


मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ जिले से एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है। खरगापुर थाना क्षेत्र के 15 वर्षीय नाबालिग ने अपनी सगी बुआ और परिवार के कुछ अन्य लोगों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। किशोर ने पुलिस अधीक्षक (एसपी) कार्यालय पहुंचकर शिकायत दी है और निष्पक्ष जांच के साथ सुरक्षा की मांग की है।
पीड़ित किशोर का आरोप है कि उसकी बुआ ने अपने दिवंगत बेटे की विधवा बहू की मांग उससे जबरन भरवाई। इसके बाद उस पर महिला के साथ पति-पत्नी की तरह रहने का दबाव बनाया गया। किशोर का कहना है कि उसने इस बात का कई बार विरोध किया, लेकिन उसकी बात नहीं सुनी गई।
किशोर ने अपनी शिकायत में बताया कि माता-पिता की मृत्यु के बाद वह अपनी सगी बुआ के घर रह रहा था। इसी दौरान कथित तौर पर उसे एक मंदिर ले जाया गया, जहां उससे बुआ की विधवा बहू की मांग भरवाई गई। बाद में उसे बताया गया कि अब उसकी शादी हो चुकी है और उसे उसी महिला के साथ पति की तरह रहना होगा।
नाबालिग का कहना है कि उसने कई बार बताया कि उसकी उम्र सिर्फ 15 साल है और वह इस रिश्ते के लिए तैयार नहीं है। इसके बावजूद उस पर लगातार मानसिक दबाव बनाया गया। उसने यह भी आरोप लगाया कि उसके साथ जबरन शारीरिक शोषण कराने की कोशिश की गई।
पीड़ित का कहना है कि इस पूरी घटना ने उसका बचपन, पढ़ाई और भविष्य खतरे में डाल दिया है। उसने आरोप लगाया कि बुआ अपने दिवंगत बेटे की विधवा बहू को उसके साथ रखने के लिए लगातार दबाव बना रही है।
किशोर ने बताया कि उसने पहले संबंधित थाना पुलिस और 1098 चाइल्ड हेल्पलाइन पर भी शिकायत की थी, लेकिन उसे कोई राहत नहीं मिली। इसके बाद वह सीधे एसपी कार्यालय पहुंचा और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच, अपनी सुरक्षा और आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की।
मामले पर टीकमगढ़ के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ASP) ने बताया कि शिकायत प्राप्त हो गई है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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CM हेल्पलाइन पर शिकायत की तो राजगढ़ में दो भाइयों को पंचायत में बुलाकर पीटा, पीड़ित ने थाने में कीटनाशक पीया
राजगढ़ मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिले में सीएम हेल्पलाइन पर सड़क निर्माण में कथित गड़बड़ी और राशन कार्ड में नाम नहीं जुड़ने की शिकायत करना दो भाइयों को भारी पड़ गया। आरोप है कि शिकायत वापस लेने के लिए दोनों को पंचायत भवन बुलाया गया, जहां उनके साथ मारपीट की गई। इसके बाद जब पीड़ित युवक शिकायत लेकर कुरावर थाने पहुंचे तो घंटों तक एफआईआर दर्ज नहीं हुई। कार्रवाई में देरी से आहत एक युवक ने थाने परिसर में ही कीटनाशक पी लिया। जिसके बाद उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
राजगढ़ जिले के मोयली खुर्द गांव के रहने वाले रामनिवास मीणा और उनके भाई हरिनारायण मीणा ने कुछ समय पहले सीएम हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराई थी। इस शिकायत में दोनों भाइयों ने आरोप लगाया था कि ग्राम पंचायत में सीमेंट कांक्रीट सड़क का निर्माण किए बिना भुगतान कर दिया गया, वहीं राशन कार्ड में परिवार के सदस्य का नाम भी नहीं जोड़ा जा रहा है।
पीड़ितों का आरोप है कि पंचायत सचिव चैनसिंह चौधरी ने फोन कर दोनों भाइयों रामनिवास मीणा और हरिनारायण मीणा को दोपहर में पंचायत भवन में बुलाया। दोनों भाई वहां पहुंचे तो पंचायत भवन में सरपंच रामनारायण मीणा, उनके भाई रामराज मीणा और अन्य लोग मौजूद थे। आरोप है कि शिकायत वापस लेने का दबाव बनाया गया और इनकार करने पर गाली-गलौज करते हुए लाठी-डंडों व लात-घूंसों से मारपीट की गई। इस दौरान मोबाइल छीनने और पर्स गायब होने का भी आरोप लगाया गया।
मारपीट के बाद दोनों भाई कुरावर थाने पहुंचे, लेकिन उनका आरोप है कि कई घंटे तक एफआईआर दर्ज नहीं की गई। लगातार गुहार लगाने के बाद भी कार्रवाई नहीं होने से परेशान रामनिवास मीणा ने थाने परिसर में ही कीटनाशक पी लिया। पुलिस उन्हें अस्पताल ले गई, जहां प्राथमिक उपचार के बाद भोपाल रेफर कर दिया गया। रात में परिजन घायल को फिर थाने लेकर पहुंचे, जिसके बाद पुलिस ने दोनों पक्षों पर प्रकरण दर्ज किया।
