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अगार मालवा आगर-मालवा के जिला अस्पताल में दर्दनाक नजारा दिखाई दिया। यहां एक बच्ची को लाया गया था जिसे कुत्ते ने काटा था। तीन साल की मासूम बच्ची का पूरा चेहरा बिगाड़ दिया, उसे दर्जनों टांके लगाने पड़े। उज्जैन जिले की महिदपुर तहसील में देलवाड़ी गांव में घर के बाहर खेल रही माही (3) पिता कालू सिंह पर अचानक आवारा कुत्ता ने हमला कर दिया। मासूम के चेहरे को जगह-जगह से उसने बुरी तरह फाड़ डाला। आंख के नीचे, पूरी नाक, गाल और मुंह तक गंभीर जख्म आए। बच्ची दर्द से चीखती रही। परिजन उसे जिला अस्पताल लाए। कुत्ते ने बच्ची की ऐसी हालत कर दी कि टांके लगाना भी मुश्किल हो गया। आखिरकार बड़ी ही सावधानी से डॉक्टरों ने 55 टांके लगाए। बच्ची की हालत गंभीर है। उसे इंदौर रेफर किया गया है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद भी प्रदेश में आवारा कुत्तों पर प्रभावी नियंत्रण की कवायद नहीं की जा रही। जिम्मेदारों की इसी लापरवाही से इस बच्ची की जान पर बन आई।
प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया, माही खेल रही थी। पास ही बैठा कुत्ता अचानक आक्रामक हो उठा। उसने हमला किया और बच्ची गिर गई। वह मदद के लिए चीखती रही, चिल्लाती रही। कुत्ता काटता रहा। परिजन उसे जिला अस्पताल ले गए।
डॉक्टर भी मासूम के दर्द और उसके चेहरे की दशा देख द्रवित हो उठे। बच्ची की आंख के पास तक पहुंचे जख्म को देख ड्यूटी डॉक्टर ने नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. शशांक सकसेना को बुलाया। डॉ. सक्सेना ने सर्जरी कर आंख को बचाने का प्रयास किया। डॉक्टर ने बताया, जख्म गहरा है, आंखों की रोशनी बचाना जरूरी है।
सुप्रीम कोर्ट ने 19 मई को ही अपने फैसले में कुत्तों पर नियंत्रण के लिए सख्ती दिखाई। कोर्ट ने कहा था, जरूरी हो तो रेबीज पीडि़त, असाध्य बीमार, ज्यादा आक्रामक और खतरनाक आवारा कुत्ते को दया मृत्यु दी जा सकती है।
शीर्ष कोर्ट ने यह भी कहा..'गरिमा के साथ जीने के अधिकार में यह तथ्य शामिल है कि व्यक्ति कुत्तों के हमलों के डर के बिना स्वतंत्र रूप से जीवन जी सके। राज्य मूकदर्शक बनकर नहीं रह सकता। कोर्ट भी उस कठोर जमीनी हकीकत से आंखें नहीं मूंद सकती, जहां बच्चे-बुजुर्ग, विदेशी यात्री तक कुत्तों के काटने की घटनाओं के शिकार हुए।' कोर्ट ने कहा कि ईमानदारी से काम करने वाले अफसरों पर आपराधिक कार्यवाही नहीं की जाएगी। जब तक की उनके खिलाफ अधिकारों के दुरुपयोग का ठोस सबूत न हो।

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एटीएस की बड़ी कार्रवाई: राजस्थान से दबोचा गया PFI का ‘सेकंड कमांडर’ शाकिर मेव, 3 दिन में तीसरी गिरफ्तारी
भोपाल। मध्य प्रदेश एंटी टेरेरिस्ट स्क्वाड (MP ATS) ने देश विरोधी ताकतों और आतंकी नेटवर्क के खिलाफ एक बार फिर बड़ी और ताबड़तोड़ कार्रवाई की है। एटीएस ने प्रतिबंधित संगठन पीएफआई (PFI) और अन्य आतंकी संगठनों के संपर्क में रहने वाले शातिर आतंकी शाकिर मेव को गिरफ्तार कर लिया है। शाकिर मेव को आतंकी नेटवर्क का ‘सेकंड कमांडर’ माना जा रहा है। पिछले 3 दिनों के भीतर एमपी एटीएस द्वारा की गई यह तीसरी बड़ी गिरफ्तारी है।
मिली जानकारी के अनुसार, एमपी एटीएस ने खुफिया इनपुट के आधार पर दबिश देकर आरोपी शाकिर मेव को राजस्थान के अलवर जिले के टप्पुकरा थाना क्षेत्र से धर दबोचा। जांच एजेंसियों के मुताबिक, शाकिर मेव बेहद शातिर है और वह भारत में किसी बड़ी देश विरोधी गतिविधि और हमले की फिराक में था। वह पूरे आतंकी षड्यंत्र का ब्लूप्रिंट और रूपरेखा (प्लानिंग) तैयार करने का मुख्य काम संभालता था।
यह पूरी कार्रवाई हाल ही में पकड़े गए संदिग्ध आतंकी मोहम्मद फराक से पूछताछ के बाद की गई है। शाकिर मेव, मोहम्मद फराक का ही मुख्य सहयोगी है। जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा भी हुआ है कि आरोपी मोहम्मद फराक युवाओं को मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग देने के बहाने बरगला रहा था और ट्रेनिंग पूरी होने के बाद वह खुद अफगानिस्तान जाने की फिराक में था। ये सभी आरोपी प्रतिबंधित संगठन पीएफआई (PFI) सहित अन्य अंतरराष्ट्रीय आतंकी संगठनों के सीधे संपर्क में थे।
