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रीवा। मध्य प्रदेश के रीवा जिले से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। जहां लोगों की सेवा के लिए इस्तेमाल होने वाला शासकीय शव वाहन कथित तौर पर बकरी चोरी में उपयोग किया गया। देर रात हुई इस घटना के बाद ग्रामीणों में आक्रोश फैल गया। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए शव वाहन के चालक को गिरफ्तार कर लिया है और चोरी की गई बकरियों को बरामद कर लिया है।
मामला गुढ़ थाना क्षेत्र के ग्राम पोखरा का है। बताया जा रहा है कि 28 मई की रात अज्ञात लोगों ने घर के बाहर बंधी छह बकरियों को चोरी कर लिया। घटना के समय परिवार के सदस्य घर के अंदर सो रहे थे। देर रात एक वाहन गांव में पहुंचा और बकरियों को उसमें भरकर ले जाया गया। आहट मिलने पर परिजन जागे और वाहन का पीछा भी किया, लेकिन आरोपी मौके से फरार हो गए।
घटना की शिकायत मिलने के बाद गुढ़ पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की। जांच के दौरान ग्रामीणों ने पुलिस को बताया कि चोरी में इस्तेमाल वाहन एंबुलेंस या शव वाहन जैसा दिखाई दे रहा था। पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों और पूछताछ के आधार पर संदेहियों तक पहुंच बनाई, जिसके बाद शासकीय शव वाहन के चालक राजेश मिश्रा का नाम सामने आया।
पुलिस ने आरोपी चालक और उसके एक साथी को हिरासत में लेकर पूछताछ की। पूछताछ में दोनों ने कथित तौर पर चोरी की वारदात में शामिल होने की बात स्वीकार की। आरोपियों की निशानदेही पर चोरी की गई छह बकरियां सीधी जिले के रामपुर नैकिन क्षेत्र के पिपराव गांव से बरामद की गईं। साथ ही चोरी में प्रयुक्त शासकीय शव वाहन को भी जब्त कर लिया गया है।
पुलिस के अनुसार प्रारंभिक जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि इस वारदात में एक संगठित गिरोह शामिल हो सकता है। पूछताछ के दौरान कुछ अन्य संदिग्धों के नाम भी सामने आए हैं, जिनकी तलाश की जा रही है। डीएसपी उदित मिश्रा कहना है कि मामले की विस्तृत जांच जारी है और जल्द ही अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार किया जाएगा। सरकारी संसाधनों के कथित दुरुपयोग से जुड़ा यह मामला कई सवाल खड़े कर रहा है। फिलहाल पुलिस ने मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर चोरी की गई बकरियां बरामद कर ली हैं, वहीं फरार आरोपियों की तलाश जारी है।

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एमपी में न्याय व्यवस्था का डिजिटल युग शुरू होने की तैयारी, अब मोबाइल जब्त करने की जरूरत नहीं
जबलपुर. मध्य प्रदेश न्यायिक और प्रशासनिक सुधारों के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक कदम उठाने की तैयारी में है. प्रदेश में इलेक्ट्रानिक रिकॉर्ड्स रूल्स-2026 को लागू करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच चुकी है. नियमों को अधिसूचित किए जाने के बाद मध्य प्रदेश देश का पहला ऐसा राज्य बन सकता है, जहां डिजिटल साक्ष्यों के संग्रहण, संरक्षण, प्रमाणीकरण और न्यायालय में प्रस्तुतिकरण की संपूर्ण व्यवस्था स्पष्ट कानूनी ढांचे के तहत संचालित होगी. इस पहल को न्याय व्यवस्था के डिजिटल युग में प्रवेश का महत्वपूर्ण अध्याय माना जा रहा है, क्योंकि अब अदालतों में केवल दस्तावेज और गवाह ही नहीं, बल्कि डेटा भी सच्चाई का महत्वपूर्ण साक्ष्य बनेगा.
तकनीकी क्रांति के इस दौर में अपराध, लेन-देन, संवाद और सामाजिक गतिविधियों का बड़ा हिस्सा डिजिटल माध्यमों पर स्थानांतरित हो चुका है. मोबाइल फोन, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, ई-मेल, सीसीटीवी कैमरे, ऑनलाइन बैंकिंग और विभिन्न डिजिटल उपकरण आज घटनाओं के प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष गवाह बन चुके हैं. ऐसे में न्यायालयों के समक्ष प्रस्तुत होने वाले साक्ष्यों का स्वरूप भी तेजी से बदल रहा है. अब सच केवल कागजों के पुलिंदों और प्रत्यक्षदर्शियों की यादों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि वह वीडियो क्लिप, चैट संदेश, ऑडियो रिकॉर्डिंग और डिजिटल ट्रांजेक्शन के रूप में भी सामने आ रहा है.
इलेक्ट्रानिक रिकॉर्ड्स रूल्स-2026 लागू होने के बाद आम नागरिकों को सबसे बड़ी राहत यह मिलेगी कि उन्हें डिजिटल साक्ष्य प्रस्तुत करने के लिए अपना मोबाइल फोन या अन्य इलेक्ट्रानिक उपकरण न्यायालय अथवा जांच एजेंसियों के पास जमा नहीं कराना पड़ेगा. वर्तमान व्यवस्था में कई मामलों में व्यक्ति को अपना मोबाइल लंबे समय तक जांच एजेंसियों के पास छोड़ना पड़ता है, जिससे उसकी व्यक्तिगत और व्यावसायिक गतिविधियां प्रभावित होती हैं. नए नियमों के तहत प्रमाणित डिजिटल रिकॉर्ड ही साक्ष्य के रूप में स्वीकार किए जाएंगे, जिससे व्यक्ति अपने उपकरण का उपयोग जारी रख सकेगा और न्यायिक प्रक्रिया भी प्रभावित नहीं होगी.
नियमों के अनुसार किसी भी डिजिटल साक्ष्य को निर्धारित पोर्टल पर अपलोड किए जाने के साथ ही उसे एक विशिष्ट पहचान संख्या और हैश वैल्यू प्रदान की जाएगी. हैश वैल्यू डिजिटल दुनिया में किसी दस्तावेज या फाइल की विशिष्ट पहचान मानी जाती है. विशेषज्ञों के अनुसार यदि किसी वीडियो, फोटो, दस्तावेज या ऑडियो फाइल में एक अक्षर, एक पिक्सेल अथवा एक बिंदु का भी परिवर्तन किया जाता है तो उसकी हैश वैल्यू बदल जाती है. इससे रिकॉर्ड के साथ छेड़छाड़ की संभावना लगभग समाप्त हो जाती है और अदालत के सामने प्रस्तुत साक्ष्य की प्रामाणिकता सुनिश्चित होती है.