दूसरी ओर पंचायत सचिव चैनसिंह चौधरी ने भी रामनिवास और हरिनारायण के खिलाफ शासकीय कार्य में बाधा और मारपीट की शिकायत दर्ज कराई। उनका कहना है कि राशन कार्ड में नाम सर्वर डाउन होने के कारण नहीं जुड़ पाया था। इसी बात पर दोनों भाई विवाद करने लगे और उनके साथ मारपीट की।
कुरावर एसआई अरविंद सिंह राजपूत ने बताया कि दोनों पक्षों की शिकायतें मिली थीं। घटनाक्रम को समझने और मेडिकल प्रक्रिया पूरी होने के बाद रात करीब 10 बजे दोनों पक्षों के खिलाफ अपराध दर्ज कर लिया गया है। मामले की जांच जारी है।
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मां बगलामुखी मंदिर में भी हुई दान चोरी? सामने आई अनियमितताएं, जांच के लिए तीन सदस्यीय दल का गठन
आगर मालवा। अयोध्या के श्री राम जन्मभूमि मंदिर में दान चोरी का मामला अभी ठंडा नहीं हुआ। इस बीच आगर मालवा के विश्वप्रसिद्ध मां बगलामुखी मंदिर में भी दान चोरी का आरोप लगा है। दरअसल, नलखेड़ा में मंदिर के रजत सौंदरीकरण के लिए मंदिर परिसर में एक गैर-शासकीय समिति की श्रद्धालुओं से नगद, स्वर्ण और रजत दान मिलने और उनके उपयोग में वित्तीय अनियमितता पाए जाने के आरोप लगे हैं। जिसके बाद जिला प्रशासन हरकत में आ गया है।
कलेक्टर प्रीति यादव ने मामले की निष्पक्ष जांच के लिए तीन सदस्यीय संयुक्त जांच दल का गठन किया है। इस दल के अध्यक्ष मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत बी. एस. सोलंकी होंगे। उनके साथ जिला कोषालय अधिकारी मनीष सोलंकी और नगर परिषद नलखेड़ा की मुख्य नगर पालिका अधिकारी मिनी अग्रवाल को सदस्य बनाया गया है। यह समिति सात दिनों के भीतर अपनी जांच रिपोर्ट कलेक्टर को सौंपेगी।
जांच समिति को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वह यह जांच करे कि क्या मंदिर परिसर में अधिकृत प्रबंधन व्यवस्था से अलग समानांतर दान संग्रह की व्यवस्था संचालित की गई। इसके साथ ही समिति यह भी जांच करेगी कि श्रद्धालुओं से मिले नगद, सोना और चांदी का वास्तविक रिकॉर्ड क्या है, उसका लेखा-जोखा किस प्रकार रखा गया, संबंधित बैंक खातों और अभिलेखों की स्थिति क्या है और इस पूरे मामले में किसी अधिकारी, कर्मचारी, मंदिर प्रबंधन या अन्य संबंधित व्यक्तियों की जवाबदेही बनती है या नहीं।
कलेक्टर के आदेश में यह भी कहा गया है कि जांच दल तत्काल मंदिर परिसर का निरीक्षण करेगा। आवश्यक दस्तावेज, साक्ष्य और संबंधित पक्षों के बयान दर्ज करेगा और अपनी विस्तृत जांच रिपोर्ट और अनुशंसाएं सात दिनों में पेश करेगा।
अब यह मामला केवल आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं रहा, बल्कि प्रशासनिक जांच के दायरे में आ चुका है। आने वाले दिनों में जांच रिपोर्ट से यह साफ होगा कि शिकायतों में कितनी सच्चाई है, और प्रशासन आगे क्या कार्रवाई करता है।
Bhopal. मध्य प्रदेश की मोहन सरकार ने प्रदेश के लाखों सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए अब तक का सबसे सख्त फरमान जारी किया है। सामान्य प्रशासन विभाग ने शासकीय सेवकों के सोशल मीडिया इस्तेमाल को लेकर एक नई और कड़ी आचार संहिता लागू कर दी है। इस आदेश के बाद अब कोई भी सरकार बाबू या अफसर फेसबुक (FacebooK), एक्स (X), वॉट्सएप (Whatsapp) या इंस्टाग्राम (Instagram) पर अपनी मर्जी से कुछ भी पोस्ट, लाइक या शेयर नहीं कर पाएगा। नियमों का उल्लंघन करने पर सीधे विभागीय जांच के साथ जेल जाने की नौबत आ सकती है।
प्रशासन द्वारा जारी किए गए आदेश में साफ कर दिया गया है कि सोशल मीडिया पर सिर्फ पोस्ट डालना ही नहीं, बल्कि किसी और की विवादित पोस्ट पर प्रतिक्रिया देना भी भारी पड़ेगा।
कोई भी शासकीय सेवक सोशल मीडिया पर ऐसी कोई भी पोस्ट, टिप्पणी, फोटो, वीडियो या अन्य सामग्री साझा नहीं करेगा, जिससे जाति, धर्म, राजनीति या सामाजिक भेदभाव फैलने की आशंका हो।
सोशल मीडिया के किसी भी प्लेटफॉर्म पर किसी जाति, धर्म, समुदाय या व्यक्ति के प्रति घृणा, द्वेष या तनाव पैदा करने वाली पोस्ट को ना तो लाइक किया जाएगा, ना फॉरवर्ड और ना ही शेयर किया जा सकेगा। शासकीय कर्मचारियों को स्पष्ट हिदायत दी गई है कि वे सोशल मीडिया पर होने वाली किसी भी तरह की बहसबाजी या विवादित चर्चाओं से पूरी तरह दूर रहें।
चुनाव हो या सामान्य दिन, अब सरकारी कर्मचारी सोशल मीडिया के जरिए किसी भी राजनीतिक दल के समर्थन या विरोध में कोई प्रचार-प्रसार नहीं कर सकेंगे। यदि कोई कर्मचारी किसी नेता या दल के पक्ष-विपक्ष में माहौल बनाते पाया गया, तो इसे ‘मध्य प्रदेश सिविल सेवा आचरण नियम’ का गंभीर उल्लंघन माना जाएगा।
