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पति कैंसर से जूझता रहा, पत्नी ने बिना तलाक की दूसरी शादी; कोर्ट ने जारी किया गिरफ्तारी वारंट

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रतलाम से रिश्तों को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। यहां कैंसर से जूझ रहे एक युवक ने अपनी पत्नी पर कानूनी रूप से तलाक लिए बिना दूसरी शादी करने का आरोप लगाया है। मामले में कोर्ट ने प्रथम दृष्टया साक्ष्य मिलने के बाद आरोपी महिला के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिया है। राजस्व कॉलोनी निवासी आकाश जाट की मुलाकात इंस्टाग्राम के जरिए साक्षी नकुम से हुई थी। करीब छह महीने की दोस्ती के बाद दोनों ने 20 नवंबर 2022 को इंदौर के आर्य समाज मंदिर में विवाह किया। परिवार की सहमति मिलने के बाद 13 दिसंबर 2022 को रतलाम में सामाजिक रीति-रिवाजों के साथ दोबारा शादी हुई।
शादी के कुछ ही महीनों बाद आकाश की तबीयत बिगड़ने लगी। गुजरात के वडोदरा में जांच के दौरान 10 अप्रैल 2023 को उन्हें श्वासनली (Trachea) का कैंसर होने की पुष्टि हुई। आकाश का आरोप है कि बीमारी का पता चलते ही पत्नी का व्यवहार बदल गया। उसने साथ देने के बजाय दूरी बना ली और कहा, "तुम तो कल मर जाओगे, मेरा क्या होगा?"
आकाश के इलाज के दौरान साक्षी ने महिला थाने में उनके खिलाफ मारपीट की शिकायत दर्ज कराई लेकिन मेडिकल रिकॉर्ड के आधार पर पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। इसके बाद साक्षी ने फैमिली कोर्ट में तलाक की याचिका दायर कर दी। इसी बीच जबकि तलाक का मामला अदालत में लंबित था और दोनों कानूनी रूप से पति-पत्नी थे, साक्षी ने 10 जून 2024 को छतरपुर निवासी एक युवक से दूसरी शादी कर ली। इस विवाह से एक बेटी भी हुई। जब आकाश को इसकी जानकारी मिली तो उन्होंने सबूत जुटाकर अदालत का दरवाजा खटखटाया।
18 अप्रैल 2026 को फैमिली कोर्ट ने साक्षी की तलाक याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि पत्नी ने अप्रैल 2023 में घर से निकाले जाने का दावा किया था जबकि रिकॉर्ड के अनुसार नवंबर 2023 में वह अपने पिता के साथ विवाह पंजीकरण संबंधी प्रक्रिया में शामिल हुई थी। अदालत ने माना कि उपलब्ध साक्ष्य पत्नी के आरोपों का समर्थन नहीं करते।
इसके बाद आकाश ने अपने अधिवक्ता रजनीश शर्मा के माध्यम से JMFC कोर्ट में आपराधिक परिवाद दायर किया। अदालत ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 82(1) के तहत बिना वैध तलाक दूसरी शादी करने के आरोप में मामला दर्ज किया। बार-बार समन जारी होने के बावजूद साक्षी अदालत में पेश नहीं हुई। लगातार अनुपस्थिति को देखते हुए कोर्ट ने उसके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया है और 25 जुलाई 2026 को अदालत में पेश होने का निर्देश दिया है।
आकाश की मुश्किलें यहीं खत्म नहीं हुईं। कैंसर के इलाज के दौरान 19 जून 2023 को उनके पिता बंशीलाल जाट का निधन हो गया। कुछ समय बाद उनकी मां सुशीला जाट भी चल बसीं। फिलहाल आकाश अकेले रह रहे हैं और इलाज व दैनिक जरूरतों के लिए दोस्तों के सहयोग पर निर्भर हैं। उनके अधिवक्ता रजनीश शर्मा बिना किसी फीस के यह कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं।
