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भोपाल। नर्मदा स्नान के लिए विदिशा जिले के श्रद्धालुओं से भरी पिकअप की भिड़ंत हो गई। इसमें अहिरवार परिवार के 5 श्रद्धालुओं की मौत हो गई और 10 घायल हुए हैं, जिनमें से एक महिला को भोपाल रैफर किया गया है। वही टैÑक्टर ट्राली में सवार 8 श्रद्धालु भी घायल हुए हैं, जिनमें एक की हालत गंभीर है। सूचना मिलते ही मौके पर पुलिस और प्रशासन के अधिकारी पहुंचे और घायलों को बैरसिया अस्पताल में भर्ती कराने के साथ ही इलाज शुरू किया गया है।
पुलिस के अनुसार नर्मदा स्नान के लिए विदिशा जिले के लटेरी के नजदीकी गांव मसूरी और सगड़ा गांव के साथ ही सिरोंज में रहने वाले अहिरवार परिवार के श्रद्धालु एक पिकअप में सवार होकर नर्मदापुरम के पास घाट की ओर जा रहे थे। बैरसिया में आते ही विद्या विहार स्कूल के पास एक ट्रैक्ट्र से पिकअप की जबर्दस्त भिंड़त हो गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि पिकअप के कई हिस्से टूट कर सड़क पर बिखर गए और मौके पर घायलों की चीख-पुकार मच गई। टक्कर की आवाज सुनकर आसपास के लोग पहुंचे और पुलिस को सूचित किया।
हादसे के बाद पुलिस और स्थानीय लोगों ने 108 एंबुलेंस की मदद से घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया। तब तक अस्पताल के इमरजेंसी स्टाफ के साथ ही बाकी स्टाफ भी पहुंच गया। घायलों का इलाज करने के साथ ही गंभीर घायलों को आक्सीजन सपोर्ट पर रखा गया।
पिकअप के घायलों श्रद्धालुओं की सूची
-सरजूबाई पत्नी मुकेश अहिरवार 35 वर्ष, हाजीपुर मोहल्ला, सिरोंज को भोपाल रैफर किया गया।
-विदिता अहिरवार पुत्री दौलत सिंह अहिरवार
-सुनील अहिरवार पिता दौलत सिंह अहिरवार
-मोनिका पिता मुकेश अहिरवार
-महक पिता मुकेश अहिरवार
-भूरी बाई पिता नेतराम अहिरवार 35 वर्ष
-लल्लू अहिरवार पिता कोमल अहिरवार 3 साल
-प्रदीप चतर सिंह विदिशा
-ज्योति पिता मुकेश अहिरवार 17 वर्ष
-विनीता पिता दौलत सिंह 18 वर्ष
इन श्रद्धालुओं की हुई है मौत
-लक्ष्मीबाई पत्नी दौलत अहिरवार 60 साल
-बबरीबाई पत्नी सुखलाल अहिरवार्र 60 साल
-हरीबाई पत्नी विपत सिंह अहिरवार 60 साल
-मुकेश पिता सुखलाल अहिरवार 40 साल
-दीपक पिता मुकेश अहिरवार 14 साल
(सभी मृतक अहिरवार परिवार के हैं, जोकि ग्राम मसूरी और सगड़ा के साथ ही सिरोंज, जिला विदिशा के निवासी हैं।)
ट्रैक्टर ट्राली के घायलों की सूची
-बाबूलाल पिता बारेलाल
-देव केवट पिता राजेश 30 वर्ष
-मोहन पिता भगवान सिंह 60 वर्ष
-बुंदेल सिंह पिता गजराज 60 वर्ष
-जितेंद्र गंभीर हालत में है
-रामस्वरुप पिता गोवर्धन 32 वर्ष
-प्रशांत पिता रंधीर सिंह 42 वर्ष
-नर्मदा पिता टीकाराम 38 साल
एसडीएम शमशाबाद पहुंचे और घायलो की देखभाल में जुटे
शमशाबाद एसडीएम अजय पटेल ने बैरसिया अस्पताल पहुंचकर घायलों के इलाज की व्यवस्थाएं देखी और उनके परिवारों से बात करवाई। एसडीएम पटेल ने पीपुल्स समाचार को बताया कि एक घायल महिला के हाथ में फ्रैक्चर होने से भोपाल रैफर किया गया है। बाकी सारे घायलों की हालत खतरे से बाहर होने से बैरसिया अस्पताल में ही इलाज हो रहा है। घायलों के परिवारों को भी बैरसिया तक पहुंचने में मदद करते हुए वाहन करवाए जा रहे हैं।
एक्सीडेंट की जानकारी बैरसिया एसडीएम से मिलने के बाद मसूरी और सगड़ा गांव के साथ ही सिरोंज में परिजनों को सूचना पहुंचाई गई। वहीं मदद के लिए तत्काल शमशाबाद एसडीएम अजय पटेल बैरसिया पहुंचे। पीएम के बाद शवों को लाने के लिए शव वाहन भेजे जा रहे हैं।
-नितिन जैन, एसडीएम, लटेरी (विदिशा)
घायलों को बैरसिया अस्पताल में रखा गया है, इलाज के लिए अस्पताल के समस्त स्टाफ को लगाया गया है। घटना के बारे में लटेरी एसडीएम से बात हो गई है, जिससे घायलों और मृतकों के परिवारों तक सूचना पहुंचाई गई है। पुलिस और प्रशासन के लोग अस्पताल में ही हैं।
-आशुतोष शर्मा, एसडीएम, बैरसिया

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'सीवरेज वाले पानी से सब्जी उगाना बंद करें', MP High Court ने दिए सख्त निर्देश, दूषित पानी को बताया जहर
जबलपुर। हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा व न्यायमूर्ति विनय सराफ की युगलपीठ के समक्ष बुधवार को जबलपुर (Jabalpur High Court News) में नालों के गंदे पानी से सब्जी उगाने के मामले में संज्ञान आधारित जनहित याचिका की सुनवाई हुई।
इस दौरान मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण मंडल ने नालों के पानी की जांच रिपोर्ट पेश की गई, जिसमें चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। शहर के लगभग सभी नालों के पानी में भारी मात्रा में सीवरेज मिलता है, जिस कारण वे अत्यंत दूषित हैं। यह पानी पीने, निस्तार और सिंचाई के लिए पूर्णत: अनुपयोगी है।
