सिंगरौली। मध्य प्रदेश के सिंगरौली में पुल निर्माण के नाम पर सरकारी खजाने में खुलेआम डाका डालने की सनसनीखेज साजिश बेनकाब हुई है। मामला बैढ़न विकासखंड के चाचर से कुल्हनिया मार्ग पर म्यार नदी पर बने पुल का है। जहां अफसरों और ठेकेदार की सांठगांठ का ऐसा खेल सामने आया है, जिसने सिस्टम की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। महज 7 लाख 37 हजार रुपये के अंतिम बिल को कूटरचना कर, रातों-रात 40 लाख 91 हजार रुपये बना दिया गया। यानी सीधे-सीधे करीब 33 लाख 53 हजार रुपये के सरकारी धन की हेराफेरी और खेल सिर्फ रकम बढ़ाने तक सीमित नहीं रहा। काम में देरी और नियमों की अनदेखी के चलते अंकेक्षक ने निर्माण एजेंसी पर करीब 16 लाख 78 हजार रुपये की पेनाल्टी यानी कटौती तय की थी।
अब इस 16 लाख से ज्यादा की पेनाल्टी से बचने के लिए क्या किया गया? नियम-कायदों को ताक पर रखते हुए महत्वपूर्ण सरकारी दस्तावेज-माप पुस्तिका क्रमांक 605- को रिकॉर्ड से पूरी तरह गायब कर दिया गया। यही नहीं, माप पुस्तिका क्रमांक 606 और 734 में खुलेआम ओवरराइटिंग और काट-छांट कर बैकडेट में संशोधित देयक तैयार कर दिया गया। इस पूरे मामले की शिकायत जब आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ यानी EOW रीवा तक पहुंची, तो जांच में इस बड़े फर्जीवाड़े की परतें खुल गईं।
EOW ने मामले में सख्त रुख अपनाते हुए 4 लोगों के खिलाफ संगीन धाराओं में एफआईआर दर्ज कर ली है, जिसमें सुशील कुमार मिश्रा – तत्कालीन एसडीओ, चंद्रशेखर तिवारी- तत्कालीन उपयंत्री, मेसर्स विजय कुमार मिश्रा कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड – निर्माण एजेंसी के प्रोपराइटर और एक अन्य आरोपी है। इन सभी पर आईपीसी की धारा 409, 420, 467, 468, 471, 120-बी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की गंभीर धाराओं के तहत आपराधिक प्रकरण दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी गई है।
पुल का ठेका 574 लाख रुपये का था, काम में महीनों की देरी हुई और अंत में जनता की गाढ़ी कमाई लूटने के लिए दस्तावेजों तक में हेराफेरी कर दी गई। ईओडब्ल्यू की इस कार्रवाई से लोक निर्माण विभाग में हड़कंप मच गया है। मामले में ईओडब्ल्यू पुलिस अधीक्षक अरविंद ठाकुर ने बताया कि पीडब्ल्यूडी विभाग के अधिकारियों और संबंधित ठेकेदारों के खिलाफ अपराध पंजीबद्ध किया गया है।
ईओडब्ल्यू एसपी अरविंद ने बताया कि साल 2016 में सिंगरौली जिले की म्यार नदी पर पुल का निर्माण होना था, इसका निर्माण कार्य साल 2018 में पूरा होना था, लेकिन नहीं हो सका। इस पर विभाग ने 16 लाख की पेनाल्टी लगाई। इस पेनाल्टी को बचाने और ठेकेदार को लाभ पहुंचाने के लिए मेजरमेंट को गायब कर दिया गया और सरकारी माप मुस्तिका में कांट छांट की गई। साथ ही फाइनल बिल में कूटचरित किया गया। इस पर अपराध पंजीबद्ध कर जांच में लिया गया है।
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पूजा-पाठ के बहाने घर बुलाकर पुजारियों से 60 लाख की ठगी के बाद कमिश्नर कार्यालय पहुंचे पीड़ित
इंदौर। मध्य प्रदेश के इंदौर से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहाँ पूजा-पाठ कराने वाले पुजारियों को ही ठगी का शिकार बनाया गया है। आरोप है कि वास्तु दोष और हवन-पूजन के बहाने पुजारियों को घर बुलाकर शेयर मार्केट और विभिन्न कंपनियों में निवेश करने का लालच दिया गया, और इसके बाद लाखों रुपए की ठगी की वारदात को अंजाम दिया गया। इस मामले में पीड़ित पुजारियों ने इंदौर पुलिस कमिश्नर कार्यालय पहुँचकर न्याय की गुहार लगाई है।
जानकारी के अनुसार, पंडित राजेश शास्त्री ने पुलिस कमिश्नर के समक्ष शिकायत दर्ज कराते हुए बताया कि करीब 4-5 महीने पहले खातीवाला टैंक इलाके में रहने वाले एक दंपति नितिन और उनकी पत्नी पारागीता जोशी ने अपने घर पर वास्तु दोष निवारण और भगवान के हवन-पूजन के लिए उन्हें और अन्य पंडितों को आमंत्रित किया था।
जब सभी पंडित पूजा-पाठ के लिए उनके घर पहुँचे, तो बातचीत के दौरान दंपति ने पुजारियों से कहा कि— “पूजा-पाठ से आप लोग कितना कमा लेते हैं? यदि अधिक मुनाफा कमाना चाहते हैं, तो हमारी कंपनी और शेयर मार्केट में इन्वेस्टमेंट करिए।” हवन-पूजन संपन्न होने के बाद आरोपियों ने पुजारियों को शेयर मार्केट और कंपनियों में भारी मुनाफे का सब्जबाग दिखाया।
दंपति के झांसे में आकर पंडित राजेश शास्त्री ने खुद 7 लाख रुपए का इन्वेस्टमेंट कर दिया। इतना ही नहीं, उनसे जुड़े अन्य कई पुजारी भी इस जाल में फंस गए और उन्होंने शेयर मार्केट व फर्जी कंपनियों में लाखों रुपए लगा दिए। प्रारंभिक अनुमान के मुताबिक, सभी पुजारियों को मिलाकर कुल 60 लाख रुपए की ठगी की गई है।
