इंदौर। महिला पर चाकुओं से हमला करने के मामले का पुलिस ने 72 घंटे में खुलासा कर दिया है। महिला का मारने के लिए व्यापारी ने 3 लाख में सुपारी दी थी। बदमाश चाकू मारकर फरार हो गया था। एक साल पहले व्यापारी और महिला के बीच किसी बात को लेकर विवाद हुआ था। विवाद का बदला लेने के लिए ड्राइवर से कॉन्टेक्ट किलर ढूंढने को कहा था। ड्राइवर ने मिलवाया साहिल से, साहिल ने अमन और विक्रम को सुपारी दी थी।
दरअसल मामला शहर के अन्नपूर्णा थाना क्षेत्र का है। बदमाश अमन दुर्लभ कश्यप को रोल मॉडल मानता था। अमन ने ही महिला के ऊपर हमला किया था। व्यापारी मनीष वाधवानी ने महिला की सुपारी दी थी। दो दिन पहले महिला पर चाकुओं से हमला हुआ था। पुलिस ने मामले का 72 घंटे में खुलासा कर दिया। पुलिस ने व्यापारी मनीष सहित 4 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। घटना का खुलासा करने वाली टीम को रिवॉर्ड मिलेगा। टीम को 40 हजार रुपए का रिवॉर्ड दिया जाएगा। पुलिस आरोपियों से पूछताछ में जुटी है।
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वेयर हाउस के बाहर धान के बोरों में लगी भीषण आग
जबलपुर. एमपी के जबलपुर जिले के कटंगी के गुरूजी वेयर हाउस के बाद प्रांगण में रखे 200 बोरा धान में अचानक आग भड़क उठी. वेयर हाउस में मौजूद लोगों ने आग बुझाने का प्रयास किया लेकिन आग की प्रचंडता को देखते हुए तत्काल दमकल कर्मियों को सूचना दी.
कटंगी की दमकल ने आग बुझाने का प्रयास किया लेकिन बढ़ती आग की लपटें देखकर पाटन के साथ जबलपुर सूचना दी गई. तीनों ओर से पहुंचे दमकल वाहनों ने जैसे-तैसे आग पर काबू पाया. दमकल कर्मियों का कहना है कि खुले में रखी गई धान के बोरों में आग लगने का कारण मौके पर समझ में नहीं आया है. फिलहाल, इसकी सूचना विभाग को दे दी गई है.
गौरतलब है कि गुरूजी वेयर हाउस पहले से ही विवादित है. समिति पर धोखाधड़ी किए जाने का मामला लंबित है. समिति प्रबंधन और केन्द्र प्रभारी गायब हैं. समिति पर एक करोड़ 29 लाख रुपए का गड़बड़झाला किए जाने का आरोप है.
सूत्रों का कहना है कि वेयरहाउस के बाहर रखी धान में आग लगना संदिग्ध प्रतीत हो रहा है. संभवत: भ्रष्टाचार छिपाने के लिए धान के बोरों में आग लगाया जाना प्रतीत हो रहा है. फिलहाल, इस मामले में पुलिस जांच कर रही है.
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एमपी में सबसे बड़े वेतन घोटाले की आशंका, कांग्रेस ने सरकार को घेरा- कहां गए 12 हजार 500 करोड़?
भोपाल मध्य प्रदेश के सरकारी सिस्टम में बड़े घोटाले की आशंका जताई जा रही है। कांग्रेस ने गंभीर आरोप लगाते हुए प्रदेश की बीजेपी सरकार को घेर लिया है। कांग्रेस ने सरकार पर आरोप लगाया है कि, एमपी के 50 हजार कर्मचारी चोरी हो गए, गायब हो गए और फिर भी ये सैलरी ले रहे हैं। आखिर 12, 500 करोड़ रुपए कहां गए?
