मुरैना। मुरैना पुलिस ने गुरुवार को चंबल के डकैत कल्ली गुर्जर का शॉट एनकाउंटर कर गिरफ्तार कर लिया है। बताया जा रहा है कि, पुलिस से हुई मुठभेड़ के दौरान उसके पैर में गोली लगी है, जिससे घायल होने के बाद बानमौर थाना पुलिस की टीम उसे मेडिकल जांच के लिए अस्पताल लेकर पहुंची है, जहों उसका उपचार किया गया।
बताया जा रहा है कि, डकैत कल्ली पर कई संगीन मामले दर्ज हैं। वो सोशल मीडिया पर लगातार वीडियो अपलोड कर अन्य डकैतों को धमकियां दे रहा था। इन वीडियो में वो खासतौर पर अपने दुश्मनों को धमकी देता नजर आ रहा था। कल्ली पर 80 हजार रुपए का इनाम था। उसे करीब 200 जवानों की टीम बीते कई दिनों से जंगलों में तलाश रही थी।
आपको बता दें कि, आज दोपहर 1 बजकर 12 मिनट पर एसपी मुरैना समेत 20 से 25 पुलिस जवानों की टीम और अफसरों के साथ 80 हजार रुपए के इनामी कल्ली गुर्जर को घायल अवस्था में जिला अस्पताल लाया गया है।, यहां उसका मेडिकल टेस्ट कराया जा रहा है। कल्ली डकैत के बाएं पैर में गोली लगी हुई है। अस्पताल में कल्ली का मेडिकल टेस्ट किया जा रहा है। बता दें कि, दोपहर 1 बजकर 45 मिनिट तक भी कल्ली अस्पताल के अंदर ही है।
कल्ली गुर्जर को मेडिकल परीक्ष के बाद अस्पताल के कैदी वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया है। कैदी वार्ड के बाहर बड़ी तादाद में पुलिस फोर्स तैनात की गई है। बताया ये भी जा रहा है कि, पुलिस ने कल्ली गुर्जर और उसका एक और साथी अजय गुर्जर को भी पकड़ा है। उसका भी अस्पताल में इलाज किया जा रहा है। हालांकि, कल्ली के अन्य तीन साथी फिलहाल, पुलिस गिरफ्त से बाहर हैं।
इस कार्रवाई में पुलिस ने कल्ली के पास से आधा सैकड़ा कारतूस बरामत किए हैं। जबकि, उसके पास एक सेमीऑटोमैटिक गन भी है जो अभी बरामद नहीं हुई है। पुलिस उसे भी बरामद करने की कोशिश कर रही है।
इधर, पुलिस अधीक्षक धर्मराज मीणा ने कल्ली को गिरफ्तार करने वाली पुलिस टीम के जवानों को शाबाशी देते हुए उनके द्वारा की गई इस जटिल धरपकड़ की सराहना भी की है। आपको बता दें कि, कल्ली पर पहले से 60 हजार रूपए का ईनाम था, जिसे हालही में बढ़ाकर 80 हजार रुपए किया गया था।
आपको बता दें कि, एक तरफ जहां कल्ली गुर्जर को मुरैना पुलिस जंगल - जंगल छान रही थी। तभी करीब 20 दिन पहले कल्ली गुर्जर का धमकाते हुए वीडियो सामने आया था। कल्ली मुरैना के महेश्वर मंदिर के सामने खड़ा दिखाई दे रहा था। वो अपने विरोधी करुआ गुर्जर निवासी जड़ेरुआ को ललकारते हुए कह रहा था कि, मैं मंदिर आ गया हूं, दम है तो आकर मिल।' ऐसे में पुलिस की सर्चिंग कार्यप्रणाली पर सवाल भी खड़े हुए थे कि, पुलिस जिसे हर पत्थर के पीछे और हर इलाके ढूंढने का दावा कर रही है, वो तो वीडियो जारी करके अपनी लोकेशन दिखा रहा है, फिर भी पुलिस उसे पकड़ नहीं पा रही।
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30 हजार की रिश्वत लेते परियोजना अधिकारी और सुपरवाइजर गिरफ्तार, लोकायुक्त ने रंगे हाथों दबोचा
आगर मालवा। उज्जैन लोकायुक्त की टीम ने बड़ौद में बड़ी कार्रवाई की है। महिला एवं बाल विकास विभाग के परियोजना अधिकारी भगतसिंह चौहान और सुपरवाइजर जयश्री खींची को 30 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया। दोनों पर शिकायतकर्ता की पत्नी की सहायिका पद पर नियुक्ति कराने के एवज में रिश्वत मांगने का आरोप है।
जानकारी के अनुसार, बिनायगा बड़ौद निवासी बहादुर लोहार पिता नारायण सिंह लोहार ने 4 नवंबर को लोकायुक्त पुलिस अधीक्षक उज्जैन विनोद कुमार दीक्षित से शिकायत की थी। शिकायत में बताया गया था कि उसकी पत्नी रामू की महिला एवं बाल विकास परियोजना में सहायिका पद पर नियुक्ति कराने के बदले परियोजना अधिकारी भगतसिंह चौहान और सुपरवाइजर जयश्री खींची द्वारा 80 हजार रुपये की रिश्वत मांगी जा रही थी।
शिकायतकर्ता द्वारा इतनी राशि देने में असमर्थता जताने पर परियोजना अधिकारी 60 हजार रुपये लेने के लिए तैयार हो गया था। योजना के तहत गुरुवार को रिश्वत की पहली किश्त के रूप में 30 हजार रुपये देना तय हुआ। जैसे ही शिकायतकर्ता ने दोनों अधिकारियों को राशि दी, पहले से तैयार लोकायुक्त टीम ने कार्रवाई करते हुए परियोजना अधिकारी भगतसिंह चौहान और सुपरवाइजर जयश्री खींची को रंगे हाथों पकड़ लिया।
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सलाखों से निकलते ही हत्या के आरोपी का फूल-मालाओं से स्वागत, बोनट पर बैठकर कश लगाते वीडियो वायरल
सतना। मध्य प्रदेश के सतना में हत्या के मामले में 14 महीने जेल में रहने के बाद जमानत पर बाहर आए आरोपी का शहर की सड़कों पर अंदाज देखकर लोग हैरान रह गए। जेल से रिहा होते ही मान सिंह उर्फ बेटू सिंगरौल ने अपने साथियों के साथ गैंगस्टर स्टाइल में शक्ति प्रदर्शन किया। साथियों ने जेल के बाहर फूल-मालाओं से उसका स्वागत किया। इसके बाद बोलेरो के बोनट पर बैठकर सिगरेट के कश लगाते हुए वह बाइक रैली के साथ शहर की सड़कों पर निकला। जेल से सिद्धार्थ कॉलोनी स्थित घर तक निकाली गई इस रैली का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।
देर शाम हुई इस रिहाई के बाद आरोपी और उसके साथियों का काफिला जेल परिसर से बिड़ला रोड होते हुए सिद्धार्थ कॉलोनी पहुंचा। बोलेरो के बोनट पर बैठकर सिगरेट पीने और बाइक रैली निकालने के इस अंदाज को लेकर शहर में चर्चा है। हत्या के आरोपी के इस तरह खुलेआम शक्ति प्रदर्शन से लोगों में दहशत का माहौल बनने की बात सामने आई है।