फिलहाल, 6 से अधिक पीड़ित पुजारी जनसुनवाई में अपनी शिकायत लेकर पहुँचे हैं, लेकिन आरोपी दंपति फिलहाल अपने ठिकाने से नदारद बताए जा रहे हैं। पुजारियों ने पुलिस कमिश्नर से मांग की है कि उनकी पूजा-पाठ की मेहनत की गाढ़ी कमाई को वापस दिलाया जाए और आरोपियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए। पुलिस मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच में जुट गई है।
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हॉस्टल की बदहाली पर 100 KM पैदल चलकर कलेक्टर से मिलने पैदल निकले स्टूडेंट्स
शहडोल। शहडोल में छात्रावास की अव्यवस्थाओं के खिलाफ अब Gen-Alpha के नन्हे कदम प्रशासन की जवाबदेही का बड़ा सवाल बनते जा रहे हैं। ये वो पीढ़ी है जो अपनी बात रखने के लिए सोशल मीडिया से लेकर सड़क तक का रास्ता चुन रही है। फर्क सिर्फ इतना है कि इनके हाथों में न तो कोई राजनीतिक झंडा है और न ही कोई नारेबाजी का मंच, बल्कि अपनी समस्याओं के समाधान की उम्मीद लेकर ये बच्चे सैकड़ों किलोमीटर पैदल चलने को तैयार है।
शहडोल में एक बार फिर ऐसा ही नजारा देखने को मिला, जब ब्यौहारी के मॉडल खंडोली विद्यालय के छात्र स्कूल और छात्रावास से निकलकर जिला मुख्यालय में कलेक्टर से मिलने पैदल रवाना हो गए। छात्रावास की अव्यवस्थाओं से नाराज छात्रों ने करीब 100 किलोमीटर का सफर पैदल तय करने का फैसला किया है। छात्र रीवा-शहडोल स्टेट हाईवे पर लगातार आगे बढ़ रहे हैं। खबर लिखे जाने तक छात्र 6 किलोमीटर से अधिक का सफर तय कर चुके थे।
हैरानी की बात यह है कि छात्रों के इस पैदल मार्च से एक दिन पहले ही जयसिंहनगर के आवासीय विद्यालय की छात्राएं छात्रावास की दीवार फांदकर करीब 40 किलोमीटर पैदल चलकर कलेक्टर से मिलने निकल पड़ी थीं। इससे पहले भी जिले के अलग-अलग आवासीय विद्यालयों के छात्र-छात्राएं अपनी समस्याओं और मांगों को लेकर इसी तरह जिला मुख्यालय तक पैदल मार्च कर चुके हैं। बताया जा रहा है कि एक दिन पहले छात्रों के बीच विवाद भी हुआ था। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम के पीछे छात्रावास की व्यवस्थाओं को लेकर उनकी नाराजगी सामने आ रही है।
लगातार सामने आ रहे इन मामलों ने शिक्षा और आदिवासी विकास विभाग की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर ऐसी कौन सी समस्याएं हैं, जिनके समाधान के लिए मासूम बच्चों को स्कूल और छात्रावास छोड़कर 100 किलोमीटर पैदल चलने का जोखिम उठाना पड़ रहा है। Gen-Alpha की यह पदयात्रा सिर्फ बच्चों का पैदल मार्च नहीं, बल्कि व्यवस्था के सामने खड़ा एक बड़ा सवाल है। जब छात्र अपनी बात कहने के लिए बार-बार सड़क पर उतर रहे हैं, तो सवाल यह है कि उनकी आवाज छात्रावास की चारदीवारी के भीतर ही क्यों नहीं सुनी जा रही है?
वहीं इस पूरे मामले में शहडोल जिला शिक्षा अधिकारी अतुल चौधरी ने जानकारी देते हुए बताया कि अभी आधे घंटे पहले ही जानकारी लगी है कि बच्चे पैदल निकले है, जानकारी के अनुसार सड़क की डिमांड है, साथ ही एक दिन पहले बच्चों के बीच विवाद हुआ था, बच्चों को समझा-बुझाकर उन्हें ऐसा करने से रोकने का पूरा प्रयास किया जा रहा है। साथ ही उनकी समस्या का समाधान किया जाएगा।
मऊगंज। बहुचर्चित भाटी जंगल दोहरे हत्याकांड में पुलिस और एसआईटी की कार्यप्रणाली पर न्यायालय ने एक ऐसा करारा तमाचा जड़ा है। जिसने पुलिस के दावों की धज्जियां उड़ा दी हैं। जिस अंधे कत्ल के खुलासे का ढोल तत्कालीन थाना प्रभारी राजेश पटेल और एसआईटी की टीम पीट रही थी। अदालत के फैसले ने उस पूरी कहानी को कागजी और झूठा साबित कर दिया है। गिरफ्तारी, जब्ती, मेडिकल और मेमोरेंडम के समय में ऐसा गजब का झोल मिला कि अदालत को दोनों आरोपियों को बरी करना पड़ा। बचाव पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने इन तमाम विसंगतियों को अदालत के सामने बेनकाब किया।
मऊगंज जिले का भाटी जंगल… जहां 25 और 26 दिसंबर 2024 की दरमियानी रात मंगल यादव और उसकी 80 वर्षीय पत्नी तेरसी यादव के साथ बालात्कार कर निर्मम हत्या कर दी गई थी। पुलिस ने दावा किया था कि उसने ‘अंधी हत्या’ का पर्दाफाश कर दिया है और श्रीनिवास पाल तथा साकिर अहमद को सलाखों के पीछे भेज दिया है।
