भोपाल। राजधानी भोपाल से न्याय के इतिहास में एक बहुत बड़ा और कड़ा फैसला सामने आया है। बहुचर्चित बच्चियों से दुष्कर्म और यौन शोषण मामले में पॉक्सो विशेष न्यायालय ने मुख्य आरोपी प्यारे मियां को 10 बार उम्रकैद (आजीवन कारावास) की सजा सुनाई है। इसके साथ ही अदालत ने आरोपी पर 77 लाख 64 हजार रुपये का भारी-भरकम जुर्माना भी लगाया है। देश में संभवतः यह पहला ऐसा मामला है जब किसी अपराधी को इस तरह एक साथ 10 बार उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। वहीं, इस घृणित कृत्य में प्यारे मियां का साथ देने वाली उसकी सहयोगी राबिया बी को 20 साल की कैद की सजा दी गई है।
78 वर्षीय आरोपी प्यारे मियां लंबे समय से अपने काले कारनामों को अंजाम दे रहा था। जांच में सामने आया कि आरोपी साल 2014 से मासूम बच्चियों का सेक्सुअल हैरेसमेंट कर रहा था। वह ज्यादातर मामलों में जन्मदिन मनाने या नौकरी व अन्य कामों का झांसा देकर बच्चियों को अपने जाल में फंसाता था और पार्टी के बहाने बुलाकर उनके साथ दुष्कर्म करता था। आरोपी ने कमरे में हिडन कैमरे लगा रखे थे, जिनसे वीडियो बनाकर वह पीड़िताओं को ब्लैकमेल भी करता था। इस दरिंदगी से तंग आकर एक पीड़िता ने आत्महत्या भी कर ली थी।
यह पूरा मामला तब खुलकर सामने आया जब 11 जुलाई 2020 की रात पुलिस को भोपाल में 5 बच्चियां संदिग्ध हालत में घूमती हुई मिली थीं। इसके बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए शिकंजा कसा था। इससे पहले 7 मार्च 2022 को भी प्यारे मियां को एक अन्य मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई जा चुकी है।
अदालत में सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि आरोपी ने अपनी सौतेली नातिन को पहले नशीला पदार्थ देकर अपनी हवस का शिकार बनाया था और पीड़िता के गर्भवती होने पर उसका जबरन गर्भपात भी कराया था।
इस पूरे सिंडिकेट में आरोपी की सहयोगी राबिया बी मुख्य भूमिका निभाती थी। राबिया मासूम बच्चियों को बहला-फुसलाकर और लालच देकर प्यारे मियां तक पहुँचाने का काम करती थी। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और पुख्ता सबूतों व गवाहों के आधार पर प्यारे मियां और उसकी सहयोगी को दोषी करार देते हुए यह ऐतिहासिक सजा सुनाई है।
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भ्रष्टाचार पर एक्शन, टिमरनी और कानड़ के पूर्व सीएमओ समेत कई अधिकारियों पर की दंडात्मक कार्रवाई
भोपाल। मध्य प्रदेश के नगरीय निकायों के भीतर वित्तीय अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के मामलों में नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। विभाग के आयुक्त संकेत भोंडवे ने कई निकायों में गड़बड़ी पाए जाने पर कई भ्रष्ट अधिकारियों और इंजीनियरों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की है।
हरदा जिले की टिमरनी नगर पालिका के तत्कालीन सीएमओ राजाराम सोनपुर को स्वच्छता सामग्री के अनियमित खरीद मामले में दोषी पाया गया है। इस गंभीर लापरवाही के चलते विभाग ने उनके खिलाफ कार्रवाई करते हुए आगामी 5 साल तक उनकी पेंशन से 10% राशि रोकने के आदेश जारी किए हैं।
इसी प्रकार आगर-मालवा जिले की कानड़ नगर परिषद में पेयजल योजना के क्रियान्वयन में वित्तीय अनियमितता पाए जाने पर तत्कालीन सीएमओ पवन मिश्रा की पेंशन में 3% की स्थायी कटौती कर दी गई है।
नगरीय विकास विभाग ने केवल CMO ही नहीं बल्कि निर्माण कार्यों और अन्य आयोजनों में लापरवाही बरतने वाले तकनीकी अमले पर भी शिकंजा कसा है। खरगोन में प्रतिमा स्थापना के दौरान हुई अनियमितता के मामले में दो इंजीनियरों पर गाज गिरी है। विभाग ने उपयंत्री जितेंद्र सोडा और सहायक यंत्री मनीष महाजन की वेतन वृद्धि रोकने के आदेश दिए हैं।
विभाग की इस सख्त कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य प्रदेश के सभी नगरीय निकायों में वित्तीय अनुशासन, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है, ताकि सरकारी धन के दुरुपयोग पर पूरी तरह लगाम लगाई जा सके।
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चक्रवात ‘अर्नब’ का मध्य प्रदेश में असर: IMD ने 31 जिलों में जारी किया अलर्ट