सरकार ने साफ कर दिया है कि कोई भी सरकारी सेवक इस आचार संहिता का उल्लंघन करते हुए पकड़ा जाता है, तो उसके खिलाफ दोहरी और कड़ी कानूनी कार्रवाई होगी। ‘मध्य प्रदेश सिविल सेवा नियम 1965’ के तहत सस्पेंशन और विभागीय जांच शुरू की जाएगी। इसके साथ ही नए कानून यानी भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की सुसंगत धाराओं के तहत एफआईआर (FIR) दर्ज कर कानूनी शिकंजा कसा जाएगा।
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कोचिंग सेंटर्स को अल्टीमेटम: 70 संचालकों को 48 घंटे की मोहलत, शपथ पत्र नहीं देने पर 10 जुलाई से होंगे सील, जानें सख्त नियम
भोपाल. दिल्ली के कोचिंग हादसे से सबक लेते हुए राजधानी भोपाल का नगर निगम प्रशासन अब पूरी तरह से एक्शन मोड में आ गया है। छात्रों की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ करने वाले कोचिंग संचालकों की लापरवाही पर नगर निगम ने अब तक का सबसे सख्त रुख अख्तियार किया है। भोपाल के 70 कोचिंग संचालकों को 48 घंटे का कड़ा अल्टीमेटम जारी किया गया है।
प्रशासन ने साफ कर दिया है कि अगले 48 घंटे के भीतर इन कोचिंग संचालकों को एक ज्यूडिशियल शपथ पत्र जमा करना होगा, जिसमें यह वचन देना होगा कि वे अगले 30 दिनों के भीतर अपनी बिल्डिंग में फायर सेफ्टी के सभी पुख्ता इंतजाम कर लेंगे। अगर निर्धारित समय में शपथ पत्र जमा नहीं किया गया, तो 10 जुलाई से कोचिंग संस्थानों को सीधे सील करने की बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी। नगर निगम ने संचालकों के साथ हुई एक आपात बैठक में 20 पॉइंट की सख्त गाइडलाइन थमा दी है।
नियम पूरे नहीं किए, तो सीधे डलेगा ताला! ये हैं नए आदेश:
नगर निगम द्वारा जारी की गई गाइडलाइन में छात्रों की जिंदगी को सुरक्षित बनाने के लिए बेहद कड़े कदम उठाए गए हैं, जिनका पालन न करने पर सीधे सीलिंग की जाएगी:
आपातकालीन द्वार और बेसमेंट नियम: हर संस्थान में आवश्यकता अनुसार क्षमता का फायर पंप और 2 आपातकालीन द्वार होना अनिवार्य है। इन द्वारों पर किसी भी तरह का ज्वलनशील या इलेक्ट्रिक सामान नहीं रखा जा सकेगा। साथ ही, ऑटोमेटिक लॉक होने वाले दरवाजे लगाने पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा। भवन के बेसमेंट का उपयोग केवल पार्किंग या स्टोर के रूप में ही किया जा सकेगा, वहाँ कक्षाएं नहीं चलेंगी।
स्प्रिंकलर और डिटेक्शन सिस्टम: 200 वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्रफल वाले बेसमेंट में स्प्रिंकलर्स और ऑटोमेटिक डिटेक्शन सिस्टम लगाना अनिवार्य होगा। फायर सिस्टम को हमेशा ‘ऑटो मोड’ पर रखना होगा और सभी हूटर्स को आपस में जोड़ना होगा।
मॉकड्रिल और ट्रेनिंग: हर 4 महीने में अनिवार्य रूप से मॉकड्रिल का आयोजन करना होगा। बच्चों को फायर सेफ्टी के प्रति जागरूक करने के साथ-साथ उन्हें फ्लूम मास्क उपलब्ध कराने होंगे। संस्थान के प्रत्येक स्टाफ सदस्य को फायर अग्निशामक यंत्र और सिक्योरिटी गार्ड को हाइड्रेंट सिस्टम चलाने की ट्रेनिंग दिलानी होगी।
व्यवधान रहित निर्गम क्षेत्र: आपात स्थिति में बच्चों के बाहर निकलने वाले रास्ते को पूरी तरह से व्यवधान मुक्त रखना होगा। इस निर्गम क्षेत्र में कोई भी विद्युत उपकरण या पैनल स्थापित नहीं किया जा सकेगा।
आईकैचिंग पॉइंट्स पर संकेत: भवन के आसानी से दिखने वाले स्थानों पर ‘एक्जिट’ के संकेत चस्पा करने होंगे। इसके अलावा हर मंजिल पर भवन का एक्जिट प्लान लगाना अनिवार्य होगा।
बायपास लाइन और डीजी सेट: फायर पंप और डिटेक्शन सिस्टम को डीजी सेट से बायपास लाइन के जरिए कनेक्ट करना होगा। डीजी सेट को किसी भी हाल में रिफ्यूज एरिया या मुख्य गेट पर स्थापित नहीं किया जा सकेगा।
विद्युत और फायर ऑडिट: धुंआ बाहर निकलने के लिए प्राकृतिक वेंटिलेशन अनिवार्य रूप से सुनिश्चित करना होगा। इसके साथ ही, हर साल फायर एवं विद्युत ऑडिट कराना होगा और इसकी रिपोर्ट नगर निगम के फायर ब्रिगेड कार्यालय में अनिवार्य रूप से जमा करनी होगी।
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CRPF परिसर में दर्दनाक हादसा: सीवरेज चैंबर में दम घुटने से दो मजदूरों की मौत, ठेका कंपनी पर लापरवाही के संगीन आरोप
