


मध्य प्रदेश में बाइक टैक्सी सेवाएं चलाने वाली कंपनियां ओला, उबर और रेपिडो अब कानूनी घेरे में आ गई हैं। इंदौर हाईकोर्ट ने इन सेवाओं के संचालन और यात्री सुरक्षा से जुड़े गंभीर आरोपों पर सख्त रुख अपनाते हुए केंद्र सरकार, राज्य सरकार और संबंधित कंपनियों सहित कुल 10 पक्षों को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने सभी से चार सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है।
यह मामला एक जनहित याचिका (PIL) के जरिए हाईकोर्ट के सामने आया। याचिका में आरोप लगाया गया कि इंदौर और आसपास के क्षेत्रों में बाइक टैक्सी सेवाएं बिना उचित परमिट और नियमों का पालन किए संचालित की जा रही हैं। इससे न केवल मोटर व्हीकल एक्ट का उल्लंघन हो रहा है, बल्कि यात्रियों की सुरक्षा भी खतरे में पड़ रही है। याचिका में यह भी कहा गया कि इन कंपनियों के प्लेटफॉर्म के जरिए निजी दोपहिया वाहनों को व्यावसायिक रूप से उपयोग में लाया जा रहा है, जबकि इसके लिए जरूरी परमिट और नियमों का पालन कई मामलों में नहीं किया जा रहा।
मामले की सुनवाई के दौरान इंदौर हाईकोर्ट ने इस स्थिति पर गंभीर चिंता जताई। कोर्ट ने कहा कि यदि यात्री परिवहन से जुड़ी सेवाएं बिना स्पष्ट नियमों और सुरक्षा प्रावधानों के संचालित हो रही हैं, तो यह कानून और आम लोगों की सुरक्षा दोनों के लिए चिंता का विषय है। कोर्ट ने केंद्र सरकार, मध्य प्रदेश सरकार, परिवहन विभाग और बाइक टैक्सी सेवाएं संचालित करने वाली कंपनियों को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए पूछा है कि आखिर इन सेवाओं को किस आधार पर संचालित किया जा रहा है और क्या इनके पास आवश्यक अनुमति है या नहीं।
याचिका में यह भी मुद्दा उठाया गया कि बाइक टैक्सी सेवाओं में यात्रियों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं। कई मामलों में हेलमेट की व्यवस्था नहीं होती, ड्राइवरों का सत्यापन स्पष्ट नहीं होता और दुर्घटना की स्थिति में जिम्मेदारी तय करना भी मुश्किल हो जाता है। इसके अलावा यह भी कहा गया कि बिना उचित नियमों के ऐसे प्लेटफॉर्म चलने से सड़क सुरक्षा और बीमा से जुड़े कई सवाल भी खड़े होते हैं।
हाईकोर्ट ने सभी संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर चार सप्ताह के भीतर विस्तृत जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट यह जानना चाहता है कि इन सेवाओं के संचालन को लेकर सरकार की क्या नीति है और क्या कंपनियां मोटर व्हीकल एक्ट और अन्य नियमों का पालन कर रही हैं या नहीं।
मध्य प्रदेश के रायसेन में स्थित ऐतिहासिक रायसेन किला से तोप चलाने का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में कुछ युवक किले की पहाड़ी पर खड़े दिखाई दे रहे हैं और कथित तौर पर ईरान के समर्थन में नारे लगाते हुए तोप चलाते नजर आ रहे हैं। इस वीडियो को लेकर प्रशासन सतर्क हो गया है और मामले की जांच शुरू कर दी गई है।
इस वीडियो को लेकर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि रायसेन के संरक्षित किले से आबादी वाले इलाके की ओर देसी तोप चलाना लोगों की सुरक्षा के लिए खतरा हो सकता है।
उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि यदि यह अवैध तरीके से किया गया है तो संबंधित लोगों के खिलाफ गैरकानूनी हथियार बनाने, दहशत फैलाने और ऐतिहासिक धरोहर को नुकसान पहुंचाने जैसे मामलों में कार्रवाई की जानी चाहिए।
वायरल वीडियो में चार युवक रायसेन किले की ऊंचाई पर खड़े दिखाई देते हैं। नारे लगाने के बाद उनमें से एक युवक तोप के पास जाता है और माचिस से उसमें आग लगा देता है। कुछ ही पल बाद जोरदार धमाके के साथ तोप चलती है और आसपास का इलाका धुएं से भर जाता है। वीडियो में किले की पहाड़ी से नीचे पूरा शहर दिखाई दे रहा है।
