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नर्मदापुरम। मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम जिले में पुलिस महकमे को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है। नर्मदापुरम की कोतवाली थाना पुलिस ने एक महिला की शिकायत पर पुलिस लाइन में पदस्थ कांस्टेबल सोमिल सक्सेना के खिलाफ दुष्कर्म और धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी सिपाही पिछले करीब सात महीने से ड्यूटी से लगातार गैरहाजिर चल रहा था।
पीड़ित 37 वर्षीय महिला नर्मदापुरम से लगभग 15 किलोमीटर दूर स्थित एक गांव की निवासी है। पीड़िता के अनुसार लगभग एक वर्ष पूर्व सोमिल ने उसे नर्मदा तट तक छोड़ने के बहाने लिफ्ट दी थी। इसी दौरान दोनों के बीच जान-पहचान हुई और संपर्क नंबरों का आदान-प्रदान हुआ। इसके बाद दोनों में फोन पर बातचीत शुरू हो गई। पीड़िता ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि आरोपी सोमिल सक्सेना ने अपने भाई के इलाज का बहाना बनाकर उससे आर्थिक मदद मांगी। महिला ने मदद करते हुए उसे अपने 10 ग्राम सोने के जेवर दे दिए।
आरोप है कि जब महिला ने अपने गहने वापस मांगे, तो आरोपी ने उसे गहने लौटाने के बहाने अपने घर बुलाया और वहां उसके साथ जबरदस्ती दुष्कर्म किया। आरोपी ने महिला के साथ दो से तीन बार इस वारदात को अंजाम दिया। एसपी साईं कृष्णा एस. थोटा ने बताया कि पीड़िता की शिकायत के आधार पर सिटी कोतवाली में मामला दर्ज कर आरोपी सिपाही को गिरफ्तार कर लिया गया है। आरोपी को वर्ष 2022 में अनुकंपा नियुक्ति मिली थी। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

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भोपाल में वकीलों का प्रदर्शन, अधिवक्ता से मारपीट के आरोप में TI सस्पेंड
भोपाल । मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के अदालत चौराहे पर बुधवार को जिला अदालत के वकीलों का सड़क पर खासा आक्रोश देखने को मिला। नाराज वकीलों ने जिला अदालत के बाहर के पूरे चौराहे पर चक्काजाम कर अदालत के वरिषण अधिवक्ता से बीती रात मारपीट करने वाले जहांगीराबाद टीआई के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की। इधर, मामले को तूल पकड़ता देख पुलिस विभाग ने भी बड़ा एक्शन लेते हुए थाना प्रभारी को सस्पेंड कर दिया है।
बता दें कि, राजधानी भोपाल के जहांगीराबाद थाने में जिला अदालत के वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश रावल के साथ मारपीट का मामला तूल पकड़ने के बाद पुलिस प्रशासन द्वारा थाना प्रभारी समेत तीन पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। भोपाल में वकीलों के प्रदर्शन के बाद थाना प्रभारी को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है।
बता दें कि, मामला मंगलवार रात का है। बैरागढ़ कलां में रहने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश रावल, जो करीब 21 वर्षों से वकालत कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि, थाना परिसर में उनके साथ मारपीट की गई है। घटना का एक वीडियो भी सामने आया, जिसमें राकेश रावल अपने शरीर पर लाठी से पिटाई के निशान दिखाते हुए जहांगीराबाद थाना प्रभारी और उनके स्टाफ पर मारपीट का आरोप लगा रहे थे। मामला सामने आने के बाद बड़ी संख्या में अधिवक्ता बीती रात भी जहांगीराबाद थाने पहुंच गए थे और थाने का घेराव करते हुए टीआई पर कार्रवाई की मांग को लेकर प्रदर्शन किया था। कार्रवाई न किए जाने पर बुधवार को जिला अदालत के सामने चक्काजाम कर दिया।
बताया जा रहा है कि, मंगलवार रात डोल ग्यारस के मौके पर खटलापुरा इलाके में गणेश प्रतिमा विसर्जित की जा रही थी। इसी दौरान ट्रैफिक व्यवस्था को लेकर अधिवक्ता राकेश रावल और ट्रैफिक एसीपी के बीच कहासुनी हुई थी। यहां से पुलिस राकेश रावल को पकड़कर जहांगीराबाद थाने ले आई थी। रावल का आरोप है कि, थाने लाकर टीआई और अन्य पुलिसकर्मियों ने उनके साथ मारपीट की। घटना की जानकारी मिलते ही मामला तेजी से फैल गया और बड़ी संख्या में वकील थाने पहुंच गए।
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41 मौतों के बाद बंडा शराब कांड के ‘किंगपिन’ का एनकाउंटर, साथी भी गिरफ्तार, देशी कट्टे और कारतूस बरामद
सागर। मध्य प्रदेश के सागर जिले के बंडा शराब त्रासदी को लेकर पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस ने मामले के मुख्य आरोपी और 30 हजार रुपए के इनामी बदमाश मनीष लोधी उर्फ यशवंत ठाकुर को पुलिस ने मंगलवार-बुधवार की दरमियानी रात एक मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार कर लिया। मालथौन थाना क्षेत्र के नोनिया सेसई रोड घाटी पर हुई इस कार्रवाई के दौरान पुलिस की जवाबी फायरिंग में मनीष लोधी के पैर में चोट लगी है, जबकि उसका साथी आशीष साहू भी भागने के प्रयास में घायल हो गया।
पुलिस के अनुसार, थाना बड़ा और विनायका क्षेत्र में हुई शराब त्रासदी के बाद से ही मनीष लोधी की तलाश में लगातार दबिश दी जा रही थी। सुबह करीब 3 बजे जब पुलिस टीम ने घेराबंदी की, तो आरोपियों ने पुलिस पर फायरिंग शुरू कर दी। पुलिस ने आत्मरक्षार्थ जवाबी कार्रवाई की, जिसमें मुख्य आरोपी मनीष लोधी उर्फ यशवंत ठाकुर घायल हो गया। मौके से पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से दो देशी कट्टे, पांच कारतूस और एक बेसबॉल डंडा जब्त किया है। दोनों घायलों को इलाज के लिए तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