मान सिंह उर्फ बेटू सिंगरौल 16 वर्षीय सत्यम शुक्ला की हत्या के मामले में जेल में बंद था। घटना 4 सितंबर को कोलगवां थाना क्षेत्र में एफसीआई गोदाम के पास हुई थी। पुलिस के मुताबिक, सूर्यप्रताप अपने दोस्त आदित्य के साथ चाय पीने के बाद बस स्टैंड जाने के लिए बाइक पर बैठ रहा था। तभी पुराने परिचित वेद मिश्रा, आयुष द्विवेदी उर्फ बेटू किंग, अर्पित तिवारी, सचिन पाल, बेटू सिंगरौल और सत्यम शुक्ला वहां पहुंच गए। बताया गया कि वेद मिश्रा ने सूर्यप्रताप से विवाद शुरू कर दिया। इसी दौरान आयुष ने उसका मोबाइल छीन लिया। विरोध करने पर वेद ने कट्टे से फायर कर दिया। सूर्यप्रताप ने झुककर अपनी जान बचाई। गोली चलने से नाराज सत्यम ने साथियों को कट्टा रखने के लिए कहा तो विवाद उस पर ही पलट गया। आरोप है कि सचिन पाल ने सत्यम के सीने में गोली मार दी।
गोली लगने से सत्यम जमीन पर गिर पड़ा। इसके बाद आरोपी उसे बिरला हॉस्पिटल के गेट पर छोड़कर भाग निकले। प्राथमिक उपचार के बाद सत्यम को रीवा रेफर किया गया, लेकिन रास्ते में ही उसकी मौत हो गई थी। इस मामले में मान सिंह उर्फ बेटू सिंगरौल करीब 14 महीने से अपने तीन अन्य साथियों के साथ जेल में बंद था। अब जमानत पर रिहाई के बाद उसके स्वागत और सड़क पर निकाली गई रैली का वीडियो सामने आने से एक बार फिर यह मामला चर्चा में आ गया है। सवाल यह भी है कि गंभीर आपराधिक मामले के आरोपी की रिहाई के बाद इस तरह खुलेआम सड़क पर शक्ति प्रदर्शन और यातायात नियमों की धज्जियां उड़ाने पर पुलिस क्या कार्रवाई करती है।
भोपाल। भोपाल में एक प्रतिष्ठित बिजनेसमैन को कथित हनीट्रैप और ब्लैकमेलिंग के जरिए शिकार बनाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। आरोपियों ने कारोबारी को दुष्कर्म और एससी-एसटी (SC-ST) एक्ट के झूठे केस में फंसाने की धमकी देकर करीब 40 लाख रुपये ऐंठ लिए और इसके बाद 1.5 करोड़ रुपये की और मांग कर डाली। बिजनेसमैन की शिकायत पर बागसेवनिया थाना पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी महिला, उसके पति और पिता तीनों को गिरफ्तार कर लिया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, पीड़ित कारोबारी ने बागसेवनिया थाने में शिकायत दर्ज कराई कि आरोपियों का एक गिरोह उन्हें लगातार झूठे आपराधिक मामलों में फंसाने की धमकी देकर भारी रकम की वसूली कर रहा था। ब्लैकमेलिंग के तहत पहले आरोपी महिला और उसके साथियों ने कारोबारी से 5 लाख और फिर 10 लाख रुपये नकद ऐंठे। इसके बाद केस वापस लेने और समझौते के नाम पर 25 लाख रुपये की और वसूली की गई। इस तरह आरोपी अब तक कुल 40 लाख रुपये वसूल चुके थे। 40 लाख रुपये हड़पने के बाद भी आरोपियों का पेट नहीं भरा। उन्होंने पीड़ित से 1.5 करोड़ रुपये की नई डिमांड रख दी। पैसे न देने पर दोबारा झूठे केस में फंसाने और जान से मारने की धमकियां दी जाने लगीं।
लगातार मिल रही धमकियों और भारी रकम की मांग से तंग आकर बिजनेसमैन ने हिम्मत जुटाई और पुलिस की शरण ली। कारोबारी की शिकायत पर बागसेवनिया पुलिस ने मामला दर्ज कर तत्काल दबिश दी और आरोपी महिला रत्नप्रिया देवड़ा, उसके पति राम कुमार धाकड़ और पिता रामकृष्ण देवड़ा को गिरफ्तार कर लिया।
पीड़ित कारोबारी ने पुलिस को ब्लैकमेलिंग से जुड़े कई पुख्ता सबूत सौंपे हैं। इनमें बैंक चेक, एग्रीमेंट पेपर (अनुबंध पत्र), कॉल रिकॉर्डिंग्स और व्हाट्सएप चैट शामिल हैं, जिन्हें पुलिस ने मामले में अहम साक्ष्य बनाया है। बागसेवनिया पुलिस ने तीनों आरोपियों को हिरासत में लेकर गहन पूछताछ शुरू कर दी है। पुलिस इस बात की भी जाँच कर रही है कि इस हनीट्रैप और ब्लैकमेलिंग के गिरोह ने शहर में किसी अन्य व्यक्ति या कारोबारी को तो अपना शिकार नहीं बनाया है।
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सफाईकर्मियों की हड़ताल: भोपाल में सफाई ठप, सड़कों पर जल रहा कचरा, बंद करेंगे पानी
भोपाल. मध्य प्रदेश में सफाई कर्मचारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल का असर अब शहरों की व्यवस्था पर दिखाई देने लगा है. राजधानी भोपाल में लगातार दूसरे दिन कचरा नहीं उठने से सड़कों, बाजारों और रिहायशी इलाकों में गंदगी फैल गई है. कई जगह कचरे के ढेर में आग लगाए जाने की घटनाएं भी सामने आई हैं. इसी बीच कर्मचारियों ने शुक्रवार से पानी की सप्लाई बंद करने की चेतावनी देकर प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है.
भोपाल में 2.30 लाख से अधिक नल कनेक्शन हैं. ऐसे में जलापूर्ति प्रभावित होने पर बड़ी आबादी को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है. सफाई कर्मचारियों के साथ दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी भी आंदोलन में शामिल हो गए हैं. गुरुवार को कर्मचारी नेता अशोक वर्मा ने नगर निगम मुख्यालय स्थित अटल भवन की बिजली सप्लाई बंद कर दी और कार्यालय में ताला लगा दिया.
कर्मचारी नेताओं ने चेतावनी दी है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक शहर में दीपावली का आयोजन प्रभावित रहेगा. शुक्रवार को नगर निगम में पूरी तरह तालाबंदी करने की भी चेतावनी दी गई है.
राजधानी में करीब 11 हजार दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी हड़ताल पर हैं. इनमें सफाई कर्मचारियों के अलावा कंप्यूटर ऑपरेटर, बाबू, जलप्रदाय, फायर विभाग, विद्युत, उद्यान, अतिक्रमण और अन्य विभागों के कर्मचारी शामिल हैं. हड़ताल के कारण नगर निगम के सभी 85 वार्डों और 21 जोन में कामकाज प्रभावित हुआ है.
