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ग्वालियर। ग्वालियर में सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर और ‘इंस्टाग्राम क्वीन’ के नाम से मशहूर 21 साल की पलक रजक की संदिग्ध मौत मामले में मुरार थाना पुलिस ने FIR दर्ज की है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत की वजह फांसी लगने से दम घुटना बताई गई है। वहीं परिजनों ने इसे हत्या करार देते हुए ससुराल पक्ष पर गंभीर आरोप लगाए हैं। मुरार थाना पुलिस ने पति, देवर और सास के खिलाफ FIR दर्ज कर जांच तेज कर दी है।
ग्वालियर के मुरार थाना क्षेत्र स्थित सुरैयापुरा में रहने वाली सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर पलक रजक की संदिग्ध मौत ने पूरे शहर को झकझोर दिया है। 12 मई की शाम पलक का शव उसके ससुराल स्थित घर में मिला था। महज 21 साल की उम्र में पलक की मौत ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत की वजह हैंगिंग यानी फांसी लगने से दम घुटना बताई गई है। रिपोर्ट में शरीर पर किसी तरह की बाहरी चोट या प्रताड़ना के निशान नहीं मिले हैं। लेकिन सोनम के माता पिता भाई आरोप लगा चुके है कि पलक ने आत्महत्या नहीं की,बल्कि उसकी हत्या की गई है। पलक के पिता राधेश्याम रजक और भाई प्रिंस रजक ने ससुराल पक्ष पर गंभीर आरोप लगाए हैं। परिवार का कहना है कि शादी के बाद से ही पलक को लगातार प्रताड़ित किया जा रहा था। आरोप है कि ससुराल वाले कार और सोने की चेन की मांग कर रहे थे। सास और देवर मानसिक रूप से प्रताड़ित करते थे,जबकि पति अमित ने कभी उसका साथ नहीं दिया।
परिजनों के मुताबिक मौत से करीब 20 मिनट पहले पलक ने अपने पिता को फोन कर अपनी पीड़ा बताई थी। भाई प्रिंस उसे लेने जाने की तैयारी कर रहा था, लेकिन उससे पहले ही पलक की मौत की खबर आ गई। पलक सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव थी और इंस्टाग्राम पर उसकी बड़ी फैन फॉलोइंग थी। पुलिस को उसकी प्रोफाइल से कई ऐसी रील्स मिली हैं जो मानसिक तनाव की ओर इशारा करती हैं। 10 मई को पोस्ट की गई एक रील में पलक ने Panic Attack, Anxiety, Sleepless Nights, Continuous Crying और Depression जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया था। वहीं 24 अप्रैल को मैरिज एनिवर्सरी पर पोस्ट की गई रील में भी उसने दर्द और टूटती जिंदगी के भाव जाहिर किए थे। अब पुलिस इन सोशल मीडिया पोस्ट्स को तकनीकी साक्ष्य मानकर जांच कर रही है।
मामले में CSP अतुल सोनी का कहना है कि शुरुआती तौर पर मर्ग कायम किया गया था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और परिजनों के आरोपों के आधार पर अब पति अमित, देवर आकाश और सास मीरा देवी के खिलाफ FIR दर्ज कर ली गई है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हैंगिंग की पुष्टि हुई है। सोशल मीडिया एक्टिविटी और कॉल रिकॉर्ड की जांच की जा रही है। फिलहाल FIR तो दर्ज हो गयी है,लेकिन पलक रजक की मौत आत्महत्या है या इसके पीछे कोई साजिश छिपी है,इसका जवाब पुलिस की पूरी जांच के बाद ही सामने आएगा।

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सीएम के काफिले का सिपाही ने चार किमी तक किया पीछा, लालघाटी चौराहे पर सुरक्षा घेरा तोड़ा, किया गया सस्पेंड
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सुरक्षा में बड़ी चूक का मामला सामने आया है। बुधवार रात एक बाइक सवार सिपाही ने लालघाटी चौराहे पर मुख्यमंत्री के काफिले में घुसकर उसे ओवरटेक करने की कोशिश की। सिपाही नशे की हालत में करीब चार किलोमीटर तक पीछा करता रहा।
करबला तिराहे के पास प्वाइंट पर पुलिस ने उसे रोका। ब्रीथ एनलाइजर से टेस्ट करने पर वह शराब के नशे में पाया गया। जिसके बाद डीसीपी जोन-4 ने सिपाही शैलेश अवस्थी को सस्पेंड कर दिया है।
शैलेश भोपाल में थाना प्रभारी रहे इंस्पेक्टर नीलेश अवस्थी का छोटा भाई है। जानकारी के अनुसार मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव रात करीब 10 बजे स्टेट हैंगर से मुख्यमंत्री निवास लौट रहे थे। काफिले के गुजरने के दौरान लालघाटी चौराहे पर कोहेफिजा पुलिस की विशेष सुरक्षा व्यवस्था लगाई गई थी।
बताया जा रहा है कि सिपाही शैलेश अवस्थी करीब चार किलोमीटर तक मुख्यमंत्री के काफिले के पीछे बाइक दौड़ाता रहा। स्थिति को गंभीरता से लेते हुए पुलिस ने तत्काल वायरलेस पर आगे के प्वाइंट्स को सूचना दी। इसके बाद करबला तिराहे पर घेराबंदी कर उसे पकड़ लिया गया।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार सिपाही शराब के नशे में था। प्रारंभिक जांच के बाद उसके खिलाफ कार्रवाई करते हुए उसे सस्पेंड कर दिया गया है। घटना के बाद कोहेफिजा पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठे हैं। अधिकारियों का कहना है कि सुरक्षा में हुई चूक की अलग से जांच कर जिम्मेदार पुलिसकर्मियों पर भी कार्रवाई की जाएगी।
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देवास पटाखा फैक्ट्री ब्लास्ट केस: मुख्य आरोपी दिल्ली एयरपोर्ट से गिरफ्तार, विस्फोट में 6 लोगों की गई जान
भोपाल। देवास के टोंककला पटाखा फैक्ट्री ब्लास्ट मामले में पुलिस को बड़ी कामयाबी मिली है। मामले के मुख्य आरोपी मुकेश विज को चीन के ग्वांग्झू से भारत लौटते ही दिल्ली एयरपोर्ट से गिरफ्तार कर लिया गया। आरोपी के खिलाफ पहले से लुक आउट सर्कुलर जारी था। वहीं फरार चल रहे एक अन्य आरोपी महेश चौहान को भी दिल्ली से पकड़ा गया है।