न्यायिक अधिकारियों का मानना है कि नए आपराधिक कानूनों के लागू होने के बाद इलेक्ट्रानिक साक्ष्यों का महत्व पहले की तुलना में कहीं अधिक बढ़ गया है. अपराध स्थलों की वीडियोग्राफी, सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल कॉल रिकॉर्ड, लोकेशन डेटा, बैंकिंग ट्रांजेक्शन, सोशल मीडिया संवाद और डिजिटल दस्तावेज अब जांच और सुनवाई प्रक्रिया का अभिन्न हिस्सा बन चुके हैं. इतना ही नहीं, संपत्ति विवाद, व्यावसायिक अनुबंध, पारिवारिक मामलों और अन्य सिविल विवादों में भी व्हाट्सएप चैट, ई-मेल संवाद और डिजिटल रिकॉर्ड महत्वपूर्ण साक्ष्य के रूप में सामने आ रहे हैं. ऐसे में इन रिकॉर्ड्स की विश्वसनीयता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए स्पष्ट नियमों की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी.
नए नियमों की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह भी होगी कि डिजिटल साक्ष्य केवल एक वीडियो, फोटो या दस्तावेज के रूप में सुरक्षित नहीं रहेगा, बल्कि उसे एक संपूर्ण डिजिटल पैकेज के रूप में संरक्षित किया जाएगा. इस पैकेज में रिकॉर्ड अपलोड किए जाने का समय, हैश वैल्यू, तकनीकी विवरण और उससे संबंधित अन्य प्रमाणिक जानकारियां भी शामिल रहेंगी. यही पैकेज मूल इलेक्ट्रानिक रिकॉर्ड माना जाएगा. इससे साक्ष्य की श्रृंखला यानी ‘चेन ऑफ कस्टडी’ को सुरक्षित रखा जा सकेगा और अदालत में उसकी प्रमाणिकता पर उठने वाले विवादों में कमी आएगी.
व्यवस्था को अधिक सुलभ और जनसुलभ बनाने के लिए ई-सेवा केंद्रों को भी महत्वपूर्ण भूमिका दी गई है. पक्षकार, अधिवक्ता और अन्य संबंधित व्यक्ति अधिकृत केंद्रों के माध्यम से अपने डिजिटल साक्ष्य अपलोड कर सकेंगे. इससे तकनीकी जानकारी के अभाव में भी लोग आसानी से न्यायिक प्रक्रिया में भाग ले सकेंगे. ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के नागरिकों को भी इस सुविधा का लाभ मिलने की उम्मीद है.
संवेदनशील मामलों में गोपनीयता बनाए रखने पर भी विशेष ध्यान दिया गया है. विशेष रूप से यौन अपराधों और महिलाओं से जुड़े मामलों में डिजिटल रिकॉर्ड को सामान्य पोर्टल पर सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं कराया जाएगा. ऐसे रिकॉर्ड्स तक पहुंच केवल न्यायालय के नियंत्रण में रहेगी और आवश्यकता पड़ने पर निरीक्षण की सीमित अनुमति दी जा सकेगी. इससे पीड़ितों की निजता और सम्मान की रक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी.
इलेक्ट्रानिक साक्ष्यों के संबंध में लंबे समय से एक महत्वपूर्ण प्रश्न यह भी बना हुआ था कि डिजिटल रिकॉर्ड की तकनीकी जांच और सत्यापन करने वाला विशेषज्ञ कौन होगा. कई मामलों में इस विषय को लेकर न्यायालयों और अधिवक्ताओं के समक्ष व्यावहारिक कठिनाइयां उत्पन्न होती थीं. नए नियम इस अस्पष्टता को दूर करते हुए विशेषज्ञ की स्पष्ट परिभाषा और उसकी भूमिका निर्धारित करते हैं. इससे न्यायिक प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनने की उम्मीद है.
कानून और तकनीक के इस संगम को न्याय व्यवस्था के भविष्य की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है. डिजिटल रिकॉर्ड्स के बढ़ते उपयोग के बीच यह पहल न केवल न्यायिक प्रक्रिया को तेज, पारदर्शी और विश्वसनीय बनाएगी, बल्कि नागरिकों की सुविधा और अधिकारों की भी रक्षा करेगी. यदि मध्य प्रदेश इस व्यवस्था को सफलतापूर्वक लागू करने में सफल होता है तो यह मॉडल अन्य राज्यों के लिए भी मार्गदर्शक बन सकता है. बदलते समय के साथ अब अदालतों में केवल इंसानों की गवाही ही नहीं, बल्कि डेटा भी सच बोलता दिखाई देगा और न्याय की यात्रा तकनीक का हाथ थामकर भविष्य की ओर आगे बढ़ेगी.
