भोपाल एमपी पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स एसटीएफ (STF) ने अवैध शस्त्रों के विरुद्ध बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस ने कई अत्याधुनिक पिस्तौलें बरामद की हैं। हथियारों के साथ दो आरोपियों को भी पकड़ा है। STF के अधिकारियों के अनुसार प्रकरण में अवैध शस्त्रों की आपूर्ति, नेटवर्क तथा इनके संभावित उपयोग से जुड़े सभी पहलुओं की गहराई से जांच की जा रही है। मामले में आगे की वैधानिक कार्रवाई चल रही है।
मध्यप्रदेश पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) को अवैध शस्त्रों के विरुद्ध कार्यवाही में बड़ी सफलता प्राप्त हुई है। एसटीएफ इंदौर की दो विशेष टीमों ने संयुक्त रूप से कार्रवाई कर 5 अत्याधुनिक पिस्तौलें मय मैगजीन जब्त की हैं। दो आरोपियों को गिरफ्तार भी किया है।
STF इंदौर के उप पुलिस अधीक्षक राजेश सिंह चौहान के निर्देशन में दो विशेष टीमें गठित की गई थीं। इनमें प्रथम टीम में इंस्पेक्टर रमेश चौहान, प्रधान आरक्षक भूपेन्द्र गुप्ता एवं आरक्षक विवेक द्विवेदी शामिल थे जबकि दूसरी टीम में प्रधान आरक्षक आदर्श दीक्षित, आरक्षक देवराज बघेल एवं आरक्षक देवेन्द्र सिंह को सम्मिलित किया गया था।
अधिकारियों ने बताया कि STF को प्राप्त विश्वसनीय सूचना के आधार पर अवैध शस्त्रों की धरपकड़ के लिए दोनों टीमों को कार्रवाई के लिए रवाना किया गया। सूचना के अनुसार बताए गए स्थान पर पहुंचकर टीमों द्वारा घेराबंदी कर दो संदिग्ध व्यक्तियों को रोका गया। विधिवत तलाशी के दौरान उनके कब्जे से 5 अत्याधुनिक पिस्तौलें एवं मैगजीन बरामद की गईं।
पुलिस ने दोनों आरोपियों से सख्ती से पूछताछ की। इस दौरान पता चला कि दोनों, जिला खरगोन के थाना भिकनगांव के ग्राम बोराड़िया के रहनेवाले हैं। दोनों आरोपी किसी भी प्रकार का वैध शस्त्र लाइसेंस प्रस्तुत नहीं कर सके। इस पर सभी हथियारों को जब्त करते हुए नियमानुसार कार्रवाई की गई।
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गौमांस मिलने का मामला: नगर निगम ने 8 कर्मचारियों को किया सस्पेंड, पुलिस ने फाइलें की जब्त
भोपाल। राजधानी भोपाल से बड़ी खबर सामने आई है, जहां नगर निगम के संचालित आधुनिक स्लॉटर हाउस में गौमांस मिलने की शिकायत के बाद पुलिस और प्रशासन की जांच में कई चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। जानकारी के अनुसार, भोपाल के जहांगीराबाद इलाके स्थित इस स्लॉटर हाउस से जुड़े कई कर्मचारियों पर लापरवाही और अवैध गतिविधियों में संलिप्तता के आरोप लगे हैं। नगर निगम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए स्लॉटर हाउस में तैनात 8 कर्मचारियों को सस्पेंड कर दिया है।
सस्पेंड किए गए कर्मचारियों में शामिल हैं
वसीम खान
सलीम खान
राजा खान
शेख यूसुफ
वहीद खान
मोहम्मद फैयाज खान
ईसा मोहम्मद
अब्दुल रहमान
इसके अलावा, यूसुफ खान, अब्दुल हकीम और मोहम्मद रफीक को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। पुलिस ने इस मामले में नगर निगम से स्लॉटर हाउस से संबंधित महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त कर लिए हैं। इनमें वर्ष 2014-15 से अब तक के सभी टेंडर, अनुमति पत्र और अन्य रिकॉर्ड शामिल हैं।
प्रभारी सहायक यंत्री सौरभ सूद सहित दो अन्य कर्मचारियों से लगातार पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां इस बात की तह तक पहुंचने की कोशिश कर रही हैं कि आखिर इतने लंबे समय से यह अवैध गतिविधि कैसे चल रही थी।
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ई-चालान के नाम से आई एपीके फाइल, फिर बैंक अकाउंट से निकल गए 9.42 लाख रुपए
ग्वालियर। ई-चालान के नाम पर साइबर ठगी की घटनाएं लगातार हो रही हैं। अब मुरार के रहने वाले प्रापर्टी डील के साथ 9.42 लाख रुपए की ठगी हुई है। प्रापर्टी डीलर के वाट्स एप पर ई-चालान के नाम से एपीके फाइल आई। इसे उन्होंने पीडीएफ समझकर डाउनलोड कर लिया। इसके बाद उनका मोबाइल करीब आठ मिनट के लिए बंद हो गया। फिर मोबाइल चालू हो गया। शातिर हैकर ने मोबाइल का सारा एक्सेस ले लिया।
फिर मोबाइल हैक होने के 20 दिन बाद खाते से रुपए निकाल लिए। तीन बार में नौ लाख 42 हजार 182 रुपए की ठगी उनके साथ हुई है। इस मामले में उन्होंने साइबर हेल्पलाइन शिकायत की। जिसके बाद ई-जीरो एफआइआर दर्ज की गई है। मुरार थाने में एफआइआर दर्ज हुई है।
मुरार थाना क्षेत्र के अंतर्गत बड़ागांव क्षेत्र में रहने वाले विजय पुत्र लक्ष्मीनारायण यादव प्रापर्टी कारोबारी हैं। वह व्यापार में पैसों के लेनदेन के लिए पत्नी के बैंक खाते का इस्तेमाल करते हैं। पत्नी के बैंक खाते में मोबाइल नंबर विजय का ही लिंक है। 25 दिसंबर को ई-चालान नाम से एपीके फाइल आई। उन्होंने इसे डाउनलोड कर लिया। फिर 16 जनवरी को उनका मोबाइल दोबारा बंद हुआ और पांच मिनट में ही तीन बार में नौ लाख 42 हजार 182 रुपए निकल गए। फिर उन्होंने साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत की।
पहली बार- 4.49 लाख रुपए
दूसरी बार- तीन लाख 45 हजार 522 रुपए
तीसरी बार- एक लाख 50 हजार 660 रुपए
ई-चालान की फाइल नहीं आती, सिर्फ एसएमएस आता है- सावनधान रहें
स्मार्ट सिटी के आइटीएमएस द्वारा जो ई-चालान किए जाते हैं, उनकी सूचना एसएमएस के माध्यम से भेजी जाती है। साथ ही वहां से फोन भी आता है। कभी भी एपीके फाइल नहीं भेजी जाती। इसलिए सावधान रहने की आवश्यकता है। यह तरीका अपनाकर ठग अब सबसे ज्यादा ठगी कर रहे हैं।
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