गौरतलब है कि बंडा में जहरीली शराब पीने से अब तक 41 लोगों की जान जा चुकी है। पुलिस ने इस पूरे प्रकरण में कुल 52 लोगों को आरोपी बनाया है, जिनमें से अब तक 39 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। खास बात यह है कि 52 आरोपियों में शराब बनाने वाला मुख्य आरोपी और गांव में अवैध बिक्री करने वाले दो आरोपियों का निधन खुद इसी जहरीली शराब के सेवन से हो चुकी है।
पुलिस की इस सख्त कार्रवाई में यह तीसरा मौका है जब शराब कांड के किसी आरोपी को शार्ट एनकाउंटर के जरिए दबोचा गया है। इससे पहले पुलिस रवि लखेरा और शिवांजय सिंह को भी मुठभेड़ के दौरान शार्ट एनकाउंटर के बाद गिरफ्तार कर चुकी है। पुलिस का कहना है कि मामले में साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं और निष्पक्ष वैधानिक जांच जारी है।

बालाघाट। मध्य प्रदेश के बालाघाट के किरनापुर पुलिस थाने में दंपति के साथ की गई मारपीट के मामले में प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। SIT की जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद दोषी पाए गए चार पुलिसकर्मियों के खिलाफ FIR कर ली गई है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी जांच डीएसपी प्रतिष्ठा राठौर के नेतृत्व में गठित SIT को सौंपी गई थी। जांच टीम ने घटना से जुड़े हर पहलू की बारीकी से पड़ताल की। इस दौरान SIT ने 49 से अधिक प्रत्यक्षदर्शियों, पीड़ित दंपती और गवाहों के बयान दर्ज किए तथा अन्य महत्वपूर्ण सबूतों का गहन विश्लेषण किया।
SIT की जांच रिपोर्ट में पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर कई चौंकाने वाले और गंभीर तथ्य सामने आए हैं। जांच में सामने आया है कि पीड़ित महिला को गैर-कानूनी तरीके से थाने में बिठाकर रखा गया था। सूर्यास्त के बाद महिला की गिरफ्तारी की गई, जो सर्वोच्च न्यायालय और पुलिस नियमावली के स्पष्ट निर्देशों का सीधा उल्लंघन है। पुलिसकर्मियों ने दंपती को डराने-धमकाने और उन पर अनुचित दबाव बनाने के तथ्य भी साबित हुए हैं।
इस घटना के सामने आने के बाद मरार माली समाज में पुलिस के प्रति तीव्र आक्रोश पनप गया था। समाज के लोगों ने किरनापुर में उग्र प्रदर्शन और आंदोलन किया था। इस बवाल के दौरान आक्रोशित भीड़ ने थाने पर पत्थरबाजी और तोड़फोड़ की थी, जिसके जवाब में स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज भी करना पड़ा था।
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मध्य प्रदेश में 6 महीने टल सकते हैं निकाय चुनाव, जनगणना और परिसीमन के कारण फंसा पेच
भोपाल। मध्य प्रदेश में अगले वर्ष होने वाले निकाय चुनाव जनगणना के कारण प्रभावित हो सकते हैं। इसकी वजह वार्ड से लेकर नगर परिषद, नगर पालिका और नगर निगमों की आरक्षण प्रक्रिया है। इसकी प्रक्रिया शुरू करने का समय आ चुका है लेकिन जनगणना का कार्य चलने के कारण राज्य सरकारइसे आगे बढ़ा सकती है।
दरअसल, जनगणना के बाद नए वार्ड बनेंगे और वर्तमान नगरीय निकायों की सीमाएं भी परिवर्तित होंगी। इसे देखते हुए चुनाव छह माह के लिए आगे बढ़ाए जा सकते हैं। हाल ही में कानून व्यवस्था और वर्षा की स्थिति का हवाला देकर कुछ निकायों के चुनाव स्थगित कराए गए हैं।
प्रदेश में 16 नगर निगम, 99 नगर पालिका व 298 नगर परिषद मिलाकर 413 नगरीय निकाय हैं। इनके महापौर, अध्यक्ष के साथ 7,679 वार्ड पार्षद पद के लिए चुनाव कराए जाने हैं। इस बार नगर पालिका और नगर परिषद के अध्यक्ष का चुनाव भी प्रत्यक्ष प्रणाली यानी सीधे मतदाताओं द्वारा कराया जाएगा।
एससी-एसटी और ओबीसी के साथ महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण रहेगा। नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने महापौर और अध्यक्ष पद के आरक्षण के लिए विभाग ने आयुक्त, नगरीय प्रशासन एवं विकास को विहित प्राधिकारी घोषित कर दिया है।
चूंकि, जनगणना की प्रक्रिया चल रही है इसलिए न तो वार्ड परिसीमन हो सकता है और न ही नए नियम बनाए जा सकते हैं। जबकि, सरकार द्वारा कुछ पंचायतों को मिलाकर नगर परिषद बनाने की घोषणा की है। जनगणना की प्रक्रिया पूरी होने तक इनका गठन नहीं हो सकता।
उधर, राज्य निर्वाचन आयोग के अधिकारियों का कहना है कि आरक्षण की प्रक्रिया करना सरकार का काम है। हम चुनाव कराने वाली संस्था हैं। पांच वर्ष की अवधि पूर्ण होने से पहले हमें चुनाव कराना होता है। हमने मतदाता सूची अद्यतन कर ली है। सरपंच तक के चुनाव के लिए ईवीएम खरीदने का प्रस्ताव सरकार को भेजा है। यदि समय रहते ईवीएम उपलब्ध हो जाती है तो सारे चुनाव इसी से कराए जाएंगे।
सूत्रों का कहना है कि सरकार चुनाव को लेकर किसी भी प्रकार की जल्दबाजी नहीं करना चाहती है, इसलिए सहकारी समितियों के चुनाव भी हाई कोर्ट द्वारा बार-बार निर्देश देने के बाद भी नहीं कराए जा रहे हैं। नगरीय निकाय के चुनाव दलीय आधार पर होते हैं। इसके परिणामों को असर राजनीतिक दलों की विधानसभा चुनाव की तैयारी के साथ वातावरण पर पड़ता है।
वर्ष 2022 के चुनाव में महापौर पद का चुनाव प्रत्यक्ष प्रणाली यानी सीधे मतदाताओं के माध्यम से हुआ था। 16 में से पांच नगर निगमों में कांग्रेस के महापौर चुने गए थे, जबकि सिंगरौली नगर निगम में महापौर आम आदमी पार्टी की रानी अग्रवाल जीती थीं।