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बिल्ली के पंजे से पहली बार फैला रेबीज, 13 साल के मासूम की मौत, दिमाग तक फैल गया था गंभीर इंफेक्शन
ग्वालियर। मध्य प्रदेश में ग्वालियर में बिल्ली के पंजा मारने से फैले रेबीज से 13 साल के मासूम की मौत हो गई। यह पहली बार है जब बिल्ली के पंजा मारने की वजह से किसी को रेबीज हो गया।
दरअसल, शिवपुरी जिले के करैरा 13 साल के बच्चे को बिल्ली ने पंजा मार दिया था। लक्षण दिखने पर उसे ग्वालियर के शासकीय कमलाराजा अस्पताल में मासूम को भर्ती कराया था। जांच में पता चला कि उसे इंफेक्शन हो गया है।
इंफेक्शन इतना बढ़ गया कि दिमाग तक फैल गया। बता दें कि इस दुर्लभ घटना से डॉक्टर भी हैरान हैं। गौरतलब है कि 2026 में अभी तक 8 रैबीज से मौत हो चुकी है।
PSM विभागाध्यक्ष डॉ. मनोज बंसल ने बताया कि केस हिस्ट्री के मुताबिक बच्चे को बाल रोग विभाग रैफर किया गया। संपर्क में रहे परिजन को भी उन्होंने एआरवी लगवाने की सलाह दी है। कोई भी पशु के काटने या पंजा मारने पर एआरवी जरूर लगवाना चाहिए। किसी अंग पर चाट लग जाए या फिर उसकी लार गिर जाए तो उसे साफ करें।

खरगोन। मध्य प्रदेश के खरगोन जिले में एक युवक की मौत पर बवाल मच गया। संदिग्ध परिस्तिथियों में युवक की मौत से ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा और पुलिस पर हमला कर दिया। ग्रामीणों ने पुलिस को दौड़ा-दौड़ाकर पीटा। इस पूरी घटना का वीडियो भी सामने आया है, जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। यह पूरा मामला चैनपुर थाना क्षेत्र का बताया जा रहा है।
मिली जानकारी के मुताबिक, चैनपुर थाना क्षेत्र के ग्राम दामखेड़ा में एक युवक का शव घर में फांसी के फंदे पर लटका मिला। जिसके बाद माहौल तनावपूर्ण हो गया। परिजनों ने युवक की हत्या की आशंका जताते हुए गांव के ही एक युवक पर जादू-टोना करने का आरोप लगाया और दामखेड़ा फाटे पर चक्काजाम कर प्रदर्शन शुरू कर दिया। प्रदर्शन के दौरान स्थिति अचानक बिगड़ गई। आक्रोशित ग्रामीणों और पुलिस के बीच झड़प हो गई।
इस घटना में पुलिसकर्मियों और अधिकारियों के साथ मारपीट की जानकारी सामने आई है, जिसका वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। हालात को काबू में करने के लिए चार थानों का पुलिस बल मौके पर तैनात किया गया। पुलिस मामले की जांच कर रही है और मृतक के परिजनों की शिकायत के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है।
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Twisha Sharma Case : गिरिबाला सिंह और समर्थ सिंह को भेजा जेल, भोपाल कोर्ट का बड़ा फैसला; CBI ने नहीं मांगी रिमांड
भोपाल के चर्चित ट्विशा शर्मा डेथ केस में जिला अदालत ने मंगलवार (2 जून) को बड़ा फैसला सुनाया। अदालत ने पूर्व जिला जज गिरिबाला सिंह और उनके बेटे समर्थ सिंह को 16 जून तक न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया है। यह आदेश सेशन जज शोभना भालवी की अदालत ने दिया।
इससे पहले 29 मई को अदालत ने दोनों आरोपियों को पांच दिन की सीबीआई रिमांड पर भेजा था। मंगलवार को रिमांड अवधि पूरी होने के बाद सीबीआई ने दोनों को कोर्ट में पेश किया। सुनवाई के बाद अदालत ने उन्हें 16 जून तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया।
सीबीआई ने 27 मई को भोपाल के कटारा हिल्स स्थित गिरिबाला सिंह के घर पर सात घंटे से अधिक पूछताछ की थी। इसके बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया। उनकी गिरफ्तारी उस समय हुई जब मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने उनकी अंतरिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी।
ट्विशा शर्मा की मौत के बाद समर्थ सिंह करीब एक सप्ताह तक लापता रहा था। इसके बाद भोपाल पुलिस ने 22 मई को उसे जबलपुर से गिरफ्तार किया था। 23 मई को उसे न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी (JMFC) की अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे पुलिस रिमांड पर भेजा गया था।
मामले की जांच अपने हाथ में लेने के बाद सीबीआई ने समर्थ सिंह से कई दौर की पूछताछ की। जांच एजेंसी उसे कटारा हिल्स स्थित घर भी लेकर गई, जहां कथित घटना हुई थी। टीम ने घटनास्थल की फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी की, साथ ही कई अहम सबूत भी जुटाए। इस दौरान 12 मई की रात हुई घटनाओं के बारे में समर्थ से विस्तार से पूछताछ की गई।
जानकारी के अनुसार 12 मई को ट्विशा शर्मा अपने ससुराल स्थित घर में फंदे से लटकी मिली थीं। घटना के बाद ट्विशा के परिजनों ने पति और ससुराल पक्ष पर दहेज प्रताड़ना के आरोप लगाए थे। इसके बाद मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठी और जांच का जिम्मा सीबीआई को सौंप दिया गया।
सीबीआई मामले के सभी पहलुओं की जांच कर रही है। जांच एजेंसी अब तक कई लोगों से पूछताछ कर चुकी है और जुटाए गए साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है।
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Dr. Mohan Yadav Cabinet : लाखों परिवारों को मिलेगी आबादी की जमीन की रजिस्ट्री, छात्रों को सिली यूनिफॉर्म देगी सरकार
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट की बैठक में आमजन से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। इनमें सबसे बड़ा फैसला स्वामित्व योजना के तहत प्रदेश के लाखों परिवारों को उनकी आबादी वाली भूमि के रजिस्ट्रीकृत दस्तावेज उपलब्ध कराने का है।