रिपोर्ट में कहा गया कि यदि नालों का यह पानी वाटर पाइपलाइन में मिल गया तो गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं पैदा होंगी। हाई कोर्ट ने रिपोर्ट को गंभीरता से लेते हुए सरकार से कहा कि घरों से निकलने वाले सीवरेज को सीधे नालों में जाने से तत्काल रोकें और इसके उपयोग पर प्रतिबंध लगाएं। कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिए कि मप्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल के सुझावों पर तत्काल अमल करके रिपोर्ट पेश करें। मामले की अगली सुनवाई दो फरवरी को होगी।
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5 माह बाद छात्र की मौत का राज खुला, अधीक्षक पर FIR हुई दर्ज
जबलपुर के एक आदिवासी छात्रावास में 5 महीने पहले हुई छात्र की मौत के मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। जांच में सामने आया है कि मौत की वजह बीमारी नहीं, बल्कि अधीक्षक द्वारा उपलब्ध कराया गया दूषित भोजन था। पुलिस ने आरोपी अधीक्षक के खिलाफ मामला दर्ज कर उसकी तलाश शुरू कर दी है।
5 माह बाद छात्र की मौत का राज खुला, दूषित भोजन से गई थी जान, हॉस्टल अधीक्षक पर FIR हुई दर्ज
जिले के कुंडम स्थित आदिवासी छात्रावास में पांच महीने पहले हुई 14 वर्षीय छात्र राजकुमार धुर्वे की मौत की गुत्थी सुलझ गई है। एक लंबी जांच के बाद यह खुलासा हुआ है कि छात्र की मौत किसी बीमारी से नहीं, बल्कि छात्रावास अधीक्षक द्वारा लाए गए घटिया और दूषित भोजन खाने से हुई थी। इस मामले में कुंडम थाना पुलिस ने आरोपी हॉस्टल अधीक्षक गजेंद्र झारिया के खिलाफ FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने छात्र के शव का पोस्टमार्टम कराया और बिसरा को जांच के लिए जबलपुर की रीजनल फॉरेंसिक लैब (RFSL) भेजा। कई महीनों की जांच और डॉक्टरों की विस्तृत रिपोर्ट के बाद RFSL ने स्पष्ट किया कि राजकुमार की मौत का कारण दूषित भोजन था। जांच में यह भी पता चला कि 20 अगस्त को मृतक छात्र समेत कुल 13 छात्रों ने छात्रावास में बना खाना खाया था, जिसके बाद सभी की तबीयत बिगड़ गई थी।
पुलिस जांच में सामने आया कि छात्रावास का अधीक्षक गजेंद्र झारिया अक्सर अपनी ड्यूटी से नदारद रहता था और छात्रावास की देखरेख में लापरवाही बरतता था। वह खुद ही घटिया किस्म का गेहूं, आटा, चावल और दाल खरीदकर लाता था और कर्मचारियों पर दबाव डालकर उसे छात्रों के लिए बनवाता था। घटना के बाद खाद्य विभाग की टीम ने भी छात्रावास से खाद्य सामग्री के नमूने लिए थे, जिनकी रिपोर्ट में उन्हें निम्न गुणवत्ता वाला पाया गया था।
सभी सबूतों और जांच रिपोर्टों के आधार पर कुंडम पुलिस ने अधीक्षक गजेंद्र झारिया को छात्र की मौत का जिम्मेदार मानते हुए उसके खिलाफ मामला दर्ज किया है। आरोपी फिलहाल फरार बताया जा रहा है और पुलिस उसकी तलाश में जुट गई है। इस घटना ने आदिवासी छात्रावासों में छात्रों को दिए जाने वाले भोजन की गुणवत्ता और व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

सिवनी. एमपी के सिवनी जिला जेल में बंद तीन विचाराधीन कैदियों के बुधवार 14 जनवरी की शाम 20 फीट ऊंची दीवार बांधकर फरार होने के बाद जेल प्रशासन ने डूंडासिवनी थाने में मामले की एफआईआर दर्ज कराई है. विचाराधीन कैदियों के फरार होने से हड़कंप मच गया. हालांकि फरार कैदियों को परिजनों ने आज गुरुवार 15 जनवरी की सुबह वापस जेल प्रशासन के सुपुर्द कर दिया है.
बताया जाता है कि जिला जेल में पाक्सो एक्ट के तीन विचाराधीन कैदी बंद थे. तीनों कैदी मौका देखकर जेल से फरार हो गए. फरार कैदियों में दो कैदी लखनवाड़ा थाना क्षेत्र के निवासी है, जबकि एक कैदी गोंदिया जिले का बताया जा रहा है. घटना के बाद जेल प्रशासन में हड़कंप मच गया है.
फरार कैदियों की पहचान अंकित पुत्र श्रीवाल लखनवाड़ा, विशाल पुत्र ब्रहमानंद लखनवाड़ा तथा विशाल पुत्र चिंदीलाल गोंदिया निवासी के रूप में हुई है. बताया जा रहा है कि तीनों आरोपितों ने जेल परिसर की सुरक्षा के लिए बनी लगभग 20 फीट ऊंची दीवार को एक दूसरे का सहारा लेकर फांद कर पार कर सुरक्षा घेरे से बाहर निकलकर बुधवार शाम लगभग 6 बजे फरार हो गए. जेल में लगे सीसीटीवी कैमरे में भी पूरा घटनाक्रम कैद होने की बात सामने आई है.
हैरानी की बात यह है कि इतनी बड़ी घटना के दौरान जेल में तैनात सुरक्षा कर्मियों को कोई भनक तक नहीं लगी. गिनती के दौरान तीन कैदियों की अनुपस्थिति मिलने पर पूरे जेल परिसर में अफरा-तफरी मच गई और तत्काल उच्च अधिकारियों को इसकी सूचना दी गई. मामले की गंभीरता को देखते हुए जेल प्रशासन ने डुंडासिवनी थाने में एफआईआर दर्ज कराई. सूत्रों के अनुसार जेल प्रशासन ने फरार आरोपितों के परिजनों से संपर्क किया और उन्हें समझाइश दी गई. बताया जाता है कि प्रशासन की बात मानते हुए परिजनों ने खुद आरोपितों को खोजकर जेल में लाकर छोड़ दिया.
