


सिरोंज । विदिशा जिले के सिरोंज विधानसभा क्षेत्र से एक बेहद सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहां मुरवास में संचालित एक मदरसे की 26 वर्षीय महिला शिक्षिका ने तीन मौलवियों पर यौन उत्पीड़न, जबरन छेड़छाड़ और भाई को जान से मारने की धमकी देने जैसे कई गंभीर आरोप लगाए हैं। इस हाई-प्रोफाइल मामले में तत्परता दिखाते हुए पुलिस ने महज 24 घंटे के भीतर तीनों आरोपी मौलवियों को दबोचकर कोर्ट में पेश कर दिया है। वहीं स्थानीय विधायक उमाकांत शर्मा ने इस पूरे मामले में प्रदेश स्तरीय जांच की मांग उठा दी है।
यह पूरा शर्मनाक मामला मुरवास स्थित सिराज एजुकेशन मदरसे का है। पुलिस को दी गई लिखित शिकायत में पीड़िता ने बताया कि मदरसे में ही कार्यरत मौलवी नसीर, अख्तर और जावेद लंबे समय से उस पर अश्लील टिप्पणियां कर रहे थे और अभद्र व्यवहार कर रहे थे।
घटना वाले दिन मुख्य आरोपी मौलवी नसीर ने काम के बहाने शिक्षिका को ऑफिस में बुलाया। जैसे ही वह अंदर पहुंची, नसीर ने उसके हाथ पकड़ लिए और वहां मौजूद अन्य दो मौलवियों यानि अख्तर और जावेद ने उसके साथ जबरन छेड़छाड़ और यौन उत्पीड़न की वारदात को अंजाम दिया।
पीड़िता ने पुलिस को बताया कि इस घिनौनी करतूत के बाद तीनों आरोपियों ने उसे मुंह बंद रखने के लिए धमकी दी थी। आरोपियों ने कहा था कि यदि उसने इस बारे में किसी को भी बताया या पुलिस में शिकायत दर्ज कराई तो वे उसके इकलौते भाई की हत्या कर देंगे। इस धमकी के डर से पीड़िता कुछ दिनों तक खौफ के साए में चुप रही लेकिन आखिरकार हिम्मत जुटाकर उसने पुलिस की शरण ली।
शिकायत मिलते ही पुलिस महकमे में खलबली मच गई। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए केस दर्ज किया और महज 24 घंटे के भीतर तीनों नामजद आरोपियों नसीर, अख्तर और जावेद को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश कर दिया।
इस संवेदनशील मामले के सामने आने के बाद सिरोंज के विधायक उमाकांत शर्मा भी सख्त नजर आ रहे हैं। उन्होंने इस घटना की घोर निंदा करते हुए मध्य प्रदेश सरकार से प्रदेश स्तरीय उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
उन्होंने कहा कि दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई होनी चाहिए जो एक मिसाल बने। इसके साथ ही उन्होंने प्रशासन से यह भी जांच करने को कहा है कि यदि यह मदरसा नियमों को ताक पर रखकर अवैध रूप से संचालित पाया जाता है तो इस पर भी तत्काल वैधानिक व जमींदोज करने जैसी कार्रवाई की जानी चाहिए। फिलहाल पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपियों को जेल भेजा जा चुका है और मामले की विस्तृत विवेचना जारी है।
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दवा लेने निकला युवक दिनदहाड़े अगवा, CCTV में कैद हुई पूरी वारदात
दवा लेने घर से निकले एक युवक का दिनदहाड़े कथित अपहरण होने की घटना ने झाबुआ जिले में सनसनी फैला दी है। पूरी वारदात पास में लगे CCTV कैमरे में रिकॉर्ड हो गई, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। घटना के बाद परिजनों में दहशत है और स्थानीय लोग भी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता जता रहे हैं।
जानकारी के मुताबिक यह मामला झाबुआ जिले के खयडूछोटी गांव के रहने वाले भल्लू सिंगाड़ से जुड़ा है। बताया जा रहा है कि वह दवा लेने के लिए पारा गांव गए थे। इसी दौरान कुछ लोगों ने उन्हें जबरन अपने साथ ले लिया। घटना को देखकर उनकी पत्नी भूरी बाई घबरा गईं और पुलिस से मदद की गुहार लगाई। उन्होंने कुछ लोगों के खिलाफ नामजद शिकायत दर्ज कराते हुए पति की सुरक्षित वापसी की मांग की है।
इस पूरे मामले में सबसे अहम कड़ी CCTV फुटेज को माना जा रहा है। वायरल वीडियो में कुछ लोग कथित तौर पर युवक को जबरन ले जाते हुए दिखाई दे रहे हैं। हालांकि वीडियो की जांच पुलिस कर रही है और अभी तक सभी तथ्यों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस का कहना है कि फुटेज की मदद से घटना में शामिल लोगों की पहचान की जा रही है।
पीड़ित की पत्नी का आरोप है कि घटना के पर्याप्त सबूत होने के बावजूद अब तक उनके पति का कोई पता नहीं चल सका है। उन्होंने प्रशासन से जल्द कार्रवाई की मांग की है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार मामले को गंभीरता से लिया गया है और संदिग्ध लोगों से पूछताछ की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल पुलिस अपहृत युवक की तलाश में संभावित ठिकानों पर दबिश भी दे रही है।
दिनदहाड़े कथित अपहरण की इस घटना के बाद इलाके के लोगों में डर का माहौल है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि अगर भीड़भाड़ वाले इलाके में इस तरह किसी व्यक्ति को जबरन ले जाया जा सकता है, तो आम लोगों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ना स्वाभाविक है।