गिरफ्तारी के बाद एमपी एटीएस की टीम आरोपी शाकिर मेव को लेकर भोपाल पहुंची, जहां उसे विशेष न्यायालय (Court) में पेश किया गया। एटीएस ने आतंकी नेटवर्क और उनके भविष्य के प्लान का पर्दाफाश करने के लिए आरोपी की रिमांड मांगी थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए न्यायालय ने आरोपी शाकिर मेव को 20 जून तक एटीएस की रिमांड पर सौंप दिया है। अब पूछताछ में कई और बड़े चौंकाने वाले खुलासे होने की उम्मीद है।
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भोपाल में चयनित शिक्षकों का बड़ा आंदोलन: जनजाति कार्य विभाग से DPI तक निकाली ‘दंडवत यात्रा’, पद वृद्धि की मांग
भोपाल। मध्य प्रदेश में शिक्षक पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण कर चुके अभ्यर्थियों का गुस्सा अब सड़कों पर फूट पड़ा है। प्रदेश के अलग-अलग जिलों से राजधानी भोपाल पहुंचे वर्ग-2 और वर्ग-3 के शिक्षक अभ्यर्थियों ने अपनी मांगों को लेकर मोर्चा खोल दिया है। अपनी पीड़ा सरकार तक पहुंचाने के लिए अभ्यर्थियों ने जनजाति कार्य विभाग से लेकर लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) तक दंडवत यात्रा निकालकर अनोखा प्रदर्शन किया।
आंदोलन कर रहे चयनित अभ्यर्थियों ने सरकार के सामने मुख्य रूप से दो मांगें रखी हैं। वर्ग 2 (Class 2): रिक्त पदों को भरने के लिए कम से कम 10,000 पदों की बढ़ोतरी की जाए। वर्ग 3 (Class 3): प्राथमिक शिक्षकों के लिए 25,000 पद वृद्धि की मांग की जा रही है। अभ्यर्थियों का तर्क है कि मध्य प्रदेश के स्कूल शिक्षा विभाग और जनजाति कार्य विभाग में इस समय करीब 1 लाख 25 हजार पद खाली पड़े हैं, इसके बावजूद युवाओं को नियुक्तियों के लिए भटकना पड़ रहा है।
प्रदर्शनकारियों ने बताया कि वर्ष 2023 में शिक्षक पात्रता परीक्षा आयोजित की गई थी, जिसमें प्रदेश भर से लगभग पौने दो लाख (1.75 लाख) अभ्यर्थी शामिल हुए थे। लंबी प्रक्रिया के बाद सरकार ने महज 10,700 पदों पर भर्ती निकाली थी। हैरानी की बात यह है कि परीक्षा पास करने और नाम चयन सूची में आने के बावजूद इन पदों पर भी फिलहाल अब तक जॉइनिंग नहीं हो सकी है। स्कूल एलॉटमेंट (School Allotment) न होने के कारण चयनित अभ्यर्थी केवल दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर हैं।
अपनी सुस्त रफ्तार और उदासीनता को लेकर हमेशा सुर्खियों में रहने वाले जनजाति कार्य विभाग के बाहर अभ्यर्थियों ने जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शन में शामिल युवाओं का कहना है कि जब तक सरकार पद वृद्धि और तुरंत नियुक्ति को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाती, उनका यह संघर्ष जारी रहेगा। इस आंदोलन ने एक बार फिर प्रदेश की लचर शिक्षक भर्ती प्रक्रिया और युवाओं के रोजगार के मुद्दे को गरमा दिया है।

देवास। देवास पुलिस ने चोरी करने वाले एक अंतरराज्यीय गिरोह के सात सदस्यों को गिरफ्तार किया है। गिरोह के सदस्य लग्जरी कार से वारदात करने आते थे और इनके निशाने पर धार्मिक आयोजनों में शामिल होने वाली महिला श्रद्धालु रहती थीं। आरोपितों से 158 ग्राम वजनी नौ सोने की चेन, वारदात में प्रयुक्त करीब 20 लाख रुपये कीमत की कार, छह मोबाइल फोन और 3,500 रुपये नकद जब्त किए गए हैं।
पुलिस के अनुसार, राधागंज क्षेत्र निवासी सरोज अग्रवाल ने कोतवाली थाने में शिकायत दर्ज कराई थी कि 10 जून को मंडी व्यापारी एसोसिएशन धर्मशाला, एबी रोड में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दौरान भीड़ का फायदा उठाकर उनके गले से करीब 3.50 लाख रुपये कीमत की सोने की चेन और पेंडल चोरी कर लिया गया।
पुलिस अधीक्षक पुनीत गेहलोत ने बताया कि ऑपरेशन त्रिनेत्रम के तहत लगाए गए सीसीटीवी कैमरों की सैकड़ों फुटेज का विश्लेषण किया गया। संदिग्ध महिलाओं की गतिविधियों को चिन्हित कर उनकी आवाजाही ट्रेस की गई। जांच के दौरान आरोपितों की लोकेशन भोपाल तक मिली, जिसके बाद पुलिस टीम ने दबिश देकर गिरोह के सात सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस जांच में सामने आया कि गिरोह बड़े धार्मिक आयोजनों के दौरान अपनी कार को दूर खड़ा कर देता था। इसके बाद महिलाएं पैदल या ऑटो से कार्यक्रम स्थल तक पहुंचती थीं। आरती, प्रसाद वितरण और भीड़भाड़ के समय महिला श्रद्धालुओं के करीब पहुंचकर उनके गले से सोने की चेन निकाल लेती थीं। वारदात के तुरंत बाद गिरोह के सदस्य अलग-अलग दिशाओं में निकल जाते थे, ताकि किसी को संदेह न हो।
गिरोह के पुरुष सदस्य निगरानी रखने, परिवहन की व्यवस्था करने और चोरी के माल को ठिकाने लगाने का काम करते थे।