तत्कालीन एसपी द्वारा गठित एसआईटी में सम्मिलित तत्कालीन एसडीओपी अंकिता शूल्या ,तत्कालीन थाना प्रभारी राजेश पटेल,भैया मान सिंह , इस के द्विवेदी ,जगदीश सिंह ठाकुर सहित अन्य पुलिस कर्मियों की स्पेशल निगरानी में जांच हुई थी, लेकिन जब कोर्ट ने दस्तावेजों की परतें उधेड़ीं, तो पुलिस का पूरा फर्जीवाड़ा सामने आ गया और दोनों आरोपियों को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया गया।
इस केस की सबसे बड़ी विसंगति यह है कि जिस हंसिया और काली चप्पल, दारू की बोतल, मछली के जाल को घटना के ठीक दूसरे दिन यानी 27 दिसंबर 2024 की सुबह 8:35 बजे डॉग स्क्वॉड को सूंघाया गया था और जिसे विवेचक भैया मान सिंह पहले ही घटनास्थल से उठा चुके थे और थाना प्रभारी को सौंप चुके थे। लेकिन बाद में वही हंसिया आरोपी साकिर अहमद के कब्जे से बरामद दिखाई गई। जो हथियार पहले से पुलिस के कब्जे में था, उसे बाद में जब्ती में दिखाना पुलिस की थ्योरी पर सीधा सवाल खड़ा करता है।
पुलिस के द्वारा श्रीनिवास पाल से जब्ती: दोपहर 16:20 बजे दिखाई गई जबकि श्रीनिवास पाल की गिरफ्तारी ठीक 5 मिनट बाद यानी दोपहर 16:25 बजे दर्शाई गई है। इसी तरह साकिर अहमद से जब्ती दोपहर 16:38 बजे दिखाई गई। जबकि साकिर अहमद की गिरफ्तारी दोपहर 16:45 बजे दर्शाई गई है ठीक 7 मिनट के बाद।
इसके बाद जब बिना देर किए इन दोनों आरोपियों को शाम को ठीक लगभग 17:00 बजे न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया गया। तब उसके बाद पुलिस के द्वारा दोनों आरोपी श्रीनिवास से रात 22:10 बजे और साकिर का रात 23:30 बजे! मेमोरंडम कथन कैसे लिए गए ,जब दोनों आरोपी शाम 5 बजे ही जेल भेजे जा चुके थे,
तारीखों और मेडिकल का खेल भी हैरान करने वाला है। आरोपी श्रीनिवास पाल की गिरफ्तारी पुलिस रिकॉर्ड में 31 दिसंबर 2024 को दर्शाई गई, लेकिन मजे की बात यह है कि उसका मेडिकल परीक्षण उससे एक दिन पहले यानी 30 दिसंबर 2024 को सुबह 7:18 बजे ही कराया जा चुका था! वहीं, दूसरे आरोपी साकिर अहमद का तो मेडिकल परीक्षण कराया ही नहीं गया।
इस पूरे मामले में आरोपियों की ओर से सक्षम पैरवी अधिवक्ता प्रदीप मिश्रा और ममनून सिद्दीकी ने की। उन्होंने अदालत के सामने इन सभी समयात्मक विसंगतियों, फर्जी मेमोरेंडम और साक्ष्यों की अनदेखी को जोरदार तरीके से रखा। जिसके बाद न्यायालय के द्वारा दोनोंरोपियो को बरी कर दिया गया!अब सवाल यह उठता है कि तत्कालीन एसडीओपी की निगरानी में बनी एसआईटी आखिर क्या कर रही थी? आखिर एस आईटी ने क्या जांच किया ,क्या अब पुलिस के ऊपर न्यायालय के द्वारा की गई सख्त टिप्पणियों के बाद कोई कार्यवाही होगी ? क्या अब भी बुजुर्ग दम्पतियों की हत्या के असली गुनाहगार को पुलिस पकड़ पाएगी ,या इस दोहरी हत्या की गुत्थी कागजों में उलझ कर रह जायेगी।
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धीरेंद्र शास्त्री के खिलाफ दामोदर यादव की चेतावनी, 15 नवंबर को आश्रम में ताला लगाने का ऐलान
उज्जैन. भगवान श्रीकृष्ण पर विवादित टिप्पणी के मामले में माफी मांगने के बावजूद बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का विरोध जारी है. उज्जैन के टॉवर चौक पर आजाद समाज पार्टी के नेता दामोदर यादव ने उनके खिलाफ प्रदर्शन करते हुए धर्म को धंधा बनाने और भगवान श्रीकृष्ण का अपमान करने का आरोप लगाया. उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से बागेश्वर धाम आश्रम को सील करने और धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की कथाओं पर रोक लगाने की मांग की. इसके लिए उन्होंने 14 नवंबर तक का अल्टीमेटम दिया है.
दामोदर यादव ने कहा कि वे धर्म विरोधी न कल थे, न आज हैं और न कभी होंगे. धर्म उनके लिए आत्मा के समान है. उन्होंने मुख्यमंत्री से कहा कि यदि वे स्वयं को भगवान श्रीकृष्ण का वंशज बताते हैं तो उन्हें भगवान का अपमान करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए. यादव ने चेतावनी दी कि 14 नवंबर तक मांग पूरी नहीं हुई तो 15 नवंबर को वे एक हजार वाहनों के काफिले के साथ बागेश्वर धाम पहुंचकर आश्रम में ताला लगाने जाएंगे.
प्रदर्शन के दौरान दामोदर यादव ने धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के खिलाफ आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया. उन्होंने मुख्यमंत्री से कहा कि छतरपुर में रहने वाले धीरेंद्र शास्त्री भगवान श्रीकृष्ण पर अनुचित टिप्पणियां कर रहे हैं, ऐसे में सरकार को कार्रवाई करनी चाहिए. उन्होंने कहा कि वे संविधान और मानवतावादी विचारधारा में विश्वास रखते हैं, लेकिन इसे कमजोरी नहीं समझा जाना चाहिए. यादव ने भगवान बिरसा मुंडा की जयंती पर आश्रम में ताला लगाने की चेतावनी भी दोहराई.
