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रीवा। रीवा में हैरान करने वाला सामने आया है। एक घर के सीसीटीवी कैमरे में यह घटना कैद हो गई है। रात को एक मोटरसाइकिल बगैर ड्राइवर के चलती हुई नजर आने से मोहल्ले वाले हैरान है। यह घटना रीवा शहर से लगे भुंडहा गांव की है।
रीवा के भुंडहा गांव में रात को हुई इस घटना ने सभी को हैरान कर दिया है। एक घर में लगे सीसीटीवी कैमरे में बगैर चालक के बाइक दौड़ती नजर आई। यह वीडियो वायरल होने के बाद तरह-तरह की चर्चाएं होने लगी। कई लोग इसे भूतहा समझ रहे हैं तो कोई इसे किसी की शरारत समझ रहा है। लोग कह रहे हैं कि मोटरसाइकिल से वाहन चालक उतर गया होगा और बगैर ड्राइवर के मोटरसाइकिल जाते हुए नजर आई।जो भी है, इस घटना के बाद लोग तरह-तरह से तर्क दे रहे हैं।
भुंडहा के रहने वाले विवेक कुमार शर्मा के सीसीटीवी कैमरे में यह रिकार्ड हुआ है। यह वीडियो वायरल होने के बाद शर्मा मीडिया के सामने आए और उन्होंने बताया कि घर में लगे एक कैमरे में दिख रहा है कि ड्राइवर नहीं है, जबकि घर के दूसरे हिस्से में लगे सीसीटीवी कैमरे में जो बाइक दिखी, जिस पर कोई चालक वाहन चला रहा था।
शर्मा ने यह भी बताया कि उनके भांजे ने सीसीटीवी का एक फुटेज मजाक के रूप में अपने दोस्तों को शेयर किया था, जिसमें उसने बताया था कि एक बाइक बगैर चालक के जाते हुए कैमरे में कैद हुई है। जबकि भांजे को दूसरे वीडियो के बारे में जानकारी नहीं थी, जिसमें कोई चालक नजर आ रहा था। यह वीडियो वायरल होने के बाद विवेक कुमार शर्मा ने सभी से अपील की है कि लोग इसे देखकर हैरान न हों। विवेक कुमार शर्मा ने लोगों से अफवाह पर ध्यान नहीं देने की भी अपील की है। उन्होंने कहा कि यह टेक्नॉलाजी का एक ग्लीच हो सकता है। शर्मा ने यह दोनों ही वीडियो उपलब्ध करवाए हैं।

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माता की चौकी में बैनर लगाने पर बवाल! घर में घुसकर परिवार पर मुस्लिम युवकों ने किया हमला, 5 आरोपी गिरफ्तार
इंदौर। माता की चौकी के आयोजन में बैनर लगाने को लेकर शुरू हुआ विवाद इंदौर में कथित तौर पर मारपीट और घर में घुसकर हमला करने तक पहुंच गया। राजेंद्र नगर थाना क्षेत्र के तेजपुर गड़बड़ी स्थित काली मल्टी में रहने वाले एक ऑटो चालक ने आरोप लगाया है कि माता की चौकी के पंडाल में बैनर लगाने का विरोध करने पर कुछ मुस्लिम युवकों ने पहले उसके साथ मारपीट की और इसके बाद उसके घर में घुसकर परिवार के सदस्यों को भी निशाना बनाया।मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने प्रकरण दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी है। ACP निधि सक्सेना के मुताबिक मामले में 5 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि बाकी आरोपियों की धरपकड़ के लिए पुलिस की टीम लगाई गई है।
शिकायत के मुताबिक तेजपुर गड़बड़ी की स्कीम नंबर 103 में रहने वाले ऑटो चालक सुरेश साह अपने घर के सामने सड़क पर बने पंडाल में माता की चौकी का बैनर लगा रहे थे।आरोप है कि इसी दौरान काली मल्टी में रहने वाले कुछ मुस्लिम युवक वहां पहुंचे और बैनर लगाने को लेकर आपत्ति जताई। सुरेश ने कथित तौर पर कहा कि यह धार्मिक कार्यक्रम का बैनर है और इसे लगाया जाएगा। बस इसी बात को लेकर विवाद बढ़ गया। शिकायत में आरोप है कि कहासुनी के बाद आरोपियों ने गाली-गलौज शुरू कर दी। सुरेश ने इसका विरोध किया तो एक युवक ने कथित तौर पर बल्ली उठाकर उनके बाएं हाथ पर हमला कर दिया। इसके बाद कई अन्य लोगों ने भी लात-घूंसों से मारपीट की।
विवाद यहीं खत्म नहीं हुआ। शिकायत के मुताबिक शोर सुनकर सुरेश की पत्नी सपना, सास द्वारिकाबाई और रिश्तेदार रोहित मौके पर पहुंचे तो आरोपियों ने कथित तौर पर उनके साथ भी मारपीट की।आरोप है कि इसके बाद कुछ आरोपी सुरेश के घर में घुस गए और उनके बेटों विकास और आकाश को घसीटते हुए बाहर लाकर उनके साथ भी मारपीट की।शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया है कि जाते-जाते आरोपियों ने जान से खत्म करने की धमकी दी। यानी जिस विवाद की शुरुआत एक बैनर लगाने को लेकर हुई, वह देखते ही देखते पूरे परिवार के साथ कथित मारपीट तक पहुंच गया।पूरे घटनाक्रम ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर माता की चौकी के बैनर को लेकर शुरू हुई बहस इतनी हिंसक कैसे हो गई? क्या विवाद अचानक बढ़ा या इसके पीछे पहले से कोई रंजिश थी?
