


ग्वालियर। एमपी के ग्वालियर में एडवोकेट मृत्युंजय चौहान सुसाइड केस में एक आरक्षक और एसआई पर मामला दर्ज किया गया है। आत्महत्या के लिए उकसाने पर पुलिस ने केस दर्ज किया है। मृतक ने बीते 15 दिसंबर को फांसी के फंदे पर लटककर अपनी जान दे दी थी। यह पूरी घटना गोला का मंदिर थाना क्षेत्र के आदर्श नगर में हुई थी।
दरअसल, वकील मृत्युंजय चौहान का शव किराए के मकान में फांसी पर लटका मिला था। सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर जांच शुरू की। आत्महत्या से पहले मृतक ने एक युवती के साथ सोशल मीडिया पर पोस्ट किया था। जिसमें लिखा था ‘प्रेम में मुक्ति नहीं मृत्यु है।’ पोस्ट से मामला प्रेम प्रसंग से जुड़ा और जांच आगे बढ़ी।
बताया जा रहा है कि मुरैना में पदस्थ महिला सब इंस्पेक्टर (युवती) के साथ मृतक का पांच साल से प्रेम प्रसंग चल रहा था। दोनों की 30 दिसंबर 2025 को शादी भी होने वाली थी, लेकिन इससे पहले ही वकील ने आत्महत्या कर ली। यह भी बताया गया कि एडवोकेट मृत्युंजय ने अपनी गर्लफ्रेंड को कमरे में एक आरक्षक के साथ पकड़ा था।
वहीं इस पूरे मामले में अब पुलिस ने कार्रवाई की है। मुरैना में पदस्थ आरक्षक अराफत खान और एसआई प्रीति जादौन पर आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज किया है। गोला का मंदिर थाना पुलिस ने दोनों के खिलाफ FIR दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी है। फिलहाल दोनों पुलिसकर्मियों से पूछताछ की जा रही है।
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कार्तिक मेला ग्राउंड में दो गुटों में हुई झड़प, जमकर चले लाठी डंडे, पुलिसकर्मी घायल
उज्जैन। शिप्रा नदी के किनारे कार्तिक मेला ग्राउंड में मंगलवार को उपद्रव देखने को मिला। यहां 2 गुटों में जमकर लाठी डंडे चले। यहां पारदी , सांठीया, कंजर औऱ गाडोलिए समुदाय के ढेरों में विवाद हुआ है। मामला शांत करने के लिए बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी पहुंचे। इस दौरान गिरने से एक पुलिसकर्मी घायल भी हुआ । घटना में घायल लोगों को उपचार के लिए जिला चिकित्सालय भेजा। हालांकि मामले में अभी तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है।
दरअसल शिप्रा नदी के किनारे कार्तिक मेला ग्राउंड में कई समाज के डेरे हैं। यह लोग यहां पर तंबू लगाकर रहते हैं और महाकाल मंदिर और काल भैरव मंदिर क्षेत्र में अलग-अलग प्रकार का व्यापार व्यवसाय करते हैं। कुछ लोग फेरी लगाकर धार्मिक सामग्रियां बेचते हैं। माला रुद्राक्ष व अन्य प्रकार की सामग्री बेची जाती है। इसके साथ ही कुछ लोग भिक्षा भी मांगते हैं।
मंगलवार शाम करीब आधा दर्जन युवक यहां बैठकर शराब पी रहे थे। यह युवक अलग-अलग डेरे से थे। इनमें आपस में विवाद हुआ। विवाद इतना बढ़ा कि डेरों से बड़ी संख्या में महिला-पुरुष बाहर आ गए और आपस में मारपीट शुरू कर दी। जमकर लाठी डंडे व लात घूसे चले और पत्थरबाजी भी हुई। इस दौरान कुछ लोग घायल भी हो गए जिन्हें मामूली चोट आई है। घायलों को प्राथमिक उपचार दिया गया है।
थाना प्रभारी गगन बादल ने बताया कि शिप्रा नदी के पास खुला मैदान में अलग-अलग समाज के लोग तंबू लगाकर रहते हैं। ये लोग माला बेचना, भिक्षावृत्ति व फेरी लगाकर काम करते है। आपसी विवाद में दो लोगों को चोट आई है। गिरने से एक पुलिसकर्मी भी घायल हुआ है। दोनों पक्षों के करीब आधा दर्जन लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया जा रहा है।
सीएसपी राहुल देशमुख ने बताया कि कार्तिक मेला ग्राउंड में करीब आधा दर्जन युवक शराब पी रहे थे। इस दौरान उन्होंने आपस में विवाद शुरू कर दिया और लाठी डंडों से एक दूसरे पर हमला शुरू कर दिया। कुछ लोग घायल हुए है जिन्हें उपचार दिया जा रहा है। हालांकि अभी किसी को भी हिरासत में नहीं लिया गया है। मामले की जांच की जा रही है।
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बड़ी खबर: धर्मांतरण और अवैध मस्जिद निर्माण को लेकर तनाव, विवादित ढांचे को गिराने की कोशिश
सतना। जिले के धारकुण्डी थाना क्षेत्र अंतर्गत झखौरा ग्राम में धर्मांतरण और अवैध मस्जिद निर्माण का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। प्रशासन की ओर से विवादित मस्जिद नुमा मकान को सील करने के बाद आज विश्व हिंदू परिषद ने महापंचायत का आयोजन किया। लेकिन महापंचायत में स्थिति उस समय तनावपूर्ण हो गई, जब बड़ी संख्या में बजरंग दल के कार्यकर्ता विवादित ढांचे को गिराने के लिए कूच कर गए।
दरअसल, मामला संज्ञान में आते ही मझगवां एसडीएम आईएएस महिपाल सिंह गुर्जर ने बड़ी कार्रवाई करते हुए झखौरा स्थित विवादित मस्जिद नुमा मकान को पूरी तरह से सील कर दिया था। प्रशासन ने इस भवन के उपयोग पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाते हुए वहां ताले लटका दिए हैं। यह मामला तब प्रकाश में आया था जब स्थानीय निवासी पंकज पाठक की शिकायत पर पुलिस ने जांच शुरू की थी।