पुलिस ने बताया कि आरोपितों के मोबाइल फोन से अयोध्या, ओरछा, उज्जैन, नरसिंहपुर, जयपुर और अलवर सहित विभिन्न शहरों में होने वाले धार्मिक आयोजनों की जानकारी मिली है। पुलिस को आशंका है कि गिरोह इन आयोजनों में भी वारदात की तैयारी कर रहा था।
गिरोह की मुख्य सरगना जया निवासी मदनगीर, दक्षिण दिल्ली सहित ज्योति मानकर, मग्मा, देवी, देवेंद्र मुगम, रवि और राहुल को गिरफ्तार किया गया है। सभी वर्तमान में दक्षिण दिल्ली में रहते हैं और मूल रूप से तमिलनाडु के निवासी हैं। पुलिस के अनुसार, आरोपितों के खिलाफ दिल्ली, मुंबई और हरियाणा में चोरी व लूट के छह प्रकरण पहले से दर्ज हैं।
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बड़ा फर्जीवाड़ा: 20 टैक्सियां किराए पर लेकर किसानों को बेचीं, 1 करोड़ की लग्जरी कारें बरामद, आरोपी गिरफ्तार
भोपाल में एक बड़े वाहन फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है, जिसमें किराए पर ली गई कारों को आगे बेचने या गिरवी रखने का मामला सामने आया है। अरेरा हिल्स थाना पुलिस ने इस मामले में कार्रवाई करते हुए एक आरोपी को गिरफ्तार किया है और उसके कब्जे से करीब 10 लग्जरी कारें बरामद की गई हैं। इन कारों की कुल कीमत एक करोड़ रुपये से ज्यादा बताई जा रही है। पुलिस अब इस पूरे गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश में जुटी है और यह भी जांच कर रही है कि कितनी और गाड़ियां इस नेटवर्क के जरिए गायब की गई हैं।
यह मामला तब सामने आया जब पुरानी विधानसभा के सामने वाहन कारोबार करने वाले गौरव कुशवाहा ने अरेरा हिल्स थाने में शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने बताया कि 19 फरवरी को शैलेंद्र जोशी नाम का व्यक्ति उनके पास आया और एक कार किराए पर ली।
शुरुआत में सब कुछ सामान्य था। आरोपी समय पर किराया भी देता रहा, जिससे मालिक को कोई शक नहीं हुआ। लेकिन कुछ समय बाद उसने अचानक संपर्क तोड़ दिया। इसके बाद न तो वह कार वापस लेकर आया और न ही किराए की राशि दी। काफी समय तक इंतजार करने के बाद जब कोई जवाब नहीं मिला, तो पीड़ित ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।
शिकायत मिलने के बाद अरेरा हिल्स थाना पुलिस ने जांच शुरू की। जांच के दौरान पुलिस ने शैलेंद्र जोशी को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में कई अहम जानकारियां सामने आईं। पुलिस को पता चला कि आरोपी अकेले काम नहीं कर रहा था, बल्कि वह एक ऐसे गिरोह का हिस्सा हो सकता है जो किराए पर ली गई गाड़ियों को बेचने या गिरवी रखने का काम करता है। इसके बाद पुलिस ने आरोपी की निशानदेही पर कई जगह छापेमारी की और करीब 10 लग्जरी कारें बरामद कर लीं।
पुलिस के अनुसार, बरामद की गई कारों की कीमत लगभग एक करोड़ रुपये से ज्यादा है। ये सभी कारें अलग-अलग कंपनियों और मॉडल की हैं। जांच में यह भी सामने आया है कि गिरोह लग्जरी वाहनों को निशाना बनाता था, ताकि उन्हें आसानी से बेचकर ज्यादा पैसा कमाया जा सके।
पुलिस का कहना है कि यह मामला सिर्फ 10 कारों तक सीमित नहीं है। शुरुआती जांच में संकेत मिले हैं कि गिरोह ने करी30 से 36 वाहन किराए पर लिए हो सकते हैं। इनमें से कई गाड़ियां भोपाल और आसपास के जिलों से ली गई थीं। पुलिस अब उन सभी वाहनों की तलाश कर रही है जो अभी तक बरामद नहीं हुए हैं।
जांच में यह भी सामने आया है कि यह गिरोह सिर्फ भोपाल तक सीमित नहीं था। बल्कि आसपास के जिलों से भी वाहन किराए पर लेकर उन्हें या तो गिरवी रखा गया या बेच दिया गया। इससे साफ है कि यह एक संगठित नेटवर्क हो सकता है, जिसमें कई लोग शामिल हैं। पुलिस अब गिरोह के अन्य सदस्यों की पहचान करने में जुटी है।
जब इस पूरे मामले का खुलासा हुआ और पुलिस ने कुछ गाड़ियां बरामद कीं, तो कई वाहन मालिक अरेरा हिल्स थाने पहुंचे। कई लोगों को यह भी पता चला कि उनकी गाड़ियां चोरी या गायब हो चुकी हैं। थाने में लोगों की भीड़ लग गई, क्योंकि कई लोग अपने वाहनों की स्थिति जानने के लिए पहुंचे थे।
कुछ वाहन मालिकों ने बताया कि उन्होंने अपनी गाड़ियां किराए पर दी थीं, लेकिन बाद में उन्हें धोखे का पता चला। एक मालिक ने बताया कि उसने लगभग डेढ़ महीने पहले अपनी कार किराए पर दी थी, लेकिन बाद में पता चला कि गाड़ी वापस नहीं आई। एक अन्य व्यक्ति ने कहा कि उसकी कार अब तक गायब थी और बाद में उसे थाने से जानकारी मिली। एक और पीड़ित ने बताया कि उनकी हुंडई ओरा कार के बारे में तीन महीने बाद पता चला कि वह बरामद कर ली गई है, इसलिए वे थाने पहुंचे। कई लोगों ने यह भी कहा कि उन्हें लंबे समय तक यह नहीं पता था कि उनकी गाड़ियां वास्तव में चोरी हो चुकी हैं।