भोपाल। बंगाल की खाड़ी से उठे गंभीर चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ का असर अब मध्य प्रदेश के मौसम पर भी साफ तौर पर दिखाई देने लगा है। मौसम विभाग (IMD) भोपाल ने राज्य के 31 जिलों में अलर्ट जारी किया है, जहां आगामी कुछ दिनों तक मौसम का मिजाज बदला रहेगा और कई जगहों पर तेज हवाओं के साथ बारिश की संभावना है।
इन जिलों में भारी बारिश का अलर्ट
मौसम विज्ञान केंद्र के मुताबिक, चक्रवात के प्रभाव से अगले 24 घंटों के दौरान राज्य के पूर्वी और उत्तर-पूर्वी हिस्सों में विशेष सतर्कता बरती जा रही है। खासतौर पर सीधी, सिंगरौली, अनूपपुर, डिंडौरी, मंडला और बालाघाट जिलों के कुछ हिस्सों में भारी बारिश होने की चेतावनी दी गई है। इन इलाकों में 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं और गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ सकती हैं।
चक्रवात के असर से राजधानी भोपाल, जबलपुर और रीवा संभाग के जिलों में भी बादलों की आवाजाही के साथ हल्की बूंदाबांदी दर्ज की जा रही है। IMD ने अगले 4 दिनों तक प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में आंधी, गरज-चमक और हल्की से मध्यम बारिश का दौर बने रहने की संभावना जताई है।
सीधी। जिले के रामपुर नैकिन क्षेत्र स्थित भंवरसेन घाटी की पहाड़ी पर जाने का रास्ता प्रशासन ने बंद कर दिया है। पहाड़ी पर मां काली जैसी आकृति दिखाई देने के स्थानीय दावों और सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद यहां लोगों की भीड़ बढ़ने लगी थी। धार्मिक आस्था के चलते लोग पहाड़ी पर पहुंचकर पूजा-अर्चना कर रहे थे। दुर्गम रास्ते, गहरी खाई और बड़ी चट्टानों के कारण हादसे की आशंका को देखते हुए प्रशासन ने यह कदम उठाया है। मौके पर पुलिस और वन विभाग की टीम तैनात है, जबकि सुरक्षा व्यवस्था के लिए 18 जवानों की तैनाती की गई है।
भंवरसेन घाटी में सोन नदी के समीप स्थित पहाड़ी का इलाका भौगोलिक रूप से जोखिमपूर्ण है। यहां ऊंची पहाड़ी, गहरी खाई और बड़ी-बड़ी चट्टानें हैं। ऐसे में थोड़ी सी लापरवाही भी गंभीर हादसे का कारण बन सकती है। स्थानीय दावों के बाद पहाड़ी पर पहुंच रहे लोग चट्टानों के बीच से होकर ऊपर जाने का प्रयास कर रहे थे। भीड़ बढ़ने के साथ किसी अप्रिय घटना की आशंका भी बढ़ गई थी। इसी को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने पहाड़ी पर चढ़ने और प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश करने पर रोक लगा दी है।
प्रशासन और पुलिस की टीम ने मौके पर घेराबंदी कर दी है। लोगों को प्रतिबंध की जानकारी देने के लिए सूचना बोर्ड भी लगाया गया है। पुलिस और वन विभाग के जवानों को निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी व्यक्ति को प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश न करने दिया जाए। प्रशासन का कहना है कि लोगों की सुरक्षा सर्वोपरि है। इसलिए किसी भी तरह का जोखिम लेने से बचना जरूरी है।
रामपुर नैकिन थाना प्रभारी सुधांशु तिवारी के अनुसार पिछले कुछ दिनों से भंवरसेन घाटी में लोगों की अत्यधिक भीड़ पहुंच रही थी। क्षेत्र दुर्गम है और चट्टानों से घिरा होने के कारण यहां हादसे की आशंका बनी हुई है। लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पहाड़ी को प्रतिबंधित क्षेत्र घोषित किया गया है और वहां सूचना बोर्ड लगाया गया है।
सीधी में चट्टान में देवी की आकृति दिखने के दावे के बाद उमड़े 5 हजार श्रद्धालु, 2 किमी लंबा जाम
प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे सुरक्षा व्यवस्था का पालन करें और पहाड़ी पर चढ़ने का प्रयास न करें। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो या स्थानीय दावों के आधार पर अपनी जान जोखिम में न डालें। प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश करने से बचें और प्रशासन के निर्देशों का पालन करें।
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कांग्रेस के नेता ने मंच पर अपने ही विधायक के लिए कहा- तीन जूते मारूंगा, बयान से मचा बवाल
