवेश किया गया था।
शुरुआती जांच में करीब 107 करोड़ रुपये के गबन की आशंका जताई गई थी। हालांकि अदालत में ईडी ने फिलहाल 92 करोड़ रुपये की अनियमितताओं की जानकारी प्रस्तुत की है। जांच एजेंसी के अनुसार पूर्व सहायक यंत्री अभय राठौर इस पूरे नेटवर्क का प्रमुख सूत्रधार था। आरोप है कि उसने ठेकेदारों के साथ मिलकर फर्जी दस्तावेजों और हस्ताक्षरों के आधार पर करोड़ों रुपये का भुगतान करवाया।
घोटाले की जांच के शुरुआती दौर में निगम से कई महत्वपूर्ण फाइलें गायब होने की जानकारी भी सामने आई थी। जो दस्तावेज मिले, उनमें मौजूद हस्ताक्षरों की जांच कराई गई तो कई अधिकारियों के हस्ताक्षर मेल नहीं खाए। सबसे बड़ा सवाल यह भी बना हुआ है कि अधिकारियों की मूल आईडी और पासवर्ड आरोपियों तक कैसे पहुंचे। हालांकि जांच के दौरान कुछ अधिकारियों को क्लीन चिट भी मिल चुकी है।
जांच एजेंसियों के अनुसार संदिग्ध 186 फाइलों की जांच की गई, जिनमें 80 प्रतिशत से अधिक फाइलों में गड़बड़ी और फर्जीवाड़ा पाया गया। इनमें ट्रेंचिंग ग्राउंड से जुड़ी करीब 4 करोड़ रुपये की फाइल भी शामिल बताई जा रही है। फर्जी वर्क ऑर्डर, नकली मापन पुस्तिकाएं (एमबी), फर्जी बिल और भुगतान दस्तावेजों के जरिए पूरे घोटाले को अंजाम दिया गया। हैरत की बात यह है कि करोड़ों रुपये का भुगतान होने के बावजूद लंबे समय तक किसी स्तर पर इसकी भनक नहीं लगी।

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गजब हो गया: 1.31 करोड़ की नई SDM बिल्डिंग में दरारें, एक साल में खुली निर्माण की पोल
हरदा। जिला मुख्यालय की तवा कॉलोनी में करीब 12 माह पहले शुरू हुआ नया एसडीएम कार्यालय भवन अब भ्रष्टाचार और लापरवाही के आरोपों के घेरे में है। लगभग 1 करोड़ 31 लाख रुपए की लागत से निर्मित इस भवन की दीवारों में 6 से 8 इंच चौड़ी दरारें आ गई हैं, जिससे किसी बड़े हादसे की आशंका बनी हुई है।
भवन के दोनों किनारों और पिछले हिस्से में स्ट्रक्चरल जोड़ खुल गए हैं। सबसे चिंताजनक स्थिति बेसमेंट और ऊपरी हिस्से के बीच बढ़ते गैप की है। तकनीकी विशेषज्ञों के अनुसार यह स्थिति नींव धंसने या निर्माण में घटिया सामग्री के उपयोग का संकेत हो सकती है। इस भवन का भूमिपूजन 19 अप्रैल 2023 को तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और प्रभारी मंत्री तुलसी सिलावट द्वारा किया गया था। निर्माण कार्य की निगरानी का जिम्मा पीआईयू को सौंपा गया था, लेकिन अब गुणवत्ता नियंत्रण पर सवाल उठ रहे हैं।
मामला सामने आने के बाद कलेक्टर सिद्धार्थ जैन ने पीआईयू के माध्यम से ठेकेदार पर दंडात्मक कार्रवाई और तत्काल मरम्मत के निर्देश दिए हैं। एसडीएम अशोक डेहरिया ने भवन की स्थिति को गंभीर बताते हुए जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदार के खिलाफ जांच तथा एफआईआर की मांग की है।
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व्यापारी हत्याकांड में बड़ी सफलता: मुख्य आरोपी के पिता-पत्नी पकड़ाए
इंदौर। चर्चित गुलाब बाग पेट्रोल पंप हत्याकांड में लसूडिया पुलिस को एक और बड़ी सफलता मिली है। हत्या के मामले में फरार चल रहे मुख्य आरोपी चंद्रकांत उर्फ डीलू लहारिया को संरक्षण देने और उसकी गिरफ्तारी से बचाने में सहयोग करने के आरोप में पुलिस ने उसकी पत्नी और पिता को गिरफ्तार किया है। दोनों आरोपियों को न्यायालय में पेश किया गया है।
दरअसल, इंदौर के लसूडिया थाना क्षेत्र में 21 मई को गुलाब बाग पेट्रोल पंप के सामने हुए अभितेंद्र उर्फ अभि तोमर हत्याकांड की जांच लगातार जारी है। इस मामले में पुलिस पहले ही पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है, जबकि मुख्य आरोपी चंद्रकांत उर्फ डीलू लहारिया अब भी फरार है।
पुलिस जांच के दौरान सामने आया कि फरार आरोपी को उसकी पत्नी प्रीति लहारिया और पिता राजेंद्र कुमार शर्मा की ओर से संरक्षण दिया जा रहा था। पुलिस के अनुसार दोनों को घटना की जानकारी होने के बावजूद उन्होंने आरोपी को छिपाने और गिरफ्तारी से बचाने में सहयोग किया। इसी दौरान पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली कि आरोपी की पत्नी और पिता अपने पुत्र एवं पोते से मिलने इंदौर आने वाले हैं।