मामला सामने आने के बाद राजेंद्र नगर पुलिस ने शिकायत के आधार पर प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।ACP निधि सक्सेना के मुताबिक पुलिस ने अब तक 5 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। वहीं, मामले में शामिल बाकी आरोपियों की धरपकड़ के लिए पुलिस टीम लगाई गई है।पुलिस अब पूरे घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि विवाद की वास्तविक शुरुआत कैसे हुई और इसमें किस-किस की क्या भूमिका रही।
माता की चौकी जैसे धार्मिक आयोजन में एक बैनर लगाने को लेकर शुरू हुआ विवाद अगर वास्तव में घर में घुसकर पूरे परिवार से मारपीट तक पहुंचा है, तो मामला गंभीर है। हालांकि शिकायत में लगाए गए आरोपों की पूरी तस्वीर पुलिस जांच के बाद ही साफ होगी।फिलहाल 5 आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस बाकी आरोपियों की तलाश कर रही है।
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मध्य प्रदेश में पटवारियों का 3 दिन सामूहिक अवकाश: स्वामित्व योजना और निलंबन का विरोध, आंदोलन की चेतावनी
भोपाल। मध्यप्रदेश में पटवारी आज से 3 दिन तक सामूहिक अवकाश पर रहेंगे। स्वामित्व योजना और राजस्व कार्य में कार्रवाई का विरोध करेंगे। प्रदेश में अब तक दो दर्जन से ज्यादा पटवारियों की सेवा समाप्त हुई है। कार्रवाई वापस नहीं होने पर चरणबद्ध आंदोलन की चेतावनी दी है। वहीं पटवारियों के अवकाश से राजस्व कार्य प्रभावित होगा।
नर्मदापुरम। जिले में स्वामित्‍व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन-2026 को लेकर पटवारियों पर हो रही निलंबन, सेवा समाप्ति और अन्य दंडात्मक कार्रवाइयों के विरोध में मध्यप्रदेश पटवारी संघ ने मोर्चा खोल दिया है। संघ के आह्वान पर नर्मदापुरम जिले में आज से पटवारियों ने बुधवार को सभी ऑनलाइन राजस्व कार्य पूरी तरह बंद कर दिए है। पटवारी संघ की नर्मदापुरम जिला इकाई ने कलेक्ट्रेट परिसर में उग्र नारेबाजी करते हुए विरोध दर्ज कराया। इसके बाद राजस्व विभाग के प्रमुख सचिव के नाम एक ज्ञापन डिप्टी कलेक्टर सीमा बडोले को सौंपा गया।
संघ ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि पटवारियों पर की गई दंडात्मक कार्रवाई वापस नहीं ली जाती है, तो गुरुवार से सभी पटवारी सामूहिक अवकाश पर चले जाएंगे। ​देवास में तीन पटवारियों की सेवा समाप्त करने का कड़ा विरोध करते हुए जिला अध्यक्ष देवेंद्र कदम और इटारसी तहसील अध्यक्ष देवीशरण पटेल ने बताया कि राज्यभर में पटवारियों पर अनुचित दबाव बनाया जा रहा है। संघ का कहना है कि स्वामित्व योजना के क्रियान्वयन में आ रही व्यावहारिक और कानूनी अड़चनों से सरकार को पहले ही अवगत कराया जा चुका है। इसके बावजूद विसंगतियां दूर करने के बजाय पटवारियों को निशाना बनाया जा रहा है।
राजस्व निरीक्षक और तहसीलदार संघ भी इस कार्य पर अपनी आपत्ति दर्ज करा चुके हैं। पटवारियों की हड़ताल और ऑनलाइन कार्य बंद करने से गिरदावरी, किसानों को नामांतरण व दस्तावेजों की नकल और खाद-बीज से जुड़े महत्वपूर्ण राजस्व कार्य पूरी तरह ठप्प होने की आशंका है। ​ज्ञापन सौंपने के दौरान देवेंद्र कदम, मुकेश गौर, प्रदीप यादव, चेतन वर्मा और राजेश गहरवार समेत संघ के कई पदाधिकारी उपस्थित रहे।

भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल और इंदौर समेत प्रदेश के कई बड़े शहरों में शारदीय नवरात्रि के ठीक पहले सोशल मीडिया पर शुरू हुए ‘रेंट ए गरबा पार्टनर’के ट्रेंड ने तूल पकड़ लिया है। ऑनलाइन वेबसाइट्स और सोशल मीडिया के जरिए पैसे लेकर गरबा पार्टनर उपलब्ध कराने के दावों और विज्ञापनों को लेकर अब पुलिस प्रशासन, हिंदू संगठनों और संत समाज ने तीखी प्रतिक्रिया दी है।
अहमदाबाद, वडोदरा, सूरत, मुंबई, दिल्ली NCR के साथ-साथ इंदौर और भोपाल जैसे शहरों के नाम से भी अलग-अलग सेक्शन बनाकर ‘Find Garba Partner’ और ‘Find Dandiya Partner’ के विज्ञापन चलाए जा रहे हैं। आगामी 11 से 19 अक्टूबर तक यानी 9 दिनों के लिए 1000 रुपये से लेकर 6500 रुपये तक के बुकिंग पैकेज तय किए गए हैं। इसमें गरबा खेलने, डांस सीखने, रील्स बनाने, मैचिंग आउटफिट पहनने और साथ में सेल्फी लेने के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन कुछ पोस्ट्स में व्यक्तिगत नजदीकी के ऑफर भी लिखे गए हैं, जिससे यह मामला गंभीर हो गया है।
बढ़ते मामलों को देखते हुए भोपाल पुलिस ने आम जनता के लिए चेतावनी जारी की है। धोखाधड़ी से बचने की सलाह के साथ एडिशनल डीसीपी अनिल शर्मा ने कहा है कि सोशल मीडिया पर गरबा और पार्टनर्स के नाम से कई फर्जी और भ्रामक आईडी सक्रिय हैं। इन विज्ञापनों के झांसे में आकर पार्टनर के लिए अप्लाई करने वाले लोग भारी ठगी का शिकार हो सकते हैं। पुलिस ने नागरिकों से ऐसे किसी भी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर बुकिंग न करने की अपील की है।
