

इंदौर। शहर में सार्वजनिक गार्डन के इस्तेमाल को लेकर एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने नगर निगम की व्यवस्था और नियमों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। नेमीनगर स्थित निगम के सार्वजनिक गार्डन में जैन समाज के एक धर्मगुरु के निधन के बाद अंतिम संस्कार किए जाने की जानकारी सामने आई है। मामला सामने आने के बाद नगर निगम के उद्यान विभाग ने आपत्ति जताई है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या किसी सार्वजनिक गार्डन में बिना नगर निगम की अनुमति अंतिम संस्कार किया जा सकता है? निगम का कहना है कि पार्क उद्यान विभाग के अधीन है और वहां इस तरह की गतिविधि के लिए निर्धारित प्रक्रिया और अनुमति जरूरी है।
मिली जानकारी के मुताबिक, जैन समाज के धर्मगुरु नेमीनगर स्थित नगर निगम के गार्डन में ठहरे हुए थे। इसी दौरान उनका निधन हो गया। इसके बाद सुबह करीब 6 बजे गार्डन परिसर में ही उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया। नगर निगम उद्यान विभाग के कर्मचारियों को इसकी जानकारी करीब सुबह 7 बजे मिली। जब निगम की टीम मौके पर पहुंची, तब तक अंतिम संस्कार पूरा हो चुका था। मौके पर केवल राख और अन्य अवशेष मौजूद थे।
नगर निगम उद्यान विभाग का कहना है कि अंतिम संस्कार से पहले विभाग को इसकी कोई सूचना या वैध अनुमति नहीं दी गई थी। जानकारी मिलने के बाद उद्यान विभाग की टीम ने मौके का निरीक्षण किया और पंचनामा तैयार किया। पूरे मामले की रिपोर्ट वरिष्ठ अधिकारियों को भेज दी गई है। अब आगे की कार्रवाई को लेकर अधिकारियों के स्तर पर फैसला लिया जाना है।
वहीं इस मामले में जैन समाज की ओर से अलग पक्ष सामने आया है। समाज का कहना है कि अंतिम संस्कार से पहले पुलिस को इसकी जानकारी दी गई थी और पुलिस को सूचना देने के बाद ही अंतिम संस्कार किया गया। ऐसे में अब विवाद का केंद्र यही है कि पुलिस को सूचना देना पर्याप्त था या नगर निगम के उद्यान विभाग से भी औपचारिक अनुमति लेना जरूरी था।
सहायक उद्यान अधिकारी राहुल वर्मा के मुताबिक, नेमीनगर का यह गार्डन नगर निगम के उद्यान विभाग के अधीन आता है। सार्वजनिक पार्क में किसी भी तरह की गतिविधि के लिए निर्धारित नियम और प्रक्रिया का पालन किया जाना जरूरी है।
अधिकारी के मुताबिक, मौके पर पंचनामा तैयार कर लिया गया है और मामले की पूरी रिपोर्ट वरिष्ठ अधिकारियों को भेजी गई है।
यह मामला सिर्फ एक अंतिम संस्कार तक सीमित नहीं है, बल्कि शहर में सार्वजनिक स्थानों के इस्तेमाल और उनके प्रबंधन से जुड़े कई सवाल खड़े करता है। अगर किसी सार्वजनिक गार्डन में इस तरह की अनुमति दी जा सकती है तो उसकी प्रक्रिया क्या है? और अगर अनुमति जरूरी है तो क्या इस मामले में वह प्रक्रिया पूरी की गई थी?फिलहाल नगर निगम की रिपोर्ट के बाद आगे की कार्रवाई वरिष्ठ अधिकारियों के निर्णय पर निर्भर है।
वहीं जैन समाज की ओर से पुलिस को सूचना दिए जाने की बात सामने आने के बाद अब यह भी स्पष्ट होना बाकी है कि संबंधित विभागों के बीच अनुमति और सूचना को लेकर आखिर स्थिति क्या थी। नेमीनगर का यह मामला अब सिर्फ अंतिम संस्कार को लेकर विवाद नहीं रहा, बल्कि सार्वजनिक पार्कों के इस्तेमाल के नियम और प्रशासनिक अनुमति की व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर रहा है।
इधर, जैन समाज ने बताया कि नेमीनगर जिनालय में 11 अगस्त को प्राकृताचार्य आचार्य सुनील सागर महाराज के संघस्थ क्षुल्लक सुलब्धि सागर की समाधि हो गई, जिनकी अग्नि क्रिया 12 अगस्त को प्रातः नेमीनगर स्थित विद्यासागर उद्यान में की गई। उद्यान में अंतिम क्रिया पर कहा कि हमारे यहां की यह परंपरा रही है, पहले भी दो समाधियां यहां हुईं, उनका अंतिम संस्कार, उनकी अग्नि क्रिया इसी उद्यान में पहले भी हो चुकी है। यह यहां की परंपरा है और दिगंबर समाज की परंपरा है कि किसी भी साधु का, ऐलक का, क्षुल्लक का या साध्वी का अंतिम संस्कार श्मशान में नहीं करते। या तो हमारी नसिया में करते हैं, अन्यथा जहां परंपरा है, ऐसे अंतिम संस्कार अग्नि क्रिया करने का, वहां किया जा सकता है। इसी परंपरा के तहत आज यह अंतिम संस्कार विद्यासागर उद्यान में संपन्न हुआ। अतः इसमें किसी भी प्रकार की विवाद करने की कोई आवश्यकता नहीं है, यह परंपरा है।
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किताबों की जगह स्कूल में मासूमों से कराई जा रही थी मजदूरी, Video Viral होते ही मचा हड़कंप
सतना। मध्य प्रदेश के सतना से बेहद सनसनीखेज मामला सामने आया है। जिस स्कूल में शिक्षा देकर बच्चों का जीवन संवारने का काम किया जाता है, वहां मासूमों के हाथ में फावड़ा और तगाड़ी पकड़ा दी गई। इसका वीडियो सामने आते विद्यालय प्रबंधन पर सवाल खड़े होने लगे हैं।
दरअसल, पूरा मामला सतना के रामपुर बघेलान ब्लॉक के शासकीय विद्यालय त्योंधरा क्रमांक-1 का है। आरोप है कि स्कूल पहुंचे छात्रों से सड़क पर पड़ी गिट्टी फावड़े से उठवाकर एक जगह से दूसरी जगह ढुलवाई गई। इस पूरे मामले का वीडियो दो दिन पुराना बताया जा रहा है, जो बुधवार को सोशल मीडिया पर वायरल हुआ।