परिजनों ने गुरुवार सुबह आरोपितों को वापस जेल पहुंचा दिया, इसके बाद तीनों को पुन: जेल में दाखिल किया गया. हालांकि इस घटनाक्रम ने जेल की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. फिलहाल तीनों आरोपित वापस जेल में हैं, लेकिन यह घटना सिवनी जेल की व्यवस्थाओं की पोल खोलने के लिए काफी है. सूत्रों के अनुसार जेल प्रशासन ने इस घटना के लिए लापरवाह कर्मचारियों पर कार्रवाई करने में जुट गया है.
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नालों में मिल रहा 99 मिलियन लीटर सीवेज, प्रदूषण बोर्ड की रिपोर्ट में खुलासा
जबलपुर. एमपी के जबलपुर में नालों के गंदे पानी से सब्जी उगाने के मामले में दायर जनहित याचिका पर एमपी हाईकोर्ट में एक बार फिर सुनवाई हुई. इस दौरान मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण मंडल द्वारा पेश की गई जांच रिपोर्ट ने हालात की गंभीरता उजागर कर दी. रिपोर्ट में सामने आया है कि जबलपुर शहर के लगभग सभी नालों के पानी में भारी मात्रा में सीवेज मिला हुआ हैए जिससे यह पानी अत्यंत दूषित हो चुका है और पीनेए निस्तार व सिंचाई के लिए पूरी तरह अनुपयोगी है.
जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने सरकार को कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि प्रदूषण नियंत्रण मंडल के सुझावों पर तत्काल अमल किया जाए और इसकी रिपोर्ट पेश की जाए. मामले की अगली सुनवाई 2 फरवरी को तय की गई है. प्रदूषण नियंत्रण मंडल की रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि यदि नालों का यह दूषित पानी किसी भी स्थिति में वॉटर पाइप लाइन में मिल गयाए तो इससे गंभीर स्वास्थ्य संकट पैदा हो सकता है.
हाईकोर्ट ने रिपोर्ट की गंभीरता को देखते हुए सरकार को निर्देश दिए हैं कि घरों से निकलने वाले सीवेज को सीधे नालों में जाने से तत्काल रोका जाए और नाले के पानी के किसी भी तरह के उपयोग पर प्रतिबंध लगाया जाए. प्रदूषण बोर्ड की ओर से पैरवी कर रहे एडवोकेट सिद्धार्थ सेठ ने बताया कि हाईकोर्ट के निर्देश पर कृषि विभागए स्वास्थ्य विभाग और प्रदूषण नियंत्रण मंडल की संयुक्त टीम ने 23 नवंबर 2025 को ओमती नालाए मोती नालाए खूनी नाला सहित अन्य प्रमुख नालों से पानी के सैंपल लेकर जांच की थी. जांच रिपोर्ट में पाया गया कि पानी में बीओडी, टोटल कॉलीफॉर्म और फीकल कॉलीफॉर्म की मात्रा निर्धारित मानकों से कहीं अधिक है. रिपोर्ट के अनुसार यह पानी पीने, नहाने, खेती या किसी भी अन्य उपयोग के लिए उपयुक्त नहीं है.
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मध्यप्रदेश विधानसभा का बजट सत्र 16 फरवरी से, 19 दिन चलेगा सदन
मध्यप्रदेश विधानसभा का बजट सत्र 16 फरवरी 2026 से शुरू होगा। यह सत्र 6 मार्च 2026 तक चलेगा। इस दौरान विधानसभा की कुल 12 बैठकें आयोजित की जाएंगी। इस साल यह मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सरकार का तीसरा बजट होगा। बजट सत्र कुल 19 दिनों तक चलेगा, जिसमें सरकार अपनी आर्थिक योजनाओं और नीतियों को सदन के सामने रखेगी।
किसानों और मध्यम वर्ग को उम्मीदें
इस बजट से किसानों और मध्यम वर्ग के लोगों को काफी उम्मीदें हैं। माना जा रहा है कि सरकार खेती, महंगाई और आम लोगों से जुड़े मुद्दों पर कुछ अहम घोषणाएं कर सकती है।
सत्र में कब-कब रहेगा अवकाश
बजट सत्र के दौरान कुछ दिनों में कार्यवाही नहीं होगी।
21, 22 और 28 फरवरी को अवकाश रहेगा
1 मार्च को रविवार का अवकाश रहेगा
3 मार्च को होली के कारण छुट्टी रहेगी
मोहन सरकार का तीसरा बजट
यह मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सरकार का तीसरा बजट होगा। इस बजट से किसानों और मध्यम वर्ग को काफी उम्मीदें हैं। माना जा रहा है कि सरकार इन वर्गों को राहत देने वाले फैसले कर सकती है।
डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा पेश करेंगे बजट
इस बार बजट डिप्टी सीएम और वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा विधानसभा में पेश करेंगे। बजट से पहले मौजूदा वित्त वर्ष के लिए द्वितीय अनुपूरक बजट, आर्थिक सर्वेक्षण 2025 पेश किया जाएगा।
अब तक पेश किए गए दो बजट
मोहन सरकार अब तक दो बजट पेश कर चुकी है-
पहला बजट (2024-25): 3 लाख 65 हजार 67 करोड़ रुपए
दूसरा बजट (2025-26): 4 लाख 21 हजार 32 करोड़ रुपए
अब तीसरा बजट 2026-27 के लिए फरवरी-मार्च में पेश किया जाएगा।
2047 तक 2 ट्रिलियन इकोनॉमी का लक्ष्य
भाजपा सरकार ने विकसित मध्य प्रदेश 2047 के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए राज्य की अर्थव्यवस्था को 2 ट्रिलियन डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य रखा है। यह बजट उसी दिशा में अहम माना जा रहा है।
पिछले साल मध्य प्रदेश विधानसभा का बजट सत्र 10 मार्च से 24 मार्च तक चला था, जिसकी अवधि 15 दिन रही थी।

शिमला. हिमाचल प्रदेश में सोलन जिले के अर्की बाजार में हुए दर्दनाक हादसे के दो दिन बाद अब सिरमौर जिले से एक और दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है. जिला सिरमौर के नौहराधार क्षेत्र में बीती रात हुए भीषण अग्निकांड में एक ही परिवार के छह लोगों की जिंदा जलकर मौत हो गई है. मृतकों में तीन मासूम बच्चे भी शामिल हैं. इस हृदयविदारक हादसे से पूरा इलाका सदमे में है.