दरअसल, हाल ही में शिवपुरी जिले के करैरा में श्रीराम कथा के दौरान धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण के स्वरूप की तुलना करते हुए श्रीकृष्ण को टेढ़ा-मेढ़ा बताया था. उनकी इस टिप्पणी पर कई समाजों ने आपत्ति जताई. प्रदेश के अलग-अलग स्थानों पर विरोध प्रदर्शन हुए और पुतले भी जलाए गए. विरोध बढ़ने के बाद धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने अपनी टिप्पणी पर माफी मांग ली थी. इसके बावजूद उनके खिलाफ विरोध जारी है.
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गरीबों के राशन की कालाबाजारी: 275 बोरी सरकारी गेहूं से भरा अन्नदूत ट्रक निजी फ्लोर मिल सील
भोपाल। मध्य प्रदेश के सागर जिले से गरीबों को मिलने वाले सरकारी राशन की हेराफेरी और कालाबाजारी का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहां मुख्यमंत्री युवा अन्नदूत योजना के तहत संचालित करीब 275 बोरी गेहूं से भरा एक ट्रक निर्धारित गंतव्य पर पहुंचने के बजाय सीधे एक निजी फ्लोर मिल में पहुंच गया, जहां रात के अंधेरे में चुपचाप गेहूं की बोरियां उतारी जा रही थीं। भनक लगते ही पुलिस और खाद्य विभाग की संयुक्त टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मौके पर छापा मारा और फ्लोर मिल को सील कर दिया, जबकि गेहूं से भरे ट्रक को मोतीनगर थाने में खड़ा करवा दिया गया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, ट्रक चालक भरत पटेल जो सुभाषनगर का रहने वाला है, साईंखेड़ा वेयरहाउस से लगभग 275 बोरी गेहूं ट्रक में भरकर रवाना हुआ था। उसे किसी रोहित दांगी के निर्देश पर पर्ची देकर SPC यानी विशिष्ट खरीद केंद्र के लिए भेजा जाना था। लेकिन हैरानी की बात यह है कि ट्रक अपने निर्धारित और तय स्थान पर पहुंचने के बजाय मोतीनगर थाना क्षेत्र के छोटा करीला स्थित ‘MK इंटरप्राइजेज’ फ्लोर मिल जा पहुंचा। यह निजी फ्लोर मिल गणेश केशरवानी की बताई जा रही है। रात के वक्त फ्लोर मिल परिसर में संदिग्ध परिस्थितियों में ट्रक से गेहूं की बोरियां खाली कराई जा रही थीं, तभी मुखबिर की सूचना पर मोतीनगर थाना पुलिस की टीम तत्काल मौके पर पहुंच गई।
मामले की गंभीरता को देखते हुए CSP ललित कश्यप भी दल-बल के साथ घटनास्थल पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। इसके बाद तत्काल खाद्य आपूर्ति विभाग को इसकी सूचना दी गई, जिसके बाद सहायक आपूर्ति अधिकारी मौके पर पहुँचे और ट्रक व मिल में रखे गेहूं से संबंधित दस्तावेजों की बारीकी से जांच की। प्रारंभिक जांच में पूरा मामला प्रथम दृष्टया संदिग्ध और राशन घोटाले की बू लिए हुए प्रतीत हुआ, जिस पर कार्रवाई करते हुए अधिकारियों ने तत्काल प्रभाव से फ्लोर मिल को सील कर दिया। वहीं, ट्रक को थाने लाकर खड़ा कराया गया और चालक भरत पटेल के बयान दर्ज कर उससे पूछताछ की जा रही है।
गौरतलब है कि ‘मुख्यमंत्री युवा अन्नदूत योजना’ के तहत संचालित इन ट्रकों का मुख्य उद्देश्य सरकारी राशन को पूरी पारदर्शिता के साथ निर्धारित उचित मूल्य की दुकानों तक पहुंचाना होता है। ऐसे में सरकारी गेहूं का रूट बदलकर किसी निजी फ्लोर मिल तक पहुंच जाना प्रशासन और परिवहन व्यवस्था पर कई गंभीर सवाल खड़े करता है। अब खाद्य विभाग और पुलिस इस बात की गहराई से छानबीन कर रही है कि वेयरहाउस से यह गेहूं आखिर किसके इशारे पर और किसकी मिलीभगत से निकला था। इस पूरे खेल में वेयरहाउस से लेकर परिवहन और फ्लोर मिल संचालक तक किसकी और क्या भूमिका रही है, इसका खुलासा विस्तृत जांच के बाद ही हो सकेगा।
असम में बड़ा एनकाउंटर हुआ है। गुवाहाटी होटल बिलास इन शूटिंग केस के मुख्य आरोपी घनकांत गोगोई को पुलिस ने मुठभेड़ में मार गिराया है। असम के शिवसागर में पुलिस ने होटल बिलास इन शूटिंग का मुख्य आरोपी घनकांत गोगोई का अनकाउंटर किया है।
पुलिस के अनुसार आरोपी ने कस्टडी से भागने की नीयत से पुलिस टीम पर हमला कर पिस्टल छीनने की कोशिश की। इसके जवाब में हुई आत्मरक्षात्मक फायरिंग में वह गंभीर रूप से घायल हो गया और बाद में डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दियाष इस घटना में सब-इंस्पेक्टर भी घायल हो गया।
पुलिस के मुताबिक पुलिस टीम आरोपी घनकांत गोगोई को गुवाहाटी से शिवसागर ले जा रही थी। बुधवार तड़के करीब 3:10 बजे फूलपनिचिगा इलाके में रोंगमोन ढाबा के पास आरोपी ने अचानक पुलिसकर्मियों पर हमला कर दिया और भागने की कोशिश की। आरोपी के हमले के जवाब में पुलिस को गोलियां चलानी पड़ीं। गोली लगने से गोगोई गंभीर रूप से घायल हो गया, जिसे तुरंत शिवसागर के जॉयसागर सिविल अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
बता दें कि घनकांत गोगोई ने 26 अक्टूबर को देर शाम गुवाहाटी के होटल बिलास इन में ताबड़तोड़ फायरिंग कर 5 लोगों को मार डाला था। मृतकों की पहचान बरपेटा निवासी भूदेव भराली (65), नारायण दास (48) और गुवाहाटी के नवीन नगर निवासी हेलेना भराली (58), देबर्षि कश्यप (39) और रिनिका कश्यप (30) के रूप में हुई थी।
