रांची. झारखंड में जेपीएससी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ विधानसभा घेराव करने पहुंचे छात्रों को रोकने के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव की स्थिति बन गई. छात्रों के लगातार आगे बढ़ने और बैरिकेडिंग पार करने की कोशिश के बाद पुलिस ने लाठीचार्ज किया. इसके बाद प्रदर्शनकारी छात्रों की ओर से पुलिस की तरफ जूते-चप्पल फेंके जाने लगे. घटनाक्रम के बाद मौके पर तनाव बढ़ गया है और पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी है. इस बीच मामले को लेकर एसपी की ओर से भी बयान सामने आया है.
रांची में छात्रों का बड़ा जत्था विधानसभा की ओर बढ़ रहा है. हजारों की संख्या में प्रदर्शनकारी छात्र अपनी मांगों को लेकर आगे बढ़ रहे हैं. पुलिस की ओर से बल प्रयोग और उन्हें रोकने की कोशिश के बाद भी छात्रों का मार्च जारी है. प्रदर्शनकारी लगातार विधानसभा की ओर बढ़ते हुए नारेबाजी कर रहे हैं. मौके पर पुलिस और छात्रों के बीच तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है.
झारखंड में छात्रों के विधानसभा घेराव के दौरान स्थिति तनावपूर्ण हो गई. छात्रों और पुलिस के बीच टकराव की स्थिति बन गई. जगन्नाथ मंदिर के पास पुलिस ने प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर आंसू गैस के गोले छोड़े. पुलिस ने भीड़ को हटाने के लिए टियर गैस का इस्तेमाल किया. इसके बाद मौके पर अफरा-तफरी की स्थिति बन गई. प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज भी किया. पुलिस ने इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी है. हालात को काबू में करने के लिए बड़ी संख्या में पुलिस बल को मौके पर तैनात किया गया है. छात्र अपनी मांगों को लेकर विधानसभा घेराव के लिए आगे बढ़ रहे थे. पुलिस उन्हें आगे जाने से रोक रही थी. इसी दौरान दोनों पक्षों के बीच तनाव बढ़ गया.
जेपीएससी से जुड़ी कथित अनियमितताओं के मामले में बड़ी खबर सामने आई. झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) के पूर्व चेयरमैन एल. खियांगते को सीआईडी ने गिरफ्तार किया है. यह गिरफ्तारी 14वीं जेपीएससी परीक्षा समेत भर्ती प्रक्रिया में सामने आई कथित गड़बडिय़ों की जांच के बीच हुई है. मामले में सीआईडी की जांच लगातार आगे बढ़ रही है.
रांची में विधानसभा घेराव मार्च के दौरान पुलिस के लाठीचार्ज पर एक प्रदर्शनकारी छात्र ने इसे बर्बरतापूर्ण कार्रवाई बताया. छात्र का आरोप है कि पुलिस बैरिकेडिंग के पास प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर लाठियां बरसाईं. छात्र ने कहा कि लाठी का इस्तेमाल कमर के नीचे किया जाना चाहिए, लेकिन प्रदर्शनकारियों के सिर, हाथ, चेहरे और शरीर के अन्य हिस्सों पर भी लाठियां मारी गईं. छात्र ने इसे सरकार का दोहरा रवैया बताते हुए पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए.
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वाल्मीकि कॉर्पोरेशन घोटाला: CBI चार्जशीट में बी. नागेंद्र को बताया गया ‘मास्टरमाइंड’
कर्नाटक के वाल्मीकि डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन घोटाले को लेकर राज्य की राजनीति में एक बार फिर उफान देखने को मिल रहा है। मामले में CBI की ओर से दाखिल चार्जशीट में पूर्व मंत्री बी. नागेंद्र की भूमिका को गंभीर बताया गया है। जांच एजेंसी ने तीन अलग-अलग चार्जशीट में नागेंद्र को कथित घोटाले की साजिश में अहम भूमिका निभाने वाला बताया है।
CBI ने इस मामले में 2 जून 2026 को चार्जशीट दाखिल किए जाने को लेकर आधिकारिक प्रेस रिलीज भी जारी की थी। चार्जशीट में कथित तौर पर कहा गया है कि बी. नागेंद्र ने वाल्मीकि डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन में हुई कथित वित्तीय अनियमितताओं और आपराधिक साजिश में व्यापक और महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। जांच एजेंसी के आरोपों के मुताबिक, उनकी भूमिका केवल प्रशासनिक जिम्मेदारियों तक सीमित नहीं थी, बल्कि वह कथित साजिश के महत्वपूर्ण हिस्से में शामिल थे।
हालांकि, चार्जशीट में आरोपी बनाए जाने का अर्थ अपराध साबित होना नहीं है। किसी भी आरोपी की दोषसिद्धि अदालत में सुनवाई और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही मानी जाती है।
अब सबसे बड़ा राजनीतिक सवाल यह है कि CBI की चार्जशीट सामने आने के करीब एक महीने के भीतर ही बी. नागेंद्र को दोबारा कर्नाटक मंत्रिमंडल में जगह कैसे मिल गई?