बता दें कि टोंककला पटाखा फैक्ट्री में हुए भीषण विस्फोट में अब तक 6 लोगों की मौत हो चुकी है। इस मामले में इससे पहले फैक्ट्री लाइसेंसी अनिल मालवीय, ठेकेदार मोहम्मद अयाज और संयुक्त संचालक कपिल विज की गिरफ्तारी हो चुकी है। अब तक कुल 5 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जबकि मामले की जांच लगातार जारी है।

उमरिया, भरेवा। लूट का सामान खरीदने वाले आरोपित के फरार होने के मामले में थाना इंदवार के प्रभारी, सब इंस्पेक्टर और एएसआई को एसपी ने सस्पेंड कर दिया है। इस बारे में जानकारी देते हुए एसडीओपी पीएल परस्ते ने बताया कि यह कार्रवाई थाना प्रभारी विजय पाटिल, सब इंस्पेक्टर सूर्यपाल सिंह और एएसआई अमर बहादुर सिंह के खिलाफ की गई है।
एसडीओपी ने यह भी बताया कि फरार हुए आरोपित अनुराग ताम्रकार के पास से पुलिस ने पांच से सात लाख रुपए मूल्य के सोने और चांदी के आभूषण जब्त किए हैं। इसमें एक किलो 10 ग्राम चांदी और 15 ग्राम सोना शामिल है। एसडीओपी ने बताया कि आरोपित की तलाश की जा रही है और उसे जल्द से जल्द गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
एसडीओपी पीएल परस्ते ने बताया कि आरोपित ने गिरफ्तारी के बाद जब्ती के कागजातों पर हस्ताक्षर करने से मना कर दिया था और अपनी पहुंच की धौंस पुलिस अधिकारियों को बता रहा था। आरोपित का कहना था कि उसने जब्त किए गए सोने और चांदी को खरीदा नहीं है, बल्कि उसने यह सारा सामान गिरवी रखा है। पुलिस आरोपित के साथ पूरी सद्भावना का भाव प्रदर्शित कर रही थी और उसे सहयोग के लिए कह रही थी, लेकिन इसी बीच मौका पाकर वह थाने से गायब हो गया। पुलिस लगातार आरोपित की तलाश कर रही है, लेकिन अभी तक उसका कोई सुराग नहीं मिला है।
जिले के इंदवार थाना से लूट का माल खरीदने का आरोपित अनुराग ताम्रकार पिता रामदीन ताम्रकार, उम्र लगभग 40 वर्ष, बुधवार को फरार हो गया था। जानकारी के अनुसार ग्राम पल्झा में कुछ दिन पूर्व हुए सराफा व्यापारी लूटकांड की जांच के दौरान पुलिस ने अनुराग ताम्रकार को पूछताछ के लिए थाने बुलाया था, जिस पर लुटेरों से सोना-चांदी खरीदने का आरोप था।
लूट की घटना को अंजाम देने वाले आरोपितों ने सराफा व्यापारी से लूटे गए सोना-चांदी अनुराग ताम्रकार को बेच दिया था। पुलिस को पूछताछ के दौरान मिली जानकारी और आरोपितों की निशानदेही पर मंगलवार की शाम बरही क्षेत्र से अनुराग को हिरासत में लिया गया था।
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नाबालिग की अधेड़ से शादी, दूल्हा और दादा-दादी समेत 13 लोगों पर FIR, फरार पंडित की तलाश में जुटी पुलिस
इंदौर। राऊ थाना क्षेत्र से सामाजिक व्यवस्था को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है। यहां एक 13 साल की मासूम बच्ची की शादी उससे करीब 30 साल बड़े यानी 42 वर्ष के व्यक्ति से कराई जा रही थी। हालांकि बच्ची के माता-पिता की सूझबूझ और पुलिस की मुस्तैदी के कारण इस बाल विवाह को रुकवा दिया गया है। पुलिस ने दूल्हे बच्ची के दादा-दादी और बारातियों समेत कुल 13 लोगों को आरोपी बनाया है।
जानकारी के अनुसार इस घिनौने अपराध की ताने-बाने बच्ची के दादा-दादी ने बुने थे। वे बच्ची के माता-पिता की मर्जी के खिलाफ जाकर जबरन यह शादी करवा रहे थे। माता-पिता इस शादी से बेहद नाराज थे और अपनी मासूम बेटी का भविष्य बचाने के लिए उन्होंने तुरंत जिला प्रशासन के ‘बाल विवाह निरोधी दस्ते’ से संपर्क किया और लिखित शिकायत दर्ज कराई।
शिकायत के बाद हरकत में आई राऊ थाना पुलिस और बाल विवाह निरोधी दस्ते को पता चला कि यह विवाह उज्जैन में गुपचुप तरीके से संपन्न भी करा दिया गया था। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए मासूम बच्ची को आरोपियों के चंगुल से छुड़ाया और सुरक्षित उसके माता-पिता के सुपुर्द किया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने बेहद सख्त रुख अपनाया है। डीसीपी नरेंद्र रावत के मुताबिक पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 42 वर्षीय दूल्हे को गिरफ्तार कर लिया है। इसके अलावा बच्ची के दादा-दादी को मुख्य साजिशकर्ता एवं शादी में शामिल हुए बारातियों को भी सह-आरोपी बनाया गया है। इसके साथ ही उज्जैन के रहने वाले उस पंडित की भी सरगर्मी से तलाश की जा रही है जिसने यह बाल विवाह करवाया था।
DCP रावत ने बताया कि बाल विवाह एक बेहद गंभीर और सामाजिक अपराध है। कानून के मुताबिक बाल विवाह में शामिल होने वाला या उसमें किसी भी तरह का सहयोग करने वाला हर एक व्यक्ति चाहे वह बाराती हो, हलवाई हो या पंडित बराबर का अपराधी माना जाता है। इस मामले में भी शामिल सभी 13 लोगों पर कड़ी कार्रवाई की जा रही है।
जिला प्रशासन और सरकार द्वारा बाल विवाह को रोकने के लिए लगातार बड़े-बड़े जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। लेकिन इंदौर की इस घटना ने साफ कर दिया है कि आज भी समाज के कुछ हिस्सों में ऐसी रूढ़िवादी और आपराधिक मानसिकता पैर पसारे हुए है। फिलहाल पुलिस पकड़े गए आरोपियों से पूछताछ कर रही है और फरार पंडित की तलाश में जुटी है।
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वाग्देवी मंदिर घोषित होने के बाद पहले शुक्रवार को अखंड पूजा और महाआरती, धार में चप्पे-चप्पे पर सुरक्षा
भोपाल। धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला परिसर में शुक्रवार को एक नया अध्याय शुरू होने जा रहा है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के हालिया फैसले के बाद यह पहला शुक्रवार है, जब यहां की तस्वीर पूरी तरह बदली नजर आएगी। अदालत ने विवादित भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद परिसर को देवी वाग्देवी यानी मां सरस्वती का मंदिर माना है। साथ ही, वर्षों से चली आ रही उस व्यवस्था को भी समाप्त कर दिया गया है, जिसके तहत मुस्लिम समुदाय को शुक्रवार को नमाज अदा करने की अनुमति दी जाती थी।