अखिल भारतीय संत समिति के कार्यकारी अध्यक्ष अनिलानंद महाराज ने बड़ा दावा करते हुए कहा कि इस तरह के ट्रेंड्स के जरिए हिंदू बहन-बेटियों को टारगेट किया जा रहा है और इससे ‘लव जिहाद’ को बढ़ावा मिलने की आशंका है। उन्होंने ऐसे सोशल मीडिया अकाउंट्स और ट्रेंड्स की गहराई से जांच कर कठोर कार्रवाई की मांग की है।
‘जय मां भवानी हिंदू संगठन’ के अध्यक्ष भानु हिंदू ने कहा कि सनातन धर्म के आयोजनों का बड़े पैमाने पर व्यवसायीकरण हो रहा है। पैड गरबा पार्टनर उपलब्ध कराने वाली कंपनियों और फर्जी अकाउंट्स को बख्शा नहीं जाएगा। संगठनों ने अपील की है कि हिंदू महिलाएं और युवतियां इस तरह के पैड और व्यावसायिक गरबा आयोजनों से पूरी तरह दूर रहें।
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98 हजार परिवारों के चूल्हे पर संकट: PNG के रिकॉर्ड की गड़बड़ी से 15 हजार LPG कनेक्शन ब्लॉक
भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में गैस एजेंसियों के रिकॉर्ड की गड़बड़ी का खामियाजा आम उपभोक्ता भुगत रहे हैं। शहर की 30 से ज्यादा कॉलोनियों में करीब 98 हजार घरों में रसोई गैस परेशानी का सबब बन गई है। इसमें सबसे बड़ा आंकड़ा ई-केवाईसी का है, जहां 83 हजार कनेक्शन बिना केवाईसी के कारण बंद कर दिए गए हैं। हालांकि केवाईसी को लेकर पहले से ही सरकार ने गाइडलाइन जारी की थी। लेकिन दूसरा मामला ज्यादा गंभीर है।
भोपाल में लगभग 14 से 15 हजार ऐसे परिवार हैं, जिनका LPG कनेक्शन इसलिए ब्लॉक कर दिया गया क्योंकि कंपनी के रिकॉर्ड में उनके क्षेत्र में PNG पाइपलाइन उपलब्ध दिखाई गई। जमीन पर हकीकत कुछ और है। कई कॉलोनियों में आज तक PNG लाइन बिछी ही नहीं है, तो कुछ जगह लाइन बिछने के बाद भी घरों तक कनेक्शन नहीं पहुंचा है। इस दोहरी व्यवस्था में उपभोक्ता बुरी तरह फंस गए हैं।
एक तरफ उनके पुराने LPG सिलेंडर की बुकिंग बंद है, दूसरी तरफ PNG का विकल्प भी उनके पास नहीं है। नया LPG कनेक्शन भी नहीं दिया जा रहा है। ऐसे में लोगों के सामने चूल्हा कैसे जलेगा, यह बड़ा सवाल बन गया है। उधर जारी एडवाइजरी में बताया गया है कि एजेंसी में जाकर उपभोक्ता नंबर से कारण पता करें। कई बार ई-केवाईसी पूरी होने के बाद भी PNG रिकॉर्ड में गड़बड़ी से कनेक्शन ब्लॉक रहता है। ये दोनों प्रक्रियाएं अलग-अलग हैं। यदि आपकी कॉलोनी में PNG लाइन नहीं है, तो संबंधित एजेंसी को लिखित में आवेदन दें और दोबारा केवाईसी कराएं। इसके बाद एजेंसी से मौके पर जांच कराने की मांग करें। यदि सुनवाई नहीं होती है तो गैस कंपनी की वेबसाइट या टोल-फ्री नंबर पर शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
इस मामले को लेकर अब सियासत भी जमकर बोल रही है। पूर्व मंत्री पीपी शर्मा ने कहा कि सरकार की गलत नीतियों के खिलाफ लोगों का गुस्सा बढ़ता जा रहा है। महंगाई के साथ असुविधाओं को बढ़ाया जा रहा है। सरकार की गलत नीति के चलते ही बड़ा संकट खड़ा हो गया है। मामले पर भाजपा प्रदेश प्रवक्ता पवन दुबे ने कहा कि कांग्रेस मामले पर सियासत कर रही है। कई बार समस्याएं होती है जिनका समाधान भी अपने स्तर पर निकाला जाता है। इस समस्या का भी समाधान निकाला जा रहा है।
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ट्रेन में यात्रियों से अवैध वसूली करने वाले 3 किन्नर गिरफ्तारः आरपीएफ ने की कार्रवाई
जबलपुर। मध्य प्रदेश के जबलपुर में रेल यात्रियों की सुरक्षा और सुगम सफर को लेकर रेलवे सुरक्षा बल (RPF) ने सख्ती बढ़ा दी है। आरपीएफ ने ‘ऑपरेशन यात्री सुरक्षा’ के तहत कार्रवाई करते हुए ट्रेनों में यात्रियों से जबरन पैसे वसूलने (अवैध वसूली) और न्यूसेंस फैलाने वाले तीन किन्नरों को रंगे हाथों गिरफ्तार किया है।
घटना उस वक्त सामने आई जब ट्रेन संख्या 11401 इटारसी स्टेशन के आउटर पर रुकी थी। इसी दौरान ये किन्नर ट्रेन के डिब्बों में दाखिल हुए और यात्रियों से जबरन पैसों की मांग करने लगे। यात्रियों द्वारा विरोध करने और शिकायत मिलने पर आरपीएफ ने त्वरित एक्शन लेते हुए तीनों आरोपियों को हिरासत में ले लिया।
गिरफ्तार आरोपियों के नाम:
पुलिस द्वारा पकड़े गए तीनों आरोपी किन्नर इटारसी के ही रहने वाले हैं, जिनकी पहचान इस प्रकार है:
बबली (उम्र 35 वर्ष), निवासी- नाला मोहल्ला, इटारसी।
काली (उम्र 45 वर्ष), निवासी- नाला मोहल्ला, इटारसी।
गंगा (उम्र 48 वर्ष), निवासी- नाला मोहल्ला, इटारसी।
आरपीएफ ने तीनों आरोपियों के खिलाफ रेलवे अधिनियम और संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। अधिकारियों का कहना है कि ट्रेनों में यात्रियों को परेशान करने और अवैध वसूली करने वालों के खिलाफ आगे भी इस तरह की सख्त कार्रवाई लगातार जारी रहेगी, ताकि यात्रियों का सफर सुरक्षित और सुगम हो सके।