यह दर्दनाक घटना रेणुका विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत संगड़ाह उपमंडल की नौहराधार तहसील की ग्राम पंचायत घंडूरी के तलागना गांव में हुई. बुधवार बीती रात पटवार वृत्त घंडूरी, तहसील नौहराधार के अंतर्गत मोहन सिंह पुत्र रामदयाल के रिहायशी मकान में अचानक भीषण आग लग गई. घटना के समय मकान के भीतर कुल सात लोग मौजूद थे. आग इतनी तेजी से फैली कि घर में सो रहे लोगों को बाहर निकलने का मौका तक नहीं मिल पाया.
प्रशासन से प्राप्त जानकारी के अनुसार इस हादसे में छह लोगों की मौके पर ही जिंदा जलकर मौत हो गई, जबकि एक व्यक्ति को ग्रामीणों की मदद से बाहर निकाल लिया गया. गंभीर रूप से घायल व्यक्ति की पहचान 42 वर्षीय लोकेंद्र, निवासी ग्राम खुमड़ा, तहसील चौपाल (जिला शिमला) के रूप में हुई है. प्राथमिक उपचार के बाद लोकेंद्र को नौहराधार से सोलन अस्पताल रेफर किया गया है, जहां उनकी हालत गंभीर बनी हुई है.
इस अग्निकांड में जान गंवाने वालों की पहचान नरेश (पुत्र दुर्गा सिंह, निवासी टपरोली, राजगढ़), उनकी पत्नी तृप्ता, कविता (पत्नी लोकेंद्र, निवासी खुमड़ा, चौपाल) और उनके तीन मासूम बच्चों सारिका, कृतिका व कृतिक के रूप में हुई है. रिपोर्ट के मुताबिक ये सभी लोग अपने मायके में मोहन सिंह के घर मेहमान बनकर आए हुए थे. आग की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मृतकों के शव बुरी तरह झुलस गए. इससे उनकी पहचान करना भी बेहद मुश्किल हो गया.
स्थानीय लोगों के अनुसार रात करीब दो से तीन बजे के बीच अचानक मकान से धुआं और आग की तेज लपटें उठती दिखीं. गांव दूरदराज क्षेत्र में स्थित है और मकान लकड़ी का होने के कारण आग ने कुछ ही मिनटों में विकराल रूप धारण कर लिया. ग्रामीणों ने शोर मचाकर आग बुझाने और लोगों को बचाने की कोशिश की, लेकिन आग इतनी भीषण थी कि वे बेबस नजर आए. सूचना मिलने के बाद पुलिस, प्रशासन और राहत दल मौके पर पहुंचे और आग पर काबू पाया.
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I-PAC रेड केस : ममता सरकार को सुप्रीम कोर्ट का नोटिस, ED अफसरों के खिलाफ FIR पर रोक
नई दिल्ली। कोलकाता में 8 जनवरी को I-PAC से जुड़े ठिकानों पर हुई प्रवर्तन निदेशालय (ED) की रेड अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गई है। इस हाई-प्रोफाइल मामले में शीर्ष अदालत ने पश्चिम बंगाल सरकार को नोटिस जारी करते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली सरकार से दो सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है। कोर्ट ने साफ कहा है कि, राज्य सरकार केंद्रीय जांच एजेंसी के काम में दखल न दे। ED का आरोप है कि, रेड के दौरान बंगाल सरकार और पुलिस ने जांच में बाधा डाली। इसके साथ ही अहम दस्तावेज व इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस जब्त करने से रोका गया। बंगाल में आगामी चुनावों के बीच यह मामला राजनीतिक और कानूनी दोनों मोर्चों पर अहम बन गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में स्पष्ट टिप्पणी करते हुए कहा कि, राज्य सरकार को प्रवर्तन निदेशालय (ED) के काम में किसी भी तरह का दखल नहीं देना चाहिए और जांच एजेंसी को स्वतंत्र रूप से अपना काम करने दिया जाए। अदालत ने ED अधिकारियों के खिलाफ दर्ज FIR पर 3 फरवरी तक रोक लगा दी है।
कोर्ट ने यह भी कहा कि, यदि केंद्रीय एजेंसियां किसी गंभीर अपराध की ईमानदारी से जांच कर रही हैं, तो उन्हें राजनीतिक हस्तक्षेप के जरिए रोका जाना उचित नहीं है। साथ ही शीर्ष अदालत ने यह जानना जरूरी बताया कि, ED किस उद्देश्य से मौके पर गई थी और क्या वास्तव में राज्य सरकार या पुलिस की ओर से जांच में बाधा डाली गई।
ED के मुताबिक, 8 जनवरी को की गई रेड का मुख्य उद्देश्य 2,742 करोड़ रुपए के मनी लॉन्ड्रिंग मामले की गहन जांच करना था। इसी सिलसिले में जांच एजेंसी ने I-PAC डायरेक्टर प्रतीक जैन के घर, ऑफिस और कंपनी से जुड़े कुल 10 ठिकानों पर एक साथ तलाशी अभियान चलाया।
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान प्रवर्तन निदेशालय की ओर से उठाई गई CBI जांच की मांग पर भी गंभीरता से विचार किया। अदालत में यह तर्क रखा गया कि, यदि मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपी जाती है, तो जरूरत पड़ने पर जांच को राज्य से बाहर ट्रांसफर किया जा सकता है, जिससे निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच सुनिश्चित हो सके। ED ने यह भी कहा कि, उसे अपने अधिकारियों की सुरक्षा और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख करना पड़ा है। इस संदर्भ में एजेंसी ने आर्टिकल 21 के तहत अपने अधिकारों का हवाला दिया