शहर में घरों से कचरा इकट्ठा करने के लिए 400 से ज्यादा वाहन लगाए गए हैं, लेकिन हड़ताल के कारण ये गार्बेज स्टेशनों पर खड़े हैं. सामान्य दिनों में प्रत्येक वाहन रोजाना दो से तीन चक्कर लगाता है. भोपाल से प्रतिदिन लगभग 850 टन कचरा निकलता है, जिसे गार्बेज स्टेशनों से कैप्सूल टैंकरों के जरिए आदमपुर छावनी भेजा जाता है.
हड़ताल का असर शहर के प्रमुख इलाकों में साफ दिखाई दे रहा है. लिंक रोड नंबर-1 पर पेट्रोल पंप के सामने डस्टबिन का कचरा सड़क पर फैल गया है. पांच नंबर स्टॉप, सात नंबर और एमपी नगर एसडीएम कार्यालय के सामने भी कचरे के ढेर जमा हैं.
शिवाजी नगर और तुलसी नगर में भी दो दिनों से कचरा कलेक्शन वाहन नहीं पहुंचे हैं. जगह-जगह कचरा जमा होने से कुछ स्थानीय लोगों और व्यापारियों ने उसे जलाना शुरू कर दिया है. चूना भट्टी इलाके में कचरे के ढेर में आग लगाए जाने की जानकारी भी सामने आई है.
हड़ताल समाप्त कराने के लिए यूनियन पदाधिकारियों ने नगरीय प्रशासन विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय दुबे से मुलाकात की, लेकिन बातचीत में कोई समाधान नहीं निकल सका. इसके बाद कर्मचारियों ने आंदोलन जारी रखने का फैसला किया.
इससे पहले बुधवार को न्यू मार्केट सहित कई बाजारों में व्यापारियों ने स्वयंसेवकों की मदद से सफाई कराई. व्यापारियों ने कर्मचारियों की मांगों का समर्थन करते हुए सरकार से जल्द समाधान निकालने की अपील की है.
मंगलवार को कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपने के लिए प्रदर्शन किया था. इसके बाद मुख्यमंत्री निवास का घेराव करने की योजना बनाई गई, लेकिन पुलिस ने जहांगीराबाद चौराहे पर बैरिकेडिंग कर उन्हें रोक दिया. विरोध में कर्मचारी करीब दो घंटे तक सड़क पर बैठे रहे.
हड़ताल के बीच विदिशा जिले के सिरोंज में विधायक उमाकांत शर्मा भी सफाई अभियान में शामिल हुए. उन्होंने बुधवार रात सड़क पर उतरकर करीब दो घंटे तक झाड़ू लगाई और सफाई की. वहीं, शिवपुरी में भी नगर पालिका के करीब 350 कर्मचारी हड़ताल पर हैं, जिससे वहां के बाजारों और सड़कों पर कचरा जमा होने लगा है.
प्रदेशभर में एक लाख से अधिक कर्मचारी नियमितीकरण, वेतन वृद्धि और ठेका प्रथा समाप्त करने जैसी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं. अब देखना होगा कि सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच बातचीत से कोई समाधान निकलता है या दीपावली के दौरान शहरों में सफाई और जरूरी सेवाओं का संकट और बढ़ता है.
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धीरेंद्र शास्त्री के खिलाफ यादव समाज का फूटा गुस्सा: भीड़ ने किया पुतला दहन, गिरफ्तारी की मांग
पन्ना। बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री द्वारा भगवान श्रीकृष्ण और महिलाओं को लेकर दिए गए कथित अमर्यादित बयानों के विरोध में आज पन्ना जिला मुख्यालय पर यादव समाज एवं श्रीकृष्ण भक्तों ने उग्र प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा और शास्त्री पर धार्मिक भावनाओं को आहत करने का आरोप लगाते हुए तुरंत एफआईआर दर्ज कर जेल भेजने की मांग की।
यादव महासभा के जिलाध्यक्ष ने शास्त्री पर ढोंग की दुकान चलाने और समाज का सौहार्द बिगाड़ने का गंभीर आरोप लगाते हुए चेतावनी दी कि यदि 15 से 20 दिनों के भीतर वैधानिक कार्रवाई नहीं की गई, तो देशव्यापी आंदोलन किया जाएगा। पूर्व बुंदेलखंड विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष बाबूलाल यादव समेत कई प्रमुख प्रतिनिधियों ने भी इस तरह के बयानों को समाज के लिए घातक बताते हुए इनके पूर्ण बहिष्कार की बात कही है।
समाज के लोगों ने स्पष्ट किया है कि भगवान श्रीकृष्ण करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था के केंद्र हैं और यदि प्रशासन ने जल्द सख्त कदम नहीं उठाए, तो यादव समाज उग्र आंदोलन करने के लिए मजबूर होगा जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
बॉलीवुड अभिनेता टाइगर श्रॉफ के घर के बाहर हुई फायरिंग का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। मुंबई क्राइम ब्रांच की जांच में अब लॉरेंस बिश्नोई गैंग के एक ऐसे फाइनेंशियल नेटवर्क का खुलासा हुआ है, जिसके जरिए आम लोगों के बैंक खातों का इस्तेमाल शूटरों तक पैसे पहुंचाने के लिए किया जा रहा था। हैरानी की बात यह है कि इस नेटवर्क में ऑटो-रिक्शा चालकों और छोटे दुकानदारों को महज 10 रुपए जैसे मामूली कमीशन का लालच दिया जाता था। जांच एजेंसियों के मुताबिक, विदेश में बैठा गैंग का सदस्य अनिल पंडित इस पूरे नेटवर्क को ऑपरेट कर रहा था। उसके छोटे भाई अभिषेक पंडित और अभिषेक की पत्नी सुनेहा पंडित की भूमिका भी जांच के घेरे में है।
टाइगर श्रॉफ के घर के बाहर हुई फायरिंग के मामले में मुंबई क्राइम ब्रांच अब सिर्फ शूटरों और साजिशकर्ताओं तक सीमित नहीं है, बल्कि गैंग के आर्थिक नेटवर्क की भी गहराई से जांच कर रही है। जांच में सामने आया है कि लॉरेंस बिश्नोई गैंग ने पैसों के लेन-देन के लिए एक अलग तरीका अपनाया था। आमतौर पर आपराधिक गतिविधियों में पैसों का लेन-देन जांच एजेंसियों के लिए अहम सुराग बनता है। इसी से बचने के लिए गैंग ने आम नागरिकों के बैंक खातों और यूपीआई क्यूआर कोड का इस्तेमाल किया। इससे विदेश में बैठे गैंग के सदस्यों और मुंबई में मौजूद शूटरों के बीच सीधे पैसों का लेन-देन नहीं होता था। क्राइम ब्रांच के मुताबिक, इस नेटवर्क के जरिए शूटरों की रोजमर्रा की जरूरतों और अन्य खर्चों के लिए रकम पहुंचाई जा रही थी।