पुलिस के मुताबिक भराली परिवार ने घनकांत गोगोई के साथ होटल का 5 साल का लीज एग्रीमेंट किया था। इसका मासिक किराया करीब ₹1.8 लाख तय हुआ था। गोगोई ने होटल में मरम्मत कराई थी। इसके बाद होटल के इस्तेमाल और कुछ सुविधाएं देने को लेकर दोनों पक्षों के बीच मतभेद चल रहे थे। विवाद सुलझाने के लिए 26 अक्टूबर को होटल में बैठक तय की गई थी। पुलिस के मुताबिक, बैठक से पहले ही दोनों पक्षों के बीच बहस हुई, जो मारपीट में बदल गई। इसके बाद गोगोई ने वहां मौजूद 6 लोगों पर गोलियां चला दीं। इसमें 5 लोगों की मौत हो गई थी।
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पूर्व CM के बेटे अमित जोगी के खिलाफ FIR दर्ज, PM मोदी और CEC ज्ञानेश कुमार पर आपत्तिजनक पोस्ट से छिड़ा विवाद
रायपुर: छत्तीसगढ़ की राजनीति में जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ के प्रदेश अध्यक्ष अमित जोगी की एक सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी वाले वीडियो को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने कड़ा ऐतराज जताया है। भाजपा नेताओं ने रायपुर के सिविल लाइंस थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई। इस मामले में अमित जोगी के खिलाफ FIR दर्ज किए जाने की जानकारी सामने आई है।
अमित जोगी की ओर से सोशल मीडिया पर पोस्ट किए गए एक वीडियो को लेकर भाजपा ने नाराजगी जाहिर की है। भाजपा का आरोप है कि वीडियो में देश के प्रधानमंत्री और मुख्य चुनाव आयुक्त जैसे संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों के खिलाफ आपत्तिजनक और अपमानजनक टिप्पणियां की गई हैं। भाजपा नेताओं का कहना है कि इस तरह की सामग्री न केवल संवैधानिक पदों की गरिमा के विपरीत है, बल्कि इससे आम लोगों की भावनाएं भी आहत हुई हैं। इसी मुद्दे को लेकर पार्टी ने पुलिस से हस्तक्षेप कर कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
मंगलवार को भाजपा का प्रतिनिधिमंडल रायपुर के सिविल लाइंस थाना पहुंचा। प्रतिनिधिमंडल में भाजपा विधायक राजेश मूणत समेत कई वरिष्ठ नेता और पार्टी कार्यकर्ता शामिल रहे। नेताओं ने पुलिस अधिकारियों को ज्ञापन सौंपकर सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो और उसमें की गई टिप्पणियों की जांच कराने की मांग की। भाजपा ने शिकायत में पूरे घटनाक्रम को गंभीर बताते हुए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग उठाई।
भाजपा की शिकायत में केवल सोशल मीडिया पोस्ट करने वाले व्यक्ति तक कार्रवाई सीमित नहीं रखने की मांग की गई है। पार्टी नेताओं ने वीडियो तैयार करने, उसकी पटकथा लिखने और निर्माण में शामिल अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच करने को कहा है। भाजपा का कहना है कि यदि इस तरह की सामग्री योजनाबद्ध तरीके से तैयार और प्रसारित की गई है, तो इसमें शामिल सभी जिम्मेदार लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए।
भाजपा नेताओं ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार देश के महत्वपूर्ण संवैधानिक पदों से जुड़े हैं। ऐसे पदों को लेकर अपमानजनक सामग्री प्रसारित करना लोकतांत्रिक मर्यादाओं के खिलाफ है। इस शिकायत के बाद छत्तीसगढ़ की राजनीति में सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर राजनीतिक टकराव तेज होने के संकेत हैं। अब इस मामले में पुलिस की जांच और आगे की कानूनी कार्रवाई पर सबकी नजर रहेगी।
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CEC ज्ञानेश के खिलाफ 20 साल पुराने आरोप की जांच होगी, केरल में PWD सचिव रहते 2 करोड़ रुपए घूस मांगने का आरोप
केरल के गृह मंत्री रमेश चेन्निथला ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ करीब 20 साल पुराने एक मामले की दोबारा जांच के आदेश दिए है. आरोप है केरल राज्य परिवहन परियोजना के तहत सड़क निर्माण के ठेके देने के एवज में 2 करोड़ रुपये की रिश्वत मांगने का. केरल सरकार ने इस मामले में विजिलेंस एंड एंटी करप्शन ब्यूरो को नए सिरे से जांच करने का निर्देश दिया है.
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ 20 साल पुराने रिश्वत मांगने के आरोपों की जांच होगी। केरलम के गृहमंत्री मेश चेन्निथला ने विजिलेंस को जांच के आदेश दिए हैं.
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की मुश्किलें बढ़ सकती हैं. केरल के गृह मंत्री रमेश चेन्नीथला ने VACB को निर्देश दिया है कि वह ज्ञानेंद्र कुमार के खिलाफ एक पूर्व ठेकेदार द्वारा लगाए गए रिश्वत के नए आरोपों की जांच करे. कोल्लम के ठेकेदार साजन का आरोप है कि ज्ञानेश कुमार ने केरल स्टेट ट्रांसपोर्ट प्रोजेक्ट (KSTP) का काम पूरा होने के बाद पेमेंट करने के बदले ₹2 करोड़ की रिश्वत मांगी थी.