पश्चिम बंगाल में मार्च-अप्रैल 2026 में होने वाले विधानसभा चुनावों के बीच I-PAC रेड का मामला सामने आने से राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। I-PAC तृणमूल कांग्रेस (TMC) की चुनावी रणनीति तैयार करने वाली प्रमुख पॉलिटिकल कंसल्टेंसी कंपनी मानी जाती है। ऐसे समय में ED की कार्रवाई होने से राजनीतिक विवाद और गहरा गया। जांच एजेंसी का आरोप है कि I-PAC के पास चुनाव से जुड़े कई अहम और संवेदनशील डेटा मौजूद थे, जिनकी जानकारी ED को जांच के दौरान मिली।
ED के अनुसार, I-PAC डायरेक्टर प्रतीक जैन के लैपटॉप में पार्टी और आगामी चुनावों से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां थीं। एजेंसी का दावा है कि, रेड के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और बंगाल पुलिस ने ED को ये डेटा और दस्तावेज जब्त करने से रोका, जिससे जांच प्रक्रिया प्रभावित हुई।
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दिल्ली एयरपोर्ट पर बड़ा हादसा टला! एअर इंडिया की फ्लाइट से टकराया ग्राउंड कंटेनर
इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से गुरुवार (15 जनवरी 2026) को एअर इंडिया की न्यूयॉर्क जाने वाली A350 फ्लाइट रवाना हुई। लेकिन ईरान के हवाई क्षेत्र के अचानक बंद होने के कारण विमान को कुछ ही देर बाद वापस दिल्ली लौटना पड़ा।
सुरक्षित लैंडिंग के बाद विमान रनवे पर टैक्सी कर रहा था। इस दौरान एक ग्राउंड कंटेनर विमान के दाहिने इंजन के पास आ गया और टकरा गया। एअर इंडिया के प्रवक्ता ने बताया कि यह विदेशी सामान से टकराने का मामला है।
विमान का दाहिना इंजन क्षतिग्रस्त हुआ है। एहतियात के तौर पर विमान को ग्राउंड कर दिया गया है। इसके कारण कुछ A350 रूट की उड़ानों पर असर पड़ सकता है।
एअर इंडिया ने कहा कि उन्होंने यात्रियों को हुई असुविधा के लिए खेद व्यक्त किया है। यात्रियों को वैकल्पिक यात्रा व्यवस्था और रिफंड में मदद की जा रही है। एयरलाइन के लिए सुरक्षा सर्वोपरि प्राथमिकता है। वीडियो में विमान रनवे पर खड़ा दिखाई दे रहा है और इंजन के पास टक्कर के निशान भी दिख रहे हैं।
एअर इंडिया ने बताया कि ईरान ने अपना हवाई क्षेत्र बंद कर दिया था, जिसकी वजह से फ्लाइट को दिल्ली लौटना पड़ा। अमेरिका और ईरान के बीच संभावित सैन्य कार्रवाई की आशंका के चलते हवाई क्षेत्र लगभग पांच घंटे बंद रहा। इसके बाद ईरान ने अपना हवाई क्षेत्र फिर से खोल दिया।

 

उज्जैन। मध्यप्रदेश पुलिस के 5500 से अधिक ट्रेड आरक्षकों ने देश में शायद पहली बार एक अभूतपूर्व कदम उठाते हुए अपनी पीड़ा सीधे न्याय के देवता महाकाल बाबा के दरबार में रखी है। इन सिपाहियों ने उज्जैन में बाबा के चरणों में अर्जी लगाने के बाद एक सामूहिक प्रार्थना-पत्र मुख्यमंत्री को भेजकर हस्तक्षेप की गुहार लगाई है। टेÑड आरक्षक चाहते हैं कि 5 साल की सेवा अवधि के बाद पूर्व की तरह विभागीय परीक्षा पास करने पर थानों में पोस्टिंग दी जाए।
महाकाल बाबा को अर्पित अर्जी के माध्यम से ट्रेड आरक्षकों कहना है कि उन्हें जनता की सुरक्षा के लिए नहीं बल्कि वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के निजी बंगलों में घरेलू नौकरों की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है, जिसमें झाड़ू-पोंछा, बर्तन धोना, साफ-सफाई करना, खाना बनाना, जूता पालिश, कारपेंटर सहित बच्चों और पालतू कुत्तों की देखभाल जैसे कार्य उनसे कराए जा रहे हैं। यह न केवल संविधान बल्कि मानवाधिकारों का भी खुला उल्लंघन है।
ट्रेड आरक्षकों ने अपने आवेदन में बताया है कि पहले मध्यप्रदेश में नियम जीओपी-57/93 के तहत 5 वर्ष की सेवा के बाद उन्हें जनरल ड्यूटी (जीडी) में संविलियन किया जाता था। इससे उनकी पोस्टिंग थानों में होने से फील्ड में कानून व्यवस्था संभालते थे। लेकिन वर्ष 2012 में इस व्यवस्था को अचानक जीओपी-57/93 के माध्यम से बंद कर दिया गया। नतीजे में 5500 जवान में से कई आज भी अफसरों की निजी सेवा में ही फं से हुए हैं।
प्रदेश के 5500 ट्रेड आरक्षकों के वेतन आदि पर प्रदेश सरकार सालाना लगभग 250-300 करोड़ रुपए खर्च कर रही है, जबकि वही काम आउटसोर्स के माध्यम से सिर्फ 45 करोड़ रु सालाना खर्च में हो सकता है। यानी हर साल लगभग 250 करोड़ बेवजह खर्च हो रहे हैं, जबकि यह राशि आम जनता के टैक्स से प्राप्त होती है।
मद्रास हाईकोर्ट कई दशक पहले ही अर्दली प्रथा को अवैध बता चुका है। इसके अलावा प्रिवेंशन आॅफ करप्शन एक्ट, 1988 की धारा 13 के अनुसार भी सरकारी स्टाफ को निजी सेवा में लगाना भ्रष्टाचार की श्रेणी में आता है। बावजूद मध्यप्रदेश में यह व्यवस्था दशकों से बरकरार है।