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महिला प्रधान आरक्षक के पति ने लगाई फांसी: पेड़ से लटका मिला शव, जांच में जुटी पुलिस
भोपाल। राजधानी भोपाल के नेहरू नगर इलाके से एक दुखद घटना सामने आई है, जहाँ महिला प्रधान आरक्षक के पति ने संदिग्ध परिस्थितियों में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। घटना के बाद इलाके में हड़कंप मच गया है।
मिली जानकारी के मुताबिक, मृतक युवक अपनी पत्नी (महिला प्रधान आरक्षक) के साथ नेहरू नगर पुलिस लाइन में रहता था। बुधवार को नेहरू नगर पुलिस ग्राउंड में एक पेड़ से युवक का शव लटका हुआ मिला। स्थानीय लोगों और पुलिसकर्मियों की नजर जब शव पर पड़ी, तो तुरंत कमला नगर थाना पुलिस को सूचना दी गई।
पुलिस के शुरुआती बयानों के अनुसार, मृतक अक्सर शराब के नशे में रहता था और अपनी महिला पुलिसकर्मी पत्नी के साथ मारपीट करता था। हालांकि, उसने यह आत्मघाती कदम किस वजह से उठाया, इसका सटीक कारण अभी स्पष्ट नहीं हो पाया है।
सूचना मिलते ही कमला नगर थाना पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शव को कब्जे में लिया और पंचनामा बनाकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले की जांच शुरू कर दी है।

आजमगढ़। करीब 7 घंटे बाद अरविंद ने एक बेटे पर भी गोली चला दी। इसके बाद ATS और SOG की टीम ने कमरे में घुसकर उसे घेर लिया, जहां जवाबी कार्रवाई में उसकी मौत हो गई। घटना आजमगढ़ जिला मुख्यालय से करीब 50 किलोमीटर दूर अहिरौला थाना क्षेत्र के शंभूपुर गहजी गांव की है। पुलिस के मुताबिक, परिवार को शक था कि अरविंद को उसके भाई सुनील की आत्मा परेशान कर रही है। इसी वजह से पत्नी बबीता और मां कमला देवी महामृत्युंजय जाप करा रही थीं। इससे अरविंद नाराज था और मंगलवार शाम करीब 6 बजे इसी बात को लेकर पत्नी से विवाद हो गया।
बहस के दौरान अरविंद ने पत्नी से कहा कि तेरे चक्कर में मेरे भाई की हत्या हो गई और अब तू यहां ड्रामा कर रही है। इसके बाद उसने दोनों पुजारियों से आधार कार्ड मांगा और उनसे भी कहासुनी करने लगा। गुस्से में वह कमरे से लाइसेंसी रिवॉल्वर लेकर आया और पत्नी बबीता और पुजारी महेंद्र पाठक और अखिलेश मिश्रा को गोली मार दी।
हत्या के बाद अरविंद ने अपने तीन बच्चों को कमरे में बंधक बना लिया। सूचना मिलने पर 10 थानों की पुलिस मौके पर पहुंची तो उसने बच्चों को मारने की धमकी दी। स्थिति बिगड़ती देख ATS और SOG के 45 जवानों को बुलाया गया। टीम लगातार उसे सरेंडर करने के लिए समझाती रही।
रात करीब 1 बजे अरविंद ने अपने एक बच्चे पर गोली चला दी। इसके बाद टीम ने स्मोक ग्रेनेड और टियर गैस छोड़ी और दरवाजा तोड़कर कमरे में प्रवेश किया। अरविंद ने जवानों पर लाइसेंसी रिवॉल्वर से 6 राउंड फायर किए। जवाबी कार्रवाई में वह मारा गया।
मृतकों में अरविंद सिंह (42), पत्नी बबीता (40), बेटा शौर्य (9), पुजारी महेंद्र पाठक (60) और अखिलेश मिश्रा (55) शामिल हैं। परिवार में अब अरविंद की मां कमला देवी (70), बेटी परी (5) और 7 महीने की शांभवी बची हैं। दोपहर करीब डेढ़ बजे पोस्टमॉर्टम के बाद शव घर लाए गए और अंतिम संस्कार की तैयारियां शुरू हो गईं। घर के बाहर पुलिस फोर्स तैनात है।
पुलिस के मुताबिक, अरविंद कोई काम नहीं करता था। करीब 8 साल पहले उसके भाई सुनील की चचेरे भाइयों मनीष और अविनाश ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। बताया जा रहा है कि अरविंद की पत्नी बबीता का मनीष के साथ अफेयर था। इसका पता चलने पर सुनील ने मनीष के खिलाफ चोरी और छेड़खानी की शिकायत की थी।
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सलवार उतारने की कोशिश को रेप नहीं मानने पर SC सख्त, पटना हाईकोर्ट के फैसले पर सुनवाई
नई दिल्ली। पटना हाईकोर्ट के उस फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया है, जिसमें महिला की सलवार उतारने की कोशिश और उसके सीने को दबाने की घटना को बलात्कार के प्रयास का अपराध नहीं माना गया था। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले में की गई कुछ टिप्पणियों को आपत्तिजनक बताया है। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि आरोपी का पक्ष सुनने के बाद हाईकोर्ट के इस आदेश को खारिज भी किया जा सकता है। मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ कर रही है। सुप्रीम कोर्ट ने बिहार के एडवोकेट जनरल एसडी संजय से कहा है कि स्थानीय पुलिस के माध्यम से आरोपी को नोटिस की तामील कराई जाए ताकि अगली सुनवाई में उसका पक्ष भी सुना जा सके।
यह मामला बिहार के बांका जिले से जुड़े वर्ष 2008 के एक मामले का है। पटना हाईकोर्ट के जस्टिस पूर्णेंदु सिंह ने 9 जुलाई 2026 को आरोपी हिमांशु कुमार पाठक की अपील पर फैसला सुनाया था। हाईकोर्ट ने निचली अदालत की ओर से दी गई बलात्कार के प्रयास की सजा को रद्द करते हुए आरोपी को इस आरोप से बरी कर दिया था। हाईकोर्ट के सामने अभियोजन का मामला था कि पीड़िता अपने पिता के साथ फोटो खिंचवाने के लिए एक स्टूडियो गई थी। आरोप के मुताबिक स्टूडियो संचालक ने उसके पिता को बाहर भेज दिया और दरवाजा अंदर से बंद कर लिया। इसके बाद उसने महिला की सलवार उतारने की कोशिश की और उसके सीने को दबाकर कथित रूप से बलात्कार का प्रयास किया। पीड़िता के शोर मचाने पर उसके पिता ने दरवाजा खुलवाया, जिसके बाद आरोपी वहां से भाग गया।
