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स्वामी चैतन्यानंद पर 15 छात्राओं ने लगाया यौन उत्पीड़न का आरोप, दिल्ली से फरार हुआ आरोपी

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दिल्ली के वसंतकुंज में आश्रम चलाने वाले स्वामी चैतन्यानंद सरस्वती उर्फ पार्थसारथी पर गंभीर आरोप लगे हैं। उन पर करीब 15 छात्राओं से छेड़छाड़ का मामला दर्ज किया गया है। शिकायत के बाद वसंतकुंज (नॉर्थ) पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। आरोपी फिलहाल फरार है और उसकी तलाश जारी है।
पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी के पास वॉल्वो कार थी, जिस पर फर्जी राजनयिक नंबर प्लेट (39 UN 1) लगी हुई थी। पुलिस ने कार को जब्त कर लिया है। वहीं, मामला सामने आने के बाद आश्रम प्रशासन ने आरोपी को पद से हटा दिया है।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, आरोपी की आखिरी लोकेशन आगरा में ट्रेस की गई है। दिल्ली पुलिस अब यूपी पुलिस की मदद से उसकी तलाश कर रही है। दूसरी ओर, पीड़ित छात्राओं के बयान दर्ज कर लिए गए हैं।
शिकायत के अनुसार, आश्रम से जुड़े शारदा इंस्टीट्यूट ऑफ इंडियन मैनेजमेंट में पढ़ रही EWS स्कॉलरशिप वाली छात्राओं ने आरोप लगाया कि स्वामी चैतन्यानंद सरस्वती ने उनका यौन उत्पीड़न किया। ये छात्राएं PGDM (पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन मैनेजमेंट) की पढ़ाई कर रही थीं।
पुलिस पूछताछ में अब तक 32 छात्राओं के बयान दर्ज किए गए हैं। इनमें से 17 छात्राओं ने बताया कि आरोपी स्वामी ने उनसे गाली-गलौज की, अश्लील मैसेज भेजे और जबरन संपर्क बनाने की कोशिश की। छात्राओं ने यह भी कहा कि कॉलेज की कुछ महिला फैकल्टी और एडमिनिस्ट्रेटर ने उन पर स्वामी की मांगें मानने का दबाव बनाया।
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मोदी कैबिनेट का निर्णय : रेलवे कर्मियों को बोनस, बिहार के लिए 6 हजार करोड़ की परियोजनाओं को मंजूरी
नई दिल्ली. केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को रेलवे कर्मचारियों के लिए 1,866 करोड़ रुपये के उत्पादकता-आधारित बोनस (पीएलबी) को मंजूरी दे दी. इससे 10.90 लाख कर्मचारियों को उनके अच्छे प्रदर्शन के लिए लाभ मिलेगा. सूचना और प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार को कैबिनेट के इस फैसले की जानकारी दी.
केंद्रीय कैबिनेट ने बिहार के बख्तियारपुर-राजगीर और झारखंड के तिलैया के बीच 104 किलोमीटर की रेल दोहरीकरण परियोजना को भी मंजूरी दी है. इस पर करीब 2,192 करोड़ रुपये की लागत आएगी. केंद्रीय कैबिनेट ने बिहार के लिए लगभग छह हजार करोड़ रुपये की योजनाओं को मंजूरी दी है.
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि यह बोनस उनके 78 दिनों के वेतन के बराबर है. हर साल दुर्गा पूजा/दशहरा की छुट्टियों से पहले पात्र रेल कर्मचारियों को पीएलबी का भुगतान किया जाता है. पिछले साल मोदी सरकार ने रेल कर्मचारियों के लिए 2,029 करोड़ रुपये के बोनस को मंज़ूरी दी थी. इससे 11,72,240 कर्मचारियों को लाभ हुआ था.
एक पात्र रेल कर्मचारी को 78 दिनों के लिए अधिकतम देय राशि 17,951 रुपये है. यह राशि कई प्रकार के रेल कर्मचारियों को दी जाएगी. इनमें ट्रैक मेंटेनर, लोकोमोटिव पायलट, ट्रेन मैनेजर (गार्ड), स्टेशन मास्टर, सुपरवाइजर, तकनीशियन, तकनीशियन हेल्पर, पॉइंट्समैन, मंत्रालयिक कर्मचारी और अन्य ग्रुप 'सी' कर्मचारी शामिल हैं. सरकार ने कहा, वर्ष 2024-25 में रेलवे का प्रदर्शन बहुत अच्छा रहा. रेलवे ने रिकॉर्ड 1614.90 मिलियन टन माल ढुलाई की और लगभग 7.3 बिलियन यात्रियों को ढोया. वैष्णव ने बताया कि केंद्रीय मंत्री ने नेशनल शिप बिल्डिंग मिशन को भी मंजूरी दी है.