भोपाल। मध्य प्रदेश के नीमच शहर के सीआरपीएफ (CRPF) परिसर में मंगलवार को एक बड़ा हादसा हो गया। जहां निर्माणाधीन सीवरेज लाइन के गहरे चैंबर में काम करने उतरे दो मजदूरों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। इस मामले में ठेका कंपनी पर लापरवाही के संगीन आरोप लगे है।
मिली जानकारी के मुताबिक, झाबुआ निवासी महेश (25) दोपहर में सीवरेज लाइन की रिपेयरिंग करने गया था, लेकिन जब वह काफी देर तक वापस नहीं लौटा तो उसकी पत्नी अनीता बाई उसे ढूंढने निकली। तेज बारिश के कारण पहले तो उसे कुछ दिखाई नहीं दिया, लेकिन बारिश थमने पर जब उसने सीवरेज के गहरे गड्ढे में झांका तो महेश अंदर बेसुध पड़ा था। पति को इस हाल में देख वहां चीख-पुकार मच गई।
इसके बाद उसे रस्सी के सहारे बाहर निकालने के लिए बिहार का रहने वाला रूपेश (19) चैंबर के भीतर उतरा, लेकिन अंदर फैली जहरीली गैस के कारण वह भी तुरंत बेहोश हो गया। बाद में साथी कर्मचारियों की मदद से दोनों को बमुश्किल बाहर निकालकर सीआरपीएफ की एंबुलेंस से जिला अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
इस भीषण हादसे ने दोनों मजदूरों के परिवारों को पूरी तरह उजाड़ दिया है, जहां मृतक महेश अपने पीछे पत्नी और 2, 5 व 7 साल के तीन मासूम बच्चों को रोता-बिलखता छोड़ गया है, वहीं रूपेश महज चार दिन पहले ही अपने भाई के साथ बिहार से नीमच मजदूरी करने आया था और वह अपने माता-पिता और दो बहनों का इकलौता सहारा था।
घटना के बाद अस्पताल पहुंचे साथी मजदूरों ने ‘एसएस टोटल’ ठेका कंपनी पर सुरक्षा मानकों की घोर अनदेखी का आरोप लगाते हुए कहा कि इतने खतरनाक और गहरे चैंबर में उतारने के बावजूद कंपनी ने मजदूरों को मास्क या ऑक्सीजन किट जैसे कोई सुरक्षा उपकरण नहीं दिए थे, जिसके कारण यह बड़ा हादसा हुआ। फिलहाल कैंट थाना पुलिस ने दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर मर्ग कायम किया है और मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी है।
कर्नाटक लोकायुक्त ने बुधवार को भ्रष्टाचार और आय से अधिक संपत्ति के मामलों में राज्यभर में बड़ी कार्रवाई करते हुए 10 सरकारी अधिकारियों के ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। यह कार्रवाई बेंगलुरु सिटी, बेंगलुरु साउथ, रायचूर, चित्रदुर्ग, तुमकुरु, शिवमोगा और कलबुर्गी समेत कई जिलों में की गई।
लोकायुक्त अधिकारियों के अनुसार, सभी अधिकारियों पर अपनी वैध आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का संदेह है। छापेमारी के दौरान कृषि विभाग की कृषि विस्तार अधिकारी (AEO) पुष्पा डी.आर. के आवास से बड़ी मात्रा में सोने के आभूषण और भारी नकदी बरामद हुई है। बरामद गहनों का मूल्यांकन करने के लिए सुनार को बुलाया गया है, जबकि नकदी और अन्य संपत्तियों की गिनती का कार्य जारी है। जांच पूरी होने के बाद बरामद संपत्ति का वास्तविक मूल्य सामने आएगा।
लोकायुक्त की कार्रवाई के दायरे में आए अधिकारियों में कृष्णा भाग्य जल निगम लिमिटेड, रायचूर के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर बसनगौड़ पाटिल, कृषि इंजीनियरिंग (बागवानी) विश्वविद्यालय, चित्रदुर्ग के असिस्टेंट प्रोफेसर शंकर एम, वॉटरशेड डेवलपमेंट विभाग, चित्रदुर्ग के रेंज फॉरेस्ट ऑफिसर दुग्गप्पा बी.एच., बेंगलुरु पीडब्ल्यूडी के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर नरेंद्र कुमार, केआरआईडीएल बेंगलुरु रेंज के सुपरिंटेंडेंट इंजीनियर प्रवीण बी. श्री हरि तथा बेंगलुरु एपीएमसी की डिप्टी डायरेक्टर (प्रशासन) पुष्पा डी.आर. शामिल हैं
इसके अलावा तुमकुरु के माइनर इरिगेशन विभाग के असिस्टेंट इंजीनियर मधुसूदन एन., बेंगलुरु साउथ के कुंबलगोडु पंचायत के पीडीओ थिम्मे गौड़ा, शिवमोगा फॉरेस्ट रिसर्च डिवीजन के असिस्टेंट कंजरवेटर किरण अंगड़ी और कलबुर्गी जीईएससीओएम के असिस्टेंट एग्जीक्यूटिव इंजीनियर (इलेक्ट्रिकल) अमृत राव के परिसरों की भी तलाशी ली गई।
लोकायुक्त की टीमें सभी अधिकारियों की चल-अचल संपत्तियों, बैंक खातों, दस्तावेजों और निवेश संबंधी रिकॉर्ड की जांच कर रही हैं। जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि संबंधित अधिकारियों की घोषित आय और उनके पास मौजूद संपत्ति में कोई असंगति तो नहीं है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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लश्कर-ए-तैयबा का टॉप कमांडर ढेर: 5 दिनों से छिपा था जाकिर अहमद, शोपियां में ऑपरेशन जारी
