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तेज बारिश के बीच नाले में बही वैन, 9 की मौत, डूबने वालों में 3 बच्चे भी

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राजगढ़। जिले में लगातार हो रही तेज बारिश के बीच सोमवार को बड़ा हादसा हो गया। पचोर-सारंगपुर मार्ग पर पड़ाना कस्बे के पास झिरी नाले में 11 लोगों से भरी ईको वैन पानी के तेज बहाव में बह गई। हादसे में तीन बच्चों और दो महिलाओं समेत नौ लोगों की मौत हो गई। वैन में सवार दो युवकों ने किसी तरह तैरकर अपनी जान बचाई।
बताया जा रहा है कि लगातार बारिश के कारण झिरी नाला उफान पर था। पानी अधूरे पुल के ऊपर से बह रहा था। इसी दौरान ईको वैन वहां से गुजर रही थी। पानी का बहाव इतना तेज था कि वाहन अनियंत्रित होकर नाले में जा गिरा और देखते ही देखते बह गया। हादसे के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई और स्थानीय लोगों ने पुलिस को सूचना दी।
सारंगपुर टीआई राहुल रघुवंशी के मुताबिक, ईको में सवार सभी लोग देवास के सतवास ब्लॉक के धांसड़ गांव के रहने वाले थे और कड़लावद गांव जा रहे थे। कार मुकेश सिंह (40) चला रहा था। टीआई ने बताया कि पढ़ाना के पास झिरी नाले पर 30 फीट का पुल निर्माणाधीन है। तेज बारिश की वजह से पानी पुल के ऊपर बह रहा है। ड्राइवर को अधूरा पुल नहीं दिखा। उसने कार आगे बढ़ा दी, जो नाले में बह गई। हादसे में बच निकले मुकेश और हुकुम सिंह (30) को सारंगपुर अस्पताल में भर्ती कराया गया है। मुकेश ने बताया कि उसकी काकी को लकवा लगा है, जिन्हें इलाज के लिए हम लोग कड़लावाद धाम ले जा रहे थे।
हादसे में इनकी गई जान
शंकर सिंह (50)
सागरबाई पति शंकर सिंह
रीनू (28) पति हुकुम सिंह
राजवीर (3) पिता हुकुम सिंह
जसप्रीत पिता हुकुम सिंह
विशाल चौहान
पूजा (27) पति विशाल चौहान
रिशिका
आनंद सिंह
घटना की सूचना मिलते ही कौशल विकास एवं रोजगार मंत्री डॉ. गौतम टेटवाल ग्राम पढ़ाना पहुंचे और घटनास्थल का निरीक्षण किया। उन्होंने पीड़ित परिवारों से मुलाकात कर शोक संवेदना जताई और सरकार की ओर से हर संभव मदद का भरोसा दिलाया।
हादसे के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मृतकों के परिजनों को 4-4 लाख की आर्थिक सहायता राशि प्रदान करने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन द्वारा आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर पीड़ित परिवारों को सहायता राशि उपलब्ध कराने की कार्रवाई की जा रही है।
इधर, लोक निर्माण विभाग के इंजीनियर पीके शर्मा ने कहा कि सड़क पर निर्माण कार्य जारी है। वहां डायवर्जन के बोर्ड लगाए गए हैं। रास्ता पानी में डूबा था। ग्रामीणों ने कार ड्राइवर को रोका भी था। इसके बावजूद उसने गाड़ी आगे बढ़ा दी, जिसकी वजह से हादसा हुआ।
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ब्लैकमेल करने वाले गिरोह का पर्दाफाश, दो महिलाओं समेत 5 गिरफ्तार
छिंदवाड़ा। देहात थाना पुलिस ने हनीट्रैप के जरिए लोगों को फंसाकर कथित रूप से ब्लैकमेल करने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने मामले में दो महिलाओं समेत पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि गिरोह पहले लोगों को अपने जाल में फंसाता था और बाद में दुष्कर्म के मामले में फंसाने की धमकी देकर उनसे मोटी रकम की मांग करता था।
पुलिस के अनुसार, आरोपित कथित तौर पर पीड़ितों को झूठे रेप केस में फंसाने की धमकी देकर पैसे ऐंठने का प्रयास करते थे। एक मामले में आरोपियों ने करीब 5 लाख रुपए की मांग की थी। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने जांच शुरू की और आरोपियों तक पहुंचने के लिए कार्रवाई की।
जांच के दौरान पुलिस को गिरोह से जुड़े लोगों के बारे में महत्वपूर्ण सुराग मिले। इसके बाद पुलिस टीम ने कार्रवाई करते हुए पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। इनमें दो महिलाएं भी शामिल हैं।
पुलिस अब गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर रही है। पूछताछ में गिरोह के अन्य सदस्यों और इसी तरह की अन्य वारदातों के बारे में जानकारी सामने आने की उम्मीद है। पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि आरोपियों ने अब तक कितने लोगों को अपना निशाना बनाया है और उनसे कितनी रकम वसूली गई।
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चोरी की गाड़ियों की कटिंग पर बड़ा खुलासा: पूर्व पार्षद के भाई-बेटे गिरफ्तार