मामले को लेकर रायसेन के तहसीलदार भरत मांडरे ने बताया कि उन्हें वायरल वीडियो की जानकारी मिली है। उन्होंने इस संबंध में पुलिस को सूचित कर दिया है और जांच के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल प्रशासन यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि वीडियो कब का है और किन परिस्थितियों में तोप चलाई गई थी।
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बाइक टैक्सी पर हाईकोर्ट सख्त: Ola, Uber और Rapido को नोटिस, मांगा जवाब
मध्य प्रदेश में बाइक टैक्सी सेवाएं चलाने वाली कंपनियां ओला, उबर और रेपिडो अब कानूनी घेरे में आ गई हैं। इंदौर हाईकोर्ट ने इन सेवाओं के संचालन और यात्री सुरक्षा से जुड़े गंभीर आरोपों पर सख्त रुख अपनाते हुए केंद्र सरकार, राज्य सरकार और संबंधित कंपनियों सहित कुल 10 पक्षों को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने सभी से चार सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है।
यह मामला एक जनहित याचिका (PIL) के जरिए हाईकोर्ट के सामने आया। याचिका में आरोप लगाया गया कि इंदौर और आसपास के क्षेत्रों में बाइक टैक्सी सेवाएं बिना उचित परमिट और नियमों का पालन किए संचालित की जा रही हैं। इससे न केवल मोटर व्हीकल एक्ट का उल्लंघन हो रहा है, बल्कि यात्रियों की सुरक्षा भी खतरे में पड़ रही है। याचिका में यह भी कहा गया कि इन कंपनियों के प्लेटफॉर्म के जरिए निजी दोपहिया वाहनों को व्यावसायिक रूप से उपयोग में लाया जा रहा है, जबकि इसके लिए जरूरी परमिट और नियमों का पालन कई मामलों में नहीं किया जा रहा।
मामले की सुनवाई के दौरान इंदौर हाईकोर्ट ने इस स्थिति पर गंभीर चिंता जताई। कोर्ट ने कहा कि यदि यात्री परिवहन से जुड़ी सेवाएं बिना स्पष्ट नियमों और सुरक्षा प्रावधानों के संचालित हो रही हैं, तो यह कानून और आम लोगों की सुरक्षा दोनों के लिए चिंता का विषय है। कोर्ट ने केंद्र सरकार, मध्य प्रदेश सरकार, परिवहन विभाग और बाइक टैक्सी सेवाएं संचालित करने वाली कंपनियों को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए पूछा है कि आखिर इन सेवाओं को किस आधार पर संचालित किया जा रहा है और क्या इनके पास आवश्यक अनुमति है या नहीं।
याचिका में यह भी मुद्दा उठाया गया कि बाइक टैक्सी सेवाओं में यात्रियों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं। कई मामलों में हेलमेट की व्यवस्था नहीं होती, ड्राइवरों का सत्यापन स्पष्ट नहीं होता और दुर्घटना की स्थिति में जिम्मेदारी तय करना भी मुश्किल हो जाता है। इसके अलावा यह भी कहा गया कि बिना उचित नियमों के ऐसे प्लेटफॉर्म चलने से सड़क सुरक्षा और बीमा से जुड़े कई सवाल भी खड़े होते हैं।
हाईकोर्ट ने सभी संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर चार सप्ताह के भीतर विस्तृत जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट यह जानना चाहता है कि इन सेवाओं के संचालन को लेकर सरकार की क्या नीति है और क्या कंपनियां मोटर व्हीकल एक्ट और अन्य नियमों का पालन कर रही हैं या नहीं।
चंडीगढ़। करीब 23 साल पुराने चर्चित पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को इस मामले में बरी कर दिया है। कोर्ट का कहना है कि, उनके खिलाफ साजिश रचने के पर्याप्त सबूत नहीं मिले। इस केस में दोषी ठहराए गए तीन अन्य आरोपियों कुलदीप सिंह, निर्मल सिंह और कृष्ण लाल की उम्रकैद की सजा को हाईकोर्ट ने बरकरार रखा है।
यह मामला देश के चर्चित आपराधिक मामलों में से एक रहा है, जिसमें एक पत्रकार की हत्या, डेरा प्रमुख पर लगे गंभीर आरोप और लंबे कानूनी संघर्ष ने इसे सुर्खियों में बनाए रखा।
हरियाणा के सिरसा के पत्रकार रामचंद्र छत्रपति की हत्या वर्ष 2002 में गोली मारकर की गई थी। उन्होंने अपने अखबार में डेरा सच्चा सौदा से जुड़े गंभीर आरोपों को प्रकाशित किया था। इन आरोपों में डेरे में साध्वियों के यौन शोषण से संबंधित एक चिट्ठी भी शामिल थी, जिसे छत्रपति ने अपने अखबार में प्रकाशित किया था। इसके बाद उन्हें लगातार धमकियां मिलने लगीं।