पटना हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि रिकॉर्ड पर ऐसा कोई साक्ष्य नहीं है, जिससे बलात्कार के प्रयास के लिए जरूरी स्पष्ट कृत्य या इरादा साबित हो। अदालत ने यह भी कहा कि मामले में प्रवेश या शारीरिक संबंध बनाने की कोशिश का मेडिकल प्रमाण नहीं मिला। हालांकि हाईकोर्ट ने यह माना कि आरोपी ने महिला को कमरे में बंद किया, उसकी सलवार उतारने की कोशिश की और उसके सीने को दबाकर शारीरिक बल का इस्तेमाल किया। अदालत के अनुसार ये कृत्य महिला की गरिमा और लज्जा भंग करने के अपराध के दायरे में आते हैं और भारतीय दंड संहिता की धारा 354 के तहत अपराध बनता है। हाईकोर्ट ने इसी आधार पर भारतीय दंड संहिता की धारा 376 के साथ धारा 511 के तहत बलात्कार के प्रयास की दोषसिद्धि को टिकाऊ नहीं माना और आरोपी को बरी कर दिया।
इस मामले में निचली अदालत ने वर्ष 2013 में आरोपी को बलात्कार के प्रयास और गलत तरीके से बंधक बनाने के आरोपों में दोषी माना था। उसे बलात्कार के प्रयास के मामले में तीन साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई थी। इसके बाद आरोपी ने पटना हाईकोर्ट में निचली अदालत के फैसले को चुनौती दी। करीब 13 साल बाद हाईकोर्ट ने उसकी अपील पर फैसला सुनाते हुए बलात्कार के प्रयास की दोषसिद्धि को रद्द कर दिया।
पटना हाईकोर्ट के इस फैसले का उल्लेख जुलाई में सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही के दौरान किया गया था। वरिष्ठ अधिवक्ता शोभा गुप्ता ने सुप्रीम कोर्ट का ध्यान इस फैसले की ओर दिलाते हुए कहा था कि इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक समान मामले में दिए गए आदेश को सुप्रीम कोर्ट पहले ही रद्द कर चुका है। इसके बाद 23 सितंबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने पटना हाईकोर्ट के 9 जुलाई के आदेश पर स्वत: संज्ञान लेते हुए मामले को अपने सामने लिया। सुनवाई के दौरान सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि हाईकोर्ट के फैसले में कुछ टिप्पणियां आपत्तिजनक हैं। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि आदेश को खारिज करने से पहले आरोपी को सुनना जरूरी होगा।
यह पूरा घटनाक्रम उस मामले से भी जुड़ा है जिसमें इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने हस्तक्षेप किया था। उस मामले में नाबालिग लड़की के साथ यौन दुर्व्यवहार से जुड़े कृत्यों को बलात्कार के प्रयास की श्रेणी में नहीं रखने पर सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट का आदेश रद्द कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने उस मामले में कहा था कि जब आरोपी अपने इरादे को स्पष्ट कृत्यों के जरिए आगे बढ़ाता है और बाहरी हस्तक्षेप के कारण आगे नहीं बढ़ पाता, तो मामला केवल तैयारी तक सीमित नहीं रहता बल्कि प्रयास के स्तर तक पहुंच सकता है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट के मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने यौन अपराधों से जुड़े मामलों में न्यायिक संवेदनशीलता को लेकर भी दिशा-निर्देश तैयार कराने की प्रक्रिया शुरू की थी। इसके लिए नेशनल ज्यूडिशियल एकेडमी के स्तर पर विशेषज्ञ समिति गठित की गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने यौन अपराधों, खासकर महिलाओं और बच्चों से जुड़े मामलों की सुनवाई के दौरान न्यायिक भाषा और दृष्टिकोण में संवेदनशीलता बनाए रखने पर जोर दिया है।
फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने पटना हाईकोर्ट के फैसले को रद्द नहीं किया है। पीठ ने आरोपी को नोटिस जारी कराने की प्रक्रिया शुरू की है। आरोपी का पक्ष सुनने के बाद ही सुप्रीम कोर्ट इस मामले में आगे कोई आदेश देगा। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की अगली कार्यवाही इसलिए महत्वपूर्ण होगी क्योंकि अदालत को यह देखना है कि पटना हाईकोर्ट के फैसले में की गई टिप्पणियां और बलात्कार के प्रयास तथा महिला की गरिमा भंग करने के अपराध के बीच किया गया कानूनी अंतर मौजूदा कानून और सुप्रीम कोर्ट के पहले के फैसलों के अनुरूप है या नहीं।
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देश भर में रविवार को भी खुले रहेंगे बैंक, 3 दिन की देशव्यापी हड़ताल के चलते वित्त मंत्रालय का फैसला
नई दिल्ली. 28 से 30 सितंबर तक बुलाए गए देशव्यापी बैंक हड़ताल को ध्यान में रखते हुए वित्त मंत्रालय ने आम लोगों की सुविधा के लिए एक बड़ा फैसला किया है. वित्त मंत्रालय ने बुधवार को जारी किए गए एक प्रेस रिलीज में बताया कि रविवार, 27 सितंबर को सभी सरकारी बैंक और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक खुले रहेंगे. वित्त मंत्रालय के मुताबिक, इस रविवार को सभी सरकारी बैंक और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों में आम दिनों की तरह ही कामकाज जारी रहेगा. ये व्यवस्था देशभर के बैंकों के साथ-साथ मध्य प्रदेश में भी प्रभावी रहेगी.
बैंक यूनियन द्वारा 3 दिनों के लिए बुलाई गई हड़ताल को देखते हुए भारतीय स्टेट बैंक, पंजाब नेशनल बैंक समेत कई प्रमुख बैंकों ने अपने ग्राहकों के लिए सूचना जारी की थी. भारतीय स्टेट बैंक ने अपने ग्राहकों को सलाह दी थी कि वे हड़ताल की तारीखों को ध्यान में रखते हुए पहले ही बैंक से जुड़े जरूरी काम पूरा कर लें.