कानून के जानकारों का कहना है कि किसी भी अपहरण के मामले में शुरुआती कुछ घंटे बेहद अहम होते हैं। ऐसे मामलों में CCTV फुटेज, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और मोबाइल लोकेशन जैसी तकनीकी जांच महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यदि किसी व्यक्ति के अपहरण की आशंका हो तो परिजनों को तुरंत पुलिस को सूचना देनी चाहिए और उपलब्ध सबूत सुरक्षित रखने चाहिए।
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बाप ने ही उजाड़ दिया बेटी का सुहाग: ससुर ने दामाद के साथ पी शराब, फिर गमछे से गला दबाकर हत्या कर दी
बालाघाट। मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में बीते 14 जून को अज्ञात युवक का शव मिला था। सूचना मिलने पर पुलिस, एफएसएल टीम और डॉग स्क्वाड के साथ घटनास्थल पहुंची थी और आवश्यक कार्यवाही कर शव को पीएम के लिए भिजवा दिया था। यह पूरा मामला वारासिवनी थाना क्षेत्र अंतर्गत कोपे के जंगल का है। इस केस में अब सनसनीखेज खुलासा हुआ है।
मृतक की पहचान राजेंद्र शरणागत (40) ग्राम डोंगरिया निवासी के रूप में हुई है। वह एक दिन पहले से लापता था। पीएम रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि युवक की मौत गला दबाने से हुई थी। इसी आधार पर पुलिस ने मृतक के परिजनों और ग्रामीणों से पूछताछ की। घटना स्थल के आसपास के सीसीटीवी खंगाले तो मृतक के साथ उसके ससुर राजेश चौहान और एक अन्य व्यक्ति दिखाई दिए।
पुलिस ने राजेश चौहान को हिरासत में लेकर कड़ाई से पूछताछ की। जिसमें उसने अपराध स्वीकार करते हुए बताया कि उनका दामाद बहुत ज्यादा शराब पीता था और उसकी बेटी से मारपीट किया करता था। शराब की लत के कारण उसने कृषि भूमि भी बेच दी थी। इन्हीं सब कारणों के चलते आरोपी राजेश चौहान ने अपने साथी प्रभुदयाल बिसेन के साथ मिलकर योजना बद्ध तरीके से पहले मिलकर शराब पी और जंगल में ले जाकर गमछे से गला दबाकर हत्या कर दी। पुलिस ने आरोपियों से हत्या में प्रयुक्त गमछा, दो बाइक और मोबाइल फोन जब्त किए हैं।
रतलाम से रिश्तों को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। यहां कैंसर से जूझ रहे एक युवक ने अपनी पत्नी पर कानूनी रूप से तलाक लिए बिना दूसरी शादी करने का आरोप लगाया है। मामले में कोर्ट ने प्रथम दृष्टया साक्ष्य मिलने के बाद आरोपी महिला के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिया है। राजस्व कॉलोनी निवासी आकाश जाट की मुलाकात इंस्टाग्राम के जरिए साक्षी नकुम से हुई थी। करीब छह महीने की दोस्ती के बाद दोनों ने 20 नवंबर 2022 को इंदौर के आर्य समाज मंदिर में विवाह किया। परिवार की सहमति मिलने के बाद 13 दिसंबर 2022 को रतलाम में सामाजिक रीति-रिवाजों के साथ दोबारा शादी हुई।
शादी के कुछ ही महीनों बाद आकाश की तबीयत बिगड़ने लगी। गुजरात के वडोदरा में जांच के दौरान 10 अप्रैल 2023 को उन्हें श्वासनली (Trachea) का कैंसर होने की पुष्टि हुई। आकाश का आरोप है कि बीमारी का पता चलते ही पत्नी का व्यवहार बदल गया। उसने साथ देने के बजाय दूरी बना ली और कहा, "तुम तो कल मर जाओगे, मेरा क्या होगा?"
आकाश के इलाज के दौरान साक्षी ने महिला थाने में उनके खिलाफ मारपीट की शिकायत दर्ज कराई लेकिन मेडिकल रिकॉर्ड के आधार पर पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। इसके बाद साक्षी ने फैमिली कोर्ट में तलाक की याचिका दायर कर दी। इसी बीच जबकि तलाक का मामला अदालत में लंबित था और दोनों कानूनी रूप से पति-पत्नी थे, साक्षी ने 10 जून 2024 को छतरपुर निवासी एक युवक से दूसरी शादी कर ली। इस विवाह से एक बेटी भी हुई। जब आकाश को इसकी जानकारी मिली तो उन्होंने सबूत जुटाकर अदालत का दरवाजा खटखटाया।
18 अप्रैल 2026 को फैमिली कोर्ट ने साक्षी की तलाक याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि पत्नी ने अप्रैल 2023 में घर से निकाले जाने का दावा किया था जबकि रिकॉर्ड के अनुसार नवंबर 2023 में वह अपने पिता के साथ विवाह पंजीकरण संबंधी प्रक्रिया में शामिल हुई थी। अदालत ने माना कि उपलब्ध साक्ष्य पत्नी के आरोपों का समर्थन नहीं करते।
इसके बाद आकाश ने अपने अधिवक्ता रजनीश शर्मा के माध्यम से JMFC कोर्ट में आपराधिक परिवाद दायर किया। अदालत ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 82(1) के तहत बिना वैध तलाक दूसरी शादी करने के आरोप में मामला दर्ज किया। बार-बार समन जारी होने के बावजूद साक्षी अदालत में पेश नहीं हुई। लगातार अनुपस्थिति को देखते हुए कोर्ट ने उसके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया है और 25 जुलाई 2026 को अदालत में पेश होने का निर्देश दिया है।
आकाश की मुश्किलें यहीं खत्म नहीं हुईं। कैंसर के इलाज के दौरान 19 जून 2023 को उनके पिता बंशीलाल जाट का निधन हो गया। कुछ समय बाद उनकी मां सुशीला जाट भी चल बसीं। फिलहाल आकाश अकेले रह रहे हैं और इलाज व दैनिक जरूरतों के लिए दोस्तों के सहयोग पर निर्भर हैं। उनके अधिवक्ता रजनीश शर्मा बिना किसी फीस के यह कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं।