आखिरकार 19 अक्टूबर 2002 की रात को उनके घर के बाहर अज्ञात हमलावरों ने उन पर गोलियां चला दीं। उन्हें गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन 21 अक्टूबर 2002 को दिल्ली के अपोलो अस्पताल में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने इस मामले की सुनवाई के बाद गुरमीत राम रहीम को बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि, उपलब्ध सबूतों के आधार पर यह साबित नहीं होता कि राम रहीम इस हत्याकांड की साजिश में शामिल थे। कोर्ट ने कहा कि, अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत किए गए सबूत राम रहीम को दोषी ठहराने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। इसलिए उन्हें इस मामले में राहत दी जाती है। हालांकि, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि अन्य तीन आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त सबूत और गवाह मौजूद हैं। इसी आधार पर उनकी सजा को बरकरार रखा गया है।
हालांकि, राम रहीम को साध्वियों के यौन शोषण केस में 10 साल कैद की सजा हुई है। जिसकी वजह से राम रहीम को अभी जेल में ही रहना होगा।
इस केस में हाईकोर्ट ने तीन आरोपियों की उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा है। इन आरोपियों में शामिल हैं-
कुलदीप सिंह
निर्मल सिंह
कृष्ण लाल
अदालत ने कहा कि, इन तीनों के खिलाफ उपलब्ध सबूत और गवाह उनकी भूमिका को स्पष्ट रूप से स्थापित करते हैं।
इससे पहले 17 जनवरी 2019 को पंचकूला स्थित सीबीआई की विशेष अदालत ने इस मामले में बड़ा फैसला सुनाया था। सीबीआई कोर्ट ने गुरमीत राम रहीम समेत चारों आरोपियों को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इसके अलावा जुर्माने का भी प्रावधान किया गया था। इस फैसले के खिलाफ सभी दोषियों ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में अपील दाखिल की थी। लंबी सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने अब अपना फैसला सुनाया है।
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष और सीबीआई दोनों की ओर से कई अहम दलीलें दी गईं। राम रहीम के वकील बसंत राय ने अदालत में कहा कि इस मामले में सबूतों के साथ छेड़छाड़ की गई है। उन्होंने कहा कि, पत्रकार को लगी गोली सॉफ्ट लेड से बनी थी। वकील ने यह भी तर्क दिया कि, ऐसी गोलियां आमतौर पर सैन्य उपकरणों और स्नाइपर में इस्तेमाल की जाती हैं।
उन्होंने अदालत को बताया कि, घटना को 23 साल बीत चुके हैं और अब गोली पर मौजूद निशान या पहचान चिन्ह स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं दे रहे हैं।
कोर्ट में यह भी सवाल उठा कि, जिस कंटेनर में गोली रखी गई थी, उस पर एम्स की सील लगी हुई थी और फोरेंसिक विशेषज्ञों के हस्ताक्षर भी मौजूद थे। बचाव पक्ष ने पूछा कि, अगर कंटेनर की सील कभी खोली ही नहीं गई, तो फिर फोरेंसिक लैब ने गोली की जांच कैसे की। इसके अलावा यह भी स्पष्ट नहीं हो सका कि विशेषज्ञों के हस्ताक्षर गोली पर थे या कंटेनर पर। इन सवालों के आधार पर अदालत ने सबूतों को पर्याप्त नहीं माना।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि, प्रस्तुत की गई गोलियों पर कोई स्पष्ट निशान दिखाई नहीं दे रहे हैं। अदालत ने शिकायत पक्ष के वकील से पूछा कि, फोरेंसिक विशेषज्ञों ने गोली पर हस्ताक्षर किए थे या कंटेनर पर। इस पर शिकायत पक्ष की ओर से कहा गया कि, कंटेनर पर विशेषज्ञों के हस्ताक्षर मौजूद हैं, लेकिन गोली पर हस्ताक्षर के निशान अब स्पष्ट नहीं दिखाई दे रहे।
राम रहीम पर तीन बड़े केस
डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम पर अलग-अलग मामलों में कई गंभीर आरोप लगे थे।
1. साध्वी यौन शोषण केस
