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मर्डर केस में अदालत का बड़ा फैसला, BJP नेता की हत्या के 6 दोषियों को फांसी; भारी जुर्माना भी लगाया गया

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कर्नाटक के कोप्पल जिले से एक बड़ी खबर सामने आई है, जहां गंगावती की अदालत ने भाजपा नेता वेंकटेश कुरुबारा की पिछले साल हुई हत्या मामले में छह दोषियों को मौत की सजा सुनाई है। पुलिस ने बताया कि जज सदानंद नागप्पा नायक ने रवि, विजय उर्फ मैलारी, धनराज, भीमा उर्फ भरत, सलीम और गंगाधर गवली को गुरुवार को सजा सुनाई। अदालत ने इस हत्याकांड को गंभीर अपराध मानते हुए सख्त रुख अपनाया है. फैसला कोप्पल जिले के प्रथम अतिरिक्त सत्र न्यायालय ने सुनाया है। मरत्युदंड के अलावा कोर्ट ने सभी दोषियों पर तीन-तीन लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है. इस फैसले की पूरे इलाके में चर्चा हो रही है.
यह मामला लंबे समय से न्यायालय में चल रहा था, जिस पर अब जाकर अंतिम निर्णय आया है. इस केस में अदालत ने सभी सबूतों और गवाहों के आधार पर आरोपियों को दोषी माना. वहीं, पहले ही छह अन्य आरोपियों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया था. कोर्ट ने अपने फैसले में साफ कहा कि अभियोजन पक्ष ने मजबूत साक्ष्य पेश किए, जिससे आरोपियों की संलिप्तता साबित हुई. इस फैसले से यह भी साफ हो गया कि न्यायालय ने हर पहलू को बारीकी से जांचने के बाद ही सजा सुनाई है.
क्या है पूरा मामला ?-दरअसल, यह हत्याकांड साल 2025 में हुआ था और इसके पीछे पुरानी दुश्मनी और गैंग वॉर को मुख्य कारण माना गया. वेंकटेश कुरुबा की हत्या एक सोची-समझी साजिश के तहत की गई थी. अभियोजन पक्ष के मुताबिक, आरोपियों के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा था, जो समय के साथ और भी हिंसक होता चला गया. इस दुश्मनी ने अंततः एक बड़ी आपराधिक घटना का रूप ले लिया.
मामले की सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि आरोपियों ने सोशल मीडिया पर वीडियो डालकर लोगों को डराने और अपना प्रभाव दिखाने की कोशिश की थी. कोर्ट ने इस पहलू को बेहद गंभीरता से लिया और इसे समाज में भय का माहौल बनाने की कोशिश बताया. न्यायालय ने कहा कि इस तरह की हरकतें कानून-व्यवस्था के लिए खतरा हैं और इन्हें सख्ती से रोका जाना जरूरी है.
इस पूरे मामले की जड़ें एक पुराने हमले से जुड़ी थीं, जिसमें वेंकटेश के एक सहयोगी को निशाना बनाया गया था. उसी घटना के बाद से दोनों पक्षों के बीच तनाव और बढ़ गया था. धीरे-धीरे यह विवाद गैंगवार में बदल गया और आखिरकार वेंकटेश कुरुबा की हत्या कर दी गई. कोर्ट के इस फैसले को कानून का कड़ा संदेश माना जा रहा है, जो यह बताता है कि संगठित अपराध और गैंग रंजिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.
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क्रूज में सुरक्षा नहीं, मौत का था इंतजाम...! 5 मिनट की लापरवाही पड़ गई कई जिंदगियों पर भारी
जबलपुर। बरगी डैम में हुआ क्रूज हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि कई सवाल छोड़ गया है। नर्मदा की तेज लहरें, अचानक बदला मौसम और सुरक्षा में चूक इन सबने मिलकर कई जिंदगियां छीन लीं। गुरुवार (30 अप्रैल) शाम पर्यटकों से भरा क्रूज नर्मदा के बैकवाटर में सैर कर रहा था। तभी अचानक मौसम बिगड़ गया। तेज हवाएं चलने लगीं, लहरें ऊंची हो गईं और देखते ही देखते क्रूज डगमगाने लगा। कुछ ही मिनटों में खुशियों का सफर चीख-पुकार में बदल गया।
दिल्ली के प्रदीप कुमार इस हादसे में बच गए, लेकिन उनकी पत्नी और 4 साल का बेटा लापता हैं। उनकी आंखों में दर्द साफ दिखता है। प्रदीप का आरोप है कि क्रूज में सुरक्षा के नाम पर कुछ भी नहीं था। न तो यात्रियों को लाइफ जैकेट पहनाई गई, न ही कोई सुरक्षा निर्देश दिए गए। हालात बिगड़ने पर क्रू मेंबर भी मदद करने के बजाय पीछे हट गए।
आमतौर पर बोट या क्रूज में बैठने से पहले लाइफ जैकेट पहनना जरूरी होता है। लेकिन यहां ऐसा नहीं हुआ। प्रदीप के मुताबिक, जब पानी अंदर आने लगा तो लोगों ने खुद लाइफ जैकेट ढूंढी और एक-दूसरे को पहनाई। सोचिए, उस वक्त क्या हाल होगा जब पहली बार ही किसी को समझ आए कि लाइफ जैकेट कहां है और कैसे पहननी है।
हादसे से पहले ही खतरे के संकेत मिल रहे थे। तेज हवाएं और ऊंची लहरें साफ बता रही थीं कि हालात खराब हैं। किनारे पर मौजूद लोगों ने भी चालक को वापस लौटने को कहा, लेकिन आरोप है कि उसने बात नहीं मानी और क्रूज को आगे बढ़ाता रहा। यही फैसला भारी पड़ गया।
विशेषज्ञों के अनुसार, पानी में हादसे के पहले 5 मिनट बेहद अहम होते हैं। लाइफ जैकेट शरीर को पानी के ऊपर बनाए रखती है और घबराहट में भी व्यक्ति को डूबने से बचाती है। इस क्रूज में कई बच्चे और बुजुर्ग सवार थे। अगर सभी ने लाइफ जैकेट पहनी होती, तो शायद कई जिंदगियां बच सकती थीं।
उठ रहे हैं ये बड़े सवाल
क्या सभी यात्रियों को लाइफ जैकेट दी गई थी?
