MNS प्रमुख राज ठाकरे के बेटे और मनसे विद्यार्थी सेना अध्यक्ष अमित ठाकरे ने रविवार को पुणे के गवर्नमेंट पॉलिटेक्निक कॉलेज में एक बड़ा विवाद खड़ा कर दिया. MNS नेता अमित ठाकरे ने सरकारी पॉलिटेक्निक कॉलेज में प्रिंसिपल के दफ्तर में लगी पीएम नरेंद्र मोदी की तस्वीर को जबरन हटवा दी है. यह घटना उस समय हुई जब अमित ठाकरे कॉलेज में छात्रों की समस्याओं और सुविधाओं का जायजा लेने पहुंचे थे. बताया जा रहा है कि ऑफिस में पीएम की फोटो पर एक छात्र ने आपत्ति जताई थी. शिवाजी महाराज की तस्वीर के पास लगी फोटो हटाए जाने का VIDEO सोशल मीडिया पर वायरल है.
महाराष्ट्र के पुणे में शिवाजीनगर के सरकारी पॉलिटेक्निक कॉलेज में पहुंचे अमित ठाकरे ने प्रिंसिपल के कार्यालय में लगी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर को लेकर सवाल उठाया. कॉलेज के हॉस्टल सुपरिटेंडेंट और प्रिंसिपल के दफ्तर का दौरा करते समय अमित ठाकरे की नजर दीवार पर लगी तस्वीरों पर पड़ी.
उन्होंने कॉलेज प्रशासन से छत्रपति शिवाजी महाराज और डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर की तस्वीर के ठीक बगल में लगी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की फोटो पर अमित ठाकरे ने तुरंत कड़ी आपत्ति जताते हुए हटवा दी.
बताया जा रहा है कि अमित ठाकरे कॉलेज में छात्रों की समस्याएं जानने और वहां की सुविधाओं का जायजा लेने पहुंचे थे. उन्होंने हॉस्टल और मेस का निरीक्षण किया और छात्रों से बातचीत भी की.
इस पूरे मामले में कॉलेज प्रशासन की ओर से अभी आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है. इसलिए यह साफ नहीं है कि तस्वीर किसके निर्देश पर लगाई गई थी. आरोप है कि तस्वीर तुरंत नहीं हटाई गई, जिसके बाद मनसे कार्यकर्ताओं ने उसे कार्यालय से निकाल दिया.
अमित ठाकरे कॉलेज के प्रिंसिपल के पास अलग-अलग मामलों के बारे में पूछने गए थे. इस दौरान यह पूरी घटना वहीं घटी है. एक स्टूडेंट पूछता है कि प्रोफेसर के ऑफिस में पीएम मोदी की फोटो क्यों है? पीएम मोदी की तस्वीर हटाए जाने की घटना पर अमित ठाकरे ने प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने बताया कि एक छात्र द्वारा मुझे इस बारे में जानकारी दी गई.
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सोना-चांदी सस्ता होगा! त्योहारी सीजन में मोदी सरकार ले सकती है बड़ा निर्णय, इंपोर्ट ड्यूटी घटाने पर कर रही विचार
सोना-चांदी सस्ता हो सकता है। त्योहारी सीजन में मोदी सरकार सोना-चांदी पर से इंपोर्ट ड्यूटी यानी कस्टम ड्यूटी घटाने पर विचार कर रही है। जेम्स एंड ज्वेलरी काउंसिल इस अहम बदलाव की तरफ इशारा किया है। जेम्स एंड ज्वेलरी काउंसिल के चेयरमैन राजेश रोकड़े ने ईटी ऑनलाइन को बताया कि ऊंचे टैक्स रेट अपने मकसद में नाकाम रहे हैं, जिसके बाद सरकार इस नीति पर पुनर्विचार कर रही है।
जेम्स एंड ज्वेलरी काउंसिल के मुताबिक सोने-चांदी पर बढ़ाई गई इंपोर्ट ड्यूटी का असर बेअसर साबित हो रहा है। आयात पर लगाम लगाने के लिए बढ़ाई गई ड्यूटी के बावजूद देश में सोने की मांग में कोई खास कमी नहीं आई. इसके विपरीत तस्करी बढ़ गई है। लिहाजा अब सरकार टैक्स कटौती पर विचार कर रही है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक सरकार ने जब सोने पर इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ाई थी, तो ज्वेलरी बॉडी ने पहले ही चेतावनी दी थी। उनका कहना था कि भारी भरकम टैक्स से अवैध कारोबार को बढ़ावा मिलेगा। रोकड़े के मुताबिक, बिल्कुल ऐसा ही हुआ। सरकार को उम्मीद थी कि ड्यूटी बढ़ने से सोने का आयात गिरेगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। आयात तो कम नहीं हुआ, लेकिन देश में ग्रे मार्केट का दायरा काफी तेजी से फैल गया। सरकार काफी समय से सोना-चांदी पर से इंपोर्ट ड्यूटी घटाने पर विचार कर रही है। फिलहाल ड्यूटी कटौती पर कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। हालांकि उम्मीद है कि सरकार इंपोर्ट ड्यूटी कम कर सकती है।