नागौर। राजस्थान के नागौर जिले के मेड़ता क्षेत्र से कुदरत का एक ऐसा अनोखा मामला सामने आया है, जिसे देखकर हर कोई हैरान है। करीब सवा साल (1 साल, 2 महीने और 21 दिन) पहले एक हादसे में जान गंवाने वाले दो घनिष्ठ दोस्तों का एक ही दिन पुनर्निमाण/पुनर्जन्म के रूप में नए जीवन की शुरुआत माना जा रहा है। इस अद्भुत संयोग ने दोनों शोक संतप्त परिवारों के साथ-साथ पूरे इलाके में खुशी की लहर दौड़ा दी है।
यह पूरी घटना मेड़ता के पास स्थित मोकलपुर और सातलावास गांवों से जुड़ी है। 14 जुलाई 2025 को नरेंद्र बेड़ा और नरेंद्र मुंवाल अपने एक अन्य साथी प्रदीप विश्नोई के साथ चित्तौड़गढ़ के निलिया महादेव झरने में पिकनिक मनाने गए थे। इस दौरान अचानक हुए हादसे में तीनों दोस्त झरने में डूब गए और उनकी असमय मृत्यु हो गई।
हादसे के बाद नरेंद्र बेड़ा का पार्थिव शरीर उसी दिन मिल गया था, जिसके बाद 14 जुलाई को ही उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया। वहीं दूसरे दोस्त नरेंद्र मुंवाल का शव लगभग 12 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद मिला, जिससे उनका अंतिम संस्कार अगले दिन हो सका।
प्रकृति का अनोखा करिश्मा देखिए कि नरेंद्र बेड़ा की मां ने जिस समय नवजात को जन्म दिया, उसके ठीक 12 घंटे बाद नरेंद्र मुंवाल की मां की गोद भी बच्चे की किलकारी से गूंज उठी। दोनों परिवारों में महज 12 घंटे के अंतराल पर पुत्रों का जन्म हुआ है, जिसे ग्रामीण और परिजन दोनों दोस्तों का पुनर्जन्म मान रहे हैं।
हादसे से पहले दोनों माताओं ने नसबंदी का ऑपरेशन करवा लिया था। लेकिन अपने जवान बेटों को खोने के गहरे सदमे के बाद दोनों माताओं ने नसबंदी खुलवाने (ट्यूबेक्टमी रिवर्सल) का साहसिक फैसला लिया। हादसे के ठीक 1 साल, 2 महीने और 21 दिन बाद जब दोनों घरों में नन्हे मेहमानों ने कदम रखा, तो दोनों माताओं के चेहरे खिल उठे। इस अद्भुत संयोग की चर्चा अब पूरे क्षेत्र में हो रही है।
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बेंगलुरु में CJP का अनोखा प्रदर्शन, चुनाव आयोग के खिलाफ उठी जवाबदेही की मांग
बेंगलुरु.मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर चुनाव आयोग के खिलाफ विपक्षी खेमे की नाराजगी लगातार बढ़ती नजर आ रही है. देश के अलग-अलग हिस्सों में इस मुद्दे पर विरोध-प्रदर्शन किए जा रहे हैं. इसी कड़ी में बेंगलुरु में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की ओर से अलग अंदाज में प्रदर्शन किया गया.
प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने चप्पलें हाथ में लेकर अपना विरोध दर्ज कराया. सोशल मीडिया पर सामने आई तस्वीरों में यूट्यूबर ध्रुव राठी की मौजूदगी भी दिखाई दी. प्रदर्शनकारियों ने चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग उठाई.
CJP नेता सौरभ दास ने प्रदर्शन से जुड़ी तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा कीं. उन्होंने कहा कि चुनाव प्रक्रिया को लेकर लोगों के मन में उठ रहे सवालों का जवाब मिलना जरूरी है. पार्टी का दावा है कि मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर नागरिकों की चिंताएं कई शहरों में सामने आ रही हैं.
पार्टी नेताओं के मुताबिक, विरोध का उद्देश्य चुनाव व्यवस्था में जवाबदेही और पारदर्शिता को लेकर अपनी बात सार्वजनिक तौर पर रखना है.
दिल्ली के जंतर-मंतर पर 10 अक्टूबर को प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर भी राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं. CJP नेता आशुतोष रांका ने दावा किया है कि उनका प्रस्तावित आंदोलन शांतिपूर्ण रहेगा.
रांका ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन को प्रभावित करने के लिए विभिन्न क्षेत्रों से दक्षिणपंथी संगठनों से जुड़े लोगों को जुटाने की कोशिश की जा रही है. हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है.
CJP की ओर से यह भी आरोप लगाया गया है कि उसके कुछ कार्यकर्ताओं और स्वयंसेवकों को प्रस्तावित प्रदर्शन में शामिल होने से रोकने के लिए हिरासत में लिया जा रहा है. पार्टी का दावा है कि अलग-अलग राज्यों में उसके समर्थकों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है.
पार्टी नेताओं का कहना है कि यदि प्रदर्शनकारियों को रोकने की कोशिश की गई तो इससे आंदोलन को लेकर लोगों की नाराजगी और बढ़ सकती है.
हालांकि, हिरासत से जुड़े इन दावों पर संबंधित पुलिस या प्रशासन की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है. ऐसे में इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है.
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर विपक्षी दल लगातार चुनाव आयोग पर सवाल उठा रहे हैं. पटना से लेकर दिल्ली और अब बेंगलुरु तक इस मुद्दे पर राजनीतिक गतिविधियां देखने को मिल रही हैं. 10 अक्टूबर को होने वाले प्रस्तावित प्रदर्शन को देखते हुए आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सियासी टकराव और बढ़ने की संभावना है.