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मंदिर निर्माण रोकने पहुंची पुलिस से झूमाझटकीः वाहनों में पथराव, 2 दर्जन से अधिक पर केस दर्ज
सतना। जिले के कोटर थाना क्षेत्र के कैमरी पहाड़ स्थित खनन लीज क्षेत्र में मंदिर निर्माण को लेकर विवाद सामने आया है। पुलिस के अनुसार, लीज क्षेत्र में निर्माण कार्य रोकने पहुंची पुलिस टीम के साथ ग्रामीणों ने अभद्रता की। इस दौरान शासकीय वाहनों में पथराव किए जाने का भी आरोप है। घटना शुक्रवार की शाम की है। इस मामले का एक वीडियो भी शनिवार की देर शाम सामने आया है। मामले में कोटर थाना पुलिस ने सात नामजद सहित दो दर्जन से अधिक लोगों के खिलाफ शासकीय कार्य में बाधा, पथराव, गाली-गलौज और अन्य धाराओं में प्रकरण दर्ज किया है।
दरअसल कैमरी पहाड़ स्थित 56 एकड़ की खदान का 50 वर्ष का खनन पट्टा गैवीनाथ माइंस एंड मिनरल्स के नाम स्वीकृत है। पुलिस के मुताबिक शुक्रवार को कुछ ग्रामीण लीज क्षेत्र के अंदर एक टीले पर मंदिर निर्माण के लिए पहुंचे थे। इसकी सूचना मिलने पर डायल-112 के साथ आरक्षक अभय सिंह मौके पर पहुंचे। मगर ग्रामीण उनसे अभद्रता करने लगे। स्थिति बेकाबू होते देख कांस्टेबल ने थाने को सूचना दी। लिहाजा अतिरिक्त पुलिस बल भी मौके पर पहुंचा। पुलिस का आरोप है कि समझाइश के दौरान कुछ लोगों ने गाली गलौच करते हुए पुलिसकर्मियों से झुमाझटकी की, जिसके बाद पुलिस दल को वहां से हटना पड़ा।
लौटने के दौरान वाहनों में पथराव किया गया। जिसका एक वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है। उधर, शनिवार को खनिज विभाग की टीम भी मौके पर पहुंची और स्वीकृत लीज क्षेत्र का सीमांकन कर ग्रामीणों से मंदिर निर्माण के लिए वैकल्पिक स्थान चुनने का आग्रह किया। हालांकि ग्रामीण उसी स्थान पर मंदिर निर्माण की मांग पर अड़े रहे। बताया जा रहा है कि इस मुद्दे को लेकर पहले भी विवाद हो चुका है।
पुलिस और प्रशासन का कहना है कि मामले की जांच जारी है। वहीं कुछ स्थानीय लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। बताया जा रहा है कि कुछ स्थानीय प्रभावशाली लोग आदिवासियों को आगे कर इस तरह का विवाद आए दिन करवा रहे है जिससे खनन कारोबारियों के सामने समस्याएं खड़ी हो रही है। पता चला है कि ये वही लोग है जो लीज स्वीकृत होने से पहले अवैध उत्खनन कर सरकारी खजाने को चोट पहुंचा रहे थे।
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एमपी कैबिनेट में यूसीसी को मंजूरी, लिव-इन रजिस्ट्रेशन अनिवार्य, आदिवासियों को रखा बाहर
भोपाल. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में भोपाल जिले के जगदीशपुर में रविवार 19 जुलाई को आयोजित मध्य प्रदेश कैबिनेट की बैठक में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक के प्रारूप को मंजूरी दे दी गई. सरकार अब इस विधेयक को 20 जुलाई से शुरू होने वाले विधानसभा के मानसून सत्र में पेश करेगी. बैठक में यूसीसी के अलावा श्रम संहिता, निजी विश्वविद्यालय संशोधन, नागरिक सुरक्षा और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस से जुड़े विधेयकों को भी स्वीकृति दी गई.
कैबिनेट बैठक के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि समान नागरिक संहिता का उद्देश्य सभी नागरिकों के लिए समान कानून लागू करना है. उन्होंने कहा कि राम और रहीम सबके लिए एक जैसा कानून होगा. हालांकि, इस कानून के दायरे से आदिवासी समुदाय को बाहर रखा गया है.
प्रस्तावित विधेयक के तहत एक माह के भीतर लिव-इन संबंधों का पंजीयन अनिवार्य किया जाएगा. ऐसे संबंधों से जन्म लेने वाली संतान को उत्तराधिकार के सभी अधिकार प्राप्त होंगे. यदि कोई व्यक्ति बिना सूचना दिए लिव-इन संबंध में रहता है, तो उसके विरुद्ध कानूनी कार्रवाई का प्रावधान भी रखा गया है.
यूसीसी के तहत विवाह से जुड़े प्रावधान सभी नागरिकों के लिए समान होंगे. मुख्यमंत्री ने कहा कि विवाह विच्छेद केवल मौखिक घोषणा से मान्य नहीं होगा, बल्कि उसे कानूनी प्रक्रिया के तहत ही मान्यता मिलेगी.
मुख्यमंत्री ने बताया कि कांग्रेस को छोड़कर अन्य सभी राजनीतिक दलों ने समान नागरिक संहिता को लेकर अपने सुझाव दिए हैं. उन्होंने कांग्रेस से भी दलगत राजनीति से ऊपर उठकर इस विधेयक का समर्थन करने की अपील की.
कैबिनेट ने प्रदेश में 71 स्वास्थ्य संस्थाओं के उन्नयन के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी. साथ ही प्रदेश की एकमात्र मेडिकल यूनिवर्सिटी का विभाजन कर दूसरी मेडिकल यूनिवर्सिटी का मुख्यालय उज्जैन में स्थापित करने का निर्णय लिया गया. वर्तमान में जबलपुर स्थित मेडिकल यूनिवर्सिटी सभी मेडिकल कॉलेजों को संबद्धता प्रदान करती है.
विधेयक के अनुसार यदि विवाह का पंजीकरण नहीं कराया जाता है, तो केवल इसी आधार पर विवाह अमान्य नहीं माना जाएगा. हालांकि, यदि रजिस्ट्रार बिना किसी ठोस लिखित कारण के आवेदन खारिज करता है, तो उसके खिलाफ दंड का प्रावधान किया गया है.