पूर्व विशेष पुलिस महानिदेशक (पुलिस रिफार्म्स) शैलेष सिंह ने अर्दली के तौर पर नियमित आरक्षकों की भर्ती से लेकर उनके रिटायरमेंट तक होने वाले वेतन भत्तों के खर्च को सामने रखते हुए प्रस्ताव तत्कालीन पुलिस महानिदेशक सुधीर सक्सेना को प्र्रस्तुत किया था। इसमे कलेक्टर रेट पर अर्दली रखने के साथ ही ट्रेड आरक्षकों को जीडी में संविलियन का मसौदा था, क्योंकि ट्रेड आरक्षक प्रमोशन पाते हुए सहायक उपनिरीक्षक या उपनिरीक्षक स्तर से रिटायर होते हैं। ऐसे में उनका मासिक वेतन 65 से 70 हजार रुपए तक हो जाता है, जबकि काम बंगले पर चाकरी करना ही होता है। यह प्रस्ताव अभी भी विचाराधीन ही है, जिससे ट्रेड आरक्षकों के थानों में पोस्टिंग पूर्व विभागीय परीक्षा शुरू नहीं हो पा रही है।

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पौने दो करोड़ की एक्सपायर बीयर ज़मीन में दफन, बड़ी कार्रवाई से हड़कंप
इंदौर। नागरिकों की सेहत से किसी भी तरह का समझौता न हो, इसी मंशा के साथ इंदौर आबकारी विभाग ने सख्त कार्रवाई करते हुए पौने दो करोड़ रुपये कीमत की एक्सपायर बीयर को नष्ट कर दिया। सिमरोल क्षेत्र स्थित माउंट एवरेस्ट ब्रेवरीज लिमिटेड, मेमदीग्राम में बनाई गई करीब 2 लाख 23 हजार 316 लीटर बीयर तय समय पर निर्यात नहीं हो सकी, जिसके चलते उसकी वैधता अवधि समाप्त हो गई थी।
अगर यह बीयर बाजार में पहुंचती, तो जनस्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा बन सकती थी। आबकारी विभाग को जैसे ही जानकारी मिली कि बीयर की निर्माण तिथि से छह महीने की अवधि पूरी हो चुकी है और स्टॉक अब एक्सपायर हो चुका है, विभाग ने इसे बेहद गंभीरता से लिया। बिना समय गंवाए नियमानुसार नष्टीकरण की प्रक्रिया शुरू की गई, ताकि किसी भी स्तर पर यह बीयर बिक्री या आपूर्ति में न आ सके। इस पूरे मामले में उपायुक्त आबकारी संजय तिवारी की अध्यक्षता में एक विशेष समिति गठित की गई।
समिति ने पूरी पारदर्शिता और सख्त निगरानी के साथ नष्टीकरण की कार्रवाई को अंजाम दिया। कुल 23,154 पेटियों में भरी बीयर, जिसकी डिस्टिलरी कीमत लगभग पौने दो करोड़ रुपये आंकी गई, को पूरी तरह नष्ट किया गया। सहायक आयुक्त आबकारी अभिषेक तिवारी ने बताया कि यह बीयर मध्यप्रदेश के अलावा दिल्ली, असम और महाराष्ट्र भेजे जाने के लिए बनाई गई थी, लेकिन संबंधित राज्यों से समय पर डिमांड नहीं आने के कारण इसे निर्धारित समय में निर्यात नहीं किया जा सका। ब्रेवरी प्रबंधन द्वारा खुद आबकारी विभाग को बीयर के एक्सपायर होने की सूचना दी गई, जिसके बाद विभाग ने तुरंत कार्रवाई शुरू की।
नष्टीकरण की प्रक्रिया तीन दिनों तक चली। सबसे पहले बोतलों में भरी बीयर को पूरी तरह बहाकर नष्ट किया गया, ताकि दोबारा उपयोग की कोई संभावना न रहे। वहीं, केन में भरी बीयर को बुलडोजर और जेसीबी मशीन की मदद से कुचलकर खत्म किया गया। पूरी कार्रवाई की फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी कराई गई, ताकि भविष्य में किसी भी तरह के सवाल या विवाद की गुंजाइश न रहे। आबकारी विभाग की इस कार्रवाई को जनहित में बड़ा कदम माना जा रहा है। अक्सर देखा जाता है कि एक्सपायर खाद्य और पेय पदार्थ चोरी-छिपे बाजार में खपा दिए जाते हैं, जिससे आम लोगों की सेहत पर सीधा असर पड़ता है।
लेकिन इस मामले में विभाग ने समय रहते सख्ती दिखाकर साफ संदेश दिया है कि स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने वालों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा। नष्टीकरण के दौरान समिति में शामिल उपायुक्त आबकारी संजय तिवारी, सहायक आयुक्त अभिषेक तिवारी, इकाई प्रभारी अधिकारी प्रतीक्षा शर्मा, धर्मेंद्र जोशी, जहांगीर खान, राजेश जैन, आरएस पुरोहित सहित सभी सहायक जिला आबकारी अधिकारी, आबकारी उपनिरीक्षक मीना माल और आबकारी आरक्षक मौजूद रहे। हर स्तर पर निगरानी रखी गई, ताकि प्रक्रिया पूरी तरह नियमों के मुताबिक हो।
आबकारी विभाग की यह कार्रवाई न सिर्फ विभागीय सख्ती का उदाहरण है, बल्कि शराब उद्योग को भी साफ चेतावनी है कि नियमों की अनदेखी या एक्सपायर उत्पादों के साथ किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इंदौर में हुई यह कार्रवाई आने वाले समय में प्रदेशभर के लिए एक मिसाल मानी जा रही है।
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बोतल में ‘सीवेज’ भरकर CMO दफ्तर पहुंचे पार्षद! बोले- आप पी कर बताए ये पानी
पन्ना। मध्य प्रदेश के पन्ना नगर पालिका से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने सिस्टम की ‘साफ-सफाई’ की पोल खोलकर रख दी है। ज़रा सोचिए, जिसे आप अपनी प्यास बुझाने के लिए पी रहे हैं, अगर वो नाले का गंदा पानी बन जाए तो आप क्या करेंगे ?