जांच में खुलासा हुआ कि लालमन चौधरी उर्फ अब्दुल रहमान, विजय भारती उर्फ मोहम्मद उमर और दीनानाथ चौधरी उर्फ अब्दुल्ला ने आर्थिक लालच में धर्म परिवर्तन किया था। मुख्य आरोपी लालमन के खाते में विदेशों से 8 से 9 लाख रुपये की फंडिंग भी पाई गई थी। जिसका उपयोग गांव में मस्जिद निर्माण के लिए किया जा रहा था। धारकुण्डी पुलिस ने आरोपियों को पहले ही जेल भेज दिया है।
इसे लेकर बुधवार को विश्व हिंदू परिषद ने गांव में महापंचायत का आयोजन किया। बजरंग दल का दावा है कि जिस गांव में एक भी मुस्लिम परिवार नहीं है, वहां अवैध मस्जिद का निर्माण केवल भोले-भाले हिंदुओं के धर्मांतरण के उद्देश्य से किया जा रहा था। महापंचायत के दौरान एकत्रित हुए सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने विवादित ढांचे को गिराने की मांग को लेकर सभा स्थल से गांव की ओर कूच कर दिया। भारी संख्या में प्रदर्शनकारियों के आगे बढ़ने से मौके पर अफरा-तफरी मच गई।
पुलिस बल ने भारी मशक्कत के बाद कार्यकर्ताओं को विवादित ढांचे से करीब 200 मीटर पहले ही रोक लिया। अधिकारियों की काफी समझाइश के बाद कार्यकर्ता वापस सभा स्थल की ओर लौटे। विश्व हिंदू परिषद ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि इस अवैध मस्जिद को जल्द ही पूरी तरह ध्वस्त नहीं किया गया, तो वे आने वाले दिनों में और भी उग्र आंदोलन करेंगे। हिंदू पंचायत में विहिप कार्यकर्ताओं के साथ झखौरा के ग्रामवासी बड़ी संख्या में मौजूद रहे। मझगांव एसडीएम महिपाल सिंह गुर्जर ने बताया कि झखौरा में एक विवादित स्ट्रक्चर है। हम बराबर इस पर कार्रवाई कर रहे है। हटाने के लिए पंचायत के द्वारा नोटिस दिया गया है। प्रक्रिया के तहत आगे की कार्रवाई की जाएगी।
सतना। मध्य प्रदेश के सतना शहर के सिविल लाइन थाना अंतर्गत अमौधा स्थित सीएमए विद्यालय में एक बेहद चिंताजनक और संवेदनशील मामला सामने आया है, जहां होमवर्क नहीं करने पर एक शिक्षिका द्वारा मासूम छात्रा को थप्पड़ मारने का आरोप लगा है। बताया जा रहा है कि थप्पड़ लगने से छात्रा संतुलन खो बैठी और गिर गई, जिससे उसका हाथ फ्रैक्चर हो गया।
घटना के बाद क्षेत्र में आक्रोश का माहौल है। पीड़ित छात्रा यूकेजी कक्षा में पढ़ती है और चौहान नगर पतेरी निवासी संजय शर्मा की बेटी है। परिजनों के अनुसार बच्ची स्कूल में सामान्य रूप से पढ़ाई करने गई थी। लेकिन होमवर्क पूरा न होने पर इंग्लिश विषय पढ़ाने वाली शिक्षिका सपना खरे ने उसे थप्पड़ मार दिया। अचानक लगे थप्पड़ से बच्ची गिर पड़ी और गंभीर रूप से घायल हो गई। बाद में चिकित्सकीय जांच में उसके हाथ में फ्रैक्चर की पुष्टि हुई। घटना की जानकारी मिलते ही बच्ची के पिता संजय शर्मा अमौधा थाने पहुंचे और मामले की शिकायत दर्ज कराई।
उन्होंने आरोप लगाया कि विद्यालय में बच्चों के साथ अनुशासन के नाम पर शारीरिक हिंसा की जा रही है, जो पूरी तरह से गलत और कानूनन अपराध है। परिजनों ने दोषी शिक्षिका के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। मामले को लेकर विद्यालय प्रबंधन की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। आरोप है कि घटना के बाद जब परिजनों ने सीसीटीवी फुटेज की मांग की तो विद्यालय प्रबंधन ने उसे देने से साफ इंकार कर दिया। वहीं विद्यालय की प्राचार्य ने इस पूरे मामले पर मीडिया से दूरी बनाए रखी और कोई स्पष्ट बयान देने से बचते नजर आए।
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एमपी हाईकोर्ट ने कलेक्टर पर लगाया 2 लाख का जुर्माना, मनमानी पर दी कड़ी सजा
जबलपुर मध्यप्रदेश में अफसरशाही पर कोर्ट लगातार सख्त रवैया अपना रहा है। अधिकारियों की मनमानी पर कड़ी टिप्पणी भी कर रहा है। ऐसे ही एक मामले में हाईकोर्ट ने शहडोल के कलेक्टर केदार सिंह पर जुर्माना लगा दिया है। राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम एनएसए के दुरुपयोग पर कलेक्टर पर कोर्ट ने ये कार्रवाई की है। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने मामले में कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसा लगता है कि कलेक्टर महाभारत की गांधारी की तरह आंखों पर पट्टी बांधकर काम कर रहे हैं।
शहडोल के कलेक्टर डॉक्टर केदार सिंह ने जिले के एक युवक पर सख्ती दिखाते हुए उसपर राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम(NSA) की धारा लगाते हुए जेल भेज दिया था। शहडोल के व्यवहारी तहसील में बुढ़वा के युवा सुशांत सिंह बैस पर ये कार्रवाई की गई थी। उन्होंने रेत के अवैध उत्खनन की कई शिकायतेें की थीं।