जम्मू-कश्मीर के शोपियां जिले में सुरक्षाबलों को बड़ी सफलता मिली है। संयुक्त अभियान के दौरान लश्कर-ए-तैयबा का टॉप कमांडर जाकिर अहमद गनी मारा गया है। उसका शव ऑपरेशन के पांचवें दिन बरामद किया गया। सुरक्षा एजेंसियां अब इलाके में छिपे दूसरे आतंकी की तलाश में लगातार अभियान चला रही हैं।
सूचना के आधार पर शुरू किए गए इस ऑपरेशन में सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और सीआरपीएफ ने मिलकर कार्रवाई की। जाकिर गनी का नाम पहलगाम आतंकी हमले के बाद जारी 14 वांछित आतंकियों की सूची में शामिल था। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि उसकी मौत आतंकवाद के खिलाफ चल रहे अभियान की बड़ी सफलता है। फिलहाल पूरे इलाके में सर्च ऑपरेशन जारी है और सुरक्षाबल किसी भी तरह की ढिलाई नहीं बरत रहे हैं।
शनिवार शाम सुरक्षाबलों को सूचना मिली थी कि शोपियां के चनापोरा इलाके में आतंकियों ने ठिकाना बना रखा है। इसके बाद पूरे क्षेत्र की घेराबंदी कर तलाशी अभियान शुरू किया गया। लगातार कई दिनों तक चलाए गए ऑपरेशन के दौरान सुरक्षाबलों ने इलाके को चारों ओर से घेरकर आतंकियों के बच निकलने के सभी रास्ते बंद कर दिए। आखिरकार पांचवें दिन जाकिर अहमद गनी का शव बरामद कर लिया गया।
इस संयुक्त अभियान में सेना की राष्ट्रीय राइफल्स की कई यूनिट, स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) और सीआरपीएफ के जवान शामिल रहे। सेना की विक्टर फोर्स ने घने जंगल और बाग वाले इलाके में विशेष रणनीति के साथ मोर्चा संभाला। रात के समय भी निगरानी बनी रहे, इसके लिए अतिरिक्त जवानों की तैनाती और रोशनी की व्यवस्था की गई। पूरे अभियान के दौरान सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल देखने को मिला।
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ईडी का टीएमसी पर बड़ा एक्शन: 440 करोड़ रुपये वाले 3 बैंक खाते फ्रीज, विमान-हेलीकॉप्टर खरीद में मनी लॉन्ड्रिंग की जांच तेज
पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की मुश्किलें बढ़ गई हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA) के तहत कार्रवाई करते हुए टीएमसी से जुड़े तीन बैंक खातों को फ्रीज कर दिया है। इन खातों में करीब 440 करोड़ रुपये जमा बताए जा रहे हैं। एजेंसी कथित संदिग्ध वित्तीय लेन-देन और चार्टर्ड विमान व हेलीकॉप्टर खरीद से जुड़े मनी ट्रेल की जांच कर रही है।
ईडी ने हाल ही में कोलकाता के करीब पांच स्थानों पर छापेमारी की। कार्रवाई के दायरे में केयरवेल ग्रुप ऑफ कंपनीज भी शामिल रही, जिसकी इकाई केयरवेल एविएशन प्राइवेट जेट किराए पर उपलब्ध कराती है। जांच का मकसद टीएमसी के खातों से जुड़े वित्तीय लेन-देन और विमान खरीद की पूरी प्रक्रिया की पड़ताल करना है।
ईडी की शुरुआती जांच के अनुसार, अप्रैल 2023 से जून 2026 के बीच टीएमसी के बैंक खातों से करीब 160 करोड़ रुपये केयरवेल एविएशन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और उसकी सहयोगी कंपनियों के खातों में ट्रांसफर किए गए। इसके बाद कंपनी ने 82.96 करोड़ रुपये एक नई कंपनी के खाते में भेजे।
एजेंसी का दावा है कि इसी वित्तीय श्रृंखला के जरिए करीब 112 करोड़ रुपये का उपयोग Embraer Legacy 600 कॉरपोरेट विमान और AgustaWestland 109SP हेलीकॉप्टर खरीदने में किया गया। जांच में यह भी सामने आया है कि हेलीकॉप्टर खरीद के लिए विदेश से प्राप्त धन का भी इस्तेमाल किया गया। बाद में इन दोनों विमानों को कथित तौर पर टीएमसी को किराए पर उपलब्ध कराया गया।
प्रवर्तन निदेशालय का कहना है कि विमानों के उपयोग के नाम पर बड़े पैमाने पर वित्तीय लेन-देन हुआ, जो प्रथम दृष्टया संदिग्ध प्रतीत होता है। एजेंसी को आशंका है कि वास्तविक लाभार्थियों की पहचान छिपाने के लिए कंपनियों का इस्तेमाल किया गया। इस पहलू की विस्तृत जांच जारी है।
यह मामला टीएमसी के भीतर राजनीतिक विवाद के बाद सामने आया। पार्टी के कुछ बागी विधायकों ने पार्टी फंड में जमा धन के स्रोत की जांच की मांग उठाई थी। इसके बाद कोलकाता पुलिस ने टीएमसी के तीन बैंक खातों से होने वाले वित्तीय लेन-देन पर रोक लगाई। इस कार्रवाई को चुनौती देते हुए ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने कलकत्ता हाई कोर्ट का रुख किया। वहीं, अब ईडी की जांच ने इस पूरे मामले को और अधिक गंभीर बना दिया है।