वीडियो में स्कूली बच्चे स्कूल परिसर अथवा आसपास के मार्ग पर फावड़े से गिट्टी उठाते और उसे दूसरी जगह ले जाते दिखाई दे रहे हैं। वीडियो सामने आने के बाद शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है।
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जनाजे को दफनाने की जद्दोजहद: बारिश में कमर तक पहुंचा ‘विकास’, नदी से होकर अंतिम यात्रा पर निकले लोग
सिवनी। मध्य प्रदेश के सिवनी में कुछ घंटे की बारिश ने व्यवस्थाओं की पोल खोलकर रख दी। कई जगह पानी से लबालब हो गए और विकास के सारे दावे पानी में ही डूब गए। लोगों को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए कमर भरे पानी से होकर गुजरना पड़ा। इसका असर जिंदा ही नहीं बल्कि मृत इंसानों पर भी हुआ जिन्हें अंतिम सफर के दौरान भी मुश्किलें झेलनी पड़ी। भौगोलिकसंदर्भ
दरअसल, जिले के लखनादौन तहसील की गणेशगंज ग्राम पंचायत के गंज टोला से बेहद हैरान करने वाली तस्वीरें सामने आई हैं। यहां नाईम शाह नाम के शख्स का निधन हो गया था। लेकिन उन्हें दफनाने के लिए ले जाने वाला रास्ता पानी से भरा हुआ था। लेकिन कड़ी मुश्किलों के बाद करीब 5 फीट गहरे पानी से होते हुए लोग जनाजा लेकर गुजरने को मजबूर नजर आए।
बता दें कि 50 घरों की इस बस्ती में लगभग 500 मतदाता रहते हैं। इसके बावजूद बारिश के दिनों में लोगों को आवागमन की गंभीर समस्या का सामना करना पड़ रहा है। जनाजे को पानी के बीच से ले जाते लोगों की ये तस्वीरें ग्रामीण सुविधाओं और विकास के दावों पर सवाल खड़े कर रही हैं।
टीकमगढ़। टीकमगढ़ जिले में एक निजी स्कूल के टीचर की मारपीट से मासूम बच्ची के कान का पर्दा फटने का माता पिता ने गंभीर आरोप लगाया है। यह पूरा मामला टीकमगढ़ शहर के प्रतिष्ठित पुष्पा इंग्लिश मीडियम स्कूल का है, जहां कक्षा एक में पढ़ने वाली मासूम छात्रा सांभवि तिवारी के साथ स्कूल की अध्यापिका अमृता सिंह पर मारपीट करने व मारपीट से उनकी बेटी के कान के पर्दे में छेद हो जाने का आरोप माता पिता ने लगाया है। वहीं इस मामले की शिकायत माता पिता के द्वारा लिखित रूप से जिला कलेक्टर को भी दी गई है, जिसके बाद कलेक्टर ने पूरे मामले के जांच के आदेश दिए है।
दरअसल यह पूरा मामला टीकमगढ़ शहर के पुष्पा इंग्लिश मीडियम स्कूल का है। जहां कक्षा एक में पढ़ने वाली मासूम छात्रा सांभवि के पिता राजेश तिवारी का आरोप है की पिछले महीने की 15 जुलाई को उनकी बेटी सांभवी के साथ स्कूल में अध्यापिका अमृता सिंह ने मारपीट की थी। जिसकी शिकायत उन्होंने स्कूल प्रबंधन से की थी, लेकिन स्कूल प्रबंधन ने उनकी शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया। मारपीट की घटना के बाद से उनकी बेटी लगातार कान दर्द की शिकायत किया करती थी, जिसके बाद उन्होंने अपनी बेटी को डॉक्टर को दिखाया।
जांच उपरांत डॉक्टर का कहना था की उनकी बेटी के कान के पर्दे में छेद हो गया है जिस कारण उसे दर्द रहता है, पिता का कहना है उन्होंने डॉक्टर की रिपोर्ट से स्कूल वालों को अवगत कराया तो पहले तो उन्होंने बेटी के इलाज में सहयोग करने की बात कही थी। लेकिन बाद में इलाज कराना तो दूर, उन्होंने स्कूल से बेटी का नाम काट कर टीसी पकड़ा दी। आज भी स्कूल प्रबंधन अपनी टीचर का बचाव कर रहा है, जिसके बाद मजबूरन उन्हें जिले के कलेक्टर से पूरे मामले की शिकायत करना पड़ी है।
वहीं शिकायत के बाद इस पूरे मामले की जांच कराने की टीकमगढ़ कलेक्टर ने बात कही है। वहीं जब स्कूल प्रबंधन से इस सम्बंध में बात की गई तो उन्होंने स्वीकार किया की टीचर ने बच्ची को मारा है। प्रिंसिपल ने कहा कि हमने छात्रा के माता पिता को पूरा सहयोग किया और हमने बच्ची के इलाज के लिये भी अपने स्तर से नाक कान गला विशेषज्ञों से बात कर ली थी। लेकिन उनके परिजन इलाज को राजी नहीं हुए, वे अपने बच्चे का इलाज ग्वालियर कराना चाहते थे। हमने उन्हें पूरा सहयोग किया है वही टीसी काटने की बात है तो छात्रा के माता पिता ने ही स्कूल से नाम कटवाने का फॉर्म भर कर हमें दिया था। रहा मारपीट का सवाल तो टीचर ने बच्चे के साथ ऐसी कोई गंभीर मारपीट नहीं की है।
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खजराना गणेश मंदिर में कड़ी सुरक्षा के बीच खुलीं दान पेटियां: दो दिन में 72 लाख से ज्यादा चढ़ावा
इंदौर। अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी का मामला सामने आने के बाद देशभर के प्रमुख मंदिरों में दान राशि की सुरक्षा और गिनती की व्यवस्था को लेकर सतर्कता बढ़ गई है। इसी कड़ी में इंदौर के प्रसिद्ध खजराना गणेश मंदिर में भी लंबे समय से बंद दान पेटियों को कड़ी सुरक्षा के बीच खोला गया है। करीब साढ़े तीन महीने बाद शुरू हुई चढ़ावे की गिनती में दो दिनों के भीतर ही 72 लाख रुपये से अधिक की नकद राशि सामने आ चुकी है।मंदिर प्रबंधन के मुताबिक दान पेटियों को खोलने से लेकर राशि की गिनती और बैंक में जमा कराने तक पूरी प्रक्रिया निगरानी में की जा रही है। इस दौरान कर्मचारियों की जांच, सीसीटीवी निगरानी और वीडियोग्राफी जैसी व्यवस्थाएं की गई हैं।