हाईकोर्ट के फैसले के बाद हिंदू संगठनों में उत्साह का माहौल है। भोज उत्सव समिति ने इस शुक्रवार को गौरव दिवस के रूप में मनाने का फैसला किया है। समिति के अनुसार, दोपहर में श्रद्धालु धान मंडी चौराहे पर एकत्र होंगे, जहां से विशाल जुलूस भोजशाला परिसर तक पहुंचेगा। परिसर में सामूहिक पूजा, अखंड आराधना और महाआरती का आयोजन किया जाएगा। आयोजकों का कहना है कि यह आयोजन ऐतिहासिक और सांस्कृतिक अस्मिता का प्रतीक होगा।
संवेदनशील माहौल को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने पूरे शहर को सुरक्षा घेरे में बदल दिया है। एसपी सचिन शर्मा के मुताबिक, भोजशाला परिसर और आसपास के संवेदनशील इलाकों में लगभग 2000 पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है। ड्रोन कैमरों और CCTV के जरिए हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है। इसके अलावा मोबाइल गश्त, वाहनों की सघन जांच और नौ-स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई है, ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके।
15 मई को आए हाईकोर्ट के फैसले ने प्रदेश की राजनीति और सामाजिक माहौल में नई हलचल पैदा कर दी है। अदालत ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के उस पुराने आदेश को भी निरस्त कर दिया, जिसके आधार पर परिसर में शुक्रवार को नमाज की अनुमति दी जाती थी। फैसले के बाद प्रशासन लगातार शांति बनाए रखने की अपील कर रहा है। कलेक्टर राजीव रंजन मीना और पुलिस अधिकारियों ने शांति समिति की बैठक कर दोनों समुदायों से संयम और सौहार्द बनाए रखने की अपील की है।
उधर, हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस ने आरोप लगाया है कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (ASI) अब तक अदालत के निर्देशों का पूर्ण रूप से पालन नहीं कर रहा है। इसे लेकर संस्था के मुख्य याचिकाकर्ता आशीष गोयल और अधिवक्ता विनय जोशी ने एएसआई भोपाल मंडल को पत्र और ई-मेल भेजकर तत्काल कार्रवाई की मांग की है। संस्था की ओर से भेजे गए पत्र में कहा गया है कि भोजशाला प्रकरण में हाईकोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए विस्तृत आदेश पारित किया था। इसके बावजूद अब तक कई महत्वपूर्ण मांगों पर अमल नहीं हुआ है। हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस ने एएसआई से मांग की है कि न्यायालय के आदेशों का पालन सुनिश्चित करते हुए श्रद्धालुओं को निर्बाध दर्शन और पूजन की सुविधा उपलब्ध कराई जाए।
संस्था ने अपने पत्र में कहा कि वर्तमान में श्रद्धालुओं से प्रवेश के लिए एक रुपए का टिकट लिया जा रहा है, जबकि न्यायालय के आदेश के अनुसार भक्तों को नि:शुल्क प्रवेश और पूजा का अधिकार मिलना चाहिए। पत्र में यह भी मांग की गई कि भोजशाला परिसर के दक्षिण-पूर्व दिशा में स्थित कमरे को खोला जाए, जिसे मूल मंदिर का हिस्सा बताया गया है।
हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस ने एएसआई सर्वेक्षण के दौरान प्राप्त देवी-देवताओं की प्रतिमाओं और धार्मिक अवशेषों को पुनः भोजशाला परिसर में स्थापित करने की मांग भी उठाई है। संस्था का कहना है कि सर्वे के दौरान मिले कई हिंदू प्रतीक चिह्न और प्रतिमाएं फिलहाल सुरक्षित स्थानों पर रखी गई हैं, लेकिन श्रद्धालुओं को उनके दर्शन की अनुमति नहीं है। पत्र में कहा गया कि इन प्रतिमाओं और धार्मिक अवशेषों को भोजशाला परिसर में उचित स्थान पर स्थापित किया जाए, ताकि श्रद्धालु नियमित रूप से दर्शन और पूजन कर सकें। साथ ही प्रतिमाओं की सुरक्षा और संरक्षण के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने की भी मांग की गई है।
संस्था ने अपने पत्राचार में यह भी कहा कि हाई कोर्ट ने भोजशाला को मंदिर घोषित किया है, इसलिए परिसर में बाद में लगाए गए मुस्लिम धर्म से जुड़े प्रतीक चिह्नों को हटाया जाना चाहिए। हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस ने दावा किया कि भोजशाला प्राचीनकाल से मां वाग्देवी और हिंदू आस्था का प्रमुख केंद्र रही है। गौरतलब है कि वर्ष 2024 में हाई कोर्ट के निर्देश पर भोजशाला परिसर में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग द्वारा 98 दिन तक वैज्ञानिक सर्वेक्षण किया गया था। इसके बाद से ही हिंदू और मुस्लिम पक्षों के बीच धार्मिक स्वरूप को लेकर कानूनी लड़ाई तेज हो गई थी। वहीं, 23 जनवरी 2026 को वसंत पंचमी के अवसर पर सुप्रीम कोर्ट ने दिनभर पूजा-अर्चना की अनुमति देने का आदेश भी इसी प्रकरण में पारित किया था। इसके बाद अब हाई कोर्ट के हालिया आदेश के क्रियान्वयन को लेकर एक बार फिर भोजशाला मामला चर्चा में आ गया है।

देश में हर दिन नई-नई राजनीतिक पार्टियां बनती रहती हैं, लेकिन इस समय कॉकरोच जनता पार्टी का नाम हर किसी के जुबान पर है। सोशल मीडिया के तीन प्लेटफॉर्म एक्स, इंस्टाग्राम और फेसबुक…इनपर कॉकरोच जनता पार्टी ने धमाकेदार एंट्री की है। पार्टी ने खासकर इंस्टाग्राम पर तो अलग ही धमाका किया हुआ है। कॉकरोच जनता पार्टी नाम के अकाउंट ने इंस्टाग्राम पर बड़ा मुकाम हासिल करते हुए महज 4 दिन में बीजेपी और कांग्रेस जैसी दिग्गज पॉलिटिकल पार्टियों को पीछे छोड़ दिया है। इंस्टाग्राम पर इसके 14 मिलियन फॉलोअर्स हो गए हैं।
कॉकरोच जनता पार्टी के मिले समर्थन को लेकर अब नया अपडेट है कि इस पार्टी के पाकिस्तान कनेक्शन हैं. यह दावा दिल्ली में बीजेपी नेता ने किया है.