अरेरा हिल्स थाना प्रभारी सुनील शर्मा के अनुसार, आरोपी से लगातार पूछताछ की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस गिरोह में और कौन-कौन लोग शामिल हैं। इसके अलावा, जिन गाड़ियों की अभी तक बरामदगी नहीं हुई है, उनकी भी तलाश जारी है। पुलिस का मानना है कि जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं।
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थाना प्रभारी पर जानलेवा हमला, उपद्रवियों ने किया धारदार हथियार से हमला, सिर पर आई गंभीर चोट
सीधी। मध्य प्रदेश के सीधी जिले से कानून व्यवस्था को चुनौती देने वाली एक बेहद गंभीर और सनसनीखेज वारदात सामने आई है। यहां कमर्जी थाना क्षेत्र में दो पक्षों के बीच चल रहे नाली विवाद के बाद लगाए गए सड़क जाम को खुलवाने पहुंचे थाना प्रभारी और पुलिस बल पर कुछ असामाजिक तत्वों ने जानलेवा हमला कर दिया। इस हमले में कमर्जी थाना प्रभारी के सिर पर नुकीले हथियार से वार किया गया है, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। उन्हें तत्काल जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
जानकारी के अनुसार कमर्जी थाना क्षेत्र के अंतर्गत एक ही परिवार के लोगों के बीच नाली निर्माण को लेकर काफी समय से विवाद चल रहा था। सोमवार को यह विवाद इतना बढ़ गया कि आक्रोशित लोगों ने सड़क पर उतरकर चक्काजाम कर दिया। सड़क पर वाहनों की लंबी कतारें लगने और जाम की सूचना मिलने पर कमर्जी थाना प्रभारी अपने पुलिस स्टाफ के साथ तुरंत मौके पर पहुंचे।
थाना प्रभारी और पुलिस दल मौके पर मौजूद लोगों को समझाइश देकर शांतिपूर्वक जाम खुलवाने का प्रयास कर रहे थे। इसी दौरान चक्काजाम कर रहे करीब आठ लोग अचानक उग्र हो गए और पुलिस दल के साथ विवाद करने लगे। देखते ही देखते आरोपियों ने थाना प्रभारी पर हमला बोल दिया और उनके सिर पर नुकीले हथियार से ताबड़तोड़ वार कर दिए। अचानक हुए इस हमले में थाना प्रभारी लहूलुहान होकर वहीं गिर पड़े।
थाना प्रभारी पर हमले की खबर जंगल की आग की तरह फैली, जिससे पूरे पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। गंभीर रूप से घायल अधिकारी को तुरंत जिला अस्पताल लाया गया, जहां डॉक्टरों की टीम उनका उपचार कर रही है। घटना की गंभीरता को देखते हुए सीधी पुलिस अधीक्षक (SP) संतोष कोरी तुरंत जिला अस्पताल पहुंचे और घायल थाना प्रभारी का हालचाल जाना। पुलिस अधीक्षक ने साफ कहा है कि घटना में शामिल सभी आरोपियों की पहचान कर ली गई है और पुलिस बल पर हमला करने वाले किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा, सभी के खिलाफ बेहद कड़ी कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

अयोध्या. श्रीराम मंदिर के चढ़ावे में गबन का मामला अब सर्वोच्च न्यायालय पहुंच गया है. सुप्रीम कोर्ट में एक प्रस्तुतीकरण पेश किया गया है कथित गबन के मामले में एफआईआर (FIR) दर्ज करने और कोर्ट की निगरानी में जांच का निर्देश देने की मांग की गई है. भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत को संबोधित यह प्रस्तुतीकरण एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड अनूप प्रकाश अवस्थी ने दिया है.
प्रस्तुतिकरण में कहा गया है कि भगवान श्री रामचंद्रजी मर्यादा पुरुषोत्तम माने जाते हैं, जो न्याय, जवाबदेही और नैतिक शासन के प्रतीक हैं. इसमें यह भी कहा गया है कि उनके जन्मस्थान पर चढ़ाए गए चढ़ावे से जुड़ा कोई भी आरोप किसी आम आपराधिक केस से कहीं ज्यादा बड़ा हो जाता है. प्रस्तुतीकरण में कहा गया, “जिन मामलों में संस्थाओं पर लोगों का भरोसा दांव पर लगा हो, वहां लाखों भक्तों का भरोसा सिर्फ एक ऐसी जांच से ही वापस लाया जा सकता है जो साफ तौर पर स्वतंत्र, व्यापक और जिसमें असर, दबाव या हितों के टकराव की कोई संभावना न हो.”
प्रस्तुतीकरण में ये भी कहा गया कि राज्य सरकार ने एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) बनाई है, लेकिन औपचारिक आपराधिक जांच और FIR न होने से मामले में सरकारी कार्रवाई पर सवाल उठे हैं. रिप्रेजेंटेशन में कहा गया, “मैं किसी भी व्यक्ति, संस्था या अथॉरिटी के बारे में पहले से कोई राय नहीं बनाना चाहता. न ही मेरा ट्रस्ट पर कोई शक करने का इरादा है, जिसके सदस्यों ने बहुत कीमती सेवा दी है. हालांकि, आरोपों की गंभीरता और इसमें शामिल संस्था की बहुत बड़ी अहमियत के लिए आम मापदंड से ज्यादा पारदर्शिता और भरोसे की जरूरत है.”