खजराना गणेश मंदिर परिसर में 40 से अधिक दान पेटियां हैं। करीब साढ़े तीन महीने तक बंद रहने के बाद इन पेटियों को चरणबद्ध तरीके से खोला जा रहा है। अब तक 25 से अधिक दान पेटियां खोली जा चुकी हैं।इन पेटियों से निकली राशि की गिनती का काम लगातार जारी है। सिर्फ दो दिनों में करीब 72 लाख रुपये से अधिक की नकदी गिनी जा चुकी है। बाकी दान पेटियों की गिनती पूरी होने के बाद चढ़ावे की कुल राशि और बढ़ने की संभावना है।मंदिर प्रबंधन के अनुसार पूरी प्रक्रिया को पूरा करने में करीब 5 से 6 दिन का समय लग सकता है।
इस बार दान पेटियों की गिनती के दौरान सुरक्षा व्यवस्था पर खास जोर दिया गया है। पेटियां खोलने से लेकर नोटों की गिनती और राशि को बैंक तक पहुंचाने की प्रक्रिया तक निगरानी रखी जा रही है।मौके पर पांच सुरक्षा गार्ड तैनात किए गए हैं। इसके अलावा चार सीसीटीवी कैमरों से पूरे परिसर और गिनती की प्रक्रिया पर नजर रखी जा रही है। गिनती में शामिल कर्मचारियों को जांच के बाद ही अंदर प्रवेश दिया जा रहा है।पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी भी कराई जा रही है, ताकि चढ़ावे की गिनती में पारदर्शिता बनी रहे और पूरी प्रक्रिया का रिकॉर्ड सुरक्षित रखा जा सके।
चढ़ावे की गिनती के लिए अलग-अलग विभागों के कर्मचारियों को जिम्मेदारी दी गई है। बैंक, कोषालय और नगर निगम के कर्मचारियों समेत करीब 25 लोगों की टीम इस पूरी प्रक्रिया में जुटी है।दान पेटियों से निकलने वाली नकदी को गिनने के बाद उसका रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है। इसके बाद राशि को अधिकृत बैंक खाते में जमा कराया जा रहा है।यानी दान पेटी खुलने से लेकर बैंक में राशि जमा होने तक हर चरण को रिकॉर्ड और निगरानी के दायरे में रखा गया है।
खजराना गणेश मंदिर की दान पेटियों में भक्तों ने सिर्फ नकदी ही नहीं चढ़ाई है। गिनती के दौरान चांदी की गणेश प्रतिमा, करीब 10 ग्राम वजन के चांदी के सिक्के और स्मार्ट वॉच जैसी वस्तुएं भी मिली हैं।इसके अलावा करीब 10 साल पहले बंद हो चुके 1000 रुपये के पुराने नोट भी दान पेटियों से मिले हैं। इन वस्तुओं और पुराने नोटों को भी अलग से सुरक्षित रखा जा रहा है।
मंदिर में चढ़ावे की रकम का बड़ा हिस्सा भक्तों की आस्था से जुड़ा होता है। ऐसे में दान पेटियों की गिनती के दौरान सुरक्षा के साथ-साथ पारदर्शिता भी अहम हो जाती है। यही वजह है कि इस बार पूरी प्रक्रिया को कई स्तरों की निगरानी में रखा गया है।मंदिर के मुख्य पुजारी अशोक भट्ट, मंदिर प्रबंधक और अन्य अधिकारी भी गिनती की प्रक्रिया पर नजर बनाए हुए हैं। अधिकारियों और कर्मचारियों की मौजूदगी में पेटियां खोली जा रही हैं और प्राप्त राशि का हिसाब दर्ज किया जा रहा है।
खजराना गणेश मंदिर में दान पेटियों की गिनती अभी पूरी नहीं हुई है। 40 से अधिक पेटियों में से 25 से अधिक पेटियां खोली जा चुकी हैं और दो दिनों में ही 72 लाख रुपये से ज्यादा की राशि सामने आ चुकी है।ऐसे में बाकी पेटियों की गिनती पूरी होने के बाद चढ़ावे की कुल रकम कितनी पहुंचती है, इस पर सभी की नजर है। फिलहाल मंदिर प्रबंधन की टीम सुरक्षा और पारदर्शिता के साथ गिनती की प्रक्रिया को पूरा करने में जुटी है।
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दूध की जगह वनस्पति से बना पनीर मध्य प्रदेश में हुआ बैन, सीएम ने जारी किया आदेश
भोपाल. महाराष्ट्र, गुजरात और छत्तीसगढ़ की तर्ज पर अब मध्य प्रदेश में भी एनालॉग पनीर पर प्रतिबंध लगा दिया गया है. बुधवार 12 अगस्त को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुजरात रवाना होने से पहले खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के अधिकारियों की बैठक में इसके उत्पादन, बिक्री और इस्तेमाल पर रोक लगाने के आदेश दिए.
बता दें कि एनालॉग पनीर को असली दूध से बने पनीर के विकल्प के तौर पर तैयार किया जाता है. इसमें दूध की जगह या दूध के साथ वनस्पति वसा, स्टार्च और अन्य सामग्री का इस्तेमाल किया जाता है. इसकी कम कीमत के कारण बाजार में इसकी खपत तेजी से बढ़ी है. मुख्यमंत्री ने कहा मध्य प्रदेश में एनालॉग पनीर पर हम प्रतिबंध लगा रहे हैं. जैसा अन्य राज्यों ने लगाया है. हम प्राकृतिक रूप से दुग्ध उत्पादन को बढ़ाएंगे और प्राकृतिक रूप से ही पनीर बनाएंगे.
मध्य प्रदेश में एनालॉग पनीर की रोजाना आवक और बिक्री करीब 300 से 400 क्विंटल होने का अनुमान है. इस हिसाब से प्रदेश में हर महीने करीब 9 हजार से 12 हजार क्विंटल, यानी 900 से 1200 टन एनालॉग पनीर खपने की बात सामने आई है. बड़ी मात्रा में इसकी बिक्री को देखते हुए सरकार ने अब इस पर सख्ती का निर्णय लिया है.
