ग्वालियर। मध्यप्रदेश के ग्वालियर में हेल्थ विभाग में लापरवाही पर बड़ी कार्रवाई हुई है। कलेक्टर ने लापरवाही पर बड़ा एक्शन लेते हुए 06 कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर को सेवा से बर्खास्त कर दिया है। इन पर दायित्वों का निर्वहन नहीं करने पर बर्खास्तगी की गाज गिरी है। इसी तरह 02 सीएचओ के वेतन काटने के भी निर्देश दिए है।
कलेक्टर रुचिका चौहान ने जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में ये निर्देश दिए हैं। कलेक्टर का सख्त निर्देश है कि-“स्वास्थ्य सुविधाओं के क्रियान्वयन में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जायेगी”।
इन कम्युनिटी हेल्थ ऑफीसर के विरूद्ध हुई कार्रवाई
शशिकला कुमारी, घरसोंदी
दीपक सिंह तोमर ,नौगांव
के पी राणा ,देवरा
शिवेन्द्र सिंह तोमर ,गढ़रौली,
विकेन्द्र सिंह ,गिजौर्रा
अनुपमा यादव ,पार
इसके वेतन काटने के निर्देश
उपदेश राजौरिया ,छोटी अकबई
कनूप्रिया आहूजा ,गिरवई
---------------------------
MP के 250 स्कूलों की मान्यता रद्द होने के बाद बच्चों का दूसरे स्कूल में कराया जाएगा एडमिशन
भोपाल। प्रदेश के 250 निजी स्कूलों की मान्यता समाप्त कर दी गई है। इन स्कूलों में अध्ययनरत करीब 25 हजार विद्यार्थियों को नजदीक के सरकारी स्कूलों में प्रवेश का विकल्प दिया गया है। लोक शिक्षण संचालनालय (डीपीआइ) ने सभी जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) को इस संबंध में व्यापक दिशा-निर्देश जारी किए हैं। कहा गया कि ऐसे विद्यार्थियों को एक सप्ताह के भीतर दूसरे स्कूल में प्रवेश दिलाया जाए।
जिन स्कूलों की मान्यता समाप्त हुई है उनमें राजधानी भोपाल के ही करीब 12 स्कूल हैं। इनमें दर्ज बच्चों के एडमिशन अवैध हो गए हैं। अब बच्चों की आगे की पढ़ाई पर संकट है। इस कारण अब डीईओ की जिम्मेदारी होगी कि इन स्कूलों में दर्ज बच्चों को नजदीक के स्कूलों में प्रवेश दिलाएं। यह आदेश सत्र शुरू होने के चार माह बाद हुए।
बता दें, कि प्रदेश के 350 निजी स्कूलों की मान्यता संबंधी विवाद की अपील शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह के पास पहुंची थी। उन्होंने 250 स्कूलों की अपील को खारिज कर दिया। ये स्कूल जमीन संबंधी दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर पाए थे। कुछ स्कूलों के पास जमीन नहीं थी तो कुछ के पास पर्याप्त जमीन और रजिस्ट्री के कागज नहीं थे। अपील में जाने वाले 50 स्कूलों की मान्यता का नवीनीकरण हुआ वहीं 50 स्कूलों का मामला अभी भी लंबित है।
राजधानी के अंकुर हायर सेकेंडरी स्कूल, जवाहर चौक स्थित सेवन हिल्स, सर्वधर्म कोलार स्थित प्रीति हायर सेकेंडरी स्कूल, कोलार स्थित राजपुष्पा, पार्थ, ज्ञान कृष्णा समेत अन्य स्कूल शामिल है। इन स्कूलों में मान्यता समाप्त करने का कारण जमीन नहीं होना बताया गया है। इन स्कूलों में करीब दो ढाई हजार विद्यार्थी हैं।
जिला शिक्षा अधिकारी एनके अहिरवार का कहना है कि राजधानी के करीब 12 स्कूल हैं, जिनकी मान्यता समाप्त की गई है। इसमें कुछ बड़े स्कूल भी हैं, जिनके पास जमीन नहीं था और वे वर्षों से संचालित हो रहे थे। इन स्कूलों के करीब 2500 विद्यार्थियों को पास के सरकारी स्कूल में प्रवेश दिलाया जाएगा।