प्रदेश के एमएसएमई मंत्री चैतन्य काश्यप ने बताया कि स्वामित्व योजना के अंतर्गत ड्रोन और सैटेलाइट तकनीक के माध्यम से ग्रामीण आबादी क्षेत्रों का सर्वे कराया गया था। इस प्रक्रिया में लोगों की संपत्तियों का सीमांकन कर उन्हें स्वामित्व पत्र प्रदान किए गए। अब सरकार इन संपत्तियों का विधिवत पंजीयन कराकर रजिस्ट्रीकृत दस्तावेज भी देगी, जिससे मालिकाना हक को कानूनी मजबूती मिलेगी।
प्रदेश के 55 जिलों में करीब 48.80 लाख निजी और लगभग 19 लाख सरकारी संपत्तियों का चिन्हांकन किया गया है। सरकार ने तय किया है कि संपत्ति पंजीयन के दौरान लगने वाला पंचायत उपकर और रजिस्ट्रेशन शुल्क लाभार्थियों से नहीं लिया जाएगा। यह पूरा खर्च राज्य सरकार वहन करेगी, जिस पर लगभग 3,800 करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है।
कैबिनेट ने कक्षा पहली से आठवीं तक के विद्यार्थियों को सिली हुई यूनिफॉर्म उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है। अब तक विद्यार्थियों के खातों में डीबीटी के माध्यम से 600 रुपए भेजे जाते थे, लेकिन विभिन्न शिकायतों और व्यावहारिक समस्याओं को देखते हुए नई व्यवस्था लागू की जा रही है। इसके तहत टेंडर प्रक्रिया से कपड़ा खरीदा जाएगा और निर्धारित मानकों के अनुसार यूनिफॉर्म तैयार कर छात्रों तक पहुंचाई जाएगी।
बैठक में गेहूं खरीदी की समीक्षा भी की गई। सरकार ने दावा किया कि इस वर्ष देश में सबसे अधिक गेहूं की खरीद मध्य प्रदेश में हुई है। समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लेकर भी चर्चा हुई और बताया गया कि सुझाव लेने की प्रक्रिया 30 जुलाई तक पूरी कर ली जाएगी। इसके अलावा बरगी बांध क्रूज हादसे की न्यायिक जांच, पंचायत राज एवं उपकर कानूनों में संशोधन, फिल्म ‘तन्वी द ग्रेट’ को टैक्स फ्री करने, मेडिकल कॉलेजों के विस्तार, इंदौर जिला न्यायालय भवन की लागत बढ़ाने तथा विभिन्न संविदा नियुक्तियों को मंजूरी दी गई।
मंत्री काश्यप ने बताया कि राज्य में दूध उत्पादन बढ़कर 11 लाख लीटर प्रतिदिन तक पहुंच गया है। पशुपालकों की सहायता के लिए ‘गोरस’ मोबाइल ऐप भी लॉन्च किया गया है, जो मौसम, पशु आहार और पशुपालन संबंधी जानकारी उपलब्ध कराएगा। वहीं पीएम सूर्यघर योजना के तहत अब तक चार लाख घरों में रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाए जा चुके हैं। सरकार ने इस संख्या को छह लाख तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत भी दो लाख से अधिक जल संरचनाओं पर कार्य पूरा किया जा चुका है।

सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के उन फैसलों को पलट दिया है, जिन फैसलों के मुताबिक शादीशुदा बेटी अपने माता-पिता के परिवार में नहीं आती है और इसलिए उसे अनुकंपा लाभ नहीं मिल सकता है. जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने कहा कि विवाहित बेटी को बाहर रखना संविधान के समानता सिद्धांत के खिलाफ है। फैसले में कहा है कि माता-पिता के ना रहने पर उनपर आश्रित विवाहित पुत्री अनुकंपा रोजगार की पात्र है.
सुप्रीम कोर्ट ने साफ साफ कहा है कि अगर शादीशुदा बेटी अन्य सभी शर्तें पूरी करती है तो उसका दावा सिर्फ वैवाहिक स्थिति के आधार पर खारिज नहीं किया जा सकता.
सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उन फैसलों को पलटते हुए कहा की सिर्फ शादीशुदा होने के आधार पर किसी बेटी को अनुकंपा नियुक्ति या कल्याणकारी लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता है, अगर शादीशुदा बेटी अनुकंपा नियुक्ति की सभी शर्तें पूरी करती है तो. सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि माता-पिता के ना रहने पर उनपर आश्रित विवाहित पुत्री अनुकंपा रोजगार की पात्र है. जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने अपने फैसले में ये बातें कहीं.
पीठ ने आगे कहा कि वह बॉम्बे हाई कोर्ट और कर्नाटक हाईकोर्ट के उन सभी निर्णयों से सहमत है, जिनमें कहा गया है कि वैवाहिक स्थिति किसी पात्र पुत्री को कल्याणकारी योजना से वंचित करने का वैध आधार नहीं बन सकती है.
पीठ ने यह सब इलाहाबाद हाई कोर्ट की एक सिंगल बेंच द्वारा सर्वोच्च अदालत को भेजे गए एक संदर्भ से संबंधित है, जिसमें यह पूछा गया था कि क्या विवाहित पुत्रों के मामले में ऐसी कोई अक्षमता न होने पर भी विवाहित पुत्रियों के अनुकंपा नियुक्ति के दावों को अस्वीकार किया जा सकता है.
इस मामले में याचिकाकर्ता, जो एक विवाहित पुत्री है. उसने अनुकंपा के आधार पर उचित दुकान चलाने के लाइसेंस के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी. शादीशुदा होने के बावजूद वह अपने परिवार के साथ रहते हुए अपनी मां के साथ दुकान चलाती थी और अपनी विकलांग बहन की देखभाल करती थी. अपनी मां के निधन के बाद याचिकाकर्ता ने लाइसेंस के लिए आवेदन किया, जिसे अस्वीकार कर दिया गया था.

 

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CBSE का बड़ा एक्शन : हटाए गए चेयरमैन-सचिव, विवादित OSM टेंडर की होगी जांच ; पोर्टल पर साइबर अटैक
CBSE की नई ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली को लेकर उठे विवाद ने बड़ा मोड़ ले लिया है। छात्रों की शिकायतों और बढ़ते दबाव के बीच केंद्र सरकार ने CBSE के चेयरमैन और सचिव को उनके पदों से हटा दिया है। न्यूज एजेंसी ANI के अनुसार, OSM प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों और मूल्यांकन संबंधी शिकायतों के बाद यह कार्रवाई की गई।
सरकार ने OSM सेवा के टेंडर आवंटन और खरीद प्रक्रिया की जांच के लिए एक विशेष समिति गठित की है। जांच का मुख्य फोकस यह होगा कि डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली लागू करने में नियमों का पालन किया गया था या नहीं।