इससे गुस्साए रेत माफिया ने सुशांत सिंह बैस के खिलाफ ही रेत चोरी व अन्य केस दर्ज करवा दिए। इतना ही नहीं, रेत माफिया के दबाव में पुलिस ने उनके खिलाफ एनएसए की कार्रवाई का प्रस्ताव शहडोल कलेक्टर डॉक्टर केदार सिंह के पास भेज दिया। कलेक्टर के आदेश के बाद सुशांत बैस को गिरफ्तार कर लिया गया। उनके पिता हीरामणि बैस ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की।
हालांकि इस बीच सुशांत सिंह को रिहा कर दिया गया लेकिन कलेक्टर द्वारा गलत तरीके से एनएसए लगाने का विरोध किया गया। कोर्ट ने शहडोल कलेक्टर से जवाब तलब किया तो सफाई दी कि दूसरे आरोपी की जगह गलती से सुशांत बैस का नाम दर्ज हो गया था।
हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस विवेक अग्रवाल और एके सिंह की डबल बेंच ने मामले की सुनवाई के बाद फैसला सुनाते हुए शहडोल कलेक्टर को फटकार लगाई। कोर्ट ने कलेक्टर केदार सिंह को अपनी व्यक्तिगत राशि से दो लाख रुपए का जुर्माना भरने का आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि ऐसा लगता है कि कलेक्टर मानो प्राइवेट कंपनी के कर्मचारी बन गए। राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत केवल तब कार्रवाई की जा सकती है जब देश की सुरक्षा के लिए खतरा पैदा हो रहा हो।
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गुंडों के साथ ससुराल पहुंची दुल्हन: दहेज की बाइक बांधकर ले गई, सास-ससुर ने मारपीट के लगाए आरोप
छतरपुर। मध्य प्रदेश के छतरपुर में बुधवार को पारिवारिक विवाद की वजह से बहू का खौफनाक रूप देखने को मिला। नवविवाहिता अपने पिता और कथित गुंडों के साथ ससुराल पहुंची। दहेज में दी गई बाइक को बांधकर घसीटते हुए अपने साथ ले गई। इस दौरान सास और ससुर ने इस पर मारपीट का भी आरोप लगाया। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। घटना सिविल लाइन थाना क्षेत्र की है।
दरअसल, नए चंद्रपुरा निवासी लक्ष्मण कुशवाहा के बेटे की शादी 4 मार्च 2024 को हिंदू रीति-रिवाजों के साथ रोशनी कुशवाहा से हुई थी। विवाह रोशनी के मायके जनकपुर में धूमधाम से हुई थी। जिसमें दहेज में बाइक भी दी थी। लेकिन यह रिश्ता सिर्फ 10 महीने ही चल सकी।
आरोप है कि 27 दिसंबर 2024 को रोशनी कुशवाहा का अपने सास-ससुर से विवाद हो गया, जिसके बाद वह अपने पिता किशनलाल कुशवाहा के साथ कथित तौर पर कट्टे की नोक पर ससुराल से मायके चली गई। इसके करीब एक साल बाद रोशनी कुशवाहा अपने पिता लक्ष्मण कुशवाहा और कुछ लोगों के साथ बाइक पर सवार होकर ससुराल पहुंची। यहां सास-ससुर के साथ जमकर मारपीट की गई और दहेज में दी गई।
बाइक को बिना चाबी दूसरी बाइक से बांधकर घसीटते हुए ले गए। पीड़ित पति का कहना है कि उसने घटना की शिकायत दर्ज कराने सिविल लाइन थाना पहुंचकर आवेदन दिया है। लेकिन पुलिस ने फिलहाल जांच का आश्वासन देकर आवेदन रख लिया है।
पति का आरोप है कि उसे अपनी पत्नी और ससुराल पक्ष से जान का खतरा है। पीड़ित पति का यह भी कहना है कि वह अपनी पत्नी के साथ रहना चाहता है और पत्नी भी उसके साथ रहना चाहती है, लेकिन ससुराल पक्ष के लोग उनके सुखमय दांपत्य जीवन में लगातार कलह और हस्तक्षेप कर रहे हैं।फिलहाल पुलिस मामले की जांच की बात कह रही है, वहीं वायरल वीडियो के सामने आने के बाद यह मामला पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।
मुंबई. महाराष्ट्र के अहिल्यानगर जिले (अहमदनगर) में एक दर्दनाक सड़क हादसा हुआ है. राहुरी-शनि शिंगणापुर मार्ग पर एक तेज रफ्तार टेम्पो ट्रैवलर और ऑटो रिक्शा के बीच जोरदार भिड़ंत हो गई. इस भीषण दुर्घटना में रिक्शा में सवार 5 यात्रियों की मौत होने की खबर है, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं.
यह दुर्घटना उंबरे गांव की सीमा में तांबे पेट्रोल पंप के पास घटी. एक टेम्पो ट्रैवलर बेहद तेज रफ्तार में शनि शिंगणापुर की ओर जा रहा था. इसी दौरान राहुरी की ओर से आ रहे एक ऑटो रिक्शा को उसने सामने से जोरदार टक्कर मार दी. टक्कर इतनी भीषण थी कि रिक्शा के परखच्चे उड़ गए और वह हवा में उछलकर कुछ दूर जा गिरी. टक्कर मारने के बाद अनियंत्रित टेम्पो ट्रैवलर भी सड़क किनारे पलट गया.
हादसे के तुरंत बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई. स्थानीय लोग पीडि़तों की मदद के लिए दौड़ पड़े. ग्रामीणों ने तुरंत पुलिस को सूचना दी और रिक्शा में फंसे यात्रियों को बाहर निकाला. प्राथमिक रिपोर्ट के मुताबिक रिक्शा में सवार 5 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई. जबकि टेम्पो ट्रैवलर में सवार यात्री भी घायल हुए हैं, जिन्हें एम्बुलेंस के जरिए राहुरी और अहमदनगर के अस्पतालों में भर्ती कराया गया है.