कॉकरोच जनता पार्टी को देश का राजनीतिक विमर्श बनने में भले ही फॉलअर्स बढ़ने के मुकाबले ज्यादा वक्त लग गया हो, लेकिन अब खुलेतौर पर राजनीतिक बयानबाजी इस मजाक में बनी पार्टी को लेकर शुरू हो गई है. कोई इसे युवाओं का गुस्सा बता रहा है, तो किसी ने इसे राजनीतिक विकल्प करार दिया है.
पार्टी को काफी सपोर्ट मिल रहा है. इसके इंस्टाग्राम पेज पर महज पांच दिन के भीतर 15 मिलियन फॉलोअर्स जुड़ गए हैं. समर्थन के मामले में इस पेज ने बीजेपी के इंस्टाग्राम पेज को काफी पीछे छोड़ दिया है. मामला इतना बढ़ गया था कि इस पार्टी का एक्स अकाउंट ट्विटर पर ब्लॉक कर दिया. लेकिन अब नया अपडेट है कि इस पार्टी के पाकिस्तान कनेक्शन हैं. यह हम नहीं, दिल्ली में बीजेपी नेता ने दावा किया है.
उन्होंने सोशल मीडिया पर इस कॉकरोच जनता पार्टी को पाकिस्तान जनता पार्टी कहा है. बकायादा उन्होंने एक Insight Data इमेज भी शेयर किया है.
इस इमेज में दावा किया गया है कि पाकिस्तान के 49 प्रतिशत फॉलोअर्स पाकिस्तानी हैं. इनके अलावा यूएसए में 14 प्रतिशत, बांग्लादेश में 14 प्रतिशत, इंडिया में 9 प्रतिशत, यूके में 3 प्रतिशत, ऑस्ट्रेलिया में 3 प्रतिशत, सऊदी अरब में 3 प्रतिशत, यूएई में 2 प्रतिशत और अन्य देश के 3 प्रतिशथ फॉलोअर्स हैं. अब इस कनेक्शन पर यूजर्स कई तरह की प्रतिक्रिया भी दे रहे हैं.
15 मई 2026 को जस्टिस सूर्यकांत ने एक केस की सुनवाई के दौरान बेरोजगार पढ़े-लिखे लोगों के एक ग्रुप की तुलना ‘कॉकरोच’ और ‘परजीवी’ से कर दी. बस, यहीं से इस पार्टी का आइडिया पैदा हुआ.
बता दें कि, कॉकरोच जनता पार्टी’ का क्रेज भारत में ही नहीं बल्कि पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान में भी देखा जा रहा है। इस पार्टी की पाकिस्तान में भी चर्चा होने लगी है। पाकिस्तान के फेसम जर्नलिस्ट सनाउल्लाह खान (Sana Ullah Khan) ने भारत में बने कॉरकरोच जनता पार्टी को लेकर एक वीडियो शेयर किया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर इस पार्टी पर एक वीडियो शेयर किया है, जो देखते ही देखते वायरल भी हो गया।
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पुलवाला हमले का मास्टरमाइंड हमजा मारा गया, पाकिस्तान में गोली मारकर हत्या
पुलवामा हमले के मास्टरमाइंड में शामिल आतंकी हमजा बुरहान को मुजफ्फराबाद में अज्ञात हमलावरों ने गोली मार दी। हमले में उसकी मौत हो गई और घटना के बाद सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं। हमजा पर आतंकियों को ट्रेनिंग देने और घुसपैठ में मदद करने के आरोप थे।
जानकारी के अनुसार, आतंकी हमजा बुरहान को पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के मुजफ्फराबाद में निशाना बनाया गया। कुछ अज्ञात हमलावरों ने ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी। हमले में हमजा को कई गोलियां लगीं, जिससे मौके पर ही उसकी मौत हो गई।
हमजा बुरहान का नाम 14 फरवरी 2019 को हुए पुलवामा आतंकी हमले के साजिशकर्ताओं में शामिल रहा है। इस हमले में आतंकियों ने सीआरपीएफ के काफिले को निशाना बनाया था, जिसमें 40 से ज्यादा जवान शहीद हुए थे। सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक हमजा पाकिस्तान में खुद को टीचर बताता था, लेकिन पर्दे के पीछे आतंकी गतिविधियों से जुड़ा हुआ था। वह कई आतंकी संगठनों के संपर्क में रहकर गतिविधियों को अंजाम देता था।
रिपोर्ट्स के मुताबिक हमजा बुरहान 2019 के बाद से कई आतंकी गतिविधियों में सक्रिय था। वह पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में आतंकियों को ट्रेनिंग देने के साथ बॉर्डर पार घुसपैठ कराने में भी मदद करता था। पुलवामा हमले के बाद भारत ने जवाबी कार्रवाई करते हुए ऑपरेशन बालाकोट को अंजाम दिया था, जिसमें पाकिस्तान में मौजूद आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया था।
अर्जुमंद गुलजार डार उर्फ हमजा बुरहान अल बद्र आतंकी संगठन का सक्रिय कमांडर था। वह साल 2015 से पाकिस्तान में रह रहा था और आतंकियों की भर्ती कराने के साथ आतंकी गतिविधियों को संचालित करने में जुटा हुआ था। भारत सरकार ने साल 2022 में उसे UAPA के तहत आतंकी घोषित किया था, जबकि वह मुजफ्फराबाद के अब्बास इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस में प्रिंसिपल के पद पर भी तैनात था।
हमजा बुरहान का नाम पुलवामा आतंकी हमले की साजिश से जुड़ा था। वह साल 2020 में पुलवामा में CRPF जवानों पर हुए ग्रेनेड हमले का भी मास्टरमाइंड बताया गया था। 14 फरवरी 2019 को हुए पुलवामा हमले में CRPF के 40 जवान शहीद हुए थे।