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ज्ञानेश कुमार सहित तीन चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती, प्रक्रिया पर उठे सवाल
सुप्रीम कोर्ट में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू तथा विवेक जोशी की नियुक्तियों को चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ता सूरी पसाला ने इन नियुक्तियों की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि इसमें मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा की शर्तें और कार्यकाल) अधिनियम, 2023 के प्रावधानों और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन नहीं किया गया।
याचिका में 14 मार्च 2024 की उस अधिसूचना को चुनौती दी गई है जिसके जरिए ज्ञानेश कुमार और सुखबीर सिंह संधू को चुनाव आयुक्त नियुक्त किया गया था। इसके साथ ही फरवरी 2025 में ज्ञानेश कुमार को मुख्य चुनाव आयुक्त और विवेक जोशी को चुनाव आयुक्त बनाए जाने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए गए हैं।
याचिकाकर्ता ने खास तौर पर 2024 में हुई नियुक्तियों के दौरान खोज समिति की ओर से तैयार किए गए नामों के पैनल को लेकर आपत्ति जताई है। याचिका के मुताबिक उस समय चुनाव आयुक्त के दो पद खाली थे। कानून में हर रिक्त पद के लिए पांच नामों का पैनल तैयार किए जाने का प्रावधान है। इस हिसाब से 10 नाम होने चाहिए थे लेकिन खोज समिति ने चयन समिति के सामने सिर्फ छह नाम रखे।
याचिका में 22 मार्च 2024 के सुप्रीम कोर्ट के आदेश का भी हवाला दिया गया है। इसमें नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर अदालत के सामने यह बात आई थी कि चयन समिति के सदस्यों को उम्मीदवारों से जुड़ी पूरी जानकारी पर्याप्त समय पहले मिलनी चाहिए। याचिकाकर्ता का आरोप है कि 14 मार्च 2024 को खोज समिति ने छह नामों की सिफारिश की और उसी दिन चयन समिति ने ज्ञानेश कुमार और सुखबीर सिंह संधू के नामों को मंजूरी दे दी।
इस याचिका में नियुक्तियों के लिए तय पात्रता को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। 2023 के कानून के मुताबिक चुनाव आयुक्त के पद पर नियुक्ति के लिए ऐसे व्यक्ति पात्र हैं, जो भारत सरकार में सचिव या समकक्ष पद पर रह चुके हों और जिन्हें चुनावों के प्रबंधन और संचालन का पर्याप्त ज्ञान एवं अनुभव हो। याचिकाकर्ता ने दावा किया है कि तीनों नियुक्तियों में इन प्रावधानों का पालन हुआ या नहीं, इसकी जांच की जानी चाहिए।
सूरी पसाला ने सुप्रीम कोर्ट से नियुक्तियों से जुड़ी खोज समिति और चयन समिति के रिकॉर्ड मंगाने की मांग की है। याचिका में तीनों अधिकारियों के खिलाफ क्वो वारंटो की रिट जारी करने की मांग की गई है। इसके तहत अदालत किसी व्यक्ति से यह स्पष्ट करने को कह सकती है कि वह किस कानूनी अधिकार के तहत किसी सार्वजनिक पद पर बना हुआ है।

 

जबलपुर. एमपी की संस्कारधानी जबलपुर के रक्षा मंत्रालय की व्हीकल फैक्ट्री (व्हीएफजे) के पास एक संदिग्ध युवक पाया गया. स्थानीय लोगों ने उसकी हरकतों को देखकर उसे पकड़ लिया और पुलिस को सूचना दी. स्थानीय लोगों का दावा है कि, पूछताछ के बाद युवक ने बताया कि, वह पाकिस्तान के रावलपिंडी का रहने वाला है और भारत में बाघा बॉर्डर से आया था. उसने बताया कि, उसके साथ 11 और लोग भारत आए हैं. पुलिस ने उसे पकड़ लिया है और उसका मेडिकल टेस्ट करवाया जाएगा. इसके बाद उससे पूछता शुरू की जाएगी.
जबलपुर के रांझी में सतपुला ब्रिज के पास रक्षा मंत्रालय की व्हीकल फैक्ट्री है. व्हीकल फैक्ट्री की कॉलोनी में एक मंदिर है. आज बुधवार सुबह मॉर्निंग वॉक करने वाले लोगों ने देखा कि मंदिर के पास एक लड़का बैठा हुआ है और उसकी गतिविधियां कुछ ठीक नहीं लग रही हैं. मौके पर मौजूद एडवोकेट आशीष प्रजापति ने उसका वीडियो भी बनाया.
सतपुला के रहने वाले सचिन विश्वकर्मा ने बताया कि, जब हमने इससे पूछताछ की तो उसने बताया कि, वह पाकिस्तान के रावलपिंडी का रहने वाला है और भारत में वह कराची से होता हुआ बाघा बॉर्डर क्रॉस करके आया है. सचिन ने बताया कि, उसने यह स्वीकार किया है कि उसके साथ 11 और लोग आए हैं जब स्थानीय लोगों को इस बात की पूरी तसदीक हो गई की यह विदेशी है और गलत ढंग से भारत में आया है तब उन्होंने पुलिस को सूचना दी.
मौके पर पहुंचे जबलपुर के रांझी पुलिस के एएसआई सीताराम ने लड़के की गतिविधियों को संदिग्ध मानते हुए उसे हिरासत में ले लिया है. सीताराम का कहना है कि, हम सबसे पहले उसका मेडिकल टेस्ट करवाएंगे. क्योंकि ऐसा लग रहा है कि वह बीमार है फिर उससे पूछताछ की जाएगी कि आखिर वह पाकिस्तान से भारत क्यों आया है. दरअसल, उसका जबलपुर के रक्षा मंत्रालय के फैक्ट्री के पास पाया जाना भी उसे और संदिग्ध बना देता है. क्योंकि जबलपुर की इन फैक्ट्री में भारतीय सेना के लिए जरूरत के सामान बनाए जाते हैं और यहां पर किसी भी संदिग्ध को आने जाने की अनुमति नहीं है. ऐसी स्थिति में उसकी फैक्ट्री के पास पाया जाना और भी सवाल खड़े करता है.
जबलपुर के इस क्षेत्र में पहले भी पाकिस्तानियों की आने की सूचनाओं मिलती रही है. भारत-पाकिस्तान के संबंध हमेशा ही ठीक नहीं रहे हैं. इसलिए किसी पाकिस्तान का बिना अनुमति इस तरह भारत की केंद्र तक पहुंचाना संदिग्ध है. अब सवाल यह भी उठता है कि यह बाघा बॉर्डर में कैसे प्रवेश कर गया फिर यह बॉर्डर से लेकर लगभग डेढ़ हजार किलोमीटर दूर जबलपुर तक कैसे पहुंच गया. इस बीच में किसी ने रोका क्यों नहीं और इसकी जांच क्यों नहीं की गई.