दुर्घटना के बाद व्यस्त रोड पर कुछ समय के लिए यातायात पूरी तरह ठप हो गया. राहुरी पुलिस ने मौके पर पहुंचकर पंचनामा किया और क्रेन की मदद से दुर्घटनाग्रस्त वाहनों को हटाया. फिलहाल पुलिस मृतकों की शिनाख्त करने की कोशिश कर रही है. गौरतलब है कि शनि शिंगणापुर में शनिदेव का प्राचीन मंदिर है, जो देश के प्रमुख तीर्थ स्थलों में गिना जाता है. इसी कारण हर साल देशभर से लाखों श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं. इसके अलावा शिरडी के साईंबाबा मंदिर के नजदीक होने की वजह से साईं भक्तों की भी यहां बड़ी संख्या में आवाजाही बनी रहती है. राहुरी-शनि शिंगणापुर मंदिर जाने का प्रमुख मार्ग है.
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BJP की महिला कार्यकर्ता से बदसलूकी? बोली- कपड़े तक फाड़े, कर्नाटक पुलिस सवालों में घिरी
कर्नाटक के हुबली शहर में पुलिस कार्रवाई को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। बीजेपी ने आरोप लगाया है कि केशवापुर पुलिस थाने के पुलिसकर्मियों ने हिरासत में पार्टी की एक महिला कार्यकर्ता के साथ मारपीट की और अभद्र व्यवहार किया।
इस मामले से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया है। वीडियो में महिला के कपड़े फटे हुए नजर आ रहे हैं और पुलिसकर्मी उसे चारों ओर से घेरकर खड़े दिखाई दे रहे हैं। इस वीडियो के बाद मामला और ज्यादा तूल पकड़ता जा रहा है।
शिकायत करने वाली महिला की पहचान सुजाता उर्फ विजयलक्ष्मी हांडी के रूप में हुई है। उन्हें कांग्रेस पार्षद सुवर्णा कल्लकुंटला की शिकायत के आधार पर पुलिस ने हिरासत में लिया था।
बताया जा रहा है कि यह पूरा मामला केशवापुर राणा इलाके में चल रहे मतदाता सूची पुनरीक्षण (वोटर लिस्ट रिवीजन) के दौरान कांग्रेस और बीजेपी कार्यकर्ताओं के बीच हुए विवाद से जुड़ा है।
आरोप है कि गिरफ्तारी के समय सुजाता ने आपत्ति जताई और विरोध किया। इसी दौरान पुलिस ने कथित तौर पर उनके साथ मारपीट की और उनके कपड़े आंशिक रूप से फाड़ दिए।
जानकारी के मुताबिक, सुजाता पहले कांग्रेस पार्टी से जुड़ी थीं और कुछ साल पहले बीजेपी में शामिल हुई थीं।
विवाद की जड़ उन आरोपों से जुड़ी है, जिनमें कहा गया है कि सुजाता ने कुछ मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटाने में अधिकारियों की मदद की थी। हालांकि, सुजाता ने इन आरोपों को पूरी तरह गलत बताया है।
फिलहाल, वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की ओर से हिरासत में कथित दुर्व्यवहार को लेकर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। इस घटना के बाद इलाके में राजनीतिक तनाव और बढ़ गया है। कांग्रेस और बीजेपी दोनों दलों ने एक-दूसरे के खिलाफ शिकायतें दर्ज कराई हैं।
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ऑपरेशन सिंदूर पर अमेरिकी फर्म का दावा : हमले से गिड़गिड़ाया PAK, एयर स्ट्राइक रूकवाने ई-मेल, फोन से संपर्क किया
नई दिल्ली। अमेरिका में सार्वजनिक हुए फॉरेन एजेंट्स रजिस्ट्रेशन एक्ट (FARA) के दस्तावेजों से एक अहम खुलासा हुआ है। इन दस्तावेजों के मुताबिक, पिछले साल अप्रैल में भारत के चलाए गए ऑपरेशन सिंदूर से पाकिस्तान बुरी तरह घबरा गया था। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, हालात बिगड़ते देख पाकिस्तान ने जंग रुकवाने के लिए अमेरिका का सहारा लिया।
इसके लिए उसने अमेरिका में तैनात अपने राजनयिकों के जरिए जोरदार लॉबिंग शुरू कर दी। पाकिस्तानी डिप्लोमैट्स ने अमेरिका के शीर्ष प्रशासनिक अधिकारियों, सांसदों, पेंटागन और विदेश विभाग के अफसरों से करीब 60 बार संपर्क किया।
FARA के तहत अमेरिकी न्याय विभाग में जमा रिपोर्ट बताती है कि अप्रैल के अंत से लेकर ऑपरेशन सिंदूर के चार दिन पूरे होने के बाद तक पाकिस्तान लगातार संघर्ष विराम की कोशिश करता रहा। इस दौरान ईमेल, फोन कॉल और आमने-सामने बैठकों के जरिए बातचीत जारी रही।
जहां इसमें पाकिस्तान ने हमले को रूकवाने के लिए अमेरिका में शीर्ष प्रशासनिक अधिकारियों, सांसदों, पेंटागन और विदेश विभाग के अफसरों के साथ करीब 60 बार संपर्क किया था।पाकिस्तान की कोशिश थी कि किसी भी तरह अमेरिका भारत पर दबाव बनाए और युद्ध रुक जाए। इसके लिए उसने तत्कालीन ट्रम्प प्रशासन तक पहुंच बनाने, व्यापार और कूटनीतिक फैसलों को प्रभावित करने के उद्देश्य से 6 अमेरिकी लॉबिंग फर्मों को करीब 45 करोड़ रुपये दिए।
इसी बीच अमेरिकी लॉबिंग फर्म SHW पार्टनर्स LLC ने अपनी रिपोर्ट में यह भी बताया कि भारत ने भी अमेरिका में अपनी कूटनीतिक पहुंच मजबूत करने के लिए फर्म की सेवाएं ली थीं। भारतीय दूतावास ने अमेरिकी सरकार और अधिकारियों से संवाद बढ़ाने के लिए पेशेवर लॉबिंग का रास्ता अपनाया। कुल मिलाकर, FARA दस्तावेज साफ दिखाते हैं कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान और उसके बाद अमेरिका में भारत-पाकिस्तान दोनों ही देशों के बीच कूटनीतिक स्तर पर जबरदस्त हलचल रही।