इसी बीच CBSE के री-इवैल्यूएशन पोर्टल पर बड़े पैमाने पर साइबर अटैक की भी जानकारी सामने आई है। बोर्ड के मुताबिक, मात्र दो मिनट में पोर्टल पर करीब 15 लाख एक्सेस प्रयास दर्ज किए गए, जबकि एक लाख से अधिक बार सिस्टम की फाइलों तक अनधिकृत पहुंच बनाने की कोशिश हुई।
हालांकि, साइबर हमले के बावजूद पोर्टल सामान्य रूप से काम करता रहा और दोपहर 3 बजे तक 16 हजार से अधिक छात्रों ने पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन कर दिया।
CBSE ने 13 मई को कक्षा 12वीं का परिणाम घोषित किया था। इस वर्ष पहली बार उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन पूरी तरह ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) तकनीक के जरिए किया गया। रिजल्ट जारी होने के बाद बड़ी संख्या में छात्रों ने अपने अंकों को लेकर सवाल उठाए, जिसके बाद पूरे मामले की जांच शुरू हुई।
OSM प्रणाली के खिलाफ आवाज उठाने वाले छात्र सार्थक सिद्धांत मंगलवार को संसद की स्थायी समिति के समक्ष पेश हुए। शिक्षा, महिला, बाल, युवा एवं खेल मामलों से संबंधित समिति की बैठक में उन्होंने OSM प्रणाली और टेंडर प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं पर विस्तार से अपनी बात रखी।
सूत्रों के अनुसार, सार्थक ने समिति को बताया कि उनकी रिसर्च और ब्लॉग के आधार पर OSM प्रणाली में कम से कम 15 गंभीर खामियां मौजूद हैं। इसके बाद शिक्षा मंत्रालय ने CBSE से COEMPT कंपनी को टेंडर दिए जाने के संबंध में विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
दिल्ली के छात्र वेदांत श्रीवास्तव को फिजिक्स में 65 अंक मिले थे। परिणाम पर संदेह होने पर उन्होंने पुनर्मूल्यांकन कराया, जहां उत्तर पुस्तिका में गंभीर विसंगतियां सामने आईं। शुरुआत में सोशल मीडिया पर उन्हें ट्रोलिंग और आलोचनाओं का सामना करना पड़ा, लेकिन बाद में CBSE ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए माफी मांगी।
रांची के 17 वर्षीय टेक रिसर्चर सार्थक सिद्धांत ने एक सामान्य छात्र से बढ़कर जांचकर्ता की भूमिका निभाई। उन्होंने CBSE के 576 से अधिक आधिकारिक दस्तावेजों का अध्ययन और तुलनात्मक विश्लेषण कर टेंडर प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों की ओर ध्यान आकर्षित किया।
हैदराबाद स्थित COEMPT Edutech कंपनी तेलंगाना, कर्नाटक और पश्चिम बंगाल सहित कई राज्यों में डिजिटल मूल्यांकन सेवाएं प्रदान करती है। वर्ष 2019 में यह कंपनी ग्लोबरेना टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड के नाम से जानी जाती थी।
कंपनी का नाम उस समय भी विवादों में आया था जब तेलंगाना बोर्ड परीक्षा में डेटा प्रोसेसिंग में कथित गड़बड़ियों के आरोप लगे थे। उस वर्ष करीब 9.74 लाख विद्यार्थियों में से 3 लाख से अधिक छात्र असफल घोषित किए गए थे, जिसके बाद व्यापक विरोध प्रदर्शन हुए थे।
देशभर में चर्चा का विषय बनी ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के संस्थापक अभिजीत दीपके ने सीबीएसई परीक्षा संबंधी अनियमितताओं के मुद्दे पर बड़ा आंदोलन शुरू करने का ऐलान किया है। सोमवार को जारी एक वीडियो संदेश में उन्होंने कहा कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री Dharmendra Pradhan के इस्तीफे की मांग को लेकर वह 6 जून को भारत लौटेंगे और शांतिपूर्ण जनआंदोलन की शुरुआत करेंगे।
वर्तमान में अमेरिका में रह रहे दीपके ने इंस्टाग्राम पर साझा किए गए वीडियो में छात्रों, युवाओं और समर्थकों से दिल्ली में प्रस्तावित प्रदर्शन में शामिल होने की अपील की। उन्होंने कहा कि परीक्षा प्रणाली से जुड़े लगातार विवादों और कथित गड़बड़ियों ने लाखों छात्रों के भविष्य को प्रभावित किया है, इसलिए अब जवाबदेही तय किए जाने की आवश्यकता है।
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मंदिर के गेट पर घंटी की जगह मिली लटकती लाश, इलाके में फैली सनसनी, पुलिस आत्महत्या या हत्या में उलझी
रांची के डोरंडा थाना क्षेत्र के अंतर्गत हिनू इलाके से एक स्तब्ध कर देने वाली घटना सामने आयी है. हिनू इलाके का रजिस्ट्री ऑफिस के पास रविवार को हनुमान मंदिर में घंटे की जगह एक युवक का शव झूलता हुआ मिला. हनुमान मंदिर के मुख्य गेट पर शव का लटके होने की सूचना आग की तरह फैलते ही पूरे इलाके में सनसनी फ़ैल गयी. सूचना मिलते ही डोरंडा थाना की पुलिस भी मौके पर पहुंच गयी.
डोरंडा थाना की पुलिस ने युवक के शव को पोस्टमार्टम के लिए रिम्स अस्पताल भेज दिया है. पुलिस सभी बिंदुओं पर जांच कर रही है कि जैसे यह हत्या है या फिर आत्महत्या.
निबंधन कार्यालय के हनुमान मंदिर के समीप से स्थानीय लोग गुजर रहे थे कि तभी कुछ लोगों की नजर मंदिर के मुख्य द्वार पर एक युवक की फंदे से लटकती हुई बॉडी दिखाई दी, पास जाने पर पता चला कि वह एक लाश है जिसके बाद यह खबर पूरे क्षेत्र में सनसनी की तरह फैल गई. मंदिर के मुख्य गेट के लोहे के एंगल से फंदे पर लटका हुआ एक युवक का शव की पहचान निचले हिनू निवासी सोनू कुमार के रूप में हुई है। इसके बाद इस खबर की सूचना पुलिस को दे दी गई.
स्थानीय लोगों के मुताबिक, सोनू एक टेंट हाउस में मजदूरी करता था और उसके पिता की भी मृत्यु पहले ही हो चुकी है. मृतक सोनू हमेशा नशे में डूबा रहता था. वहीं पुलिस का कहना है कि जांच के हर पहलू पर काम किया जा रहा है और जल्द ही मामले की सच्चाई सामने लाने की कोशिश की जाएगी।
पुलिस के अनुसार, प्रथम दृष्टया मामला आत्महत्या का प्रतीत होता है पर पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही खुलासा हो पाएगा कि यह घटना सुनियोजित हत्या है या फिर युवक ने आत्महत्या की है. मृतक युवक की मां पिंकी देवी मजदूरी कर घर का भरण-पोषण करती हैं. सोनू की मां के अलावे दो भाई और एक बहन भी है.

