अमेरिका में वीजा पाने के लिए फर्जी लूट करवाने के आरोप में 11 भारतीयों को गिरफ्तार किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि इन लोगों ने फर्जी डकैती और लूट करवाई, ताकि अमेरिका का U वीजा हासिल कर सके। U-वीजा उन लोगों को मिलता है, जो किसी गंभीर अपराध के शिकार होते हैं और जांच में पुलिस की मदद करते हैं। पुलिस ने कहा कि ये सभी अमेरिका के अलग-अलग राज्यों में अवैध रूप से रह रहे थे।
पुलिस के अनुसार, मार्च 2023 में एक आरोपी रामभाई और उसके साथियों ने मैसाचुसेट्स और अन्य स्थानों में कम से कम 6 सुविधा स्टोर, शराब दुकानों और फास्ट-फूड रेस्तरां में फर्जी डकैतियों को अंजाम दिया। इन फर्जी डकैतियों का उद्देश्य दुकानों के कर्मचारियों को U वीजा के लिए आवेदन करते समय यह झूठा दावा करने में सक्षम बनाना था कि वे एक अपराध का शिकार थे। गिरफ्तार किए गए एक आरोपी को पहले ही भारत भेजा जा चुका है।
आरोपियों की पहचान जितेंद्र पटेल (39), महेश पटेल (36), संजय पटेल (45), दीपिकाबेन पटेल (40), रमेशभाई पटेल (52), अमिताबहेन पटेल (43), रोना पटेल (28), संगीताबेन पटेल (36), मिंकेश पटेल (42), सोनल पटेल (42) और मितुल पटेल (40) के तौर पर हुई है। अमेरिकी न्याय विभाग के मुताबिक, 6 आरोपियों को बोस्टन की कोर्ट में पेश किया गया। दोषी साबित होने पर इन लोगों को 5 साल तक जेल और 2.31 करोड़ रुपये का जुर्माना हो सकता है।
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1 अप्रैल से हाईवे सफर महंगा! 3000 वाला सालाना पास करवाएगा ज्यादा खर्चा
नई दिल्ली।अगर आप नेशनल हाईवे पर नियमित रूप से ड्राइव करते हैं और सालाना टोल पास का इस्तेमाल करते हैं, तो आपके लिए एक छोटी बढ़ोतरी की खबर है। 1 अप्रैल 2026 से नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने सालाना टोल पास की कीमत में इजाफा कर दिया है।
पहले जिन पर्सनल वाहनों के लिए सालाना टोल पास की कीमत 3,000 रुपए थी, अब इसे 3,075 रुपए में खरीदा जा सकेगा। यह नई दर वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए लागू होगी। ध्यान रहे कि यह पास केवल उन वाहनों के लिए है जिनमें FASTag वैध और चालू है।
NHAI के नए नियम के अनुसार, सालाना टोल पास की वैधता अब 1 साल या 200 बार टोल पार करने तक की होगी, जो भी पहले पूरा होगा वही लागू होगा। मतलब अगर कोई वाहन 200 बार टोल पार कर लेता है, तो पास की वैधता खत्म हो जाएगी, भले ही साल पूरा न हुआ हो।
यह नियम उन यात्रियों के लिए फायदेमंद है जो नियमित रूप से नेशनल हाईवे पर सफर करते हैं। इससे टोल प्रशासन के काम में भी पारदर्शिता बढ़ेगी और पास का सही इस्तेमाल सुनिश्चित होगा।
NHAI ने सभी टोल प्लाजा और संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि 1 अप्रैल 2026 से नई दरें लागू की जाएं। साथ ही, यात्रियों को भी इसके बारे में पहले से जानकारी दी जाए।
सरकार के अनुसार, टोल शुल्क से जुड़ी दरों की हर साल समीक्षा होती है। यही प्रक्रिया इस साल भी अपनाई गई और सालाना टोल पास की कीमत में हल्की बढ़ोतरी की गई।
सालाना टोल पास की कीमत में यह मामूली वृद्धि मुख्य रूप से इन्फ्रास्ट्रक्चर, रख-रखाव और प्रशासनिक खर्चों को ध्यान में रखते हुए की गई है। नेशनल हाईवे की गुणवत्ता और सुविधाओं को बनाए रखने के लिए यह कदम जरूरी था।
पास लेने के फायदे
सुविधाजनक सफर: बार-बार टोल भरने की झंझट नहीं।
समय की बचत: टोल पर खड़े होने का समय बचेगा।
सालाना स्थिरता: एक साल तक निश्चित दर पर टोल का भुगतान।
नियमित यात्रियों के लिए किफायती: अगर आप साल भर में ज्यादा टोल पार करते हैं तो यह पास बहुत फायदेमंद है।
ध्यान देने वाली बातें
नया पास 1 अप्रैल 2026 से ही मान्य होगा।
यह सिर्फ निजी वाहनों (नॉन-कमर्शियल) के लिए है।
FASTag लगे बिना पास वैध नहीं होगा।
अगर 200 क्रॉसिंग पहले पूरी हो जाए तो पास की अवधि खत्म मानी जाएगी।
भविष्य में और बदलाव?