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बकरीद पर गाय, बकरे और ऊंट सबकी होगी कुर्बानी- हुमायूं कबीर
बकरीद से पहले पश्चिम बंगाल में कुर्बानी को लेकर सियासत तेज हो गई है। आम जनता उन्नयन पार्टी यानी AJUP चीफ हुमायूं कबीर ने ऐसा बयान दिया है, जिसके बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया है। हुमायूं कबीर ने कहा कि बकरीद पर कुर्बानी हर हाल में होगी और इसे कोई नहीं रोक सकता। उन्होंने गाय, बकरी और ऊंट समेत कई जानवरों की कुर्बानी का जिक्र करते हुए बड़ा बयान दिया है। दरअसल, पश्चिम बंगाल सरकार ने एनिमल स्लॉटर कंट्रोल एक्ट 1950 के तहत खुले में कुर्बानी पर रोक लगाने को लेकर आदेश जारी किया था। इसी आदेश को लेकर हुमायूं कबीर ने सरकार और बीजेपी नेताओं पर निशाना साधा। उनका बयान सामने आने के बाद अब यह मुद्दा राजनीतिक और धार्मिक बहस का केंद्र बन गया है।
हुमायूं कबीर ने मीडिया से बातचीत में कहा कि कुर्बानी कोई नई परंपरा नहीं है, बल्कि यह सदियों से चली आ रही धार्मिक प्रक्रिया है। उन्होंने कहा कि जब तक दुनिया रहेगी, कुर्बानी होती रहेगी। गाय की भी कुर्बानी होगी, बकरी की भी होगी और ऊंट की भी होगी। इसे कोई रोक नहीं सकता। उन्होंने कहा कि मुस्लिम समाज अपनी धार्मिक परंपराओं से पीछे हटने वाला नहीं है। कबीर के अनुसार, "कुर्बानी 1400 साल से चली आ रही है और आगे भी जारी रहेगी। सरकार चाहे कोई भी आदेश जारी कर दे, लेकिन धार्मिक परंपराओं को पूरी तरह रोका नहीं जा सकता।"
गौरतलब है कि एनिमल स्लॉटर कंट्रोल एक्ट 1950 के तहत राज्य सरकार ने खुले में कुर्बानी पर रोक लगाने का आदेश जारी किया था। इसी आदेश के खिलाफ कबीर ने बयान दिया है। बाबरी मस्जिद-राम जन्मभूमि केस के मुख्य पैरोकार इकबाल अंसारी ने गुरुवार को कहा था कि मुस्लिम समुदाय गाय का सम्मान करें और उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया था कि गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित कर दिया जाए।
हुमायूं कबीर ने पश्चिम बंगाल सरकार के उस आदेश पर भी सवाल उठाए, जिसमें खुले में कुर्बानी पर रोक लगाने की बात कही गई थी। उन्होंने कहा कि सरकार प्रशासनिक नियम बना सकती है, लेकिन धार्मिक परंपराओं में दखल नहीं देना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार गाय को लेकर कोई नियम बना सकती है या लोगों से अपील कर सकती है, लेकिन कुर्बानी की परंपरा को बंद नहीं किया जा सकता। हम किसी की बात सुनने वाले नहीं हैं। कबीर ने यह भी कहा कि अगर सरकार को सख्ती करनी है तो सबसे पहले स्लॉटर हाउस बंद करने चाहिए। उन्होंने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि देश से बीफ एक्सपोर्ट करके सरकार खुद पैसा कमाती है, तो फिर सिर्फ कुर्बानी पर सवाल क्यों उठाए जा रहे हैं।
हुमायूं कबीर ने पश्चिम बंगाल के नेता शुभेंदु अधिकारी का नाम लेते हुए भी तीखा बयान दिया। उन्होंने कहा कि मैं बीजेपी सरकार और शुभेंदु अधिकारी से कहना चाहता हूं कि आग से खेलने की कोशिश मत कीजिए। अगर कुर्बानी रोकने की कोशिश की गई तो मुश्किलें बढ़ सकती हैं। उन्होंने दावा किया कि राज्य में बड़ी संख्या में मुस्लिम समुदाय के लोग गोमांस खाते हैं और धार्मिक मामलों में कोई समझौता नहीं किया जाएगा। कबीर ने कहा कि संविधान सभी को अपने धर्म का पालन करने का अधिकार देता है और उसी अधिकार के तहत कुर्बानी की परंपरा भी जारी रहेगी।

मध्य प्रदेश के भिंड जिले से भ्रष्टाचार का एक बड़ा मामला सामने आया है। गोहद तहसील क्षेत्र में पदस्थ पटवारी हिमांशु तोमर को ग्वालियर लोकायुक्त पुलिस ने 6 हजार रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। आरोपी पटवारी जमीन के सीमांकन के बदले रिश्वत मांग रहा था। लोकायुक्त की इस कार्रवाई के बाद राजस्व विभाग में हड़कंप मच गया है।
यह कार्रवाई बुधवार को मालनपुर थाना क्षेत्र के जोगीपुरा इलाके में स्थित कैडबरी फैक्ट्री के पास की गई। लोकायुक्त टीम पहले से ही जाल बिछाकर मौके पर मौजूद थी। जैसे ही पटवारी ने फरियादी से पैसे लिए, टीम ने तुरंत उसे पकड़ लिया।
जानकारी के मुताबिक आरोपी हिमांशु तोमर गोहद तहसील और एंडौरी उप तहसील के अंतर्गत आने वाले तुकैंडा हल्के में पटवारी के पद पर तैनात है। फरियादी राम खिलाड़ी चौहान ने ग्वालियर लोकायुक्त में शिकायत दर्ज कराई थी।