प्रस्तावित कानून में तलाक के बाद पूर्व जीवनसाथी से दोबारा विवाह के लिए निकाह हलाला जैसी अपमानजनक या नीचा दिखाने वाली शर्तों को मानने, बढ़ावा देने या किसी को इसके लिए मजबूर करने को दंडनीय आपराधिक अपराध माना गया है.
यूसीसी के तहत विवाहित या अविवाहित माता-पिता से जन्मे बच्चों, जैविक संतान, गोद लिए गए बच्चों और सरोगेसी से जन्मे बच्चों को समान कानूनी दर्जा दिया जाएगा. सभी बच्चों को कानून के तहत बराबर अधिकार प्राप्त होंगे.
विधेयक में पुत्र और पुत्री दोनों को संपत्ति के उत्तराधिकार में समान अधिकार देने का प्रावधान किया गया है. उत्तराधिकार के मामले में वैवाहिक स्थिति के आधार पर किसी भी तरह का भेदभाव नहीं किया जाएगा.
प्रस्तावित प्रावधानों के अनुसार जीवित माता और पिता दोनों को क्लास-1 उत्तराधिकारी माना जाएगा. यदि किसी संतान की मृत्यु होती है, तो उसकी संपत्ति में माता-पिता को जीवनसाथी और बच्चों के साथ बराबर का हिस्सा मिलेगा. इसके अलावा, उत्तराधिकार के मामलों में विधवा और विधुर के साथ भी समान व्यवहार सुनिश्चित किया जाएगा.
मुंबई। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने नासिक के ज्योतिषी अशोक खरात, उनकी पत्नी कल्पना खरात और चार अन्य के खिलाफ मनी-लॉन्ड्रिंग केस में मुंबई की एक स्पेशल कोर्ट में चार्जशीट फाइल की।
खरात पर आरोप है कि उन्होंने कथित लॉन्ड्रिंग ऑपरेशन चलाने के लिए लोगों की आध्यात्मिक आस्था का फायदा उठाया। इस केस के सिलसिले में, ED ने लगभग 37 करोड़ रुपये की संपत्ति अटैच की।
ED ने खरात पर दो कोऑपरेटिव क्रेडिट सोसाइटियों के ज़रिए एक कर्मचारी की मिलीभगत से कई अकाउंट्स को फ्रॉड तरीके से ऑपरेट करके और कई बेनामी अकाउंट्स के ज़रिए बड़ी मात्रा में कैश डिपॉजिट और बाद में विड्रॉल करके मनी लॉन्ड्रिंग करने का आरोप लगाया।
ED ने इस केस में NCP नेता रूपाली चाकनकर के बयान दर्ज किए। रूपाली, जिन्होंने खरात की गिरफ्तारी के बाद राज्य महिला आयोग की चेयरपर्सन का पद छोड़ दिया था, उनके बनाए शिवनिका ट्रस्ट की ट्रस्टी में से एक थीं। खरात से जुड़ाव के कारण चाकनकर को आयोग के पद से इस्तीफा देना पड़ा।
ED ने कहा कि लॉन्ड्रिंग का पैसा भरोसेमंद साथियों के पास रखा गया था या उनके परिवार के सदस्यों के नाम पर नासिक, अहमदनगर, सोलापुर, पुणे और मुंबई में अचल संपत्तियों में निवेश किया गया था।
ED ने आरोप लगाया कि खरात ने बिना सहमति के फॉलोअर्स के दस्तावेजों का इस्तेमाल करके दो क्रेडिट सोसाइटियों में 60 बैंक खाते खोले, जिनमें से 43 एक ही दिन में खोले गए।
सभी खाते उसके मोबाइल नंबर से जुड़े थे, जिससे उसे पैसे पर कंट्रोल मिल गया। ED ने कहा कि इन खातों के ज़रिए 9 करोड़ रुपये से ज़्यादा का कैश जमा किया गया और इसे संगठित जबरन वसूली और धार्मिक हेरफेर से अपराध की कमाई बताया।
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वांगचुक की पत्नी ने खटखटाया दिल्ली HC का दरवाजा... रखी ये बड़ी मांग, अस्पताल प्रबंधन पर साधा निशाना
दिल्ली के Safdarjang अस्पताल में भर्ती सामाजिक कार्यकर्ता और इंजीनियर सोनम वांगचुक को निजी अस्पताल में शिफ्ट करने की मांग को लेकर उनकी पत्नी गीतांजलि आंगमो ने दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया है। उन्होंने याचिका में कहा है कि उन्हें सफदरजंग अस्पताल की व्यवस्था पर भरोसा नहीं है और वांगचुक को जिस तरह अस्पताल में रखा गया है, वह एक तरह की गैरकानूनी हिरासत जैसा है। उन्होंने अदालत से वांगचुक को बेहतर इलाज के लिए किसी निजी अस्पताल में भेजने की अनुमति देने की मांग की है।
सोनम पिछले 22 दिनों से आमरण अनशन पर हैं। शनिवार सुबह दिल्ली पुलिस उन्हें जंतर-मंतर से उठाकर सफदरजंग अस्पताल ले गई थी। अस्पताल में भर्ती होने के बाद भी उन्होंने अपना अनशन खत्म नहीं किया है। जानकारी के अनुसार, उन्होंने ड्रिप, ओआरएस और दवाइयां लेने से भी इनकार कर दिया है। डॉक्टर लगातार उनकी निगरानी कर रहे हैं, लेकिन उनकी ओर से इलाज में सहयोग नहीं किया जा रहा है।
वांगचुक और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) 28 जून से जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे हैं। उनका आंदोलन NEET पेपर लीक मामले में जवाबदेही तय करने और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर है। वांगचुक की ओर से सोशल मीडिया पर कहा गया कि 20 जुलाई का प्रदर्शन आजादी का दूसरा आंदोलन होगा। इसमें पेपर लीक जैसे अन्याय और कथित अवैध हिरासत के खिलाफ आवाज उठाई जाएगी।