बालाघाट । मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले से कांग्रेस पार्टी के भीतर चल रही भारी अंतर्कलह का एक ऐसा वीडियो सामने आया है, जिसने राजनीतिक गलियारों में भूचाल ला दिया है। जिले के खैरलांजी में शरद पूर्णिमा के पूर्व आयोजित एक सांस्कृतिक कार्यक्रम का मंच उस समय राजनीतिक अखाड़े में तब्दील हो गया, जब कांग्रेस के पूर्व जिला पंचायत सदस्य रामकुमार नगपुरे ने अपनी ही पार्टी के विधायक विवेक ‘विक्की’ पटेल पर जमकर भड़ास निकाली।
सार्वजनिक मंच से बोलते हुए कांग्रेस नेता रामकुमार नगपुरे ने विधायक विवेक पटेल पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि जनता को सिर्फ विधायक का चेहरा नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर विकास कार्य चाहिए। नगपुरे ने आरोप लगाया कि विधायक ने सड़क निर्माण का भूमिपूजन तो करवा दिया, लेकिन अब तक सड़क नहीं बनी। इसके साथ ही खैरलांजी क्षेत्र की करीब 30 पंचायतों में विकास कार्य न होने और ठेकेदारी चुनिंदा लोगों को दिए जाने का भी गंभीर आरोप लगाया।
नगपुरे यहीं नहीं रुके, उन्होंने अपनी ही पार्टी के विधायक के खिलाफ अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल करते हुए कहा कि “तीन जूते मारूंगा।” उनका यह बयान और गुस्सा अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
इस पूरे वाकये का सबसे दिलचस्प पहलू यह रहा कि अपनी ही पार्टी के विधायक को खरी-खोटी सुनाते हुए कांग्रेस नेता रामकुमार नगपुरे ने मंच से भारतीय जनता पार्टी (BJP) के पूर्व मंत्री प्रदीप जायसवाल के कार्यकाल की जमकर तारीफ की। कांग्रेस नेता द्वारा विपक्षी दल के नेता की तारीफ करना और अपनी पार्टी के विधायक को सरेआम धमकी देना अब चर्चा का विषय बन गया है।
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जीएसटी और आबकारी विभाग की बड़ी कार्रवाई, 3 करोड़ की अवैध शराब से भरे 2 ट्रक जब्त
इंदौर। मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर से टैक्स चोरी और अवैध शराब सिंडिकेट के खिलाफ एक बहुत ही बड़ी खबर सामने आ रही है। मंगलवार देर रात जीएसटी खुफिया महानिदेशालय और मध्य प्रदेश आबकारी विभाग की संयुक्त टीम ने शहर में एक बड़ा ऑपरेशन चलाकर शराब माफिया की कमर तोड़ दी है।
दरअसल अधिकारियों की टीम ने बायपास के पास पत्थर मुंडला इलाके में तगड़ी घेराबंदी करके दो विशाल ट्रकों को रोक लिया। जब ट्रकों की जांच की गई तो उनके अंदर से ‘श्री गोल्ड कॉइन’ ब्रांड की लगभग 3,000 पेटी अवैध शराब बरामद हुई जिसकी बाजार में कीमत करीब 3 करोड़ रुपए बताई जा रही है।
विभागीय सूत्रों के मुताबिक संयुक्त टीम को काफी दिनों पहले से ही गुप्त सूचना मिल रही थी कि इंदौर के रास्ते शराब की बहुत बड़ी खेप कहीं बाहर खपाने या फिर टैक्स चोरी करके स्थानीय बाजार में बेचने की तैयारी चल रही है।
इस पक्की जानकारी के मिलने के बाद DGGI और आबकारी की विशेष टीमें पिछले सात दिनों से लगातार संदिग्ध गाड़ियों पर नजर बनाए हुए थीं। मंगलवार की रात को जैसे ही दोनों ट्रकों ने बायपास से पत्थर मुंडला की तरफ मोड़ लिया वैसे ही अधिकारियों की टीम ने अचानक दबिश देकर उन्हें चारों तरफ से घेर लिया।
जब ट्रकों को रोका गया, तो शुरुआत में ड्राइवरों ने झूठ बोलकर अफसरों को गुमराह करने की कोशिश की कि गाड़ियों में सामान्य सामान लदा हुआ है। लेकिन अधिकारियों को पूरा शक था इसलिए उन्होंने तुरंत ट्रकों पर बंधी तिरपाल हटवाकर बारीकी से तलाशी लेना शुरू कर दिया।
जैसे ही तिरपाल हटी अधिकारियों के भी होश उड़ गए क्योंकि पूरे ट्रक शराब की पेटियों से ठसाठस भरे पड़े थे। दोनों गाड़ियों से ‘श्री गोल्ड कॉइन’ ब्रांड की 3000 से भी ज्यादा पेटियां बाहर निकाली गईं जिन्हें देखकर कार्रवाई करने आई टीम भी हैरान रह गई।
अधिकारियों ने जब ट्रकों के चालकों से शराब ले जाने से जुड़े वैध कागज, ई-वे बिल या कोई भी सरकारी परमिट दिखाने को कहा तो वे एक भी जायज दस्तावेज पेश नहीं कर पाए। चालकों के पास कोई भी कागज न होने से यह साफ हो गया कि यह पूरी खेप अवैध तरीके से ले जाई जा रही थी।
इसके तुरंत बाद टीम ने पूरी की पूरी शराब और दोनों ट्रकों को कानूनी प्रक्रिया के तहत अपने कब्जे में ले लिया। इतनी बड़ी मात्रा में अवैध शराब पकड़े जाने के बाद से ही पूरे शराब माफिया और टैक्स चोरी करने वाले गिरोहों में हड़कंप मच गया है।
