This website uses cookies to ensure you get the best experience on our website.

30 से ज्यादा स्कूलों को बम से उड़ाने की धमकी, हाई अलर्ट पर पुलिस

User Rating: 3 / 5

Star ActiveStar ActiveStar ActiveStar InactiveStar Inactive
 

गुजरात में सोमवार की सुबह उस वक्त अफरा-तफरी मच गई जब अहमदाबाद और वडोदरा सहित राज्य के 30 से अधिक स्कूलों को बम से उड़ाने की धमकी भरा ईमेल मिला। इस धमकी के बाद पुलिस प्रशासन और अभिभावकों में हड़कंप मच गया। ईमेल में न केवल विस्फोट करने की बात कही गई, बल्कि गुजरात को 'खालिस्तान' बनाने की आपत्तिजनक चेतावनी भी दी गई है।
इन प्रमुख शिक्षण संस्थानों को मिला ईमेल
धमकी भरे संदेशों की चपेट में राज्य के कई प्रतिष्ठित स्कूल और विश्वविद्यालय आए हैं:
अहमदाबाद: मकरबा स्थित डीएवी इंटरनेशनल स्कूल, वस्त्रापुर का एशिया स्कूल, सैटेलाइट क्षेत्र का ए-वन स्कूल और प्रसिद्ध निरमा विश्वविद्यालय को ईमेल भेजे गए।
वडोदरा: यहां डीआर अमीन, उर्मी, नालंदा, बड़ौदा हाई स्कूल (बागीखाना), जीवन साधना, नवयुग और शानन स्कूल जैसे संस्थानों को निशाना बनाया गया।
पुलिस और बम निरोधक दस्ते की त्वरित कार्रवाई
धमकी की सूचना मिलते ही गुजरात पुलिस अलर्ट मोड पर आ गई। बम निरोधक दस्ता (BDDS), खोजी कुत्तों की टीम (Dog Squad) और दमकल विभाग की टीमें तुरंत चिन्हित स्कूलों में पहुंचीं।
सर्च ऑपरेशन: पुलिस ने सघन तलाशी अभियान चलाकर पूरे परिसर की जांच की।
निकासी: एहतियात के तौर पर वडोदरा के कई स्कूलों को तुरंत खाली कराया गया और बच्चों को उनके घर भेज दिया गया।
हॉस्टल खाली: उर्मी स्कूल के हॉस्टल में रह रहे छात्रों को भी सुरक्षा के मद्देनजर बाहर निकाला गया।
यह भी पढ़ें- 125 साल बाद ब्रिटिश साये से मुक्त हुआ सत्ता का गलियारा, PM मोदी आज करेंगे नए पीएमओ ‘सेवा तीर्थ’ का उद्घाटन
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईमेल में लिखा था, "गुजरात को खालिस्तान बना देंगे और स्कूल में विस्फोट होगा।" इस संदेश के राजनीतिक और अलगाववादी तार जुड़ने के कारण साइबर सेल और खुफिया एजेंसियां सक्रिय हो गई हैं। पुलिस ईमेल के आईपी एड्रेस (IP Address) को ट्रेस कर भेजने वाले का पता लगाने की कोशिश कर रही है।
हमने सभी स्कूलों की सुरक्षा जांच की है और फिलहाल किसी भी संदिग्ध वस्तु के मिलने की पुष्टि नहीं हुई है। अभिभावकों से अपील है कि वे घबराएं नहीं, पुलिस स्थिति पर पूरी नजर रखे हुए है। — स्थानीय पुलिस प्रशासन
सुबह-सुबह स्कूलों से छुट्टी की खबर पाकर बड़ी संख्या में अभिभावक स्कूलों के बाहर जमा हो गए। कई स्कूलों ने सुरक्षा कारणों से आज की कक्षाएं स्थगित कर दी हैं। फिलहाल जांच जारी है और स्कूलों के आसपास सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है।
------------------------------------------
सुप्रीम कोर्ट में फिर सबरीमाला विवाद : 9 जजों की बेंच सुनेगी दलीलें, 7 अप्रैल से महिलाओं के मंदिर प्रवेश पर सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट की 9-न्यायाधीशों की बेंच 7 अप्रैल से धार्मिक स्थलों पर महिलाओं के भेदभाव के मामलों की सुनवाई शुरू करेगी। इस मामले में मुख्य रूप से केरल के सबरीमाला मंदिर से जुड़े मुद्दों पर ध्यान दिया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षों को 14 मार्च तक अपनी लिखित दलीलें जमा करने का आदेश दिया है।
बेंच में शामिल न्यायाधीश
सुनवाई में शामिल हैं- मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची, जस्टिस विपुल एम पंचोली, एमिकस क्यूरी और नोडल काउंसल सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने वरिष्ठ वकील परमेश्वर और शिवम सिंह को एमिकस क्यूरी नियुक्त किया है, ताकि न्यायालय को मार्गदर्शन और पक्षों की दलीलों का विश्लेषण मिल सके।
नोडल काउंसल-
सबरीमाला फैसले की समीक्षा का समर्थन करने वालों के लिए - कृष्ण कुमार सिंह
फैसले का विरोध करने वालों के लिए - शश्वती परी
सुनवाई 22 अप्रैल तक पूरी हो जाएगी।
क्यों फिर उठा सबरीमाला मामला?
यह मामला इसलिए फिर सामने आया है क्योंकि सुप्रीम कोर्ट 2018 के सबरीमाला फैसले से जुड़े रिव्यू और रिट याचिकाओं पर विचार करने वाली है। 2018 के फैसले में हर उम्र की महिलाओं को भगवान अयप्पा के मंदिर में प्रवेश की अनुमति दी गई थी।
सुप्रीम कोर्ट के प्रमुख सवाल
सुप्रीम कोर्ट ने धार्मिक स्वतंत्रता और संविधान के अनुच्छेद 25 एवं 26 के दायरे पर सात मुख्य सवाल तैयार किए हैं।