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मंदिर निर्माण रोकने पहुंची पुलिस से झूमाझटकीः वाहनों में पथराव, 2 दर्जन से अधिक पर केस दर्ज
सतना। जिले के कोटर थाना क्षेत्र के कैमरी पहाड़ स्थित खनन लीज क्षेत्र में मंदिर निर्माण को लेकर विवाद सामने आया है। पुलिस के अनुसार, लीज क्षेत्र में निर्माण कार्य रोकने पहुंची पुलिस टीम के साथ ग्रामीणों ने अभद्रता की। इस दौरान शासकीय वाहनों में पथराव किए जाने का भी आरोप है। घटना शुक्रवार की शाम की है। इस मामले का एक वीडियो भी शनिवार की देर शाम सामने आया है। मामले में कोटर थाना पुलिस ने सात नामजद सहित दो दर्जन से अधिक लोगों के खिलाफ शासकीय कार्य में बाधा, पथराव, गाली-गलौज और अन्य धाराओं में प्रकरण दर्ज किया है।
दरअसल कैमरी पहाड़ स्थित 56 एकड़ की खदान का 50 वर्ष का खनन पट्टा गैवीनाथ माइंस एंड मिनरल्स के नाम स्वीकृत है। पुलिस के मुताबिक शुक्रवार को कुछ ग्रामीण लीज क्षेत्र के अंदर एक टीले पर मंदिर निर्माण के लिए पहुंचे थे। इसकी सूचना मिलने पर डायल-112 के साथ आरक्षक अभय सिंह मौके पर पहुंचे। मगर ग्रामीण उनसे अभद्रता करने लगे। स्थिति बेकाबू होते देख कांस्टेबल ने थाने को सूचना दी। लिहाजा अतिरिक्त पुलिस बल भी मौके पर पहुंचा। पुलिस का आरोप है कि समझाइश के दौरान कुछ लोगों ने गाली गलौच करते हुए पुलिसकर्मियों से झुमाझटकी की, जिसके बाद पुलिस दल को वहां से हटना पड़ा।
लौटने के दौरान वाहनों में पथराव किया गया। जिसका एक वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है। उधर, शनिवार को खनिज विभाग की टीम भी मौके पर पहुंची और स्वीकृत लीज क्षेत्र का सीमांकन कर ग्रामीणों से मंदिर निर्माण के लिए वैकल्पिक स्थान चुनने का आग्रह किया। हालांकि ग्रामीण उसी स्थान पर मंदिर निर्माण की मांग पर अड़े रहे। बताया जा रहा है कि इस मुद्दे को लेकर पहले भी विवाद हो चुका है।
पुलिस और प्रशासन का कहना है कि मामले की जांच जारी है। वहीं कुछ स्थानीय लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। बताया जा रहा है कि कुछ स्थानीय प्रभावशाली लोग आदिवासियों को आगे कर इस तरह का विवाद आए दिन करवा रहे है जिससे खनन कारोबारियों के सामने समस्याएं खड़ी हो रही है। पता चला है कि ये वही लोग है जो लीज स्वीकृत होने से पहले अवैध उत्खनन कर सरकारी खजाने को चोट पहुंचा रहे थे।
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एमपी कैबिनेट में यूसीसी को मंजूरी, लिव-इन रजिस्ट्रेशन अनिवार्य, आदिवासियों को रखा बाहर
भोपाल. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में भोपाल जिले के जगदीशपुर में रविवार 19 जुलाई को आयोजित मध्य प्रदेश कैबिनेट की बैठक में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक के प्रारूप को मंजूरी दे दी गई. सरकार अब इस विधेयक को 20 जुलाई से शुरू होने वाले विधानसभा के मानसून सत्र में पेश करेगी. बैठक में यूसीसी के अलावा श्रम संहिता, निजी विश्वविद्यालय संशोधन, नागरिक सुरक्षा और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस से जुड़े विधेयकों को भी स्वीकृति दी गई.