NHAI हर साल टोल दरों की समीक्षा करता है। इसलिए यह संभावना है कि भविष्य में भी पास की कीमत और वैधता में मामूली बदलाव हो सकते हैं। यात्रियों को सलाह दी जाती है कि वे अपने सफर की योजना बनाते समय इन बदलावों को ध्यान में रखें।
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सरकार ने सोनम वांगचुक पर लगा NSA हटाया : करीब 170 दिन बाद जोधपुर जेल से होंगे रिहा
नई दिल्ली/लेह। लद्दाख के प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता और इंजीनियर सोनम वांगचुक से जुड़ी बड़ी खबर सामने आई है। केंद्र सरकार ने उनके ऊपर लगाया गया राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) हटाने का फैसला लिया है। गृह मंत्रालय के अनुसार, यह आदेश तुरंत प्रभाव से लागू किया जाएगा।
इस फैसले के साथ ही वांगचुक की करीब साढ़े पांच महीने से चली आ रही हिरासत समाप्त होने का रास्ता साफ हो गया है। वह सितंबर 2025 से जोधपुर जेल में बंद थे और अब लगभग 170 दिन बाद उनकी रिहाई संभव हो सकेगी। सरकार का कहना है कि वांगचुक ने NSA के तहत निर्धारित हिरासत अवधि का लगभग आधा समय पूरा कर लिया है, इसलिए इस कानून को हटाने का निर्णय लिया गया है।
लद्दाख प्रशासन ने 26 सितंबर 2025 को सोनम वांगचुक को राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत हिरासत में लिया था। इससे दो दिन पहले यानी 24 सितंबर 2025 को लेह में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन के दौरान हिंसा भड़क गई थी। प्रशासन ने आरोप लगाया था कि इस हिंसा को भड़काने में वांगचुक की भूमिका रही। इसी आरोप के आधार पर उन्हें NSA के तहत गिरफ्तार किया गया और बाद में उन्हें जोधपुर की जेल में शिफ्ट कर दिया गया।
राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम एक ऐसा कानून है, जो सरकार को विशेष परिस्थितियों में किसी व्यक्ति को बिना मुकदमा चलाए हिरासत में रखने की अनुमति देता है। इस कानून के तहत अगर किसी व्यक्ति से देश की सुरक्षा, सार्वजनिक व्यवस्था या राष्ट्रीय हित को खतरा माना जाता है, तो प्रशासन उसे हिरासत में ले सकता है। NSA के तहत किसी व्यक्ति को अधिकतम 12 महीने तक नजरबंद रखा जा सकता है। हालांकि, सरकार समय-समय पर समीक्षा के आधार पर इस हिरासत को समाप्त भी कर सकती है।
सितंबर 2025 में लद्दाख में लंबे समय से चल रहा आंदोलन अचानक हिंसक हो गया था। लद्दाख के लोग लंबे समय से दो प्रमुख मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे थे-
संविधान की छठी अनुसूची के तहत क्षेत्र को संवैधानिक सुरक्षा मिले
इन मांगों को लेकर सितंबर के महीने में लगातार विरोध प्रदर्शन और धरने चल रहे थे।
स्थिति को काबू में करने के लिए पुलिस और सुरक्षाबलों को सख्त कदम उठाने पड़े। प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े गए, कई जगह लाठीचार्ज भी किया गया। हिंसा में 10 से 12 पुलिसकर्मी भी घायल हो गए। हालात बिगड़ने के बाद प्रशासन ने पूरे लेह शहर में कर्फ्यू लगा दिया।
सोनम वांगचुक लद्दाख के जाने-माने इंजीनियर, शिक्षाविद और सामाजिक कार्यकर्ता हैं। वह पर्यावरण संरक्षण, शिक्षा सुधार और हिमालयी क्षेत्रों के सतत विकास को लेकर लंबे समय से काम करते रहे हैं। इसके अलावा वांगचुक को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिली है। वह लद्दाख के पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक तकनीक के मेल से विकास के मॉडल को बढ़ावा देने के लिए जाने जाते हैं।
लद्दाख में चल रहे आंदोलन में वांगचुक एक प्रमुख चेहरा बनकर सामने आए थे। उन्होंने कई बार सार्वजनिक मंचों से कहा था कि लद्दाख की संस्कृति, पर्यावरण और स्थानीय अधिकारों की रक्षा के लिए संवैधानिक सुरक्षा जरूरी है। हालांकि, प्रशासन ने आरोप लगाया कि उनके आह्वान और भाषणों के कारण प्रदर्शन का माहौल उग्र हुआ, जिसके बाद उन्हें NSA के तहत हिरासत में लिया गया।
गिरफ्तारी के बाद सोनम वांगचुक को लद्दाख से राजस्थान के जोधपुर की जेल में भेज दिया गया था। पिछले करीब साढ़े पांच महीने से वे वहीं बंद थे। इस दौरान कई सामाजिक संगठनों और राजनीतिक नेताओं ने उनकी रिहाई की मांग भी उठाई थी।
गृह मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, सरकार ने स्थिति की समीक्षा के बाद यह फैसला लिया है। अधिकारियों का कहना है कि वांगचुक ने NSA के तहत निर्धारित हिरासत अवधि का लगभग आधा हिस्सा पूरा कर लिया है और वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए इस कानून को हटाने का निर्णय लिया गया है।
NSA हटाए जाने के बाद वांगचुक की रिहाई की प्रक्रिया जल्द पूरी की जा सकती है। हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि उनके खिलाफ अन्य कानूनी मामलों की स्थिति क्या होगी और रिहाई के बाद उन्हें किन शर्तों का पालन करना होगा।