एनालॉग पनीर की बिक्री को लेकर राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग ने भी नाराजगी जताई है. आयोग ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए मध्य प्रदेश समेत अन्य राज्यों को पत्र लिखने का फैसला किया है. आयोग की ओर से राज्यों से इस तरह के उत्पाद की बिक्री और लोगों के स्वास्थ्य पर पडऩे वाले संभावित प्रभाव को लेकर जानकारी मांगे जाने की संभावना है. आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो ने कहा कि एनालॉग पनीर घातक है. इसके लिए एफएसएसएआई को नोटिस देकर पूछ रहे हैं कि इस तरह के पनीर को बेचने की इजाजत क्यों दे रहे हैं.
दिल्ली हाईकोर्ट के पूर्व जज यशवंत वर्मा कैशकांड केस में जांच कमेटी रिपोर्ट लोकसभा में पेश कर दिया है। जांच समिति की रिपोर्ट बुधवार (12 अगस्त) को संसद में पेश किया। रिपोर्ट में यशवंत वर्मा के खिलाफ भ्रष्टाचार समेत सभी आरोप सही साबित हुए हैं। इसके आधार पर कानून के अनुसार आगे की जरूरी कार्रवाई की जाएगी।
दरअसल मार्च 2025 में उनके सरकारी आवास में आग लगने के बाद स्टोररूम से भारी मात्रा में जला हुआ नोट और नकदी मिलने का आरोप लगा था। जांच में उनका स्टोररूम पर नियंत्रण होना पाया गया। इसके बाद जुलाई 2025 में 200 से ज्यादा सांसदों ने उन्हें हटाने के प्रस्ताव पर दस्तखत किए थे। इसके बाद जस्टिस वर्मा ने बाद में इस्तीफा दे दिया था।
इंक्वायरी कमेटी की रिपोर्ट में पूर्व जज जस्टिस यशवंत वर्मा पर लगाए गए तीनों आरोप सिद्ध हो गए हैं। जांच समिति ने जज के खिलाफ लगाए गए आर्टिकल्स ऑफ चार्ज- I, II और III (Articles of Charge I, II और III) तीनों आरोपों को सिद्ध पाया है। च कमेटी ने उन पर लगे जिन तीन आरोपों को सिद्ध किया। उनमें पहला- अघोषित नकदी, दूसरा- साक्ष्यों के संरक्षण में लापरवाही और तीसरा- टालमटोल और असंतोषजनक जवाब का आरोप शामिल है।
बता दें कि यह पूरा विवाद 14 मार्च 2025 की रात शुरू हुआ था। दिल्ली हाईकोर्ट के जज जस्टिस वर्मा के सरकारी आवास में आग लग गई थी। आग बुझाने पहुंचे दमकलकर्मियों को स्टोररूम में जली हुई भारी मात्रा में नकदी मिलने की बात सामने आई थी। इसके बाद जस्टिस वर्मा ने इस्तीफा दे दिया था। हालांकि कानून मंत्रालय ने अब तक उनका इस्तीफा अधिसूचित नहीं किया है। विवाद के बाद उन्हें वापस उनके मूल हाईकोर्ट यानी इलाहाबाद हाईकोर्ट भेज दिया गया था।जुलाई 2025 में 200 से अधिक सांसदों ने जज को हटाने के प्रस्ताव पर दस्तखत किए थे। इसके बाद पिछले साल अगस्त में बिरला ने तीन सदस्यीय जज जांच समिति बनाई थी। तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना की बनाई अंदरूनी समिति ने अपनी जांच में पाया था कि जिस स्टोररूम में नकदी छिपी मिली, उस पर जस्टिस वर्मा का सीधा या परोक्ष नियंत्रण था।
समिति के अनुसार, जज नकदी की मौजूदगी, स्रोत और स्वामित्व को लेकर संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं दे सके। इसलिए समिति ने इस आरोप को सिद्ध माना। समिति ने पाया कि मामले से जुड़े भौतिक साक्ष्यों को उचित तरीके से सुरक्षित और संरक्षित नहीं रखा गया। कानूनी सीलिंग और निरीक्षण से पहले स्टोररूम की स्थिति में बदलाव किए जाने की बात सामने आई।
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CJP के अभिजीत दीपके का ऐलान- 'जल्द आएगा जंतर-मंतर का सीजन-2', बीजेपी पर लगाए गंभीर आरोप
नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने दावा किया है कि दिल्ली में पार्टी की वॉलंटियर्स मीट आयोजित करने के लिए हॉल बुक करने में उन्हें काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। दीपके का आरोप है कि कई हॉल मालिकों ने 'ऊपर से दबाव' होने की बात कहकर जगह देने से इनकार कर दिया। उन्होंने बीजेपी पर हॉल मालिकों को धमकाने का भी आरोप लगाया है। इसी दौरान दीपके ने जंतर-मंतर पर होने वाले अपने पहले के प्रदर्शन को लेकर भी बड़ा ऐलान किया और कहा कि इसका 'सीजन-2' जल्द शुरू होगा।
अभिजीत दीपके ने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि सोशल मीडिया पर लोग लगातार उनसे जंतर-मंतर के अगले चरण को लेकर सवाल कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि बहुत से लोग इंस्टाग्राम पर सवाल कर रहे हैं कि जंतर-मंतर का सीजन-2 कब आ रहा है। तो उन्हें बताना चाहता हूं कि जंतर-मंतर का सीजन-2 बहुत ही जल्द शुरू होने जा रहा है। दीपके के इस बयान के बाद CJP के आगामी कार्यक्रम को लेकर चर्चा तेज हो गई है। हालांकि, उन्होंने जंतर-मंतर के ‘सीजन-2’ की कोई निश्चित तारीख या कार्यक्रम की विस्तृत जानकारी फिलहाल साझा नहीं की है।
CJP संस्थापक ने बताया कि 12 अगस्त को दिल्ली में पार्टी की वॉलंटियर्स मीट प्रस्तावित थी। इसके लिए पार्टी की ओर से एक हॉल की तलाश की जा रही थी। दीपके के मुताबिक, कई जगह संपर्क करने के बावजूद उन्हें हॉल किराए पर देने के लिए कोई तैयार नहीं हुआ। उन्होंने दावा किया कि अलग-अलग जगहों पर उन्हें यही जवाब मिला कि हॉल देने को लेकर "ऊपर से दबाव" है। दीपके ने इसे पार्टी की बैठक रोकने की कोशिश बताया।