राजधानी भोपाल के एक होलसेल क्रॉकरी कारोबारी रमेश गुप्ता का कहना है कि, आज इस संबंध में आरबीआई की ओर से फोन पर मैसेज के माध्यम से सूचना दी गई है कि, रविवार को बैंक खुले रहेंगे. उन्होंने कहा कि, इससे खासतौर पर व्यापारी वर्ग को राहत रहेगी. क्योंकि, बड़े ट्रांजेक्शन बैंकों के माध्यम से ही करने होते हैं, जो हड़ताल की अवधि में काफी प्रभावित होते.
उनका कहना है कि, बैंक कर्मचारियों के यूनियन- यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस ने 28 से 30 सितंबर, 2026 तक 3 दिनों दिन की देशव्यापी बैंक हड़ताल है. लेकिन ये हड़ताल 26 और 27 सितंबर को शनिवार और रविवार की छुट्टियों के ठीक बाद है. यानी, बैंकों का कामकाज 3 दिन नहीं बल्कि 5 दिन प्रभावित होता, जिसका बड़ा असर कारोबारियों के साथ-साथ आम ग्राहकों पर भी पडऩा तय था. ऐसे में, सरकार ने आम ग्राहकों की बैंकिंग जरूरतों को पूरा करने के लिए पहले से ही जरूरी कदम उठाए हैं.
बैंक यूनियन द्वारा 3 दिनों की हड़ताल को मद्देनजर रखते हुए भारतीय स्टेट बैंक, पंजाब नेशनल बैंक समेत कई प्रमुख बैंकों ने अपने मध्य प्रदेश में भी अपने ग्राहकों के लिए रविवार को बैंक खुले रहने की सूचना जारी की है. भारतीय स्टेट बैंक से आए टैक्स्ट मैसेज में अपने ग्राहकों को सलाह दी गई है कि, वे हड़ताल की तारीखों को ध्यान में रखते हुए पहले ही बैंक से जुड़े जरूरी काम निपटा लें.
इससे पहले वित्त मंत्रालय ने अपनी प्रेस विज्ञप्ति जार करते हुए कहा कि, 'विभाग कहता है कि, बैंक ग्राहकों की भलाई और सुविधा सरकार की पहली प्राथमिकता है. सरकार और बैंक मैनेजमेंट ने यूनियनों से प्रस्तावित हड़ताल को टालने की अपील की है और ये सुनिश्चित करने के लिए भी कदम उठाए हैं कि, जरूरी बैंकिंग सेवाएं बिना किसी रुकावट के जारी रहें.

ग्वालियर। कुशवाह समाज के हॉस्टल के भूमिपूजन कार्यक्रम में हुआ विवाद अब सियासी रंग ले चुका है। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की मौजूदगी में काले झंडे दिखाए जाने के बाद दो गुटों में मारपीट और कुर्सियां फेंकने का वीडियो सामने आया था। अब प्रदेश सरकार के मंत्री नारायण सिंह कुशवाह का बयान सामने आया है।
उन्होंने किसी का नाम लिए बिना प्रभावशाली नेताओं के इशारे पर युवाओं से काले झंडे दिखाने का आरोप लगाया है। वहीं कांग्रेस ने इस विवाद को बीजेपी के भीतर चल रही गुटबाजी से जोड़ते हुए निशाना साधा है। कांग्रेस प्रवक्ता राम पांडे ने आरोप लगाया कि बीजेपी में पुरानी बीजेपी और सिंधिया बीजेपी के बीच टकराव चल रहा है।
ग्वालियर के गिरवाई थाना क्षेत्र के बेला की बावड़ी में कुशवाह समाज के हॉस्टल के भूमिपूजन कार्यक्रम के दौरान हुआ विवाद अब राजनीतिक बहस का मुद्दा बन गया है।केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के कार्यक्रम में पहुंचने और संबोधन के दौरान कुछ युवाओं द्वारा काले झंडे दिखाए जाने की बात सामने आई। इसके बाद विरोध करने वालों और दूसरे पक्ष के लोगों के बीच विवाद बढ़ गया और मारपीट के साथ कुर्सियां फेंके जाने का वीडियो सामने आया।विरोध करने वाले लोगों को स्थानीय सांसद भारत सिंह कुशवाह के समर्थक बताए जाने की चर्चा है। हालांकि, इस संबंध में पुलिस की ओर से विवाद की पूरी वजह और सभी पक्षों की भूमिका को लेकर आधिकारिक जानकारी का इंतजार है।
अब इस पूरे विवाद पर मंत्री नारायण सिंह कुशवाह का वीडियो बयान सामने आया है। मंत्री ने सीधे तौर पर किसी नेता का नाम नहीं लिया, लेकिन इशारों-इशारों में प्रभावशाली नेताओं पर निशाना साधा,उन्होंने कहा कि कुछ प्रभावशाली नेताओं के बहकावे में आकर युवाओं ने काले झंडे दिखाने जैसा काम किया। मंत्री ने इस तरह की गतिविधि पर नाराजगी जताते हुए कहा कि कुशवाह समाज किसी की जागीर नहीं है और ऊंचे पद पर बैठकर शक्ति का गलत इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।मंत्री के इस बयान को स्थानीय राजनीतिक समीकरणों और कार्यक्रम में सांसद भारत सिंह कुशवाह की गैरमौजूदगी से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, मंत्री ने अपने बयान में किसी नेता का नाम लेकर सीधा आरोप नहीं लगाया है।
विवाद के बाद कांग्रेस ने भी बीजेपी पर निशाना साधा है। कांग्रेस प्रवक्ता राम पांडे ने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी के भीतर पुरानी बीजेपी और सिंधिया बीजेपी के बीच सिर फुटव्वल चल रहा है।राम पांडे ने इमरती देवी और पूर्व विधायक ममता मीना के बयानों का हवाला देते हुए कहा कि बीजेपी के भीतर अलग-अलग गुटों के बीच मतभेद सामने आ रहे हैं। उनका आरोप है कि एक तरफ नेताओं के बीच सार्वजनिक मंचों पर विवाद और बयानबाजी हो रही है, तो दूसरी तरफ सिंधिया समर्थकों और सांसद भारत सिंह कुशवाह के समर्थकों के बीच मारपीट और कुर्सियां फेंकने जैसी घटना सामने आई है।कांग्रेस का दावा है कि इन घटनाओं से बीजेपी के भीतर गुटबाजी की स्थिति स्पष्ट होती है।हालांकि कांग्रेस के इन राजनीतिक आरोपों पर बीजेपी की ओर से प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है।
बहरहाल कुशवाह समाज के हॉस्टल के कार्यक्रम में हुए विवाद के बाद अब मामला सिर्फ मारपीट और काले झंडे दिखाए जाने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि स्थानीय बीजेपी की अंदरूनी राजनीति और नेतृत्व के बीच संबंधों पर भी सवाल उठने लगे हैं। फिलहाल पुलिस विवाद की वास्तविक वजह और इसमें शामिल लोगों की भूमिका की जांच कर रही है। पुलिस की जांच और दोनों पक्षों के बयानों के बाद ही पूरे मामले की तस्वीर साफ हो सकेगी।
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एमपी के हर विधानसभा क्षेत्रों में बनेंगे स्टेडियम और हेलीपेड, देखें मोहन कैबिनेट के अहम फैसले
भोपाल. मध्य प्रदेश के हर विधानसभा क्षेत्र में सर्वसुविधायुक्त स्टेडियम का निर्माण किया जायेगा, साथ ही हेलीपैड भी बनाए जाएंगे. यह निर्णय मंगलवार को मोहन कैबिनेट की महत्वपूर्ण बैठक में लिये गये, जिसमें कई प्रस्तावों को मंजूरी मिल गई. कैबिनेट की बैठक की जानकारी सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्री चैतन्य कश्यप ने मीडिया को दी.