जांच एजेंसियों के मुताबिक, अनिल पंडित विदेश में बैठकर मुंबई में मौजूद शूटरों फूल सिंह, रेहान और ऋतिक के संपर्क में था। वह उन्हें लगातार निर्देश दे रहा था और पैसों की व्यवस्था करने में भी अहम भूमिका निभा रहा था। बताया जा रहा है कि अनिल पंडित ने अपने भाई अभिषेक पंडित के साथ मिलकर ऐसा नेटवर्क तैयार किया था, जिसमें छोटे दुकानदारों और ऑटो चालकों के बैंक खातों को माध्यम बनाया जाता था। इस पूरी प्रक्रिया में पहले शूटर स्थानीय लोगों से संपर्क करते थे। इसके बाद उनसे उनका यूपीआई क्यूआर कोड लिया जाता था। इन क्यूआर कोड की तस्वीरें अनिल पंडित को भेजी जाती थीं। अनिल यह जानकारी अपने भाई अभिषेक तक पहुंचाता था।
मुंबई क्राइम ब्रांच की जांच में पैसों के लेन-देन का एक दिलचस्प तरीका सामने आया है। शूटरों ने ऑटो-रिक्शा चालकों से यूपीआई क्यूआर कोड हासिल करने के लिए किराए का बहाना बनाया था। दरअसल, टाइगर श्रॉफ के घर की रेकी और अन्य गतिविधियों के दौरान शूटरों ने मुंबई में आने-जाने के लिए ऑटो-रिक्शा का इस्तेमाल किया था। जब किराया देने की बारी आती थी, तो वे चालकों से कहते थे कि उनका कोई दोस्त या रिश्तेदार ऑनलाइन पैसे भेज देगा। इस बहाने ऑटो चालक अपना यूपीआई क्यूआर कोड दे देते थे। इसके बाद उनके खाते में ऑनलाइन रकम पहुंचाई जाती थी। शूटर किराए की रकम अपने पास रख लेते थे और बाकी पैसे ऑटो चालकों से नकद ले लेते थे।
इस पूरे मामले में एक दुकानदार के यूपीआई क्यूआर कोड से हुआ ट्रांजैक्शन जांच एजेंसियों के लिए अहम सुराग बना है। क्राइम ब्रांच को जांच के दौरान पता चला कि एक दुकानदार के खाते में 1,510 रुपए ट्रांसफर किए गए थे। इसके बदले दुकानदार को केवल 10 रुपए कमीशन दिया गया, जबकि बाकी 1,500 रुपए शूटरों ने नकद हासिल कर लिए। यानी महज 10 रुपए के लालच में दुकानदार का बैंक खाता गैंग के आर्थिक लेन-देन का माध्यम बन गया। जांच एजेंसियों के मुताबिक, इसी तरह ढाबों, होटलों और छोटी दुकानों पर भी इस तरीके का इस्तेमाल किया जाता था। जहां शूटर खाना खाते या ठहरते थे, वहां भी ऑनलाइन पेमेंट के नाम पर क्यूआर कोड हासिल करने की कोशिश की जाती थी।
टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस में अनिल पंडित के छोटे भाई अभिषेक पंडित की भूमिका भी बेहद अहम मानी जा रही है। मुंबई क्राइम ब्रांच के मुताबिक, अभिषेक इस मामले में वांटेड है। जांच में सामने आया है कि अभिषेक ने साल 2022 में सुनेहा पंडित से शादी की थी। आरोप है कि सुनेहा हरियाणा के करनाल से अलग-अलग बैंक खातों में पैसे ट्रांसफर करने का काम कर रही थी। वहीं, जांच एजेंसियों को शक है कि अभिषेक फिलहाल विदेश में छिपा हुआ है। उसके क्रिप्टो वॉलेट और हवाला नेटवर्क के जरिए गैंग के आर्थिक लेन-देन को संभालने की आशंका भी जताई जा रही है।
मुंबई क्राइम ब्रांच अब इस पूरे फाइनेंशियल नेटवर्क की परतें खोलने में जुटी है। जांच एजेंसियां डिजिटल फोरेंसिक और तकनीकी निगरानी के जरिए पैसों के लेन-देन से जुड़े सुराग जुटा रही हैं। जांच के दौरान एजेंसियां मुख्य रूप से इन सवालों के जवाब तलाश रही हैं- सुनेहा पंडित ने अलग-अलग बैंक खातों में कुल कितनी रकम ट्रांसफर की? मुंबई में मौजूद शूटरों तक कितने रुपए पहुंचाए गए? इस नेटवर्क में कितने ऑटो चालक और दुकानदार शामिल हुए? अनिल और अभिषेक पंडित के बीच पैसों के लेन-देन का पूरा तरीका क्या था?
टाइगर श्रॉफ के घर के बाहर हुई फायरिंग के मामले में अब जांच का दायरा लगातार बढ़ रहा है। शुरुआत में जहां पुलिस का फोकस फायरिंग करने वाले शूटरों और उनकी गिरफ्तारी पर था, वहीं अब गैंग की फंडिंग, विदेशी कनेक्शन और पैसों के नेटवर्क की भी पड़ताल की जा रही है।
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सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: हिरासत में लेते ही शुरू होंगे 24 घंटे, औपचारिक गिरफ्तारी का नहीं करना होगा इंतजार
सुप्रीम कोर्ट ने गिरफ्तारी और हिरासत को लेकर एक अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि किसी व्यक्ति को मजिस्ट्रेट के सामने पेश करने के लिए 24 घंटे की समय-सीमा उसकी औपचारिक गिरफ्तारी से नहीं, बल्कि हिरासत में लिए जाने के समय से शुरू होगी। यानी पुलिस किसी व्यक्ति को पूछताछ या जांच के नाम पर हिरासत में रखकर औपचारिक गिरफ्तारी में देरी नहीं कर सकती। कोर्ट ने कहा कि गिरफ्तारी और हिरासत के बीच कृत्रिम अंतर करना संवैधानिक रूप से गलत है।