क्या उन्हें पहनना अनिवार्य किया गया था?
क्या खराब मौसम में क्रूज चलाना सही था?
चेतावनी के बावजूद क्रूज को किनारे क्यों नहीं लाया गया?
ये सवाल सिर्फ जांच के नहीं, बल्कि उन परिवारों की पीड़ा हैं, जिन्होंने अपने अपनों को खोया है।
हादसे के बाद पुलिस, SDRF और NDRF की टीमों ने राहत-बचाव शुरू किया। अब तक 9 लोगों की मौत हो चुकी है और 23 लोगों को बचाया गया है। कई लोग अभी भी लापता हैं, जिनकी तलाश जारी है।
हादसे के बाद मध्य प्रदेश सरकार ने सख्त कदम उठाया है। पर्यटन मंत्री धर्मेंद्र लोधी ने आदेश दिया है कि अगले आदेश तक प्रदेश के सभी क्रूज बंद रहेंगे। साथ ही सभी क्रूज की सुरक्षा जांच और स्टाफ को आपातकालीन ट्रेनिंग देने के निर्देश दिए गए हैं।
हर जल यात्रा रोमांचक होती है, लेकिन सुरक्षा उससे भी ज्यादा जरूरी है। बरगी डैम हादसे ने यह साफ कर दिया कि लाइफ जैकेट कोई औपचारिकता नहीं, बल्कि जिंदगी बचाने का सबसे बड़ा सहारा है। यह हादसा एक चेतावनी है- अगर नियमों का पालन नहीं होगा, तो ऐसी त्रासदियां दोहराई जा सकती हैं। अब जिम्मेदारी व्यवस्था की है कि अगली बार कोई भी यात्री अपनी जान को लेकर असुरक्षित महसूस न करे।
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यूपी: स्मार्ट मीटर पर बवाल, सैकड़ों महिलाएं सिर पर मीटर लेकर बिजली ऑफिस पहुंचीं, फेंकी, बोलीं- ये बर्दाश्त नहीं
आगरा. उत्तर प्रदेश में स्मार्ट मीटर पर विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है, इसी क्रम में आगरा में बिजली विभाग के स्मार्ट मीटर को लेकर विरोध-प्रदर्शन किया गया. शुक्रवार को शहर से 20 किमी दूर अकोला कस्बे में सैकड़ों महिलाओं ने घरों से स्मार्ट मीटर उखाड़ लिए. सिर पर मीटर लेकर गांव के बिजली ऑफिस पहुंच गईं और वहां मीटर फेंक दिए.
स्मार्ट मीटर को लेकर लोगों में काफी गुस्सा देखने को मिला. कई लोग बोरे में भरकर स्मार्ट मीटर लेकर पहुंचे और उन्हें फेंककर विरोध जताया. इसके बाद महिलाएं और ग्रामीण धरने पर बैठ गए. बिजली विभाग के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी. सूचना पर पहुंची पुलिस ने महिलाओं और ग्रामीणों को समझा-बुझाकर शांत कराया.
ग्रामीणों का कहना है कि स्मार्ट मीटर बहुत तेज चलता है. इससे कम इस्तेमाल करने पर भी ज्यादा बिल आ रहा है. यहां तक की कई बार बिना इस्तेमाल के भी बैलेंस कम हो जाता है. लोगों का कहना है कि बैलेंस माइनस में जाते ही बिजली आपूर्ति बंद हो जाती है. रिचार्ज के बाद भी कई बार सप्लाई तुरंत बहाल नहीं होती. स्मार्ट मीटर को कई महीनों से हो रहे विरोध के बाद प्रदेश सरकार ने सरकार को नया आदेश जारी किया था. इसके मुताबिक, 1 किलोवाट तक के कनेक्शन पर 30 दिन तक और 2 किलोवाट पर 200 रुपए माइनस होने पर भी बिजली नहीं काटने की बात कही गई थी.