मोहन सरकार के कैबिनेट मंत्री चैतन्य कश्यप ने बताया कि मंगलवार को मोहन कैबिनेट की बैठक में कई बड़े प्रस्तावों को मंजूरी मिल गई. जनविश्वास अभियान के तहत हर शुक्रवार के दिन सारे प्रशासनिक अधिकारी क्षेत्र के अंदर या फील्ड में रहते हैं. जनता की समस्याएं उन्हीं के द्वार पर जाकर सुनते हैं. 25 सितंबर को अनंत चतुर्दशी पर गणेश विसर्जन का आयोजन है, इसलिए धार्मिक मान्यताओं के कारण झाकियों और आयोजन के कारण जनता की समस्याएं सुनने के लिए 26 सितंबर को जारी रहेगा.
चैतन्य कश्यप ने बताया कि कैबिनेट में महत्वपूर्ण विषयों को लाया गया. इसमें मध्यप्रदेश में रोडवेज बंद होने और फिर से परिवहन सेवा का शुभारंभ 25 सितंबर को किया जा रहा है. इस दिन 350 बसों को हरी झंडी दिखाई जाएगी. इसमें नितिन गडकरी के शामिल होंगे. रूट और आम यात्रियों के लिए सुविधाजनक बनाने के लिए वर्तमान बसों का उपयोग करते हुए इलेक्ट्रिक बसों को शामिल किया जाएगा. 2030-31 तक 14981 बसों को चलाएंगे. इसका उद्देश्य यह है कि दूरदराज के गांव में इस सेवा से जुड़ सके. सीसीटीवी कैमरे भी रहेंगे. जीपीएस सिस्टम रहेगा, जिससे यात्रियों को पता चलता रहे कि बस कितना लेट हो रही है या कितनी दूर है. इस सेवा का व्यवस्थित मॉडल हम बना रहे हैं. सरकार अपनी कोई बस नहीं लगा रही है, सारे के सारे बस ऑपरेटरों की भागीदारी के साथ ही सुविधाओं की मॉनिटरिंग भी हो. एक वैज्ञानिक तरीके से पूरे मॉडल को विकसित कर रहे हैं. सीएम मोहन यादव स्वयं इसके अध्यक्ष भी हैं और पूरे देश में इस तरह का यह पहला मॉडल है.
चैतन्य कश्यप ने बताया कि एक और फैसला खेल जगत के लिए हुआ है. मध्यप्रदेश की हर विधानसभा में एक-एक स्टेडियम बनाया जाएगा. इसके लिए स्पोर्ट्स कॉम्पलेक्स की अवधारणा बनाई गई है, जिसमें इनडोर और आउटडोर स्पोर्ट्स कॉम्पलेक्स होंगे. मल्टीपर्पस काम्पलेक्स होंगे. जमीन की उपलब्धता और रोड की कनेक्टिविटी को देखते हुए इसे डेवलप किया जाएगा. बच्चे वहां अपनी खेल प्रतिभा को निखार पाएंगे. यह पहली बार हो रहा है कि विधानसभा और ब्लाक लेवल पर संसाधनों के साथ खेल परिसर बनाए जाएंगे. इसका नाम रखा गया है मुख्यमंत्री स्पोर्ट्स काम्प्लेक्स. इसे अगले 5 सालों में 960 करोड़ की लागत का प्रावधान किया है. 140 विधानसभा क्षेत्र ऐसे हैं, जहां खेल की सुविधा नहीं है. 90 जगह है, जिसे अपडेट करेंगे. इसमें नई चीज जोड़ रहे हैं, इन कॉम्प्लेक्स के बीच हेलीपेड भी बनेगा, जिससे एयर एंबुलेंस की सेवा गांव-गांव तक पहुंचाई जा सके. यह मैदान के बीच में बनेगा, जो हमेशा उपलब्ध रहेगा. यह अपने आप में नया प्रयोग है.
इंदौर के दंत चिकित्सा महाविद्यालय में सीटें बढ़ाने के लिए पदों का सृजन किया गया है. 63 सीटों की जगह 100 सीटें की जाएगी, ग्रेजुएट के लिए भी 35 से 44 सीटें की जाएंगी. इसके साथ ही 9 हजार 61 करोड़ की कार्ययोजना की निरंतरता, जो प्रोजेक्ट चल रहे हैं, इन सबकी योजनाओं के लिए स्वीकृति दी गई.