----------------------------------
IAS मंजूषा राय के घर पर जेसीबी से तोड़फोड़ : 40 गुंडों ने बाउंड्रीवॉल और CCTV कैमरे तोड़े
भोपाल। राजधानी भोपाल के दानिश कुंज कॉलोनी में हड़कंप मच गया। यहां शिक्षा विभाग में उप सचिव के पद पर तैनात आईएएस अधिकारी मंजूषा राय के घर पर जेसीबी लेकर करीब 40 लोग पहुंच गए और मकान की बाउंड्रीवॉल व CCTV कैमरों को तोड़ना शुरू कर दिया। इस पूरे मामले को लेकर अफसर ने प्रशासन से शिकायत की है और न्याय की गुहार लगाई है। घटना ने पूरे प्रशासनिक महकमे को भी चौंका दिया है।
आईएएस मंजूषा राय के मुताबिक, शुक्रवार को करीब 40 लोग उनके घर के बाहर जमा हो गए और जेसीबी लेकर जबरन घर की बाउंड्रीवॉल तोड़ने लगे। उन्होंने कहा कि, अगर प्रॉपर्टी को लेकर कोई विवाद है, तो सिविल कोर्ट में हल निकालो, लेकिन इस तरह की गुंडागर्दी बर्दाश्त नहीं की जा सकती। गुंडों ने CCTV कैमरे भी जेसीबी से तोड़ डाले ताकि उनके चेहरे रिकॉर्ड न हो सकें।
जानकारी के अनुसार, विवाद 1800 स्क्वायर फीट के उस मकान से जुड़ा है, जिसे आईएएस अफसर ने वर्ष 2010 में 41 लाख रुपये में खरीदा था। यह सौदा रंजना अहमद से हुआ था और सभी भुगतान बैंक खाते से किए गए थे। लेकिन, रंजना की मृत्यु के बाद उनके बेटे रिदित अरोड़ा (पहले सईद फरीद अहमद) ने उसी संपत्ति को किसी मोना बटेजा नामक महिला को भी बेच दिया। 10 जून 2025 को इस जमीन की रजिस्ट्री भी कर दी गई, जिसकी जानकारी मंजूषा राय को नहीं थी।
आईएएस मंजूषा राय ने बताया कि 2021 में रिदित अरोड़ा ने दो बार नामांतरण का आवेदन लगाया था जिसे दस्तावेजों के अभाव में नायब तहसीलदार ने खारिज कर दिया था। लेकिन 17 मार्च 2025 को नामांतरण हुआ और इसके कुछ ही दिनों बाद जून में रजिस्ट्री हो गई। जब अफसर को इसकी भनक लगी तो उन्होंने कोलार एसडीएम कोर्ट में इसके खिलाफ अपील दायर की और आपत्ति भी जताई। फिलहाल मामला राजस्व न्यायालय में विचाराधीन है।
अफसर ने बताया कि उनके पति विक्रांत प्रवीण राय के नाम पर यह एग्रीमेंट हुआ था और वे साल 2011 से इस मकान में परिवार के साथ रह रही हैं। यहां दो कमरे भी उनकी तरफ से निर्माण करवाए गए थे। मंजूषा राय का आरोप है कि विरोधी पक्ष ने उनकी अनुपस्थिति में मकान पर कब्जा करने की कोशिश की और तोड़फोड़ की।
आईएएस अधिकारी ने कहा कि उन्होंने तत्कालीन थाना प्रभारी और पुलिस कमिश्नर को भी इस बारे में जानकारी दी थी, लेकिन फिर भी तोड़फोड़ की कार्रवाई नहीं रुकी। उनका कहना है कि मामले में पुलिस की तरफ से कोई ठोस मदद नहीं मिल रही है, जिससे गुंडों के हौसले और बढ़ गए हैं।
घटना की सूचना मिलते ही प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और दोनों पक्षों को समझाइश दी, लेकिन अधिकारियों के हटते ही फिर से जेसीबी से तोड़फोड़ शुरू हो गई। प्रशासन इस मामले में कोई स्पष्ट टिप्पणी देने से बच रहा है। वहीं मोना बटेजा या उनके पति हितेश बटेजा से फिलहाल कोई संपर्क नहीं हो पाया है।
मध्य प्रदेश