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फर्नीचर फैक्ट्री में धधकी आग, 5-6 करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान, दमकलें आग बुझाने में जुटीं
नीमच में आज बुधवार अचानक एक फर्नीचर फैक्ट्री में आग धधक उठी, देखते ही देखते आग ने विकराल रूप ले लिया, सूचना पर पहुंचीं फायर ब्रिगेड की गाड़ियों ने आग पर काबू करने का प्रयास शुरू किया, आग से फैक्ट्री में रखा फर्नीचर जलकर ख़ाक हो गया, फैक्ट्री संचालक ने करीब 5-6 करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान जताया है। आग लगने का स्पष्ट कारण तो जाँच के बाद मालूम चल सकेगा लेकिन फैक्ट्री संचालक ने शॉर्ट सर्किट होने का अनुमान जताया हैं।
नीमच के पीजी कॉलेज के पीछे कृषि विज्ञान केंद्र के पास स्थित DV Distribution Services की फर्नीचर फैक्ट्री में दोपहर करीब 12:30 बजे भीषण आग लग गई। आग इतनी विकराल थी कि देखते ही देखते फैक्ट्री का बड़ा हिस्सा चपेट में आ गया। फैक्ट्री स्टाफ ने आसपास के लोगों की मदद से आग पर काबू पाने का प्रयास किया और फायर ब्रिगेड को सूचना दी।
सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की चार गाड़ियाँ मौके पर पहुंची चूँकि फैक्ट्री बड़े हिस्से में फैली थी और आग चारों तरफ फ़ैल चुकी थी इसलिए दीवारों को तोड़ने में बहुत मशक्कत करनी पड़ी उसके बाद पानी की धार आग पर पहुंचाई गई, सूचना मिलते ही कुछ देर पहले ही फैक्ट्री से गए संचालक वापस लौटे।
मीडिया से बात करते हुए फैक्ट्री संचालक दीपक भंडारी ने बताया की वे जब यहाँ से गए तब सबकुछ ठीक ठाक था अचानक आग कैसे लगी समझ नहीं आ रहा उन्होंने शॉर्ट सर्किट होने की आशंका जताई है, भंडारी के मुताबिक फैक्ट्री में करीब 2 से 2.5 करोड़ रुपये का तैयार स्टॉक था और लगभग 3 करोड़ रुपये की मशीनरी थी। करीब 30 हजार वर्गफीट का शेड भी आग की चपेट में आकर लगभग पूरी तरह ध्वस्त हो गया। संचालक ने कुल नुकसान 5 से 6 करोड़ रुपये तक होने का अनुमान बताया है। आग लगने की वजह फिलहाल स्पष्ट नहीं है, हालांकि संचालक ने शॉर्ट सर्किट की आशंका जताई है।
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इंदौर से चलता था साइबर ठगों का ‘APK कारखाना’! 2900 से ज्यादा फर्जी ऐप बनाकर देशभर में भेजे, मुंबई क्राइम ब्रांच ने दबोचा
इंदौर। साइबर ठगी के खिलाफ चल रही कार्रवाई में इंदौर से एक ऐसे नेटवर्क का खुलासा हुआ है, जिसने देशभर के साइबर ठगों को ठगी के लिए तैयार APK फाइलें उपलब्ध कराईं। खजराना थाना पुलिस और मुंबई महाराष्ट्र क्राइम ब्रांच की संयुक्त कार्रवाई में पंकज पिता अवधेश गुप्ता को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के मुताबिक आरोपी इंदौर में रहकर साइबर ठगों के लिए फर्जी एप तैयार करता और उन्हें उपलब्ध कराता था। मुंबई क्राइम ब्रांच की जांच में दावा किया गया है कि आरोपी ने करीब 2,905 APK फाइलें साइबर ठगी करने वाले गिरोहों को बेचीं। इन फाइलों के जरिए देशभर में करीब 9,673 लोगों को निशाना बनाए जाने की जानकारी सामने आई है। अब तक करीब 15.75 करोड़ रुपये की ठगी का पता चल चुका है। पुलिस को आशंका है कि वास्तविक ठगी की रकम इससे कहीं ज्यादा हो सकती है। आरोही पंकज मुल्तान नागदा का रहने वाला है।
जांच में सामने आया है कि पंकज ने इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी नहीं की और बीच में पढ़ाई छोड़ दी थी। शुरुआत में वह गेमिंग ऐप तैयार करने का काम करता था। इसी दौरान उसने APK फाइल बनाने की तकनीक सीखी।बाद में उसका संपर्क साइबर ठगी करने वाले लोगों से हुआ और कथित तौर पर उसने इसी तकनीकी जानकारी को ठगी के लिए इस्तेमाल होने वाले ऐप बनाने में लगा दिया।पुलिस के अनुसार वह करीब तीन साल से साइबर ठगों को ऐसे ऐप उपलब्ध करा रहा था।
पूछताछ में आरोपी ने साइबर ठगी के एक तरीके के बारे में भी जानकारी दी है। साइबर ठग खुद को कभी SBI, HDFC या किसी अन्य बैंक का अधिकारी या मैनेजर बताकर लोगों से संपर्क करते थे।लोगों को कहा जाता था कि उनकी KYC बंद हो गई है या बैंक खाता जल्द बंद हो सकता है। इसके बाद उन्हें KYC अपडेट करने के नाम पर फर्जी लिंक या APK भेजी जाती थी।कई मामलों में QR कोड के जरिए भी लोगों को जाल में फंसाने की बात सामने आई है।
साइबर ठग कभी-कभी लोगों से कहते थे कि QR कोड पर 5 भेजकर अपना बैलेंस चेक कर लें। जैसे ही पीड़ित बताए गए तरीके से प्रक्रिया पूरी करता, उसके मोबाइल और बैंकिंग से जुड़ी संवेदनशील जानकारी तक पहुंच बनाने की कोशिश की जाती थी।इसके बाद खाते से रकम निकालने या दूसरे खातों में ट्रांसफर करने का खेल शुरू हो जाता था।यानी 5 का भरोसा और उसके बाद खाते से लाखों रुपये गायब।
पुलिस के मुताबिक पंकज खुद हर पीड़ित को फोन करके ठगी नहीं करता था। उसका कथित काम साइबर ठगों के लिए फर्जी APK तैयार करना था।इन APK को अलग-अलग सरकारी सेवाओं, बैंकिंग प्रक्रियाओं और वेरिफिकेशन के नाम दिए जाते थे, ताकि आम व्यक्ति उन्हें देखकर भरोसा कर ले।