सूत्रों के मुताबिक, शुक्रवार देर रात करीब 1:30 बजे दिल्ली पुलिस को वांगचुक को अस्पताल ले जाने के निर्देश मिले। इसके बाद नई दिल्ली जिले के वरिष्ठ अधिकारियों ने मंदिर मार्ग थाने में पूरी रणनीति तैयार की। पुलिस ने बिना किसी टकराव के कार्रवाई करने की योजना बनाई और इसकी रिहर्सल भी की। शनिवार सुबह करीब 5 बजे पुलिसकर्मी सादे कपड़ों में सफेद चादरें लेकर जंतर-मंतर पहुंचे और वांगचुक को चादर सहित उठाकर एंबुलेंस तक ले गए। बताया गया कि कार्रवाई की वीडियो रिकॉर्डिंग से बचने के लिए चादरों का इस्तेमाल किया गया।
वांगचुक के अस्पताल भेजे जाने के बावजूद जंतर-मंतर पर CJP का विरोध प्रदर्शन जारी है। पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके भी भूख हड़ताल पर बैठे हैं। प्रदर्शनकारियों ने 20 जुलाई को संसद तक मार्च निकालने का ऐलान किया है। इसी बीच आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया भी रविवार दोपहर प्रदर्शन में शामिल होंगे। इससे पहले अरविंद केजरीवाल ने भी वीडियो जारी कर वांगचुक को अस्पताल भेजे जाने का विरोध किया था।
कॉकरोच जनता पार्टी ने दावा किया है कि दिल्ली पुलिस और भाजपा से जुड़े 30 से 40 लोग प्रदर्शन स्थल में घुस आए हैं। पार्टी का आरोप है कि ये लोग भारत विरोधी और भड़काऊ बयान देकर आंदोलन को बदनाम करने की कोशिश कर सकते हैं। CJP ने अपने समर्थकों से ऐसे लोगों की पहचान कर उन्हें मंच से दूर रखने की अपील की है। वहीं, पुलिस की ओर से इन आरोपों पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
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अस्पताल के OT में प्रेमिका की हत्या : जहरीला इंजेक्शन देकर नर्स की जेब में रख दिया था फर्जी सुसाइड नोट
मेरठ। जिले के लोहिया नगर स्थित एक अस्पताल में नर्स नेहा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत ने सनसनी फैला दी। नेहा शनिवार सुबह रोज की तरह अस्पताल पहुंची थी, लेकिन दोपहर में ऑपरेशन थिएटर (OT) के अंदर बेसुध मिली। डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। शुरुआती घटनाक्रम ने आत्महत्या का संकेत दिया, लेकिन बाद में मामला हत्या का निकला। मौके पर पहुंची पुलिस ने शव की तलाशी ली तो उसकी जेब से एक कथित सुसाइड नोट और सल्फास की गोलियां बरामद हुईं। नोट में ससुराल पक्ष पर प्रताड़ना के आरोप लगाए गए थे। हालांकि शुरुआती जांच के दौरान पुलिस ने सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए मामले की पड़ताल शुरू कर दी।
मृतका के मायके पक्ष ने सुसाइड नोट को फर्जी बताते हुए उसकी लिखावट पर सवाल खड़े किए। परिजन नेहा की पुरानी कॉपियां और डायरियां लेकर थाने पहुंचे। पुलिस ने जब दोनों लिखावटों का मिलान किया तो स्पष्ट अंतर सामने आया। इसके बाद आत्महत्या की आशंका कमजोर पड़ गई और हत्या का मामला दर्ज कर जांच तेज कर दी गई।
जांच के दौरान पुलिस ने नेहा के मोबाइल की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) खंगाली। इसमें अस्पताल के कर्मचारी सुरेश से उसकी लगातार बातचीत सामने आई। पुलिस के अनुसार दोनों के बीच कई महीनों से प्रेम संबंध थे और नेहा सुरेश पर शादी का दबाव बना रही थी। इसी बिंदु से जांच को नई दिशा मिली।
पुलिस का आरोप है कि शादी के दबाव से बचने के लिए सुरेश ने अपने साथी फरहान के साथ मिलकर नेहा की हत्या की योजना बनाई। आरोप है कि ऑपरेशन थिएटर के भीतर नेहा को जहरीला इंजेक्शन लगाया गया और बाद में घटना को आत्महत्या का रूप देने के लिए उसकी जेब में फर्जी सुसाइड नोट और सल्फास की गोलियां रख दी गईं।
पुलिस जांच में सामने आया कि नेहा के पति की करीब ढाई वर्ष पहले मौत हो चुकी थी। इसके बाद वह निजी अस्पताल में नर्स के रूप में काम कर अपने परिवार की जिम्मेदारी संभाल रही थी। इसी दौरान उसकी सुरेश से नजदीकियां बढ़ीं, जो बाद में इस सनसनीखेज हत्याकांड की वजह बनीं।
मेरठ पुलिस ने मुख्य आरोपी सुरेश और उसके सहयोगी फरहान को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस का कहना है कि फॉरेंसिक रिपोर्ट और अन्य वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर मामले की आगे जांच जारी है। अधिकारियों के अनुसार जांच पूरी होने के बाद इस हत्याकांड से जुड़े अन्य तथ्य भी सामने आ सकते हैं।
शहडोल। मध्यप्रदेश में फर्जीवाड़े का एक बड़ा मामला सामने आया है। शहडोल के जयसिंहनगर विकासखंड स्थित उफरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में पदस्थ तथाकथित डॉक्टर महेश चंद शर्मा के रिश्वत लेते पकड़े जाने के बाद एक-एक कर चौंका देने वाले खुलासे हो रहे हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि तथाकथित फर्जी डॉक्टर एक ही समय में प्रदेश के तीन जिलों में नौकरी कर रहा था और वेतन ले रहा था। जानकारी के मुताबिक वो अब तक तीनों जिलों में मिलाकर 64 लाख रुपये के करीब वेतन ले चुका है।