चैतन्य कश्यप ने बताया कि पॉवर मैनेजमेंट कंपनी के अंदर एक रिपोर्ट आई है कि 2037 तक आज भी हम ऊर्जा में सरप्लस मानते हैं, उद्योगों का जो जाल बिछा रहे हैं. मध्यप्रदेश ने 2037 की मांग को देखते हुए 1800 + 900 मेगावाट को पर्चेस करने का फैसला लिया है.
चैतन्य कश्यप ने बताया कि तीन करोड़ 88 लाख दीपक मध्यप्रदेश में प्रज्वलित हुए. उज्जैन में राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन आए थे, उन्होंने 32 लाख से अधिक दीपक प्रज्वलित हुए, यह उपलब्धि मध्यप्रदेश के लिए प्रधानमंत्री के प्रति भावना प्रकट करने का अवसर रहा है. आशीर्वाद के दीये के साथ ही रक्तदान का भी बडा आयोजन हुआ. पूरे प्रदेश में 1100 स्थानों पर रक्तदान किया गया. उज्जैन में ही 25 हजार रक्तदान यूनिट का आयोजन सफल हुआ. इसी कार्यक्रम की अगली कडिय़ों में 24-25 सितंबर को वडनगर से वाराणसी तक मोटरसाइकिल यात्राएं निकल रही हैं और उनको प्रधानमंत्री स्वयं संबोधित करेंगे.

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छिंदवाड़ा SP के खिलाफ गैर-जमानती वारंट: 1 अक्टूबर को पेश करने के आदेश, वारंट तामीली कराने आईजी को जिम्मेदारी
जबलपुर। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने छिंदवाड़ा एसपी (SP) के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया है। इतना ही नहीं, एक अक्टूबर को कोर्ट में पेश करने का आदेश भी दिया है। अदालत ने जबलपुर आईजी को वारंट की तामील कराने की जिम्मेदारी दी है। जस्टिस विवेक जैन की बेंच ने यह आदेश दिया है। आइए जानते है आखिर पूरा मामला क्या है…
दरअसल, जबलपुर निवासी सीता तिवारी ने अवमानना याचिका दायर की है। जिसमें कहा गया कि याचिकाकर्ता के मृत पति संतोष पांडे पर रिकवरी निकाली गई थी। रिटायरमेंट के कई साल बाद भी सवा 2 लाख की रिकवरी निकाल दी थी। कोर्ट ने रिकवरी के आदेश को निरस्त कर राहत दी थी। आदेश के बाद भी रिकवरी की जा रही थी। कोर्ट के आदेश का पालन न होने पर अवमानना याचिका लगाई गई थी।
इस मामले में हाईकोर्ट ने सुनवाई करते हुए छिंदवाड़ा एसपी के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया है। कोर्ट ने जबलपुर आईजी को वारंट की तामील कराने की जिम्मेदारी दी है। साथ ही एक अक्टूबर को कोर्ट में पेश करने का आदेश दिया है। आपको बता दें कि याचिकाकर्ता के पति संतोष पांडे छिंदवाड़ा में पुलिसकर्मी के पद पर पदस्थ थे।

ग्वालियर। ग्वालियर में इंसान की हैवानियत का मामला सामने आया है। हजीरा थाना क्षेत्र की पीएचई कॉलोनी में एक स्ट्रीट डॉग की कुल्हाड़ी मारकर हत्या कर दी गई, जबकि दूसरे कुत्ते को भी कुल्हाड़ी से हमला कर घायल कर दिया गया। पूरी घटना सीसीटीवी कैमरे में कैद हुई है। महिला की शिकायत पर पुलिस फुटेज के आधार पर आरोपी की पहचान करने में जुटी है।
हजीरा थाना क्षेत्र की पीएचई कॉलोनी में बेजुबान जानवरों के साथ क्रूरता का मामला सामने आया है। आरोप है कि एक व्यक्ति ने स्ट्रीट डॉग पर कुल्हाड़ी से हमला कर उसकी हत्या कर दी, जबकि दूसरे कुत्ते को भी कुल्हाड़ी मारकर घायल कर दिया। यह घटना पास में लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई।
वहीं कॉलोनी में रहने वाली रजनी नाम की महिला ने पुलिस से शिकायत की है और घटना से जुड़े सीसीटीवी फुटेज भी उपलब्ध कराए हैं। सीएसपी नागेंद्र सिंह सिकरवार के मुताबिक, फुटेज के आधार पर आरोपी की पहचान करने की कार्रवाई की जा रही है। आरोपी की पहचान होने के बाद नियमानुसार वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
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कौन है वो पुलिस अफसर जिसके कारण नेहा पच्चीसिया के गिरफ़्तारी वारंट पर हुई गफलत
कटनी। कटनी में बहुचर्चित भूमि के बदले राहत वाले सौदेबाजी कांड में निलंबित सीएसपी नेहा पच्चीसिया समेत तीनों आरोपियों को बड़ी राहत मिली है। उनकी गिरफ़्तारी को लेकर जारी वारंट कोर्ट ने निरस्त कर दिया है। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी की अदालत ने यह निर्णय दिया है। कोर्ट ने निलंबित सीएसपी नेहा पच्चीसिया समेत तीनों आरोपियों के 18 सितंबर को जारी गिरफ़्तारी वारंट तत्काल प्रभाव से निरस्त कर वापस लेने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही एसआइटी जबलपुर के निरीक्षक चंद्रकांत झा की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ गए हैं। इस पुलिस अधिकारी को कोर्ट ने भी कारण बताओ नोटिस जारी किया है।
अदालत का यह आदेश केवल 18 सितंबर को जारी गिरफ़्तारी वारंट से संबंधित है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि वारंट निरस्त होने से आरोपियों के खिलाफ दर्ज प्रकरण खत्म नहीं हुआ है।
कोर्ट ने वारंट जारी करने संबंधित पूर्व में सत्र न्यायालय से खारिज आवेदन की जानकारी नहीं देने पर पुलिस निरीक्षक चंद्रकांत झा को फटकार लगाते हुए कार्यवाही की चेतावनी दी। कोर्ट ने कहा, सत्र न्यायालय से आवेदन खारिज होने के बाद इस न्यायालय के पास वारंट जारी करने का क्षेत्राधिकार नहीं था।
बता दें, पूर्व सीएसपी नेहा पर पद का दुरुपयोग कर महंगी जमीन का कौडिय़ों के दाम सौदा कराने का आरोप है। उनपर मामले में केस दर्ज हुआ तो विभाग ने निलंबित कर दिया था।
कटनी की निलंबित सीएसपी नेहा पच्चीसिया की याचिका पर हाईकोर्ट की भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम संबंधित विशेष बेंच में सुनवाई होगी। नेहा ने उनके पर दर्ज केस को रद्द करने याचिका दाखिल की है। राज्य सरकार ने तर्क दिया गया कि एफआइआर में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराएं हैं। इसलिए नियमानुसार सुनवाई भ्रष्टाचार से जुड़े प्रकरणों के लिए निर्धारित बेंच में होनी चाहिए।
नेहा पच्चीसिया मामले में आज कोर्ट में सुनवाई होनी है। कोर्ट ने केस को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम से जुड़े मामलों की सुनवाई करने वाली उपयुक्त बेंच के समक्ष भेजने का निर्णय लिया था। 22 सितंबर को नई बेंच के समक्ष ही मामले की सुनवाई होगी। हालांकि नेहा के वकीलों ने इसका विरोध किया। उन्होंने पहले से तय बेंच में ही सुनवाई पर जोर दिया। नेहा पच्चीसिया के वकीलों ने तर्क दिया था कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराएं पिछली सुनवाई के बाद जोड़ी गई हैं।
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संतोष पटेल की Reels पर लगेगा ब्रेक? अब MP Police के नए नियमों से बदल जाएगा सबकुछ!