बता दें कि इसी साल मई के महीने में केंद्र सरकार ने सोने तथा चांदी पर कस्टम ड्यूटी को 6 फीसदी से बढ़ाकर सीधे 15 फीसदी कर दिया था। पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव के बीच देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम करने के लिए ये कदम उठाया गया था।
बता दें कि पूरी दुनिया में चीन के बाद भारत सोने का दूसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता है। देश में हर साल करीब 700 से 900 टन सोने का आयात होता है। सरकारी आंकड़ों पर नजर डालें तो वित्त वर्ष 26 में सोने का आयात 24 फीसदी बढ़कर 71.9 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। हालांकि, मात्रा के हिसाब से देखें तो आयात घटकर 721 टन रह गया। फिर भी बिल का बोझ कम नहीं हुआ है।
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सुप्रीम कोर्ट ने सीजेपी के 5 सितंबर मार्च पर रोक लगाने से किया इनकार, कहा- कानून व्यवस्था बनाएं रखे
नई दिल्ली. कॉकरोच जनता पार्टी ने दिल्ली में 5 सितंबर को मार्च का ऐलान किया है. इसे लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला दिया है. कोर्ट ने सीजेपी के मार्च पर रोक लगाने या फिर कोई विशेष प्रतिबंध लगाने से इनकार कर दिया है. मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि अभी कोई ऐसा आधार सत्यापित नहीं हो पाया है जिससे यह लगे की इस दौरान कुछ हिंसक हो सकता है.
हालांकि, कोर्ट ने अधिकारियों को कानून-व्यवस्था बनाए रखने और सभी पक्षों से शांतिपूर्ण तरीके से कार्यक्रम करने की उम्मीद जताई. बता दें कि सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर मांग की गई थी कि 5 सितंबर के प्रस्तावित मार्च पर ब्रिक्सि समिट के बाद तक रोक लगाई जाए. ब्रिक्स समिट 12 और 13 सितंबर को दिल्ली में प्रस्तावित है.
याचिका में कानून-व्यवस्था को लेकर चिंता जताई गई थी. याचिका में कहा गया है कि इतने बड़े कार्यक्रम से राजधानी में सुरक्षा और कानून-व्यवस्था से जुड़ी परेशानी हो सकती है. लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल मार्च पर रोक लगाने के लिए पर्याप्त आधार नहीं माना.
सीजेपी ने 5 सितंबर को दिल्ली में शांतिपूर्ण मार्च निकालने का ऐलान किया है. यह मार्च इंडिया गेट से दिल्ली पुलिस मुख्यालय तक प्रस्तावित है. संगठन का कहना है कि केंद्र सरकार ने 25 जुलाई को युवाओं से किए गए कुछ वादों को अब तक पूरा नहीं किया है. सीजेपी के मुताबिक, मार्च में छात्रों और युवाओं के साथ उन परिवारों के लोग भी शामिल होंगे, जिनके बच्चों की हृश्वश्वञ्ज से जुड़े विवादों के दौरान मौत हुई. इसके अलावा जुलाई के प्रदर्शन के दौरान कथित पुलिस कार्रवाई से प्रभावित लोग भी मार्च में शामिल होंगे.
कोर्ट ने साफ किया कि प्रशासन की जिम्मेदारी है कि कानून-व्यवस्था बनी रहे. मार्च में शामिल लोगों और आयोजकों को भी शांतिपूर्ण और जिम्मेदारी के साथ कानून का पालन करते हुए कार्यक्रम करना होगा.
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