वहीं इस संबंध में भारतीय विदेश मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि अमेरिका में संपर्क और संवाद बढ़ाने के लिए सिर्फ सरकारें ही नहीं, बल्कि दूतावास, निजी कंपनियां और व्यावसायिक संगठन भी लॉबिंग फर्मों और कंसल्टेंट्स की सेवाएं लेते हैं। सूत्रों के मुताबिक, भारतीय दूतावास भी 1950 के बाद से जरूरत के हिसाब से ऐसी फर्मों के साथ अनुबंध करता आया है। इसका मकसद अमेरिकी प्रशासन और संस्थाओं के साथ बेहतर तालमेल और संवाद बनाए रखना होता है।
विदेश मंत्रालय ने साफ किया कि अमेरिका में डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस के तहत फॉरेन एजेंट्स रजिस्ट्रेशन एक्ट (FARA) के अंतर्गत विदेशी सरकारों की ओर से लॉबिंग करना पूरी तरह कानूनी, पारदर्शी और स्थापित प्रक्रिया है।
खंडवा। वैसे तो बहू ससुर के बीच का रिश्ता प्यार और सम्मान का होता है। बहू अपने ससुर को पिता की तरह मानती है और ससुर भी अपनी बहू को बेटी की तरह प्रेम करता हैं… लेकिन मध्य प्रदेश के खंडवा जिले से इस रिश्ते को कलंकित कर देने वाला शर्मनाक मामला सामने आया है। जहां एक ससुर अपनी बहू के साथ संबंध बनाना चाहता था। लेकिन उसके बेटे और बहू ने मिलकर उसे मौत के घाट उतार दिया। यह पूरा मामला पिपलोद थाना क्षेत्र का है।
दरअसल, बीते रविवार को खेत में एक शव मिला था। जिसकी पहचान रमेश गोंड (55) पिता शिवप्रसाद गोंड के रूप में हुई थी। मृतक के सिर पर गंभीर चोट के निशान थे। जिससे मामला संदिग्ध लगा। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम कराया। साथ ही मामले की गंभीरता को देखते हुए केस दर्ज कर जांच पड़ताल शुरू की। इस दौरान मृतक के बेटे गणेश और उसकी पत्नी पर शक के घेरे में आए।
पुलिस ने दोनों को हिरासत में लेकर पूछताछ की। जिसमें अहम खुलासा हुआ। पुलिस की कड़ाई से की गई पूछताछ में मर्डर का खुलासा किया। गणेश की पत्नी ने बताया कि उसका ससुर रमेश उस पर गंदी नीयत रखता था। उसके साथ छेड़छाड़ करता था। यह बात नागवार गुजरी और वारदात को प्लान बनाया। गणेश, उसकी पत्नी और गणेश के दोस्त लालू उर्फ बलीराम शनिवार को खेत पहुंचे और रमेश के सिर पर लट्ठ से हमला कर मौत के घाट उतार दिया।
यह भी बताया जा रहा है कि बहू ने मृतक रमेश गोंड पर साल 2020 में दुष्कर्म का मामला दर्ज कराया था। इस केस में वह लगभग डेढ़ साल सलाखों के पीछे था। इसके बाद परिवार में राजीनामा हुआ और वह जेल से बाहर आ गया था। मृतक पर आपराधिक रिकॉर्ड भी है। इतना ही नहीं वह थाने की गुंडा लिस्ट में भी शामिल था। वहीं इस मामले में एसपी मनोज कुमार राय ने बताया कि मर्डर करने के बाद आरोपी भागे नहीं थे। बल्कि शव का अंतिम संस्कार कराने की तैयारी कर रहे थे। फिलहाल पुलिस ने तीनों के खिलाफ हत्या का केस दर्ज कर लिया है। आगे की कार्रवाई की जा रही है।
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बर्बरता की हद पार... चोरी के शक में युवक को बेरहमी से पीटा, फिर जड़ से उखाड़ दी 12 इंच लंबी 'चोटी',
रीवा। जिले से मानवता को शर्मसार कर देने वाली एक घटना सामने आई है। बैकुंठपुर थाना क्षेत्र के ग्राम मजगावा में एक युवक के साथ न केवल मारपीट की गई, बल्कि उसकी धार्मिक आस्था और पहचान से जुड़ी 12 इंच लंबी चोटी (चूंदी) को भी जबरन उखाड़ दिया गया। पीड़ित युवक हाथ में अपनी उखड़ी हुई चोटी लेकर इंसाफ की गुहार लगाने थाने पहुंचा, जिसे देख हर कोई दंग रह गया।
पीड़ित युवक की पहचान रोहित यादव के रूप में हुई है, जो सेमरिया का रहने वाला है और वर्तमान में बीएसएनएल 5 जी लाइन के लिए पाइप डालने का काम कर रहा है। रोहित के अनुसार, घटना उस समय हुई जब वह मजगावा गांव में अपनी ही गाड़ी से डीजल निकाल रहा था। इसी दौरान गांव के ही दीपक पांडे (उर्फ बिल्लू) ने उन पर पेट्रोल/डीजल चोरी का झूठा आरोप लगाया। रोहित ने बताया कि उसने अपने सेठ से भी बात कराने की कोशिश की और स्पष्ट किया कि वह चोरी नहीं कर रहा है, लेकिन आरोपी ने एक न सुनी। आरोपी के साथ तीन-चार अन्य लोग भी वहां पहुंच गए और रोहित को अकेला पाकर उसके साथ बर्बरता शुरू कर दी।
रोहित यादव ने अत्यंत भावुक होते हुए बताया कि वह पिछले सात वर्षों से जटाधारी हैं और किसी भी प्रकार का नशा नहीं करते है। आरोपियों ने न केवल उसे शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया, बल्कि उसकी 12 इंच लंबी चोटी को जड़ से उखाड़ दिया। पीड़ित का आरोप है कि मारपीट के दौरान आरोपियों ने उससे 15,700 भी लूट लिए। रोहित ने आरोपी दीपक पांडे पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वह नशे का आदी है और आपराधिक प्रवृत्ति का व्यक्ति है। घटना के बाद आरोपियों ने उसे धमकी भी दी कि यदि उसने पुलिस में शिकायत की, तो वे उसे फिर से मारेंगे।