आपने कभी न कभी सोशल मीडिया पर पुलिस अधिकारी संतोष कुमार पटेल की रील जरूर देखी होगी। वर्दी में उनका अंदाज, पुलिस से जुड़े वीडियो और लोगों को जागरूक करने वाले कंटेंट सोशल मीडिया पर काफी नजर आते हैं। लेकिन अब MP Police के नए सोशल मीडिया नियमों के बाद सवाल उठ रहा है- क्या वर्दी में रील बनाने पर लगेगा ब्रेक? आखिर इन नए नियमों में ऐसा क्या है, जिससे सोशल मीडिया पर एक्टिव पुलिस अधिकारियों की गतिविधियां बदल सकती हैं?
मध्य प्रदेश पुलिस में सोशल मीडिया के इस्तेमाल को लेकर सख्ती बढ़ाई गई है। DGP कैलाश मकवाना के निर्देशों के तहत पुलिसकर्मियों के लिए सोशल मीडिया इस्तेमाल से जुड़े दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। इनमें वर्दी में रील, फोटो या वीडियो पोस्ट करने और पुलिस की संवेदनशील गतिविधियों से जुड़ी जानकारी साझा करने पर रोक जैसी पाबंदियां शामिल हैं। नए नियमों के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर सक्रिय पुलिस अधिकारियों को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है। खास तौर पर ऐसे अधिकारी जिनकी सोशल मीडिया पर बड़ी फैन फॉलोइंग है, उनके लिए यह बदलाव महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सोशल मीडिया पर लोकप्रिय पुलिस अधिकारी संतोष कुमार पटेल का नाम भी इसी वजह से चर्चा में है। उन्होंने जुलाई 2026 में भोपाल ACP कोतवाली का पदभार संभाला था। इससे पहले वे बालाघाट में पदस्थ थे। भोपाल में जिम्मेदारी संभालने के बाद उन्होंने कानून-व्यवस्था, अपराध नियंत्रण, ट्रैफिक व्यवस्था और जनता से बेहतर संवाद को अपनी प्राथमिकताओं में बताया था। संतोष कुमार पटेल अपनी सोशल मीडिया सक्रियता और आम लोगों से जुड़ने वाले अंदाज के लिए भी जाने जाते हैं। उनके वीडियो और पोस्ट सोशल मीडिया पर चर्चा में रहे हैं।
सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में लोग उन्हें फॉलो करते हैं। ऐसे में नए नियमों के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि वर्दी और आधिकारिक ड्यूटी से जुड़े वीडियो को लेकर उनकी सोशल मीडिया गतिविधियों में क्या बदलाव आएगा। हालांकि, इन दिशा-निर्देशों का मतलब यह नहीं है कि पुलिस अधिकारी सोशल मीडिया का इस्तेमाल पूरी तरह बंद कर देंगे। मुख्य जोर वर्दी, सरकारी संसाधनों, संवेदनशील जानकारी और पुलिस की आधिकारिक गतिविधियों से जुड़े कंटेंट पर है।
दिशा-निर्देशों में पुलिसकर्मियों को सरकारी या गोपनीय जानकारी सोशल मीडिया के साथ-साथ ChatGPT और दूसरे AI प्लेटफॉर्म पर साझा करने से भी बचने को कहा गया है। पुलिस की कार्रवाई, जांच, छापेमारी, हथियारों की ट्रेनिंग और संवेदनशील ड्यूटी से जुड़ी जानकारी पोस्ट करने को लेकर भी सख्ती की गई है।
नए नियमों के बाद सोशल मीडिया पर सक्रिय पुलिसकर्मियों को यह देखना होगा कि उनका कंटेंट विभागीय दिशा-निर्देशों के दायरे में है या नहीं। खास तौर पर वर्दी में बनाए गए वीडियो और आधिकारिक ड्यूटी से जुड़े कंटेंट पर अब पहले से ज्यादा सावधानी जरूरी होगी। ऐसे में संतोष कुमार पटेल जैसे सोशल मीडिया पर चर्चित पुलिस अधिकारियों को लेकर सवाल यही है- क्या अब वर्दी वाली रील्स पर ब्रेक लगेगा?

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गरिमा के जन्म के 15 मिनिट बाद का फोटो
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गरिमा के 2 वर्ष बाद का फोटो
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बीमार होने के बाद भोपाल अस्पताल मे भर्ती गरिमा
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हाई कोर्ट के आदेश के बाद गरिमा के शव को जमीन से निकालते हुऐ
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निकालने के बाद गरिमा के शव को पैक कर जॉच के लिऐ भेजा गया
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दोषी डॉक्टर के खिलाफ मामला कायम कराने के लिऐ पुलिस अधिक्षक से मिले पत्रकार
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गरिमा के शव की जॉच होने के बाद पुनः उसी स्थान पर चबूतरा का निर्माण किया गया
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पूजा स्थल मे गरिमा
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