इंदौर. मध्य प्रदेश की व्यावसायिक राजधानी इंदौर के बहुचर्चित शिवानी पाटेरिया हत्याकांड में करीब साढ़े छह साल बाद जिला अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने शातिर बैंक अधिकारी अमितेश उर्फ शालू पाटेरिया को अपनी ही पत्नी की हत्या का दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है।
इस रोंगटे खड़े कर देने वाले मामले में आरोपी पति ने अपनी पत्नी की हत्या को सांप का काटना साबित करने की पूरी स्क्रिप्ट तैयार की थी लेकिन फॉरेंसिंक जांच और साक्ष्यों के आगे साहब की यह खूनी साजिश टिक नहीं सकी। अदालत ने आरोपी को न सिर्फ हत्या, बल्कि साक्ष्य मिटाने और कोबरा सांप की हत्या के मामले में वन्यजीव संरक्षण कानून के तहत भी दोषी पाते हुए अलग से सजा और जुर्माना लगाया है।
यह खौफनाक वारदात इंदौर के संचार नगर की है। 1 दिसंबर 2019 को बैंक अधिकारी अमितेश पाटेरिया अपनी पत्नी शिवानी को लेकर अस्पताल पहुंचा और डॉक्टरों को बताया कि उसे सांप ने काट लिया है जिससे उसकी मौत हो गई। शुरुआती तौर पर परिवार ने भी इसे एक दर्दनाक हादसा बताने की कोशिश की लेकिन कहानी में मोड़ तब आया जब मृतका के मायके वालों ने इस मौत को संदिग्ध बताते हुए सीधे दामाद पर हत्या का आरोप मढ़ दिया और मामले में जांच की मांग की।
जब पुलिस ने इस हाई-प्रोफाइल मामले की गहराई से तफ्तीश शुरू की, तो परत-दर-परत जो खुलासे हुए उसने पुलिस अफसरों के भी होश उड़ा दिए। आरोपी पति किसी दूसरी महिला के संपर्क में था और अपनी पत्नी से छुटकारा पाना चाहता था। इसके लिए उसने बकायदा योजना बनाई और राजस्थान के अलवर से एक बेहद जहरीला कोबरा सांप लेकर आया।
वारदात वाली रात आरोपी ने पहले तकिए से शिवानी का मुंह और गला दबाकर उसे मौत के घाट उतारा। इसके बाद हत्या को सांप काटने का रूप देने के लिए शातिर पति ने उस कोबरा सांप को भी मार डाला और उसके शव को घटनास्थल पर रख दिया ताकि पुलिस और डॉक्टर इसे सर्पदंश का मामला मान लें।
आरोपी ने खुद को बचाने के लिए जाल तो तगड़ा बुना था लेकिन वह विज्ञान को धोखा नहीं दे सका। शिवानी की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत की वजह दम घुटना सामने आई न कि सांप का जहर। वहीं फॉरेंसिक और वैज्ञानिक जांच में यह साफ हो गया कि बिस्तर पर मिला कोबरा सांप पहले ही मारा जा चुका था। परिस्थितियों और बयानों में विरोधाभास के आधार पर पुलिस ने कड़ाई से पूछताछ की तो बैंक अफसर का यह खूनी चेहरा बेनकाब हो गया।
साढ़े छह साल तक चली सुनवाई के बाद जिला अदालत ने माना कि अमितेश ने बेहद क्रूरता और शातिराना ढंग से अपनी पत्नी की जान ली। कोर्ट ने आरोपी को उम्रकैद की सजा के साथ-साथ, साक्ष्य मिटाने के अपराध में अलग से सजा सुनाई। इसके अलावा, बेजुबान कोबरा सांप की हत्या कर अपनी साजिश में इस्तेमाल करने के जुर्म में वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत 3 साल की जेल और आर्थिक जुर्माना भी ठोका है। कोर्टऔर न्यायपालिका
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10 करोड़ की MD ड्रग्स जब्त; नागपुर-मुंबई तक नेटवर्क, मऊगंज फैक्ट्री का हो चुका है भंडाफोड़
रीवा. विंध्य में नशे के कारोबार पर रीवा पुलिस ने अब तक का सबसे बड़ा प्रहार किया है। मऊगंज में एमडी ड्रग्स फैक्ट्री का खुलासा होने के कुछ ही घंटों बाद रीवा पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए करोड़ो रुपये के ड्रग्स जब्त की है। इस कार्रवाई में पुलिस ने दो आरोपियों को भी गिरफ्तार किया है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि जब्त की गई ड्रग्स की खेप महाराष्ट्र के नागपुर और मुंबई भेजी जानी थी। पुलिस को इस मामले में अंतर्राज्यीय ड्रग तस्करी नेटवर्क से जुड़े अहम सुराग भी मिले हैं।
यह पूरी कार्रवाई गढ़ थाना और लालगांव चौकी पुलिस की संयुक्त टीम द्वारा की गई। रीवा रेंज के आईजी गौरव राजपूत के निर्देश पर पुलिस टीम ने सोनबरसा गांव से भारी मात्रा में मादक पदार्थ जब्त किया है। जब्त ड्रग्स को बाहर भेजने की तैयारी है। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में जब्त की गई इस एमडी ड्रग्स की कीमत लगभग 10 करोड़ रुपये आंकी गई है। पुलिस ने दोनों आरोपियों को हिरासत में लेकर उनके खिलाफ एनडीपीएस (NDPS) एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है।