वर्ष 2017 में पंचकूला की विशेष अदालत ने दो साध्वियों के यौन शोषण के मामले में राम रहीम को दोषी ठहराया था। इस मामले में उन्हें 20 साल की सजा सुनाई गई थी।
2. पत्रकार रामचंद्र छत्रपति मर्डर केस
इस मामले में जनवरी 2019 में सीबीआई कोर्ट ने उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई थी। अब हाईकोर्ट ने इस मामले में उन्हें बरी कर दिया है।
3. डेरा मैनेजर रणजीत सिंह हत्याकांड
इस केस में भी हाईकोर्ट ने राम रहीम को बरी कर दिया था। हालांकि, इस फैसले को सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।
हालांकि हाईकोर्ट से इस मामले में राहत मिलने के बावजूद राम रहीम अभी जेल से बाहर नहीं आ सकेगा। इसकी वजह यह है कि, साध्वी यौन शोषण मामले में उसे 20 साल की सजा सुनाई जा चुकी है और वह फिलहाल उसी सजा के तहत जेल में बंद है।
रामचंद्र छत्रपति हरियाणा के सिरसा जिले के रहने वाले पत्रकार थे। उन्होंने वर्ष 2000 में वकालत छोड़कर पत्रकारिता शुरू की और सिरसा से अपना अखबार प्रकाशित करना शुरू किया।
2002 में उन्हें एक गुमनाम चिट्ठी मिली जिसमें डेरा सच्चा सौदा में साध्वियों के यौन शोषण का आरोप लगाया गया था। छत्रपति ने 30 मई 2002 को इस चिट्ठी को अपने अखबार में प्रकाशित कर दिया। इसके बाद उन्हें लगातार धमकियां मिलने लगीं।
परिवार के अनुसार चिट्ठी प्रकाशित होने के बाद कई महीनों तक उन्हें धमकियां मिलती रहीं। 19 अक्टूबर 2002 की रात को जब रामचंद्र छत्रपति अपने घर के बाहर मौजूद थे, तभी हमलावरों ने उन पर गोली चला दी। उन्हें कुल पांच गोलियां मारी गईं। गंभीर हालत में उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन दो दिन बाद उनकी मौत हो गई।
शुरुआत में पुलिस जांच से परिवार संतुष्ट नहीं था। इसके बाद पत्रकार के परिवार ने मुख्यमंत्री से मामले की जांच सीबीआई को सौंपने की मांग की। जनवरी 2003 में उनके बेटे अंशुल छत्रपति ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की। इसके बाद 10 नवंबर 2003 को हाईकोर्ट ने इस मामले की जांच सीबीआई को सौंपने का आदेश दिया।
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गैस सिलेंडर के दाम बढ़ने पर भड़की कांग्रेस, प्रधानमंत्री मोदी की भूमिका पर उठाए सवाल
घरेलू और व्यावसायिक एलपीजी सिलेंडरों की कीमतों में बढ़ोतरी के बाद कांग्रेस ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र पर तीखा हमला बोला। पार्टी ने पीएम को महंगाई मैन बताते हुए आरोप लगाया कि सरकार महंगाई का बोझ सीधे आम लोगों पर डाल रही है। दरअसल, कांग्रेस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि मोदी सरकार ने घरेलू एलपीजी सिलेंडर के दाम 60 रुपये बढ़ाकर आम परिवारों के बजट पर सीधा हमला किया है। वहीं 19 किलोग्राम वाले व्यावसायिक एलपीजी सिलेंडर की कीमत में 115 रुपये की बढ़ोतरी की गई है। पार्टी ने यह भी दावा किया कि पिछले तीन महीनों में व्यावसायिक सिलेंडर की कीमत 307 रुपये तक बढ़ चुकी है।
कांग्रेस के मीडिया और प्रचार विभाग के अध्यक्ष पवन खेड़ा ने पेट्रोलियम व प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी पर तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि शुक्रवार को हरदीप सिंह पुरी ने कहा था कि सरकार की प्राथमिकता नागरिकों को सस्ता और टिकाऊ ईंधन उपलब्ध कराना है। खेड़ा ने तंज कसते हुए लिखा कि एक दिन बाद ही घरेलू एलपीजी की कीमत 60 रुपये और व्यावसायिक सिलेंडर की कीमत 115 रुपये बढ़ा दी गई। खेड़ा कहा कि हरदीप सिंह पुरी जो कहते हैं, उस पर भरोसा नहीं करना चाहिए।
दरअसल पेट्रोलियम व प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि देश में ऊर्जा आपूर्ति को लेकर किसी तरह की कमी नहीं है और उपभोक्ताओं को चिंता करने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य नागरिकों को किफायती और टिकाऊ ईंधन उपलब्ध कराना है।