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राम मंदिर के चढ़ावे पर उठे सवाल! दान में कथित गड़बड़ी की जांच की मांग लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला
नई दिल्ली। अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में मिलने वाले दान और चढ़ावे को लेकर उठे सवाल अब देश की सर्वोच्च अदालत तक पहुंच गए हैं। मंदिर के धन के कथित दुरुपयोग और वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में हस्तक्षेप की मांग की गई है। याचिकाकर्ता का कहना है कि यह मामला केवल पैसों का नहीं बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था और विश्वास से जुड़ा है। इसी वजह से स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच जरूरी है।
श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए दान और चढ़ावे के कथित गलत इस्तेमाल का मामला अब सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे तक पहुंच गया है। एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड अनूप प्रकाश अवस्थी ने भारत के मुख्य न्यायाधीश को पत्र भेजकर इस मामले में हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने कहा है कि मंदिर से जुड़े वित्तीय मामलों पर लगे आरोपों की निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए ताकि लोगों का भरोसा बना रहे। याचिकाकर्ता ने अदालत से आग्रह किया है कि इस मामले की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी, जैसे CBI, को सौंपी जाए और पूरी प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में हो। उनका कहना है कि इतने बड़े धार्मिक संस्थान से जुड़े आरोपों की जांच पूरी पारदर्शिता के साथ होना जरूरी है।
पत्र में कहा गया है कि राम मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं बल्कि करोड़ों लोगों की भावनाओं और विश्वास का केंद्र है। यहां आने वाला दान भक्तों की श्रद्धा का प्रतीक माना जाता है। ऐसे में यदि धन के उपयोग को लेकर किसी तरह के सवाल उठते हैं तो उनका स्पष्ट जवाब मिलना जरूरी है। याचिकाकर्ता का कहना है कि मामला केवल आर्थिक अनियमितता का नहीं है बल्कि उस भरोसे का भी है जो श्रद्धालु मंदिर प्रबंधन पर जताते हैं। इसलिए जांच ऐसी होनी चाहिए जिस पर किसी को भी संदेह न रहे।
उत्तर प्रदेश सरकार ने मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है। याचिका में कहा गया है कि केवल प्रशासनिक जांच पर्याप्त नहीं मानी जा सकती। इसमें दावा किया गया है कि अब तक इस मामले में कोई औपचारिक FIR दर्ज नहीं हुई है, जिससे कई सवाल खड़े हो रहे हैं। याचिकाकर्ता ने कहा है कि जब तक स्वतंत्र आपराधिक जांच नहीं होगी, तब तक जांच की निष्पक्षता को लेकर लोगों के मन में संदेह बना रह सकता है। इसी कारण न्यायिक निगरानी वाली जांच की मांग की गई है।
याचिका में मंदिर में मिलने वाले दान के संग्रह, लेखा-जोखा, रखरखाव और उपयोग से जुड़े सभी पहलुओं की गहन जांच कराने की मांग की गई है। साथ ही भविष्य में दान की राशि और संपत्तियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक मजबूत व्यवस्था बनाने का सुझाव भी दिया गया है। याचिकाकर्ता का कहना है कि जांच का उद्देश्य किसी व्यक्ति या संस्था को दोषी ठहराना नहीं है बल्कि सच्चाई सामने लाना और जनता का भरोसा बनाए रखना है।
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कॉकरोच जनता पार्टी के फाउंडर अभिजीत दीप्के पर जयपुर में हमला, युवक ने मारा थप्पड़
जयपुर. राजस्थान के जयपुर में सोमवार 15 जून को कॉकरोच जनता पार्टी के अभिजीत दीप्के को थप्पड़ मारा गया है. बताया जा रहा है कि प्रदर्शन के दौरान एक अज्ञात युवक ने अभिजीत पर हमला कर दिया. युवक ने अभिजीत को थप्पड़ मार दिया. युवक ने एक के बाद एक कई थप्पड़ मारे. इसके बाद अभिजीत के समर्थकों ने युवक को पकड़कर जमकर पीटा. इसके बाद वहां हंगामा मच गया.
जयपुर के शहीद स्मारक पर कॉकरोच जनता पार्टी के कार्यकर्ता सोमवार को प्रदर्शन कर रहे थे. इसी बीच पार्टी फाउंडर अभिजीत दिपके सभा स्थल पर पहुंचे. सभा स्थल में प्रवेश के दौरान कई युवकों ने उन पर हमला कर दिया. युवकों ने अभिजीत को एक के बाद एक कई थप्पड़ रसीद कर दिए. इसके बाद वहां से फरार हो गए. इस बीच सीजेपी के कार्यकर्ताओं ने युवकों को पकड़कर जमकर पीट दिया.
हालांकि मौके पर मौजूद भारी पुलिस ने बल ने आरोपियों को पकड़ लिया. पुलिस ने फिलहाल 3 से 4 युवकों को हिरासत में लिया है. हालांकि पुलिस ने अभी आरोपियों की पहचान उजागर नहीं की गई है. इस घटना के बाद घटना के बाद कार्यकर्ताओं में नाराजगी देखी गई. वहीं इस पूरे प्रकरण के बाद अभिजीत ने अपने कार्यकर्ताओं सेशांति बनाए रखने को कहा.
जयपुर से पहले अभिजीत इससे पहले दिल्ली, लखनऊ समेत कई जगहों पर अपनी पार्टी के प्रदर्शन में शामिल हो चुके हैं. बता दें कि देशभर के अलग-अलग शहरों कॉकरोच जनता पार्टी का प्रदर्शन जारी है. प्रदर्शन के माध्यम में सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए जा रहे हैं. देश की शिक्षा व्यवस्था, नीट पेपर लीक और बेरोजगारी जैसे मुद्दों को लेकर कॉकरोच पार्टी लगातार सरकार को निशाने पर ले रही है.