मध्यप्रदेश के शहडोल, खरगोन और श्योपुर तीनों जिलों में डॉक्टर महेश चंद शर्मा की अलग-अलग कर्मचारी आईडी, अलग-अलग पैन नंबर और अलग-अलग आधार संबंधी विवरण दर्ज थे, लेकिन एनएचएम और स्वास्थ्य विभाग की जांच प्रणाली इस फर्जीवाड़े को वर्षों तक पकड़ नहीं सकी। शुरुआती आंकलन के अनुसार आरोपी ने वेतन के रूप में सरकार को करीब 64 लाख रुपए की आर्थिक क्षति पहुंचाई है।
जांच में सामने आया कि आरोपी ने प्रत्येक जिले में अलग-अलग दस्तावेजों के आधार पर नियुक्ति हासिल की। सबसे बड़ा सवाल यह है कि शहडोल में आधार का अधूरा नंबर जमा होने के बावजूद नियुक्ति कैसे मिल गई और दस्तावेजों का सत्यापन किस स्तर पर हुआ।
शहडोल : ज्वाइनिंग 9 फरवरी 2024 एम्प्लॉई आईडी एनएचएम 331906 व पैन नंबर सीवायडब्ल्यूपीसी 6248 एल व आधार नंबर 30801691904 दर्ज हैं।
खरगोन : ज्वाइनिंग 14 फरवरी 2023 एम्प्लॉई आईडी एनएचएम 326860 व पैन नंबर आइबीएपीएम 7895 जी दर्ज है।
श्योपुर : ज्वाइनिंग 1 जून 2021 एम्प्लॉई आईडी एनएचएम 281676 व पैन नंबर ओइटीपीएस 6180 ई व आधार नंबर 230801691904 दर्ज है।
विभागीय सूत्रों के अनुसार आरोपी उफरी स्वास्थ्य केंद्र में शायद ही कभी दिखाई देता था। वह सार्थक ऐप के माध्यम से जिले और कई बार प्रदेश की सीमा से बाहर रहकर भी अपनी ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करा देता था। ब्लॉक और जिला स्तर के अधिकारियों के औचक निरीक्षण में भी वह कई बार अनुपस्थित मिला, जिसके कारण नोटिस भी जारी किए गए, लेकिन इसके बावजूद उसके खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।
पड़ताल में सामने आया है कि आरोपी को तीनों जिलों से प्रतिमाह लगभग 50 से 55 हजार रुपए मानदेय मिलता था। अनुमानित भुगतान इस प्रकार है-
श्योपुर से लगभग 30 लाख रुपए
खरगोन से करीब 20 लाख रुपए
शहडोल से लगभग 14 लाख रुपए
इस प्रकार आरोपी ने तीनों जिलों से मिलाकर करीब 64 लाख रुपए का सरकारी भुगतान प्राप्त किया।
मामले पर संज्ञान लेते हुए प्रदेश के उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला ने शहडोल प्रवास के दौरान सख्त कार्रवाई के संकेत दिए हैं। उन्होंने कहा कि आरोपी की सेवा समाप्त करने के साथ उसके द्वारा लिए गए पूरे वेतन की वसूली की जाएगी और उसके खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराई जाएगी। साथ ही उन अधिकारियों की जिम्मेदारी भी तय होगी, जिन्होंने दस्तावेजों का सत्यापन किए बिना नियुक्ति प्रक्रिया पूरी की, ऑनलाइन उपस्थिति पर निगरानी नहीं रखी और समय रहते अनियमितताओं की जानकारी उच्च अधिकारियों तक नहीं पहुंचाई।
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इंद्रदेव को मनाने का अनोखा टोटका : गधों को खिलाए गए गुलाब जामुन, 44 जिलों में बारिश का अलर्ट
भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून की सुस्ती अब लोगों की चिंता बढ़ाने लगी है। खेतों में पानी का इंतजार है, शहरों में उमस लोगों को परेशान कर रही है और किसान आसमान की ओर उम्मीद भरी नजरों से देख रहे हैं। इसी बीच राजधानी भोपाल में बारिश की कामना के लिए लोगों ने एक अनोखी लोक परंपरा निभाई। गधों को गुलाब जामुन खिलाकर इंद्रदेव से अच्छी बारिश की प्रार्थना की गई। दूसरी ओर मौसम विभाग ने अगले चार दिनों तक प्रदेश के कई जिलों में तेज बारिश की संभावना जताई है।
मानसून की बेरुखी के बीच भोपाल के कोलार रोड और चूनाभट्टी क्षेत्र में लोगों ने सालों पुरानी लोक परंपरा निभाई। यहां गधों को गुलाब जामुन खिलाकर अच्छी बारिश की प्रार्थना की गई। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब समय पर बारिश नहीं होती, तब यह प्रतीकात्मक परंपरा निभाई जाती है। मान्यता है कि इससे इंद्रदेव प्रसन्न होते हैं और अच्छी वर्षा होती है। लोगों ने गधों को मिठाई खिलाने के साथ किसानों की खुशहाली और प्रदेश में झमाझम बारिश की कामना भी की।
स्थानीय लोगों के अनुसार गधा शीतला माता का वाहन माना जाता है। मान्यता है कि जब उनके वाहन को मिठाई खिलाई जाती है तो माता प्रसन्न होती हैं और इंद्रदेव अच्छी वर्षा करते हैं। मालवा और निमाड़ क्षेत्र के कई गांवों में यह परंपरा लंबे समय से निभाई जाती रही है।
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) भोपाल के अनुसार शनिवार को प्रदेश के 44 जिलों में बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। डिंडौरी और उमरिया में भारी बारिश होने की संभावना है।
भोपाल, इंदौर, रायसेन, सीहोर, विदिशा, धार, झाबुआ, आलीराजपुर, बड़वानी, बुरहानपुर, खंडवा, खरगोन, देवास, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, ग्वालियर, मुरैना, भिंड, दतिया, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, सिवनी, बालाघाट, मंडला, रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, मऊगंज, मैहर, शहडोल, अनूपपुर, सागर, पन्ना, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी में हल्की से मध्यम बारिश का अनुमान है।