रीवा रेंज के आईजी गौरव राजपूत को मुखबिर से सूचना मिली थी कि गांव में बड़ी मात्रा में मादक पदार्थ छिपाकर रखा गया है और उसे महाराष्ट्र भेजने की तैयारी चल रही है। सूचना मिलते ही वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में विशेष टीम गठित कर छापेमारी की गई, जिसमें पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी।
पूछताछ में गिरफ्तार आरोपियों ने कई अहम जानकारियां दी हैं। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि एमडी ड्रग्स की सप्लाई मुंबई और नागपुर तक की जाती थी। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि ड्रग्स कहां से लाई जाती थी, किन राज्यों तक इसका नेटवर्क फैला हुआ है और इस पूरे रैकेट में कौन-कौन लोग शामिल हैं। फंडिंग और सप्लाई चेन की भी गहन जांच की जा रही है।
रीवा पुलिस के मुताबिक, नशे के सौदागरों के खिलाफ चलाया जा रहा यह अभियान रुकने वाला नहीं है। यह विंध्य के इतिहास की सबसे बड़ी रिकवरी है। पुलिस को इस अंतरराज्यीय नेटवर्क से जुड़े कई अहम सुराग और नाम हाथ लगे हैं, जिसके आधार पर आने वाले दिनों में कुछ और बड़े तस्करों की गिरफ्तारी तय मानी जा रही है।
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दर्दनाक मंजर: कुएं में गिरने से 13 हिरणों की मौत, एक कुत्ता भी मिला मृत, मचा हड़कंप
शाजापुर। मध्य प्रदेश के शाजापुर जिले में वन्यजीवों की सामूहिक मौत का बेहद दर्दनाक मामला सामने आया है। जिले के कालापीपल क्षेत्र स्थित खरदौनकलां गांव के एक खेत में बने कुएं में गिरने से 13 हिरणों की मौत हो गई। कुएं में हिरणों के साथ एक कुत्ता भी मृत अवस्था में मिला। घटना से क्षेत्र में हड़कंप मच गया।
जानकारी के अनुसार खेत मालिक किसान कीटनाशक का छिड़काव करने खेत पहुंचा था। इस दौरान कुएं से दुर्गंध आने पर उसने अंदर झांककर देखा तो उसमें कई हिरणों के शव दिखाई दिए। सूचना मिलते ही वन विभाग, पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची। प्रारंभिक जांच में आशंका जताई जा रही है कि हिरणों का झुंड आवारा कुत्ते से बचने के लिए तेजी से भाग रहा था। इसी दौरान सभी हिरण खुले कुएं में गिर गए। उनका पीछा कर रहा कुत्ता भी कुएं में गिरने से मर गया।
वन विभाग के मुताबिक मृत हिरणों में चार नर और नौ मादा शामिल हैं। शव सड़-गल चुके थे, जिससे अनुमान लगाया जा रहा है कि यह घटना एक से दो दिन पहले हुई होगी। मौके पर पंचनामा तैयार करने के बाद वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत संरक्षित प्राणी होने के कारण नायब तहसीलदार की मौजूदगी में सभी हिरणों का पोस्टमार्टम कराया गया। इसके बाद नियमानुसार मौके पर ही उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया।
देवास। कन्नौद के ग्राम बरबईखेड़ा में किन्नर का भेष बनाकर लूट-डकैती की वारदात को अंजाम देने वाले छह आरोपियों को खातेगांव और कन्नौद पुलिस ने गिरफ्तार कर बड़ी सफलता हासिल की है। मामले का खुलासा अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सौम्या जैन ने प्रेस वार्ता में किया।
पुलिस के मुताबिक 19 जून 2026 को हुई इस वारदात के बाद विशेष टीम गठित कर तकनीकी साक्ष्यों, सीसीटीवी फुटेज और मुखबिर की सूचना के आधार पर आरोपियों की तलाश की गई। पूछताछ में आरोपियों ने किन्नर का भेष धारण कर वारदात को अंजाम देने की बात स्वीकार की। पुलिस का कहना है कि आरोपियों ने पहचान छिपाने और लोगों को शक न हो, इसके लिए किन्नर का भेष अपनाया था।
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से लूटी गई दो सोने की मालाएं, एक सोने का टॉप्स, घटना में इस्तेमाल किया गया चाकू और वारदात में प्रयुक्त दो कारें बरामद की हैं। पुलिस के अनुसार पीड़ित ने आरोपियों के डर से तत्काल रिपोर्ट दर्ज नहीं कराई थी। आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद उसने थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई।
फिलहाल सभी आरोपियों से पूछताछ जारी है। पुलिस को उम्मीद है कि पूछताछ में इस गिरोह से जुड़े अन्य मामलों का भी खुलासा हो सकता है। खातेगांव और पुलिस की इस संयुक्त कार्रवाई को बड़ी सफलता माना जा रहा है।
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अन्नदाताओं से धोखाधड़ी: 31 किसानों से 80 लाख की ठगी, खाली खाते का चेक थमाकर फरार हुए व्यापारी