मध्यप्रदेश के मुरैना जिले में रविवार शाम एक दर्दनाक रेल हादसा हो गया। इस हादसे में लोगों की मौत हो गई, जबकि कई यात्री घायल बताए जा रहे हैं। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, उदयपुर इंटरसिटी एक्सप्रेस में आग लगने की अफवाह फैलने के बाद यात्रियों में भगदड़ मच गई। जान बचाने की कोशिश में कई लोग चलती ट्रेन से नीचे कूद गए। लेकिन उन्हें अंदाजा नहीं था कि दूसरी पटरी पर तेज रफ्तार से पातालकोट एक्सप्रेस आ रही है। यह हादसा मुरैना के हेतमपुर स्टेशन के पास हुआ, जहां कुछ ही मिनटों में खुशी का सफर मातम में बदल गया।
जानकारी के अनुसार, उदयपुर इंटरसिटी एक्सप्रेस शाम करीब 4 बजे मुरैना से धौलपुर की ओर रवाना हुई थी। ट्रेन सामान्य गति से अपने गंतव्य की ओर बढ़ रही थी। इसी दौरान हेतमपुर स्टेशन के पास किसी यात्री या अन्य व्यक्ति ने ट्रेन में आग लगने की बात कही।
आग लगने की खबर सुनते ही डिब्बों में बैठे यात्रियों के बीच घबराहट फैल गई। कई लोगों ने बिना स्थिति की पुष्टि किए ट्रेन से बाहर निकलने की कोशिश शुरू कर दी। कुछ ही देर में माहौल पूरी तरह अफरा-तफरी में बदल गया।
आग की अफवाह के कारण कई यात्री इतने डर गए कि उन्होंने चलती ट्रेन से ही कूदना शुरू कर दिया। लोगों को लगा कि अगर वे ट्रेन में रहे तो उनकी जान खतरे में पड़ सकती है। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, कुछ यात्री एक के बाद एक ट्रेन से नीचे उतरने लगे। इसी दौरान कई लोग रेलवे ट्रैक पर पहुंच गए। लेकिन उन्हें यह नहीं पता था कि पास वाली पटरी पर पातालकोट एक्सप्रेस आने वाली है।
उसी समय धौलपुर की ओर से मुरैना की तरफ पातालकोट एक्सप्रेस आ रही थी। ट्रेन अपनी निर्धारित रफ्तार से मुख्य ट्रैक पर आगे बढ़ रही थी।
पटरी पर मौजूद यात्रियों को संभलने का मौका भी नहीं मिला और वे पातालकोट एक्सप्रेस की चपेट में आ गए। हादसा इतना भयावह था कि मौके पर ही कई लोगों की मौत हो गई। शुरुआती रिपोर्ट में 5 से ज्यादा लोगों के मारे जाने की बात सामने आई है, जबकि कई यात्री गंभीर रूप से घायल हुए हैं।
हादसे के तुरंत बाद ट्रेन में सवार यात्रियों और स्थानीय लोगों ने राहत कार्य शुरू किया। कई घायल यात्रियों को ट्रैक से हटाकर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया। घटना की सूचना मिलते ही रेलवे अधिकारी, पुलिस और प्रशासन की टीमें मौके पर पहुंच गईं। एंबुलेंस की मदद से घायलों को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया। कुछ घायलों की हालत गंभीर बताई जा रही है।
हादसे के बाद रेलवे प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि सबसे पहले यह पता लगाया जाएगा कि ट्रेन में आग लगने की अफवाह कैसे फैली और इसके पीछे क्या कारण था। रेलवे सुरक्षा बल (RPF) और स्थानीय पुलिस भी पूरे मामले की जांच कर रही है। अधिकारियों का मानना है कि अगर अफवाह नहीं फैलती तो शायद इतना बड़ा हादसा नहीं होता।
राहत और बचाव कार्य जारी है। कई घायल यात्रियों का इलाज अस्पताल में चल रहा है। कुछ लोगों की हालत गंभीर होने के कारण मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है।
प्रशासन मृतकों की पहचान करने और उनके परिजनों को सूचना देने का काम कर रहा है। घटना के बाद कई परिवार अपने प्रियजनों की जानकारी के लिए अस्पतालों और रेलवे अधिकारियों से संपर्क कर रहे हैं।
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पंजाब नेशनल बैंक में 1 करोड़ से ज्यादा का गबन: पूर्व शाखा प्रबंधक समेत उप प्रबंधक निलंबित, FIR दर्ज
मंदसौर। मंदसौर जिले में पंजाब नेशनल बैंक के करेंसी चेस्ट से करोड़ों रुपये के गबन का सनसनीखेज मामला सामने आया है। बताया जा रहा है कि बैंक के करेंसी चेस्ट का भौतिक सत्यापन किए जाने पर नकदी में भारी कमी पाई गई। जांच के दौरान करीब 4 करोड़ 5 लाख रुपये की जगह 3.5 करोड़ रुपए मिलने की बात सामने आने के बाद बैंक प्रबंधन में हड़कंप मच गया।
प्रारंभिक जांच में करीब 1 करोड़ रुपये के गबन की पुष्टि हुई है। पूर्व शाखा प्रबंधक अनुज शर्मा और उप प्रबंधक उत्कर्ष घावरी के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। बताया जा रहा है कि करेंसी चेस्ट में रखी नकदी और अभिलेखों के मिलान के दौरान अनियमितताएं सामने आईं, जिसके बाद विस्तृत जांच शुरू की गई। बैंक अधिकारियों ने मामले की जानकारी पुलिस को दी, जिसके बाद संबंधित अफसरों के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज कर लिया गया।
पुलिस अब बैंक के रिकॉर्ड, लेनदेन और नकदी प्रबंधन से जुड़े दस्तावेजों की जांच कर रही है। मामला करोड़ों रुपये से जुड़ा होने के कारण बैंकिंग व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। फिलहाल पुलिस और बैंक की जांच एजेंसियां पूरे मामले की तह तक पहुंचने का प्रयास कर रही हैं। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि गबन की वास्तविक राशि कितनी है और इसमें अन्य लोगों की भूमिका रही है या नहीं।