वहीं श्योपुर, राजगढ़, शाजापुर, उज्जैन, आगर-मालवा, रतलाम, नीमच और मंदसौर में धूप और उमस का असर बना रह सकता है।
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी में बना निम्न दबाव क्षेत्र लगातार मजबूत हो रहा है। इसके साथ सक्रिय ट्रफ और 19 जुलाई से पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) भी प्रभावी होगा। मौसम विशेषज्ञ के मुताबिक, जैसे-जैसे यह सिस्टम मजबूत होगा, प्रदेश में बारिश की गतिविधियां भी तेज होती जाएंगी। अगले चार दिनों तक कई जिलों में भारी बारिश की संभावना बनी हुई है।
शुक्रवार को करीब नौ दिनों के बाद उमरिया, डिंडौरी, बालाघाट समेत कई जिलों में अच्छी बारिश दर्ज की गई। राजधानी भोपाल में भी बूंदाबांदी हुई। प्रदेश में फिलहाल निम्न दबाव क्षेत्र और चक्रवाती परिसंचरण सक्रिय होने के कारण मौसम बदला हुआ है।
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सूदखोरों का आतंकः कर्जदार की मौत के बाद जमानतदार का अपहरण, 4 आरोपी गिरफ्तार
ग्वालियर। उधारी के पैसों की वसूली को लेकर सूदखोरों की दबंगई का मामला सामने आया है। सिरोल थाना क्षेत्र में मृत कर्जदार के कथित जमानतदार पर पहले जानलेवा हमला किया गया,फिर उसके दोस्त का कार में अपहरण कर लिया गया। सूचना मिलते ही पुलिस ने तत्काल घेराबंदी की और करीब डेढ़ घंटे के कड़ी मशक्कत के बाद अपहृत युवक को सकुशल बरामद कर लिया। पुलिस ने इस मामले में एक मास्टरमाइंड,एक नाबालिग सहित चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।
दरअसल सिरोल थाना पुलिस TI गोविंद बगोली के मुताबिक पीड़ित विवेक किरार के दोस्त यश सोलंकी ने करीब दो साल पहले आरोपी शिवम गुर्जर से 40 हजार रुपए उधार लिए थे। यश गोहद के पास ढाबा चलाता था, लेकिन करीब डेढ़ साल पहले सड़क हादसे में उसकी मौत हो गई। आरोप है कि यश की मौत के बाद शिवम गुर्जर लगातार विवेक से उधार की रकम मांग रहा था और उसे जमानतदार बताकर दबाव बना रहा था,पीड़ित ने पुलिस को बताया कि जब उसने पैसे देने से इनकार किया तो आरोपियों ने सिरोल हाईवे पर उसे घेरकर मारपीट की।
विरोध करने पर उसके साथी को जबरन कार में बैठाकर अगवा कर लिया। घटना की सूचना मिलते ही सिरोल थाना पुलिस ने जिलेभर में घेराबंदी कर कार्रवाई शुरू की और करीब डेढ़ घंटे के भीतर अपहृत युवक को सुरक्षित बरामद कर लिया। पुलिस ने इस मामले में मास्टरमाइंड शिवम गुर्जर समेत एक नाबालिग और चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के खिलाफ अपहरण, मारपीट और जानलेवा हमले सहित अन्य धाराओं में मामला दर्ज कर पूछताछ की जा रही है।पुलिस यह भी जांच कर रही है कि आरोपियों का सूदखोरी का नेटवर्क और किन लोगों से जुड़ा हुआ है।
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इंदौर। मध्य प्रदेश के इंदौर से पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाने वाला एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। रतलाम की रहने वाली आदिवासी छात्राओं को नौकरी का झांसा देकर बंधक बनाने, धोखाधड़ी करने और उनके मोबाइल छीनने के आरोप में आखिरकार पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है। चौंकाने वाली बात यह है कि पीड़ित युवतियों को रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए दर-दर भटकना पड़ा और पुलिस कमिश्नर व डीसीपी के हस्तक्षेप के बाद ही राजेंद्र नगर थाना पुलिस हरकत में आई।
पीड़ित आदिवासी छात्राओं का आरोप है कि उन्हें इंदौर में ‘महादेव इंटरप्राइजेज’ नाम की संस्था द्वारा अच्छी नौकरी का झांसा दिया गया था। इसके बाद उनसे नौकरी के नाम पर हजारों रुपये वसूल लिए गए। पीड़िताओं ने शिकायत में बताया कि 9 जुलाई को आरोपियों ने उनके मोबाइल फोन छीन लिए और 13 जुलाई तक उन्हें एक कमरे में जबरन बंद (बंधक) बनाकर रखा गया। इस दौरान आरोपियों की कड़ी निगरानी में ही उनकी परिजनों से बात कराई जाती थी, जिसके कारण वे अपनी आपबीती और परेशानी घर वालों को नहीं बता पा रही थीं
पीड़ितों का दावा है कि आरोपी उन्हें गुजरात के अहमदाबाद भेजने की तैयारी में थे। लेकिन किसी तरह चार युवतियां उनके चंगुल से भागकर अपने गांव पहुंचने में कामयाब रहीं, जिसके बाद इस पूरे रैकेट का पर्दाफाश हुआ। इस मामले में पुलिस का अमानवीय चेहरा भी सामने आया है। पीड़ितों का आरोप है कि जब वे शिकायत लेकर स्थानीय थाने पहुंचीं, तो उन्हें वहां से धक्के देकर भगा दिया गया। करीब 27 घंटे तक पुलिस इस गंभीर मामले को दबाए बैठी रही। इसके बाद जब मामला पुलिस कमिश्नर और डीसीपी तक पहुंचा और उन्होंने कड़ी नाराजगी जताई, तब जाकर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई की। राजेंद्र नगर थाना पुलिस ने महादेव इंटरप्राइजेज की संचालिका उर्मिला गुर्जर समेत तीन लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है।