अभिजीत दीपके के अनुसार, काफी कोशिशों के बाद CJP ने एक हॉल बुक कर लिया था। उन्होंने कहा कि पार्टी के पास हॉल की बुकिंग की रसीद भी मौजूद है। लेकिन उनके दावे के मुताबिक, बैठक से एक दिन पहले मंगलवार सुबह हॉल मालिकों को कथित तौर पर धमकी दी गई। दीपके ने आरोप लगाया कि हॉल मालिकों से कहा गया कि अगर उन्होंने CJP की बैठक होने दी तो उन्हें उल्टा लटका दिया जाएगा। उन्होंने इस कथित दबाव के पीछे बीजेपी का हाथ होने का आरोप लगाया। हालांकि, अभिजीत दीपके के इन आरोपों को लेकर बीजेपी की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में हॉल मालिकों को कथित धमकी और बीजेपी की भूमिका को लेकर दीपके के दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
CJP संस्थापक ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि इस तरह की कार्रवाई से यह संकेत मिलता है कि पार्टी देश के युवाओं से डर रही है। उन्होंने कहा, अगर उन्हें लगता है कि ऐसी छोटी-मोटी हरकतों से हम डर जाएंगे तो यह उनकी बहुत बड़ी गलतफहमी है। दीपके ने कहा कि पार्टी अपने कार्यक्रमों को लेकर पीछे हटने वाली नहीं है। उनके मुताबिक, हॉल की बुकिंग को लेकर सामने आई कथित परेशानी के बावजूद CJP अपने कार्यकर्ताओं और समर्थकों के साथ आगे की गतिविधियां जारी रखेगी।
अभिजीत दीपके का "जंतर-मंतर का सीजन-2" वाला बयान इस पूरे घटनाक्रम का सबसे अहम हिस्सा माना जा रहा है। उन्होंने यह स्पष्ट कर दिया है कि पार्टी जल्द ही जंतर-मंतर से जुड़े अगले प्रदर्शन या अभियान की शुरुआत करने वाली है। हालांकि, इसकी तारीख, स्वरूप और इसमें कितने लोग शामिल होंगे, इस बारे में अभी कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है। फिलहाल, CJP की वॉलंटियर्स मीट के लिए हॉल नहीं मिलने को लेकर लगाए गए दीपके के आरोप और 'जंतर-मंतर सीजन-2' के ऐलान ने पार्टी की आगामी गतिविधियों को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा बढ़ा दी है। कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने जंतर-मंतर के 'सीजन-2' का जल्द आगाज करने का ऐलान किया है। उन्होंने दिल्ली में CJP की वॉलंटियर्स मीट के लिए हॉल नहीं मिलने और मालिकों को धमकी दिए जाने का आरोप बीजेपी पर लगाया। हालांकि, बीजेपी की ओर से इन आरोपों पर तत्काल कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
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बारिश में चिता बुझने लगी तो तिरपाल लेकर खड़े हो गए लोग, महाराष्ट्र के इस आदिवासी गांव में नहीं है श्मशान
महाराष्ट्र के ठाणे जिले के शाहपुर से सामने आई एक तस्वीर गांवों में बुनियादी सुविधाओं की हकीकत दिखाती है। यहां एक महिला की मौत के बाद जब अंतिम संस्कार शुरू हुआ तो अचानक तेज बारिश होने लगी। चिता की आग बुझने लगी तो ग्रामीणों ने तिरपाल तानकर उसे बारिश से बचाया। लोग खुद बारिश में भीगते रहे, लेकिन कोशिश रही कि किसी तरह अंतिम संस्कार पूरा हो सके। यह मामला शाहपुर तालुका के उंभरई गांव की आदिवासी बस्ती का है, जहां ग्रामीणों के मुताबिक आज तक श्मशान भूमि की व्यवस्था नहीं हो पाई है। इसी वजह से लोगों को अपने परिजनों का अंतिम संस्कार खुले मैदान में करना पड़ता है। बारिश के मौसम में यह परेशानी और भी गंभीर हो जाती है।
उंभरई गांव की ग्राम पंचायत समिति की सदस्य जयाबाई महादू वाघ की बीमारी के चलते मौत हो गई थी। मंगलवार को गांव के पास खुले मैदान में उनके अंतिम संस्कार की तैयारी की गई। अंतिम संस्कार की प्रक्रिया शुरू हुई ही थी कि इलाके में तेज बारिश होने लगी। बारिश इतनी तेज थी कि चिता की आग पर भी असर पड़ने लगा। आग बुझने की स्थिति में पहुंची तो ग्रामीणों ने चिता के ऊपर तिरपाल तान दिया। कुछ लोग तिरपाल को चारों तरफ से पकड़कर खड़े रहे, ताकि बारिश का पानी सीधे चिता पर न गिरे। इस दौरान ग्रामीण खुद बारिश में खड़े रहे और किसी तरह अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी की गई।
ग्रामीणों का कहना है कि उंभरई की आदिवासी बस्ती में श्मशान भूमि नहीं है। करीब 100 लोगों की आबादी वाली इस बस्ती के लोगों को किसी की मौत होने पर खुले मैदान में अंतिम संस्कार करना पड़ता है। गर्मी के मौसम में तो किसी तरह यह प्रक्रिया पूरी हो जाती है, लेकिन बारिश के दिनों में स्थिति काफी मुश्किल हो जाती है। खुले मैदान में कीचड़ और पानी के बीच चिता जलाना आसान नहीं होता। ऐसे में परिवार और ग्रामीणों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। जयाबाई महादू वाघ के अंतिम संस्कार के दौरान सामने आई तस्वीर ने इसी समस्या को एक बार फिर सामने ला दिया है।