जबलपुर। मध्य प्रदेश के जबलपुर से किसानों के साथ धोखाधड़ी का एक बड़ा मामला सामने आया है। यहां दो शातिर व्यापारियों ने क्षेत्र के 6 गांव के 31 किसानों से करीब 80 लाख रुपये की ठगी को अंजाम दिया है। आरोपियों ने किसानों से भारी मात्रा में गेहूं और चना तो खरीद लिया लेकिन भुगतान के बदले उन्हें खाली बैंक खाते के चेक थमा दिए जो बाद में बाउंस हो गए। पीड़ित किसानों की शिकायत पर कटंगी थाना पुलिस ने दोनों सगे व्यापारियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
यह मामला कटंगी थाना क्षेत्र की है जहां अप्रैल महीने में व्यापारियों ने किसानों से अनाज खरीदा था। आरोपी व्यापारियों ने किसानों से करीब 6 हजार क्विंटल गेहूं और 150 क्विंटल चना खरीदा था। सौदा होने के बाद व्यापारियों ने किसानों को भरोसा जीतने के लिए 11 लाख रुपये और बची रकम के लिए 80 लाख रुपये का चेक थमा दिया। जब किसानों ने भुगतान के लिए चेक बैंक में लगाया तो खाता खाली होने के कारण बैंक ने चेक बाउंस कर दिया। इसके बाद जब व्यापारियों ने पैसे देने से हाथ खड़े कर लिए तो ठगे गए किसानों ने पुलिस का दरवाजा खटखटाया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए कटंगी थाना पुलिस ने दोनों आरोपी व्यापारियों राजा सिंह लोधी और सोहन लोधी के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि आरोपियों ने इस अनाज को कहां खपाया और किसानों के पैसे कैसे वसूले जाएंगे।
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80 साल का हो चुका हूं, पार्टी ने सब कुछ दियाः अब सिर्फ धर्म की रक्षा करूंगा, दशहरे पर निकालेंगे गैर-राजनीतिक यात्रा
भोपाल। मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने अपनी भविष्य की सियासत और जीवन की दिशा को लेकर एक चौंकाने वाला बयान दिया है। दिग्विजय सिंह ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि वे अब सक्रिय चुनावी राजनीति से धीरे-धीरे दूरी बना रहे और उनका पूरा ध्यान धर्म-कर्म व अध्यात्म पर रहेगा। उन्होंने अपनी आगामी यात्रा का ऐलान करते हुए कहा है कि यह पूरी तरह से धार्मिक होगी, इसमें राजनीति का कोई स्थान नहीं होगा।
अपने राजनीतिक जीवन और उम्र का जिक्र करते हुए दिग्विजय सिंह ने भावुक और बेबाक अंदाज में कहा, “मैं अब 80 साल का हो चुका हूँ। मुझे मेरी पार्टी (कांग्रेस) ने सब कुछ दिया है। मैं सांसद रहा, विधायक रहा और सूबे का मुख्यमंत्री भी रहा। अब मेरी कोई व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा नहीं बची है।” उन्होंने खुलासा करते हुए आगे कहा कि हाल ही में हुए राज्यसभा चुनाव के दौरान भी उन्होंने खुद संगठन से कहा था कि अब मेरी जगह किसी अन्य नए चेहरे को मौका दिया जाना चाहिए।
2 अक्टूबर की जगह ‘दशहरे’ पर शुरू यात्रा होगी। दिग्विजय सिंह ने अपनी इस आगामी धार्मिक यात्रा की रूपरेखा और तारीखों में बदलाव को लेकर कई महत्वपूर्ण बातें साझा कीं। पहले यह यात्रा 2 अक्टूबर से शुरू होने वाली थी, लेकिन अब इसे बदलकर दशहरे (विजयादशमी) के पावन पर्व से शुरू करने का निर्णय लिया गया है। इस यात्रा में कांग्रेस या किसी भी अन्य राजनीतिक दल का झंडा इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। यात्रा के भीतर सभी धर्मों के झंडे शामिल होंगे, जो सर्वधर्म समभाव का संदेश देंगे। उन्होंने साफ किया कि वे इस यात्रा के दौरान कोई राजनीतिक या धार्मिक प्रवचन नहीं देंगे। यहां तक कि वे सोशल मीडिया पर भी इस यात्रा को लेकर कोई प्रचार या पोस्ट नहीं लिखेंगे।
दिग्विजय की इस यात्रा का सबसे बड़ा और दिलचस्प पहलू इसके मुख्य अतिथि (Chief Guest) को लेकर है। उन्होंने ऐलान किया है कि अयोध्या आंदोलन के समय चार गोलियां खाने वाले प्रखर कारसेवक संतोष दुबे इस यात्रा के मुख्य अतिथि होंगे। संतोष दुबे को मुख्य अतिथि बनाकर दिग्विजय ने एक बड़ा दांव खेला है, जिससे सियासी गलियारों में नई चर्चा छिड़ गई हैं।
दिग्विजय का यह बयान ऐसे समय में आया है जब कांग्रेस संगठन के भीतर पीढ़ी परिवर्तन (Generation Shift) का दौर चल रहा है। उनके इस ‘धार्मिक टर्न’ को राजनीति के जानकार उनके सक्रिय संसदीय जीवन से सन्यास और खुद को ‘मार्गदर्शक’ की भूमिका में ले जाने के संकेत के रूप में देख रहे हैं। बहरहाल, उनकी यह ‘गैर-राजनीतिक’ यात्रा आने वाले दिनों में मध्यप्रदेश की राजनीति में क्या रंग लाती है, इस पर सबकी निगाहें टिकी रहेंगी।
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