सूचना मिलते ही लसूडिया थाना पुलिस ने सक्रियता दिखाते हुए देवगुराडिया क्षेत्र में घेराबंदी की और दोनों को हिरासत में ले लिया। पुलिस का कहना है कि फरार मुख्य आरोपी की तलाश लगातार जारी है और उसे जल्द गिरफ्तार करने के प्रयास किए जा रहे हैं।

छिंदवाड़ा। मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा के देहात थाना क्षेत्र की प्रियदर्शनी कॉलोनी में पुलिस लाइन में पदस्थ महिला प्रधान आरक्षक का जला हुआ शव उनके ही मकान में मिला है। वारदात के बाद इलाके में सनसनी फ़ैल गई। सूचना मिलते ही पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे और जांच शुरू कर दी है।
जानकारी के अनुसार महिला प्रधान आरक्षक दीपा नेगी सुबह अपनी मां से कहकर घर से निकली थी कि पेट्रोल डलवाने जा रही हूं , उनका मकान कुछ ही दूरी पर था। वहीं उनका जला हुआ शव बरामद हुआ है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पूरे मामले की जांच की जा रही है, अभी इस पर कुछ भी कहना संभव नहीं है। जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे उनके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
घटना की सूचना मिलते ही आसपास के इलाके में अफरा-तफरी मच गई। दीपा नेगी स्थानीय पुलिस बल में पदस्थ थीं और उनकी अचानक इस तरह मौत ने सभी को स्तब्ध कर दिया है। पुलिस आत्महत्या, हत्या या किसी अन्य कारण की आशंका जताते हुए हर पहलू से जांच कर रही है। फिलहाल मामले की जांच जारी है।
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कब्र से निकाली गई 2 साल की मासूम की लाश, पोस्टमार्टम के लिए होगा खुलासा, गलत इलाज का आरोप
इंदौर। मध्य प्रदेश के इंदौर में डॉक्टर की लापरवाही से हुई 2 साल की बच्ची की मौत के बाद उसे दफना दिया गया था। लेकिन आज इसे दोबारा कब्र खुदवाकर निकाला गया है। जिसके बाद पोस्टमार्टम में जांच के लिए भेज दिया गया है।
बता दें कि उल्टी-दस्त के बाद बच्ची का तीन अस्पतालों में इलाज चला था। लेकिन अचानक उसकी मौत हो गई थी जिसके बाद इलाज में लापरवाही के आरोप लगे थे। परिजनों ने अस्पताल पर गलत उपचार का आरोप लगाया था जिस पर पुलिस ने मर्ग दर्ज कर इसकी जांच शुरू कर दी।
एसडीएम की अनुमति के बाद शव को कब्र से बाहर निकालकर पांच डॉक्टरों के पैनल ने पोस्टमार्टम किया। पोस्टमार्टम के दौरान विसरा सुरक्षित रख लिया है। अब दवाओं और इलाज की जांच होगी। भंवरकुआं पुलिस तीनों अस्पतालों से उपचार संबंधी दस्तावेज जुटा रही है। जांच के बाद खुलासा होगा।
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कागज चेकिंग के दौरान भड़का शख्स, पुलिसकर्मी को जड़ा थप्पड़, जांच में हुआ बड़ा खुलासा
धार। मध्य प्रदेश के धार में बाइक के कागज चेक करने पर विवाद हो गया। विवाद इतना बढ़ा कि युवक ने पुलिसकर्मी को थप्पड़ तक जड़ दिए जिससे पुलिसकर्मी नीचे गिर पड़ा। इस घटना के बाद मौके पर तनाव की स्थिति पैदा हो गई। इससे जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।
घटना मंगलवार शाम की बताई जा रही है जब मांडव नाका स्थित रिलायंस पेट्रोल पंप के पास शाम को बाइक के कागजों की जांच के दौरान शुरू हुआ विवाद देखते ही देखते बड़े हंगामे में बदल गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, पुलिसकर्मियों ने एक बाइक सवार युवक को रोककर उससे वाहन के दस्तावेज मांगे। लेकिन बातचीत के दौरान दोनों पक्षों के बीच विवाद बढ़ गया। इसी दौरान युवक ने कथित रूप से एक पुलिसकर्मी को जमकर थप्पड़ जड़ दिया जिसके चलते पुलिसकर्मी नीचे गिर गया। इसके बाद स्थिति और बिगड़ गई।
आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने युवक के साथ मारपीट की। वहीं बाइक पर मौजूद महिलाओं के साथ भी धक्का-मुक्की की गई। घटना के समय महिलाओं के साथ छोटे बच्चे भी मौजूद थे, जो पूरे घटनाक्रम के दौरान डरे-सहमे नजर आए। घटना का वायरल वीडियो भी सामने आया है, जिसमें सड़क पर जमकर हंगामे दिखाई दे रहा है। वीडियो में महिलाओं की चीख-पुकार और धक्का-मुक्की के दृश्य भी दिखाई दे रहा है। वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और घटना को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं चल रही हैं।
नगर पुलिस अधीक्षक सुजावल जग्गा ने बताया कि पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी कि एक एक व्यक्ति बाइक से जा रहा है जो बाइक सही से नहीं चला रहा है और उसके नंबर प्लेट संदिग्ध लग रही है। उसी की चेकिंग के लिए बल भेजा गया था। जब बाइक सवार को रोका गया और कागजात मांगे तो उसने पुलिसकर्मियों को धक्का देकर भागने की कोशिश की। बदतमीजी को संदिग्ध मानते हुए उसका मेडिकल करवाया गया जिसमे वह शराब के नशे में पाया गया। उसके खिलाफ 185 मोटर व्हीकल एक्ट के तहत कार्रवाई की गई है वही 170 126 बीएनएस की कार्रवाई प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की गई है। मोटर व्हीकल का डेटाबेस चेक करवाया गया तो यह बात सामने आई कि उसकी नंबर प्लेट है दूसरे गाड़ी की है जबकि वाहन उसका दूसरा वाहन था। इसे भी संज्ञान में लेते हुए अपराध पंजीबद्ध किया गया है।

दिल्ली के मालवीय नगर स्थित लेमन ग्रीन होटल में लगी भीषण आग ने 21 लोगों की जान ले ली। इस दर्दनाक हादसे ने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया है। आग इतनी तेजी से फैली कि होटल में फंसे लोगों को जान बचाने के लिए खिड़कियों और ऊपरी मंजिलों से कूदना पड़ा।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, सुबह करीब 9:30 बजे होटल में आग लगी थी। कुछ ही देर में आग ने पूरी इमारत को अपनी चपेट में ले लिया। धुआं और लपटें इतनी ज्यादा थीं कि अंदर मौजूद लोगों के लिए बाहर निकलना मुश्किल हो गया।
घटनास्थल पर मौजूद ओम नाम के युवक ने बताया कि वह अपने दोस्त के साथ स्कूटी से जा रहा था, तभी उसने होटल में आग लगी देखी। उसके अनुसार कई लोग जान बचाने के लिए खिड़कियों के शीशे तोड़कर नीचे कूद रहे थे। उसने 4 से 5 लोगों को इमारत से कूदते देखा। एक व्यक्ति के कूदने पर उसका पैर बुरी तरह टूट गया था।
एक अन्य प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि शुरुआत में आग कम थी, लेकिन धीरे-धीरे पूरी इमारत में फैल गई। उन्होंने बताया कि होटल में फंसे लोगों के पास बाहर निकलने का कोई सुरक्षित रास्ता नहीं बचा था। ऐसे में स्थानीय लोगों ने सड़क पर गद्दे बिछाकर लोगों को कूदने में मदद की। एक महिला अपने छोटे बच्चे को गोद में लेकर तीसरी मंजिल से कूद गई। नीचे गिरने से उसका पैर फ्रैक्चर हो गया। महिला खुद बता रही थी कि उसका पैर टूट चुका है।
आग बढ़ने के साथ ही होटल के अंदर फंसे लोग घबराकर एक-एक कर नीचे कूदने लगे। आसपास के लोगों ने उन्हें बचाने की कोशिश की, लेकिन हालात लगातार बिगड़ते गए।
कुछ देर बाद दमकल विभाग की गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया गया। सुरक्षा के मद्देनजर पूरे इलाके को घेर लिया गया, जबकि बड़ी संख्या में लोग घटनास्थल पर जमा हो गए।
इस भीषण अग्निकांड में 21 लोगों की मौत हो गई। हादसे की भयावह तस्वीरें और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान पूरे मामले की गंभीरता को बयां कर रहे हैं। फिलहाल आग लगने के कारणों की जांच की जा रही है और प्रशासन राहत कार्य में जुटा हुआ है।
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TMC सांसद अभिषेक बनर्जी के घर पहुंची ED की टीम : बंगाल के चर्चित भर्ती घोटाले में नया मोड़
पश्चिम बंगाल के चर्चित प्राथमिक शिक्षक भर्ती घोटाले की जांच में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। इसी सिलसिले में ईडी की टीम मंगलवार को तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सांसद अभिषेक बनर्जी के कोलकाता स्थित आवास पर पहुंची।