ये है मामला-दरअसल मीडिया रिपोर्ट्स में एमपी सरकार में करोड़ों के वेतन घोटाले की खबर सामने आई। जिसके मुताबिक ट्रेजरी डिपार्टमेंट की जांच में सामने आया है कि एमपी में 50 हजार ऐसे कर्मचारी हैं, जिन्हें सिस्टम में केवल नाम के लिए ही जिंदा रखा गया है, लेकिन असल में उनका अस्तित्व है ही नहीं…। इन कर्मचारियों की सैलरी पिछले छह महीने से ट्रेजरी से नहीं निकाली गई। फिर भी कर्मचारी कोड एक्टिव हैं। इस बड़ी गड़बड़ी के चलते 230 करोड़ रुपए से ज्यादा के सरकारी खजाने पर सवाल खड़े हो गए हैं। खबर के खुलासे के बाद कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मामले पर सरकार को घेर लिया है।
जीतू पटवारी ने एमपी की बीजेपी सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि, एमपी में अब तक 40-50 बड़े घोटाले यहां हुए हैं। जबकि छोटे-ंमोटे घोटाले यहां होते ही रहते हैं। उन्होंने ताजा उदाहरण की बात करते हुए कहा कि, एमपी के 50 हजार कर्मचारी गायब हो गए…250 करोड़ रुपए की सैलरी निकाली नहीं गई। सरकार ने इसके लिए वित्त कमेटी बनाकर आदेश दिए हैं कर्मचारी ढूंढ़ो।
जीतू पटवारी ने कहा कि, 4 लाख 50 हजार कर्मचारी जिस प्रदेश में हैं, उनमें 50 हजार कर्मचारियों को ढूंढना पड़े.. ये कितनी बड़ी आर्थिक अराजकता प्रशासनिक अराजकता है। अगर इनकी आईडी होने के बाद सैलरी नहीं निकाली गई और सरकार को इसके लिए आदेश देने पड़े।
जीतू पटवारी ने आगे कहा कि 25 साल से जो 250-500 करोड़ रुपए साल के निकल रहे थे, वो कहां जा रहे थे? यानी अगर 500 करोड़ भी हों, तो 12,500 करोड़ रुपए कहां गए अब सवाल ये है।
उन्होंने कहा कि.. कर्ज तो हम ले ही रहे हैं.. फिर ले रहे हैं 500 करोड़ का, परसों। तो प्रदेशवासियों जागो, इन्होंने कर्मचारी भी गायब कर दिए और सैलरी भी ले रहे हैं। इतनी बड़ी अराजकता नहीं हो सकती।
एमपी कांग्रेस अध्यक्ष ने आगे कहा कि देखो घोटालों की लिस्ट, इनका चम्मच घोटाला, सांप काटने का घोटाला, करछी घोटाला, 42 अलग-अलग घोटाले किए, पुलिस भर्ती, व्यापमं घोटाला, पटवारी घोटाला, नर्सिंग घोटाला, फर्जी वेबसाइट घोटाला, एमपीएससी घोटालों का जखीरा बन गया। इसके बाद भी पटवारी घोटालों के नाम लेते रहे और सरकार पर आरोप लगाते रहे।
कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि सरकार ने घोटालों की फैक्ट्री खोल ली है। ये 230 करोड़ का नहीं 12 हजार 500 करोड़ का सुनियोजित सैलरी घोटाला है। ये सिर्फ आंकड़ा नहीं बल्कि सरकारी खजाने की लूट है। मामले को लेकर कांग्रेस अब सीबीआई की जांच नहीं बल्कि सीधे कोर्ट का रुख करने की तैयारी में है। जानकारी ये भी है कि इस मामले को राज्य सरकार ने गंभीरता से लिया है और इसकी जांच की जा रही है।
मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो, मध्यप्रदेश के 6 हजार से ज्यादा डीडीओ की भूमिका अब संदिग्ध नजर आ रही है। क्योंकि डीडीओ की रिपोर्ट के आधार पर ही सैलरी जारी की जाती है। अगर इन अफसरों की मिलीभगत साबित हुई तो, पूरा का पूरा सरकारी वेतन तंत्र संदेह के घेरे में आ जाएगा। ट्रेजरी आयुक्त ने खुद इस मामले की जांच शुरू की है और सभी डीडीओ से जवाब भी मांगा है।