इन नामों के पीछे छिपी APK फाइलों का इस्तेमाल कथित तौर पर लोगों को गुमराह करने और उनके मोबाइल से संवेदनशील जानकारी हासिल करने के लिए किया जाता था।
मुंबई क्राइम ब्रांच की जांच के अनुसार आरोपी से जुड़े नेटवर्क ने करीब 2,905 APK फाइलें साइबर ठग गिरोहों को उपलब्ध कराईं। इनका इस्तेमाल कर करीब 9,673 लोगों को निशाना बनाए जाने की जानकारी सामने आई है।अब तक करीब ₹15.75 करोड़ की साइबर ठगी सामने आने का दावा किया गया है।जांच एजेंसी को आशंका है कि यह आंकड़ा अंतिम नहीं है और नेटवर्क की पूरी जांच के बाद ठगी की रकम और पीड़ितों की संख्या बढ़ सकती है।
इस कार्रवाई ने इंदौर में बैठे साइबर अपराध के एक अलग नेटवर्क की तस्वीर सामने रख दी है। आमतौर पर साइबर ठगी में फोन करने वाले ठग, बैंक खाते उपलब्ध कराने वाले लोग और रकम निकालने वाले गिरोह सामने आते हैं।लेकिन इस मामले में ठगी के लिए इस्तेमाल होने वाले तकनीकी हथियार तैयार करने वाले व्यक्ति तक पुलिस पहुंची है।यही वजह है कि जांच अब केवल पंकज तक सीमित नहीं रहने वाली। पुलिस उन लोगों की तलाश भी कर रही है, जिन्होंने उससे APK खरीदीं और आगे उनका इस्तेमाल साइबर अपराध में किया।
पुलिस की जांच से सामने आए इस तरीके के बाद आम लोगों के लिए सबसे बड़ी चेतावनी है—WhatsApp या SMS के जरिए आई किसी अनजान APK फाइल को डाउनलोड न करें।अगर कोई फाइल बैंक KYC, पेंशन, चालान, क्रेडिट कार्ड, सरकारी योजना या किसी वेरिफिकेशन के नाम पर भेजी जाए तो उस पर भरोसा न करें।
यह मामला सिर्फ एक आरोपी की गिरफ्तारी नहीं, बल्कि साइबर अपराध के बदलते तरीके की तस्वीर भी सामने लाता है। अब ठगों को खुद तकनीकी ऐप बनाने की जरूरत नहीं- ऐसे लोग उनके लिए फर्जी ऐप तैयार कर उपलब्ध करा रहे हैं। इंदौर से पकड़े गए आरोपी से पूछताछ के बाद अब पुलिस की नजर उन साइबर गिरोहों तक पहुंचने पर है, जिन्होंने इन APK फाइलों का इस्तेमाल किया। 2,905 APK, 9,673 संभावित पीड़ित और 15.75 करोड़ की सामने आई ठगी- इन आंकड़ों ने साइबर अपराध के उस नेटवर्क की गंभीरता जरूर उजागर कर दी है, जिसका अगला सिरा अब देशभर के ठग गिरोहों तक पहुंच सकता है।

ग्वालियर। ग्वालियर से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है।जहां शिवपुरी से पत्नी को लेकर फूलबाग स्तिथ चिड़ियाघर घूमने आया पति,उसे गेट पर छोड़कर बाइक पार्क करने गया,लेकिन वापस लौटा तो पत्नी गायब थी। तलाश की तो पत्नी एक युवक की बाइक पर बैठकर जाती दिखाई दी।पूरी घटना गांधी प्राणी उद्यान के गेट पर लगे CCTV कैमरे में कैद हुई है। पति ने पत्नी के एक युवक के साथ जाने का शक जताते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है।पुलिस ने मामला दर्ज कर महिला की तलाश शुरू कर दी है।
दरअसल मामला पड़ाव थाना क्षेत्र के फूलबाग स्थित गांधी प्राणी उद्यान चिड़ियाघर का है। शिवपुरी जिले के कांकर निवासी 21 वर्षीय करन रजक ने पुलिस को बताया कि उसकी शादी 5 मई 2026 को सुहाना रजक से हुई थी। करन के मुताबिक, वह पत्नी के साथ बाइक से ग्वालियर में रहने वाले रिश्तेदारों के यहां आया था। रास्ते में पत्नी ने पहले चिड़ियाघर घूमने और उसके बाद रिश्तेदारों के घर जाने की इच्छा जताई। पत्नी की बात मानकर करन उसे लेकर गांधी प्राणी उद्यान पहुंचा। यहां मेन गेट के पास पत्नी को छोड़कर वह बाइक पार्किंग में खड़ी करने चला गया,लेकिन जब वह वापस लौटा तो पत्नी वहां नहीं थी। आसपास तलाश करने के बाद भी जब उसका पता नहीं चला तो पति ने उसकी खोज शुरू की। इसी दौरान उसे पत्नी एक युवक की बाइक पर बैठकर जाती हुई नजर आई।
घटना की जानकारी मिलने के बाद पड़ाव थाना पुलिस ने चिड़ियाघर और आसपास लगे CCTV कैमरों के फुटेज खंगाले,फुटेज में एक महिला बाइक सवार युवक के साथ जाती हुई दिखाई दे रही है। पति ने आशंका जताई है कि उसकी पत्नी अरमान खान नाम के युवक के साथ गई है। काफी तलाश के बाद भी पत्नी का कोई सुराग नहीं मिलने पर करन पड़ाव थाने पहुंचा और नामजद शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने पति की शिकायत पर मामला दर्ज कर महिला की तलाश शुरू कर दी है। CCTV फुटेज के आधार पर बाइक सवार युवक की पहचान करने की कोशिश की जा रही है। हालांकि महिला अपनी मर्जी से गई है या उसके साथ किसी तरह की घटना हुई है। इसका खुलासा महिला के मिलने के बाद ही हो सकेगा।फिलहाल पुलिस CCTV फुटेज और अन्य सुरागों के आधार पर महिला और उसके साथ नजर आ रहे युवक की तलाश में जुटी है।
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पुलिस यूनिफॉर्म में बदमाश की शादी में जाना पड़ा भारी, सब इंस्पेक्टर और ASI को किया तत्काल सस्पेंड
भोपाल। ड्यूटी के दौरान पुलिस वर्दी पहनकर निजी कार्यक्रम में शामिल होना कजलीखेड़ा थाने के दो पुलिसकर्मियों को भारी पड़ गया है। इंटरनेट मीडिया के अलग-अलग माध्यमों पर तस्वीरें वायरल होने के बाद पुलिस महकमे ने बड़ी कार्रवाई करते हुए उप निरीक्षक श्रीकांत द्विवेदी और सहायक उप निरीक्षक गदीश रघुवंशी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