फरियादी का आरोप था कि उसकी जमीन का सीमांकन किया जाना था, लेकिन पटवारी काम करने के बदले पैसे मांग रहा था। पटवारी ने पहले 8 हजार रुपए रिश्वत की मांग की थी। शिकायतकर्ता का कहना था कि बिना पैसे दिए सीमांकन की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाई जा रही थी। इसके बाद परेशान होकर फरियादी ने लोकायुक्त पुलिस से संपर्क किया और पूरी जानकारी दी।
शिकायत मिलने के बाद लोकायुक्त पुलिस ने मामले की जांच शुरू की। टीम ने पहले यह पता लगाया कि शिकायत सही है या नहीं। जांच में रिश्वत मांगने की बात सही पाई गई। इसके बाद लोकायुक्त पुलिस ने आरोपी को पकड़ने के लिए पूरी योजना बनाई। फरियादी को कहा गया कि वह पटवारी से संपर्क बनाए रखे और बातचीत जारी रखे।बातचीत के दौरान रिश्वत की रकम 8 हजार रुपए से घटाकर 6 हजार रुपए तय हुई। जैसे ही पैसे देने का समय तय हुआ, लोकायुक्त टीम सक्रिय हो गई।
बुधवार को तय योजना के अनुसार फरियादी आरोपी पटवारी के पास पहुंचा। जैसे ही उसने 6 हजार रुपए पटवारी हिमांशु तोमर को दिए, पहले से मौजूद लोकायुक्त टीम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए उसे पकड़ लिया।
लोकायुक्त अधिकारियों ने मौके पर ही आरोपी के हाथ धुलवाए। जांच में पुष्टि हुई कि आरोपी ने रिश्वत की रकम हाथ में ली थी। इसके बाद उसे हिरासत में लेकर मालनपुर थाना लाया गया। कार्रवाई के दौरान वहां मौजूद लोगों में भी काफी हलचल देखने को मिली। अचानक हुई इस कार्रवाई से आसपास के लोग भी हैरान रह गए।
गिरफ्तारी के बाद आरोपी पटवारी से देर शाम तक पूछताछ की गई। लोकायुक्त टीम ने उससे जुड़े दस्तावेज और अन्य जरूरी जानकारी भी जुटाई। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आरोपी पहले भी इस तरह रिश्वत लेने के मामलों में शामिल रहा है या नहीं। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि कहीं इस मामले में कोई और कर्मचारी या अधिकारी भी शामिल तो नहीं है। लोकायुक्त पुलिस ने आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर लिया है। आगे की जांच जारी है।
पटवारी की गिरफ्तारी के बाद राजस्व विभाग में हड़कंप की स्थिति बन गई है। जिले में इस कार्रवाई की चर्चा तेजी से हो रही है। लोगों का कहना है कि सीमांकन, नामांतरण और नक्शे से जुड़े कामों में अक्सर आम जनता को परेशान किया जाता है। कई बार बिना पैसे दिए काम नहीं होता, जिससे लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
मध्य प्रदेश में पिछले कुछ समय में कई सरकारी कर्मचारी और अधिकारी रिश्वत लेते पकड़े जा चुके हैं। लोकायुक्त लगातार ट्रैप कार्रवाई कर भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान चला रही है। इसके बावजूद कई विभागों में रिश्वतखोरी की शिकायतें लगातार सामने आती रहती हैं। खासतौर पर राजस्व विभाग में जमीन से जुड़े मामलों में भ्रष्टाचार की शिकायतें ज्यादा देखने को मिलती हैं।
अब इस मामले में आगे की जांच जारी है और लोकायुक्त पुलिस आरोपी पटवारी से जुड़े अन्य पहलुओं की भी जांच कर रही है।
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थाने के मेन गेट पर लगी हथकड़ी: खुद सुरक्षा ढूंढ रही पुलिस! वीडियो हुआ वायरल
डबरा (ग्वालियर)। मध्य प्रदेश के ग्वालियर जिले की पुलिस को अब खुद ही सुरक्षा की जरूरत आन पड़ी है। ये इसलिए कह रहे हैं क्यों कि सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है। जिसमें एक फरियादी अपनी फरियाद लेकर थाने पहुंचता है, लेकिन उसे एक भी पुलिसकर्मी नजर नहीं आता। फरियादी थाने में आवाज लगाता हुआ दिखाई दे रहा है, लेकिन कोई भी सुनने वाला नहीं था। उसने इसका वीडियो भी बनाया है।
यह पूरा मामला ग्वालियर जिले के पिछोर थाने का बताया जा रहा है। जहां रात के समय एक फरियादी अपनी फरियाद लेकर पहुंचता है, लेकिन थाने का गेट ही बंद मिलता है। इतना ही नहीं गेट पर हथकड़ी डाली होती हैं और पुलिसकर्मी अंदर सोते रहे है। फरियादी करीब 1 घंटे तक चिल्लाता रहा, लेकिन कोई भी पुलिसकुर्मी उठकर नहीं आया। फरियादी ने थाने के अंदर का वीडियो भी बनाया। इसके बाद वह अपने घर लौट जाता है।
सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद खाकी वर्दी पर गंभीर सवाल उठ रहे है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि 24 घंटे नागरिकों की सुरक्षा देने का जिम्मा, जिनके कंधों पर है वही ताला डालकर गहरी नींद में सो जाएं तो क्या होगा ? अगर रात के समय कोई बड़ी घटना हो जाए तो आखिरकार इसका जिम्मेदार कौन होगा ?