सूत्रों के अनुसार, 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू रसोई गैस सिलेंडर की कीमत 7 मार्च से देशभर में 60 रुपये बढ़ा दी गई है। वहीं होटल, रेस्टोरेंट और छोटे व्यवसायों में इस्तेमाल होने वाले 19 किलोग्राम के व्यावसायिक सिलेंडर के दाम में भी 115 रुपये की बढ़ोतरी लागू हो गई है।
इससे पहले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत अप्रैल 2025 से स्थिर थी, जब दिल्ली में गैर-सब्सिडी वाला सिलेंडर 853 रुपये का था। नई बढ़ोतरी से घरेलू उपभोक्ताओं के साथ-साथ एलपीजी पर निर्भर व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की लागत भी बढ़ेगी।
इस बीच इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन ने भी सोशल मीडिया पर पेट्रोल और डीजल की कमी से जुड़ी खबरों को खारिज करते हुए कहा कि देश में ईंधन का पर्याप्त भंडार है और आपूर्ति व्यवस्था सामान्य रूप से चल रही है। कंपनी ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करने की अपील की है।
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बजट सत्र का दूसरा चरण 9 मार्च से, लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को हटाने के प्रस्ताव पर चर्चा की हो रही मांग
बजट सत्र का दूसरा चरण 9 मार्च से शुरू होना है, और पहले ही दिन लोकसभा में हंगामा देखने को मिल सकता है. लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पद से हटाने से जुड़े विपक्ष के प्रस्ताव पर सोमवार को ही लोकसभा में चर्चा होने की संभावना है. लोकसभा सचिवालय की ओर से 9 मार्च के लिए जो कार्यसूची जारी की गई है, उसके मुताबिक़ उस दिन प्रश्नकाल के अलावा केवल इस प्रस्ताव पर चर्चा से जुड़ी कार्यवाही को ही शामिल किया गया है. कांग्रेस ने अपने सांसदों से कहा है कि वे इन दिनों सदन में मौजूद रहें क्योंकि लोकसभा स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर चर्चा की संभावना है। वहीं भाजपा ने भी सांसदों को मौजूद रहने का निर्देश दिया है।
संसद का बजट सत्र का दूसरा चरण 9 मार्च से शुरू होकर 2 अप्रैल तक चलेगा। भाजपा और कांग्रेस दोनों ने अपने लोकसभा सांसदों को 9 से 11 मार्च तक सदन में मौजूद रहने के लिए 3-लाइन व्हिप जारी किया है।
विपक्ष ने स्पीकर ओम बिरला को पद से हटाने के लिए प्रस्ताव का नोटिस दिया है। विपक्ष के 118 सांसदों ने इस प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किए हैं। हालांकि तृणमूल कांग्रेस के सांसदों (29) ने इस नोटिस पर हस्ताक्षर नहीं किए।
आरोप है कि स्पीकर ने सदन की कार्यवाही चलाने में पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाया और विपक्षी नेताओं को बोलने का मौका नहीं दिया।
नियमों के अनुसार स्पीकर को हटाने का प्रस्ताव लोकसभा में साधारण बहुमत से पारित होता है। मौजूदा लोकसभा में एनडीए के पास करीब 290 से अधिक सांसदों का समर्थन है, इसलिए प्रस्ताव पारित होना कठिन है। प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान स्पीकर स्वयं सदन की अध्यक्षता नहीं करेंगे, लेकिन उन्हें अपना पक्ष रखने और मतदान करने का अधिकार होगा।
कार्यसूची के मुताबिक, कांग्रेस सांसद मो जावेद, के. सुरेश और मल्लू रवि इस प्रस्ताव को पेश करेंगे. प्रस्ताव में लोकसभा स्पीकर ओम बिरला पर पक्षपात का आरोप लगाते हुए कहा गया है कि स्पीकर के कुछ फ़ैसलों से सदन के सुचारु रूप से संचालन को खतरा पैदा हो गया है.
ओम बिरला के खिलाफ प्रस्ताव में आरोप लगाया गया है कि स्पीकर ज़्यादातर विवादित मुद्दों पर सत्तापक्ष के सांसदों का साथ देते हैं. ये भी कहा गया है कि स्पीकर विपक्ष के अधिकारों का संरक्षण नहीं करते हैं और गैर पक्षपाती रवैया नहीं अपनाते हैं, जो सदन के सभी पक्षों का विश्वास हासिल करने के लिए ज़रूरी है.