सूत्रों के मुताबिक, शिक्षक भर्ती घोटाले से जुड़े कुछ पहलुओं को लेकर ईडी अभिषेक बनर्जी से पूछताछ करना चाहती है। जांच एजेंसी जल्द ही उन्हें आधिकारिक समन जारी कर सकती है। बताया जा रहा है कि जांच के दौरान मिले कुछ दस्तावेजों और तथ्यों के आधार पर एजेंसी ने उनसे पूछताछ की जरूरत महसूस की है।
जानकारी के अनुसार, ईडी ने पूछताछ के लिए 16 जून की तारीख तय की है। एजेंसी समन जारी करने की प्रक्रिया में जुटी हुई है। जांच अधिकारी भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और उससे जुड़े वित्तीय लेनदेन की भी जांच कर रहे हैं।
ईडी का कहना है कि शिक्षक भर्ती घोटाले की जांच के दौरान कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आई हैं। इन्हीं के आधार पर मामले से जुड़े लोगों से लगातार पूछताछ की जा रही है। एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि भर्ती प्रक्रिया में किसी तरह की गड़बड़ी या वित्तीय अनियमितता हुई थी या नहीं।
गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल का शिक्षक भर्ती घोटाला लंबे समय से जांच एजेंसियों के रडार पर है। इस मामले में पहले भी कई नेताओं, अधिकारियों और भर्ती प्रक्रिया से जुड़े अन्य लोगों से पूछताछ की जा चुकी है। अब ईडी की नजर इस मामले से जुड़े अन्य पहलुओं पर भी है और जांच लगातार आगे बढ़ रही है।
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कॉकरोच जनता पार्टी को सोनम वांगचुक का मिला साथ, 6 जून को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन में होंगे शामिल
कॉकरोच जनता पार्टी में शामिल होने के लिए कई ऐसे राजनेता है जो अपनी इच्छा बता चुके चुके है, पर अभी तक से यही लग रहा है कि सिर्फ इस पार्टी का मकसद केवल सोशल मीडिया पर ट्रेंड में आकर सिर्फ अटेन्शन पाना था. लेकिन अब लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देने के लिए अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन करनेवाले भारतीय ऐक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने इसमे शामिल होने की इच्छा जताई है. सोनम वांगचुक ने ऐलान किया है कि अगर शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान 5 जून तक इस्तीफा नहीं देते है तो कॉकरोच जनता पार्टी के साथ खड़े होंगे.
उन्होंने ने सोशल मीडिया पर कहा कि अगर हम नहीं तो कौन? अभी नहीं तो कब? अगर 5 जून तक हालात नहीं सुधरते है तो 6 जून को कॉकरोच जनता पार्टी को सपोर्ट करेंगे.
भारतीय ऐक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की मांगों और विचारधारा का समर्थन किया है। सोनवांगचुक ने आगे कहा है कि मुझे कॉकरोच जनता पार्टी के फाउंडर अभिजीत दिपके से बात करके ऐसा लगा कि उनकी सोच गलत नहीं है, वह अच्छे मंशा के साथ एक देशप्रेमी की तरह देश में बदलाव चाहते है.
भारतीय ऐक्टिविस्ट ने आगे कहा कि अभिजीत 6 जून को दिल्ली में लोगों को बुला रहे हैं, अगर 5 जून तक शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान इस्तीफा नहीं देते है तो मैं भी जंतर-मंतर पर CJP के प्रदर्शन में शामिल होऊंगा. NEET-UG परीक्षा के पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में व्याप्त गंभीर समस्याओं को भी उन्होंने अपनी मांगों में जोड़ा है.
बताते चले कि कॉकरोच जनता पार्टी के फाउंडर अभिजीत दिपके अमेरिका से भारत आएंगे. उसके बाद वे एयरपोर्ट से सीधे पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन जाएंगे और प्रदर्शन की इजाजत मांगेंगे. अभिजीत दिपके ने सोशल मीडिया पर बताया था कि वे 1 जून को जंतर-मंतर पर शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन करेंगे. कॉकरोच जनता पार्टी के फाउंडर किसान आंदोलन से लेकर महंगाई जैसे राजनीतिक मुद्दों पर X अकाउंट पर केंद्र सरकार और पीएम पर निशाना साधते रहे हैं.