जस्टिस उज्ज्वल भुइयां और जस्टिस अतुल एस. चंदुरकर की बेंच ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 22(2) के तहत किसी भी गिरफ्तार और हिरासत में रखे गए व्यक्ति को 24 घंटे के भीतर नजदीकी मजिस्ट्रेट के सामने पेश करना जरूरी है। कोर्ट के मुताबिक, 24 घंटे की समय-सीमा औपचारिक गिरफ्तारी दर्ज होने के बजाय उसी समय से शुरू होगी, जब किसी व्यक्ति की आजादी पर वास्तविक रूप से रोक लगा दी जाती है और उसे हिरासत में ले लिया जाता है।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि पूछताछ, जांच, तलाशी या जब्ती में लगने वाले समय को 24 घंटे की समय-सीमा से अलग नहीं रखा जा सकता। इसमें केवल हिरासत की जगह से मजिस्ट्रेट की अदालत तक पहुंचने में लगने वाला जरूरी यात्रा समय ही अलग रखा जा सकता है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हिरासत और औपचारिक गिरफ्तारी के बीच बनावटी अंतर करके पुलिस किसी व्यक्ति की संवैधानिक सुरक्षा को कमजोर नहीं कर सकती। अगर किसी व्यक्ति को पहले हिरासत में रखा जाता है और बाद में उसकी गिरफ्तारी दिखाई जाती है, तो 24 घंटे की गणना हिरासत में लिए जाने के वास्तविक समय से ही होगी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ऐसा कोई अतिरिक्त समय नहीं बनाया जा सकता, जिसमें व्यक्ति की आजादी छीन ली जाए, लेकिन उसे कानूनी रूप से गिरफ्तार न दिखाया जाए। ऐसा करना संविधान के अनुच्छेद 22(2) के प्रावधानों के खिलाफ है।
सुप्रीम कोर्ट ने ओडिशा हाईकोर्ट के आर्यमन पटनायक मामले, केरल हाईकोर्ट के अरुण के थॉमस मामले और मद्रास हाईकोर्ट के कन्नन मामले में दिए गए फैसलों को गलत कानूनी व्याख्या माना। इन मामलों में गिरफ्तारी से पहले हिरासत में बिताए गए समय को 24 घंटे की संवैधानिक समय-सीमा से बाहर रखने की बात कही गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ऐसी व्याख्या संविधान के अनुच्छेद 22(2) के अनुरूप नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति को निर्धारित 24 घंटे से ज्यादा समय तक मजिस्ट्रेट के सामने पेश किए बिना हिरासत में नहीं रखा जा सकता। ऐसा होने पर उसकी हिरासत अवैध और असंवैधानिक होगी तथा उसे तत्काल रिहा करना होगा। कोर्ट ने मजिस्ट्रेट की जिम्मेदारी पर भी जोर दिया है। मजिस्ट्रेट को व्यक्ति को हिरासत में लेने की वास्तविक तारीख और समय दर्ज करना होगा और यह जांचना होगा कि उसे तय समय के भीतर अदालत में पेश किया गया है या नहीं।
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‘जेल में ही मर जाऊंगा, मुझे जमानत चाहिए’, सुप्रीम कोर्ट में छलका आजम खान का दर्द; ED केस की सुनवाई हाईकोर्ट पहुंची
नई दिल्ली. समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान को सुप्रीम कोर्ट से तत्काल राहत नहीं मिली है. प्रवर्तन निदेशालय (ED) की गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली उनकी याचिका को शीर्ष अदालत ने इलाहाबाद हाईकोर्ट भेज दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट से 16 नवंबर को ही उनकी जमानत याचिका पर अंतरिम आदेश पारित करने को कहा है. सुनवाई के दौरान आजम खान की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने उनकी उम्र और स्वास्थ्य का हवाला देते हुए जमानत की मांग की.
मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाला बागची की पीठ कर रही थी. अदालत ने याचिका को सुनवाई के लिए हाईकोर्ट भेजते हुए दो दिनों के भीतर वहां पहुंचाने के निर्देश दिए. हालांकि, पीठ ने मामले के गुण-दोष पर कोई राय देने से इनकार किया.
सुनवाई के दौरान कपिल सिब्बल ने आजम खान की ओर से दलील देते हुए कहा कि वह हर आरोप का सामना करने के लिए तैयार हैं, लेकिन उन्हें जमानत दी जानी चाहिए. उन्होंने अदालत को बताया कि आजम खान की उम्र करीब 78 साल है और उनके खिलाफ पहले से ही कई मामले दर्ज हैं.
सिब्बल ने कहा, ''मैं हर चीज का सामना करूंगा, लेकिन मुझे जमानत चाहिए. मैं 80 साल का हो गया हूं. मुझे ED के मामले में गिरफ्तार किया गया है और 28 अन्य मामले भी हैं. ऐसे में मैं जेल में ही मर जाऊंगा.''
उन्होंने गिरफ्तारी के समय पर भी सवाल उठाए और आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए आजम खान को जेल में रखने की कोशिश की जा रही है.
कपिल सिब्बल ने दलील दी कि जिस मामले में कार्रवाई की जा रही है, वह वर्ष 2006 का है और इसकी FIR 2019 में दर्ज हुई थी. उन्होंने सवाल उठाया कि इतने पुराने मामले में मनी लॉन्ड्रिंग का केस कैसे बनता है.
उन्होंने शिकायतों का जिक्र करते हुए कहा कि कुछ मामलों में घर में घुसकर नकदी, सोने की बालियां, बकरियां और अन्य सामान लूटने के आरोप लगाए गए हैं. साथ ही मकान गिराने की शिकायतें भी दर्ज हैं. सिब्बल ने इन आरोपों के आधार पर ED की कार्रवाई पर सवाल उठाए.
इस पर मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि उनकी दलीलों में दम हो सकता है, लेकिन अदालत इस स्तर पर कोई राय नहीं देना चाहती.
आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम से जुड़े दो पैन कार्ड मामले में 29 अक्टूबर को सजा निलंबित किए जाने के बाद ED ने आजम खान को गिरफ्तार किया था. इसके बाद उनकी ओर से गिरफ्तारी और न्यायिक हिरासत के आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई.
याचिका में गिरफ्तारी को गैरकानूनी बताते हुए आरोप लगाया गया है कि जांच एजेंसी की कार्रवाई में प्रक्रिया का दुरुपयोग हुआ है. आजम खान की ओर से यह भी दावा किया गया है कि आपराधिक न्याय व्यवस्था का इस्तेमाल राजनीतिक उद्देश्य से किया जा रहा है.
सुप्रीम कोर्ट ने आजम खान को तत्काल राहत देने के बजाय मामले को इलाहाबाद हाईकोर्ट में सुनवाई के लिए भेज दिया है. हाईकोर्ट को 16 नवंबर को उनकी जमानत याचिका पर अंतरिम आदेश पारित करने का निर्देश दिया गया है. अब आजम खान की जमानत पर अगला फैसला इलाहाबाद हाईकोर्ट को करना है.