जनगणना-2027 में अन्य पिछड़ा वर्ग यानी ओबीसी जातियों की अलग सूची की मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने इसका फैसला मोदी सरकार को सौंप दिया है। जनगणना में OBC जातियों के लिए ड्रॉप-डाउन मेनू की मांग वाली याचिका पर सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत की पीठ ने कहा कि यह नीतिगत निर्णय है, जिस पर सरकार विचार कर सकती है। साथ ही देश का शीर्ष न्यायालय याचिकाकर्ताओं को जनगणना रजिस्ट्रार जनरल के सामने अपनी बात रखने की छूट दी है।
दरअसल यह याचिका OBC फेडरेशन ऑफ इंडिया की तरफ से दाखिल की गई थी। इसमें मांग की गई थी कि ऑनलाइन जनगणना फॉर्म में OBC जातियों की सूची ड्रॉप-डाउन मेनू के रूप में उपलब्ध कराई जाए, ताकि अलग-अलग पिछड़ी जातियों को सूचीबद्ध किया जा सके।
28 अक्टूबर को हुई सुनवाई के दौरान फेडरेशन की तरफ से पेश वकील अंजनी अयंगर ने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता पिछड़े वर्गों से आते हैं। उन्होंने सरकार के सामने मांग रखी थी कि चल रही ऑनलाइन जनगणना प्रक्रिया में OBC जातियों के लिए ड्रॉप-डाउन मेनू की व्यवस्था की जाए। याचिका में कहा गया कि जनगणना के शेड्यूल के कॉलम नंबर 10 में अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और जाति से जुड़ी जानकारी मांगी गई है। हालांकि SC और ST के अलावा अन्य लोगों के लिए जाति दर्ज करने का विकल्प ओपन टेक्स्ट फील्ड के रूप में दिया गया है। इसमें लोगों को अपनी जाति का नाम खुद लिखना पड़ता है।
इसपर मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी मोहना की पीठ ने कहा कि यह मामला नीतिगत निर्णय से जुड़ा है और इस पर सरकार ही विचार कर सकती है। हालांकि, पीठ ने याचिकाकर्ताओं को भारत के जनगणना रजिस्ट्रार जनरल के सामने अपनी मांग रखने की छूट दे दी।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि OBC जातियों के लिए भी ड्रॉप-डाउन मेनू होना चाहिए, जैसा कि 2011 की जनगणना में SC और ST जातियों के लिए किया गया था। उनके मुताबिक, इससे विभिन्न OBC जातियों को सूचीबद्ध करने में मदद मिलेगी।
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हां! मैं दिमागी नक्सल हूंः नसीरुद्दीन शाह का फिर विवादित बयान, पीएम मोदी पर कहा- ‘तुम और तुम्हारे पालतू कुत्ते गोदी मीडिया में भौंकते…,’
मशहूर एक्टर नसीरुद्दीन शाह इन दिनों अपनी एक्टिंग से ज्यादा आपत्तिजनक बयानों और राजनीतिक टिप्पणियों को लेकर चर्चा में हैं। नसीरुद्दीन शाह मोदी सरकार पर विवादित और अपमानजनक टिप्पणी कर रहे हैं। एक बार फिर नसीरुद्दीन शाह ने विवादस्पद बयान देते हुए मोदी सरकार को घेरा है। नसीरुद्दीन शाह ने खुद को दिमागी नक्सल बताते हुए कहा कि हां! मैं दिमागी नक्सल हूं। साथ ही पीएम मोदी पर हमला करते हुए कहा कि ‘तुम और तुम्हारे पालतू कुत्ते गोदी मीडिया में भौंकते रहते हैं। वो जाहिल, नाकारा लोग है। अपनी पूरी ताकत लगा लो। न हमारे मुल्क के नौजवानों का हौसला नहीं तोड़ पाओगे।
जामिया मिल्लिया इस्लामिया में जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच अभिनेता नसीरुद्दीन शाह ने वीडियो पोस्ट किया है। वीडियो में उन्होंने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला और देश के युवाओं, शिक्षा संस्थानों और लोकतंत्र को लेकर सवाल उठाए। इतना ही नहीं, उन्होंने खुद को ‘दिमागी नक्सल’ भी बताया।
नसीरुद्दीन शाह ने वीडियो में कहा- मैं फक्र के साथ कहता हूं, मैं दिमागी नक्सल हूं। दिमागी नक्सल के अलावा पता नहीं क्या-क्या टर्म दिए हैं चौकीदार ने मुझ जैसे लोगों को। एंटी-नेशनल, टुकड़े-टुकड़े गैंग और मालूम नहीं क्या-क्या। टुकड़े-टुकड़े गैंग अगर कोई है इस मुल्क में तो वो ये नाजायज हुकूमत है। मैं इस हुकूमत से एक सवाल पूछना चाहता हूं, ‘और क्या-क्या करोगे तुम? हमारे मुल्क के नौजवानों की हिम्मत तोड़ने के लिए। शिक्षा संस्थाओं को बर्बाद करने के लिए और हमारे लोकतंत्र को खतरे में डालने के लिए। कितना करोगे?’ तुम और तुमने जो अपने आसपास बेवकूफों और बेईमानों की पलटन खड़ी की है, उसके साथ कहां तक जाओगे?