खंडवा। मध्य प्रदेश के खंडवा में पुलिस थाने में पथराव मामले में कार्रवाई की गई है। 22 नामजद समेत कुल 47 लोगों पर एफआईआर दर्ज की गई है। बताया जा रहा है कि सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर बवाल हुआ था। शिकायत दर्ज कराने आई भीड़ ने हंगामा करते हुए थाना परिसर में पथराव कर दिया था।
यह पूरा मामला खंडवा के मोघट थाना क्षेत्र का है। जहां इंस्टाग्राम पर एक पोस्टर वायरल हुई थी, जो धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाली थी। फरियादी मुजाहिद कुरैशी शिकायत करने मोघट थाने पहुंचा था। पुलिस ने सुनवाई करते हुए कायमी की। इस मामले में कायमी BNS की धारा 199 के तहत की गई। जिस व्यक्ति ने पोस्ट डाली है, उसे राउंड-अप भी किया गया है।
बाद में फरियादी मुजाहिद के साथ बड़ी संख्या में भीड़ थाना परिसर में पहुंचीं और पुलिस पर दबाव बनाने की कोशिश की, जिससे लॉ एंड ऑर्डर की स्थिति बनी। सिटी एसपी ने तीन थानों के बल के साथ स्थिति को संभाला। ASP महेंद्र तारनेकर ने कहा कि स्थिति शांतिपूर्ण है। साथ ही पुलिस ने अपील की है कि पर्व त्योहार के मौके पर किसी भी प्रकार की अफवाह पर ध्यान न दें। पुलिस को सूचना दें, तत्काल कार्रवाई की जाएगी।
खंडवा सिटी मजिस्ट्रेट बजरंग बहादुर ने बताया कि कानून व्यवस्था की स्थिति निर्मित हुई थी। हालांकि स्थिति को नियंत्रण में कर लिया गया है। पुलिस ने उपद्रवी तत्वों को हिरासत में लिया है। यथास्थिति सामान्य है। एक सप्ताह से लगातार प्रतिबंधात्मक कार्रवाई का जा रही है। जिसके कारण अभी तक किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति निर्मित नहीं हुई है। यह स्थिति हम बनाए रहेंगे। लोगों से अपील है कि सांप्रदायिक स्वभाव बनाए रखें, किसी भी तरह के अफवाह में न आए।
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आवारा कुत्तों का आतंक: डॉग लवर्स के खिलाफ सोसाइटी के रहवासियों ने किया प्रदर्शन
भोपाल। मध्यप्रदेश में आवारा कुत्तों का आतंक जारी है। इसी कड़ी में राजधानी भोपाल में डॉग लवर्स के खिलाफ रहवासियों का गुस्सा फूटा है। डॉग बाइट के बढ़ते मामलों को लेकर रहवासियों ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया।
दरअसल करोंद स्थित मैपल ट्री सोसाइटी के रहवासियों ने प्रदर्शन किया। आवारा कुत्तों के काटने की घटनाओं से परेशान है।डॉग लवर्स के दबाव में पुलिस कार्रवाई नहीं करती है। लोगों का कहना है कि डॉग बाइट के बढ़ते मामलों के लिए डॉग लवर्स भी जिम्मेदार हैं। शिकायत करने पर डॉग लवर्स झूठी FIR करा रहे है। सोसाइटी में आवारा कुत्तों का आतंक है। डॉग लवर्स रहवासियों को धमकाते है और उन खिलाफ झूठी शिकायतें करते हैं।
हर्षराज गुप्ता, खरगोन। बीटीआई रोड पर घर के बहार घूम रही सेवानिवृत्त बुजुर्ग महिला पर आवारा कुत्तों के झूंड ने हमला कर दिया। डरकर भागी महिला कुत्तों के हमले के दौरान नीचे गिर गई। सडक पर घूम रहे राहगीरों ने कुत्तों के झुंड को पत्थर फेंककर भगाया और महिला की जान बचाई। घटना सीसीटीवी में कैद हुई है। गुरूवार रात करीब 10 बजे अपने घर के बहार नगरपालिका की सेवानिवृत्त कर्मचारी प्रतिभा मोडक घूम रही थी। सोशल मीडिया पर कुत्तों के हमले का विडियो वायरल हो गया है। हमले में घायल महिला का काफी बहा खून, निजी अस्पताल में उपचार कराया गया। घटना कोतवाली के बीटीआई रोड की है।
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राष्ट्रीय ध्वज के अपमान का मामला: मंत्री राव उदय प्रताप को MPLA कोर्ट का नोटिस, पूछा- क्यों न दर्ज हो FIR
जबलपुर। मध्य प्रदेश के स्कूल शिक्षा एवं परिवहन मंत्री राव उदय प्रताप सिंह की मुश्किलें बढ़ती दिख रही हैं। राष्ट्रीय ध्वज के अपमान के आरोप में जबलपुर हाईकोर्ट (MPLA कोर्ट) ने उनके खिलाफ नोटिस जारी कर दिया है। कोर्ट ने मंत्री से जवाब मांगा है कि उनके खिलाफ FIR क्यों न दर्ज की जाए।