ग्रामीणों के मुताबिक, गांव में श्मशान भूमि की व्यवस्था के लिए पिछले करीब दो साल से प्रशासन से मांग की जा रही है। उनका कहना है कि करीब दो साल पहले शाहपुर के तत्कालीन तहसीलदार परमेश्वर कालूसे ने भी गांव में श्मशान के लिए जगह देखी थी। उस समय ग्रामीणों को जल्द श्मशान बनाने का भरोसा दिया गया था। हालांकि, ग्रामीणों का दावा है कि दो साल बीतने के बाद भी जमीन और श्मशान की समस्या का समाधान नहीं हुआ है। अब सवाल यह है कि जिस बस्ती में लोगों को अपने मृत परिजनों का अंतिम संस्कार करने के लिए भी खुले मैदान पर निर्भर रहना पड़ रहा है, वहां बुनियादी सुविधा कब पहुंचेगी।
ग्रामीणों की परेशानी सिर्फ श्मशान की कमी तक सीमित नहीं है। शाहपुर तालुका के दूरदराज के इलाकों में सड़क और आवाजाही की सुविधा भी कई जगहों पर बड़ी समस्या बनी हुई है। ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों से जुड़े लोगों का दावा है कि शाहपुर तालुका के 250 से ज्यादा गांवों में श्मशान भूमि से जुड़ी समस्या है। कहीं अंतिम संस्कार के लिए जमीन उपलब्ध नहीं है तो कहीं बजट की कमी बताई जाती है। शाहपुर तालुका में 110 ग्राम पंचायतें, 227 राजस्व गांव और 414 अन्य ग्रामीण बस्तियां हैं। दूरदराज के कई इलाकों में सड़कें भी नहीं हैं। बरसात के दिनों में स्थिति और खराब हो जाती है। कई जगह ग्रामीणों को शव को अंतिम संस्कार के लिए ले जाने के दौरान नाले या नदी पार करनी पड़ती है।
शाहपुर में एक तरफ बड़े विकास कार्यों की बातें होती हैं, लेकिन दूसरी तरफ आदिवासी बस्तियों में लोग सड़क, पानी, बिजली और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए जूझ रहे हैं। अब श्मशान जैसी जरूरी सुविधा भी इस सूची में शामिल है। जयाबाई महादू वाघ के अंतिम संस्कार की तस्वीर ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के सामने एक गंभीर सवाल खड़ा किया है। किसी व्यक्ति की आखिरी विदाई भी अगर मौसम और सुविधाओं की कमी से जूझते हुए करनी पड़े, तो यह सिर्फ एक गांव की समस्या नहीं रह जाती। ग्रामीणों की मांग है कि उंभरई में जल्द श्मशान भूमि की व्यवस्था की जाए। इसके साथ ही सड़क और दूसरी जरूरी सुविधाओं पर भी काम किया जाए, ताकि बारिश के मौसम में लोगों को अपने परिजनों के अंतिम संस्कार के लिए ऐसी मुश्किल परिस्थितियों का सामना न करना पड़े।
बुरहानपुर। जिले के प्रतापपुरा क्षेत्र में पुलिस ने सेक्स रैकेट का पर्दाफाश किया है। जिला पुलिस प्रशासन की ओर से अवैध गतिविधियों और देह व्यापार में संलिप्त लोगों के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत थाना शिकारपुरा पुलिस ने बोरवाड़ी (प्रतापपुरा) स्थित एक आवासीय परिसर में दबिश दी। कार्रवाई के दौरान पुलिस ने मां-बेटे समेत एक ग्राहक के खिलाफ अनैतिक व्यापार (निवारण) अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज किया है।
पुलिस के अनुसार रविवार को थाना शिकारपुरा को सूचना मिली थी कि बोरवाड़ी प्रतापपुरा में 'चस्का चाय' के पास स्थित एक मकान में कथित तौर पर देह व्यापार संचालित किया जा रहा है। एसपी आशुतोष बागरी के निर्देश और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक प्रदीप सेंडे तथा नगर पुलिस अधीक्षक गौरव पाटिल के मार्गदर्शन में थाना प्रभारी निरीक्षक संदीप चौरसिया के नेतृत्व में विशेष टीम गठित की गई। कार्रवाई के लिए एक प्रधान आरक्षक को छद्म ग्राहक बनाकर मकान में भेजा गया।
पुलिस के मुताबिक छद्म ग्राहक द्वारा संकेत दिए जाने के बाद टीम ने संबंधित मकान पर दबिश दी। तलाशी और प्रारंभिक पूछताछ में 55 वर्षीय महिला के अपने मकान का उपयोग कथित तौर पर देह व्यापार के लिए कमरों की व्यवस्था और मध्यस्थता करने में किए जाने की जानकारी सामने आई। पुलिस ने महिला के पास से छद्म ग्राहक द्वारा दिए गए 500-500 रुपये के दो हस्ताक्षरित नोट भी बरामद किए।
जांच के दौरान महिला के 34 वर्षीय पुत्र शेख शाहरुख की भूमिका भी सामने आई। पुलिस के अनुसार वह कथित अवैध गतिविधि में अपनी मां का सहयोग करता पाया गया। तलाशी के दौरान उसके पास से चार पैकेट कंडोम बरामद किए गए। पुलिस ने मौके से एक पुरुष और एक महिला को आपत्तिजनक स्थिति में पाया, जबकि परिसर में तीन अन्य महिलाएं भी मौजूद थीं।
पुलिस ने मामले में महिला, उसके पुत्र शेख शाहरुख और ग्राहक शेख फिरोज, पिता शेख इमाम, उम्र 40 वर्ष, निवासी राजीव नगर को आरोपी बनाया है। थाना शिकारपुरा में अनैतिक व्यापार (निवारण) अधिनियम के अंतर्गत प्रकरण दर्ज किया गया है। पुलिस ने मामले से जुड़ी महिलाओं की पहचान गोपनीय रखते हुए उनके बयान दर्ज किए हैं और नियमानुसार आगे की कानूनी एवं सुधारात्मक कार्रवाई की जा रही है।
कार्रवाई में थाना प्रभारी निरीक्षक संदीप चौरसिया, उप निरीक्षक राधिका सोलंकी, उप निरीक्षक दिलीप सिंह, प्रधान आरक्षक अमर पवार, प्रधान आरक्षक विजय बडकारे, महिला आरक्षक रिया पटवा, आरक्षक विनोद परिहार और आरक्षक महेंद्र प्रताप की महत्वपूर्ण भूमिका रही। पुलिस का कहना है कि जिले में अवैध गतिविधियों के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा।