कर लो जितना हो सके तुमसे
नसीरुद्दीन शाह ने आगे कहा- पहले जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी, फिर सत्यजीत रेय फिल्म इंस्टीट्यूट और अब जामिया मिल्लिया। छात्रों पर जो जुल्म किया जा रहा है, वो याद रखा जाएगा। सब याद रखा जाएगा। कर लो जितना हो सके तुमसे और तुम्हारे पालतू कुत्तों जो गोदी मीडिया में भौंकते रहते हैं और वो जाहिल, नाकारा लोग, जो बीजेपी आईटी सेल के मुलाजिम हैं। कितना करोगे तुम? करते रहो। अपनी पूरी ताकत लगा लो। न हमारे मुल्क के नौजवानों का हौसला टूटने वाला है, न हमारे शिक्षा संस्थाओं बर्बाद होने वाले हैं और न ही हमारा लोकतंत्र खतरे में पड़ने वाला है। जो करना है, करके देख लो। देख लेंगे कितना जोर है बाजू-ए-कातिल में है।
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सुको दिल्ली एसआईआर पर सख्त, पूछा-पहले से वोटर लिस्ट में शामिल लोगों से फार्म-6 क्यों, मांगा जवाब
नई दिल्ली. दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को चुनौती देने वाली याचिका पर बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई, जिसमें कोर्ट ने चुनाव आयोग से सवाल किया कि जिन लोगों ने दिल्ली एसआईआर में गणना फॉर्म नहीं भरे थे, उनसे नए मतदाता के रूप में पंजीकरण के लिए फॉर्म 6 भरने को क्यों कहा जा रहा है, जबकि वो पहले से ही 2026 की मतदाता सूची में शामिल हैं.
सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को इस पर दो हफ्ते के भीतर जवाब देने को कहा है. यह सवाल तब उठा है जब लगभग 43 लाख लोगों को स्थान बदलने या अनुपस्थित होने के कारण ड्राफ्ट मतदाता सूची से बाहर कर दिया गया है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि फॉर्म-6 पहली बार वोट देने वालों के लिए है. जो लोग पहले से ही 2026 की मतदाता सूची में शामिल हैं और केवल एक जगह से दूसरी जगह गए हैं, उन्हें फॉर्म-8 का उपयोग करने की अनुमति मिलनी चाहिए. उनसे यह घोषणा करने के लिए नहीं कहा जाना चाहिए कि वो पहले कभी मतदाता सूची में शामिल नहीं थे. कोर्ट ने कहा कि कुछ समय के लिए बाहर रहना, स्थायी रूप से जगह बदलना नहीं है. काम के सिलसिले में एक-दो महीने के लिए बाहर रहने से कोई मतदाता स्थायी रूप से स्थानांतरित नहीं हो जाता.
जस्टिस बागची ने सवाल किया कि क्या कोई मतदाता, जो अपना फॉर्म नहीं भर पाया, वह हमेशा के लिए अपना वोट देने का अधिकार खो देता है? उन्होंने इसे एक ऐसी संरचनात्मक विसंगति बताया, जिसे ठीक करने की जरूरत है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जब तक अंतिम मतदाता सूची तैयार नहीं हो जाती, तब तक केवल इसलिए किसी फॉर्म को खारिज करने का कोई मतलब नहीं है कि उसकी समय-सीमा निकल गई है. चुनाव आयोग ने इस पर कहा कि वह देर से जमा किए गए पंजीकरण फॉर्मों को स्वीकार करने पर विचार करेगा और जरूरत पडऩे पर 30 अक्टूबर की समय-सीमा को भी बढ़ा देगा.
दिल्ली एसआईआर मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा, बिहार एसआईआर मामले में हमने तार्किक विसंगति के मुद्दे पर कोई फैसला नहीं लिया था और पश्चिम बंगाल में इसे एक अंतरिम व्यवस्था के तौर पर अनुमति दी गई थी. हमने इस पर कोई फैसला नहीं दिया है, लेकिन लोग बिहार वाले फैसले को दिखाते हैं और कहते हैं कि सब कुछ तय हो चुका है. जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने सुनवाई के दौरान कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने लॉजिकल डिसक्रिपेंसी यानी तार्किक विसंगति श्रेणी को मान्यता नहीं दी है.