मामला उस समय का है, जब ज्ञानेश कुमार केरलम में लोक निर्माण विभाग (PWD) के सचिव थे। एक ठेकेदार ने आरोप लगाया है कि सड़क निर्माण परियोजना के बिलों का भुगतान जारी करने के बदले उनसे 2 करोड़ रुपए की रिश्वत मांगी गई थी.
कोल्लम के ठेकेदार साजन के मुताबिक, इंजीनियरों ने करीब ₹17 करोड़ के बिल मंजूर कर दिए थे, लेकिन ज्ञानेश कुमार ने चेक रोक दिए। इससे मलेशियाई कंपनी PATI-BEL, उसके ठेकेदारों और कर्मचारियों को आर्थिक परेशानी हुई. कार्यों का भुगतान जारी करने के लिए दो करोड़ रुपये की रिश्वत मांगी थी.
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मंजूर बिल का भुगतान जारी करने में देरी और रिश्वत की कथित मांग को लेकर कंपनी के परियोजना इंजीनियर और मलेशियाई नागरिक ली सी बीन ने वर्ष 2006 में कथित तौर पर आत्महत्या कर ली थी.
शिकायत मिलने के बाद विजिलेंस विभाग ने शुरुआती जांच के बाद केस दर्ज करने के लिए गृह विभाग से अनुमति मांगी थी. सूत्रों के मुताबिक, कानूनी राय लेने के बाद गृह मंत्री ने जांच के आदेश दिए हैं.
यह घटनाक्रम देशभर में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के मुख्य निर्वाचन आयुक्त कुमार के खिलाफ किए जा रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच सामने आया है. ऐसे में उनकी मुश्किलें और भी बढ़ती हुई नजर आ रही है.
मुरैना. मुरैना में नशे के लिए इस्तेमाल किए जा रहे प्रतिबंधित तरीके से बेचे जा रहे इंजेक्शनों के अवैध कारोबार का बड़ा खुलासा हुआ है. कोतवाली पुलिस ने ग्राहक बनकर एक किराए के मकान में दबिश दी और वहां से अलग-अलग कंपनियों के 2856 इंजेक्शन बरामद किए. पुलिस ने मौके से तीन लोगों को गिरफ्तार किया है. जब्त दवाओं की अनुमानित कीमत करीब 4.50 लाख रुपये बताई गई है.
पुलिस अधीक्षक धर्मराज मीना को सूचना मिली थी कि पुरानी हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी स्थित एक किराए के मकान से नशे के इंजेक्शन बेचे जा रहे हैं. सूचना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने पहले पूरे मामले की पुष्टि करने की योजना बनाई.
कोतवाली थाना प्रभारी अमित भदौरिया के निर्देश पर एसआई अरुण कुशवाह और एसआई पवन भदौरिया सादे कपड़ों में ग्राहक बनकर मकान पहुंचे. मकान ईशान वर्मा ने किराए पर ले रखा था. पुलिस के मुताबिक, ईशान ने दोनों को इंजेक्शन दिए. इसके बाद पहले से तैयार पुलिस टीम ने मकान पर छापा मार दिया.
तलाशी के दौरान पुलिस को अंदर के कमरे में 106 पैकेट, तीन कार्टन और एक प्लास्टिक बोरे में बड़ी संख्या में इंजेक्शन रखे मिले. गिनती करने पर कुल 2856 इंजेक्शन बरामद हुए. इनमें टर्मिन और अन्य कंपनियों के इंजेक्शन शामिल हैं.
पुलिस ने जब्त दवाओं की कीमत लगभग 4.50 लाख रुपये आंकी है. प्रारंभिक जांच में सामने आया कि इन इंजेक्शनों की बिक्री बिना आवश्यक लाइसेंस के की जा रही थी.
पुलिस ने कार्रवाई के दौरान तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है. इनकी पहचान ईशान वर्मा (30), मयंक गुप्ता (35) और अनिल उर्फ बाबी गुप्ता (51) के रूप में हुई है. पुलिस के अनुसार, तीनों अलग-अलग स्तर पर इंजेक्शन की अवैध बिक्री से जुड़े थे.
जांच के दौरान आरोपियों के पास दवाओं के भंडारण और बिक्री से संबंधित वैध लाइसेंस नहीं मिला. कोतवाली पुलिस ने ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट की धारा 18(सी) और 27(बी)(ii) के तहत प्रकरण दर्ज किया है.
पूछताछ में आरोपियों ने कथित तौर पर आगरा से इंजेक्शनों की सप्लाई मिलने की जानकारी दी है. पुलिस के मुताबिक, आगरा के रामबाग इलाके में रहने वाला हामिद खान मांग के अनुसार इंजेक्शन भेजता था और इसके बदले पैसे लेता था.
पुलिस अब कथित सप्लायर की तलाश कर रही है. साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि इस अवैध कारोबार का नेटवर्क किन-किन शहरों तक फैला हुआ है और इसमें अन्य लोग भी शामिल हैं या नहीं.
पुलिस जांच में सामने आया है कि बरामद इंजेक्शनों में शामिल कुछ दवाओं का उपयोग विशेष चिकित्सकीय परिस्थितियों में किया जाता है. डॉक्टर इनका इस्तेमाल मरीजों के रक्तचाप में गंभीर गिरावट जैसी स्थितियों में कर सकते हैं. ऐसे इंजेक्शनों का बिना चिकित्सकीय निगरानी और वैध अनुमति के इस्तेमाल गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा कर सकता है.
स्थानीय स्तर पर मुरैना के अलावा अंबाह, पोरसा, कैलारस और जौरा क्षेत्रों में भी इन इंजेक्शनों के दुरुपयोग की जानकारी सामने आई है. पुलिस अब पूरे नेटवर्क की पड़ताल कर रही है, ताकि अवैध सप्लाई और बिक्री से जुड़े अन्य लोगों तक पहुंचा जा सके.