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पिता 4 महीने से ऑक्सीजन पर, FIR के लिए दर-दर भटक रहा बेटा; सिलेंडर कंधे पर लेकर SP ऑफिस पहुंचकर जताया विरोध
ग्वालियर। ग्वालियर में न्याय के लिए एक बेटे का अनोखा विरोध देखने को मिला। पिता चार महीने से जिंदगी के लिए जूझ रहे हैं,लेकिन आरोप है कि हादसे के चार महीने बाद भी FIR दर्ज नहीं हुई। ऐसे में नाराज बेटा कंधे पर ऑक्सीजन सिलेंडर लेकर SP ऑफिस पहुंच गया। बेटे ने पुलिस से कहा की मेरे पिता आज भी ऑक्सीजन सपोर्ट पर हैं, जिस तरह मेरी शिकायत पर कार्रवाई नहीं हो रही,उससे लगता है कि इस ऑक्सीजन सिलेंडर की जरूरत अब पुलिस और बिजली विभाग के जिम्मेदारों को है।
ये तस्वीर ग्वालियर के SP ऑफिस की है,कंधे पर ऑक्सीजन सिलेंडर और हाथ में शिकायत। ये हैं हिमांशु शर्मा,जो अपने पिता को न्याय दिलाने के लिए कुछ इस अंदाज में SP ऑफिस पहुंचे,हिमांशु का कहना है कि उनके पिता हरिओम शर्मा 28 अप्रैल 2026 को हजीरा थाना क्षेत्र के बिरला नगर में खाटू श्याम जी मंदिर के पास लाइन नंबर-1 पर ड्यूटी के दौरान गंभीर विद्युत हादसे का शिकार हुए थे।हादसे के बाद से पिता की हालत ऐसी है कि उन्हें आज भी ऑक्सीजन के सहारे रहना पड़ रहा है,हिमांशु का आरोप है कि हादसा विद्युत विभाग की लापरवाही के कारण हुआ,लेकिन हादसे को करीब चार महीने बीत गए,पिता अस्पताल और ऑक्सीजन के सहारे हैं और बेटा FIR के लिए थाने से लेकर बिजली विभाग और SP कार्यालय तक चक्कर लगा रहा है,हिमांशु का कहना है कि उसने कई बार अधिकारियों को आवेदन दिए,लेकिन अब तक FIR दर्ज नहीं हुई।
हिमांशु ने अधिकारियों के सामने ऑक्सीजन सिलेंडर रखकर अपना दर्द बयां किया। उसका कहना था कि “मेरे पिताजी अभी भी ऑक्सीजन पर हैं, अगर मेरी शिकायत पर कार्रवाई नहीं हो रही, तो लगता है इस ऑक्सीजन सिलेंडर की जरूरत मुझे नहीं, कार्रवाई न करने वाले जिम्मेदार लोगों को है।”,हिमांशु ने अपने आवेदन में विद्युत हादसे के लिए पांच अधिकारियों कर्मचारियों को जिम्मेदार बताते हुए उनके खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की है।आवेदन में जिनके नाम दिए गए हैं, उनमें….
– प्रीति बरैया, उपमहाप्रबंधक STM…
– रोहित सिंह, प्रबंधक बिरला नगर जोन
– अजय नामदेव, सहायक प्रबंधक STM
– शशांक कुलश्रेष्ठ सहायक प्रबंधक STC
– मोहसिन बेग, सब-स्टेशन ऑपरेटर
हिमांशु ने SP से पूरे मामले की गंभीरता से जांच कराने,तत्काल FIR दर्ज करने और हादसे के लिए जिम्मेदार लोगों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है। वहीं SP कार्यालय पहुंचे हिमांशु को पुलिस अधिकारियों ने मामले की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई का आश्वासन दिया है। अब देखना होगा कि हिमांशु के इस अनोखे विरोध के बाद पुलिस मामले में FIR दर्ज करती है या फिर परिवार को न्याय के लिए अभी और इंतजार करना पड़ेगा।
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मध्य प्रदेश में प्रत्यक्ष प्रणाली से होंगे छात्रसंघ चुनाव! सितंबर में प्रस्तावित इलेक्शन पर पहला बड़ा संकेत
भोपाल। मध्य प्रदेश में प्रत्यक्ष प्रणाली से छात्रसंघ के चुनाव होंगे! बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने बड़ा संकेत दिया हैं। उन्होंने कहा कि सितंबर में छात्रसंघ चुनाव होना है। चुनाव की प्रणाली तय होना शेष है। सरकार इस संबंध में जल्द छात्र संगठनों से चर्चा करेगी। छात्र संगठनों से चर्चा कर चुनाव की प्रणाणी पर फैसला लिया जाएगा। दरअसल, बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष व विधायक हेमंत खंडेलवाल ने मंगलवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस दौरान उन्होंने कहा कि झारखंड में स्टूडेंट्स ने मर्यादित और शालीनता से विरोध किया, लेकिन उनके साथ बर्बरतापूर्ण व्यवस्था किया गया। बेटियों से अनैतिक व्यवहार किया गया। छात्रों के हित में बात करने वाले राहुल गांधी रांची में कहां हैं ? राहुल को झारखंड के स्टूडेंट्स का साथ देना चाहिए। छात्र हित की उनकी राजनीति झूठी है। राहुल गांधी झूठ आधारित राजनीति करते हैं। नीट मामले में उन्होंने शिक्षा मंत्री का इस्तीफा मांगा, सदन में गृहमंत्री उनके हर सवाल का जवाब देना चाहते हैं, लेकिन राहुल गांधी भाग रहे हैं।
एमपी बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि राहुल गांधी को चुनोती है, अमित शाह हर सवाल का जवाब देंगे, सदन में सामना कीजिए। सदन की कार्यवाही बाधित न करें, गृहमंत्री जवाब के लिए तैयार हैं। जंतर-मंतर के मुद्दे को मोदी जी ने स्वीकारा और धर्मेंद्र प्रधान जी ने इस्तीफा दिया। झारखंड मामले में वहां की सरकार को फैसला लेना चाहिए। विपक्ष स्प्ष्ट करे छात्रों के मामले में दो तरह की राजनीति क्यों कर रहा है ? रांची के छात्र राहुल गांधी, केजरीवाल को प्रिय क्यों नहीं है ?