दरअस, मामला वार्ड नंबर-14 का है… जहां पिछले तीन दिनों से नलों से पानी नहीं बल्कि ‘बीमारियों का सीवेज’ सप्लाई हो रहा है। जनता का गला सूखा तो गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। हद तो तब हो गई जब शिकायतों के बाद भी अधिकारी ‘कुंभकर्णी नींद’ से नहीं जागे। ​मंगलवार को जब पार्षद वैभव थापक हाथ में गंदे पानी की बोतल लेकर सीधे CMO के चैंबर में दाखिल हुए, तो वहां मौजूद अफसरों के पसीने छूट गए।
पार्षद ने दो टूक शब्दों में पूछा कि ‘क्या यही पानी साहब के घर भी जाता है?’ इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों का हवाला देते हुए पार्षद ने चेताया कि प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतज़ार न करे। अब इस ‘गंदे संग्राम’ के बाद पन्ना की जनता को साफ पानी मिलता है या सिर्फ आश्वासन का घूंट!” यह देखने वाली बात है।

रतलाम। जिले के झाबुआ रोड पर उंडवा के पास देर रात दर्दनाक हादसा हो गया। टाइल्स से भरा ट्रक रिवर्स आया और पीछे चल रही लोडिंग गाड़ी को धकेलते हुए पीछे ले गया। कुछ दूर जाकर लोडिंग गाड़ी सड़क किनारे गड्ढे में गिर गई, जिस पर ट्रक भी पलटकर उसके ऊपर गिर गया। इससे लोडिंग गाड़ी में सवार तीन लोगों की दबने से मौके पर ही मौत हो गई। तीनों के शव को दो से ढाई घंटे की मशक्कत के बाद बाहर निकाला जा सका। तीनों के शव पूरी तरह चिपक गए थे।
बिलपांक थाना प्रभारी ने बताया कि टाइल्स से भरा ट्रक झाबुआ से रतलाम की ओर आ रहा था। उसके पीछे एक लोडिंग गाड़ी चल रही थी, जिसमें अंडों की खाली कैरेट भरी थी। उंडवा के पास सड़क पर चढ़ाई चढ़ रहा था, तभी अचानक तकनीकी खराबी के कारण वह रिवर्स आने लगा और पीछे चल रही लोडिंग (छोटा हाथी) गाड़ी को धकेलते हुए पीछे ले गया।
लोडिंग गाड़ी में सवार लोग कुछ समझ पाते, इससे पहले ही ट्रक उसे पीछे धकेलता चला गया। लोडिंग गाड़ी सड़क किनारे गड्ढे में गिर गई और ट्रक भी उसके ऊपर पलट गया। ट्रक के नीचे दबने से पिकअप के कैबिन में सवार रियाज (48) पिता शब्बीर अहमद, निवासी हाट रोड रतलाम, जफर (52) पिता अब्दुल शकूर, निवासी घास बाजार रतलाम और अब्दुल हमीद (50) पिता फाज मोहम्मद निवासी झाबुआ की मौके पर ही मौत हो गई।
मौके पर दो क्रेन और दो जेसीबी बुलाकर वाहनों को सीधा किया गया। करीब दो से ढाई घंटे की मशक्कत के बाद मृतकों के शव बाहर निकाले जा सके। शव निकालने के लिए कटर का भी उपयोग करना पड़ा। तीनों शव बुरी तरह क्षत-विक्षत हो चुके थे। बाद में शवों को मेडिकल कॉलेज भिजवाया गया। हादसे में लोडिंग गाड़ी भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई।
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मोहन कैबिनेट में अनेक निर्णय, ग्वालियर-उज्जैन व्यापार मेले में नई गाडिय़ों पर छूट
भोपाल. एमपी की कैबिनेट बैठक मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार, 13 जनवरी को मंत्रालय में हुई. बैठक में कई अहम फैसलों पर मुहर लगी. कैबिनेट में परिवहन विभाग के प्रस्ताव पर ग्वालियर व्यापार मेला 2026 और उज्जैन विक्रमोत्सव व्यापार मेला 2026 में नई गाडिय़ां खरीदने पर परिवहन टैक्स में 50 प्रतिशत छूट दिए जाने पर चर्चा हुई और बाद में सर्वसम्मति से इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गई.
ग्वालियर व्यापर मेला 25 दिसंबर से शुरू हो हुआ है. शुरुआत में ही मेले में नई गाडिय़ां खरीदने पर परिवहन टैक्स में 50 प्रतिशत छूट देने का प्रस्ताव सरकार के पास भेज दिया गया था. जिस पर आज यानी 13 जनवरी की कैबिनेट मीटिंग में मंजूरी दी गई है. करीब 19 दिन बाद प्रस्ताव को हरी झंडी मिली है.
टैबलेट लेकर पहुंचे सीएम व अन्य मंत्री
मोहन सरकार की यह पहली हाईटेक कैबिनेट बैठक हुई. जिसमें मुख्यमंत्री और मंत्री फाइलों के बजाय टैबलेट लेकर पहुंचे. सभी ने अपने प्रस्ताव टैबलेट पर देखकर ही रखे और मुख्यमंत्री ने भी टैबलेट में देखकर उन प्रस्तावों पर चर्चा की.
विदित हो कि गत 6 जनवरी को हुई कैबिनेट की बैठक में मुख्यमंत्री मोहन यादव की पहल पर प्रदेश में ई-कैबिनेट की प्रक्रिया शुरू करने के लिए मंत्रियों को टैबलेट दिए गए थे और कैबिनेट के सामने ई-टैबलेट एप्लिकेशन का प्रजेंटेशन हुआ था. सीएम ने बताया कि यह पहल प्रदेश में ई-गवर्नेंस को बढ़ावा देने के लिए की जा रही है. इससे पेपरलेस कार्य प्रक्रिया अपनाने, समय की बचत और पारदर्शिता सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी.