शहडोल। मध्य प्रदेश के शहडोल जिले के पपौंध थाना क्षेत्र से बेहद हृदयविदारक खबर सामने आई है। यहां बरा बघेलहा गांव में घर के पास खेल रहे दो मासूम बच्चों की कुएं में डूबने से दर्दनाक मौत हो गई। रिश्ते में ये दोनों मासूम सगे चाचा और भतीजे थे, जिनकी उम्र महज 4-4 वर्ष थी। इस खौफनाक हादसे ने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया है। पपौंध थाना क्षेत्र में एक ही दिन में हुई दो बड़ी त्रासदियों में कुल 6 लोगों की मौत से दो गांवों में मातम पसरा हुआ है।
दिल को झकझोर देने वाली यह घटना पपौंध थाना क्षेत्र के बरा बघेलहा गांव की है। जानकारी के मुताबिक 4 वर्षीय किशन कोल चाचा और उसका 4 वर्षीय भतीजा सत्यम कोल घर के आंगन के पास खेल रहे थे। खेलते-खेलते दोनों बच्चे वहां स्थित कुएं के बिल्कुल नजदीक पहुंच गए।
आशंका जताई जा रही है कि खेलते समय अचानक दोनों मासूमों का पैर फिसल गया और वे पानी से भरे गहरे कुएं में जा गिरे। काफी देर तक जब बच्चों की आवाज नहीं आई तो परिजनों ने उनकी तलाश शुरू की। जब कुएं में देखा गया तो दोनों के शव पानी में तैर रहे थे। मासूमों को बाहर निकाला गया लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी।
चाचा-भतीजे की मौत से पहले हृदयविदारक घटना सामने आ चुकी है। पपौंध थाना क्षेत्र के ही हिरवार गांव से एक सामूहिक मौत की खबर आ चुकी है। जहां एक बेबस मां ने अपनी तीन मासूम बेटियों के साथ जहर पीकर आत्महत्या कर ली थी। जहर का असर इतना घातक था कि चारों की मौके पर ही मौत हो गई। सामूहिक खुदकुशी के इस खौफनाक कदम के पीछे की वजहों का अभी पता नहीं चल पाया है।
महज कुछ ही घंटों के भीतर हिरवार और बरा बघेलहा गांवों में कुल 6 लोगों की मौत से पूरे क्षेत्र में सन्नाटा पसरा हुआ है। कई घरों में चूल्हे तक नहीं जले हैं। घटना की सूचना मिलते ही पपौंध थाना पुलिस मौके पर पहुंची और सभी शवों को पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया। पुलिस प्रशासन का कहना है कि दोनों ही घटनाएं बेहद संवेदनशील और गंभीर हैं। मासूम चाचा-भतीजे की कुएं में डूबने से हुई मौत और मां-बेटियों द्वारा किए गए सामूहिक सुसाइड, दोनों मामलों की अलग-अलग मर्ग कायम कर बारीकी से जांच की जा रही है।

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पेट्रोल पंप बेचने के नाम पर 88 लाख की ठगी: पंप किसी और को बेचा, दो के खिलाफ FIR दर्ज
जबलपुर। मध्य प्रदेश के जबलपुर से जालसाजी और धोखाधड़ी का एक बड़ा मामला सामने आया है। यहां कटंगी कुसली स्थित एक पेट्रोल पंप को बेचने के नाम पर युवक से 88 लाख रूपए की मोटी रकम ऐंठ ली गई। पूरी रकम वसूलने के बाद भी जब पेट्रोल पंप खरीदार के नाम नहीं किया गया और उसे किसी तीसरे व्यक्ति को बेचने की तैयारी कर ली गई, तब जाकर इस पूरी ठगी का खुलासा हुआ। पीड़ित की शिकायत पर अधारताल थाना पुलिस ने दो आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
धोखाधड़ी का यह पूरा खेल 10 मार्च 2025 को शुरू हुआ था। कटंगी कुसली स्थित एक पेट्रोल पंप को बेचने के लिए दीपिका सिंह राजपूत और अनिकेत सिंह राजपूत ने पीड़ित विशाल के साथ 88 लाख रुपये में सौदा तय किया था। दोनों पक्षों के बीच एक एग्रीमेंट भी हुआ था, जिसके तहत यह तय पाया गया कि पूरी रकम मिलने के बाद पेट्रोल पंप आधिकारिक तौर पर विशाल के नाम ट्रांसफर कर दिया जाएगा।
एग्रीमेंट की शर्तों के मुताबिक पीड़ित विशाल ने आरोपियों पर भरोसा करते हुए RTGS, बैंक चेक और UPI जैसे अलग-अलग माध्यमों से कुल 88 लाख रुपये का पूरा भुगतान कर दिया।
पूरी रकम चुकाने के बाद भी दीपिका सिंह राजपूत और अनिकेत सिंह राजपूत ने पेट्रोल पंप विशाल के नाम करने में टालमटोल शुरू कर दी। इसी बीच दिसंबर 2025 में विशाल को भनक लगी कि आरोपियों ने वह पेट्रोल पंप किसी और दूसरे व्यक्ति को बेच दिया है।
धोखाधड़ी का अहसास होने पर पीड़ित विशाल ने आरोपियों से अपने 88 लाख रुपये वापस करने की मांग की। लेकिन पूरी रकम डकार चुके दीपिका और अनिकेत सिंह राजपूत लगातार पैसे लौटाने के नाम पर बहानेबाजी और टालमटोल करते रहे।
आखिरकार परेशान होकर पीड़ित ने न्याय के लिए अधारताल थाने का दरवाजा खटखटाया और मामले की लिखित शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने प्रारंभिक जांच के बाद दोनों आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी और अन्य संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। अधारताल थाना पुलिस का कहना है कि आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया है और पूरे मामले की बारीकी से जांच की जा रही है।
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भारत सिंह हत्याकांडः मृतक की पत्नी और उसके कथित प्रेमी को पुलिस ने किया गिरफ्तार
नागदा(उज्जैन)। जिले के उन्हेल थाना क्षेत्र में हुए भारत सिंह हत्या मामले पुलिस ने 24 घंटे के भीतर खुलासा करते हुए मृतक की पत्नी और उसके कथित प्रेमी को गिरफ्तार कर लिया है।