रीवा। मध्य प्रदेश के रीवा जिले से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। जहां लोगों की सेवा के लिए इस्तेमाल होने वाला शासकीय शव वाहन कथित तौर पर बकरी चोरी में उपयोग किया गया। देर रात हुई इस घटना के बाद ग्रामीणों में आक्रोश फैल गया। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए शव वाहन के चालक को गिरफ्तार कर लिया है और चोरी की गई बकरियों को बरामद कर लिया है।
मामला गुढ़ थाना क्षेत्र के ग्राम पोखरा का है। बताया जा रहा है कि 28 मई की रात अज्ञात लोगों ने घर के बाहर बंधी छह बकरियों को चोरी कर लिया। घटना के समय परिवार के सदस्य घर के अंदर सो रहे थे। देर रात एक वाहन गांव में पहुंचा और बकरियों को उसमें भरकर ले जाया गया। आहट मिलने पर परिजन जागे और वाहन का पीछा भी किया, लेकिन आरोपी मौके से फरार हो गए।
घटना की शिकायत मिलने के बाद गुढ़ पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की। जांच के दौरान ग्रामीणों ने पुलिस को बताया कि चोरी में इस्तेमाल वाहन एंबुलेंस या शव वाहन जैसा दिखाई दे रहा था। पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों और पूछताछ के आधार पर संदेहियों तक पहुंच बनाई, जिसके बाद शासकीय शव वाहन के चालक राजेश मिश्रा का नाम सामने आया।
पुलिस ने आरोपी चालक और उसके एक साथी को हिरासत में लेकर पूछताछ की। पूछताछ में दोनों ने कथित तौर पर चोरी की वारदात में शामिल होने की बात स्वीकार की। आरोपियों की निशानदेही पर चोरी की गई छह बकरियां सीधी जिले के रामपुर नैकिन क्षेत्र के पिपराव गांव से बरामद की गईं। साथ ही चोरी में प्रयुक्त शासकीय शव वाहन को भी जब्त कर लिया गया है।
पुलिस के अनुसार प्रारंभिक जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि इस वारदात में एक संगठित गिरोह शामिल हो सकता है। पूछताछ के दौरान कुछ अन्य संदिग्धों के नाम भी सामने आए हैं, जिनकी तलाश की जा रही है। डीएसपी उदित मिश्रा कहना है कि मामले की विस्तृत जांच जारी है और जल्द ही अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार किया जाएगा। सरकारी संसाधनों के कथित दुरुपयोग से जुड़ा यह मामला कई सवाल खड़े कर रहा है। फिलहाल पुलिस ने मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर चोरी की गई बकरियां बरामद कर ली हैं, वहीं फरार आरोपियों की तलाश जारी है।

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एमपी में न्याय व्यवस्था का डिजिटल युग शुरू होने की तैयारी, अब मोबाइल जब्त करने की जरूरत नहीं
जबलपुर. मध्य प्रदेश न्यायिक और प्रशासनिक सुधारों के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक कदम उठाने की तैयारी में है. प्रदेश में इलेक्ट्रानिक रिकॉर्ड्स रूल्स-2026 को लागू करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच चुकी है. नियमों को अधिसूचित किए जाने के बाद मध्य प्रदेश देश का पहला ऐसा राज्य बन सकता है, जहां डिजिटल साक्ष्यों के संग्रहण, संरक्षण, प्रमाणीकरण और न्यायालय में प्रस्तुतिकरण की संपूर्ण व्यवस्था स्पष्ट कानूनी ढांचे के तहत संचालित होगी. इस पहल को न्याय व्यवस्था के डिजिटल युग में प्रवेश का महत्वपूर्ण अध्याय माना जा रहा है, क्योंकि अब अदालतों में केवल दस्तावेज और गवाह ही नहीं, बल्कि डेटा भी सच्चाई का महत्वपूर्ण साक्ष्य बनेगा.
तकनीकी क्रांति के इस दौर में अपराध, लेन-देन, संवाद और सामाजिक गतिविधियों का बड़ा हिस्सा डिजिटल माध्यमों पर स्थानांतरित हो चुका है. मोबाइल फोन, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, ई-मेल, सीसीटीवी कैमरे, ऑनलाइन बैंकिंग और विभिन्न डिजिटल उपकरण आज घटनाओं के प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष गवाह बन चुके हैं. ऐसे में न्यायालयों के समक्ष प्रस्तुत होने वाले साक्ष्यों का स्वरूप भी तेजी से बदल रहा है. अब सच केवल कागजों के पुलिंदों और प्रत्यक्षदर्शियों की यादों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि वह वीडियो क्लिप, चैट संदेश, ऑडियो रिकॉर्डिंग और डिजिटल ट्रांजेक्शन के रूप में भी सामने आ रहा है.
इलेक्ट्रानिक रिकॉर्ड्स रूल्स-2026 लागू होने के बाद आम नागरिकों को सबसे बड़ी राहत यह मिलेगी कि उन्हें डिजिटल साक्ष्य प्रस्तुत करने के लिए अपना मोबाइल फोन या अन्य इलेक्ट्रानिक उपकरण न्यायालय अथवा जांच एजेंसियों के पास जमा नहीं कराना पड़ेगा. वर्तमान व्यवस्था में कई मामलों में व्यक्ति को अपना मोबाइल लंबे समय तक जांच एजेंसियों के पास छोड़ना पड़ता है, जिससे उसकी व्यक्तिगत और व्यावसायिक गतिविधियां प्रभावित होती हैं. नए नियमों के तहत प्रमाणित डिजिटल रिकॉर्ड ही साक्ष्य के रूप में स्वीकार किए जाएंगे, जिससे व्यक्ति अपने उपकरण का उपयोग जारी रख सकेगा और न्यायिक प्रक्रिया भी प्रभावित नहीं होगी.
नियमों के अनुसार किसी भी डिजिटल साक्ष्य को निर्धारित पोर्टल पर अपलोड किए जाने के साथ ही उसे एक विशिष्ट पहचान संख्या और हैश वैल्यू प्रदान की जाएगी. हैश वैल्यू डिजिटल दुनिया में किसी दस्तावेज या फाइल की विशिष्ट पहचान मानी जाती है. विशेषज्ञों के अनुसार यदि किसी वीडियो, फोटो, दस्तावेज या ऑडियो फाइल में एक अक्षर, एक पिक्सेल अथवा एक बिंदु का भी परिवर्तन किया जाता है तो उसकी हैश वैल्यू बदल जाती है. इससे रिकॉर्ड के साथ छेड़छाड़ की संभावना लगभग समाप्त हो जाती है और अदालत के सामने प्रस्तुत साक्ष्य की प्रामाणिकता सुनिश्चित होती है.