राजगढ़ जिले की सारंगपुर तहसील की मोहनपुरा विस्तारिकरण सिंचाई परियोजना 396.21 करोड़ की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई. खटनार तहसील के 26 गांवों की 11 हजार 40 हेक्टयर में सिंचाई होगी. इससे 10 हजार से ज्यादा गांवों के किसान लाभांवित होंगे. इसी प्रकार रायसेन जिले की सुल्तानपुर सिंचाई परियोजना के लिए 115.99 करोड़ की प्रशासकीय स्वीकृति हुई. 20 गांवों के 5700 हेक्टयर क्षेत्र में सिंचाई होगी.
स्पेस टेक नीति पर कैबिनेट की मुहर
स्पेस टेक नीति 2026 के जरिए राज्य सरकार का उद्देश्य स्पेस टेक्नोलॉजी, सैटेलाइट डेटा, ड्रोन, जियो-स्पेशियल एप्लीकेशन और स्टार्टअप्स को बढ़ावा और प्रोत्साहन देना है. इससे रिसर्च, इनोवेशन और निजी निवेश को आकर्षित करने के साथ-साथ युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित करना है.
सोलर एनर्जी के इन प्रोजेक्ट्स को मंजूरी
कैबिनेट बैठक में जिन तीन परियोजनाओं को मंजूरी दी गई. इन प्रोजेक्ट्स के द्वारा राज्य में नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन को स्थायित्व देने और पीक डिमांड के समय निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा गया है.
ये प्रोजेक्ट इस प्रकार हैं.
- सोलर सह 4 घंटे की 300 मेगावाट विद्युत प्रदाय स्टोरेज परियोजना
- सोलर सह 6 घंटे की 300 मेगावाट विद्युत प्रदाय स्टोरेज परियोजना
- 24 घंटे 200 मेगावाट सोलर सह स्टोरेज परियोजना
शिक्षकों को बड़ी राहत, चतुर्थ क्रमोन्नत वेतनमान योजना मंजूर
शैक्षणिक संवर्ग के शिक्षकों के लिए चतुर्थ क्रमोन्नत वेतन मान योजना लागू करने की मंजूरी दी गई. इसमें सहायक शिक्षक, उच्च श्रेणी शिक्षक तथा नए शैक्षणिक संवर्ग के शिक्षक शामिल होंगे. इस पर 322.34 करोड़ का अनुमानित व्यय आएगा. यह शिक्षकों के लिए राहतभरा निर्णय है.
स्कूल शिक्षा विभाग के प्रस्ताव पर सांदीपनि विद्यालय योजना के दूसरे चरण के लिए 200 नए सांदीपनी विद्यालय शुरू करने को मंजूरी. इसमें करीब 3660 करोड़ रुपए खर्च होंगे. प्रथम चरण में 275 विद्यालयों की स्वीकृति मिली थी. हर स्कूल की स्थापना पर 17-18 करोड़ रुपए खर्च होंगे.
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75 किसानों से ट्रैक्टर की ठगी,रिंग रोड निर्माण में लगाए थे, न किराया मिला, न लौटाए वाहन
जबलपुर. एमपी के जबलपुर में बन रही रिंग रोड निर्माण में ग्रामीण क्षेत्र के किसानों के ट्रैक्टर किराए पर ले लिए गए. इसके बाद तीन माह तक किसानों को टै्रैक्टर का किराया नहीं मिला. किसान जब मौके पर पहुंचे तो पता चला कि जिस व्यक्ति को ट्रैक्टर दिए थे वह गायब हैं. इतना ही नहीं 75 किसानों के ट्रैक्टर भी गायब हैं. किसानों ने आसपास बहुत तलाश किया लेकिन ट्रैक्टर नहीं मिले तो गोसलपुर थाने पहुंचे. वहां पर भी सुनवाई नहीं हुई है. इसके बाद किसान एसपी आफिस पहुंचे और शिकायत की है.
पुलिस अधिकारियों से शिकायत करते हुए किसानों ने बताया कि जबलपुर के रहने वाले दीपक गोस्वामी ने कुछ माह पहले गांव आकर किसानों से कहा कि पास ही रिंग रोड बन रही है. यहां किसान अपना ट्रैक्टर लगवाना चाहते हैं तो चल सकते हैं. दीपक के कहने पर पौड़ी खुर्द, गोसलपुर, कुंडम में रहने वाले किसानों ने करीब 100 से अधिक ट्रैक्टर रिंग रोड बनाने में लगा दिए. कुछ दिनों तक दीपक लगातार किसानों के संपर्क में था. अचानक एक दिन उसका फोन बंद हो गया.
किसान मौके पर पहुंचे तो पता चला कि दीपक के साथ-साथ 75 ट्रैक्टर गायब हैं. किसानों का कहना है कि ट्रैक्टर बैंक से फाइनेंस कराए थे. सोचा था कि रिंग रोड के काम में अगर ट्रैक्टर लग जाएगे तो किस्त निकाल आती. शिकायत में कहा गया है कि आसपास के कई लोगों के ट्रैक्टर दीपक और विमल लेकर गए है. जहां पर रिंग रोड बन रही हैए वहां पर भी पूछताछ की गई तो पता चला कि कई दिनों से दोनों नहीं आए हैं. जितने ट्रैक्टर काम पर लगे थे सभी गायब हैं. दीपक और विमल ने 25 हजार रुपए प्रतिमाह में किराए पर लगाया था. गुलाब ने बताया कि इससे पहले दमोह के भी किसानों के साथ दोनों ने ठगी की थी.

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फोटो गैलरी

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गरिमा के जन्म के 15 मिनिट बाद का फोटो
गरिमा के जन्म के 15 मिनिट बाद का फोटो
गरिमा के 1 वर्ष बाद का फोटो
गरिमा के 1 वर्ष बाद का फोटो
गरिमा के 2 वर्ष बाद का फोटो
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बीमार होने के बाद भोपाल अस्पताल मे भर्ती गरिमा
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हाई कोर्ट के आदेश के बाद गरिमा के शव को जमीन से निकालते हुऐ
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निकालने के बाद गरिमा के शव को पैक कर जॉच के लिऐ भेजा गया
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दोषी डॉक्टर के खिलाफ मामला कायम कराने के लिऐ पुलिस अधिक्षक से मिले पत्रकार
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गरिमा के शव की जॉच होने के बाद पुनः उसी स्थान पर चबूतरा का निर्माण किया गया
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पूजा स्थल मे गरिमा
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