दरअसल ग्राम पिपलियाडाबी निवासी भारत सिंह राजपूत का शव 30 मई को उसके खेत में मिला था। सिर पर गंभीर चोट के निशान मिलने के बाद पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी। पुलिस जांच में मृतक की पत्नी सोनाकुंवर और गांव के जितेंद्र सिंह के बीच प्रेम संबंध सामने आए। पूछताछ में दोनों ने हत्या की साजिश रचने और वारदात को अंजाम देने की बात स्वीकार की, जिसके बाद पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस के अनुसार, जितेंद्र सिंह ने भारत सिंह को शराब पिलाने के बहाने खेत पर बुलाया और पत्थर से हमला कर उसकी हत्या कर दी। हत्या के पीछे प्रेम संबंध और जमीन बेचने को लेकर विवाद की बात सामने आई है। वहीं मृतक भारत के परिजनों का कहना है कि हत्या की इस वारदात में अन्य लोगों की भूमिका भी हो सकती है। परिजनों ने पुलिस से मामले की गहराई से जांच कर सभी संभावित आरोपियों को सामने लाने की मांग की है। फिलहाल पुलिस गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर रही है और मामले में आगे की जांच जारी है।

ग्वालियर की इंदरगंज थाना पुलिस ने सूने मकान में सोने चांदी के गहने चोरी करने वाले गिरोह के दो सदस्यों को लाखों के चोरी के माल सहित गिरफ्तार किया है, इनके पास से 200 ग्राम सोने का टुकड़ा, 50 ग्राम सोने की चूडी, 12 किलो 500 ग्राम चांदी और एक आई-20 कार पुलिस ने जब्त की है, आरोपियों ने चोरी का माल शहर से दूर जंगल में जमीन में गाड़कर दबा दिया था।
एडिशनल एसपी अनु बेनीवाल ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि 5 मई को अजय शंकर मित्तल नामक व्यक्ति ने इंदरगंज थाने में एक शिकायत दर्ज कराई थी जिसमें उन्होंने बताया था कि बताया उनके सूने घर का ताला तोड़कर किसी ने सोने चांदी के जेवर चोरी कर लिए हैं, लाखों रुपये के गहने चोरी होने की शिकायत पुलिस ने दर्ज कर तत्काल इसपर एक्शन शुरू किया ।
पुलिस ने जब तफ्तीश शुरू की तो मालूम चला कि लोकल गैंग ने चोरी की है इसमें एक नाबालिग भी शामिल है, पुलिस ने कुछ संदेहियों को पकड़ा तो उसे अच्छी सफलता मिली, पुलिस के हाथ गिरोह का मास्टर माइंड आकाश माहौर, व एक बाल अपचारी आया, इनसे पूछताछ करने पर चोरी की घटना करना स्वीकार किया, पुलिस ने इनके कब्जे से करीब 6 लाख रुपये की 2 किलो पक्की चांदी, 9 हजार रुपये की एक जोड़ी चांदी की पायल, 75 हजार रुपये कीमत की एक सोने की चेन और 42 हजार रुपये कीमत की 2 सोने की अंगूठी जब्त की, इन लोगों ने कुछ सोना बेच दिया था, पुलिस ने व्यापारी विशाल सोनी को भी पकड़ लिया
पुलिस इस गिरोह के अन्य साथियों की भी तलाश में थी, आईपीएस अनु बेनीवाल ने बताया कि फरार आरोपियों को पकड़ने के लिए सीएसपी रोबिन जैन और इंदरगंज थाना प्रभारी इंस्पेक्टर दीप्ती तोमर को निर्देश दिए गए उन्होंने टीमें लगाकर मुखबिर तंत्र मजबूत किया और पुलिस को आरोपियों के बारे में पुख्ता जानकारी मिली जिसके बाद दो संदेहियों विवेक प्रजापति व फरमान खान को पकड़ लिए, पूछताछ में ये उसी गिरोह के सदस्य निकले जिन्होंने सूने मकान से चोरी की थी।
पुलिस की कड़ी पूछताछ में आरोपी विवेक प्रजापति व फरमान खान ने शहर से दूर पनिहार टोल के आगे दरगाह के सामने जंगल में पत्थरों से जमीन में सोने चांदी दबाकर रखने की बात कही जिसपर पुलिस वहां पहुंची और जेवर निकाल लिए। पुलिस ने दोनों आरोपियों द्वारा छिपाए गए करीब 32 लाख रुपये का 200 ग्राम सोने का टुकड़ा , 07 लाख 50 हजार कीमत की 50 ग्राम सोने की चूडी, लगभग 37 लाख 50 हजार रुपये कीमत की 12 किलो 500 ग्राम चांदी जब्त कर ली।
पुलिस ने जब घटना में उपयोग की गई आई – 20 कार के बारे में पूछताछ की तो आरोपियों ने बताया कि चोरी के गहने बेचकर 8 लाख 65 हजार रुपये मिले थे जिसमें से 5 लाख रुपये में रॉयल कार बाजार शिवपुरी लिंक रोड से पुरानी आई 20 कार खरीद ली, पुलिस ने आरोपियों के बताने पर कार को कम्पू नेहरु पार्क के पास पार्किंग से जब्त कर लिया।
पुलिस ने गिरोह के चार सदस्यों को गिरफ्तार किया हिया जिसमें एक बाल अपचारी यानि नाबालिग है साथ ही चोरी के जेवर खरीदने वाले सराफा कारोबारी को भी पकड़ा है। पुलिस ने चोरों के पास से करीब 94 लाख 25 हजार का मशरुका जब्त किया है, पुलिस आरोपियों से अन्य चोरियों के बारे में भी पता कर रही है और आरोपियों का रिकॉर्ड खंगाल रही है।
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मध्य प्रदेश में कमर्शियल LPG सिलेंडर हुआ महंगा, रसोई से लेकर रेस्टोरेंट तक बिगड़ा बजट
मध्य प्रदेश। नए महीने की शुरुआत के साथ ही मध्य प्रदेश में कमर्शियल LPG उपभोक्ताओं को महंगाई का नया झटका लगा है। तेल कंपनियों ने 19 किलोग्राम वाले गैस सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी कर दी है, जिसके बाद राज्य के प्रमुख शहरों में रेट फिर से ऊपर पहुंच गए हैं। भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर और उज्जैन में सिलेंडर की नई कीमतें लागू हो चुकी हैं। इस बढ़ोतरी का सीधा असर होटल, ढाबों और रेस्टोरेंट कारोबार पर पड़ रहा है, जहां खाने की लागत लगातार बढ़ती जा रही है। व्यापारियों का कहना है कि इससे आम लोगों की जेब पर भी दबाव बढ़ेगा।
मध्य प्रदेश में कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमतें पिछले कुछ महीनों से लगातार बढ़ रही हैं। इस बढ़ोतरी ने होटल और रेस्टोरेंट व्यवसाय को मुश्किल में डाल दिया है। कारोबारियों का कहना है कि हर महीने बदलती कीमतों के कारण लागत का सही अनुमान लगाना मुश्किल हो गया है। कई जगहों पर खाने पीने की चीजों की कीमतों में पहले ही बढ़ोतरी की जा चुकी है और आगे भी कीमतें बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।