इस मामले में एडिशनल एसपी तेर सिंह बघेल ने बताया कि थाना कोतवाली क्षेत्र स्थित पंजाब नेशनल बैंक शाखा मंदसौर में एक बड़ा गबन का मामला सामने आया है। फरियादी ने कोतवानी थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई है। मामले में 1 करोड़ की राशि का हेरफेर है। इसमें दो अनूज शर्मा और उत्कर्ष घावरी दो आरोपी है। बैंक के मुख्य प्रबंधक और डिप्टी प्रबंधक के विरुद्ध एफआईआर दर्ज की गई है। इसका घटनाक्रम दिसंबर 2025 से अभी तक के समय अवधि में हेराफेरी हुई है। मामले में अन्य आरोपी भी शामिल हो सकते हैं। जांच के बाद खुलासा हो सकेगा।
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ड्रग्स फैक्ट्री से 5 करोड़ के MDMA पकड़ाने का मामला, कोर्ट ने पुलिस के खिलाफ FIR के दिए आदेश, SP बोले- सीधे नहीं हो सकता मामला दर्ज
आगर मालवा (झालावाड़)। आगर मालवा की चर्चित एनडीपीएस कार्रवाई अब कानूनी पेंच में उलझ गई है। चौमहला न्यायालय ने इस मामले में मध्यप्रदेश पुलिस टीम के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए हैं, वहीं स्थानीय पुलिस ने न्यायालय को पत्र लिखकर स्पष्ट किया है कि आदेश में जिन धाराओं का उल्लेख है, वे असंज्ञेय प्रकृति की हैं और ऐसे मामलों में पुलिस सीधे एफआईआर दर्ज नहीं कर सकती।
जानकारी के अनुसार मध्यप्रदेश की आगर पुलिस ने डग क्षेत्र के घाटाखेड़ी में 28 जनवरी को कार्रवाई करते हुए ड्रग्स की फैक्ट्री से 5 करोड़ की एमडीएमए पकड़ी थी। इस कार्रवाई को लेकर परिवादी पक्ष ने न्यायालय में परिवाद पेश किया था। मामले की जांच रिपोर्ट और दोनों पक्षों के तर्क सुनने के बाद चौमहला न्यायालय ने कार्रवाई करने वाली आगर पुलिस टीम के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के आदेश दिए।
न्यायालय के आदेश सामने आते ही मध्यप्रदेश पुलिस महकमे में हलचल मच गई। हालांकि बाद में पुलिस ने आदेश का परीक्षण कर न्यायालय को अवगत कराया कि आदेश में जिन धाराओं का उल्लेख किया गया है, वे असंज्ञेय श्रेणी में आती हैं। पुलिस का कहना है कि ऐसे मामलों में सीधे एफआईआर दर्ज करने का प्रावधान नहीं है। इसके लिए कानूनन अलग प्रक्रिया अपनाई जाती है।
झालावाड़ एसपी ने इस मामले की जांच एएसपी भागचंद मीणा को सौंपी थी। जांच के दौरान कई ऐसे तथ्य सामने आए, जिन्होंने पूरी कार्रवाई की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगा दिए। जांच रिपोर्ट के अनुसार जिस कार्रवाई को लेकर पुलिस ने विस्तृत तलाशी, गिरफ्तारी और जब्ती का दावा किया था, उससे संबंधित कई महत्वपूर्ण बिंदुओं का रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं मिला। एमपी पुलिस ने प्रेसवार्ता में बताए गए कई सामान जब्ती दस्तावेजों में दर्ज नहीं पाए गए। साथ ही कार्रवाई के दौरान वीडियो रिकॉर्डिंग किए जाने का दावा भी जांच में पुष्ट नहीं हो सका।
11 जून को परिवादी हमीद खान की ओर से उनके अधिवक्ताओं ने न्यायालय में विस्तृत तर्क प्रस्तुत किए। अधिवक्ताओं ने कहा कि एनडीपीएस जैसी संवेदनशील कार्रवाई में स्थानीय राजस्थान पुलिस को सूचना नहीं देना, स्वतंत्र गवाहों को राजस्थान के बजाय आगर से साथ ले जाना, तलाशी, गिरफ्तारी और जब्ती की वीडियोग्राफी नहीं करना तथा प्रक्रिया संबंधित कई नियमों का पालन नहीं किया जाना कार्रवाई को संदिग्ध बनाता है
झालावाड़ एसपी अमित कुमार ने कहा कि मध्यप्रदेश पुलिस ने घाटाखेड़ी में एनडीपीएस की कार्रवाई की थी। इस मामले में चौमहला कोर्ट ने एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए हैं, लेकिन वे असंज्ञेय प्रकृति की हैं। ऐसे मामलों में पुलिस सीधे एफआईआर दर्ज नहीं कर सकती।

भोपाल। मध्य प्रदेश में स्थानीय निकाय चुनावों को लेकर सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। प्रदेश की डॉ मोहन यादव सरकार ने नगरीय निकाय चुनावों को लेकर तैयारियां शुरू कर दी हैं। इसी कड़ी में नगरीय प्रशासन विभाग ने एक बड़ा आदेश जारी करते हुए चुनाव की प्रक्रियात्मक तैयारियों को रफ्तार दे दी है।
नगरीय प्रशासन विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार, मध्य प्रदेश में 16 नगर निगमों समेत तमाम नगर पालिकाओं और नगर परिषदों में जुलाई 2027 में एक साथ चुनाव कराए जाने हैं। महापौर और अध्यक्ष पदों के आरक्षण की प्रक्रिया को सुचारू रूप से पूरा करने के लिए सरकार ने अधिकारियों की नियुक्तियां कर दी हैं। इसके तहत आयुक्त, नगरीय प्रशासन को आरक्षण प्रक्रिया के लिए अधिकृत अधिकारी (नोडल ऑफिसर) बनाया गया है।