ग्वालियर। ग्वालियर में ट्रेनों के एसी कोच में सफर कर यात्रियों का सामान चोरी करने वाले शातिर आरोपी को जीआरपी ने गिरफ्तार किया है। आरोपी यात्री बनकर ट्रेन में चढ़ता और मौका मिलते ही बैग चोरी कर अगले स्टेशन पर उतर जाता था। पुलिस ने आरोपी की निशानदेही पर 34 बैग बरामद किए हैं, जिनमें रखे सामान की कीमत करीब 8 लाख 26 हजार रुपये है। फिलहाल पुलिस आरोपी से पूछताछ कर रही है।
पुलिस के मुताबिक, आरोपी महंगे कपड़े पहनकर एसी कोच में सफर करता था, ताकि यात्रियों को उस पर शक न हो। सफर के दौरान वह यात्रियों की गतिविधियों पर नजर रखता और मौका मिलते ही उनका बैग लेकर अगले स्टेशन पर उतर जाता था। इसी तरीके से वह ट्रेनों में चोरी की वारदातों को अंजाम दे रहा था। जांच में सामने आया कि आरोपी दीपक पहले एक फाइनेंस कंपनी में नौकरी करता था। आर्थिक नुकसान के बाद वह तंगी में आ गया। इसी दौरान ट्रेन में एक यात्री का बैग चोरी किया। बैग में कीमती सामान और नकदी मिलने के बाद उसने इस वारदात को ही अपना जरिया बना लिया और लगातार चोरी करने लगा।
जीआरपी डीएसपी कीर्ति नरवरिया के मुताबिक, आरोपी ने हाल ही में ग्वालियर के गोले का मंदिर क्षेत्र स्थित प्रगति विहार निवासी दीपक शर्मा का सामान जीटी एक्सप्रेस से चोरी किया था। इसके अलावा मई में नागपुर निवासी विशाखा शशिकांत के सामान की चोरी के मामले में भी आरोपी की भूमिका सामने आई है। जीआरपी ने आरोपी की निशानदेही पर 34 बैग बरामद किए हैं। इनमें मौजूद सामान की कुल कीमत करीब 8 लाख 26 हजार रुपये आंकी गई है। पुलिस को आशंका है कि पूछताछ में ट्रेनों में चोरी की अन्य वारदातों का भी खुलासा हो सकता है।
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खाकी फिर दागदार! जुए के मामले में कटारा हिल्स TI सुनील दुबे सस्पेंड, संदिग्ध आचरण के चलते गिरी गाज
भोपाल। राजधानी भोपाल से पुलिस महकमे से जुड़ी एक बड़ी और सख्त खबर सामने आ रही है। भोपाल में एक बार फिर लापरवाही और संदिग्ध आचरण के चलते एक थाना प्रभारी पर गाज गिरी है। कटारा हिल्स थाना प्रभारी निरीक्षक सुनील दुबे को सस्पेंड कर दिया गया है। यह कार्रवाई क्षेत्र में देर रात पकड़े गए जुए के एक मामले में उनके संदिग्ध आचरण को लेकर की गई है।
जानकारी के अनुसार, कटारा हिल्स थाना क्षेत्र के अंतर्गत पुलिस ने देर रात जुए के खिलाफ कार्रवाई की थी। इस पूरी कार्रवाई के दौरान थाना प्रभारी निरीक्षक सुनील दुबे की भूमिका और आचरण संदिग्ध पाया गया, जिसके बाद उच्च अधिकारियों ने मामले को गंभीरता से लेते हुए उनके निलंबन का आदेश जारी कर दिया।
राजधानी में पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू होने के बाद से लापरवाह और संदिग्ध कार्यशैली वाले पुलिसकर्मियों पर लगातार शिकंजा कसा जा रहा है। कटारा हिल्स TI से पहले भोपाल के कोतवाली और बजरिया थाना प्रभारियों पर भी इस तरह की संदिग्ध गतिविधियों और प्रशासनिक लापरवाही के चलते कार्रवाई की जा चुकी है। एक के बाद एक थाना प्रभारियों के सस्पेंड होने से पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है।
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बीजेपी विधायक का विवादित वीडियो वायरलः जिला पंचायत अध्यक्ष बनने के लिए ‘सदस्य खरीदने’ की बात कबूली, कांग्रेस ने की केस दर्ज करने की मांग
भोपाल। मध्य प्रदेश के सीहोर जिले की आष्टा विधानसभा सीट से बीजेपी विधायक गोपाल सिंह इंजीनियर का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने राज्य की सियासत में भूचाल ला दिया है। इस वीडियो में विधायक मंच से हंसते हुए यह स्वीकार करते नजर आ रहे हैं कि जिला पंचायत अध्यक्ष बनने के लिए उन्होंने सदस्यों की खरीद-फरोख्त की थी। इस सनसनीखेज खुलासे के बाद विपक्ष को भाजपा सरकार और उसकी कार्यप्रणाली पर हमला करने का बड़ा हथियार मिल गया है।