कैबिनेट बैठक के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि समान नागरिक संहिता का उद्देश्य सभी नागरिकों के लिए समान कानून लागू करना है. उन्होंने कहा कि राम और रहीम सबके लिए एक जैसा कानून होगा. हालांकि, इस कानून के दायरे से आदिवासी समुदाय को बाहर रखा गया है.
प्रस्तावित विधेयक के तहत एक माह के भीतर लिव-इन संबंधों का पंजीयन अनिवार्य किया जाएगा. ऐसे संबंधों से जन्म लेने वाली संतान को उत्तराधिकार के सभी अधिकार प्राप्त होंगे. यदि कोई व्यक्ति बिना सूचना दिए लिव-इन संबंध में रहता है, तो उसके विरुद्ध कानूनी कार्रवाई का प्रावधान भी रखा गया है.
यूसीसी के तहत विवाह से जुड़े प्रावधान सभी नागरिकों के लिए समान होंगे. मुख्यमंत्री ने कहा कि विवाह विच्छेद केवल मौखिक घोषणा से मान्य नहीं होगा, बल्कि उसे कानूनी प्रक्रिया के तहत ही मान्यता मिलेगी.
मुख्यमंत्री ने बताया कि कांग्रेस को छोड़कर अन्य सभी राजनीतिक दलों ने समान नागरिक संहिता को लेकर अपने सुझाव दिए हैं. उन्होंने कांग्रेस से भी दलगत राजनीति से ऊपर उठकर इस विधेयक का समर्थन करने की अपील की.
कैबिनेट ने प्रदेश में 71 स्वास्थ्य संस्थाओं के उन्नयन के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी. साथ ही प्रदेश की एकमात्र मेडिकल यूनिवर्सिटी का विभाजन कर दूसरी मेडिकल यूनिवर्सिटी का मुख्यालय उज्जैन में स्थापित करने का निर्णय लिया गया. वर्तमान में जबलपुर स्थित मेडिकल यूनिवर्सिटी सभी मेडिकल कॉलेजों को संबद्धता प्रदान करती है.
विधेयक के अनुसार यदि विवाह का पंजीकरण नहीं कराया जाता है, तो केवल इसी आधार पर विवाह अमान्य नहीं माना जाएगा. हालांकि, यदि रजिस्ट्रार बिना किसी ठोस लिखित कारण के आवेदन खारिज करता है, तो उसके खिलाफ दंड का प्रावधान किया गया है.
प्रस्तावित कानून में तलाक के बाद पूर्व जीवनसाथी से दोबारा विवाह के लिए निकाह हलाला जैसी अपमानजनक या नीचा दिखाने वाली शर्तों को मानने, बढ़ावा देने या किसी को इसके लिए मजबूर करने को दंडनीय आपराधिक अपराध माना गया है.
यूसीसी के तहत विवाहित या अविवाहित माता-पिता से जन्मे बच्चों, जैविक संतान, गोद लिए गए बच्चों और सरोगेसी से जन्मे बच्चों को समान कानूनी दर्जा दिया जाएगा. सभी बच्चों को कानून के तहत बराबर अधिकार प्राप्त होंगे.
विधेयक में पुत्र और पुत्री दोनों को संपत्ति के उत्तराधिकार में समान अधिकार देने का प्रावधान किया गया है. उत्तराधिकार के मामले में वैवाहिक स्थिति के आधार पर किसी भी तरह का भेदभाव नहीं किया जाएगा.
प्रस्तावित प्रावधानों के अनुसार जीवित माता और पिता दोनों को क्लास-1 उत्तराधिकारी माना जाएगा. यदि किसी संतान की मृत्यु होती है, तो उसकी संपत्ति में माता-पिता को जीवनसाथी और बच्चों के साथ बराबर का हिस्सा मिलेगा. इसके अलावा, उत्तराधिकार के मामलों में विधवा और विधुर के साथ भी समान व्यवहार सुनिश्चित किया जाएगा.

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