वाल्मीकि कॉर्पोरेशन मामले के सामने आने के बाद नागेंद्र को पहले मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था। ऐसे में उनकी दोबारा कैबिनेट में वापसी को लेकर विपक्ष कांग्रेस नेतृत्व पर हमलावर है।
विपक्ष ने सवाल उठाया है कि क्या बी. नागेंद्र को किसी विशेष ‘Payment Quota’ के तहत मंत्री बनाया गया? साथ ही कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व से यह भी पूछा जा रहा है कि कर्नाटक कैबिनेट के ‘Full Meals’ का फायदा आखिर किसे मिला। इस मुद्दे पर राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे, मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार से जवाब मांगा जा रहा है।
फिलहाल, वाल्मीकि कॉर्पोरेशन घोटाला CBI की जांच और न्यायिक प्रक्रिया के दायरे में है। वहीं, नागेंद्र की दोबारा मंत्री पद पर वापसी ने कर्नाटक की राजनीति में नए सियासी सवाल खड़े कर दिए हैं।
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आयुष्मान भारत योजना पर सरकार ने 2359 अस्पताल को किया डी-एम्पैनल, कार्रवाई में 1,200 हॉस्पिटल सस्पेंड
आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB-PMJAY) में नियमों का उल्लंघन करने वाले अस्पतालों के खिलाफ सरकार ने बड़ी कार्रवाई की है. सरकार की तरफ से दो हजार से ज्यादा अस्पतालों के खिलाफ आयुष्मान भारत के तहत बड़ी कार्रवाई की गई है. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने 7 अगस्त को लोकसभा में लिखित जवाब में बताया कि योजना के तहत 2,359 अस्पतालों को पैनल से हटा दिया गया है.
लगातार शिकायतों के बाद नेशनल हेल्थ अथॉरिटी (NHA) के एंटी-फ्रॉड मैकेनिज्म को पहले से सख्त किया है. इसके अलावा सरकार की तरफ से की गई कार्रवाई में 1,200 अस्पतालों को सस्पेंड कर दिया गया है.
आयुष्मान भारत योजना में फर्जीवाड़ा करने वाले अस्पतालों पर सरकार ने अब तक का सबसे बड़ा एक्शन लिया है. आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB-PMJAY) में नियमों का उल्लंघन करने वाले 2,359 अस्पतालों के खिलाफ सरकार ने बड़ी कार्रवाई की है. सरकार ने गलत दावों और अनधिकृत बिलिंग जैसे मामलों पर कार्रवाई करते हुए 29 FIR भी दर्ज कराई हैं.
इतना ही नहीं, सरकार ने गड़बड़ी में शामिल अस्पतालों पर 328.49 करोड़ की पेनाल्टी लगाई है. सरकार की कार्रवाई के बाद ब्लैकलिस्ट या सस्पेंड कि ये गए अस्पतालों में कैशलेस इलाज की सुविधा नहीं मिलेगी. सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 31 जुलाई 2026 तक इस हाई-टेक सिस्टम ने 676.14 करोड़ रुपये का सरकारी पैसा लुटने से बचाया है.
वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान 3.75 करोड़ नए आयुष्मान कार्ड बनाए गए। इसी अवधि में योजना के तहत 2.74 करोड़ अस्पताल में भर्ती को मंजूरी दी गई.
सरकार ने फ्रॉड के मामलों में संदिग्ध क्लेम की पहचान के लिए एआई (AI) और मशीन लर्निंग जैसी तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है. एक ही मरीज के डुप्लीकेट क्लेम सामने आती है तो सिस्टम तुरंत अलर्ट जारी कर देता है. क्लेम सब्मिट होने के 24 घंटे के अंदर जांच हो जाती है.
यह खबर आम जन के लिए बेहद अहम है. इसलिए, अगर आप किसी निजी या सरकारी अस्पताल में भर्ती होने जा रहे हैं, तो पहले यह जरूर जांच लें कि वह अस्पताल वर्तमान में योजना के तहत पंजीकृत है या नहीं.