इंदौर। शहर में चोरी के वाहनों को काटकर उनके पार्ट्स ठिकाने लगाने के मामले में क्राइम ब्रांच ने बड़ी कार्रवाई की है। दौलतगंज-रानीपुरा क्षेत्र की एक कबाड़ दुकान पर दबिश देकर पुलिस ने चोरी की 12 गाड़ियों के इंजन बरामद किए हैं। मामले में पूर्व पार्षद अंसाफ अंसारी के भाई अल्ताफ अंसारी और बेटे अरशद अंसारी को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस को शुरुआती जांच में बरामद इंजनों का कनेक्शन चोरी के वाहनों से मिला है। खास बात यह है कि जांच के दौरान पुलिस को सभी 12 इंजनों से जुड़ी चोरी की एफआईआर भी मिली हैं। इसके बाद मामला महज कबाड़ के कारोबार तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि पुलिस को चोरी के वाहनों को काटने और उनके पार्ट्स को खपाने वाले संगठित रैकेट की आशंका है।
क्राइम ब्रांच ने दौलतगंज-रानीपुरा इलाके में स्थित कबाड़ की दुकान पर कार्रवाई की। तलाशी के दौरान पुलिस को बड़ी संख्या में वाहन पार्ट्स मिले। जांच आगे बढ़ने पर 12 इंजन पुलिस के हाथ लगे। पुलिस के मुताबिक, इनमें से तीन इंजन घिसे हुए हालत में मिले हैं, जबकि बाकी इंजनों की भी तकनीकी जांच की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि ये इंजन किन वाहनों के हैं और इन्हें दुकान तक किस माध्यम से लाया गया।
मामले में सबसे अहम कड़ी यह सामने आई है कि बरामद किए गए 12 इंजनों से जुड़ी चोरी की गाड़ियों की एफआईआर पुलिस को मिल गई है। यानी जिन वाहनों के इंजन दुकान से बरामद हुए हैं, उनके चोरी होने की शिकायतें पहले से पुलिस रिकॉर्ड में दर्ज हैं। अब जांच का फोकस इस बात पर है कि चोरी के वाहन कब और कहां से उठाए गए, उन्हें किसके जरिए कबाड़ दुकान तक पहुंचाया गया और वाहन काटने के बाद उनके इंजन व अन्य पार्ट्स कहां खपाए जाते थे।
पुलिस ने कार्रवाई के दौरान चोरी के वाहनों को काटने में इस्तेमाल होने वाला इलेक्ट्रिक कटर भी बरामद किया है। इस बरामदगी ने पुलिस की उस आशंका को और मजबूत किया है कि दुकान पर सिर्फ सामान्य कबाड़ का काम नहीं हो रहा था, बल्कि वाहनों को काटकर उनके अलग-अलग पार्ट्स निकालने का काम भी किया जा रहा था। अब पुलिस इलेक्ट्रिक कटर समेत अन्य सामान की भी जांच कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि कितने वाहनों को पहले इस तरह काटा गया है।
इस मामले में क्राइम ब्रांच ने अल्ताफ अंसारी और अरशद अंसारी को गिरफ्तार किया है। दोनों को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से अदालत ने दोनों आरोपियों को 5 दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया है। रिमांड के दौरान पुलिस चोरी के वाहनों की सप्लाई से लेकर उनकी कटिंग और पार्ट्स को बेचने तक की पूरी कड़ी खंगालने की तैयारी में है। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश करेगी कि इस कथित नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं।
क्राइम ब्रांच ने अब कबाड़ दुकान की जमीन और उसके मालिकाना हक से जुड़े दस्तावेजों की भी जांच शुरू कर दी है। सामने आया है कि जिस जमीन पर यह दुकान संचालित हो रही है, वह पूर्व पार्षद अंसाफ अंसारी के नाम है। इसी वजह से जांच का दायरा अब गिरफ्तार आरोपियों से आगे बढ़ गया है। पुलिस यह पता कर रही है कि दुकान का संचालन किसके की ओर से किया जा रहा था, जमीन का इस्तेमाल किस उद्देश्य से हो रहा था और वहां होने वाली गतिविधियों की जानकारी जमीन मालिक या अन्य संबंधित लोगों को थी या नहीं।
दुकान की जमीन पूर्व पार्षद के नाम होने के कारण अंसाफ अंसारी भी पुलिस की जांच के दायरे में आ गए हैं। हालांकि, फिलहाल पुलिस की कार्रवाई गिरफ्तार किए गए दोनों आरोपियों के खिलाफ है। पूर्व पार्षद की भूमिका को लेकर जांच जारी है। पुलिस दस्तावेजों, दुकान के संचालन और आरोपियों से पूछताछ के आधार पर आगे की कार्रवाई तय करेगी।
क्राइम ब्रांच अब यह पता लगाने में जुटी है कि बरामद 12 इंजन ही इस पूरे नेटवर्क की पूरी कहानी हैं या फिर चोरी के और भी वाहन काटे गए हैं। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि चोरी की गाड़ियों को इंदौर में ही काटा जाता था या उन्हें दूसरे इलाकों से यहां लाकर उनके पार्ट्स अलग किए जाते थे। इसके अलावा पुलिस बरामद इंजन के पार्ट्स, चेसिस और अन्य पहचान योग्य नंबरों की जांच कर रही है। इनकी मदद से यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि चोरी की गाड़ियों को किस तरह कबाड़ में बदलकर बाजार में खपाया जाता था।

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