घटना के बाद पीड़ित बैकुंठपुर थाना पहुंचा और मामले की शिकायत दर्ज कराई। हालांकि, रोहित का कहना है कि पुलिस ने केवल साधारण मारपीट का मामला दर्ज किया है, जबकि उसकी चोटी उखाड़ने और लूटपाट जैसी गंभीर घटनाओं को प्राथमिकता नहीं दी गई। पीड़ित ने प्रशासन से मांग की है कि उसकी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने और उसके साथ हुई लूटपाट के लिए आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।
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'रखवाला ही निकला चोर', सरकारी धान की 977 बोरियां छिपाईं, प्रबंधक और भाई पर FIR
रीवा। जिले से भ्रष्टाचार और सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग का एक गंभीर मामला सामने आया है। "रखवाला ही निकला चोर" वाली कहावत को चरितार्थ करते हुए, सेवा सहकारी समिति परसिया के समिति प्रबंधक पर अपने ही भाई के साथ मिलकर धान के अवैध भंडारण का आरोप लगा है। इस मामले में प्रशासनिक सख्ती के बाद अब पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पूरा मामला जनेह थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले चंद्रपुर गांव का है।
प्रशासन को गुप्त सूचना मिली थी कि सरकारी धान को अवैध रूप से एक निजी फार्म हाउस में छिपाकर रखा गया है। सूचना के आधार पर त्योंथर एसडीएम, नायब तहसीलदार और अन्य राजस्व अधिकारियों की टीम ने फार्म हाउस पर दबिश दी। छापेमारी के दौरान अधिकारी तब दंग रह गए जब फार्म हाउस के भीतर 977 बोरी धान का अवैध भंडारण पाया गया। सबसे चौंकाने वाली बात यह थी कि यह धान उन सरकारी बारदानों में भरा हुआ था, जो केवल समर्थन मूल्य पर सरकारी खरीदी के लिए आवंटित किए जाते हैं। इससे स्पष्ट संकेत मिले कि इस धान को अवैध तरीके से सरकारी कोटे में खपाने की तैयारी की जा रही थी।
कार्रवाई के दौरान मुख्य आरोपी समिति प्रबंधक शैलेंद्र तिवारी और उनका भाई प्रदीप तिवारी मौके से फरार मिले। हालांकि, उनका एक अन्य भाई ज्ञानेंद्र तिवारी वहां मौजूद था, जो धान के स्वामित्व से संबंधित कोई भी वैध दस्तावेज पेश नहीं कर सका। कलेक्टर प्रतिभा पाल ने समीक्षा बैठक के दौरान इस मामले में ढिलाई बरतने वाले अधिकारियों पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने खाद्य नियंत्रक को तत्काल प्रभाव से एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए। कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि जिले की सीमाएं अन्य राज्यों से सटी होने के कारण व्यापारियों द्वारा अवैध धान खपाने की संभावना बनी रहती है, जिसे रोकने के लिए प्रशासन पूरी तरह सतर्क है।
कलेक्टर के कड़े रुख के बाद कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी विनीत मिश्रा ने जनेह थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने समिति प्रबंधक शैलेंद्र तिवारी और उनके भाई प्रदीप तिवारी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। शैलेंद्र तिवारी को समिति प्रबंधक के पद से हटा दिया गया है। परसिया स्थित विवादित खरीदी केंद्र को बंद करने का निर्णय लिया गया है। आस-पास के अन्य केंद्रों पर किसानों के लिए स्लॉट बुकिंग की वैकल्पिक व्यवस्था की गई है।
कलेक्टर प्रतिभा पाल ने बताया कि रीवा जिले में धान उपार्जन का लक्ष्य लगभग 3.70 लाख मीट्रिक टन है, जिसमें से 90% से अधिक लगभग 3.42 लाख मीट्रिक टन खरीदी पूरी हो चुकी है। उन्होंने सभी नोडल अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि उपार्जन के अंतिम 10-15 दिनों में विशेष निगरानी रखी जाए, क्योंकि इसी दौरान गड़बड़ी की संभावनाएं सबसे अधिक होती हैं। प्रशासन अब जिले के अन्य केंद्रों, जैसे चाकघाट विपणन समिति, की भी जांच कर रहा है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कहीं और भी इस प्रकार की अनियमितताएं तो नहीं हो रही हैं। पुलिस फिलहाल फरार आरोपियों की तलाश कर रही है।
मंडला। एमपी के मंडला में किन्नरों के साथ हुई डेढ़ लाख रुपए की लूट का खुलासा कर दिया है. मामले में पुलिस ने जबलपुर से पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है. पुलिस ने आरोपियों के कब्जे लूट का कुछ रुपया व घटना मेें प्रयुक्त कार बरामद कर ली है.
बताया गया है कि मंडला के कचहरी मोहल्ला निवासी सुनिता मौसी उर्फ शबनम उम्र32 वर्ष अपनी पार्वती मौसी के साथ मोटरसाइकिल से बड़ी खैरी जाने के लिए निकली. रात करीब 9 बजे के लगभग हनुमान घाट के आगे एक सफेद रंग की कार ने उनकी बाइक को टक्कर मार दी. टक्कर लगते ही सुनिता व पार्वती मोटर साइकल सहित सड़क पर गिर गई, उनका डेंढ़ लाख रुपए से भरा पर्स भी गिर गया, इस दौरान कार से उतरे दो युवकों ने पर्स उठाया और मौके से फरार हो गए.
सुनीता मौसी ने 31 दिसंबर को थाना कोतवाली में इसकी रिपोर्ट दर्ज कराई थी. पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए एक टीम का गठन किया और आरोपियों की गिरफ्तारी पर दस हजार रुपए का इनाम भी घोषित कर दिया.