मुख्य बिंदु-
क्या धार्मिक समूह या संप्रदाय की प्रथाओं को किसी अन्य व्यक्ति द्वारा जनहित याचिका (PIL) के जरिए चुनौती दी जा सकती है।
सबरीमाला के अलावा, मस्जिदों और दरगाहों में मुस्लिम महिलाओं और पारसी अगियारी में महिलाओं के प्रवेश से जुड़े मामले भी बड़े बेंच के सामने भेजे गए हैं।
सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई से पहले राजनीतिक हलचल बढ़ गई है।
विपक्ष का रुख-
नेता प्रतिपक्ष वी डी सतीशन ने पूछा कि क्या सरकार पुराने हलफनामे पर ही खड़ी है।
कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने कहा कि केरल सरकार को साफ रुख दिखाना चाहिए, वरना यह जनता के साथ धोखा होगा।
सत्तारूढ़ दल का रुख-
CPI(M) के राज्य सचिव एम वी गोविंदन ने कहा कि सरकार अपना पक्ष अदालत में रखेगी, सार्वजनिक करने की जरूरत नहीं है।
वरिष्ठ नेता ए विजयराघवन ने कहा कि मामला जटिल है और सभी पक्षों की सुनवाई के बाद ही फैसला लिया जाएगा।
-------------------------
पश्चिम बंगाल में EC का बड़ा एक्शन : 7 अधिकारी सस्पेंड, SIR प्रक्रिया में लापरवाही बरतने का आरोप
नई दिल्ली/कोलकाता। वोटर लिस्ट जैसी संवेदनशील प्रक्रिया में जरा-सी लापरवाही भी लोकतंत्र की नींव को हिला सकती है। पश्चिम बंगाल में ठीक ऐसा ही हुआ और इस बार चुनाव आयोग ने कोई नरमी नहीं दिखाई। स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया में गंभीर गड़बड़ियों के आरोपों के बाद आयोग ने सात अधिकारियों को तत्काल सस्पेंड कर दिया। इसके साथ ही आयोग ने बता दिया है कि, चुनावी जिम्मेदारियों में चूक अब बर्दाश्त नहीं होगी।
आयोग का कहना है कि, इन अधिकारियों के खिलाफ गंभीर लापरवाही, कर्तव्य की अवहेलना और कानूनी शक्तियों के दुरुपयोग के ठोस सबूत सामने आए हैं।
चुनाव आयोग ने राज्य की मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती को निर्देश दिया है कि, संबंधित कैडर-कंट्रोलिंग अथॉरिटीज बिना किसी देरी के इन अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करें। साथ ही, की गई कार्रवाई की जानकारी तुरंत आयोग को देने के भी निर्देश दिए गए हैं।
SIR प्रक्रिया में क्या थी गड़बड़ी?
स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) का उद्देश्य मतदाता सूची को पूरी तरह शुद्ध और अपडेट रखना होता है। लेकिन आयोग को शिकायतें मिली थीं कि,
BLO और AERO स्तर पर मनमानी की गई।
पात्र मतदाताओं के नाम जोड़ने में लापरवाही बरती गई।
मृत या स्थानांतरित मतदाताओं के नाम हटाने में नियमों की अनदेखी हुई।
कुछ मामलों में कानूनी अधिकारों का गलत इस्तेमाल किया गया।
जांच में ये आरोप सही पाए गए, जिसके बाद निलंबन का फैसला लिया गया।
कौन हैं सस्पेंड किए गए अधिकारी?
निलंबित अधिकारियों की सूची इस प्रकार है-
डॉ. सेफाउर रहमान - सहायक निदेशक, कृषि विभाग एवं AERO, 56-समसेरगंज विधानसभा क्षेत्र, मुर्शिदाबाद
नितीश दास - राजस्व अधिकारी एवं AERO, 55-फरक्का विधानसभा क्षेत्र
डालिया रे चौधरी - महिला विकास अधिकारी एवं AERO, 16-मयनागुड़ी विधानसभा क्षेत्र
एसके मुर्शिद आलम - सहायक कृषि निदेशक (ADA) एवं AERO, 57-सूती विधानसभा क्षेत्र
सत्यजीत दास - संयुक्त BDO एवं AERO, 139-कैनिंग पूर्व विधानसभा क्षेत्र
जॉयदीप कुंडू - FEO एवं AERO, 139-कैनिंग पूर्व विधानसभा क्षेत्र
देबाशीष बिस्वास - संयुक्त BDO एवं AERO, 229-देबरा विधानसभा क्षेत्र
ये सभी अधिकारी चुनाव आयोग के लिए Assistant Electoral Registration Officer (AERO) के रूप में काम कर रहे थे।की
बूथ लेवल ऑफिसर (BLO), इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (ERO) और AERO राज्य सरकार के कर्मचारी होते हैं, लेकिन चुनावी प्रक्रिया के दौरान वे चुनाव आयोग के निर्देशों पर डेप्युटेशन में काम करते हैं। ऐसे में आयोग ने साफ किया कि जिम्मेदारी तय होगी और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।
चुनाव आयोग ने दो टूक कहा है कि, SIR प्रक्रिया में किसी भी तरह की मनमानी, लापरवाही या नियमों के उल्लंघन को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। आयोग ने संकेत दिया है कि भविष्य में भी ऐसी शिकायतें मिलने पर इसी तरह की सख्त कार्रवाई की जाएगी। यह कदम निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करने की दिशा में एक मजबूत चेतावनी माना जा रहा है।

© 2017 Your Company. All Rights Reserved. Designed By WarpTheme