वायरल वीडियो में आष्टा विधायक गोपाल सिंह अपने पुराने दिनों को याद करते हुए मंच से सार्वजनिक रूप से कह रहे हैं कि जब वे जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए मैदान में थे, तब उन्होंने जिला पंचायत के कुल सदस्यों में से बहुमत जुटाने के लिए सदस्यों को खरीदा था। गौरतलब है कि गोपाल सिंह पूर्व में जिला पंचायत अध्यक्ष रह चुके हैं और बाद में विधायक चुने जाने के बाद उन्होंने वह पद छोड़ दिया था। अब उनके ही मुंह से हॉर्स ट्रेडिंग (खरीद-फरोख्त) की बात स्वीकार करने वाला यह वीडियो सामने आने के बाद राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मच गया है। सत्ताधारी दल के विधायक के इस बयान से पार्टी की खासी किरकिरी हो रही है।
भाजपा विधायक के इस वायरल वीडियो के सामने आने के बाद मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस पूरी तरह आक्रामक हो गई है। कांग्रेस मीडिया विभाग के अध्यक्ष मुकेश नायक ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जो बात कांग्रेस पार्टी लंबे समय से कहती आ रही थी, आज वह बीजेपी विधायक के खुद के मुंह से सार्वजनिक रूप से सच साबित हो गई है। मुकेश नायक ने सरकार और प्रशासन पर हमला बोलते हुए मांग की है कि- सरकार इस मामले का तत्काल संज्ञान ले। मामले की उच्चस्तरीय या सरकारी जांच एजेंसियों से निष्पक्ष जांच कराई जाए।
विधायक के खिलाफ लोकतंत्र की हत्या और भ्रष्टाचार के आरोप में आपराधिक प्रकरण (FIR) दर्ज किया जाना चाहिए। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि चाहे नगरीय निकाय चुनाव हों, पंचायत चुनाव हों या चुनी हुई सरकारें गिराने का मामला हो, बीजेपी हर जगह पैसों के दम पर खरीद-फरोख्त कर लोकतंत्र का गला घोंट रही है। इस विवादित बयान के बाद अब देखना यह होगा कि डैमेज कंट्रोल के लिए बीजेपी संगठन और प्रदेश नेतृत्व इस मामले में क्या रुख अपनाता है।
भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के वीआईपी इलाके की सुरक्षा व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। इस बार चोरों ने आईएएस (IAS) अधिकारी के घर पर धावा बोला है। बताया जा रहा है कि अफसर के घर से चंदन के पेड़ की चोरी कर फरार हो गए। अधिकारी का घर, प्रदेश के डीजीपी कैलाश मकवाना के बगल में ही है। ऐसे में सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे है।
मिली जानकारी के मुताबिक, चोरों ने आईएएस अधिकारी विवेक पोरवाल के चार इमली स्थित घर पर धावा बोला। चोरों ने विवेक पोरवाल के घर में लगे चंदन का पेड़ चोरी कर ले गए। मध्य प्रदेश के डीजीपी कैलाश मकवाना, विवेक पोरवाल के पड़ोसी है। वहीं चोरी की घटना के बाद डीजीपी ने चोरों को पकड़ने के निर्देश दिए है। फिलहाल हबीबगंज पुलिस और क्राइम ब्रांच मामले की जांच में जुटी हुई है।
आपको बता दें कि चार इमली इलाका, शहर का सबसे वीआईपी क्षेत्र है। जहां वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों, पुलिस अधिकारियों, नेताओं और अन्य वीआईपी लोगों के घर हैं। इसके बावजूद इलाके में चोरी की वारदात होना सुरक्षा व्यवस्था के लिए बेहद चिंता का विषय है। यह कोई पहला मामला नहीं है, इससे पहले भी आईजी इंटेलिजेंस के आवास के आसपास और भाजपा विधायक व पूर्व मंत्री अजय विश्नोई के सरकारी बंगले पर चोरी हुई थी।
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भाजपा कोर ग्रुप से नरोत्तम मिश्रा बाहर... समर्थकों के उत्पात के बाद कटा पत्ता, नई टीम में नहीं मिली जगह
भोपाल। दतिया विधानसभा सीट के उपचुनाव में पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों द्वारा की गई पार्टी विरोधी गतिविधियों का नुकसान आखिरकार उन्हें भुगतना पड़ गया। भाजपा के नए प्रदेश प्रभारी बिप्लब कुमार देब के दूसरे प्रवास के बाद प्रदेश भाजपा के कोर ग्रुप का पुनर्गठन किया गया। इसमें नरोत्तम मिश्रा का नाम कट गया। पहले कोर ग्रुप में 20 सदस्य होते थे, वहीं अब 19 रह गए हैं।
इसी साल जुलाई में दतिया विधानसभा सीट के लिए हुए उपचुनाव में नरोत्तम मिश्रा को टिकट नहीं मिला था। इसके बाद उनके समर्थकों ने जमकर बवाल काटा था। भाजपा ने यहां से आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाया था। पार्टी को पराजय का मुंह देखना पड़ा था। बाद में पार्टी ने नरोत्तम समर्थक जिलाध्यक्ष और पूरी कार्यकारिणी को भंग कर दिया था।