पुलिस की टीम आरोपियों की तलाश में जुटी रही, इस दौरान पुलिस का खबर मिली कि लूट का मास्टर माइंड सलमान खान फरियादी के समूह की एक सदस्य से परिचित था. उसने इस परिचय का फायदा उठाकर उनकी दिनचर्या और पैसों की जानकारी हासिल की. इसके बाद आरोपी जबलपुर से टाटा-जेस्ट कार से मंडला पहुंचे. उन्होंने पहचान छिपाने के लिए कार का नंबर काले प्लेट बदल दी और सुनियोजित तरीके से वारदात को अंजाम दिया.
लूट के बाद आरोपी अंजनिया मार्ग से फरार हो गए और रास्ते में ही लूटी गई रकम आपस में बांट ली. पुलिस ने इस मामले में जबलपुर से इमरान अंसारी, श्याम सुंदर चौहान, दीपक चौधरी, मोहम्मद सलमान व सलमान खान को गिरफ्तार किया है. आरोपियों के पास से 32,100 रुपए नकद और वारदात में इस्तेमाल टाटा जेस्ट कार बरामद की गई है. शेष राशि की बरामदगी के प्रयास जारी हैं.
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दो हजार की रिश्वत ने छीनी वर्दी की इज्जत, कॉन्स्टेबल को चार साल की सजा
जबलपुर. पुलिस की वर्दी कानून की रक्षा और जनता के भरोसे का प्रतीक मानी जाती है, लेकिन जब वही वर्दीधारी कानून को ताक पर रखकर लालच का रास्ता चुन ले, तो न्याय का कठोर संदेश भी उतना ही स्पष्ट होता है. जबलपुर के शाहपुरा थाने में पदस्थ रहे आरक्षक विवेक साहू को महज दो हजार रुपये की रिश्वत लेने के मामले में अब चार साल की सजा काटनी होगी. मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को सही ठहराते हुए आरोपी कॉन्स्टेबल की अपील खारिज कर दी है और उसका बेल बॉन्ड निरस्त करते हुए जेल भेजने के आदेश जारी किए हैं. यह फैसला न केवल आरोपी के लिए बल्कि पूरे सिस्टम के लिए एक सख्त चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है.
यह मामला भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दर्ज किया गया था. आरोपी आरक्षक विवेक साहू ने ट्रायल कोर्ट द्वारा दी गई चार साल की सजा को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. उसने अपनी अपील में यह तर्क दिया कि उसे गलत तरीके से फंसाया गया है और सजा अनुचित है. लेकिन हाईकोर्ट ने सभी साक्ष्यों, गवाहों और केस के तथ्यों का बारीकी से अध्ययन करने के बाद यह स्पष्ट कर दिया कि ट्रायल कोर्ट का निर्णय पूरी तरह न्यायसंगत और कानून के अनुरूप है.
हाईकोर्ट में इस मामले की सुनवाई जस्टिस राजेंद्र कुमार वाणी की एकलपीठ ने की. अदालत के समक्ष यह तथ्य सामने आए कि विवेक साहू शाहपुरा थाने में पदस्थ रहते हुए एक चेक बाउंस के मामले में आरोपी देवी सिंह के खिलाफ जारी गैर जमानती वारंट की तामीली के लिए जिम्मेदार था. न्यायालय द्वारा वारंट जारी किए जाने के बावजूद आरक्षक ने अपनी ड्यूटी का पालन नहीं किया. आरोप है कि उसने देवी सिंह को गिरफ्तारी की धमकी दी और बदले में दो हजार रुपये की रिश्वत की मांग की.
मामले के अनुसार, बाद में गैर जमानती वारंट निरस्त हो गए और देवी सिंह को जमानत का लाभ मिल गया. इसके बावजूद आरक्षक ने उसे डराया-धमकाया और गिरफ्तारी का भय दिखाकर रिश्वत की मांग जारी रखी. पीड़ित देवी सिंह ने जब यह महसूस किया कि उसके साथ अन्याय हो रहा है और कानून की आड़ में उससे पैसे वसूले जा रहे हैं, तो उसने लोकायुक्त कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई.
शिकायत के आधार पर लोकायुक्त पुलिस ने जाल बिछाया और शाहपुरा थाने में पदस्थ आरक्षक विवेक साहू को दो हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़ लिया. इस कार्रवाई के बाद पूरे मामले की जांच की गई और पर्याप्त साक्ष्य एकत्र किए गए. ट्रायल कोर्ट में चली लंबी सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने यह साबित किया कि आरोपी ने न केवल रिश्वत की मांग की, बल्कि उसे स्वीकार भी किया. गवाहों के बयान, लोकायुक्त की ट्रैप कार्रवाई और अन्य दस्तावेजी साक्ष्यों ने आरोपी के खिलाफ मजबूत केस खड़ा किया.
ट्रायल कोर्ट ने सभी तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर विवेक साहू को दोषी ठहराते हुए भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत चार साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई. इसके बाद आरोपी ने हाईकोर्ट में अपील दायर कर सजा पर रोक और जमानत की मांग की थी. हालांकि हाईकोर्ट ने अपील की सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि ट्रायल कोर्ट के फैसले में किसी भी प्रकार की त्रुटि नहीं है.
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि एक पुलिसकर्मी से अपेक्षा की जाती है कि वह कानून का पालन करे और जनता की सेवा करे. यदि वही व्यक्ति अपने पद का दुरुपयोग कर रिश्वत मांगता है, तो यह न केवल अपराध है बल्कि समाज के भरोसे के साथ भी धोखा है. अदालत ने यह भी कहा कि दो हजार रुपये की रकम भले ही छोटी लग सकती है, लेकिन अपराध की गंभीरता रकम से नहीं, बल्कि उसके प्रभाव और उद्देश्य से तय होती है.