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बेखौफ बदमाश: घर में घुसकर किन्नर को डंडों से पीटा, फिर लाखों रुपए-गहने लेकर हुए फरार
नागदा। उन्हेल थाना क्षेत्र में किन्नर के घर पर लूट व मारपीट की घटना हुई है। तीन अज्ञात बदमाश अचानक घर में घुस आए और डंडों से हमला कर घायल कर दिया। इसके बाद घर में रखे लाखों रूपए और गहने लेकर फरार हो गए।
घर किन्नर समुदाय की गुरू कविता का है। बताया जा रहा है कि घर में घुसे बदमाशों ने कविता और मिस्टी पर डंडे से वार कर उन्हें घायल कर दिया। जिसके बाद दोनों बेहोश हो गए। हमले में कविता को गंभीर चोटें आई हैं जिन्हें उपचार के लिए उज्जैन जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। जहां डॉक्टर उनका इलाज कर रहे हैं। वहीं मिस्टी को मामूली चोटें आई हैं।
बदमाशों ने कविता और मिस्टी के बेहोश होने के बाद घर में लूटपाट की वारदात को अंजाम दिया। बदमाशों ने घर में रखा 3 लाख 50 हजार रूपए नगद और गहनों पर हाथ साफ किए और वहां से फरार हो गए।
घटना की सूचना मिलते ही उन्हेल थाना पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी। पुलिस आसपास लगे CCTV खंगाल रही है जिससे आरोपियों की पहचान हो सके। पुलिस का कहना है कि आरोपियों की तलाश की जा रही है, जल्द ही उन्हें गिरफ्तार कर घटना का खुलासा किया जाएगा।

इंदौर। एमपी के इंदौर में घर से बकरा खरीदने निकले एक युवक के अपहरण से सनसनी फैल गई। बदमाशों ने उसे कार में जबरन बिठाया, घर से कुछ दूर ले जाकर मारपीट की और फिर परिवार वालों ने पैसों की डिमांड की। पुलिस ने 2 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।
खजराना पुलिस के मुताबिक घटना महफूज निवासी चंदननगर है। परिजन ने पुलिस को बताया युवक बकरा खरीदने के लिए खजराना गया था। तभी वहां कुछ आरोपी कार से आए और घेरकर उसकी पिटाई करने लगे । फिर सफेद कार में जबरदस्ती बैठाकर ले गए। शुरुआती तौर पर पुलिस ने परिजनों के बताए अनुसार गुमशुदगी का प्रकरण दर्ज किया था। इसके बाद परिजनों ने अपहरण की भी आशंका व्यक्त करते हुए रुपए की डिमांड की बात कही थी।
पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए फरियादी के बैकग्राउंड की जानकारी जुटाई और उसके बाद में जांच पड़ताल करते हुए देवास के नजदीक फरियादी को ले गए थे। उसके बाद खुद मारपीट करते हुए छोड़ गए। मामले में पुलिस ने फरियादी के बताए अनुसार महफूज खान निवासी माणिकबाग और फिरोज खान निवासी सीहोर के रहने वाले व्यक्ति को गिरफ्तार कर लिया। साथ ही घटना के दौरान इस्तेमाल की गई कार भी जब्त कर ली गई है।
खजराना थाना प्रभारी मनोज सेंधवा का कहना है कि रुपए से जुड़ा हुआ मामला है। दोनों पक्षों में लेनदेन हुआ था, जिसको लेकर विवाद चल रहा था। जबरदस्ती कार में बिठाकर ले गए थे, इस कारण अपहरण की धाराओं में प्रकरण दर्ज किया गया है और आगे की जांच पड़ताल की जा रही है।
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विकलांग कोटे से पाई सरकारी नौकरी, श्रम निरीक्षक नवनीत कुमार पांडेय की सेवा समाप्त
सिंगरौली। श्रम विभाग में बड़ा प्रशासनिक एक्शन हुआ है। विकलांग सर्टिफिकेट से नौकरी पाने को लेकर सुर्खियों में रहे श्रम निरीक्षक नवनीत कुमार पांडेय की सेवा शासन ने समाप्त कर दी है। बताया जा रहा है कि उनकी नियुक्ति का मामला हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा था।
कोर्ट के निर्देशों के बाद श्रम आयुक्त इंदौर संदीप जीआर द्वारा जारी आदेश में उन्हें पद से पृथक कर दिया गया। नवनीत पांडेय पूर्व में रीवा जिले में पदस्थ थे, बाद में उनका तबादला सीधी और कटनी सहित अन्य जिलों में किया गया था।
करीब दो साल पहले उन्हें फिर से सिंगरौली में पदस्थ किया गया था। सरकार ने उन्हें अब तक मिले वेतन और अन्य सरकारों लाभों की रिकवरी के आदेश भी जारी किए हैं। इस फैसले से श्रम विभाग और प्रशासनिक महकमे में हलचल मच गई है।
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ये कौन सी देशभक्ति है मोहन भागवत जी? पीएम मोदी ईंधन बचाने की कर रहे अपील, इधर 14 गाड़ियों के काफिले के साथ निकले RSS प्रमुख
उमरिया। मध्यप्रदेश के उमरिया जिले से एक वीडियो सामने आया है। जिसमें राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सरसंघचालक डॉ मोहन भागवत 14 गाड़ियों के काफिले के साथ जाते हुए दिखाई दिए। ऐसे में अब सवाल उठ रहे है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पेट्रोल-डीजल बचाने का आह्वान क्या सिर्फ आम जनता के लिए है ? वहीं इसे लेकर अब राजनीतिक और सामाजिक बहस भी शुरू हो गई है। साथ ही ईंधन बचत और वीआईपी कल्चर को लेकर भी सवाल भी उठ रहे हैं।
वैश्विक संकट के बीच देशभर में कोने-कोने से पेट्रोल-डीजल की कमी की तस्वीरें सामने आ रही है। इस बीच संघ प्रमुख डॉ मोहन भागवत का एक वीडियो सामने आया। जिसमें वे मध्य प्रदेश के उमरिया जिले से 14 गाड़ियों के काफिले के साथ गुजरते हुए दिखाई दे रहे हैं। वीडियो सामने आने के बाद इस पर सवाल उठ रहे है कि जब देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पेट्रोल-डीजल की बचत, कम ईंधन खपत को लेकर आम जनता से अपील की हैं, तो क्या ये संदेश सिर्फ आम लोगों के लिए ही है ?