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को भारत के जहाज निर्माण और समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के लिए 69,725 करोड़ रुपये के व्यापक पैकेज को भी मंजूरी दी. यह मिशन घरेलू क्षमता को मजबूत करने, दीर्घकालिक वित्तपोषण में सुधार करने, ग्रीनफील्ड और ब्राउनफील्ड शिपयार्ड विकास को बढ़ावा देने, तकनीकी क्षमताओं और कौशल को बढ़ाने तथा मजबूत समुद्री बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए कानूनी, कराधान और नीतिगत सुधारों को लागू करने के लिए बनाया गया है.
सूचना व प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल द्वारा लिए गए निर्णयों की जानकारी देते हुए यह बात कही. इस पैकेज के तहत, जहाज निर्माण वित्तीय सहायता योजना (एसबीएफएएस) को 24,736 करोड़ रुपये की कुल राशि के साथ 31 मार्च 2036 तक बढ़ाया जाएगा. इस योजना का उद्देश्य भारत में जहाज निर्माण को प्रोत्साहित करना है और इसमें 4,001 करोड़ रुपये के आवंटन के साथ एक शिपब्रेकिंग क्रेडिट नोट भी शामिल है. सभी पहलों के कार्यान्वयन की निगरानी के लिए एक राष्ट्रीय जहाज निर्माण मिशन भी स्थापित किया जाएगा. इसके अलावे, इस क्षेत्र के लिए दीर्घकालिक वित्तपोषण उपलब्ध कराने हेतु 25,000 करोड़ रुपये की राशि के साथ समुद्री विकास कोष (एमडीएफ) को मंजूरी दी गई है. जहाज निर्माण विकास योजना का बजटीय परिव्यय 19,989 करोड़ रुपये है.
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लद्दाख में बवाल- प्रदर्शनकारियों ने BJP ऑफिस में लगाई आग, लेह में सड़कों पर उतरे हजारों छात्र
लेह. लद्दाख: लेह-लद्दाख की शांत वादियों में आज 24 सितम्बर बुधवार को माहौल गरमा गया. यहां हज़ारों की संख्या में छात्र और स्थानीय लोग अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर उतर आए, जिसके बाद उनकी पुलिस से झड़प हो गई. इस दौरान जमकर हंगामा हुआ, पत्थरबाज़ी हुई और गाडिय़ों में आग भी लगा दी गई.
दरअसल ये कहानी शुरू होती है मशहूर शिक्षाविद और पर्यावरणविद सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल से. सोनम वांगचुक लेह-लद्दाख के लोगों के अधिकारों के लिए लंबे समय से आवाज़ उठा रहे हैं और इसी सिलसिले में वे भूख हड़ताल पर बैठे हैं. उनके समर्थन में ही बुधवार को एक बड़ी रैली निकाली गई, जिसमें ज़्यादातर छात्र शामिल थे. जब ये रैली आगे बढ़ रही थी, तो प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच टकराव हो गया. प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर पत्थर फेंके और आरोप है कि उन्होंने सीआरपीएफ की एक गाड़ी समेत कई गाडिय़ों में आग लगा दी. भीड़ को काबू में करने के लिए पुलिस को भी लाठीचार्ज करना पड़ा और आंसू गैस के गोले छोडऩे पड़े. विरोध प्रदर्शन के दौरान लेह में भाजपा कार्यालय में आग लगा दी गई.
आपको याद होगा कि 5 अगस्त 2019 को सरकार ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाकर उसे दो केंद्रशासित प्रदेशों में बांट दिया था- जम्मू-कश्मीर और लद्दाख. तब लद्दाख के लोगों को उम्मीद थी कि इससे उनका विकास होगा. लेकिन अब उन्हें डर है कि अपनी ज़मीन, पहचान और संस्कृति खो देंगे.
लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा मिले: वे चाहते हैं कि लद्दाख सिर्फ केंद्र के अधीन न रहे, बल्कि उसका अपना मुख्यमंत्री और अपनी विधानसभा हो, जैसे दूसरे राज्यों में होता है.
संविधान की छठी अनुसूची में शामिल हो: यह एक विशेष संवैधानिक दर्जा है जो आदिवासी क्षेत्रों की ज़मीन और संस्कृति की रक्षा करता है. इससे बाहरी लोग आसानी से वहां ज़मीन नहीं खरीद पाएंगे.
जनजातियों को आदिवासी दजार्: वे चाहते हैं कि लद्दाख की जनजातियों को आधिकारिक तौर पर आदिवासी का दर्जा मिले ताकि उन्हें सरकारी योजनाओं और आरक्षण का लाभ मिल सके. फिलहाल, प्रशासन का कहना है कि स्थिति अब नियंत्रण में है. लेकिन इस घटना ने एक बार फिर लद्दाख के लोगों की चिंताओं और मांगों को पूरे देश के सामने लाकर रख दिया है.