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नेशनल हाईवे पर दर्दनाक हादसा, तेज रफ्तार कंटेनर ने भेड़ों के झुंड को रौंदा, 100 भेड़ों की मौत
बुधनी। बुधनी क्षेत्र अंतर्गत आने वाले व्यस्ततम मिडघाट नेशनल हाईवे पर मंगलवार को दोपहर लगभग ढाई से तीन बजे एक भीषण और दर्दनाक सड़क हादसा सामने आया है। यहां तेज रफ्तार अनियंत्रित कंटेनर ने सड़क पार कर रहे भेड़ों के एक बड़े झुंड को अपनी चपेट में ले लिया। इस भयंकर टक्कर में लगभग 100 बेजुबान भेड़ों की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई, जबकि दर्जनों अन्य भेड़ें गंभीर रूप से घायल हो गई हैं।
जानकारी के अनुसार भेड़ पालक भेड़ों के झुंड को लेकर हाईवे से गुजर रहे थे। इसी दौरान पीछे से आ रहे एक तेज रफ्तार कंटेनर के चालक ने लापरवाही से वाहन चलाते हुए भेड़ों के झुंड को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि संभलने का मौका तक नहीं मिला और देखते ही देखते बड़ी संख्या में भेड़ें कंटेनर के पहियों के नीचे आ गईं।
हादसे के बाद हाईवे पर मृत भेड़ों के शव बिखर गए और यातायात भी कुछ समय के लिए प्रभावित हुआ। दर्दनाक हादसे की सूचना मिलते ही बुधनी थाना पुलिस तुरंत हरकत में आई। पुलिस बल ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को संभाला और यातायात को सुचारू कराया। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए दुर्घटना को अंजाम देने वाले कंटेनर और उसके चालक को अपनी हिरासत में ले लिया है। पुलिस मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई कर रही है।
इस हृदयविदारक घटना से स्थानीय भेड़ पालकों को भारी आर्थिक क्षति उठानी पड़ी है। पीड़ित भेड़ पालक रूपेश ने जानकारी देते हुए बताया कि इस दुर्घटना में उनकी और अन्य साथियों की लगभग 100 भेड़ों की जान चली गई है। रोजी-रोटी का मुख्य जरिया माने जाने वाले इन मवेशियों की अचानक हुई मौत से पूरा परिवार गहरे सदमे और आर्थिक संकट में आ गया है। स्थानीय ग्रामीणों और पशुपालकों ने शासन-प्रशासन से पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा दिए जाने की मांग की है।
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फूड प्वाइजनिंग से हड़कंप: 38 बच्चे जिला अस्पताल में भर्ती; कलेक्टर और एसपी मौके पर पहुंचे
नरसिंहपुर। मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर के सरकारी स्कूल के बच्चों में फूड प्वाइजनिंग होने से हड़कंप मच गया है। पूरा मामला नरसिंहपुर के समनापुर प्राथमिक शाला का हैं, जहां मिडिल स्कूल में पढ़ने वाले 38 बच्चों ने मध्यान्ह भोजन में बनने वाले भोजन को किया और इनमें से 10 से 12 बच्चे फूड प्वाइजनिंग का शिकार हो गए हैं और उनकी तबीयत बिगड़ने लगी।
उन्हें उल्टी और पेट दर्द होने लगा जिसके बाद सभी 38 बच्चों को आनन-फानन में इलाज के लिए नरसिंहपुर जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां डॉक्टरों की निगरानी में उनका उपचार जारी है। घटना की गंभीरता को देखते हुए नरसिंहपुर कलेक्टर रजनी सिंह और पुलिस अधीक्षक डॉ. ऋषिकेश मीना तुरंत जिला अस्पताल पहुंचे और पीड़ित बच्चों का हालचाल जाना और डॉक्टरों को बच्चों के बेहतर और त्वरित इलाज के सख्त निर्देश दिए हैं।
बहरहाल कलेक्टर ने समनापुर के सरकारी स्कूल में भोजन बनाने वाले एकता स्वसहायता समूह को तत्काल हटाने के निर्देश दे दिए हैं और बच्चों का स्वास्थ्य फिलहाल खतरे से बाहर बताया जा रहा है।
जबलपुर. एमपी के रायसेन में यूट्यूबर उवेश खान के खिलाफ दर्ज एफआईआर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने रद्द कर दी है. सिलवानी थाना पुलिस ने सितंबर 2025 में गणेश विसर्जन जुलूस के दौरान हुई हिंसा की रिपोर्टिंग करने पर उनके खिलाफ सांप्रदायिक सौहार्द बिगाडऩे के आरोप में केस दर्ज किया था.
जस्टिस हिमांशु जोशी की कोर्ट ने आज एफआईआर खारिज करते हुए कहा कि किसी वास्तविक घटना या हिंसा की निष्पक्ष और तथ्यात्मक रिपोर्टिंग करना अपराध नहीं है. मामला 6 सितंबर 2025 का है. रायसेन जिले के सिलवानी में गणेश विसर्जन जुलूस के दौरान हिंसक घटना हुई थी, जिसमें कुछ लोग घायल हुए थे. उवेश खान यूट्यूब न्यूज चैनल चलाते हैं. उन्होंने इस घटना की रिपोर्टिंग कर वीडियो अपने चैनल पर प्रसारित किया था. रिपोर्ट प्रसारित होने के बाद शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि उवेश खान की खबर भ्रामक थी. इससे हिंदू समुदाय के बीच डर और भ्रम का माहौल पैदा हुआ और सांप्रदायिक सौहार्द बिगडऩे की आशंका थी. शिकायत के आधार पर सिलवानी थाना पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 196(1) के तहत एफआईआर दर्ज की थी. यह धारा विभिन्न समुदायों के बीच वैमनस्य बढ़ाने से संबंधित है. उवेश खान ने इस कार्रवाई को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी.