सिंगरौली। मध्य प्रदेश के सिंगरौली में पुल निर्माण के नाम पर सरकारी खजाने में खुलेआम डाका डालने की सनसनीखेज साजिश बेनकाब हुई है। मामला बैढ़न विकासखंड के चाचर से कुल्हनिया मार्ग पर म्यार नदी पर बने पुल का है। जहां अफसरों और ठेकेदार की सांठगांठ का ऐसा खेल सामने आया है, जिसने सिस्टम की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। महज 7 लाख 37 हजार रुपये के अंतिम बिल को कूटरचना कर, रातों-रात 40 लाख 91 हजार रुपये बना दिया गया। यानी सीधे-सीधे करीब 33 लाख 53 हजार रुपये के सरकारी धन की हेराफेरी और खेल सिर्फ रकम बढ़ाने तक सीमित नहीं रहा। काम में देरी और नियमों की अनदेखी के चलते अंकेक्षक ने निर्माण एजेंसी पर करीब 16 लाख 78 हजार रुपये की पेनाल्टी यानी कटौती तय की थी।
अब इस 16 लाख से ज्यादा की पेनाल्टी से बचने के लिए क्या किया गया? नियम-कायदों को ताक पर रखते हुए महत्वपूर्ण सरकारी दस्तावेज-माप पुस्तिका क्रमांक 605- को रिकॉर्ड से पूरी तरह गायब कर दिया गया। यही नहीं, माप पुस्तिका क्रमांक 606 और 734 में खुलेआम ओवरराइटिंग और काट-छांट कर बैकडेट में संशोधित देयक तैयार कर दिया गया। इस पूरे मामले की शिकायत जब आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ यानी EOW रीवा तक पहुंची, तो जांच में इस बड़े फर्जीवाड़े की परतें खुल गईं।
EOW ने मामले में सख्त रुख अपनाते हुए 4 लोगों के खिलाफ संगीन धाराओं में एफआईआर दर्ज कर ली है, जिसमें सुशील कुमार मिश्रा – तत्कालीन एसडीओ, चंद्रशेखर तिवारी- तत्कालीन उपयंत्री, मेसर्स विजय कुमार मिश्रा कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड – निर्माण एजेंसी के प्रोपराइटर और एक अन्य आरोपी है। इन सभी पर आईपीसी की धारा 409, 420, 467, 468, 471, 120-बी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की गंभीर धाराओं के तहत आपराधिक प्रकरण दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी गई है।
पुल का ठेका 574 लाख रुपये का था, काम में महीनों की देरी हुई और अंत में जनता की गाढ़ी कमाई लूटने के लिए दस्तावेजों तक में हेराफेरी कर दी गई। ईओडब्ल्यू की इस कार्रवाई से लोक निर्माण विभाग में हड़कंप मच गया है। मामले में ईओडब्ल्यू पुलिस अधीक्षक अरविंद ठाकुर ने बताया कि पीडब्ल्यूडी विभाग के अधिकारियों और संबंधित ठेकेदारों के खिलाफ अपराध पंजीबद्ध किया गया है।
ईओडब्ल्यू एसपी अरविंद ने बताया कि साल 2016 में सिंगरौली जिले की म्यार नदी पर पुल का निर्माण होना था, इसका निर्माण कार्य साल 2018 में पूरा होना था, लेकिन नहीं हो सका। इस पर विभाग ने 16 लाख की पेनाल्टी लगाई। इस पेनाल्टी को बचाने और ठेकेदार को लाभ पहुंचाने के लिए मेजरमेंट को गायब कर दिया गया और सरकारी माप मुस्तिका में कांट छांट की गई। साथ ही फाइनल बिल में कूटचरित किया गया। इस पर अपराध पंजीबद्ध कर जांच में लिया गया है।
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पूजा-पाठ के बहाने घर बुलाकर पुजारियों से 60 लाख की ठगी के बाद कमिश्नर कार्यालय पहुंचे पीड़ित
इंदौर। मध्य प्रदेश के इंदौर से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहाँ पूजा-पाठ कराने वाले पुजारियों को ही ठगी का शिकार बनाया गया है। आरोप है कि वास्तु दोष और हवन-पूजन के बहाने पुजारियों को घर बुलाकर शेयर मार्केट और विभिन्न कंपनियों में निवेश करने का लालच दिया गया, और इसके बाद लाखों रुपए की ठगी की वारदात को अंजाम दिया गया। इस मामले में पीड़ित पुजारियों ने इंदौर पुलिस कमिश्नर कार्यालय पहुँचकर न्याय की गुहार लगाई है।
जानकारी के अनुसार, पंडित राजेश शास्त्री ने पुलिस कमिश्नर के समक्ष शिकायत दर्ज कराते हुए बताया कि करीब 4-5 महीने पहले खातीवाला टैंक इलाके में रहने वाले एक दंपति नितिन और उनकी पत्नी पारागीता जोशी ने अपने घर पर वास्तु दोष निवारण और भगवान के हवन-पूजन के लिए उन्हें और अन्य पंडितों को आमंत्रित किया था।
जब सभी पंडित पूजा-पाठ के लिए उनके घर पहुँचे, तो बातचीत के दौरान दंपति ने पुजारियों से कहा कि— “पूजा-पाठ से आप लोग कितना कमा लेते हैं? यदि अधिक मुनाफा कमाना चाहते हैं, तो हमारी कंपनी और शेयर मार्केट में इन्वेस्टमेंट करिए।” हवन-पूजन संपन्न होने के बाद आरोपियों ने पुजारियों को शेयर मार्केट और कंपनियों में भारी मुनाफे का सब्जबाग दिखाया।
दंपति के झांसे में आकर पंडित राजेश शास्त्री ने खुद 7 लाख रुपए का इन्वेस्टमेंट कर दिया। इतना ही नहीं, उनसे जुड़े अन्य कई पुजारी भी इस जाल में फंस गए और उन्होंने शेयर मार्केट व फर्जी कंपनियों में लाखों रुपए लगा दिए। प्रारंभिक अनुमान के मुताबिक, सभी पुजारियों को मिलाकर कुल 60 लाख रुपए की ठगी की गई है।
फिलहाल, 6 से अधिक पीड़ित पुजारी जनसुनवाई में अपनी शिकायत लेकर पहुँचे हैं, लेकिन आरोपी दंपति फिलहाल अपने ठिकाने से नदारद बताए जा रहे हैं। पुजारियों ने पुलिस कमिश्नर से मांग की है कि उनकी पूजा-पाठ की मेहनत की गाढ़ी कमाई को वापस दिलाया जाए और आरोपियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए। पुलिस मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच में जुट गई है।
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हॉस्टल की बदहाली पर 100 KM पैदल चलकर कलेक्टर से मिलने पैदल निकले स्टूडेंट्स
शहडोल। शहडोल में छात्रावास की अव्यवस्थाओं के खिलाफ अब Gen-Alpha के नन्हे कदम प्रशासन की जवाबदेही का बड़ा सवाल बनते जा रहे हैं। ये वो पीढ़ी है जो अपनी बात रखने के लिए सोशल मीडिया से लेकर सड़क तक का रास्ता चुन रही है। फर्क सिर्फ इतना है कि इनके हाथों में न तो कोई राजनीतिक झंडा है और न ही कोई नारेबाजी का मंच, बल्कि अपनी समस्याओं के समाधान की उम्मीद लेकर ये बच्चे सैकड़ों किलोमीटर पैदल चलने को तैयार है।
शहडोल में एक बार फिर ऐसा ही नजारा देखने को मिला, जब ब्यौहारी के मॉडल खंडोली विद्यालय के छात्र स्कूल और छात्रावास से निकलकर जिला मुख्यालय में कलेक्टर से मिलने पैदल रवाना हो गए। छात्रावास की अव्यवस्थाओं से नाराज छात्रों ने करीब 100 किलोमीटर का सफर पैदल तय करने का फैसला किया है। छात्र रीवा-शहडोल स्टेट हाईवे पर लगातार आगे बढ़ रहे हैं। खबर लिखे जाने तक छात्र 6 किलोमीटर से अधिक का सफर तय कर चुके थे।
हैरानी की बात यह है कि छात्रों के इस पैदल मार्च से एक दिन पहले ही जयसिंहनगर के आवासीय विद्यालय की छात्राएं छात्रावास की दीवार फांदकर करीब 40 किलोमीटर पैदल चलकर कलेक्टर से मिलने निकल पड़ी थीं। इससे पहले भी जिले के अलग-अलग आवासीय विद्यालयों के छात्र-छात्राएं अपनी समस्याओं और मांगों को लेकर इसी तरह जिला मुख्यालय तक पैदल मार्च कर चुके हैं। बताया जा रहा है कि एक दिन पहले छात्रों के बीच विवाद भी हुआ था। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम के पीछे छात्रावास की व्यवस्थाओं को लेकर उनकी नाराजगी सामने आ रही है।
लगातार सामने आ रहे इन मामलों ने शिक्षा और आदिवासी विकास विभाग की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर ऐसी कौन सी समस्याएं हैं, जिनके समाधान के लिए मासूम बच्चों को स्कूल और छात्रावास छोड़कर 100 किलोमीटर पैदल चलने का जोखिम उठाना पड़ रहा है। Gen-Alpha की यह पदयात्रा सिर्फ बच्चों का पैदल मार्च नहीं, बल्कि व्यवस्था के सामने खड़ा एक बड़ा सवाल है। जब छात्र अपनी बात कहने के लिए बार-बार सड़क पर उतर रहे हैं, तो सवाल यह है कि उनकी आवाज छात्रावास की चारदीवारी के भीतर ही क्यों नहीं सुनी जा रही है?