राज्य के अलग अलग शहरों में कमर्शियल LPG सिलेंडर के नए दाम लागू हो गए हैं। भोपाल में अब 19 किलो का सिलेंडर लगभग 3116 रुपए में मिल रहा है। इंदौर में इसकी कीमत 3220 रुपए से ऊपर पहुंच गई है। वहीं जबलपुर में यह करीब 3290 रुपए, ग्वालियर में 3338 रुपए और उज्जैन में 3250 रुपए के आसपास पहुंच गया है। इन बढ़ी हुई कीमतों का सीधा असर स्थानीय व्यापार और खाने-पीने की सेवाओं पर दिखने लगा है।
होटल और रेस्टोरेंट संचालकों का कहना है कि गैस की कीमतों में बार बार हो रही बढ़ोतरी से उनका मुनाफा कम होता जा रहा है। कई कारोबारियों ने बताया कि पिछले कुछ महीनों में खाने की लागत 10 से 15 प्रतिशत तक बढ़ चुकी है। कुछ जगहों पर तो मेन्यू की कीमतों में भी बदलाव किया गया है ताकि खर्चों को संतुलित किया जा सके। व्यापारियों का मानना है कि अगर यही स्थिति रही तो आने वाले समय में ग्राहकों को और ज्यादा महंगाई झेलनी पड़ेगी।
शादी और बड़े आयोजनों में कैटरिंग का काम करने वाले लोगों पर भी इस बढ़ोतरी का असर साफ दिखाई दे रहा है। कैटरिंग व्यवसाय से जुड़े लोगों के अनुसार, पहले जहां एक बड़े आयोजन का खर्च निश्चित रहता था, अब उसमें लगातार बढ़ोतरी हो रही है। हजारों लोगों के खाने का बजट कई हजार रुपए तक बढ़ गया है, जिससे ऑर्डर मैनेज करना मुश्किल हो रहा है।
आम घरों में इस्तेमाल होने वाले 14.2 किलो वाले घरेलू LPG सिलेंडर की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है, जिससे आम उपभोक्ताओं को थोड़ी राहत मिली है लेकिन कमर्शियल सिलेंडर की बढ़ती कीमतें होटल और व्यापारिक क्षेत्र पर असर डाल रही हैं। छोटे 5 किलो वाले सिलेंडर की कीमत में भी हल्की बढ़ोतरी हुई है, जिससे छोटे कारोबारियों पर अतिरिक्त बोझ बढ़ गया है।
पिछले कुछ महीनों में कमर्शियल LPG की कीमतों में कई बार बढ़ोतरी हो चुकी है। इस वजह से खाने पीने की चीजों की कीमतें भी बढ़ने लगी हैं। कारोबारियों का कहना है कि अगर यही ट्रेंड जारी रहा तो आने वाले समय में होटल और रेस्टोरेंट में खाना और महंगा हो सकता है। इसका असर सीधे आम जनता की जेब पर पड़ेगा और बाहर खाना और महंगा हो जाएगा।
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होटल में ‘लव जिहाद’ को लेकर वीएचपी का उग्र प्रदर्शनः संचालक पूर्व तहसीलदार पर NSA लगाने की मांग
जबलपुर। संस्कारधानी जबलपुर में होटल में कथित ‘लव जिहाद’ और अनैतिक गतिविधियों को लेकर विश्व हिंदू परिषद (VHP) और बजरंग दल ने मोर्चा खोल दिया है। कार्यकर्ताओं ने पूर्व तहसीलदार विवेक त्रिपाठी के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) लगाने की मांग को लेकर जिला प्रशासन के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही आरोपी पर कड़ी कार्रवाई नहीं हुई, तो बड़े स्तर पर चक्काजाम किया जाएगा।
दरअसल, पिछले दिनों रांझी थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले होटल सुकून (Hotel SUKOON) में बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने दबिश दी थी। आरोप है कि यहाँ एक हिंदू लड़की को मुस्लिम युवक के साथ पकड़ा गया था। मामला सामने आने और हिंदूवादी संगठनों के भारी विरोध के बाद जिला प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए होटल को सील कर दिया था। विश्व हिंदू परिषद का आरोप है कि पूर्व तहसीलदार विवेक त्रिपाठी के इस होटल में लंबे समय से अय्याशी का अड्डा और अनैतिक कार्य संचालित किए जा रहे थे।
प्रदर्शन के दौरान विहिप ने पूर्व तहसीलदार के एक अन्य उपक्रम ‘निसर्ग रिसोर्ट एवं वॉटर पार्क’ का मुद्दा भी उठाया। कार्यकर्ताओं ने याद दिलाया कि पिछले दिनों इस रिसोर्ट में करंट लगने के कारण साजन विश्वकर्मा नाम के एक युवक की दर्दनाक मौत हो गई थी। संगठन ने आरोप लगाया कि पूर्व तहसीलदार कई होटलों में अवैध और अनैतिक गतिविधियां चला रहे हैं, जिन पर प्रशासन को निष्पक्ष और सख्त जांच करनी चाहिए।
विश्व हिंदू परिषद ने जिला प्रशासन को अल्टीमेटम देते हुए कहा है कि इस पूरे सिंडिकेट की गहराई से जांच होनी चाहिए। इस हाई-प्रोफाइल मामले के बाद पुलिस और प्रशासन अलर्ट मोड पर है और होटल की पुरानी कड़ियों को खंगाला जा रहा है।

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गरिमा के जन्म के 15 मिनिट बाद का फोटो
गरिमा के जन्म के 15 मिनिट बाद का फोटो
गरिमा के 1 वर्ष बाद का फोटो
गरिमा के 1 वर्ष बाद का फोटो
गरिमा के 2 वर्ष बाद का फोटो
गरिमा के 2 वर्ष बाद का फोटो
बीमार होने के बाद भोपाल अस्पताल मे भर्ती गरिमा
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हाई कोर्ट के आदेश के बाद गरिमा के शव को जमीन से निकालते हुऐ
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निकालने के बाद गरिमा के शव को पैक कर जॉच के लिऐ भेजा गया
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दोषी डॉक्टर के खिलाफ मामला कायम कराने के लिऐ पुलिस अधिक्षक से मिले पत्रकार
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गरिमा के शव की जॉच होने के बाद पुनः उसी स्थान पर चबूतरा का निर्माण किया गया
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पूजा स्थल मे गरिमा
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