यह मामला 11 अगस्त 2024 को नरसिंहपुर जिले के गोटेगांव में आयोजित तिरंगा यात्रा से जुड़ा है। यात्रा के दौरान मंत्री राव उदय प्रताप सिंह जिस खुली जीप पर सवार थे, उस जीप के बोनट पर तिरंगा चिपकाया गया था, जिससे ध्वज को अपमानित करने का आरोप लगा। वीडियो और फोटो में साफ दिख रहा है कि तिरंगा मंत्री के पैरों के पास या जीप से टकराते हुए नजर आया, जो भारतीय ध्वज संहिता 2002 और Prevention of Insults to National Honour Act, 1971 का उल्लंघन माना जा रहा है।
गोटेगांव निवासी याचिकाकर्ता कौशल ने पहले पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, लेकिन पुलिस द्वारा FIR न दर्ज करने पर उन्होंने कोर्ट का रुख किया। परिवाद दायर कर मंत्री के खिलाफ राष्ट्रध्वज अपमान का मामला दर्ज करने की मांग की गई। कोर्ट ने नोटिस जारी करते हुए पूछा है कि इस मामले में मंत्री के खिलाफ FIR क्यों न दर्ज की जाए।
याचिकाकर्ता के वकील असीम त्रिवेदी ने बताया कि यह गंभीर मामला है, जिसमें ध्वज संहिता के स्पष्ट उल्लंघन के सबूत मौजूद हैं। कोर्ट ने जल्द सुनवाई का संकेत दिया है। मंत्री राव उदय प्रताप सिंह या उनकी ओर से अभी तक इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
छिंदवाड़ा। मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले के अमरवाड़ा में उस वक्त तनाव फैल गया जब एक दुर्गा मंदिर के गेट पर इस्लाम का झंडा लगा दिया गया। असमाजिक तत्वों ने माता रानी के पास रखे त्रिशूल पर हरे रंग का एक कपड़ा भी रख दिया। धार्मिक आस्था से छेड़छाड़ की घटना के बाद ग्रामीणों में आक्रोश है।
दरअसल, पूरी घटना सोनपुर गांव की है जहां कुछ असमाजिक तत्वों की हरकत की वजह से इलाके में तनाव और आक्रोश का माहौल बन गया। जैसे ही घटना की जानकारी ग्रामीणों को मिली, बड़ी संख्या में लोग मौके पर एकत्रित हो गए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करने लगे।
ग्रामीणों का कहना है कि इस तरह की हरकतें क्षेत्र की फिजा शांति और आपसी भाईचारा को बिगाड़ने का प्रयास हैं। लोगों ने तुरंत इसकी सूचना पुलिस प्रशासन को दी और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और जांच में जुट गई।
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से धार्मिक भावनाओं से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है। जिससे भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो सके। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी है और क्षेत्र में शांति बनाए रखने की अपील की गई है।
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पूर्व मुख्यमंत्री लेने वाले है रिटायरमेंट! सोशल मीडिया पर शेयर किया प्लान…
भोपाल। मध्य प्रदेश की राजनीति में एक महत्वपूर्ण अध्याय जल्द समाप्त होने जा रहा है। वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह (Digvijaya Singh) का राज्यसभा कार्यकाल अप्रैल में पूरा होने वाला है। वर्तमान कार्यकाल 10 अप्रैल को समाप्त हो रहा है, जिसके बाद उनके भविष्य को लेकर सियासी गलियारों में तरह-तरह की चर्चाएं तेज हो गई हैं।
पूर्व सीएम और सांसद दिग्विजय सिंह ने एक्स पर एक वीडियो साझा कर अपना रिटायरमेंट प्लान बताया है। दिग्विजय ने एक्स पर रिटायर्ड बैंक अधिकारी शिवानंद भंजा का एक वीडियो शेयर कर अंग्रेजी में लिखा है माय रिटायरमेंट प्लान? मे बी. व्हाई नॉट? इसमें भंजा सेवानिवृत्ति के बाद एक गाड़ी खरीदकर भारत भ्रमण के लिए निकल पड़े हैं।
राजनीतिक सूत्रों के अनुसार दिग्विजय सिंह पहले ही यह संकेत दे चुके हैं कि वे तीसरी बार राज्यसभा जाने के इच्छुक नहीं हैं। उनके इस बयान के बाद से कांग्रेस संगठन और समर्थकों के बीच यह सवाल उठने लगा है कि आगे उनकी राजनीतिक भूमिका क्या होगी। लंबे समय से सक्रिय राजनीति में रहने वाले दिग्विजय सिंह का यह निर्णय पार्टी की रणनीति और मध्य प्रदेश की राजनीति दोनों के लिए अहम माना जा रहा है।