वहीं इस पूरे मामले में शहडोल जिला शिक्षा अधिकारी अतुल चौधरी ने जानकारी देते हुए बताया कि अभी आधे घंटे पहले ही जानकारी लगी है कि बच्चे पैदल निकले है, जानकारी के अनुसार सड़क की डिमांड है, साथ ही एक दिन पहले बच्चों के बीच विवाद हुआ था, बच्चों को समझा-बुझाकर उन्हें ऐसा करने से रोकने का पूरा प्रयास किया जा रहा है। साथ ही उनकी समस्या का समाधान किया जाएगा।
मऊगंज। बहुचर्चित भाटी जंगल दोहरे हत्याकांड में पुलिस और एसआईटी की कार्यप्रणाली पर न्यायालय ने एक ऐसा करारा तमाचा जड़ा है। जिसने पुलिस के दावों की धज्जियां उड़ा दी हैं। जिस अंधे कत्ल के खुलासे का ढोल तत्कालीन थाना प्रभारी राजेश पटेल और एसआईटी की टीम पीट रही थी। अदालत के फैसले ने उस पूरी कहानी को कागजी और झूठा साबित कर दिया है। गिरफ्तारी, जब्ती, मेडिकल और मेमोरेंडम के समय में ऐसा गजब का झोल मिला कि अदालत को दोनों आरोपियों को बरी करना पड़ा। बचाव पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने इन तमाम विसंगतियों को अदालत के सामने बेनकाब किया।
मऊगंज जिले का भाटी जंगल… जहां 25 और 26 दिसंबर 2024 की दरमियानी रात मंगल यादव और उसकी 80 वर्षीय पत्नी तेरसी यादव के साथ बालात्कार कर निर्मम हत्या कर दी गई थी। पुलिस ने दावा किया था कि उसने ‘अंधी हत्या’ का पर्दाफाश कर दिया है और श्रीनिवास पाल तथा साकिर अहमद को सलाखों के पीछे भेज दिया है।
तत्कालीन एसपी द्वारा गठित एसआईटी में सम्मिलित तत्कालीन एसडीओपी अंकिता शूल्या ,तत्कालीन थाना प्रभारी राजेश पटेल,भैया मान सिंह , इस के द्विवेदी ,जगदीश सिंह ठाकुर सहित अन्य पुलिस कर्मियों की स्पेशल निगरानी में जांच हुई थी, लेकिन जब कोर्ट ने दस्तावेजों की परतें उधेड़ीं, तो पुलिस का पूरा फर्जीवाड़ा सामने आ गया और दोनों आरोपियों को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया गया।
इस केस की सबसे बड़ी विसंगति यह है कि जिस हंसिया और काली चप्पल, दारू की बोतल, मछली के जाल को घटना के ठीक दूसरे दिन यानी 27 दिसंबर 2024 की सुबह 8:35 बजे डॉग स्क्वॉड को सूंघाया गया था और जिसे विवेचक भैया मान सिंह पहले ही घटनास्थल से उठा चुके थे और थाना प्रभारी को सौंप चुके थे। लेकिन बाद में वही हंसिया आरोपी साकिर अहमद के कब्जे से बरामद दिखाई गई। जो हथियार पहले से पुलिस के कब्जे में था, उसे बाद में जब्ती में दिखाना पुलिस की थ्योरी पर सीधा सवाल खड़ा करता है।
पुलिस के द्वारा श्रीनिवास पाल से जब्ती: दोपहर 16:20 बजे दिखाई गई जबकि श्रीनिवास पाल की गिरफ्तारी ठीक 5 मिनट बाद यानी दोपहर 16:25 बजे दर्शाई गई है। इसी तरह साकिर अहमद से जब्ती दोपहर 16:38 बजे दिखाई गई। जबकि साकिर अहमद की गिरफ्तारी दोपहर 16:45 बजे दर्शाई गई है ठीक 7 मिनट के बाद।
इसके बाद जब बिना देर किए इन दोनों आरोपियों को शाम को ठीक लगभग 17:00 बजे न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया गया। तब उसके बाद पुलिस के द्वारा दोनों आरोपी श्रीनिवास से रात 22:10 बजे और साकिर का रात 23:30 बजे! मेमोरंडम कथन कैसे लिए गए ,जब दोनों आरोपी शाम 5 बजे ही जेल भेजे जा चुके थे,
तारीखों और मेडिकल का खेल भी हैरान करने वाला है। आरोपी श्रीनिवास पाल की गिरफ्तारी पुलिस रिकॉर्ड में 31 दिसंबर 2024 को दर्शाई गई, लेकिन मजे की बात यह है कि उसका मेडिकल परीक्षण उससे एक दिन पहले यानी 30 दिसंबर 2024 को सुबह 7:18 बजे ही कराया जा चुका था! वहीं, दूसरे आरोपी साकिर अहमद का तो मेडिकल परीक्षण कराया ही नहीं गया।
इस पूरे मामले में आरोपियों की ओर से सक्षम पैरवी अधिवक्ता प्रदीप मिश्रा और ममनून सिद्दीकी ने की। उन्होंने अदालत के सामने इन सभी समयात्मक विसंगतियों, फर्जी मेमोरेंडम और साक्ष्यों की अनदेखी को जोरदार तरीके से रखा। जिसके बाद न्यायालय के द्वारा दोनोंरोपियो को बरी कर दिया गया!अब सवाल यह उठता है कि तत्कालीन एसडीओपी की निगरानी में बनी एसआईटी आखिर क्या कर रही थी? आखिर एस आईटी ने क्या जांच किया ,क्या अब पुलिस के ऊपर न्यायालय के द्वारा की गई सख्त टिप्पणियों के बाद कोई कार्यवाही होगी ? क्या अब भी बुजुर्ग दम्पतियों की हत्या के असली गुनाहगार को पुलिस पकड़ पाएगी ,या इस दोहरी हत्या की गुत्थी कागजों में उलझ कर रह जायेगी।
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धीरेंद्र शास्त्री के खिलाफ दामोदर यादव की चेतावनी, 15 नवंबर को आश्रम में ताला लगाने का ऐलान
उज्जैन. भगवान श्रीकृष्ण पर विवादित टिप्पणी के मामले में माफी मांगने के बावजूद बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का विरोध जारी है. उज्जैन के टॉवर चौक पर आजाद समाज पार्टी के नेता दामोदर यादव ने उनके खिलाफ प्रदर्शन करते हुए धर्म को धंधा बनाने और भगवान श्रीकृष्ण का अपमान करने का आरोप लगाया. उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से बागेश्वर धाम आश्रम को सील करने और धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की कथाओं पर रोक लगाने की मांग की. इसके लिए उन्होंने 14 नवंबर तक का अल्टीमेटम दिया है.