हेमंत खंडेलवाल ने कहा कि मध्य प्रदेश में सितंबर में छात्रसंघ चुनाव होना है, चुनाव की प्रणाली तय होना शेष है। सरकार इस संबंध में जल्द छात्र संगठनों से चर्चा करेगी। छात्र संगठनों से चर्चा कर चुनाव की प्रणाणी पर फैसला लिया जाएगा। आपको बता दें कि प्रदेश में आखिरी बार चुनाव 2017 में हुए थे। हाईकोर्ट ने सितंबर में चुनाव कराने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट के आदेश के बाद उच्च शिक्षा विभाग ने चुनाव कराने की तैयारियां शुरू कर दी हैं। प्रमुख छात्र संगठन एबीवीपी और एनएसयूआई ने चुनाव प्रत्यक्ष प्रणाली से कराने की मांग की है। शहरऔर स्थानीय मार्गदर्शिका
ग्वालियर, ग्वालियर शहर में विश्वविद्यालय थाना क्षेत्र के सिटी सेंटर स्थित स्पा सेंटर में लंबे समय से चल रहे देह व्यापार के मामले में तत्कालीन बीट प्रभारी एसआइ विनोद कुमार प्रजापति को हाइकोर्ट से राहत नहीं मिली। जस्टिस आनंद सिंह बहरावत की एकलपीठ ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि विभागीय जांच शुरू करना या आरोप-पत्र जारी करना कर्मचारी को दोषी ठहराना नहीं है। यह जांच प्रक्रिया का हिस्सा है।
बता दें कि विनोद कुमार प्रजापति अगस्त 2023 से विश्वविद्यालय थाने में पदस्थ थे और सिटी सेंटर बीट का प्रभार संभाल रहे थे। जनवरी 2025 में पुलिस ने सिटी सेंटर स्थित द हीलिंग हैंड स्पा सेंटर पर छापा मारकर देह व्यापार का खुलासा किया था। जांच में सामने आया कि स्पा सेंटर में जुलाई 2024 से अवैध गतिविधियां चल रही थीं। इसके बाद लापरवाही के आरोप में एसपी ने संयुक्त विभागीय जांच के निर्देश दिए। एसआइ ने इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी।
याचिकाकर्ता ने कहा कि वह 10 से 14 जनवरी 2025 तक मेडिकल लीव पर था और 13 जनवरी को छापे के समय ड्यूटी पर नहीं था। मामला आइजी के समक्ष पहुंचा तो उन्होंने एसपी की राय स्वीकार नहीं की। आइजी ने माना कि स्पा सेंटर में जुलाई 2024 से अवैध गतिविधियां चल रही थीं और एसआइ वर्ष 2024 से उसी बीट के प्रभारी थे। ऐसे में छापे वाले दिन छुट्टी पर होना उन्हें लंबे समय से चल रही गतिविधियों की निगरानी की जिम्मेदारी से मुक्त नहीं करता। जिसके बाद आगे का फैसला लिया गया।
हाईकोर्ट ने कहा कि विभागीय जांच में कर्मचारी को अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर मिलता है और आने वाले समय में वह गवाहों से जिरह भी कर सकता है। कोर्ट इस स्तर पर आरोपों की सत्यता पर फैसला नहीं करेगी, बल्कि यह देखेगी कि कार्रवाई कानून के अनुरूप है या नहीं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि विभागीय जांच का आदेश अंतिम सजा या दोषसिद्धि नहीं है। इसलिए इसमें हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं है। इसी के साथ एसआइ की याचिका खारिज कर दी गई।
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13 देशी पिस्टल और 45 जिंदा कारतूस के साथ तस्कर गिरफ्तार
बुरहानपुर। अवैध हथियारों के निर्माण, खरीद-बिक्री और तस्करी के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत खकनार थाना पुलिस को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। पुलिस ने एक शातिर अंतर्राज्यीय हथियार तस्कर को गिरफ्तार कर उसके पास से 13 देशी हस्तनिर्मित पिस्टल, 1 खाली मैगजीन, 45 जिंदा कारतूस और एक मोटरसाइकिल बरामद की है। जब्त किए गए अवैध सामान की कुल कीमत करीब 4,72,000 रुपये आंकी गई है।
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक प्रदीप शिंदे ने बताया कि पकड़ा गया तस्कर बड़वानी जिले के नागलवाड़ी का निवासी बादल सिंग पटवा है। वह मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र सीमा पर स्थित अवैध हथियार बनाने वाले सिगलीगरों से पिस्टल खरीदकर बाहर सप्लाई करता था। आरोपी से फिलहाल कड़ाई से पूछताछ की जा रही है। भौगोलिकसंदर्भ
गौरतलब है कि खकनार थाना पुलिस ने बीते एक साल में अवैध हथियारों के खिलाफ ताबड़तोड़ कार्रवाई करते हुए 12 मामलों में कुल 47 देशी पिस्टल, 6 मैगजीन और 45 कारतूस जब्त कर तस्करों के नेटवर्क की कमर तोड़ी है।
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चेकिंग के दौरान आरक्षक का अपहरण! हाथ-पैर बांध रातभर कार में घुमाते रहे बदमाश
भोपाल। राजधानी भोपाल में अपराधियों के हौसले किस कदर बुलंद हैं, इसका एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। शाहपुरा थाने में पदस्थ पुलिस आरक्षक सुन्दर पटेल को बदमाशों ने चेकिंग के दौरान अगवा कर लिया। हाथ-पैर और मुंह बांधकर आरक्षक को रातभर कार में बंधक बनाकर घुमाते रहे और बाद में सरकारी प्रेस के पास फेंककर फरार हो गए।
पुलिस ने मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए NHAI लिखी कार के नंबर के आधार पर मुख्य आरोपी भूपेंद्र शर्मा और उसके साथी ऋषि नामदेव को गिरफ्तार कर लिया है। दोनों पर अपहरण और लूट की धाराओं में केस दर्ज किया गया है। पकड़ा गया आरोपी भूपेंद्र शर्मा शातिर किस्म का अपराधी है, जिस पर पहले से विदिशा में हत्या के प्रयास का मामला दर्ज है।
- पूर्व जज यशवंत वर्मा के खिलाफ सभी आरोप साबित, जांच कमेटी ने लोकसभा में पेश की रिपोर्ट
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- 15 अगस्त पर देश में बड़े हमले की फिराक में खालिस्तानी समर्थक; हाई अलर्ट जारी, गुरपतवंत सिंह पन्नू पर विशेष नजर
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13 August 2026
दिल्ली हाईकोर्ट के पूर्व जज यशवंत वर्मा कैशकांड केस में जांच कमेटी रिपोर्ट लोकसभा में पेश कर दिया है। जांच समिति की रिपोर्ट बुधवार (12 अगस्त) को संसद में पेश किया। रिपोर्ट में यशवंत वर्मा के खिलाफ भ्रष्टाचार समेत सभी आरोप सही साबित हुए हैं। इसके आधार पर कानून के अनुसार आगे की जरूरी कार्रवाई की जाएगी।दरअसल मार्च 2025 में उनके सरकारी आवास में आग लगने के बाद स्टोररूम से भारी मात्रा में जला हुआ नोट और नकदी मिलने का आरोप लगा था। जांच में उनका... मध्य प्रदेश
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