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि वास्तविक घटना या हिंसा की निष्पक्ष रिपोर्टिंग को सांप्रदायिक दुश्मनी बढ़ाने वाला कृत्य नहीं माना जा सकता. पत्रकार ने ऐसी घटना की रिपोर्टिंग की थी, जिसके संबंध में पुलिस पहले ही अलग एफआईआर दर्ज कर चुकी थी. अदालत ने स्पष्ट किया कि पत्रकारिता की स्वतंत्रता के तहत वास्तविक घटनाओं की सटीक रिपोर्टिंग को अपराध नहीं ठहराया जा सकता. हालांकि, यह संरक्षण केवल तथ्यात्मक रिपोर्टिंग तक सीमित है और पत्रकारों को हर तरह की कानूनी कार्रवाई से पूर्ण छूट नहीं देता
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कलेक्ट्रेट की जनसुनवाई में मधुमक्खियों ने मचाया आतंक, सुरक्षित स्थानों की ओर भागे लोग
छिंदवाड़ा। मंगलवार को कलेक्ट्रेट में आयोजित जनसुनवाई के दौरान उस समय अचानक हड़कंप मच गया, जब कलेक्ट्रेट के मुख्य द्वार के पास लगे मधुमक्खियों के छत्ते से बड़ी संख्या में मधुमक्खियां निकल आईं और शिकायत लेकर पहुंचे लोगों पर हमला कर दिया।
मधुमक्खियों के अचानक हमले से कलेक्ट्रेट परिसर में मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई। अपनी जान बचाने के लिए लोग इधर-उधर भागते नजर आए। कुछ देर के लिए जनसुनवाई स्थल पर भी भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। इस दौरान लोग मधुमक्खियों से बचने के लिए सुरक्षित स्थानों की ओर जाते दिखाई दिए।
हालांकि राहत की बात यह रही कि इस घटना में किसी के गंभीर रूप से घायल होने की सूचना नहीं है। घटना के बाद कलेक्ट्रेट परिसर में मुख्य द्वार के पास लगे मधुमक्खियों के छत्ते को लेकर सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं।
जनसुनवाई में प्रतिदिन बड़ी संख्या में आम नागरिक अपनी समस्याएं लेकर पहुंचते हैं, ऐसे में परिसर में मौजूद मधुमक्खियों के छत्ते को हटाने और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
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भगवान श्री कृष्ण की टिप्पणी पर अखिलेश यादव की दो टूक- पूरे देश में रद्द हो धीरेंद्र शास्त्री के कार्यक्रम, FIR दर्ज कराने पहुंचे पप्पू यादव
भोपाल। बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के विवादित बयान पर सियासी बवाल मचा हुआ है। अब सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि ‘ईशनिंदा’ के लिए कभी क्षमा नहीं किया जा सकता। साथ ही उन्होंने पूरे देश में धीरेंद्र शास्त्री के कार्यक्रम रद्द करने और उनके खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की मांग की है। इधर, बिहार के सांसद पप्पू यादव ने भी इसका कड़ा विरोध जताया है।
समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के बयान पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने अपने सोशल मीडिया अकाउंट एक्स (X) पर पोस्ट कर लिखा- ‘मानवीय भूलों के लिए तो क्षमा किया जा सकता है, ‘ईशनिंदा’ के लिए कभी नहीं। ऐसे दुष्मुखी लोगों पर आजीवन प्रतिबंध लगाना ही समाज के लिए श्रेयस्कर है। पूरे देश में इनके सभी कार्यक्रम रद्द किये जाएं, नई अनुमति नहीं दी जाए और सार्वजनिक जीवन में हर सच्चा सनातनी इनका पूर्ण बहिष्कार करे, यही इनके अक्षम्य पाप का दंड होना चाहिए, नहीं तो वो भी ईशनिंदा के पाप का भागी बनकर अपना लोक-परलोक बिगाड़ लेगा। अगर दुर्भावना से भरा ऐसा व्यक्ति जीवन भर भी एकांतवास करके अपने किये का पश्चाताप और प्रायश्चित करेगा तो भी कोई भी धर्म प्रधान आस्थावान उसे माफ़ नहीं करेगा। मनुष्य का दंभ इतना भी नहीं होना चाहिए कि वो अपने को ईश्वर से ऊपर समझने लगे। वैधानिक कार्रवाई हो।’
इधर, बिहार से सांसद पप्पू यादव दिल्ली के पार्लियामेंट थाने में धीरेंद्र शास्त्री के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने पहुंचे। उन्होंने भगवान कृष्ण को लेकर की गई टिप्पणी पर आपत्ति जताई है। साथ ही पप्पू यादव ने एक्स पर जानकारी भी दी थी कि वह शास्त्री के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराएंगे। उन्होंने लिखा था- ‘भगवान श्रीकृष्ण जी का अपमान किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं करेंगे! सत्ता संरक्षित टुटपुंजिये फरेबी कथावाचक के ख़िलाफ़ आज मैं मुक़दमा दर्ज कराने जा रहा हूं! कृष्ण कन्हैया जी को अपमानित कर यह मूर्ख बेईमान अब माफ़ी मांगने की नौटंकी कर रहा है। इसे छोड़ेंगे नहीं,सजा दिलाकर ही मानेंगे!’
गौरतलब है कि मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के करैरा में आयोजित श्रीराम कथा के दौरान पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री भगवान श्रीराम और भगवान श्रीकृष्ण के स्वरूप की तुलना करते नजर आए। जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो में वे कहते सुनाई दे रहे हैं कि उनके भगवान सीधे खड़े होते हैं, जबकि ठाकुर जी तीन जगह से टेढ़े होते हैं। उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण की बांसुरी बजाने की मुद्रा और वृंदावन धाम का भी जिक्र किया।
इतना ही नहीं, उन्होंने बांसुरी बजाने और भगवान श्रीराम के धनुष चलाने की तुलना करते हुए कहते नजर आए कि बांसुरी बजाना तो खेल है, लेकिन धनुष चलाना कोई खेल नहीं। बागेश्वर बाबा के इस बयान के बाद बहस छिड़ गई। कई लोगों ने इसे धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाला बयान बताया, तो कुछ लोग इसे कथा के दौरान किया गया हास्य-विनोद बता रहे है। वहीं इस पर जमकर सियासत भी हुई।
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