हालांकि, सुरक्षा प्रोटोकॉल और वीआईपी मूवमेंट को लेकर तय नियमों के तहत कई बार बड़े काफिलों का इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन वैश्विक संकट के बीच इस मामले पर सोशल मीडिया पर लोग अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दे रहे है। साथ ही ईंधन बचत और वीआईपी कल्चर को लेकर सवाल भी उठा रहे हैं। गौरतलब है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत शहडोल में आयोजित मध्य प्रदेश-छतीसगढ़ के 383 स्वयं सेवकों के विकास वर्ग में शामिल होंगे।
डॉ मोहन भागवत बुधवार सुबह कटनी तक ट्रेन से, इसके बाद सड़क मार्ग के जरिए शहडोल पहुंचे। संघ प्रमुख के पहली बार शहडोल आगमन को लेकर जिले में सुरक्षा व्यवस्था अभूतपूर्व स्तर पर पहुंच गई है। उनके दौरे को देखते हुए पूरा प्रशासन हाईअलर्ट मोड पर है। केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF), स्पेशल ब्रांच, जिला पुलिस और आसपास के जिलों से आने वाले अधिकारियों ने शहडोल में डेरा डाल दिया है। डॉ मोहन भागवत को Z+ श्रेणी की सुरक्षा दी गई है। सुरक्षा व्यवस्था के लिए लगभग 350 अधिकारी-कर्मचारियों की तैनाती की गई है, जिनमें DSP रैंक के अधिकारी, CISF की विशेष टुकड़ी और विभिन्न जिलों से बुलाए गए पुलिस बल शामिल हैं।

प्रमुख समाचार

देश में हर दिन नई-नई राजनीतिक पार्टियां बनती रहती हैं, लेकिन इस समय कॉकरोच जनता पार्टी का नाम हर किसी के जुबान पर है। सोशल मीडिया के तीन प्लेटफॉर्म एक्स, इंस्टाग्राम और फेसबुक…इनपर कॉकरोच जनता पार्टी ने धमाकेदार एंट्री की है। पार्टी ने खासकर इंस्टाग्राम पर तो अलग ही धमाका किया हुआ है। कॉकरोच जनता पार्टी नाम के अकाउंट ने इंस्टाग्राम पर बड़ा मुकाम हासिल करते हुए महज 4 दिन में बीजेपी और कांग्रेस जैसी दिग्गज पॉलिटिकल पार्टियों को पीछे छोड़ दिया है।...

मध्य प्रदेश

उमरिया, भरेवा। लूट का सामान खरीदने वाले आरोपित के फरार होने के मामले में थाना इंदवार के प्रभारी, सब इंस्पेक्टर और एएसआई को एसपी ने सस्पेंड कर दिया है। इस बारे में जानकारी देते हुए एसडीओपी पीएल परस्ते ने बताया कि यह कार्रवाई थाना प्रभारी विजय पाटिल, सब इंस्पेक्टर सूर्यपाल सिंह और एएसआई अमर बहादुर सिंह के खिलाफ की गई है।एसडीओपी ने यह भी बताया कि फरार हुए आरोपित अनुराग ताम्रकार के पास से पुलिस ने पांच से सात लाख रुपए मूल्य के सोने और चांदी के...

अपराध

ग्वालियर। ग्वालियर में सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर और ‘इंस्टाग्राम क्वीन’ के नाम से मशहूर 21 साल की पलक रजक की संदिग्ध मौत मामले में मुरार थाना पुलिस ने FIR दर्ज की है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत की वजह फांसी लगने से दम घुटना बताई गई है। वहीं परिजनों ने इसे हत्या करार देते हुए ससुराल पक्ष पर गंभीर आरोप लगाए हैं। मुरार थाना पुलिस ने पति, देवर और सास के खिलाफ FIR दर्ज कर जांच तेज कर दी है। ग्वालियर के मुरार थाना क्षेत्र स्थित सुरैयापुरा में रहने वाली सोशल मीडिया...
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गुना सिटी

गुना।(गरिमा टीवी न्यूज़) कलेक्‍टर किशोर कुमार कन्‍याल के निर्देशानुसार बाल भिक्षावृत्ति रोकथाम अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में बाल भिक्षावृत्ति रोकथाम हेतु गठित दल महिला एव बाल विकास विभाग, श्रम विभाग, शिक्षा विभाग, पुलिस विभाग की संयुक्त टीम द्वारा हनुमान चौराहे, जयस्‍तभ चौराहा, जज्‍जी बस स्‍टेण्‍ड, आरोन बस स्‍टेण्‍ड एवं रेलवे स्‍टेशन एवं हनुमान टेकरी मंदिर पर जाकर निरीक्षण किया गया। इस दौरान कोई भी बच्‍चा भिक्षावृत्ति करते हुये नही पाया गया। बाल संरक्षण अधिकारी मबावि...

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गरिमा के जन्म के 15 मिनिट बाद का फोटो
गरिमा के जन्म के 15 मिनिट बाद का फोटो
गरिमा के 1 वर्ष बाद का फोटो
गरिमा के 1 वर्ष बाद का फोटो
गरिमा के 2 वर्ष बाद का फोटो
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बीमार होने के बाद भोपाल अस्पताल मे भर्ती गरिमा
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हाई कोर्ट के आदेश के बाद गरिमा के शव को जमीन से निकालते हुऐ
हाई कोर्ट के आदेश के बाद गरिमा के शव को जमीन से निकालते हुऐ
निकालने के बाद गरिमा के शव को पैक कर जॉच के लिऐ भेजा गया
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दोषी डॉक्टर के खिलाफ मामला कायम कराने के लिऐ पुलिस अधिक्षक से मिले पत्रकार
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गरिमा के शव की जॉच होने के बाद पुनः उसी स्थान पर चबूतरा का निर्माण किया गया
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पूजा स्थल मे गरिमा
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