इस बार के नगरीय निकाय चुनाव कई मायनों में बदले हुए नजर आएंगे। मोहन सरकार ने चुनाव से जुड़े नियमों में बड़ा संशोधन कर दिया है। नए संशोधन के तहत अब नगर परिषदों में अध्यक्ष पद के लिए डायरेक्ट (प्रत्यक्ष) चुनाव कराए जाएंगे। यानी अब जनता पार्षदों के बजाय सीधे अपने नगर परिषद अध्यक्ष को चुन सकेगी। सरकार के इस कदम से स्थानीय स्तर पर चुनावी समीकरण पूरी तरह बदलने की उम्मीद है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि समय रहते आरक्षण और अन्य प्रशासनिक औपचारिकताएं पूरी कर ली जाएंगी ताकि जुलाई में तय समय पर चुनाव संपन्न कराए जा सकें।
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'कार्रवाई नहीं हुई तो 16 जून को आत्मदाह करूंगा...', पटवारी ने तहसीलदार पर लगाया रिश्वत मांगने का आरोप, सौंपा इस्तीफा
शहडोल। जिले की जयसिंहनगर तहसील से एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसने प्रशासनिक महकमे में हलचल मचा दी है। जयसिंहनगर तहसील में पदस्थ पटवारी रमेश पटेल ने प्रभारी तहसीलदार सुषमा धुर्वे पर रिश्वत मांगने और मानसिक एवं आर्थिक प्रताड़ना का आरोप लगाते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपना इस्तीफा संभागायुक्त (कमिश्नर) शहडोल को सौंपते हुए मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
पटवारी रमेश पटेल ने मीडिया से चर्चा के दौरान आरोप लगाया कि नवनियुक्त एसडीएम की व्यवस्थाओं के नाम पर प्रभारी तहसीलदार द्वारा उनसे 40 हजार रुपये की मांग की गई थी। उनका कहना है कि दबाव के चलते उन्होंने 5 हजार रुपये नकद तथा 5 हजार रुपये फोन-पे के माध्यम से दिए, लेकिन इसके बाद भी लगातार शेष राशि की मांग की जाती रही।
पटवारी का आरोप है कि निर्धारित रकम नहीं देने पर पहले उनका स्थानांतरण कराया गया और बाद में उन्हें निलंबित कर दिया गया। इतना ही नहीं, निलंबन अवधि के दौरान मिलने वाला गुजारा भत्ता भी रोक दिया गया, जिससे उन्हें आर्थिक संकट का सामना करना पड़ा।
रमेश पटेल का कहना है कि लंबे समय से हो रही कथित प्रताड़ना और आर्थिक परेशानियों से तंग आकर उन्होंने नौकरी छोड़ने का फैसला लिया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि 16 जून तक दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई तो वह भोपाल स्थित मुख्यमंत्री निवास के सामने आत्मदाह करेंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
मामले के सामने आने के बाद प्रशासनिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है। वहीं, इस संबंध में प्रभारी तहसीलदार या जिला प्रशासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। अब देखना होगा कि कलेक्टर और संभागायुक्त स्तर पर इस गंभीर आरोप की जांच कर क्या कार्रवाई की जाती है।
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पंजाब नेशनल बैंक में 1 करोड़ से ज्यादा का गबन: पूर्व शाखा प्रबंधक समेत उप प्रबंधक निलंबित, FIR दर्ज
मंदसौर। मंदसौर जिले में पंजाब नेशनल बैंक के करेंसी चेस्ट से करोड़ों रुपये के गबन का सनसनीखेज मामला सामने आया है। बताया जा रहा है कि बैंक के करेंसी चेस्ट का भौतिक सत्यापन किए जाने पर नकदी में भारी कमी पाई गई। जांच के दौरान करीब 4 करोड़ 5 लाख रुपये की जगह 3.5 करोड़ रुपए मिलने की बात सामने आने के बाद बैंक प्रबंधन में हड़कंप मच गया।
प्रारंभिक जांच में करीब 1 करोड़ रुपये के गबन की पुष्टि हुई है। पूर्व शाखा प्रबंधक अनुज शर्मा और उप प्रबंधक उत्कर्ष घावरी के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। बताया जा रहा है कि करेंसी चेस्ट में रखी नकदी और अभिलेखों के मिलान के दौरान अनियमितताएं सामने आईं, जिसके बाद विस्तृत जांच शुरू की गई। बैंक अधिकारियों ने मामले की जानकारी पुलिस को दी, जिसके बाद संबंधित अफसरों के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज कर लिया गया।
पुलिस अब बैंक के रिकॉर्ड, लेनदेन और नकदी प्रबंधन से जुड़े दस्तावेजों की जांच कर रही है। मामला करोड़ों रुपये से जुड़ा होने के कारण बैंकिंग व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। फिलहाल पुलिस और बैंक की जांच एजेंसियां पूरे मामले की तह तक पहुंचने का प्रयास कर रही हैं। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि गबन की वास्तविक राशि कितनी है और इसमें अन्य लोगों की भूमिका रही है या नहीं।
इस मामले में एडिशनल एसपी तेर सिंह बघेल ने बताया कि थाना कोतवाली क्षेत्र स्थित पंजाब नेशनल बैंक शाखा मंदसौर में एक बड़ा गबन का मामला सामने आया है। फरियादी ने कोतवानी थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई है। मामले में 1 करोड़ की राशि का हेरफेर है। इसमें दो अनूज शर्मा और उत्कर्ष घावरी दो आरोपी है। बैंक के मुख्य प्रबंधक और डिप्टी प्रबंधक के विरुद्ध एफआईआर दर्ज की गई है। इसका घटनाक्रम दिसंबर 2025 से अभी तक के समय अवधि में हेराफेरी हुई है। मामले में अन्य आरोपी भी शामिल हो सकते हैं। जांच के बाद खुलासा हो सकेगा।

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निकालने के बाद गरिमा के शव को पैक कर जॉच के लिऐ भेजा गया
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