दामोदर यादव ने कहा कि वे धर्म विरोधी न कल थे, न आज हैं और न कभी होंगे. धर्म उनके लिए आत्मा के समान है. उन्होंने मुख्यमंत्री से कहा कि यदि वे स्वयं को भगवान श्रीकृष्ण का वंशज बताते हैं तो उन्हें भगवान का अपमान करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए. यादव ने चेतावनी दी कि 14 नवंबर तक मांग पूरी नहीं हुई तो 15 नवंबर को वे एक हजार वाहनों के काफिले के साथ बागेश्वर धाम पहुंचकर आश्रम में ताला लगाने जाएंगे.
प्रदर्शन के दौरान दामोदर यादव ने धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के खिलाफ आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया. उन्होंने मुख्यमंत्री से कहा कि छतरपुर में रहने वाले धीरेंद्र शास्त्री भगवान श्रीकृष्ण पर अनुचित टिप्पणियां कर रहे हैं, ऐसे में सरकार को कार्रवाई करनी चाहिए. उन्होंने कहा कि वे संविधान और मानवतावादी विचारधारा में विश्वास रखते हैं, लेकिन इसे कमजोरी नहीं समझा जाना चाहिए. यादव ने भगवान बिरसा मुंडा की जयंती पर आश्रम में ताला लगाने की चेतावनी भी दोहराई.
दरअसल, हाल ही में शिवपुरी जिले के करैरा में श्रीराम कथा के दौरान धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण के स्वरूप की तुलना करते हुए श्रीकृष्ण को टेढ़ा-मेढ़ा बताया था. उनकी इस टिप्पणी पर कई समाजों ने आपत्ति जताई. प्रदेश के अलग-अलग स्थानों पर विरोध प्रदर्शन हुए और पुतले भी जलाए गए. विरोध बढ़ने के बाद धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने अपनी टिप्पणी पर माफी मांग ली थी. इसके बावजूद उनके खिलाफ विरोध जारी है.
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गरीबों के राशन की कालाबाजारी: 275 बोरी सरकारी गेहूं से भरा अन्नदूत ट्रक निजी फ्लोर मिल सील
भोपाल। मध्य प्रदेश के सागर जिले से गरीबों को मिलने वाले सरकारी राशन की हेराफेरी और कालाबाजारी का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहां मुख्यमंत्री युवा अन्नदूत योजना के तहत संचालित करीब 275 बोरी गेहूं से भरा एक ट्रक निर्धारित गंतव्य पर पहुंचने के बजाय सीधे एक निजी फ्लोर मिल में पहुंच गया, जहां रात के अंधेरे में चुपचाप गेहूं की बोरियां उतारी जा रही थीं। भनक लगते ही पुलिस और खाद्य विभाग की संयुक्त टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मौके पर छापा मारा और फ्लोर मिल को सील कर दिया, जबकि गेहूं से भरे ट्रक को मोतीनगर थाने में खड़ा करवा दिया गया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, ट्रक चालक भरत पटेल जो सुभाषनगर का रहने वाला है, साईंखेड़ा वेयरहाउस से लगभग 275 बोरी गेहूं ट्रक में भरकर रवाना हुआ था। उसे किसी रोहित दांगी के निर्देश पर पर्ची देकर SPC यानी विशिष्ट खरीद केंद्र के लिए भेजा जाना था। लेकिन हैरानी की बात यह है कि ट्रक अपने निर्धारित और तय स्थान पर पहुंचने के बजाय मोतीनगर थाना क्षेत्र के छोटा करीला स्थित ‘MK इंटरप्राइजेज’ फ्लोर मिल जा पहुंचा। यह निजी फ्लोर मिल गणेश केशरवानी की बताई जा रही है। रात के वक्त फ्लोर मिल परिसर में संदिग्ध परिस्थितियों में ट्रक से गेहूं की बोरियां खाली कराई जा रही थीं, तभी मुखबिर की सूचना पर मोतीनगर थाना पुलिस की टीम तत्काल मौके पर पहुंच गई।
मामले की गंभीरता को देखते हुए CSP ललित कश्यप भी दल-बल के साथ घटनास्थल पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। इसके बाद तत्काल खाद्य आपूर्ति विभाग को इसकी सूचना दी गई, जिसके बाद सहायक आपूर्ति अधिकारी मौके पर पहुँचे और ट्रक व मिल में रखे गेहूं से संबंधित दस्तावेजों की बारीकी से जांच की। प्रारंभिक जांच में पूरा मामला प्रथम दृष्टया संदिग्ध और राशन घोटाले की बू लिए हुए प्रतीत हुआ, जिस पर कार्रवाई करते हुए अधिकारियों ने तत्काल प्रभाव से फ्लोर मिल को सील कर दिया। वहीं, ट्रक को थाने लाकर खड़ा कराया गया और चालक भरत पटेल के बयान दर्ज कर उससे पूछताछ की जा रही है।
गौरतलब है कि ‘मुख्यमंत्री युवा अन्नदूत योजना’ के तहत संचालित इन ट्रकों का मुख्य उद्देश्य सरकारी राशन को पूरी पारदर्शिता के साथ निर्धारित उचित मूल्य की दुकानों तक पहुंचाना होता है। ऐसे में सरकारी गेहूं का रूट बदलकर किसी निजी फ्लोर मिल तक पहुंच जाना प्रशासन और परिवहन व्यवस्था पर कई गंभीर सवाल खड़े करता है। अब खाद्य विभाग और पुलिस इस बात की गहराई से छानबीन कर रही है कि वेयरहाउस से यह गेहूं आखिर किसके इशारे पर और किसकी मिलीभगत से निकला था। इस पूरे खेल में वेयरहाउस से लेकर परिवहन और फ्लोर मिल संचालक तक किसकी और क्या भूमिका रही है, इसका खुलासा विस्तृत जांच के बाद ही हो सकेगा।
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