शिवराज सिंह सरकार में कभी नंबर दो की हैसियत रखने वाले नरोत्तम मिश्रा को मुख्यमंत्री पद का दावेदार तक माना गया था। भाजपा के केंद्रीय संगठन ने प्रदेश की राजनीति में पीढ़ीगत बदलाव के जो संकेत दिए हैं, उसकी गाज नरोत्तम मिश्रा पर ही गिरी है। वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में दतिया सीट से हारने के बाद नरोत्तम मिश्रा को उम्मीद थी कि उपचुनाव में पार्टी उन्हें मौका देगी। दतिया सीट कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को आपराधिक मामले में सजा होने से खाली हुई थी। नरोत्तम मिश्रा ने उपचुनाव के लिए नामांकन पत्र तक खरीद लिया था, लेकिन पार्टी ने उन्हें टिकट नहीं दिया।
समर्थकों द्वारा किए गए उत्पात के बाद से ही उनकी उपेक्षा शुरू हुई। अक्टूबर में प्रदेश भाजपा कोर ग्रुप की महत्वपूर्ण बैठकों में नरोत्तम मिश्रा को नहीं बुलाया गया। राज्य में पार्टी के प्रदेश प्रभारी और प्रदेश संगठन महामंत्री को बदले जाने के बाद कोर ग्रुप की सूची को अपडेट किया गया। इसमें नरोत्तम मिश्रा का नाम नहीं है। बता दें, मध्य प्रदेश में सत्ता और संगठन में समन्वय के लिहाज से भाजपा में कोर ग्रुप व्यवस्था वर्ष 2020 में शुरू हुई थी।
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ग्वालियर में 20 दिन बाद मिला रहस्य का जवाब: चिड़ियाघर के बाहर से गायब हुई महिला बरामद
ग्वालियर। ग्वालियर के गांधी प्राणी उद्यान के बाहर से लापता हुई शिवपुरी की महिला 20 दिन बाद मिल गई है। 6 अक्टूबर को पति के साथ चिड़ियाघर घूमने पहुंची महिला अचानक गायब हो गई थी। CCTV फुटेज में वह एक बाइक सवार के साथ जाती दिखाई दी थी। अब महिला ने पुलिस को बताया है कि उसने बाइक सवार से लिफ्ट ली थी, जिसके बाद वह बहोड़ापुर के मोतीझील इलाके में रास्ता भटक गई और एक झोंपड़ी में रहने लगी।फिलहाल महिला न पति के साथ जाने को तैयार है और न ही किसी दूसरे के साथ जाने की बात स्वीकार कर रही है। पुलिस उसके बयान कोर्ट में दर्ज कराकर आगे की कार्रवाई की बात रही है।
दरअसल शिवपुरी निवासी करण रजक अपनी पत्नी सुहाना रजक के साथ 6 अक्टूबर को बाइक से ग्वालियर आया था। सुहाना ने चिड़ियाघर घूमने की इच्छा जताई,जिसके बाद दोनों गांधी प्राणी उद्यान पहुंचे।CCTV फुटेज के मुताबिक दोपहर 3 बजकर 9 मिनट 29 सेकंड पर सुहाना ने पति से बाइक पार्किंग में खड़ी करने के लिए कहा। करण बाइक पार्क करने गया और महज 26 सेकंड बाद लौटा, तो सुहाना वहां से गायब थी।करण ने आसपास तलाश की, कई बार फोन लगाया, लेकिन मोबाइल बंद मिला। इसके बाद उसने अपने और पत्नी के परिजनों रिश्तेदारों से संपर्क किया। कोई जानकारी नहीं मिलने पर पड़ाव थाना पुलिस को सूचना दी गई,पुलिस ने चिड़ियाघर के आसपास लगे CCTV कैमरों की जांच की। फुटेज में करण के बाइक लेकर जाने के बाद एक दूसरी बाइक तेज रफ्तार से आती दिखाई दी। इसी दौरान सुहाना दौड़कर उस बाइक पर बैठती नजर आई। फुटेज सामने आने के बाद पुलिस ने गुमशुदगी दर्ज कर उसकी तलाश शुरू की।
करीब 20 दिन बाद सुहाना के मिलने पर पुलिस ने उससे पूछताछ की। महिला ने बताया कि वह बाइक सवार के साथ भागी नहीं थी, बल्कि उसने उससे लिफ्ट ली थी। उसके मुताबिक,बाइक सवार उसे बहोड़ापुर के मोतीझील इलाके में छोड़कर चला गया। इसके बाद वह रास्ता भटक गई और एक झोंपड़ी में रहने लगी।महिला के बयान के बाद अब पुलिस पूरे घटनाक्रम की पड़ताल कर रही है। सुहाना फिलहाल अपने पति के साथ जाने को तैयार नहीं है और न ही किसी कतिथ बॉयफ्रेंड के साथ जाने की बात स्वीकार कर रही है। पुलिस उसे न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करने की तैयारी में है, जहां उसके बयान और सामने आए तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।
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सीधी। जिले के रामपुर नैकिन क्षेत्र स्थित भंवरसेन घाटी की पहाड़ी पर जाने का रास्ता प्रशासन ने बंद कर दिया है। पहाड़ी पर मां काली जैसी आकृति दिखाई देने के स्थानीय दावों और सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद यहां लोगों की भीड़ बढ़ने लगी थी। धार्मिक आस्था के चलते लोग पहाड़ी पर पहुंचकर पूजा-अर्चना कर रहे थे। दुर्गम रास्ते, गहरी खाई और बड़ी चट्टानों के कारण हादसे की आशंका को देखते हुए प्रशासन ने यह कदम उठाया है। मौके पर पुलिस और वन विभाग की टीम... अपराध
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