न्यायिक अधिकारियों का मानना है कि नए आपराधिक कानूनों के लागू होने के बाद इलेक्ट्रानिक साक्ष्यों का महत्व पहले की तुलना में कहीं अधिक बढ़ गया है. अपराध स्थलों की वीडियोग्राफी, सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल कॉल रिकॉर्ड, लोकेशन डेटा, बैंकिंग ट्रांजेक्शन, सोशल मीडिया संवाद और डिजिटल दस्तावेज अब जांच और सुनवाई प्रक्रिया का अभिन्न हिस्सा बन चुके हैं. इतना ही नहीं, संपत्ति विवाद, व्यावसायिक अनुबंध, पारिवारिक मामलों और अन्य सिविल विवादों में भी व्हाट्सएप चैट, ई-मेल संवाद और डिजिटल रिकॉर्ड महत्वपूर्ण साक्ष्य के रूप में सामने आ रहे हैं. ऐसे में इन रिकॉर्ड्स की विश्वसनीयता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए स्पष्ट नियमों की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी.
नए नियमों की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह भी होगी कि डिजिटल साक्ष्य केवल एक वीडियो, फोटो या दस्तावेज के रूप में सुरक्षित नहीं रहेगा, बल्कि उसे एक संपूर्ण डिजिटल पैकेज के रूप में संरक्षित किया जाएगा. इस पैकेज में रिकॉर्ड अपलोड किए जाने का समय, हैश वैल्यू, तकनीकी विवरण और उससे संबंधित अन्य प्रमाणिक जानकारियां भी शामिल रहेंगी. यही पैकेज मूल इलेक्ट्रानिक रिकॉर्ड माना जाएगा. इससे साक्ष्य की श्रृंखला यानी ‘चेन ऑफ कस्टडी’ को सुरक्षित रखा जा सकेगा और अदालत में उसकी प्रमाणिकता पर उठने वाले विवादों में कमी आएगी.
व्यवस्था को अधिक सुलभ और जनसुलभ बनाने के लिए ई-सेवा केंद्रों को भी महत्वपूर्ण भूमिका दी गई है. पक्षकार, अधिवक्ता और अन्य संबंधित व्यक्ति अधिकृत केंद्रों के माध्यम से अपने डिजिटल साक्ष्य अपलोड कर सकेंगे. इससे तकनीकी जानकारी के अभाव में भी लोग आसानी से न्यायिक प्रक्रिया में भाग ले सकेंगे. ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के नागरिकों को भी इस सुविधा का लाभ मिलने की उम्मीद है.
संवेदनशील मामलों में गोपनीयता बनाए रखने पर भी विशेष ध्यान दिया गया है. विशेष रूप से यौन अपराधों और महिलाओं से जुड़े मामलों में डिजिटल रिकॉर्ड को सामान्य पोर्टल पर सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं कराया जाएगा. ऐसे रिकॉर्ड्स तक पहुंच केवल न्यायालय के नियंत्रण में रहेगी और आवश्यकता पड़ने पर निरीक्षण की सीमित अनुमति दी जा सकेगी. इससे पीड़ितों की निजता और सम्मान की रक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी.
इलेक्ट्रानिक साक्ष्यों के संबंध में लंबे समय से एक महत्वपूर्ण प्रश्न यह भी बना हुआ था कि डिजिटल रिकॉर्ड की तकनीकी जांच और सत्यापन करने वाला विशेषज्ञ कौन होगा. कई मामलों में इस विषय को लेकर न्यायालयों और अधिवक्ताओं के समक्ष व्यावहारिक कठिनाइयां उत्पन्न होती थीं. नए नियम इस अस्पष्टता को दूर करते हुए विशेषज्ञ की स्पष्ट परिभाषा और उसकी भूमिका निर्धारित करते हैं. इससे न्यायिक प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनने की उम्मीद है.
कानून और तकनीक के इस संगम को न्याय व्यवस्था के भविष्य की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है. डिजिटल रिकॉर्ड्स के बढ़ते उपयोग के बीच यह पहल न केवल न्यायिक प्रक्रिया को तेज, पारदर्शी और विश्वसनीय बनाएगी, बल्कि नागरिकों की सुविधा और अधिकारों की भी रक्षा करेगी. यदि मध्य प्रदेश इस व्यवस्था को सफलतापूर्वक लागू करने में सफल होता है तो यह मॉडल अन्य राज्यों के लिए भी मार्गदर्शक बन सकता है. बदलते समय के साथ अब अदालतों में केवल इंसानों की गवाही ही नहीं, बल्कि डेटा भी सच बोलता दिखाई देगा और न्याय की यात्रा तकनीक का हाथ थामकर भविष्य की ओर आगे बढ़ेगी.