हाल ही में दोनों पुलिसकर्मी थाना क्षेत्र के एक निगरानी बदमाश की शादी में ऑन-ड्यूटी वर्दी पहनकर शामिल हुए थे। इंटरनेट मीडिया पर इनकी तस्वीरें वायरल होने के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया था। मामले का संज्ञान लेते हुए पुलिस उपायुक्त (जोन-04) आदर्शकांत शुक्ला ने इसे घोर अनुशासनहीनता, अशोभनीय और संदेहस्पद आचरण माना। यह कृत्य पुलिस रेगुलेशन के पैरा-64 में उल्लेखित सेवा की सामान्य शर्तों का स्पष्ट उल्लंघन है।
कार्रवाई के तहत दोनों अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर सहायक पुलिस आयुक्त कार्यालय, चूनाभट्टी, भोपाल से संबद्ध कर दिया गया है। निलंबन अवधि के दौरान उन्हें नियमानुसार वेतन-भत्तों की पात्रता होगी।
पुलिस उपायुक्त ने इस प्रकरण की प्राथमिक जांच के निर्देश भी दिए हैं। सहायक पुलिस आयुक्त (चूनाभट्टी) को मामले की विस्तृत जांच कर 7 दिवस के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के आदेश दिए गए हैं।गौरतलब है कि पिछले डेढ़ माह के दौरान भोपाल में कजलीखेड़ा, बजरिया और कोतवाली समेत एक दर्जन से अधिक पुलिसकर्मियों पर इस तरह की अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा चुकी है।
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निजी अस्पतालों ने निकाली एम्बुलेंस रैली, ‘आयुष्मान योजना’ के बहिष्कार की चेतावनी, दिल्ली कूच की तैयारी
भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में निजी अस्पताल संचालकों ने आयुष्मान भारत योजना का बकाया भुगतान न मिहने से नाराज होकर मोर्चा खोल दिया है। निजी अस्पतालों ने सड़कों पर एम्बुलेंस रैली निकाली और उग्र प्रदर्शन किया। एम्बुलेंसों के साथ-साथ अस्पतालों के बाहर भी आयुष्मान योजना बंद के पोस्टर चिपका दिए गए हैं। अस्पताल संचालकों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि उनकी समस्याओं का समाधान जल्द नहीं हुआ तो वे इस योजना का पूरी तरह बहिष्कार कर देंगे।
दरअसल मध्य प्रदेश के निजी अस्पताल संचालकों का लंबे समय से आयुष्मान योजना के तहत किए गए इलाज का भुगतान अटका हुआ है। अस्पताल संचालकों का आरोप है कि राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण द्वारा कई क्लेम बिना वजह रिजेक्ट किए जा रहे हैं या फिर स्वीकृत क्लेम की राशि में भारी कटौती की जा रही है। इसके अलावा NABH की अनिवार्यता, प्री-ऑथराइजेशन के बाद क्लेम सेटलमेंट की जटिल प्रक्रिया, टीएटी, ऑथेंटिकेशन और अन्य तकनीकी खामियों को लेकर भी अस्पताल संचालकों में भारी असंतोष है।
अस्पताल संचालकों ने सरकार और प्रशासन को स्पष्ट अल्टीमेटम देते हुए कहा है कि यदि 8 अक्टूबर तक उनकी समस्याओं का कोई ठोस और स्थायी समाधान नहीं निकाला गया, तो वे आयुष्मान भारत योजना का अनिश्चितकालीन बहिष्कार शुरू कर देंगे। यही नहीं, अपनी आवाज केंद्र सरकार तक पहुंचाने के लिए प्रदेशभर के अस्पताल संचालक करीब 1,000 एम्बुलेंसों के काफिले के साथ दिल्ली कूच करेंगे और प्रधानमंत्री कार्यालय तक अपनी मांगें पहुंचाएंगे।

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नागौर। राजस्थान के नागौर जिले के मेड़ता क्षेत्र से कुदरत का एक ऐसा अनोखा मामला सामने आया है, जिसे देखकर हर कोई हैरान है। करीब सवा साल (1 साल, 2 महीने और 21 दिन) पहले एक हादसे में जान गंवाने वाले दो घनिष्ठ दोस्तों का एक ही दिन पुनर्निमाण/पुनर्जन्म के रूप में नए जीवन की शुरुआत माना जा रहा है। इस अद्भुत संयोग ने दोनों शोक संतप्त परिवारों के साथ-साथ पूरे इलाके में खुशी की लहर दौड़ा दी है।यह पूरी घटना मेड़ता के पास स्थित मोकलपुर और सातलावास गांवों...

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गरिमा के जन्म के 15 मिनिट बाद का फोटो
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गरिमा के 1 वर्ष बाद का फोटो
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गरिमा के 2 वर्ष बाद का फोटो
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बीमार होने के बाद भोपाल अस्पताल मे भर्ती गरिमा
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हाई कोर्ट के आदेश के बाद गरिमा के शव को जमीन से निकालते हुऐ
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निकालने के बाद गरिमा के शव को पैक कर जॉच के लिऐ भेजा गया
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दोषी डॉक्टर के खिलाफ मामला कायम कराने के लिऐ पुलिस अधिक्षक से मिले पत्रकार
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गरिमा के शव की जॉच होने के बाद पुनः उसी स्थान पर चबूतरा का निर्माण किया गया
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पूजा स्थल मे गरिमा
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