कोर्ट ने गवाहों और साक्ष्यों को विश्वसनीय मानते हुए यह निष्कर्ष निकाला कि आरोपी आरक्षक ने जानबूझकर अपने पद का दुरुपयोग किया. इसलिए ट्रायल कोर्ट द्वारा दी गई सजा उचित है और उसमें किसी प्रकार की नरमी बरतने का कोई आधार नहीं है. इसी के साथ हाईकोर्ट ने आरोपी का बेल बॉन्ड निरस्त कर उसे तुरंत जेल भेजने के आदेश जारी कर दिए.
इस फैसले के बाद यह मामला पूरे जबलपुर और प्रदेश में चर्चा का विषय बन गया है. आम लोगों का कहना है कि यह निर्णय भ्रष्टाचार के खिलाफ एक मजबूत संदेश देता है. वहीं, कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के फैसले से निचले स्तर पर फैले भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी.
यह मामला यह भी दिखाता है कि लोकायुक्त जैसी संस्थाओं की सक्रियता और आम नागरिक की हिम्मत मिलकर भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई कर सकती है. यदि देवी सिंह शिकायत दर्ज कराने से पीछे हट जाता, तो संभव है कि यह मामला सामने ही न आता. लेकिन उसकी शिकायत ने न केवल उसे न्याय दिलाया, बल्कि यह भी साबित किया कि कानून के दायरे में रहते हुए भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाई जा सकती है.
हाईकोर्ट का यह फैसला पुलिस विभाग के लिए भी आत्ममंथन का विषय है. वर्दी की गरिमा बनाए रखने और जनता का विश्वास कायम रखने के लिए ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई जरूरी मानी जा रही है. दो हजार रुपये की रिश्वत ने एक आरक्षक के करियर, प्रतिष्ठा और आजादी—तीनों को छीन लिया. यह फैसला आने वाले समय में उन सभी सरकारी कर्मचारियों के लिए चेतावनी है, जो अपने पद का दुरुपयोग कर अवैध लाभ कमाने की सोच रखते हैं.
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इंदौर जहरीला पानी : सरकार का रवैया निराशाजनक, हाईकोर्ट बोला- घटना ने देशभभर में शहर की इमेज खराब की
इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पेयजल से हुई मौतों का मामला देशभर में गहन चिंता का विषय बन गया है। वहीं इस घटना को लेकर कांग्रेस ने इंदौर के सभी वार्डों में प्रदर्शन शुरू कर दिया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार भी प्रदर्शन में शामिल हुए और राज्य सरकार पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए।
उधर, मंगलवार (6 जनवरी) को इस मामले की सुनवाई मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में हुई। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि इस घटना ने इंदौर शहर की छवि को गहरा नुकसान पहुंचाया है। कोर्ट ने कहा कि इंदौर देश का सबसे स्वच्छ शहर माना जाता है, लेकिन अब दूषित पेयजल के कारण यह पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया है।
हाईकोर्ट ने कहा कि अगर पीने का पानी ही दूषित हो, तो यह बेहद गंभीर चिंता का विषय है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह समस्या सिर्फ शहर के एक इलाके तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे इंदौर शहर के पेयजल की सुरक्षा पर सवाल खड़े हो गए हैं। इसी को देखते हुए कोर्ट ने इस मामले में मुख्य सचिव को सुनने की जरूरत बताई।मंगलवार की सुनवाई में शीर्षकोर्ट ने अगली सुनवाई में मध्य प्रदेश के चीफ सेक्रेटरी को वर्चुअली पेश होने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 15 जनवरी को होगी।
इस बीच, दूषित पानी पीने से मरने वालों की संख्या बढ़कर 17 हो गई है। फिलहाल 110 मरीज विभिन्न अस्पतालों में भर्ती हैं। अब तक कुल 421 मरीजों को अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जिनमें से 311 मरीज स्वस्थ होकर डिस्चार्ज हो चुके हैं। वहीं, 15 मरीजों की हालत गंभीर बनी हुई है और उनका इलाज आईसीयू में चल रहा है।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, उल्टी-दस्त के 38 नए मामले सामने आए हैं। इनमें से 6 मरीजों को बेहतर इलाज के लिए अरबिंदो हॉस्पिटल रेफर किया गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग अलर्ट मोड पर है, लेकिन सवाल अब भी बने हुए हैं कि आखिर देश के सबसे स्वच्छ शहर में लोगों को सुरक्षित पेयजल क्यों नहीं मिल पा रहा है।
इंदौर में दूषित पेयजल से हुई मौतों के मामले में हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान अहम तथ्य सामने आए हैं। याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट को बताया कि 31 दिसंबर 2025 को हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और नगर निगम को नागरिकों को स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने के स्पष्ट निर्देश दिए थे। हालांकि, याचिकाकर्ताओं के वकील ने कोर्ट में दलील दी कि प्रभावित क्षेत्रों में अब भी जो पानी सप्लाई किया जा रहा है, वह स्वच्छ और पीने योग्य नहीं है। उनका कहना है कि रिपोर्ट में किए गए दावों के बावजूद जमीनी हकीकत इससे अलग है और लोगों को अब भी दूषित पानी ही मिल रहा है।
इस मामले में दायर अन्य याचिकाओं में प्रशासन की गंभीर लापरवाही का मुद्दा भी उठाया गया। याचिकाकर्ताओं ने कहा कि इस घटना से पहले स्थानीय निवासियों ने दूषित पानी को लेकर कई बार शिकायतें की थीं, लेकिन प्रशासन और नगर निगम ने उन पर कोई ध्यान नहीं दिया। अगर समय रहते इन शिकायतों को गंभीरता से लिया गया होता और आवश्यक रोकथाम के कदम उठाए गए होते, तो इतने बड़े स्तर पर लोग बीमार नहीं पड़ते और जान-माल का नुकसान टल सकता था। कोर्ट ने इन दलीलों को गंभीरता से लेते हुए संकेत दिए कि पूरे मामले की गहराई से जांच जरूरी है। अगली सुनवाई में प्रशासन की जवाबदेही और किए गए कदमों की विस्तृत समीक्षा की जाएगी।
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