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बिल्ली के पंजे से पहली बार फैला रेबीज, 13 साल के मासूम की मौत, दिमाग तक फैल गया था गंभीर इंफेक्शन
ग्वालियर। मध्य प्रदेश में ग्वालियर में बिल्ली के पंजा मारने से फैले रेबीज से 13 साल के मासूम की मौत हो गई। यह पहली बार है जब बिल्ली के पंजा मारने की वजह से किसी को रेबीज हो गया।
दरअसल, शिवपुरी जिले के करैरा 13 साल के बच्चे को बिल्ली ने पंजा मार दिया था। लक्षण दिखने पर उसे ग्वालियर के शासकीय कमलाराजा अस्पताल में मासूम को भर्ती कराया था। जांच में पता चला कि उसे इंफेक्शन हो गया है।
इंफेक्शन इतना बढ़ गया कि दिमाग तक फैल गया। बता दें कि इस दुर्लभ घटना से डॉक्टर भी हैरान हैं। गौरतलब है कि 2026 में अभी तक 8 रैबीज से मौत हो चुकी है।
PSM विभागाध्यक्ष डॉ. मनोज बंसल ने बताया कि केस हिस्ट्री के मुताबिक बच्चे को बाल रोग विभाग रैफर किया गया। संपर्क में रहे परिजन को भी उन्होंने एआरवी लगवाने की सलाह दी है। कोई भी पशु के काटने या पंजा मारने पर एआरवी जरूर लगवाना चाहिए। किसी अंग पर चाट लग जाए या फिर उसकी लार गिर जाए तो उसे साफ करें।

खरगोन। मध्य प्रदेश के खरगोन जिले में एक युवक की मौत पर बवाल मच गया। संदिग्ध परिस्तिथियों में युवक की मौत से ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा और पुलिस पर हमला कर दिया। ग्रामीणों ने पुलिस को दौड़ा-दौड़ाकर पीटा। इस पूरी घटना का वीडियो भी सामने आया है, जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। यह पूरा मामला चैनपुर थाना क्षेत्र का बताया जा रहा है।
मिली जानकारी के मुताबिक, चैनपुर थाना क्षेत्र के ग्राम दामखेड़ा में एक युवक का शव घर में फांसी के फंदे पर लटका मिला। जिसके बाद माहौल तनावपूर्ण हो गया। परिजनों ने युवक की हत्या की आशंका जताते हुए गांव के ही एक युवक पर जादू-टोना करने का आरोप लगाया और दामखेड़ा फाटे पर चक्काजाम कर प्रदर्शन शुरू कर दिया। प्रदर्शन के दौरान स्थिति अचानक बिगड़ गई। आक्रोशित ग्रामीणों और पुलिस के बीच झड़प हो गई।
इस घटना में पुलिसकर्मियों और अधिकारियों के साथ मारपीट की जानकारी सामने आई है, जिसका वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। हालात को काबू में करने के लिए चार थानों का पुलिस बल मौके पर तैनात किया गया। पुलिस मामले की जांच कर रही है और मृतक के परिजनों की शिकायत के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है।
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Twisha Sharma Case : गिरिबाला सिंह और समर्थ सिंह को भेजा जेल, भोपाल कोर्ट का बड़ा फैसला; CBI ने नहीं मांगी रिमांड
भोपाल के चर्चित ट्विशा शर्मा डेथ केस में जिला अदालत ने मंगलवार (2 जून) को बड़ा फैसला सुनाया। अदालत ने पूर्व जिला जज गिरिबाला सिंह और उनके बेटे समर्थ सिंह को 16 जून तक न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया है। यह आदेश सेशन जज शोभना भालवी की अदालत ने दिया।
इससे पहले 29 मई को अदालत ने दोनों आरोपियों को पांच दिन की सीबीआई रिमांड पर भेजा था। मंगलवार को रिमांड अवधि पूरी होने के बाद सीबीआई ने दोनों को कोर्ट में पेश किया। सुनवाई के बाद अदालत ने उन्हें 16 जून तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया।
सीबीआई ने 27 मई को भोपाल के कटारा हिल्स स्थित गिरिबाला सिंह के घर पर सात घंटे से अधिक पूछताछ की थी। इसके बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया। उनकी गिरफ्तारी उस समय हुई जब मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने उनकी अंतरिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी।
ट्विशा शर्मा की मौत के बाद समर्थ सिंह करीब एक सप्ताह तक लापता रहा था। इसके बाद भोपाल पुलिस ने 22 मई को उसे जबलपुर से गिरफ्तार किया था। 23 मई को उसे न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी (JMFC) की अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे पुलिस रिमांड पर भेजा गया था।
मामले की जांच अपने हाथ में लेने के बाद सीबीआई ने समर्थ सिंह से कई दौर की पूछताछ की। जांच एजेंसी उसे कटारा हिल्स स्थित घर भी लेकर गई, जहां कथित घटना हुई थी। टीम ने घटनास्थल की फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी की, साथ ही कई अहम सबूत भी जुटाए। इस दौरान 12 मई की रात हुई घटनाओं के बारे में समर्थ से विस्तार से पूछताछ की गई।