इस घटना ने इंदौर पुलिस की संवेदनशीलता और सुरक्षा दावों की पोल खोल दी है।एक तरफ जहां प्रदेश में आदिवासियों और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर कड़े निर्देश हैं, वहीं पीड़ितों को FIR दर्ज कराने के लिए आला अधिकारियों के चक्कर काटने पड़े।
पीड़ितों को थाने से भगाने वाले पुलिसकर्मियों पर क्या एक्शन लिया जाएगा? ये कुछ ऐसे गंभीर प्रश्न हैं जो इस समय पुलिस प्रशासन के सामने खड़े हैं। फिलहाल पुलिस मामले की जांच और फरार आरोपियों की तलाश में जुट गई है।
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जवानी की चोरी, बुढ़ापे में गिरफ्तारी: 36 साल फरार आरोपी चढ़ा पुलिस के हत्थे, ‘किसान’ बन पहुंची पुलिस ने खेत से दबोचा
खंडवा। कानून के हाथ कितने लंबे होते हैं, इसका एक अनूठा उदाहरण सामने आया है। जवानी के दिनों में चोरी की वारदात को अंजाम देकर फरार हुआ एक शातिर आरोपी अपने बुढ़ापे (61 साल की उम्र) में जाकर पुलिस के हत्थे चढ़ा है। आरोपी पिछले 36 साल से अपनी पहचान छिपाकर फरारी काट रहा था, लेकिन आखिरकार पुलिस की सूझबूझ और फिल्मी जाल के आगे उसकी चालाकी धरी की धरी रह गई।
दरअसल मामला वर्ष 1989 का है, जब कोतवाली क्षेत्र में कालू नाम के एक युवक ने चोरी की वारदात को अंजाम दिया था। तब उसकी उम्र महज 25 वर्ष थी। वारदात के बाद कोतवाली पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया और कोर्ट में पेश किया था, जहां से उसे जमानत मिल गई थी। जमानत पर बाहर आते ही कालू ऐसा गायब हुआ कि फिर कभी कोर्ट या थाने नहीं पहुंचा। इस हाई-प्रोफाइल लापरवाही के कारण इस केस की फाइल पर पिछले 36 सालों से धूल जमी हुई थी।
कालू ने पुलिस से बचने के लिए अपना मूल गांव ‘बेड़ियाव’ पूरी तरह से छोड़ दिया और रुस्तमपुर इलाके में जाकर रहने लगा, ताकि कोई उसे पहचान न सके। लंबे समय बाद जब कोर्ट ने इस पेंडिंग फाइल को खोला, तो इसी साल जनवरी में आरोपी के खिलाफ दोबारा गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया। इसके बाद कोतवाली पुलिस ने मुखबिरों का जाल बिछाया और पता चला कि आरोपी रुस्तमपुर में छुपा हुआ है।
आरोपी कालू को पकड़ने के लिए पुलिस ने फिल्मी योजना बनाई। हेडकांस्टेबल रफीक खान ने कांस्टेबल अनुराग और पंकज साहू के साथ मिलकर ऑपरेशन शुरू किया। चूंकि आरोपी खेतों में काम कर रहा था, इसलिए पुलिसकर्मी खुद ‘किसान’ का भेष बनाकर रुस्तमपुर के खेतों में पहुंच गए। वहां कालू निंदाई (खरपतवार हटाने) कर रहा था। पुलिसकर्मियों ने उससे निंदाई काम कराने के बहाने बातचीत शुरू की और जैसे ही भरोसा हुआ कि यही कालू है, उसे मौके पर ही दबोच लिया। 36 साल बाद हुई इस गिरफ्तारी से पुलिस महकमे में भी राहत है। आरोपी को दोबारा सलाखों के पीछे भेज दिया।
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80 हजार की रिश्वत मांगी: बिजली कंपनी का जूनियर इंजीनियर 40 हजार लेते लोकायुक्त के हत्थे चढ़ा
इंदौर। मध्यप्रदेश पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी (एमपीपीकेवीवीसीएल) के सुखलिया जोन में पदस्थ एक कनिष्ठ यंत्री (जेई) को लोकायुक्त पुलिस ने रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। आरोपी ने होटल की इमारत पर लगाए जाने वाले सोलर पैनल की फाइल आगे बढ़ाने के एवज में 80 हजार रुपये की रिश्वत मांगी थी। शिकायत के सत्यापन के बाद लोकायुक्त टीम ने शनिवार को ट्रैप कार्रवाई कर उसे 40 हजार रुपये की पहली किश्त लेते हुए दबोच लिया।
लोकायुक्त के अनुसार शिकायतकर्ता शिवप्रकाश बसवाल, निवासी कुलकर्णी नगर, इंदौर ने 17 जुलाई को लोकायुक्त कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया था कि अंबे नगर स्थित जीआर-7 होटल की इमारत पर सोलर पैनल लगाने की फाइल मंजूर करने के लिए कनिष्ठ यंत्री नमेश कुमार भोंडेकर द्वारा 80 हजार रुपये की रिश्वत मांगी जा रही है।
लोकायुक्त पुलिस अधीक्षक राजेश सहाय के निर्देश पर शिकायत का सत्यापन कराया गया। जांच के दौरान रिश्वत मांगने की पुष्टि होने पर निरीक्षक सचिन पटेरिया के नेतृत्व में विशेष टीम गठित की गई। शनिवार को टीम ने एमपीपीकेवीवीसीएल के सुखलिया जोन कार्यालय में ट्रैप कार्रवाई की। इस दौरान आरोपी नमेश कुमार भोंडेकर को शिकायतकर्ता से 40 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़ लिया गया।
लोकायुक्त पुलिस ने आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण (संशोधन) अधिनियम-2018 की धारा 7 के तहत प्रकरण दर्ज कर लिया है। आरोपी से पूछताछ की जा रही है और मामले में आगे की वैधानिक कार्रवाई जारी है।
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