विश्लेषकों का मानना है कि यदि वे राज्यसभा की दौड़ से खुद को अलग रखते हैं तो यह उनके सार्वजनिक जीवन के नए चरण की शुरुआत हो सकती है। कुछ राजनीतिक जानकार इसे सक्रिय राजनीति से संभावित संन्यास के संकेत के रूप में भी देख रहे हैं। हालांकि दिग्विजय सिंह ने औपचारिक रूप से राजनीति छोड़ने की घोषणा नहीं की है, लेकिन उनके बयान ने इस संभावना को जरूर जन्म दे दिया है।
दूसरी ओर, कुछ विशेषज्ञों की राय अलग है। उनका मानना है कि दिग्विजय सिंह का यह बयान रणनीतिक भी हो सकता है। कई बार वरिष्ठ नेता सार्वजनिक रूप से पीछे हटने का संकेत देकर पार्टी नेतृत्व को नए दायित्व देने या संगठन में बड़ी भूमिका तय करने के लिए भी दबाव बनाते हैं। इसलिए यह भी संभव है कि राज्यसभा के बाद उन्हें कांग्रेस में कोई नई जिम्मेदारी सौंपी जाए। कुल मिलाकर, 10 अप्रैल के बाद दिग्विजय सिंह की अगली राजनीतिक दिशा क्या होगी, इस पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं। आने वाले समय में यह साफ हो जाएगा कि वे वास्तव में सक्रिय राजनीति से दूरी बनाते हैं या फिर किसी नई भूमिका में दिखाई देते हैं
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दुश्मनों को फंसाने के लिए दोस्त के सीने में मारी गोली, फिर खुद फरियादी बनकर पहुंचा थाने
ग्वालियर। मध्य प्रदेश के ग्वालियर में एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जहां एक युवक ने अपने तीन दुश्मनों को हत्या के प्रयास के झूठे मामले में फंसाने के लिए अपने ही दोस्त को गोली मार दी। घटना गोला का मंदिर थाना क्षेत्र के पिंटू पार्क में हुई, जहां आरोपी मधुसूदन उर्फ पोपट तोमर ने अपने दोस्त विकास साहू (24) के सीने में गोली मारी।
पुलिस और उपलब्ध जानकारी के अनुसार, मधुसूदन तोमर का तीन अन्य युवकों से पहले से विवाद चल रहा था। साजिश के तहत उसने विकास को गोली मारकर यह दिखाने की कोशिश की कि दुश्मन युवकों ने हमला किया है। गोली चलने के बाद विकास बाइक से गिर पड़ा और गंभीर रूप से घायल हो गया। उसे तुरंत मैक्स अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां से हालत नाजुक होने पर जे.ए.एच. (जयारोग्य अस्पताल) रेफर किया गया।
घटना के बाद मधुसूदन खुद थाने पहुंचकर फरियादी बन गया और शिकायत दर्ज कराई कि दुश्मनों ने उसके दोस्त पर हमला किया। लेकिन पुलिस ने मौके के सीसीटीवी फुटेज की जांच की, जिसमें साफ तौर पर दिखा कि मधुसूदन ने ही विकास पर गोली चलाई। फुटेज में काली थार के पास विवाद और फायरिंग का सीन कैद हुआ है। इस खुलासे के बाद गोला का मंदिर थाना पुलिस ने मधुसूदन तोमर के खिलाफ मामला दर्ज किया और उसे गिरफ्तार कर लिया। पुलिस द्वारा आरोपी से विस्तृत पूछताछ की जा रही है, जिसमें साजिश के अन्य पहलुओं और हथियार की बरामदगी की जांच शामिल है।
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08 March 2026
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मध्य प्रदेश में बाइक टैक्सी सेवाएं चलाने वाली कंपनियां ओला, उबर और रेपिडो अब कानूनी घेरे में आ गई हैं। इंदौर हाईकोर्ट ने इन सेवाओं के संचालन और यात्री सुरक्षा से जुड़े गंभीर आरोपों पर सख्त रुख अपनाते हुए केंद्र सरकार, राज्य सरकार और संबंधित कंपनियों सहित कुल 10 पक्षों को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने सभी से चार सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है।यह मामला एक जनहित याचिका (PIL) के जरिए हाईकोर्ट के सामने आया। याचिका में आरोप लगाया गया कि इंदौर और आसपास... अपराध
मध्य प्रदेश के रायसेन में स्थित ऐतिहासिक रायसेन किला से तोप चलाने का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में कुछ युवक किले की पहाड़ी पर खड़े दिखाई दे रहे हैं और कथित तौर पर ईरान के समर्थन में नारे लगाते हुए तोप चलाते नजर आ रहे हैं। इस वीडियो को लेकर प्रशासन सतर्क हो गया है और मामले की जांच शुरू कर दी गई है।इस वीडियो को लेकर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि... गुना सिटी
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