जानकारी के अनुसार 12 मई को ट्विशा शर्मा अपने ससुराल स्थित घर में फंदे से लटकी मिली थीं। घटना के बाद ट्विशा के परिजनों ने पति और ससुराल पक्ष पर दहेज प्रताड़ना के आरोप लगाए थे। इसके बाद मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठी और जांच का जिम्मा सीबीआई को सौंप दिया गया।
सीबीआई मामले के सभी पहलुओं की जांच कर रही है। जांच एजेंसी अब तक कई लोगों से पूछताछ कर चुकी है और जुटाए गए साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है।
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Dr. Mohan Yadav Cabinet : लाखों परिवारों को मिलेगी आबादी की जमीन की रजिस्ट्री, छात्रों को सिली यूनिफॉर्म देगी सरकार
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट की बैठक में आमजन से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। इनमें सबसे बड़ा फैसला स्वामित्व योजना के तहत प्रदेश के लाखों परिवारों को उनकी आबादी वाली भूमि के रजिस्ट्रीकृत दस्तावेज उपलब्ध कराने का है।
प्रदेश के एमएसएमई मंत्री चैतन्य काश्यप ने बताया कि स्वामित्व योजना के अंतर्गत ड्रोन और सैटेलाइट तकनीक के माध्यम से ग्रामीण आबादी क्षेत्रों का सर्वे कराया गया था। इस प्रक्रिया में लोगों की संपत्तियों का सीमांकन कर उन्हें स्वामित्व पत्र प्रदान किए गए। अब सरकार इन संपत्तियों का विधिवत पंजीयन कराकर रजिस्ट्रीकृत दस्तावेज भी देगी, जिससे मालिकाना हक को कानूनी मजबूती मिलेगी।
प्रदेश के 55 जिलों में करीब 48.80 लाख निजी और लगभग 19 लाख सरकारी संपत्तियों का चिन्हांकन किया गया है। सरकार ने तय किया है कि संपत्ति पंजीयन के दौरान लगने वाला पंचायत उपकर और रजिस्ट्रेशन शुल्क लाभार्थियों से नहीं लिया जाएगा। यह पूरा खर्च राज्य सरकार वहन करेगी, जिस पर लगभग 3,800 करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है।
कैबिनेट ने कक्षा पहली से आठवीं तक के विद्यार्थियों को सिली हुई यूनिफॉर्म उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है। अब तक विद्यार्थियों के खातों में डीबीटी के माध्यम से 600 रुपए भेजे जाते थे, लेकिन विभिन्न शिकायतों और व्यावहारिक समस्याओं को देखते हुए नई व्यवस्था लागू की जा रही है। इसके तहत टेंडर प्रक्रिया से कपड़ा खरीदा जाएगा और निर्धारित मानकों के अनुसार यूनिफॉर्म तैयार कर छात्रों तक पहुंचाई जाएगी।
बैठक में गेहूं खरीदी की समीक्षा भी की गई। सरकार ने दावा किया कि इस वर्ष देश में सबसे अधिक गेहूं की खरीद मध्य प्रदेश में हुई है। समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लेकर भी चर्चा हुई और बताया गया कि सुझाव लेने की प्रक्रिया 30 जुलाई तक पूरी कर ली जाएगी। इसके अलावा बरगी बांध क्रूज हादसे की न्यायिक जांच, पंचायत राज एवं उपकर कानूनों में संशोधन, फिल्म ‘तन्वी द ग्रेट’ को टैक्स फ्री करने, मेडिकल कॉलेजों के विस्तार, इंदौर जिला न्यायालय भवन की लागत बढ़ाने तथा विभिन्न संविदा नियुक्तियों को मंजूरी दी गई।
मंत्री काश्यप ने बताया कि राज्य में दूध उत्पादन बढ़कर 11 लाख लीटर प्रतिदिन तक पहुंच गया है। पशुपालकों की सहायता के लिए ‘गोरस’ मोबाइल ऐप भी लॉन्च किया गया है, जो मौसम, पशु आहार और पशुपालन संबंधी जानकारी उपलब्ध कराएगा। वहीं पीएम सूर्यघर योजना के तहत अब तक चार लाख घरों में रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाए जा चुके हैं। सरकार ने इस संख्या को छह लाख तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत भी दो लाख से अधिक जल संरचनाओं पर कार्य पूरा किया जा चुका है।

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गरिमा के जन्म के 15 मिनिट बाद का फोटो
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गरिमा के 1 वर्ष बाद का फोटो
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गरिमा के 2 वर्ष बाद का फोटो
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बीमार होने के बाद भोपाल अस्पताल मे भर्ती गरिमा
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हाई कोर्ट के आदेश के बाद गरिमा के शव को जमीन से निकालते हुऐ
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निकालने के बाद गरिमा के शव को पैक कर जॉच के लिऐ भेजा गया
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दोषी डॉक्टर के खिलाफ मामला कायम कराने के लिऐ पुलिस अधिक्षक से मिले पत्रकार
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गरिमा के शव की जॉच होने के बाद पुनः उसी स्थान पर चबूतरा का निर्माण किया गया
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पूजा स्थल मे गरिमा
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